Update 70:
पापा को कुछ सूझ नहीं रहा था कि अब प्रज्ञा को क्या जवाब दिया जाए । उस स्टाफ ने प्रज्ञा के सामने कोंडोम का जिक्र कर के माहौल ही बदल दिया । प्रज्ञा के मन का चोर इस बात को सुन के शर्म से अंदर ही अंदर छुपने की कोशिश कर रहा था । वो मन में सोच रही थी : क्या उस आदमी ने सच में वो कहा जो मैंने सुना ? क्या उसने कोंडोम की बात की ? पापा का क्या इरादा है ? क्या वो मुझे वो यहां.....? नहीं नहीं... पापा मेरे साथ ऐसा नहीं करेंगे । पर उस स्टॉफ ने ऐसे ही हनीमून की बात नहीं की होगी , जरूर उसे लगा होगा कि पापा और मैं कपल है । हाँ, तभी वो इस तरह से बोल रहा था । उसे एक बार जान तो लेना चाहिए था कि ये मेरे पापा है , पति नहीं । पर पापा ने उसे कुछ कहा क्यों नहीं ? क्या पापा सच में वो कोंडोम का इस्तेमाल करने वाले है ? हाय मेरा दिल कितना तेज धड़क रहा है । मै कैसे नज़रे मिला पाऊँगी अब पापा से ? क्या पापा मुझे उस मौलवी की तरह.....बाप रे क्या सच में पापा ऐसा कुछ....नहीं नहीं...ये सब कुछ ग़लतफहमी हुई है । पापा ऐसा कुछ कभी नहीं करेंगे । मगर क्या पापा मेरे साथ ज़बरदस्ती भी कर सकते है ? रात को तो वो भी इसी कमरे में होंगे ? नहीं नहीं...पापा तो, मेरे लिए , उन लड़कों तक से भीड़ गये थे , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते । ये सब सच में कोई गलतफहमी ही है । पापा की मै प्यारी बेटी हु । मेरे साथ ये सब पापा नहीं कर सकते।
प्रज्ञा अपने मन को सांत्वना दे रही थी कि पापा और उसके बीच कुछ नहीं हो सकता और उस आदमी को गलत फहमी हुई है , वही एक डर भी था कि कही उस आदमी की कही हुई बाते सही ना हो जाए । ये डर कुछ अलग था , इस डर में उत्साह भी था, थोड़ी घबराहट और थोड़ी सी, आने वाले 8 दिन कैसे गुजरेंगे इसका आंकलन और चिंता ।
उधर पापा के भी हवाइयां उर गई थी , उस स्टाफ के कोंडोम वाले बात पे । अब वो प्रज्ञा को क्या बताए कि उनके ओर प्रज्ञा के कमरे ने कोंडोम क्या कर रहा है ? क्या प्रज्ञा अब मुझ पे विश्वास कर पाएगी अगले 8 दिनों तक की मै उसके साथ कुछ उट पटांग हरकत नहीं करना चाहता । क्या वो अब सतर्क हो जाएगी ? प्रज्ञा के हाव भाव से लग रहा है कि उसे ये पसंद नहीं आया है । अब मै क्या करूं और कहा अपना मुंह छुपाऊ । उसे ये कैसे बताऊ की मैने रजिस्ट्रेशन के टाइम उसे अपनी पत्नी बताया है बेटी नहीं । पर जो भी हो , अगर ग़लत फहमी बढ़ गई तो शायद प्रज्ञा के दिमाग में नेगेटिव असर को , और उसके एग्जाम पे भी इसका असर पड़े। इसलिए मुझे प्रज्ञा को अब कुछ खुल के बताना होगा ।
पापा: प्रज्ञा ।
प्रज्ञा जैसे नींद से उठी हो और पापा की आवाज सुन के ही चौक गई : हम्ममम...हां पापा।
पापा: प्रज्ञा बेटी , कैसा लगा कमरा ?
प्रज्ञा इस प्रश्न से थोड़ी सोच में पर गई कि पापा ये क्यों पूछ रहे है कि कैसा लगा कमरा , कही मेरे साथ इसी कमरे में..... : अच्छा है पापा । बहुत बड़ा है और आलीशान लग रहा है ।
पापा: ह्म्म्म...बेटी वो तुझे मै एक बात बताना चाहता हूँ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । पापा क्या बताना चाहते है ? कही वो मेरे साथ प्यार करने या उस तरीके का कुछ बात तो नहीं करना चाहते ? क्या वो मुझे अगले 8 दिनों का प्लान बताना चाहते है । प्रज्ञा : हां पापा , बताइए ना।
पापा: बेटी वो एक गलत फहमी हो गई है ।
प्रज्ञा मन में राहत का सांस ली और सोचा , तभी मै बोलूं कि उस आदमी ने कोंडोम का जिक्र क्यों किया । मेरा शक सही था । उसे गलतफहमी ही हुआ था ।
प्रज्ञा : क्या , गलत फहमी पापा?
वो ऐसा दर्शा रही थी कि उसने कुछ ध्यान ही नहीं दिया कोंडोम और हनीमून वाली बात पे ।
पापा: वो..., वो जो स्टाफ अभी कह के गया है , वो दराज़ में रखे कोंडोम वाली बात।
प्रज्ञा एकदम ऐसा दर्शाना चाहती थी कि वो ये सब कुछ समझ ही नहीं पाई कुछ भी : हां पापा , उसने ऐसा क्यों बोला ? मै कुछ समझ नहीं पाई । हम दोनों तो कपल नहीं है ना। कपल तो आप ओर दीदी है ।फिर उसने हनीमून वाली बात क्यों की ?
पापा के दिमाग में थोड़ी सी राहत मिली । वो सोचे : चलो प्रज्ञा को उतना कुछ समझ नहीं आया जो भी अभी हुआ । वैसे भी अभी इन सब बातों का उसे ज्यादा पता भी नहीं होगा । मगर ऐसा भी तो हो सकता है कि प्रज्ञा सब समझ गई हो और ना समझ बनने का नाटक कर रही हो ?
पापा फिर धर्मसंकट में घिर गए ।
पापा: नहीं प्रज्ञा, वो शायद उसने हमारे बारे में गलत समझ लिया । दरअसल जब हम यहां आए, तो मैने देखा कि रूम काफी महंगे है। और 1-2 दिनों की बात होती तो हम 2 अलग अलग कमरे के सकते थे , मगर 8 दिन रुकने का बात हुआ तो हमारा बजट बहुत बढ़ जाएगा इस लिए मैने एक ही कमरा लेने का सोचा ।
प्रज्ञा : हां पापा , सही किया अपने । वैसे भी आप कोई पराये आदमी थोड़े हो मेरे लिए की हमे दो कमरे चाहिए ।
पापा: हाँ पर एक गलती हो गई मुझ से ।
प्रज्ञा : क्या गलती पापा ?
पापा : प्रज्ञा , मैने उस रिसेप्शनिष्ट को ये नहीं बताया कि हम बाप बेटी है ।
प्रज्ञा : तो क्या बताया पापा ?
पापा : उसने तुम्हे मेरे साथ देख के उसे लगा कि तुम मेरी पत्नी हो , और मुझ से पूछा कि, मुझे कपल रूम लेना ? तो मैने उसे बताया के हां । क्यों कि अगर मै उसे उसे ये बता देता कि तुम मेरी बेटी हो और तब सिंगल रूम लेता तो पता नहीं वो लोग क्या सोच लेते मेरे बारे में, सोचते कि मैं अपने बेटी के साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहा , या फिर ये भी की शायद मेरी औकाद ही नहीं इस होटल में रहने की इस लिए एक कमरा ले रहा हूं। इस चक्कर में मैने उसे ये नहीं बताया कि तुम मेरी बेटी हो । और जब कोई कमरा खाली नहीं था तो उसने हमें अपग्रेड कर के ये हनीमून स्वीट दे दिया ,क्योंकि उसने समझा कि हम कपल। वही वो स्टाफ ने समझा कि मैने यही स्वीट बुक किया है और हनीमून मनाने आया हूं। इसलिए उसने कोडम का ज़िक्र कर दिया । मुझे माफ कर दो बेटी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था । ये सब गलतफहमी में हुआ है ।
प्रज्ञा एकदम से दंग रह गई : क्या , पापा ने मेरे बारे में बताया कि मैं और वो एक कपल है ? हाय राम ! वो आदमी क्या सोच रहा होगा कि रात को हमारे बीच क्या होगा ? एक गलतफहमी और अब लोग मुझे पापा की पत्नी समझ रही है । पर वो तो दीदी है ना । हद है , ये सब क्या हो रहा है । मगर इसमें पापा की कोई गलती नहीं । लोगो का क्या वो तो अंजान है । मुझे उनके सोचने से क्या ? उनके सोचने से मेरे और पापा का रिश्ता थोड़ी बदल जाएगा । सोचने दो उन्हें । और जैसा मैने सोचा था , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते , वही हुआ । ये सारा गलत फहमी था । मुझे लोगों के सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता । पापा मुझे होनेस्टी के साथ सारा मामला बताया , यानी पापा का इरादा गलत नहीं हो सकता । पापा मेरे साथ वो सब नहीं के सकते । मुझे पापा के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए थे कि पापा मेरे साथ कुछ...या कोई जोर जबर्दस्ती करेंगे...रात को।
प्रज्ञा निश्चिंत को के पापा को बोला : कोई बात नहीं पापा , लोगो को सोचने दीजिए जो भी सोचते है । मै जानती हूं आप मेरा हर तरह से ख्याल रखेंगे । आपने सही किया कि मुझे सब कुछ बता दिया । नहीं तो किसी स्टाफ के सामने आपको पापा बोल देती तो कितना गलत ही जाता । उसे क्या लगता कि इसकी बेटी ही इसकी पत्नी है । हाहाहा...
पापा का दिमाग ठनका , अब पुरुष का दिमाग है , प्रज्ञा के इस तरह के जवाब से पापा को लगा कि प्रज्ञा को इसका कोई एतराज़ नहीं हुआ कि पापा ने उसे अपनी पत्नी बताया रिसेप्शनिस्ट को । क्या प्रज्ञा ये सुन के थोड़ा चकित भी नहीं हुईं। क्या प्रज्ञा चाहती है कि मैं उसके साथ ये कोंडोम का इस्तेमाल करूं ? उसे मेरे पत्नी कहलवाने या समझे जाने से कोई दिक्कत नहीं है , उसने मेरे बातों पे कोई गुस्सा या विरोध नहीं किया । मतलब सिग्नल ग्रीन है और प्रज्ञा का बुर मेरे लिए फड़कने लगा है । हां ....तभी इसने की जायदा विरोध नहीं किया और बात तुरंत समझ गई ,क्योंकि इसका मन है कि मैं इसे सेक्स क्या होता है वो सिखाऊं । इसकी चुदाई करूँ । इसके साथ इन कोंडोम का इस्तेमाल करूं । हां लग रहा है अगले आठ दिन में हमारे बीच बहुत कुछ होने वाला। है ।
यहाँ पापा और प्रज्ञा की सोच बिल्कुल भी मेल नहीं खा रही । प्रज्ञा को पापा का ईमानदारी से अब बता देना, उसके दिल को ये सुकून दे रहा था कि पापा कुछ भी नहीं करेंगे उसके साथ । वही पापा को प्रज्ञा के जायदा गुस्से नहीं करने से लगा कि प्रज्ञा को इस बात से कोई एतराज़ नहीं कि कोंडोम का इस्तेमाल उसके साथ किया जाए।
अब आगे क्या होगा , ये तो वक्त ही तय करेगा।
खैर , पापा और प्रज्ञा ,लंबा सफर से आए थे सो दिनों ने फ्रेश होने का सोचा ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : बेटी तू पहले नहा ले , तेरा एग्जाम 11 बजे से है और तुझे नहाने के बाद भी कपड़े और तैयार होने में समय लगेगा ,तो तू पहले नहा के अपने काम में लग जा । मै तो तुरंत तैयार हो जाऊंगा । मुझे क्या मै तो टी-शर्ट और पेंट डालूँगा , और कंघी करूंगा । हो गया रेडी । तुझे समय लगेगा ।
प्रज्ञा : हां , आप सही कह रहे है पापा , मै अभी आती हु नहा के , हमारे पास ज्यादा समय नहीं है अब । वैसे भी होटल बुकिंग में काफी समय लग गया ।
प्रज्ञा ने बैग से तौलिया , कुछ कपड़े , और अपनी अंडर गारमेंट ली और बाथरूम में चल दी । अंदर जाते ही , एकदम से खुशी से चिल्लाया: अरे पापा, ये तो मस्त हो गया ।
पापा एकदम से घबरा से गए कि क्या हो गया। पापा : अरे क्या मस्त हो गया ?
प्रज्ञा : पापा ,देखो ना, बाथ टब है यहां तो । मैने तो बस फिल्मों में ही देखा है बाथ टब ।

पापा: हद है....तूने तो मुझे एक पल के लिए डरा दिया कि क्या देख लिया तूने । हाहाहा....हां बढ़िया होटल है तो बाथ टब तो होगा ही , वो भी ये कपल स्वीट है । इसका दाम नॉर्मल कमरे से जायदा है , तो इसमें बाथ टब नहीं होता तो अजीब लगता ।
प्रज्ञा : वाह पापा , मैने पहली बार देखा है ये । मै अब इसी में नहाऊंगी।
प्रज्ञा बहुत ज्यादा उत्साहित थी उस बाथटब
को देख कर ।
पापा: अरे यार , आज मत नहाना , इसमें लोग आराम से रिलेक्स करने के लिए नहाते है । अभी तू जल्दी नहा के नहीं निकलेगी तो तेरा एग्जाम इस बाथ टब में ही होता रह जाएगा । और बाथ टब में ऐसा क्या है कि तू इतना खुशी से झूम उठी है ?
प्रज्ञा : पापा वो मैने उसे बस पिक्चर में देखा है । एक फिल्म में हीरो और हिरोइन इसी में बैठ के गाना गा रहे थे। मुझे ये बहुत अच्छा लगता है । मेरा भी मन था कि जब भी मुझे मौका मिलेगा मै भी एक बार इसमें नहाऊंगी ।
पापा: हीरो के साथ ??? हाहाहाहा....
प्रज्ञा एक्साइटमेंट में अचानक बोल परी : हां...एकदम उस फिल्म की तरह ,नंगे बदन..., प्यार करते ह....... । उसने अपना पूरा बात भी नहीं बोला था और अचानक ही प्रज्ञा को लगा, कि ये वो क्या बोल गई ? और वो झेप गई ।
लेकिन इसका असर पापा पे ये हुआ कि उन्हें लगा , प्रज्ञा के ख्यालों के हीरो वो है , जिसके साथ वो उस टब में नंगी बैठना चाहती थी और प्रज्ञा करना चाहती थी ।
प्रज्ञा एकदम शांत हो गई थी , उसे अपने बड़बोले होने पर आज बहुत शर्म आ रहा था । पापा एक मीठी मुस्कान लिए बाथरूम से जाने लगे : ठीक है , प्यार बाद में के लेना , अभी नहा के जल्दी निकल ।
प्रज्ञा को बहुत ग्लानि हो रही थी , कि वो पापा के क्या कह बैठी ।
उधर पापा भी अब बाथरूम से निकल गए थे , उन्होंने अपने पेंट की तरफ देखा। लिंग फ़नफना चुका था । पापा ने प्रज्ञा के साथ उस टब में नंगे बैठने का दृश्य,अपने मन में देख लिया था । उनको अब लग रहा था कि प्रज्ञा उनके साथ, 8 दिन , उनको लवर बन के गुजरना चाहती है । वो उनसे चुदवाना चाहती है , वो भी उस टब में , नंगे पानी में बैठ के । क्या गजब की चुदाई होगी हमारी । जब मै प्रज्ञा के टाइट बुर में अपने लन्ड से शॉर्ट मारूंगा तो साथ साथ पूरा पानी भी झपाक झपाक कर के उड़ेगा और टब के बाहर तक गिरेगा । पापा अब आश्वस्त हो चुके थे कि प्रज्ञा उनको कई इसारे दे रही है।
मगर ये तो प्रज्ञा का नेचर ही ऐसा था कि उसे पता ही नहीं चलता था कि उसको कहा पे क्या बोलना चाहिए , वो जब बोलने लगती तो बेधड़क ही कही भी , कुछ भी बोल देती , और पापा के संग उसका ऐसा कुछ इरादा नहीं था , पर उसने उतेजित हो कर उनके सामने अपने फैन्टेसी के बारे में ज़िक्र कर दिया था ,गलती से । वो बेचारी को जब समझ में आया कि वो क्या बोल गई तो, उसे लगा कि , उसका रीढ़ की हड्डी जैसे अकड़ गया हो। वो हिल नहीं पा रही हो । और पापा के बाथरूम से जाने के बाद वो 2 में वही आवक खड़ी रही । उसका दिल की धक धक इतनी तेज था कि अगर उस बाथरूम मे कोई ओर होता तो उसे बिना सीने में कान लगाए ही , उसकी धड़कन सुनाई दे जाती ।
उसने हिम्मत कर के गेट बंद किया और झरने के नीचे , अपने कपड़े उतार के खड़ी हो गई ।

घबराहट से उसके चेहरे पे हवाइयां उरी हुई थी । उसने पापा की सामने ये क्या कह दिया था । कही पापा ये ना समझ जाए कि मैं ऐसा कुछ उनके साथ करने की सोच रही हूं। उनकी बेटी होके ,उनकी पत्नी की सौतन बनने की कोशिश कर रही हूं। पापा के दिल में ऐसा कुछ होता वो वो मेरे साथ इतना होनेस्ट नहीं होते उस स्टाफ की बात को लेकर । नहीं पापा ने ऐसा कुछ नहीं सोचा होगा मेरे बारे में । मगर वो ये जरूर सोच रहे होंगे कि मैं कितनी बेशर्मी भरी बाते कर रही हु उनके साथ । धत् मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए थे पापा से ।
उधर पापा का लौरा खड़ा हो गया था और मीठा मीठा दर्द होने लगा था उन्हें ,इतना कड़क हो गया था । वो पेंट में के तब्बू जैसा बना चुका था । पापा प्रज्ञा से मिलन के सपने में खो गए थे । और प्रज्ञा संग हुए अभी के कुछ घटना उन्हें प्रज्ञा के तरफ से भी ग्रीन सिग्नल देने का अंदेशा दे रहा था । मगर ऐसा था क्या ? ये तो आगे ही पता चलेगा ।
प्रज्ञा का बदन शर्म के मारे अंदर बाथरूम ने थरथरा रहा था कि ये क्या हुआ अभी ।

उधर पापा का लिंग प्रज्ञा के बुर को सलामी देने की लिए तन के दर्द देने लगा था । पापा ने अब मन बना लिया था, पूरी तरह से , कि अब वो ये मौका गवां नहीं सकते ,और प्रज्ञा के साथ इन्हीं 8 दिन के अंदर ,उसके 18 साल की कच्ची बुर के परखच्चे उड़ा देना है उन्हें । प्रज्ञा उनसे प्यार करने के लिए तरस रही है और इसीलिए शायद प्रज्ञा उस स्टाफ के बातों पे भी जायदा गुस्से नहीं की थी ।
प्रज्ञा चुप थी और बाथरूम में बस अब उसके गर्म जवान जिस्म पे , पानी गिरने का आवाज ही गूंज रहा था ।

प्रज्ञा की मनोदशा में, पापा क्या सोच रहे होंगे , यही चल रहा था । मगर अब जो होना था वो हो चुका । और जल्दी ही उसके एग्जाम का समय हो जाएगा , तो उसने इस सोच को पीछे छोड़ , एग्जाम का टेंशन सर पे ले लिए और जल्दी से नहा के निकल जाने का सोचा । वो झरने के नीचे अच्छे से नहा रही थी । बीच बीच ने वो, झरने को बंद कर के , अपने बदन को साबुन लगा के मल भी रही थी ।

वो अपने चूचो को भी साबुन लगा रही थी । साबुन की फेन उसके संतरे जैसे छोटे छोटे चुचि से फिसल कर नीचे गिर रहे थे ।

जल्दी ही वो नहा चुकी थी और बाथरूम में ही कपड़े बदलने लगी ,क्योंकि रूम में पापा भी होंगे । बाहर पापा प्रज्ञा संग मिलन के सपना लिए , अपने खड़े मर्दानगी को सुलाने का कोशिश कर रहे थे कि कही प्रज्ञा बाथरूम से बाहर आई और उनकी इस पेंट के तम्बू को देख लिया तो गजब हो जाएगा । मगर वो जितना उसे दवाई की कोशिश करते , उतना ही ज्यादा कड़कपन उसमे आता ही का रहा था ।
प्रज्ञा जल्दी हो कपड़े पहन के बाहर निकली : पापा , हो गया मेरा , आप जाइए ,नहा लीजिए ।
प्रज्ञा ने ये बात पापा को काफी हिम्मत जुटाने के बाद बोली थी । उसके नज़रे भी नीचे झुकी हुई थी ।
पापा: हां बस अभी गया और तुरंत नहा के आया ।
पापा कोशिश कर रहे थे कि उनका खड़ा हुआ मर्दानगी की निशानी , प्रज्ञा के नज़र में ना आए । इस सोच से लिंग अब झटके खाने लगा था । और पापा को तो था भी बड़ा और मोटा, जिसके कारण तम्बू बहुत ही विशाल बना हुआ था ।
वो थोड़ा शरीर को घुमा के अंदर जाने लगे । कि तभी उनके सामने ही प्रज्ञा ,एकदम से गिले बालों को तैलिया से झरते हुए ,आ गई । जिसका डर था वही हुआ ।
प्रज्ञा की नजर डायरेक्ट पापा के तम्बू में खड़े बम्बू पे पर गया । वो बहुत ज्यादा चौंक गई और अन्यास ही उसके मुंह से जोर से निकल गया : हाय दइया, इतना बड़ा......।
पापा की शर्मिंदगी अब आसमान पे थी । ये क्या हो गया । प्रज्ञा को मेरा सामान दिख गया है । धत् ,बारी गड़बड़ हो गई ।
वो झटके से उसपे हाथ रखते हुए बाथरूम ने घुश गए । वही प्रज्ञा को आज ,झटके पे झटका लगता ही का रहा था । ट्रेन पे उस मौलवी का उसकी बेटी को चोदना, होटल के स्टाफ का ऐसा बोलना , पापा को उसको अपनी पत्नी बताना रिसेप्शन पे , कमरे में कोंडोम का पैकेट होना , कमरा भी हनीमून स्वीट होना , पापा के साथ बाथटब का जिक्र करना , और अब पापा का वो मोटा खड़ा,लिंग से बने आकर को देख लेना। ये सब प्रज्ञा के दिमाग को इसकी पुष्टि दे चुके थे कि वो अपने दीदी के साथ ही ,पापा के दिल में , स्थान ले चुकी है । यानी अब पापा सिर्फ दीदी से ही नहीं ,उसे भी अपने दिल में बसा चुके है । ऐसा नहीं होता तो अभी ये लंबा और मोटा तम्बू जो उसे दिखा है वो नहीं दिखता ।
सबके जज़्बात बदल रहे थे । उधर पापा ने नहाने के लिए जैसे ही अपना कपड़ा खोला और पेंट को नीचे सरकाया , ऐसा लग रहा था कि उनका लिंग चड्डी फार कर बस निकलने ही वाला है । पापा ने बारी बारी सारे कपड़े उतारे और जैसे ही अपने चड्डी नीचे सरकाया , उछल के 8 इंच खा लौड़ा,बाहर आ गया । उनकी नसे फटी जा रही थी । बर्दाश्त से बाहर । पापा ने झरना चलाया और सोचा ठंडा पानी परते ही एकदम से उनकी सारी गर्मी शांत हो जाएगी । मगर ऐसा हुआ नहीं और लिंग अब और झटके खाने लगा ।
तभी पापा की नजर पास पड़े ,प्रज्ञा का अभी अभी खोला गया कपड़ा पे पड़ा । प्रज्ञा ने कपड़े को बाल्टी में डाल के छोड़ दिया था कि वो पापा के नहाने के बाद सारे कपड़े एक साथ ही धो लेगी । वो चाहती नहीं थी कि पापा खुद ही कपड़ा ना धोये ,इसलिए उसने पापा को बाथरूम में घुसने से पहले ही बोल दिया था कि आप कपड़े को बाल्टी में रख के छोड़ दीजिएगा , मै धो दूंगी , आपके नहाने और बाल झरने के के बाद ।
पापा प्रज्ञा के कपड़े देख के उत्सुक हो गए और बाल्टी में हाथ डाल कर कुछ तलाशने लगे । थोड़े देर कपड़ों को उलट फेर करने के बाद ही उनको एक काला कलर का कपड़ा मिला , शायद पापा वही ढूंढ रहे थे । वो था प्रज्ञा की पैंट । पापा ऐसे खुश हुए जैसे लग उन्हें खजाना मिल गया हो । उन्होंने उस पैन्टी को उलट पलट के देखा और उसे उल्टा कर दिया , और उस स्थान पे देखने लगे जहाँ अभी कुछ देर पहले तक प्रज्ञा के सील युक्त चुत का मुहाना लगा हुआ था । पापा झूम गए । पैन्टी का वो हिस्सा सफेद और थोड़ा करा सा जान पड़ता था । उसपे एक गाढ़ा क्रीम जैसा द्रव लगा हुआ था । ये हो ना हो प्रज्ञा का चुत रस था । उन्होंने उसे अपने नाक के पास ले जाके , कस के अंदर सांस भरी , और उसी के साथ प्रज्ञा के चुत रस से उठ रही कुशबू उनके नथुनों को गमकता हुआ महसूस हुआ । आह , एक बाप अपने छोटी बेटी के बुर का रस का सुगंध ले रहा था ।

वो भी एक अनचुदी बुर का। पापा ने तुरंत पैन्टी के उस स्थान को अपने जीभ से चाटा , और पाया कि उस रस का स्वाद कसैला था ।
अब पापा के लिंग में इतना तान आ गया था कि अब उसे कोई दीवाल में भी छेद करवा सकता था । पापा ने उस पैन्टी को झट से अपने लन्ड पे लपेट लिया और पैन्टी से अपने लिंग को रगड़ने लगे और सुपारे पे अपने फोरस्किन को ऊपर नीचे करने लगे ।

उनका सुपारा कभी नंगा ही रहा था तो कभी फोरस्किन से ढक जाता । पापा अपना लन्ड हिलाने लगे । पापा प्रज्ञा के नाम का मूठ मार रहे थे , वो भी उसके पैन्टी से रगड़ रगड़ के ।

उन्हें ये ऐसा अनुभव दे रहा था जैसे वो प्रज्ञा के चुत का ही मजा ले रहे हो । उधर झरने से पानी की बूंदे उनके शरीर को और मजा दे रहा था । वो प्रज्ञा के कुंवारी बुर के बारे में सोचते हुए बहुत ज़्यादा उत्साहित हो गए और कुछ मिंटो के घर्षण के बाद ही उनके लिंग के टोपे से एक मोटा ,गाढ़ा , वीर्य धार निकला और प्रज्ञा का पैन्टी उससे पूरी तरह गीली हो गई ।

उनके लन्ड का पानी पैन्टी में सीधे बुर के मुहाने वाले जगह पे गिरी थी । जब पापा को होश आया , तब तक बहुत देर हो चुकी थी । उसका सारा माल ,प्रज्ञा के पैन्टी पे लग चुका था । पापा ने सोचा कि वो पैन्टी को धो देते है । फिर सोचा नहीं अगर प्रज्ञा को पैन्टी पूरा धोया हुआ और गीला मिला तो उसे पता चल जाएगा कि पापा ने उसकी पैन्टी को छुआ है । उन्होंने सोचा , कि क्यों ना इसको कपड़ों के बीच छिपा दिया जाए , ताकि प्रज्ञा कपड़े धोने के कर्म में पैन्टी को गिला करने के बाद ढूंढ पाए , कपड़ों के बीच । फिर उसे पता भी नहीं चलेगा । पापा ने पैन्टी को बाल्टी में सबसे नीच कपड़ों के बीच में रख दिया । ऊपर से अपने कपड़े के ,प्रज्ञा के सारे कपड़े रख दिया । अगले 2 मिनिट में पापा नहा के बनियान और तैलिया लपेटे बाथरूम से बाहर आ गया।
प्रज्ञा को उन्होंने किसी सोच में डूबी और अपने बालों में एकदम धीरे धीरे कंघी करते देखा।

पापा: प्रज्ञा बेटी ।
पापा के आवाज सुनते ही ऐसा लगा जैसे प्रज्ञा की किसी ने सोते हुए का के हिला के जग दिया हो : उम्म..ह्म्म...हां हां पापा ।
उसका नज़र सीधा पापा के तैलिया पे गया ,जहां उसे अब कोई तम्बू नहीं दिखा । वो थोड़ा रिलेक्स हुई ।
पापा: किन ख्यालों में खोई हो । 10 बज गए , हमे नाश्ता भी करना है, और एग्जाम सेंटर 20 मिनट पहले भी पहुंचना है ,नहीं तो गेट बंद हो जायेगे । जल्दी कर ।
प्रज्ञा को अचानक याद आया कि वो यहां आई क्यों है : हां पापा , बस ,अभी कपड़ों को मशीन में डाल देती हु । अभी देखा कि बालकनी ने वाशिंग मशीन भी लगा है ।
पापा मन में : मर गए , अब मशीन में तो वो एक एक कर के कपड़े डालेगी । उसे पता न चल जाए कि उसके पैन्टी के साथ क्या किया है मैने ।
प्रज्ञा तुरंत बाथरूम में कपड़े से भरे बाल्टी ले आई और बालकनी में चली गई । पापा के पसीने छूटने लगे ।
प्रज्ञा एक एक के सारे कपड़े मशीन का ढक्कन खोल के डालने लगी । पहले पापा के कपड़े , फिर अपने कपड़े , अंत में बाल्टी में बस उसकी पैन्टी पड़ी थी ।
पापा तब तक अपना कपड़े पहनने लगे : अब जो होगा वो होगा , प्रज्ञा आज नहीं तो कल वो वीर्य अपने बच्चेदानी में ही लेने वाली है। आज उसके दर्शन भी हो जाएंगे उसे ।
प्रज्ञा ने जैसे ही अपने चड्डी को हाथ में उठाया , उसे कुछ चिपचिप सा महसूस हुआ । उसने अपनी पैन्टी को उल्टा किया कि उसे एक अजीब सा गढ़ा सफेद क्रीम जैसा द्रव दिखा । ये पहले उसने कभी नहीं देखा था । ये क्या है ? उसके मन में पहला सवाल ये आया । वो समझ नहीं पा रही थी ये है क्या , कही ये उसके बुर से तो नहीं निकला , या बाल्टी में पहले से ही कुछ था जो इसमें लग गया है ।
दादी रहती तो वो झट से पूछ लेती , मगर पापा को अपनी पैन्टी वो कैसे दिखाई और फिर वो स्थान दिखाए जहां पे उसकी चुत का मुहाना रहता है । नहीं नहीं , ये नहीं कर सकती थी । उसने उस क्रीम जैसे चीज को सूंघने की कोशिश की , आह अजीब सा गमक था । ये क्या था ? वो बहुत कन्फ्यूज थी। अचानक ही उसका दिमाग ठनका । कही ये पापा ने तो कुछ नहीं किया ? हां मेरे बाद बाथरूम में वही गए थे । और उन्होंने अपने कपड़े भी इस बाल्टी में डाला है । मतलब पापा को ये पैन्टी उस बाल्टी में जरूर ही दिखा होगा । क्या ये.....नहीं....पापा का काम रस , जो मुझे दादी ने बताया था कि मर्दो का काम रस निकलता है , झरने के बाद । हां ये वही है । ओह माई गौड । क्या पापा ने मेरे पैन्टी का इस्तेमाल झरने के किए किया है ?
प्रज्ञा को अब पापा के इरादे साफ नज़र आने लगा , पापा उसे उसके दीदी का सौतन बनाना चाह रहे थे । हालांकि प्रज्ञा ,पापा और प्राची के पहली रात को घटी घटना के बाद ही पापा के साथ वो एक्स्पीरियंस करना चाहती थी , जो उसके पापा ने दीदी को कराया था । इसका जिक्र वो कई बार कर चुकी थी , जैसे हनीमून पे पापा के साथ जाने वाले बात , जब प्राची और पापा का हनीमून में जाने का प्लान बन रहा था । या फिर साली आधी घरवाली वाली बात । प्रज्ञा को सब याद आने लगा , मगर उस समय प्रज्ञा नादानी में ये सब बाते बोली रही थी ।
अब उसे पूरा पता लग गया था कि पापा उसके साथ क्या करना चाहते है । वो भी कही ना कही ये करना जरूर चाहती थी मगर अब उसे पापा का इरादा पता लगने के बाद डर लगने लगा था । साथ ही पापा के तंबू का साइज उसे डरा रहा था । उसके पेट में जैसे तितलियाँ उड़ने लगी हो , ऐसा महसूस होने लगा । उसका डर बस इसलिए था कि पापा कही उसके साथ जबरदस्ती ना कर दे । मिला जुला के प्रज्ञा चाहती थी कि पापा उसे थोड़ा टाइम दे । मगर ये काम रस सुनिश्चित कर चुका था कि पापा ने तो मन बना ही लिया है।
तभी पापा की आवाज आई : प्रज्ञा , जल्दी करो , नाश्ता भी आ गया है ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा के पास अब ये सब सोचने का टाइम नहीं था । उसका पूरा फोकस अब एग्जाम के तरफ चल गया ,जिसके लिए वो पिछले 3-4 महीनों से तैयारी कर रही थी ।
उसने जल्दी से अपने पैन्टी को भी मशीन में डाला , और उसे डिटर्जेंट डाल के चालू कर दिया और पापा के पास चली गई ।
पापा बिल्कुल ही नॉर्मल थे , एकदम पहले जैसे ही बिहेव कर रहे थे : अरे , चल अब जल्दी से नाश्ता कर , नहीं तो एंट्री नहीं मिलेगी , एग्जाम सेंटर में ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
पापा का एकदम नॉर्मल होना , प्रज्ञा को थोड़ा आश्वस्त कर चुका था कि हो सकता है पापा का मन भी उसके जैसे ही मिलन का कर रहा हो और उन्हें डर भी लग रहा हो ,या जबरदस्ती ना करना चाहते हो । जो भी हो , अब समय कम था ।
दोनों के जल्दी ही नाश्ता खत्म किया । और दोनों एग्जाम सेंटर की ओर निकल गए । एग्जाम सेंटर पहुंच के पापा ने प्रज्ञा को गेट से अंदर जाने से पहले बोला : बेटी , ऑल द बेस्ट । अच्छे से एग्जाम दे , और पास हो जाना है । तूने बहुत मेहनत की है इसके लिए । डरना नहीं , नर्वस मत होना , मै यही बाहर रहूंगा ।
प्रज्ञा : पापा एग्जाम तो ३ बजे तक चलेगा और लंच की व्यवस्था अंदर ही है मतलब ये ३ से पहले मुझे बाहर नहीं आने देंगे । आप होटल जा के आराम कीजिए , फिर ३ बजे मन हो तो आ जाइएगा ।
पापा: ह्म्म्म...ये भी ठीक कह रही यहां धूल खाने से अच्छा , AC में सो जाऊं थोड़ा । हाहाहा...चल तू जा अब ,मेरी चिंता छोड़।
प्रज्ञा अंदर चली गई । पापा थोड़े देर वहां रुक के वापस होटल चले गए और आराम फरमाने लगे । सफर में थके होने के कारण , थोड़े देर में ही उनकी आंख लग गई ।
पापा को कुछ सूझ नहीं रहा था कि अब प्रज्ञा को क्या जवाब दिया जाए । उस स्टाफ ने प्रज्ञा के सामने कोंडोम का जिक्र कर के माहौल ही बदल दिया । प्रज्ञा के मन का चोर इस बात को सुन के शर्म से अंदर ही अंदर छुपने की कोशिश कर रहा था । वो मन में सोच रही थी : क्या उस आदमी ने सच में वो कहा जो मैंने सुना ? क्या उसने कोंडोम की बात की ? पापा का क्या इरादा है ? क्या वो मुझे वो यहां.....? नहीं नहीं... पापा मेरे साथ ऐसा नहीं करेंगे । पर उस स्टॉफ ने ऐसे ही हनीमून की बात नहीं की होगी , जरूर उसे लगा होगा कि पापा और मैं कपल है । हाँ, तभी वो इस तरह से बोल रहा था । उसे एक बार जान तो लेना चाहिए था कि ये मेरे पापा है , पति नहीं । पर पापा ने उसे कुछ कहा क्यों नहीं ? क्या पापा सच में वो कोंडोम का इस्तेमाल करने वाले है ? हाय मेरा दिल कितना तेज धड़क रहा है । मै कैसे नज़रे मिला पाऊँगी अब पापा से ? क्या पापा मुझे उस मौलवी की तरह.....बाप रे क्या सच में पापा ऐसा कुछ....नहीं नहीं...ये सब कुछ ग़लतफहमी हुई है । पापा ऐसा कुछ कभी नहीं करेंगे । मगर क्या पापा मेरे साथ ज़बरदस्ती भी कर सकते है ? रात को तो वो भी इसी कमरे में होंगे ? नहीं नहीं...पापा तो, मेरे लिए , उन लड़कों तक से भीड़ गये थे , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते । ये सब सच में कोई गलतफहमी ही है । पापा की मै प्यारी बेटी हु । मेरे साथ ये सब पापा नहीं कर सकते।
प्रज्ञा अपने मन को सांत्वना दे रही थी कि पापा और उसके बीच कुछ नहीं हो सकता और उस आदमी को गलत फहमी हुई है , वही एक डर भी था कि कही उस आदमी की कही हुई बाते सही ना हो जाए । ये डर कुछ अलग था , इस डर में उत्साह भी था, थोड़ी घबराहट और थोड़ी सी, आने वाले 8 दिन कैसे गुजरेंगे इसका आंकलन और चिंता ।
उधर पापा के भी हवाइयां उर गई थी , उस स्टाफ के कोंडोम वाले बात पे । अब वो प्रज्ञा को क्या बताए कि उनके ओर प्रज्ञा के कमरे ने कोंडोम क्या कर रहा है ? क्या प्रज्ञा अब मुझ पे विश्वास कर पाएगी अगले 8 दिनों तक की मै उसके साथ कुछ उट पटांग हरकत नहीं करना चाहता । क्या वो अब सतर्क हो जाएगी ? प्रज्ञा के हाव भाव से लग रहा है कि उसे ये पसंद नहीं आया है । अब मै क्या करूं और कहा अपना मुंह छुपाऊ । उसे ये कैसे बताऊ की मैने रजिस्ट्रेशन के टाइम उसे अपनी पत्नी बताया है बेटी नहीं । पर जो भी हो , अगर ग़लत फहमी बढ़ गई तो शायद प्रज्ञा के दिमाग में नेगेटिव असर को , और उसके एग्जाम पे भी इसका असर पड़े। इसलिए मुझे प्रज्ञा को अब कुछ खुल के बताना होगा ।
पापा: प्रज्ञा ।
प्रज्ञा जैसे नींद से उठी हो और पापा की आवाज सुन के ही चौक गई : हम्ममम...हां पापा।
पापा: प्रज्ञा बेटी , कैसा लगा कमरा ?
प्रज्ञा इस प्रश्न से थोड़ी सोच में पर गई कि पापा ये क्यों पूछ रहे है कि कैसा लगा कमरा , कही मेरे साथ इसी कमरे में..... : अच्छा है पापा । बहुत बड़ा है और आलीशान लग रहा है ।
पापा: ह्म्म्म...बेटी वो तुझे मै एक बात बताना चाहता हूँ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । पापा क्या बताना चाहते है ? कही वो मेरे साथ प्यार करने या उस तरीके का कुछ बात तो नहीं करना चाहते ? क्या वो मुझे अगले 8 दिनों का प्लान बताना चाहते है । प्रज्ञा : हां पापा , बताइए ना।
पापा: बेटी वो एक गलत फहमी हो गई है ।
प्रज्ञा मन में राहत का सांस ली और सोचा , तभी मै बोलूं कि उस आदमी ने कोंडोम का जिक्र क्यों किया । मेरा शक सही था । उसे गलतफहमी ही हुआ था ।
प्रज्ञा : क्या , गलत फहमी पापा?
वो ऐसा दर्शा रही थी कि उसने कुछ ध्यान ही नहीं दिया कोंडोम और हनीमून वाली बात पे ।
पापा: वो..., वो जो स्टाफ अभी कह के गया है , वो दराज़ में रखे कोंडोम वाली बात।
प्रज्ञा एकदम ऐसा दर्शाना चाहती थी कि वो ये सब कुछ समझ ही नहीं पाई कुछ भी : हां पापा , उसने ऐसा क्यों बोला ? मै कुछ समझ नहीं पाई । हम दोनों तो कपल नहीं है ना। कपल तो आप ओर दीदी है ।फिर उसने हनीमून वाली बात क्यों की ?
पापा के दिमाग में थोड़ी सी राहत मिली । वो सोचे : चलो प्रज्ञा को उतना कुछ समझ नहीं आया जो भी अभी हुआ । वैसे भी अभी इन सब बातों का उसे ज्यादा पता भी नहीं होगा । मगर ऐसा भी तो हो सकता है कि प्रज्ञा सब समझ गई हो और ना समझ बनने का नाटक कर रही हो ?
पापा फिर धर्मसंकट में घिर गए ।
पापा: नहीं प्रज्ञा, वो शायद उसने हमारे बारे में गलत समझ लिया । दरअसल जब हम यहां आए, तो मैने देखा कि रूम काफी महंगे है। और 1-2 दिनों की बात होती तो हम 2 अलग अलग कमरे के सकते थे , मगर 8 दिन रुकने का बात हुआ तो हमारा बजट बहुत बढ़ जाएगा इस लिए मैने एक ही कमरा लेने का सोचा ।
प्रज्ञा : हां पापा , सही किया अपने । वैसे भी आप कोई पराये आदमी थोड़े हो मेरे लिए की हमे दो कमरे चाहिए ।
पापा: हाँ पर एक गलती हो गई मुझ से ।
प्रज्ञा : क्या गलती पापा ?
पापा : प्रज्ञा , मैने उस रिसेप्शनिष्ट को ये नहीं बताया कि हम बाप बेटी है ।
प्रज्ञा : तो क्या बताया पापा ?
पापा : उसने तुम्हे मेरे साथ देख के उसे लगा कि तुम मेरी पत्नी हो , और मुझ से पूछा कि, मुझे कपल रूम लेना ? तो मैने उसे बताया के हां । क्यों कि अगर मै उसे उसे ये बता देता कि तुम मेरी बेटी हो और तब सिंगल रूम लेता तो पता नहीं वो लोग क्या सोच लेते मेरे बारे में, सोचते कि मैं अपने बेटी के साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहा , या फिर ये भी की शायद मेरी औकाद ही नहीं इस होटल में रहने की इस लिए एक कमरा ले रहा हूं। इस चक्कर में मैने उसे ये नहीं बताया कि तुम मेरी बेटी हो । और जब कोई कमरा खाली नहीं था तो उसने हमें अपग्रेड कर के ये हनीमून स्वीट दे दिया ,क्योंकि उसने समझा कि हम कपल। वही वो स्टाफ ने समझा कि मैने यही स्वीट बुक किया है और हनीमून मनाने आया हूं। इसलिए उसने कोडम का ज़िक्र कर दिया । मुझे माफ कर दो बेटी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था । ये सब गलतफहमी में हुआ है ।
प्रज्ञा एकदम से दंग रह गई : क्या , पापा ने मेरे बारे में बताया कि मैं और वो एक कपल है ? हाय राम ! वो आदमी क्या सोच रहा होगा कि रात को हमारे बीच क्या होगा ? एक गलतफहमी और अब लोग मुझे पापा की पत्नी समझ रही है । पर वो तो दीदी है ना । हद है , ये सब क्या हो रहा है । मगर इसमें पापा की कोई गलती नहीं । लोगो का क्या वो तो अंजान है । मुझे उनके सोचने से क्या ? उनके सोचने से मेरे और पापा का रिश्ता थोड़ी बदल जाएगा । सोचने दो उन्हें । और जैसा मैने सोचा था , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते , वही हुआ । ये सारा गलत फहमी था । मुझे लोगों के सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता । पापा मुझे होनेस्टी के साथ सारा मामला बताया , यानी पापा का इरादा गलत नहीं हो सकता । पापा मेरे साथ वो सब नहीं के सकते । मुझे पापा के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए थे कि पापा मेरे साथ कुछ...या कोई जोर जबर्दस्ती करेंगे...रात को।
प्रज्ञा निश्चिंत को के पापा को बोला : कोई बात नहीं पापा , लोगो को सोचने दीजिए जो भी सोचते है । मै जानती हूं आप मेरा हर तरह से ख्याल रखेंगे । आपने सही किया कि मुझे सब कुछ बता दिया । नहीं तो किसी स्टाफ के सामने आपको पापा बोल देती तो कितना गलत ही जाता । उसे क्या लगता कि इसकी बेटी ही इसकी पत्नी है । हाहाहा...
पापा का दिमाग ठनका , अब पुरुष का दिमाग है , प्रज्ञा के इस तरह के जवाब से पापा को लगा कि प्रज्ञा को इसका कोई एतराज़ नहीं हुआ कि पापा ने उसे अपनी पत्नी बताया रिसेप्शनिस्ट को । क्या प्रज्ञा ये सुन के थोड़ा चकित भी नहीं हुईं। क्या प्रज्ञा चाहती है कि मैं उसके साथ ये कोंडोम का इस्तेमाल करूं ? उसे मेरे पत्नी कहलवाने या समझे जाने से कोई दिक्कत नहीं है , उसने मेरे बातों पे कोई गुस्सा या विरोध नहीं किया । मतलब सिग्नल ग्रीन है और प्रज्ञा का बुर मेरे लिए फड़कने लगा है । हां ....तभी इसने की जायदा विरोध नहीं किया और बात तुरंत समझ गई ,क्योंकि इसका मन है कि मैं इसे सेक्स क्या होता है वो सिखाऊं । इसकी चुदाई करूँ । इसके साथ इन कोंडोम का इस्तेमाल करूं । हां लग रहा है अगले आठ दिन में हमारे बीच बहुत कुछ होने वाला। है ।
यहाँ पापा और प्रज्ञा की सोच बिल्कुल भी मेल नहीं खा रही । प्रज्ञा को पापा का ईमानदारी से अब बता देना, उसके दिल को ये सुकून दे रहा था कि पापा कुछ भी नहीं करेंगे उसके साथ । वही पापा को प्रज्ञा के जायदा गुस्से नहीं करने से लगा कि प्रज्ञा को इस बात से कोई एतराज़ नहीं कि कोंडोम का इस्तेमाल उसके साथ किया जाए।
अब आगे क्या होगा , ये तो वक्त ही तय करेगा।
खैर , पापा और प्रज्ञा ,लंबा सफर से आए थे सो दिनों ने फ्रेश होने का सोचा ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : बेटी तू पहले नहा ले , तेरा एग्जाम 11 बजे से है और तुझे नहाने के बाद भी कपड़े और तैयार होने में समय लगेगा ,तो तू पहले नहा के अपने काम में लग जा । मै तो तुरंत तैयार हो जाऊंगा । मुझे क्या मै तो टी-शर्ट और पेंट डालूँगा , और कंघी करूंगा । हो गया रेडी । तुझे समय लगेगा ।
प्रज्ञा : हां , आप सही कह रहे है पापा , मै अभी आती हु नहा के , हमारे पास ज्यादा समय नहीं है अब । वैसे भी होटल बुकिंग में काफी समय लग गया ।
प्रज्ञा ने बैग से तौलिया , कुछ कपड़े , और अपनी अंडर गारमेंट ली और बाथरूम में चल दी । अंदर जाते ही , एकदम से खुशी से चिल्लाया: अरे पापा, ये तो मस्त हो गया ।
पापा एकदम से घबरा से गए कि क्या हो गया। पापा : अरे क्या मस्त हो गया ?
प्रज्ञा : पापा ,देखो ना, बाथ टब है यहां तो । मैने तो बस फिल्मों में ही देखा है बाथ टब ।

पापा: हद है....तूने तो मुझे एक पल के लिए डरा दिया कि क्या देख लिया तूने । हाहाहा....हां बढ़िया होटल है तो बाथ टब तो होगा ही , वो भी ये कपल स्वीट है । इसका दाम नॉर्मल कमरे से जायदा है , तो इसमें बाथ टब नहीं होता तो अजीब लगता ।
प्रज्ञा : वाह पापा , मैने पहली बार देखा है ये । मै अब इसी में नहाऊंगी।
प्रज्ञा बहुत ज्यादा उत्साहित थी उस बाथटब
पापा: अरे यार , आज मत नहाना , इसमें लोग आराम से रिलेक्स करने के लिए नहाते है । अभी तू जल्दी नहा के नहीं निकलेगी तो तेरा एग्जाम इस बाथ टब में ही होता रह जाएगा । और बाथ टब में ऐसा क्या है कि तू इतना खुशी से झूम उठी है ?
प्रज्ञा : पापा वो मैने उसे बस पिक्चर में देखा है । एक फिल्म में हीरो और हिरोइन इसी में बैठ के गाना गा रहे थे। मुझे ये बहुत अच्छा लगता है । मेरा भी मन था कि जब भी मुझे मौका मिलेगा मै भी एक बार इसमें नहाऊंगी ।
पापा: हीरो के साथ ??? हाहाहाहा....
प्रज्ञा एक्साइटमेंट में अचानक बोल परी : हां...एकदम उस फिल्म की तरह ,नंगे बदन..., प्यार करते ह....... । उसने अपना पूरा बात भी नहीं बोला था और अचानक ही प्रज्ञा को लगा, कि ये वो क्या बोल गई ? और वो झेप गई ।
लेकिन इसका असर पापा पे ये हुआ कि उन्हें लगा , प्रज्ञा के ख्यालों के हीरो वो है , जिसके साथ वो उस टब में नंगी बैठना चाहती थी और प्रज्ञा करना चाहती थी ।
प्रज्ञा एकदम शांत हो गई थी , उसे अपने बड़बोले होने पर आज बहुत शर्म आ रहा था । पापा एक मीठी मुस्कान लिए बाथरूम से जाने लगे : ठीक है , प्यार बाद में के लेना , अभी नहा के जल्दी निकल ।
प्रज्ञा को बहुत ग्लानि हो रही थी , कि वो पापा के क्या कह बैठी ।
उधर पापा भी अब बाथरूम से निकल गए थे , उन्होंने अपने पेंट की तरफ देखा। लिंग फ़नफना चुका था । पापा ने प्रज्ञा के साथ उस टब में नंगे बैठने का दृश्य,अपने मन में देख लिया था । उनको अब लग रहा था कि प्रज्ञा उनके साथ, 8 दिन , उनको लवर बन के गुजरना चाहती है । वो उनसे चुदवाना चाहती है , वो भी उस टब में , नंगे पानी में बैठ के । क्या गजब की चुदाई होगी हमारी । जब मै प्रज्ञा के टाइट बुर में अपने लन्ड से शॉर्ट मारूंगा तो साथ साथ पूरा पानी भी झपाक झपाक कर के उड़ेगा और टब के बाहर तक गिरेगा । पापा अब आश्वस्त हो चुके थे कि प्रज्ञा उनको कई इसारे दे रही है।
मगर ये तो प्रज्ञा का नेचर ही ऐसा था कि उसे पता ही नहीं चलता था कि उसको कहा पे क्या बोलना चाहिए , वो जब बोलने लगती तो बेधड़क ही कही भी , कुछ भी बोल देती , और पापा के संग उसका ऐसा कुछ इरादा नहीं था , पर उसने उतेजित हो कर उनके सामने अपने फैन्टेसी के बारे में ज़िक्र कर दिया था ,गलती से । वो बेचारी को जब समझ में आया कि वो क्या बोल गई तो, उसे लगा कि , उसका रीढ़ की हड्डी जैसे अकड़ गया हो। वो हिल नहीं पा रही हो । और पापा के बाथरूम से जाने के बाद वो 2 में वही आवक खड़ी रही । उसका दिल की धक धक इतनी तेज था कि अगर उस बाथरूम मे कोई ओर होता तो उसे बिना सीने में कान लगाए ही , उसकी धड़कन सुनाई दे जाती ।
उसने हिम्मत कर के गेट बंद किया और झरने के नीचे , अपने कपड़े उतार के खड़ी हो गई ।

घबराहट से उसके चेहरे पे हवाइयां उरी हुई थी । उसने पापा की सामने ये क्या कह दिया था । कही पापा ये ना समझ जाए कि मैं ऐसा कुछ उनके साथ करने की सोच रही हूं। उनकी बेटी होके ,उनकी पत्नी की सौतन बनने की कोशिश कर रही हूं। पापा के दिल में ऐसा कुछ होता वो वो मेरे साथ इतना होनेस्ट नहीं होते उस स्टाफ की बात को लेकर । नहीं पापा ने ऐसा कुछ नहीं सोचा होगा मेरे बारे में । मगर वो ये जरूर सोच रहे होंगे कि मैं कितनी बेशर्मी भरी बाते कर रही हु उनके साथ । धत् मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए थे पापा से ।
उधर पापा का लौरा खड़ा हो गया था और मीठा मीठा दर्द होने लगा था उन्हें ,इतना कड़क हो गया था । वो पेंट में के तब्बू जैसा बना चुका था । पापा प्रज्ञा से मिलन के सपने में खो गए थे । और प्रज्ञा संग हुए अभी के कुछ घटना उन्हें प्रज्ञा के तरफ से भी ग्रीन सिग्नल देने का अंदेशा दे रहा था । मगर ऐसा था क्या ? ये तो आगे ही पता चलेगा ।
प्रज्ञा का बदन शर्म के मारे अंदर बाथरूम ने थरथरा रहा था कि ये क्या हुआ अभी ।

उधर पापा का लिंग प्रज्ञा के बुर को सलामी देने की लिए तन के दर्द देने लगा था । पापा ने अब मन बना लिया था, पूरी तरह से , कि अब वो ये मौका गवां नहीं सकते ,और प्रज्ञा के साथ इन्हीं 8 दिन के अंदर ,उसके 18 साल की कच्ची बुर के परखच्चे उड़ा देना है उन्हें । प्रज्ञा उनसे प्यार करने के लिए तरस रही है और इसीलिए शायद प्रज्ञा उस स्टाफ के बातों पे भी जायदा गुस्से नहीं की थी ।
प्रज्ञा चुप थी और बाथरूम में बस अब उसके गर्म जवान जिस्म पे , पानी गिरने का आवाज ही गूंज रहा था ।

प्रज्ञा की मनोदशा में, पापा क्या सोच रहे होंगे , यही चल रहा था । मगर अब जो होना था वो हो चुका । और जल्दी ही उसके एग्जाम का समय हो जाएगा , तो उसने इस सोच को पीछे छोड़ , एग्जाम का टेंशन सर पे ले लिए और जल्दी से नहा के निकल जाने का सोचा । वो झरने के नीचे अच्छे से नहा रही थी । बीच बीच ने वो, झरने को बंद कर के , अपने बदन को साबुन लगा के मल भी रही थी ।

वो अपने चूचो को भी साबुन लगा रही थी । साबुन की फेन उसके संतरे जैसे छोटे छोटे चुचि से फिसल कर नीचे गिर रहे थे ।

जल्दी ही वो नहा चुकी थी और बाथरूम में ही कपड़े बदलने लगी ,क्योंकि रूम में पापा भी होंगे । बाहर पापा प्रज्ञा संग मिलन के सपना लिए , अपने खड़े मर्दानगी को सुलाने का कोशिश कर रहे थे कि कही प्रज्ञा बाथरूम से बाहर आई और उनकी इस पेंट के तम्बू को देख लिया तो गजब हो जाएगा । मगर वो जितना उसे दवाई की कोशिश करते , उतना ही ज्यादा कड़कपन उसमे आता ही का रहा था ।
प्रज्ञा जल्दी हो कपड़े पहन के बाहर निकली : पापा , हो गया मेरा , आप जाइए ,नहा लीजिए ।
प्रज्ञा ने ये बात पापा को काफी हिम्मत जुटाने के बाद बोली थी । उसके नज़रे भी नीचे झुकी हुई थी ।
पापा: हां बस अभी गया और तुरंत नहा के आया ।
पापा कोशिश कर रहे थे कि उनका खड़ा हुआ मर्दानगी की निशानी , प्रज्ञा के नज़र में ना आए । इस सोच से लिंग अब झटके खाने लगा था । और पापा को तो था भी बड़ा और मोटा, जिसके कारण तम्बू बहुत ही विशाल बना हुआ था ।
वो थोड़ा शरीर को घुमा के अंदर जाने लगे । कि तभी उनके सामने ही प्रज्ञा ,एकदम से गिले बालों को तैलिया से झरते हुए ,आ गई । जिसका डर था वही हुआ ।
प्रज्ञा की नजर डायरेक्ट पापा के तम्बू में खड़े बम्बू पे पर गया । वो बहुत ज्यादा चौंक गई और अन्यास ही उसके मुंह से जोर से निकल गया : हाय दइया, इतना बड़ा......।
पापा की शर्मिंदगी अब आसमान पे थी । ये क्या हो गया । प्रज्ञा को मेरा सामान दिख गया है । धत् ,बारी गड़बड़ हो गई ।
वो झटके से उसपे हाथ रखते हुए बाथरूम ने घुश गए । वही प्रज्ञा को आज ,झटके पे झटका लगता ही का रहा था । ट्रेन पे उस मौलवी का उसकी बेटी को चोदना, होटल के स्टाफ का ऐसा बोलना , पापा को उसको अपनी पत्नी बताना रिसेप्शन पे , कमरे में कोंडोम का पैकेट होना , कमरा भी हनीमून स्वीट होना , पापा के साथ बाथटब का जिक्र करना , और अब पापा का वो मोटा खड़ा,लिंग से बने आकर को देख लेना। ये सब प्रज्ञा के दिमाग को इसकी पुष्टि दे चुके थे कि वो अपने दीदी के साथ ही ,पापा के दिल में , स्थान ले चुकी है । यानी अब पापा सिर्फ दीदी से ही नहीं ,उसे भी अपने दिल में बसा चुके है । ऐसा नहीं होता तो अभी ये लंबा और मोटा तम्बू जो उसे दिखा है वो नहीं दिखता ।
सबके जज़्बात बदल रहे थे । उधर पापा ने नहाने के लिए जैसे ही अपना कपड़ा खोला और पेंट को नीचे सरकाया , ऐसा लग रहा था कि उनका लिंग चड्डी फार कर बस निकलने ही वाला है । पापा ने बारी बारी सारे कपड़े उतारे और जैसे ही अपने चड्डी नीचे सरकाया , उछल के 8 इंच खा लौड़ा,बाहर आ गया । उनकी नसे फटी जा रही थी । बर्दाश्त से बाहर । पापा ने झरना चलाया और सोचा ठंडा पानी परते ही एकदम से उनकी सारी गर्मी शांत हो जाएगी । मगर ऐसा हुआ नहीं और लिंग अब और झटके खाने लगा ।
तभी पापा की नजर पास पड़े ,प्रज्ञा का अभी अभी खोला गया कपड़ा पे पड़ा । प्रज्ञा ने कपड़े को बाल्टी में डाल के छोड़ दिया था कि वो पापा के नहाने के बाद सारे कपड़े एक साथ ही धो लेगी । वो चाहती नहीं थी कि पापा खुद ही कपड़ा ना धोये ,इसलिए उसने पापा को बाथरूम में घुसने से पहले ही बोल दिया था कि आप कपड़े को बाल्टी में रख के छोड़ दीजिएगा , मै धो दूंगी , आपके नहाने और बाल झरने के के बाद ।
पापा प्रज्ञा के कपड़े देख के उत्सुक हो गए और बाल्टी में हाथ डाल कर कुछ तलाशने लगे । थोड़े देर कपड़ों को उलट फेर करने के बाद ही उनको एक काला कलर का कपड़ा मिला , शायद पापा वही ढूंढ रहे थे । वो था प्रज्ञा की पैंट । पापा ऐसे खुश हुए जैसे लग उन्हें खजाना मिल गया हो । उन्होंने उस पैन्टी को उलट पलट के देखा और उसे उल्टा कर दिया , और उस स्थान पे देखने लगे जहाँ अभी कुछ देर पहले तक प्रज्ञा के सील युक्त चुत का मुहाना लगा हुआ था । पापा झूम गए । पैन्टी का वो हिस्सा सफेद और थोड़ा करा सा जान पड़ता था । उसपे एक गाढ़ा क्रीम जैसा द्रव लगा हुआ था । ये हो ना हो प्रज्ञा का चुत रस था । उन्होंने उसे अपने नाक के पास ले जाके , कस के अंदर सांस भरी , और उसी के साथ प्रज्ञा के चुत रस से उठ रही कुशबू उनके नथुनों को गमकता हुआ महसूस हुआ । आह , एक बाप अपने छोटी बेटी के बुर का रस का सुगंध ले रहा था ।

वो भी एक अनचुदी बुर का। पापा ने तुरंत पैन्टी के उस स्थान को अपने जीभ से चाटा , और पाया कि उस रस का स्वाद कसैला था ।
अब पापा के लिंग में इतना तान आ गया था कि अब उसे कोई दीवाल में भी छेद करवा सकता था । पापा ने उस पैन्टी को झट से अपने लन्ड पे लपेट लिया और पैन्टी से अपने लिंग को रगड़ने लगे और सुपारे पे अपने फोरस्किन को ऊपर नीचे करने लगे ।

उनका सुपारा कभी नंगा ही रहा था तो कभी फोरस्किन से ढक जाता । पापा अपना लन्ड हिलाने लगे । पापा प्रज्ञा के नाम का मूठ मार रहे थे , वो भी उसके पैन्टी से रगड़ रगड़ के ।

उन्हें ये ऐसा अनुभव दे रहा था जैसे वो प्रज्ञा के चुत का ही मजा ले रहे हो । उधर झरने से पानी की बूंदे उनके शरीर को और मजा दे रहा था । वो प्रज्ञा के कुंवारी बुर के बारे में सोचते हुए बहुत ज़्यादा उत्साहित हो गए और कुछ मिंटो के घर्षण के बाद ही उनके लिंग के टोपे से एक मोटा ,गाढ़ा , वीर्य धार निकला और प्रज्ञा का पैन्टी उससे पूरी तरह गीली हो गई ।

उनके लन्ड का पानी पैन्टी में सीधे बुर के मुहाने वाले जगह पे गिरी थी । जब पापा को होश आया , तब तक बहुत देर हो चुकी थी । उसका सारा माल ,प्रज्ञा के पैन्टी पे लग चुका था । पापा ने सोचा कि वो पैन्टी को धो देते है । फिर सोचा नहीं अगर प्रज्ञा को पैन्टी पूरा धोया हुआ और गीला मिला तो उसे पता चल जाएगा कि पापा ने उसकी पैन्टी को छुआ है । उन्होंने सोचा , कि क्यों ना इसको कपड़ों के बीच छिपा दिया जाए , ताकि प्रज्ञा कपड़े धोने के कर्म में पैन्टी को गिला करने के बाद ढूंढ पाए , कपड़ों के बीच । फिर उसे पता भी नहीं चलेगा । पापा ने पैन्टी को बाल्टी में सबसे नीच कपड़ों के बीच में रख दिया । ऊपर से अपने कपड़े के ,प्रज्ञा के सारे कपड़े रख दिया । अगले 2 मिनिट में पापा नहा के बनियान और तैलिया लपेटे बाथरूम से बाहर आ गया।
प्रज्ञा को उन्होंने किसी सोच में डूबी और अपने बालों में एकदम धीरे धीरे कंघी करते देखा।

पापा: प्रज्ञा बेटी ।
पापा के आवाज सुनते ही ऐसा लगा जैसे प्रज्ञा की किसी ने सोते हुए का के हिला के जग दिया हो : उम्म..ह्म्म...हां हां पापा ।
उसका नज़र सीधा पापा के तैलिया पे गया ,जहां उसे अब कोई तम्बू नहीं दिखा । वो थोड़ा रिलेक्स हुई ।
पापा: किन ख्यालों में खोई हो । 10 बज गए , हमे नाश्ता भी करना है, और एग्जाम सेंटर 20 मिनट पहले भी पहुंचना है ,नहीं तो गेट बंद हो जायेगे । जल्दी कर ।
प्रज्ञा को अचानक याद आया कि वो यहां आई क्यों है : हां पापा , बस ,अभी कपड़ों को मशीन में डाल देती हु । अभी देखा कि बालकनी ने वाशिंग मशीन भी लगा है ।
पापा मन में : मर गए , अब मशीन में तो वो एक एक कर के कपड़े डालेगी । उसे पता न चल जाए कि उसके पैन्टी के साथ क्या किया है मैने ।
प्रज्ञा तुरंत बाथरूम में कपड़े से भरे बाल्टी ले आई और बालकनी में चली गई । पापा के पसीने छूटने लगे ।
प्रज्ञा एक एक के सारे कपड़े मशीन का ढक्कन खोल के डालने लगी । पहले पापा के कपड़े , फिर अपने कपड़े , अंत में बाल्टी में बस उसकी पैन्टी पड़ी थी ।
पापा तब तक अपना कपड़े पहनने लगे : अब जो होगा वो होगा , प्रज्ञा आज नहीं तो कल वो वीर्य अपने बच्चेदानी में ही लेने वाली है। आज उसके दर्शन भी हो जाएंगे उसे ।
प्रज्ञा ने जैसे ही अपने चड्डी को हाथ में उठाया , उसे कुछ चिपचिप सा महसूस हुआ । उसने अपनी पैन्टी को उल्टा किया कि उसे एक अजीब सा गढ़ा सफेद क्रीम जैसा द्रव दिखा । ये पहले उसने कभी नहीं देखा था । ये क्या है ? उसके मन में पहला सवाल ये आया । वो समझ नहीं पा रही थी ये है क्या , कही ये उसके बुर से तो नहीं निकला , या बाल्टी में पहले से ही कुछ था जो इसमें लग गया है ।
दादी रहती तो वो झट से पूछ लेती , मगर पापा को अपनी पैन्टी वो कैसे दिखाई और फिर वो स्थान दिखाए जहां पे उसकी चुत का मुहाना रहता है । नहीं नहीं , ये नहीं कर सकती थी । उसने उस क्रीम जैसे चीज को सूंघने की कोशिश की , आह अजीब सा गमक था । ये क्या था ? वो बहुत कन्फ्यूज थी। अचानक ही उसका दिमाग ठनका । कही ये पापा ने तो कुछ नहीं किया ? हां मेरे बाद बाथरूम में वही गए थे । और उन्होंने अपने कपड़े भी इस बाल्टी में डाला है । मतलब पापा को ये पैन्टी उस बाल्टी में जरूर ही दिखा होगा । क्या ये.....नहीं....पापा का काम रस , जो मुझे दादी ने बताया था कि मर्दो का काम रस निकलता है , झरने के बाद । हां ये वही है । ओह माई गौड । क्या पापा ने मेरे पैन्टी का इस्तेमाल झरने के किए किया है ?
प्रज्ञा को अब पापा के इरादे साफ नज़र आने लगा , पापा उसे उसके दीदी का सौतन बनाना चाह रहे थे । हालांकि प्रज्ञा ,पापा और प्राची के पहली रात को घटी घटना के बाद ही पापा के साथ वो एक्स्पीरियंस करना चाहती थी , जो उसके पापा ने दीदी को कराया था । इसका जिक्र वो कई बार कर चुकी थी , जैसे हनीमून पे पापा के साथ जाने वाले बात , जब प्राची और पापा का हनीमून में जाने का प्लान बन रहा था । या फिर साली आधी घरवाली वाली बात । प्रज्ञा को सब याद आने लगा , मगर उस समय प्रज्ञा नादानी में ये सब बाते बोली रही थी ।
अब उसे पूरा पता लग गया था कि पापा उसके साथ क्या करना चाहते है । वो भी कही ना कही ये करना जरूर चाहती थी मगर अब उसे पापा का इरादा पता लगने के बाद डर लगने लगा था । साथ ही पापा के तंबू का साइज उसे डरा रहा था । उसके पेट में जैसे तितलियाँ उड़ने लगी हो , ऐसा महसूस होने लगा । उसका डर बस इसलिए था कि पापा कही उसके साथ जबरदस्ती ना कर दे । मिला जुला के प्रज्ञा चाहती थी कि पापा उसे थोड़ा टाइम दे । मगर ये काम रस सुनिश्चित कर चुका था कि पापा ने तो मन बना ही लिया है।
तभी पापा की आवाज आई : प्रज्ञा , जल्दी करो , नाश्ता भी आ गया है ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा के पास अब ये सब सोचने का टाइम नहीं था । उसका पूरा फोकस अब एग्जाम के तरफ चल गया ,जिसके लिए वो पिछले 3-4 महीनों से तैयारी कर रही थी ।
उसने जल्दी से अपने पैन्टी को भी मशीन में डाला , और उसे डिटर्जेंट डाल के चालू कर दिया और पापा के पास चली गई ।
पापा बिल्कुल ही नॉर्मल थे , एकदम पहले जैसे ही बिहेव कर रहे थे : अरे , चल अब जल्दी से नाश्ता कर , नहीं तो एंट्री नहीं मिलेगी , एग्जाम सेंटर में ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
पापा का एकदम नॉर्मल होना , प्रज्ञा को थोड़ा आश्वस्त कर चुका था कि हो सकता है पापा का मन भी उसके जैसे ही मिलन का कर रहा हो और उन्हें डर भी लग रहा हो ,या जबरदस्ती ना करना चाहते हो । जो भी हो , अब समय कम था ।
दोनों के जल्दी ही नाश्ता खत्म किया । और दोनों एग्जाम सेंटर की ओर निकल गए । एग्जाम सेंटर पहुंच के पापा ने प्रज्ञा को गेट से अंदर जाने से पहले बोला : बेटी , ऑल द बेस्ट । अच्छे से एग्जाम दे , और पास हो जाना है । तूने बहुत मेहनत की है इसके लिए । डरना नहीं , नर्वस मत होना , मै यही बाहर रहूंगा ।
प्रज्ञा : पापा एग्जाम तो ३ बजे तक चलेगा और लंच की व्यवस्था अंदर ही है मतलब ये ३ से पहले मुझे बाहर नहीं आने देंगे । आप होटल जा के आराम कीजिए , फिर ३ बजे मन हो तो आ जाइएगा ।
पापा: ह्म्म्म...ये भी ठीक कह रही यहां धूल खाने से अच्छा , AC में सो जाऊं थोड़ा । हाहाहा...चल तू जा अब ,मेरी चिंता छोड़।
प्रज्ञा अंदर चली गई । पापा थोड़े देर वहां रुक के वापस होटल चले गए और आराम फरमाने लगे । सफर में थके होने के कारण , थोड़े देर में ही उनकी आंख लग गई ।
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