UPDATE 17
अभय ने बेरहमी से मुनीम की एक टांग तोड़ दी जिस कारण मुनीम मौके पर बेहोश हो गया इससे पहले अभय एक वार और करता मुनीम पर तभी राज ने आके अभय को रोक के...
राज –(अभय को पकड़ के) बस कर भाई बेहोश हो गया है वो छोड़ उसे अभय
अभय – इस हरामी ने बहुत सताया है यार आज इसको...
राज – (बीच में रोकते हुए) देख अभय ये समय सही नही है ठंडे दिमाग से काम ले और चल यहां से इससे पहले यहां पर कोई आए चलते है अन्दर हम
जब तक बाकी के स्टूडेंट्स गेट के बाहर की तरफ आते उससे पहले ही राज ने अभय को रोक कर कॉलेज गेट से ले आने लगा सबकी तरफ इस बात के चलते कोई नही जान पाया कॉलेज गेट के बाहर क्या हुआ लेकिन उनके जाते ही कॉलेज गेट के बाहर खड़े 2 आदमी ये नजारा देख रहे थे छिप के जैसे ही अभय चला गया वापस तभी ये दोनो आदमी अपनी कार लेके बेहोश पड़े मुनीम के पास आए और उसे उठा के लेके निकल गए।
अन्दर आते वक्त रास्ते में अमन पड़ा हुआ था जमीन में पेट में हाथ रखे दर्द में तड़प रहा था तभी अभय ने अमन और उसके दोस्तो को देखते हुए बोला....
अभय – लेके जाओ इसे यहां से वैसे भी आज ये पढ़ाई नही कर पाएगा
अमन के दोस्त डर से उसे उठा के लेके जाने लगे हवेली की तरफ..
जबकि इधर अभय ने आखों से इशारा किया राज , लल्ला और राजू को इशारा समझ के तीनों ने सभी स्टूडेंट्स को जाने का बोल के उनके साथ निकल गए क्लास की तरफ इधर अभय और पायल बचे थे आखरी में...
अभय –(पायल से) चल चले हम भी
इतना बोल अभय आगे जाने लगा तभी पायल ने अभय का हाथ पकड़ के....उसके गाल में मारा एक चाटा
CCCHHHHHAAAAATTTTAAAAKKKKKKKK
पायल -- (अभय को चाटा मार के रोते हुए) इतनी देर क्यों लगाई तूने, मैं पूरी पागल हो गई थी। हर पल हर घड़ी बस तुझे ही याद करती थी। और जब तू आए तो....मुझसे छुपने की क्या जरूरत थी क्या तुम्हे मेरी हालत पे जरा सा भी तरस नही आया जो ये कर रहे थे...
अभय – (पयाल को गले लगा के) मैं खुद इस सब बातो से अंजान था यही सोचता था कि जाने किसी को मैं याद हू की नही मेरे जाने के बाद कही तुम किसी और के साथ...
पायल –(अभय के मू पे हाथ रख के) तेरी याद के सहारे ही अब तक मैं जी रही थी अगर तू ना आता बाकी की जिदंगी भी तेरी यादों के साथ जीती
अभय –(मुस्कुराते हुए) सच में , अच्छा तूने मुझे पहचाना कैसे
पायल – तुझे देखते ही मेरे दिल ने कहा तू ही मेरा अभय है और बाकी का तूने खुद साबित कर दिया इस रात पूरे गांव वालो के बीच जब तेरी नजर किसी को डूंड रही थी तभी मेरी हसी निकल गई थी (बोल के हसने लगी)
अभय – (मुस्कुरा के) और मैं ये समझ रहा था सबके लिए मर चुका हू
पायल –प्लीज मत बोल एसा अब मैं तुझे खोना नही चाहती फिर से
अभय – मैं तुझे छोड़ के कही नही जाऊगा...
इससे पहले अभय और आगे बढ़ता तभी वहा राज आ जाता है....
राज -- अरे प्रेमी प्रेमिकाओं अगर तुम दोनो का हो गया हो तो क्लास में चलोगे या आज जाना नही है क्लास में
अभय – राज आज मन नही हो रहा है क्लास जाने का सोच रहा हू कही घूम आया जाए क्यों पायल चले कही हम
पायल – (हस्ते हुए) पूरे पागल होके वापस आए हो तुम , चुप चाप चलो क्लास में पढ़ाई पहले जरूरी है समझे
अभय – अच्छा ठीक है लेकिन आज नही पायल कल से अभी मुझे राज से जरूरी कम है
राज – (पायल से) पायल तू जा क्लास में हम कल से क्लास अटेंड करेगे
पायल –(मुस्कुरा के) ठीक है चलती हू
पायल के जाते ही राजू और लल्ला भी आ जाते है अभय और राज के पास....
राजू – (अभय से) क्या बात है भाई तुमने तो अच्छे से लेली इन दोनो हरामियो की
लल्ला – वो अमन कही मर तो नही गया बेचारे की आत्मा को शांति दे भगवान साथ ही मुनीम की दूसरी टांग का भी ख्याल रखे
इतना बोल के राजू , लल्ला , अभय और राज हसने लगे जोर से तभी राज ने बोला....
राज – यार अभय कसम से बता रहा हु , ये सब देख कर तेरा चाचा जरूर पागल हो जायेगा....
अभय -- पागल करने ही तो आया हूं मैं....
इधर हवेली में अमन का दोस्त उसे सहारा देते हुए हवेली के अंदर ले आते है, जहा हॉल में सब बैठे थे। सब से पहले नजर ललिता की पड़ती है....
ललिता – हाय रे मेरा बच्चा....क्या हुआ इसे
कहते वो भागते हुए अमन के पास आ जाति है और रोते हुए अमन को सहारा देते हुए सोफे पर लिटा देती है, संध्या , मलती भी घबरा जाति है....
संध्या-- क....क्या हुआ इसे , कोई डॉक्टर को बुलाओ
ये सुनकर मालती भागते हुए अपना मोबाइल उठाती है कॉल लगाने के लिए डॉक्टर को...
सब के चेहरे के रंग उड़ गए थे। ललिता और संध्या अब बहुत ज्यादा घबरा गए थे , क्योंकि अभय जब घर से चला गया था उसके काफी समय बाद अमन को ही देख के जी रही थी यहीं कारण है की कही न कही संध्या अमन को प्यार करती थी और आज अमन की ऐसी हालत देख प्यार उमड़ने में देरी नही लगी। और रोने लगी...
संध्या अमन के चेहरे को सहलाते हुए गुस्से में बोली....
संध्या -- मैने पूछा क्या हुआ इसे
संध्या की गुस्से से भरी आवाज सुनकर अमन का दोस्त सहम सा गया....
वो...वो ठाकुराइन, कॉलेज के एक लड़के ने मारा....
वो लड़का सहमे से आवाज में बोला...संध्या गुस्से में तिलमिला कर बोली.....
संध्या -- कॉलेज के लड़के ने इतनी हिम्मत। चल मेरे साथ, तुम लोग डॉक्टर को बुलाओ जल्दी.....मैं कॉलेज से होकर कर आती हूं।
कहते हुए संध्या बहुत ही गुस्से में उस लड़के के साथ हवेली से चल देती है...शायद संध्या इस बात से बेखबर थी की जिसकी वो खबर लेने जा रही है, वो कोई और नहीं उसका खुद का बेटा ही है....जबकि इस तरफ अभय अपने तीनों दोस्तो के साथ कॉलेज गेट के बाहर आगया था
राज – आज ये चाय वाला कहा चला गया दुकान बंद कर के
लल्ला – कोई बात नही भाई कम से कम बंदा अच्छा काम कर गया है बेंच बाहर रख के गया है ताकि हम चारो आराम से उसकी दुकान की छाव के नीचे बेंच में बैठ सके
लल्ला की बात सुन के तीनों दोस्त हस्ते हुए बेंच में बैठ गए उसके बाद राजू बोला...
राजू – यार अभय तू आगया सच में यकीन नही हो रहा है ऐसे लग रहा है जैसे मैं सपना देख रहा हू यार
लल्ला – हा यार मुझे भी एसा लगता है
अभय – (हस्ते हुए राजू और लल्ला के कंधे पे हाथ रख के) मैं सच में यही हू भाई लोगो तुमलोग के सामने और तुम्हारे साथ
राज – तो अब ये बता कहा था तू इतने वक्त तक
अभय -- सब बताऊगा मेरे भाई लेकिन अभी तुम सब मेरी एक बात ध्यान से सुनो , राज तुझे अपना वो पूराना खंडहर याद है जो हमारी जमीन में बना हुआ है
राज -- हां भाई, लेकिन वो तो तारो से चारो तरफ घीरा है। और ऐसा कहा जाता है की, वो खंडर शापित है इसके लिए तेरे दादा जी ने उस खंडर के चारो तरफ उचीं दीवाले उठवा दी और नुकीले तारो से घीरवा दीया था...
राज की बात सुनकर, अभय कुछ सोंचते हुए बोला...
अभय -- कुछ तो गड़बड़ है वहां। क्यूंकि जीस रात मैं गाँव छोड़ कर जा रहा था। मैं उसी रास्ते से गुज़रा था, मुझे वहा कुछ अजीब सी रौशनी दीखी थी। तूफान था इसलिए मैं कुछ ध्यान नही दे पाया। और हां, मैने उस रात उस जंगल में भी कुछ लोगों का साया देखा था। जरुर कुछ हुआ था उस रात में....
अभय की बात बड़े ही गौर से सुन रहा राज बोला...
राज -- ओह तो इसका मतलब उस रात जंगल में कोई लफ़ड़ा हुआ होगा तभी तो अगले दीन उस बच्चे की लाश मिली थी जंगल में हो ना हो भाई ये लफड़ा ज़ायदाद का लगता है मुझे और ये काम तेरे उस हरामी चाचा का होगा।
अभय – यार राज अगर ये लफड़ा जायदाद का है तो उस रात इतने तेज़ तूफान में कोई उस खंडहर में क्या कर रहा था , ऐसा क्या हो सकता है उस खंडर में
राजू – अब ये तो वहा जाके ही पता के सकता है लेकिन भाई..
अभय -- लेकिन क्या
राज – लेकिन बात ये है अभय पूरे गांव वाले जानते है की वो खंडर श्रापित है इसीलिए दिन हो या रात खंडर के आस पास से भी कोई गुजरता तक नही है
लल्ला – हा अभय एक बार अपने गांव में बनवारी चाचा का बड़ा बेटा रात में अपने खेत की फसल को देखने गया था जल्दी जल्दी में वो उस खंडर वाले रास्ते से होके गया था लेकिन रात को घर लोट के ना आया अगली सुबह खेतो में डूडा गया उसे लेकिन कही ना मिला फिर वो मिला तो लेकिन पूरी बावली हालत में खंडर के पास
राज – हा यहीं वजह है उस जगह के आस पास भी जाने नही दिया जाता है किसी को भी
अभय – लेकिन मुझे लगता है इसका पता करना पड़ेगा और इसके लिए उस खंडर में जाना पड़ेगा
राज – तू पागल हो गया है क्या अभय अभी इतनी बात सुन के भी समझ नही आ रही है बात तुझे
अभय – राज तू नही समझ रहा बात को वो जमीन ठाकुर खानदान की है मतलब मेरी है वो जमीन और उस रात वहा वो अजीब रोशनी मुझे दिखी थी ये बात मत भूल भाई , मुझे लगता है वहा ऐसा कुछ तो हो रहा है जो लोगो की नजर में ना आजाएं शायद इसी बात के चलते श्राप वाली बात को फैलाया गया हो।
जब ये चारो बाते कर रहे थे चाय के दुकान में बैठ के इन सब पे सुरु से कोई नजर बनाए हुए चाय की दुकान के पीछे दो लड़कियां चुप चाप इनकी बातो सुन रहे थी
ठीक उसी वक्त उसी रास्ते से एक कर आ रही थी जिसको संध्या चला रहे थी की तभी संध्या के साथ बैठा लड़का बोला...
लड़का – (एक तरफ इशारा करके) ठकुराइन वो देखिए वो तीनो लड़को के साथ हमारे तरफ पीठ करके बैठा ये वही लड़का है...
तभी संध्या ने कार की ब्रेक लगाई लड़के को बोली..
संध्या – तू जा कॉलेज मैं देखती हू इसको
कार की आवाज सुन के राज , लल्ला और राजू की नजर गाई देखा वो ठकुराइन की कार है..
राज – अभय ठकुराइन आई है
अभय – आने दे भाई उसे मैं देखता हू , एक काम कर तू जा मैं शाम को मिलता हू तेरे से अपने पुराने आड़े पर वहीं पर बात करते है
इस तरफ ये तीनों जा रहे थे जबकि पीछे से संध्या आ रही थी अभय की तरफ आते ही गुस्से में बोली...
संध्या – कॉन है तू और तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बेटे पर हाथ उठने की तू जानता नही जिस कॉलेज में तू पढ़ रहा है वो उसी का कॉलेज है और तेरी इतनी हिम्मत की....
संध्या बोल ही रही थी की, अचानक अभय उसकी तरफ जैसे ही मुड़ा, संध्या की जुबान ही लड़खड़ा गयी। संध्या कब शेरनी से बील्ली बनी समय को भी पता नही चला।
अभय -- (हस के ताली बजाते हुए) अरे वाह क्या बात है इतना गुस्सा मारा तो मैने अमन को था लेकिन ऐसा लगता है जैसे दर्द अमन को नही तुझे हो रहा हो (हस्ते हुए) ईसे ही तो दील में बसा कीसी के लीए प्यार कहते हैं। जो तेरे चेहरे पर उस हरामी के लिए दीख रहा है। जो मेरे लिए आज तक कभी दीखा ही नही। खैर मैं भी किस औरत उम्मिद कर रहा हूँ जो खुद के बेटे को छोड़ अपने यार के बेटे से प्यार करती है
ये शब्द सुनकर संध्या तुरंत जाने के लिए पलटी ही थी की...
अभय -- क्या हुआ शर्म आ रही है जो मुह छुपा कर भाग रही है अरे इतना दर्द मुझे उस वक्त भी नही हुआ था जब तेरा हाथ उठता था मुझे उससे ज्यादा दर्द आज हुआ है मुझे क्यूकीं आज तेरे चेहरे पर उस हरामी के लीए बेइंतहा प्यार दीखा है और मेरे लिए तेरे चेहरे पर वो प्यार का कत...कतरा...
कहते हुए अभय रोने लगता है...अभय की रोने की आवाज संध्या के कानो से होते हुए दील तक पहुंची तो उसका दील तड़प कर थम सा गया। छट से अभय की तरफ मुड़ी और पल भर में अभय को अपने सीने से लगा कर जोर जोर से रोते हुए बोली...
संध्या -- मत बोल मेरे बच्चे ऐसा। भगवान के लिए मत बोल। तेरे लीए कीतना प्यार है मेरे दील में मैं कैसे बताऊं तूझे कैसे दीखाऊं तूझे
अभय -- (संध्या के गले लगे हुए) क्यूँ तू मुझसे दूर हो गई? क्या तूझे मुझमे शैतान नज़र आता था
कहते हुए अभय एक झटके में संध्या से अलग हो गया भाऊक हो चला अभय अब गुस्से की दीवार लाँघ रहा था। खुद को अभय से अलग पा कर संध्या एक बार फीर तड़प पड़ी मगर शायद उसकी कीस्मत में पल भर का ही प्यार था। वो लम्हा वाकई अभय के उस दर्द को बयां कर गया। जीसे लीए वो बचपन से भटक रहा था ये दोनो इस बात से अनजान दो लड़कियां जो इन दोनो की सारी बाते सुन रही है जिसे सुन कर एक लड़की आखों में आसू आगए
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अभय -- तू जा यहां से, इससे पहले की मै तेरा भी वही हाल करुं जो तेरे लाडले का कीया है, तू चली जा यहां से। तूझे देखता हूं तो ना जाने क्यूँ आज भी तेरी आंचल का छांव ढुंढने लगता हूं। यूं बार बार मेरे सामने आकर मुझे कमज़ोर मत कर तू। जा यहां से...
संध्या के पास ऐसा कोई शब्द नही था जो वो बदले में बोल सके सीवाय बेबसी के आशूं। फीर भी हीम्मत करके बोल ही पड़ी...
संध्या -- माफ़ कर दे, बहुत प्यार करती हूँ तूझसे
संध्या की बात सुनकर अभय अपनी आखं से आशूं पोछते हुए बोला...
अभय – कभी तूने मुझ से पूछा की मैने कोई गलती की है की नही , जब तूने किसी के कहने पर आके मुझ पे हाथ उठाया था क्या उसके लिए माफ करू , कभी तेरे लाडले ने तो कभी मुनीम ने तो कभी तेरे यार ने मेरे लिए गलत बोला क्या तूने कभी पलट के उनको कहा है की मेरा अभय ऐसा कभी नही कर सकता है , बोला तूने , कभी नही किया तूने ऐसा कुछ भी , और तू बोलती है मुझ से प्यार करती है अरे प्यार तो मैं भी तुझ से करता था याद है एक बार तेरा लाडला अमन बीमार था तो स्कूल नही गया उस दिन मैंने भी तुझे बोला था आज मेरी तबियत ठीक नहीं है मैं नहीं जाऊंगा तब क्या कहा था तूने की अमन तेरी तरह बहाना नही करता है तबियत खराब होने का मुझे गुस्सा मत दिला जा स्कूल और तब मैंने कहा था तुझे मां मैं जा रहा हू स्कूल बस तू नाराज मत हो तू नाराज होती है मेरा दिल दुखता है बोल क्या तब मेरा प्यार नजर नहीं आया था तुझे
इन सब बातो के बाद संध्या कुछ बोल ना पाई सिवाय अपने आसू बहाने के तभी सामने से पुलिस की जीप आती हुए नजर आई जीप के पास आते ही उसमे से पोलिस उतरी संध्या को देखा के पुलिस वाला...
चौकी इंचार्ज मकमरान – (संध्या से) नमस्ते ठकुराइन जी आप यह कॉलेज के बाहर
संध्या – (अपनी आंख साफ करके) हा बताएं क्या बात है यह कैसे आना हुआ
कामरान – हवेली से ठाकुर साहब का कॉल आया था किसी लड़के ने उनके बेटे पर हाथ उठाया है इसीलिए यहां आना हुआ
अभय – (संध्या और कामरान दोनो की बात काट के बीच में बोला) मैने उठाया है हाथ उसपे क्या करना है अब बोलो सीधी बात
कामरान – ओह तो तू है वो जनता है क्या किया है तूने...
संध्या – ऐसा कुछ नही....
अभय – (संध्या की बात को काटते हुए) अच्छे से जानता हूं क्या किया है मैने शुक्र माना उस वक्त तू नही था यहां वर्ना तू भी जान जाता मैं कॉन हू
कामरान – बड़ी चर्बी है तुझ में लौंडे (अपने हवलदारों से) ले चलो इसे पुलिस स्टेशन वही पे पता चलेगा तुझे मैं क्या हू
संध्या – इसकी कोई जरूरत नहीं है ऐसा कुछ नही हुआ यहां पर
कामरान – लेकिन ठकुराइन जी एफ आई आर लिखी जा चुकी है ठाकुर साहब के कहने पर
संध्या – मैने एक बार कहा ना की....
अभय – (संध्या को घूर देखते हुए बीच में बोल पड़ा) मैने भी बोल दिया की मैने ही किया है ये सब तो बातो में वक्त क्यों बर्बाद करना ले चल मुझे और दिखा अपनी औकात जरा मुझे भी (संध्या से) आपने शायद सुना नही इसकी बात एफ आई आर लिखी जा चुकी है ठाकुर के कहने पर तो अच्छा होगा आप बीच में मत बोलिए मेरे , जब बोलना था तब बोली नही अब बोल के क्या फायदा वैसे भी आपकी बात सुन कर मैं नही रुकने वाला हू अच्छा होगा जाके आप अपने लाडले पर ध्यान दो और साथ में उसे एक बात अच्छे से समझा देना अब अगर गलती से भी मेरे और उस लड़की के बीच आया तो अगली बार तेरे लाडले की वो हालत करूंगा की पलंग से उठने लायक भी नहीं बचेगा वो समझी अब बिना कुछ बोले निकल जा यहां से
कामरान – (अभय का कॉलर पकड़ के) ठकुराइन से बतमीजी से बात करता है
जीप मैं बैठा के ले गया कामरान पुलिस स्टेशन अभय को पीछे से संध्या चिल्लाती रही
संध्या – (चिल्ला के) रुक जा मत लेजा उसे कुछ नही किया उसने रुका जा
बिना कुछ सुने वो लेके चले गए अभय को लेके पुलिस वाले संध्या गुस्से में कार से अपना मोबाइल निकल के कॉल मिलने लगी किसी को
संध्या – (गुस्से में कॉल पर) तेरी हिम्मत कैसे हुई पुलिस में एफ आई आर करने की चुप चाप अपनी एफ आई आर वापस ले और बात खतम कर दे वर्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा तेरे लिए रमन
जब ये सब हो रहा था तब वो दो लड़कियां जो चुप के अब बाते सुन रही थी वो बाहर निकली संध्या के पास गई जब संध्या कॉल पे बात कर रहे थी रमन से पीछे से संध्या के कंधे पर हाथ रखा उन्होंने...
संध्या –(पलट के दोनो लड़कियों को देखते हुए) तु यहां पे और ये कॉन है
2 लड़की बोली – जी मेरा नाम चांदनी है ठकुराइन
संध्या –(नाम सुन के चौक कर बोली) तुम चांदनी हो वही चांदनी जिसके साथ मेरा अभय...
चांदनी –(बीच में) जी ठकुराईन मैं वही हू और आप चिंता मत करिए अभय को कुछ नही होगा बस आप...
संध्या – (रोते हुए चांदनी के गले लग गई) प्लीज चांदनी मेरे अभय को रोक लो फिर से दूर नही होने देना चाहती हू अगर अब एसा हुआ मैं जी नही पाओगी उसके बिना रोको उसे चांदनी
चांदनी – (संध्या के गले लगे हुए) आप बिल्कुल भी घबराए मत ठकुराइन मैं ऐसा कुछ भी नही होने दुगी अभय सिर्फ आपका है मै वादा करती हू आपसे वो आपको मिलेगा जरूर मिलेगा अभी आप शांत हो जाइए ठकुराइन और आप चिंता मत कराए थोड़ी देर में अभय वापस आ जाएगा पुलिस स्टेशन से भी आप जाइए हवेली बाकी आप मुझे छोड़ दीजिए सब बात
संध्या – ठीक है लेकिन ये तुम्हारे साथ क्या कर रही है ये तो...
चांदनी – ये मेरे कहने पर यहां पर है ठकुराइन मैं आपको सब बात समझा दुगी लेकिन बाद में अभी आप जाय प्लीज ज्यादा देर आपका यहां रहना अच्छा नहीं है
इसके बाद संध्या वहा से निकल गई संध्या के जाते ही...
लड़की – मैडम अब क्या करना है वो तो लेके चले गए अभय को पुलिस स्टेशन
चांदनी – (हस्ते हुए) जाने दो उनको आगे जो होगा सपने में भी नही सोच सकते है वो सब इसका अंजाम
इस तरफ कामरान आगया था पुलिस स्टेशन अपने साथ में हवाल्डर अभय को पकड़ के अन्दर ले आए और जेल में डाल दिया ..
कामरान – (अपनी कुर्सी में बैठते हुए लॉकअप में बंद अभय से बोला) बिना मतलब का पंगा ले लिया तूने ठाकुर से छोरे अब देख कैसे तेरी जिंदीगी की लौड़े लगते है (हस्ते हुए)
अभय – (हस्ते हुए) इस बात को वक्त पे छोर दे तू क्योंकि वक्त आने पर तुझे पता चल जाएगा किसके लौड़े लगने वाले है
कामरान – (गुस्से में) लॉकअप में बंद है फिर भी मुझसे अकड़ दिखा रहा है अब देख मैं तुझे कैसे केस में फसता हू तेरी पूरी जवानी निकल जाएगी जेल में ही (अपने हवलदार से) सुन वो आज सुबह गांव के बाहर एक फार्म हाउस में जो लाशे मिली है ना उसकी फाइल लेके आ जरा
अभय – (कामरान की बात सुनते ही जोर से हस के बोला) ओह हो तो तू मुझे भी मरेगा और दिखाएगा की मैं भी उन सभी के साथ मर गया क्यों यही सोच रहा है क्या तू
कामरान –(हस्ते हुए) अरे नही बे तुझे तो मैं इस फाइल में ये लिख के फसाऊगा की जो मर्डर हुए इसमें तू भी शामिल था तेरे बाकी साथी तो भाग गए लेकिन तुझे हिरासत में ले लिया गया 

अभय –(कामरान की बात सुन के जोर जोर से हसने लगा) तो क्या लिखा है तेरी फाइल में को इस फार्म हाउस के हाल में 60 से 65 लोगो की लाशे मिली है यहीं लिखा है ना तेरी फाइल में ये लिखा होगा की उस फॉर्महाउस में कितने ही लोगो को सिर में गोली लगी और कितनो की सिर के बीचों बीच चाकू मारा गया है और कितनो को गर्दन टूटने की वजह से मौत हुई और साथ ही कैसे कैसे एक की गर्दन तोड़ के मार दिया गया और उसके जेब में एक छोटा सा बॉम्ब भी फटा जिससे उसके एक पैर और मेंन पार्ट गायब हो गया क्यों कामरान क्या ये लिखा है तेरी फाइल में
कामरान और पुलिस स्टेशन में बैठे तीनों हवलदार अभय की बाते सुन ले सभी को पसीने आने लगे तब कामरान बोला...
कामरान – (अभय को हैरानी से देखते हुए) तुझे कैसे पता ये सब ये बात तो हमारे इलावा किसी को नहीं पता है...
अभय – (जोर से हस्ते हुए) तूने एक बात बिल्कुल सही कही थी कामरान ये काम मैने किया लेकिन अपने साथियों के साथ नही मैने अकेले किया है ये सब मैने ही उन सभी को मार डाला था कल रात में
कामरान – (अपना थूक लीलते हुए) ह...ह...हमे डराने के लिए तो ये बोल रहा है है ना
अभय – अरे नही रे डराने की जरूरत ही नही है मुझे लेकिन तुझे एक मजे की बात बताना तो मैं भूल ही गया उसमे दो लाश ऐसी भी थी जिसके एक की गर्दन में मैने लकड़ी को आर पार कर दिया था वो बेचारा जमीन में बैठा रह गया था और दूसरी एक औरत थी जिसकी गर्दन में मैने कुहालड़ी मारी थी वो बेचारी उसी दीवार से चिपकी रह गई थी 



और जानना चाहेगा तू बताओ क्या मैं....
अभय की बाते सुन के उन चारो पुलिस वालो की हालत ऐसी हो गई थी जैसे कसाई खाने में कसाई बकरे की गर्दन को धीरे धीरे चाकू से हलाल करता है चारो के शरीर काप रहे थे डर से..
कामरान –(डरते डरते बोला) क...क...कॉन हो तुम
अभय –(मुस्कुरा के) बस 2 मिनट और उसके बाद तू अपने आप जान जाएगा कॉन हू मै
अभी दो मिनिट भी पूरे नही हुए थे की पुलिस स्टेशन का फोन बजने लगा जिसकी आवाज आते ही चारो पुलिस वाले डर गए..
अभय – (हस्ते हुए) डरो मत ये फोन की घंटी बज रही है तेरे जल्दी उठा ले कहे ऐसा ना हो इसके बाद तुम चारो की घंटी बज जाए

कामरान –(डरते डरते कॉल रिसीव किया) हेलो कॉन बो....
सामने से कुछ बोला जा रहा था जिसे कामरान गुर से सुन रहा था तभी सिर उठा के अभय की तरफ देखने लगा आखें बड़ी करके….उनकी अभय कामरान की ऐसी हालत देख के बोला...
अभय – क्यों बे कॉन है फोन पे तेरी मां या मेरी मां
तभी कामरान दौड़ के आते ही अभय को लॉकअप से बाहर निकाला और माफी मांगने लगा...
कामरान – सॉरी सर मुझे पता नही था आप D I G मैडम के खास है , प्लीज सर माफ कर दीजिए हमे
लेकिन अभय बिना कुछ बोले इंस्पेक्टर की टेबल में जाके फोन उठा के बोला
अभय – हेलो
शालिनी सिन्हा – कैसे हो तुम
अभय – बिकुल ठीक हू मां
शिलिना सिन्हा – (खुश होके) क्या कहा तूने एक बार फिर से बोल कही ये सपना तो नही
अभय –मैने कहा मैं बिल्कुल ठीक हू बस
शालिनी सिन्हा – देख नाटक मत कर अभय अब और मत तड़पा मुझे
अभय – मां मां मां अब खुश मैं बिल्कुल ठीक हू मां
शालिनी सिन्हा – थैंक्यू सो मच अभय आज मैं बहुत बहुत खुश हू
अभय – अरे बस बस अभी से इतना खुश मत हो आप अभी तो और भी खुश खबरी मिलने वाली है आपको मां
शालिनी सिन्हा – हा बेटा मां अच्छे से जानती हूं बस इंतजार कर रही हू खुशखबरी का
अभय – जल्दी सुनाऊंगा खुश खबरी मां
शिलिना सिन्हा – अच्छा ठीक है ये बता अपनी दीदी से मिला तू
अभय – कहा मां दीदी का कॉल ही नहीं आया अभी तक
शालिनी सिन्हा – तेरी दीदी कल ही आ चुकी है गांव में तेरे अब तू यहां है तो सोच अब वो कहा पर मिलेगी तुझे
अभय – समझ गया मां मैं अभी जाता हू दीदी के पास
शालिनी सिन्हा – चल ठीक है रखती हू फोन अपना ख्याल रखना और अपनी दीदी का भी और मुझसे बात करते रहना
इसके बाद कॉल कट करके अभय ने कामरान की तरफ देखा और बोला..
अभय – किस्मत वाला है तू इसीलिए आज तुझे बक्श रहा हू लेकिन जल्दी मुलाकात होगी तेरे से
बोल के अभय जाने लगा तभी पीछे से कामरान ने बोला..
कामरान – सुनिए सर क्या आप सच में D I G शालिनी जी के बेटे है
अभय – (मुस्कुरा के) बेटे से बडकर हू मै उनका , चलता हू
बोल के अभय निकल गया जबकि पीछे से कामरान और उसके तीनों हवलदार अपना पसीना पोछने लगे सिर से..जबकि अभय पुलिस स्टेशन से निकल कर सीधे हॉस्टल में चला गया अपने रूम में जाते ही
अभय – (रूम में जाते ही जोर से) दीदी
CCCHHHAAAATTTTAAAAKKKKKK
इसके साथ रूम में तेज आवाज गूंज उठी चाटे की जिसे मारा एक लड़की ने जो अभय के सामने खड़ी थी गुस्से में...
चांदनी – क्या समझता है तू अपने आप को किस लिए यहां आया था और क्या कर रहा है तू
अभय – (अपने गाल पे हाथ रखे सुन रहा था बस)
चांदनी – (गुस्से में) अब बोल चुप क्यों हो गया
अभय – आपकी बहुत याद आ रही थी दीदी
चांदनी – (अभय की बात सुन के) देख अभय मैं किसी मस्ती के मूड में नहीं हू जो पूछ रहे हू उसका सच सच जवाब दे मुझे
अभय – मैं क्या करता दीदी वो अमन ने हाथ उठाया था पहले मुझ पे मैने तो जवाब दिया बस
चांदनी – (गुस्से में एक और दिया गाल पे अभय के CCHHHAAATTTAAAKKK) कॉलेज में क्या हुआ ये नही पूछ रहे हू मै तूने कल रात में उस फार्म हाउस में जो किया उसके लिए पूछ रहे हू मै
अभय – (हैरानी से) लेकिन आपको कैसे पता चला दीदी
चांदनी – (गुस्से में) अभय
अभय –(डर के) अच्छा बताता हू बताता हू दीदी , वो आपको याद है मैने उसका नाम बताए था आपको , SEANIOUR , उसने कहा था मुझे तभी मैं गया था वहा पर
चांदनी – (गुस्से में) फिर से वही नाम आखिर कॉन है वो क्यों परदे की पीछे छुप के ये सब करवा रहा है दूसरो से खुद के हाथ में मेहंदी लगा के बैठा है क्या
अभय – दीदी बस ये आखरी बार था अब ऐसा कुछ नही करना पड़ेगा मुझे
चांदनी – तुझे डर नहीं लगा कही तुझे कुछ हो जाता तो मेरा इंतजार भी नही कर पाया तू कम से कम एक बार तो बता देता मुझे ये भी जरूरी नही समझा क्यों , अरे हा समझेगा भी क्यों आखिर सगी बहन जो नही हू मै तेरी जो हर बात मुझे बताएगा है ना अभय
अभय – (आंख में आसू लिए) नही दीदी ऐसा मैं सपने में भी नही सोच सकता हू
चांदनी – (अभय को गले लगा के) अगर तुझे कुछ हो जाता सोचा क्या होता मां और मेरा कैसे जी पाते हम बोल
अभय – बस दीदी ये आखरी काम था उसका अब मेरा कोई मतलब नहीं उससे और अब वो मां और आपका कुछ नही बिगड़ पाएगा
चांदनी – चल ठीक है अब उसका किस्सा खतम हो गया ना , अब तू बता तेरे यह आने पर कुछ बात बनी तेरी पायल से
अभय – (शरमाते हुए) हा दीदी और (आज कॉलेज जो हुआ सब बता दिया)
चांदनी – ओह हो पायल तो बहुत तेज निकली तेरे से भी एक कदम आगे अब तो मिलना पड़ेगा पायल से
अभय – तो चलो मैं ले चलता हूं उसके घर आपके
चांदनी – (हस्ते हुए) अरे मेरे मजनू भाई पायल के मिलने की खुशी में भूल गया कोई नही जानता तू अभय है
अभय – अरे हा मैं सच में भूल गया था दीदी , अच्छा एक बात तो बताइए आप कल आ गए थे मुझे बताया क्यों नही
चांदनी – क्यों की कल रात जब तू कांड करके वापस जा रहा था उसके थोड़ी देर बाद मैं वहा आई थी अपनी टीम के साथ देखने और कुछ लेने जोकि हमे मिल गया वहा पर
अभय – लेकिन आप क्या लेने गए थे वहा पे
चांदनी – वो तेरा जानना जरूरी नहीं है समझा चल जल्दी से फ्रेश हो जा भूख लगी है मुझे साथ में खाना खाते है
इसके बाद अभय निकल गया फ्रेश होने के बाद दोनो बैठे के थे खाना खाने के लिए तभी कोई आ गया वहा पर
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जारी रहेगा
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
ये अपडेट में धमाके पे धमाके हो गये
अभय की गांड तूट गयी कामरान की माँ चुद गयी
संध्या की सासें उखडते रह गयी
चांदणी से अभय की गाल सुज गयी
फार्म हाऊस में लाशों की ढेर लग गयी
पायल के प्रेम की आस बढ गयी
बहुत ही जबरदस्त और गजब का अपडेट
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा