बहुत ही गरमागरम कामुक और उन्मादक अपडेट है मजा आ गयाUPDATE 05मुहबोला बेटा से प्यार S1 #UPDATE 5
(होली स्पेशल)
मैं और मेरी बेटी सौम्या दोनों शीला के घर आ गए।
शीला का घर बहुत बड़ा था वह पुराने जमाने का था उसमें गलियारा, ओसारे भी थे और बहुत बड़ा आंगन था जिसमें पूरा कीचड़ माटी करके एकदम होली खेलने के लिए तैयार किया गया था।
यहां तो पहले से ही होली चल रही थी शीला पूरा लेटी हुई थी और उसके पति समर भी पूरे लेटाए हुए थे मेरा बेटा आकाश भी यही था और राज भी यही था।
जैसे ही मैं यहां आई वैसे ही शीला के पति समर मेरे पास आ गए और
बोले- सुनीता जी आज तो मैं आपको पूरी तरह से लगाऊंगा ऊपर भी नीचे भी और भीतर भी।
यह सुनकर वहां जो भी खड़े थे सब हंसने लगे।
मैं भी कहां चुप रहने वाली थी मैं भी उनसे कह दी हां तो आप भी तैयार रहना मैं भी आपको पूरी तरह से लगा दूंगी आज और,
देखती हूं आपका कितना भीतर तक आप लगा पाते हैं मुझे?
फिर सभी लोग हंसने लगे।
सौम्या उठी और राज के पास गई और बोली
सौम्या- राज आज तो मैं तुझे छोड़ने वाली नहीं हूं कहां बच रहा है बच्चु मुझसे?
फिर वह उसके साथ होली खेलने लगी और उसके कपड़े के भीतर ऊपर हर जगह रंग लगाने लगी।
आकाश ने मुझे चुटकी भर रंग निकाला और गाल पर लगाकर हैप्पी होली काहा। मैं भी आकाश को रंग लगाकर बोला कि हैप्पी होली बेटा और तभी शीला आई और
बोली ऐसे होली नहीं खेलते उसने पूरा रंग लिया और उसके कमर में लगाने लगी आकाश वहां छटपटाने लगा छटपटाने के साथ ही उसका लंड शीला से टच हो गया।
शीला ने शरारत की और मेरे सामने ही उसके लंड को पकड़ कर मसल दिया और हंसने लगी।
फिर थोड़ी देर में- शीला के पति मुझे मेरे गालों पर रंग लगाए। और मैं वहां से चटपटाती हुई भाग गई।
वह मेरे पीछे दौड़े और मुझे पकरने के लिए आंगन की तरफ आए मैं आंगन में भागी पर मेरा पैर फिसल गया और मैं वहीं गिर गई। फिर शीला के पति मुझे सहारा देकर उठाएं और बोले कहीं चोट तो नहीं लगी ना और मेरे कमर को दबाने लगे।
मुझे कुछ खास चोट तो नहीं लगी थी पर जहां पर गिरी थी वहां से थोड़ी सी कमर में चोट लगी थी वह दबा रहे थे तो थोड़ा आराम मिल रहा था मैं बोली कि हां थोड़ा बहुत लगा है।
वे बोले कोई बात नहीं मैं आपको दबाकर ठीक कर देता हूं।
फिर उन्होंने मेरे कमर को दबाने लगे और दबाते दबाते हुए कभी मेरे कमर को दबाते तो कभी वह मेरे नाभि के पास चले जाते हैं मैं उन्हें यह सब करते देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।
कभी कमर को दबाते तो कभी मेरे दोनों कूल्हों को दबा देते हैं फिर कभी वह मेरे नाभि में उंगली कर देते मैं उनकी यह शरारत से काफी खुश थी मजा आ रहा था।
मैंने भी कभी-कभी उनके बालों का सहला देती तो कभी उनके बालों को कस कर खींच देती जिससे उनकी आह निकल जाती। उनकी आह्ह् सुनकर मुझे हंसी आ जाती थी।
फिर वह मुझे कसकर कमर में कभी चिकोटी काट लेते तो कभी नाभि में कस कर उंगली कर देते जिससे कि मेरी आह निकल जाती।
हम दोनों को काफी मजा आ रहा था। तभी उनकी शरारत और बड़ी और वह मेरे साड़ी के अंदर हाथ डालने लगे।
मैं उन्हें कसकर धक्का दे दी और वह नीचे गिर गये मैं वहां से दौड़कर भाग गई।
जब मैं भाग कर हॉल वाले रूम के पास आई तो देखी कि मेरी बेटी सौम्या और मेरा बेटा राज दोनों मिलकर होली खेल रहे थे सौम्या राज के ऊपर चढ़ी हुई थी जिससे कि राज का लंड सौम्या के योनि से दबी हुई थी और सौम्या उसे जबरदस्ती रंग लगाने की कोशिश कर रही थी राज भी उसे हटाने का नाकामयाब कोशिश कर रहा था जिससे कि कई बार सौम्या की चूचियों को वह हाथ से लगा देता था।
इन दोनों के जुगलबंदी चलती रही कभी सौम्या उसके लंड पर बैठी रहती तो कभी राज उसके ऊपर चढ़कर उसे रंग लगाने लगता और इन दोनों मिलकर भाई-बहन खूब होली खेल रहे थे फिर मैं वहां से भागी क्योंकि यहां भी शीला के पति मेरे पीछे आ रहे थे।
मैं यहां से भाग कर ओसारे के तरफ गई तब दिखै की शीला और मेरा बेटा आकाश दोनों एक दूसरे को रंग लगा रहे हैं।
आकाश ने शीला को पीछे से जबरदस्ती पकड़ा हुआ था और शीला झुकी हुई थी जिससे की शिला की गांड का भार आकाश के लंड पर था।
तभी मैं उनके सामने गई तब शीला मुझे देखकर बोली है रे सुनीता बचा अपने इस नौजवान बेटे से यह तो मेरी फाड़ ही डालेगा कितनी जबरदस्ती रंग लगा रहा है।
तब मैं बोली नहीं बेटा आकाश इसे छोड़ना मत यह बहुत उछल कूद कर रही थी कब से, अब तो पूरा रंग लगा।
तभी मैं भी उन दोनों का साथ देने के लिए गई तब शीला ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझे भी झुका दिया जिससे कि मैं
अपने बेटे आकाश के गले के पास मेरा मुंह चला गया और हम दोनों का मुंह एक दूसरे के पास आ गया ऐसा लग रहा था कि और थोड़ी हलचल होती तो हम दोनों के होंठ एक दूसरे से सट्ट जाते। तभी शीला ने एक हरकत की और मुझे खींच लिया और आकाश भी थोड़ा आगे की ओर हो गया जिससे कि हम दोनों मां बेटे का होंठ एक दूसरे से मिल गए शीला तो नीचे की ओर झुकी हुई थी और उसकी गांड मेरे बेटे के लंड से दबा हुआ था और मैं और मेरे बेटे का मुंह एक दूसरे से सटा हुआ था ।
मैं झट से अलग हुई और शीला के दोनों चूचियों को अपने बेटे के सामने ही मसल दी।
मेरा बेटा भी शीला को कसकर पकड़ लिया और अपने से सटा लिया जिससे कि अब उसका लंड शीला के गांड में जबरदस्त घुस रहा था मेरा तो मन हुआ कि अभी इसकी सलवार को फाड़ दू जिससे कि मेरा बेटे का लैंड पूरी तरह से घुस जाए।
मुझे जाने क्या हुआ और मैं शीला के सलवार पर हाथ लगा दी? मेरा जैसे ही शीला की सलवार पर हाथ लगा मैंने महसूस किया कि उसकी बूर तो खुली हुई है उसने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी वह सिर्फ सलवार में थी अगर सलवार गलती से भी खुल जाती तो मेरे बेटे का लंड उसकी बूर में समा जाता है।
तभी शीला मेरी चूची को दबाने लगी और मुझे गुस्सा आया और मैं उसकी सलवार को खींच दी जिससे कि उसकी बूर की जगह पर थोड़ी सी सलवार फट गई और उसकी बूर एकदम साफ नजर आने लगी।
मैं अपने बेटे के सामने यह सब देखकर काफी शर्मिंदा महसूस की और तुरंत वहां से भागने लगी।
जैसे ही मैं वहां से भागी
मैं देखी की शीला के पति मुझे ही ढूंढ रहे हैं तो मैं एक खिड़की के पास छुप गई।
वहां से मुझे शीला और आकाश साफ नजर आ रहे थे। आकाश ने शीला को छोड़ दिया था तभी शीला ने आकाश पर हमला किया और उसके लोअर को खींचकर उतार दिया जिससे कि आकाश का फनफानाता हुआ लंड एकदम से टनटना कर बाहर निकाला और शीला के मुंह के पास आ गया।
अब आकाश को गुस्सा आया और उसने शीला के गाल को धर के पूरा मिस दिया।
वह इस हमले में दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर गए और शीला के चूचियां आकाश के सीने से दब गई और उसका लंड शीला के बूर पर लगने लगी।
फिर शीला ने जोर लगाया और उसके ऊपर आ गई आकाश को नीचे कर दी और पास में पड़े कीचड़ मिट्टी को उसके छाती पर रगड़ने लगी इसी हमले में आकाश ने नीचे से ही उसकी चूची को पकड़ लिया।
तभी शीला ने कसकर उसके बालों को खींचा और उसके गाल पर एक दांत गड़ा दी।
फिर आकाश ने उसके चूचियों को कस कर खींचा और उसके होंठ को अपने होंठ में मिलाकर चूसने लगा।
अब दोनों गर्म हो चुके थे दोनों एक दूसरे के ऊपर पड़े एक दूसरे के होंठ को चूस रहे थे और आकाश उसके दोनों चूचियों को दबा रहा था।
तभी शीला ने थोड़ी सी अपनी गांड को उठाई और हाथ को उसके लंड पर ले गई जो की पूरी तरह से टाइट थी।
शीला अपनी बूर को चौड़ा करके थोड़ी सी जगह बनाई और लंड को अपनी बूर पर सेट करके धीरे से अंदर की ओर ले ली।
आकाश उसकी चूचियों को चूस रहा था और शीला उसके लंड पर उठक बैठक कर रही थी।
फिर आकाश शीला को नीचे किया और उसके बूर में फटी सलवार की जगह से ही लंड को पेल दिया और उसे चुदाई करने लगा और धीरे-धीरे उसकी दोनों चूचियों को मसल मसल कर चूस रहा था और कभी काट रहा था तो कभी उसके होंठ पर चुमा ले रहा था।
मैं यह सदृश्य देखकर एकदम से गर्म हो रही थी कि तभी मेरे पीछे से कुछ हमला हुआ।
यह हमला था शीला के पति का जो आते ही मेरे दोनों चूचियों को अपने हाथों में लेकर दबा दिए थे मैं एकदम से सीहर उठी।
शीला के पति की हमला से मै एकदम से अछामहित् थी।
उन्होंने आकर मुझसे कहा -क्या बात है सुनीता जी आप केवल देखकर मजा लोगी चलो आज सब करके मजा लेते हैं?
इधर शीला को मेरे बेटे आकाश ने पूरे जोर से चोदना शुरू किया था।
और इधर शीला के पति मुझे अपने गोद में उठकर फिर से मुझे आंगन में ले जा रहे थे जहां कोई नहीं था।
जैसे ही उन्होंने मुझे आंगन में उतारा मैं तुरंत भगाने की कोशिश की पर उन्होंने मुझे जाने नहीं दिया फिर से पकड़ लिया।
आंगन में रंगों से भरा हुआ एक टब था वह पास में ही था मैंने उन्हें टब के पास ले गई और प्यार से उनके गाल को सहलाते हुए एक किस की और टब में धकेल दिया। वह बेचारे उस गिर कर रंग से नहा लिए। और मैं वहां से हंसते हुए भाग गई?
जैसे ही मैं हाल में आई मैं देखी कि वहां राज और सौम्या नहीं थे तो मुझे लगा कि यह दोनों आखिर कहां चले गए होली खेलते खेलते, तो मैं थोड़ा सा आगे बड़ी तब
मुझे ऊपर जाती सीढ़ियों के पास से कुछ आवाज आई?
मैं देखी कि सीढ़ियों के पास मेरे बेटे राज लेटा हुआ है और मेरी बेटी सौम्या उसके ऊपर चढ़ी हुई है और वह दोनों बिल्कुल नंगे हैं।
मेरा मुंहबोला बेटा मेरी सगी बेटी को चोद रहा था यह देखकर मेरी तो फिर से बूर गीली होने लगी थी एकदम से उसकी चूचियां हिल रही थी वह अभी छोटी-छोटी चूचियां थी मेरी बेटी पटना में रहकर काफी चुदक्कड़ हो गई थी जिसकी वजह से वह अपने भाई के ऊपर चढ़कर खूब मजे लेकर चुदाई कर रही थी।
राज उसके छोटे-छोटे चूचियों को अपने हाथ से धर कर दबा रहा था और सौम्या उसके ऊपर चढ़कर धीरे-धीरे हिल रही थी और आंखें बंद कर आआआह्ह कर रही थी। आज अपनी सगी बेटी की चुदाई अपने मुंहबोले बेटे से होते देखी तो फिर से मेरी बूर एकदम से पानी पानी होने लगी मैं वहां से जल्दी ही भाग गई।
मैं भाग कर जैसे ही हाल के तरफ आई की फिर से मुझे शीला के पति ने पकड़ लिया और इस बार वह मुझे गोद में उठाकर मेरी गालों को दांत से काटते हुए बोले क्यों सुनीता जी पक्की खिलाड़ी हो एकदम से मुझे चक्मा देकर भाग रही हो?
वह मुझे उठा कर ले गए और टब में खुद भी घुसे और मुझे भी
टब का पानी अधिक नहीं था हम दोनों उसमें बैठ गए वह मुझे कसकर पकड़ के अपने लंड पर बैठाये हुए थे मेरी साड़ी कमर तक उन्होंने उठा दी और पानी में बैठने की वजह से छाती तक डूब गए थे जिसकी वजह से बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था वह मेरी साड़ी को ऊपर उठाकर अपने लंड को मेरे पैंटी के ऊपर से ही बुर को रगड़ रहे थे और बैठे हुए थे।
फिर उनकी हरकत शुरु हुई और वह मेरी चूचियों को दबाने लगे और मेरे गाल को काटने लगे।
कभी वह मेरे गाल को चूमते तो कभी गर्दन को चूमते तो कभी पीठ को चुमते तो कभी बालों को सहलाते और नीचे से लंड को मेरी बूर पर रगड़ रहे थे और एक हाथ से मेरी बूर को सहला रहे थे तो दूसरे हाथ से मेरी चूचियों को दबा रहे थे।
यही सब कर रहे थे कि अचानक मेरा बेटा आकाश आंगन में आ गया। हम दोनों हड़बड़ा गए और उन्होंने मुझे छोड़ दिया मैं डरकर तुरंत से वहां से उठी और निकाल कर भाग गई।
मैं बेटे के पास से जब निकल रही थी तब मुझे काफी शर्मिंदगी महसूस हुई कि मैं किसी गैर के बाहों में पड़ी हुई थी और मेरा बेटा मुझे देख लिया हालांकि वह अभी-अभी शीला की चुदाई करके आ रहा था।
शीला के पति काफी गुस्सा हुए वह एकदम गर्म जोशी में थे और ऐसा लगा कि उनके गर्म तवे पर किसी ने पानी फेंक दिया उन्होंने तुरंत मेरे बेटे को अपने पास बुलाया और आकाश के दोनों गाल पकड़ कर गुस्से से बोले अरे बेटा तुम यहां क्यों आ गए वहीं क्यों नहीं रहे?
तब आकाश बोला अरे मैं तो आपको बुलाने के लिए आया था वह शीला आंटी आपको खाने के लिए बुला रही थी।
मैं वहीं खड़ी, खिड़की के पास सब देख रही थी कि तभी उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी मैं तुरंत वहां से भाग कर अपने घर की ओर निकलने लगी कि तभी जैसे ही शीला के घर से मैं निकली और दरवाजे से बाहर जा ही रही थी कि एक सफेद बांग्ला कुर्ता पहने हुए आदमी से मैं टकरा गई वह देखने में काफी हैंडसम था काला चश्मा लगाए हुए बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखे हुए एकदम से गोर फुले हुए गाल और मजबूत बाहो वाला मैं जैसे ही उसे टकराई उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
वह मुझे देख रहा था पर मैं उसे देख रही थी वह मुझे शायद पहचान लिया था इसलिए उसने बोला अरे आप अभी गिर जाती?
मेरा बदन गीला था सब अंग झलक रहे थे और मेरे शरीर पर कीचड़ भी लगे हुए थे जो उसके सफेद कपड़े को गंदा कर दिया था मैं उसे देखते ही काफी शर्मा गई और
मै बोली-- मैंने तो आपका कपड़ा गंदा कर दिया सॉरी तब
उसने बोला- अरे कोई बात नहीं मैं तो आपसे ही मिलने आ रहा था।
मैं एकदम से सकपका गई कि यह हैंडसम आदमी मुझसे क्यों मिलने आ रहा था यह कौन था मैं तो पहचान ही नहीं पाई?
धन्यवाद दोस्तों अंत तक बने रहने के लिए। अब मैं आपसे अगले भाग में मिलेगी अभी होली जारी है।![]()
बहुत ही गरमागरम कामुक और मदमस्त अपडेट है मजा आ गयाUPDATE 06मुहबोला बेटा से प्यार
(होली स्पेशल)
अब तक आपने पढ़ा की जब मैं शीला के घर से निकल रही थी तब किसी सफेद कुर्ते वाले आदमी से टकरा गई जिसकी मजबूत बाहों में मैं समा गई थी मैं उसे देख रही थी और वह मुझे देख रहा था वह मुझे पहचान लिया था पर मैं उसे नहीं पहचान पाई थी। अब आगे।
उन्होंने मुझसे कहा -लगता है आप मुझे नहीं पहचानी मैं सौम्या के दोस्त हूं आलम।
मैं एकदम चक्कीत रह गयी ये तो मुसलमान है सौम्या का दोस्त यानी कि उसका बॉयफ्रेंड है।
इसलिए मुझे बोल रहा था कि मेरे साथ ही यह होली खेलने आया है।
मैं उन्हें बोली चलिए घर चलते हैं। और मैं उन्हें अपने घर लेकर आ गई।
मैं उन्हें हाल में सोफे पर बैठा दिया और सौम्या को बुलाने लगी।
पर सौम्या तो आई ही नहीं मैं उसके रूम में जाकर देखी तो वह तो टांग पसार कर सो रही थी।
राज से चुदवाने के बाद थक गई होगी इसलिए सो रही है।
मैं सौम्या को सोते हुए छोड़कर आलम के पास आई और उनसे पूछने लगी कि आप क्या लेंगे?
तब उन्होंने कहा मैं तो बस आपके मालपुआ खाने आया हूं।
मैं एकदम से शकपका गई। फिर मैं जल्दी से किचन में गई और उनके लिए पानी और कुछ बने हुए मालपुआ उठाकर लाइ और उनके सामने रख दिए।
तभी वह खड़ा हुआ मेरे पास आया मैं उनके सामने ही खड़ी थी।
आलम ने बोला- अरे मैं इस मालपुआ की बात नहीं कर रहा था।
मैं काफी डर गई थी कि यह बंदा मेरे साथ किया करने वाला है और यह किस मालपुए की बात कर रहा है।
फिर मैं डरती हुई बोली की जी आप कौन से मालपुआ खाएंगे?
फिर आलम बोला अरे आप तो डर रही है मैं तो बस मजाक कर रहा था।
तब जाकर मेरी जान में जान आई और वह हंसने लगा।
आलम फिर से बोलना शुरू किया। और उसने बोला मैं तो बस आपको अपने पिचकारी से रंग डालने के लिए आया था अगर आप तैयार हो तो बोलो मैं यही खड़े-खड़े आपको डाल देता हूं।
मैं फिर से डर गई। मुझे डर लग रहा था कि कहीं यह अपनी उस पिचकारी की तो बात नहीं कर रहा क्योंकि यह तो और कोई पिचकारी लेकर आया नहीं है ना ही कोई रंग लाया है बिल्कुल सफेद सा हो कर आया है आखिर किस पिचकारी की बात कर रहा था?
फिर वह मेरे पास आया और बोला कि बोलिए भाभी जी अगर आपकी इजाजत है तो मैं आप में मेरी पिचकारी डाल दूँ।
मैं एकदम से घबरा गई। तब उसने फिर से हंसने लगा और बोला अरे मैं तो मजाक कर रहा था और उसने एक रंग की पुड़िया निकाली और मेरे गालों पर लगाकर बोला हैप्पी होली भाभी जी।
फिर मैं बोली अरे आप तो मेरे बेटी के दोस्त हो और मेरे बेटे जैसे हो और मैं आपकी भाभी कैसे हो गई?
आलम ने कहा- अरे इतनी खूबसूरत औरत को भला कोई कैसे आंटी का सकता है आप तो बिल्कुल सौम्या की बड़ी बहन जैसी लगती हो अगर मुझे सौम्या पहले ना मिली होती तो मैं आप ही को पसंद करता और आपसे ही शादी करने की डिमांड करता।
मैं उसकी बातों से एकदम से घबरा गई यह क्या कह रहा है?
अच्छा ठीक है आपको जो कहना हो कहो पर चलो अब आप मालपुए खा लो?
आलम ने कहा- अरे मैं सच में यह मालपुआ खाने नहीं आया मैं तो आपकी मालपुआ खाने के लिए आया हूं।
मैं फिर से चक्रा गई यह क्या बात को घुमा रहा था?
मैंने उससे कहा- किस मालपुआ की बात कर रहे हैं बोलिए मैं अभी फिर से बना कर ला दूंगी।
तब आलम ने कहा- अरे मैं कोई मालपुए खाने नहीं आया मैं तो मजाक कर रहा हूं मैं बस आपके साथ होली खेलने आया हूं।
मैं बोली- ठीक है।
फिर आलम में भरमुथि रंग लिया और मेरे पेट पर रगड़ते हुए गालों पर और मेरी गर्दन पर लगा दिया।
फिर मैं भी रंग लिया उनके गालों पर लगाने लगी जो काफी मुलायम थे और बड़े-बड़े दाढ़ी भी थे उनके गाल पर रंग लगाते ही मेरे अंदर पता नहीं कौन सी वासना भड़क उठी मैं उससे चिपक गई और वह भी मुझे अपनी बाहों में ले लीये।
मेरी दोनों चूचियाँ उनके चौड़ी छाती में दबी हुई थी और उनका लंड का भर मेरे योनि पर लग रहा था।
वह अपना चेहरा थोड़ा नीचे किये और उनका गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकराने लगे हम दोनों का चेहरा बिल्कुल एकदम पास में था अगर वह थोड़ा और झुक जाते तो हम दोनों के होंठ एकदम से मिल जाते मैं भी नहीं चाहती थी कि उनसे दूर होउ मैं भी थोड़ा सा गरदन उठाई और वह भी थोड़ा सा नीचे झुके और हम दोनों के होंठ एकदम से मिल गए।
मेरी आंखें तो बंद हो गई और वह मेरे होंठ को एकदम से चूसने लगा। मुझे डर था कि कहीं मेरे बेटी अंदर से जाग न जाए।
तभी मैं उससे अलग हुई।
और बोली यह ठीक नहीं है आप रंग लगाइए और मालपुआ खा लीजिए?
तब आलम ने बोला- अरे मैं तो आपके मालपुआ खाने के लिए आया हूं और वह फिर से मुस्कुराने लगे।
मैं इस बार सब समझ रही थी कि वह
किस मालपुए की बात कर रहे थे।
तभी वह मेरे पास आए और मेरे गालों को रंग लगाते हुए अपने चेहरे को मेरे चेहरे के करीब लाये और मेरे होंठ पर फिर से अपने होंठ रख दिए और उन्होंने चूसना शुरू कर दिया। मुझ में भी वासना भड़क उठी थी मुझे भी ना रहा गया और मैं भी अपनी दोनों हाथ उनके गले में डालकर चुप चाप अपनी होंठ चुसाई के आनंद लेने लगी आंखें बिल्कुल बंद कर ली और एकदम रस लेकर उनके कोमल होंठ को चूस रही थी और अपने कोमल मुलायम होंठ को चुसवा रही थी मेरी दोनों चूचियां उनके सीने में दबी हुई थी।
तभी डोर बेल बजी और हम दोनों की तंद्रा टूट गई।
मैं उनसे अलग हुई और किचन में भाग गई।
वह भी भाग कर मेरे साथ किचन में आये और बोले मैं इस हालत में कैसे वहां जाऊं?
तब मैंने उन्हें उनके हाथ धुलवाई और मैं अपने आप को ठीक किया और उन्हें सोफे पर बैठ कर मालपुआ परोसी और तब जाकर दरवाजा खोला।
दरवाजे पर मेरा बेटा आकाश आया हुआ था।
वह आलम को देखते ही बोला
आकाश- अरे आलम तुम यहां?
आलाम- हां मेरे दोस्त मैं तो यहां किसी के मालपुआ खाने आया था।
आकाश- हां तो खाए कि नहीं मालपुए।
आलम- अरे बस बस खा ही रहा हूं।
मैं वहां से उठकर अंदर चली गई।
मैं अंदर बिस्तर पर बैठी ही थी कि सौम्या जाग गई और मुझसे बोली।
सौम्या- आप कब होली खेल कर आई?
मैं बोली जब तुम टांग पसारकर सो रही थी तब आई थी।
मैं सौम्या को बताई कि उसका दोस्त आलम घर पर आया हुआ है।
तब सौम्या मुझे छेढ़ते हुए बोली- अरे माँ तो आप उन्हें अपनी मालपुआ चखाई या नहीं।
तब मैंने बोला हां जाकर देखो मालपुआ ही खा रहे हैं और कब से तुझे बुला रहे हैं जा?
तब सोम्या बोली- झूठ मत बोलो माँ वह होली मुझसे नहीं तुमसे खेलने आया था और तो फोन पर ही बोल दिया था कि तुम सो जाना मैं तुम्हारी मां के साथ खेलूंगा।
तब मैं बोली अच्छा तो मेरी बेटी का ये प्लानिंग थी। अभी तुझे बताती हूं रुक जा तू।
तभी सौम्या वहां से उठकर दौड़कर बाथरूम में घुस गई और खुद को लॉक कर ली और बोली अब मैं नहीं खोलूंगी मां जब तक तुम्हारा गुस्सा शांत नहीं हो जाता और मुझे छेढ़ते हुए बोली जाओ मां बाहर देखो कहीं मालपुया घट तो नहीं रहा अपनी मालपुआ खिला दो मां उन्हें। और हंसने लगी।
तभी बाहर से आवाज आई आकाश की -मां हम लोग बाहर जा रहे हैं।
तभी मैं दौड़कर बाहर आई तो देखी कि वह दोनों लोग जा रहे थे पहले आकाश निकाला और फिर आलम निकले।
मैं दरवाजे के पास ही खड़ी थी कि थोड़ी देर में आलम फिर से आए और बोले अरे मेरा घड़ी छूट गया था उन्होंने घड़ी टेबल से उठाया और पहने और दरवाजे के पास आकर मुझे फिर से कसकर कमर से पकड़ लिया मैं एकदम से सकपका गई।
आलम ने कहा- आज तो मैं आपके मालपुआ नहीं चख पाया पर किसी दिन जरूर मैं आपके मालपुआ चाखुन्गा और अपनी पिचकारी का रंग आपकी झोली में जरूर भर दूंगा एक दिन और फिर उन्होंने मुझे होंठ पर एक किस कर लिया और निकल गया।
जब आलम यहां से निकल रहे थे मुझे किस करके तब मैं पलटी तो देखी कि मेरी बेटी दरवाजे से खड़ी होकर सब देख रही थी तब मैंने उसे डाटा सब तुम्हारी ही करतूत है तुम क्या चाहती हो?
तब सौम्या बोली मां अपनी मालपुआ बस उन्हें चढ़ा दो और उनकी पिचकारी एक बार लेकर देखो बहुत मजा आएगा मां।
मैं बोली- बहुत शैतान हो गई हो।
आकाश उन्हें बाहर छोड़ने चला गया!
तभी मुझे याद आया कि राज तो घर पर है ही नहीं आखिर राज कहां चला गया?
फिर मैं सौम्या से बोली कि मैं राज को देखकर आती हूं कहां रह गया?
और मैं घर से निकल गई।
शाम के करीब 6:00 बज रहे थे होली अब खत्म हो गई थी कुछ-कुछ लोग पर अभी भी होली चढ़ी हुई थी कुछ लोग नशा में बड़बड़ा रहे थे तो कुछ लोग गाली बक रहे थे तो कुछ लफुओ की टोली अभी भी भाभियों को पेलने के फिराक मे थे।
मैं यहां से निकल कर शीला के घर जाने लगी कि शायद मेरा राज वहीं पर होगा कि तभी मुझे कुछ लोगों की टोली ने घेर लिया।
और बोला- भाभी पिछले साल आप बच गई थी पर इस साल नहीं बचेगी।
पिछले साल की होली मुझे ठीक से याद थी यही चार लफुए थे जिन्होंने मुझे घेर कर मेरी चूचियां दवाई चूतड़ दबाए और मुझे रंग लगाया था फिर भी किसी तरह मैं बच निकली थी लेकिन आज कोई चांस नहीं लग रहा था।
मैं भी कहां काम थी!
मैं उन लोगों से बोली- तो चलो ना देख लेती हूं कौन किसको और कितना अंदर तक रंग लगता है?
उन्होंने बोला कि क्या आप यही लगवाना पसंद करेंगी हम तो पूरा भीतर तक डालेंगे?
तब मैं समझ गई कि ये कुछ ज्यादा करना चाहते हैं?
तब मैं बोली ठीक है फिर जहां तुम लोग ले चलो मैं वही चलने को तैयार हूं।
यह चार लोग थे इनमें से एक का नाम था कालू, सरोज पंडित, तीसरे का नाम था सुखना शर्मा, और चौथा इन सब का लीडर यादव।
यादव ने बोला -कि चलो भाभी जी को यादव जी के खटाल पर ले चलो वहीं पर मस्त रगड़ के इनका रंग लगाएंगे।
मैंने उनसे बोली पिछले साल तो तुम लोग मुझे आंटी बोल रहे थे अब मैं भाभी कैसे हो गई? तब कालू ने बोला- अरे भाभी को भाभी ही कहा जाता है भाभी आपकी उम्र तो देखो एकदम छोटी लग रही हो ऐसा लग रहा है आपसे से उम्र मे तो बडे हम ही हैं पर क्या करें आपकी एकदम से छोटी होगी और हम लोग का बहुत लंबा है आप बस सह् लेना भाभी?
मैं बोली- ओ मेरे देवर लोग मेरे चेहरे पर मत जाना मैं दिखने में भले ही कम उम्र की लगु, जवान लगु पर मेरे तुम जैसे दो-दो जवान बेटे बेटियां हैं।
फिर कालू बोला - वह भाभी हमें फर्क नहीं पड़ता है बस हमें तो आपके में डालना है और निकालना है बस आप मजे लेना और हमें मजे देना।
और सभी हंसने लगे तभी खटाल भी आ गया उन्होंने मुझे खटाल में ले जाकर एक तरफ जहां चार रखा हुआ था पशुओं का वहां पर लेटा दिया।
मैं उनसे बोली चारों अब क्या एक ही बार करोगे एक-एक बार आओगे?
तब उन सब का लीडर यादव बोला की सबसे पहले इस बुर का उद्घाटन यादव जी करेंगे मैडम आप बस लेटी रहो।
मेरी भी बुर में कब से चुनचुनी मच रही थी चुदवाने को?
तभी यादव ने रंग लिया और मेरे पूरे शरीर घसने लगा और मेरे ब्लाउज को खोल दिया और चूचियों को आजाद कर दिया।
मैं भी आनंद में अपनी आंखें बंद कर ली और उसे अपनी चूचियों को चुस्वाने लगी।
पास में पड़े अबीर को मैंने उठाया और यादव के पूरे मुंह पर पोत दिया।
वहां पर सभी उसे देखकर हंसने लगे मैं भी हंसने लगी तभी यादव गुस्सा हुआ और मेरी चूची को कसकर कट कट कर चूसने लगा और मेरे मुंह से सीस्कारी निकलने लगी।
ओ मेरे यादव जी चूसोना सब तुम्हारे लिए तो है।
फिर यादव ने मेरी जांघों को फैले और साड़ी को कमर तक उठा दिया मेरी पैंटी को निकाला और मेरी बूर में मुंह लगा दिया और उसे जोर-जोर से चूसने लगा।
मैं वहां पास के रखे सारे पुवाल को छीटने लगी एकदम तड़प रही थी एकदम से गर्म हो रही थी मेरी बूर पानी छोड़ रही थी और वह लगातार कहते जा रहि थी गजब मेरे यादव जी एकदम बूर को चाट चाट कर लाल कर दो। मेरी मुलायम बूर को अअअअअअह्ह्ह।
तभी यादव उठा और अपने लंड को मेरे चुत के निशाने पर लगाया और सट से पूरा चूत में उतार दिया मैं तो एकदम से कराह उठी कि वो यह क्या गरम सरिया डाल दिया मेरे बूर के अंदर?
ऊऊऊह्ह्ह आआह्ह्ह
इसी तरह यादव जोर-जोर से मेरे अंदर अपने लंड को घुसता रहा। मैं उसके हर धक्के से पूरी तरह सिहर उठती थी।
और इसी तरह यादव के बाद कालू कालू के बाद सरोज और सरोज के बाद कालू ने मुझे चोदा।
फिर उन्होंने कहा कि भाभी जी अब आगे कब दोगी?
तब मैंने उन्हें कहा कि अब आगे का सपना मत देखो आज होली थी बस आज ले लिया बहुत है।
तब यादव ने कहा कि अरे भाभी जी हम तो कभी भी ले लेते हैं बस अगर आपका मन करे तो आ जाना हमारे खटाल में हम आपकी खूब बाजा बजा कर लेंगे।
मैं यादव के गोद में बैठ गई और उसे पूरा प्यार से बोली अरे मेरी यादव जी अगर मेरा मन हुआ तो मैं आपका लेने जरूर आऊंगी।
और फिर मैं वहां से निकल गई। वहां से निकाल कर मैं सीधे अपने घर आई। घर आते ही देखा कि राज तो घर आ चुका है और वह टीवी देख रहा था उसके साथ ही सौम्या भी बैठकर टीवी देख रही थी और आकाश बगल में बैठा हुआ था मैं जाकर आकाश के पास बैठ गई।
सौम्या ने मुझसे पूछा कहां इतनी देर लगा दी थी मां? मैं सौम्या को कोई जवाब दे नहीं पाई फिर मैं वहां से उठकर सीधे बाथरूम में चली गई।
जब मैं बाथरुम से निकाल कर आई तब आकाश मेरे पास आया और मेरे गले लग गया और बोला मां आज तो होली खत्म हो गई मुझे और दीदी को कल यहां से निकलना है पटना जाने के लिए वहां पर कोचिंग तुरंत ही स्टार्ट होने वाली है।
फिर मैं अपने आकाश को उसके गालों पर एक किस देते हुए बोली की ठीक है बेटा मैं तुम लोगों की तैयारी कर दूंगी कल चले जाना और उसे प्यार से मैं उसके गालों पर किस दे रही थी कि तभी सौम्या ने आवाज लगाया और आकाश अपना मुंह उसके उधर से इधर किया वैसे ही उसका मुंह और मेरा दोनों का एक में सेट किया और फिर से एक दूसरे के होंठ को चूसने लगे।
मुझे पता नहीं क्या हुआ मेरी आंख अपने आप बंद हो गई और उसे के होंठ को मैं चूसने लगी कि तभी एक और आवाज लगाई सौम्या और हम दोनों अलग हो गए?
फिर आकाश जाकर सौम्या के पास बैठ गया और मैं अपने काम में लग गई।
रात में मैं और सौम्या सोई हुई थी और आकाश और राज दोनों एक साथ सोए हुए थे कि तभी रात को मेरी नींद खुली तो देखी की सौम्या मेरे पास नहीं थी तो मैं उठकर जाकर बाहर देखने लगी तब किचन से कुछ आवाज आ रही थी।
मैं किचन में देखे की सौम्या का एक पैर किचन के ऊपर पड़ा हुआ है और एक नीचे और पीछे से मेरा बेटा राज उसके बूर में लगातार तेज धक्के लगा रहा था और सौम्या की धीरे-धीरे सिसकारी निकल रही थी।
उन दोनों को वैसे ही छोड़ कर जाकर सो गई। सुबह में उठकर जल्दी से खाना पीना बना दी क्योंकि आज मेरे बेटे और बेटी बाहर निकलने वाले थे? मैं जाकर सौम्या को उठाई और बोली जाओ जाकर फ्रेश हो जाओ और खाना खा लो आज तुम लोगों को निकलना भी है।
फिर मैं राज और आकाश को भी उठा दी और इन तीनों लोगों को खाना खिलाकर फिर इन दोनों को तैयार करके मैं और राज दोनों इन लोगों को स्टेशन पर छोड़ने गए।
सौम्या और आकाश दोनों ही मुझे और राज से गले मिले और फिर ट्रेन पकड़े और पटना के लिए निकल गए।
मैं और राज दोनों ही घर जाकर थोड़ा आराम करने लगे राज सो गया।
तभी मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया।
हेलो भाभी
मेरा मालपुआ अभी आपके पास है मैं जल्द ही आ रहा हूं आपके मालपुए को खाने के लिए आप बस रेडी रहना।
यह मैसेज तो आलम का था पर उससे मेरा नंबर कहां से मिला और वह कब आ रहा है? यह सोचते सोचते मैं सो गई।
धन्यवाद अंत तक बने रहने के लिए
हैं अगले भाग में।![]()