invisible
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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयामैने कहा मालकिन आपका पानी बंद हो गया और कोई सेवा बताइए। वह मुस्कुरा कर बोली सिर्फ कह ही रहा है या मेरी सेवा कर भी देगा। मैने कहा मालकिन आप हुक्म कीजिए मै कुछ भी कर सकता हूं। उसने कहा ऐसा कर अभी ठाकुर साहब के आने में टाइम है। तुम मेरे पैर दबा दो बहुत दिनों से दर्द है।
वह बेड के किनारे बैठ गई और मै नीचे जमीन पर बैठकर उसके पैर दबाने लगा। धीरे धीरे उसने अपने साड़ी ऊपर को तरफ खींची और घुटनों से ऊपर कर ली। उसकी गोरी गोरी पिंडलियां मेरे हाथों में थी उन पर एक भी बाल नहीं था। मैने अब उसके घुटनों तक दबाना शुरू कर दिया।
वह बोली तेरे में दम नहीं लगता, ना तो तेरे हाथ सख्त हुए है ना ही......
मैने बोला मालकिन ज्यादा तेज दबाने से आपके शरीर पर निशान पड़ जाएंगे वैसे भी बहुत गोरा पैर है आपका दूध की तरह। मेरी बात सुनकर वह बहुत खुश हुई। वैसे भी तारीफ हर तरह की औरतों को सुनना पसंद होता है। वह बोली थोड़ा और ऊपर कर। ऐसा करो तुम बेड पर ही आ जाओ और वह पीछे की तरफ पीठ के बल लेट गई। उसकी छाती से साड़ी एक तरफ हो चुकी थी और उसने पैर मोड़ कर नीचे से भी शादी पेडू के लगभग कर ली थी। अब उसके पैर बिल्कुल नंगे थे और मै उसकी जांघों तक देख सकता था। उसने काले हल्के कपड़े की चड्डी पहनी थी। मै उसके पूरे पैरो को दबाने लगा। अब मैं पूरी तरह समझ चुका था कि ठाकुराइन प्यासी है। मै धीरे धीरे पैर दबाने के बहाने उनकी चड्डी के कोनो में अपनी उंगलियों डालने लगा। उनकी छाती तेज साँस चलने के कारण ऊपर नीचे होने लगी थी। उसने मेरा हाथ पकड़ पर अचानक अपनी चड्डी में डाल दिया और बोली यहां भी दबाओ। मैने उसकी बिना बालों वाली चूत की सहलाया और बोला मालकिन इसे और भी अच्छे तरीके से दबा सकता हूं। उसने अपनी नशीली आँखे थोड़ी सी खोली और बोली जाओ पहले दरवाजा लॉक कर दो। मै उठकर दरवाजे की चिटकनी लगा आया। मेरे आते ही वह बोली दबाओ कैसे दबाया जा सकता है, याद रखो अगर तुम्हारा दबाना मुझे पसंद आया तो तुम्हारी नौकरी पक्की। मैने कहा जी मालकिन, और उसकी चड्डी को उतर कर उसकी चूत को आजाद कर दिया। उसकी चूत एक दम गोरी तो नहीं लेकिन काली भी नहीं थी। उसके अंदर वाले पत्ते बाहर की तरफ निकले थे और इनके ऊपर उसकी चूत का दाना था। मै उसकी चूत पर झुका और उसे मुँह में भर लिया। ठाकुराइन के पूरे जिस्म में सरसराहट हो गई। शायद पहली बार उसकी चूत पर होंठ और जीभ का आक्रमण हुआ था। वह कुलबुलाने लगी। मै उसकी चूत को अच्छे से चाट रहा हूं जैसे भैंसा भैंस की चूत को चाट रहा हो। बीच बीच में उसके दाने को और छेद को भी अपनी जीभ से तंग कर रहा हूं। अभी मुश्किल से पांच मिनट ही हुए होंगे कि ठाकुराइन अकड़ गई और उसने अपने चूतड़ हवा में उठा लिए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। मै समझ गया कि ठाकुराइन अपनी मंजिल के करीब है। मैने और जोर जोर से चूत को चाटा और आखिरकार ठाकुराइन झड़ गई। वह धड़ाम से नीचे गिरी और सांसो को सामान्य करने लगी। मेरा लंड अब अपने पूरे उफान पर था लेकिन मैं अपनी तरफ से पहल नहीं कर सकता था। थोड़ी देर बाद सुलोचना देवी सामान्य हुई और कहा वह लड़के जीभ में दम है तेरी। और भी किसी चीज में दम है या नहीं। मैने कहा मालकिन सेवा करने की छूट दीजिए पता चल जाएगा एक बार हुक्म कीजिए। वह बोली चलो दिखाओ अपनी सेवा करने की सीमा मेरी तरफ से छूट है तुम्हे।
मैने कहा जो आज्ञा मालकिन। मैने उसकी ब्लाउज को खोला और उसे ऊपर से नंगी कर दिया। अब उसकी बाकी की साड़ी को भी उतार कर नंगी कर दिया।
वह सब कुछ आराम से करवा रही थी। मैने उसके चूचियों को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरी चुचि को हाथों से सहलाना चालू कर दिया। मै खुद भी अब तक पूरा नंगा हो चुका था। मै उसके पूरे बदन को चाटने लगा। उसके कान, गर्दन, गाल, होंठ, चूचियां। अब धीरे धीरे उसकी छाती को जीभ से चाटते हुए पेट पर जीभ घुमाने लगा। उसके शरीर में मीठी मीठी हलचल होने लगी। मैने उसे उल्टा पेट के बल लिटाया और इसकी गुदी से चाटता हुआ उसकी कमर पर चटके लगा। धीरे धीरे मै उसके चूतड़ों की तरफ बढ़ रहा था। उसके चूतड़ सख्त हो चले थे और गांड के छेद को बुरी तरह दबाकर छिपा लिया था। मैने उसके गोरे और चिकने चूतड़ों पर जीभ घुमाई। अब उसकी जांघे थोड़ा खुल गई थी। मैने उसे कमर से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाकर उसके पेट के नीचे सो तकिये लगा दिए जिससे उसकी चूत खुलकर सामने आ गई।
अब मैं वो करने जा रहा था जो मेरी जिंदगी बदल सकता था। अगर मै जल्दी झड़ गया तो ठाकुराइन नाराजगी में कुछ भी कर सकती थी और अगर मैने उसे अपनी सेवा से संतुष्ट कर दिया तो वह मेरी शायद गुलाम बन सकती थी।
मैने उसके छेद में अपना लंड प्रविष्ट कर दिया। उसकी चूत में चिकनाई लगी होने के कारण मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और मैने झटके लगाने शुरू कर दिए। वह एक एक झटके के साथ सिसकारियां ले रही थी। मेरा कड़क लंड उसकी बच्चेदानी पर प्रहार कर रहा था। वह अपनी गांड और भी बाहर निकाल कर लगभग एक आदर्श पोजिशन में डॉगी बन चुकी थी। अब मेरा लंड उसकी चूत में और गहराई में जा रहा था। मै उसकी कमर को चूम रहा था और थोड़ी देर बाद उसके चूतड़ों पर हल्के हल्के चाटे लगाने लगा। अब वह और जोश में आ गई थी। पूरे कमरे में उसकी चूत में लंड बाहर अंदर होने से आने वाली चप चप और उसके चूतड़ों पर मेरे द्वारा धक्के लगाने से थप थप की आवाजें आ रही थी। हम दोनों पिछले बीस मिनट से पसीने में तर अपनी चूदाई में लगे हुए थे। दोनों में से कोई भी हार नहीं मान रहा था। आखिर में ठाकुराइन बोली यशपाल मै घोड़ी बनकर थक गई हूं। मैने उसे बेड के किनारे पीठ के बल लिटाया। वह टांगे मोड़कर लेट गई। मैने अपना एक पैर नीचे जमीन पर रखा और दूसरा पैर उसकी बगल में बेड पर रख किया। अब मेरा लंड उसके दाने पर रगड़ रहा था। मै उसके दाने को लंड के टोपा से रगड़ते हुए उसकी चूचियों को पी रहा था। अचानक उसने कहा यशपाल अपना लंड जल्दी मेरी चूत में डालों मैने एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। वह मेरी गर्दन में हाथ डालकर ऊपर उठी और मेरे होंठो को अपने होंठों में कश लिया। थोड़ी देर बाद वह चीखती हुई पीछे लुढ़क गई । वह झड़ चुकी थी और उसके चूत के संकुचन ने मेरी नशों में भी फुलाव ला दिया। मेरे लंड के फुलाव को उसने महसूस करके एक बार फिर मुझे अपने से कसकर लिपटा लिया और मै उसकी चूत में अपना लावा निकालने लगा। यह मेरे जीवन का पहला अनुभव था अगर ठाकुराइन को जगह कोई मेरी तरह युवा होती तो शायद ऐसा अच्छा अनुभव नहीं रहता। मै उसके ऊपर पड़ा हुआ अपनी लोड गन को उसमें निचोड़ रहा था। कुछ देर बाद हम दोनों समान्य हुए। मै उठा और अपने कपड़े पहन लिए। ठाकुराइन अभी भी बेड पर नंगी पड़ी थी। उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और बोली यशपाल तुम्हारी नौकरी पक्की और वो भी मेरे सेवक के तौर पर। तुम पहले मर्द हो जो इस हवेली में रहोगे। तुमने मुझे जीत लिया।
Mazadarमैने कहा शुक्रिया मालकिन। सुलोचना देवी ने अपनी नौकरी फूलमती को बुलाया। फूलमती सांवले रंग की तीखे नैन नक्श की लड़की थी। वह अंदर आई। ठकुराइन ने उससे कहा कि यह मोहन है आज ही काम पर आया है इसे ले जाओ और हवेली के पीछे बगीचे में बने अपने कमरे के साथ वाला बड़ा कमरा इन्हें दे दो और इनके खाने पीने और कपड़ों का बंदोबस्त कर दो। फूलमती ने अदब से सिर झुकाया और मुझे साथ लेकर पीछे अपने कमरे पर पहुंच गई। यह हवेली के और हिस्सों से थोड़ा दूर था और यहां अन्य सदस्य नहीं आते थे, सिर्फ महिलाएं बगीचे में बैठने के लिए या फूल चुनने के लिए आती थी। उसने मुझे अपनी खाट पर बिठाया और मेरा कमरा खोल कर साफ कर दिया। उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी और वह बार बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी।
मैने कहा क्या बात है तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो। वह बोली लड़के तुझ में कुछ बात तो है, ठाकुराइन को खुश करना हर किसी के वश में नहीं है। तुझे ऐसा करना आता है तुमने किया भी और मैने सुना भी। यह कहकर उसमें गर्दन झुका ली। कुछ देर बाद एक बड़ी सी खाट निकालकर मेरे कमरे में लगा दी एक पुराना मगर साफ गद्दा भी लगा दिया। फूलमती मेरे पास आई और कहा कि तुम आराम करो शायद ठाकुराइन ने तुम्हे थका दिया होगा, मै खाना लेकर आती हूं।
ऐसा कहकर वह अपनी कमर को मटकाती हुई चली गई और थोड़ी देर बाद खाना लेकर आ गई। मैने खाना खाया और अपने बिस्तर पर सो गया। शाम को किसी के हिलाने से मै जाग गया। मैने देखा कि फूलमती मुझे जगा रही है। वह बोली कि यशपाल ठाकुर साहब आ गए हैं, तुम्हे बुला रहे हैं।
मै हाथ मुंह धोकर जल्दी से ठाकुर वीर प्रताप चौहान के सामने खड़ा हूं। ठाकुर थोड़ा ही बोलने वाला व्यक्ति था, इसकी वजह बाद में ही पता चलेगी। उसने मुझे देखकर बोला तो तुम ही हो जिसे दलेर सिंह ने भेजा है। मैने कहा जी मालिक। उसने कहा आज से तुम इस हवेली में काम करोगे। बाजार का काम, बगीचे की बागवानी और दूसरे काम करोगे। ध्यान रहे कि हवेली में सभी औरतें है, कभी भी शिकायत का मौका न मिले। मैने कहा कि आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। मै मन ही मन सोच रहा हूं कि ठाकुर मुझे रौब दिखा रहा है जबकि यह खुद फैसला न करके ठाकुराइन के किए गए फैसले को मुझे बस सुना रहा है।
ठाकुर के कमरे से निकल कर मै पीछे अपने कमरे में आ गया। फूलमती ने मुझ से कहा कि आज रात 10 बजे बड़ी मालकिन ने तुम्हे अपने कमरे में बुलाया है। शाम हुई और जल्द ही घना अंधेरा भी। बारिश का मौसम था। बादलो ने रात को और भी गहरा दिया। मै खाना खाकर अपने कमरे में लेता हुआ था। अभी फूलमती दूर दूर तक नहीं थी। मै सोच रहा था कि ठाकुराइन को कैसे चौदूं कि वह पूरी तरह से मुझ पर मेहरबान हो जाए। ऐसे ही सोच रहा था कि फूलमती आई और मुझे ठाकुराइन के कमरे में ले जाने लगी। हम ठाकुराइन के कमरे में थे। ठाकुराइन अभी अपने बाथरूम में थी। फूलमती वहां गई और बाहर आई। उसमें मुझ से कहा कि मालकिन अभी आएंगी तब तक यही खड़े रहो। फूलमती चली गई और दरवाजा बंद कर दिया। मैने मन ही मन सोच लिया कि आज रात ठाकुराइन को अपनी बनाना होगा वरना उसका यह व्यवहार मुझे बहुत छोटा दिखाता रहेगा। कुछ देर बाद सुलोचना देवी कमरे में आई और उसके आते ही पूरे कमरे में महक फैल गई। उसने अपने शरीर पर एक नाइट गाउन पहना हुआ था। उसने कहा लड़के चिटकनी बंद कर दो दरवाजे की। मैने वैसा हो किया। वह बेड पर बैठ गई और मुझ से कहा कि अपनी मालकिन को खुश कर। उसकी आंखों में हवश सिर एकांकी पन था।
मैने उससे कहा बड़ी मालकिन आप मुझे गुस्ताखी की माफी दे और छूट दे तो मै आपको ऐसा खुश करूंगा कि आप खुश होकर मुझे मुंह मंगा इनाम दोगी। मेरी बात सुनकर सुलोचना देवी ने मुझे तीखी नजरों से देखा और कहा अच्छा दिखा आज अपनी सेवा की हद , तू क्या कर सकता है लड़के। अभी तक मुझे ठाकुर खुश नहीं कर पाए तुम आधी उम्र के लड़के में मेरी गर्मी और भूख मिटाने की ताकत है तो दिखा।
मै आगे बढ़ा और उसके गाउन को उसके शरीर से जुदा कर दिया। अब वह एक शेक्सी कच्चे चोली में थी। मैने उसे बेड पर पीठ के बाद लिटाया और उसके कान पर किस किया। धीरे धीरे मैने उसकी गर्दन पर अपनी जीभ घुमाई। वह बेडशीट पर अपनी उंगलियों को गाड़ने लगी। मैने धीरे धीरे नीचे जीभ लाते हुए उसकी गर्दन फिर उसकी चूचियों के बीच में चाटना शुरू किया। उसके बदन से मस्त खुशबू आ रही थी। मैने उसके पेट पर जीभ घुमाई और उसकी नाभि में किस किया, वह अपने आप को हिलाने लगी।
मैने अपना काम जारी रखा। मैने उसकी चोली को खोलकर अलग कर दिया उसकी चूचियों को आजाद कर दिया और अपने मुंह में भरकर चूसने लगा। वह और भी गर्म होने लगी। उसका शरीर गर्म तपने लगा। मै एक चुचि को पीता तो दूसरी को मसलने लगता और दूसरी चुचि को पीता तो पहली को मसलता। ऐसा बहुत देर किया। मेरी जीभ जादू दिखाने लगी। जो ठाकुराइन अभी तक मुझे भाव नहीं दे रही थी वह मेरे सिर को सहला रही थी और सिसकियां निकाल रही थी। मैने उसकी चूचियों के चूचक अपनी जीभ से कुरेदते हुए उसकी कच्छी को भी निकाल दिया। अब वह पूरी तरह से नंगी होकर मेरे पास लेटी हुई थी। मै चुचिया छोड़कर नीचे आया तो उसकी ताजा ताजा साफ की गई चूत के दर्शन होते ही मेरा लंड पूरे जोश में आ गया। मैने झुककर उसकी चूत के ऊपरी भाग पर अपनी जीभ घुमानी शुरू की। उसकी चूत के नर्म नर्म फांक मुझे बहुत मुलायम लग रहे थे। मै उसकी चूत के छोटे पत्ते जोकि कुछ ज्यादा ही बाहर थे बाह्य पत्तों से उन्हें मुंह में लेकर चूसने लगा। उसकी चूत पनिया हुई थी और उसके दोनों हाथ मेरे सिर पर बालों में घूम रहे थे। वह बार बार 'आह राजा आह राजा ऐसे ही करते रहो ' कह रही थी। मैने अपनी जीभ को बीच बीच में उसके छेद में भी डालना शुरू कर दिया। अब उसकी बर्दाश्त से बाहर हो गया था और वह चीखते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी। उसके शरीर में कम्पन हुई और वह झड़ गई। उसका रस बाहर मेरी लार के साथ निकलता हुआ गांड के छेद तक बह निकला। मै उठा और उसकी कच्छी लेकर उसकी चूत और गांड को साफ किया। वह अभी भी हांफ रही थी। मैने उसके चुचको को फिर से मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया। अब वह दोबारा नॉर्मल होकर मेरे लंड को सहलाने लगी। उसने मेरा पजामा उतार दिया और फिर कच्छा भी। मै अलग हुआ और अपने सारे कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया। मैने ठाकुराइन को घोड़ी बनने के लिए कहा। वह बेड पर बेढंगी सी मुद्रा में घोड़ी बन गई। शायद उसे कभी ऐसी पोजिशन में चूदाई नहीं मिली थी। मैने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाया वह समझ गई और नीचे की तरफ हो गई उसकी गांड पीछे की तरफ अच्छे से फैल गई और छूट का छेद सामने आ गया। मैने उसके छेद पर अपना लंड रखा और पूरा लंड उसकी चूत को गहराई में उतार दिया। मैने धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसकी चूत में गीले पन के कारण अच्छी फिसलन बनी हुई थी। मैने उसे चौदना जारी रखा। मै उसे चोदते हुए उसकी पीठ को चाट रहा था। थोड़ी देर बाद वह पीछे की तरफ मूँह करके चुदवाने लगी। मैने हिम्मत करके उसके गालों को भी चूमना शुरू कर दिया और फिर उसके होंठो को चूसने लगा। पहले उसके होंठ कठोर थे लेकिन अगले ही पल वह भी मेरे होंठो को चूसने लगी। शायद वह यही चाह रही थी लेकिन उसका अहम उसे रोक रहा था। अब वह पूरी तरह से मुझ से चुदाई करवा रही थी। ऐसे ही चोदते हुए लगभग आधा घंटा निकल गया। वह उस पोजीशन में थक सी गई थी। मैने कहा मालकिन आप मेरे ऊपर आ जाओ। मै पीठ के बल लेट गया और वह मेरे लंड पर चूत रखकर बैठ गई। अब कमांड उसके हाथ में थी। वह धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ते हुए चुदाई करवाने लगी। इस स्थिति में मेरा लंड उसकी बच्चेदानी पर दस्तक दे रहा था। वह ज्यादा देर सहन नहीं कर पाई और कांपने लगी। मै भी उसके झड़ने की गर्मी को महसूस करने लगा था। हम दोनों एक साथ जोर जोर से चुदाई करते हुए झड़ गए। वह एक दम से निढाल और पसीने से तरबतर होकर मेरे सीने पर गिर गई। मै अभी भी उसकी चूत में लंड फंसाए उसके नीचे पड़ा था। कुछ सी बाद मेरा लंड पूरी तरह से खाली होकर उसकी चूत से बाहर निकल कर निढाल हो गया और हम दोनों का पानी उसकी चूत से निकल कर बाहर गिने लगा। पानी मेरे अंडकोष और पेडू पर लगा हुआ था। ठाकुराइन की सबसे सामान्य हुई तो मैने कहा मालकिन मुझे अपने शरीर को साफ करना है आपके शरीर को भी साफ कर दूं। वह उठ गई और बोली आज से मुझे मालकिन नहीं सुलोचना या सुलु कहा करो। मैं तुम्हे सब हक देरी हूं। यह कहते हुए उसकी आंखों में संतुष्टि और कृतज्ञता के भाव थे। उसने आगे कहा तुम्हे जब भी मन करे मुझे कभी भी चोद लेना। आज से मैं तुम्हारी हूं। ऐसा कहकर उसने मुझे उठाया और अपने साथ बाथरूम में लेकर गई। अपने और मेरे को साफ किया। इस दौरान उसने मुझे अपना सर्वस्व मान लिया था। मुझे खुशी थी कि मैने ठाकुराइन को अपना गुलाम बना लिया था। हम वापिस कमरे में आए तो उसमें फूलमती को आवाज दी। फूलमती ऐसे अंदर आई जैसे बाहर दरवाजे पर ही बैठी हो। उसने आते ही सिर झुकाया। ठाकुराइन ने उससे कहा कि फूलमती आज से तुम मेरे साथ साथ इनकी भी सेवा करोगी। यह भी तुम्हारे मालिक है और उनका हर तरह से ख्याल रखना। उसने हां में सर हिलाया। इसके बाद ठाकुराइन ने मुझे नोटों की एक गड्डी थमाई और आगे के लिए जो भी चीज चाहिए तुरंत बताने को कहा। मैने कहा सुलोचना मुझे कुछ नहीं चाहिए। आपने इतना कुछ दिया अपना शरीर तक मुझे सौंप दिया है। ऐसे बेड पर मुझे लिटाया है जिसकी कल्पना मैने कभी नहीं की थी। आपका नर्म मुलायम गद्दा आपके शरीर की तरह मुलायम है। ऐसा कहकर मैं अपने कमरे में आकर लेट गया। रात गहरा गई थी और मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई।
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयामैने कहा शुक्रिया मालकिन। सुलोचना देवी ने अपनी नौकरी फूलमती को बुलाया। फूलमती सांवले रंग की तीखे नैन नक्श की लड़की थी। वह अंदर आई। ठकुराइन ने उससे कहा कि यह मोहन है आज ही काम पर आया है इसे ले जाओ और हवेली के पीछे बगीचे में बने अपने कमरे के साथ वाला बड़ा कमरा इन्हें दे दो और इनके खाने पीने और कपड़ों का बंदोबस्त कर दो। फूलमती ने अदब से सिर झुकाया और मुझे साथ लेकर पीछे अपने कमरे पर पहुंच गई। यह हवेली के और हिस्सों से थोड़ा दूर था और यहां अन्य सदस्य नहीं आते थे, सिर्फ महिलाएं बगीचे में बैठने के लिए या फूल चुनने के लिए आती थी। उसने मुझे अपनी खाट पर बिठाया और मेरा कमरा खोल कर साफ कर दिया। उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी और वह बार बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी।
मैने कहा क्या बात है तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो। वह बोली लड़के तुझ में कुछ बात तो है, ठाकुराइन को खुश करना हर किसी के वश में नहीं है। तुझे ऐसा करना आता है तुमने किया भी और मैने सुना भी। यह कहकर उसमें गर्दन झुका ली। कुछ देर बाद एक बड़ी सी खाट निकालकर मेरे कमरे में लगा दी एक पुराना मगर साफ गद्दा भी लगा दिया। फूलमती मेरे पास आई और कहा कि तुम आराम करो शायद ठाकुराइन ने तुम्हे थका दिया होगा, मै खाना लेकर आती हूं।
ऐसा कहकर वह अपनी कमर को मटकाती हुई चली गई और थोड़ी देर बाद खाना लेकर आ गई। मैने खाना खाया और अपने बिस्तर पर सो गया। शाम को किसी के हिलाने से मै जाग गया। मैने देखा कि फूलमती मुझे जगा रही है। वह बोली कि यशपाल ठाकुर साहब आ गए हैं, तुम्हे बुला रहे हैं।
मै हाथ मुंह धोकर जल्दी से ठाकुर वीर प्रताप चौहान के सामने खड़ा हूं। ठाकुर थोड़ा ही बोलने वाला व्यक्ति था, इसकी वजह बाद में ही पता चलेगी। उसने मुझे देखकर बोला तो तुम ही हो जिसे दलेर सिंह ने भेजा है। मैने कहा जी मालिक। उसने कहा आज से तुम इस हवेली में काम करोगे। बाजार का काम, बगीचे की बागवानी और दूसरे काम करोगे। ध्यान रहे कि हवेली में सभी औरतें है, कभी भी शिकायत का मौका न मिले। मैने कहा कि आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। मै मन ही मन सोच रहा हूं कि ठाकुर मुझे रौब दिखा रहा है जबकि यह खुद फैसला न करके ठाकुराइन के किए गए फैसले को मुझे बस सुना रहा है।
ठाकुर के कमरे से निकल कर मै पीछे अपने कमरे में आ गया। फूलमती ने मुझ से कहा कि आज रात 10 बजे बड़ी मालकिन ने तुम्हे अपने कमरे में बुलाया है। शाम हुई और जल्द ही घना अंधेरा भी। बारिश का मौसम था। बादलो ने रात को और भी गहरा दिया। मै खाना खाकर अपने कमरे में लेता हुआ था। अभी फूलमती दूर दूर तक नहीं थी। मै सोच रहा था कि ठाकुराइन को कैसे चौदूं कि वह पूरी तरह से मुझ पर मेहरबान हो जाए। ऐसे ही सोच रहा था कि फूलमती आई और मुझे ठाकुराइन के कमरे में ले जाने लगी। हम ठाकुराइन के कमरे में थे। ठाकुराइन अभी अपने बाथरूम में थी। फूलमती वहां गई और बाहर आई। उसमें मुझ से कहा कि मालकिन अभी आएंगी तब तक यही खड़े रहो। फूलमती चली गई और दरवाजा बंद कर दिया। मैने मन ही मन सोच लिया कि आज रात ठाकुराइन को अपनी बनाना होगा वरना उसका यह व्यवहार मुझे बहुत छोटा दिखाता रहेगा। कुछ देर बाद सुलोचना देवी कमरे में आई और उसके आते ही पूरे कमरे में महक फैल गई। उसने अपने शरीर पर एक नाइट गाउन पहना हुआ था। उसने कहा लड़के चिटकनी बंद कर दो दरवाजे की। मैने वैसा हो किया। वह बेड पर बैठ गई और मुझ से कहा कि अपनी मालकिन को खुश कर। उसकी आंखों में हवश सिर एकांकी पन था।
मैने उससे कहा बड़ी मालकिन आप मुझे गुस्ताखी की माफी दे और छूट दे तो मै आपको ऐसा खुश करूंगा कि आप खुश होकर मुझे मुंह मंगा इनाम दोगी। मेरी बात सुनकर सुलोचना देवी ने मुझे तीखी नजरों से देखा और कहा अच्छा दिखा आज अपनी सेवा की हद , तू क्या कर सकता है लड़के। अभी तक मुझे ठाकुर खुश नहीं कर पाए तुम आधी उम्र के लड़के में मेरी गर्मी और भूख मिटाने की ताकत है तो दिखा।
मै आगे बढ़ा और उसके गाउन को उसके शरीर से जुदा कर दिया। अब वह एक शेक्सी कच्चे चोली में थी। मैने उसे बेड पर पीठ के बाद लिटाया और उसके कान पर किस किया। धीरे धीरे मैने उसकी गर्दन पर अपनी जीभ घुमाई। वह बेडशीट पर अपनी उंगलियों को गाड़ने लगी। मैने धीरे धीरे नीचे जीभ लाते हुए उसकी गर्दन फिर उसकी चूचियों के बीच में चाटना शुरू किया। उसके बदन से मस्त खुशबू आ रही थी। मैने उसके पेट पर जीभ घुमाई और उसकी नाभि में किस किया, वह अपने आप को हिलाने लगी।
मैने अपना काम जारी रखा। मैने उसकी चोली को खोलकर अलग कर दिया उसकी चूचियों को आजाद कर दिया और अपने मुंह में भरकर चूसने लगा। वह और भी गर्म होने लगी। उसका शरीर गर्म तपने लगा। मै एक चुचि को पीता तो दूसरी को मसलने लगता और दूसरी चुचि को पीता तो पहली को मसलता। ऐसा बहुत देर किया। मेरी जीभ जादू दिखाने लगी। जो ठाकुराइन अभी तक मुझे भाव नहीं दे रही थी वह मेरे सिर को सहला रही थी और सिसकियां निकाल रही थी। मैने उसकी चूचियों के चूचक अपनी जीभ से कुरेदते हुए उसकी कच्छी को भी निकाल दिया। अब वह पूरी तरह से नंगी होकर मेरे पास लेटी हुई थी। मै चुचिया छोड़कर नीचे आया तो उसकी ताजा ताजा साफ की गई चूत के दर्शन होते ही मेरा लंड पूरे जोश में आ गया। मैने झुककर उसकी चूत के ऊपरी भाग पर अपनी जीभ घुमानी शुरू की। उसकी चूत के नर्म नर्म फांक मुझे बहुत मुलायम लग रहे थे। मै उसकी चूत के छोटे पत्ते जोकि कुछ ज्यादा ही बाहर थे बाह्य पत्तों से उन्हें मुंह में लेकर चूसने लगा। उसकी चूत पनिया हुई थी और उसके दोनों हाथ मेरे सिर पर बालों में घूम रहे थे। वह बार बार 'आह राजा आह राजा ऐसे ही करते रहो ' कह रही थी। मैने अपनी जीभ को बीच बीच में उसके छेद में भी डालना शुरू कर दिया। अब उसकी बर्दाश्त से बाहर हो गया था और वह चीखते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी। उसके शरीर में कम्पन हुई और वह झड़ गई। उसका रस बाहर मेरी लार के साथ निकलता हुआ गांड के छेद तक बह निकला। मै उठा और उसकी कच्छी लेकर उसकी चूत और गांड को साफ किया। वह अभी भी हांफ रही थी। मैने उसके चुचको को फिर से मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया। अब वह दोबारा नॉर्मल होकर मेरे लंड को सहलाने लगी। उसने मेरा पजामा उतार दिया और फिर कच्छा भी। मै अलग हुआ और अपने सारे कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया। मैने ठाकुराइन को घोड़ी बनने के लिए कहा। वह बेड पर बेढंगी सी मुद्रा में घोड़ी बन गई। शायद उसे कभी ऐसी पोजिशन में चूदाई नहीं मिली थी। मैने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाया वह समझ गई और नीचे की तरफ हो गई उसकी गांड पीछे की तरफ अच्छे से फैल गई और छूट का छेद सामने आ गया। मैने उसके छेद पर अपना लंड रखा और पूरा लंड उसकी चूत को गहराई में उतार दिया। मैने धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसकी चूत में गीले पन के कारण अच्छी फिसलन बनी हुई थी। मैने उसे चौदना जारी रखा। मै उसे चोदते हुए उसकी पीठ को चाट रहा था। थोड़ी देर बाद वह पीछे की तरफ मूँह करके चुदवाने लगी। मैने हिम्मत करके उसके गालों को भी चूमना शुरू कर दिया और फिर उसके होंठो को चूसने लगा। पहले उसके होंठ कठोर थे लेकिन अगले ही पल वह भी मेरे होंठो को चूसने लगी। शायद वह यही चाह रही थी लेकिन उसका अहम उसे रोक रहा था। अब वह पूरी तरह से मुझ से चुदाई करवा रही थी। ऐसे ही चोदते हुए लगभग आधा घंटा निकल गया। वह उस पोजीशन में थक सी गई थी। मैने कहा मालकिन आप मेरे ऊपर आ जाओ। मै पीठ के बल लेट गया और वह मेरे लंड पर चूत रखकर बैठ गई। अब कमांड उसके हाथ में थी। वह धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ते हुए चुदाई करवाने लगी। इस स्थिति में मेरा लंड उसकी बच्चेदानी पर दस्तक दे रहा था। वह ज्यादा देर सहन नहीं कर पाई और कांपने लगी। मै भी उसके झड़ने की गर्मी को महसूस करने लगा था। हम दोनों एक साथ जोर जोर से चुदाई करते हुए झड़ गए। वह एक दम से निढाल और पसीने से तरबतर होकर मेरे सीने पर गिर गई। मै अभी भी उसकी चूत में लंड फंसाए उसके नीचे पड़ा था। कुछ सी बाद मेरा लंड पूरी तरह से खाली होकर उसकी चूत से बाहर निकल कर निढाल हो गया और हम दोनों का पानी उसकी चूत से निकल कर बाहर गिने लगा। पानी मेरे अंडकोष और पेडू पर लगा हुआ था। ठाकुराइन की सबसे सामान्य हुई तो मैने कहा मालकिन मुझे अपने शरीर को साफ करना है आपके शरीर को भी साफ कर दूं। वह उठ गई और बोली आज से मुझे मालकिन नहीं सुलोचना या सुलु कहा करो। मैं तुम्हे सब हक देरी हूं। यह कहते हुए उसकी आंखों में संतुष्टि और कृतज्ञता के भाव थे। उसने आगे कहा तुम्हे जब भी मन करे मुझे कभी भी चोद लेना। आज से मैं तुम्हारी हूं। ऐसा कहकर उसने मुझे उठाया और अपने साथ बाथरूम में लेकर गई। अपने और मेरे को साफ किया। इस दौरान उसने मुझे अपना सर्वस्व मान लिया था। मुझे खुशी थी कि मैने ठाकुराइन को अपना गुलाम बना लिया था। हम वापिस कमरे में आए तो उसमें फूलमती को आवाज दी। फूलमती ऐसे अंदर आई जैसे बाहर दरवाजे पर ही बैठी हो। उसने आते ही सिर झुकाया। ठाकुराइन ने उससे कहा कि फूलमती आज से तुम मेरे साथ साथ इनकी भी सेवा करोगी। यह भी तुम्हारे मालिक है और उनका हर तरह से ख्याल रखना। उसने हां में सर हिलाया। इसके बाद ठाकुराइन ने मुझे नोटों की एक गड्डी थमाई और आगे के लिए जो भी चीज चाहिए तुरंत बताने को कहा। मैने कहा सुलोचना मुझे कुछ नहीं चाहिए। आपने इतना कुछ दिया अपना शरीर तक मुझे सौंप दिया है। ऐसे बेड पर मुझे लिटाया है जिसकी कल्पना मैने कभी नहीं की थी। आपका नर्म मुलायम गद्दा आपके शरीर की तरह मुलायम है। ऐसा कहकर मैं अपने कमरे में आकर लेट गया। रात गहरा गई थी और मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई।