बिंदिया राजेश से चुदने के बाद, राजेश की ओर उनका झुकाओ बढ़ गया।
राजेश जब किसी सेविका से कुछ मंगाती, बिंदिया उस सेविका की जगह खुद राजेश की सेवा में लग जाती। बिंदिया राजेश के आस पास ही दिखाई पड़ने लगीऔर यह बात रत्नवती को खटकने लगी।
रत्नवती _ये बिंदिया कभी रशोई के काम में रूचि नहीं लेती थी। हमेशा दूसरी सेविकाओं पर हुकुम चलाती थी। राजेश के आने के बाद इसे क्या हो गया है। ये राजेश की आवभगत करती रहती है। राजेश को क्या जरूरत है नही है, पूछती रहती है। कभी भोजन नही परोषती थी, अब तो हर चीज राजेश को ही पहले परोस रही है, ठाकुर के सामने ही।पहले तो ये ठाकुर का ही काम करती थी। आखिर इसके अंदर इतना बदलाव कैसा आया? क्यू आया, ये सब बाते रत्नवती सोचने लगी। वह बिंदिया की क्रिया कलापो पर नजरे रखने लगी। और अपनी खास सेविकाओं को भी बिंदिया पर नजर रखने के लिए कह दी।
इधर ठाकुर को भी लगने लगा की बिंदिया मुझे छोड़कर राजेश का ज्यादा ख्याल रखने लगी है वह बिंदिया को अपने कमरे में बुलाकर पूछा।
ठाकुर _बिंदिया ये मै क्या देख रहा हूं। तुम मुझे छोड़कर राजेश के आस पास ज्यादा मंडराने लगी हो। उसकी खातिर दारी कुछ ज्यादा ही कर रही हो। और कुछ ज्यादा ही बन ठन कर रहने लगी हो।
बिंदिया _हुजूर मै तो वहीं कर रही हूं जो आपने कहा था।
ठाकुर _मै कुछ समझा नही।
बिंदिया _हुजूर आपने ही तो कहा था कि राजेश को अपनी जाल में फसाओ। मै वही कर रही हूं। राजेश को फसाने की कोशिश, फिर आपका काम आसान हो जाएगा राजेश पर झूठा इल्जाम लगा कर उसे हवेली से निकलवाने का।
ठाकुर _ओह तो ये बात है, मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। मुझे लग रहा था कि कही मेरे बेटियो और पत्नि की की तरह उस लडके ने तुम पर भी तो कोई जादू नही कर दिया।
बिंदिया _हुजूर ये आप कैसी बाते कर रहे हैं, मै आपके सिवा भला और किसी के बारे में सोच सकती हूं। मै तो सिर्फ आपकी हूं और आपकी ही बनकर रहूंगी।
ठाकुर _ये हुई न बात। चल काफी दिन हो गया, आज मुझे खुश करदे।
ठाकुर बिंदिया को चोदने लगा।
बिंदिया ठाकुर से बेमन से chud रही थी उसे मजा नही आ रहा था।
Chudai खत्म होने के बाद।
ठाकुर _बिंदिया तुम उस लड़के को जल्द से जल्द अपनी जाल में फसाओ। फिर साले को धक्का मार के उसे बाहर भगाएंगे।
बिंदिया _जी हुजूर मै इसी काम में लगी हूं।
ठाकुर _हा और मुनीम की बेटी दिया को भी मेरे बिस्तर तक लाने पर काम करो, साली क्या माल है जब से पार्टी में देखा है मेरे दिल में उतर गई है। क्या वो हवेली में आती है।
बिंदिया _जी हुजूर दिया तो हवेली आती रहती है। राजेश से कुछ परीक्षा की तैयारी के लिए, पुस्तक खोल कर, राजेश को समझाने कहती हैं, दोनो हस हस कर इधर उधर की बाते भी करते रहते हैं।हुजूर कही ऐसा न हो दिया, तुम्हारी तरह राजेश के दिल में उतर गया तो। आप हाथ मलते रह जायेंगे।
ठाकुर _ये तुम क्या बक रही हो।
बिंदिया _हुजूर जो कह रही हूं सच कह रही हूं।
ठाकुर _मुनीम जी को बताना पड़ेगा।
बिंदिया _जी हुजूर,इससे पहले की दोनो के बीच कोई चक्कर चल जाय। आप मुनीम जी को बोलिए, वह दिया को राजेश से दुर रहने को कहे।
एक दिन दोपहर में राजेश का दोपहर में ही chudai का मन बन गया। बिंदिया आज कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। राजेश से रहा न गया। वह सोफे पर बैठा था। बिंदिया पानी लेकर आई। राजेश ने उसे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।
और बिंदिया की चूची मसलने लगा।
बिंदिया _दामाद बाबू आज तो बड़े मूड में लग रहे हो।
छोड़ों कोई देख लेगा तो, तुम्हारी बदनामी हो जाएगी,,,
राजेश _आज तो बड़ी हॉट लग रही हो काकी,, छोड़ने का मन नही कर रहा है।
बिंदिया _अगर इतना ही मन कर रहा है तो चलो मेरे कमरे में, पर यहां नही,,, कही तुम्हारी सास को पता न चल जाए।
राजेश _अच्छा तो चलो फिर,,,
राजेश बिंदिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाज़ा बंद कर दी।
इस सब घटना को रत्नवती की खास सेविका देख ली। इस बात की जानकारी उसने रत्नवती को दी।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रही हो,
सेविका _रानी मां मैने जो भी बात बताई बिलकुल सच है आप खुद भी जाकर देख सकती हैं।
रत्ना vati सेविका के साथ बिंदिया की कमरे तक गई।
कमरे की दरवाज़ा पर कान लगाकार, सुनने की कोशिश की। कमरे के अंदर बिंदिया की सिसकारी और चीखे सुनकर उसे यकिन नही huwa
रत्नवती_हे भगवान आखिर वही huwa जिसका डर था। ये बिंदिया पहले तो ठाकुर को अपने जाल में फसाया और अब राजेश को। इस बात का पता दिव्या को चला तो पता नही उस पर क्या बीतेगी।
इस चुड़ैल ने मेरी जिंदगी खराब की तो की मै अपनी बेटी की जिंदगी को खराब होने नही दूंगी।
रत्नवती अपने कमरे में आई और सोचने लगी की उसे क्या करना चाहिए।
उसने सोचा क्या इस बात की जानकारी दिव्या को दू।
फिर सोचा की दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है अगर यह बात दिव्या को पता चला कि उसका पति अधेड़ महिला के साथ रंगरेलियां मना रहा है, उसकी क्या दशा होगी। उसके बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। नही मै दिव्या को यह बात नहीं बताऊंगी।
मुझे ही कुछ करना होगा। मुझे राजेश से बात करनी होगी।
राजेश जब बिंदिया की chudai करके, कही बाहर जा रहा था। तभी सेविका ने उससे कहा।
सेविका _राजेश भईया आपको रानी मां अपने कमरे में बुलाई है।
राजेश _क्या सासू मां मुझे,,,
सेविका _हां,,,
राजेश रत्नवती के कमरे में गया।
राजेश_रानी मां आपने मुझे बुलाया, कुछ काम था क्या?
रत्नवती_हां, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
राजेश _मां जी क्या huwa आप कुछ नाराज लग रही है। क्या बात है मुझसे कोई गलती हो गई क्या?
रत्नवती_दामाद जी ये जो तुम कर रहे हो न, ये बिलकुल गलत है।
राजेश _क्या मां जी, मै क्या गलत कर रहा हूं, मै समझा नही।
रत्नवती_तुम भोले मत बनो, मुझे सब पता चल गया है तुम्हारे और बिंदिया के बीच क्या चल रहा है।
राजेश _ओह तो आप इसलिए मुझसे नाराज हो।
रत्नवती_कभी सोचा है अगर यह बात दिव्या को पता चली तो उस पर क्या बीतेगी?
राजेश _मां जी आप दिव्या की चिंता न करो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रत्नवती_मै दिव्या की मां हूं, मै उसकी चिंता नही करूंगी तो और कौन करेगा। वैसे तुम ये क्यो कह रहे हो कि दिव्या को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
राजेश _क्यों की दिव्या जी को यह बात पता है?
रत्नवती_क्या, दिव्या को यह बात पता है?
राजेश _हां, दिव्या ने ही मुझे यहां की सेविका के साथ संबंध रखने को कहा।
रत्नवती_ये तुम क्या कह रहे हो, मै कुछ समझी नहीं, दिव्या भला तुम्हे दूसरे औरतों से संबंध बनाने क्यों कहेगी।
राजेश _मां जी, आपको तो पता है सुहागरात के दिन की घटना। उस घटना के बाद डॉक्टर ने हमें संबंध बनाने से मना किया है। नही तो बच्चा गिर सकता है।
उस दिन के बाद हमने फिर संबंध नही बनाए।
लेकिन दिव्या को ये फिल होने लगा की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है।
कभीकभी मै दिव्या जी को अपने क़रीब पा कर उत्तेजित हो जाता था। मै रात में ठीक से सो नही पाता था।
दिव्या अपने को दोष देने लगी की वह मुझे पत्नी का सुख नही दे पा रही है। इसलिए उसने ही यह निर्णय लिया की जब तक उसकी डिलीवरी नही हो जाती, तुम इस हवेली की सेविका के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर सकते हो।
मैने उसे समझाया कीमेरी चिंता मत करों, मै खुद पर नियंत्रण रख लूंगा, लेकिन दिव्या नही मानी और वह खुद बिंदिया काकी से जाकर मेरी शारीरिक जरूरत को पुरा करने के लिए बोली तो काकी मान गई।
उसके बाद मैं और बिंदियां काकी संबंध बनाने लगे।
रत्नवती_, मुझे दिव्या ये बात बताई नही।
राजेश _मां जी आप उसकी मां है उसे लगा होगा की यह बात अगर आपको बताई तो आप इसके लिए साफ मना कर देंगी। इसलिए नही बताई होंगी।
रत्नवती_कोई मां ये कैसे स्वीकार करेगी की उसका दामाद उसकी बेटी को छोड़कर किसी पराई औरत से संबंध रखे।
और वो भी उस बिंदियां जैसी औरत से, तुम्हे पता भी है वो कैसी औरत है?
रत्नवती_देखो राजेश बेटा, वो बिंदियां अच्छी औरत नही है, वो तुम्हे बदनाम कर देगी। वो ठाकुर की रखैल है। वो तुम्हे मुसीबत में डाल देगी।
तुम्हे बिंदिया से दुर रहना होगा।
राजेश _ठीक है मां जी अगर आप चाहती है की मै बिंदियां काकी से दुर रहूं तो आपका आदेश का पालन होगा।
रत्नवती_क्या तुम सच कह रहे हो?
राजेश _हां मां जी,,, पर,,,
रत्नवती_पर क्या दामाद जी,,,
राजेश _मां जी आखिर मैं भी तो इंसान हूं न, दिव्या जी के डीलवरी तक खुद पर नियंत्रण रख पाना,,, आप तो समझ ही गई होगी,,,
रत्नवती_अच्छा ठीक है मेरी एक विश्वाश पात्र सेविका है, तुम उसके साथ अपनी जरूरतें पूरी कर लेना ।
राजेश _मां जी क्या वो सेविका जवान है?
रत्नवती_हां तो, ते तो तुम्हारे लिए अच्छा है न, उस बुढ़िया बिंदिया मे से तो अच्छी है।
राजेश _मां जी कही वह सेविका, किसी दूसरे से पेट से होकर मुझ पर इल्जाम डाल दी तो,,, वह जवान है तो किसी के साथ तो उसका संबंध होगा न।
रत्नवती_तो तुम क्या चाहते हो।
राजेश _मै तो यही चाहता हूं जो आप चाहती हो, हवेली की बदनामी न हो।
अच्छा आप इधर आईए मै आपसे कुछ सवाल पूछता हूं।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर उसे बेड में बिठा कर, उसके बाजू में बैठ गया।
राजेश _अच्छा ये बताओ आप दिव्या की मां हो न।
रत्नवती_ये भी कोई पुछने की बात है।
राजेश _जब दामाद की देखभाल बेटी न कर पाए तो बेटी का घर बचाने के लिए दामाद का ख्याल बेटी की मां रखे तो क्या ये गलत होगा।
रत्नवती_दामाद जी ये तुम क्या कह रहे हो?रत्नवती शर्म से पानी पानी होते हुए अपनी नजरे नीचे झुका ली।
राजेश _मां जी आप भी तो मेरी जरूरत पूरी कर सकती हों न, अगर आपको बिंदिया काकी पर भरोसा नहीं है तो।
दामाद का ख्याल सासू मां से अच्छा और कौन रख सकता है।
राजेश ने रत्नवती का हाथ पकड़ कर चूम लिया।
अब बेटी का फर्ज तो मां को ही पुरा करना पड़ेगा।
बोलो न मां जी,,,
रत्नवती सोच में पड़ गई,,,
राजेश _मां जी क्या सोचने लगी आप,,,
रत्नवती बेड से खड़ा हो गई।
रत्नवती_दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, ये गलत है।
राजेश भी बेड से उतर कर रत्नवती को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।
राजेश _मां जी कुछ गलत नहीं है।
रत्नवती का दिल जोरो से धड़कने लगा।
रत्नवती_बेटा छोड़ों न किसी के पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।
राजेश _मां जी ये बात किसी जो पता नहीं चलेगा। और रही बात दिव्या की तो मुझे पता है दिव्या हमारे बीच नए संबंध को वो स्वीकार लेगी।
राजेश ने रत्नवती की खुली पीठ को चूम लिया।
रत्नवती सिसक उठी ।
रत्नवती_दामाद जी, यहां तो जवान और खूबसूरत सेविकाय है, मै तो बूढ़ी हो गई हूं।
राजेश रत्नवती को आईने के सामने ले गया।
राजेश _ मां जी,खुद को देखो आईने में, आप दिव्या और गीता जी की मां नही बड़ी बहन लगती है।
राजेश ने एक रत्नवती को जकड़ कर एक स्तन दबाते हुए कहा।
देखो कितनी कसावट है अब भी आपकी स्तनों में बिलकुल कुंवारी लड़कियो की तरह।
रत्नवती , सिसक उठी उसकी दिल की धड़कन बहुत बड़ गई। राजेश की हरकत से उसकी योनि में पानी भर गया।
रत्नवती_दामाद जी मुझे सोचने का वक्त दो।
राजेश ने रत्नवती को छोड़ दिया।
राजेश _ठीक है मां जी, कोई जबरदस्ती नही है, आपकी मर्जी, अगर राजी हो तो कल पिंक कलर की साड़ी पहनना मै समझ जाऊंगा आप तैयार है।
अब मैं चलू,,
रत्नवती ने अपना हा में सिर हिलाया।
राजेश काम से सूरज पुर चला गया।
रात में राजेश घर आया।
रात्रि में भोजन के समय रत्नवती राजेश के सामने ही डाइनिंग टेबल में भोजन करने बैठी थी पर उसे राजेश के सामने बहुत शर्म महसूस कर रही थी।
भोजन पश्चात रत्नवती अपने कमरे में चली गई। वह रात भर सोचती रही वह राजेश के साथ नया रिश्ता शुरू करे की नही।
उसने सोंचा की राजेश को अगर न कह दी तो वह नाराज न हो जाए और वह मेरा कहना भी नही मानेगा। वह उस बिंदिया की जाल में फस जायेगा। नही नही मैं अपनी बेटी की जिंदगी बरबाद होने नही दे सकती। मै उसकी मां हूं। मेरी बेटी दामाद जी की शारीरिक जरूरत पुरा नही नही कर पा रही है तो मेरा भी फर्ज बनता है अपनी बेटी का घर बचाने दामाद जी की ईच्छा पूरी करू।
रत्नवती सुबह उठी आज नहाने से पहले अपने शरीर की अनचाहे बालों को अच्छे से हटाईऔर खूब रगड़ रगड़ कर नहाई। ठाकुर ने रत्नवती को जब से दिव्या को पेट में थी चोदना बन्द कर दिया था। तब से रत्नवती ने chut की बाल साफ़ नही की थी।
नहाने के बाद रत्नवती,
गुलाबी साड़ी पहन कर सेविकाओं से श्रृंगार करवाई।
आज बहुत ही खुबसूरत लग रही थी।
उसने सेविकाओं से राजेश के बारे में पूछा वो कहा है ताकि वह राजेश को दिखा सके।
सेविकाओं ने कहा वो किसी काम से बाहर चला गया है।
दिव्या ने जब ने जब अपनी मां को इस रूप में देखा।
दिव्या _मां आज तो बड़ी कमाल की लग रही हो। कही जा रही हो क्या?
रत्नवती को समझ नही आ रहा था कि क्या कहे, उसने कह दी बेटी काफी दिन हो गए न हम मंदिर नही गए तो सोची चलो मंदिर चले जाते है जाओ तुम भी तैयार हो जाओ।
दिव्या _मां पहले बताती तो राजेश को बाहर जाने से रोक लेती वो भी चला जाता हमारे साथ।
कोई बात नही बेटी हम दोनों चलें जायेंगे। तुम राजेश को फोन कर देना वो मंदिर आ जायेगा।
दिव्या _ठीक है मां।
राजेश को दिव्या ने फोन कर मंदिर बुलाया।
राजेश जब रत्नवती को गुलाबी साड़ी में देखा तो। मुस्कुराने लगा।
रत्नवती शर्म से सिर झुका ली।
मंदिर में दर्शन के बाद। दिव्या और रत्नवती कार से घर आ गए।
राजेश को कुछ काम था वह सूरज पुर चला गया।
राजेश के लंद में अभी से हल चल होने लगा। राजेश नअपने लंद को सहलाते हुए कहा। शाला रात होने का इन्तजार तो कर सासू मां के अंदर जाने अभी से छटपटा रहा है।
रत्नवती हवेली आने के बाद राजेश के बारे e ही सोचने लगी पता नहीं राजेश क्या क्या करेगा उसके साथ। उसकी योनि गीली हो चुकी थी। पतानहीं राजेशके साथ वो सब कैसेकर पाएगी, उसे बड़ी शर्म महसूस हो रही थी।
वर्षो बाद उसकी शरीर की औरत जाग उठी थी। ठाकुर ने उसे आखिरी बार कब चोदा था। भुल गई थी।
राजेश हवेली लौटा।
रात में सभी लोग भोजन के लिए बैठे थे। ठाकुर भी बैठा था।
राजेश और रत्नवती आमने सामने बैठे थे।
रत्नवती राजेश से नजरे बचा रही थी।
राजेश को मजाक सूझा।
उसने अपने पैर से रत्नवती की पैर को रगड़ते लगा।
रत्नवती चौंकी, वह राजेश की ओर तिरछी नजरों से देखि।
सबकी नजरों से बचा कर न में सिर हिलाई।
पर राजेश नही माना, उसे मजा आ रहा था। वह रत्ना वटी की पैरो को अपने पैर से रगड़ने हुवे ऊपर ले जाने लगा।
रत्नवती सिसक उठी।
गीता _मां क्या हुआ?
राजेश _लगता है सासू मां को मिर्ची लग गई।
रत्नवती गुस्से से राजेश की ओर देखने लगा। राजेश ने उसे आंख मार दी।
रत्ना वटी का मुंह खुला का खुला रह गया।
वैसे रत्नवती को राजेश की छेड़ खानी अच्छा लग रहा था जब कि ठाकुर भी वहीं बैठा था उसे पता नही था सास और दामाद के बीच क्या चल रहा है।
राजेश को रत्नवती को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था।
वह अपना पैर ऊपर रत्नवती के टांगो तक ले गया। और अपने अंगूठे से उसकी पैंटी को रगड़ दिया ।
रत्नवती फिर सिसक उठी।
गीता _मां लगता हैं आपको कुछ ज्यादा मिर्ची लगी है लो पानी पी लो।
रत्नवती _हूं,
रत्नवती चुपचाप पानी पीने लगी और राजेश को तिरछी नजरों से घूरने लगी।
राजेश मुस्कुराने लगा।
राजेश अपनी एक कान पकड़ लिया। और इशारे से माफ़ी मांगा ।
रत्नवती मुस्कुराने लगी।