रत्नवती रात्रि भोज के बाद अपने बेडरुम में जाकर, राजेश का आने का इन्तजार करने लगी। राजेश ने डिनर टेबल के नीचे सबके सामने ही जो उसके साथ छेड़खानी किया था, उससे वह बहुत गर्म हो चुकी थी। उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी।
वह यह सोच कर की राजेश उसके कमरे में आकर पता नहीं उसके साथ क्या क्या करेगा, जब सबके सामने ही, इतनी छेड़खानी करता है पता नही एकेले में कैसी कैसी हरकत करेगा। यह सोचकर ही रत्नवती के अंदर रक्त संचार बढ़ गया था।
इधर राजेश अपने कमरे लेटा था वह भी अपनी सास की chut मारने बेताब था लेकिन वह दिव्या को धोखा नही देना चाहता था। वह बिना दिव्या के जानकारी के वह अपनी सास के कमरे में नही जा सकता था।
उसे समझ नही आ रहा था कि यह बात दिव्या को कैसे बताए। कही वो बुरा मान गई तो,,,
दिव्या राजेश के सीने में कंधे रख कर सोई थी। राजेश ने जब फैसला किया की वह दिव्या को इस बात की जानकारी दे दे, तब तक दिव्या गहरी नींद में सो चुकी थी।
राजेश _दिव्या जी तो सो गई है, उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं है उसने अपने लंद को मसला, सारी यार तुम्हे सासू मां के अंदर जाने के लिए और इन्तजार करना पड़ेगा।
इधर रत्नवती अपनी दामाद का, इन्तजार करती रह गई।
रत्नवती की नींद लग गई।
उसने सपने में देखा वहदुलहन बनकर बैठीहै, राजेश, उसके कमरे में आया है।
और राजेश उसकी घूंघट उठाता बाहों में भर कर आई लव यू सासू मां कह रहा है।
वह शर्म से सिर झुका कर कहती है दामाद जी ये आप क्या कह रहे है, मै तुम्हारी सासू मां हूं।
फिर राजेश कहता है, तो क्या हुआ तुम भी एक औरत हो,और मै एक मर्द हूं। एक मर्द एक खुबसूरत औरत से प्यार नहीं कर सकता क्या?
अगर मैं आपको पसंद नही हूं तो कह दो मै यहां से चला जाता हूं। राजेश वहा से उठ कर जाने को huwa
तभी रत्नवती ने राजेश का हाथ पकड़ लिया, और बोली, दामाद जी कहा जा रहे हो।
राजेश _आप मुझे पसंद नही करती तो यहां से जा रहा हूं।
दामाद जी अगर मैं आपको पसंद नही करती तो दुलहन की तरह सज कर क्यो बैठती?
राजेश _मतलब, आग दोनो तरफ़ लगी है। तो कह दो न जो एक लङकी अपनी बॉय फ्रेंड से कहता है।
रत्नवती _ न,मुझे शर्म आती है,,
राजेश _ठीक है मत बोलो मैं जा रहा हूं।
रत्नवती _ मुझे कहने में शर्म आ रही है, प्लीज दामाद जी समझो न।
राजेश _अच्छा धीरे से मेरे कान में कह दो,,
राजेश ने अपना कान रत्नवति के मुंह के पास लाया,
रत्नवती ने धीरे से कहा, आई लव यू,,,, दामाद जी,, और यह कहकर शर्म से अपना चेहरा अपनी हाथो से छुपा लिया
राजेश ने अपने दोनो से रत्ना की हाथ पकड़ कर उसके चेहरे से हटाया, रत्ना vati शर्म से सिर झुका ली।
राजेश ने उसका चेहरा ऊपर किया और उसकी ओंठ को चूम लिया।
रत्नवती शर्म से राजेश से लिपट गई।
राजेश ने रत्ना को अपनी बाहों में जकड़ लिया।
राजेश ने रत्नवती को अपनी बाहों में उठा लिया। और उसे बेड पर लिटा दिया।
फिर राजेश ने उसकी ब्लाउज उतार कर उसकी चूची पीने लगा। वह बहुत उत्तेजित हो कर सिसक रही है। राजेश ने अब अपना पेंट और कच्छा उतार दिया, और उसकी कच्छी भी उतार दी।
राजेश ने उसकी bur की बड़ी तारीफ की। वह अपने हाथो से bur को सहलाया, फिर उसकी टांगे फैला कर राजेश उसके बीच आ गया।
राजेश ने अपना लंद पकड़ कर योनि के मुख पे रख कर जोर का धक्का मारा, वह चीख उठी,,,
तभी वह नींद से जाग गई।
वह हांप रहीं थी।
रत्नवती _ओह ये सब सपना था। उसे दुख हुआ कि रात में वह राजेश का बेसब्री से इंतजार कर रही थी और वो नही आया।
उसने अपने पेंटी में गिला पन महसूस किया। वह अपना हाथ ले जाकर उसे अपने हाथ से छू कर देखी,chut रस से हाथ गीली हो गई। उसने उसे सूंघा एक मादक खुश्बू महसूस की।
वर्षो बाद उसकी पैंटी गीली हुई थी।
वह घड़ी की ओर देखा तो सुबह के 6बज चूके थे वह उठी और बाथरूम में घुस गई, अपनी शरीर को रगड़ रगड़ कर नहाने लगी।
उसकी bur पे अभी भी खुजली सी हो रही थी वह अपनी bur को सहलाई उसे बहुत अच्छा फिल huwa, वह एक ऊंगली से अपनी भगनाशा को छेड़ी, उसे परम आनंद का अनुभव huwa, वह ऊंगली से अपनी भगनाशा को घिसने लगी।
वह राजेस को इमेज कर तेज तेज ऊंगली चलाते हुवे सिसकने लगी, कुछ ही देर में वह झड़ने की स्थिति में आ गई, वह तेज तेज ऊंगली चलाते हुवे, दामाद जी,, कहकर चीखते हुए झड़ने लगी।
वह राहत की सांस ली,, वह हापने लगी।
सावर को चालू कर खुद को शान्त करने लगी।
उसके साथ ऐसा कभी नहीं huwa tha वह शर्मिंदगी महसूस करने लगी।
वह नहाकर निकली और पिंक कलर की एक नई साड़ी पहन ली।
वह अपने कमरे से बाहर आई। वह पूजा रूम में गई और पूजा कर भगवान से बोली, हे भगवान मुझे मुझे माफ़ कर देना, मै जानती हूं की ये गलत है पर मैं भी तो आखिर इक स्त्री हूं । अपनी भावनाओ को कब तक दबा कर रख सकती हूं। हो सके तो मेरी गलतियों के लिए क्षमा कर देना।
वह पूजा रूम से बाहर आई सेवीका ने उसके लिए चाय लेकर आई, वह चाय लेकर दिव्या के कमरे की ओर जा रही थी तभी रत्ना ने उससे पूछी,,
चाय लेकर कहा जा रहीं,,
सेविका _जी रानी मां, मै दिव्या दी के कमरे में जा रहीं थी।
रत्ना _तुम गीता के कमरे में चली जाओ मै दिव्या के कमरे में, चाय लेकर जाऊंगी,,
सेविका _आश्चर्य से देखने लगी,,
रत्ना _क्या huwa, ऐसे क्यों देख रही हों, तुम्हे कोई दिक्कत है,,
सेविका _नही रानी मां, मुझे क्या दिक्कत होगी, वो क्या है न कि अब तक मैं ही लेकर जाती थी,, तो,,
रत्ना _हा तो, क्या मैं लेकर नंही जा सकती,,
जो कहा है वो करो,,
सेविका _जी रानी मां,,
सेविका वहा से चली गईं।
इधर रत्ना काफी लेकर खुद दिव्या के कमरे में गई, राजेश को काफी ज्यादा पसंद था।
जब वह कमरे में गई,,
उसने देखा राजेश बेड पर सोया है, दिव्या कमरे में नही है। उसने देखा बाथरूम से आवाज आ रही है, मतलब दिव्या नहा रही है।
उसने राजेश को को देखा जो अब भी सो रहा था।
रत्ना _लो कमबख्त मेरी नींद उड़ा कर खुद घोड़े बेच कर सो रहा है।
उसने राजेश को पुकारा,,
रत्ना _दामाद जी उठो, सुबह ही गई है,,,
राजेश नींद से जागा,,,
राजेश _सासू मां आप,,,
रत्ना _क्यों, मै नही आ सकती क्या तुम्हारे और दिव्या के कमरे में,, काफी लाई हूं उठो,,,
राजेश _वो तो सेविका लाती थी न,,,
रत्ना _लगता है मेरा आना तुमको अच्छा नही लगा,, मुंह बनाते बोली,,
राजेश _अरे सासू मां आप तो नाराज हो गई,,
राजेश उठ कर बैठ गया ।
रत्ना _अच्छा मै चलती हूं काफी पी लेना,,
राजेश ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया,
रत्ना _दामाद जी क्या कर रहे हो,,,
राजेश ने रत्ना को खीच कर अपनी गोद में बिठा लिया।
राजेश _आज बहुत प्यारी लग रही हो, उसकी कान में धीरे से कहा । आह,, बड़ी प्यारी खुशबू आ रही है आपकी बदन से,,,
उसकी गरदन को सूंघते हुए कहा,,
रत्ना _चल झूठा कहीं का,,,
राजेश _मै झूठ नहीं सच कह रहा हूं,,
उसकी पीठ को चूमते हुए कहा,,,
रत्ना _इतनी अच्छी लगती हूं तो कल आया क्यों नही,
रत्ना ने रूठते हुवे कहा,,
राजेश _ओह तो नाराजगी की वजह ये है।
सॉरी सासू मां,,,
मैं तो आना चाहता था, पर,,
रत्नवती _पर क्या?
राजेश _मै दिव्या जी से यह बात कह न सका की मै आपके पास जा रहा हूं, आज से आप मेरी जरुरते पूरी करेंगी । मुझे लगा की दिव्या जी कही बुरी मान गई तो,,, आप मेरी सासू मां है इस लिए,,
रत्ना _पर तुमने तो कहा था कि दिव्या को यह बात पता चलेगा तो उसे मना लोगे ।
राजेश _हूं, कहा तो था, पर हिम्मत नही हुई उसे धोखे में रख कर तुम्हारे कमरे में जाने की, मै चाहता हूं, दिव्या को यह बात मालूम हो कि मैं तुम्हारे कमरे में जा रहा हूं, अपनी शारीरिक जरूरत पुरा करने।
रत्ना _ये तो अच्छी बात है, मेरे बेटी के लिए,,, तुम उसे धोखे में रख कर कोई काम नहीं करोगे,,
अच्छा अब छोड़ों मुझे, दिव्या से पूछ कर ही आना मेरे पास,,,
राजेश _अरे रुको न एक किस तो दे दो,,,
राजेश ने रत्ना को अपनी ओर घुमा दिया। फिर रत्ना की ओंठ को अपनी ओंठ में भर कर चूसने लगा।
रत्ना की सांसे तेज हो गई।
वह राजेश को खुद से छुड़ाई और कमरे से भागी,
अपने कमरे में आकर तेज तेज सांस लेने लगी
उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।
इधर राजेश का लंद तन कर खड़ा हो गया था।
राजेश को जोरो की सुसु आई थी।
जान दरवाज़ा खोलो मुझे सुसु करना है।
दिव्या ने दरवाज़ा खोला , दिव्या शरीर पर एक तौलिया लपेटी थी।
दिव्या _क्या huwa बेबी,
राजेश _मुझे जोर की सुसु लगी है।
दिव्या _ओह, आ कर लो,,
राजेश ने बाथरूम में जाकर अपनाl लोअर कच्छा नीचे कर लंद पकड़ कर,यूरिनल के सामने खड़ा हो गया।
वह मूतने की कोशिश करने लगा, पर मूत्र बाहर नही आ रहा था क्यो की उसका लंद खड़ा huwa था।
दिव्या _क्या huwa जानू, कोई दिक्कत है क्या?
दिव्या ने राजेश के पास आकर उसके लंद को देखा और हंसने लगी।
राजेश _आप हंस क्यू रही हो?
दिव्या _लंद खड़ा कर रखा है तो पेशाब बाहर कैसे आएगी।
राजेश _तो जानू आप ही मदद कर दो,,
दिव्या, राजेश के पीछे खड़ी हो गई और राजेश का लंद पकड़ कर हिलाने लगी।
दिव्या _अरे बाबा ये तो मेरा हाथ लगते ही और सख्त हो रहा है।
राजेश को दिव्या का लंद हिलाना बहुत अच्छा लग रहा था।
वह मुड़ कर दिव्या की ओंठ चूसने लगा। दिव्या लंद हिलाती रही।
दिव्या _जान, अब तो मेरा हाथ दुखने लगा है, लगता हैं तुम्हे chudai की जरूरत है।
दिव्या नीचे बैठ गई और राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगी।
राजेश प्यार से दिव्या की बाल सहलाने लगा।
उसने दिव्या की तौलिया हटा दिया और उसकी चूची मसलने लगा।
राजेश का लंद और लंबा मोटा हो गया।
दिव्या _मुझे लगता है तुम्हे तेज chudai की जरूरत है।
तुम रुको मैं काकी को बुलाकर लाती हूं।
दिव्या बाथरूम से बाहर निकल आई और बिंदिया को काल करने के लिए मोबाइल उठा ली।
राजेश _नही दिव्या जी, काकी को मत बुलाओ,,
दिव्या _पर क्यों, तुम्हे उसकी जरूरत है।
मैं उसे बुला रही,,,
राजेश _नही,,, दिव्या जी,,, काकी को नहीं,,
दिव्या _काकी को नही,,,
मैं कुछ समझी नहीं जान
राजेश _सासू मां को पता चल गया है कि मैं अपनी शारीरिक जरूरत को काकी से पूरी करता हूं। सासू मां ने मुझे कहा है कि उससे दुर रहूं वह अच्छी औरत नही है वह विश्वाश पात्र नहीं है।
दिव्या _क्या?
राजेश _हा, ये सच है
दिव्या _फिर तुम्हारी जरुरते कैसे पूरी होगी।
राजेश _सासू मां ने कहा है कि,,,
दिव्या _मां ने क्या कहा है राजेश चुप क्यो हो गए,,
राजेश _सासू मां ने कहा की यहां और भी जवान खुबसूरत औरते एवम लड़किया है मै उससे बात करूंगी।
मैने कहा कि जवान लडकियो पर विश्वास कैसे कर सकते हैं, कही दूसरे से पेट से होकर इल्जाम मुझ पर डाल दी तो।
दिव्या _जानू, तुमने बिलकुल ठीक कहा, इन जवान और खुबसूरत सेविकाओं का कोइ भरोसा नहीं।
फिर मां ने कोई दूसरा उपाय बताया।
राजेश _हां उसने कहा कि तुम चाहो तो तुम अपनी जरूरत मुझसे पूरी कर सकते हो? मै अपनी बेटी का घर बचाने इतना तो कर ही सकती हूं।
दिव्या _क्या मां ने ऐसा कहा ?
राजेश _हां , पर सासू मां ने यह भी कहा है कि यदि दिव्या को कोई आपत्ति न हो तो।
दिव्या _क्या तुमको मां पसंद है ?
राजेश_दिव्या जी ये आप क्या पूछ रही हैं?
दिव्या _मेरा मतलब है कि क्या तुम मां के साथ करना चाहोगे।
राजेश _ अगर आपको आपत्ति न हो तो,, मुझे भी कोई आपत्ति नहीं।
दिव्या _मां ने कुछ फैसला किया है तो मेरे भलाई के लिए ही लिया होगा। इसलिय मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
राजेश _पर मुझे नही लगता कि वह आपके सामने मेरे साथ सब कर पाएगी।
दिव्या _हूं, जानती हूं, इतना खुलने में समय तो लगेगा ही।
ठीक है तुम मेरे अनुपाथिति में मां के साथ सब कर सकते हो। पर सिर्फ मेरी डीलवरी तक,
वैसे अभी क्या करना है? तुम्हे तो मां की जरूरत है न। तो मैं मां को कमरे में भेजू।
राजेश _ओके जान।
राजेश ने दिव्या की ओंठ को चूसते हुए कहा।
दिव्या ने राजेश के लंद को हाथ से पकड़ा, उसका लंद झटके मार रहा था।
दिव्या _राजेश लगता है तुम्हारा घोड़ा अपनी सासू मां की कुवा की पानी पीने कुछ ज्यादा ही बेताब है। देखो तो कैसे झटके मार रहा है।
दोनो हंसने लगे।
दिव्या अपनी कपड़े पहनी। और अपने मां के कमरे में गई।
रत्ना _अरे बेटी तुम यहां कुछ काम था क्या?
दिव्या _मां, ओ राजेश को आपसे कुछ काम है, वो आपको बुला रहे हैं।
रत्ना _क्या कहा, दामाद जी को मुझसे काम है?
दिव्या _हां मां।
रत्ना _वैसे दामाद जी को क्या काम है बेटी, कुछ बताया नही क्या?
दिव्या _राजेश ने कहा की वह आपको, वह आपको ही बताएंगे।
रत्ना _ओह, ऐसा क्या काम आ गया दामाद जी को जो सिर्फ मुझे बताएगा, अभी जाकर पूछती हूं।
दिव्या _मां, राजेश को जो भी समस्या हो न उसका अच्छे से समाधान कर देना।
रत्ना _ठीक है बेटी देखती हूं।
रत्ना राजेश के कमरे में गई।
रत्ना ने देखा राजेश बेड पे लेटा है।
रत्ना _ क्या huwa दामाद जी दिव्या बता रही थी आपको मुझसे कुछ काम है।
राजेश _हां सासू मां,
रत्ना राजेश के सिर के बाजू बैठ गई बोलो क्या काम है। दामाद जी।
राजेश _मुझे अपनी सासू मां कादूदू पीना है ।
रत्ना _छी दामाद जी, बड़े बेशरम हो,रत्ना शर्मा गई।
राजेश _अपने दामाद की ईच्छा पूरी नही करोगी।
रत्ना का दिल जोरो से धड़कने लगा।
राजेश ने रत्ना का पल्लू गिराकर उसका ब्लाउज का बटन खोलने लगा।
रत्ना _दामाद जी, क्या कर रहे हो कोई आ जाएगा।
राजेश _कोई नही आयेगा सासू मां, दिव्या जी ने ही भेजा है न आपको।
रत्ना _मतलब दिव्या मान गई क्या?
राजेश _हूं,
रत्ना _सच, कही झूठ तो नही बोल रहे।
राजेश _न
चलो अब अपने दूदू के दर्शन कराओ।
रत्ना _दरवाज़ा खुला है, कोई भी आ सकता है।
राजेश _ठीक है बंद कर दो।
रत्ना _किसी को शक हो गया तो सास और दामाद बंद कमरे मे क्या कर रहे हैं।
राजेश _लगता है आपका मन नही है, आप जाओ, मै काकी को बुला लेता हूं।
रत्ना _अरे बाबा तुम तो नाराज हो गए।
अच्छा मै दरवाज़ा बंद कर के आती हूं।
राजेश बेड पर उठ कर बैठ गया। रत्ना दरवाज़ा बंद कर के आई।
राजेश ने रत्ना का ब्लाउज का बटन खोलने लगा। रत्ना प्यार से राजेश का बाल सहलाने लगी।
ब्लाउज के खुलते ही, मस्त बड़े बड़े गोरे गोरे सुडौल स्तन राजेश के आंखों के सामने आ गया।
राजेश _वाह, सासू मां क्या मस्त स्तन है आपके, उसके चूचक काफी बड़े बड़े थे।
राजेश देर न करते हुए चुचक को मुंह में भर लिया। और बारी बारी से मसल मसल कर पीने लगा।
रत्ना सिसकने लगी। उसकी, उसके शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ गया।
वह प्यार से राजेश की बालो को सहलाते लगी।
रत्ना बहुत अधिक गर्म हो गई।
राजेश ने रत्ना को बेड पे लिटा कर उसके ऊपर आ गया।
और उसकी गालों को चूमने चाटने लगा।
उसकी ओंठ चुसने लगा।
चूमते चूमते नीचे गया। उसकी खुबसूरत गहरी नाभी को चूमने चाटने लगा।
रत्ना की हालत खराब होने लगी।
रत्ना _दामाद जी जो भी करना है जल्दी करो कोई आ न जाए।
राजेश ने रत्ना की साड़ी पेटीकोट ऊपर उठा कर उसकी पैंटी खींचकर अलग कर दिया।
उसकी पेंटी एकदम गीली थी, राजेश ने उसे सूंघा, जिसे देखकर रत्ना शर्म से पानी पानी हो गई।
पेंटी निकलने से
उसकी मस्त फूली हुई चिकनी chut राजेश के आंखों के सामने आ गया।
राजेश ने पहले हाथ से boor को सहलाया।
राजेश _सासू मां सच में क्या गजब की boor है आपकी, लेने में खूब मजा आयेगा।
राजेश ने जीभ से chut चाटना शुरू कर दिया।
रत्ना की हालात और ज्यादा खराब हो गई। वह आनंद में सिसकने लगी छटपटाने लगी।
आह मां,, आह,,,
उसकी आंखो की पुतलियां पलट गई।
रत्ना _दामाद जी जल्दी करो और मैं बर्दास्त नही कर पाऊंगी।
राजेश बेड से उतरा और अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।
रत्ना राजेश का लंद को आश्चर्य से देखने लगी।
उसका पति के लंद से डेढ़ गुना ज्यादा बड़ा और मोटा था।
राजेश बेड पर चढ़ गया,
वह रत्ना के कमर के नीचे तकिया लगा दिया और उसकी टांगे फैला दी। अपना लंद पकड़ कर उसकी योनि को लंद से रगड़ने लगा।
रत्ना लंद लेने और व्याकुल हो गई।
वह सिसकते हुए बोली, दामाद जी और मत तड़फाओ डाल दो, अनदर फाड़ दो मेरी chut, कमिनी बहुत परेशान कर रखी है।
राजेश ने लंद को योनि मुख पर रख एक जोर का धक्का मारा एक ही धक्के में फच की आवाज करता huwa लंद bur फाड़कर आधे से ज्यादा अदंर घुस गया।
रत्ना चीख उठी।
राजेश ने रत्ना की चूची चूसना शुरू कर दिया ।
रत्ना फिर तड़फने लगी।
राजेश ने फिर एक जोर का धक्का मारा इस बार लंद पुरा जड़ तक अन्दर घुस गया। लंद का टोपा रत्न के बच्चे दानी से टकराया रत्ना चीख उठी।
राजेश कुछ देर तक वैसे ही घुसाए उसकी ओंठ चूसने लगा, फिर चूची मसलने और पीने लगा।
जिससे रत्ना फिर गर्म हो गई।। अब राजेश अपने लंद को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। रत्ना को मजा आने लगा।
राजेश धीरे धीरे स्पीड बढ़ाने लगा।
रत्ना को बहुत मजा आने लगा। वह संभोग की परम सुख को प्राप्त करने लगी।
राजेश को भी अपनी सास को चोदने में एक अलग ही मजा आ रहा था।
दोनो स्वर्ग की सैर करने लगें। दोनो दो जिस्म एक जान बन कर संभोग का मजा लूटने लगे।
कमरामें दोनो की आह उह आह उह की आवे गूंजने लगी ।
लंद रत्ना की bur की पूरी गहराई तक जा रहा था और टोपा उस्की गर्भाशय को ठोक रहा था, जिससे रत्ना का शरीर में झन्नाहट पैदा हो रहा था।
आज तक रत्ना को ऐसा सुख कभी नहीं मिला था उसकी bur में वर्षो से जमा पानी आज लावा बन कर बह रहा था, पुरा बेड शीट गीली हो गई।
राजेश जोर जोर से धक्का मार मार के चोदने लगा।
जैसे वह रत्ना के अंदर पुरा घुस जाना चाहता हो।
कमरे में फ्च फैच, गछ gach आह उह आह उह और चूड़ियों की खन खन की आवाज गूंज रही थी।
रत्ना राजेश को जकड़ ली थी और अपनी क़मर ऊचका उचका कर राजेश का साथ दे रही थी।
रत्ना सेक्स की आनन्द की जिस परम अनुभूति को प्राप्त कर रही थी उसकी व्याख्या करना मुश्किल है।यह केवल महसूस किया जा सकता है बताया नही।
वह उस आनन्द में ऐसी डूबी की राजेश उसे अपना मर्द नजर आने लगा ।
पर कुछ ही देर में वह झड़ने की स्थिति में आ गई वह राजेश से जोर से लिपट गई और चीखते हुए झड़ने लगी। उसे झड़ने में ऐसा आनद कभी महसूस नहीं की थी।
इधर राजेश ने चोदना बन्द कर दिया, वह भी सुस्ताने लगा।
तभी राजेश की मोबाइल बजने लगा।
दिव्या का कॉल था।
रत्ना _क्या huwa दामाद जी किसका फोन है।
राजेश मां जी, दिव्व्या जी का,,
दिव्या _हैलो राजेश, गीता दी मां को ढूंढ रही है। कही ढूढते हुवे कमरे में न पहूंच जाय, आप दोनो जल्दी बाहर आ जाओ।
राजेश ने रत्ना को पूरी बात बताई।
रत्ना, बेड से उठी और अपनी ब्लाउज का बटन लगाने लगी।
राजेश उसे पीछे से जकड़ लिया।
राजेश _सासू मां मेरा अभी huwa नही है ।
रत्ना _दामाद जी सिचवेसन को समझो, गीता ढूढते कही इधर आ गई तो अनर्थ हो जायेगा ।
वैसे भी मै घर में ही हूं, ठाकूर और गीता के काम पर जाने के बाद मैं फिर आ जाऊंगी, तब तक धैर्य रखो।