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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#213.

सूर्यांश:
(25.01.2002, शुक्रवार, मैनहट्टन, न्यूयार्क, अमेरिका)

आर्ची ने जैसे ही शलाका को उस बच्चे के कहीं और जाने की बात कही शलाका सबकुछ छोड़ उस पार्क की ओर चल दी। जेम्स भी विक्रम को देखता हुआ शलाका के पीछे भागा।

“आर्ची, मुझे रास्ता गाइड करती रहो।” शलाका ने तेज चलते हुए कहा।

“आप बिल्कुल सही रास्ते पर हो...अब सामने दिख रही सड़क को पार करके, दूसरी ओर आ जाओ।" आर्ची ने शलाका को गाइड करना शुरु कर दिया।

"एक मिनट रुको शलाका।” जेम्स ने शलाका को रोकने की कोशिश करते हुए कहा- “हम लोग ऐसे भाग क्यों रहे हैं, हम आपके जादू से भी तो वहां जा सकते हैं?"

“तुम्हें क्या लगता है कि मैं यहां न्यूयार्क के बीचो बीच खड़े होकर जादू का प्रयोग करुंगी, अगर एक भी कैमरे ने हमें ऐसा करते देख लिया, तो फिर पूरी दुनिया की समाचार एजेंसियां आज से ही हमारे पीछे पड़ जायेंगी।” शलाका ने बिना रुके चलते हुए कहा।

लेकिन अब जेम्स को समझ में आ गया था कि क्यों शलाका इस प्रकार भाग रही थी?

“अब आपके सामने, एक प्लेग्राऊंड का गेट आयेगा, उसे पार करने के बाद, पार्क का गेट, आपके सामने होगा।” आर्ची, शलाका को तेजी से गाइड कर रही थी। कुछ ही देर में शलाका को ‘फोर्ट ट्रायन पार्क' का गेट दिखाई देने लगा।

“अब इस गेट से आप पार्क के अंदर की ओर आ जाइये और फिर बांई ओर चलिये। अब वह लड़का आपसे ज्यादा दूरी पर नहीं है।” आर्ची ने शलाका को उत्साहित करते हुए कहा।

शलाका काफी तेज चल रही थी, जेम्स बड़ी मुश्किल से उसकी गति के बराबर चल पा रहा था। जेम्स की अब साँस भी फूलने लगी थीं। तभी शलाका और जेम्स को वह लड़का दिखाई दिया।

“आपके सामने जो लड़का है, वही है वह लड़का, जिसने उस दिन अमृत की शीशी म्यूजियम से चुराई थी।" आर्ची ने कहा।

शलाका उस लड़के के पास पहुंच गई, जो कि पार्क की एक बेंच पर बैठा था।

लड़का शक्ल से ही भारतीय लग रहा था, परंतु उसकी आँखें बहुत चमकीली थीं। उसका रंग गोरा और बाल काले थे। उसने इस समय एक सफेद रंग की शर्ट पर एक गाढ़े नीले रंग का जंपर पहन रखा था।

शलाका उस लड़के के बगल जाकर बैठ गई। उस लड़के ने अपना चेहरा उठाकर शलाका को देखा और फिर बिना अपनी नजर हटाये, उसे निहारता रहा।

शलाका को वह लड़का काफी भोला-भाला लगा। पर फिर भी उसने अपने दिमाग को केन्द्रित करते हुए उस बच्चे की ओर ध्यान से देखा।

"आर्ची इस बच्चे को स्कैन करो और देखो कि यह कौन है?” शलाका ने यह बात अपने मन में ही कही थी, इसलिये उस बच्चे को शलाका की आवाज सुनाई नहीं दी।

"इस बच्चे के चेहरे पर किसी प्रकार का कोई मेकअप नहीं है, इसके शरीर की ऊर्जा बताती है कि यह बहुरुपिया भी नहीं है, इसके दिल की धड़कन सामान्य है और वह किसी बालक की ही तरह धड़क रही है, इसका मतलब यह सच का ही एक बालक है इसके शरीर के सभी अंग बिल्कुल साधारण मनुष्य की भांति ही हैं, जो यह साबित करता है कि इस बालक में किसी भी प्रकार की कोई दिव्य शक्ति नहीं है। शलाका, यह एक साधारण बालक है, जिसकी उम्र लगभग ..... वर्ष है। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

यह सुन शलाका ने बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा- “तुम्हारा नाम क्या है और तुम कहां रहते हो?"

मगर शलाका को देखते हुए, पता नहीं क्यों उस बच्चे की आँखें भर आईं, पर वह बोला कुछ नहीं वह तो बस अनवरत शलाका को देखे जा रहा था।

“क्या हुआ, तुम कुछ बोलते क्यों नहीं?" शलाका ने उसकी भरी-भरी आँखों को देखते हुए प्यार से पूछा।

“मेरा नाम सूर्यांश है, मैं इस दुनिया में अकेला हूं और आपको देखकर मुझे मेरी माँ की याद आ गई।" सूर्यांश ने कहा।

“क्यों तुम्हारे माता-पिता कहां गये?” शलाका ने आश्चर्य से सूर्यांश को देखते हुए पूछा।

“मेरी माँ, बचपन में ही मुझे छोड़कर कहीं चली गई?” सूर्यांश ने कहा- “मैं यहां अपने अंकल के यहां रहता हूं...उनका घर यहां से कुछ दूरी पर है जब वो अपने ऑफिस चले जाते हैं, तो मैं यहां पार्क में आ जाता हूं।"

“और तुम्हारे पापा? वो कहां गये?" शलाका ने सूर्यांश के गाल को प्यार से सहलाते हुए पूछा।

“वो माँ को ढूंढने चले गये। काफी समय से उनका भी कुछ पता नहीं है?” सूर्यांश ने भी अब शलाका के चेहरे को छूते हुए कहा- “क्या मैं आपको माँ बोल सकता हूं?"

सूर्यांश के यह शब्द सुनते ही जाने क्यों शलाका का मन भर आया, उसने सूर्यांश को गले से लगाते हुए कहा- “बिल्कुल बोल सकते हो, पर पहले तुम्हें, मुझे एक चीज बतानी होगी?" शलाका की बात सुन सूर्यांश, शलाका का चेहरा देखने लगा।

“तुमने 4 दिन पहले जो म्यूजियम से एक शीशी चुराई थी, वह कहां है?”

“उस शीशी में तो कुछ भी नहीं था, मैंने उसे खोल के देखा था, उसमें तो बस एक बूंद पानी था।” सूर्यांश, शलाका का प्यार देख अब खुल के बोलने लगा था।

"तो तुमने उस शीशी के पानी का क्या किया?"

“उस समय मेरा गला सूख रहा था, इसलिये मैंने उस पानी को पी लिया और शीशी यहीं पार्क में फेंक दी थी।” सूर्यांश ने पार्क के एक ओर इशारा करते हुए कहा।

शलाका ने जेम्स की ओर देखा। जेम्स शलाका का इशारा समझ उस ओर जाकर शीशी को ढूंढने लगा, जिधर सूर्यांश ने इशारा किया था।

कुछ ही देर में जेम्स उस सुनहरी शीशी को लिये हुए, शलाका के पास पहुंचा। शलाका ने शीशी को खोलकर देखा, पर उसमें कुछ नहीं था, यानि की सूर्यांश सही कह रहा था और अब वह अमरत्व को प्राप्त कर चुका था।

अब शलाका के वहां रुके रहने का कोई औचित्य नहीं था, इसलिये उसने एक आखिरी बार सूर्यांश के सिर पर हाथ फेरा और उठकर खड़ी हो गई।

“अब मैं चलती हूं सूर्यांश, पर आप ज्यादा शैतानी मत करना और समय पर यहां से सीधे अपने घर जाना।"
यह कहकर शलाका वहां से वापस चल दी, पर शलाका अभी कुछ ही दूर जा पाई थी कि एका एक उसे कुछ याद आया- “ओह नो!"

और वह जेम्स को ले वापस भागकर उसी स्थान पर आ गई, जहां उसने अभी सूर्यांश को छोड़ा था, पर अब सूर्यांश उस जगह पर नहीं था।

“क्या हुआ? आप इस तरह से भागकर वापस क्यों आईं?" अब जेम्स से रहा ना गया, इसलिये वह पूछ बैठा।

“सूर्यांश झूठ बोल रहा था, अगर उसने अमृत पीया होता, तो आर्ची को उसके शरीर के बदलाव नजर आ जाते, पर आर्ची को वह सामान्य बालक ही लगा, इसका साफ मतलब निकलता है कि या तो उस बालक ने अमृत नहीं पिया था या फिर वह किसी प्रकार से आर्ची को धोका देकर बच निकला है?"

तभी शलाका को उस सीट पर कोई कागज रखा हुआ दिखाई दिया, जहां अभी सूर्यांश बैठा था। शलाका ने उस कागज को उठा लिया, परंतु उस कागज पर नजर पड़ते ही शलाका के दिमाग में धमाके से होने लगे।

उस कागज पर वैसा ही डिजाइनर S और दिल का निशान बना था, जैसा कि एक दिन पहले शलाका को अपने कमरे में मिला था।

“यह क्या? क्या सूर्यांश ही उस दिन मेरे कमरे में आया था? लेकिन कैसे? कैसे एक छोटा सा बालक मेरी सभी सिक्योरिटी को धता देकर, मेरे कमरे में घुस सकता है? और....और वह अंटार्कटिका कैसे पहुंच गया? कुछ तो गड़बड़ है सूर्यांश में? मुझे कैसे भी उस बालक को दोबारा ढूंढना होगा?” शलाका के दिमाग में सैकड़ों प्रश्न घुमड़-घुमड़ कर आ रहे थे।

"कहीं ऐसा तो नहीं कि हम जिस दिव्य बालक को देवोम समझ कर ढूंढ रहे हैं, यह वही बालक हो क्यों कि यह आपको माँ बोल रहा था... और इसने यह भी कहा था कि इसके माता-पिता इसे छोड़कर कहीं चले गये?" जेम्स के शब्दों ने तो कहानी को और ज्यादा उलझा दिया।

“पर महेन्द्र के कहने के हिसाब से तो देवोम कम से कम 24 से 25 वर्ष का होना चाहिये था, पर यह तो xyz से yxz वर्ष का बालक था।” शलाका ने जेम्स की ओर देखते हुए कहा।

“ये भी तो हो सकता है कि महेन्द्र जान-बूझकर झूठ बोल रहा हो, उसे डर हो कि अगर हम सच्चाई जान जायेंगे, तो फिर हम देवोम को अपने साथ लेते जायेंगे। जेम्स ने कहा।

“महेन्द्र सच बोल रहा था या नहीं, यह गुत्थी तो अभी सुलझ जायेगी।” यह कहकर शलाका ने एक बार फिर आर्ची को संबोधित किया- “आर्ची, तुम जरा पिछले 15 दिन का पुलिस का डेटा चेक करो और पता करो कि महेन्द्र ने देवोम के खोने की पुलिस कंप्लेन किसी पुलिस स्टेशन में लिखवाई है क्या?

कुछ ही देर में आर्ची की आवाज आई- “हां, महेन्द्र ने 5 दिन पहले देवोम की एक 'मिशिंग रिपोर्ट' लिखवाई है।"

“यानि कि देवोम सच में ही गायब हुआ है, पर बिना उसकी फोटो के हम उसे ढूंढे भी तो कैसे?” शलाका ने कहा।

तभी अचानक शलाका को कुछ याद आया “आर्ची, मैंने जो देवोम की फोटो, तुम्हें सेव करने को कही थी, उसे तुम अपने फ्यूचर डेटा में डाल कर बता सकती हो कि देवोम इस समय देखने में कैसा होगा? तुरंत देवोम की बचपन की फोटो से अभी की फोटो बनाकर मुझे बताओ।"

लगभग 5 मिनट के बाद आर्ची की आवाज आई“मैंने देवोम की नई फोटो बना ली है।"

“अब देवोम की इस नई फोटो को पूरे विश्व के कैमरे से स्कैन करो और देखो कि इसे आखिरी बार कहां पर देखा गया था?” शलाका ने कहा।

जेम्स तो जैसे आर्ची का फैन होता जा रहा था, इतने एडवांस कंप्यूटर के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकता था।

"देवोम की फोटो सर्च करने के बाद पता चला कि देवोम को 15 दिन पहले, आखिरी बार फ्लोरिडा के एयरपोर्ट पर देखा गया था, जहां से वह एक हेलीकॉप्टर में बैठकर कहीं चला गया? एक मिनट रुकिये.... हमें देवोम के चेहरे से मिलता एक डेटा और मिला है, पर इस डेटा में देवोम का नाम व्योम लिखा हुआ है और यह डेटा अमेरिका की सीक्रेट सर्विस CIA का है। यानि की देवोम ने व्योम के नाम से, अमेरिकन सीक्रेट सर्विस ज्वाइन की थी और इस डेटा का आधार पर उसे जो आखिरी मिशन दिया गया था, उसका मिशन का नाम था- “डिस्कवर ऑफ सुप्रीम"

यह सुनकर तो शलाका को जैसे चक्कर आ गया। अब वह समझ चुकी थी कि क्यों देवोम की फोटो उसके घर पर नहीं मिल रही थी? जरुर CIA वालों ने देवोम के CIA ज्वाइन करने के बाद, उसकी तस्वीर को उसके घर से हटवा दिया होगा।

पर अगर देवोम ही व्योम है, तो सूर्यांश कौन है? जो भी हो शलाका इस गुत्थी को जितना सुलझाने की कोशिश कर रही थी, यह गुत्थी उतना ही और उलझती जा रही थी।

ऐसा लग रहा था कि जैसे ईश्वर ने भविष्य को स्वयं उलझा रखा हो?


°°°°°
प्रश्नावली:

दोस्तों जैसा कि आप देख रहे हैं कि प्रश्नों की संख्या अब इतनी ज्यादा हो चुकी है कि अब वह मस्तिष्क में एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। तो क्यों न इन सारे प्रश्नों को एक जगह पर एकत्रित कर लें

1) पंचशूल का निर्माण किसने और क्यों किया था?
2) मैग्ना का ड्रैगन, लैडन नदी की तली में क्यों सो रहा था? मेलाइट उसे क्यों जगाना चाहती थी?
3) सागरिका, वेगिका, अग्निका आदि चमत्कारी पुस्तकों का क्या रहस्य था?
4) क्या था फेरोना ग्रह के जनक, पेन्टाक्स का रहस्य?
5) एण्ड्रोनिका में जाने के बाद धरा और मयूर का क्या हुआ?
6) महावृक्ष के स्वप्जतरु में कितने रहस्य छिपे थे?
7) सुनहरी ढाल और तलवार से आकृति देवराज इंद्र से कैसे वरदान मांगना चाहती थी?
8) विक्रम बर्फ के गोले में कैसे पहुंच गया? उसकी स्मृति कैसे चली गई थी? जबकि वह एक अमर योद्धा था।
9) क्या विक्रम आकृति की दी हुई नीली अंगूठी उतारकर वारुणी से सम्पर्क कर सका?
10) क्या फासा और कागोशी को सच में कलाट ने मारा था?
11) कौन था जैगन का गुरु कुवान? क्या मकोटा को वुल्फा उसी से मिला था?
12) तीसरे पिरामिड में कुवान की मूर्ति के नीचे खड़े निष्क्रिय जीव योद्धा कौन थे?
13) क्या मकोटा सुरंग के रास्ते तिलिस्मा में प्रवेश कर सका?
14) क्या मेलाइट, रोजर को कस्तूरी मृग का रहस्य बता पाई?
15) सुर्वया के सिंहलोक में 'चतुर्भुज सिंहराज', शुभार्जना और दिव्यदृष्टि जैसी शक्तियां कहां से आयीं थीं? सुर्वया ने अपने परिवार के बारे में क्यों नहीं बताया?
16) क्या था उस रक्त भैरवी की डिबिया के अंदर, जिसे नीलाभ ने हनुका को दिया था?
17) माया ने 15 लोकों का निर्माण किस प्रकार किया? वह 15 लोक कौन-कौन से स्थान पर थे?
18) क्या नीलाभ महानदेव के अन्य रुपों से आशीर्वाद ले पाया?
19) क्या था नीलाभ के रक्त से बनी चिड़िया नीलिमा का रहस्य?
20) क्या हुआ था गिरोट के साथ, जो वह ओरस को पृथ्वी पर भेजने से डर रहा था? वह किन समय के आयामों में उलझने की बात कर रहा था?
21) ज़ेनिक्स ने संरक्षिका के बारे में अभी तक ओरस को क्यों नहीं बताया था? क्या संरक्षिका में भी कुछ रहस्य छिपे थे?
22) क्या एलात्रा और एलनिको के मरने के बाद एंड्रोवर्स पावर और खतरनाक हो गये?
23) शलाका की अति आधुनिक कंप्यूटर आर्ची का निर्माण किसने किया था?
24) क्या शलाका का आर्केडिया यान, शलाका के पिता का था? कहां था इस समय शलाका का पिता?
25) क्या कैस्पर, मेरोन और सोफिया को हेडिस की कैद से छुड़ाने अंडरवर्ल्ड जा पाया?
26) क्या कैस्पर का सत्य जानने के बाद जीयूष ने किसी प्रकार से कैस्पर की मदद की?
27) क्या कैस्पर की बताई तैयारियों को वारुणि पूरा कर पाई?
28) क्या कैस्पर और वारुणि सभी ब्रह्मांड रक्षकों को संगठित कर पाये?
29) कैसी थी विद्युम्ना की बल और छल शक्ति? क्या व्योम और त्रिकाली उन शक्तियों को परास्त कर त्रिशाल और कलिका को छुड़ा पाये?
30) क्या ऐलेक्स और तौफीक सच में मर गये थे या फिर ये भी कोई कैश्वर का जाल था?
31) वुल्फा के मरने के बाद मकोटा ने क्या किया?
32) क्या था बिल्ली वाली देवी के हाथ में पहने कड़े का रहस्य, जिसे अलबर्ट ने उतारकर स्वयं पहन लिया था?
33) क्या ब्रूनो ही डेंगो था? तो फिर लैडन नदी के अंदर सोया ड्रैगन कौन था?
34) क्या अलबर्ट तिलिस्मा में प्रवेश कर सुयश से मिल पाया?
35) साफ दिख रहा था कि ज़ेनिक्स कैश्वर के साथ है, तो क्या वह ओरस से भी झूठ बोल रही थी? ज़ेनिक्स आखिर ऐसा क्यों कर रही थी?
36) क्या कैश्वर अपने नये शरीर में प्रवेश करने के बाद और भी खतरनाक हो गया?
37) क्या ऐमू को कभी अमरकथा का भान हो पाया?
38) इंद्राक्ष से क्रिस्टी ने क्या वरदान मांगा था?
39) क्या कलाट और युगाका ने वीनस को अपना लिया?
40) भविष्य में जाने के बाद ओरस को गिरोट कैसे दिखाई दिया? क्या ज़ेनिक्स ने जान-बूझकर ओरस को भविष्य में भेजा था?
41) भविष्य की जेनिथ, ओरस, सुयश और तौफीक को क्यों नहीं जानती थी?
42) कौन था नन्हा सूर्यांश? क्या सूर्यांश ही चुपचाप शलाका के कमरे में गया था?
43) क्या वेदांत रहस्यम् में अभी और भी रहस्य छिपे थे? जिन्हें अभी शलाका देख नहीं पाई थी।
44) ज़ेनिक्स ने कैश्वर के माध्यम से फेरोना ग्रह पर संदेश क्यों भिजवाया था?
45) कैस्पर ने छिपकर शैफाली को कैसा प्लान बताया था?
46) कैसा था तिलिस्मा का आगे का मायाजाल? क्या वह आगे और कठिन होता गया?
47) क्या तिलिस्मा में घुसे सभी लोग तिलिस्मा को पार कर काला मोती प्राप्त कर सके? ऐसे ही ना जाने कितने सवाल होंगे जो आपके दिमाग में घूम रहे होंगें?

तो दोस्तों इन सारे अनसुलझे सवालों के जवाब इस कहानी के अगले भाग का जिसका नाम है- “ब्रह्मकण शक्ति' में मिलेंगे, जिसमें हम आपको ले चलेंगे, ब्रह्मलोक के एक ऐसे अद्भुत संसार में, जहां पर पृथ्वी की उत्पत्ति के रहस्य छिपे है।

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"दूसरों को बना ने में तमाम उम्र गुजारी है,
पंख नये हैं, पर अब मेरे उड़ने की बारी है"

दोस्तों इस कहानी को लिखने में बहुत समय और मेहनत लगी है। इसे पढ़कर कृपया “रिव्यू के माध्यम से अपने विचार जरुर व्यक्त की जियेगा।

🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼
 
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