भाग ३:
आर्यन रिया के साथ सीढ़ियां चढ़कर ऊपरी मंजिल पर अपने पुराने कमरे में पहुंचा। दरवाजा खोलते ही उसे लगा जैसे समय ठहर गया हो। कमरा बिल्कुल वैसा का वैसा था – वही पुरानी लकड़ी की अलमारी, वही छोटा-सा बिस्तर, दीवार पर उसकी बचपन की तस्वीरें, और खिड़की से नीम के पेड़ की वही छांव।मां और चाची ने इसे साफ-सुथरा रखा था। बिस्तर पर नई चादर बिछी थी, तकिए पर नई कवर। हवा में हल्की अगरबत्ती की खुशबू।"देख भैया, मैं हर हफ्ते यहां झाड़ू-पोंछा करती थी। सब कुछ वैसा ही रखा है जैसा तुम छोड़कर गए थे," रिया ने मुस्कुराते हुए कहा और अलमारी खोल दी।अंदर उसके दस-पंद्रह साल पुराने कपड़े लटके थे – स्कूल की यूनिफॉर्म, कुछ टी-शर्ट, शॉर्ट्स, और दो-तीन कुर्ते-पायजामे।नेहा चाची ने एक तौलिया निकालकर आर्यन की ओर बढ़ाया। "ले बेटा, पहले नहा ले। गीजर ऑन कर दिया है। मैं नीचे खाना गरम करती हूं।"आर्यन ने तौलिया लिया। चाची के हाथ की गर्मी तौलिये में बाकी रह गई। "थैंक्स चाची।"वह बाथरूम में गया। पुराना बाथरूम, लेकिन साफ। गीजर से गरम पानी की भाप फैल रही थी। आर्यन ने अपने गंदे कपड़े उतारे और शावर के नीचे खड़ा हो गया। गरम पानी की बौछारें उसके मजबूत कंधों, चौड़ी छाती और पेट की मांसपेशियों पर गिर रही थीं। दस साल की जिम और मेहनत ने उसे एकदम फिट बना दिया था – चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, और नीचे... वो हिस्सा जो अब जवान मर्द का था।नहाते हुए उसने सोचा – आज सब कितना खुश हैं। मां, रिया, चाची... जैसे कोई बोझ उतर गया हो उनके दिल से। लेकिन एक बात सब भूल गए थे – दस साल में वो बच्चा नहीं रहा। वो अब एक पूरा मर्द था।नहाकर वह तौलिया लपेटकर कमरे में लौटा। अलमारी से सबसे बड़ा कुर्ता-पायजामा निकाला। पहले पायजामा पहनने की कोशिश की। कमर में तो आ गया, लेकिन जांघें इतनी मोटी हो चुकी थीं कि कपड़ा खींच गया। सबसे मुश्किल हुई अंडरवियर। पुरानी वाली छोटी अंडरवियर उसकी जांघों में फंस गई ही नहीं। उसका मर्दाना अंग अब इतना बड़ा और भारी था कि वो छोटी-सी अंडरवियर में समा ही नहीं रहा था। आर्यन ने कोशिश की, खींचा, लेकिन रबर टाइट होकर दर्द करने लगा।फिर कुर्ता। कंधों पर तो फिट हो गया, लेकिन सीना इतना चौड़ा था कि बटन बंद होते-होते दो बटन उछलकर अलग हो गए। पायजामा भी घुटनों तक ही पहुंच रहा था, जैसे कैप्रि बन गया हो।आर्यन आईने के सामने खड़ा हो गया। तौलिया अभी भी कमर पर लिपटा था, क्योंकि कुछ भी ठीक से फिट नहीं हो रहा था। उसका बदन चमक रहा था – चौड़ी छाती, सिक्स-पैक एब्स, मजबूत जांघें। तौलिया नीचे से थोड़ा उभरा हुआ था, क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं था।"अब क्या करूं?" उसने खुद से बुदबुदाया। नीचे जाना तो है, खाना खाना है, सबके साथ बैठना है... लेकिन ऐसे हालत में?वह दरवाजे की ओर बढ़ा, फिर रुक गया। अगर ऐसे ही नीचे चला गया तो... सब देख लेंगी। मां, रिया, चाची... सबकी नजर वहां जाएगी।बस यही सोचते हुए वह बिस्तर पर बैठ गया, तौलिया कसकर लपेटे हुए, और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए।दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।"भैया... कपड़े बदल लिए?" रिया की आवाज आई।आर्यन का दिल धड़का। "हां... बस... एक मिनट रिया।"लेकिन दरवाजा धीरे से खुल गया।