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में जब रूम में आया तो देखा पदमिनी बिस्तर पर लेती हुई हे और वो गुस्से और नफरत के साथ मुझे देखते हुए बोली आप कितने कमीने और बहनचोद हो पापा आप तो इतनी देर में अपनी कजिन को भी चोद आये .मुझे काटो तो खून नहीं पद्मिनी को कैसे पता चला की में रीना की चूत बजाकर आ रहा हु ? पदमिनी ने कहा मुझे पता नहीं था की मेरे द्वारा आपसे इतनी चुदाई के बाद भी आपका मन अभी भी किसी और को चोदने का करता हे।
मेने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन वो बहुत गुस्से में थी उसने गुस्से में मेरी रात की बची व्हिस्की की बॉटल जिसमे ४ लार्ज पेग बचे हुए थे गटागट पी गयी और बिस्तर पर लुढ़क गयी
मुझे बेहद अफ़सोस हुआ की मेने बेकार रीना के साथ चुदाई की और पदमिनी का दिल दुखाया मेने बिस्तर पर लेटी पदमिनी की और देखा उसकी स्कर्ट तो वैसे ही छोटी थी और अब थोड़ी सी ऊपर भी उठ गई तो उसकी पैंटी का वो तीकोना हिस्सा भी दिखने लगा जहाँ उसकी दोनों मांसल जांघे एक दूसरे से मिल रहीं थीं. मेने अपना मुँह पदमिनी कि पैंटी वाली जगह पे झुका कर एक गहरी साँस ली तो एक तेज मादक गंध मेरी नाक में घुस गयी .
मेने पदमिनी के टांगों कि तरफ झुका और इस बार अच्छे से मन भर कर उसकी पैंटी में ढ़की हुई चूत का गंध सूंघा. पदमिनी ने अभी अभी पेशाब किया था, सो उसकी चूत कि त्वचा, पेशाब और Cotton के पैंटी कि मिली जुली महक इतनी मदहोश कर देने वाली थी
" आओ अब बैठो... " पदमिनी ने मुझसे कहा
में नंगी लेटी पदमिनी के बगल में उसी हाल में नंगा बैठ गया.
" छुओ मुझे... " पदमिनी का ये रूप मेरी समझ बाहर था
" It's Okay यार... मैं बोल रही हूं ना ! ". पदमिनी पलट कर पीठ के बल सीधा होकर लेट गई और उसकी चूत अब मेरे सामने नंगी खुली पड़ी थी. पदमिनी का मनोभाव समझने के लिये मेने एक बार उसकी ओर देखा... वो एकदम शांत थी... फिर मेने अपनी नज़र उसकी चूत पे गड़ा दी.
मांसल जांघों के बीच दबी पड़ी पदमिनी कि चूत एकदम पावरोटी कि तरह फुली हुई थी... चूत लाजवाब लग रही थी.
इस बार मेने पदमिनी के बूब्स को दोनों हाथों से हल्का सा दबाया तो देखा कि पदमिनी चुप है...मेने उसकी गोल मटोल चुचियों को थोड़ी देर दबाने के बाद उसके निप्पल चूसने शुरु किये. जब में बारी बारी से दोनों मम्मे चूस रहा था तब पदमिनी ने सिर उठाकर देखना चाहा पर देख नहीं पायी. वो चुपचाप मुझे अपना दूध पिलाती रही.
दो तीन मिनट तक मन भर कर चुचियाँ पीने चूसने के बाद मेने पदमिनी के बदन के नीचले हिस्से कि तरफ रुख किया. मेरी मंशा भाप कर पदमिनी ने अपने पैर फैला दिये और धीरे से बोली " चाट... ".
देखा कि पदमिनी कि चूत के दोनों होंठ आपस में सटे हुए थें. अपने दाहिने हाथ कि उंगलियों से उसकी चूत के Lips को खोला तो उसे पता चला कि चूत के होंठ किसी चिपचिपे से लस्सेदार रस कि वजह से चिपके पड़े थें. उसका पानी गिरना शुरु हो गया था !
में उसकी चूत चाटने लगा. !!!
इस दौरान पदमिनी धीमी धीमी आवाज़ में गरम सिसकारीयां भरती रही. मेरा लण्ड अब तक तन कर पूरा खड़ा हो चुका था. चूत चाटना छोड़ जब में अपने घुटनो के बल उठा तो सिर उठा कर पदमिनी ने मेरा लण्ड देखा. लण्ड का चमड़ा अब पीछे खिसक गया था और लाल मोटा सुपाड़ा पूरा बाहर निकल आया था ! वो समझ गई की में अब अब उसे चोदेगा. उसने अपनी दोनों टांगे खोल कर फैला ली... में उसकी टांगों के बीच अपने घुटनो पर बैठ गया और अपने हाथ में अपना लौड़ा पकड़ कर उसकी चूत की छेद में ठेलने लगा. पदमिनी का पानी भी गिर रहा था... सो एक बार में ही लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में धस गया.
मेने बिना किसी प्यार मुहब्बत और Formality के उसे पेलना शुरु कर दिया. चार पाँच धक्के मारने के बाद लगा कि पदमिनी कि गांड़ बहुत नीचे होने कि वजह से में उसे ठीक से पेल नहीं पा रहा. उसकी गांड़ के नीचे एक तकिया चाहिये था मेने ऊँचा करके पदमिनी कि गांड़ के नीचे रखा और फिर उसपे उसके चुतड़ों को टिकाया और फिर से उसकी जांघों के बीच बैठ कर उसे पेलने लगा.
" Fuck Me... Fuck Me... Ohhh Yeah... चोद मुझे कमीने... आआह्ह्ह्हह मम्मी !!! ". मस्ती में बावली होने लगी पदमिनी जब मेरे लण्ड ने उसकी बूर को रोंदना शुरु किया. उसने अपनी टांगे मेरी कमर में लपेट दी और चुदने लगी.
नशे में पदमिनी चुदाई का मज़ा खुद भी ले रही थी और मुझे भी प्रोत्साहित कर रही थी.
में उसकी गदराई कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था... हर धक्के में उसके लण्ड का चमड़ा उसके सुपाड़े के आगे पीछे हो रहा था जिसमें उसे Extra आनंद आ रहा था. पदमिनी कि चूत का पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था... उसकी चूत के अंदर का हिस्सा इतना गिला हो चुका था कि चोदने के दौरान कई बार मेरा लण्ड फिसल कर बाहर छिटक पड़ता... में बिना रुके उसी तरह धक्के मारता रहता जब तक कि मेरा लण्ड पदमिनी कि जांघों पे इधर उधर टकरा कर वापस बूर कि छेद खोज कर भीतर नहीं घुस जाता.
छत पर घूमते फैन कि आवाज, बेड कि चरमराहट, चूत में लण्ड के अंदर बाहर होने कि फचाफच गचागच कि ध्वनी, पदमिनी के चूतड़ों पे मेरे अंडकोषों कि थपेड़, पदमिनी कि कराह, मेरी गहरी सांसे और पूरे कमरे में लण्ड चूत और कामरस कि मिली जुली फैली अजीब सी गंध... एक ऐसा कामुक माहौल बना रही थी कि दोनों एक दूसरे में समाने के लिये बेक़रार हो रहें थें...
मेरा वीर्य लण्ड के मुँह तक आ गया था... में अब स्खलित होने के लिये रेडी था ! मेने अंतिम के तीन चार धक्के कस के लगाए और लास्ट धक्के पे अपने लण्ड को पदमिनी कि बूर कि तह तक घुसा कर छोड़ दिया . 20 सेकंड रुके रहने के बाद उसके पूरे शरीर में एक कंपन सी हुई और मेरा लण्ड पदमिनी के बच्चेदानी को गाढ़े माल कि पिचकारी से भरने लगा !!!
पदमिनी कि चूत को अपने रस से भरने के बाद में अपना लण्ड बाहर निकाल के उसकी बगल में ही निढ़ाल होकर लेट गया. पदमिनी ने भी उसी वक़्त अपना पानी छोड़ दिया और उसकी चूत से उसका पानी और मेरा वीर्य एक साथ घुल मिल कर उसकी गांड़ के नीचे रखे कपड़ों पर गिरने लगा. पदमिनी के लिये शायद अभी ये तो शुरुआत थी.
उसे और मस्ती करनी थी. वो तुरंत पलट कर अब मेरे ऊपर बैठ गई और मुझे एक ज़ोर का थप्पड़ मारा...
" चोद हरामी... इतना बड़ा मादरचोद जैसा लण्ड है और You Cum So Fast... Bastard !!! ". पदमिनी हिंदी इंग्लिश मिला जुला कर बड़बड़ाई और मेरे आधे खड़े लण्ड ( जिसमे से अभी तक वीर्य रिस रिस कर बाहर आ रहा था ) को अपने हाथ में लेकर अपनी गीली चूत में फिट किया और फिर उसके सीने पे अपने दोनों हाथ से टिक कर उसके ऊपर उछलने लगी.
पदमिनी जब उसके झड़े लण्ड पे अपनी बड़ी गांड़ घपाघप मारने लगी. उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और साँस रोक कर पदमिनी कि चुदाई को बर्दाश्त करता रहा. उसका लण्ड ढीला पड़ गया था और उसे पता था कि अगर उसने जल्दी ही अपना लौड़ा खड़ा नहीं किया तो पदमिनी उसकी जान ले लेगी. क्यूंकि वो नशे में अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी !
वैसे मेरे को ज़्यादा परेशानी नहीं हुई अपना लण्ड खड़ा करने में..मेरे लण्ड में ज़ल्दी ही उत्तेजना वापस आ गई और पहले जैसा तो नहीं पर फिर भी मेरा लण्ड चोदने लायक सख्त हो गया था....
करीब दस मिनट तक अपनी चूत में लण्ड घुसेड़े पदमिनी उसके ऊपर बैठे उसे चोदती रही. उसका बूर एक बार फिर से झड़ने के करीब था. उसने मेरी छाती को अपने नाखुनों से खरोंच डाला और उसके ऊपर से उठकर इसके बगल में लेट कर बिस्तर पे अपना पानी गिराने लगी.
" आआह्ह्ह्हह्ह.... हाय... मम्मी... आअह्ह्ह्हह God !!! ".
पदमिनी ने ऐसे समय में मेरे को छोड़ा था जब मेरा लण्ड भी झड़ने ही वाला था, सो में तुरंत पलट कर पदमिनी के ऊपर चढ़ गया और इससे पहले कि अपना लण्ड वापस उसकी चूत में डाल पाता, उसके लण्ड ने पदमिनी कि पेट पर ही ढ़ेर सारी उल्टी कर दी. पदमिनी हंस पड़ी और मुझे अपनी बाहों में भर कर अपने ऊपर लिटा कर शांत करने लगी !!!..................
रात भर पदमिनी कितनी बार चुदी उसे याद नहीं और जहाँ तक मेरा सवाल था तो में उसे चोदे नहीं थक रहा था. मेने पूरी रात कई बार पदमिनी को पेला, कभी उसका माल गिरता तो कभी नहीं, पर पदमिनी कि चूत का पानी निकलना कभी बंद ही नहीं हुआ. .........
मेने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन वो बहुत गुस्से में थी उसने गुस्से में मेरी रात की बची व्हिस्की की बॉटल जिसमे ४ लार्ज पेग बचे हुए थे गटागट पी गयी और बिस्तर पर लुढ़क गयी
मुझे बेहद अफ़सोस हुआ की मेने बेकार रीना के साथ चुदाई की और पदमिनी का दिल दुखाया मेने बिस्तर पर लेटी पदमिनी की और देखा उसकी स्कर्ट तो वैसे ही छोटी थी और अब थोड़ी सी ऊपर भी उठ गई तो उसकी पैंटी का वो तीकोना हिस्सा भी दिखने लगा जहाँ उसकी दोनों मांसल जांघे एक दूसरे से मिल रहीं थीं. मेने अपना मुँह पदमिनी कि पैंटी वाली जगह पे झुका कर एक गहरी साँस ली तो एक तेज मादक गंध मेरी नाक में घुस गयी .
मेने पदमिनी के टांगों कि तरफ झुका और इस बार अच्छे से मन भर कर उसकी पैंटी में ढ़की हुई चूत का गंध सूंघा. पदमिनी ने अभी अभी पेशाब किया था, सो उसकी चूत कि त्वचा, पेशाब और Cotton के पैंटी कि मिली जुली महक इतनी मदहोश कर देने वाली थी
" आओ अब बैठो... " पदमिनी ने मुझसे कहा
में नंगी लेटी पदमिनी के बगल में उसी हाल में नंगा बैठ गया.
" छुओ मुझे... " पदमिनी का ये रूप मेरी समझ बाहर था
" It's Okay यार... मैं बोल रही हूं ना ! ". पदमिनी पलट कर पीठ के बल सीधा होकर लेट गई और उसकी चूत अब मेरे सामने नंगी खुली पड़ी थी. पदमिनी का मनोभाव समझने के लिये मेने एक बार उसकी ओर देखा... वो एकदम शांत थी... फिर मेने अपनी नज़र उसकी चूत पे गड़ा दी.
मांसल जांघों के बीच दबी पड़ी पदमिनी कि चूत एकदम पावरोटी कि तरह फुली हुई थी... चूत लाजवाब लग रही थी.
इस बार मेने पदमिनी के बूब्स को दोनों हाथों से हल्का सा दबाया तो देखा कि पदमिनी चुप है...मेने उसकी गोल मटोल चुचियों को थोड़ी देर दबाने के बाद उसके निप्पल चूसने शुरु किये. जब में बारी बारी से दोनों मम्मे चूस रहा था तब पदमिनी ने सिर उठाकर देखना चाहा पर देख नहीं पायी. वो चुपचाप मुझे अपना दूध पिलाती रही.
दो तीन मिनट तक मन भर कर चुचियाँ पीने चूसने के बाद मेने पदमिनी के बदन के नीचले हिस्से कि तरफ रुख किया. मेरी मंशा भाप कर पदमिनी ने अपने पैर फैला दिये और धीरे से बोली " चाट... ".
देखा कि पदमिनी कि चूत के दोनों होंठ आपस में सटे हुए थें. अपने दाहिने हाथ कि उंगलियों से उसकी चूत के Lips को खोला तो उसे पता चला कि चूत के होंठ किसी चिपचिपे से लस्सेदार रस कि वजह से चिपके पड़े थें. उसका पानी गिरना शुरु हो गया था !
में उसकी चूत चाटने लगा. !!!
इस दौरान पदमिनी धीमी धीमी आवाज़ में गरम सिसकारीयां भरती रही. मेरा लण्ड अब तक तन कर पूरा खड़ा हो चुका था. चूत चाटना छोड़ जब में अपने घुटनो के बल उठा तो सिर उठा कर पदमिनी ने मेरा लण्ड देखा. लण्ड का चमड़ा अब पीछे खिसक गया था और लाल मोटा सुपाड़ा पूरा बाहर निकल आया था ! वो समझ गई की में अब अब उसे चोदेगा. उसने अपनी दोनों टांगे खोल कर फैला ली... में उसकी टांगों के बीच अपने घुटनो पर बैठ गया और अपने हाथ में अपना लौड़ा पकड़ कर उसकी चूत की छेद में ठेलने लगा. पदमिनी का पानी भी गिर रहा था... सो एक बार में ही लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में धस गया.
मेने बिना किसी प्यार मुहब्बत और Formality के उसे पेलना शुरु कर दिया. चार पाँच धक्के मारने के बाद लगा कि पदमिनी कि गांड़ बहुत नीचे होने कि वजह से में उसे ठीक से पेल नहीं पा रहा. उसकी गांड़ के नीचे एक तकिया चाहिये था मेने ऊँचा करके पदमिनी कि गांड़ के नीचे रखा और फिर उसपे उसके चुतड़ों को टिकाया और फिर से उसकी जांघों के बीच बैठ कर उसे पेलने लगा.
" Fuck Me... Fuck Me... Ohhh Yeah... चोद मुझे कमीने... आआह्ह्ह्हह मम्मी !!! ". मस्ती में बावली होने लगी पदमिनी जब मेरे लण्ड ने उसकी बूर को रोंदना शुरु किया. उसने अपनी टांगे मेरी कमर में लपेट दी और चुदने लगी.
नशे में पदमिनी चुदाई का मज़ा खुद भी ले रही थी और मुझे भी प्रोत्साहित कर रही थी.
में उसकी गदराई कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था... हर धक्के में उसके लण्ड का चमड़ा उसके सुपाड़े के आगे पीछे हो रहा था जिसमें उसे Extra आनंद आ रहा था. पदमिनी कि चूत का पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था... उसकी चूत के अंदर का हिस्सा इतना गिला हो चुका था कि चोदने के दौरान कई बार मेरा लण्ड फिसल कर बाहर छिटक पड़ता... में बिना रुके उसी तरह धक्के मारता रहता जब तक कि मेरा लण्ड पदमिनी कि जांघों पे इधर उधर टकरा कर वापस बूर कि छेद खोज कर भीतर नहीं घुस जाता.
छत पर घूमते फैन कि आवाज, बेड कि चरमराहट, चूत में लण्ड के अंदर बाहर होने कि फचाफच गचागच कि ध्वनी, पदमिनी के चूतड़ों पे मेरे अंडकोषों कि थपेड़, पदमिनी कि कराह, मेरी गहरी सांसे और पूरे कमरे में लण्ड चूत और कामरस कि मिली जुली फैली अजीब सी गंध... एक ऐसा कामुक माहौल बना रही थी कि दोनों एक दूसरे में समाने के लिये बेक़रार हो रहें थें...
मेरा वीर्य लण्ड के मुँह तक आ गया था... में अब स्खलित होने के लिये रेडी था ! मेने अंतिम के तीन चार धक्के कस के लगाए और लास्ट धक्के पे अपने लण्ड को पदमिनी कि बूर कि तह तक घुसा कर छोड़ दिया . 20 सेकंड रुके रहने के बाद उसके पूरे शरीर में एक कंपन सी हुई और मेरा लण्ड पदमिनी के बच्चेदानी को गाढ़े माल कि पिचकारी से भरने लगा !!!
पदमिनी कि चूत को अपने रस से भरने के बाद में अपना लण्ड बाहर निकाल के उसकी बगल में ही निढ़ाल होकर लेट गया. पदमिनी ने भी उसी वक़्त अपना पानी छोड़ दिया और उसकी चूत से उसका पानी और मेरा वीर्य एक साथ घुल मिल कर उसकी गांड़ के नीचे रखे कपड़ों पर गिरने लगा. पदमिनी के लिये शायद अभी ये तो शुरुआत थी.
उसे और मस्ती करनी थी. वो तुरंत पलट कर अब मेरे ऊपर बैठ गई और मुझे एक ज़ोर का थप्पड़ मारा...
" चोद हरामी... इतना बड़ा मादरचोद जैसा लण्ड है और You Cum So Fast... Bastard !!! ". पदमिनी हिंदी इंग्लिश मिला जुला कर बड़बड़ाई और मेरे आधे खड़े लण्ड ( जिसमे से अभी तक वीर्य रिस रिस कर बाहर आ रहा था ) को अपने हाथ में लेकर अपनी गीली चूत में फिट किया और फिर उसके सीने पे अपने दोनों हाथ से टिक कर उसके ऊपर उछलने लगी.
पदमिनी जब उसके झड़े लण्ड पे अपनी बड़ी गांड़ घपाघप मारने लगी. उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और साँस रोक कर पदमिनी कि चुदाई को बर्दाश्त करता रहा. उसका लण्ड ढीला पड़ गया था और उसे पता था कि अगर उसने जल्दी ही अपना लौड़ा खड़ा नहीं किया तो पदमिनी उसकी जान ले लेगी. क्यूंकि वो नशे में अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी !
वैसे मेरे को ज़्यादा परेशानी नहीं हुई अपना लण्ड खड़ा करने में..मेरे लण्ड में ज़ल्दी ही उत्तेजना वापस आ गई और पहले जैसा तो नहीं पर फिर भी मेरा लण्ड चोदने लायक सख्त हो गया था....
करीब दस मिनट तक अपनी चूत में लण्ड घुसेड़े पदमिनी उसके ऊपर बैठे उसे चोदती रही. उसका बूर एक बार फिर से झड़ने के करीब था. उसने मेरी छाती को अपने नाखुनों से खरोंच डाला और उसके ऊपर से उठकर इसके बगल में लेट कर बिस्तर पे अपना पानी गिराने लगी.
" आआह्ह्ह्हह्ह.... हाय... मम्मी... आअह्ह्ह्हह God !!! ".
पदमिनी ने ऐसे समय में मेरे को छोड़ा था जब मेरा लण्ड भी झड़ने ही वाला था, सो में तुरंत पलट कर पदमिनी के ऊपर चढ़ गया और इससे पहले कि अपना लण्ड वापस उसकी चूत में डाल पाता, उसके लण्ड ने पदमिनी कि पेट पर ही ढ़ेर सारी उल्टी कर दी. पदमिनी हंस पड़ी और मुझे अपनी बाहों में भर कर अपने ऊपर लिटा कर शांत करने लगी !!!..................
रात भर पदमिनी कितनी बार चुदी उसे याद नहीं और जहाँ तक मेरा सवाल था तो में उसे चोदे नहीं थक रहा था. मेने पूरी रात कई बार पदमिनी को पेला, कभी उसका माल गिरता तो कभी नहीं, पर पदमिनी कि चूत का पानी निकलना कभी बंद ही नहीं हुआ. .........
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