कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना ।
डेविल भाई मेरा ऐसा मानना है की ये स्टोरी संध्या और अभय के लव हेट और उनके साथ किए हुए छल पर आधारित है तो मैं थीम तो वो हो गई।
कुछ स्टोरीज़ की थीम और प्लॉट इतना स्ट्रॉंग होता है की सेक्स की ज़रूरत होती है नहीं और ना अभी तक इस स्टोरी मैं ऐसा फील हुआ है। बाक़ी सिचुएशन की डिमांड और अपनी समझ से आप किसी के साथ सेक्स दिखा सकते है ।
और एक हीरो पूरा गाँव उसकी दुल्हन कुछ प्रैक्टिकल लगता है नहीं भाई।
मेरे हिसाब से आप सही जा रहे है थोड़ा कॉमेडी वाले सीन फ़िल्मी होने से स्टोरी को लूस कर रहे है। ( शायरी भी लिखता पर इस बार वाली शायरी अच्छी लगी)
राज और चाँदनी एक युगल बनाये जाये कोई बुराई नहीं है इस मैं । और ना ही कोई बहुत एक्साइटएड वाली चीज मुझे लगी ।
पर ये स्टोरी का मूल माँ बेटे का रिलेशन उनकी नफ़रत मिसअंडरस्टैंडिंग षड्यंत्र के बारे मैं है और वही रहनी चाहिए फिर चाहे इस मैं सेक्स हो या ना हो ।
बाक़ी इसे आप अपनी समझ बुझ से ही लिखे वही बढ़िया है।
बाक़ी मुझे लगता है शायरी और कॉमेडी ऐसी सीरियस स्टोरी को भटका रही है
