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Incest मुहबोला बेटा से प्यार पार्ट1

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Raaj Avani

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wonderful bhai...jo ki part 2 start kiya...waiting for next hot update as well.

Raaj Avani
 
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Raaj Avani

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मुंहबोला बेटा से प्यार। S2
Update 03

आज सुबह से ही शादी की तैयारी चल रही थी। सुनीता पूरी तरह से बन ठन कर तैयार थी और अपनी बेटी को भी तैयार कर लिया था क्योंकि आज उसकी बेटी की शादी थी?

सुनीता अपने परिवार के साथ मैरिज हॉल पहुंच गयी।

मैरिज हॉल उधर के परिवार वाले भी आ चुके थे।

परिचय।
सौम्या का होने वाला पति- विजय(28)।
विजय के बड़े भाई -विक्रम(30)।
विजय की भाभी- सोनिया(27)।
सोनिया के बच्चे-आयान(8) , अंजलि(6) , अंशु(5)।
विजय का बाप- रामाधार(65)
विजय की माँ नहीं है।


शादी विवाह की सारी रस में शुरू हो चुकी थी सभी लोग बिजी हो चुके थे।

सुनीता अपनी बेटी की शादी में पूरी तरह से मग्न हो चुकी थी लेकिन उसको देखने वाले नजरे कई ओर से उसे ताड़ रही थी।

विक्रम के तो नजर सुनीता से हट ही नहीं रही थी तो वहीं विजय के दोस्त लोग भी सुनीता को ही ताड़ रहे थे।

उसी में से एक दोस्त ने सुनीता के पास जाकर उसे सुनते हुए विजय से बोल यार तुम्हारी तो कोई सालिया ही नहीं है हम लोग मजाक किससे करेंगे।

तब विजय अपनी सास सुनीता को देखते हुए बोलता है यार जिसकी सासु माँ इतनी सुंदर हो उसे सालिया की क्या जरूरत है?

सुनीता यह सुनकर शर्मा जाती है और मुस्कुराने लगती है।

सुनीता को मुस्कुराता देख विजय के दोस्त बोलते हैं यार यह तो लगता है कि सेट हो जाएगी चलो सालिया ना सही आज हम तुम्हारी सास को ही पटा लेते हैं।

उनकी बातें सुनकर सुनीता की आंखे फटी की फटी ही रह गई।

की तभी वहां आकाश आ गया और विजय के दोस्त साइड हो गए सुनीता से उसको कुछ काम था तो सुनीता के अपने साथ लेकर चला गया।

इसी तरह से चल रहा था और शादियां हो गई और विदाई का वक्त हो चुका था।

विदाई करते वक्त सुनीता की आंखें बिल्कुल नम हो चुकी थी वही सौम्या भी पूरी तरह से भावुक हो चुकी थी आकाश भी भावुक था और अशोक भी अपने कलेजे को संभाल कर रखे हुए थे।

विदाई कर दिया गया विदाई के साथ ही आकाश को भी अपनी बहन का ध्यान रखने के लिए कुछ दिन के लिए उसके साथ उसके ससुराल में भेज दिया गया अब घर पर सिर्फ सुनीता और उसके पति अशोक ही बचे हुए थे?

इधर सौम्या के ससुराल में सौम्या जैसे ही पहुंची विजय की भाभी ने उसकी आरती उतारी और उसे घर में बुला ली।

सारे रसमौरी बज हुआ और सौम्या को उसके हनीमून वाले रूम में ले जाकर बैठा दिया गया।

आकाश अपने दीदी के साथ ही था तब उसे रोकते हुए भाभी बोली- क्यों आकाश जी आप भी अपने दीदी के साथ हनीमून वाले रूम में जाओगे क्या और सब हंसने लगी?

आकाश बेचारा शर्मा गया और वहां से जाने लगा तब विक्रम बोले- अरे क्यों हमारे साले साहब को इतना परेशान कर रही हो लिए साले साहब चलिए मैं आपके गांव घुमा लाता हूं?

रात का समय हो चुका था विक्रम और आकाश गांव घूमने के लिए निकल गए और विजय का आज तो सुहागरात था तो वह अपने सुहागरात की तैयारी में लगा हुआ था कि उधर इसके दोस्त विजय से बात कर रहे थे कि यार आज तो तुझे मैदान-ए-जंग में जाना है आज पूरा झंडा घर के आना।

विजय बोलता है कि हां हां एकदम झंडा गढ़ के आऊंगा और इसका सबूत तो 9 महीने बाद ही दिखेगा एकदम फसल लहर जाएगा।

और सब खूब जोर से हंसने लगे तभी दूसरा दोस्त बोला अरे सारी बातें यही कर लेगा या जाकर कुछ वहां भी करेगा। और नहीं तो बोल भाभी जी का उद्घाटन हम ही कर देंगे और खूब हंसने लगे तभी विजय गुस्सा हो गया।

खबरदार अगर मेरी बीवी के बारे में कुछ भी बोला तो।

तब विजय के दोस्त बोलते हैं अरे यार हम लोग तो मजाक कर रहे थे तू तो बुरा मान गया चला जा अब जाकर अपनी बीवी के साथ सुहागरात मना और खूब हंसने लगे।

विजय अपने बीवी के रूम में चला जाता है देखता है कि सौम्या घूंघट ओढ़े बिस्तर पर बैठी हुई थी।

विजय एक गुलाब का फूल लेकर सौम्या के पास जाता है और उसके घूंघट को प्यार से उठाकर उसके उसके चेहरे को ऊपर करके उसे गुलाब का फूल दे देता है।

सौम्या मुस्कुरा कर गुलाब का फूल ले लेती है।

सौम्या को गुलाब का फूल देते हुए विजय ने उसके हाथ को पकड़ने की कोशिश की परंतु सौम्या ने बड़ी चालाकी से अपनी हाथ को पीछे खींच ली थी।

इस पर विजय भी हार न माना और वह सौम्या को मुंडी को ऊपर किया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख किस कर दिया।

सौम्या पूरी तरह से शर्मा गई फिर विजय यहां तक नहीं रुक वह उसके होंठ पर फिर से किस किया और फिर से किस करते हुए उसे बिस्तर पर लेटा दिया सौम्या भी अब अपने आप को उसके हवाले कर चुकी थी।

सौम्या और पूरी तरह से विजय के बाहों में जकड़ी हुई थी और विजय उसे पर अपने चुंबन की बरसात कर रहा था।

धीरे-धीरे दोनों मदहोश होने लगे और मदहोशी में एक दूसरे के कपड़े निकालना शुरू कर दिए।
ज्यादा देर नहीं लगी दोनों कुछ ही देर में एक दूसरे के बाहों में नंगे लेटे हुए थे।

विजय बोल यार तुम्हारी तो खूबसूरती देखकर मेरा तो है पूरी तरह से टाइट खड़ा है इसे अंदर ले लो जल्दी से वरना यही फट जाएगा।
विजय की बात सुनकर सौम्या मुस्कुराने लगी और विजय रुका नहीं उसने सौम्या के मुस्कुराता चेहरा को अपने होठों से होंठ मिलकर किस करना शुरू किया और फिर उसके दोनों स्तन को दबाने लगा।

स्तन जैसे ही विजय की मुट्ठी में आई विजय सिहर उठा उसे लगा जैसे स्वर्ग उसके हाथ में स्वर्ग लग गई हो वह उसे बड़े प्यार से सलाहकार दबा रहा था और सौम्य बेचारि आँखे बंद करके मदहोशी में विजय के बाहों में खो गयी थी।

सो मैं अपने बॉयफ्रेंड से तो कई बार छोड़ चुकी थी पर अपने पति के सामने वह बिल्कुल भी अनजान लग रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसका सही में आज पहली रात हो और वह पहली बार चुद रही हो।

विजय से अब रुक ना गया वह सौम्या के दोनों पैर को फैलाया और अपने लंड को ठीक उसके बुरे पर सेट किया और धीरे-धीरे नीचे उतरना शुरू किया।

जैसे-जैसे लन्ड सौम्या के बुर के अंदर जाता है वैसे-वैसे सौम्या की आवाज़ तेज हो रही थी।

बाहर का माहौल एकदम शांत पड़ा हुआ था तो सौम्या की आवाज बाहर भी थोड़ी बहुत आ रही थी जिसे विक्रम आते ही सुन लिया और आकाश भी विक्रम के साथ ही था उसने भी आवाज को सुना।

विक्रम ने आकाश से कहा देख रहे हो साले साहब तुम्हारी दीदी कितनी मधुर आवाज में गा रही है।

आकाश इस बात को समझ जाता है और वह शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगता है कि तभी एक और मादक आवाज आती है।

आह मारर गयी।
विजय सौम्या के बूर में अपना लंड को उतर चुका था सौम्या भी ऐसी एहसास पहली बार पा रही थी वह अपने पति के बाहों में खो गई थी उसके लंड को अंदर लेकर पूरी तरह से जैसे स्वर्ग में उतर आई हो।

सौम्या मदहोशी में काफी मादा का आवाज निकल रही थी जो बाहर आकाश और विक्रम के कानों में पड़ रही थी। आकाश वहां से जाना चाहता था पर विक्रम उसे नहीं जाने दे रहे थे बोल रहे थे थोड़ा देर और यह सुरीली गानों को सुनते हैं ना रुको ना साले साहब।

की तभी अंदर से विक्रम की बीवी सानिया निकाल कर आती है और बोलती है आप लोग वहां क्या कर रहे हैं अभी तक खाना भी नहीं खाया है चलिए छत पर मैं खाना लेकर आता हूं आप लोगों के लिए? और इधर-उधर का माहौल इतना गम था कि बाहर की आवाज सुनकर बेचारी विजय की भाभी भी एकदम कामुक होने लगी थी वह खाना तो निकाल रही थी पर वह भी मदहोशी हो चुकी थी।

सानिया अपने पति और आकाश को खाना खिलाई और सोने को बोल दिया आकाश का बिस्तर छत पर ही लगा था जबकि सानिया अपने पति को बोली कि आप आ जाएगा जल्दी से।

जैसे ही सानिया रूम में पहुंची थोड़े ही देर में आकाश को वहां सोनी को बोलकर विक्रम नीचे आया और सानिया को बाहों में पकड़ कर उसे चूमना शुरू कर दिया।

इधर अभी चुदाई थमी नहीं थी अभी धक्को की बरसात शुरू हुई हुई थी बेचारा विजय जोर-जोर से सौम्या को चोद रहा था सौम्या बेचारि आँखे बंद करके विजय के गालो को चूमती तो कभी बालों को सहलाती तो कभी उसके होठों को चुम्मा लेती।

और इधर दूसरे रूम में विक्रम भी अपने बीवी के सारे कपड़े उतार कर उसके होठों को चूमते हुए उसके बुरे तक पहुंच गया और टांगों को फैला कर बूर में मुंह लगाकर चूसना शुरू कर दिया सानिया बेचारी इस चुसाई से पागल हो रही थी।

इन लोगों की ऐसे ही रात भर चुदाई चलती रही और बेचारा आकाश छत पर तड़पता हुआ सोता रहा।

सुबह हुई तब विक्रम आए और आकाश का हाल-चाल पूछने लगे- और साले साहब रात कैसी कटी।
तब आकाश बोल- अब आप जैसा मौज थोड़ी है बड़े जीजा जी।

तब विक्रम हंसते हुए बोले- तब आप अपनी दीदी के साथ क्यों नहीं सो गए थे मजा आ जाता आपको भी?

बेचारा आकाश यहां पर झेप गया और शांत बैठा रहा।

तभी विजय आया और बोला अरे साले साहब आप चलिए मेरे साथ थोड़ा बाजार आपको घुमा लाता हूं और आकाश विजय के साथ बाजार चला गया।

तब किचन से चाय लेकर सौम्या बाहर आती है और विक्रम को देती है।

तभी विक्रम की बीवी सानिया सौम्या को बोलती है- थोड़ा ध्यान से देवरानी जी आपके जेठ बड़े वो हैं देखना कुछ कर न दे और हंसने लगती है सौम्या भी बेचारी मुस्कुराने लगती है और विक्रम तो जैसे सौम्या से उनकी नज़रें ही नहीं हट रही थी।

तभी घर में राम आधार की एंट्री होती है और सभी लोग शांत हो जाते हैं विक्रम अपने काम से निकल जाते हैं बाहर और सौम्या किचन में भाग जाती है ।

तब सानिया भी किचन में जाकर बोलती है अरे देवरानी जी बाबूजी से क्यों शर्माना।
उन्हें भी आप चाय दे कर आइये।
तब सौम्या बड़ी हिचकती हुई चाय देने चली जाती है?

सौम्या जैसे ही चाय देने के लिए झुकती है रामाधार की नजर सौम्या पर पड़ती है रामाधार की तो जैसे सांस ही रुक जाती है कई साल से बेचारे मन महसूस कर अकेले सोया करते थे आज पहली बार किसी को देखकर उनके मन में फिर से वासना उठ चुकी थी ।

सौम्या की ऊपर की दूध हल्की-हल्की दिखाई दे रही थी जिसे देखकर रामआधार की आंखों में चमक आ चुकी थी।

रामआधार अपने बहू को इस तरह देखकर थोड़ा सा खींझ गये और उन्होंने अपनी नज़रें झुकी और चाय को उठाकर चुपचाप पीने लगे।
सौम्या भी अपनी गान्ड मटकाती हुई किचन मे चाली आई।

धन्यवाद आंत तक बने रहने के लिए।मिलते है अगले भाग मे।
 
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Raaj Avani

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Update 04

अब तक आपने पढ़ा की सौम्या अपने ससुराल में आ चुकी थी और अपने पति के साथ हनीमून मना चुकी थी उसके बाद सुबह-सुबह चाय अपने ससुर को देखने गई जब ससुर ने सौम्या को देखा तो उसे देखते ही उसकी वासना भड़क उठी थी और तभी सौम्या भी अपनी गांड मटकती हुई वहां से किचन में चली आई थी।
अब आगे।

सौम्या जैसे ही किचन में पहुंच गई तभी उसे सानिया बोलती है क्या बात है मेरी देवरानी तुम्हें तो आज बाबूजी देखकर गदगद लग रहे हैं?

तब सौम्या कहती है क्या बोल रही हो भाभी?

तब सानिया बोलती है अरे मेरी देवरानी आज देखी नहीं बाबूजी को मैं तो रोज ही चाय देता हूं इस तरह तो कभी नहीं देखे थे आज देखो किस तरह तुम्हें भूखी नजरों से देख रहे हैं लग रहा है मेरे देवर के साथ-साथ तुम्हें आज ससुर का भी मिलने वाला है और हंसने लगती है।

सौम्या शर्मा जाती है बोलती है कैसी बात कर रही हो भाभी मेरे पिता समान है मैं उनके साथ यह सब सोच भी नहीं सकती।

तब सानिया बोलती है अरे पिता समान हो या पिता हो अगर दे रहा है तो तुम्हें लेने में क्या जाता है मेरी देवरानी जाकर ले लो ना मैं तो आज तक तरसती रह गई ना मुझे देवर का मिला और ना ही मुझे मेरे ससुर का मिला केवल पति का लेकर अब तक मैं थक रही हूं?

तब समय भी खुश होती है और खुश होते हुए कहती है भाभी तो चलो आज मैं आपको आपके देवर की दिलाए देता हूं आप भी क्या याद रखेंगे?

तब सानिया बोलती है अच्छा ठीक है देख लूंगी देवर का बाद में दिलाना पहले अपने भाई का दिया तो बड़ा मस्त लौंडा है।

तब सौम्या शर्मा जाती है और बोलती है दर्द भाभी अब मेरे भाई पर बुरी नजर ना डालो वह बेचारा अभी बहुत बच्चा है।

तब सानिया बोलती है अरे वह भले ही बच्चा होगा मैं कल देखी थी किस तरह वह मेरे दोनों स्तनों को घर रहा था वह बच्चा है लेकिन उसका औजार आदमी जैसा हो गया होगा।

और दोनों खूब हंसने लगती है।

तभी बाजार से विजय और आकाश वापस आ जाते हैं और आकाश आते ही घर में चला जाता है और विजय जाकर सौम्या को अपने बाहों में पकड़ लेता है और किस करने लगता है तब सौम्या बोलती है अरे छोड़िए ना क्या करते हैं मेरा भाई अभी यहीं पर है?

तब विजय बोलता है तो क्या हुआ मैं अपने बीवी के साथ कुछ कर भी नहीं सकता क्या?

तब सौम्या बोलते हैं आप अपने बीवी के साथ जो मर्जी हो करिए मगर उसकी भी तो मैं बहन हूं उसके सामने तो कम से कम मत करिए।

तब विजय सौम्या को छोड़ते हुए बोलता है अच्छा बाबा ठीक है मैं नहीं करता जब वह चल जाएगा उसके बाद मैं तुम्हें खूब प्यार करूंगा।

तब आकाश सौम्या के पास आता है और बोलता है दीदी मुझे घर जाना होगा बहुत दिन हो गए यहां पर आए हुए।

तब सौम्या बोलती है अच्छा बच्चे अभी कल ही परसों तो आया था और तुम्हें बहुत दिन हो गए।

तब आकाश बोलता है दीदी बात को समझो वहां पर मां अकेली होगी पिताजी भी अब जाने वाले हैं विदेश।

क फिर सौम्या बोलती- अच्छा ठीक है चले जाना पहले हाथ मुह धो लो और खाना खा लो उसके बाद सबसे मिल लेना और चले जाना जहां जाना होगा।

तब सौम्या के गले लग जाता है आकाश और उसके गाल पर एक हल्की सी किस कर देता है।

फिर खाना-वाना होता है उसके बाद आकाश सभी से मिल लेता है और फिर वह घर के लिए निकल जाता है।

सौम्या अपने भाई के जाने से थोड़ी सी उदास हो गई थी कि उसकी उदासी दूर करने के लिए विजय आया और उसे अपने बाहों में पकड़ कर किस करने लगा।

थोड़ी ही देर में माहौल रोमांटिक हो गया और विजय सौम्या को बाहों में उठाकर कमरे में लेकर चला गया और कमरे का दरवाजा बंद हो गया।

इधर सानिया भी इस बात को समझ गई थी और अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी।

बाबूजी इस बात को देखकर तो ताड़ रहे थे कि यह दोनों एकदम बेशर्म हो गए हैं मेरे सामने ही अंदर जाकर दरवाजा बंद कर दिए।

दरअसल रामआधार केले की खेती करते थे वह दिन भर केले की खेत नहीं रहते थे खाने के समय केवल घर आते थे कभी-कभी सोनिया उन्हें खाना देने के लिए खेतों पर जाया करती थी।

थोड़ी ही देर में अंदर से मादक आवाज से आना शुरू हो गई की राम आधार वहां से तुरंत अपने खेत के लिए निकल गया और विक्रम सानिया के साथ फिर से वह भी शुरू होने लगा।


अब सुनीता के घर की तरफ
अशोक जल्दी-जल्दी से अपने बैक पैक कर रहे थे सुनीता उनकी मदद कर रही थी कि तभी आकाश वहां पर पहुंच गया।

जैसे ही आकाश घर पहुंच सुनीता और अशोक दोनों ने अपने बेटे को गले लगा लिए।

उसे सौम्या के ससुराल का समाचार लेने लगे।
तब सुनीता बोली -अरे इसे खाने भी दीजिए केवल आप समाचार ही पूछते रहेंगे क्या?

तब आकाश बोला अच्छा पिताजी आप कहां जाने की तैयारी कर रहे हैं?

तब सुनीता बोली अरे बेटा यह कहीं नहीं जाने वाले यह अभी पटना जा रहे हैं इनकी थोड़ी सी वहां काम आ गई है विदेश जाने के लिए टिकट तथा और कुछ कामों में थोड़ा प्रॉब्लम है इस देखकर कल तक वापस आ जाएंगे।

तब आकाश बोला अच्छा फिर ठीक है फिर आपको विदेश कब जाना है पापा

तब अशोक बोले नहीं बेटा इस हफ्ते के सोमवार को मुझे निकलना होगा।
तब आकाश बोला पापा इतनी जल्दी?

तब अशोक बोल हां बेटा जाना होगा वहां पर काम थोड़ा ज्यादा है और उसे प्रेशर भी है इसलिए जाना होगा।

अशोक पटना के लिए निकल गए और आकाश भी छोड़कर वापस आ चुका था।

तब सुनीता बोली अरे आकाश बेटा कहां इतनी जल्दी बाजी में हो।

आकाश थोड़ा जल्दी बाजी में था क्योंकि उसे अपनी दीदी की मादक आवाज याद आ रही थी वह जल्दी से जल्दी शीला के पास पहुंचाना चाहता था और उसके साथ है चुदाई की खेल कर अपना वासना मिटाना चाहता था।
पर सुनीता थी कि अपने काम में उसे व्यस्त रखना चाहती थी?

सुनीता बोली बेटा चल मेरे साथ छत पर थोड़ा पापड़ बनाए हैं उसे सुखाना है।

फिर आकाश अपनी मां के साथ छत पर गया और पापड़ को उलट पलट करके सूखने लगा सुनीता भी बड़े प्यार से अपने बेटे को इस तरह उसकी मदद करते देख रही थी।

तभी सुनीता बोलती है कितना प्यारा है मेरा बेटा अपनी मां की मदद करता रहता है।

आकाश भी मुस्कुरा रहा था।

सुनीता भी पापड़ को कट पलट कर रही थी नीचे छुपाकर जिससे कि सुनीता की और स्तन जो थी वह दिखाई देने लगी थी।

आकाश को अपनी मां के स्तन देखकर धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगी थी वह अपने पसीने को पूछ रहा था कभी पापड़ को देखा तो कभी अपनी मां के स्तन को देख रहा था।

इसी गर्मी में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था सुनीता इस बात को भाग गई थी कि धीरे-धीरे अब शाम होने लगी थी तो सुनीता बोली कि चलो बेटा आप बहुत हो गया नीचे चलते हैं और नीचे चले जाए।

अपनी मां के स्तन को देखकर अब आकाश का तो लन्ड तूफान मार रहा था उसे लग रहा था कि कब कोई मिले और उसे चोद कर अपनी वासना को शांत कर ले।
पर आकाश करता भी क्या कोई मिल ही नहीं रहा था वह जल्दी से भाग कर शीला के घर गया पर शीला के पति उसे वक्त घर आ चुके थे।
वह केवल चाय पीकर वाहा से वापस आ गया?

जब आकाश घर पहुंचा तब सुनीता उसके आंखों में उसके वासना को समझ गई थी।

नीता फिर खाना बनाने में व्यस्त हो गई और आकाश चुपचाप बाहर बैठकर टीवी देख रहा था कि तभी सुनीता आई और उससे मजाक करना शुरू कर दिया।

सुनीता जाकर आकाश के गाल पर हाथ में लगे आता को लगाकर वहां से भाग गई।

आकाश अपनी मां की हरकत से थोड़ा नाराज होकर बोला मां यह क्या कर रही हो और वह भी थोड़ा अपनी मां के पीछे?

सुनीता हंस रही थी और हंसते हुए भाग कर किचन में आ गई कि तभी पीछे से आकाश आ गया और अपनी मां को पीछे से पकड़ लिया।

सुनीता तो जैसे यही चाहती थी वह जैसे ही पड़ा अपनी गांड के दबाव को उसके लंड पर बनाने लगी।

धीरे-धीरे आकाश का हाथ उसके पेट पर चलने लगा सुनीता इस बात को जानते हैं मदहोश होने लगी और आता सुनते हुए ही उसके बाहों में गर्म होने लगी।

कई बार ऐसा मौका आया था जब दोनों मां बेटे का होता एक दूसरे से मिल गए थे दोनों ने अपने होठों का रसपान तो कई दफा किया था अपने गांड में उसके लंड को कोई दफा महसूस की थी पर अपने बुरे में उसके लंड को कभी पूरा अंदर तक नहीं ले पाई थी आज ऐसा लग रहा था जैसे उसका लंड उसकी साड़ी को फाड़ कर अंदर घुस जाएगा।

तभी आकाश सुनीता को छोड़कर वहां से चल दिए सुनीता इस बात से थोड़ी सी नाराज हुई और वह अपने बेटे को तिरछी नजर से देखने लगी आकाश जाकर फिर से टीवी देखने लगा और सुनीता आपने खाना बनाने में व्यस्त हो गई।

दोनों ने खाना खाया और खाना खाने के बाद सोने चल दिये।

तब आकाश बोला मां मैं आपके साथ ही सोना चाहूंगा।
सुनीता भी यही चाहती थी छत से उसने कह दिया तो चलना रुका क्यों है अभी तक?

दोनों मां बेटे एक ही बिस्तर में सोने लगे थोड़ी ही देर में सुनीता ने अपनी करवट बदली और अपनी गांड को आकाश के तरफ करके सो गई। फिर आकाश भी पलटा और अपने लंड को सुनीता की गांड से सटाकर उसे अपनी बाहों में पकड़ कर सोने लगे।

थोड़ी देर बाद सुनीता फिर से पलटी और अब दोनों मां बेटे के मुंह एक दूसरे के सामने था दोनों ही एक दूसरे को देख रहे थे।

थोड़ी ही देर में सुनीता ने थोड़ी पहल की और अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले गई।

आकाश से बिना रह गया कई दिन की वासना उसके अंदर भड़क रही थी वह भी अपने होंठ को थोड़ा और आगे ले गया और अब दोनों की फोटो एक दूसरे से सब चुके थे तभी सुनीता ने उसके होंठ को चूसना शुरू कर दिया और अब दोनों एकदम गरम होकर एक दूसरे से लिपट गए और जोर-जोर से होठों की चुसाई शुरू कर दिए।

थोड़े ही देर में दोनों एक दूसरे के बाहों में लिए हुए प्रेमी प्रेमिका की तरह एक दूसरे को चूस रहे थे और कभी अपने गालों को काट लेते थे।

धीरे-धीरे दोनों कब नंगे हो गये पता भी नंगा चला और फिर?

सुबह हुई तो देखी की सुनीता अपने बिस्तर में नंगे लेटी हुई थी और उसके बगल में आकाश नहीं था वह जा चुका था।

सुनीता उठकर अपने बुर को देखती हैं तो वह पहले से ज्यादा खुल चुकी थी ऐसा लग रहा था कि कोई मोटा-मुसर डालकर उसकी कुटाई किया।

बर के चारों ओर पानी के सुख पापड़ी मौजूद थी ऐसा लग रहा था कि सारा वीर्य ऊपर ही गिराया गया हो।

सुनीता मंद मंद मुस्कान आने लगी कि आज पहली बार उसके अपने बेटे ने उसकी इस तरह से चुदाई करके खुश किया था।

लेकिन आकाश कहां था इस बात की चिंता सुनीता को खाया जा रही थी वह झट से उठी और अपने आप को ठीक करके आकाश को देखने चली गई।

धन्यवाद अंत तक बने रहने के लिए मिलते हैं अब अगले भाग में।
 

Raaj Avani

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अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह सुनीता अपने बेटे के साथ सहवास करती है और आकाश उसके बिस्तर से उठकर चला जाता है और जब सुबह नींद खुलती है सुनीता कोई तो वह अपनी बूर को देखकर काफी खुश होती है कि उसकी कुटाई उसकी बेटे ने की थी।

जब सुनीता देखी कि उसका बेटा बिस्तर पर नहीं है तो वह उठकर उसे ढूंढने के लिए खेतों की ओर चली गई और जैसे ही सुनीता खेत पर पहुंची देख की खेत में आकाश काम कर रहा था।

खेत पर और भी बहुत लोग थे इसलिए सुनीता अपने बेटे को बेटे की तरह ही बोली कि यहां क्या कर रहे चलो घर नहीं चलना क्या इतनी सुबह-सुबह काम करने चले आए खाना नहीं खाओगे?

तब आकाश अपनी मां से थोड़ा देखते हुए बोला मां अब चली जाओ मैं आ जाऊंगा अभी मेरा मन नहीं है मुझे काम करने दो।

सुनीता समझ गई थी कि वह कल रात से थोड़ा सा अपसेट है वह बोली कि बेटा तुम तुरंत घर आओ मुझे थोड़ा काम है मेरा तबीयत ठीक नहीं लग रहा है। यह बोलकर सुनीता तुरंत घर चलिए।

अपनी मां के मुंह से उसके तबीयत के बारे में सुनकर आकाश को थोड़ा धक्का लगा वह जल्द ही अपना सामान को साइड में करके तुरंत ही घर की ओर निकल गया।

जैसे ही आकाश घर पहुंच देखा कि सुनीता टेबल पर एक और मुंह खुला है बैठी हुई थी तभी आकाश जाकर उसके पास बैठा और बोला मां आपको क्या हुआ है आपको की तबीयत कैसी है?

तब सुनीता थोड़ी रोंडी सी सूरत बनाते हुए आकाश की तरफ देखती है और बोलती तुझे मेरी तबीयत की क्या पड़ी है मुझे सुबह-सुबह इस साल में छोड़कर चला गया अगर तुझे मेरी तबीयत की पड़ी होती तो क्या तुम मेरे साथ इस तरह करता?

आकाश भी थोड़ा सा अपने आप में शर्मिंदगी महसूस किया और वह सुनीता के गले लग गया।

सुनीता भी अपने बेटे के बाल को सहलाने लगी और उसे गले लगा कर उसके गाल को चूम ली और बोली बेटा मैं तुम्हारी ही हूं।

और दोनों एक दूसरे के मुंह देखने लगे फिर तभी सुनीता उसके होठों पर अपना होंठ रख दी।
और एक जबरदस्त चुंबन देकर बोली कि चलो हाथ मत बोलो मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूं।

सुनीता नाश्ता बना रही थी कि पटना से अशोक भी लौट आए थे अपने काम कर दिया और उन्हें दूसरे दिन ही फिर से विदेश जाना था।

दोनों बाप बेटे मिलकर खाना खाए और उसके बाद सुनीता ने भी खाया और अशोक की विदेश जाने की तैयारी करने लगी।

2 दिन बाद अशोक विदेश के लिए रवाना हो गए। अब घर पर सिर्फ दोनों मां बेटी ही बचे हुए थे। आकाश सुबह-सुबह खेती पर चला जाता था और सुनीता अपने बेटे के लिए खाना बनाने लगती थी।

सुनीता कभी कभार अपने बेटे के लिए खाना बनाकर उसे खेत पर ही खिलाने के लिए ले जाती थी।

इसी तरह से जीवन बीत रहा था कि तभी एक दिन भारत सरकार की तरफ से ऑफर आया था कि किसी सीखने के लिए किसी गांव के नौजवान को एक महीने के लिए बाहर भेजा जा रहा था।

गांव के लोगों ने यह फैसला किया था कि किसी सीखने के लिए एक महीने के लिए आकाश को भेजा जाए आकाश की मां भी रेडी थी पर आकाश नहीं जाना चाहता था सुनीता को अकेला छोड़कर।

फिर सुनीता के जीत पर आकाश को जाना ही पड़ा। फिर सुनीता के जिद पर आकाश को जाना ही पड़ा।

आकाश एक महीने के लिए बाहर जा रहा था तो उसे छोड़ने के लिए सुनीता भी एयरपोर्ट पर आई हुई थी।

प्लेन कल के लिए थी इसीलिए उन्होंने पटना में एक अच्छा सा होटल बुक किया था और आकाश अपने मां के साथ होटल में ही रुका हुआ था।

आकाश अपने मन को लेकर एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से आकाश प्लेन में बैठकर रवाना हुआ और सुनीता वहां से लौटकर फिर से होटल में चली आई।

पटना से उसके घर के लिए ट्रेन कल दूसरे दिन थी सुबह में तो वह सूची की आज रात भर होटल में ही काटा जाए।

तभी सुनीता के डोर बेल फसती है। और वह उठकर जाकर अपने डोर को खोलती है तो देखी है कि सामने कोई बड़ा सा आदमी है जो सूट बूट पहने खड़ा था।

थोड़ी ही देर में उसने सुनीता को मां का कर संबोधित किया।

सुनीता ने झट से पहचान लिया और उसके गले लग गई

सुनीता को यह आवाज मन करने वाली कोई और नहीं राज का था जो अब अंश्मन सिंह एक बड़ा बिजनेसमैन बन चुका था।

दोनों मां बेटे अंदर आए और दरवाजे को बंद किया।

सुनीता अंश से बोली कई साल बाद तुम्हें देख रही हूं आज तू तो एकदम से बदल गया है रे मेरा राज।

तब अंश बोल मैन दुनिया भले ही मुझे अंशुमान सिंह का कर बुलाए पर मैं तेरा बेटा राज हूं।

तब सुनीता बोली चल झूठे तेरा नाम अंश होगा आपसे राज तो झूठ-मूठ का इतना दिन से नाटक करता रहा।

सुनीता को अपने मुंह बोल बेटे से बहुत प्यार था।
उसे आज भी याद था जब वह स्टेशन पर रोते हुए उसे मिला था और उसने उसे घर लाकर उसे नई जिंदगी दी थी और उसके प्यार में पढ़कर कर उसके साथ सहवास किया था और जब उसे अलग हुई थी तब वह बहुत रोई थी।

और आज जब दोनों मां बेटे मिले थे तब भी वह रो रही थी तब अंश ने उसके आंसू को पूछते हुए बोला मां अब तो मैं तुम्हारे पास आया हूं ना फिर क्यों इतना रो रही हो?

फिर सुनीता ने उसके आंखों में देखा और झट से उसके गले लग गई।

दोनों एक दूसरे से गले मिले हुए एक दूसरे में खोए हुए थे।

आज सुनीता को ऐसा लग रहा था जैसे उसे स्वर्ग मिल गया हो उसका खोया हुआ उसे प्यार मिल गया था उसका मुंह बोला बेटा राज उसके पास लौट आया था।

सुनीता उसके कभी गाल को चूमती तो कभी माथे को चूमती तो कभी हाथ को चूमती उसे खूब प्यार बरसा रही थी।

अंश भी अपने मां के इस प्यार के लिए हमेशा से तरस रहा था वह भी इस मौका को नहीं छोड़ना चाहता था और वह भी सुनीता के होंठ को कभी चूमता तो कभी उसके गाल को चुमता उसे आनंदित कर रहा था।

धीरे-धीरे दोनों मां बेटे उत्तेजित हुए और एक दूसरे के होंठ को जबरदस्त तरीके से चूसना शुरू कर दिए थे।

थोड़ी ही देर में दोनों मां बेटे एक दूसरे में खो गए और फिर से उन्होंने अपने पुराना प्यार को पाकर अपने आप को धन्य कर लिया था।

सुबह जब बाहर शोर होने लगी तब दोनों की आंखें खुली तो देखा कि दोनों एक दूसरे से चिपके हुए नंगे लिपट पड़े थे।

दोनों के बीच रात में जो घमासान चुदाई हुई थी उसकी लहर अभी भी सुनीता के शरीर पर चढ़ रही थी।

दोनों उठे और अपने कपड़े पहन कर खिड़की से बाहर देखने वालों की आखिर यह शोर था कैसे?

तभी बाहर होटल का मालिक चिल्लाने लगता है कि यहां एक बिजनेसमैन ने मर्डर कर दिया।

वह बिजनेसमैन कोई और नहीं अंश था होटल का मालिक अंश पर यह इल्जाम डाल दिया था कि अंश ने मर्डर कर दिया है वहां पर एक लाश बाहर पड़ी हुई थी जहां पर कुछ अंश के समान पड़े हुए थे।

अंश इस तरह से बाहर जा भी नहीं सकता था और बोलना भी तो क्या बोलता है कि वह किसके साथ था?

सुनीता उसे बोली कि बेटा जो तुम्हें बताओ कि तुम तो रात भर मेरे साथ रहे थे तब उसने कहा नहीं मन वह लोग अच्छे लोग नहीं है तुम पर कीचड़ उछालेंगे मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा इज्जत को कोई आंच भी आए।

अंश अपने वकील को कॉल कर देता है कि इस मामले को जल्दी से समझो।

कुछ घंटे बाद वकील फोन करता है और बोलता है कि आपका यह जो केस है बहुत बुरी तरह से फंस चुका है आपको शायद कोई बचा नहीं सकता आपको सब सच बताना ही होगा।

अंश अपने गेटअप को चेंज करता है और वहां से किसी तरह निकल जाता है।

सुनीता भी वहां से निकलकर अंश को अपने साथ घर लेकर आ जाती है।

सुनीता बोलती है जब तक यह मामला पूरी तरह से शांत नहीं हो जाता तब तक तुम मेरे घर पर रहो।

हंस अपने आप को बचाने के लिए हर प्रयास कर रहा था और उधर अंश के वकील भी किसी तरह का उपाय लग रहे थे कि उसको बचाया जा सके।

होटल के मालिक अंश को क्यों फसाना चाहता था पता ही नहीं चल रहा था?

अभी यह मामला पुलिस में जा चुका था पुलिस इसकी जांच करनी शुरू भी कर दी थी। सुनीता भी अपनी तरफ से हर प्रयास कर रही थी किस बचाया जा सके और अंश के दिमाग को ठंडा रखें बहुत कोशिश कर रही थी।

उसको अपनी ममता और एक मां का प्यार पूरी तरह से दे रही थी।

हंस के ऊपर इतनी बड़ी बीपत आ चुकी थी लेकिन सुनीता के प्यार ने उसे दीपक को काफी हद तक कम कर रखा था।

उस होटल में जिस आदमी का मौत हुआ था वह आदमी किसी नेता का आदमी था और वह नेता किसी तरह से इस बिजनेसमैन को बर्बाद करना चाहता था।

इस बात की जानकारी पुलिस ने सुनीता को दी तब सुनीता का दिमाग धानका और वह पुलिस से बोली कि मुझे इस नेता से मिलना है।

यह वही पुलिस वाला था जो अंश को इसके बेटे से मिलाया था यह सुनीता का बहुत ही खास और अच्छा पुलिस वाला था एक दोस्त की तरह मदद कर रहा था।

सुनीता दिन भर अब इस पुलिस वाले के साथ रहती और किसी तरह से अंश को बचाने का हर प्रयास करती थी।

दिन भर के प्रयास के बाद शाम को घर लौटी और अंश से खूब प्यार करती और प्यार भरी बातें भी करती।

और अंश को यह उम्मीद देती कि तुम चिंता मत करो तुम्हें कुछ नहीं होगा तुम्हारी मां जब तक है तुम्हें कुछ नहीं होने देगी।

अंश के असली माता-पिता जो थे उन्हें इस बात की पता चल चुकी थी वह लोग भी अपनी तरह से हर कोशिश कर रहे थे कि उसको बचाया जा सके अंश कहां था यह सिर्फ सुनीता को ही पता थे।

सुबह होते हि सुनीता ने खाना बनाया और अंश को खिला-खिला कर बोल दी कि वह उसे बचाने के लिए प्रयास कर रही है उसकी मदद एक पुलिस वाला कर रहा है वह उसी के पास जा रही है और वह निकल गई।

अंत तक बने रहने के लिए धन्यवाद मिलते हैं अगले अपडेट में।
 

Napster

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UPDATE 05

मुहबोला बेटा से प्यार S1 #UPDATE 5
(होली स्पेशल)

मैं और मेरी बेटी सौम्या दोनों शीला के घर आ गए।

शीला का घर बहुत बड़ा था वह पुराने जमाने का था उसमें गलियारा, ओसारे भी थे और बहुत बड़ा आंगन था जिसमें पूरा कीचड़ माटी करके एकदम होली खेलने के लिए तैयार किया गया था।

यहां तो पहले से ही होली चल रही थी शीला पूरा लेटी हुई थी और उसके पति समर भी पूरे लेटाए हुए थे मेरा बेटा आकाश भी यही था और राज भी यही था।

जैसे ही मैं यहां आई वैसे ही शीला के पति समर मेरे पास आ गए और
बोले- सुनीता जी आज तो मैं आपको पूरी तरह से लगाऊंगा ऊपर भी नीचे भी और भीतर भी।

यह सुनकर वहां जो भी खड़े थे सब हंसने लगे।
मैं भी कहां चुप रहने वाली थी मैं भी उनसे कह दी हां तो आप भी तैयार रहना मैं भी आपको पूरी तरह से लगा दूंगी आज और,
देखती हूं आपका कितना भीतर तक आप लगा पाते हैं मुझे?

फिर सभी लोग हंसने लगे।
सौम्या उठी और राज के पास गई और बोली

सौम्या- राज आज तो मैं तुझे छोड़ने वाली नहीं हूं कहां बच रहा है बच्चु मुझसे?
फिर वह उसके साथ होली खेलने लगी और उसके कपड़े के भीतर ऊपर हर जगह रंग लगाने लगी।



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आकाश ने मुझे चुटकी भर रंग निकाला और गाल पर लगाकर हैप्पी होली काहा। मैं भी आकाश को रंग लगाकर बोला कि हैप्पी होली बेटा और तभी शीला आई और

बोली ऐसे होली नहीं खेलते उसने पूरा रंग लिया और उसके कमर में लगाने लगी आकाश वहां छटपटाने लगा छटपटाने के साथ ही उसका लंड शीला से टच हो गया।

शीला ने शरारत की और मेरे सामने ही उसके लंड को पकड़ कर मसल दिया और हंसने लगी।

फिर थोड़ी देर में- शीला के पति मुझे मेरे गालों पर रंग लगाए। और मैं वहां से चटपटाती हुई भाग गई।

वह मेरे पीछे दौड़े और मुझे पकरने के लिए आंगन की तरफ आए मैं आंगन में भागी पर मेरा पैर फिसल गया और मैं वहीं गिर गई। फिर शीला के पति मुझे सहारा देकर उठाएं और बोले कहीं चोट तो नहीं लगी ना और मेरे कमर को दबाने लगे।

मुझे कुछ खास चोट तो नहीं लगी थी पर जहां पर गिरी थी वहां से थोड़ी सी कमर में चोट लगी थी वह दबा रहे थे तो थोड़ा आराम मिल रहा था मैं बोली कि हां थोड़ा बहुत लगा है।

वे बोले कोई बात नहीं मैं आपको दबाकर ठीक कर देता हूं।

फिर उन्होंने मेरे कमर को दबाने लगे और दबाते दबाते हुए कभी मेरे कमर को दबाते तो कभी वह मेरे नाभि के पास चले जाते हैं मैं उन्हें यह सब करते देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।

कभी कमर को दबाते तो कभी मेरे दोनों कूल्हों को दबा देते हैं फिर कभी वह मेरे नाभि में उंगली कर देते मैं उनकी यह शरारत से काफी खुश थी मजा आ रहा था।

मैंने भी कभी-कभी उनके बालों का सहला देती तो कभी उनके बालों को कस कर खींच देती जिससे उनकी आह निकल जाती। उनकी आह्ह् सुनकर मुझे हंसी आ जाती थी।

फिर वह मुझे कसकर कमर में कभी चिकोटी काट लेते तो कभी नाभि में कस कर उंगली कर देते जिससे कि मेरी आह निकल जाती।

हम दोनों को काफी मजा आ रहा था। तभी उनकी शरारत और बड़ी और वह मेरे साड़ी के अंदर हाथ डालने लगे।

मैं उन्हें कसकर धक्का दे दी और वह नीचे गिर गये मैं वहां से दौड़कर भाग गई।

जब मैं भाग कर हॉल वाले रूम के पास आई तो देखी कि मेरी बेटी सौम्या और मेरा बेटा राज दोनों मिलकर होली खेल रहे थे सौम्या राज के ऊपर चढ़ी हुई थी जिससे कि राज का लंड सौम्या के योनि से दबी हुई थी और सौम्या उसे जबरदस्ती रंग लगाने की कोशिश कर रही थी राज भी उसे हटाने का नाकामयाब कोशिश कर रहा था जिससे कि कई बार सौम्या की चूचियों को वह हाथ से लगा देता था।


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इन दोनों के जुगलबंदी चलती रही कभी सौम्या उसके लंड पर बैठी रहती तो कभी राज उसके ऊपर चढ़कर उसे रंग लगाने लगता और इन दोनों मिलकर भाई-बहन खूब होली खेल रहे थे फिर मैं वहां से भागी क्योंकि यहां भी शीला के पति मेरे पीछे आ रहे थे।

मैं यहां से भाग कर ओसारे के तरफ गई तब दिखै की शीला और मेरा बेटा आकाश दोनों एक दूसरे को रंग लगा रहे हैं।
आकाश ने शीला को पीछे से जबरदस्ती पकड़ा हुआ था और शीला झुकी हुई थी जिससे की शिला की गांड का भार आकाश के लंड पर था।


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तभी मैं उनके सामने गई तब शीला मुझे देखकर बोली है रे सुनीता बचा अपने इस नौजवान बेटे से यह तो मेरी फाड़ ही डालेगा कितनी जबरदस्ती रंग लगा रहा है।
तब मैं बोली नहीं बेटा आकाश इसे छोड़ना मत यह बहुत उछल कूद कर रही थी कब से, अब तो पूरा रंग लगा।

तभी मैं भी उन दोनों का साथ देने के लिए गई तब शीला ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझे भी झुका दिया जिससे कि मैं
अपने बेटे आकाश के गले के पास मेरा मुंह चला गया और हम दोनों का मुंह एक दूसरे के पास आ गया ऐसा लग रहा था कि और थोड़ी हलचल होती तो हम दोनों के होंठ एक दूसरे से सट्ट जाते। तभी शीला ने एक हरकत की और मुझे खींच लिया और आकाश भी थोड़ा आगे की ओर हो गया जिससे कि हम दोनों मां बेटे का होंठ एक दूसरे से मिल गए शीला तो नीचे की ओर झुकी हुई थी और उसकी गांड मेरे बेटे के लंड से दबा हुआ था और मैं और मेरे बेटे का मुंह एक दूसरे से सटा हुआ था ।
मैं झट से अलग हुई और शीला के दोनों चूचियों को अपने बेटे के सामने ही मसल दी।


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मेरा बेटा भी शीला को कसकर पकड़ लिया और अपने से सटा लिया जिससे कि अब उसका लंड शीला के गांड में जबरदस्त घुस रहा था मेरा तो मन हुआ कि अभी इसकी सलवार को फाड़ दू जिससे कि मेरा बेटे का लैंड पूरी तरह से घुस जाए।


मुझे जाने क्या हुआ और मैं शीला के सलवार पर हाथ लगा दी? मेरा जैसे ही शीला की सलवार पर हाथ लगा मैंने महसूस किया कि उसकी बूर तो खुली हुई है उसने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी वह सिर्फ सलवार में थी अगर सलवार गलती से भी खुल जाती तो मेरे बेटे का लंड उसकी बूर में समा जाता है।

तभी शीला मेरी चूची को दबाने लगी और मुझे गुस्सा आया और मैं उसकी सलवार को खींच दी जिससे कि उसकी बूर की जगह पर थोड़ी सी सलवार फट गई और उसकी बूर एकदम साफ नजर आने लगी।

मैं अपने बेटे के सामने यह सब देखकर काफी शर्मिंदा महसूस की और तुरंत वहां से भागने लगी।

जैसे ही मैं वहां से भागी

मैं देखी की शीला के पति मुझे ही ढूंढ रहे हैं तो मैं एक खिड़की के पास छुप गई।

वहां से मुझे शीला और आकाश साफ नजर आ रहे थे। आकाश ने शीला को छोड़ दिया था तभी शीला ने आकाश पर हमला किया और उसके लोअर को खींचकर उतार दिया जिससे कि आकाश का फनफानाता हुआ लंड एकदम से टनटना कर बाहर निकाला और शीला के मुंह के पास आ गया।

अब आकाश को गुस्सा आया और उसने शीला के गाल को धर के पूरा मिस दिया।

वह इस हमले में दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर गए और शीला के चूचियां आकाश के सीने से दब गई और उसका लंड शीला के बूर पर लगने लगी।

फिर शीला ने जोर लगाया और उसके ऊपर आ गई आकाश को नीचे कर दी और पास में पड़े कीचड़ मिट्टी को उसके छाती पर रगड़ने लगी इसी हमले में आकाश ने नीचे से ही उसकी चूची को पकड़ लिया।

तभी शीला ने कसकर उसके बालों को खींचा और उसके गाल पर एक दांत गड़ा दी।

फिर आकाश ने उसके चूचियों को कस कर खींचा और उसके होंठ को अपने होंठ में मिलाकर चूसने लगा।

अब दोनों गर्म हो चुके थे दोनों एक दूसरे के ऊपर पड़े एक दूसरे के होंठ को चूस रहे थे और आकाश उसके दोनों चूचियों को दबा रहा था।

तभी शीला ने थोड़ी सी अपनी गांड को उठाई और हाथ को उसके लंड पर ले गई जो की पूरी तरह से टाइट थी।

शीला अपनी बूर को चौड़ा करके थोड़ी सी जगह बनाई और लंड को अपनी बूर पर सेट करके धीरे से अंदर की ओर ले ली।

आकाश उसकी चूचियों को चूस रहा था और शीला उसके लंड पर उठक बैठक कर रही थी।


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फिर आकाश शीला को नीचे किया और उसके बूर में फटी सलवार की जगह से ही लंड को पेल दिया और उसे चुदाई करने लगा और धीरे-धीरे उसकी दोनों चूचियों को मसल मसल कर चूस रहा था और कभी काट रहा था तो कभी उसके होंठ पर चुमा ले रहा था।

मैं यह सदृश्य देखकर एकदम से गर्म हो रही थी कि तभी मेरे पीछे से कुछ हमला हुआ।

यह हमला था शीला के पति का जो आते ही मेरे दोनों चूचियों को अपने हाथों में लेकर दबा दिए थे मैं एकदम से सीहर उठी।

शीला के पति की हमला से मै एकदम से अछामहित् थी।


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उन्होंने आकर मुझसे कहा -क्या बात है सुनीता जी आप केवल देखकर मजा लोगी चलो आज सब करके मजा लेते हैं?

इधर शीला को मेरे बेटे आकाश ने पूरे जोर से चोदना शुरू किया था।

और इधर शीला के पति मुझे अपने गोद में उठकर फिर से मुझे आंगन में ले जा रहे थे जहां कोई नहीं था।

जैसे ही उन्होंने मुझे आंगन में उतारा मैं तुरंत भगाने की कोशिश की पर उन्होंने मुझे जाने नहीं दिया फिर से पकड़ लिया।
आंगन में रंगों से भरा हुआ एक टब था वह पास में ही था मैंने उन्हें टब के पास ले गई और प्यार से उनके गाल को सहलाते हुए एक किस की और टब में धकेल दिया। वह बेचारे उस गिर कर रंग से नहा लिए। और मैं वहां से हंसते हुए भाग गई?

जैसे ही मैं हाल में आई मैं देखी कि वहां राज और सौम्या नहीं थे तो मुझे लगा कि यह दोनों आखिर कहां चले गए होली खेलते खेलते, तो मैं थोड़ा सा आगे बड़ी तब
मुझे ऊपर जाती सीढ़ियों के पास से कुछ आवाज आई?

मैं देखी कि सीढ़ियों के पास मेरे बेटे राज लेटा हुआ है और मेरी बेटी सौम्या उसके ऊपर चढ़ी हुई है और वह दोनों बिल्कुल नंगे हैं।

मेरा मुंहबोला बेटा मेरी सगी बेटी को चोद रहा था यह देखकर मेरी तो फिर से बूर गीली होने लगी थी एकदम से उसकी चूचियां हिल रही थी वह अभी छोटी-छोटी चूचियां थी मेरी बेटी पटना में रहकर काफी चुदक्कड़ हो गई थी जिसकी वजह से वह अपने भाई के ऊपर चढ़कर खूब मजे लेकर चुदाई कर रही थी।


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राज उसके छोटे-छोटे चूचियों को अपने हाथ से धर कर दबा रहा था और सौम्या उसके ऊपर चढ़कर धीरे-धीरे हिल रही थी और आंखें बंद कर आआआह्ह कर रही थी। आज अपनी सगी बेटी की चुदाई अपने मुंहबोले बेटे से होते देखी तो फिर से मेरी बूर एकदम से पानी पानी होने लगी मैं वहां से जल्दी ही भाग गई।

मैं भाग कर जैसे ही हाल के तरफ आई की फिर से मुझे शीला के पति ने पकड़ लिया और इस बार वह मुझे गोद में उठाकर मेरी गालों को दांत से काटते हुए बोले क्यों सुनीता जी पक्की खिलाड़ी हो एकदम से मुझे चक्मा देकर भाग रही हो?

वह मुझे उठा कर ले गए और टब में खुद भी घुसे और मुझे भी
टब का पानी अधिक नहीं था हम दोनों उसमें बैठ गए वह मुझे कसकर पकड़ के अपने लंड पर बैठाये हुए थे मेरी साड़ी कमर तक उन्होंने उठा दी और पानी में बैठने की वजह से छाती तक डूब गए थे जिसकी वजह से बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था वह मेरी साड़ी को ऊपर उठाकर अपने लंड को मेरे पैंटी के ऊपर से ही बुर को रगड़ रहे थे और बैठे हुए थे।

फिर उनकी हरकत शुरु हुई और वह मेरी चूचियों को दबाने लगे और मेरे गाल को काटने लगे।

कभी वह मेरे गाल को चूमते तो कभी गर्दन को चूमते तो कभी पीठ को चुमते तो कभी बालों को सहलाते और नीचे से लंड को मेरी बूर पर रगड़ रहे थे और एक हाथ से मेरी बूर को सहला रहे थे तो दूसरे हाथ से मेरी चूचियों को दबा रहे थे।

यही सब कर रहे थे कि अचानक मेरा बेटा आकाश आंगन में आ गया। हम दोनों हड़बड़ा गए और उन्होंने मुझे छोड़ दिया मैं डरकर तुरंत से वहां से उठी और निकाल कर भाग गई।

मैं बेटे के पास से जब निकल रही थी तब मुझे काफी शर्मिंदगी महसूस हुई कि मैं किसी गैर के बाहों में पड़ी हुई थी और मेरा बेटा मुझे देख लिया हालांकि वह अभी-अभी शीला की चुदाई करके आ रहा था।

शीला के पति काफी गुस्सा हुए वह एकदम गर्म जोशी में थे और ऐसा लगा कि उनके गर्म तवे पर किसी ने पानी फेंक दिया उन्होंने तुरंत मेरे बेटे को अपने पास बुलाया और आकाश के दोनों गाल पकड़ कर गुस्से से बोले अरे बेटा तुम यहां क्यों आ गए वहीं क्यों नहीं रहे?

तब आकाश बोला अरे मैं तो आपको बुलाने के लिए आया था वह शीला आंटी आपको खाने के लिए बुला रही थी।
मैं वहीं खड़ी, खिड़की के पास सब देख रही थी कि तभी उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी मैं तुरंत वहां से भाग कर अपने घर की ओर निकलने लगी कि तभी जैसे ही शीला के घर से मैं निकली और दरवाजे से बाहर जा ही रही थी कि एक सफेद बांग्ला कुर्ता पहने हुए आदमी से मैं टकरा गई वह देखने में काफी हैंडसम था काला चश्मा लगाए हुए बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखे हुए एकदम से गोर फुले हुए गाल और मजबूत बाहो वाला मैं जैसे ही उसे टकराई उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

वह मुझे देख रहा था पर मैं उसे देख रही थी वह मुझे शायद पहचान लिया था इसलिए उसने बोला अरे आप अभी गिर जाती?

मेरा बदन गीला था सब अंग झलक रहे थे और मेरे शरीर पर कीचड़ भी लगे हुए थे जो उसके सफेद कपड़े को गंदा कर दिया था मैं उसे देखते ही काफी शर्मा गई और

मै बोली-- मैंने तो आपका कपड़ा गंदा कर दिया सॉरी तब

उसने बोला- अरे कोई बात नहीं मैं तो आपसे ही मिलने आ रहा था।


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मैं एकदम से सकपका गई कि यह हैंडसम आदमी मुझसे क्यों मिलने आ रहा था यह कौन था मैं तो पहचान ही नहीं पाई?

धन्यवाद दोस्तों अंत तक बने रहने के लिए। अब मैं आपसे अगले भाग में मिलेगी अभी होली जारी है।🙏
बहुत ही गरमागरम कामुक और उन्मादक अपडेट है मजा आ गया
 

Napster

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UPDATE 06
मुहबोला बेटा से प्यार
(होली स्पेशल)

अब तक आपने पढ़ा की जब मैं शीला के घर से निकल रही थी तब किसी सफेद कुर्ते वाले आदमी से टकरा गई जिसकी मजबूत बाहों में मैं समा गई थी मैं उसे देख रही थी और वह मुझे देख रहा था वह मुझे पहचान लिया था पर मैं उसे नहीं पहचान पाई थी। अब आगे।

उन्होंने मुझसे कहा -लगता है आप मुझे नहीं पहचानी मैं सौम्या के दोस्त हूं आलम।

मैं एकदम चक्कीत रह गयी ये तो मुसलमान है सौम्या का दोस्त यानी कि उसका बॉयफ्रेंड है।
इसलिए मुझे बोल रहा था कि मेरे साथ ही यह होली खेलने आया है।
मैं उन्हें बोली चलिए घर चलते हैं। और मैं उन्हें अपने घर लेकर आ गई।

मैं उन्हें हाल में सोफे पर बैठा दिया और सौम्या को बुलाने लगी।

पर सौम्या तो आई ही नहीं मैं उसके रूम में जाकर देखी तो वह तो टांग पसार कर सो रही थी।


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राज से चुदवाने के बाद थक गई होगी इसलिए सो रही है।
मैं सौम्या को सोते हुए छोड़कर आलम के पास आई और उनसे पूछने लगी कि आप क्या लेंगे?

तब उन्होंने कहा मैं तो बस आपके मालपुआ खाने आया हूं।

मैं एकदम से शकपका गई। फिर मैं जल्दी से किचन में गई और उनके लिए पानी और कुछ बने हुए मालपुआ उठाकर लाइ और उनके सामने रख दिए।

तभी वह खड़ा हुआ मेरे पास आया मैं उनके सामने ही खड़ी थी।
आलम ने बोला- अरे मैं इस मालपुआ की बात नहीं कर रहा था।

मैं काफी डर गई थी कि यह बंदा मेरे साथ किया करने वाला है और यह किस मालपुए की बात कर रहा है।

फिर मैं डरती हुई बोली की जी आप कौन से मालपुआ खाएंगे?

फिर आलम बोला अरे आप तो डर रही है मैं तो बस मजाक कर रहा था।

तब जाकर मेरी जान में जान आई और वह हंसने लगा।

आलम फिर से बोलना शुरू किया। और उसने बोला मैं तो बस आपको अपने पिचकारी से रंग डालने के लिए आया था अगर आप तैयार हो तो बोलो मैं यही खड़े-खड़े आपको डाल देता हूं।

मैं फिर से डर गई। मुझे डर लग रहा था कि कहीं यह अपनी उस पिचकारी की तो बात नहीं कर रहा क्योंकि यह तो और कोई पिचकारी लेकर आया नहीं है ना ही कोई रंग लाया है बिल्कुल सफेद सा हो कर आया है आखिर किस पिचकारी की बात कर रहा था?

फिर वह मेरे पास आया और बोला कि बोलिए भाभी जी अगर आपकी इजाजत है तो मैं आप में मेरी पिचकारी डाल दूँ।

मैं एकदम से घबरा गई। तब उसने फिर से हंसने लगा और बोला अरे मैं तो मजाक कर रहा था और उसने एक रंग की पुड़िया निकाली और मेरे गालों पर लगाकर बोला हैप्पी होली भाभी जी।


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फिर मैं बोली अरे आप तो मेरे बेटी के दोस्त हो और मेरे बेटे जैसे हो और मैं आपकी भाभी कैसे हो गई?

आलम ने कहा- अरे इतनी खूबसूरत औरत को भला कोई कैसे आंटी का सकता है आप तो बिल्कुल सौम्या की बड़ी बहन जैसी लगती हो अगर मुझे सौम्या पहले ना मिली होती तो मैं आप ही को पसंद करता और आपसे ही शादी करने की डिमांड करता।

मैं उसकी बातों से एकदम से घबरा गई यह क्या कह रहा है?

अच्छा ठीक है आपको जो कहना हो कहो पर चलो अब आप मालपुए खा लो?

आलम ने कहा- अरे मैं सच में यह मालपुआ खाने नहीं आया मैं तो आपकी मालपुआ खाने के लिए आया हूं।

मैं फिर से चक्रा गई यह क्या बात को घुमा रहा था?

मैंने उससे कहा- किस मालपुआ की बात कर रहे हैं बोलिए मैं अभी फिर से बना कर ला दूंगी।

तब आलम ने कहा- अरे मैं कोई मालपुए खाने नहीं आया मैं तो मजाक कर रहा हूं मैं बस आपके साथ होली खेलने आया हूं।

मैं बोली- ठीक है।

फिर आलम में भरमुथि रंग लिया और मेरे पेट पर रगड़ते हुए गालों पर और मेरी गर्दन पर लगा दिया।

फिर मैं भी रंग लिया उनके गालों पर लगाने लगी जो काफी मुलायम थे और बड़े-बड़े दाढ़ी भी थे उनके गाल पर रंग लगाते ही मेरे अंदर पता नहीं कौन सी वासना भड़क उठी मैं उससे चिपक गई और वह भी मुझे अपनी बाहों में ले लीये।


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मेरी दोनों चूचियाँ उनके चौड़ी छाती में दबी हुई थी और उनका लंड का भर मेरे योनि पर लग रहा था।

वह अपना चेहरा थोड़ा नीचे किये और उनका गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकराने लगे हम दोनों का चेहरा बिल्कुल एकदम पास में था अगर वह थोड़ा और झुक जाते तो हम दोनों के होंठ एकदम से मिल जाते मैं भी नहीं चाहती थी कि उनसे दूर होउ मैं भी थोड़ा सा गरदन उठाई और वह भी थोड़ा सा नीचे झुके और हम दोनों के होंठ एकदम से मिल गए।


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मेरी आंखें तो बंद हो गई और वह मेरे होंठ को एकदम से चूसने लगा। मुझे डर था कि कहीं मेरे बेटी अंदर से जाग न जाए।

तभी मैं उससे अलग हुई।
और बोली यह ठीक नहीं है आप रंग लगाइए और मालपुआ खा लीजिए?

तब आलम ने बोला- अरे मैं तो आपके मालपुआ खाने के लिए आया हूं और वह फिर से मुस्कुराने लगे।

मैं इस बार सब समझ रही थी कि वह
किस मालपुए की बात कर रहे थे।

तभी वह मेरे पास आए और मेरे गालों को रंग लगाते हुए अपने चेहरे को मेरे चेहरे के करीब लाये और मेरे होंठ पर फिर से अपने होंठ रख दिए और उन्होंने चूसना शुरू कर दिया। मुझ में भी वासना भड़क उठी थी मुझे भी ना रहा गया और मैं भी अपनी दोनों हाथ उनके गले में डालकर चुप चाप अपनी होंठ चुसाई के आनंद लेने लगी आंखें बिल्कुल बंद कर ली और एकदम रस लेकर उनके कोमल होंठ को चूस रही थी और अपने कोमल मुलायम होंठ को चुसवा रही थी मेरी दोनों चूचियां उनके सीने में दबी हुई थी।


तभी डोर बेल बजी और हम दोनों की तंद्रा टूट गई।
मैं उनसे अलग हुई और किचन में भाग गई।

वह भी भाग कर मेरे साथ किचन में आये और बोले मैं इस हालत में कैसे वहां जाऊं?

तब मैंने उन्हें उनके हाथ धुलवाई और मैं अपने आप को ठीक किया और उन्हें सोफे पर बैठ कर मालपुआ परोसी और तब जाकर दरवाजा खोला।

दरवाजे पर मेरा बेटा आकाश आया हुआ था।

वह आलम को देखते ही बोला
आकाश- अरे आलम तुम यहां?
आलाम- हां मेरे दोस्त मैं तो यहां किसी के मालपुआ खाने आया था।


आकाश- हां तो खाए कि नहीं मालपुए।

आलम- अरे बस बस खा ही रहा हूं।

मैं वहां से उठकर अंदर चली गई।

मैं अंदर बिस्तर पर बैठी ही थी कि सौम्या जाग गई और मुझसे बोली।


सौम्या- आप कब होली खेल कर आई?
मैं बोली जब तुम टांग पसारकर सो रही थी तब आई थी।

मैं सौम्या को बताई कि उसका दोस्त आलम घर पर आया हुआ है।

तब सौम्या मुझे छेढ़ते हुए बोली- अरे माँ तो आप उन्हें अपनी मालपुआ चखाई या नहीं।

तब मैंने बोला हां जाकर देखो मालपुआ ही खा रहे हैं और कब से तुझे बुला रहे हैं जा?

तब सोम्या बोली- झूठ मत बोलो माँ वह होली मुझसे नहीं तुमसे खेलने आया था और तो फोन पर ही बोल दिया था कि तुम सो जाना मैं तुम्हारी मां के साथ खेलूंगा।

तब मैं बोली अच्छा तो मेरी बेटी का ये प्लानिंग थी। अभी तुझे बताती हूं रुक जा तू।

तभी सौम्या वहां से उठकर दौड़कर बाथरूम में घुस गई और खुद को लॉक कर ली और बोली अब मैं नहीं खोलूंगी मां जब तक तुम्हारा गुस्सा शांत नहीं हो जाता और मुझे छेढ़ते हुए बोली जाओ मां बाहर देखो कहीं मालपुया घट तो नहीं रहा अपनी मालपुआ खिला दो मां उन्हें। और हंसने लगी।

तभी बाहर से आवाज आई आकाश की -मां हम लोग बाहर जा रहे हैं।
तभी मैं दौड़कर बाहर आई तो देखी कि वह दोनों लोग जा रहे थे पहले आकाश निकाला और फिर आलम निकले।

मैं दरवाजे के पास ही खड़ी थी कि थोड़ी देर में आलम फिर से आए और बोले अरे मेरा घड़ी छूट गया था उन्होंने घड़ी टेबल से उठाया और पहने और दरवाजे के पास आकर मुझे फिर से कसकर कमर से पकड़ लिया मैं एकदम से सकपका गई।


आलम ने कहा- आज तो मैं आपके मालपुआ नहीं चख पाया पर किसी दिन जरूर मैं आपके मालपुआ चाखुन्गा और अपनी पिचकारी का रंग आपकी झोली में जरूर भर दूंगा एक दिन और फिर उन्होंने मुझे होंठ पर एक किस कर लिया और निकल गया।
जब आलम यहां से निकल रहे थे मुझे किस करके तब मैं पलटी तो देखी कि मेरी बेटी दरवाजे से खड़ी होकर सब देख रही थी तब मैंने उसे डाटा सब तुम्हारी ही करतूत है तुम क्या चाहती हो?

तब सौम्या बोली मां अपनी मालपुआ बस उन्हें चढ़ा दो और उनकी पिचकारी एक बार लेकर देखो बहुत मजा आएगा मां।
मैं बोली- बहुत शैतान हो गई हो।

आकाश उन्हें बाहर छोड़ने चला गया!
तभी मुझे याद आया कि राज तो घर पर है ही नहीं आखिर राज कहां चला गया?

फिर मैं सौम्या से बोली कि मैं राज को देखकर आती हूं कहां रह गया?
और मैं घर से निकल गई।

शाम के करीब 6:00 बज रहे थे होली अब खत्म हो गई थी कुछ-कुछ लोग पर अभी भी होली चढ़ी हुई थी कुछ लोग नशा में बड़बड़ा रहे थे तो कुछ लोग गाली बक रहे थे तो कुछ लफुओ की टोली अभी भी भाभियों को पेलने के फिराक मे थे।

मैं यहां से निकल कर शीला के घर जाने लगी कि शायद मेरा राज वहीं पर होगा कि तभी मुझे कुछ लोगों की टोली ने घेर लिया।
और बोला- भाभी पिछले साल आप बच गई थी पर इस साल नहीं बचेगी।


पिछले साल की होली मुझे ठीक से याद थी यही चार लफुए थे जिन्होंने मुझे घेर कर मेरी चूचियां दवाई चूतड़ दबाए और मुझे रंग लगाया था फिर भी किसी तरह मैं बच निकली थी लेकिन आज कोई चांस नहीं लग रहा था।

मैं भी कहां काम थी!
मैं उन लोगों से बोली- तो चलो ना देख लेती हूं कौन किसको और कितना अंदर तक रंग लगता है?

उन्होंने बोला कि क्या आप यही लगवाना पसंद करेंगी हम तो पूरा भीतर तक डालेंगे?

तब मैं समझ गई कि ये कुछ ज्यादा करना चाहते हैं?

तब मैं बोली ठीक है फिर जहां तुम लोग ले चलो मैं वही चलने को तैयार हूं।

यह चार लोग थे इनमें से एक का नाम था कालू, सरोज पंडित, तीसरे का नाम था सुखना शर्मा, और चौथा इन सब का लीडर यादव।

यादव ने बोला -कि चलो भाभी जी को यादव जी के खटाल पर ले चलो वहीं पर मस्त रगड़ के इनका रंग लगाएंगे।


मैंने उनसे बोली पिछले साल तो तुम लोग मुझे आंटी बोल रहे थे अब मैं भाभी कैसे हो गई? तब कालू ने बोला- अरे भाभी को भाभी ही कहा जाता है भाभी आपकी उम्र तो देखो एकदम छोटी लग रही हो ऐसा लग रहा है आपसे से उम्र मे तो बडे हम ही हैं पर क्या करें आपकी एकदम से छोटी होगी और हम लोग का बहुत लंबा है आप बस सह् लेना भाभी?

मैं बोली- ओ मेरे देवर लोग मेरे चेहरे पर मत जाना मैं दिखने में भले ही कम उम्र की लगु, जवान लगु पर मेरे तुम जैसे दो-दो जवान बेटे बेटियां हैं।

फिर कालू बोला - वह भाभी हमें फर्क नहीं पड़ता है बस हमें तो आपके में डालना है और निकालना है बस आप मजे लेना और हमें मजे देना।

और सभी हंसने लगे तभी खटाल भी आ गया उन्होंने मुझे खटाल में ले जाकर एक तरफ जहां चार रखा हुआ था पशुओं का वहां पर लेटा दिया।

मैं उनसे बोली चारों अब क्या एक ही बार करोगे एक-एक बार आओगे?

तब उन सब का लीडर यादव बोला की सबसे पहले इस बुर का उद्घाटन यादव जी करेंगे मैडम आप बस लेटी रहो।

मेरी भी बुर में कब से चुनचुनी मच रही थी चुदवाने को?


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तभी यादव ने रंग लिया और मेरे पूरे शरीर घसने लगा और मेरे ब्लाउज को खोल दिया और चूचियों को आजाद कर दिया।
मैं भी आनंद में अपनी आंखें बंद कर ली और उसे अपनी चूचियों को चुस्वाने लगी।

पास में पड़े अबीर को मैंने उठाया और यादव के पूरे मुंह पर पोत दिया।

वहां पर सभी उसे देखकर हंसने लगे मैं भी हंसने लगी तभी यादव गुस्सा हुआ और मेरी चूची को कसकर कट कट कर चूसने लगा और मेरे मुंह से सीस्कारी निकलने लगी।

ओ मेरे यादव जी चूसोना सब तुम्हारे लिए तो है।
फिर यादव ने मेरी जांघों को फैले और साड़ी को कमर तक उठा दिया मेरी पैंटी को निकाला और मेरी बूर में मुंह लगा दिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगा।


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मैं वहां पास के रखे सारे पुवाल को छीटने लगी एकदम तड़प रही थी एकदम से गर्म हो रही थी मेरी बूर पानी छोड़ रही थी और वह लगातार कहते जा रहि थी गजब मेरे यादव जी एकदम बूर को चाट चाट कर लाल कर दो। मेरी मुलायम बूर को अअअअअअह्ह्ह।

तभी यादव उठा और अपने लंड को मेरे चुत के निशाने पर लगाया और सट से पूरा चूत में उतार दिया मैं तो एकदम से कराह उठी कि वो यह क्या गरम सरिया डाल दिया मेरे बूर के अंदर?
ऊऊऊह्ह्ह आआह्ह्ह
इसी तरह यादव जोर-जोर से मेरे अंदर अपने लंड को घुसता रहा। मैं उसके हर धक्के से पूरी तरह सिहर उठती थी।
और इसी तरह यादव के बाद कालू कालू के बाद सरोज और सरोज के बाद कालू ने मुझे चोदा।

फिर उन्होंने कहा कि भाभी जी अब आगे कब दोगी?

तब मैंने उन्हें कहा कि अब आगे का सपना मत देखो आज होली थी बस आज ले लिया बहुत है।
तब यादव ने कहा कि अरे भाभी जी हम तो कभी भी ले लेते हैं बस अगर आपका मन करे तो आ जाना हमारे खटाल में हम आपकी खूब बाजा बजा कर लेंगे।

मैं यादव के गोद में बैठ गई और उसे पूरा प्यार से बोली अरे मेरी यादव जी अगर मेरा मन हुआ तो मैं आपका लेने जरूर आऊंगी।

और फिर मैं वहां से निकल गई। वहां से निकाल कर मैं सीधे अपने घर आई। घर आते ही देखा कि राज तो घर आ चुका है और वह टीवी देख रहा था उसके साथ ही सौम्या भी बैठकर टीवी देख रही थी और आकाश बगल में बैठा हुआ था मैं जाकर आकाश के पास बैठ गई।

सौम्या ने मुझसे पूछा कहां इतनी देर लगा दी थी मां? मैं सौम्या को कोई जवाब दे नहीं पाई फिर मैं वहां से उठकर सीधे बाथरूम में चली गई।

जब मैं बाथरुम से निकाल कर आई तब आकाश मेरे पास आया और मेरे गले लग गया और बोला मां आज तो होली खत्म हो गई मुझे और दीदी को कल यहां से निकलना है पटना जाने के लिए वहां पर कोचिंग तुरंत ही स्टार्ट होने वाली है।

फिर मैं अपने आकाश को उसके गालों पर एक किस देते हुए बोली की ठीक है बेटा मैं तुम लोगों की तैयारी कर दूंगी कल चले जाना और उसे प्यार से मैं उसके गालों पर किस दे रही थी कि तभी सौम्या ने आवाज लगाया और आकाश अपना मुंह उसके उधर से इधर किया वैसे ही उसका मुंह और मेरा दोनों का एक में सेट किया और फिर से एक दूसरे के होंठ को चूसने लगे।


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मुझे पता नहीं क्या हुआ मेरी आंख अपने आप बंद हो गई और उसे के होंठ को मैं चूसने लगी कि तभी एक और आवाज लगाई सौम्या और हम दोनों अलग हो गए?

फिर आकाश जाकर सौम्या के पास बैठ गया और मैं अपने काम में लग गई।

रात में मैं और सौम्या सोई हुई थी और आकाश और राज दोनों एक साथ सोए हुए थे कि तभी रात को मेरी नींद खुली तो देखी की सौम्या मेरे पास नहीं थी तो मैं उठकर जाकर बाहर देखने लगी तब किचन से कुछ आवाज आ रही थी।

मैं किचन में देखे की सौम्या का एक पैर किचन के ऊपर पड़ा हुआ है और एक नीचे और पीछे से मेरा बेटा राज उसके बूर में लगातार तेज धक्के लगा रहा था और सौम्या की धीरे-धीरे सिसकारी निकल रही थी।


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उन दोनों को वैसे ही छोड़ कर जाकर सो गई। सुबह में उठकर जल्दी से खाना पीना बना दी क्योंकि आज मेरे बेटे और बेटी बाहर निकलने वाले थे? मैं जाकर सौम्या को उठाई और बोली जाओ जाकर फ्रेश हो जाओ और खाना खा लो आज तुम लोगों को निकलना भी है।
फिर मैं राज और आकाश को भी उठा दी और इन तीनों लोगों को खाना खिलाकर फिर इन दोनों को तैयार करके मैं और राज दोनों इन लोगों को स्टेशन पर छोड़ने गए।

सौम्या और आकाश दोनों ही मुझे और राज से गले मिले और फिर ट्रेन पकड़े और पटना के लिए निकल गए।

मैं और राज दोनों ही घर जाकर थोड़ा आराम करने लगे राज सो गया।

तभी मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया।
हेलो भाभी
मेरा मालपुआ अभी आपके पास है मैं जल्द ही आ रहा हूं आपके मालपुए को खाने के लिए आप बस रेडी रहना।

यह मैसेज तो आलम का था पर उससे मेरा नंबर कहां से मिला और वह कब आ रहा है? यह सोचते सोचते मैं सो गई।

धन्यवाद अंत तक बने रहने के लिए

हैं अगले भाग में।🙏
बहुत ही गरमागरम कामुक और मदमस्त अपडेट है मजा आ गया
 

Mass

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hot update bhai..good one...
 
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