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Incest यह क्या हुआ

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Skb21

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बिंदिया राजेश से चुदने के बाद, राजेश की ओर उनका झुकाओ बढ़ गया।
राजेश जब किसी सेविका से कुछ मंगाती, बिंदिया उस सेविका की जगह खुद राजेश की सेवा में लग जाती। बिंदिया राजेश के आस पास ही दिखाई पड़ने लगीऔर यह बात रत्नवती को खटकने लगी।
रत्नवती _ये बिंदिया कभी रशोई के काम में रूचि नहीं लेती थी। हमेशा दूसरी सेविकाओं पर हुकुम चलाती थी। राजेश के आने के बाद इसे क्या हो गया है। ये राजेश की आवभगत करती रहती है। राजेश को क्या जरूरत है नही है, पूछती रहती है। कभी भोजन नही परोषती थी, अब तो हर चीज राजेश को ही पहले परोस रही है, ठाकुर के सामने ही।पहले तो ये ठाकुर का ही काम करती थी। आखिर इसके अंदर इतना बदलाव कैसा आया? क्यू आया, ये सब बाते रत्नवती सोचने लगी। वह बिंदिया की क्रिया कलापो पर नजरे रखने लगी। और अपनी खास सेविकाओं को भी बिंदिया पर नजर रखने के लिए कह दी।
इधर ठाकुर को भी लगने लगा की बिंदिया मुझे छोड़कर राजेश का ज्यादा ख्याल रखने लगी है वह बिंदिया को अपने कमरे में बुलाकर पूछा।
ठाकुर _बिंदिया ये मै क्या देख रहा हूं। तुम मुझे छोड़कर राजेश के आस पास ज्यादा मंडराने लगी हो। उसकी खातिर दारी कुछ ज्यादा ही कर रही हो। और कुछ ज्यादा ही बन ठन कर रहने लगी हो।
बिंदिया _हुजूर मै तो वहीं कर रही हूं जो आपने कहा था।
ठाकुर _मै कुछ समझा नही।
बिंदिया _हुजूर आपने ही तो कहा था कि राजेश को अपनी जाल में फसाओ। मै वही कर रही हूं। राजेश को फसाने की कोशिश, फिर आपका काम आसान हो जाएगा राजेश पर झूठा इल्जाम लगा कर उसे हवेली से निकलवाने का।
ठाकुर _ओह तो ये बात है, मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। मुझे लग रहा था कि कही मेरे बेटियो और पत्नि की की तरह उस लडके ने तुम पर भी तो कोई जादू नही कर दिया।
बिंदिया _हुजूर ये आप कैसी बाते कर रहे हैं, मै आपके सिवा भला और किसी के बारे में सोच सकती हूं। मै तो सिर्फ आपकी हूं और आपकी ही बनकर रहूंगी।
ठाकुर _ये हुई न बात। चल काफी दिन हो गया, आज मुझे खुश करदे।
ठाकुर बिंदिया को चोदने लगा।
बिंदिया ठाकुर से बेमन से chud रही थी उसे मजा नही आ रहा था।
Chudai खत्म होने के बाद।
ठाकुर _बिंदिया तुम उस लड़के को जल्द से जल्द अपनी जाल में फसाओ। फिर साले को धक्का मार के उसे बाहर भगाएंगे।
बिंदिया _जी हुजूर मै इसी काम में लगी हूं।
ठाकुर _हा और मुनीम की बेटी दिया को भी मेरे बिस्तर तक लाने पर काम करो, साली क्या माल है जब से पार्टी में देखा है मेरे दिल में उतर गई है। क्या वो हवेली में आती है।
बिंदिया _जी हुजूर दिया तो हवेली आती रहती है। राजेश से कुछ परीक्षा की तैयारी के लिए, पुस्तक खोल कर, राजेश को समझाने कहती हैं, दोनो हस हस कर इधर उधर की बाते भी करते रहते हैं।हुजूर कही ऐसा न हो दिया, तुम्हारी तरह राजेश के दिल में उतर गया तो। आप हाथ मलते रह जायेंगे।
ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो।
बिंदिया _हुजूर जो कह रही हूं सच कह रही हूं।
ठाकुर _मुनीम जी को बताना पड़ेगा।

बिंदिया _जी हुजूर,इससे पहले की दोनो के बीच कोई चक्कर चल जाय। आप मुनीम जी को बोलिए, वह दिया को राजेश से दुर रहने को कहे।


एक दिन दोपहर में राजेश का दोपहर में ही chudai का मन बन गया। बिंदिया आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। राजेश से रहा न गया। वह सोफे पर बैठा था। बिंदिया पानी लेकर आई। राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।
और बिंदिया की चूची मसलने लगा।
बिंदिया _दामाद बाबू आज तो बड़े मूड में लग रहे हो।
छोड़ों कोई देख लेगा तो, तुम्हारी बदनामी हो जाएगी,,,
राजेश _आज तो बड़ी हॉट लग रही हो काकी,, छोड़ने का मन नही कर रहा है।
बिंदिया _अगर इतना ही मन कर रहा है तो चलो मेरे कमरे में, पर यहां नही,,, कही तुम्हारी सास को पता न चल जाए।
राजेश _अच्छा तो चलो फिर,,,
राजेश बिंदिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाज़ा बंद कर दी।
इस सब घटना को रत्नवती की खास सेविका देख ली। इस बात की जानकारी उसने रत्नवती को दी।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रही हो,
सेविका _रानी मां मैने जो भी बात बताई बिलकुल सच है आप खुद भी जाकर देख सकती हैं।
रत्ना vati सेविका के साथ बिंदिया की कमरे तक गई।
कमरे की दरवाज़ा पर कान लगाकार, सुनने की कोशिश की। कमरे के अंदर बिंदिया की सिसकारी और चीखे सुनकर उसे यकिन नही huwa
रत्नवती_हे भगवान आखिर वही huwa जिसका डर था। ये बिंदिया पहले तो ठाकुर को अपने जाल में फसाया और अब राजेश को। इस बात का पता दिव्या को चला तो पता नही उस पर क्या बीतेगी।
इस चुड़ैल ने मेरी जिंदगी खराब की तो की मै अपनी बेटी की जिंदगी को खराब होने नही दूंगी।
रत्नवती अपने कमरे में आई और सोचने लगी की उसे क्या करना चाहिए।
उसने सोचा क्या इस बात की जानकारी दिव्या को दू।
फिर सोचा की दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है अगर यह बात दिव्या को पता चला कि उसका पति अधेड़ महिला के साथ रंगरेलियां मना रहा है, उसकी क्या दशा होगी। उसके बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नही मै दिव्या को यह बात नहीं बताऊंगी।
मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे राजेश से बात करनी होगी।
राजेश जब बिंदिया की chudai करके, कही बाहर जा रहा था। तभी सेविका ने उससे कहा।
सेविका _राजेश भईया आपको रानी मां अपने कमरे में बुलाई है।
राजेश _क्या सासू मां मुझे,,,
सेविका _हां,,,
राजेश रत्नवती के कमरे में गया।
राजेश_रानी मां आपने मुझे बुलाया, कुछ काम था क्या?
रत्नवती_हां, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
राजेश _मां जी क्या huwa आप कुछ नाराज लग रही है। क्या बात है मुझसे कोई गलती हो गई क्या?
रत्नवती_दामाद जी ये जो तुम कर रहे हो न, ये बिलकुल गलत है।
राजेश _क्या मां जी, मै क्या गलत कर रहा हूं, मै समझा नही।
रत्नवती_तुम भोले मत बनो, मुझे सब पता चल गया है तुम्हारे और बिंदिया के बीच क्या चल रहा है।
राजेश _ओह तो आप इसलिए मुझसे नाराज हो।
रत्नवती_कभी सोचा है अगर यह बात दिव्या को पता चली तो उस पर क्या बीतेगी?
राजेश _मां जी आप दिव्या की चिंता न करो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रत्नवती_मै दिव्या की मां हूं, मै उसकी चिंता नही करूंगी तो और कौन करेगा। वैसे तुम ये क्यो कह रहे हो कि दिव्या को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
राजेश _क्यों की दिव्या जी को यह बात पता है?
रत्नवती_क्या, दिव्या को यह बात पता है?
राजेश _हां, दिव्या ने ही मुझे यहां की सेविका के साथ संबंध रखने को कहा।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रहे हो, मै कुछ समझी नहीं, दिव्या भला तुम्हे दूसरे औरतों से संबंध बनाने क्यों कहेगी।
राजेश _मां जी, आपको तो पता है सुहागरात के दिन की घटना। उस घटना के बाद डॉक्टर ने हमें संबंध बनाने से मना किया है। नही तो बच्चा गिर सकता है।
उस दिन के बाद हमने फिर संबंध नही बनाए।
लेकिन दिव्या को ये फिल होने लगा की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है।
कभीकभी मै दिव्या जी को अपने क़रीब पा कर उत्तेजित हो जाता था। मै रात में ठीक से सो नही पाता था।
दिव्या अपने को दोष देने लगी की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है। इसलिए उसने ही यह निर्णय लिया की जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, तुम इस हवेली की सेविका के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर सकते हो।
मैने उसे समझाया कीमेरी चिंता मत करों, मै खुद पर नियंत्रण रख लूंगा, लेकिन दिव्या नही मानी और वह खुद बिंदिया काकी से जाकर मेरी शारीरिक जरूरत को पुरा करने के लिए बोली तो काकी मान गई।
उसके बाद मैं और बिंदियां काकी संबंध बनाने लगे।
रत्नवती_, मुझे दिव्या ये बात बताई नही।
राजेश _मां जी आप उसकी मां है उसे लगा होगा की यह बात अगर आपको बताई तो आप इसके लिए साफ मना कर देंगी। इसलिए नही बताई होंगी।
रत्नवती_कोई मां ये कैसे स्वीकार करेगी की उसका दामाद उसकी बेटी को छोड़कर किसी पराई औरत से संबंध रखे।
और वो भी उस बिंदियां जैसी औरत से, तुम्हे पता भी है वो कैसी औरत है?
रत्नवती_देखो राजेश बेटा, वो बिंदियां अच्छी औरत नही है, वो तुम्हे बदनाम कर देगी। वो ठाकुर की रखैल है। वो तुम्हे मुसीबत में डाल देगी।
तुम्हे बिंदिया से दुर रहना होगा।
राजेश _ठीक है मां जी अगर आप चाहती है की मै बिंदियां काकी से दुर रहूं तो आपका आदेश का पालन होगा।
रत्नवती_क्या तुम सच कह रहे हो?
राजेश _हां मां जी,,, पर,,,
रत्नवती_पर क्या दामाद जी,,,
राजेश _मां जी आखिर मैं भी तो इंसान हूं न, दिव्या जी के डीलवरी तक खुद पर नियंत्रण रख पाना,,, आप तो समझ ही गई होगी,,,
रत्नवती_अच्छा ठीक है मेरी एक विश्वाश पात्र सेविका है, तुम उसके साथ अपनी जरूरतें पूरी कर लेना ।
राजेश _मां जी क्या वो सेविका जवान है?
रत्नवती_हां तो, ते तो तुम्हारे लिए अच्छा है न, उस बुढ़िया बिंदिया मे से तो अच्छी है।
राजेश _मां जी कही वह सेविका, किसी दूसरे से पेट से होकर मुझ पर इल्जाम डाल दी तो,,, वह जवान है तो किसी के साथ तो उसका संबंध होगा न।
रत्नवती_तो तुम क्या चाहते हो।
राजेश _मै तो यही चाहता हूं जो आप चाहती हो, हवेली की बदनामी न हो।
अच्छा आप इधर आईए मै आपसे कुछ सवाल पूछता हूं।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर उसे बेड में बिठा कर, उसके बाजू में बैठ गया।
राजेश _अच्छा ये बताओ आप दिव्या की मां हो न।
रत्नवती_ये भी कोई पुछने की बात है।
राजेश _जब दामाद की देखभाल बेटी न कर पाए तो बेटी का घर बचाने के लिए दामाद का ख्याल बेटी की मां रखे तो क्या ये गलत होगा।
रत्नवती_दामाद जी ये तुम क्या कह रहे हो?रत्नवती शर्म से पानी पानी होते हुए अपनी नजरे नीचे झुका ली।
राजेश _मां जी आप भी तो मेरी जरूरत पूरी कर सकती हों न, अगर आपको बिंदिया काकी पर भरोसा नहीं है तो।
दामाद का ख्याल सासू मां से अच्छा और कौन रख सकता है।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर चूम लिया।
अब बेटी का फर्ज तो मां को ही पुरा करना पड़ेगा।
बोलो न मां जी,,,
रत्नवती सोच में पड़ गई,,,
राजेश _मां जी क्या सोचने लगी आप,,,
रत्नवती बेड से खड़ा हो गई।
रत्नवती_दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, ये गलत है।
राजेश भी बेड से उतर कर रत्नवती को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।
राजेश _मां जी कुछ गलत नहीं है।
रत्नवती का दिल जोरो से धड़कने लगा।
रत्नवती_बेटा छोड़ों न किसी के पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।
राजेश _मां जी ये बात किसी जो पता नहीं चलेगा। और रही बात दिव्या की तो मुझे पता है दिव्या हमारे बीच नए संबंध को वो स्वीकार लेगी।
राजेश ने रत्नवती की खुली पीठ को चूम लिया।
रत्नवती सिसक उठी ।
रत्नवती_दामाद जी, यहां तो जवान और खूबसूरत सेविकाय है, मै तो बूढ़ी हो गई हूं।
राजेश रत्नवती को आईने के सामने ले गया।
राजेश _ मां जी,खुद को देखो आईने में, आप दिव्या और गीता जी की मां नही बड़ी बहन लगती है।
राजेश ने एक रत्नवती को जकड़ कर एक स्तन दबाते हुए कहा।
देखो कितनी कसावट है अब भी आपकी स्तनों में बिलकुल कुंवारी लड़कियो की तरह।
रत्नवती , सिसक उठी उसकी दिल की धड़कन बहुत बड़ गई। राजेश की हरकत से उसकी योनि में पानी भर गया।
रत्नवती_दामाद जी मुझे सोचने का वक्त दो।
राजेश ने रत्नवती को छोड़ दिया।
राजेश _ठीक है मां जी, कोई जबरदस्ती नही है, आपकी मर्जी, अगर राजी हो तो कल पिंक कलर की साड़ी पहनना मै समझ जाऊंगा आप तैयार है।
अब मैं चलू,,
रत्नवती ने अपना हा में सिर हिलाया।
राजेश काम से सूरज पुर चला गया।
रात में राजेश घर आया।
रात्रि में भोजन के समय रत्नवती राजेश के सामने ही डाइनिंग टेबल में भोजन करने बैठी थी पर उसे राजेश के सामने बहुत शर्म महसूस कर रही थी।
भोजन पश्चात रत्नवती अपने कमरे में चली गई। वह रात भर सोचती रही वह राजेश के साथ नया रिश्ता शुरू करे की नही।
उसने सोंचा की राजेश को अगर न कह दी तो वह नाराज न हो जाए और वह मेरा कहना भी नही मानेगा। वह उस बिंदिया की जाल में फस जायेगा। नही नही मैं अपनी बेटी की जिंदगी बरबाद होने नही दे सकती। मै उसकी मां हूं। मेरी बेटी दामाद जी की शारीरिक जरूरत पुरा नही नही कर पा रही है तो मेरा भी फर्ज बनता है अपनी बेटी का घर बचाने दामाद जी की ईच्छा पूरी करू।
रत्नवती सुबह उठी आज नहाने से पहले अपने शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से हटाईऔर खूब रगड़ रगड़ कर नहाई। ठाकुर ने रत्नवती को जब से दिव्या को पेट में थी चोदना बन्द कर दिया था। तब से रत्नवती ने chut की बाल साफ़ नही की थी।
नहाने के बाद रत्नवती,
गुलाबी साड़ी पहन कर सेविकाओं से श्रृंगार करवाई।
आज बहुत ही खुबसूरत लग रही थी।
उसने सेविकाओं से राजेश के बारे में पूछा वो कहा है ताकि वह राजेश को दिखा सके।
सेविकाओं ने कहा वो किसी काम से बाहर चला गया है।
दिव्या ने जब ने जब अपनी मां को इस रूप में देखा।
दिव्या _मां आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो। कही जा रही हो क्या?
रत्नवती को समझ नही आ रहा था कि क्या कहे, उसने कह दी बेटी काफी दिन हो गए न हम मंदिर नही गए तो सोची चलो मंदिर चले जाते है जाओ तुम भी तैयार हो जाओ।
दिव्या _मां पहले बताती तो राजेश को बाहर जाने से रोक लेती वो भी चला जाता हमारे साथ।
कोई बात नही बेटी हम दोनों चलें जायेंगे। तुम राजेश को फोन कर देना वो मंदिर आ जायेगा।
दिव्या _ठीक है मां।
राजेश को दिव्या ने फोन कर मंदिर बुलाया।
राजेश जब रत्नवती को गुलाबी साड़ी में देखा तो। मुस्कुराने लगा।
रत्नवती शर्म से सिर झुका ली।
मंदिर में दर्शन के बाद। दिव्या और रत्नवती कार से घर आ गए।
राजेश को कुछ काम था वह सूरज पुर चला गया।
राजेश के लंद में अभी से हल चल होने लगा। राजेश नअपने लंद को सहलाते हुए कहा। शाला रात होने का इन्तजार तो कर सासू मां के अंदर जाने अभी से छटपटा रहा है।
रत्नवती हवेली आने के बाद राजेश के बारे e ही सोचने लगी पता नहीं राजेश क्या क्या करेगा उसके साथ। उसकी योनि गीली हो चुकी थी। पतानहीं राजेशके साथ वो सब कैसेकर पाएगी, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।
वर्षो बाद उसकी शरीर की औरत जाग उठी थी। ठाकुर ने उसे आखिरी बार कब चोदा था। भुल गई थी।
राजेश हवेली लौटा।
रात में सभी लोग भोजन के लिए बैठे थे। ठाकुर भी बैठा था।
राजेश और रत्नवती आमने सामने बैठे थे।
रत्नवती राजेश से नजरे बचा रही थी।
राजेश को मजाक सूझा।
उसने अपने पैर से रत्नवती की पैर को रगड़ते लगा।
रत्नवती चौंकी, वह राजेश की ओर तिरछी नजरों से देखि।
सबकी नजरों से बचा कर न में सिर हिलाई।
पर राजेश नही माना, उसे मजा आ रहा था। वह रत्ना वटी की पैरो को अपने पैर से रगड़ने हुवे ऊपर ले जाने लगा।
रत्नवती सिसक उठी।
गीता _मां क्या हुआ?
राजेश _लगता है सासू मां को मिर्ची लग गई।
रत्नवती गुस्से से राजेश की ओर देखने लगा। राजेश ने उसे आंख मार दी।
रत्ना वटी का मुंह खुला का खुला रह गया।
वैसे रत्नवती को राजेश की छेड़ खानी अच्छा लग रहा था जब कि ठाकुर भी वहीं बैठा था उसे पता नही था सास और दामाद के बीच क्या चल रहा है।
राजेश को रत्नवती को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।
वह अपना पैर ऊपर रत्नवती के टांगो तक ले गया। और अपने अंगूठे से उसकी पैंटी को रगड़ दिया ।
रत्नवती फिर सिसक उठी।
गीता _मां लगता हैं आपको कुछ ज्यादा मिर्ची लगी है लो पानी पी लो।
रत्नवती _हूं,
रत्नवती चुपचाप पानी पीने लगी और राजेश को तिरछी नजरों से घूरने लगी।
राजेश मुस्कुराने लगा।
राजेश अपनी एक कान पकड़ लिया। और इशारे से माफ़ी मांगा ।
रत्नवती मुस्कुराने लगी।
Akhir Ratnavati ki chudai ka number aahi gaya fir Geeta bhi chudegi waiting for next
 
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बिंदिया राजेश से चुदने के बाद, राजेश की ओर उनका झुकाओ बढ़ गया।
राजेश जब किसी सेविका से कुछ मंगाती, बिंदिया उस सेविका की जगह खुद राजेश की सेवा में लग जाती। बिंदिया राजेश के आस पास ही दिखाई पड़ने लगीऔर यह बात रत्नवती को खटकने लगी।
रत्नवती _ये बिंदिया कभी रशोई के काम में रूचि नहीं लेती थी। हमेशा दूसरी सेविकाओं पर हुकुम चलाती थी। राजेश के आने के बाद इसे क्या हो गया है। ये राजेश की आवभगत करती रहती है। राजेश को क्या जरूरत है नही है, पूछती रहती है। कभी भोजन नही परोषती थी, अब तो हर चीज राजेश को ही पहले परोस रही है, ठाकुर के सामने ही।पहले तो ये ठाकुर का ही काम करती थी। आखिर इसके अंदर इतना बदलाव कैसा आया? क्यू आया, ये सब बाते रत्नवती सोचने लगी। वह बिंदिया की क्रिया कलापो पर नजरे रखने लगी। और अपनी खास सेविकाओं को भी बिंदिया पर नजर रखने के लिए कह दी।
इधर ठाकुर को भी लगने लगा की बिंदिया मुझे छोड़कर राजेश का ज्यादा ख्याल रखने लगी है वह बिंदिया को अपने कमरे में बुलाकर पूछा।
ठाकुर _बिंदिया ये मै क्या देख रहा हूं। तुम मुझे छोड़कर राजेश के आस पास ज्यादा मंडराने लगी हो। उसकी खातिर दारी कुछ ज्यादा ही कर रही हो। और कुछ ज्यादा ही बन ठन कर रहने लगी हो।
बिंदिया _हुजूर मै तो वहीं कर रही हूं जो आपने कहा था।
ठाकुर _मै कुछ समझा नही।
बिंदिया _हुजूर आपने ही तो कहा था कि राजेश को अपनी जाल में फसाओ। मै वही कर रही हूं। राजेश को फसाने की कोशिश, फिर आपका काम आसान हो जाएगा राजेश पर झूठा इल्जाम लगा कर उसे हवेली से निकलवाने का।
ठाकुर _ओह तो ये बात है, मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। मुझे लग रहा था कि कही मेरे बेटियो और पत्नि की की तरह उस लडके ने तुम पर भी तो कोई जादू नही कर दिया।
बिंदिया _हुजूर ये आप कैसी बाते कर रहे हैं, मै आपके सिवा भला और किसी के बारे में सोच सकती हूं। मै तो सिर्फ आपकी हूं और आपकी ही बनकर रहूंगी।
ठाकुर _ये हुई न बात। चल काफी दिन हो गया, आज मुझे खुश करदे।
ठाकुर बिंदिया को चोदने लगा।
बिंदिया ठाकुर से बेमन से chud रही थी उसे मजा नही आ रहा था।
Chudai खत्म होने के बाद।
ठाकुर _बिंदिया तुम उस लड़के को जल्द से जल्द अपनी जाल में फसाओ। फिर साले को धक्का मार के उसे बाहर भगाएंगे।
बिंदिया _जी हुजूर मै इसी काम में लगी हूं।
ठाकुर _हा और मुनीम की बेटी दिया को भी मेरे बिस्तर तक लाने पर काम करो, साली क्या माल है जब से पार्टी में देखा है मेरे दिल में उतर गई है। क्या वो हवेली में आती है।
बिंदिया _जी हुजूर दिया तो हवेली आती रहती है। राजेश से कुछ परीक्षा की तैयारी के लिए, पुस्तक खोल कर, राजेश को समझाने कहती हैं, दोनो हस हस कर इधर उधर की बाते भी करते रहते हैं।हुजूर कही ऐसा न हो दिया, तुम्हारी तरह राजेश के दिल में उतर गया तो। आप हाथ मलते रह जायेंगे।
ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो।
बिंदिया _हुजूर जो कह रही हूं सच कह रही हूं।
ठाकुर _मुनीम जी को बताना पड़ेगा।

बिंदिया _जी हुजूर,इससे पहले की दोनो के बीच कोई चक्कर चल जाय। आप मुनीम जी को बोलिए, वह दिया को राजेश से दुर रहने को कहे।


एक दिन दोपहर में राजेश का दोपहर में ही chudai का मन बन गया। बिंदिया आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। राजेश से रहा न गया। वह सोफे पर बैठा था। बिंदिया पानी लेकर आई। राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।
और बिंदिया की चूची मसलने लगा।
बिंदिया _दामाद बाबू आज तो बड़े मूड में लग रहे हो।
छोड़ों कोई देख लेगा तो, तुम्हारी बदनामी हो जाएगी,,,
राजेश _आज तो बड़ी हॉट लग रही हो काकी,, छोड़ने का मन नही कर रहा है।
बिंदिया _अगर इतना ही मन कर रहा है तो चलो मेरे कमरे में, पर यहां नही,,, कही तुम्हारी सास को पता न चल जाए।
राजेश _अच्छा तो चलो फिर,,,
राजेश बिंदिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाज़ा बंद कर दी।
इस सब घटना को रत्नवती की खास सेविका देख ली। इस बात की जानकारी उसने रत्नवती को दी।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रही हो,
सेविका _रानी मां मैने जो भी बात बताई बिलकुल सच है आप खुद भी जाकर देख सकती हैं।
रत्ना vati सेविका के साथ बिंदिया की कमरे तक गई।
कमरे की दरवाज़ा पर कान लगाकार, सुनने की कोशिश की। कमरे के अंदर बिंदिया की सिसकारी और चीखे सुनकर उसे यकिन नही huwa
रत्नवती_हे भगवान आखिर वही huwa जिसका डर था। ये बिंदिया पहले तो ठाकुर को अपने जाल में फसाया और अब राजेश को। इस बात का पता दिव्या को चला तो पता नही उस पर क्या बीतेगी।
इस चुड़ैल ने मेरी जिंदगी खराब की तो की मै अपनी बेटी की जिंदगी को खराब होने नही दूंगी।
रत्नवती अपने कमरे में आई और सोचने लगी की उसे क्या करना चाहिए।
उसने सोचा क्या इस बात की जानकारी दिव्या को दू।
फिर सोचा की दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है अगर यह बात दिव्या को पता चला कि उसका पति अधेड़ महिला के साथ रंगरेलियां मना रहा है, उसकी क्या दशा होगी। उसके बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नही मै दिव्या को यह बात नहीं बताऊंगी।
मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे राजेश से बात करनी होगी।
राजेश जब बिंदिया की chudai करके, कही बाहर जा रहा था। तभी सेविका ने उससे कहा।
सेविका _राजेश भईया आपको रानी मां अपने कमरे में बुलाई है।
राजेश _क्या सासू मां मुझे,,,
सेविका _हां,,,
राजेश रत्नवती के कमरे में गया।
राजेश_रानी मां आपने मुझे बुलाया, कुछ काम था क्या?
रत्नवती_हां, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
राजेश _मां जी क्या huwa आप कुछ नाराज लग रही है। क्या बात है मुझसे कोई गलती हो गई क्या?
रत्नवती_दामाद जी ये जो तुम कर रहे हो न, ये बिलकुल गलत है।
राजेश _क्या मां जी, मै क्या गलत कर रहा हूं, मै समझा नही।
रत्नवती_तुम भोले मत बनो, मुझे सब पता चल गया है तुम्हारे और बिंदिया के बीच क्या चल रहा है।
राजेश _ओह तो आप इसलिए मुझसे नाराज हो।
रत्नवती_कभी सोचा है अगर यह बात दिव्या को पता चली तो उस पर क्या बीतेगी?
राजेश _मां जी आप दिव्या की चिंता न करो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रत्नवती_मै दिव्या की मां हूं, मै उसकी चिंता नही करूंगी तो और कौन करेगा। वैसे तुम ये क्यो कह रहे हो कि दिव्या को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
राजेश _क्यों की दिव्या जी को यह बात पता है?
रत्नवती_क्या, दिव्या को यह बात पता है?
राजेश _हां, दिव्या ने ही मुझे यहां की सेविका के साथ संबंध रखने को कहा।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रहे हो, मै कुछ समझी नहीं, दिव्या भला तुम्हे दूसरे औरतों से संबंध बनाने क्यों कहेगी।
राजेश _मां जी, आपको तो पता है सुहागरात के दिन की घटना। उस घटना के बाद डॉक्टर ने हमें संबंध बनाने से मना किया है। नही तो बच्चा गिर सकता है।
उस दिन के बाद हमने फिर संबंध नही बनाए।
लेकिन दिव्या को ये फिल होने लगा की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है।
कभीकभी मै दिव्या जी को अपने क़रीब पा कर उत्तेजित हो जाता था। मै रात में ठीक से सो नही पाता था।
दिव्या अपने को दोष देने लगी की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है। इसलिए उसने ही यह निर्णय लिया की जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, तुम इस हवेली की सेविका के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर सकते हो।
मैने उसे समझाया कीमेरी चिंता मत करों, मै खुद पर नियंत्रण रख लूंगा, लेकिन दिव्या नही मानी और वह खुद बिंदिया काकी से जाकर मेरी शारीरिक जरूरत को पुरा करने के लिए बोली तो काकी मान गई।
उसके बाद मैं और बिंदियां काकी संबंध बनाने लगे।
रत्नवती_, मुझे दिव्या ये बात बताई नही।
राजेश _मां जी आप उसकी मां है उसे लगा होगा की यह बात अगर आपको बताई तो आप इसके लिए साफ मना कर देंगी। इसलिए नही बताई होंगी।
रत्नवती_कोई मां ये कैसे स्वीकार करेगी की उसका दामाद उसकी बेटी को छोड़कर किसी पराई औरत से संबंध रखे।
और वो भी उस बिंदियां जैसी औरत से, तुम्हे पता भी है वो कैसी औरत है?
रत्नवती_देखो राजेश बेटा, वो बिंदियां अच्छी औरत नही है, वो तुम्हे बदनाम कर देगी। वो ठाकुर की रखैल है। वो तुम्हे मुसीबत में डाल देगी।
तुम्हे बिंदिया से दुर रहना होगा।
राजेश _ठीक है मां जी अगर आप चाहती है की मै बिंदियां काकी से दुर रहूं तो आपका आदेश का पालन होगा।
रत्नवती_क्या तुम सच कह रहे हो?
राजेश _हां मां जी,,, पर,,,
रत्नवती_पर क्या दामाद जी,,,
राजेश _मां जी आखिर मैं भी तो इंसान हूं न, दिव्या जी के डीलवरी तक खुद पर नियंत्रण रख पाना,,, आप तो समझ ही गई होगी,,,
रत्नवती_अच्छा ठीक है मेरी एक विश्वाश पात्र सेविका है, तुम उसके साथ अपनी जरूरतें पूरी कर लेना ।
राजेश _मां जी क्या वो सेविका जवान है?
रत्नवती_हां तो, ते तो तुम्हारे लिए अच्छा है न, उस बुढ़िया बिंदिया मे से तो अच्छी है।
राजेश _मां जी कही वह सेविका, किसी दूसरे से पेट से होकर मुझ पर इल्जाम डाल दी तो,,, वह जवान है तो किसी के साथ तो उसका संबंध होगा न।
रत्नवती_तो तुम क्या चाहते हो।
राजेश _मै तो यही चाहता हूं जो आप चाहती हो, हवेली की बदनामी न हो।
अच्छा आप इधर आईए मै आपसे कुछ सवाल पूछता हूं।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर उसे बेड में बिठा कर, उसके बाजू में बैठ गया।
राजेश _अच्छा ये बताओ आप दिव्या की मां हो न।
रत्नवती_ये भी कोई पुछने की बात है।
राजेश _जब दामाद की देखभाल बेटी न कर पाए तो बेटी का घर बचाने के लिए दामाद का ख्याल बेटी की मां रखे तो क्या ये गलत होगा।
रत्नवती_दामाद जी ये तुम क्या कह रहे हो?रत्नवती शर्म से पानी पानी होते हुए अपनी नजरे नीचे झुका ली।
राजेश _मां जी आप भी तो मेरी जरूरत पूरी कर सकती हों न, अगर आपको बिंदिया काकी पर भरोसा नहीं है तो।
दामाद का ख्याल सासू मां से अच्छा और कौन रख सकता है।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर चूम लिया।
अब बेटी का फर्ज तो मां को ही पुरा करना पड़ेगा।
बोलो न मां जी,,,
रत्नवती सोच में पड़ गई,,,
राजेश _मां जी क्या सोचने लगी आप,,,
रत्नवती बेड से खड़ा हो गई।
रत्नवती_दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, ये गलत है।
राजेश भी बेड से उतर कर रत्नवती को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।
राजेश _मां जी कुछ गलत नहीं है।
रत्नवती का दिल जोरो से धड़कने लगा।
रत्नवती_बेटा छोड़ों न किसी के पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।
राजेश _मां जी ये बात किसी जो पता नहीं चलेगा। और रही बात दिव्या की तो मुझे पता है दिव्या हमारे बीच नए संबंध को वो स्वीकार लेगी।
राजेश ने रत्नवती की खुली पीठ को चूम लिया।
रत्नवती सिसक उठी ।
रत्नवती_दामाद जी, यहां तो जवान और खूबसूरत सेविकाय है, मै तो बूढ़ी हो गई हूं।
राजेश रत्नवती को आईने के सामने ले गया।
राजेश _ मां जी,खुद को देखो आईने में, आप दिव्या और गीता जी की मां नही बड़ी बहन लगती है।
राजेश ने एक रत्नवती को जकड़ कर एक स्तन दबाते हुए कहा।
देखो कितनी कसावट है अब भी आपकी स्तनों में बिलकुल कुंवारी लड़कियो की तरह।
रत्नवती , सिसक उठी उसकी दिल की धड़कन बहुत बड़ गई। राजेश की हरकत से उसकी योनि में पानी भर गया।
रत्नवती_दामाद जी मुझे सोचने का वक्त दो।
राजेश ने रत्नवती को छोड़ दिया।
राजेश _ठीक है मां जी, कोई जबरदस्ती नही है, आपकी मर्जी, अगर राजी हो तो कल पिंक कलर की साड़ी पहनना मै समझ जाऊंगा आप तैयार है।
अब मैं चलू,,
रत्नवती ने अपना हा में सिर हिलाया।
राजेश काम से सूरज पुर चला गया।
रात में राजेश घर आया।
रात्रि में भोजन के समय रत्नवती राजेश के सामने ही डाइनिंग टेबल में भोजन करने बैठी थी पर उसे राजेश के सामने बहुत शर्म महसूस कर रही थी।
भोजन पश्चात रत्नवती अपने कमरे में चली गई। वह रात भर सोचती रही वह राजेश के साथ नया रिश्ता शुरू करे की नही।
उसने सोंचा की राजेश को अगर न कह दी तो वह नाराज न हो जाए और वह मेरा कहना भी नही मानेगा। वह उस बिंदिया की जाल में फस जायेगा। नही नही मैं अपनी बेटी की जिंदगी बरबाद होने नही दे सकती। मै उसकी मां हूं। मेरी बेटी दामाद जी की शारीरिक जरूरत पुरा नही नही कर पा रही है तो मेरा भी फर्ज बनता है अपनी बेटी का घर बचाने दामाद जी की ईच्छा पूरी करू।
रत्नवती सुबह उठी आज नहाने से पहले अपने शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से हटाईऔर खूब रगड़ रगड़ कर नहाई। ठाकुर ने रत्नवती को जब से दिव्या को पेट में थी चोदना बन्द कर दिया था। तब से रत्नवती ने chut की बाल साफ़ नही की थी।
नहाने के बाद रत्नवती,
गुलाबी साड़ी पहन कर सेविकाओं से श्रृंगार करवाई।
आज बहुत ही खुबसूरत लग रही थी।
उसने सेविकाओं से राजेश के बारे में पूछा वो कहा है ताकि वह राजेश को दिखा सके।
सेविकाओं ने कहा वो किसी काम से बाहर चला गया है।
दिव्या ने जब ने जब अपनी मां को इस रूप में देखा।
दिव्या _मां आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो। कही जा रही हो क्या?
रत्नवती को समझ नही आ रहा था कि क्या कहे, उसने कह दी बेटी काफी दिन हो गए न हम मंदिर नही गए तो सोची चलो मंदिर चले जाते है जाओ तुम भी तैयार हो जाओ।
दिव्या _मां पहले बताती तो राजेश को बाहर जाने से रोक लेती वो भी चला जाता हमारे साथ।
कोई बात नही बेटी हम दोनों चलें जायेंगे। तुम राजेश को फोन कर देना वो मंदिर आ जायेगा।
दिव्या _ठीक है मां।
राजेश को दिव्या ने फोन कर मंदिर बुलाया।
राजेश जब रत्नवती को गुलाबी साड़ी में देखा तो। मुस्कुराने लगा।
रत्नवती शर्म से सिर झुका ली।
मंदिर में दर्शन के बाद। दिव्या और रत्नवती कार से घर आ गए।
राजेश को कुछ काम था वह सूरज पुर चला गया।
राजेश के लंद में अभी से हल चल होने लगा। राजेश नअपने लंद को सहलाते हुए कहा। शाला रात होने का इन्तजार तो कर सासू मां के अंदर जाने अभी से छटपटा रहा है।
रत्नवती हवेली आने के बाद राजेश के बारे e ही सोचने लगी पता नहीं राजेश क्या क्या करेगा उसके साथ। उसकी योनि गीली हो चुकी थी। पतानहीं राजेशके साथ वो सब कैसेकर पाएगी, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।
वर्षो बाद उसकी शरीर की औरत जाग उठी थी। ठाकुर ने उसे आखिरी बार कब चोदा था। भुल गई थी।
राजेश हवेली लौटा।
रात में सभी लोग भोजन के लिए बैठे थे। ठाकुर भी बैठा था।
राजेश और रत्नवती आमने सामने बैठे थे।
रत्नवती राजेश से नजरे बचा रही थी।
राजेश को मजाक सूझा।
उसने अपने पैर से रत्नवती की पैर को रगड़ते लगा।
रत्नवती चौंकी, वह राजेश की ओर तिरछी नजरों से देखि।
सबकी नजरों से बचा कर न में सिर हिलाई।
पर राजेश नही माना, उसे मजा आ रहा था। वह रत्ना वटी की पैरो को अपने पैर से रगड़ने हुवे ऊपर ले जाने लगा।
रत्नवती सिसक उठी।
गीता _मां क्या हुआ?
राजेश _लगता है सासू मां को मिर्ची लग गई।
रत्नवती गुस्से से राजेश की ओर देखने लगा। राजेश ने उसे आंख मार दी।
रत्ना वटी का मुंह खुला का खुला रह गया।
वैसे रत्नवती को राजेश की छेड़ खानी अच्छा लग रहा था जब कि ठाकुर भी वहीं बैठा था उसे पता नही था सास और दामाद के बीच क्या चल रहा है।
राजेश को रत्नवती को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।
वह अपना पैर ऊपर रत्नवती के टांगो तक ले गया। और अपने अंगूठे से उसकी पैंटी को रगड़ दिया ।
रत्नवती फिर सिसक उठी।
गीता _मां लगता हैं आपको कुछ ज्यादा मिर्ची लगी है लो पानी पी लो।
रत्नवती _हूं,
रत्नवती चुपचाप पानी पीने लगी और राजेश को तिरछी नजरों से घूरने लगी।
राजेश मुस्कुराने लगा।
राजेश अपनी एक कान पकड़ लिया। और इशारे से माफ़ी मांगा ।
रत्नवती मुस्कुराने लगी।
 

sunoanuj

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राजेश और दिव्या दोनो के ठाकुर अपने साथ हवेली लेकर चले गए। वह ठाकुर खुश हो रहा था उसे लग रहा था कि उसका चाल कामयाब हों गया है।
अगले दिन ठाकुर नई हवेली में भव्य पार्टी का आयोजन किया।
पार्टी में अपने क्षेत्र के सभी प्रमुख लोगो को आमन्त्रित किया। ताकि सभी लोग यह जान सके की राजेश ठाकुर का दामाद है, और राजेश अब ठाकुर का समर्थन करेगा। उसके खिलाफ जो लोगो में नाराजगी है वह दूर हो जाएगी।
सभी मेहमान, राजेश और दिव्या को शादी की शुभकामनाएं दे रहे थे।
तभी मुनीम के पत्नी और उसकी बेटी भी पार्टी में पहुंची।
मुनीम की बेटी दिया बहुत ही खुबसूरत थी वह पोस्ट ग्रेजुएट की पढाई कार कुछ दिन पहले ही गांव पहुंची थी।
ठाकुर _अरे मुनीम जी ये लङकी कौन है?
मुनीम _ठाकुर साहब आप भी अच्छा मजाक कर लेते है आप क्या सच में इसे नही पहचान रहे।
ठाकुर _नही तो,
मुनीम _हुजूर या मेरी बेटी दिया है।
ठाकुर_ओह ये तुम्हारी बेटी दिया है, जब छोटी थी तब देखा थ, अब तो बहुत बड़ी और खुबसूरत हो गई है।
ठाकुर और मुनीम दोनो हंसने लगे।
मुनीम _,, दिया बेटा ठाकुर साहब का पैर छूकर प्रणाम करो।
दिया ने ठाकुर का पैर छूकर प्रणाम किया।
ठाकुर _अरे बेटी पैर नही, मेरे गले लगो तुम भी मेरी दिव्या और गीता बेटी जैसी हो। आओ गले लगो।
ठाकुर ने दिया को गले लगा लिया।
ठाकुर _क्या मस्त मॉल है, ये अब तक कैसे मुझसे बची रही। शाला मुनीम मुझसे छिपा कर रखा था।
इसका स्वाद तो चखना पड़ेगा। ठाकुर अपने मन में कहा।
इधर मुनीम के दिया का गले लगाना अच्छा नही लगा।
उसने अपने पत्नी से कहा अरे भाग्यवान, अब जाओ तुम दोनो दिव्या बेटी के शादी की बधाई दे दो।
इधर ठाकुर की नजर दिया पार ही अटका हुआ था।
दिया और उसकी मां दिव्या और राज को बधाई देने मंच पर पहुंचे।
दिया _दिव्या दीदी आपने मुझे पहचाना,
दिव्या _तुम,,, कुछ जानी पहचानी सी लग रही हो।
दिया _मै दिया हम बचपन में साथ में खेला करते थे आप भुल।
दिव्या _अरे दिया तुम, कितने दिनो बाद मिल रही हो। मुनीम काका तो बता रहे थे कि तुम पढ़ने के लिए शहर गई हो, कब आई शहर से।
दिया _कुछ दिन पहले ही ही आई हूं।
दिव्या _दिया इनसे मिलो, ये है मेरा पति राजेश।
दिया _इनको कौन नही जानता दी, भारत के हर युवा अच्छे से जानते हैं राजेश जीजू को, आई ए एस टापर, मै भी जीजू का बहुत बड़ा फैन बन गया हूं।
जीजू बहुत बहुत बधाई दिव्या दीदी के साथ शादी के लिए और आई ए एस परीक्षा में टॉप करने के लिए।
राजेश _ओह शुक्रिया दिया।
दिया _जीजू, मै भी आई ए एस अफसर बनना चाहतीं हूं। तैयारी के लिए मुझे आपका मार्गदर्शन चाहिए।
राजेश _अरे भाई आपने हमें जीजू कहा है, तुम हमारे शाली हुवे, हम तुम्हारी हर तरह से मदद करेंगे।
दिया _ओह थैंक यू जीजू।
इधर पार्टी में ठाकुर ने अपने पार्टी अध्यक्ष को भी आमन्त्रित किया था।
ठाकुर _अध्यक्ष जी, आप के कहने पर मैंने राजेश को अपना दामाद स्वीकार कर लिया। अब तो मेरा टिकट पक्का न।
अध्यक्ष _हा ठाकुर साहब अब तो मैं पार्टी हाई कमान से, आपके लिए जरूर बात करुंगा। टिकट पक्का समझो।
इधर बधाई कार्यक्रम संपन्न होने के बाद डांस प्रोग्राम शुरू हुआ। महिलाएं पुरुष लडके लडकियां अपनी अपनी जोड़े बनाकर नाचने लगे।
दिव्या, प्रेगनेंसी के कारण राजेश का साथ न दे सकी।
दिव्या _सॉरी राजेश मै आपका साथ नही दे पा रही।
दिया _अरे दी मै हूं न जीजू का साथ देने के लिए। चलो जीजू हम डांस करते हैं।
राजेश और दिया एक दूसरे का हाथ पकड़ कर डांस करने लगें।
इधर ठाकुर की नजर दिया पर ही टिकी हुई थी।
दिया उसके दिल में उतर गया था।
ठाकुर अब दिया को पाना चाहता था।
जब ठाकर ने देखा कि दिया राजेश के साथ उसके कमर और बाहों में हाथ डाल नाच रही है जल भुन सा गया। वह गुस्से में शराब पीने लगा।
पार्टी खतम हुआ। सभी मेहमान अपने अपने घर चलें गए।
ठाकुर अपने कमरे में बिंदिया के साथ था।
बिंदिया _हुजूर मुझे यह बात समझ नहीं आई, अपनी दुश्मन के बेटे को ही अपना दामाद स्वीकार कर लिया।
आप भुल गए राजेश की मां के कारण आपको सूरज पुर मे कितनी बेजजती झेलनी पड़ी थी। और आप उसी सुनिता के लडके को दामाद स्वीकार कर पार्टी दे रहे हो।
ठाकुर _बिंदिया ठाकुर अपने अपमान को कभी भूलता नहीं। यू सब दिखावा है।
बिंदिया _ये सब दिखावा है, ठाकर साहब मै कुछ समझी नहीं।
ठाकुर _बिंदिया मै राजेश को दामाद इसलिए बनाया ताकि अपने परिवार और गांव वालों का विश्वास जीत सकू, अभी मेरी बिटिया, पत्नी और गांव वाले मुझसे नाराज है। राजेश को दामाद स्वीकार कर लेने के बाद मेरे परिवार और गांव वालो की नाराजगी दूर हो जाएगी। मुझे टिकट मिल जायेगा और चुनाव जीत जाने के बाद राजेश को मैं दूध में पढ़ी मक्खी की तरह इस हवेली से निकाल कर बाहर फेक दूंगा।
बिंदिया _वो कैसे ठाकुर साहब?
ठाकुर _राजेश के चरित्र पर दाग लगाकार। मै उस पर बलात्कार का इल्जाम लगवाऊंगा। उसका वीडियो बनाकर वायरल करुंगा। फिर सब उस पर थू थू करेंगे।
बिंदिया इसके लिए तुम्हे मेरी मदद करनी पड़ेगी।
बिंदिया _कैसी मदद ठाकर साहब।
ठाकुर _तुम राजेश को अपनी जाल में फांसो।
बिंदिया _ठाकुर साहब अब तो मैं बूढ़ी हो गई हूं, राजेश मुझसे कहा फसेगा।राजेश को फसाने के लिए कोई जवान और खूबसूरत लङकी चाहिए। और मेरी नजर में एक लङकी है जो राजेश को फांस सकती है।
ठाकुर _कौन है वो,
बिंदिया_ मुनीम की बेटी दिया। पार्टी में देखा सबने कैसे दोनो एक दूसरे का कमर पकड़ कर डांस कर रहे थे। पर मुनीम जी इसके लिए मानेंगे।
ठाकुर _दिया तो मेरे भी दिल में उतर गई है बिंदिया, उसकी सील तो मैं तोड़ना चाहता हूं।
बिंदिया _हुजूर ये आप क्या कह रहे है, मुनीम जी को यह बात पता चली तो वो आपके खिलाफ बगावत पर उतर सकते हैं।
ठाकुर _मुनीम जी ने हमारा नमक खाया है, उसने हमारे सामने गांव की कई लडकियो और औरतों को हमारे सामने परोसा है। अब उसे अपनी बेटी को भी मेरे सामने परोसना होगा। बिंदिया का सील मै तोडूंगा और इल्जाम लगेगा राजेश पर, हा हा हा,,,
बिंदिया _पर हुजूर अगर मुनीम ने ऐसा नहीं किया तो।
ठाकुर _मेरे और दिया के बीच अब कोई भी आया तो उसे मै रास्ते से हटा दूंगा।
बिंदिया _लगता है इस ठाकुर का सर्वनाश का समय अब आ गया हैं, जिंदा रहना है तो फिर कुछ नया सोचना पड़ेगा। बिंदिया अपने मन में बोली।
इसके बाद ठाकुर दिया को इमेज कर बिंदिया की ठुकाई करने लगा।
जब झड़ने वाला था तो ठाकुर बोला,
आह मेरी जान दिया क्या मस्त मॉल है तू ले मेरी बीज अपनी कोख में,,, आह आह,,,,
ठाकुर झड़ने लगा।
दिव्या _ये ठाकुर तो सच में दिया के लिए पागल हो चूका है।
इधर राजेश और दिव्या अपने बेड रुम में सोने की कोशिश कर रहे थे।
दिव्या राजेश के सीने में अपना सिर रखी थी।
दिव्या _राजेश तुम खुश तो हो न।
राजेश _दिव्या जी आप खुश हो न।
दिव्या _तुम मेरे पास हो इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है।
राजेश _आप खुश तो मैं भी खुश।
दिव्या _राजेश आई सॉरी
राजेश _ओ किस लिए दिव्या की,
दिव्या _आज ऐसे खुशी के मौके पर तुम्हे पत्नि का सुख नही दे पा रही।
राजेश _दिव्या जी मै खुश हूं, इसकी आवश्यकता नही।
दिव्या _इसकी आवश्यकता कितनी है ये मै अच्छे से जानती हूं।
इसकी आवश्यकता नहीं होती न तो तुम अभी तक यू जागते नही थक कर गहरी नींद में सो जाते।
लगता है तुम्हारे लिए हवेली में भी कोई जुगाड करना पड़ेगा।
राजेश ये बताओ इस हवेली में तो बहुत सी सेविकाय है कोई तुम्हे पसंद है क्या बताओ मैं उससे बात करूंगी।
राजेश _दिव्या जी ये आप क्या कह रही है? कही सासू मां और गीता दी को इसके बारे में पता चल गया तो,,,
दिव्या _तुम उन लोगों की चिंता मत करो मैं उनको समझा lungi
तुम बताओ कोइ सेविका पसंद है क्या?
राजेश _दिव्याजी, वो बिंदिया काकी कैसी रहेगी।
दिव्या _हसने लगी।
राजेश _क्या huwa दिव्या जी,,
दिव्या _मानती हूं बिंदिया काकी खुबसूरत है पर वह 42की होगी लगता है तुम्हे बड़ी उम्र की औरते ज्यादा पसंद है।
राजेश _वो तो मैं इस लिए कह रहा था कि बिंदिया काकी अनुभवी है और तुम्हारी बातो के वो अच्छे से समझेंगी। और यह बात अपने तक ही रखेगी। किसी को बताएगी नही।
दिव्या _अच्छा ठीक है फिर मैं कल बिंदिया काकी से बात करूंगी।
राजेश ने बिंदिया को इस लिए चुना क्यों की बिंदिया ठाकुर के सारे राज जानता था, वह बिंदिया को अपने पक्ष में लाकर ठाकुर की खिलाफ इस्तमाल करना चाहता था।
अगले दिन ठाकुर उद्घाटन कार्यक्रम से बाहर चला गया। गीता भी धरमपुर चली गईं राजेश सूरज पुर चला गया। आर्मी एवम पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं का मार्गदर्शन करने।
दिव्या सेविकाओ से कहकर बिंदिया को अपने कमरे में बुलाई।
बंदिया _बिटिया तुमने मुझे बुलाया।
दिव्या _हा काकी, मुझे तुमसे कुछ बाते करनी थी।
बिंदिया _बोलो बिटिया क्या बात है?
दिव्या _काकी ये बताओ की अगर किसी युवक की नई नई शादी हुई हो और उसे शारीरिक सुख न मिले तो वो क्या करेगा? आप तो काफी अनुभवी है।
बिंदिया _वह इधर उधर मुंह मरेगा ओर क्या करेगा बिटिया।
दिव्या _आपने सही कहा काकी।
बिंदिया _पर ये बात मुझसे क्यों पूछ रही हो बिटिया।
दिव्या _ काकी मै ये बात इसलिए आपसे कह रही हूं कि मैं राजेश के किसी कारण से शारीरिक सुख नही दे पा रही हूं। इस लिए मुझे डर है कि वह कही इधर उधर न मुंह मारने लगे। इससे हवेली की काफी बदनामी होगी।
बिंदिया _ये बात तो है बिटिया, पर ये बात मुझे क्यू बता रही हो।
दिव्या _यह बात मै आपको इसलिए बता रही हूं। क्यों की आप मेरी मदद कर सकती हो।
बिंदिया _वो कैसे बिटिया
दिव्या _राजेश को शारीरिक सुख देकर
बिंदिया _पर बिटिया यहां तो बहुत सी जवान सेविकाएं है उससे मदद ले सकती हों फिर मुझ बुढ़िया को क्यू चुनी।
दिव्या _वो इसलिए की जवान सेविकाओं पर मुझे भारोसा नही कही यह बात गांवो में फैला दी तो बड़ी बदनामी हो जाएगी, मुझे आप पर पुरा भरोसा है तुम याह राज अपने तक ही रखोगी।
बोलो काकी मेरी मदद करोगी ना।
बिंदिया _अब बिटिया हवेली की इज्जत के लिए तो इतना कर ही सकती हूं।
दिव्या _धन्यवाद काकी, मुझे यकीन था आप मेरी बात को टालेंगी नही।
आज रात सबके सोने के बाद चुपके से हमारे कमरे में आ जाइयेगा।
बिंदिया _ठीक है बिटिया।
बिंदिया वहा से चली गई।
अपने कमरे में जाने के बाद,
ठाकुर ने तो राजेश को अपने जाल में फसाने कहा था। यहां तो खुद ही उसकी बेटी मुझे राजेश के साथ सोने के लिए कह रही है।
ठाकुर लगता हैं अब तुम्हारे बुरे दिन शुरू हो गए है।

आखिर रात का समय हो ही गया। रात्रि भोजन के बाद सभी अपने कमरे में सोने चले गए।
राजेश और दिव्या भी सोने की कोशिश कर रहे थे।
तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया ।
दिव्या _दरवाज़ा खोली।
काकी आप आ गए। मै आप ही के इन्तजार कर रही थी।
राजेश देखो कौन आई है।
राजेश ने देखा बिंदिया सज धज कर आई थी, काफी सेक्सी लग रही थी। पुरा बदन इत्र कि खुशबू से महक रहा था।
दिव्या _आओ काकी बैठो।
बिंदिया बेड किनारे बैठ गई।
काकी आज तो बहुत प्यारी लग रही हो।
बिंदिया राजेश से नजर नहीं मिला पा रही थी। खामोश बैठी थी।
राजेश _काकी अगर आपकी इच्छा नहीं है तो कोई जबरदस्ती नहीं है तुम जा सकती हों।
दिव्या _राजेश पहली बार है वो भी एक पत्नि के सामने कोई भी स्त्री संकोच तो करेगी ही।
तो शुरू करे।
राजेश चलो शुरू हो जाओ आज मैं सिर्फ देखूंगी। कुछ नहीं करूंगी।
चलो अब शुरू हो जाओ।
राजेश बेड से उतारा और बिंदिया का हाथ पकड़ कर खड़ा करा दिया।
बिंदिया सिर झुकाए खड़ी थी। राजेश पिछे से उसे बाहों में भर लिया। उसकी पीठ को चूमने लगा।
फिर उसकी गर्दन चूमने लगा।
उसकी मुंह को अपनी ओर कर बिंदिया की ओंठ चूसने लगा एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा।
उसकी ओंठ उसकी गाल गर्दन कान के नीचे भाग को चूमने लगा।
बिंदिया गर्म हो कर सिसकने लगीं।
राजेश उसकी साडी को धीरे धीरे उतार दिया।
राजेश खुद अपना कपड़ा उतार कर चड्डी बनियान में आ गया।
अब राजेश बिंदिया की ओंठ को अपनी ओंठ में भर कर जी भर कर चूसा।
फिर गर्दन चूमता huwa आगे बड़ा। उसकी ब्लाउज को उतार दिया। वह अब ब्रा और पेटीकोट में थी।
राजेश ने ब्रा भाई खोल दिया।
बिंदिया की मस्त बड़े बड़े गोरे गोरे सुडौल स्तन राजेश के आंखों के सामने आ गया।
बिंदिया का स्तन देख कर राजेश का लंद तन गया। झटके मारने लगा।
राजेश एक हाथ से चूची मसलने तो दूसरी चूची को पीने लगा। बिंदिया बहुत अधिक गर्म हो गई।
वह सिसकने लगीं।
राजेश नीचे गया और बिंदिया की सपाट पेट और खुबसूरत नाभी को चूमने चाटने लगा।
बिंदिया प्यार से राजेश की बालो को सहलाते हुए सिसकने लगीं।
अब राजेश बिंदिया की पेटीकोट का नाडा खीच दिया। पेटीकोट बिंदिया की पैरो में गिर गया।
दिव्या ने राजेश का बनियान उतार दिया।
अब राजेश बिंदिया को उठा कर अपने गोद में बिठा लिया।
और जी भर कर ओंठ चूसा चूची मसल मसल कर पीने लगा।
बिंदिया सिसकने लगीं।
राजेश अब बिंदिया को उठा कर बेड किनारे लिटा दिया।
उसकी पेंटी को उतार कर नंगी कर दिया।
उसकी खुबसूरत फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखों के सामने आ गया जिसे देखकर राजेश का लंद और लंबा मोटा हो गया।
राजेश ने अपने हाथ से बिंदिया की योनि सहलाया फिर फिर जीव से उसकी योनि चाटने लगा।
बिंदिया आनंद में अपनी सिर पटकने लगी छटपटाने लगी सिसकने लगीं।
उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
बिंदिया _राजेश बेटा अब बस करो अब मुझसे और बर्दास्त नही हो रहा।
दिव्या ने राजेश का चड्डी उतार दिया उसका लंद हवा में लहराने लगा।
राजेश के लंद को बिंदिया फटी आंखों से देखने लगी।
दिव्या ने राजेश के लंद को चूस चूस कर और सख्त कर दिया।
फिर राजेश का लंद पकड़ कर बिंदिया की योनि में सेट कर दिया।
राजेश ने बिंदिया की चूची पकड़ कर एक जोर का धक्का मारा।
लड़ एक ही बार में boor चीरकर आधा अंदर चला गया।
बिंदिया सिसक उठी।
राजेश ने बिंदिया की ओंठो को चूसा चूची मसला फिर एक जोर का धक्का मारा। लंद जड़ तक अन्दर घुस गया। बिंदिया चीख उठी।
Rajes कुछ देर रुका फिर धीरे धीरे लंद को अंदर बाहर करना शुरू किया।
बिंदिया सिसकने लगी, राजेश धीरे धीरे अपना स्पीड बढ़ाने लगा। राजेश का लंद बिंदिया की bur la भग्नाशा ko अच्छी तरह रगड़ रहा था। लंद मोटा होने की कारण bur की दीवारों को अच्छी तरह रगड़ रहा था जिससे बिंदिया को एक बहुत आनन्ददेd रहा थ। बिंदिया जन्नत की सैर करने लगी।
राजेश अब स्पीड से लंद को bur में अंदर बाहर करने लगा। बिंदिया की bur से पानी झरने की तरह बहने लगा। लंद गप गप अंदर बाहर हो रहा था।
राजेश बिंदिया की चूची को मसल मसल कर दनादन चोद रहा था।

बिंदिया को अलौकिक सुख प्राप्त होने लगा जिसकी कल्पना तक उसने नही की थी। लंद का का टोपा बिंदिया की बच्चेदानी से टकराने के कारण उसके शरीर में एक अलग ही कंपन पैदा कर रहा था।
बिंदिया बहुत ही उत्तेजित हो गई वह इतनी अधिक गर्म हो चुकी थी की वह अपने मुंह से अनाप शनाप बकने लगी।
और मूतने लगी।
राजेश ने अपना लंद बाहर निकाल लिया। बिंदिया शर्म से पानी पानी होते लगी।
राजेश अब उसे घोड़ी बना दिया। दिव्या ने राजेश का लंद चूसा और उसे बिंदिया की bur में सेट कर दिया। राजेश अब एक ही धक्का में जड़ तक अन्दर घुसा दीया। बिंदिया चीख उठी।
अब राजेश फिर तेज तेज चोदने लगा।
बिंदिया की खुबसूरत चूतड पर thappad मार मार कर लाल कर दिया।
बिंदिया के bur में लंद सर सर अंदर बाहर होने लगा।
बिंदिया फिर से जन्नत में पहुंच गई। राजेश को भी बिंदिया की chudai me एक अलग मजा आने लगा।
राजेश लगातार ठोकता रहा। कमरे में बिंदिया की सिसकारी और चीखे गूंजती रही।
उसके बाद राजेश ने बिंदिया की bur से लंद निकाल दिया और उसे अपनी गोद में उठा कर अपना लंद उसकी bur में डाल कर हवा में उछाल उछाल कर चोदना सुरू कर दिया।
बिंदिया किसी बंदरिया की तरह हवा में उछल उछल कर chud रही थी। वह राजेश की मर्दाना ताकत देख कर दंग थी।
फाच फ़च आवाज करता huwa लंद bur फाड़कर अंदर बाहर हो रहा था। तभी बिंदिया फिर मूतने लगी।
राजेश ने लंद बाहर निकाल लिया।
राजेश ने बिंदिया को बेड में लिटा दिया। फिर अपना लंद उसकी bur में डाल कर गच गच चोदने लगा। राजेश के लंद bur की सफेद रस से लसलसा दिखाईदे रहाथा। उसकी योनिसे सफेद पानी लंद सी होता हुआ अंडकोष से टपकन लगा।
बिंदिया तो जन्नत में थी। ताभी राजेश ने लंद बाहर निकाल लिया और बेड पार लेट गया।
बिंदिया को ऊपर आने का इशारा किया। बिंदिया बेड के ऊपर चढ़ गई और राजेश के लंद के पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर बैठ गई।
बिंदिया राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी। राजेश बिंदिया की कमर पकड़ कर पीछे से कमर उचका उचका कर लंद को bur की गहराई में ठेलने लगा।
एक बार फिर सी दोनो आनंद के गोते लगाने लगे। बिंदिया इतनी गर्म हो गई की खुद को रोक न सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी।
वह राजेश से लिपट कर सुस्ताने लगी।
कुछ देर बाद राजेश बिंदिया को नीचे कर लिया खुद ऊपर आ कर उसकी चूचियों पीने लगा। ओंठ चुसने लगा।
बिंदिया फिर गर्म हो गई।
अब राजेश ने बिंदिया को घोड़ी बना दिया।
और पीछे से लंद डाल कर चोदना शुरू कर दिया। एक ऊंगली उसकी गाड़ में घुसा दिया। बिंदिया चिहुंक उठी।
राजेश गाड़ में ऊंगली अन्दर बाहर करने लगा। दिव्या देख कर मजे ले रही थी। बीच बीच में राजेश का लंद योनि सी निकाल कर चूस लेती फिर उसे योनि में ठेल देती।
अब राजेश ने लंद को योनि से निकाल कर गाड़ में डालने की कोशिश करने लगा। बिंदिया छटपटाने लगी। राजेश अपना लंद गाड़ मे डालने में सफल हो गया।
लंद गाड़ फाड़कर आधे से ज्यादा अदंर घुस चुका था। राजेश अब धीरे धीरे गाड़ मारने लगा।
बिंदिया दर्द सी चीखने लगी।
लंद धीरे धीरे गाड़ में अपनी जगह बना लिया अब बिंदिया को दर्द के साथ मजा भी आने लगा।
राजेश अब अपना स्पीड बढ़ा दिया। लंद गाड़ में तेजी से अंदर बाहर होने लगा। लंद ने गाड़को पूरी तरह फैला दिया।
अब राजेश लंद के कभी गाड़ तो कभी bur में डाल कर दनादन चोदने लगा।
कमरे में बिंदिया की चीख तो कभी सिसकारी गूंजने लगी।
राजेश भी बहुत अधिक उत्तेजित हो गया वह झड़ने की स्थिति में आ गया।
वह दिव्या की ओंठ को चूसते हुवे बिंदिया को चोदने लगा।
आह आह बेबी मै आने वाला हूं, आई एम कमिंग बेबी आह मां आह,,, कराहते हुवे बिंदिया की योनि को अपनी वीर्य से पुरा भर दिया। गर्म गर्म वीर्य को अंदर महसूस कर बिंदिया भी एक बार फिर झड़ गई।
दोनो बेड पर ही लुड़क कर सुस्ताने लगे। बिंदिया ने राहत की सांस ली।
दिव्या ने अपने अलमारी से एक गोली निकाली और बिंदिया को खाने को दे दी।
दिव्या _काकी ये गोली खा लो, नही तो तुम पेट सी हो सकती हो।
बिंदिया ने गोली खा ली।
उसके बाद बिंदिया अपने कपड़े पहन कर वहा से चुपके से निकली और अपने कमरे में आ गई।
राजेश ने उसे चोद चोद कर उसका बुरा हाल कार दिया था।
राजेश से चुदाने में उसे इतना आनद मिला था जिसकी कल्पना भी उसने नही की थी।
सुबह उठी तो ठीक से चल नहीं पा रही थी। वह बाथरूम में जाकर अपनी bur और गाड़ की हालात देखी, जो बुरी तरह सूज गई थी।
बहुत ही जबरदस्त और शानदार अपडेट ! 👏🏻👏🏻👏🏻
Lagta hai ab bindiya rajesh ki diwani ho jayegi !
 

sunoanuj

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बिंदिया राजेश से चुदने के बाद, राजेश की ओर उनका झुकाओ बढ़ गया।
राजेश जब किसी सेविका से कुछ मंगाती, बिंदिया उस सेविका की जगह खुद राजेश की सेवा में लग जाती। बिंदिया राजेश के आस पास ही दिखाई पड़ने लगीऔर यह बात रत्नवती को खटकने लगी।
रत्नवती _ये बिंदिया कभी रशोई के काम में रूचि नहीं लेती थी। हमेशा दूसरी सेविकाओं पर हुकुम चलाती थी। राजेश के आने के बाद इसे क्या हो गया है। ये राजेश की आवभगत करती रहती है। राजेश को क्या जरूरत है नही है, पूछती रहती है। कभी भोजन नही परोषती थी, अब तो हर चीज राजेश को ही पहले परोस रही है, ठाकुर के सामने ही।पहले तो ये ठाकुर का ही काम करती थी। आखिर इसके अंदर इतना बदलाव कैसा आया? क्यू आया, ये सब बाते रत्नवती सोचने लगी। वह बिंदिया की क्रिया कलापो पर नजरे रखने लगी। और अपनी खास सेविकाओं को भी बिंदिया पर नजर रखने के लिए कह दी।
इधर ठाकुर को भी लगने लगा की बिंदिया मुझे छोड़कर राजेश का ज्यादा ख्याल रखने लगी है वह बिंदिया को अपने कमरे में बुलाकर पूछा।
ठाकुर _बिंदिया ये मै क्या देख रहा हूं। तुम मुझे छोड़कर राजेश के आस पास ज्यादा मंडराने लगी हो। उसकी खातिर दारी कुछ ज्यादा ही कर रही हो। और कुछ ज्यादा ही बन ठन कर रहने लगी हो।
बिंदिया _हुजूर मै तो वहीं कर रही हूं जो आपने कहा था।
ठाकुर _मै कुछ समझा नही।
बिंदिया _हुजूर आपने ही तो कहा था कि राजेश को अपनी जाल में फसाओ। मै वही कर रही हूं। राजेश को फसाने की कोशिश, फिर आपका काम आसान हो जाएगा राजेश पर झूठा इल्जाम लगा कर उसे हवेली से निकलवाने का।
ठाकुर _ओह तो ये बात है, मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। मुझे लग रहा था कि कही मेरे बेटियो और पत्नि की की तरह उस लडके ने तुम पर भी तो कोई जादू नही कर दिया।
बिंदिया _हुजूर ये आप कैसी बाते कर रहे हैं, मै आपके सिवा भला और किसी के बारे में सोच सकती हूं। मै तो सिर्फ आपकी हूं और आपकी ही बनकर रहूंगी।
ठाकुर _ये हुई न बात। चल काफी दिन हो गया, आज मुझे खुश करदे।
ठाकुर बिंदिया को चोदने लगा।
बिंदिया ठाकुर से बेमन से chud रही थी उसे मजा नही आ रहा था।
Chudai खत्म होने के बाद।
ठाकुर _बिंदिया तुम उस लड़के को जल्द से जल्द अपनी जाल में फसाओ। फिर साले को धक्का मार के उसे बाहर भगाएंगे।
बिंदिया _जी हुजूर मै इसी काम में लगी हूं।
ठाकुर _हा और मुनीम की बेटी दिया को भी मेरे बिस्तर तक लाने पर काम करो, साली क्या माल है जब से पार्टी में देखा है मेरे दिल में उतर गई है। क्या वो हवेली में आती है।
बिंदिया _जी हुजूर दिया तो हवेली आती रहती है। राजेश से कुछ परीक्षा की तैयारी के लिए, पुस्तक खोल कर, राजेश को समझाने कहती हैं, दोनो हस हस कर इधर उधर की बाते भी करते रहते हैं।हुजूर कही ऐसा न हो दिया, तुम्हारी तरह राजेश के दिल में उतर गया तो। आप हाथ मलते रह जायेंगे।
ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो।
बिंदिया _हुजूर जो कह रही हूं सच कह रही हूं।
ठाकुर _मुनीम जी को बताना पड़ेगा।

बिंदिया _जी हुजूर,इससे पहले की दोनो के बीच कोई चक्कर चल जाय। आप मुनीम जी को बोलिए, वह दिया को राजेश से दुर रहने को कहे।


एक दिन दोपहर में राजेश का दोपहर में ही chudai का मन बन गया। बिंदिया आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। राजेश से रहा न गया। वह सोफे पर बैठा था। बिंदिया पानी लेकर आई। राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।
और बिंदिया की चूची मसलने लगा।
बिंदिया _दामाद बाबू आज तो बड़े मूड में लग रहे हो।
छोड़ों कोई देख लेगा तो, तुम्हारी बदनामी हो जाएगी,,,
राजेश _आज तो बड़ी हॉट लग रही हो काकी,, छोड़ने का मन नही कर रहा है।
बिंदिया _अगर इतना ही मन कर रहा है तो चलो मेरे कमरे में, पर यहां नही,,, कही तुम्हारी सास को पता न चल जाए।
राजेश _अच्छा तो चलो फिर,,,
राजेश बिंदिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाज़ा बंद कर दी।
इस सब घटना को रत्नवती की खास सेविका देख ली। इस बात की जानकारी उसने रत्नवती को दी।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रही हो,
सेविका _रानी मां मैने जो भी बात बताई बिलकुल सच है आप खुद भी जाकर देख सकती हैं।
रत्ना vati सेविका के साथ बिंदिया की कमरे तक गई।
कमरे की दरवाज़ा पर कान लगाकार, सुनने की कोशिश की। कमरे के अंदर बिंदिया की सिसकारी और चीखे सुनकर उसे यकिन नही huwa
रत्नवती_हे भगवान आखिर वही huwa जिसका डर था। ये बिंदिया पहले तो ठाकुर को अपने जाल में फसाया और अब राजेश को। इस बात का पता दिव्या को चला तो पता नही उस पर क्या बीतेगी।
इस चुड़ैल ने मेरी जिंदगी खराब की तो की मै अपनी बेटी की जिंदगी को खराब होने नही दूंगी।
रत्नवती अपने कमरे में आई और सोचने लगी की उसे क्या करना चाहिए।
उसने सोचा क्या इस बात की जानकारी दिव्या को दू।
फिर सोचा की दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है अगर यह बात दिव्या को पता चला कि उसका पति अधेड़ महिला के साथ रंगरेलियां मना रहा है, उसकी क्या दशा होगी। उसके बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नही मै दिव्या को यह बात नहीं बताऊंगी।
मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे राजेश से बात करनी होगी।
राजेश जब बिंदिया की chudai करके, कही बाहर जा रहा था। तभी सेविका ने उससे कहा।
सेविका _राजेश भईया आपको रानी मां अपने कमरे में बुलाई है।
राजेश _क्या सासू मां मुझे,,,
सेविका _हां,,,
राजेश रत्नवती के कमरे में गया।
राजेश_रानी मां आपने मुझे बुलाया, कुछ काम था क्या?
रत्नवती_हां, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
राजेश _मां जी क्या huwa आप कुछ नाराज लग रही है। क्या बात है मुझसे कोई गलती हो गई क्या?
रत्नवती_दामाद जी ये जो तुम कर रहे हो न, ये बिलकुल गलत है।
राजेश _क्या मां जी, मै क्या गलत कर रहा हूं, मै समझा नही।
रत्नवती_तुम भोले मत बनो, मुझे सब पता चल गया है तुम्हारे और बिंदिया के बीच क्या चल रहा है।
राजेश _ओह तो आप इसलिए मुझसे नाराज हो।
रत्नवती_कभी सोचा है अगर यह बात दिव्या को पता चली तो उस पर क्या बीतेगी?
राजेश _मां जी आप दिव्या की चिंता न करो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रत्नवती_मै दिव्या की मां हूं, मै उसकी चिंता नही करूंगी तो और कौन करेगा। वैसे तुम ये क्यो कह रहे हो कि दिव्या को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
राजेश _क्यों की दिव्या जी को यह बात पता है?
रत्नवती_क्या, दिव्या को यह बात पता है?
राजेश _हां, दिव्या ने ही मुझे यहां की सेविका के साथ संबंध रखने को कहा।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रहे हो, मै कुछ समझी नहीं, दिव्या भला तुम्हे दूसरे औरतों से संबंध बनाने क्यों कहेगी।
राजेश _मां जी, आपको तो पता है सुहागरात के दिन की घटना। उस घटना के बाद डॉक्टर ने हमें संबंध बनाने से मना किया है। नही तो बच्चा गिर सकता है।
उस दिन के बाद हमने फिर संबंध नही बनाए।
लेकिन दिव्या को ये फिल होने लगा की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है।
कभीकभी मै दिव्या जी को अपने क़रीब पा कर उत्तेजित हो जाता था। मै रात में ठीक से सो नही पाता था।
दिव्या अपने को दोष देने लगी की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है। इसलिए उसने ही यह निर्णय लिया की जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, तुम इस हवेली की सेविका के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर सकते हो।
मैने उसे समझाया कीमेरी चिंता मत करों, मै खुद पर नियंत्रण रख लूंगा, लेकिन दिव्या नही मानी और वह खुद बिंदिया काकी से जाकर मेरी शारीरिक जरूरत को पुरा करने के लिए बोली तो काकी मान गई।
उसके बाद मैं और बिंदियां काकी संबंध बनाने लगे।
रत्नवती_, मुझे दिव्या ये बात बताई नही।
राजेश _मां जी आप उसकी मां है उसे लगा होगा की यह बात अगर आपको बताई तो आप इसके लिए साफ मना कर देंगी। इसलिए नही बताई होंगी।
रत्नवती_कोई मां ये कैसे स्वीकार करेगी की उसका दामाद उसकी बेटी को छोड़कर किसी पराई औरत से संबंध रखे।
और वो भी उस बिंदियां जैसी औरत से, तुम्हे पता भी है वो कैसी औरत है?
रत्नवती_देखो राजेश बेटा, वो बिंदियां अच्छी औरत नही है, वो तुम्हे बदनाम कर देगी। वो ठाकुर की रखैल है। वो तुम्हे मुसीबत में डाल देगी।
तुम्हे बिंदिया से दुर रहना होगा।
राजेश _ठीक है मां जी अगर आप चाहती है की मै बिंदियां काकी से दुर रहूं तो आपका आदेश का पालन होगा।
रत्नवती_क्या तुम सच कह रहे हो?
राजेश _हां मां जी,,, पर,,,
रत्नवती_पर क्या दामाद जी,,,
राजेश _मां जी आखिर मैं भी तो इंसान हूं न, दिव्या जी के डीलवरी तक खुद पर नियंत्रण रख पाना,,, आप तो समझ ही गई होगी,,,
रत्नवती_अच्छा ठीक है मेरी एक विश्वाश पात्र सेविका है, तुम उसके साथ अपनी जरूरतें पूरी कर लेना ।
राजेश _मां जी क्या वो सेविका जवान है?
रत्नवती_हां तो, ते तो तुम्हारे लिए अच्छा है न, उस बुढ़िया बिंदिया मे से तो अच्छी है।
राजेश _मां जी कही वह सेविका, किसी दूसरे से पेट से होकर मुझ पर इल्जाम डाल दी तो,,, वह जवान है तो किसी के साथ तो उसका संबंध होगा न।
रत्नवती_तो तुम क्या चाहते हो।
राजेश _मै तो यही चाहता हूं जो आप चाहती हो, हवेली की बदनामी न हो।
अच्छा आप इधर आईए मै आपसे कुछ सवाल पूछता हूं।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर उसे बेड में बिठा कर, उसके बाजू में बैठ गया।
राजेश _अच्छा ये बताओ आप दिव्या की मां हो न।
रत्नवती_ये भी कोई पुछने की बात है।
राजेश _जब दामाद की देखभाल बेटी न कर पाए तो बेटी का घर बचाने के लिए दामाद का ख्याल बेटी की मां रखे तो क्या ये गलत होगा।
रत्नवती_दामाद जी ये तुम क्या कह रहे हो?रत्नवती शर्म से पानी पानी होते हुए अपनी नजरे नीचे झुका ली।
राजेश _मां जी आप भी तो मेरी जरूरत पूरी कर सकती हों न, अगर आपको बिंदिया काकी पर भरोसा नहीं है तो।
दामाद का ख्याल सासू मां से अच्छा और कौन रख सकता है।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर चूम लिया।
अब बेटी का फर्ज तो मां को ही पुरा करना पड़ेगा।
बोलो न मां जी,,,
रत्नवती सोच में पड़ गई,,,
राजेश _मां जी क्या सोचने लगी आप,,,
रत्नवती बेड से खड़ा हो गई।
रत्नवती_दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, ये गलत है।
राजेश भी बेड से उतर कर रत्नवती को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।
राजेश _मां जी कुछ गलत नहीं है।
रत्नवती का दिल जोरो से धड़कने लगा।
रत्नवती_बेटा छोड़ों न किसी के पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।
राजेश _मां जी ये बात किसी जो पता नहीं चलेगा। और रही बात दिव्या की तो मुझे पता है दिव्या हमारे बीच नए संबंध को वो स्वीकार लेगी।
राजेश ने रत्नवती की खुली पीठ को चूम लिया।
रत्नवती सिसक उठी ।
रत्नवती_दामाद जी, यहां तो जवान और खूबसूरत सेविकाय है, मै तो बूढ़ी हो गई हूं।
राजेश रत्नवती को आईने के सामने ले गया।
राजेश _ मां जी,खुद को देखो आईने में, आप दिव्या और गीता जी की मां नही बड़ी बहन लगती है।
राजेश ने एक रत्नवती को जकड़ कर एक स्तन दबाते हुए कहा।
देखो कितनी कसावट है अब भी आपकी स्तनों में बिलकुल कुंवारी लड़कियो की तरह।
रत्नवती , सिसक उठी उसकी दिल की धड़कन बहुत बड़ गई। राजेश की हरकत से उसकी योनि में पानी भर गया।
रत्नवती_दामाद जी मुझे सोचने का वक्त दो।
राजेश ने रत्नवती को छोड़ दिया।
राजेश _ठीक है मां जी, कोई जबरदस्ती नही है, आपकी मर्जी, अगर राजी हो तो कल पिंक कलर की साड़ी पहनना मै समझ जाऊंगा आप तैयार है।
अब मैं चलू,,
रत्नवती ने अपना हा में सिर हिलाया।
राजेश काम से सूरज पुर चला गया।
रात में राजेश घर आया।
रात्रि में भोजन के समय रत्नवती राजेश के सामने ही डाइनिंग टेबल में भोजन करने बैठी थी पर उसे राजेश के सामने बहुत शर्म महसूस कर रही थी।
भोजन पश्चात रत्नवती अपने कमरे में चली गई। वह रात भर सोचती रही वह राजेश के साथ नया रिश्ता शुरू करे की नही।
उसने सोंचा की राजेश को अगर न कह दी तो वह नाराज न हो जाए और वह मेरा कहना भी नही मानेगा। वह उस बिंदिया की जाल में फस जायेगा। नही नही मैं अपनी बेटी की जिंदगी बरबाद होने नही दे सकती। मै उसकी मां हूं। मेरी बेटी दामाद जी की शारीरिक जरूरत पुरा नही नही कर पा रही है तो मेरा भी फर्ज बनता है अपनी बेटी का घर बचाने दामाद जी की ईच्छा पूरी करू।
रत्नवती सुबह उठी आज नहाने से पहले अपने शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से हटाईऔर खूब रगड़ रगड़ कर नहाई। ठाकुर ने रत्नवती को जब से दिव्या को पेट में थी चोदना बन्द कर दिया था। तब से रत्नवती ने chut की बाल साफ़ नही की थी।
नहाने के बाद रत्नवती,
गुलाबी साड़ी पहन कर सेविकाओं से श्रृंगार करवाई।
आज बहुत ही खुबसूरत लग रही थी।
उसने सेविकाओं से राजेश के बारे में पूछा वो कहा है ताकि वह राजेश को दिखा सके।
सेविकाओं ने कहा वो किसी काम से बाहर चला गया है।
दिव्या ने जब ने जब अपनी मां को इस रूप में देखा।
दिव्या _मां आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो। कही जा रही हो क्या?
रत्नवती को समझ नही आ रहा था कि क्या कहे, उसने कह दी बेटी काफी दिन हो गए न हम मंदिर नही गए तो सोची चलो मंदिर चले जाते है जाओ तुम भी तैयार हो जाओ।
दिव्या _मां पहले बताती तो राजेश को बाहर जाने से रोक लेती वो भी चला जाता हमारे साथ।
कोई बात नही बेटी हम दोनों चलें जायेंगे। तुम राजेश को फोन कर देना वो मंदिर आ जायेगा।
दिव्या _ठीक है मां।
राजेश को दिव्या ने फोन कर मंदिर बुलाया।
राजेश जब रत्नवती को गुलाबी साड़ी में देखा तो। मुस्कुराने लगा।
रत्नवती शर्म से सिर झुका ली।
मंदिर में दर्शन के बाद। दिव्या और रत्नवती कार से घर आ गए।
राजेश को कुछ काम था वह सूरज पुर चला गया।
राजेश के लंद में अभी से हल चल होने लगा। राजेश नअपने लंद को सहलाते हुए कहा। शाला रात होने का इन्तजार तो कर सासू मां के अंदर जाने अभी से छटपटा रहा है।
रत्नवती हवेली आने के बाद राजेश के बारे e ही सोचने लगी पता नहीं राजेश क्या क्या करेगा उसके साथ। उसकी योनि गीली हो चुकी थी। पतानहीं राजेशके साथ वो सब कैसेकर पाएगी, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।
वर्षो बाद उसकी शरीर की औरत जाग उठी थी। ठाकुर ने उसे आखिरी बार कब चोदा था। भुल गई थी।
राजेश हवेली लौटा।
रात में सभी लोग भोजन के लिए बैठे थे। ठाकुर भी बैठा था।
राजेश और रत्नवती आमने सामने बैठे थे।
रत्नवती राजेश से नजरे बचा रही थी।
राजेश को मजाक सूझा।
उसने अपने पैर से रत्नवती की पैर को रगड़ते लगा।
रत्नवती चौंकी, वह राजेश की ओर तिरछी नजरों से देखि।
सबकी नजरों से बचा कर न में सिर हिलाई।
पर राजेश नही माना, उसे मजा आ रहा था। वह रत्ना वटी की पैरो को अपने पैर से रगड़ने हुवे ऊपर ले जाने लगा।
रत्नवती सिसक उठी।
गीता _मां क्या हुआ?
राजेश _लगता है सासू मां को मिर्ची लग गई।
रत्नवती गुस्से से राजेश की ओर देखने लगा। राजेश ने उसे आंख मार दी।
रत्ना वटी का मुंह खुला का खुला रह गया।
वैसे रत्नवती को राजेश की छेड़ खानी अच्छा लग रहा था जब कि ठाकुर भी वहीं बैठा था उसे पता नही था सास और दामाद के बीच क्या चल रहा है।
राजेश को रत्नवती को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।
वह अपना पैर ऊपर रत्नवती के टांगो तक ले गया। और अपने अंगूठे से उसकी पैंटी को रगड़ दिया ।
रत्नवती फिर सिसक उठी।
गीता _मां लगता हैं आपको कुछ ज्यादा मिर्ची लगी है लो पानी पी लो।
रत्नवती _हूं,
रत्नवती चुपचाप पानी पीने लगी और राजेश को तिरछी नजरों से घूरने लगी।
राजेश मुस्कुराने लगा।
राजेश अपनी एक कान पकड़ लिया। और इशारे से माफ़ी मांगा ।
रत्नवती मुस्कुराने लगी।
वाह यह तो नया खेल शुरू हो गया राजेश का ! लगता है कुछ बहुत बड़ा प्लान किया है !

बहुत ही शानदार अपडेट !
 
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