vihan27
“मृत्योः भयम् सर्वदुःखस्य मूलम्।”
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प्यास सबको लगती हैं और हम चाय पीते हैदर्द सबको होता है। गला सबका सूखता है
प्यास सबको लगती हैं और हम चाय पीते हैदर्द सबको होता है। गला सबका सूखता है
जिसने हँसकर चुका दी ये कीमत, वो ज़माने के लिए मिसाल हो गया,अंतिम किश्त तक आते-आते, इंसान पत्थर का हो जाता है
अब न कोई शिकवा है दुनिया से, न ही किस्मत से कोई गिला है,जिसने हँसकर चुका दी ये कीमत, वो ज़माने के लिए मिसाल हो गया,
मंजिल जिसे 'मकाम-ए-खास' कहती है, उसका रास्ता बस इसी दर्द के बाज़ार से होकर जाता है
जिस सुकून को तूने लहू से सींचा है,अब न कोई शिकवा है दुनिया से, न ही किस्मत से कोई गिला है,
ये जो सुकून मिला है आज मुझे, ये मेरे ही लहू के कतरों का सिला है
अब न कोई शिकवा है दुनिया से, न ही किस्मत से कोई गिला है,
ये जो सुकून मिला है आज मुझे, ये मेरे ही लहू के कतरों का सिला है
दिलजले चल रही है क्या यहांजिस सुकून को तूने लहू से सींचा है,
वो दुआओं से नहीं, हिम्मत से खींचा है
शायरी और कोट्सनहीं दिलवाले चल रही हैं
काहे एक (अ)बला नारी की ban कर दिया बेFir milenge chalte chalte![]()