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जब मांग रही है खुद छाव , छाव तो
कैसे मै इसको ठुकराउ..
जो लक्ष्य लगा हो खुद ही भिद्ने
उस पर फ़िर क्या बाण चलाउ,,,
हाय प्रेम की कैसी नियती
प्रेम करू तो बस छलता ही जाउ..
बस छलता ही जाउ...
कैसे मै इसको ठुकराउ..
जो लक्ष्य लगा हो खुद ही भिद्ने
उस पर फ़िर क्या बाण चलाउ,,,
हाय प्रेम की कैसी नियती
प्रेम करू तो बस छलता ही जाउ..
बस छलता ही जाउ...
