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Incest मुर्दों का जजी़रा

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Vijay2309

Well-Known Member
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17.....


इस वक्त सभी अपने अपने रूम में आराम कर रहे थे ....आज इस द्वीप पर इनका पहला दिन बिता था जो कि जरुरत से ज्यादा थका देने वाला साबित हुआ इन सभी के लिए....जहां राज को अपना प्रोजेक्ट की चिंता सता रही थी वहीं सुमन को अपने बेटे के प्राणों की....सुमन ने उस पुष्प की गंध जरूर सूंघी थी लेकिन उसका सारा असर राज के भ्रूण पर पड़ा इसलिए सुमन उस पुष्प से होने वाले प्रभाव से तो बच गई लेकिन राज नहीं बच सका.....अब अगर सुमन किसी तरह उस पुष्प की गंध राज को सूंघा देती है तो उस पुष्प के प्रभाव से राज की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल जाएगी.....एक तरफ प्रिया अपने अलग ही तरह के ख्वाबों का ताना बाना बुन रही थी वहीं नेहा इस द्वीप पर आकर खुद को काफी हल्का एवं खुश महसूस करने लगी थी....भविष्य के गर्भ में क्या छुपा था और आगे क्या और कैसे होगा वो सब कुछ तो वक्त ही बताएगा लेकिन अगली सुबह इन सबके जीवन में काफी उथल पुथल मचाने वाली है ये बात शर्तिया पक्की है....।




अगली सुबह



"" गुड मॉर्निंग एवरी वन.....ब्लू आयलैंड पर आप सभी की ये पहली सुबह है इसलिए आप सभी से मेरा अनुरोध है कि जल्दी बिस्तर छोड़े और इस द्वीप का पहला सनराइज जरूर देखे ""


रुचि ये बात बार बार दोहराएं जा रही थी जैसे कि कोई अलार्म घड़ी सुबह सुबह लगातार बजने लगती है.....

मैं उनिंदा सा अपनी पलके खोलता हूं और लगातार भोंपू की तरह बज रहे रुचि नामक अलार्म को रोकते हुए कहता हूं....


"" ओहो रुचि क्या तुम हर सुबह ये सब करने वाली हो क्या...?? कितनी अच्छी नींद आ रही थी और तुम हो की मुझे नींद से उठाने के पीछे ही पड़ गई हो ""

रुचि ने मेरी आवाज सुनकर कहा...

"" गुड मॉर्निंग राज ....प्रोफेसर दास का मेसेज आया था मेरे पास....वह कुछ देर में तुमसे बात करेंगे, अब तुम उठ ही गए हो तो जल्दी से फ्रेश हो जाओ जब तक मैं तुम्हारे लिए कॉफी तैयार कर देती हूं...""

रुचि की ये कॉफी तैयार करने वाली बात सुनकर में जोर से हस पड़ा....क्योंकि रुचि ने कॉफी वाली बात कुछ ऐसे कहीं थी जैसे कोई बीवी अपने पति को....

"" क्या हुआ राज...?? इतना जोर जोर से हस क्यों रहे हो ....मैंने कुछ ग़लत बोल दिया क्या ...?? ""

मैंने अपनी हसी पर कंट्रोल करते हुए कहा...

"" अरे नहीं नहीं....तुम ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा....वो तो मुझे सुबह सुबह ऐसे ही हसने कि आदत है , चलो अब तुम कॉफी तैयार करो जब तक मैं फ्रेश हो लेता हूं....वैसे बाकी सब लोग नहीं उठे हों तो उन्हें भी उठा दो...!!""

"" मम्मी और प्रिया सुबह काफी जल्दी उठ गई थी उनको शायद कहीं जाना था इसलिए वो मुझे बोल के गई है कि में तुम्हे ये बता दूं और नेहा बाहर बालकनी मैं कॉफी का मजा ले रही है....एक बात और तुम्हारे लिए कॉफी नेहा ने बनाई है इसलिए ये सोचना भी मत की में तुम्हारे लिए कोई कॉफी वॉफी बनाने वाली हूं....काम वाली समझा है क्या मुझे ...!!""



रुचि की बात सुनकर एक बार फिर से हसने का मन तो किया मेरा लेकिन किसी तरह हसी दबाते हुए मैंने बस इतना कहा...


"" ओके मैडम अब आप जाइए....अब क्या बाथरूम में भी साथ चलने का इरादा है क्या....??""

"" वैसे तो इस पूरी प्रॉपर्टी में ऐसी कोई जगह नहीं जहां मुझे जाने की मनाही हो...लेकिन तुम अगर कहोगे तो मैं बाथरूम के अंदर भी तुम से सवाल जवाब कर सकती हूं...बोलो आऊं क्या साथ...??""


"" ना में अकेला ही ठीक हूं उधर अब तुम थोड़ी देर के लिए मुझे अकेला छोड़ो और नेहा के साथ पंचायत करो...""

इतना बोलकर में रूम के साथ अटैच बाथरूम मै घुस जाता हूं ....


उधर जंगल में ....


प्रिया - मां ....आप को इस घने जंगल में डर नहीं लग रहा....?? देखो ना सुबह के 6 बजने आए लेकिन फिर भी कैसी कैसी आवाजे आ रही है जंगल के अंदर से...

सुमन - डरने वाली कोई बात नहीं है बेटा.....मै और तेरे पापा कॉलेज के वक्त से ही इस से खतरनाक से खतरनाक जंगल में जा चुके हैं.....यहां तो सिर्फ कुछ जंगली जानवर ही है जो हमें देख खुद ही छुप जाते है डर के ....तू घबरा मत और मेरे पीछे पीछे चलती रह....

सुमन आगे आगे चल रही थी जबकि प्रिया इधर उधर देखते हुए सुमन के पीछे पीछे चले जा रही थी. ।


काफी दूर निकल जाने के बाद भी सुमन और प्रिया को वह पुष्प नजर नहीं आ रहा था इसलिए थक हार कर वो दोनो एक छोटे झरने के समीप चट्टान पर बैठ जाती है...

प्रिया - मां देखो ना यहां के माहौल में कितनी शांति है...और ये झरना कितना सुंदर लग रहा है , मन कर रहा है जैसे इस झरने के ठंडे ठंडे पानी मै नहा लूं ...
सुमन - अरे तो इस मै सोचना क्या है....जा नहा ले....वैसे भी खुद को माहौल के अनुरूप बनाने मै ही समझदारी होती है....जा ज्यादा सोच मत और नहा ले...

प्रिया - पर मां कोई जानवर....??

सुमन ने मुस्कुराते हुए प्रिया को हल्के हाथ से एक चपत लगाते हुए कहा....

"" कल रात को पुजारी जी की गुफा में देखे ना जानवर....और वैसे भी तुझे खा कर उन्हे हड्डियों के अलावा कुछ मिलेगा नहीं इसलिए अगर कोई जानवर तुझे खाने आएगा भी तो तेरे शरीर को देख कर मन मार लेगा चल अब जा और नहा ले में जब तक यहां आस पास उस फूल को तलाश लेती हूं...""

अपनी बात कह सुमन एक तरफ अकेली ही चल पड़ी जबकि प्रिया को ये समझ नहीं आ रहा था कि यहां बिना कपड़ों के नहाया जाए या नहीं....ना कोई टॉवल था उसके पास और ना ही कोई ऐसा कपड़ा जिस से नहाने के बाद बदन पोंछा जा सके....


प्रिया ने एक क्षण इधर उधर देखा और झरने के पास एक चट्टान की आड में अपने कपड़े उतारने लगी.... इस वक्त उसने एक जींस और एक पिंक कलर का कुर्ता पहन रखा था जो कि उसके संगमरमर जैसे जिस्म को ढके हुए था....


प्रिया ने सबसे पहले अपना कुर्ता उतारा और अच्छे से तह करके पास की चट्टान पर रख दिया....एक बार प्रिया ने फिर से इधर उधर देखा लेकिन कोई भी अवांछित हलचल ना पाकर वह खुद को दिलासा देते हुए बोली...

"" अगली बार आऊंगी इधर तो टॉवल और बाकी ड्रेस जरूर लाऊंगी....लेकिन आज मुझे जंगल प्रिंसेस बनना ही पड़ेगा""

इतना बोल कर प्रिया ने एक झटके में अपनी जींस उतार दी....प्रिया अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और इस वक्त वह किसी बिकिनी मॉडल से कहीं से भी कम नहीं लग रही थी...34 साइज के लगभग उसके पुष्ट उरोज ब्रा में इस कदर हिल रहे थे जैसे आम अपनी शाखों पर झूमते है.... पेट के मध्य स्थित नाभि किसी गहरे कुंए का अहसास दिला रही थी...कमर इतनी चिकनी की कोई भी उसे छूने के लिए अपना सब कुछ लुटा बैठे...नीले रंग की पैंटी में प्रिया के नितम्ब कहर ढा रहे थे जबकि प्रिया की योनि की दरार पैंटी के बाहर भी महसूस करी जा सकती थी....

प्रिया ने अपने बालों का जुडा खोला और उसके बाद अपने लंबे रेशमी बालों से अपने सीने को ढक कर ब्रा के हुक खोलने लग जाती है....अगले ही पल उसके कपोत ब्रा से निकल कर रेशमी बालों के पर्दे में खुद को छुपा लेते हैं ,ब्रा को अपने कुर्ते और जींस के साथ रख अपनी पेंटी उतार पूर्णतया नग्न हो जाती है...


एक हाथ योनि पर तो एक हाथ अपने उभारों पर रख वह तेजी से गिरते हुए झरने के बीचों बीच खड़ी हो कर नहाने लगती है.....झरने का शीतल जल जिस्म पर पड़ते ही प्रिया की गुलाबी निप्पल पूरी तरह से तन जाती है , हल्के हल्के सुनहरे बालों से ढकी योनि भी अब पूरी तरह नुमाया हो रही थी .....
जहां प्रिया नहा रही थी वहीं से कुछ दूरी पर सुमन उस बैंगनी पुष्प को तलाशने में लगी हुई थी....और आखिरकार उसे वह पुष्प दिख ही गया....सुमन ने एक पल भी ना लगाया उस पुष्प को पहचान पाने मै ,इसलिए उसने बिना देर किए उस पुष्प को तोड़ कर अपने कब्जे में कर लिया.....

"" आखिरकार तुम मिल ही गए....अब मेरे बच्चे को कुछ नहीं हो पाएगा..""

सुमन के चहरे पर उस पुष्प को पा लेने कि संतुष्टि साफ दिखाई पड़ रही थी लेकिन उधर राज प्रोफेसर दास से मुखातिब हो रहा था....।


"" कैसे हो राज ....उम्मीद करता हूं तुम्हे ये जगह पसंद आई होगी ,रुचि ने मुझे बताया कि किस तरह तुमने उसे अपना दोस्त बना लिया है जो कि एक अच्छी बात है.....रुचि सीखना चाहती है और कोई अच्छे दिल का व्यक्ति ही किसी अभोद को सही संस्कार दे सकता है और सही जानकारी दे सकता है ,मेरे हिसाब से तुम रुचि के लिए सही ट्यूटर साबित होंगे....""

प्रोफेसर की बात सुन राज के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई क्योंकि प्रोफेसर ने रुचि का जिक्र जो कर दिया था...

"" सर रुचि जैसा जिज्ञासु प्रोग्राम मैंने कभी भी नहीं देखा था , मुझे खुशी होगी अगर मैं उसे सही बातें सीखा पाऊंगा तो....वैसे ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं है यहां के लोग भी इतने भोले और खुशमिजाज है कि ऐसा लगता ही नहीं की में इसी दुनिया में किसी द्वीप पर रह रहा हूं....यहां तक कि मेरे परिवार के लोग भी यहां आकर बेहद खुशी महसूस कर रहे है ...""

"" चलो ये तो और भी अच्छी बात है कि तुम्हारे परिवार वालों का मन भी यहां लग गया....अच्छा चलों अब कुछ काम की बात कर लेते हैं....आज कुछ सैंपल तुम्हारे पास आएंगे जो कि अलग अलग प्रकार के खतरनाक वायरस के होंगे .....तुम्हे उन वायरस का एंटीडोट इजाद करना होगा.....वैसे ये काम किसी भी लैब मै करवाया जा सकता है लेकिन अभी कुछ दिन तुम्हे यही काम दिया जा रहा है.....एक बात और राज बात सिर्फ एंटीडोट बनाने भर जितनी नहीं है....तुम्हे आगे चलकर और भी बड़े काम दिए जाएंगे जो कि देश के लिए एक फायदे का सौदा साबित होंगे....अभी के लिए बस इतना ही कुछ दिन मजे करो और हल्का फुल्का काम किए जाओ.....कहीं घूमने जाना हो तो रुचि से बोल देना वो अरेंज कर देगी , तूफानी द्वीप के बारे मै तो तुम जान ही गए होंगे और मै उम्मीद करता हूं कि तुम उस तरफ जाने की सोचोगे भी नहीं....दक्षिण में एक खूबसूरत छोटा सा द्वीप है तुम चाहो तो फैमिली को वहां घुमाने के लिए ले जा सकते हो....अच्छा अब मैं फोन रख रहा हूं किसी भी चीज को जरुरत हो तो मुझ से बेझिझक बोल सकते हो.....गुड बाय राज..."""

इतना कह दास बाबू ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और में अब सोफे पर बैठा यही सोच रहा था कि अब आगे क्या करना है.....रुचि के रोबोट्स घर की साफ सफाई में लगे हुए थे बीच बीच में रुचि की उन रोबोट्स को डांटने कि आवाज भी मुझे सुनाई दे जाती थी....कुल मिला के इज द्वीप की पहली सुबह अच्छी ही रही थी हमारे लिए.....





दोस्तो देरी से अपडेट देने के लिए माफ़ करना थोड़ा व्यस्त चल रहा हूं काम काज में , ये कहानी बंद नहीं होगी ये बात पक्की है बस अपडेट आने में देरी हो सकती है इसके लिए में आप सभी से माफी मांगता हूं ....


 

Vijay2309

Well-Known Member
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Waiting for next update
Nice update
waiting for next bhai
भाई अपडेट की बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा हूँ
अपडेट प्लीज
रेगुलर अपडेट करो लेखक महोदय नही तो जब तक नया अपडेट आता है पिछली कहानी भूल जाते है । कहानी का सारा मजा ही चला जाता है
अपडेट की प्रतिक्षा है भाई
सहीं बात है
Vijay kaha ho bhai
लेखन की गति बहुत मन्द है
waiting for next update.
Update please
Agar aapko update ni dena h to kahani band kr do , etna late se dete ho pichlaa kuch yaad ni rhtaa
Please update .........................
Waiting for next update.
intjaar rahega dost
अपडेट की प्रतिक्षा में
Update please
Waiting for next update
Happy New year 🎉🎉
Update please
आपको व आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आप जीवन में ऐसे ही प्रगति के पथ पर विकास की बुलंदियों को छूते रहे एवं ईश्वर आपको स्वस्थ तन मन धन व आरोग्य जीवन प्रदान करे।।
intjaar rahega mitr
waiting for the next update..
अपडेट की प्रतिक्षा है
Waiting for next update.
Kya bhai Kahani se man bhar gya kya? Update do.
intjaar rahega dost
Bhai aage Likhoge ya nahi. Ya fir bata diya karo ki agla update kab Aayega.
अगला अपडेट आएगा भी या नहीं?
Waiting waiting waiting for next update
update please..............
Waiting for next update.
Waiting for next update
firse latka diya .. kaha ho vijay bhai ...
लगता है कहानी अधूरी छोड कर कहीं चले गए लेखक महोदय
Update please
क्यों भाई 16 अपडेट में ही हवा निकल गई क्या हमें तो लगा था कम से हम लगा था 100 से 150अपडेट आएंगे भाई बता दो कहानी बंद हो गई क्या लिखोगे पब्लिक इंतजार कर रहे हैं
Waiting for next update.
Bhai aage likhoge ya nahi kuch to bolo
Waiting for next update.
waiting...
Sir where are you waiting for you.........
Waiting for next update
Bahut hi badiya kahani hai..
Aage ke updates ki pratiksha rahegi
पर अभी तक नही आया अपडेट
Waiting for next update.
इतनी प्रतीक्षा करने के लिए आप सभी का आभार
 
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Shalini38

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इस वक्त सभी अपने अपने रूम में आराम कर रहे थे ....आज इस द्वीप पर इनका पहला दिन बिता था जो कि जरुरत से ज्यादा थका देने वाला साबित हुआ इन सभी के लिए....जहां राज को अपना प्रोजेक्ट की चिंता सता रही थी वहीं सुमन को अपने बेटे के प्राणों की....सुमन ने उस पुष्प की गंध जरूर सूंघी थी लेकिन उसका सारा असर राज के भ्रूण पर पड़ा इसलिए सुमन उस पुष्प से होने वाले प्रभाव से तो बच गई लेकिन राज नहीं बच सका.....अब अगर सुमन किसी तरह उस पुष्प की गंध राज को सूंघा देती है तो उस पुष्प के प्रभाव से राज की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल जाएगी.....एक तरफ प्रिया अपने अलग ही तरह के ख्वाबों का ताना बाना बुन रही थी वहीं नेहा इस द्वीप पर आकर खुद को काफी हल्का एवं खुश महसूस करने लगी थी....भविष्य के गर्भ में क्या छुपा था और आगे क्या और कैसे होगा वो सब कुछ तो वक्त ही बताएगा लेकिन अगली सुबह इन सबके जीवन में काफी उथल पुथल मचाने वाली है ये बात शर्तिया पक्की है....।




अगली सुबह



"" गुड मॉर्निंग एवरी वन.....ब्लू आयलैंड पर आप सभी की ये पहली सुबह है इसलिए आप सभी से मेरा अनुरोध है कि जल्दी बिस्तर छोड़े और इस द्वीप का पहला सनराइज जरूर देखे ""


रुचि ये बात बार बार दोहराएं जा रही थी जैसे कि कोई अलार्म घड़ी सुबह सुबह लगातार बजने लगती है.....

मैं उनिंदा सा अपनी पलके खोलता हूं और लगातार भोंपू की तरह बज रहे रुचि नामक अलार्म को रोकते हुए कहता हूं....


"" ओहो रुचि क्या तुम हर सुबह ये सब करने वाली हो क्या...?? कितनी अच्छी नींद आ रही थी और तुम हो की मुझे नींद से उठाने के पीछे ही पड़ गई हो ""

रुचि ने मेरी आवाज सुनकर कहा...

"" गुड मॉर्निंग राज ....प्रोफेसर दास का मेसेज आया था मेरे पास....वह कुछ देर में तुमसे बात करेंगे, अब तुम उठ ही गए हो तो जल्दी से फ्रेश हो जाओ जब तक मैं तुम्हारे लिए कॉफी तैयार कर देती हूं...""

रुचि की ये कॉफी तैयार करने वाली बात सुनकर में जोर से हस पड़ा....क्योंकि रुचि ने कॉफी वाली बात कुछ ऐसे कहीं थी जैसे कोई बीवी अपने पति को....

"" क्या हुआ राज...?? इतना जोर जोर से हस क्यों रहे हो ....मैंने कुछ ग़लत बोल दिया क्या ...?? ""

मैंने अपनी हसी पर कंट्रोल करते हुए कहा...

"" अरे नहीं नहीं....तुम ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा....वो तो मुझे सुबह सुबह ऐसे ही हसने कि आदत है , चलो अब तुम कॉफी तैयार करो जब तक मैं फ्रेश हो लेता हूं....वैसे बाकी सब लोग नहीं उठे हों तो उन्हें भी उठा दो...!!""

"" मम्मी और प्रिया सुबह काफी जल्दी उठ गई थी उनको शायद कहीं जाना था इसलिए वो मुझे बोल के गई है कि में तुम्हे ये बता दूं और नेहा बाहर बालकनी मैं कॉफी का मजा ले रही है....एक बात और तुम्हारे लिए कॉफी नेहा ने बनाई है इसलिए ये सोचना भी मत की में तुम्हारे लिए कोई कॉफी वॉफी बनाने वाली हूं....काम वाली समझा है क्या मुझे ...!!""



रुचि की बात सुनकर एक बार फिर से हसने का मन तो किया मेरा लेकिन किसी तरह हसी दबाते हुए मैंने बस इतना कहा...


"" ओके मैडम अब आप जाइए....अब क्या बाथरूम में भी साथ चलने का इरादा है क्या....??""

"" वैसे तो इस पूरी प्रॉपर्टी में ऐसी कोई जगह नहीं जहां मुझे जाने की मनाही हो...लेकिन तुम अगर कहोगे तो मैं बाथरूम के अंदर भी तुम से सवाल जवाब कर सकती हूं...बोलो आऊं क्या साथ...??""


"" ना में अकेला ही ठीक हूं उधर अब तुम थोड़ी देर के लिए मुझे अकेला छोड़ो और नेहा के साथ पंचायत करो...""

इतना बोलकर में रूम के साथ अटैच बाथरूम मै घुस जाता हूं ....


उधर जंगल में ....


प्रिया - मां ....आप को इस घने जंगल में डर नहीं लग रहा....?? देखो ना सुबह के 6 बजने आए लेकिन फिर भी कैसी कैसी आवाजे आ रही है जंगल के अंदर से...

सुमन - डरने वाली कोई बात नहीं है बेटा.....मै और तेरे पापा कॉलेज के वक्त से ही इस से खतरनाक से खतरनाक जंगल में जा चुके हैं.....यहां तो सिर्फ कुछ जंगली जानवर ही है जो हमें देख खुद ही छुप जाते है डर के ....तू घबरा मत और मेरे पीछे पीछे चलती रह....

सुमन आगे आगे चल रही थी जबकि प्रिया इधर उधर देखते हुए सुमन के पीछे पीछे चले जा रही थी. ।


काफी दूर निकल जाने के बाद भी सुमन और प्रिया को वह पुष्प नजर नहीं आ रहा था इसलिए थक हार कर वो दोनो एक छोटे झरने के समीप चट्टान पर बैठ जाती है...

प्रिया - मां देखो ना यहां के माहौल में कितनी शांति है...और ये झरना कितना सुंदर लग रहा है , मन कर रहा है जैसे इस झरने के ठंडे ठंडे पानी मै नहा लूं ...
सुमन - अरे तो इस मै सोचना क्या है....जा नहा ले....वैसे भी खुद को माहौल के अनुरूप बनाने मै ही समझदारी होती है....जा ज्यादा सोच मत और नहा ले...

प्रिया - पर मां कोई जानवर....??

सुमन ने मुस्कुराते हुए प्रिया को हल्के हाथ से एक चपत लगाते हुए कहा....

"" कल रात को पुजारी जी की गुफा में देखे ना जानवर....और वैसे भी तुझे खा कर उन्हे हड्डियों के अलावा कुछ मिलेगा नहीं इसलिए अगर कोई जानवर तुझे खाने आएगा भी तो तेरे शरीर को देख कर मन मार लेगा चल अब जा और नहा ले में जब तक यहां आस पास उस फूल को तलाश लेती हूं...""

अपनी बात कह सुमन एक तरफ अकेली ही चल पड़ी जबकि प्रिया को ये समझ नहीं आ रहा था कि यहां बिना कपड़ों के नहाया जाए या नहीं....ना कोई टॉवल था उसके पास और ना ही कोई ऐसा कपड़ा जिस से नहाने के बाद बदन पोंछा जा सके....


प्रिया ने एक क्षण इधर उधर देखा और झरने के पास एक चट्टान की आड में अपने कपड़े उतारने लगी.... इस वक्त उसने एक जींस और एक पिंक कलर का कुर्ता पहन रखा था जो कि उसके संगमरमर जैसे जिस्म को ढके हुए था....


प्रिया ने सबसे पहले अपना कुर्ता उतारा और अच्छे से तह करके पास की चट्टान पर रख दिया....एक बार प्रिया ने फिर से इधर उधर देखा लेकिन कोई भी अवांछित हलचल ना पाकर वह खुद को दिलासा देते हुए बोली...

"" अगली बार आऊंगी इधर तो टॉवल और बाकी ड्रेस जरूर लाऊंगी....लेकिन आज मुझे जंगल प्रिंसेस बनना ही पड़ेगा""

इतना बोल कर प्रिया ने एक झटके में अपनी जींस उतार दी....प्रिया अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और इस वक्त वह किसी बिकिनी मॉडल से कहीं से भी कम नहीं लग रही थी...34 साइज के लगभग उसके पुष्ट उरोज ब्रा में इस कदर हिल रहे थे जैसे आम अपनी शाखों पर झूमते है.... पेट के मध्य स्थित नाभि किसी गहरे कुंए का अहसास दिला रही थी...कमर इतनी चिकनी की कोई भी उसे छूने के लिए अपना सब कुछ लुटा बैठे...नीले रंग की पैंटी में प्रिया के नितम्ब कहर ढा रहे थे जबकि प्रिया की योनि की दरार पैंटी के बाहर भी महसूस करी जा सकती थी....

प्रिया ने अपने बालों का जुडा खोला और उसके बाद अपने लंबे रेशमी बालों से अपने सीने को ढक कर ब्रा के हुक खोलने लग जाती है....अगले ही पल उसके कपोत ब्रा से निकल कर रेशमी बालों के पर्दे में खुद को छुपा लेते हैं ,ब्रा को अपने कुर्ते और जींस के साथ रख अपनी पेंटी उतार पूर्णतया नग्न हो जाती है...


एक हाथ योनि पर तो एक हाथ अपने उभारों पर रख वह तेजी से गिरते हुए झरने के बीचों बीच खड़ी हो कर नहाने लगती है.....झरने का शीतल जल जिस्म पर पड़ते ही प्रिया की गुलाबी निप्पल पूरी तरह से तन जाती है , हल्के हल्के सुनहरे बालों से ढकी योनि भी अब पूरी तरह नुमाया हो रही थी .....
जहां प्रिया नहा रही थी वहीं से कुछ दूरी पर सुमन उस बैंगनी पुष्प को तलाशने में लगी हुई थी....और आखिरकार उसे वह पुष्प दिख ही गया....सुमन ने एक पल भी ना लगाया उस पुष्प को पहचान पाने मै ,इसलिए उसने बिना देर किए उस पुष्प को तोड़ कर अपने कब्जे में कर लिया.....

"" आखिरकार तुम मिल ही गए....अब मेरे बच्चे को कुछ नहीं हो पाएगा..""

सुमन के चहरे पर उस पुष्प को पा लेने कि संतुष्टि साफ दिखाई पड़ रही थी लेकिन उधर राज प्रोफेसर दास से मुखातिब हो रहा था....।


"" कैसे हो राज ....उम्मीद करता हूं तुम्हे ये जगह पसंद आई होगी ,रुचि ने मुझे बताया कि किस तरह तुमने उसे अपना दोस्त बना लिया है जो कि एक अच्छी बात है.....रुचि सीखना चाहती है और कोई अच्छे दिल का व्यक्ति ही किसी अभोद को सही संस्कार दे सकता है और सही जानकारी दे सकता है ,मेरे हिसाब से तुम रुचि के लिए सही ट्यूटर साबित होंगे....""

प्रोफेसर की बात सुन राज के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई क्योंकि प्रोफेसर ने रुचि का जिक्र जो कर दिया था...

"" सर रुचि जैसा जिज्ञासु प्रोग्राम मैंने कभी भी नहीं देखा था , मुझे खुशी होगी अगर मैं उसे सही बातें सीखा पाऊंगा तो....वैसे ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं है यहां के लोग भी इतने भोले और खुशमिजाज है कि ऐसा लगता ही नहीं की में इसी दुनिया में किसी द्वीप पर रह रहा हूं....यहां तक कि मेरे परिवार के लोग भी यहां आकर बेहद खुशी महसूस कर रहे है ...""

"" चलो ये तो और भी अच्छी बात है कि तुम्हारे परिवार वालों का मन भी यहां लग गया....अच्छा चलों अब कुछ काम की बात कर लेते हैं....आज कुछ सैंपल तुम्हारे पास आएंगे जो कि अलग अलग प्रकार के खतरनाक वायरस के होंगे .....तुम्हे उन वायरस का एंटीडोट इजाद करना होगा.....वैसे ये काम किसी भी लैब मै करवाया जा सकता है लेकिन अभी कुछ दिन तुम्हे यही काम दिया जा रहा है.....एक बात और राज बात सिर्फ एंटीडोट बनाने भर जितनी नहीं है....तुम्हे आगे चलकर और भी बड़े काम दिए जाएंगे जो कि देश के लिए एक फायदे का सौदा साबित होंगे....अभी के लिए बस इतना ही कुछ दिन मजे करो और हल्का फुल्का काम किए जाओ.....कहीं घूमने जाना हो तो रुचि से बोल देना वो अरेंज कर देगी , तूफानी द्वीप के बारे मै तो तुम जान ही गए होंगे और मै उम्मीद करता हूं कि तुम उस तरफ जाने की सोचोगे भी नहीं....दक्षिण में एक खूबसूरत छोटा सा द्वीप है तुम चाहो तो फैमिली को वहां घुमाने के लिए ले जा सकते हो....अच्छा अब मैं फोन रख रहा हूं किसी भी चीज को जरुरत हो तो मुझ से बेझिझक बोल सकते हो.....गुड बाय राज..."""

इतना कह दास बाबू ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और में अब सोफे पर बैठा यही सोच रहा था कि अब आगे क्या करना है.....रुचि के रोबोट्स घर की साफ सफाई में लगे हुए थे बीच बीच में रुचि की उन रोबोट्स को डांटने कि आवाज भी मुझे सुनाई दे जाती थी....कुल मिला के इज द्वीप की पहली सुबह अच्छी ही रही थी हमारे लिए.....





दोस्तो देरी से अपडेट देने के लिए माफ़ करना थोड़ा व्यस्त चल रहा हूं काम काज में , ये कहानी बंद नहीं होगी ये बात पक्की है बस अपडेट आने में देरी हो सकती है इसके लिए में आप सभी से माफी मांगता हूं ...

17.....


इस वक्त सभी अपने अपने रूम में आराम कर रहे थे ....आज इस द्वीप पर इनका पहला दिन बिता था जो कि जरुरत से ज्यादा थका देने वाला साबित हुआ इन सभी के लिए....जहां राज को अपना प्रोजेक्ट की चिंता सता रही थी वहीं सुमन को अपने बेटे के प्राणों की....सुमन ने उस पुष्प की गंध जरूर सूंघी थी लेकिन उसका सारा असर राज के भ्रूण पर पड़ा इसलिए सुमन उस पुष्प से होने वाले प्रभाव से तो बच गई लेकिन राज नहीं बच सका.....अब अगर सुमन किसी तरह उस पुष्प की गंध राज को सूंघा देती है तो उस पुष्प के प्रभाव से राज की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल जाएगी.....एक तरफ प्रिया अपने अलग ही तरह के ख्वाबों का ताना बाना बुन रही थी वहीं नेहा इस द्वीप पर आकर खुद को काफी हल्का एवं खुश महसूस करने लगी थी....भविष्य के गर्भ में क्या छुपा था और आगे क्या और कैसे होगा वो सब कुछ तो वक्त ही बताएगा लेकिन अगली सुबह इन सबके जीवन में काफी उथल पुथल मचाने वाली है ये बात शर्तिया पक्की है....।




अगली सुबह



"" गुड मॉर्निंग एवरी वन.....ब्लू आयलैंड पर आप सभी की ये पहली सुबह है इसलिए आप सभी से मेरा अनुरोध है कि जल्दी बिस्तर छोड़े और इस द्वीप का पहला सनराइज जरूर देखे ""


रुचि ये बात बार बार दोहराएं जा रही थी जैसे कि कोई अलार्म घड़ी सुबह सुबह लगातार बजने लगती है.....

मैं उनिंदा सा अपनी पलके खोलता हूं और लगातार भोंपू की तरह बज रहे रुचि नामक अलार्म को रोकते हुए कहता हूं....


"" ओहो रुचि क्या तुम हर सुबह ये सब करने वाली हो क्या...?? कितनी अच्छी नींद आ रही थी और तुम हो की मुझे नींद से उठाने के पीछे ही पड़ गई हो ""

रुचि ने मेरी आवाज सुनकर कहा...

"" गुड मॉर्निंग राज ....प्रोफेसर दास का मेसेज आया था मेरे पास....वह कुछ देर में तुमसे बात करेंगे, अब तुम उठ ही गए हो तो जल्दी से फ्रेश हो जाओ जब तक मैं तुम्हारे लिए कॉफी तैयार कर देती हूं...""

रुचि की ये कॉफी तैयार करने वाली बात सुनकर में जोर से हस पड़ा....क्योंकि रुचि ने कॉफी वाली बात कुछ ऐसे कहीं थी जैसे कोई बीवी अपने पति को....

"" क्या हुआ राज...?? इतना जोर जोर से हस क्यों रहे हो ....मैंने कुछ ग़लत बोल दिया क्या ...?? ""

मैंने अपनी हसी पर कंट्रोल करते हुए कहा...

"" अरे नहीं नहीं....तुम ने कुछ भी ग़लत नहीं कहा....वो तो मुझे सुबह सुबह ऐसे ही हसने कि आदत है , चलो अब तुम कॉफी तैयार करो जब तक मैं फ्रेश हो लेता हूं....वैसे बाकी सब लोग नहीं उठे हों तो उन्हें भी उठा दो...!!""

"" मम्मी और प्रिया सुबह काफी जल्दी उठ गई थी उनको शायद कहीं जाना था इसलिए वो मुझे बोल के गई है कि में तुम्हे ये बता दूं और नेहा बाहर बालकनी मैं कॉफी का मजा ले रही है....एक बात और तुम्हारे लिए कॉफी नेहा ने बनाई है इसलिए ये सोचना भी मत की में तुम्हारे लिए कोई कॉफी वॉफी बनाने वाली हूं....काम वाली समझा है क्या मुझे ...!!""



रुचि की बात सुनकर एक बार फिर से हसने का मन तो किया मेरा लेकिन किसी तरह हसी दबाते हुए मैंने बस इतना कहा...


"" ओके मैडम अब आप जाइए....अब क्या बाथरूम में भी साथ चलने का इरादा है क्या....??""

"" वैसे तो इस पूरी प्रॉपर्टी में ऐसी कोई जगह नहीं जहां मुझे जाने की मनाही हो...लेकिन तुम अगर कहोगे तो मैं बाथरूम के अंदर भी तुम से सवाल जवाब कर सकती हूं...बोलो आऊं क्या साथ...??""


"" ना में अकेला ही ठीक हूं उधर अब तुम थोड़ी देर के लिए मुझे अकेला छोड़ो और नेहा के साथ पंचायत करो...""

इतना बोलकर में रूम के साथ अटैच बाथरूम मै घुस जाता हूं ....


उधर जंगल में ....


प्रिया - मां ....आप को इस घने जंगल में डर नहीं लग रहा....?? देखो ना सुबह के 6 बजने आए लेकिन फिर भी कैसी कैसी आवाजे आ रही है जंगल के अंदर से...

सुमन - डरने वाली कोई बात नहीं है बेटा.....मै और तेरे पापा कॉलेज के वक्त से ही इस से खतरनाक से खतरनाक जंगल में जा चुके हैं.....यहां तो सिर्फ कुछ जंगली जानवर ही है जो हमें देख खुद ही छुप जाते है डर के ....तू घबरा मत और मेरे पीछे पीछे चलती रह....

सुमन आगे आगे चल रही थी जबकि प्रिया इधर उधर देखते हुए सुमन के पीछे पीछे चले जा रही थी. ।


काफी दूर निकल जाने के बाद भी सुमन और प्रिया को वह पुष्प नजर नहीं आ रहा था इसलिए थक हार कर वो दोनो एक छोटे झरने के समीप चट्टान पर बैठ जाती है...

प्रिया - मां देखो ना यहां के माहौल में कितनी शांति है...और ये झरना कितना सुंदर लग रहा है , मन कर रहा है जैसे इस झरने के ठंडे ठंडे पानी मै नहा लूं ...
सुमन - अरे तो इस मै सोचना क्या है....जा नहा ले....वैसे भी खुद को माहौल के अनुरूप बनाने मै ही समझदारी होती है....जा ज्यादा सोच मत और नहा ले...

प्रिया - पर मां कोई जानवर....??

सुमन ने मुस्कुराते हुए प्रिया को हल्के हाथ से एक चपत लगाते हुए कहा....

"" कल रात को पुजारी जी की गुफा में देखे ना जानवर....और वैसे भी तुझे खा कर उन्हे हड्डियों के अलावा कुछ मिलेगा नहीं इसलिए अगर कोई जानवर तुझे खाने आएगा भी तो तेरे शरीर को देख कर मन मार लेगा चल अब जा और नहा ले में जब तक यहां आस पास उस फूल को तलाश लेती हूं...""

अपनी बात कह सुमन एक तरफ अकेली ही चल पड़ी जबकि प्रिया को ये समझ नहीं आ रहा था कि यहां बिना कपड़ों के नहाया जाए या नहीं....ना कोई टॉवल था उसके पास और ना ही कोई ऐसा कपड़ा जिस से नहाने के बाद बदन पोंछा जा सके....


प्रिया ने एक क्षण इधर उधर देखा और झरने के पास एक चट्टान की आड में अपने कपड़े उतारने लगी.... इस वक्त उसने एक जींस और एक पिंक कलर का कुर्ता पहन रखा था जो कि उसके संगमरमर जैसे जिस्म को ढके हुए था....


प्रिया ने सबसे पहले अपना कुर्ता उतारा और अच्छे से तह करके पास की चट्टान पर रख दिया....एक बार प्रिया ने फिर से इधर उधर देखा लेकिन कोई भी अवांछित हलचल ना पाकर वह खुद को दिलासा देते हुए बोली...

"" अगली बार आऊंगी इधर तो टॉवल और बाकी ड्रेस जरूर लाऊंगी....लेकिन आज मुझे जंगल प्रिंसेस बनना ही पड़ेगा""

इतना बोल कर प्रिया ने एक झटके में अपनी जींस उतार दी....प्रिया अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और इस वक्त वह किसी बिकिनी मॉडल से कहीं से भी कम नहीं लग रही थी...34 साइज के लगभग उसके पुष्ट उरोज ब्रा में इस कदर हिल रहे थे जैसे आम अपनी शाखों पर झूमते है.... पेट के मध्य स्थित नाभि किसी गहरे कुंए का अहसास दिला रही थी...कमर इतनी चिकनी की कोई भी उसे छूने के लिए अपना सब कुछ लुटा बैठे...नीले रंग की पैंटी में प्रिया के नितम्ब कहर ढा रहे थे जबकि प्रिया की योनि की दरार पैंटी के बाहर भी महसूस करी जा सकती थी....

प्रिया ने अपने बालों का जुडा खोला और उसके बाद अपने लंबे रेशमी बालों से अपने सीने को ढक कर ब्रा के हुक खोलने लग जाती है....अगले ही पल उसके कपोत ब्रा से निकल कर रेशमी बालों के पर्दे में खुद को छुपा लेते हैं ,ब्रा को अपने कुर्ते और जींस के साथ रख अपनी पेंटी उतार पूर्णतया नग्न हो जाती है...


एक हाथ योनि पर तो एक हाथ अपने उभारों पर रख वह तेजी से गिरते हुए झरने के बीचों बीच खड़ी हो कर नहाने लगती है.....झरने का शीतल जल जिस्म पर पड़ते ही प्रिया की गुलाबी निप्पल पूरी तरह से तन जाती है , हल्के हल्के सुनहरे बालों से ढकी योनि भी अब पूरी तरह नुमाया हो रही थी .....
जहां प्रिया नहा रही थी वहीं से कुछ दूरी पर सुमन उस बैंगनी पुष्प को तलाशने में लगी हुई थी....और आखिरकार उसे वह पुष्प दिख ही गया....सुमन ने एक पल भी ना लगाया उस पुष्प को पहचान पाने मै ,इसलिए उसने बिना देर किए उस पुष्प को तोड़ कर अपने कब्जे में कर लिया.....

"" आखिरकार तुम मिल ही गए....अब मेरे बच्चे को कुछ नहीं हो पाएगा..""

सुमन के चहरे पर उस पुष्प को पा लेने कि संतुष्टि साफ दिखाई पड़ रही थी लेकिन उधर राज प्रोफेसर दास से मुखातिब हो रहा था....।


"" कैसे हो राज ....उम्मीद करता हूं तुम्हे ये जगह पसंद आई होगी ,रुचि ने मुझे बताया कि किस तरह तुमने उसे अपना दोस्त बना लिया है जो कि एक अच्छी बात है.....रुचि सीखना चाहती है और कोई अच्छे दिल का व्यक्ति ही किसी अभोद को सही संस्कार दे सकता है और सही जानकारी दे सकता है ,मेरे हिसाब से तुम रुचि के लिए सही ट्यूटर साबित होंगे....""

प्रोफेसर की बात सुन राज के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई क्योंकि प्रोफेसर ने रुचि का जिक्र जो कर दिया था...

"" सर रुचि जैसा जिज्ञासु प्रोग्राम मैंने कभी भी नहीं देखा था , मुझे खुशी होगी अगर मैं उसे सही बातें सीखा पाऊंगा तो....वैसे ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं है यहां के लोग भी इतने भोले और खुशमिजाज है कि ऐसा लगता ही नहीं की में इसी दुनिया में किसी द्वीप पर रह रहा हूं....यहां तक कि मेरे परिवार के लोग भी यहां आकर बेहद खुशी महसूस कर रहे है ...""

"" चलो ये तो और भी अच्छी बात है कि तुम्हारे परिवार वालों का मन भी यहां लग गया....अच्छा चलों अब कुछ काम की बात कर लेते हैं....आज कुछ सैंपल तुम्हारे पास आएंगे जो कि अलग अलग प्रकार के खतरनाक वायरस के होंगे .....तुम्हे उन वायरस का एंटीडोट इजाद करना होगा.....वैसे ये काम किसी भी लैब मै करवाया जा सकता है लेकिन अभी कुछ दिन तुम्हे यही काम दिया जा रहा है.....एक बात और राज बात सिर्फ एंटीडोट बनाने भर जितनी नहीं है....तुम्हे आगे चलकर और भी बड़े काम दिए जाएंगे जो कि देश के लिए एक फायदे का सौदा साबित होंगे....अभी के लिए बस इतना ही कुछ दिन मजे करो और हल्का फुल्का काम किए जाओ.....कहीं घूमने जाना हो तो रुचि से बोल देना वो अरेंज कर देगी , तूफानी द्वीप के बारे मै तो तुम जान ही गए होंगे और मै उम्मीद करता हूं कि तुम उस तरफ जाने की सोचोगे भी नहीं....दक्षिण में एक खूबसूरत छोटा सा द्वीप है तुम चाहो तो फैमिली को वहां घुमाने के लिए ले जा सकते हो....अच्छा अब मैं फोन रख रहा हूं किसी भी चीज को जरुरत हो तो मुझ से बेझिझक बोल सकते हो.....गुड बाय राज..."""

इतना कह दास बाबू ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और में अब सोफे पर बैठा यही सोच रहा था कि अब आगे क्या करना है.....रुचि के रोबोट्स घर की साफ सफाई में लगे हुए थे बीच बीच में रुचि की उन रोबोट्स को डांटने कि आवाज भी मुझे सुनाई दे जाती थी....कुल मिला के इज द्वीप की पहली सुबह अच्छी ही रही थी हमारे लिए.....





दोस्तो देरी से अपडेट देने के लिए माफ़ करना थोड़ा व्यस्त चल रहा हूं काम काज में , ये कहानी बंद नहीं होगी ये बात पक्की है बस अपडेट आने में देरी हो सकती है इसके लिए में आप सभी से माफी मांगता हूं ....
अच्छी कहानी है
*अगर डेली अपडेट दो,तो मजा आ जाएगा*
 

Vijay2309

Well-Known Member
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nice update ..priya ke kapde utarne ka varnan bahut mast tha 😁..
aur ab wo phool mil gaya hai suman ko jisse wo raj ki jaan bacha sakti hai 😍😍..
ruchi ka coffee ke liye kehna wakai biwi ke jaisa hi laga 😁😁 aur uski baate bhi 😁..
इस कपड़े उतारने वाले अपडेट के कारण ही इतना लेट हो गया.....अकेले होने पर अपडेट लिख ही नहीं पा रहा था.....इसीलिए मार्केट में बैठ के कपड़े उतारने पड़े प्रिया के:D
 
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