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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

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  • 1) Have a thriller part

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Rajizexy

Punjabi Doc💊
Supreme
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354
42nd Update (घर की खुशियाँ जारी)


ऐसे ही मस्ती में दिन गुज़रते रेहते है जहां सब मस्ती में रहते है. लता भी अब इस परिवार में एक तरह से जुड़ ही गयी थी. ..थोड़े दिन बाद उनके घर में फ़ोन आता है.....

अब आगे..

थोड़े दिन बाद उनके घर में फ़ोन आता है..... जब फ़ोन की घंटी बजती है तो कविता देखती है की वो कॉल मीना का था. वैसे मीना बहुत काम ही फ़ोन पे बात करती थी... तो जब मीना का फ़ोन आता है तो कविता को लगता है की फिर कुछ समस्या आ गयी है. कविता वो कॉल लेती है.

कविता: बोल बेटी क्या हाल है? कैसे फ़ोन किया? सब ठीक तो है ना?

मीना: हाँ माँ सब ठीक है. एक बात बतानी थी... या कहूँ तो खुश खबर देनी थी. कविता को लगता है की जो वो सोच रही है शायद वो ही बात है फिर भी वो मीना से ही पूछती है की क्या खुश खबर है.

मीना: माँ आप नानी बनने वाली हो. कल ही मैंने यहाँ डॉक्टर के पास गयी थी और उन्होंने बताया है की मैं पेट से हूँ और जल्दी ही माँ बन जाऊँगी. मीना की ये बात सुनते ही वो वसु को आवाज़ देती है जो अपने कमरे में आराम कर रही थी.

कविता: वसु जरा यहां जल्दी आना. वसु कविता की बात सुनकर जल्दी से उसके पास आती है और पूछती है की वो क्यों चिल्ला रही है और बात क्या है? कविता कुछ नहीं केहती और वसु को फ़ोन देती है.

वसु: किसका फ़ोन है?

कविता: तुम ही बात कर लो. वसु फ़ोन लेकर दूसरी तरफ से मीना की आवाज़ सुनती है और पूछती है की क्या बात है.

मीना: माँ जी आप दादी बनने वाली हो. मीना की बात सुनकर वसु भी एकदम खुश हो जाती है और केहती है: बेटा तुमने तो बहुत अच्छी खबर दी है. अपना ख्याल रखना और मैं तो केहती हूँ तुम भी यहां आ जाओ. तुमको भी थोड़ा आराम मिल जाएगा. मैं मनोज से बात करती हूँ और उससे केहती हूँ की तुम्हे यहां छोड़ जाए.

मीना: आप सही कह रही हो मा जी मैं भी वहाँ रह कर ही अपने बच्चे को इस दुनिया मैं लाना चाहती हूँ.

वसु: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. अपना ख्याल रखना और मैं जल्दी ही मनोज से बात करती हूँ और दीपू को भी ये खुश खबर देती हूँ.

इतने में दिव्या, निशा और लता भी आ जाते है और वो भी उनकी बात सुनकर बहुत खुश हो जाते है और वसु जब मीना से बात कर रही होती है तो दिव्या वसु से फ़ोन छीन कर मीना से बात करती है और उसे भी बधाई देते हुए वहाँ उनके पास आने को केहती है.

निशा भी एकदम खुश हो जाती है और कविता को गले लगा कर... जल्दी ही नानी बनने की बधाई और वसु को भी गले लगा कर उसे भी बधाई देती है.

वसु: ये तो ठीक है लेकिन और ऐसा कहते हुए वो दीपू को फ़ोन करती है. जब वसु दीपू को फ़ोन करती है तो दीपू अपने काम में बिजी रहता है तो ऋतू फ़ोन उठाती है.

वसु: दीपू कहाँ है?

ऋतू: वो थोड़ा बाहर गया हुआ है काम से. बोल क्या हाल है तुम्हारा?

वसु: लगता है तुम तो हमें भूल ही गयी हो. निशा को तो घर भेज दिया. तुम क्यों नहीं आयी?

ऋतू: मैं भी आना चाहती थी लेकिन काम था तो नहीं आयी. मैं कुछ ही दिनों में तुम्हारे घर आती हूँ.

वसु: जल्दी आना... हमें भी अच्छा लगेगा. जब दीपू आ जाए तो उसे फ़ोन करने को कहना.

ऋतू: ठीक है कह देती हूँ. फिर निशा वसु से फ़ोन लेती है और आँखों से केहती है की वो ऋतू से बात करना चाहती है. वसु निशा की बात समझ जाती है और निशा ऋतू से बात करने लगती है.

जब निशा ऋतू से बात कर रही होती है तो बगल में कविता को चक्कर आ जाता है और वो अपने आप को संभालते हुए सोफे पे बैठ जाती है. सब लोग कविता को ऐसा सोफे पे बैठते हुए देखते है तो दिव्या जल्दी से किचन में जा कर पानी लाती है.

निशा भी कविता को परेशानी में देखती है और ऋतू से कहती है की वो थोड़ी देर बाद फिर से बात करेगी और फ़ोन काट देती है और कविता के बगल में बैठ कर उससे पूछती है की उसे चक्कर क्यों आया है.

वसु: क्या हुआ? ऐसे क्यों बैठ गयी?

कविता: पता नहीं वसु थोड़ा चक्कर से आने लगा और मैं गिरने वाली थी तो अपने आप को संभाल कर सोफे पे बैठ गयी.

वसु ये बात सुनकर थोड़ा घबरा जाती है और केहती है की एक बार डॉक्टर के पास चले जाओ. कविता मानती नहीं तो वसु भी नहीं मानती और लता और दिव्या को बोलकर वो उसे डॉक्टर के पास ले जाते है और वसु फिर से दीपू को फ़ोन करती है. दीपू ऑफिस वापस आ गया था और वो वसु को फ़ोन करने ही वाला था की वसु उसे फ़ोन कर देती है.

वसु: तू कहाँ गया था?

दीपू: मा में अपने काम से थोड़ा बाहर कोई ग्राहक से मिलने गया था. बोलो क्या हुआ?

वसु: लगता है की कविता की तबियत थोड़ी ठीक नहीं है. लता और दिव्या उसे डॉक्टर के पास ले गए है. तू भी एक बार चला जा.

दीपू: मैं अभी जाता हूँ माँ और फिर फ़ोन को कट करते हुए ऋतू को बताता है की कविता की तबियत ठीक नहीं है और वो हॉस्पिटल जा रहा है.

ऋतू भी थोड़ा घबरा जाती है और केहती है: तुम जाओ... मैं यहां देख लूंगी. अगर ज़रुरत पड़े तो मुझे फ़ोन करना. मैं आ जाऊँगी.

दीपू: ठीक है आंटी. मैं जाकर देखता हूँ की वो कैसी है और दीपू भी हॉस्पिटल की तरफ निकल जाता है.


हॉस्पिटल में:

लता और दिव्या कविता को एक लेडी डॉक्टर के पास ले जाते है. डॉक्टर कविता को चेक करती है और पूछती है की इनके पति कहाँ है?

दिव्या और लता एक साथ: क्यों क्या हुआ? कविता ठीक तो है ना?

डॉक्टर: घबराने की कोई बात नहीं है. एक खुश खबर है की वो पेट से है और जल्दी ही माँ बनने वाली है.

डॉक्टर की ये बात सुनकर दोनों लता और दिव्या एक दुसरे को देख कर एकदम खुश हो जाते है और बगल में बैठे कविता को देखते है तो वो शर्मा कर अपना सर नीचे कर लेती है और हस्ते रहती है.

डॉक्टर: इनका पति कहाँ पर है?

दिव्या फिर से दीपू को फ़ोन करती है और डॉक्टर से केहती है की वो रास्ते में है और जल्दी ही यहां आ जाएंगे. दोनों फिर कविता के पास जाकर उसको गले लगा लेते है और दोनों उसे बधाई देते है.

थोड़ी देर में दीपू भी वहाँ आ जाता है और पूछता है की कविता की तबियत कैसी है. डॉक्टर उसके देख कर केहती है की कोई परेशानी नहीं है बल्कि खुश खबरि है की वो जल्दी ही माँ बनने वाली है और वो उनका अच्छे से ख़याल रखे ताकि बच्चा भी अच्छा पैदा हो. दीपू डॉक्टर की बात सुनकर एकदम खुश हो जाता है और फिर अपने आप को संभालते हुए, क्यूंकि वो सब हॉस्पिटल में थे, कविता के पास जाकर उसको गले लगा लेता है और धीरे से कान में कहता है बधाई हो. मुझे फिर से बाप बनाने के लिए.

कविता शर्मा जाती है और देखती है की डॉक्टर लता और दिव्या से कुछ बात कर रहे है तो कविता भी धीरे से कान में केहती है: तुम तो और भी बहुत बच्चों के बाप बनने वाले हो.

और वो दीपू की आँखों में देख कर मुस्कुरा देती है. दीपू कविता को देखता है तो वो चुप रहने को केहती है. दीपू फिर डॉक्टर के पास जाकर कविता के बारे में बात करता है. डॉक्टर भी उसे अपनी पत्नी का अच्छे से ख़याल रखने को कहता है और फिर सब अपने घर के लिए निकल जाते है.


घर में:

जब सब घर वापिस आते है तो वसु और निशा उन तीनों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे की कविता को कुछ हुआ तो नहीं और उसकी तबियत कैसी है.

कुछ देर बाद जब सब घर आते है तो सब से रहा नहीं जाता और पूछते है की कविता तो क्या हुआ है.

दिव्या: इतनी भी जल्दी क्या है दीदी थोड़ा हमें सांस तो लेने दो. फिर निशा उन सब के लिए पानी लाती है और निशा दीपू से पूछती है की कविता तो क्या हुआ है. दीपू कुछ बोलने से पहले ही दिव्या बोल देती है.... आज तो बड़ा ख़ुशी का दिन है. कविता भी प्रेग्नेंट है और वो भी तुम्हारी तरह जल्दी ही माँ बन जायेगी और दीपू तीसरी बार बाप बनने वाला है. जब दीपू तीसरी बार की बात सुनता है तो वो दिव्या से कहता है तीसरा कैसे?

दिव्या फिर कविता की तरफ देखती है तो कविता शर्मा जाती है और कहती है: सुबह ही मीना का फ़ोन आया था. वो भी पेट से है और माँ बनने वाली है और एक तरह से तुम तीसरी बार बाप बनने वाले हो. इस बात को सुनकर दीपू भी बहुत खुश हो जाता है और कविता को अपने गले लगा लेता है और कहता है तुमने तो आज सच में बहुत अच्छी खबर दी है.

वसु कविता को देखते हुए:अब तुम्हे भी आराम की ज़रुरत है और दीपू की तरफ देख कर हस देती है. फिर सब थोड़ा आराम कर के अपने कमरे में जाने लगते है.

दीपू फिर कविता को आँखों से इशारा करता है और कविता चुपके से कमरे में जाती है तो दीपू भी उसके पीछे जाता है और फिर उसका चेहरा पकड़ कर कहता हैं: तुमने तो आज सच मैं बहुत बड़ी खुसी दी है और वो कविता को चूमता है तो कविता भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.

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२ मिन बाद कविता दीपू को हटा देती है और कहती है की मैं अभी सोने जा रही हूँ. बाद में कभी प्यार कर लेना.

दीपू: बाद में तुमको बहुत मेहंगा पड़ेगा. सोच लो.

कविता फिर उसको अपनी जीभ दिखा कर चिढ़ाते हुए वहां से निकल जाती है.

दीपू फिर ख़ुशी ख़ुशी दुसरे कमरे में जाता है तो दिव्या उसके पीछे कमरे में जाती है और अंदर दरवाज़े को बंद कर के दीपू को दीवार से सटा कर पूछती है... क्यों जानू तुमने तो दीदी और कविता को प्रेग्नेंट कर दिया. मुझे भी जल्दी ही माँ बनना है और उसके लुंड को पैंट के ऊपर से मरोड़ देती है और उसे चूम लेती है.

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दीपू: जानू अगर तुम भी प्रेग्नेंट हो गयी तो फिर तुम्हारे छोटू का ख्याल कौन रखेगा. अगर तुम भी प्रेग्नेंट हो गयी तो फिर तो तुम्हारी गांड ही मारनी पड़ेगी और ऐसा कहते हुए वो दिव्या की गांड को दबा देता है. दिव्या के मुँह से सिसकारी निकल जाती है लेकिन कहती है...ना बाबा ना...अगर तुम मेरी गांड ही मारते रहोगे तो मैं झेल नहीं पाऊँगी.

दीपू: चिंता मत करो.. अगर तुम्हारी और हम सब की किस्मत अच्छी रही तो तुम को जुड़वाँ बच्चे होंगे. बोलो कैसा रहेगा?

दिव्या ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और कहती है...अगर ऊपर वाले की मेहेरबानी है तो इससे अच्छा मुझे और क्या चाहिए और ऐसा बोलकर दिव्या फिर से दीपू को चूम लेती है तो दीपू भी इस बार उसका साथ देता है और देखते ही देखते दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है और दोनों की जीभ एक दुसरे से कुश्ती करती रहती है.

दीपू भी एक हाथ से दिव्या की गांड दबाता है तो दुसरे से उसकी चूची. दिव्या दीपू को चूमते ही सिसकी लेती रहती है और ३-४ Min बाद अलग हो कर झूठे गुस्से से कहती है..तुम तो अपने हाथ को भी ठीक से रक नहीं सकते और उसको चिढ़ाते हुए कमरे से भाग जाती है.

दिव्या दुसरे कमरे में जाती है तो वहां कविता आईने के सामने खड़ी हो कर अपने आपको देखती रहती है और अपने पेट पे हाथ रख कर उसे एक सुकून सा महसूस होता है की वो फिर से माँ बनने वाली है. दिव्या कविता को ऐसे देख कर पीछे से उसे जकड लेती है और कहती है... तुमने तो आज बड़ी खुश खबर दी है. खुश हो ना? कविता पीछे पलट कर अपनी आँखों से इशारा करती है की वो बहुत खुश है तो दिव्या भी उसके होंठ चूम लेती है

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और कहती है की वो भी बहुत खुश है और उस दिन का इंतज़ार कर रही है जब वो भी प्रेग्नेंट हो जायेगी.

कविता: चिंता मत करो. वो दिन भी ज़्यादा दूर नहीं. तुमने तो देखा होगा की अपना दीपू का वीर्य कितना गाढ़ा है और जब वो तुम्हारी चूत में अपना माल डालेगा और ऐसा कहते हुए कविता दिव्या की साडी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबाती है तो तुम भी ज़रूर प्रेग्नेंट हो जाओगी और प्यार से उसके होंठ चूम लेती है.

दिव्या: मैं भी तो यही चाहती हूँ कविता.

इतने में वहाँ लता भी आ जाती है और कहती है: दोनों सौतनें क्या बातें हो रही है?

कविता: कुछ नहीं दीदी. ये पूछ रही थी की मैं खुश हूँ ना और हाँ मैं भी बहुत खुश हूँ. कविता की इस बात से लता भी उसके पास आती है और उसके होंठ चूमते हुए कहती है..आज तो सच में ख़ुशी का दिन है. जहां तुम माँ बनने वाली हो वहीँ तुम नानी भी बन जाओगी. इससे अच्छा और क्या हो सकता है.

थोड़ी देर बाद ऋतू का फ़ोन आता है निशा ऋतू का फ़ोन पे नाम देख कर दुसरे कमरे में चली जाती है बात करने के लिए. ऋतू ये पूछने के लिए की वहाँ का क्या हाल है और कविता की तबियत कैसी है.

निशा हलकी आवाज़ में: माँ आज तो इस घर में ख़ुशी का ही माहौल है. कविता भी अब पेट से है और वो भी जल्दी ही माँ बनने वाली है. ये बात सुनकर ऋतू भी एकदम खुश हो जाती है लेकिन उसे लगता है की निशा कुछ उदास है.

ऋतू: क्या हुआ बेटी तुम खुश नहीं हो क्या?

निशा: नहीं माँ मैं भी बहुत खुश हूँ की दीपू फिर से बाप बनने वाला है लेकिन... और इतना बोलकर निशा रुक जाती है.

ऋतू को एहसास होता है और वो कहती है...मैं सोच सकती हूँ बेटा तुम क्या सोच रही हो. क्या तुम भी वही सोच रही हो जो मैं सोच रही हूँ?

निशा: आप क्या सोच रही हो?

ऋतू: यही ना की इस घर में तुमसे २ गुना ज़्यादा उम्र के लोग पेट से हो गए है और तुम जो अपनी जवानी के चरम में हो और तुम्हे कोई मर्द का सहारा नहीं है....तुम्हारे साथ ऐसा क्यों. ये तो ऊपर वाले का खेल है बेटा. अगर वो चाहे तो रास्ता ज़रूर निकल आएगा. तुम चिंता मत करो. मैं जल्दी ही वहाँ आती हूँ.

जब निशा फ़ोन लेकर कमरे में जाती है तो वसु देख लेती है और चुपके से बिना किसी के दिखे निशा के पीछे चली जाती है क्यूंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था की निशा किसीके साथ अकेले में बात करी थी और कमरे के बाहर से उन दोनों की बात सुन लेती है. उसे भी बहुत बुरा लगता है और जब ऋतू और निशा की बात हो जाती है तो निशा वहीँ बिस्तर पे बैठे हुए रोती रहती है.

निशा को ऐसे रोते देख कर वसु से भी रहा नहीं जाता और वो कमरे के अंदर आकर दरवाज़े को बंद करते हुए निशा के पास आती है उसको गले लगा लेती है और उसको देख कर वसु भी रो देती है.

वसु: मैं समझ सकती हूँ बेटा तेरे मन की दुविधा. मेरे नानी बनने के समय मैं मैं फिर खुद से माँ बन रही हूँ और अब तक तुझे भी माँ बन जाना था. निशा वसु दोनों एक दुसरे की आँखों से आंसूं पोछते है और फिर दोनों में एक अनजाना सन्नाटा छा जाता है और दोनों एक दुसरे की आँखों में देखते रहते है. जुबां को कुछ नहीं कह रही थी लेकिन आँखें बहुत कुछ कह रही थी.

निशा फिर वसु के उभरे हुए पेट पे हाथ रखती है और कहती है मेरा एक और भाई या बेहन जल्दी ही आने वाला है और ऐसा कहते हुए निशा हस देती है. वसु से भी अब हसीं नहीं रुक पाती और वो भी प्यार से निशा के गाल पे हाथ रखते हुए हस देती है.


निशा का जलता बदन:

निशा अपने आग में जलती रहती है क्यूंकि हर वक़्त अब वो घर में सब को खुश देख कर ये सोचती रहती है की उसे वो ख़ुशी कब मिलेगी (सिर्फ सोचना लेकिन कोई जलन नहीं) लेकिन वो कुछ नहीं कर पाती.

एक दिन सुबह उठ कर जब वो बाथरूम जाती है तो उस वक़्त दीपू नहा रहा होता है और नहाने के टाइम वो अपने लण्ड को हिलाते रहता है. वो भी बहुत उत्तेजित में अपने लण्ड को हिलाते हुए अपनी बीवियां को सोच कर एक तरह से मूठ मार रहा था.

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अनजाने में निशा बाथरूम का दरवाज़ा धकेल कर अंदर कदम रखती है और सामने का दृश्य देख कर उसके होश उड़ जाते है. दरवाज़े के धकेल ने की आवाज़ से दीपू भी उस तरफ देखता है और जब वो निशा को डेक्था है तो उसे भी बुरा लगता है और वो तुरंत पलट जाता है और सोचता है की वो दरवाज़ा कैसे खुल गया.

दीपू: मुझे पता नहीं था की दरवाज़ा खुला हुआ है. आय ऍम सॉरी. निशा कुछ नहीं कहती और दरवाज़ा बंद कर के बाहर निकल जाती है.

निशा दीपू के खड़े और लम्बे लण्ड को देख कर और उकसा जाती है. वो दोपहर को सोते हुए दीपू के लण्ड के बारे में ही सोचते हुए अपनी चूत पे हाथ रख कर मलते हुए वो दिनेश को याद करती है और बड़बड़ाती है: क्यों मुझे छोड़ के चले गए तुम और मुझे इस जलती आग में चैन नहीं मिल रहा है. वो ये सब सोचते हुए अपनी २ उंगलियां चूत में दाल कर अंदर बाहर करते हुए अपने आप को और आग को शांत करने की कोशिश करती है लेकिन एक लम्बे लण्ड के आगे उंगलियां क्या काम आएगी….

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शाम को ऋतू वसु के घर आती है क्यूंकि जब से उसने निशा से बात किया था उसे भी उसके लिए चिंता जता रही थी. जब वो घर आती है तो वसु उसे देख कर एकदम खुश हो जाती है और उसके गले लगती है. ऋतू धीरे से कान में: बधाई हो वसु...अब तो इस घर में खुशियों की भरमार आ गयी है.

वसु: तुम ठीक कह रही हो ऋतू लेकिन मुझे निशा को लेकर चिंता हो रही है.

ऋतू: मुझे भी..इसीलिए मुझसे रहा नहीं गया और मैं आ गयी.

वसु: बहुत अच्छा किया तुमने ऋतू.

ऋतू फिर सब से मिलती है और खासकर के कविता से और उसे भी बधाई देती है. लेकिन इस वक़्त निशा वहां नहीं थी और वो कमरे में ही बैठी थी. ऋतू दीपू को भी बधाई देती है और कहती है की वो निशा से एक बार मिल कर आएगी.

ऋतू जब निशा के कमरे में जाती है तो निशा उदासी से वहां बैठी होती है. ऋतू को देख कर निशा से रहा नहीं जाता और वो उठ कर उसके पास जाती है और गले मिलते हुए रोती है.

ऋतू: चुप कर बेटी. मैं समझ सकती हूँ तेरे पे क्या बीत रही है लेकिन होनी को कोई नहीं टाल सकता. दिनेश तो तेरा पति था लेकिन वो मेरा भी बेटा था ना. अगर तू ही ऐसे रहेगी तो फिर मेरी क्या हालत है तूने कभी सोचा है. निशा को फिर ऋतू की बात भी सही लगती है और अपने आंसूं पोछते हुए दोनों ऐसे ही बाहों में खड़े रहते है. दोनों एक दुसरे की आँखों में देखते है

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और ऋतू दरवाज़े की तरफ देखती है तो वहाँ कोई नहीं था और वो अपने होंठ आगे करती है तो निशा भी समझ जाती है और वो भी अपने होंठ आगे करती है और दोनों एक प्यार भरे चुम्बन में जुड़ जाते है जैसे एक दुसरे से कह रहे हो की वो दोनों एक दुसरे के लिए है.

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२ Min बाद दोनों अलग होते है और इस बार निशा की आँखों में कोई आंसूं नहीं थे. फिर वो दोनों कमरे से बाहर आ जाते है. निशा के चेहरे पे थोड़ी हसी देख कर वसु को भी राहत मिलती है और मन में सोचती है की वो एक बार ऋतू से बात करेगी की निशा कैसे थोड़ी ठीक हो गयी है.


वसु मन में सोचती है की ऐसी क्या बात है उन दोनों में की ऋतू के आते ही निशा थोड़ी ठीक हो गयी है…
Very nice awesome update ji 💋
👌👌👌👌🌶🌶🌶💦💦
 
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