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Incest शरीफ बाप और उसकी शैतान बेटी

Ting ting

Ting Ting
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It's very nice story....
Achha lag rha hai padhkar...lekin bahane se like,keeda ghus gya, is trh se na ho to or achha hai, khulkar or besharmi se sex hona chahiye...anyway ab to wese ho gya sb...
Waise kaafi achhi or erotic story hai ye..
Padhkar bht mja aaya...keep it up dear ,u r doing great......
Thank you Rekha ji
asl mein bharat mein baap beti ke rishte kuchh aise hote hain ki beshrmi sambhav hi nhi hai.
Yadi randion wala besharmi ka sex ho to lagta hai ki kuchh gadbad hai.
isiliye to incest sex ka mja hai ki sex mein bhi ek doori si rahti hi hai.
khair agel episode mein aapke sujaawon ka dhyan rakhunga.
thanks
 
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Rekha verma

Member
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Thank you Rekha ji
asl mein bharat mein baap beti ke rishte kuchh aise hote hain ki beshrmi sambhav hi nhi hai.
Yadi randion wala besharmi ka sex ho to lagta hai ki kuchh gadbad hai.
isiliye to incest sex ka mja hai ki sex mein bhi ek doori si rahti hi hai.
khair agel episode mein aapke sujaawon ka dhyan rakhunga.
thanks
Ji...mai bhi apni story restart krne wali hu ,21 se...ap bhi use padhege to mujhe khushi hogi...
Maine apki story 2 din me hi yha tak padh daali...bht achha likhte ho ap..
 
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sagar95

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तभी पापा ने हल्का सा धक्का मारा। भला मेरे जैसी कमसिन कच्ची कली और मैं पापा का बांस जैसा हथियार इतनी आसान से कहा जाता, पापा ने फिर से अपने लंड को मेरी चूत पर रख कर धक्का मारा पर इस बार भी वो मेरी चूत मैं ना जा कर एक साइड की ओर मुड़ गया.
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तो पापा मेरी तरफ देख शैतानी से मुस्कुराते हुए बोले

"सुमन! यह एक मेहमान तुम्हारी चौखट पर आया खड़ा है. बेचारे की नजर कमजोर है और उसकी एक ही आँख है. इसलिए वो तुम्हारे घर में नहीं जा पा रहा. तुम उसे थोड़ा रास्ता बता डौगी ताकि वो अंदर आ सके?"

मैं भी पापा को शरारत से बोली

"पापा! आप के मेहमान का मेरे घर के अंदर स्वागत है. उसे अंदर भेज दीजिये मैं तो उसका कब से इन्तजार कर रही हूँ.."

पापा बोले

"बेटी! तुम एक काम करो कि उसको पकड़ कर घर के दरवाजे पर रखो मैं उसे धक्का दे कर अंदर भेज देता हूँ. तुम अपने हाथ से पकड़कर अच्छे से लगा कर रखो मैं धक्का मारता हूं। ठीक है?"

तो मैंने शर्माते हुए पापा से कहा,

"जी पापा! आपका यह मेहमान तो बहुत मोटा है, ये अंदर नहीं जाएगा।"

तो पापा बोले

"सुमन! तुम ऐसे पकड़ कर गेट पर रखो तो सही. यह अंदर चला जाएगा।( फिर पापा मेरी आंखो में देख मुस्कुराहट से बोले), चला जाएगा सब औरतों के अंदर चला जाता है तो क्या तुम्हारे अंदर नहीं जाएगा रही बात मोटे की जितना मोटा है उतना ही तो मजा देता है। तुम अंदर तो आने दो इसे."

मैं पापा के लौड़े की मोटाई से थोड़ा सा डरी थी कि ये 9 इंच का और इतना मोटा मेरे अंदर कैसे जायेगा."

मैं पापा के गले लग कर कान में बोली

"पापा प्लीज़ आराम से चोदना, मेरी रसभरी चूत केवल 19 साल की है, मैं आपके लण्ड के हिसाब से तो कली हूं, मेरे प्यारे पापा आपका लंड बहुत मोटा और लम्बा है इस कच्ची रसभरी मासूम कली को मसल कर बर्बाद न करना,"

पापा ने मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया और कहा

"बेटा तुम बिलकुल भी चिंता न कर. एक बार इसे अंदर करने दे फिर इस मज़े को तू जीवन में कभी नहीं भूलेगी, थोड़ा सा दर्द होगा पर उसे झेल जा सुमन."
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फिर मैंने होंसला करते हुए पापा के लण्ड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसके सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर रख दिया. पापा का सुपाड़ा मोटे टमाटर जैसा था उसने चूत को पूरा ढक लिया था मैं मचलने लगी, पापा ने थोड़ा सा लंड का दबाव चूत पर दिया.

पापा का लण्ड चूत में नहीं जा रहा था, मैं कसमसाने लगी लंड बाहर छिटक जा रहा था।

पापा ने कहा

"सुमन! लण्ड का सर थोड़ा मोटा है. इसलिए अंदर नहीं घुस रहा. तुम एक करो कि मैं तुम्हारी टाँगे उठाकर अपने कन्धों पर रख लेता हूँ , तुम थोड़ा थूक अपनी चूत और मेरे लौड़े पर लगा दो. इस से थोड़ी चिकनाई हो जाएगी.

पापा ने मेरी टांगें अपने कन्धों पर रख ली. अब मैं बिलकुल फस गयी थी. चाह कर भी हिल नहीं सकती थी. खैर जो होगा देखा जायेगा सोच कर मैंने थोड़ा थूक अपनी उँगलियों में लेकर अपनी चूत के छेद पर लग लिया और थोड़ा पापा के सुपाडे पर लगा दिया। फिर मैंने लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत की कसी हुई दरार में घिसने लगी।

जब चूत खूब चिकनी हो गई.तो पापा ने मेरी चूत पर अपने सुपाड़े को दबाया. सुपाड़ा छोटे से मुलायम छेद को फ़ैलाने लगा , चूत की दीवारें साइड में खुलने लगी. और मैं दर्द से कसमसाने लगी. पापा से भी अब रुकना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने मेरी चूत में कस कर एक धक्का मारा. पर चूत पापा के लण्ड के हिसाब से इतनी छोटी थी की आधा सुपाड़ा ही अंदर घुस पाया.

मैं चिल्लाई " आ आ सी सी पापा आराम से. सी सी आह आह उई मां उई उई उफपापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह। "

पापा मेरे ऊपर लेट गये और मेरी बालों में उंगलियां डाल कर सहलाने और किस करने लगे .

मेरी तो आँखों में आंसू आ गए थे.
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फिर पापा मेरी चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे , जिस से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने पापा की आंखों में देखा। पापा ने शरारत से मुझे आँख मार दी. मैं तो शरमा गई.

पापा ने पूछा "कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी पापा ने पूछा "अब और डालूं अंदर?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में इशारा किया और मैंने पापा के लण्ड को पकड़ कर धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो सुपाड़ा धीरे धीरे रास्ता पकड़ कर अंदर जाने लगा मेरी चूत का छेद धीरे-धीरे फैलने लगा।

मुझे दर्द होने लगा. "सी सी आह आह उई मां उई उई उफपापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मेरी आँखों में से आंसू बहने लगे. मेरी आंखों फैलने लगी, मैं मुठ्ठी में चादर भींच कर दर्द को सहने लगी , पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। मुझे फिर से दर्द हुआ। पापा मेरे ऊपर ही लेट गए और आराम से बोले
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"सुमन! तुम्हारी चूत में पहली बार चोद रहा हूँ तो दर्द हो रहा है. पर तुम कोई चिंता न करो. तुम मेरी बहुत ही प्यारी बेटी हो. मैं तुम्हे दर्द देने का तो सोच भी नहीं सकता. बहुत ही आराम से चोदुँगा तुम्हे. ताकि तुम्हे अच्छा भी लगे और मजा भी आये. और तुम्हारा कीड़ा भी मर जाये. "

(इतना कुछ होने पर भी हम अभी भी कीड़े को मारने का नाटक कर रहे थे. आखिर चाहे हम दोनों की मर्जी से चुदाई हो रही थी, पर आखिर थे तो हम बाप बेटी ही न , तो थोड़ा नाटक भी चलना ही था..)

मैं बोली "आई लव यू पापा , आप मुझे कितने आराम से चोद रहे हो फिर भी दर्द हो रहा है."

पापा ने कहा "सुमन! तुम्हारी चूत में पहली बार है इसलिए दर्द हो रहा है. थोड़ी देर बाद बहुत मजा आयेगा आज के बाद सिर्फ मज़े ही मज़े हैं. बस आज थोड़ा सा दर्द सहन कर लो अपने पापा के लिए.."

मैंने पापा को चूमते हुए कहा

"पापा आप के लिए तो मैं जान भी दे सकती हूँ. दर्द तो क्या चीज है,"

पापा खुश हो गए और पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। अब उनका सुपाड़ा थोड़ा और अन्दर जा चुका था.
पापा ने फिर लंड बाहर निकाल कर फिर हल्के से धक्का लगाया अब लंड 2 इंच घुस चूका था लंड की मोटाई से रसभरी चूत का छेद बहुत फैल कर, पापा के लंड पर कस गया था.
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मैं धीरे-धीरे चीख रही थी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा , आराम से करो मैं मर जाऊंगी उई मां आ बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मैं पीछे खिसकने लगी.और बोली- "आआ ह्ह्ह पापा… आराम से डालो, मुझे दर्द हो रहा है मैं मर जाऊंगी पापा सी सी आ आह आ उई मां आराम से करो >'

पापा मेरी चूचियों को सहलाने लगे और निप्पल को दांतों और जीभ से कुरेदने लगे जिससे मैं वो दर्द को सहन कर लूँ.

पापा के मेरी चूची चूसने से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो पापा ने मेरी आंखों में देख कर पूछा

"कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी बोली "हाय पापा बहुत ही अच्छा लग रहा है. आई लव यू , बस आप आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा "सुमन! अब और अंदर डालूं?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा कर पापा को चूमने लगी.

फिर पापा ने धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो लण्ड लगभग दो इंच और अंदर घुस गया।

मैं जोर से चीखी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा। आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."
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पापा तो अनुभवी जानते थे कि मैं पहली मोटा लण्ड ले रही हूँ तो चाहे दर्द तो होना ही है.

इसलिए पापा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मेरे मुंह को बंद करते हुए एक जोर का धक्का मारा। धक्का इतना जोरदार था कि पापा का लौड़ा आधा अंदर घुस गया. मेरी तो चीख निकल गयी. मेरी चीख इतनी तेज थी कि यदि पापा ने मेरे मुंह को बंद न किया होता तो शायद घर तक मेरी मम्मी को भी सुनाई दे जाती और मम्मी दौड़ के यहाँ आ जाती और पापा पूछती कि अपनी बेटी को इतने जोर से क्यों चोद रहे? पर यहाँ तो कोई नहीं था.

मैं रोती रही और मेरे आंसू बहते रहे. पापा मेरे आंसुओं को प्यार से चूमते और चाटते रहे.

थोड़ी देर बाद पापा ने पुछा

"सुमन! बेटी , कुछ दर्द कम हुआ क्या ? आई लव यू बेटी , थोड़ा सा बर्दास्त करो तभी तुमको मजा आएगा।"

मैं सिसकते हुए बोली "आहहह.. आ ह ह् आऊ.. आ …आऊच सी ….सी .. पापा बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फट जायेगी, मैं मर जाऊंगी प्लीज़ रुक कर करो।
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मैंने पूछा शोना अब करूं तो वो शरमाते हुए बोली बाबू आराम से करना मैंने लंड को पकड़ कर उसकी चूत में लगा कर धीरे से अंदर दबा कर धक्का लगाया तो सुपाड़ा आराम से अंदर घुस गया दूसरी बार में एक इंच और अंदर घुस गया अब मैंने उसे पकड़ कर एक जोर का झटका मारकर 3इंच अंदर घुसा दिया।

वो बेचारी एकदम से कांप गई और दर्द से सिहर गई. दर्द से सिर इधर-उधर करने लगी मैंने एक बार रुक कर उसके होटो को किस किया और बोला आई लव यू बेटू जानू थोड़ा सा बर्दास्त करो तभी तुमको मजा आएगा वो सिसकते हुए बोली आहहह.. आ ह ह् आऊ.. आ …आऊच सी ….सी .. पापा बहुत दर्द हो रहा है मेरी चूत फट जायेगी मैं मर जाऊंगी प्लीज़ रुक कर करो।"

पापा रुक कर मेरी चूचियों को पीने लगे और एक हाथ से निप्पल मसलने लगे जिससे मुझे थोड़ा सा आराम आया. मेरी चूत में पानी निकलने लगा जिससे चिकनाहट बढ़ गई 1 मिनट बाद पापा ने मेरी आंखों में देखा और धीरे से कहा

"बेटी! कैसा लग रहा ?"

मैं मुस्कुराते हुए बोली

"पापा आई लव यू आई लव यू पापा पर आपने तो मेरी जान ही निकाल दी, अब दर्द कम है और हल्की सी गुदगुदी हो रही है."

पापा ने पूछा "अब और करूं?"

मैं बोली "नहीं पापा इतना ही रहने दो. आज इतना ही ठीक है. अगली बार चाहे पूरा अंदर कर लेना। वैसे पापा अभी कितना अंदर है? "

पापा कहा

"खुद ही हाथ लगा कर देख लो."

मैंने हाथ लगा कर देखा और बोला कि अभी तो केवल 5 इंच घुसा है अभी 3 इंच बाहर है.
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तभी पापा ने मेरी चूचियाँ मुंह में ले कर चूसने शुरू कर दी. अब दो ही मिनट में मेरा दर्द ख़तम हो मैं धीरे धीरे सिसकारियां मारने लगी.

अनुभवी पापा समझ गए की अब मौका है. उन्होंने साइड में पड़ी मेरी पैंटी उठा कर मेरे मुंह पर रख दी और जब समझ पाती, उन्होंने अपने चूतड़ों को कस कर अपनी पूरी ताकत लगा कर शायद अपने जीवन का सबसे तगड़ा धक्का मारा।

मेरी चूत बेचारी तो उस धक्के को सहन नहीं कर पायी और उसने लौड़े को रास्ता दे दिया. पापा का लण्ड अपने रस्ते की सारी रुकावटों को तोड़ता हुआ जड़ तक अंदर घुस गया. पूरा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया और पापा की जांघें मेरे चूतड़ों से आ कर मिल गयी जैसे दो प्रेमी आपस में गले मिल रहे हों.

मेरे फिर से चीख निकल गयी और इतना दर्द हुआ कि मैं बता नहीं सकती.

मैंने अपने नाखून पापा की नंगी पीठ में घड़ा दिए और दर्द के मारे इतनी जोर से उनकी पीठ में नाखून मारे कि पापा की पीठ में खून निकल आया.

मैंने अपने मुंह में भरी अपनी पैंटी को निकाल फेंका और रोने लगी. मैं चिल्लाते हुए बोल रही थी.

"ओह पापा! मैं मर गयी. पापा चुद गयी आपकी सुमन. फट गयी मेरी चूत, चीथड़े चीथड़े हो गयी है. अरे माँ कोई तो बचा लो मुझे , फाड् दो पापा ने अपनी बेटी की नाजुक सी चूत। घुसा दिया पापा ने घोड़े जैसा लण्ड मेरी कमसिन मुनिया में. हाय मैं क्या करूँ, बचा लो कोई मुझे, पापा निकाल लो अपना लौड़ा, मुझे नहीं चुदवाना आपसे। "

रोते रोते मेरी आँखें आंसू बहा रही थी और मैं पापा को लौड़ा निकालने की बिनती कर रही थी. पर आज पहली बार पापा मेरी मुश्किल से बेखबर लग रहे थे. उनपे तो मेरे आंसुओ या मेरे रोने का जैसे कोई असर ही नहीं हो रहा था.

पापा काफी देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटे रहे और मैं रोती रही. पापा का लण्ड उसी तरह पूरा मेरी चूत में घुसा रहा.

पापा मुझे प्यार से बोले

"सुमन बेटी! सॉरी कि तुम्हे इतना दर्द हुआ. पर जितना दर्द होना था हो चूका. मेरा लौड़ा तुम्हारी चूत की लिए बड़ा है तो जब भी पहली बार अंदर जाता, तो दर्द तो होना ही था. इसलिए मैंने आज पूरा डाल ही दिया ,अपने बाप को माफ़ कर दो. हाथ लगा कर देख लो सारा लौड़ा चला गया है. तुम्हारी चूत ने पूरा ले लिया है अंदर. बस अब मजे ही मजे हैं. साला कीड़ा तो अंदर मर ही गया होगा. यदि कहीं बच भी रहा होगा तो अभी मैं उसे अंदर ठोक ठोक कर मार दूंगा. "
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मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर चेक किया, पापा का पूरा लौड़ा मेरी प्यारी चूत को पूरा फैला कर घुसा हुआ था. और पापा के दोनों टट्टे (बॉल्स) मेरी गांड से ऐसे चिपके पड़े थे जैसे फेविकोल से चिपका दिए गए हों.

मैं भी कोई पहली बार तो चुदा नहीं रही थी, तो जानती थी की काम हो गया है. मेरी इतने दिनों की तपस्या सफल हो गयी है. भगवान् ने मुझे पापा के लण्ड का प्रशाद दे दिया है. वो हो गया है जिस के लिए मैं (और पापा भी) कब से तड़प रहे थे और कोशिश कर रहे थे. और आखिर मैं अपने पापा से चुदवाने में कामयाब हो ही गयी थी.

धीरे धीरे मेरा रोना कम हो गया. पापा जान रहे थे कि मेरा दर्द थोड़ा काबू में आ रहा है.

अब पापा ने थोड़ा लण्ड बाहर खींच कर दोबारा डालना चाहा पर मेरी चूत तो दर्द के कारण सूख गयी थी.

पापा ने लौड़ा बाहर कोशिश करी तो मेरी चूत पापा के लण्ड से इस तरह चिपक गयी थी किं लण्ड के साथ मेरी चूत का मांस भी बाहर को आने लगा.

इससे मुझे फिर दर्द होने लगा और मैंने पापा को कहा

"हाय पापा बाहर नहीं निकालिये. अंदर ही रहने दीजिये। "

पापा मेरी आँखों में देख कर मुस्कुराते बोले

"सुमन! तुम भी अजीब हो. अभी रो रो कर चिल्ला रही थी कि पापा बाहर निकाल लो अब निकाल रहा हूँ तो निकालने नहीं दे रही हो। "

मैं भी शरारत से मुस्कुराते बोली

"पापा! मेरी मर्जी है. मैं चाहे निकालने को बोलू या अंदर डालने को. आप को क्या? मेरे घर में पहली बार यह मेहमान आया है. तो इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर तो इसे अंदर रहने दो. "
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पापा भी हंस पड़े.

थोड़ी देर पापा ऐसे ही पड़े रहे और मेरी छातियां चूसते रहे. अब मेरा दर्द काम हो गया था. मुम्मे चूसे जाने और दर्द ख़त्म हो जाने से मेरी चूत में फिर से गीलापन आ गया था. और मेरा मन कर रहा था कि अब पापा चुदाई शुरू कर दें. पर पापा थे की जैसे चुदाई भूल ही गए थे और ऐसे अपना लण्ड डालें पड़े थे जैसे उनका अपना लौड़ा नहीं बल्कि किसी और का लौड़ा उनकी बेटी की चूत में हो.

मैं परेशान हो रही थी. जल्दी से चुदाई करवाना चाहती थी. मैंने पापा को कहा

"पापा! बस भी कीजिये, अब कुछ करो ना, मैं मरी जा रही हूँ. अब रहा नहीं जाता. अपना काम चालू करो."

पापा समझ रहे थे की चुदाई का समय आ गया है पर मुझे छेड़ते हुए बोले

"क्या करूँ बेटी ? कुछ बताओगी तो ही कुछ करूंगा ना."

अब मैं एक बेटी कैसे अपने बाप को कहती कि पापा अपनी बेटी की चुदाई शुरू कर दो. आखिर वो मेरे पापा थे.

मैंने अपनी गांड ऊपर को धक्का देते हुए पापा को इशारा किया, पर पापा छेड़खानी के मूड में थे तो उसी तरह पड़े रहे और बोले

"सुमन! क्या चाहती हो. मुंह से बोलो ना , मैं समझा नहीं. "

अब आखिर मैं बेशरम हो कर, पर आँखें मूँद कर बोल ही पड़ी

"पापा! बहुत हो गया , अब और मत सताओ , बस जल्दी लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दो. चोद दो अपनी बेटी को पापा, अब रहा नहीं जा रहा. जल्दी और जोर से चोदो अपनी सुमन को."

पापा मुस्कुरा पड़े और फिर मुझे छेड़ा

"सुमन! अभी तो तुम कह रही थी कि मेरा मेहमान तुम्हारे अंदर आया है. तो बाहर न निकालो, अब अंदर बाहर करने को कह रही हो. "
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मैं भी आँखें खोल कर पापा को प्यार से छेड़ते हुए बोली

"मेरा शरीर है और मेरा घर है. मैं मेहमान को अंदर ही रखूँ या अंदर बाहर करुँ , आप को क्या ? मेरी मर्जी है , मेहमान ने अंदर काफी देर आराम कर लिया है अब उसे कहो कि कुछ काम शुरू करे। "

पापा भी मुस्कुरा पड़े.
पापा ने भी अब देर करना उचित ना समझा और थोड़ा सा अपना लण्ड खींच कर फिर से अंदर धकेल दिया.

मुझे हल्का सा दर्द हुआ, मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, पापा मेरी हालत जानते थे, पर उन्होंने रुका नहीं और लगभग 2 इंच लौड़ा खींच कर जोर से दोबारा अंदर धकेल दिया. फिर लगभग 3 इंच लण्ड निकल कर डाला , मैं अपने दांत भींचे चुप चाप लेती रही. पापा मेरी तरफ देखते हुए आँख के इशारे से हे पूछे क्या ठीक सो हो रहा है? और मैंने गर्दन ही हिला कर उन्हें चालू रहने का इशारा किया.

पापा हर बार पिछली बार से थोड़ा सा अधिक लण्ड बाहर खींचते और जोर से अंदर ठोक देते, इस तरह करते करते थोड़ी ही देर में मेरी छूट में उनका पूरा लौड़ा आराम से अंदर बाहर हो रहा था. अब पापा अपने लण्ड के टोपे तक लौड़े को बाहर निकाल लेते और फिर एक जोरदार धक्के से अंदर धकेल देते.

अब मेरी चूत में बहुत कम दर्द हो रहा था. जितना भी दर्द था वो सहन करने योग्य था, तो अब में भी आराम से चुदाई के मजे ले रही थी.

पापा ने मेरी टांगें पूरी खोल ली और पूरी तेजी से चोदने लगे।

उनका लंड रेल के पिस्टन की तरह 100 की स्पीड से अंदर बाहर हो रहा. था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था.

मैं आनंद में सिसकियाँ ले रही थी और चिल्ला रही थी,
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"पापा! और जोर से करो, चोद दो पापा अपनी बेटी को, जोर जोर से चोदो अपनी सुमन को पापा. फाड़ दो मेरी चूत को। बहुत प्यासी है यह पापा , इस निगोड़ी ने मुझे बहुत परेशान किया है, टुकड़े टुकड़े कर दो मेरी चूत के आज। आह आह आह पापा, चोद लो अपनी बेटी की प्यारी सी मुनिया. "

मुझे पता नहीं चल रह था की आनंद में मैं क्या क्या बोल रही थी. मेरे दिमाग में तो बस पापा से चुदाई ही चल रही थी.

वो मेरे मम्मो पर झुक गए और उनको चूसने लगे। दूसरे हाथ से मम्मो को मसलने लगे। उन के ऐसा करने से मेरे जिस्म में मस्ती सी फैलने लगी। इधर मेरी चूत अंदर ही अंदर उनके लंड को ऐसा दबा रही थी जैसे उसका रस निकाल लेना चाहती हो। सच में अगर कोई लड़का , अनुभवहीन आदमी चुदाई कर रहा होता तो मेरी चूत की गर्मी से वो अब तक झड चुका होता।

लेकिन ये पापा थे जो मेरी चूत की गर्मी को बर्दाश्त करते हुए अब तक टिके हुए थे। मेरी चूत से गरम गरम पानी निकल केर नीचे चादर को गीकर रहा था।

मैं अपनी कमर हिलाने लगी। मेरे मूह से कराह निकल रही थी । मुझे दर्द तो हो रहा था लेकिन इतना नहीं कि मैं बर्दाश्त न कर सकूं।

एक बार फिर पापा मेरे मम्मो का रस निचोड़ने लगे। मुझे काफी राहत मिल रही थी। कुछ देर इंतजार के बाद उन्हें ने हल्के हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए।

वो किसी भी लड़की को खुश करने में माहिर थे। एक मंझा हुआ खिलारी, जो चुदाई का लुत्फ ना सिर्फ खुद उठा रहा था बल्कि मुझे भी दे रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता चुदाई करते हुए वो मेरे जिस्म को चूस रहे थे , मैं भी उन के सर के बालों में हाथ फेरते हुए आनंद ले रही थी, आहें भर रही थी।
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मैंने अपने पापा के पूरे चेहरे पर चुम्मो की बरसात कर दी। इस सारे वक्त में मेरी आंखें बंद थीं।

पापा :- मजा आया बेटी?

मैं:- (सर हां मुझे हिला केर) ह्ह्ह्म्म्म्म….

पापा :- तो आंखें खोल के बोलो ना...

मैं:- (ना मुझे सर हिला केर) उउन्नन्नहहुउउउ….

पापा :- अब मैं इतना बुरा हूँ? कि तुम मुझे देखती भी नहीं.

मैं:- (फोरन आंखें खोल केर) खबरदार! ख़ुद को आइन्दा बुराँ नहीं कहना आप ने..आप तो मेरे सब से प्यारे पापा हो .!

पापा :- मुझे तो ऐसा ही लगा, क्यू कि के तुम ने अब तक अपनी आंखें बंद रखी थीं।

मैं:- अगर आप मुझे अच्छा ना लगे होते तो आप को अपना जिस्म जो मेरा सब से ज्यादा कीमती चीज है नहीं देती। आज के बाद ये बात अपने ज़ेहन में ना लाइयेगा ।

पापा :- तो आँखों से आँखें मिला के बोलो ना अपने पापा को कि " चोदो ना मेरे पापा ताकि पापा को भी मजा आये। .

मैं:- मुझे शर्म आती है.

पापा :- किस से? मुझसे?

मैं:- हां!

पापा :- मुझसे कैसी शर्म। अब तो मैं तुम्हारी चूत में अपना पूरा लंड डाल कर चुदाई कर रहा हूँ। और तुमने तो खुद अपना हाथ से चेक करके देख लिया है कि सारा लौड़ा अंदर जा चूका है. तो अभी भी शर्म बाकि है क्या?.
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मैं कुछ नहीं बोली.

पापा :- अच्छा! अब मुझे समझ. जब तक मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड पूरा डाल के धक्के नहीं मारता रहता , तब तक तुम्हारी शर्म पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती।

मैं:- अब ऐसी बात नहीं है.

पापा :- तो क्या पूरा लंड ना डालूँ?

मैं:- मैने ये भी तो नहीं कहा.

पापा :- तो क्या करूँ न? बोलो….!

मैं:- (उन के कान में) मेरी चूत में अपना सारा तो डाल दिया है और अब और भी जो बाकि रह गया है वो भी कर लो कहीं कल आप यह ना कह सको कहो कि कुछ कसर रह गई। कि मेरी सुमन ने मुझे इस ढंग से चोदने से मना कर दिया. जो करना है दिल खोल के कर लो।

मुझे खुद को पता नहीं कि ये लफ्ज कैसे मेरे मुंह से निकल गए शायद चुदाई का ही नतीजा था. । लेकिन इन का नतीज़ा ये हुआ के पापा ज़ोर ओ शोर से मेरी चुदाई करने लगे। उन्होंने मेरी दोनों टांगें हवा में उठा के पूरी तरह से खोल दीया और अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर होता देखने लगे ।

उन की इस तरह चुदाई से मैं दो बार झर चुकी थी। लेकिन इधर वो मजा से मेरी चूत मार रहे थे । उन के तेज़ ढक्को से मेरे मम्मे हिल रहे थे। कभी वो उनसे खेलते तो कभी मेरी कमर पकड़ कर तेज़ झटके मारते।

इतनी देर और इतनी तेज चुदाई से तो मेरी चूत में जलन होने लगी। कुछ देर मैंने बर्दाश्त किया। लेकिन फिर मैं उनको रोकने की कोशिश करने लगी। तब उन्हें ने अपने धक्के रोके या मुझसे वजह पूछी। तो मैने उनको बता दिया.

पापा :- बस इतनी सी बात? मुझे पहले बता देना था. इसका तो असां सा इलाज है मेरे पास।

मैं:- वो क्या?

पापा :- बस देखती जाओ।

ये कह कर पापा ने अपना लंड बाहर निकाल लिया. और अपने लंड के सुपाडे को चूत के छेड़ पर रगड़ने लगे . मेरी चूत को थोड़ा आराम मिलने लगा। कुछ देर पहले तक मेरी चूत टाइट थी, उसका छेद भी छोटा सा था लेकिन अब उसका छेद कुछ बड़ा दिखायी दे रहा था। उसकी वजह थी पापा का मूसल। जिस ने पता नहीं कितने अंदर तक मेरी चूत को खोल दिया था। मैं इन्ही ख्यालो में खोई हुई थी के पापा के लंड से पेशाब की धार निकल कर मेरी चूत पर गिरने लगी। मुझे इस से दर्द होने लगा। जाहिर है जब एक जख्मी चुत पर नमकीन पानी डालेंगे तो क्या होगा ।
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मेरी कराह सुनने के बावज़ूद पापा नहीं रुके। बल्कि अब तो उन्होंने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में फिट कर दिया और पेशाब करने लगे । मुझे बहुत अजीब लग रहा था. गरम गरम पेशाब मुझे अपने अंदर तक महसूस हो रहा था। कुछ ही देर में मेरी चूत पूरी तरह उन के पेशाब से भर गई। मेरे अंदर तक कुछ देर दर्द हो रहा था, लेकिन फिर हमें दर्द के ख़तम होने के बाद मुझे मजा आया।

मेने अपनी टांगें पापा की कमर के गिर्द लपेट दी और उनको अपनी तरफ खींचने लगी। उनके लिए ये सिग्नल था कि वो दोबारा से मेरी चुदाई करें। और उन्होंने भी ऐसा ही किया. वो ताबड़ तोड़ धक्के लगा कर मेरी चूत को खोलने लगे. जब पापा अपना लौड़ा बाहर को निकालते तो मेरी चूत से पेशाब भी बाहर निकलने लगता और जब पापा फिर धक्का मार कर लौड़ा अंदर डालते तो पेशाब रुक जाता है। ये एक अजीब सी सनसनी थी, जिस को लफ़्ज़ों में नहीं बताया जा सकता। सिर्फ महसस ही कर सकते हैं. . मस्ती में एक बार फिर मेरी आंखें बंद हो गयी ।
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कुछ देर बाद पापा ने अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत पर झुक गये। अभी भी उनका कुछ पेशाब मेरी चूत के अंदर था।

वो मेरी चूत के अंदर तक ज़बान डाल कर चाटने लगे । उनको इस बात से ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता था कि उन्होंने ही थोड़ी देर पहले मेरी चूत में पेशाब किया था।

मेरी आंखें थी और मैं नीम बेहोसी की हालत में थी,

फिर पापा ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे खड़ा कर दिया और मेरी दोनों टांगों के नीचे से हाथ डाल कर मुझे अपनी गॉड में उठा लिया।

और पापा नीचे से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगे। इस पोजीशन में उन के धक्के का सब से ज्यादा असर मेरी चूत के दाने पर हो रहा था।

उन के धक्के की वजह से मेरी चूत बार बार पानी छोड़ रही थी। आप यकीन करें या ना करें, अगले 3 मिनट में झरने की कगार पर पहुँच गई।
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उन की चुदाई से मेरी टांगें कांप रही थी , मेरा पूरा जिस्म ख़राब था। मैं बेहाल हो के उन की छाती पर गिर गई.

मेरे मुंह से आआह्ह्ह… निकल रही थी । इस पोजीशन में उनका लंड अपनी पूरी जड़ तक मेरी चूत में जा रहा था। वो इसी तरह मुझे उछालते हुए चोद रहे थे और मैं उनके गले में अपने बाज़ू डाले अपनी चूत में अंदर बाहर होते लंड को मजा ले रही थी। मेरी चूत का पानी नीचे बहता हुआ पापा के लंड और उनकी गेंदों को गीला करता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था।

मेरे शरीर में अब अजीब ही हलचल होने लगी थी. मैं समझ गयी की मेरा काम होने वाला है.

मैंने पापा के गले में डाली हुई अपनी बाहें कस ली और पापा के कान में हौले से कहा

"पापा! मुझे कुछ हो रहा है. मैं मर जाउंगी कुछ कीजिये ना. मुझे कुछ अलग सा लग रहा है. और साथ ही अपनी स्पीड भी तेज करें। "

पापा अनुभवी थे तो समझ गए कि मेरा होने वाला ही है. खुद पापा का भी स्खलन नजदीक ही था. तो पापा ने फिर से मुझे चादर पर लिटा दिया पर लिटाते समय भी उन्होंने ध्यान रखा कि उनका लौड़ा मेरी चूत से निकल न जाये.

फिर पापा ने जो स्पीड पकड़ी कि मैं आप सब को क्या बताऊं. इतनी जोर जोर से पापा ने चोदना शुरू किया कि मेरी तो अंदर तक साड़ी नसें ही हिलने लगी.

मेरे मुंह से आह आह की आवाजें अपने आप निकल रही थी और मैं चिल्ला रही थी

"पापा! तेज और तेज. बस मैं गयी अरे मेरे पापा में मर गयी. पापा चुद गयी आपकी बेटी अपने बाप से. पापा अपना माल डाल दो अपनी सुमन के अंदर."

मैं बेख्याली में ना जाने क्या क्या बोल रही थी.

अचानक मैंने अपनी टाँगें अपने पापा की पीठ पर जोर से कस ली और चिल्लाई

"पापा! मैं गयी। मेरा हो गया पापा। हे भगवान् हो गया मेरा."

और इसके साथ ही मेरी चूत ने अपना पवित्र पानी पापा के लण्ड पर छोड़ना शुरू कर दिया.
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पापा के साथ यह मेरी पहली चुदाई थी तो मेरा इतना माल निकला कि मैं जैसे बेहोश ही हो गयी. मुझे कुछ भी होश न रहा बस अपने पापा की बाँहों में झड़ती रही.

उधर पापा के लण्ड पर जब मेरा पानी लगा तो पापा के भी मुंह से एक चीख जैसी निकली और उन्होंने फटाफट 5 - 6 धक्के मार कर अपना लैंड मेरी चूत में अंदर तक घुसेड़ दिया. और पापा का लौड़ा खुद ब खुद फूलने लगा और फिर उसके छेद से पापा के वीर्य की पिचकारियां छूटने लगी.

पापा ने पहली बार अपनी बेटी चोदी थी तो उनका इतना वीर्य निकला कि मेरी चूत भर गयी और इतना मोटा लौड़ा घुसा होने पर भी उनका गाढ़ा गाढ़ा माल मेरी चूत से बाहर आने लगा.

पापा भी निढाल हो कर मेरे ऊपर ही गिर गए. हम दोनों अपनी पहली चुदाई से इतना थक गए थे कि काफी देर तक हम दोनों बाप बेटी एक दुसरे की बाँहों में लेटे रहे.

पर घर भी तो जाना था. तो कुछ देर के बाद पापा उठे और मुझे भी उठाया. हम दोनों बहुत खुश थे जैसे जीवन में कुबेर का खजाना मिल गया हो।

पापा ने मुझे पूछा "सुमन! मजा आया?"

मैं:- "पापा बहुत मजा आया लेकिन अभी बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने बोला "कोई बात नहीं. अभी घर जाते हुए रास्ते में तुम्हे दर्द की गोली ले दूंगा. घर जा कर दूध के साथ ले लेना सब ठीक हो जायेगा. "

फिर पापा ने एक बार फिर से मुझे चूमा और एक आखिरी बार फिर से मेरी चूत को चाटा। फिर पापा ने मुझे घुमा दिया और मेरी चूत को पीछे से भी चाटा। पापा ने मेरी गांड के छेद पर भी अपनी जीभ घुमाई.
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गांड के छेद पर जीभ लगते ही मैं उछाल पड़ी. पापा को मेरी गांड शायद अच्छी लगी. उनके मन में मेरी गांड भी मारने का ख्याल आया. वो कुछ सोच रहे थे.

अब चुदाई तो हो चुकी थी. अब सब हो जाने के बाद मुझे पापा से शर्म जैसी आ रही थी.

चाहे हमने कुछ भी कर लिया था पर आखिर थे तो वो मेरे पापा ही,, शायद पापा का भी यही हालत थी,

पापा मुझे बोले

"बेटी सुमन! तुम्हारी चूत में जो कीड़ा घुसा था वो तो मेरे लण्ड से तो पक्का मर गया होगा. पर तुम्हारी गांड का छेद भी तो चूत के छेद के बिलकुल पास में ही है. मुझे डर है कि कहीं कीड़ा तुम्हारी गांड के छेद में न घुस गया हो. यदि ऐसा हो गया तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी. मैं ऐसा करता हूँ कि एक बार अपने लण्ड से तुम्हारी गांड के छेद में भी कीड़े की ठुकाई कर देता हूँ. ताकि कोई खतरा न रह जाये., तुम्हारा क्या ख्याल है.?"

मैं समझ गयी कि अब पापा मेरी गांड मारने का भी प्लान बना रहे हैं. पर मैं तो डर गयी. क्योंकि पापा का लौड़ा इतना बड़ा था कि चूत में लेने में ही नानी याद आ गयी थी. यदि पापा ने मेरी गांड में इसे घुसा दिया तो मैं तो पक्का मर ही जाऊगी।

पर मुझे एक अजीब सी सनसनी हो रही थी कि जब पापा मेरी गांड मारेंगे तो कैसा लगेगा.

तो मैंने सोचा कि जो होगा देखा जायेगा अब चूत तो मरवा ही ली है तो गांड भी मरवा ही लेंगे.

पर अब टाइम काफी हो गया था. घर में मम्मी और नानी इन्तजार कर रहे होंगे. हम पहले ही बहुत लेट हैं तो कोई बहाना बना देंगे. पर गांड मारने का अभी समय नहीं है.

तो मैं बोली

"पापा! आप ठीक कहते हैं. हो सकता है की कीड़ा गांड में घुस गया हो. क्योंकि दोनों छेद बिलकुल पास पास ही तो हैं. पर अभी बहुत टाइम हो गया है. घर चलते हैं. गांड का कीड़ा मारने का कोई सोचते हैं."
पापा खुश हो गए कि उनकी बेटी गांड मरवाने को तैयार है. वो मुझे समझाते हुए बोले
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"सुमन! हम एक काम करते हैं कि घर जाते हुए , दूकान से नींद की गोलियाँ ले जायेंगे. तुम रात को सोते समय अपनी मम्मी और नानी दोनों के दूध में इन्हे मिला देना. दोनों सो जाएंगी तो मैं रात में तुम्हारे कमरे में आ कर तुम्हारी गांड का कीड़ा भी मार दूंगा जैसे अभी चूत का मारा है. रात में हमारे पास खुला टाइम होगा, और क्योंकि मेरा लौड़ा तुम्हारी गांड के लिए बहुत बड़ा है तो हमें बहुत तेल लगा कर तुम्हारी गांड मारनी पड़ेगी. घर में भी होगा. ठीक है न तो आज रात का प्रोग्रमम पक्का है न तुम्हारी गांड के कीड़े को मारने का?"

पापा बहुत चालू थे. वो कीड़े का बहाना बना कर मेरी गांड का भी भुर्ता बना देना चाहते थे. मैं तो तैयार थी ही. तो मैंने शर्माते हुए हां में गर्दन हिलाई. पापा भी बहुत खुश हो गए.

मैंने देखा तो चादर हम दोनों बाप बेटी के माल से बिलकुल भर गयी थी,खैर मैंने उसे तह करके स्कूटर में रखने लगी. तो पापा ने पूछा

"सुमन! अब घर जा कर किताब के लिए क्या बहाना बनाना है?"

तो मैंने मुस्कुराते हुए स्कूटर की डिग्गी में से किताब (जो मैं पहले ही छुपा कर लायी थी) निकाली और पापा को दिखाई. पापा मेरी चलाकी देख कर मुस्कुराने लगे और हंस कर बोले

"मेरी बेटी तो बहुत शैतान और चलाक है. सारी तैयारी पहले ही कर के आयी थी.."

मैं भी हंस पड़ी और पापा से कहा.

"पापा चलो भी. अभी रास्ते में नींद की गोलियां भी तो लेनी हैं. "


पापा भी मुस्कुरा रहे थे. उन्होंने स्कूटर स्टार्ट किया और हम घर की ओर चल पड़े.
Kya baat h mast real story jaisa h mujhe mere bhai ki ladki jiska naam suman h ki chudai yaad aa gayi bahut choda tha maine meri suman ko aha lund khada h gaya beth hi nahi raha isme papa ki jagah chacha laga ke suman ko bheja h pad kar boli aa jao sasural bola rahi sali mast randi h
 

Devil 888

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तभी पापा ने हल्का सा धक्का मारा। भला मेरे जैसी कमसिन कच्ची कली और मैं पापा का बांस जैसा हथियार इतनी आसान से कहा जाता, पापा ने फिर से अपने लंड को मेरी चूत पर रख कर धक्का मारा पर इस बार भी वो मेरी चूत मैं ना जा कर एक साइड की ओर मुड़ गया.
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तो पापा मेरी तरफ देख शैतानी से मुस्कुराते हुए बोले

"सुमन! यह एक मेहमान तुम्हारी चौखट पर आया खड़ा है. बेचारे की नजर कमजोर है और उसकी एक ही आँख है. इसलिए वो तुम्हारे घर में नहीं जा पा रहा. तुम उसे थोड़ा रास्ता बता डौगी ताकि वो अंदर आ सके?"

मैं भी पापा को शरारत से बोली

"पापा! आप के मेहमान का मेरे घर के अंदर स्वागत है. उसे अंदर भेज दीजिये मैं तो उसका कब से इन्तजार कर रही हूँ.."

पापा बोले

"बेटी! तुम एक काम करो कि उसको पकड़ कर घर के दरवाजे पर रखो मैं उसे धक्का दे कर अंदर भेज देता हूँ. तुम अपने हाथ से पकड़कर अच्छे से लगा कर रखो मैं धक्का मारता हूं। ठीक है?"

तो मैंने शर्माते हुए पापा से कहा,

"जी पापा! आपका यह मेहमान तो बहुत मोटा है, ये अंदर नहीं जाएगा।"

तो पापा बोले

"सुमन! तुम ऐसे पकड़ कर गेट पर रखो तो सही. यह अंदर चला जाएगा।( फिर पापा मेरी आंखो में देख मुस्कुराहट से बोले), चला जाएगा सब औरतों के अंदर चला जाता है तो क्या तुम्हारे अंदर नहीं जाएगा रही बात मोटे की जितना मोटा है उतना ही तो मजा देता है। तुम अंदर तो आने दो इसे."

मैं पापा के लौड़े की मोटाई से थोड़ा सा डरी थी कि ये 9 इंच का और इतना मोटा मेरे अंदर कैसे जायेगा."

मैं पापा के गले लग कर कान में बोली

"पापा प्लीज़ आराम से चोदना, मेरी रसभरी चूत केवल 19 साल की है, मैं आपके लण्ड के हिसाब से तो कली हूं, मेरे प्यारे पापा आपका लंड बहुत मोटा और लम्बा है इस कच्ची रसभरी मासूम कली को मसल कर बर्बाद न करना,"

पापा ने मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया और कहा

"बेटा तुम बिलकुल भी चिंता न कर. एक बार इसे अंदर करने दे फिर इस मज़े को तू जीवन में कभी नहीं भूलेगी, थोड़ा सा दर्द होगा पर उसे झेल जा सुमन."
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फिर मैंने होंसला करते हुए पापा के लण्ड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसके सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर रख दिया. पापा का सुपाड़ा मोटे टमाटर जैसा था उसने चूत को पूरा ढक लिया था मैं मचलने लगी, पापा ने थोड़ा सा लंड का दबाव चूत पर दिया.

पापा का लण्ड चूत में नहीं जा रहा था, मैं कसमसाने लगी लंड बाहर छिटक जा रहा था।

पापा ने कहा

"सुमन! लण्ड का सर थोड़ा मोटा है. इसलिए अंदर नहीं घुस रहा. तुम एक करो कि मैं तुम्हारी टाँगे उठाकर अपने कन्धों पर रख लेता हूँ , तुम थोड़ा थूक अपनी चूत और मेरे लौड़े पर लगा दो. इस से थोड़ी चिकनाई हो जाएगी.

पापा ने मेरी टांगें अपने कन्धों पर रख ली. अब मैं बिलकुल फस गयी थी. चाह कर भी हिल नहीं सकती थी. खैर जो होगा देखा जायेगा सोच कर मैंने थोड़ा थूक अपनी उँगलियों में लेकर अपनी चूत के छेद पर लग लिया और थोड़ा पापा के सुपाडे पर लगा दिया। फिर मैंने लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत की कसी हुई दरार में घिसने लगी।

जब चूत खूब चिकनी हो गई.तो पापा ने मेरी चूत पर अपने सुपाड़े को दबाया. सुपाड़ा छोटे से मुलायम छेद को फ़ैलाने लगा , चूत की दीवारें साइड में खुलने लगी. और मैं दर्द से कसमसाने लगी. पापा से भी अब रुकना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने मेरी चूत में कस कर एक धक्का मारा. पर चूत पापा के लण्ड के हिसाब से इतनी छोटी थी की आधा सुपाड़ा ही अंदर घुस पाया.

मैं चिल्लाई " आ आ सी सी पापा आराम से. सी सी आह आह उई मां उई उई उफपापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह। "

पापा मेरे ऊपर लेट गये और मेरी बालों में उंगलियां डाल कर सहलाने और किस करने लगे .

मेरी तो आँखों में आंसू आ गए थे.
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फिर पापा मेरी चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे , जिस से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने पापा की आंखों में देखा। पापा ने शरारत से मुझे आँख मार दी. मैं तो शरमा गई.

पापा ने पूछा "कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी पापा ने पूछा "अब और डालूं अंदर?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में इशारा किया और मैंने पापा के लण्ड को पकड़ कर धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो सुपाड़ा धीरे धीरे रास्ता पकड़ कर अंदर जाने लगा मेरी चूत का छेद धीरे-धीरे फैलने लगा।

मुझे दर्द होने लगा. "सी सी आह आह उई मां उई उई उफपापा आराम से करो बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मेरी आँखों में से आंसू बहने लगे. मेरी आंखों फैलने लगी, मैं मुठ्ठी में चादर भींच कर दर्द को सहने लगी , पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। मुझे फिर से दर्द हुआ। पापा मेरे ऊपर ही लेट गए और आराम से बोले
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"सुमन! तुम्हारी चूत में पहली बार चोद रहा हूँ तो दर्द हो रहा है. पर तुम कोई चिंता न करो. तुम मेरी बहुत ही प्यारी बेटी हो. मैं तुम्हे दर्द देने का तो सोच भी नहीं सकता. बहुत ही आराम से चोदुँगा तुम्हे. ताकि तुम्हे अच्छा भी लगे और मजा भी आये. और तुम्हारा कीड़ा भी मर जाये. "

(इतना कुछ होने पर भी हम अभी भी कीड़े को मारने का नाटक कर रहे थे. आखिर चाहे हम दोनों की मर्जी से चुदाई हो रही थी, पर आखिर थे तो हम बाप बेटी ही न , तो थोड़ा नाटक भी चलना ही था..)

मैं बोली "आई लव यू पापा , आप मुझे कितने आराम से चोद रहे हो फिर भी दर्द हो रहा है."

पापा ने कहा "सुमन! तुम्हारी चूत में पहली बार है इसलिए दर्द हो रहा है. थोड़ी देर बाद बहुत मजा आयेगा आज के बाद सिर्फ मज़े ही मज़े हैं. बस आज थोड़ा सा दर्द सहन कर लो अपने पापा के लिए.."

मैंने पापा को चूमते हुए कहा

"पापा आप के लिए तो मैं जान भी दे सकती हूँ. दर्द तो क्या चीज है,"

पापा खुश हो गए और पापा ने लंड धीरे से बाहर निकाल लिया और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। अब उनका सुपाड़ा थोड़ा और अन्दर जा चुका था.
पापा ने फिर लंड बाहर निकाल कर फिर हल्के से धक्का लगाया अब लंड 2 इंच घुस चूका था लंड की मोटाई से रसभरी चूत का छेद बहुत फैल कर, पापा के लंड पर कस गया था.
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मैं धीरे-धीरे चीख रही थी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा , आराम से करो मैं मर जाऊंगी उई मां आ बहुत दर्द हो रहा है आ आह."

मैं पीछे खिसकने लगी.और बोली- "आआ ह्ह्ह पापा… आराम से डालो, मुझे दर्द हो रहा है मैं मर जाऊंगी पापा सी सी आ आह आ उई मां आराम से करो >'

पापा मेरी चूचियों को सहलाने लगे और निप्पल को दांतों और जीभ से कुरेदने लगे जिससे मैं वो दर्द को सहन कर लूँ.

पापा के मेरी चूची चूसने से मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो पापा ने मेरी आंखों में देख कर पूछा

"कैसा लग रहा है?"

मैं हल्के से मुस्कुरा दी बोली "हाय पापा बहुत ही अच्छा लग रहा है. आई लव यू , बस आप आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा "सुमन! अब और अंदर डालूं?"

मैंने शरमाते हुए हाँ में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा कर पापा को चूमने लगी.

फिर पापा ने धीरे से अंदर की तरफ दबाया तो लण्ड लगभग दो इंच और अंदर घुस गया।

मैं जोर से चीखी "सी सी आह आह उई मां उई उई उफ पापा। आराम से करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है."
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पापा तो अनुभवी जानते थे कि मैं पहली मोटा लण्ड ले रही हूँ तो चाहे दर्द तो होना ही है.

इसलिए पापा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मेरे मुंह को बंद करते हुए एक जोर का धक्का मारा। धक्का इतना जोरदार था कि पापा का लौड़ा आधा अंदर घुस गया. मेरी तो चीख निकल गयी. मेरी चीख इतनी तेज थी कि यदि पापा ने मेरे मुंह को बंद न किया होता तो शायद घर तक मेरी मम्मी को भी सुनाई दे जाती और मम्मी दौड़ के यहाँ आ जाती और पापा पूछती कि अपनी बेटी को इतने जोर से क्यों चोद रहे? पर यहाँ तो कोई नहीं था.

मैं रोती रही और मेरे आंसू बहते रहे. पापा मेरे आंसुओं को प्यार से चूमते और चाटते रहे.

थोड़ी देर बाद पापा ने पुछा

"सुमन! बेटी , कुछ दर्द कम हुआ क्या ? आई लव यू बेटी , थोड़ा सा बर्दास्त करो तभी तुमको मजा आएगा।"

मैं सिसकते हुए बोली "आहहह.. आ ह ह् आऊ.. आ …आऊच सी ….सी .. पापा बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फट जायेगी, मैं मर जाऊंगी प्लीज़ रुक कर करो।
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मैंने पूछा शोना अब करूं तो वो शरमाते हुए बोली बाबू आराम से करना मैंने लंड को पकड़ कर उसकी चूत में लगा कर धीरे से अंदर दबा कर धक्का लगाया तो सुपाड़ा आराम से अंदर घुस गया दूसरी बार में एक इंच और अंदर घुस गया अब मैंने उसे पकड़ कर एक जोर का झटका मारकर 3इंच अंदर घुसा दिया।

वो बेचारी एकदम से कांप गई और दर्द से सिहर गई. दर्द से सिर इधर-उधर करने लगी मैंने एक बार रुक कर उसके होटो को किस किया और बोला आई लव यू बेटू जानू थोड़ा सा बर्दास्त करो तभी तुमको मजा आएगा वो सिसकते हुए बोली आहहह.. आ ह ह् आऊ.. आ …आऊच सी ….सी .. पापा बहुत दर्द हो रहा है मेरी चूत फट जायेगी मैं मर जाऊंगी प्लीज़ रुक कर करो।"

पापा रुक कर मेरी चूचियों को पीने लगे और एक हाथ से निप्पल मसलने लगे जिससे मुझे थोड़ा सा आराम आया. मेरी चूत में पानी निकलने लगा जिससे चिकनाहट बढ़ गई 1 मिनट बाद पापा ने मेरी आंखों में देखा और धीरे से कहा

"बेटी! कैसा लग रहा ?"

मैं मुस्कुराते हुए बोली

"पापा आई लव यू आई लव यू पापा पर आपने तो मेरी जान ही निकाल दी, अब दर्द कम है और हल्की सी गुदगुदी हो रही है."

पापा ने पूछा "अब और करूं?"

मैं बोली "नहीं पापा इतना ही रहने दो. आज इतना ही ठीक है. अगली बार चाहे पूरा अंदर कर लेना। वैसे पापा अभी कितना अंदर है? "

पापा कहा

"खुद ही हाथ लगा कर देख लो."

मैंने हाथ लगा कर देखा और बोला कि अभी तो केवल 5 इंच घुसा है अभी 3 इंच बाहर है.
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तभी पापा ने मेरी चूचियाँ मुंह में ले कर चूसने शुरू कर दी. अब दो ही मिनट में मेरा दर्द ख़तम हो मैं धीरे धीरे सिसकारियां मारने लगी.

अनुभवी पापा समझ गए की अब मौका है. उन्होंने साइड में पड़ी मेरी पैंटी उठा कर मेरे मुंह पर रख दी और जब समझ पाती, उन्होंने अपने चूतड़ों को कस कर अपनी पूरी ताकत लगा कर शायद अपने जीवन का सबसे तगड़ा धक्का मारा।

मेरी चूत बेचारी तो उस धक्के को सहन नहीं कर पायी और उसने लौड़े को रास्ता दे दिया. पापा का लण्ड अपने रस्ते की सारी रुकावटों को तोड़ता हुआ जड़ तक अंदर घुस गया. पूरा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया और पापा की जांघें मेरे चूतड़ों से आ कर मिल गयी जैसे दो प्रेमी आपस में गले मिल रहे हों.

मेरे फिर से चीख निकल गयी और इतना दर्द हुआ कि मैं बता नहीं सकती.

मैंने अपने नाखून पापा की नंगी पीठ में घड़ा दिए और दर्द के मारे इतनी जोर से उनकी पीठ में नाखून मारे कि पापा की पीठ में खून निकल आया.

मैंने अपने मुंह में भरी अपनी पैंटी को निकाल फेंका और रोने लगी. मैं चिल्लाते हुए बोल रही थी.

"ओह पापा! मैं मर गयी. पापा चुद गयी आपकी सुमन. फट गयी मेरी चूत, चीथड़े चीथड़े हो गयी है. अरे माँ कोई तो बचा लो मुझे , फाड् दो पापा ने अपनी बेटी की नाजुक सी चूत। घुसा दिया पापा ने घोड़े जैसा लण्ड मेरी कमसिन मुनिया में. हाय मैं क्या करूँ, बचा लो कोई मुझे, पापा निकाल लो अपना लौड़ा, मुझे नहीं चुदवाना आपसे। "

रोते रोते मेरी आँखें आंसू बहा रही थी और मैं पापा को लौड़ा निकालने की बिनती कर रही थी. पर आज पहली बार पापा मेरी मुश्किल से बेखबर लग रहे थे. उनपे तो मेरे आंसुओ या मेरे रोने का जैसे कोई असर ही नहीं हो रहा था.

पापा काफी देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटे रहे और मैं रोती रही. पापा का लण्ड उसी तरह पूरा मेरी चूत में घुसा रहा.

पापा मुझे प्यार से बोले

"सुमन बेटी! सॉरी कि तुम्हे इतना दर्द हुआ. पर जितना दर्द होना था हो चूका. मेरा लौड़ा तुम्हारी चूत की लिए बड़ा है तो जब भी पहली बार अंदर जाता, तो दर्द तो होना ही था. इसलिए मैंने आज पूरा डाल ही दिया ,अपने बाप को माफ़ कर दो. हाथ लगा कर देख लो सारा लौड़ा चला गया है. तुम्हारी चूत ने पूरा ले लिया है अंदर. बस अब मजे ही मजे हैं. साला कीड़ा तो अंदर मर ही गया होगा. यदि कहीं बच भी रहा होगा तो अभी मैं उसे अंदर ठोक ठोक कर मार दूंगा. "
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मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर चेक किया, पापा का पूरा लौड़ा मेरी प्यारी चूत को पूरा फैला कर घुसा हुआ था. और पापा के दोनों टट्टे (बॉल्स) मेरी गांड से ऐसे चिपके पड़े थे जैसे फेविकोल से चिपका दिए गए हों.

मैं भी कोई पहली बार तो चुदा नहीं रही थी, तो जानती थी की काम हो गया है. मेरी इतने दिनों की तपस्या सफल हो गयी है. भगवान् ने मुझे पापा के लण्ड का प्रशाद दे दिया है. वो हो गया है जिस के लिए मैं (और पापा भी) कब से तड़प रहे थे और कोशिश कर रहे थे. और आखिर मैं अपने पापा से चुदवाने में कामयाब हो ही गयी थी.

धीरे धीरे मेरा रोना कम हो गया. पापा जान रहे थे कि मेरा दर्द थोड़ा काबू में आ रहा है.

अब पापा ने थोड़ा लण्ड बाहर खींच कर दोबारा डालना चाहा पर मेरी चूत तो दर्द के कारण सूख गयी थी.

पापा ने लौड़ा बाहर कोशिश करी तो मेरी चूत पापा के लण्ड से इस तरह चिपक गयी थी किं लण्ड के साथ मेरी चूत का मांस भी बाहर को आने लगा.

इससे मुझे फिर दर्द होने लगा और मैंने पापा को कहा

"हाय पापा बाहर नहीं निकालिये. अंदर ही रहने दीजिये। "

पापा मेरी आँखों में देख कर मुस्कुराते बोले

"सुमन! तुम भी अजीब हो. अभी रो रो कर चिल्ला रही थी कि पापा बाहर निकाल लो अब निकाल रहा हूँ तो निकालने नहीं दे रही हो। "

मैं भी शरारत से मुस्कुराते बोली

"पापा! मेरी मर्जी है. मैं चाहे निकालने को बोलू या अंदर डालने को. आप को क्या? मेरे घर में पहली बार यह मेहमान आया है. तो इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर तो इसे अंदर रहने दो. "
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पापा भी हंस पड़े.

थोड़ी देर पापा ऐसे ही पड़े रहे और मेरी छातियां चूसते रहे. अब मेरा दर्द काम हो गया था. मुम्मे चूसे जाने और दर्द ख़त्म हो जाने से मेरी चूत में फिर से गीलापन आ गया था. और मेरा मन कर रहा था कि अब पापा चुदाई शुरू कर दें. पर पापा थे की जैसे चुदाई भूल ही गए थे और ऐसे अपना लण्ड डालें पड़े थे जैसे उनका अपना लौड़ा नहीं बल्कि किसी और का लौड़ा उनकी बेटी की चूत में हो.

मैं परेशान हो रही थी. जल्दी से चुदाई करवाना चाहती थी. मैंने पापा को कहा

"पापा! बस भी कीजिये, अब कुछ करो ना, मैं मरी जा रही हूँ. अब रहा नहीं जाता. अपना काम चालू करो."

पापा समझ रहे थे की चुदाई का समय आ गया है पर मुझे छेड़ते हुए बोले

"क्या करूँ बेटी ? कुछ बताओगी तो ही कुछ करूंगा ना."

अब मैं एक बेटी कैसे अपने बाप को कहती कि पापा अपनी बेटी की चुदाई शुरू कर दो. आखिर वो मेरे पापा थे.

मैंने अपनी गांड ऊपर को धक्का देते हुए पापा को इशारा किया, पर पापा छेड़खानी के मूड में थे तो उसी तरह पड़े रहे और बोले

"सुमन! क्या चाहती हो. मुंह से बोलो ना , मैं समझा नहीं. "

अब आखिर मैं बेशरम हो कर, पर आँखें मूँद कर बोल ही पड़ी

"पापा! बहुत हो गया , अब और मत सताओ , बस जल्दी लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दो. चोद दो अपनी बेटी को पापा, अब रहा नहीं जा रहा. जल्दी और जोर से चोदो अपनी सुमन को."

पापा मुस्कुरा पड़े और फिर मुझे छेड़ा

"सुमन! अभी तो तुम कह रही थी कि मेरा मेहमान तुम्हारे अंदर आया है. तो बाहर न निकालो, अब अंदर बाहर करने को कह रही हो. "
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मैं भी आँखें खोल कर पापा को प्यार से छेड़ते हुए बोली

"मेरा शरीर है और मेरा घर है. मैं मेहमान को अंदर ही रखूँ या अंदर बाहर करुँ , आप को क्या ? मेरी मर्जी है , मेहमान ने अंदर काफी देर आराम कर लिया है अब उसे कहो कि कुछ काम शुरू करे। "

पापा भी मुस्कुरा पड़े.
पापा ने भी अब देर करना उचित ना समझा और थोड़ा सा अपना लण्ड खींच कर फिर से अंदर धकेल दिया.

मुझे हल्का सा दर्द हुआ, मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, पापा मेरी हालत जानते थे, पर उन्होंने रुका नहीं और लगभग 2 इंच लौड़ा खींच कर जोर से दोबारा अंदर धकेल दिया. फिर लगभग 3 इंच लण्ड निकल कर डाला , मैं अपने दांत भींचे चुप चाप लेती रही. पापा मेरी तरफ देखते हुए आँख के इशारे से हे पूछे क्या ठीक सो हो रहा है? और मैंने गर्दन ही हिला कर उन्हें चालू रहने का इशारा किया.

पापा हर बार पिछली बार से थोड़ा सा अधिक लण्ड बाहर खींचते और जोर से अंदर ठोक देते, इस तरह करते करते थोड़ी ही देर में मेरी छूट में उनका पूरा लौड़ा आराम से अंदर बाहर हो रहा था. अब पापा अपने लण्ड के टोपे तक लौड़े को बाहर निकाल लेते और फिर एक जोरदार धक्के से अंदर धकेल देते.

अब मेरी चूत में बहुत कम दर्द हो रहा था. जितना भी दर्द था वो सहन करने योग्य था, तो अब में भी आराम से चुदाई के मजे ले रही थी.

पापा ने मेरी टांगें पूरी खोल ली और पूरी तेजी से चोदने लगे।

उनका लंड रेल के पिस्टन की तरह 100 की स्पीड से अंदर बाहर हो रहा. था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था.

मैं आनंद में सिसकियाँ ले रही थी और चिल्ला रही थी,
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"पापा! और जोर से करो, चोद दो पापा अपनी बेटी को, जोर जोर से चोदो अपनी सुमन को पापा. फाड़ दो मेरी चूत को। बहुत प्यासी है यह पापा , इस निगोड़ी ने मुझे बहुत परेशान किया है, टुकड़े टुकड़े कर दो मेरी चूत के आज। आह आह आह पापा, चोद लो अपनी बेटी की प्यारी सी मुनिया. "

मुझे पता नहीं चल रह था की आनंद में मैं क्या क्या बोल रही थी. मेरे दिमाग में तो बस पापा से चुदाई ही चल रही थी.

वो मेरे मम्मो पर झुक गए और उनको चूसने लगे। दूसरे हाथ से मम्मो को मसलने लगे। उन के ऐसा करने से मेरे जिस्म में मस्ती सी फैलने लगी। इधर मेरी चूत अंदर ही अंदर उनके लंड को ऐसा दबा रही थी जैसे उसका रस निकाल लेना चाहती हो। सच में अगर कोई लड़का , अनुभवहीन आदमी चुदाई कर रहा होता तो मेरी चूत की गर्मी से वो अब तक झड चुका होता।

लेकिन ये पापा थे जो मेरी चूत की गर्मी को बर्दाश्त करते हुए अब तक टिके हुए थे। मेरी चूत से गरम गरम पानी निकल केर नीचे चादर को गीकर रहा था।

मैं अपनी कमर हिलाने लगी। मेरे मूह से कराह निकल रही थी । मुझे दर्द तो हो रहा था लेकिन इतना नहीं कि मैं बर्दाश्त न कर सकूं।

एक बार फिर पापा मेरे मम्मो का रस निचोड़ने लगे। मुझे काफी राहत मिल रही थी। कुछ देर इंतजार के बाद उन्हें ने हल्के हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए।

वो किसी भी लड़की को खुश करने में माहिर थे। एक मंझा हुआ खिलारी, जो चुदाई का लुत्फ ना सिर्फ खुद उठा रहा था बल्कि मुझे भी दे रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता चुदाई करते हुए वो मेरे जिस्म को चूस रहे थे , मैं भी उन के सर के बालों में हाथ फेरते हुए आनंद ले रही थी, आहें भर रही थी।
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मैंने अपने पापा के पूरे चेहरे पर चुम्मो की बरसात कर दी। इस सारे वक्त में मेरी आंखें बंद थीं।

पापा :- मजा आया बेटी?

मैं:- (सर हां मुझे हिला केर) ह्ह्ह्म्म्म्म….

पापा :- तो आंखें खोल के बोलो ना...

मैं:- (ना मुझे सर हिला केर) उउन्नन्नहहुउउउ….

पापा :- अब मैं इतना बुरा हूँ? कि तुम मुझे देखती भी नहीं.

मैं:- (फोरन आंखें खोल केर) खबरदार! ख़ुद को आइन्दा बुराँ नहीं कहना आप ने..आप तो मेरे सब से प्यारे पापा हो .!

पापा :- मुझे तो ऐसा ही लगा, क्यू कि के तुम ने अब तक अपनी आंखें बंद रखी थीं।

मैं:- अगर आप मुझे अच्छा ना लगे होते तो आप को अपना जिस्म जो मेरा सब से ज्यादा कीमती चीज है नहीं देती। आज के बाद ये बात अपने ज़ेहन में ना लाइयेगा ।

पापा :- तो आँखों से आँखें मिला के बोलो ना अपने पापा को कि " चोदो ना मेरे पापा ताकि पापा को भी मजा आये। .

मैं:- मुझे शर्म आती है.

पापा :- किस से? मुझसे?

मैं:- हां!

पापा :- मुझसे कैसी शर्म। अब तो मैं तुम्हारी चूत में अपना पूरा लंड डाल कर चुदाई कर रहा हूँ। और तुमने तो खुद अपना हाथ से चेक करके देख लिया है कि सारा लौड़ा अंदर जा चूका है. तो अभी भी शर्म बाकि है क्या?.
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मैं कुछ नहीं बोली.

पापा :- अच्छा! अब मुझे समझ. जब तक मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड पूरा डाल के धक्के नहीं मारता रहता , तब तक तुम्हारी शर्म पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती।

मैं:- अब ऐसी बात नहीं है.

पापा :- तो क्या पूरा लंड ना डालूँ?

मैं:- मैने ये भी तो नहीं कहा.

पापा :- तो क्या करूँ न? बोलो….!

मैं:- (उन के कान में) मेरी चूत में अपना सारा तो डाल दिया है और अब और भी जो बाकि रह गया है वो भी कर लो कहीं कल आप यह ना कह सको कहो कि कुछ कसर रह गई। कि मेरी सुमन ने मुझे इस ढंग से चोदने से मना कर दिया. जो करना है दिल खोल के कर लो।

मुझे खुद को पता नहीं कि ये लफ्ज कैसे मेरे मुंह से निकल गए शायद चुदाई का ही नतीजा था. । लेकिन इन का नतीज़ा ये हुआ के पापा ज़ोर ओ शोर से मेरी चुदाई करने लगे। उन्होंने मेरी दोनों टांगें हवा में उठा के पूरी तरह से खोल दीया और अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर होता देखने लगे ।

उन की इस तरह चुदाई से मैं दो बार झर चुकी थी। लेकिन इधर वो मजा से मेरी चूत मार रहे थे । उन के तेज़ ढक्को से मेरे मम्मे हिल रहे थे। कभी वो उनसे खेलते तो कभी मेरी कमर पकड़ कर तेज़ झटके मारते।

इतनी देर और इतनी तेज चुदाई से तो मेरी चूत में जलन होने लगी। कुछ देर मैंने बर्दाश्त किया। लेकिन फिर मैं उनको रोकने की कोशिश करने लगी। तब उन्हें ने अपने धक्के रोके या मुझसे वजह पूछी। तो मैने उनको बता दिया.

पापा :- बस इतनी सी बात? मुझे पहले बता देना था. इसका तो असां सा इलाज है मेरे पास।

मैं:- वो क्या?

पापा :- बस देखती जाओ।

ये कह कर पापा ने अपना लंड बाहर निकाल लिया. और अपने लंड के सुपाडे को चूत के छेड़ पर रगड़ने लगे . मेरी चूत को थोड़ा आराम मिलने लगा। कुछ देर पहले तक मेरी चूत टाइट थी, उसका छेद भी छोटा सा था लेकिन अब उसका छेद कुछ बड़ा दिखायी दे रहा था। उसकी वजह थी पापा का मूसल। जिस ने पता नहीं कितने अंदर तक मेरी चूत को खोल दिया था। मैं इन्ही ख्यालो में खोई हुई थी के पापा के लंड से पेशाब की धार निकल कर मेरी चूत पर गिरने लगी। मुझे इस से दर्द होने लगा। जाहिर है जब एक जख्मी चुत पर नमकीन पानी डालेंगे तो क्या होगा ।
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मेरी कराह सुनने के बावज़ूद पापा नहीं रुके। बल्कि अब तो उन्होंने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में फिट कर दिया और पेशाब करने लगे । मुझे बहुत अजीब लग रहा था. गरम गरम पेशाब मुझे अपने अंदर तक महसूस हो रहा था। कुछ ही देर में मेरी चूत पूरी तरह उन के पेशाब से भर गई। मेरे अंदर तक कुछ देर दर्द हो रहा था, लेकिन फिर हमें दर्द के ख़तम होने के बाद मुझे मजा आया।

मेने अपनी टांगें पापा की कमर के गिर्द लपेट दी और उनको अपनी तरफ खींचने लगी। उनके लिए ये सिग्नल था कि वो दोबारा से मेरी चुदाई करें। और उन्होंने भी ऐसा ही किया. वो ताबड़ तोड़ धक्के लगा कर मेरी चूत को खोलने लगे. जब पापा अपना लौड़ा बाहर को निकालते तो मेरी चूत से पेशाब भी बाहर निकलने लगता और जब पापा फिर धक्का मार कर लौड़ा अंदर डालते तो पेशाब रुक जाता है। ये एक अजीब सी सनसनी थी, जिस को लफ़्ज़ों में नहीं बताया जा सकता। सिर्फ महसस ही कर सकते हैं. . मस्ती में एक बार फिर मेरी आंखें बंद हो गयी ।
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कुछ देर बाद पापा ने अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत पर झुक गये। अभी भी उनका कुछ पेशाब मेरी चूत के अंदर था।

वो मेरी चूत के अंदर तक ज़बान डाल कर चाटने लगे । उनको इस बात से ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता था कि उन्होंने ही थोड़ी देर पहले मेरी चूत में पेशाब किया था।

मेरी आंखें थी और मैं नीम बेहोसी की हालत में थी,

फिर पापा ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे खड़ा कर दिया और मेरी दोनों टांगों के नीचे से हाथ डाल कर मुझे अपनी गॉड में उठा लिया।

और पापा नीचे से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगे। इस पोजीशन में उन के धक्के का सब से ज्यादा असर मेरी चूत के दाने पर हो रहा था।

उन के धक्के की वजह से मेरी चूत बार बार पानी छोड़ रही थी। आप यकीन करें या ना करें, अगले 3 मिनट में झरने की कगार पर पहुँच गई।
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उन की चुदाई से मेरी टांगें कांप रही थी , मेरा पूरा जिस्म ख़राब था। मैं बेहाल हो के उन की छाती पर गिर गई.

मेरे मुंह से आआह्ह्ह… निकल रही थी । इस पोजीशन में उनका लंड अपनी पूरी जड़ तक मेरी चूत में जा रहा था। वो इसी तरह मुझे उछालते हुए चोद रहे थे और मैं उनके गले में अपने बाज़ू डाले अपनी चूत में अंदर बाहर होते लंड को मजा ले रही थी। मेरी चूत का पानी नीचे बहता हुआ पापा के लंड और उनकी गेंदों को गीला करता हुआ नीचे चादर पर गिर रहा था।

मेरे शरीर में अब अजीब ही हलचल होने लगी थी. मैं समझ गयी की मेरा काम होने वाला है.

मैंने पापा के गले में डाली हुई अपनी बाहें कस ली और पापा के कान में हौले से कहा

"पापा! मुझे कुछ हो रहा है. मैं मर जाउंगी कुछ कीजिये ना. मुझे कुछ अलग सा लग रहा है. और साथ ही अपनी स्पीड भी तेज करें। "

पापा अनुभवी थे तो समझ गए कि मेरा होने वाला ही है. खुद पापा का भी स्खलन नजदीक ही था. तो पापा ने फिर से मुझे चादर पर लिटा दिया पर लिटाते समय भी उन्होंने ध्यान रखा कि उनका लौड़ा मेरी चूत से निकल न जाये.

फिर पापा ने जो स्पीड पकड़ी कि मैं आप सब को क्या बताऊं. इतनी जोर जोर से पापा ने चोदना शुरू किया कि मेरी तो अंदर तक साड़ी नसें ही हिलने लगी.

मेरे मुंह से आह आह की आवाजें अपने आप निकल रही थी और मैं चिल्ला रही थी

"पापा! तेज और तेज. बस मैं गयी अरे मेरे पापा में मर गयी. पापा चुद गयी आपकी बेटी अपने बाप से. पापा अपना माल डाल दो अपनी सुमन के अंदर."

मैं बेख्याली में ना जाने क्या क्या बोल रही थी.

अचानक मैंने अपनी टाँगें अपने पापा की पीठ पर जोर से कस ली और चिल्लाई

"पापा! मैं गयी। मेरा हो गया पापा। हे भगवान् हो गया मेरा."

और इसके साथ ही मेरी चूत ने अपना पवित्र पानी पापा के लण्ड पर छोड़ना शुरू कर दिया.
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पापा के साथ यह मेरी पहली चुदाई थी तो मेरा इतना माल निकला कि मैं जैसे बेहोश ही हो गयी. मुझे कुछ भी होश न रहा बस अपने पापा की बाँहों में झड़ती रही.

उधर पापा के लण्ड पर जब मेरा पानी लगा तो पापा के भी मुंह से एक चीख जैसी निकली और उन्होंने फटाफट 5 - 6 धक्के मार कर अपना लैंड मेरी चूत में अंदर तक घुसेड़ दिया. और पापा का लौड़ा खुद ब खुद फूलने लगा और फिर उसके छेद से पापा के वीर्य की पिचकारियां छूटने लगी.

पापा ने पहली बार अपनी बेटी चोदी थी तो उनका इतना वीर्य निकला कि मेरी चूत भर गयी और इतना मोटा लौड़ा घुसा होने पर भी उनका गाढ़ा गाढ़ा माल मेरी चूत से बाहर आने लगा.

पापा भी निढाल हो कर मेरे ऊपर ही गिर गए. हम दोनों अपनी पहली चुदाई से इतना थक गए थे कि काफी देर तक हम दोनों बाप बेटी एक दुसरे की बाँहों में लेटे रहे.

पर घर भी तो जाना था. तो कुछ देर के बाद पापा उठे और मुझे भी उठाया. हम दोनों बहुत खुश थे जैसे जीवन में कुबेर का खजाना मिल गया हो।

पापा ने मुझे पूछा "सुमन! मजा आया?"

मैं:- "पापा बहुत मजा आया लेकिन अभी बहुत दर्द हो रहा है."

पापा ने बोला "कोई बात नहीं. अभी घर जाते हुए रास्ते में तुम्हे दर्द की गोली ले दूंगा. घर जा कर दूध के साथ ले लेना सब ठीक हो जायेगा. "

फिर पापा ने एक बार फिर से मुझे चूमा और एक आखिरी बार फिर से मेरी चूत को चाटा। फिर पापा ने मुझे घुमा दिया और मेरी चूत को पीछे से भी चाटा। पापा ने मेरी गांड के छेद पर भी अपनी जीभ घुमाई.
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गांड के छेद पर जीभ लगते ही मैं उछाल पड़ी. पापा को मेरी गांड शायद अच्छी लगी. उनके मन में मेरी गांड भी मारने का ख्याल आया. वो कुछ सोच रहे थे.

अब चुदाई तो हो चुकी थी. अब सब हो जाने के बाद मुझे पापा से शर्म जैसी आ रही थी.

चाहे हमने कुछ भी कर लिया था पर आखिर थे तो वो मेरे पापा ही,, शायद पापा का भी यही हालत थी,

पापा मुझे बोले

"बेटी सुमन! तुम्हारी चूत में जो कीड़ा घुसा था वो तो मेरे लण्ड से तो पक्का मर गया होगा. पर तुम्हारी गांड का छेद भी तो चूत के छेद के बिलकुल पास में ही है. मुझे डर है कि कहीं कीड़ा तुम्हारी गांड के छेद में न घुस गया हो. यदि ऐसा हो गया तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी. मैं ऐसा करता हूँ कि एक बार अपने लण्ड से तुम्हारी गांड के छेद में भी कीड़े की ठुकाई कर देता हूँ. ताकि कोई खतरा न रह जाये., तुम्हारा क्या ख्याल है.?"

मैं समझ गयी कि अब पापा मेरी गांड मारने का भी प्लान बना रहे हैं. पर मैं तो डर गयी. क्योंकि पापा का लौड़ा इतना बड़ा था कि चूत में लेने में ही नानी याद आ गयी थी. यदि पापा ने मेरी गांड में इसे घुसा दिया तो मैं तो पक्का मर ही जाऊगी।

पर मुझे एक अजीब सी सनसनी हो रही थी कि जब पापा मेरी गांड मारेंगे तो कैसा लगेगा.

तो मैंने सोचा कि जो होगा देखा जायेगा अब चूत तो मरवा ही ली है तो गांड भी मरवा ही लेंगे.

पर अब टाइम काफी हो गया था. घर में मम्मी और नानी इन्तजार कर रहे होंगे. हम पहले ही बहुत लेट हैं तो कोई बहाना बना देंगे. पर गांड मारने का अभी समय नहीं है.

तो मैं बोली

"पापा! आप ठीक कहते हैं. हो सकता है की कीड़ा गांड में घुस गया हो. क्योंकि दोनों छेद बिलकुल पास पास ही तो हैं. पर अभी बहुत टाइम हो गया है. घर चलते हैं. गांड का कीड़ा मारने का कोई सोचते हैं."
पापा खुश हो गए कि उनकी बेटी गांड मरवाने को तैयार है. वो मुझे समझाते हुए बोले
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"सुमन! हम एक काम करते हैं कि घर जाते हुए , दूकान से नींद की गोलियाँ ले जायेंगे. तुम रात को सोते समय अपनी मम्मी और नानी दोनों के दूध में इन्हे मिला देना. दोनों सो जाएंगी तो मैं रात में तुम्हारे कमरे में आ कर तुम्हारी गांड का कीड़ा भी मार दूंगा जैसे अभी चूत का मारा है. रात में हमारे पास खुला टाइम होगा, और क्योंकि मेरा लौड़ा तुम्हारी गांड के लिए बहुत बड़ा है तो हमें बहुत तेल लगा कर तुम्हारी गांड मारनी पड़ेगी. घर में भी होगा. ठीक है न तो आज रात का प्रोग्रमम पक्का है न तुम्हारी गांड के कीड़े को मारने का?"

पापा बहुत चालू थे. वो कीड़े का बहाना बना कर मेरी गांड का भी भुर्ता बना देना चाहते थे. मैं तो तैयार थी ही. तो मैंने शर्माते हुए हां में गर्दन हिलाई. पापा भी बहुत खुश हो गए.

मैंने देखा तो चादर हम दोनों बाप बेटी के माल से बिलकुल भर गयी थी,खैर मैंने उसे तह करके स्कूटर में रखने लगी. तो पापा ने पूछा

"सुमन! अब घर जा कर किताब के लिए क्या बहाना बनाना है?"

तो मैंने मुस्कुराते हुए स्कूटर की डिग्गी में से किताब (जो मैं पहले ही छुपा कर लायी थी) निकाली और पापा को दिखाई. पापा मेरी चलाकी देख कर मुस्कुराने लगे और हंस कर बोले

"मेरी बेटी तो बहुत शैतान और चलाक है. सारी तैयारी पहले ही कर के आयी थी.."

मैं भी हंस पड़ी और पापा से कहा.

"पापा चलो भी. अभी रास्ते में नींद की गोलियां भी तो लेनी हैं. "


पापा भी मुस्कुरा रहे थे. उन्होंने स्कूटर स्टार्ट किया और हम घर की ओर चल पड़े.
Bahut bdia update.... Sex ke bich bich mei baap beti ka conversation rehna Chahiye tbhi maja aata hai
 
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Ting ting

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Ting ting

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Ji...mai bhi apni story restart krne wali hu ,21 se...ap bhi use padhege to mujhe khushi hogi...
Maine apki story 2 din me hi yha tak padh daali...bht achha likhte ho ap..
All the best and good luck for your incoming story.
If possible pl try to write hindi story in hindi fonts
 

Ting ting

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हम दोनों बाप बेटी बहुत ही खुश थे. खुश होते भी क्यों नहीं आखिर मेरी इतने दिन की मेहनत आज रंग लायी थी और मैं अपने मकसद यानि अपने प्यारे पापा से चुदवाने में सफल हो ही गयी थी.
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दुसरे चाहे अब मम्मी और नानी आ चुकी थी पर अब मुझे उतनी चिंता नहीं थी क्योंकि मैं जानती थी कि मम्मी तो अब उम्र में काफी ज्यादा हो चुकी हैं और पापा इतने सालों से उनकी चूत मार मार कर ढीली कर चुके हैं, तो अब जब उन्हें उनकी बेटी की जवान चूत मिल रही है तो क्यों वे बूढी और ढीली चूत को पसंद करेंगे? अब तो हम बाप बेटी की चुदाई चालू ही रहने वाली थी. जब भी मौका मिलेगा तो हम आपस में मजे ले ही लिया करेंगे.

खैर हम घर को जा रहे थे. पापा स्कूटर चला रहे थे और मैं उनके पीछे बैठी थी बिलकुल पापा से चिपक कर. और मेरी दोनों छातियां पापा की पीठ में घुसी हुई थी. सड़क क्योंकि ज्यादा अच्छी नहीं थी तो स्कूटर के धक्कों से मेरी चूचियां पापा की पीठ में घिस रही थी. कुछ मैं जान बूझ कर भी अपनी छातियां पापा की पीठ में रगड़ रही थी. पापा को भी मजा आ रहा था. थोड़ी ही देर मैं हम मुख्य सड़क पर पहुँचने वाले थे तो तब तक तो मैं मुम्मे रगड़ने का मजा लेती रहना चाहती थी. पापा भी शायद इसी लिए जानबूझ कर स्कूटर धीरे चला रहे थे.
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मेरी चूत में अभी भी दर्द हो रहा था. पापा के मोटे लण्ड से पहली चुदाई थी, तो चूत का तो कबाड़ा ही कर दिया था पापा ने.

तभी पापा मुझे बोले

"सुमन! मेरी जांघों में खुजली हो रही है. मेरे हाथ स्कूटर पर हैं तो थोड़ा खुजला देगी क्या?"

मैं समज रही थी कि पापा मुझे लौड़े पर हाथ फेरने का इशारा दे रहे हैं. मैं भी मुख्य सड़क पर आने से पहले लौड़े का मजा लेना चाहती थी. असल में अब लौड़े को हाथ से छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था. मन तो कर रहा था कि बस पापा का लण्ड मेरी चूत में ही घुसा रहे, या कम से कम हाथ में तो रहे ही. ताकि मैं उसे मसलती रहूं.

मैंने पापा की टांग पर हाथ रखा और छेड़ते हुए बोली

"पापा! यहाँ खुजली हो रही है क्या?"

पापा:- नहीं बेटी थोड़ा ऊपर।

मैं हाथ को उनकी जांघों के जोड़ के पास ले जाकर फिर मजाक किया

मैं:- पापा यहाँ है क्या?

पापा से भी अब दूरी सहन नहीं हो रही थी. तो वो साफ़ साफ़ बोले

"सुमन! मेरे लण्ड पर खुजली हो रही है. अभी हम लोग थोड़े अँधेरे में हैं तो लुंगी के अंदर और अंडरवियर में हाथ डाल कर थोड़ा खुजली कर दो और सेहला दो. मुख्य सड़क पर लोग होंगे तो तुम खुजली नहीं कर पाओगी.

मैंने भी देर करना उचित न समझते हुए, झट से अपना हाथ पापा की लुंगी के अंदर डाल दिया और फिर उनके अंडरवियर के साइड से अंदर घुसाया. पापा का लौड़ा तो अपनी बेटी के हाथों के इन्तजार में कब से खड़ा था और मेरे हाथों की राह देख रहा था.

मेरे उँगलियाँ लगती ही लौड़े ने ख़ुशी से झटका मार कर स्वागत किया. मैंने भी तुरंत अपनी हथेली में लौड़े को कस लिया। और पापा के लौड़े को मुठ मारने के अंदाज में सहलाने लगी.
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पापा के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी. मैं समझ रही थी कि पापा को बहुत अच्छा लग रहा है. और अच्छा तो मेरे को भी बहुत लग रहा था.

तो मैंने अपना दूसरा हाथ, जिस से मैंने पापा को पकड़ा हुआ था, को दूसरी साइड से लुंगी में डाल दिया और अपने हाथ में पापा के टट्टे (बॉल्स) पकड़ लिए और उन्हें सहलाने और उनके नीचे अपने नाखूनों से खुजली जैसे करने लगी.
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पापा और बेटी चलती स्कूटर पर मजे ले रहे थे. मैं प्यार से धीरे धीरे पापा का लौड़ा सेहला रही थी और टट्टे मसल रही थी.

एक बार तो मेरा मन हुआ कि पापा को बोलती हूँ कि स्कूटर तो कहीं साइड में खड़ा कर लें और मैं पापा का लौड़ा चूस कर मजा ले लेती हूँ पर फिर सोचा कि अभी पापा मुझे चोद के आ रहे हैं और अभी घर जा कर रात में मेरी गांड भी मारनी है, तो अभी लौड़ा चूसने को रहने देती हूँ ताकि पापा को भी थोड़ा आराम मिल सके. तो मैंने वो प्रोग्राम अभी स्थगित कर दिया और पापा के लण्ड को सिर्फ सहलाती ही रही.

इसी तरह चलते चलते थोड़ी देर में दवाइयों की दूकान आ गयी.

पापा ने स्कूटर रोक दिया, और मैंने पापा को कहा कि जा कर नींद की गोलियों का पूरा पत्ता ले आएं और कुछ दर्द कम करने की गोलियां भी ले लें.

पापा मुझे बोले

"बेटी! तू पैसे ले जा और जा कर खरीद ले. क्योंकि देख तो सही मेरा लण्ड कितना टाइट हो चूका है. मैं इस तरह लुंगी में तम्बू बनाये हुए कैसे जा सकता हूँ?"

मैं मुस्कुरा पड़ी और हँसके पूछा

"पापा यह आप का लौड़ा कभी बैठेगा भी या सदा ऐसे ही खड़ा रहेगा?"
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पापा भी हँसे

"सुमन! अब तो यह तेरी गांड मार कर ही ढीला होगा. अब जा जल्दी से दवा ले आ."

मैंने जा कर दवाई खरीदी और हम बाप बेटी घर को चल दिए.

घर जाने तक मैंने फिर पापा का लण्ड नहीं पकड़ा, एक तो हम उसे थोड़ा ढीला होने का समय देना चाहते थे क्योंकि घर में मम्मी और नानी थे और दुसरे अब मुख्य सड़क पर भीड़ भी काफी थी.

खैर हम घर आ गए और अपने अपने कमरे में चले गए. मैं पहले से ही छुपा कर ले जाई हुई किताब निकाल ली थी जिस से मम्मी को कोई शक भी नहीं हुआ. वैसे भी हम दोनों बाप बेटी थे तो मम्मी को शक करने का कोई कारण भी नहीं था. हालाँकि उन्हें क्या पता था की हम बाप बेटी किताब लाने के बहाने से क्या काण्ड करके आ रहे हैं.

रात का मुझे बहुत बेसब्री से इन्तजार था. आज राज को मेरी गांड की सील टूटने वाली थी. वो भी मेरे अपने पापा के लौड़े से. मैंने चूत तो फिर भी कई बार मरवाई थी पर गांड कभी नहीं. मैं बहुत खुश थी कि आज मेरी सील मेरे अपने बाप के हाथों (वैसे सही शब्द तो है के बाप के लौड़े से ) टूटने वाली थी.

मैं किचन में जा कर खाना बनाने लगी , गोली भी खा ली।
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मम्मी और नानी ड्राइंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे. पापा भी उनके पास बैठे टीवी देख रहे थे. मै किचन में डिनर की तैयारी कर रही थी ।

पापा से अब मेरे से दूर नहीं रहा जा रहा था तो वो पानी पीने के बहाने से उठ कर आ गए और किचन के दरवाजे पर हाथ रख के खड़ा हो गये और अपने कंधे दरवाजे पर टिका लिये ।
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और अपनी बेटी को खाना बनाती हुई को निहारने लगे । अपने पापा को अपनी ख़ूबसूरती निहारते देखकर मै मन ही मन ख़ुश हुई । फिर पापा की तरफ देखकर बो ली , "पापा , मैंने आज आपके लिये स्पेशल डिनर बनाया है । जितना ज्यादा खा सकते हो , खा लेना । आज रात आपको बहुत एनर्जी की जरुरत पड़ने वाली है ।"

मेरी कामुक बातें सुनकर पापा का लंड अपनी नींद से उठ गया । वो मेरे आकर पीछे गांड से चिपक के मुझे आलिंगन करते हुए मेरा चुम्बन लेने लगे ।

पापा प्यार से मेरे कान में बोले

"तुम्हारे लिये मेरे पास पहले से ही बहुत एनर्जी है बेटी । अगर तुमने मुझे एक्स्ट्रा एनर्जी दे दी तो फिर तुम मुझे झेल नहीं पाओगी और फिर एक हफ्ते तक बेड से उठ नहीं सकोगी , और अगर उठ भी गयी तो लंगड़ा लंगड़ा के चलोगी ।"

जोर से ठहाका लगाते हुए पापा बोले ।

उनकी इस गुस्ताखी पर, मेंने अपने निचले होंठ को दातों में दबाते हुए, शरारत से पापा के पेट में अपनी कोहनी मार दी ।

मेने कहा "पापा! मुझे यह मोटा लौड़ा अपनी गांड की पूरी गहराई में चाहिये… पूरा जड़ तक… फिर मैं आपको सिखाऊँगी कि एक्स्ट्रा एनर्जी क्या हे और मुझे कैसी चुदाई पसंद है… मुझे जोरदार और निर्मम चुदाई पसंद है… कोई दया नहीं …सिर्फ वहशी चुदाई…आज अपनी बेटी को खुश कर देना. बस अब माँ के पास जा कर बैठो, उन्हें शक न हो जाए. "
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पापा ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरा और अपनी एक ऊँगली मेरी गांड के सुराख पर रख कर उसे वहीँ रगड़ने लगे. मैं समझ रही थी कि पापा से रात होने तक का इन्तजार नहीं हो रहा है. मुझे ख़ुशी थी कि एक बार की ही चुदाई से मेरे पापा मुज पर कितने लट्टू हो गए हैं.

मुझे डर लगा कि वासना के जोर में पापा अभी मेरी गांड में ऊँगली ना घुसेड़ दें,

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उनकी ऊँगली सूखी थी और मेरी गांड बिलकुल टाइट. वैसे भी अभी पास में ही ड्राइंग रूम में मम्मी और नानी भी थे, तो कभी भी किसी के भी आ जाने का डर था. तो मैंने अपना हाथ पीछे ले जा कर अपनी गांड पर घूमती पापा की ऊँगली हटा कर पापा को जाने और रात का इन्तजार करने को कहा. पापा फिर से मुझे एक बार चूम कर और मेरे चूतड़ों पर प्यार से हाथ फेर कर चले गए.

फिर रात में हमने खाना खाया. थोड़ी देर टीवी देखा और बातें करते रहे.

हम दोनों बाप बेटी से तो रहा नहीं जा रहा था. तो पापा मुझे बोले

"सुमन! एक काम करो, तुम्हारी मम्मी और नानी भी दूर से आयी हैं और थक गयी होंगी, तुम जा कर दूध गर्म करके ले आओ. सब दूध पी लेंगे. इस से नींद भी अच्छी आती है."

मम्मी दूध पीना तो शायद नहीं चाहती थी, पर नानी के कारण चुप रही, मैं भी पापा की चाल समझ गयी और इससे पहले कि मम्मी कुछ और बोले तुरंत उठ कर किचन में गयी और दूध गर्म किया.

फिर मैंने दो गिलासों में नींद की दो दो गोलियां मिला दी, ताकि माँ और नानी को खूब नींद आये. एक गिलास मैंने पापा के लिए लिया. अपना गिलास मैंने जान बूझ कर नहीं रखा ताकि कहीं मम्मी या नानी उसे न उठा लें.
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मैं दूध ले कर सबसे पहले पापा के पास गयी और सही वाला गिलास उन्हें दे दिया, फिर मैंने नींद की दवा वाले दूध के गिलास मम्मी और नानी को दिए.

पापा ने पूछा "तुम्हारा दूध?'

तो मैंने दूध पीने से मना कर दिया, पर फिर पापा के जोर देने किचन में जा कर अपने लिए भी दूध ले आयी और पीने लगी.

(पापा जानते थे कि मुझे दूध की ताकत की आज रात ज्यादा जरूरत पड़ने वाली है. )
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थोड़ी देर में नानी बोली कि शायद वो रास्ते के सफर से थक गयी हैं और उन्हें नींद आ रही है. मम्मी ने भी नींद आने की बात कही।

तो हम सब अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए.

लगभग आधे घंटे के बाद पापा ने मम्मी को आवाज दी और हिला कर उठाने की कोशिश की पर मम्मी पर तो नींद की गोलियों का असर हो चूका था और वो बेहोश थी. फिर पापा ने नानी के कमरे में जा कर चेक किया, पर नानी भी सारे गधे घोड़े बेच कर सो रही थीं.

पापा खुश हो गए और मेरे कमरे में आ गए.

मैं तो जाने कब से पापा का इन्तजार कर ही रही थी.

तो आखिर मेरी गांड के उद्धघाटन का शुभ महूर्त भी आ ही गया था. वो भी मेरे अपने प्यारे पापा के हाथों (मतलब उनके लौड़े के द्वारा).
 
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