अगले दिन आशीष ओर पूनम दोनों
वापिस उदयपुर आगये थे ।
जयपुर से लौटे अब कुछ हफ्ते हो चुके थे।
घर फिर से वही था—
बच्चों की आवाज़ें,
माँ की भक्ति,
पूनम की शांत दिनचर्या।
लेकिन आशीष के भीतर कुछ बदल चुका था।
वह नहीं जानता था क्या,
पर यह ज़रूर जानता था—
कुछ ग़लत हुआ है।
आशीष का पहला शक
फैक्ट्री में एक छोटा-सा कॉन्ट्रैक्ट
अचानक हाथ से निकल गया।
कोई बड़ा नुकसान नहीं—
लेकिन टाइमिंग अजीब थी।
आशीष ने अपने मैनेजर से बस इतना पूछा,
“यह जानकारी बाहर कैसे पहुँची?”
जवाब साफ़ नहीं था।
और यहीं
आशीष ने पहली बार
चुप रहना चुना।
आदिल का असली चेहरा (पाठक के लिए)
आदिल अब जयपुर नहीं था।
वह दिल्ली में अशरफ खान के साथ बैठा था।
अशरफ खान आशीष का बिज़नेस प्रतिद्वंदी
जो किसी जमाने में नंबर 1 था
ओर उसका बिज़नेस आउट ऑफ इंडिया तक था
जिसे आशीष ने लगभग
खत्म सा कर दिया था
अशरफ ने ठंडी हँसी के साथ कहा,
“काम आसान नहीं था…
लेकिन तुमने सही जगह हाथ डाला।”
आदिल ने जवाब दिया,
“उसकी पत्नी ही उसका सबसे सॉफ्ट पॉइंट थी।”
यह वाक्य
कहानी की दिशा बदल देता है।
आदिल ने कभी पूनम से प्यार नहीं किया।
उसने भरोसे को साधा।
पूनम — अँधेरे में
पूनम को इन बातों का
एक अक्षर भी पता नहीं था।
वह अब भी
अपने फैसलों के बोझ से जूझ रही थी।
आदिल का फोन आना कम हो गया था।
मैसेज सूखे हो गए थे।
उसे लग रहा था—
शायद सब यहीं खत्म हो रहा है।
और यही
आदिल की सबसे बड़ी चाल थी।
श्रद्धा की वापसी
आशीष भी कच्चा खिलाड़ी नहीं था
उसने ऐसे ही अशरफ को बर्बाद करके
नम्बर 1 नहीं बना था
आशीष ने भी अपने कई लोग अशरफ की
टीम में लगाए हुए थे
उनमें से 1 थी श्रद्धा
श्रद्धा अशरफ खान के ca (चार्टड अकाउंट)
राज की पत्नी थी जिसे आशीष ने
अपना बना रखा था जिसकी
खबर किसीको नहीं थी
राज ओर श्रद्धा 1 महीने से फॉरेन ट्रिप
पर घूमने गए थे जो आज वापिस आए थे
मुंबई एयरपोर्ट पर
राज, श्रद्धा तुम टैक्सी लेकर घर जाना मुझे
अर्जेंट काम से कई जाना है
राज के जाने के बाद
श्रद्धा जैन किसीको कॉल करके
एयरपोर्ट से अकेले बाहर आई।
एयरपोर्ट के बाहर
आशीष खुद गाड़ी में आया था।
श्रद्धा कार में बैठते ही
श्रद्धा ने सिर्फ़ एक वाक्य कहा—
“अब समझ में आ रहा है
तुम्हारा कॉन्ट्रैक्ट कैसे डूबा।”
आशीष ने गाड़ी की रफ़्तार कम की।
बिना उसकी ओर देखे बोला—
“तो खेल शुरू हो चुका है?”
श्रद्धा ने सिर हिलाया।
श्रद्धा का खुलासा (आधा सच)
श्रद्धा ने बताया—
अशरफ खान पिछले एक साल से
आशीष की कंपनी पर नज़र रखे हुए है
अंदर की जानकारी के बिना
वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता
और अब एक नया नाम सामने आया है—
आदिल खान
आशीष ने नाम सुना।
चेहरा बिल्कुल स्थिर रहा।
“जयपुर वाला?” उसने पूछा।
श्रद्धा ने जवाब दिया,
“अशरफ का रिश्तेदार।”
यहीं
आशीष को समझ आ गया—
खेल बिज़नेस का नहीं था।
खेल घर तक लाया गया था।
आशीष का फैसला
उस रात
आशीष बहुत देर तक जागता रहा।
पूनम पास में सो रही थी।
उसके चेहरे पर वही मासूम शांति थी।
आशीष ने मन ही मन कहा—
तुमने गलती की है…
लेकिन तुम्हें सज़ा मैं नहीं दूँगा।
जो खेल खेल रहे हैं,
उन्हें ही उसी खेल में हराऊँगा।
उस रात
आशीष ने बदला नहीं चुना।
उसने रणनीति चुनी।