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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

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तुम क्या जानो मैं खुद से शर्मिंदा हूं, छूट गया है साथ तुम्हारा, फिर भी जिंदा हु..!!! :verysad:
 

Achin_Saha18

Don't trust anyone blindly
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N
UPDATE 15

देवेंद्र ठाकुर अपनी कार में बैठ के निकल गया रास्ते में अंगरक्षक ने देवेंद्र ठाकुर को मुस्कुराते हुए देखा तो पूछा

अंगरक्षक – क्या बात है सर आप जब यह आए गुस्सा और घबराहट थी आपकी चहरे पर लेकिन वापस जाते वक्त मुस्कुराहट है

देव – (मुस्कुराते हुए) आज देवी मां की लीला को देख कर मन खुश हो गया मेरा

अंगरक्षक – ऐसा क्या हो गया सर

देव – कुछ महीने पहले हम शहर गए थे याद है फंक्शन में जहा पर मुझपे जान लेवा हमला हुआ था

अंगरक्षक – हा सर अच्छे से याद है अगर शालिनी जी की बेटी और उनका भाई ना होता तो जाने क्या हो जाता उस दिन

देव – (मुस्कुरा के) हा बस उस लड़के की बात ही निराली थी उसे देख के मुझे मेरे बचपन के दोस्त मनन ठाकुर की याद आ गई थी और जानते हो वो लड़का कोई और नहीं मेरे बचपन के दोस्त मनन ठाकुर का बेटा है ये मुझे आज पता चला

अंगरक्षक – लेकिन सर वो तो

देव –(बीच में बात काटते हुए) हा जानते है हम लेकिन सच यही है बस यही सोच के हसी आ रही है....देवी भद्र काली की लीला अपराम पार है , अच्छा सुनो मैं चाहता हूं तुम इस साल गांव में मेला लगेगा तब वहा पे कुश्ती का आयोजन करना हम चाहते है अपने भांजे को तोहफा देना

अंगरक्षक – तोहफा देने के लिए कुश्ती का आयोजन समझ नही बात मुझे

देव – उसने जब हमारी ओर हमारे परिवार की जान बचाई तब हम उसे तोहफा में बाइक देना चाहते थे तब उसने कहा था मैंने अपना धर्म निभाया है ठाकुर साहब मुझे तोहफा देने से अच्छा आप जरूरत मंद की मदद कर दीजिएगा, उसके कही बात दिल को भा गई मेरे इसीलिए कुश्ती के बहाने अपने भांजे को तोहफा देना चाहते है

अंगरक्षक – समझ गया सर ऐसा ही होगा

देव और उनका अंगरक्षक बात करते करते निकल गए अपने गांव की ओर जबकि इस तरफ संध्या अभी भी गीता देवी के साथ बैठे बाते कर रही थी...

गीता देवी – शाम होने को आ रही है संध्या तू भी जाके तयारी कर आज गांव में भूमि पूजन है याद है ना तु वक्त पे आजाना सब साथ में पूजन करेगे

संध्या – दीदी क्या अभय आएगा वहा पे

गीता देवी – क्यों नहीं आएगा वो तो बचपन में सबसे पहले आ जाता था पूजन में इस बार भी जरूर आएगा बस तू अपने आप पर काबू रखना जानती है ना अभय की नाराजगी को

संध्या – वो सामने होता है मेरे कदम अपने आप उसके पास चले जाते है दीदी नही रोक पाती हू खुद को , नही बर्द्श होती है दूरी उससे मन करता है बस मेरे सामने रहे हर वक्त

गीता देवी – (गाल पे हाथ रख के) समझती हू तेरे दिल की भावना को , देव भईया ने कहा ना थोड़ा सब्र रख तू सब ठीक हो जाएगा

गीता देवी के समझने पर संध्या चली गई हवेली तयारी के लिए भूमि पूजन की इधर हॉस्टल में अभय खाना खा के आराम कर रहा था शाम को 6 बजे रमिया ने उठाया....

रमिया –(चाय हाथ में लिए अभय को जागते हुए) बाबू जी उठिए शाम हो गई है

अभय – अरे तू यही पे है अभी तक गई नही हवेली

रमिया – नही बाबू जी आज गांव में भूमि पूजन है ना इसीलिए रुक गई यही से पूजन में जाऊंगी सीधे

अभय – (चाय की चुस्की लेते हुए) वाह अच्छी चाय बनाती हो तुम मजा आजाता है तेरे हाथ की चाय पीने पर

रमिया –(शर्मा के) शुक्रिया बाबूंजी

अभय – अच्छा सुन एक काम है तुझसे कल शाम से रोज 3 लोगो का खाना बनाना तू

रमिया – 3 लोगो का खाना कॉन आ रहा है बाबू जी

अभय – है कोई मेरा खास कल आएंगे वो दोनो

रमिया – लेकिन बाबू जी कल तो कॉलेज के नए टीचर आ रहे है यहां पर

अभय – हा उन्हीं के साथ आ रहा है वो भी यही उनका रहने की व्यवस्था मेरे बगल वाले कमरे में करना ठीक है

रमिया – ठीक है बाबू जी

बोल के रमिया चली गई अभय चाय पी के त्यार हो गया था तभी उसके मोबाइल में कॉल आया किसी का

अभय –(मोबाइल देख के) PRIVATE NUMBER (कॉल रिसीव करके सामने से लड़की की आवाज आई)

लड़की – कैसे हो अभय बाबू

अभय – अब किस लिए फोन किया है तुमने

लड़की – इतनी भी नाराजगी अच्छी नहीं होती अभय

अभय – अच्छा तुम दोनो जो किया मेरे साथ उसके बाद भी तुम मुझसे हाल चाल पूछ रही हो। तुम्हारी वजह से में....

लड़की – (बात को काटते हुए) हमारे वजह से कुछ नही हुआ है अभय तुम शायद भूल रहे हो हमे तुम्हारे नही बल्कि तुम्हे हमारी जरूरत थी सौदा भी तुमने किया था , तुम्हे जो चाहीए था तुम्हे वो मिला और हमे जो चाहीए था वो ले लिया हमने बस और अब तुम सारा ब्लेम हम पे डाल रहे हो।

अभय – (बिना कुछ बोले गुस्से में गहरी सास ले रहा था)

लड़की – छोड़ो अभय गुस्सा से कोई हल नहीं निकलता है गलत ना तुम हो ना हम , खेर सुबह सुबह समुंदर के बीच (किनारे) का नजर देखा है जब सूरज उगता है कितना सुंदर नजारा होता है , वो देखना जरूर तुम शायद तुम्हे तुम्हारी समस्या का हल मिल जाए

अभय जब तक कुछ बोलता तब तक कॉल कट हो गया था अपने गुस्से को शांत कर गांव की तरफ निकल गया

आज की रात गांव पूरा चमक रहा था। गांव वालो की खुशियां टिमटिमाते हुए छोटे बल्ब बयां कर रही थी। सब गांव वाले आज नए नए कपड़े पहन कर एक जगह एकत्रित थे। एक जगह पर पकवान बन रहा था। तो एक जगह पर औरते अपना गीत गा रही थी। कही बुजुर्ग लोग बैठे आपस में बात कर रहे थे, तो कही बच्चे अपना बचपन शोर गुल करते हुए जी रहे थे। अल्हड़ जवानी की पहेली फुहार में भीगी वो लड़किया भी आज हसीन लग रही थी जिसे देख गांव के जवान मर्द अपनी आंखे सेंक रहे थे।
चारो तरफ शोर गुल और खुशियां ही थी, भूमि पूजन का उत्सव गांव वालो के लिए खुशियां समेत कर अपनी झोली में लाई थी इधर संध्या भी त्यार होके पूजा की थाली हाथ में लिए हाल से होते हुए बाहर को जा रहे थी तभी

मालती – दीदी आप इस वक्त पूजा की थाली लिए कहा जा रहे हो

संध्या – आज भूमि पूजन है ना वही जा रही हू मै और सुन खाने पे मेरा इंतजार मत करना बाहर ही खाना खा के आऊंगी

इतना बोल संध्या बिना मालती की बात पे ध्यान दिए निकल गई हवेली से कार लेके चलते चलते बीच रास्ते में बगीचे में संध्या की आंखो के सामने एक लैंप जलता हुआ दिखा। और उस लैंप की रौशनी में खड़ी एक लड़की दिखी कार रोक की संध्या अपने कदम लड़की की तरफ बढ़ा दी संध्या जब नजदीक पहुंची तो देखी की वो लड़की पायल थी, जो आज लाल रंग की सारी हाथो में पूजा की थाली लिए खड़ी थी।

संध्या – कैसी हो पायल

पायल – (पीछे मुड़ के) प्रणाम ठकुराइन अच्छी हू मै

संध्या – प्रणाम , पूजा में जा रही है तू

पायल – जी ठकुराइन

संध्या –आजा मेरे साथ चल मैं भी वही जा रही हू (अपने साथ पायल को कार में बैठे के कार आगे बड़ा दी चलते चलते संध्या बोली) पायल तुझे एक बात कहूं लेकिन वादा कर अपने तक रखेगी बात को

पायल – क्या बात है ठकुराइन जी ऐसी कॉन सी बात है

संध्या – जो खुशी मुझे नही मिल सकी मैं नही चाहती तू उसका गम में इस तरह डूबी रहे ही वक्त

पायल – मैं कुछ समझी नही आप क्या कहना चाहती हो ठकुराइन

संध्या – तेरा अभय जिंदा है यहीं है इसी गांव में याद वो लड़का जिसने आते ही गांव वालो को उनकी जमीन दिला दी , वो ही तेरा अभय है पायल

पायल – (मुस्कुराते हुए) जानती हू ठकुराइन

संध्या – (कार को ब्रेक लगा के) तू जानती है लेकिन कैसे

पायल – (आंख में आसू लिए) उस अलबेलें को कैसे भूल सकती हू मै जिसके इंतजार में आज तक कर रही हू उसदिन भीड़ में मैने उसे देखा था वही नैन नक्श लेकिन मुझे लगा शायद मेरा वहम है लेकिन मेरे बाबा जब उसे भूमि पूजन का न्योता देने गए थे तब वापस आके मां को बता रहे थे उसकी बातो को तब मैंने उनकी बात सुन मुझे यकीन हो गया की यही मेरा अभय है

संध्या – तो अब तक तू बोली क्यों नही कुछ भी

पायल – उस पागल ने इतने साल तरसाया है मुझे वो भी तो तरसे पता चले उसे भी इंतजार कैसा होता है

संध्या –(मुस्कुरा के पायल को गले लगा के) बड़ी हो गई है लेकिन तेरा बचपना नही गया तुझे जो अच्छा लगे वो कर , लेकिन अब तो मुस्कुरा दे सुना था मैने गांव वालो से जब से अभय गया तब से हंसना भूल गई है तू

संध्या की बात सुन के पायल हस दी दोनो मुस्कुराते हुए निकल गए गांव की तरफ जहा पर भूमि पूजन की तयारी की गई थी ठकुराइन को देख साथ में उनके पायल को देख के गांव वालो ने ठकुराइन का स्वागत किया कुछ समय के बाद अभय भी आ गया वहा पे जोर शोर से भूमि पूजन हुआ फिर सुरु हुई दावत

जहा ये सब हो रहा था वही अभय की नजर सिर्फ पायल पे टिकी हुई थी और संध्या की नजर सिर्फ अभय पर उसकी एक नजर को तरस रहे थी संध्या लेकिन अभय ने पलट के एक बार भी संध्या को नही देखा वो दोनो बात तो गांव वालो से कर रहे थे पर नजरे कही और ही थी।

संध्या – (अभय को देखते हुए खुद के मन से बोली) बेटा एक नजर अपनी मां की तरफ भी देख लो, मैं भी इसी आस में बैठी हूं। पूरा प्यार प्रेमिका पर ही , थोड़ा सा इस मां के लिए भी नही, हाय रे मेरी किस्मत!

संध्या अपनी सोच में डूबी अपनी किस्मत को कोस रही थी, तब तक वह राज , लल्ला और राजू तीनों दोस्त भी पहुंच जाते है। राज , अभय के पास आकर खड़ा हो जाता है जब राज ने अभय को देखा की उसके नजरे बार बार पायल पे ही जा रही है तो, वो पायल की तरफ बढ़ा। और पायल के नजदीक पहुंच कर बोला...

राज -- क्या बात है पायल? तूने तो उस छोकरे को दीवाना बना दीया है, कॉलेज में और यहा भी उसकी नजर तुझपे ही अटकी है।

राज की बात सुनकर, पायल बोली...

पायल -- कोई पागल लगता है, आते से ही देख रही हू घूरे जा रहा है बस सब बैठे है फिर भी बेशर्म की तरह मुझे ही घूर रहा है बदतमीज है।

राज -- वैसे, कल मज़ा आएगा।

पायल -- क्यूं ऐसा क्या होगा कल?

राज-- कल कॉलेज में जब ये तुझे इसी तरह घुरेगा, तो तेरा वो सरफिरा आशिक अमन इसकी जमकर धुलाई करेगा, तो देखने में मजा आयेगा।

पायल -- मुझे तो नही लगता।

पायल की बात सुनकर राज आश्चर्य से बोला...

राज -- क्या नही लगता?

पायल -- यही, की अमन इस पागल का कुछ बिगड़ पाएगा

राज -- (चौकते हुए) क्यूं तू ऐसा कैसे बोल सकती है तुझे पता नही क्या अमन के हरामीपन के बारे में।

पायल -- पता है, पर उससे बड़ा हरामि तो मुझे ये पागल लग रहा है। देखा नही क्या तुमने इस पागल को? सांड है पूरा, हाथ है हथौड़ा, गलती से भी उस पर एक भी पड़ गया तो बेचारे का सारा बॉडी ब्लॉक हो जायेगा। उस अमन की तरह मुफ्त की रोटियां खाने वालो में से तो नही लगता ये पागल। और वैसे भी वो मुझे देख रहा है तो उस अमन का क्या जाता है?

पायल की बाते राज को कुछ समझ नहीं आ रही थी...

राज -- अरे तू कहना क्या चाहती है तू उसकी तारीफ भी कर रही है और एक तरफ उसे पागल भी बोल रही है। क्या मतलब है...?

ये सुनकर पायल जोर से हस पड़ी.......

पायल को मुस्कुराता देख सब दंग रह गए, सालो बाद पायल आज मुस्कुराई थी...पास खड़ी उसकी सहेलियां तो मानो उनके होश ही उड़ गए हो। राज का भी कुछ यही हाल था। पायल मुस्कुराते हुए अभि भी अभय को ही देख रही थी।

और इधर पायल को मुस्कुराता देख अभय भी मंगलू और गांव वालो से बात करते हुए मुस्कुरा पड़ता है।
सब के मुंह खुले के खुले पड़े थे। पायल की एक सहेली भागते हुए कुछ औरतों के पास गई, जहा पायल की मां शांति भी थी...

काकी...काकी...काकी

उस लड़की की उत्तेजित आवाज सुनकर सब औरते उसको देखते हुए बोली...

औरत – अरे का हुआ, नीलम कहे इतना चिल्ला रही है?

नीलम ने कुछ बोलने के बजाय अपना हाथ उठते हुए पायल की तरफ इशारा किया सब औरते की नजर पायल के मुस्कुराते हुए चेहरे पर पड़ी, जिसे देख कर सब के मुंह खुले के खुले रह गए। सब से ज्यादा अचंभा तो शांति को था, ना जाने कितने सालों के बाद आज उसने अपनी बेटी का खिला और मुस्कुराता हुआ चेहरा देखी थी वो।

शांति -- है भगवान, मैं कही सपना तो नहीं देख रही हूं।

कहते हुए वो भागते हुए पायल के पास पहुंची पायल जब अपनी मां को देखती है तो उसकी मां रो रही थी। ये देख कर पायल झट से बोल पड़ी...

पायल -- मां, तू रो क्यूं रही है?

शांति -- तू , मुस्कुरा रही थी मेरी लाडो। एक बार फिर से मुस्कुरा ना।
ये सुन कर पायल इस बार सिर्फ मुस्कुराई ही नहीं बल्कि खिलखिला कर हंस पड़ी। सभी औरते और लड़किया भी पायल का खूबसूरत चेहरा देख कर खुशी से झूम उठी। पायल की जवानी का ये पहेली मुस्कान थी, जो आज सबने देखा था। वाकई मुस्कान जानलेवा था। पर शायद ये मुस्कान किसी और के लिए था...

पायल -- हो गया, मुस्कुरा दी मेरी मां। अब तो तू रोना बंद कर।

ये सुनकर शांति भी मुस्कुरा पड़ी, शांति को नही पता था की उसकी बेटी किस वजह से आज खुश है?किस कारण वो मुस्कुरा रही थी? और शायद जानना भी नही चाहती थी, उसके लिए तो सबसे बड़ी बात यही थी की, बरसो बाद उसकी फूल जैसी बेटी का मुरझाया चेहरा गुलाब की तरह खिला था।

पायल – (राज को बोली) अब तुभी अपनी शायरी सुना दे जल्दी से कल कॉलेज भी तो जाना है

पायल की बात सुन के सभी गांव वाले हसने लगे फिर सब गांव वाले एक तरफ होने लगे तभी संध्या बोली...

संध्या – (राज से) इधर आजाओ राज यहां से सबको सुनाई देगी

राज चला गया संध्या के बगल में खड़े होके त्यार हो गया शायरी सुनने के लिए इस वक्त सब गांव वालो और अभय की नजर राज पे टिकी थी

राज की शायरी उसकी जुबानी

अर्ज किया है

अभी तो मैंने नापी है,
मुट्ठी भर जमीन,
अभी तो नापना,आसमान बाकि है,
अभी तो लांघा है, समंदर मैंने,
अभी तो बाज की उडान बाकी हैं।।


शायरी सुन के सभी गांव वालो ने जोर से तालिया बजानी सुरु कर दी

सभी गांव वाले – बहुत खूब राज बहुत खूब

अर्ज किया है

कभी मै रहके भी घर पर नहीं हूं ,
जहाँ मै हूँ, वहाँ अकसर नहीं हूँ ,
किसी को चोट मुझसे क्या लगेगी,
किसी की राह का पत्थर नहीं हूँ,
रहा फूलों की संगती में निरंतर,
बहारों का भले शायर नहीं हूँ,
तेरा दर खुला हैं मेरे लिए हमेशा,
ये क्या कम है कि बेघर नहीं हूँ ।।

राजू और लल्ला – सिटी बजा के जोर से जोर से तल्लिया बजाने लगे

सभी गांव वाले ये नजारा देख के मुस्कुरा के तालिया बजाने लगे साथ अभय भी खुशी के साथ तल्लियो में साथ दे रहा था सबका

राजू – भाई कोई प्यार वाली भी सुना दे शायरी

राज – (मुस्कुरा के) अर्ज किया है

इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए
दीवाना समझ कर ही उन के होंटों पे मेरा नाम आ जाए
मैं ख़ुश हूँ अगर गुलशन के लिए कुछ लहू काम आ जाए
लेकिन मुझ को डर है इस गुल-चीं पे न इल्ज़ाम आ जाए
ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
इक चाँद फलक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-शाम आ जाए
मय-ख़ाना सलामत रह जाए इस की तो किसी को फ़िक्र नहीं
मय-ख़्वार हैं बस इस ख़्वाहिश में साक़ी पे कुछ इल्ज़ाम आ जाए
पीने का सलीका कुछ भी नहीं इस पर है ये ख़्वाहिश है रिंदों की
जिस जाम पे हक़ है साकी का हाथों में वही जाम आ जाए
इस वास्ते ख़ाक-ए-परवाना पर शमा बहाती है आँसू
मुमकिन है वफ़ा के क़िस्से में उस का भी कहीं नाम आ जाए
अफ़्साना मुकम्मल है लेकिन अफ़्साने का उनवाँ कुछ भी नहीं

ऐ मौत बस इतनी मोहलत दे उन का कोई पैग़ाम आ जाए

लल्ला – (जोर से हस्ते हुए) लो लगता है भाई की नैया पार हो गई उसे भी किसी से प्यार हो गया है कॉन है वो खुश नसीब बताओ जरा

लल्ला की बात सुन के सब गांव वाले जोर से हसने लगे साथ में तालिया बजा के खुशी जाहिर करने लगे साथ अभय भी में ले रहा था इस बात के

राज – (हस्ते हुए) अर्ज किया है की....

पायल – (बीच में टोकते हुए) अरे राज एक शायरी दोस्ती पर भी सुना दे

गांव वालो के साथ पायल को बात सुन अभय भी राज को देखने लगा शायद अब और मजा आएगा शायरी में लेकिन...

राज – दोस्ती पर शायरी (हल्का मुस्कुरा के) क्या सुनाऊं दोस्ती पे शायरी , राजू और लल्ला के इलावा एक ही दोस्त था मेरा (हल्का हस के) जब उसे अपनी शायरी सुनता था हर बार मेरी शायरी की टांग तोड़ देता था वो , पूरे स्कूल में सिर्फ हम 4 ही दोस्त ही तो थे जो साथ खेलते भी थे साथ में घूमते भी थे कभी समंदर के किनारे घंटो तक नहाते थे मस्ती करते थे तो कभी अमरूद के बाग के पेड़ो से अमरूद तोड़ के खाया करते थे तो कभी आम के बगीचे में आम तोड़ के खाया करते थे घर में देर हो जाती थी जाने में तो (हसके) डाट खाया करते थे , लेकिन फिर अगले दिन हस के एक दूसरे से मिला करते थे , बस वो आखरी दिन याद है मुझे जब उसके साथ बगीचे में खेला था मैने उसके बाद उस रात मैं बहुत सोचता रहा कल मेरे जिगरी यार का जन्मदिन है क्या दू उसे तोहफे में तो उसके लिए एक शायरी लिख डाली सोचा था अगले दिन तोहफे में अपने यार को कागज में कलम से लिखी चांद लाइन शायरी की दूंगा तो जरूर उसकी भी टांग तोड़ देगा , अगले दिन स्कूल में उसकी राह देखता रहा लेकिन वो नहीं आया हा जब मैं घर गया तो ये जरूर पता चला की अब वो कभी नही आएगा, उसदिन से दोस्ती पर शायरी कभी बना नही पाया मैं डर लगता था नए दोस्त बनाने में , बस एक आखरी शायरी बनाए थी अपने दोस्त के लिए दोस्ती पर

राज – (अपने आसू पोंछ हल्का सा हस के) अर्ज किया है

तुम्हारे जन्मदिवस पर मिले तुम्हें ढेर सारे उपहार, खुशियाँ तुम्हारी दुगनी हो मिले सुख समृद्धि अपार ! चेहरा हमेशा खिला रहे आपका गुलाब की तरह,
नाम हमेशा रोशन रहे आपका आफताब की तरह, अँधेरे में भी चमकते रहे आप महताब की तरह,
और दुःख में भी हँसते रहे आप फूलों की तरह !
अगर याद न रहे आपको अपना जन्मदिन, चेक करते रहना यूँ ही अपने मोबाइल के इनबॉक्स हर दिन,
मैं कभी न भूलूंगा अपने यार का सबसे खास दिन, चाहे वह मेरे जीवन का हो सबसे आखिरी दिन

राज – वादा तो कर दिया मैने की अपने जीवन के आखरी दिन तक मैं उसका जन्मदिन नही भूलूगा , (आखों में आसू के साथ) लेकिन ये कभी नही सोचा था वो दिन उसका आखरी दिन होगा ,(आसमान को देखते हुए) वो कहता था मुझसे की एक दिन वो आसमान में तारा बन के चमकेगा जिसकी चमक बाकी तारो से अलग ही होगी , हर रोज उसे उन तारो की नगरी में डूडता हू , एक बार मां ने मुझे कहा आसमान को देखते हुए की वो देख वो तारा तेरे दादा जी है , वो तारा तेरी दादी , वो मेरी नानी , वो मेरे नाना , लेकिन मैं सिर्फ अपने दोस्त को डूडता रहा कभी दिखा नही मुझे जाने कौन से तारे की पीछे छुपा हुआ है।

राज – राजू और लल्ला के इलावा मेरा सिर्फ एक ही सच्चा दोस्त था उसका नाम अभय है।

बोल के राज चुप हो गया तभी पीछे से किसी ने राज के कंधे पे हाथ रखा , राज ने पलट के देखा तो...

संध्या – (राज के आसू अपने हाथो से पोंछ के गले लगा लिया उसे) मुझे माफ कर देना राज मैं तेरी भी कसूरवार हू शायद मेरी वजह से तेरा दोस्त दूर हुआ तुझसे ना मैं एक अच्छी मां बन पाई और ना अच्छी ठकुराइन , कभी समझ ही ना पाई....

दूर खड़ा अभय को देखते हुए बोले जा रही थी आगे संध्या कुछ बोलती उससे पहले ही पीछे से गीता देवी ने संध्या और राज दोनो के कंधे में एक साथ हाथ रख के बोली..

गीता देवी – (राज के सर पे हाथ फेर के) चुप होजा बेटा ऐसे खुशी के मौके पर रोया नही करते वर्ना क्या सोचेगा अभय की उसका पहलवान दोस्त लड़कियों की तरह रोता है उपर वाला सब ठीक कर देगा

गांव में ज्यादा तर लोग जानते थे की ये चारो अच्छे दोस्त है लेकिन आज ये भी जान गए थे अच्छे के साथ इन चारो की दोस्ती भी सच्ची है शायद इसीलिए वो भी अपने आसू ना रोक सके इसके बाद सभी गांव वाले जाने लगे अपने घर की ओर लेकिन जाते जाते राजू , लल्ला और राज के सर पे खुशी और प्यार से हाथ फेर के जा रहे थे

जब ये सब हो रहा था वही एक तरफ अभय दूर होके एक पेड़ के पीछे छुप के आंख में आसू लिए अपने तीनों दोस्तो को देख रहा था जाने वो क्या मजबूरी थी जिसके चलते अभय अपने दोस्तो को भी नही बता सकता था की वही उनका जिगरी यार अभय है।
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जारी रहेगा✍️✍️
Nice update
 
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