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Incest मेरी माँ और चाची को चोदा

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Aryans

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मैं माँ के साथ शादी में गांव गया तो वहां मुझे अपनी छोटी चाची की जवानी भा गई और मैंने चाची को चोदा भी … मेरी माँ ने चाची की चुदाई में मदद कैसे की?

दोस्तो, मैं अंकित हूँ. ये कहानी मेरे परिवार की है. ये घटना आज से 3 वर्ष पहले की है. अब तक की मेरी सेक्स कहानी में मैं आपको

मैं अपनी माँ के साथ शादी में गांव गया था. उधर मुझे अपनी छोटी चाची की हसीन जवानी भा गई थी और मैं उनको चोदने की नजर से देखने लगा था.

दूसरे दिन मेरी बड़ी चाची का आगमन हो गया था. उनका नाम हेमा है, जो अब एक बहुत ही चुदक्कड़ औरत बन चुकी थीं. उस समय हेमा चाची की उम्र 40 वर्ष थी, लेकिन 30 से ज्यादा की नहीं दिखती थीं.

मेरी चाची के दो बच्चे हैं. एक लड़का और एक लड़की. लड़की की उम्र जवानी की दहलीज पार कर चुकी थी तथा लड़का उससे एक साल छोटा था. उन दोनों का नाम अनुजा और अंश था. अनुजा अब तक एक नम्बर की माल बन चुकी थी. अनुजा पर कई लड़कों की नजर थी लेकिन अभी उसे कोई चोद नहीं पाया था.
मैं भाभी और अपनी बहन को चोदने के कारण एक चुत चुदाई का नशेड़ी बन चुका था. अब तो मेरे लंड को बस चुत का साथ चाहिए ही था. वो चुत चाहे किसी की भी हो.

मेरी चाची के उठे हुए चूतड़ मुझे बड़े पसंद थे. उनके दोनों बड़े चूतड़ों के बीच में फंसी हुई गांड की कल्पना मेरे लंड को आंदोलित करती रहती थी.

मेरी चाची दिल्ली में रहती हैं. गांव में प्रोग्राम होने के कारण चाची और उनके साथ अनुजा और अंश भी साथ में आए थे. लेकिन चाचा अपने काम के चलते नहीं आ पाए थे. जब मैंने अनुजा को देखा, तो सनाका खा गया. उसकी वो पतली सी कमर और नींबू के जैसे छोटे छोटे उगते हुए चूचे, उसके टॉप के ऊपर से उभरे हुए मालूम पड़ते थे. मेरी मादरचोद निगाहें उसके टिकोरों पर टिक कर रह गई थीं.

एक दिन की बात है. मेरे घर के सामने एक गधा आ गया. वो उस समय शायद हीट पर था और अपने लंड को बाहर निकाले हुआ था.

उसी वक्त मेरी बड़ी चाची हेमा ने मेरी मां से मजाक करते हुए कहा- दीदी देखो सामने … इतना बड़ा लंड ले सकती हो कि नहीं?

मेरी मां ने हंस कर जबाब दिया- इतना मोटा और लम्बा लंड तो कोई गधी ही ले सकती है.
ये बातें सुनकर चाची आह भरते हुए बोलीं- आह … मेरा छेद इतना बड़ा लंड ले पाती … तो मैं जरूर इससे चुदवा लेती.
मेरी मां बोलीं- क्यों अभी लंड से मन नहीं भरा है क्या?
चाची बोलीं- नहीं दीदी … अभी भी आग लगी रहती है. आपके देवर का सामान भी ढीला हो गया है.

ये कहते हुए उन्होंने मेरी मां की मोटी चूची को जोर से दबा दिया.

मां- आउच … ये क्या कर रही हो?
चाची बोलीं- लगता है दीदी … आपकी चुची को खुब दुहा गया है.
मॉम बोलीं- हां यार, मेरी चूचियों को बहुत लोगों ने दुहा और दबाया है. लेकिन अब यह दूध नहीं देती हैं. यदि दूध निकालना हो, तो सरिता की चूचियों को दुह कर देख … वो अभी भी दूध देती है.

सरिता मेरी सबसे छोटी चाची का नाम है. वो गांव में ही रहती हैं. उनके बारे में मैंने अपनी पिछली कहानी में लिखा भी था.

हेमा चाची बोलीं- चलो आज सरिता को ही दुहते हैं.
ये सब बातें सुनकर वो दोनों तुरंत सरिता चाची को ढूढने लगीं.

चाची करकट वाले कमरे में थीं. ये करकट वाला कमरा जानवरों का था.
हेमा चाची सरिता चाची को आवाज लगाने लगीं. उनकी आवाज सुनकर सरिता चाची ने करकट वाले कमरे से आवाज दे दी.

उनकी आवाज सुनकर मॉम और हेमा चाची करकट वाले कमरे में जाने लगीं. उधर चाची एक छोटी सी चटाई पर बैठी थीं. चाची और मां भी उसी चटाई पर बैठ गईं.

मॉम ने कहा- आज हम लोग दूध दुहेंगे.
सरिता चाची बोलीं- हां ठीक है … आप शाम को दुह लेना … कौन ने रोका है.
हेमा चाची बोलीं- हम तुम्हारी चूचियों के दूध की बात कर रहे हैं.

उसके ठीक बाद मॉम, सरिता चाची की चुचियों को दबाने लगीं.

सरिता चाची बोलीं- तुम दोनों तो एक नम्बर की चुदक्कड़ औरतें हो … तुम दोनों को तो बस नए नए लंड चाहिए … चाहे वह जानवर का ही क्यों न हो.

हेमा चाची ने सरिता चाची का ब्लॉउज खोल दिया और उनकी दोनों चुचियों को दोनों तरफ से मॉम और हेमा चाची पीने लगीं.
तभी मां ने सरिता चाची को गदहे के लंड वाली बात बताई.

हेमा चाची मस्ती से चूची चूसते हुए बोलीं- हां यार उस गधे का लंड मैं अपने चूत से टच करवाना चाहती हूँ … कोई उपाय करो.
सरिता चाची बोलीं- उसका थोड़ा सा भी लंड तुम्हारी चूत में लंड घुस गया न … तो पता चल जाएगा कि गधे का लंड क्या होता है. तुम्हारे छेद की जगह गड्डा हो जाएगा. फिर तुम्हें कोई चोदने वाला भी नहीं मिलेगा.
हेमा चाची बोलीं- क्या करूं यार … आज तो बड़े लंड से चुदने का मन कर रहा है.
सरिता चाची अपनी चूची के निप्पल को ठीक से दबा कर दूध पिलाते हुए कहने लगीं- तो ठीक है … आज उस औरत से बात करना पड़ेगी, जिसके पास गदहा है.

यही सब बात करते हुए तीनों रंडियां बाहर आ गईं. मैं तो हेमा रंडी की चूत को फाड़ना चाहता था. जब मैं जान गया कि ये हेमा तो एक नंबर की चुदक्कड़ औरत है, तो मेरा काम आसान हो गया था.

कुछ देर बाद जब मेरी मां अपने रूम आईं, तो मैंने कहा- और शालिनी डार्लिंग क्या हाल है. चल दरवाजा बंद कर दे … आज तुझे चोदना है.
मां बोलीं- हां रे … मुझे भी बड़ी आग लगी है.
मैंने मां के दूध मसलते हुए कहा- तुम तीनों एक नम्बर की रंडी हो … तुम मुझे अपनी उस देवरानी हेमा मालिनी की चुत दिला दे.
मां समझ गईं और बोलीं- चल ठीक है उसका भी इंतजाम करती हूँ. पहले मेरी खुजली तो मिटा.

मैंने इसके बाद मॉम को तुरंत बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ गया. मैं उनके होंठों को चूसने लगा.

तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी.
मैं मॉम से धीरे से बोला- कह दो … अभी मैं चुद रही हूँ. मैं जानता हूं कि तुम तीनों रंडी हो, अब शरमाओ मत … साफ़ बोल दो.
मॉम ने आवाज देते हुए पूछा- कौन?
सरिता चाची ने आवाज दी- मैं हूँ सरिता.
मॉम धीरे से बोलीं- अभी मैं चुद रही हूँ … बाद में आना.
सरिता चाची जिद करते हुए बोलीं- दरवाजा खोलिये … मुझे भी आना है.
मैंने उठ कर दरवाजा खोलने को हुआ, तो मॉम बोलीं- हां आ जाने दे … सरिता सब जानती है.

उसके बाद मैंने दरवाजा खोला और चाची को अन्दर खींच कर गेट बंद कर दिया. दरवाजा बंद करते ही मैंने चाची को उठाया और बिस्तर पर पटक दिया. मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को चूसने लगा.

चाची मुझे अपने ऊपर चढ़ा देख कर एकदम से हड़ाबड़ाते हुए बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- साली रंडी चाची … आज मैं तुम्हारी जवानी से खेलूंगा.
तभी मॉम चाची से बोली- हां चल जल्दी से नंगी हो जा.

उसके बाद मैंने सरिता चाची की साड़ी को पूरा खोल दिया. वो ब्लॉउज और पेटीकोट में मेरे सामने हो गईं.

तब मॉम मुझसे बोलीं कि अभी तक ये किसी दूसरे मर्द से चुदी नहीं है … इसलिए इतना फड़फड़ा रही है.
सरिता चाची बोलीं कि तुम अपनी मां को ही चोदो … और मुझे छोड़ दो.
मैं बोला कि सरिता डार्लिंग अपनी इस जवानी का मजा मुझे तो ले लेने दो. मैं कौन सा बेगाना हूँ. अपनी चाची को ही चोद रहा हूँ.

कुछ देर बाद सरिता चाची शांत हो गईं और उनका विरोध भी केवल नाममात्र का ही रह गया था.

मैंने बड़े प्यार से सरिता चाची को पूरा नंगी कर दिया और उनकी दूध भरी चुचियों को बारी बारी से पीने लगा. मैंने मां से सरिता चाची की चूत चूसने का कहा.
मैं चाची की चूची को पीने लगा और मॉम चाची की चुत चाटने लगीं.
मैंने चाची को चूचियों को दबा दबा कर दूध निकाला और मस्ती से पीने लगा.

उधर मॉम भी बड़ी मस्ती से चाची की चूत को चूस रही थीं. ऊपर और नीचे की एक साथ चुसाई से चाची की हालत खराब हो गई और वो ‘आह … आह..’ की आवाज करने लगीं.
कुछ पल बाद मैंने अपना लंड चाची को पकड़ा दिया … और लंड चूसने का कहा.

चाची ने मेरे लंड को चूसने से मना कर दिया. मैंने उनकी चुची को इतने जोर से दबाया कि उनकी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने चाची से कहा- डार्लिंग मैं मर्द का लंड चूसने की कह रहा हूँ … कोई जलती हुई लकड़ी चूसने की नहीं कहा है. आज तुम अपने इन रसीले होंठों से मेरे लंड को चूस कर तो देखो. मजा आ जाएगा.
ये कहते हुए मैंने अपना लंड चाची के मुँह डाल दिया और चाची ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. वो इतनी मादकता से लंड चूस रही थीं कि मजा आने लगा था. सच में कितना अधिक मजा आ रहा था कि बस पूछो ही मत.

कोई दस मिनट बाद मैंने अपना लंड का पानी सरिता चाची की मुँह में छोड़ दिया. वो मेरे पानी को थूकने वाली थीं, लेकिन मैंने उनके गाल पकड़ लिए, लंड का रस उनको थूकने ही नहीं दिया. मैं अपने लंड का पूरा पानी चाची को पिला कर ही माना.

चाची को जैसे ही वीर्य का स्वाद पता चला, उन्होंने बड़े मजे से वीर्य पी लिया और मेरे लंड को चूस चूस कर साफ़ कर दिया.

कुछ देर मैंने अपना लंड चाची के मुँह से निकाल कर अपनी मॉम को चूसने को दे दिया. मैंने मॉम से कहा- जल्दी से मेरे लंड को खड़ा करो … क्योंकि चाची की चूत की पेलाई करनी है. चाची की बड़ी जबरदस्त चूत है.

चाची ये सुनकर बोलीं- नहीं … मैंने अभी तक तुम्हारे चाचा के अलावा किसी के साथ चुदाई नहीं करवाई है.
ये सुनकर मैंने कहा- आज से तुम भी रंडी बन जाओ. औरत की चुत तो मर्द के लंड से चुदने के लिए ही होती है. जिधर लंड मिले, तुरंत अन्दर करवा लेना चाहिए. जिन्दगी एक लंड के सहारे काटना चूतियाई है.

मैंने मॉम की चूची मसल कर उनको इशारा किया. मॉम ने मेरा इशारा समझते हुए चाची को हाथ से धकेलते हुए चित लेटने के लिए कहा.
चाची चित लेट गईं. मैंने तुरन्त अपनी मॉम के मुँह लंड निकाला औऱ चाची की चूत में डाल कर बहुत ही जोर से धक्का दे मारा. एकदम से लंड घुसने से चाची के मुँह से चीख निकल गई.

मॉम ने मुझसे कहा- आराम से … अपनी चाची को आराम से चोदो … आज तुम इसे बहुत समय तक चोद सकोगे.

मैं आराम आराम से अपनी चाची की चुदाई करने लगा. चाची भी धीरे धीरे चुदाई का मजा लेने लगीं और अपने मुँह से आवाज निकालने लगीं. उनकी कामुक आवाजों को सुनकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया. मैं अब जोर जोर से लंड पेलने लगा.

कोई बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने सरिता चाची की चूत में ही अपना पानी गिरा दिया. चाची को चुदाई से मजा आ गया था.

उन्होंने मुझे किस किया और कहने लगीं- तुमने बड़ा मस्त अपनी चाची को चोदा है … इतना मजा तो मुझे कभी नहीं आया. अब आज से मैं तुम्हारी चाची नहीं हूँ. … तुम्हारी रखैल बन गई हूँ.
मैंने चाची की चूची दबाते हुए कहा कि तुम मेरी रखैल नहीं हो … अब तुम मेरी पत्नी बन जाओ … चाचा के बाद मुझे अपना दूसरा पति बना लो.
चाची ने हँसते हुए कहा कि ठीक है मेरे सेकंड पतिदेव.

इस तरह मैंने अपनी माँ की मदद से चाची को चोदा.
अब चाची उठ कर कपड़े पहनने लगीं. फिर वो मेरी मॉम की तरफ देखते हुए बोलीं- अपनी इस रंडी मां के साथ क्या करोगे?
मैंने कहा- अब मैं इस रंडी की चौड़ी गांड को मारूँगा.
चाची ने कहा- हां दिख रहा है कि इसकी चूत से ज्यादा इसकी गांड ही मारी गई है.
चाची हंसते हुए बाहर चली गईं.

अगले भाग में चाची की चुदाई के नए रंग आपको दिखाता हूँ.
 

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मैं माँ के साथ शादी में गांव गया तो वहां मुझे अपनी छोटी चाची की जवानी भा गई और मैंने चाची को चोदा भी … मेरी माँ ने चाची की चुदाई में मदद कैसे की?

दोस्तो, मैं अंकित हूँ. ये कहानी मेरे परिवार की है. ये घटना आज से 3 वर्ष पहले की है. अब तक की मेरी सेक्स कहानी में मैं आपको

मैं अपनी माँ के साथ शादी में गांव गया था. उधर मुझे अपनी छोटी चाची की हसीन जवानी भा गई थी और मैं उनको चोदने की नजर से देखने लगा था.

दूसरे दिन मेरी बड़ी चाची का आगमन हो गया था. उनका नाम हेमा है, जो अब एक बहुत ही चुदक्कड़ औरत बन चुकी थीं. उस समय हेमा चाची की उम्र 40 वर्ष थी, लेकिन 30 से ज्यादा की नहीं दिखती थीं.

मेरी चाची के दो बच्चे हैं. एक लड़का और एक लड़की. लड़की की उम्र जवानी की दहलीज पार कर चुकी थी तथा लड़का उससे एक साल छोटा था. उन दोनों का नाम अनुजा और अंश था. अनुजा अब तक एक नम्बर की माल बन चुकी थी. अनुजा पर कई लड़कों की नजर थी लेकिन अभी उसे कोई चोद नहीं पाया था.
मैं भाभी और अपनी बहन को चोदने के कारण एक चुत चुदाई का नशेड़ी बन चुका था. अब तो मेरे लंड को बस चुत का साथ चाहिए ही था. वो चुत चाहे किसी की भी हो.

मेरी चाची के उठे हुए चूतड़ मुझे बड़े पसंद थे. उनके दोनों बड़े चूतड़ों के बीच में फंसी हुई गांड की कल्पना मेरे लंड को आंदोलित करती रहती थी.

मेरी चाची दिल्ली में रहती हैं. गांव में प्रोग्राम होने के कारण चाची और उनके साथ अनुजा और अंश भी साथ में आए थे. लेकिन चाचा अपने काम के चलते नहीं आ पाए थे. जब मैंने अनुजा को देखा, तो सनाका खा गया. उसकी वो पतली सी कमर और नींबू के जैसे छोटे छोटे उगते हुए चूचे, उसके टॉप के ऊपर से उभरे हुए मालूम पड़ते थे. मेरी मादरचोद निगाहें उसके टिकोरों पर टिक कर रह गई थीं.

एक दिन की बात है. मेरे घर के सामने एक गधा आ गया. वो उस समय शायद हीट पर था और अपने लंड को बाहर निकाले हुआ था.

उसी वक्त मेरी बड़ी चाची हेमा ने मेरी मां से मजाक करते हुए कहा- दीदी देखो सामने … इतना बड़ा लंड ले सकती हो कि नहीं?

मेरी मां ने हंस कर जबाब दिया- इतना मोटा और लम्बा लंड तो कोई गधी ही ले सकती है.
ये बातें सुनकर चाची आह भरते हुए बोलीं- आह … मेरा छेद इतना बड़ा लंड ले पाती … तो मैं जरूर इससे चुदवा लेती.
मेरी मां बोलीं- क्यों अभी लंड से मन नहीं भरा है क्या?
चाची बोलीं- नहीं दीदी … अभी भी आग लगी रहती है. आपके देवर का सामान भी ढीला हो गया है.

ये कहते हुए उन्होंने मेरी मां की मोटी चूची को जोर से दबा दिया.

मां- आउच … ये क्या कर रही हो?
चाची बोलीं- लगता है दीदी … आपकी चुची को खुब दुहा गया है.
मॉम बोलीं- हां यार, मेरी चूचियों को बहुत लोगों ने दुहा और दबाया है. लेकिन अब यह दूध नहीं देती हैं. यदि दूध निकालना हो, तो सरिता की चूचियों को दुह कर देख … वो अभी भी दूध देती है.

सरिता मेरी सबसे छोटी चाची का नाम है. वो गांव में ही रहती हैं. उनके बारे में मैंने अपनी पिछली कहानी में लिखा भी था.

हेमा चाची बोलीं- चलो आज सरिता को ही दुहते हैं.
ये सब बातें सुनकर वो दोनों तुरंत सरिता चाची को ढूढने लगीं.

चाची करकट वाले कमरे में थीं. ये करकट वाला कमरा जानवरों का था.
हेमा चाची सरिता चाची को आवाज लगाने लगीं. उनकी आवाज सुनकर सरिता चाची ने करकट वाले कमरे से आवाज दे दी.

उनकी आवाज सुनकर मॉम और हेमा चाची करकट वाले कमरे में जाने लगीं. उधर चाची एक छोटी सी चटाई पर बैठी थीं. चाची और मां भी उसी चटाई पर बैठ गईं.

मॉम ने कहा- आज हम लोग दूध दुहेंगे.
सरिता चाची बोलीं- हां ठीक है … आप शाम को दुह लेना … कौन ने रोका है.
हेमा चाची बोलीं- हम तुम्हारी चूचियों के दूध की बात कर रहे हैं.

उसके ठीक बाद मॉम, सरिता चाची की चुचियों को दबाने लगीं.

सरिता चाची बोलीं- तुम दोनों तो एक नम्बर की चुदक्कड़ औरतें हो … तुम दोनों को तो बस नए नए लंड चाहिए … चाहे वह जानवर का ही क्यों न हो.

हेमा चाची ने सरिता चाची का ब्लॉउज खोल दिया और उनकी दोनों चुचियों को दोनों तरफ से मॉम और हेमा चाची पीने लगीं.
तभी मां ने सरिता चाची को गदहे के लंड वाली बात बताई.

हेमा चाची मस्ती से चूची चूसते हुए बोलीं- हां यार उस गधे का लंड मैं अपने चूत से टच करवाना चाहती हूँ … कोई उपाय करो.
सरिता चाची बोलीं- उसका थोड़ा सा भी लंड तुम्हारी चूत में लंड घुस गया न … तो पता चल जाएगा कि गधे का लंड क्या होता है. तुम्हारे छेद की जगह गड्डा हो जाएगा. फिर तुम्हें कोई चोदने वाला भी नहीं मिलेगा.
हेमा चाची बोलीं- क्या करूं यार … आज तो बड़े लंड से चुदने का मन कर रहा है.
सरिता चाची अपनी चूची के निप्पल को ठीक से दबा कर दूध पिलाते हुए कहने लगीं- तो ठीक है … आज उस औरत से बात करना पड़ेगी, जिसके पास गदहा है.

यही सब बात करते हुए तीनों रंडियां बाहर आ गईं. मैं तो हेमा रंडी की चूत को फाड़ना चाहता था. जब मैं जान गया कि ये हेमा तो एक नंबर की चुदक्कड़ औरत है, तो मेरा काम आसान हो गया था.

कुछ देर बाद जब मेरी मां अपने रूम आईं, तो मैंने कहा- और शालिनी डार्लिंग क्या हाल है. चल दरवाजा बंद कर दे … आज तुझे चोदना है.
मां बोलीं- हां रे … मुझे भी बड़ी आग लगी है.
मैंने मां के दूध मसलते हुए कहा- तुम तीनों एक नम्बर की रंडी हो … तुम मुझे अपनी उस देवरानी हेमा मालिनी की चुत दिला दे.
मां समझ गईं और बोलीं- चल ठीक है उसका भी इंतजाम करती हूँ. पहले मेरी खुजली तो मिटा.

मैंने इसके बाद मॉम को तुरंत बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ गया. मैं उनके होंठों को चूसने लगा.

तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी.
मैं मॉम से धीरे से बोला- कह दो … अभी मैं चुद रही हूँ. मैं जानता हूं कि तुम तीनों रंडी हो, अब शरमाओ मत … साफ़ बोल दो.
मॉम ने आवाज देते हुए पूछा- कौन?
सरिता चाची ने आवाज दी- मैं हूँ सरिता.
मॉम धीरे से बोलीं- अभी मैं चुद रही हूँ … बाद में आना.
सरिता चाची जिद करते हुए बोलीं- दरवाजा खोलिये … मुझे भी आना है.
मैंने उठ कर दरवाजा खोलने को हुआ, तो मॉम बोलीं- हां आ जाने दे … सरिता सब जानती है.

उसके बाद मैंने दरवाजा खोला और चाची को अन्दर खींच कर गेट बंद कर दिया. दरवाजा बंद करते ही मैंने चाची को उठाया और बिस्तर पर पटक दिया. मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को चूसने लगा.

चाची मुझे अपने ऊपर चढ़ा देख कर एकदम से हड़ाबड़ाते हुए बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- साली रंडी चाची … आज मैं तुम्हारी जवानी से खेलूंगा.
तभी मॉम चाची से बोली- हां चल जल्दी से नंगी हो जा.

उसके बाद मैंने सरिता चाची की साड़ी को पूरा खोल दिया. वो ब्लॉउज और पेटीकोट में मेरे सामने हो गईं.

तब मॉम मुझसे बोलीं कि अभी तक ये किसी दूसरे मर्द से चुदी नहीं है … इसलिए इतना फड़फड़ा रही है.
सरिता चाची बोलीं कि तुम अपनी मां को ही चोदो … और मुझे छोड़ दो.
मैं बोला कि सरिता डार्लिंग अपनी इस जवानी का मजा मुझे तो ले लेने दो. मैं कौन सा बेगाना हूँ. अपनी चाची को ही चोद रहा हूँ.

कुछ देर बाद सरिता चाची शांत हो गईं और उनका विरोध भी केवल नाममात्र का ही रह गया था.

मैंने बड़े प्यार से सरिता चाची को पूरा नंगी कर दिया और उनकी दूध भरी चुचियों को बारी बारी से पीने लगा. मैंने मां से सरिता चाची की चूत चूसने का कहा.
मैं चाची की चूची को पीने लगा और मॉम चाची की चुत चाटने लगीं.
मैंने चाची को चूचियों को दबा दबा कर दूध निकाला और मस्ती से पीने लगा.

उधर मॉम भी बड़ी मस्ती से चाची की चूत को चूस रही थीं. ऊपर और नीचे की एक साथ चुसाई से चाची की हालत खराब हो गई और वो ‘आह … आह..’ की आवाज करने लगीं.
कुछ पल बाद मैंने अपना लंड चाची को पकड़ा दिया … और लंड चूसने का कहा.

चाची ने मेरे लंड को चूसने से मना कर दिया. मैंने उनकी चुची को इतने जोर से दबाया कि उनकी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने चाची से कहा- डार्लिंग मैं मर्द का लंड चूसने की कह रहा हूँ … कोई जलती हुई लकड़ी चूसने की नहीं कहा है. आज तुम अपने इन रसीले होंठों से मेरे लंड को चूस कर तो देखो. मजा आ जाएगा.
ये कहते हुए मैंने अपना लंड चाची के मुँह डाल दिया और चाची ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. वो इतनी मादकता से लंड चूस रही थीं कि मजा आने लगा था. सच में कितना अधिक मजा आ रहा था कि बस पूछो ही मत.

कोई दस मिनट बाद मैंने अपना लंड का पानी सरिता चाची की मुँह में छोड़ दिया. वो मेरे पानी को थूकने वाली थीं, लेकिन मैंने उनके गाल पकड़ लिए, लंड का रस उनको थूकने ही नहीं दिया. मैं अपने लंड का पूरा पानी चाची को पिला कर ही माना.

चाची को जैसे ही वीर्य का स्वाद पता चला, उन्होंने बड़े मजे से वीर्य पी लिया और मेरे लंड को चूस चूस कर साफ़ कर दिया.

कुछ देर मैंने अपना लंड चाची के मुँह से निकाल कर अपनी मॉम को चूसने को दे दिया. मैंने मॉम से कहा- जल्दी से मेरे लंड को खड़ा करो … क्योंकि चाची की चूत की पेलाई करनी है. चाची की बड़ी जबरदस्त चूत है.

चाची ये सुनकर बोलीं- नहीं … मैंने अभी तक तुम्हारे चाचा के अलावा किसी के साथ चुदाई नहीं करवाई है.
ये सुनकर मैंने कहा- आज से तुम भी रंडी बन जाओ. औरत की चुत तो मर्द के लंड से चुदने के लिए ही होती है. जिधर लंड मिले, तुरंत अन्दर करवा लेना चाहिए. जिन्दगी एक लंड के सहारे काटना चूतियाई है.

मैंने मॉम की चूची मसल कर उनको इशारा किया. मॉम ने मेरा इशारा समझते हुए चाची को हाथ से धकेलते हुए चित लेटने के लिए कहा.
चाची चित लेट गईं. मैंने तुरन्त अपनी मॉम के मुँह लंड निकाला औऱ चाची की चूत में डाल कर बहुत ही जोर से धक्का दे मारा. एकदम से लंड घुसने से चाची के मुँह से चीख निकल गई.

मॉम ने मुझसे कहा- आराम से … अपनी चाची को आराम से चोदो … आज तुम इसे बहुत समय तक चोद सकोगे.

मैं आराम आराम से अपनी चाची की चुदाई करने लगा. चाची भी धीरे धीरे चुदाई का मजा लेने लगीं और अपने मुँह से आवाज निकालने लगीं. उनकी कामुक आवाजों को सुनकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया. मैं अब जोर जोर से लंड पेलने लगा.

कोई बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने सरिता चाची की चूत में ही अपना पानी गिरा दिया. चाची को चुदाई से मजा आ गया था.

उन्होंने मुझे किस किया और कहने लगीं- तुमने बड़ा मस्त अपनी चाची को चोदा है … इतना मजा तो मुझे कभी नहीं आया. अब आज से मैं तुम्हारी चाची नहीं हूँ. … तुम्हारी रखैल बन गई हूँ.
मैंने चाची की चूची दबाते हुए कहा कि तुम मेरी रखैल नहीं हो … अब तुम मेरी पत्नी बन जाओ … चाचा के बाद मुझे अपना दूसरा पति बना लो.
चाची ने हँसते हुए कहा कि ठीक है मेरे सेकंड पतिदेव.

इस तरह मैंने अपनी माँ की मदद से चाची को चोदा.
अब चाची उठ कर कपड़े पहनने लगीं. फिर वो मेरी मॉम की तरफ देखते हुए बोलीं- अपनी इस रंडी मां के साथ क्या करोगे?
मैंने कहा- अब मैं इस रंडी की चौड़ी गांड को मारूँगा.
चाची ने कहा- हां दिख रहा है कि इसकी चूत से ज्यादा इसकी गांड ही मारी गई है.
चाची हंसते हुए बाहर चली गईं.

अगले भाग में चाची की चुदाई के नए रंग आपको दिखाता हूँ.
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक कहानी है भाई मजा आ गया
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
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मैं माँ के साथ शादी में गांव गया तो वहां मुझे अपनी छोटी चाची की जवानी भा गई और मैंने चाची को चोदा भी … मेरी माँ ने चाची की चुदाई में मदद कैसे की?

दोस्तो, मैं अंकित हूँ. ये कहानी मेरे परिवार की है. ये घटना आज से 3 वर्ष पहले की है. अब तक की मेरी सेक्स कहानी में मैं आपको

मैं अपनी माँ के साथ शादी में गांव गया था. उधर मुझे अपनी छोटी चाची की हसीन जवानी भा गई थी और मैं उनको चोदने की नजर से देखने लगा था.

दूसरे दिन मेरी बड़ी चाची का आगमन हो गया था. उनका नाम हेमा है, जो अब एक बहुत ही चुदक्कड़ औरत बन चुकी थीं. उस समय हेमा चाची की उम्र 40 वर्ष थी, लेकिन 30 से ज्यादा की नहीं दिखती थीं.

मेरी चाची के दो बच्चे हैं. एक लड़का और एक लड़की. लड़की की उम्र जवानी की दहलीज पार कर चुकी थी तथा लड़का उससे एक साल छोटा था. उन दोनों का नाम अनुजा और अंश था. अनुजा अब तक एक नम्बर की माल बन चुकी थी. अनुजा पर कई लड़कों की नजर थी लेकिन अभी उसे कोई चोद नहीं पाया था.
मैं भाभी और अपनी बहन को चोदने के कारण एक चुत चुदाई का नशेड़ी बन चुका था. अब तो मेरे लंड को बस चुत का साथ चाहिए ही था. वो चुत चाहे किसी की भी हो.

मेरी चाची के उठे हुए चूतड़ मुझे बड़े पसंद थे. उनके दोनों बड़े चूतड़ों के बीच में फंसी हुई गांड की कल्पना मेरे लंड को आंदोलित करती रहती थी.

मेरी चाची दिल्ली में रहती हैं. गांव में प्रोग्राम होने के कारण चाची और उनके साथ अनुजा और अंश भी साथ में आए थे. लेकिन चाचा अपने काम के चलते नहीं आ पाए थे. जब मैंने अनुजा को देखा, तो सनाका खा गया. उसकी वो पतली सी कमर और नींबू के जैसे छोटे छोटे उगते हुए चूचे, उसके टॉप के ऊपर से उभरे हुए मालूम पड़ते थे. मेरी मादरचोद निगाहें उसके टिकोरों पर टिक कर रह गई थीं.

एक दिन की बात है. मेरे घर के सामने एक गधा आ गया. वो उस समय शायद हीट पर था और अपने लंड को बाहर निकाले हुआ था.

उसी वक्त मेरी बड़ी चाची हेमा ने मेरी मां से मजाक करते हुए कहा- दीदी देखो सामने … इतना बड़ा लंड ले सकती हो कि नहीं?

मेरी मां ने हंस कर जबाब दिया- इतना मोटा और लम्बा लंड तो कोई गधी ही ले सकती है.
ये बातें सुनकर चाची आह भरते हुए बोलीं- आह … मेरा छेद इतना बड़ा लंड ले पाती … तो मैं जरूर इससे चुदवा लेती.
मेरी मां बोलीं- क्यों अभी लंड से मन नहीं भरा है क्या?
चाची बोलीं- नहीं दीदी … अभी भी आग लगी रहती है. आपके देवर का सामान भी ढीला हो गया है.

ये कहते हुए उन्होंने मेरी मां की मोटी चूची को जोर से दबा दिया.

मां- आउच … ये क्या कर रही हो?
चाची बोलीं- लगता है दीदी … आपकी चुची को खुब दुहा गया है.
मॉम बोलीं- हां यार, मेरी चूचियों को बहुत लोगों ने दुहा और दबाया है. लेकिन अब यह दूध नहीं देती हैं. यदि दूध निकालना हो, तो सरिता की चूचियों को दुह कर देख … वो अभी भी दूध देती है.

सरिता मेरी सबसे छोटी चाची का नाम है. वो गांव में ही रहती हैं. उनके बारे में मैंने अपनी पिछली कहानी में लिखा भी था.

हेमा चाची बोलीं- चलो आज सरिता को ही दुहते हैं.
ये सब बातें सुनकर वो दोनों तुरंत सरिता चाची को ढूढने लगीं.

चाची करकट वाले कमरे में थीं. ये करकट वाला कमरा जानवरों का था.
हेमा चाची सरिता चाची को आवाज लगाने लगीं. उनकी आवाज सुनकर सरिता चाची ने करकट वाले कमरे से आवाज दे दी.

उनकी आवाज सुनकर मॉम और हेमा चाची करकट वाले कमरे में जाने लगीं. उधर चाची एक छोटी सी चटाई पर बैठी थीं. चाची और मां भी उसी चटाई पर बैठ गईं.

मॉम ने कहा- आज हम लोग दूध दुहेंगे.
सरिता चाची बोलीं- हां ठीक है … आप शाम को दुह लेना … कौन ने रोका है.
हेमा चाची बोलीं- हम तुम्हारी चूचियों के दूध की बात कर रहे हैं.

उसके ठीक बाद मॉम, सरिता चाची की चुचियों को दबाने लगीं.

सरिता चाची बोलीं- तुम दोनों तो एक नम्बर की चुदक्कड़ औरतें हो … तुम दोनों को तो बस नए नए लंड चाहिए … चाहे वह जानवर का ही क्यों न हो.

हेमा चाची ने सरिता चाची का ब्लॉउज खोल दिया और उनकी दोनों चुचियों को दोनों तरफ से मॉम और हेमा चाची पीने लगीं.
तभी मां ने सरिता चाची को गदहे के लंड वाली बात बताई.

हेमा चाची मस्ती से चूची चूसते हुए बोलीं- हां यार उस गधे का लंड मैं अपने चूत से टच करवाना चाहती हूँ … कोई उपाय करो.
सरिता चाची बोलीं- उसका थोड़ा सा भी लंड तुम्हारी चूत में लंड घुस गया न … तो पता चल जाएगा कि गधे का लंड क्या होता है. तुम्हारे छेद की जगह गड्डा हो जाएगा. फिर तुम्हें कोई चोदने वाला भी नहीं मिलेगा.
हेमा चाची बोलीं- क्या करूं यार … आज तो बड़े लंड से चुदने का मन कर रहा है.
सरिता चाची अपनी चूची के निप्पल को ठीक से दबा कर दूध पिलाते हुए कहने लगीं- तो ठीक है … आज उस औरत से बात करना पड़ेगी, जिसके पास गदहा है.

यही सब बात करते हुए तीनों रंडियां बाहर आ गईं. मैं तो हेमा रंडी की चूत को फाड़ना चाहता था. जब मैं जान गया कि ये हेमा तो एक नंबर की चुदक्कड़ औरत है, तो मेरा काम आसान हो गया था.

कुछ देर बाद जब मेरी मां अपने रूम आईं, तो मैंने कहा- और शालिनी डार्लिंग क्या हाल है. चल दरवाजा बंद कर दे … आज तुझे चोदना है.
मां बोलीं- हां रे … मुझे भी बड़ी आग लगी है.
मैंने मां के दूध मसलते हुए कहा- तुम तीनों एक नम्बर की रंडी हो … तुम मुझे अपनी उस देवरानी हेमा मालिनी की चुत दिला दे.
मां समझ गईं और बोलीं- चल ठीक है उसका भी इंतजाम करती हूँ. पहले मेरी खुजली तो मिटा.

मैंने इसके बाद मॉम को तुरंत बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ गया. मैं उनके होंठों को चूसने लगा.

तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी.
मैं मॉम से धीरे से बोला- कह दो … अभी मैं चुद रही हूँ. मैं जानता हूं कि तुम तीनों रंडी हो, अब शरमाओ मत … साफ़ बोल दो.
मॉम ने आवाज देते हुए पूछा- कौन?
सरिता चाची ने आवाज दी- मैं हूँ सरिता.
मॉम धीरे से बोलीं- अभी मैं चुद रही हूँ … बाद में आना.
सरिता चाची जिद करते हुए बोलीं- दरवाजा खोलिये … मुझे भी आना है.
मैंने उठ कर दरवाजा खोलने को हुआ, तो मॉम बोलीं- हां आ जाने दे … सरिता सब जानती है.

उसके बाद मैंने दरवाजा खोला और चाची को अन्दर खींच कर गेट बंद कर दिया. दरवाजा बंद करते ही मैंने चाची को उठाया और बिस्तर पर पटक दिया. मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को चूसने लगा.

चाची मुझे अपने ऊपर चढ़ा देख कर एकदम से हड़ाबड़ाते हुए बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- साली रंडी चाची … आज मैं तुम्हारी जवानी से खेलूंगा.
तभी मॉम चाची से बोली- हां चल जल्दी से नंगी हो जा.

उसके बाद मैंने सरिता चाची की साड़ी को पूरा खोल दिया. वो ब्लॉउज और पेटीकोट में मेरे सामने हो गईं.

तब मॉम मुझसे बोलीं कि अभी तक ये किसी दूसरे मर्द से चुदी नहीं है … इसलिए इतना फड़फड़ा रही है.
सरिता चाची बोलीं कि तुम अपनी मां को ही चोदो … और मुझे छोड़ दो.
मैं बोला कि सरिता डार्लिंग अपनी इस जवानी का मजा मुझे तो ले लेने दो. मैं कौन सा बेगाना हूँ. अपनी चाची को ही चोद रहा हूँ.

कुछ देर बाद सरिता चाची शांत हो गईं और उनका विरोध भी केवल नाममात्र का ही रह गया था.

मैंने बड़े प्यार से सरिता चाची को पूरा नंगी कर दिया और उनकी दूध भरी चुचियों को बारी बारी से पीने लगा. मैंने मां से सरिता चाची की चूत चूसने का कहा.
मैं चाची की चूची को पीने लगा और मॉम चाची की चुत चाटने लगीं.
मैंने चाची को चूचियों को दबा दबा कर दूध निकाला और मस्ती से पीने लगा.

उधर मॉम भी बड़ी मस्ती से चाची की चूत को चूस रही थीं. ऊपर और नीचे की एक साथ चुसाई से चाची की हालत खराब हो गई और वो ‘आह … आह..’ की आवाज करने लगीं.
कुछ पल बाद मैंने अपना लंड चाची को पकड़ा दिया … और लंड चूसने का कहा.

चाची ने मेरे लंड को चूसने से मना कर दिया. मैंने उनकी चुची को इतने जोर से दबाया कि उनकी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने चाची से कहा- डार्लिंग मैं मर्द का लंड चूसने की कह रहा हूँ … कोई जलती हुई लकड़ी चूसने की नहीं कहा है. आज तुम अपने इन रसीले होंठों से मेरे लंड को चूस कर तो देखो. मजा आ जाएगा.
ये कहते हुए मैंने अपना लंड चाची के मुँह डाल दिया और चाची ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. वो इतनी मादकता से लंड चूस रही थीं कि मजा आने लगा था. सच में कितना अधिक मजा आ रहा था कि बस पूछो ही मत.

कोई दस मिनट बाद मैंने अपना लंड का पानी सरिता चाची की मुँह में छोड़ दिया. वो मेरे पानी को थूकने वाली थीं, लेकिन मैंने उनके गाल पकड़ लिए, लंड का रस उनको थूकने ही नहीं दिया. मैं अपने लंड का पूरा पानी चाची को पिला कर ही माना.

चाची को जैसे ही वीर्य का स्वाद पता चला, उन्होंने बड़े मजे से वीर्य पी लिया और मेरे लंड को चूस चूस कर साफ़ कर दिया.

कुछ देर मैंने अपना लंड चाची के मुँह से निकाल कर अपनी मॉम को चूसने को दे दिया. मैंने मॉम से कहा- जल्दी से मेरे लंड को खड़ा करो … क्योंकि चाची की चूत की पेलाई करनी है. चाची की बड़ी जबरदस्त चूत है.

चाची ये सुनकर बोलीं- नहीं … मैंने अभी तक तुम्हारे चाचा के अलावा किसी के साथ चुदाई नहीं करवाई है.
ये सुनकर मैंने कहा- आज से तुम भी रंडी बन जाओ. औरत की चुत तो मर्द के लंड से चुदने के लिए ही होती है. जिधर लंड मिले, तुरंत अन्दर करवा लेना चाहिए. जिन्दगी एक लंड के सहारे काटना चूतियाई है.

मैंने मॉम की चूची मसल कर उनको इशारा किया. मॉम ने मेरा इशारा समझते हुए चाची को हाथ से धकेलते हुए चित लेटने के लिए कहा.
चाची चित लेट गईं. मैंने तुरन्त अपनी मॉम के मुँह लंड निकाला औऱ चाची की चूत में डाल कर बहुत ही जोर से धक्का दे मारा. एकदम से लंड घुसने से चाची के मुँह से चीख निकल गई.

मॉम ने मुझसे कहा- आराम से … अपनी चाची को आराम से चोदो … आज तुम इसे बहुत समय तक चोद सकोगे.

मैं आराम आराम से अपनी चाची की चुदाई करने लगा. चाची भी धीरे धीरे चुदाई का मजा लेने लगीं और अपने मुँह से आवाज निकालने लगीं. उनकी कामुक आवाजों को सुनकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया. मैं अब जोर जोर से लंड पेलने लगा.

कोई बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने सरिता चाची की चूत में ही अपना पानी गिरा दिया. चाची को चुदाई से मजा आ गया था.

उन्होंने मुझे किस किया और कहने लगीं- तुमने बड़ा मस्त अपनी चाची को चोदा है … इतना मजा तो मुझे कभी नहीं आया. अब आज से मैं तुम्हारी चाची नहीं हूँ. … तुम्हारी रखैल बन गई हूँ.
मैंने चाची की चूची दबाते हुए कहा कि तुम मेरी रखैल नहीं हो … अब तुम मेरी पत्नी बन जाओ … चाचा के बाद मुझे अपना दूसरा पति बना लो.
चाची ने हँसते हुए कहा कि ठीक है मेरे सेकंड पतिदेव.

इस तरह मैंने अपनी माँ की मदद से चाची को चोदा.
अब चाची उठ कर कपड़े पहनने लगीं. फिर वो मेरी मॉम की तरफ देखते हुए बोलीं- अपनी इस रंडी मां के साथ क्या करोगे?
मैंने कहा- अब मैं इस रंडी की चौड़ी गांड को मारूँगा.
चाची ने कहा- हां दिख रहा है कि इसकी चूत से ज्यादा इसकी गांड ही मारी गई है.
चाची हंसते हुए बाहर चली गईं.

अगले भाग में चाची की चुदाई के नए रंग आपको दिखाता हूँ.
Wow maja aa gaya
 
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Aryans

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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक कहानी है भाई मजा आ गया
अगले धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Thanku Bhai
 
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Aryans

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अब आगे:​

मैंने मॉम से कहा- अब मैं आपकी चौड़ी गांड मारूँगा. कई लोग आपकी गांड का मजा ले चुके हैं.
मॉम ने कहा- सच है … मेरी गांड को कई लोगों ने मारा है.

मैंने कुछ देर तक लंड चुसवा कर अपनी मां की चौड़ी गांड पर दो तीन थप्पड़ लगाए और फिर अपनी रंडी मां की गांड में अपना लंड डाल कर जोर जोर से पेलने लगा.

मां अपनी गांड पेलाई का आनन्द लेने लगीं और मुँह से जोर जोर आवाज़ करने लगीं. कोई 10 मिनट बाद मैंने मॉम की गांड में पानी गिरा दिया और मां के ऊपर ही गिर गया. उसके बाद मैं कब सो गया पता ही नहीं चला.

जब नींद खुली, तो मैंने देखा कि मैं उस रूम में अकेला था, मॉम मेरे पास नहीं थीं.

जब बाहर गया, तो देखा कि सरिता चाची बर्तन धो रही थीं. घर में कोई नहीं था. मैं उनके सामने गया तो चाची हंसने लगीं. मैंने अपना तुरन्त लंड निकाला और सरिता चाची के मुँह में डाल दिया. चाची भी लंड चूसने लगीं और मैं चाची के मुँह को ही पेलने लगा. कुछ मिनट बाद मैंने चाची के मुँह में ही पानी गिरा दिया और बाहर चला गया.

बाहर अनुजा, बड़ी चाची और मां आपस में बातें कर रही थीं.

मैं अनुजा की चूचियों को देखता हुआ लंड सहलाने लगा. मेरी मां ने ये देख लिया था. मैं उनको आंख मार कर गांव में घूमने चला गया.

जब रात को सभी लोग खाना खाने के बाद छत पर सोने के लिए आए. तो मैंने देखा कि सरिता चाची नहीं आई थीं.

मैंने मॉम से धीरे से पूछा, तो मां बोलीं- वो अभी चाचा के साथ नीचे है.
मैंने मॉम को अपनी तरफ आने के लिए इशारा करते हुए कहा- कोई बात नहीं … तुम तो हो ही.
मॉम ने कहा- हम्म देखती हूँ. सब को सोने तो दे.

सबके सोने का इन्तजार करते करते मुझे नींद आने लगी. मैं दिन में काफी थक गया था, तो मुझे जल्दी ही नींद आ गई. बाकी के सभी लोग भी सो गए.

रात में जब मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा कि मेरे बगल में सरिता चाची सोई पड़ी थीं. दूसरी ओर हेमा चाची सोई थीं. मैंने चारों तरफ निगाह दौड़ाई, लेकिन मॉम छत पर थी ही नहीं.

मैंने तुरंत सरिता चाची की एक चुची को निकाला और उनका दूध पीने लगा. उनके बगल में चाची का लड़का सोया था. चाची बेसुध होकर दूध चुसवा रही थीं. कुछ देर बाद मैंने चाची की साड़ी ऊपर करके उनकी चूत में हाथ लगा दिया.

चाची ने जागते हुए मुझे देखा और अपने ऊपर ले लिया और धीरे से बोलीं- हम्म आराम से चोदना … मेरी चुत थकी हुई है. अभी कुछ देर पहले तुम्हारे चाचा से चुदवा कर आयी हूँ.

मैं चाची की चूत में लंड से धीरे धीरे पेलने लगा. चाची भी मेरे बड़े लंड से गांड उठा कर चुदवाने का मजा लेने लगीं. मैं उनकी चूची चूसता हुआ धीरे धीरे लंड पेल रहा था. जब पानी निकलने वाला ही था, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और चाची के होंठों को चूसने लगा.

चाची मेरे लंड की मुठ मारने लगीं और लंड का पानी निकाल दिया. मैं चाची के चुचों को पकड़ कर सो गया.

Chachi ki Chudai
Chachi ki Chudai
जब भोर मेरी नींद खुली, तो देखा कि हेमा चाची की साड़ी घुटने से ऊपर थी. ये देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. इसी उत्तेजना में मैंने सरिता चाची की चूत को जोर से मसल दिया. जिससे कि चाची की चूत के झांट के बाल भी उखड़ आए और चाची दर्द से कराह उठीं.

सरिता चाची ने मुझे सीने पर मुक्का मारते हुए कहा- साले बेरहम … जो भी करना है … आराम से करो ना.
मैंने हंस कर कहा- ठीक है मेरी जान.

मैं जानता था कि हेमा चाची एक नम्बर की चुदक्कड़ हैं. उनको भी लंड की दरकार होगी. मैं अपना हाथ धीरे धीरे हेमा चाची की चूत के पास ले गया और सहलाने लगा.
मैंने देखा कि हेमा चाची ने पेंटी ही नहीं पहनी थी. इस वजह से मेरा काम और आसान हो गया. उनकी गीली चुत टच करते मैं ये भी जान गया था कि हेमा चाची जाग रही हैं. वो एक नम्बर की चालू चुदक्कड़ औरत थीं.

उसके बाद मैंने उनकी चुत को अपनी हथेली में भर लिया औऱ एक उंगली डालकर उनकी चूत को चोदने लगा. हेमा चाची धीरे धीरे मुँह से आवाज निकाल रही थीं. मैंने देर न करते हुए सरिता चाची को अलग किया और हेमा चाची के ऊपर चढ़ गया.

हेमा चाची बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
तब मैंने कहा- आज मैं अपनी प्यारी हेमा चाची को चोदूंगा.
चाची बोलीं- लेकिन ये तो गलत है.
मैंने कहा- मैं जानता हूं कि आप बहुत बड़ी चुदक्कड़ हो. इसलिए आप मुझे चोदने दीजिये.

हेमा चाची समझ गई कि भतीजा गर्म है और इससे चुदना ही ठीक रहेगा.
चाची बोलीं- हां मैं चुदक्कड़ हूँ, लेकिन भोसड़ी के, तेरी मां से कम हूँ.
मैंने उनकी चूची मसलते हुए कहा- मुझे मालूम है.

उसके बाद मैं हेमा चाची के रसीले होंठों को चूसने लगा. कुछ देर होंठ चूसने के बाद मैं हेमा चाची की चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.

हेमा चाची बोलीं- अब ठीक से आ जा और आज मेरी चूत को तू भी चोद ले. जब बाहर के लोग मुझे चोद देते हैं, तो तुम तो अपने ही हो.
मैंने कहा- हां मेरी डार्लिंग चाची, घर के लंड सबसे सेफ होते हैं. हर समय उपलब्ध भी रहते हैं, जगह का भी कोई लोचा नहीं रहता है.
चाची मुझे चूमते हुए बोलीं- वो तो सब ठीक है. लेकिन मेरी कुछ ख्वाहिशें हैं जिनको आज कोई ने पूरा नहीं किया है.

मैं चाची की चुचियों को दबाने में मस्त था. मैंने उनकी बात सुनकर एक चूची को जोर दबाते हुए कहा- पहले एक बार मेरा लंड ले लो मेरी हेमामालिनी … फिर बताना कि क्या ख्वाहिश है.

मेरे जोर से चूची दबाने से चाची की चीख निकल गई थी. उधर सरिता चाची भी लेटे हुए हम दोनों को देख रही थीं. ये देखकर मैंने सोचा कि आज तीनों रंडियां मेरी हो गईं, जब चाहूँ, जिसे चाहूँ, चोद सकता हूँ.

उसके बाद मैंने हेमा चाची के ब्लाउज को खोलकर चुचियों को बाहर निकाला औऱ उनको बारी बारी से चूसते हुए पीने लगा.

आह क्या बताऊं दोस्तो … उस समय मुझे कितना मजा आ रहा था. क्योंकि जब मैं चाची की चुची को दांत से काटता था, तो उनकी हल्की सी सिसकारी वाली चीख़ निकल जाती थी. उनकी मादक सिसकारी सुनकर मुझे और उत्तेजना आ जाती थी.

कुछ देर बाद मैंने अपना लंड चाची के मुँह में डाल दिया और चाची ने बड़े आराम से मेरा लंड चूसना चालू कर दिया. उनका लंड चूसने का स्टाइल बड़ा मस्त था, मेरे मुँह से भी कामुक आवाजें आने लगीं.



कुछ समय के बाद मैं चाची के मुँह में ही झड़ गया. जब मेरा पानी निकल गया, तो चाची मुझे चूमते हुए बोलीं कि अब मेरी चूत को कौन शान्त करेगा.
मैंने कहा- मेरी हेमामालिनी … मैं ही आपकी चुत को ठंडा करूंगा. बस आपको तो मेरे लंड को जगाना बार है. जोकि आप बड़े अच्छे से जानती हैं.

ये कह कर मैंने तुरंत ही अपना लंड चाची के होंठों से लगा दिया और उनको लंड चूसने का कहा.
चाची की चुत में आग लगी थी तो वे झट से लंड चूसने लगीं. कोई 5 मिनट तक लंड चूसने के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

मैंने अब देर न करते हुए अपना लंड हेमा चाची की चूत की फांकों में टिका दिया और सुपारा फंसाते ही एक जोर से झटका दे मारा. हेमा चाची के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैं आराम आराम से चाची को पेलने लगा. चाची भी अपनी चूत की पेलाई का आनन्द लेने लगीं.
उनके मुँह से ‘आह आह ओह उह..’ जैसी आवाजें निकलने लगीं. ये सब सुनकर मैंने भी चाची को चोदने की स्पीड बढ़ा दी. मैं हेमा चाची की गदरायी जवानी का भरपूर मजा लूट रहा था क्योंकि जो मजा घर की औरतों को चोदने में आता है, वो किसी में नहीं आता.

उसके बाद मैंने चाची को कहा- अब बताओ माय डियर हेमामालिनी.. आपकी ख्वाहिश क्या है.
चाची ने गांड उठाते हुए लंड को ठोकर दी और कहा- अभी तो इस अँधेरी भोर में मुझे लंड का मजा लेने दो … मैं सुबह बताऊंगी … उसे तुम्हें पूरा करना होगा.
मैंने भी जर्क मारते हुए कहा- ठीक है मेरी जान.

मैंने तुरंत ही चोदने की स्पीड को बढ़ा दिया और जोर जोर से लंड चुत की जड़ तक पेलने लगा. बीस मिनट बाद मैंने हेमा चाची की चूत में ही अपना पानी गिरा दिया. इस बीच चाची भी दो बार अपनी चुत का पानी निकाल चुकी थीं.

उसके बाद मैं चाची के ऊपर ही कुछ समय तक लेटा रहा औऱ चाची मेरे होंठों को चूसने में लगी रहीं.

इस तरह थकान के कारण अब मुझे नींद आने लगी, तो मोबाइल मैंने में समय देखा. सुबह के 4 बजने में कुछ समय बाकी था. मैं नीचे अपने रूम में आकर सो गया.

जब मॉम मुझे जगाने आईं, तो 8 बज चुके थे. आज रात में ही हमारे खानदान में ही लड़की की शादी थी. इसी शादी के लिए हेमा चाची आयी थीं.
मैंने फ्रेश होकर चाय पी औऱ बाहर चला गया.

सच कहूँ तो दोस्तो … मैं अब चुदक्कड़ लड़का बन गया था. अब मुझे पेलने के लिए रोज ही चूत चाहिए थी. चाहे वह चूत किसी भी औरत की हो.

मैं अन्दर घर में आया तो देखा कि हेमा चाची का लड़का अंश अपने रूम में बहन अनुजा की गांड को घूर रहा था. अनुजा पीछे मुँह करके खड़ी थी.

ये सीन देख कर मैं समझ गया कि इस भैन के लंड को इसी उम्र में ही गांड की जरूरत हो गई है.

मेरे घर में मेरे छोटे चाचा के अलावा कोई भी बड़ा आदमी नहीं था. छोटे चाचा भी हर समय वो खेती के काम और बाहरी काम के चक्कर में लगे रहते. वो सुबह घर से निकलते तो सीधे रात में ही वापस आ पाते थे.

दिन भर वो खेत में बने ट्यूबल पम्प के बने रूम में रहते. रात में एक उधर एक नौकर सोता था और देखभाल करता रहता. चाचा रात में आते थे. मेरे हिसाब से चाचा चाची को पेलने के लिए ही आते थे और उनको पेलकर सुबह चले जाते थे. आज शादी होने के कारण उनकी और भी ज्यादा भागदौड़ थी.

अब तक मुझे घर में तीनों रंडियों की चूत का सुख मिल गया था और चौथी अनुजा का इंतजार था.

मुझे ये भी मालूम था कि शादी के कुछ दिन बाद मुझे और हेमा चाची को वापस गांव से जाना होगा.

मैंने अनुजा से पूछा- हेमा चाची कहां हैं? और मेरी मां भी नजर नहीं आ रही हैं.
अनुजा बोली- वे दोनों पिंकी दीदी के घर गई हैं.
पिंकी वही लड़की है, जिसकी आज शादी थी.

तब मैंने पूछा- और सरिता चाची कहां हैं?
अनुजा बोली- वो भी उन्हीं के साथ में हैं.
मैंने पूछा कि तुम क्यों नहीं गईं?
उसने कहा- मैं शाम को जाऊंगी … दोपहर का खाना भी वहीं है.
मैंने कहा- अच्छा इसलिए सुबह तुमने ही चाय बनाई है.

मैं घर की सारी पोजिशन समझ कर अपने रूम में चला आया और सोचने लगा कि अनुजा को कैसे चोदा जाए.

क्योंकि मुझे अभी तक सीलबंद बुर का स्वाद नहीं मिला था. मैं ये भी जानता था कि कुछ समय बाद अनुजा की सील भी कोई न कोई तोड़ ही देगा. इससे अच्छा है कि मैं ही तोड़ दूँ. आज बहुत ही अच्छा चांस है, घर पर भी कोई नहीं है.

मैंने फिर सोचा कि मुझे किस बात का डर है, जब उसकी मां ही मुझसे चुद चुकी है.. तो अनुजा को चोदने में किस बात का डर है. बस डर इस बात का था कि मेरे बड़े चाचा को पता न चल जाए. यदि अनुजा अपना पापा से कुछ न कह दे.

कुछ देर बाद मैं अनुजा के रूम में गया, तो मैंने देखा कि उसके कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था. अनुजा नहाकर अपने बालों को सुखा रही थी. उसने नीचे पेन्टी भर पहनी थी और ऊपर से एकदम नंगी थी.

उसका ये रूप देखकर मेरा लंड अंडरवियर में ही हिलोरें मारने लगा. जब उसकी नजर मेरे पर पड़ी, तो तुरंत ही अपनी चुचियों को तौलिये से ढक लीं और शर्म के मारे अपनी आंखें बन्द करके अपना सर नीचे झुका लिया. मैंने तुरंत ही दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.

वो घबरा कर बोली- भैया ये दरवाजा क्यों बन्द कर रहे हो?
मैंने कहा- तुम्हारा भैया अब तुमसे प्यार करेगा … और प्यार तो बन्द दरवाजे में ही होता है न.
वो चुप रही.

मैंने अँधेरे में तीर चलाते हुए कहा- मैं यह भी जानता हूँ तुम्हारे और अंश के बीच में क्या चल रहा है.
ये बातें सुनकर डर गई.
मैंने तो अंधेरे में तीर मारा था, जो सही निशाने में लग गया.
 
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Motaland2468

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मैंने मॉम से कहा- अब मैं आपकी चौड़ी गांड मारूँगा. कई लोग आपकी गांड का मजा ले चुके हैं.
मॉम ने कहा- सच है … मेरी गांड को कई लोगों ने मारा है.

मैंने कुछ देर तक लंड चुसवा कर अपनी मां की चौड़ी गांड पर दो तीन थप्पड़ लगाए और फिर अपनी रंडी मां की गांड में अपना लंड डाल कर जोर जोर से पेलने लगा.

मां अपनी गांड पेलाई का आनन्द लेने लगीं और मुँह से जोर जोर आवाज़ करने लगीं. कोई 10 मिनट बाद मैंने मॉम की गांड में पानी गिरा दिया और मां के ऊपर ही गिर गया. उसके बाद मैं कब सो गया पता ही नहीं चला.

जब नींद खुली, तो मैंने देखा कि मैं उस रूम में अकेला था, मॉम मेरे पास नहीं थीं.

जब बाहर गया, तो देखा कि सरिता चाची बर्तन धो रही थीं. घर में कोई नहीं था. मैं उनके सामने गया तो चाची हंसने लगीं. मैंने अपना तुरन्त लंड निकाला और सरिता चाची के मुँह में डाल दिया. चाची भी लंड चूसने लगीं और मैं चाची के मुँह को ही पेलने लगा. कुछ मिनट बाद मैंने चाची के मुँह में ही पानी गिरा दिया और बाहर चला गया.

बाहर अनुजा, बड़ी चाची और मां आपस में बातें कर रही थीं.

मैं अनुजा की चूचियों को देखता हुआ लंड सहलाने लगा. मेरी मां ने ये देख लिया था. मैं उनको आंख मार कर गांव में घूमने चला गया.

जब रात को सभी लोग खाना खाने के बाद छत पर सोने के लिए आए. तो मैंने देखा कि सरिता चाची नहीं आई थीं.

मैंने मॉम से धीरे से पूछा, तो मां बोलीं- वो अभी चाचा के साथ नीचे है.
मैंने मॉम को अपनी तरफ आने के लिए इशारा करते हुए कहा- कोई बात नहीं … तुम तो हो ही.
मॉम ने कहा- हम्म देखती हूँ. सब को सोने तो दे.

सबके सोने का इन्तजार करते करते मुझे नींद आने लगी. मैं दिन में काफी थक गया था, तो मुझे जल्दी ही नींद आ गई. बाकी के सभी लोग भी सो गए.

रात में जब मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा कि मेरे बगल में सरिता चाची सोई पड़ी थीं. दूसरी ओर हेमा चाची सोई थीं. मैंने चारों तरफ निगाह दौड़ाई, लेकिन मॉम छत पर थी ही नहीं.

मैंने तुरंत सरिता चाची की एक चुची को निकाला और उनका दूध पीने लगा. उनके बगल में चाची का लड़का सोया था. चाची बेसुध होकर दूध चुसवा रही थीं. कुछ देर बाद मैंने चाची की साड़ी ऊपर करके उनकी चूत में हाथ लगा दिया.

चाची ने जागते हुए मुझे देखा और अपने ऊपर ले लिया और धीरे से बोलीं- हम्म आराम से चोदना … मेरी चुत थकी हुई है. अभी कुछ देर पहले तुम्हारे चाचा से चुदवा कर आयी हूँ.

मैं चाची की चूत में लंड से धीरे धीरे पेलने लगा. चाची भी मेरे बड़े लंड से गांड उठा कर चुदवाने का मजा लेने लगीं. मैं उनकी चूची चूसता हुआ धीरे धीरे लंड पेल रहा था. जब पानी निकलने वाला ही था, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और चाची के होंठों को चूसने लगा.

चाची मेरे लंड की मुठ मारने लगीं और लंड का पानी निकाल दिया. मैं चाची के चुचों को पकड़ कर सो गया.

Chachi ki Chudai
Chachi ki Chudai
जब भोर मेरी नींद खुली, तो देखा कि हेमा चाची की साड़ी घुटने से ऊपर थी. ये देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. इसी उत्तेजना में मैंने सरिता चाची की चूत को जोर से मसल दिया. जिससे कि चाची की चूत के झांट के बाल भी उखड़ आए और चाची दर्द से कराह उठीं.

सरिता चाची ने मुझे सीने पर मुक्का मारते हुए कहा- साले बेरहम … जो भी करना है … आराम से करो ना.
मैंने हंस कर कहा- ठीक है मेरी जान.

मैं जानता था कि हेमा चाची एक नम्बर की चुदक्कड़ हैं. उनको भी लंड की दरकार होगी. मैं अपना हाथ धीरे धीरे हेमा चाची की चूत के पास ले गया और सहलाने लगा.
मैंने देखा कि हेमा चाची ने पेंटी ही नहीं पहनी थी. इस वजह से मेरा काम और आसान हो गया. उनकी गीली चुत टच करते मैं ये भी जान गया था कि हेमा चाची जाग रही हैं. वो एक नम्बर की चालू चुदक्कड़ औरत थीं.

उसके बाद मैंने उनकी चुत को अपनी हथेली में भर लिया औऱ एक उंगली डालकर उनकी चूत को चोदने लगा. हेमा चाची धीरे धीरे मुँह से आवाज निकाल रही थीं. मैंने देर न करते हुए सरिता चाची को अलग किया और हेमा चाची के ऊपर चढ़ गया.

हेमा चाची बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
तब मैंने कहा- आज मैं अपनी प्यारी हेमा चाची को चोदूंगा.
चाची बोलीं- लेकिन ये तो गलत है.
मैंने कहा- मैं जानता हूं कि आप बहुत बड़ी चुदक्कड़ हो. इसलिए आप मुझे चोदने दीजिये.

हेमा चाची समझ गई कि भतीजा गर्म है और इससे चुदना ही ठीक रहेगा.
चाची बोलीं- हां मैं चुदक्कड़ हूँ, लेकिन भोसड़ी के, तेरी मां से कम हूँ.
मैंने उनकी चूची मसलते हुए कहा- मुझे मालूम है.

उसके बाद मैं हेमा चाची के रसीले होंठों को चूसने लगा. कुछ देर होंठ चूसने के बाद मैं हेमा चाची की चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.

हेमा चाची बोलीं- अब ठीक से आ जा और आज मेरी चूत को तू भी चोद ले. जब बाहर के लोग मुझे चोद देते हैं, तो तुम तो अपने ही हो.
मैंने कहा- हां मेरी डार्लिंग चाची, घर के लंड सबसे सेफ होते हैं. हर समय उपलब्ध भी रहते हैं, जगह का भी कोई लोचा नहीं रहता है.
चाची मुझे चूमते हुए बोलीं- वो तो सब ठीक है. लेकिन मेरी कुछ ख्वाहिशें हैं जिनको आज कोई ने पूरा नहीं किया है.

मैं चाची की चुचियों को दबाने में मस्त था. मैंने उनकी बात सुनकर एक चूची को जोर दबाते हुए कहा- पहले एक बार मेरा लंड ले लो मेरी हेमामालिनी … फिर बताना कि क्या ख्वाहिश है.

मेरे जोर से चूची दबाने से चाची की चीख निकल गई थी. उधर सरिता चाची भी लेटे हुए हम दोनों को देख रही थीं. ये देखकर मैंने सोचा कि आज तीनों रंडियां मेरी हो गईं, जब चाहूँ, जिसे चाहूँ, चोद सकता हूँ.

उसके बाद मैंने हेमा चाची के ब्लाउज को खोलकर चुचियों को बाहर निकाला औऱ उनको बारी बारी से चूसते हुए पीने लगा.

आह क्या बताऊं दोस्तो … उस समय मुझे कितना मजा आ रहा था. क्योंकि जब मैं चाची की चुची को दांत से काटता था, तो उनकी हल्की सी सिसकारी वाली चीख़ निकल जाती थी. उनकी मादक सिसकारी सुनकर मुझे और उत्तेजना आ जाती थी.

कुछ देर बाद मैंने अपना लंड चाची के मुँह में डाल दिया और चाची ने बड़े आराम से मेरा लंड चूसना चालू कर दिया. उनका लंड चूसने का स्टाइल बड़ा मस्त था, मेरे मुँह से भी कामुक आवाजें आने लगीं.



कुछ समय के बाद मैं चाची के मुँह में ही झड़ गया. जब मेरा पानी निकल गया, तो चाची मुझे चूमते हुए बोलीं कि अब मेरी चूत को कौन शान्त करेगा.
मैंने कहा- मेरी हेमामालिनी … मैं ही आपकी चुत को ठंडा करूंगा. बस आपको तो मेरे लंड को जगाना बार है. जोकि आप बड़े अच्छे से जानती हैं.

ये कह कर मैंने तुरंत ही अपना लंड चाची के होंठों से लगा दिया और उनको लंड चूसने का कहा.
चाची की चुत में आग लगी थी तो वे झट से लंड चूसने लगीं. कोई 5 मिनट तक लंड चूसने के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

मैंने अब देर न करते हुए अपना लंड हेमा चाची की चूत की फांकों में टिका दिया और सुपारा फंसाते ही एक जोर से झटका दे मारा. हेमा चाची के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैं आराम आराम से चाची को पेलने लगा. चाची भी अपनी चूत की पेलाई का आनन्द लेने लगीं.
उनके मुँह से ‘आह आह ओह उह..’ जैसी आवाजें निकलने लगीं. ये सब सुनकर मैंने भी चाची को चोदने की स्पीड बढ़ा दी. मैं हेमा चाची की गदरायी जवानी का भरपूर मजा लूट रहा था क्योंकि जो मजा घर की औरतों को चोदने में आता है, वो किसी में नहीं आता.

उसके बाद मैंने चाची को कहा- अब बताओ माय डियर हेमामालिनी.. आपकी ख्वाहिश क्या है.
चाची ने गांड उठाते हुए लंड को ठोकर दी और कहा- अभी तो इस अँधेरी भोर में मुझे लंड का मजा लेने दो … मैं सुबह बताऊंगी … उसे तुम्हें पूरा करना होगा.
मैंने भी जर्क मारते हुए कहा- ठीक है मेरी जान.

मैंने तुरंत ही चोदने की स्पीड को बढ़ा दिया और जोर जोर से लंड चुत की जड़ तक पेलने लगा. बीस मिनट बाद मैंने हेमा चाची की चूत में ही अपना पानी गिरा दिया. इस बीच चाची भी दो बार अपनी चुत का पानी निकाल चुकी थीं.

उसके बाद मैं चाची के ऊपर ही कुछ समय तक लेटा रहा औऱ चाची मेरे होंठों को चूसने में लगी रहीं.

इस तरह थकान के कारण अब मुझे नींद आने लगी, तो मोबाइल मैंने में समय देखा. सुबह के 4 बजने में कुछ समय बाकी था. मैं नीचे अपने रूम में आकर सो गया.

जब मॉम मुझे जगाने आईं, तो 8 बज चुके थे. आज रात में ही हमारे खानदान में ही लड़की की शादी थी. इसी शादी के लिए हेमा चाची आयी थीं.
मैंने फ्रेश होकर चाय पी औऱ बाहर चला गया.

सच कहूँ तो दोस्तो … मैं अब चुदक्कड़ लड़का बन गया था. अब मुझे पेलने के लिए रोज ही चूत चाहिए थी. चाहे वह चूत किसी भी औरत की हो.

मैं अन्दर घर में आया तो देखा कि हेमा चाची का लड़का अंश अपने रूम में बहन अनुजा की गांड को घूर रहा था. अनुजा पीछे मुँह करके खड़ी थी.

ये सीन देख कर मैं समझ गया कि इस भैन के लंड को इसी उम्र में ही गांड की जरूरत हो गई है.

मेरे घर में मेरे छोटे चाचा के अलावा कोई भी बड़ा आदमी नहीं था. छोटे चाचा भी हर समय वो खेती के काम और बाहरी काम के चक्कर में लगे रहते. वो सुबह घर से निकलते तो सीधे रात में ही वापस आ पाते थे.

दिन भर वो खेत में बने ट्यूबल पम्प के बने रूम में रहते. रात में एक उधर एक नौकर सोता था और देखभाल करता रहता. चाचा रात में आते थे. मेरे हिसाब से चाचा चाची को पेलने के लिए ही आते थे और उनको पेलकर सुबह चले जाते थे. आज शादी होने के कारण उनकी और भी ज्यादा भागदौड़ थी.

अब तक मुझे घर में तीनों रंडियों की चूत का सुख मिल गया था और चौथी अनुजा का इंतजार था.

मुझे ये भी मालूम था कि शादी के कुछ दिन बाद मुझे और हेमा चाची को वापस गांव से जाना होगा.

मैंने अनुजा से पूछा- हेमा चाची कहां हैं? और मेरी मां भी नजर नहीं आ रही हैं.
अनुजा बोली- वे दोनों पिंकी दीदी के घर गई हैं.
पिंकी वही लड़की है, जिसकी आज शादी थी.

तब मैंने पूछा- और सरिता चाची कहां हैं?
अनुजा बोली- वो भी उन्हीं के साथ में हैं.
मैंने पूछा कि तुम क्यों नहीं गईं?
उसने कहा- मैं शाम को जाऊंगी … दोपहर का खाना भी वहीं है.
मैंने कहा- अच्छा इसलिए सुबह तुमने ही चाय बनाई है.

मैं घर की सारी पोजिशन समझ कर अपने रूम में चला आया और सोचने लगा कि अनुजा को कैसे चोदा जाए.

क्योंकि मुझे अभी तक सीलबंद बुर का स्वाद नहीं मिला था. मैं ये भी जानता था कि कुछ समय बाद अनुजा की सील भी कोई न कोई तोड़ ही देगा. इससे अच्छा है कि मैं ही तोड़ दूँ. आज बहुत ही अच्छा चांस है, घर पर भी कोई नहीं है.

मैंने फिर सोचा कि मुझे किस बात का डर है, जब उसकी मां ही मुझसे चुद चुकी है.. तो अनुजा को चोदने में किस बात का डर है. बस डर इस बात का था कि मेरे बड़े चाचा को पता न चल जाए. यदि अनुजा अपना पापा से कुछ न कह दे.

कुछ देर बाद मैं अनुजा के रूम में गया, तो मैंने देखा कि उसके कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था. अनुजा नहाकर अपने बालों को सुखा रही थी. उसने नीचे पेन्टी भर पहनी थी और ऊपर से एकदम नंगी थी.

उसका ये रूप देखकर मेरा लंड अंडरवियर में ही हिलोरें मारने लगा. जब उसकी नजर मेरे पर पड़ी, तो तुरंत ही अपनी चुचियों को तौलिये से ढक लीं और शर्म के मारे अपनी आंखें बन्द करके अपना सर नीचे झुका लिया. मैंने तुरंत ही दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.

वो घबरा कर बोली- भैया ये दरवाजा क्यों बन्द कर रहे हो?
मैंने कहा- तुम्हारा भैया अब तुमसे प्यार करेगा … और प्यार तो बन्द दरवाजे में ही होता है न.
वो चुप रही.

मैंने अँधेरे में तीर चलाते हुए कहा- मैं यह भी जानता हूँ तुम्हारे और अंश के बीच में क्या चल रहा है.
ये बातें सुनकर डर गई.
मैंने तो अंधेरे में तीर मारा था, जो सही निशाने में लग गया.
Congratulations for new story.plz continue
 
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