Update 4
ट्रेन में सेक्स के बाद मैं भी सीधी खड़ी हो गई और धीरे से अपनी पैंटी और लेगिंग को ऊपर कर लिया।
हमने टाइम देखा तो 8.00 बजे थे।
ट्रेन अभी भी चल रही थी.
मगर कोहरे की वजह से ट्रेन लेट हो चुकी थी।
हमने वहां बैठे बाकी लोगों पर नज़र दौड़ाई तो देखा सब सो रहे थे।
फिर करीब 15 मिनट तक मैं और सोनू एकदम चुप रहे और आपस में कोई बात नहीं।
थोड़ी देर बाद एक स्टेशन आया तब जाकर सोनू ने मुझसे कहा- मैं देख कर आता हूं कि कौन सा स्टेशन है।
मैंने कहा- ठीक है.
सोनू ने बॉक्स को पार कर सामने वाले दरवाजे को खोल कर देखा।
फिर दरवाजा बंद कर वापस आया और बोला- दीदी, हमने अगले स्टेशन पर ही उतरना है।
ट्रेन भी चल दी थी.
करीब 15 मिनट के बाद हमारा स्टेशन आ गया और हम वहां उतर गए।
उस स्टेशन पर हम दोनों के अलावा और कोई नहीं उतरा था।
रात के 8.30 बज गए।
प्लेटफार्म पर एकदम घुप्प अँधेरा था।
कोहरे की वजह से 5-10 फुट की दूरी से ज्यादा कुछ दिख नहीं जा रहा था।
स्टेशन के नाम पर थोड़ी दूर एक कमरा दिखाई दे रहा था जो शायद ऑफिस और टिकट घर था।
वहां हल्की रोशनी हो रही थी, बाकी खुला आसमान था।
पूरे प्लेटफार्म पर लाइन से 5-6 पेड़ लगे हुए थे जिनके चारों ओर बैठने के लिए पक्का चबूतरा बना हुआ था।
इसके अलावा 3-3 लोहे की बेंच भी थी।
हम दोनों के अलावा पूरे स्टेशन पर कोई नहीं था, बस एक कुत्ता दिखाई दिया, फिर वो भी अँधेरे में कहीं गुम हो गया।
मैंने सोनू से कहा- मामा ने कहा था कि स्टेशन आने के आधे घंटे पहले बता देना, हमने तो बताया ही नहीं।
सोनू ने कहा- हमें याद ही नहीं रह रहा।
तो मैंने कमेंट करते हुए शरारत से कहा- ध्यान कहीं और था तो भूलोगे ही!
तब सोनू भी हंसते हुए बोला- तुम्हारा ध्यान कहीं और नहीं था तो तुमने फोन कर दिया होगा।
मैंने हंसते हुए कहा- अच्छा झगड़ा छोड़ो और अब फोन कर दो. और गुस्सा करें तो कह देना कि अंधेरे में पता नहीं चला और नेटवर्क भी नहीं मिल रहा था रास्ते में!
सोनू ने मामा को फोन किया.
उधर से मामा गुस्से में आ गये।
फिर उन्होने कहा- ठीक है, तब तक वहां कहीं बैठो, हम आ रहे हैं।
स्टेशन पर सोनू ने बैग उठाया और कहा- आओ ऑफिस में ही चल कर बैठते हैं, वहां तो कोई होगा ही।
फिर हम दोनों धीरे-धीरे ऑफिस की तरफ चल दिये।
वहां पहुंचे तो देखा कि ऑफिस का दरवाजा बंद था मगर कुंडी खुली हुई थी और अंदर रोशनी जल रही थी.
खुली खिड़की से हल्की रोशनी बाहर आ रही थी।
लाइट के नाम ऑफिस के बाहर एक बल्ब लटक रहा था।
कोहरे की वजह बल्ब की रोशनी दूर तक नहीं जा पा रही थी.
वहीं पास में एक बेंच बनी थी।
हमने बेंच पर अपना बैग रखा.
मगर बाहर ठंड लग रही थी तो मैंने सोनू से कहा- चल कर देखते हैं, शायद ऑफिस के अंदर कोई हो।
हम दोनों साथ आए और खिड़की से अंदर झांका तो देखा कि अंदर एक बड़ी सी मेज के पीछे एक आदमी बैठा है जिसकी उम्र करीब 55-58 साल लग रही थी।
वह कोई किताब पढ़ रहा था।
अचानक हम दोनों की निगाह मेज के नीचे चली गई तो हम दोनों ही मुस्कुरा दिए।
दरअसल उसने अपनी पैंट की ज़िप खोली हुई थी और अपना लंड हाथ में लेकर किताब पढ़ रहा था।
हम समझ गए कि वो कोई अश्लील किताब थी।
यह देख कर मैं हल्का सा शर्मा गई।
मगर मेरी निगाह उसमेज के नीचे दिख रहे नज़ारे से नहीं हट रही थी।
मैंने अभी तक सिर्फ बुक में और नेट पर ही लंड देखा था मगर आज पहली बार असली लंड आंख से देख रही थी।
हालांकी ट्रेन में अभी अपने भाई के लंड का चूत के ऊपर से ही का मजा लिया था।
मगर उसके लंड को ना देखा था और ना ही अपने हाथ से टच किया था।
सोनू ने ये देख लिया कि मेरी निगाह लंड को बड़े गौर से घूर रही है।
तब उसने मेरी गांड पर हल्के हाथ से थपकी दी और धीरे से बोला- क्या देख रही हो दीदी?
मैं एकदम से शर्मा गई और खिड़की से हटकर बेंच के पास आ गई।
सोनू भी मेरे पास आ गया और हम एक-दूसरे को देख कर हल्का सा मुस्कुरा दिये।
अब हमारे बीच की झिझक करीब-करीब खत्म हो चुकी थी इसलिए अब हम आराम से एक दूसरे से बात कर रहे हैं।
सोनू ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा- दीदी यहां बैठेंगे तो हमारी तो कुल्फी जम जाएगी।
मैंने भी हल्का सा मुस्कुरा कर कहा- तो अंदर कैसे जायें, देख नहीं रहे थे तो वह क्या कर रहा था।
तो सोनू ने आंख मारते हुए कहा- तो क्या हुआ, हम भी चल कर देखेंगे. वैसे भी तो तुम बड़े गौर से देख रही थी।
मैं हल्का सा शर्मा गई और फिर मुंह चिढ़ाते हुए कहा- मुझे नहीं जाना है, जाओ तुम्हीं देखो।
सोनू ने कहा- अरे नाराज़ मत हो दीदी. मामा को आने में अभी आधा घण्टा लगेगा, इतनी देर में तो हम जम जाएंगे। मेरा कहना मानो, अंदर चलो।
तब मैंने कहा- ठीक है. पहले तुम आगे चल कर दरवाजा खटखटा लेना, तब अंदर घुसना।
सोनू ने कहा- ठीक है!
और हम बैग उठा कर हमारी तरफ चल दिये।
सोनू ने दरवाजा खटखटाया और फिर हल्का सा धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया।
हमने देखा कि वो आदमी हड़बड़ा गया और तुरंत पैंट ठीक कर खड़ा हो गया।
तभी सोनू और मैं अंदर घुसे और ये नाटक किया कि हमने कुछ देखा ही नहीं है।
उस आदमी की ज़िप अभी भी खुली थी।
सोनू ने कहा- अंकल, हम अभी ट्रेन से आए हैं और हमें लेने घर से लोग आ रहे हैं। बाहर ठंड थी तो सोचा कि यहां बैठ जाएं।
उस आदमी ने पहले तो गुस्से से हम दोनों को देखा फिर कुछ कहने लगा ही था कि उससे पहले मैंने कहा- प्लीज अंकल!
तो वह थोड़ा नर्म हुआ, उसने कहा- ठीक है, बैठ जाओ।
हम टेबल के सामने ही रखी कुर्सी पर बैठ गए और बैग को नीचे रख दिया।
थोड़ी देर हम सभी चुप रहे.
करीब 5 मिनट के बाद उसने पूछा- कहाँ जाना है तुम दोनों को?
सोनू ने गांव का नाम बताया।
उसने कहा कि वहां से आने में तो आधे घंटे से कम नहीं लगेगा और या उससे भी ज्यादा लग जाएगा।
तब मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तब तो हमें बहुत देर हो जाएगी।
तब उसने कहा- कोई बात नहीं, तब तक तुम दोनों यहीं बैठो।
मैंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा- थैंक यू अंकल।
उसने पूछा- बेटा क्या नाम है तुम्हारा?
मैंने कहा- गरिमा अंकल।
मैंने देखा कि वह मुझसे बात करने में कुछ दिलचस्पी ले रहा था।
फिर मैंने जानबूझ कर बात को आगे बढ़ाया, कहा- यह मेरा छोटा भाई है सोनू!
तो उसने कहा- अच्छा तो तुम दोनों भाई-बहन हो।
इस पर सोनू ने हंसते हुए कहा- तो क्या अंकल आप हम दोनों को गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड समझ रहे हैं?
तो वह हंसने लगा और कहा- आजकल का क्या भरोसा है, लोग मौका पड़ने पर जीएफ को भी बहन बता देते हैं।
इस पर हम तीनों ही हंसने लगे.
सोनू ने पूछा- अंकल, आप क्या करते हैं यहां?
तो उसने कहा- मैं बाबू हूं.
मैंने कहा- आप रात में ड्यूटी करते हो क्या?
तो उसने कहा- हां कभी-कभी रात में ड्यूटी करता हूं।
सोनू ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा- आप अकेले बोर नहीं होते हो?
तब उसने कहा- नहीं … क्या करूं, नौकरी लेनी पड़ती है।
अचानक सोनू ने उसके सामने से वो किताब उठाते हुए कहा- ये कौन सी किताब है, देखूं तो!
इतने में अंकल हड़बड़ा गए.
मगर जब तक वो कुछ करते सोनू ने किताब उठा ली थी।
जैसे ही सोनू ने किताब खोली तो देखा कि अंदर नंगे लड़के और लड़कियों की चुदाई करते हुए फोटो थी।
सोनू ने किताब देखते हुए कहा- वाह अंकल, आप तो बड़ी अच्छी किताब पढ़ते हो।
मैंने देखा कि अंकल बुरी तरह शर्मा गए थे।
ऐसा लगा जैसे उनकी चोरी पकड़ ली गई हो।
सोनू जानबूझ कर बदमाशी कर रहा था।
इधर मैंने भी एक बार तो अंकल का लंड देखा.
अब अंकल किताब देख कर दोबारा गर्म होने लगे थे।
मैंने सोनू को हल्का सा डांटते हुए कहा- सोनू, अंकल की किताब वापस करो।
इस पर सोनू शरारत से आंख मारते हुए बोला- अंकल तो गुस्सा नहीं कर रहे, फिर तुम्हें क्यों गुस्सा आ रहा है दीदी?
फिर उसने पलट कर अंकल से कहा- अंकल, मैं थोड़ी देर देख लूं।
उन्होंने हंसते हुए कहा- अरे देख लो बेटा!
इस पर हम तीनों हंस दिये।
तभी सोनू ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा- अरे दीदी, तुम भी देख लो, मैं घर पर नहीं बताऊंगा।
यह कह कर किताब खोल कर उसने मुझे दे दी।
मैं हल्का सा शर्मा गई और सोनू को थप्पड़ मारते हुए कहा- सोनू, तुम बहुत बदतमीज होते जा रहे हो।
इस पर अंकल हंसते हुए मुझसे बोले- अरे देख लो बेटा, यही तो उमर है ये सब देखने की! और इतना अच्छा भाई कहां मिलेगा जो घर पर बताएगा भी नहीं।
अंकल अब एकदम खुलकर बात करने लगे थे।
मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए किताब सोनू को देते हुए कहा- लो तुम देखो, मुझे नहीं देखना है।
जिस पर वो दोनों हंस दिये।
मैंने सोनू के लोअर का अगला हिस्सा उभरे हुए देख लिया था.
मैं समझ गई थी कि उसका लण्ड भी खड़ा हो रहा है।
उधर अंकल ने भी एक बार अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लण्ड को पैंट के उपर से एडजस्ट कर लिया।
इधर मेरी चूत भी गीली हो रही थी.
सोनू ने मुझे अपने लंड की तरफ देखते हुए देख लिया था और निगाहें मिलने पर हम दोनों मुस्कुरा दिये।
मैं एक बार फ़िर लंड देखना चाह रही थी.
मैं जान रही थी कि आज मुझे दो-दो लंड देखने का मौका है।
मगर कैसे देखूँ, ये समझ में नहीं आ रहा था।
हम लोगों को बात करते हुए 15 मिनट हो गए थे.
मैंने सोनू से कहा था कि मामा को फोन कर पूछो कि वे कब तक आएंगे क्योंकि मैं कन्फर्म करना चाहती थी कि उनको आने में कितना वक्त लगेगा।
सोनू ने फोन कर मामा से बात की।
फिर फोन रख कर मुझसे बोला- उन्हें आने में अभी आधे घंटे से ज्यादा लग जाएगा क्योंकि जिस बाइक से वे आ रहे थे, वो पंचर हो गई है। अब दूसरी बाइक लेकर आएंगे।
मुझे तो मानो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई हो।
मैं खुद भी यही चाह रही थी कि उन्हें आने में देर हो जाए।
उधर यह सुन कर अंकल और सोनू दोनों के चेहरे भी खिल गए।
यानि अब हम तीनों ही मजे लेना चाह रहे थे।
मगर मैंने मायूसी का नाटक करते हुए कहा- ओह, तब तो बहुत देर हो जाएगी।
इस पर अंकल बोले- कोई बात नहीं, तब तक आराम से यहां बैठो और बातें करो।
अब मेरे दिमाग में तेजी से सोच रहा था कि क्या करें.
अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।
मैंने अंकल से पूछा- अंकल, यहां टॉयलेट किधर है, मुझे जाना है।
जबकि मुझे पता था कि वहां कोई टॉयलेट नहीं है।
अंकल बोले- बेटा, यहां तो कोई टॉयलेट नहीं है। तुम्हें बाहर खुले में ही करना पड़ेगा।
मैंने नखरा दिखाते हुए कहा- ना बाबा ना … खुले में कैसे करूंगी।
इस पर सोनू ने कहा- क्या हुआ दीदी, बाहर अँधेरे में कर लो।
मैंने कहा- नहीं अँधेरे में कैसे अकेली जाऊँगी, मुझे डर लग रहा है।
तब अंकल ने कहा- कोई बात नहीं बेटा, हम लोग हैं ना. चलो हम तुम्हारे साथ बाहर चलते हैं।
इस पर सोनू ने कहा- क्यों नहीं, चलो हम भी साथ चल रहे हैं।
फिर हम तीनों बाहर आ गये.
बाहर एकदम गुप अँधेरा और सन्नाटा पसरा था।
मैंने कहा- आप दोनों यहीं रहियेगा, मैं आ रही हूं.
और फिर मैं बेंच की तरफ बढ़ गई क्योंकि बाहर लगे बल्ब की रोशनी बेंच जा रही थी।
जानबूझ कर मैं रोशनी में पेशाब करना चाह रही थी ताकि मैं इन्हें अपनी गांड का दिखा सकूं।
बेंच के पास पहुंच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो दोनों खड़े मुझे देख रहे थे।
मैंने कहा- प्लीज़ जाइयेगा मत!
दोनों ने कहा- ठीक है।
फिर मैंने अपनी लेगिंग और पैंटी को नीचे तक खिसका दिया और कुर्ती को पीछे से पूरा कमर तक उठा दिया और जानबूझकर बैठने में थोड़ा टाइम लिया ताकि ये दोनों मेरी गोरी-गोरी गांड देख सकें।
और फिर धीरे से बैठ कर पेशाब करने लगी, साथ में मेरी नंगी गांड की नुमाइश करने लगी।
मेरे पेशाब करने में छरछराहट की आवाज भी रात के सन्नाटे में गूँज रही थी।
पेशाब करने के बाद मैं खड़ी हो गई और एक बार फिर लेगिंग ऊपर करने में थोड़ा समय लिया ताकि एक बार और सोनू और अंकल मेरी गांड देख सकें।
फिर से दोनों के पास वापस आयी।
मैंने देखा कि भाई का लंड नीचे पजामे के अंदर पूरा तरह खड़ा है।
उधर पैंट के ऊपर से साफ पता चल रहा था कि अंकल का लंड भी खड़ा है।
मैंने सोनू से कहा- तुम्हें भी पेशाब करना है तो कर लो।
इस पर सोनू ने मुस्कुराते हुए कहा- हां दीदी, तुम्हें पेशाब करती देख कर मुझे भी लग गई है।
कहकर वह भी उसी तरफ चला गया.
तब तक अंकल ने कहा- मुझे भी लगी है, मैं भी कर लेता हूं।
अंकल और सोनू पास ही खड़े होकर पेशाब करने लगे।
उन दोनों की पीठ मेरी तरफ थी।
पेशाब करने के बाद अंकल का लंड हिलाते हुए मेरी तरफ घूम गए और लंड को पैंट के अंदर करने की कोशिश करने लगे।
उनका लंड अभी पैंट के बाहर था ही और लगभग खड़ा था जिसे वे पैंट के अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे।
मैं समझ गई थी कि वे जानबूझकर अपना लंड मुझे दिखा रहे हैं।
तो मैं भी आंखें फाड़े उनका लंड देख रही थी।
तभी सोनू भी पेशाब करके मुड़ा और उसने भी अपना लंड अंदर नहीं किया था।
मैंने देखा कि उसका लंड भी खड़ा था।
मगर सोनू का लंड अंकल के लंड जितना बड़ा नहीं था।
सोनू देख रहा था कि मैं आंखें फाड़े दोनों के लंड को देख रही हूं।
अंकल अपना लंड पैंट के अंदर डालने ही वाले थे कि सोनू ने कहा- क्या अंकल, आपका लंड कितना बड़ा है।
सोनू के मुँह से लंड शब्द सुन कर मैं हल्का मुस्कुरा दी।
उधर अंकल को तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था, वे अपने लंड को पैंट के अंदर डालते-डालते रुक गए।
मैं समझ रही थी कि सोनू और अंकल दोनों अब खुलकर मजे लेना चाह रहे हैं।
रात के सन्नाटे में मेरी आंखों के सामने खड़े दो-दो लंड ने माहौल को सेक्सी बना दिया था।
मेरी चूत से भी पानी निकल कर मेरी पैंटी को हल्का-हल्का गीला कर रहा था इसलिए मैंने भी शर्म लाज छोड़ कर मजे लेने का मूड आ चुकी थी।
सोनू ने मुझसे कहा- दीदी, अंकल का लंड मेरे से बड़ा है ना?
मैंने हंसते हुए कहा- तू अभी छोटा भी है और अंकल तुझसे उम्र में बड़े हैं तो उसका लंड तो तेरे से बड़ा ही होगा।
अब मेरी आंखों के सामने दो-दो खड़े लंड थे जिनमें एक मेरे भाई का था और दूसरा एक अंजान आदमी का।
मेरे ऊपर चुदाई का ऐसा नशा सवार था कि मैं अब कुछ भी करने को तैयार थी।
उधर दोनों लंड भी मुझे चोदने को बेताब हो रहे थे.
अचानक सोनू ने अंकल का लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोला- बाप रे अंकल, आपका लंड कितना गर्म है।
अब तक अंकल का लंड पूरा तरह खड़ा हो चुका था।
उनका लंड करीब सात इंच का रहा होगा।
मैं भी लंड को अपने हाथ में लेना चाह रही थी.
तभी सोनू ने मुझसे कहा- दीदी, तुम छू कर देखो, कितना गर्म है।
मैंने मुस्कुरा कर कहा- चलो ठीक है, मान गयी. वैसे तुम्हारा लंड भी तो गर्म होगा।
इस पर अंकल और मैं दोनों हंसने लगे।
अंकल ने मुझसे कहा- चलो बेटा, तुम्हीं हम दोनों का लंड छूकर बताओ कि किसका ज्यादा गर्म है।
तब सोनू बोला- हाँ दीदी, तुम छूकर देखो।
यह कहकर वे दोनों उसी तरह अपने लण्ड को हाथ से पकड़े मेरे पास आकर खड़े हो गये।
मैं तो यही चाह ही रही थी.
मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया कर सबसे पहले सोनू के लंड को अपने हाथ से पकड़ा।
मेरे पकड़ते ही सोनू का लंड हल्के-हल्के झटके लेने लगा।
तभी अंकल ने कहा- बेटा, एक बार मेरा भी पकड़ो।
मैंने दूसरे हाथ से उनका लंड पकड़ लिया।
अब मेरे दोनों हाथों में लंड था.
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभी कुछ देर पहले कहाँ मैं बस एक बार लंड देखने के लिए तरस रही थी, वहीं अब दो-दो लंड को अपने हाथों में पकड़ रखा है।
अंकल ने कहा- बेटी, इसे थोड़ा हिलाओ, मजा आएगा।
मैं धीरे-धीरे हाथों से दोनों लंड को हिलाने लगी और हल्का-हल्का मुठ मारने लगी।
मेरे हाथ से पकड़ते ही दोनों के दोनों लंड एकदम खड़े और लोहे की रॉड जैसी टाइट हो गये।
दोनों लंड का गुलाबी सुपारा देख कर मेरे मुँह में पानी आ रहा था।
मेरा मन कर रहा था कि मैं झुक कर लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दूँ।
मगर मैं किसी तरह खुद को काबू में कर दोनों लंड धीरे-धीरे हिला रही थी।
तभी सोनू ने कहा- दीदी बारी-बारी से करो, तो मजा आएगा।
अंकल- हां बेटा, सोनू सही कह रहा है. बारी-बारी से हम दोनों का हिलाओ तो ज्यादा मजा आएगा।
मैं मुस्कुराती हुई- ठीक है। तो पहले किसका करूं?
सोनू- दीदी, पहले मेरा प्लीज.
जिस पर मैं मुस्कुराती हुई सोनू के लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसके लंड की स्किन को आगे पीछे कर मुठ मारने लगी।
तब तक अंकल खुद ही अपने हाथ से अपना लंड पकड़ कर धीरे धीरे हिला रहे थे।
अचानक उन्होंने अपना एक हाथ मेरे जैकेट के ऊपर से ही चूचियों पर रख दिया और हल्का-हल्का दबाने लगे।
उधर मैं अपने हाथ की स्पीड बढ़ाती जा रही थी।
सोनू ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर साथ दे रहा था।
इधर अंकल ने मेरी जैकेट की चेन खोल दी और अब मेरी कुर्ती के बटन भी खोलने लगे।
मैंने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिये कुर्ती के बटन खोलते ही मेरी दोनों बड़ी-बड़ी गोल चूचियां आजाद हो गई।
अब अंकल एक हाथ से अपना लंड हिला रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी चूचियों को दबा रहे थे।
उधर सोनू ने भी अपने एक हाथ से मेरी चूची को दबाना शुरू कर दिया।
तभी अंकल हल्के से झुके और अपने मुँह में मेरी चूची से लगा दिया और निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगे।
मैं तो जैसे आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।
तभी सोनू ने कहा- दीदी थोड़ा तेज-तेज करो।
ये कहते वक्त सोनू की आवाज हल्की-हल्की लड़खड़ा रही थी और उसने अपनी आंख बंद कर रखी थी।
मैं समझ गई कि सोनू झड़ने वाला है.
तो मैंने भी अपने हाथों की स्पीड दुगुनी कर दी और जोर-जोर से उसका लंड हिलाने लगी।
अचानक सोनू का शरीर झटके लेने लगा।
उसने काँपती आवाज़ से कहा- दीदी इइइ इइइ इइआआ आआआ … बस्स… आआ आआह … थोडाआआ … तेज … आआआ आआआ!
अचानक उसकी कमर तेजी से झटके लेने लगी.
उसके लंड से गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य निकलने लगा जो मेरी हथेलियों पर फैल हो गया।
सोनू की आंखें अभी भी बंद थीं और वह हांफ रहा था।
मेरे भाई सोनू के झड़ते ही अंकल ने मेरी चूचियों से अपना मुंह हटाया और बोले- बेटा, अब मेरा भी हिलाओ।
मेरी हथेलियों में सोनू का वीर्य लगा हुआ था.
मैंने उन्हें साफ किये बिना ही उसके हाथ से अंकल के लंड को पकड़ लिया और उनके लंड पर वो वीर्य लगा कर उनके लंड को एकदम गीला कर दिया और धीरे उनकी मुठ मारने लगी।
अंकल एक हाथ से मेरी चूचियों को दबा भी रहे थे।
इधर सोनू भी अब थोड़ा नॉर्मल हो गया और उसने रुमाल से अपने लंड को थोड़ा साफ किया और फिर मुझे अंकल का लंड पकड़ कर मुठ मारते देखने लगा।
फिर उसने भी मेरी चूची को पहले दबाया और फिर झुक कर चूची को चूसने लगा।
थोड़ी देर तक चूची चूसने के बाद सोनू ने चूची को चूसना छोड़ दिया और घुटनों के बल मेरे ठीक सामने बैठ गया।
बैठने के बाद वह मेरी लेगिंग को नीचे खिसकाने लगा।
मैंने भी हल्का सा सीधी होकर एक हाथ से लेगिंग को एक तरफ से खिसका कर उसकी मदद की।
जिस पर सोनू ने लेगिंग को खिसका कर घुटनों से भी नीचे तक कर दिया.
लेगिंग टाइट होने की वजह से पैंटी भी उसी के साथ खिसक कर उतर गई थी।
अब मेरी चूची और चूत दोनों नंगे हो चुके थे।
सोनू ने थोड़ी देर मेरी चूत को गौर से देखा, फिर धीरे से अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर पहले तो चूत की खुशबू को सूंघा।
फिर उसने अपने दोनों हाथों को मेरी चूत पर रखा और अपने मुँह को मेरी चूत से लगा दिया और जीभ से चूत को चाटने लगा।
जैसे ही सोनू ने अपनी जीभ मेरी चूत पर फेरी मेरे मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गई।
मैंने भी अपनी जांघों को हल्का सा फैला कर सोनू को चूत चाटने की पूरी जगह दी और उसके सिर पर अपने एक हाथ धीरे से अपनी चूत पर और दबा दिया।
सोनू ने चूत चाटते चाटते अचानक अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी.
मेरे मुँह से एक बार फिर हल्की सी सिसकारी निकल गई।
अब मैं भी हल्का-हल्का अपने काम को हिलाने लगी।
इधर अंकल भी शायद झड़ने वाले थे, वे भी आंख बंद कर धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगे- आआ आहाआ औउउउर जोर से … बेटाआआ … हाआं … बाअस्स्स … हाआ … और तेईईईई ईईईईई …
मैं भी तेजी से उनका लंड हिलाने लगी.
अंकल के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली- हांआं … बस … बेटाआआ … बस्स्स स्स्स्स्स!
और वे तेजी से झटके लेते हुए झड़ने लगे.
उनके लंड का रस निकल कर मेरे हाथ पर फैल गया।
इधर सोनू मेरी चूत को जीभ को तेजी से चाट रहा था और बीच-बीच में चूत के अंदर जीभ डाल देता था।
वही अंकल थोड़ा नॉर्मल होने के बाद झुक कर मेरी चूचियों को चूसने लगे।
मेरी हालत ख़राब हो रही थी.
मैंने अपने एक हाथ से सोनू के सिर के बालों को भींच लिया और अपने कमर को तेजी से हिलाने लगी और दूसरे हाथ से अंकल के सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबा दिया था।
मैं भी झड़ने ही वाली थी, मेरे मुँह से तेज सिसकारी निकल रही थी- आआआ आहाआ सोनू … आआ आहाआ औउउर तेज चाट … आआ ऊऊऊ माआआ … आआहा आ!
मैंने इतने जोर से सोनू का सर अपनी चूत पर दबाया जैसे मैं उसके पूरे सर को ही अपनी चूत में डाल लूंगी.
और बस मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।
मैं तेजी से हांफ रही थी और अपने सांसों को काबू में करने की कोशिश कर रही थी.
सोनू ने मेरी चूत का सारा रस पी लिया था।
उधर अंकल मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूस रहे थे।
मैंने अभी भी अपनी आंखें बंद कर रखी थी।
जब मैंने आंख खोल कर देखा तो सोनू अपने मुंह पर लगे मेरी चूत के रस को रूमाल से साफ कर खड़ा हो रहा था।
मेरी नज़र उसका लंड पर गयी।
मैंने देखा कि उसके लंड में फिर से तनाव आने लगा था।
मैं आंखें बंद कर उसी तरह खड़ी रही और अंकल जो मेरी चूचियों को चूस रहे थे उनके सर पर धीरे-धीरे हाथ फेरने लगी।
तभी सोनू ने भी मेरी दूसरी चूची को चूसना शुरू कर दिया।
मैं दूसरा हाथ सोनू के सिर पर फेरने लगी।
मैं अभी भी नीचे से पूरी नंगी खड़ी थी और मेरा भाई और अंकल दोनों एक साथ मेरी दोनों चूचियों को चूस रहे थे।
जाड़े की रात में भयंकर ठंड और कोहरे के बीच खुले आसमान के नीचे जवानी का यह खेल चल रहा था।
दूर कहीं कभी-कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज से रात का सन्नाटा टूट रहा था।
हम तीनों ही करीब-करीब नंगे थे मगर ठंड का एहसास तक किसी को नहीं हो रहा था।
करीब 5 मिनट तक सोनू और अंकल मेरी चूचियों को चूसते रहेंगे।
उसके बाद अंकल ने अपना मुंह मेरी चूचियों से हटा दिया।
मैंने आंख खोल कर देखा तो वे हाथ से अपने लंड को हिला रहे थे, उनके लंड में भी तनाव आ चुका था।
मेरी निगाह उनके लंड पर ही थी मेरे मुँह में फिर पानी आ गया।
अंकल ने मुझे देखा और एक हाथ से अपने लंड की त्वचा को पूरा पीछे खींचा, दूसरे हाथ को लंड के सुपारे पर फेरते हुए मुझसे कहा- बेटा, एक बार इसे चूसो।
सोनू ने भी चूचियों से मुंह हटाया और सीधा खड़ा हो गया वो भी अपने एक हाथ से अपना लंड धीरे हिला रहा था।
उसका लंड भी आधा खड़ा हो चुका था।
मतलब साफ़ था हम तीनों एक बार फिर जवानी के खेल के लिए तैयार हो गए थे।
अंकल ने फिर अपने लंड को हिलाया और मेरे सर पर हाथ रख कर नीचे झुकाने की कोशिश करते हुए बोले- चूसो बेटा!
लंड देख कर तो मेरे मुँह में शुरू से ही पानी आ रहा था।
वहीं सोनू भी अपने लंड की त्वचा को पीछे खींच कर अपने सुपारे पर हाथ फेर रहा था।
मैं समझ गई कि वह भी चाह रहा है कि मैं उसका लंड चूसूं।
मैंने झुक कर अपना मुंह खोला और अंकल के लंड को अपने होठों के बीच रखा लिया।
अंकल बोले- हां बेटा … शाबाश!
यह कहकर अपने कमर को हल्का-हल्का हिलाकर मेरे मुंह को ही चोदने लगे और एक हाथ से मेरी चूचियों को भी दबाते जा रहे थे।
पहले तो मुझे लंड का स्वाद बड़ा अजीब लगा मगर थोड़ी ही देर में मुझे लंड चूसने में मजा आने लगा।
अंकल के लंड से थोड़ा सा वीर्य निकल आया था जिसका नमकीन स्वाद मुझे अच्छा लग रहा था और मेरे मुँह को आगे पीछे कर के लॉलीपॉप की तरह अंकल के लंड को चूसने लगी।
उधर सोनू भी अपना लंड हाथ में पकड़ कर एकदम सामने ही खड़ा था।
मैंने एक हाथ सोनू का लंड पकड़ लिया और उसे हल्का-हल्का हिलाने लगी।
सोनू ने अपना लंड एकदम मेरे मुँह के पास ला दिया।
मैं थोड़ी देर तक अंकल का लंड चूसती रही.
फिर मैंने अंकल का लंड छोड़ कर सोनू के लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी।
सोनू ने भी अपने कमर को हिलाना शुरू कर दिया और अपने लंड को मेरे मुँह में आगे पीछे करने लगा।
इसी तरह मैं सोनू और अंकल के लंड को बारी-बारी से चूसने लगी।
थोड़ी देर में ही सोनू का लंड दोबारा खड़ा हो गया।
जब मैं अंकल का लंड चूस रही थी तो सोनू मेरे पीछे चला गया।
पीछे जाकर सोनू ने अपने हाथों से मेरी गांड को सहलाने लगा और फिर धीरे से मेरी गांड के दरार को फैला कर अपने लंड को मेरी गांड और चूत से रगड़ने लगा।
इधर मैं अंकल का लंड मुंह में लेकर बड़े मजे से चूस रही थी।
उधर सोनू अपने लंड के गर्म-गर्म सुपारे को मेरी चूत और गांड से रगड़ रहा था।
रगड़ने से मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी।
लंड को चूत और गांड से रगड़ते-रगड़ते अचानक सोनू ने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और अपने हाथों से मेरी कमर को पकड़ कर जोर से धक्का मारा।
एक ही धक्के में उसका गर्म गर्म लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुस गया।
मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गयी।
हालांकि मैंने इसके पहले काई बार अपनी चूत में बैगन और मूली डाली थी मगर लंड का मजा अलग ही आ रहा था।
सोनू ने अब धीरे-धीरे अपने कमर से धक्के मारना शुरू कर दिया।
इधर मैंने अंकल का लंड चूस-चूस कर लाल कर दिया।
अब आगे मेरे मुँह में अंकल का लंड था और पीछे मेरी चूत में मेरे भाई का लंड घुसा हुआ था।
सोनू धक्के पर धक्का मारे जा रहा था।
मैं भी गांड उछाल-उछाल कर उसका साथ दे रही थी।
करीब 10 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा।
10 मिनट बाद सोनू ने अचानक धक्के की स्पीड बढ़ा दी और तेज-तेज धक्के मारता हुआ मेरी चूत में झड़ गया।
मगर मैं अभी भी नहीं झड़ी थी।
सोनू थोड़ी देर तक अपना लंड मेरी चूत में डाले ही हांफ रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और वही बेंच पर बैठ गया।
उसकी आंखें बंद थी और वह अपनी सांसों को काबू में करने की कोशिश कर रहा था. उसका लंड एकदम सिकुड़ कर लटका हुआ था।
इधर मैं अंकल का लंड अभी भी चूस रही थी.
लेकिन मेरी चूत की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी।
तभी अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और वे भी मेरे पीछे चले गये।
मैं समझ गई कि अब इस ओपन चुदाई से मेरी चूत की आग बुझेगी।
मैंने भी बेंच का सहारा लिया और अपने कूल्हों को हल्का सा फैला कर और गांड को उठा कर खड़ी हो गई तकी अंकल के लंड को मेरी चूत तक पहुंचने में कोई दिक्कत ना हो।
मेरी चूत सोनू के वीर्य से एकदम गीली हो चुकी थी।
अंकल ने अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर रखकर मेरे कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और एक जोरदार धक्का मारा और उनका लंड मेरी चूत में पूरा का पूरा घुस गया।
मेरे मुँह से हल्की से सिसकारी निकल गयी।
अंकल का लंड सोनू के लंड से मोटा और बड़ा दोनों था इसलिए मुझे दर्द होने लगा था।
अंकल लंड डालने के बाद थोड़ी देर तक रुके रहे।
फिर वे मुझसे बोले- बस बेटा, अब दर्द नहीं करेगा।
मैं भी शांत खड़ी रह कर अपने दर्द को काबू में करने की कोशिश कर रही थी।
थोड़ी देर बाद मुझे हल्का सा आराम मिला।
तभी अंकल ने भी अपने कमर से हल्के-हल्के धक्के मार कर मुझे चोदना शुरू किया।
मुझे अभी भी दर्द हो रहा था मगर वो दर्द बड़ा मीठा-मीठा था।
और अब मैं भी गांड हिला-हिला कर चुदाई में अंकल का साथ देने लगी।
करीब 5 मिनट की चुदाई में ही मेरी हालत खराब होने लगी और मेरी तेजी से अपनी कमर हिलाती हुई झड़ गई.
उधर अंकल भी तेजी से धक्के मारते हुए मेरी चूत में झड़ गए।
हम दोनों लगभाग साथ ही झड़े।
थोड़ी देर तक अंकल मेरी चूत में लंड डाल कर खड़े रहे और मैं भी उसी तरह खड़ी रही.
हम दोनों अपनी सांसों को काबू में कर रहे थे।
फिर अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मैं भी सीधी खड़ी हो गई।
खड़ी होने पर मेरी चूत से अंकल और सोनू का वीर्य निकल का मेरी जांघ पर बहने लगा।
मैंने अपने रूमाल से साफ किया और फिर अपनी चूत को भी साफ कर लेगिंग को ऊपर खींच कर पहन लिया और अपनी कुर्ती के बटन को बंद कर जैकेट को पहन लिया।
उधर सोनू और अंकल भी अपने कपड़े ठीक कर चुके थे।
उसके बाद हम तीनों ऑफिस में आ गए।
करीब 5 मिनट बाद ही बाइक की आवाज आने लगी.
हम समझ गए कि मामा आ गए हैं।
जिसके बाद मैं और सोनू अपना बैग लेकर ऑफिस से बाहर आ गए।
निकलते वक्त हमने पलट कर देखा तो अंकल कुर्सी पर अपना सर रख कर आंख बंद किये हुए थे।
मामा के आते ही मैं और सोनू बाइक पर बैठ कर घर की तरफ चल दिये।