रेखा के भाग जाने के बाद अमित ने सीमा से पूछा दीदी ये रेखा क्या कह रही थी मेरी समझ में तो कुछ भी नहीं आया, वो बोली आप सब जानती हो आखिर बात क्या है।
सीमा : देखो अमित, मम्मी ने तुमको अपनी बेटी एक बहन के रूप में सौपी है लेकिन मैंने एक पत्नी की तरह तुमको सौंपा है और रेखा ने तुमको एक पति की तरह स्वीकार किया है, ये बात अलग है कि तुम दोनों कि शादी कभी नहीं होगी, लेकिन तुम दोनों हमेशा मेरे सामने और ज़ब भी तुम दोनों अकेले होंगें एक पति पत्नी कि तरह ही रहोगे, समझें बुद्धू, और इससे भी बड़ी एक बात और है जब रात में एक बहन ज़ब मेरे कहे अनुसार एक भाई को राखी बांधेगी तब मैं तुमको बताउंगी. चलो अब भागो यहाँ से और बाजार जाकर राखी और पूजा का सामान लेकर आओ, याद रखने रात के राखी समारोह के लिए भी तुमको राखी लाना है, कैसी लाना है ये तुम देख लेना, जल्दी आओ फिर तुम्हें आकर तैयार भी होना है।
अमित बाजार चला गया, फिर रेखा और सीमा ने मिलकर खाना बनाया, तब तक अमित भी आ गया था सामान लेकर, उसने रात के राखी समारोह कि रखियां और अन्य सामान अपने कमरे में छूपा दिया और बाकि लाकर मम्मी को दे दिया। फिर सबने मिलकर खाना खाया।
खाने के बाद मम्मी ने कहा तुम तीनों अच्छे से तैयार हो कर आओ अब राखी मनाई जाएगी।
तीनों उठकर अंदर चले तब सीमा ने अमित से कहा अमित तुम शेरवानी और पजामा पहनना लाल रंग का और रेखा मैं तुमको तैयार करुँगी।
अमित बोला ऐसा क्यों
सीमा : मम्मी पापा के सामने ये राखी का त्यौहार है मगर मेरे लिए ये तुम दोनों की शादी का बंधन है इस पूजा के बाद तुम मम्मी पापा के सामने ही शादी के बंधन में बँधोगे मगर उनकी नज़रों में भाई बहन की तरह जुड़ोगे, मैं चाहती हुँ आज तुम्हारी शादी गुपचुप तरीके से रेखा से हो. तुम क्या कहती हो रेखा रानी।
रेखा : लाजबाब भाभी, आपने जो कहा था कि आप मेरे लिए सब इंतज़ाम करोगी, मैं जान गई हुँ कि किस तरह से करोगी, अब मुझे विश्वास हो गया है कि आप मुझे खाली नहीं रखोगी सदा मेरी भरी रहेगी मैं जहाँ भी रहूं, और ऐसा कह कर उसने सीमा को गले लगा लिया और भावुक होकर सुबकने लगी, सीमा की भी ऑंखें भर आई रेखा का प्रेम और अपने प्रति विश्वास देखकर.।
अमित की समझ में कुछ नहीं आ रहा था , उसने ज्यादा जोर नहीं दिया वो तो इसी बात से ख़ुश था कि रेखा जैसी जबरदस्त माल उसको मिल रही है वो भी बिना शादी किये।
एक घंटे बाद रेखा सीमा अमित तीनों बाहर आये, अमित ने लाल शेरवानी और लाल ही पजामा मेहरून दुपट्टे के साथ पहना था, जैसे एक दूल्हा आया हो, सीमा नेवी ब्लु साड़ी नेट वाली और डिज़ाइनर ब्लाउज गहरे मेकअप के साथ बाहर आई, उसने रेखा को ग्रे कलर का दुल्हन सा लहंगा चोली और दुपट्टा पहनाया जिसका आंचल बना कर सिर पर रखा जैसे एक ट्रेडिशनल दुल्हन तैयार होती है मेकअप भी दुल्हन की तरह किया गया था, जब तीनों बाहर आये तो उनको देखकर मम्मी पापा दोनों खुश हुये, ताली बजाई, वाह क्या ही सुन्दर त्यौहार की शुरुआत है.
मम्मी बोली अरे वाह सीमा तुमने तो रेखा को कितना प्यारा सजाया है मैं तो कहती हुँ इसकी शादी में किसी पार्लर जाने की जरूरत नहीं है यौम ही सजाना, इसको देखकर कोई भी यही समझेगा कि ये दुल्हन है मगर उन्हें क्या पता ये तो अपने भाई को राखी बांधने आई है।
रेखा मन ही मन बहुत खुश थी सीमा भाभी ने अपना वादा निभाया है उन्होंने उसकी चुत की प्यास को अच्छे से महसूस किया है और मेरी ज़िन्दगी के सबसे पहले लंड को मेरे मम्मी पापा के सामने ही मुझे गिफ्ट कर रही है, मैं सीमा भाभी की पूजा करूंगी हमेशा वो भाभी नहीं मेरी माँ है मम्मी से भी बढ़कर.।
वैसे भाई बहन आमने सामने बैठकर राखी बांधते हैं मगर सीमा ने दोनों को पासपास एक पति पत्नी की तरह रेखा को अमित की दाहिनी तरफ बैठाया, मम्मी ने ये सब इतनी बारीकी से नहीं देखा, वो तो सामने बैठ कर ये सोचकर खुश थी कि रेखा को एक भाई मिल गया है, सीमा ने पीछे आकर नीचे बैठकर अमित के दुपट्टे से रेखा कि चुनरी को एक गांठ से बांधकर एक दूल्हे दुल्हन कि तरह जोड़ दिया और दोनों के बीच उनके कान में धीरे से बोली तुम दोनों के दुपट्टे मैंने जोड़ दिए हैँ शादी के जोड़े कि तरह जब उठो तो ध्यान रखना मम्मी पापा को पता नहीं चले।
इसके बाद खुद उन दोनों के सामने बैठ गई और बोली मैं बड़ी बहन हुँ चलो अमित पहले मुझे राखी बांधों,
मम्मी : हाँ ये सही बात है पहले बड़ी बहन ही राखी बंधवाएगी।
अमित ने कंकु लेकर सीमा के मस्तक पर तिलक लगाया चावल चढ़ाये फिर सीमा के हाथ पर सुंदर सी राखी बाँधी, जो बांये हाथ में बाँधी, जैसा कि बहन को बांधते हैं, इसके बाद सीमा ने अमित को राखी बाँधी।
सीमा बोली मेरा गिफ्ट
अमित ने जेब से एक सेट सोने कि पाइजेब निकाली और सीमा को दी, सीमा बहुत खुश हुई.
इसके सीमा बोली चलो अब रेखा का संस्कार करो उसका मतलब शादी संस्कार था,
मम्मी बोली हाँ बेटा ये तुम दोनों की पहली राखी है तो अब तुम राखी संस्कार संपन्न करो अमित।
सीमा अमित की साइड में जाकर बैठ गई, और बोली रेखा को तिलक लगाओ, तब अमित ने अंगूठे और ऊँगली में कुमकुम लिया और रेखा के ललाट पर लगाने लगा सीमा धीरे से बोली थोड़ा ऊपर मांग तक ले जाकर इसकी मांग भर फिर सॉरी सॉरी बोलना जोर से।
अमित ने ऐसा ही किया उसने तिलक लगाते लगाते अपने हाथ को ऊपर तक ले जाते हुए रेखा की मांग भी भर दी थोड़ी सी,
फिर जोर से बोला सॉरी सॉरी के क्या हो गया मेरा हाथ ती ज्यादा ऊपर तक चला गया।
रेखा मन ही मन समझ गई थी जरूर ये सीमा भाभी ने करवाया होगा और ये सोचकर उसके पुरे शरीर में झुंझुनी दौड़ गई और वो भाभी की चतुराई पर मन ही मन हंसी और सोचने लगी कितनी चतुराई से मम्मी पापा के सामने अमित से मेरी मांग भरवा दी और पीछे दोनों की जोड़े वाली गांठ भी बांध रखी है सही मायने में ये तो हमारी शादी ही करवा रही है.
तभी सीमा झटके से उठी और बोली अमित तू क्या पागल है इतना बड़ा टीका भी भला कोई लगाता है बुद्धू, और पास पड़े कपडे से मांग में लगे कुमकुम को पोंछने दौड़ी, तभी मम्मी बोली अरे कोई बात नहीं सीमा रहने दे अभी बाद में साफ कर लेगी रेखा अभी उसका इतना सुन्दर चेहरा ख़राब ही जायेगा, उस बेचारी को क्या पता कि ये सोची समझी पूजा हो रही है,
सीमा पीछे हट गई और दोनों को देखकर आंख मारी और बोली चलने दो,
अब सीमा ने रेखा का सीधा हाथ आगे बढ़ा कर अमित से कहा राखी बांधों, ये हाथ अक्सर पति उपयोग में लाते है पत्नी को लच्छा यानी पूजा का धागा बांधने के लिए, अमित भी रेखा के लिए राखी के बजाय लव band जैसा धागे से बना band लाया था उसे पता था वो रेखा बहन को नहीं रेखा लवर रेखा रानी रेखा जान को ये बाँधने वाला है, मम्मी को कुछ अंदाजा नहीं था ये लोग क्या कर रहे हैँ वो तो यही समझ रही थी कि राखी बाँधी जा रही है।
अब अमित ने बहुत प्यार से बहुत प्रेमी वाले भाव से रेखा का हाथ अपने दोनों हाथों में लिया धीरे से दबाया और रेखा की आँखों में देखा दोनों की आँखों में असीम प्यार था रेखा की आँखों में थोड़ी नमी थी अपनी शादी का अहसास, जो अमित ने देखा और सीमा ने भी देखा, सीमा ने रेखा का दूसरा हाथ पकड़ा और बोली बेटी रेखा ये बंधन जन्मों जन्म का बांध रही हो, अगर अभी भी कोई हिचक कोई शंका मन में हो तो मत बंधावाओ ये बंधन, फिर मम्मी से बोली क्यों है ना मम्मी जी,
मम्मी बोली बेटी रेखा देख ले, वैसे मुझे तो पूरा विश्वास है अमित तेरा ज़िन्दगी भर साथ देगा फिर भी तू देख जैसा तेरा मन हो,
ये सुनकर रेखा सच में रो पड़ी पहले अमित को देखा फिर उससे पूछा मेरा साथ दोगे न अमित कभी छोड़ोगे तो नहीं, और रोती हुई सीमा के गले लग कर बोली भाभी आपने सही चुना है बंधवा दीजिये,
सीमा अमित से बोली देख कभी तूने मेरी बेटी को दुखी किया इसको भूखा या दुखी रखा तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा कसम है तुझे,, इसके सुसराल जाकर भी इसकी सेवा करनी पड़ेगी बोलो मजूर है
अमित बोला जी दीदी मंजूर है।
सीमा बोली तो पक्का करो सम्बन्ध
अमित अब संयत हो चुकी रेखा की आँखों में देखते हुये उसको प्रेम बंधन बांधने लगा जिसे मम्मी पापा राखी समझ रहे थे.
राखी बांधने के बाद अमित शांत बैठा रहा तब रेखा बोली अच्छा मेरा गिफ्ट कहाँ है तब अमित ने जेब से एक सोने की चैन सी निकाली जो दिखने में तो चैन जैसी थी मगर उसमें दो काले मोती भी थे जो उसे मांगकसूत्र बना रहे थे, सीमा की नज़र ने भाँप लिया था कि अमित मंगलसूत्र लाया है वो रेखा को देने लगा तब सीमा बोली इतने प्यार से लाया है तो पहना भी दे, क्यों है ना मम्मी।
मम्मी बोली हाँ बेटा पहना दे अपनी बहन को, तब अमित हाथ बढ़ा कर उसे खोल कर फिर फिर रेखा के गले में लपेट कर हाथ पीछे लेजाकर वो मंगलसूत्र रेखा को पहना दिया और धीरे से मुंह रेखा के कान के पास ले जाकर कहा शादी मुबारक रेखा रानी मेरी जान.
अब सीमा दोनों के पीछे आकर उनकी जोड़े कि गांठ को अपने हाथ में छुपाकर बोली दोनों उठो और मम्मी पापा का आशीर्वाद लो पहली पूजा का।
दोनों धीरे से उठ खड़े हुये और धीरे से इस तरह साथ साथ चलकर आगे बढे कि पीछे लगी गंठान मम्मी पापा को दिखाई न दे, और झुक कर दोनों के प्रणाम किया।
तब सीमा बोली, चलो संस्कार सानंद सम्पन्न हुआ दोनों जोड़े को बहुत बहुत मुबारक और गांठ धीरे से खोल कर अलग कर दी।