Nice update, bane to rahenge magar update kab aaye ga?10.....
तकरीबन दो साल पहले दूर दराज समंदर में ही कहीं स्थित निर्जन द्वीप पर....
"" खों.... खों... खों...""
जैसे वो व्यक्ति द्वीप में स्थित झील से लड़ रहा था ....जैसे ही वो डूबता व्यक्ति संघर्ष कर झील के पानी से बाहर निकलने की कोशिश करता वैसे ही वो झील उसे फिर से अपने अंदर खेंच लेती....
डूबते हुए व्यक्ति ने एक आखिरी कोशिश करी और एक लम्बी सांस लेकर झील में डुबकी लगा दी और अपने शिकारी खंजर को बूट से एक झटके मैं बाहर खींच लिया....उसकी एक टांग पर अभी भी कुछ लिपटा हुआ था जो की उसे झील के तले में खींचा चला जा रहा था....
दम घुटने लगा था उस व्यक्ति का लेकिन फिर भी वह खुद के पैर को आजाद कराने के लिए खंजर चलाने लगा , उसके हाथ भी मौत के डर से और ज्यादा तेज़ चलने लगे थे.... जल्दी ही उस आफत से खुद को आजाद कर वो व्यक्ति झील की सतह पर पहुंच गया.....
झील की सतह पर पहुंचते ही वह व्यक्ति जोर जोर से अपने फेफड़ों में हवा खीचने लगा था....अभी वो संयत हुआ ही था कि झील में हुए एक तेज़ विस्फोट ने एक बार फिर से भय कि लहरें उस व्यक्ति के चेहरे पर ला दी थी....
वो व्यक्ति तेज़ी से उस झील से बाहर निकलने के लिए तेज़ी से हाथ पैर चलाने लगा , वो आज इतना तेज़ तैर रहा था कि विश्वरिकॉर्ड धारी भी उसकी गति से पानी भरने लगे....झील में ना जाने आज कैसा उफान आना शुरू हो चुका , ऐसा लग रहा था जैसे उस व्यक्ति के पीछे पानी के भीतर ही कुछ बड़ी तेज़ी से पीछा कर रहा हो ।
जिस्म को तोड़ देनी वाली मशक्कत करने के बाद वो व्यक्ति झील के किनारे पर पहुंच गया ....जैसे ही वो व्यक्ति पानी से बाहर निकला झील मै हो रही भयंकर हलचल भी उसी के साथ शांत पड गई जैसे दूध मै आए उबाल को किसी ने पानी के छींटे मार शांत किया हो....
वह व्यक्ति वही किनारे पर ही लेटा गहरी गहरी सांसे लेने लगा था....थोड़ी देर बाद खुद को संयत करने के बाद उसने जब आंखे खोली तो पूर्ण चंद्रमा का प्रकाश उसकी आंखो को चौंधिया गया....
अभी कुछ ही देर हुई थी उस व्यक्ति को वहां लेटे हुए और तभी पास की झाड़ियों में सरसराहट तेज़ी से बढ़ सी गई........
""आऊ उ उ उं ऊं ऊं......""
भेड़िए के इस रुदन ने उस व्यक्ति की रीढ़ में जैसे सिहरन पैदा कर दी थी....
एक पल ना लगा उसे वहां से भागने के लिए ....वह व्यक्ति बिना मुड़े बस एक ही दिशा में भागे जा रहा था और पीछे से भेड़ियों कि आवाजें और ज्यादा नजदीक आती उसे सुनाई दे रही थी....
घने पेड़ों के बीच से भागता वह व्यक्ति अब हाफने सा लगा था....वह किसी भी तरह अपनी जान बचा कर इस वीराने से निकालना चाहता था , बार बार वह व्यक्ति खुद से बस यही बात दोहरा रहा था कि ...
"" बस कुछ दूर और ....किनारा आने ही वाला है ...""
उस व्यक्ति की बोट द्वीप के किनारे पर ही मौजूद थी जो कि उसके जीवन की एक मात्र आशा थी इस द्वीप से जीवित बाहर निकालने की.....
अचानक उस व्यक्ति को ठोकर लगी और वह ढलान पर लुढ़कने लगा ....लेकिन जब वह लुढ़कते हुए एक पेड़ से टकराया तो वो हो गया जो किसी भी सर्वाइवर या अकेले फसे व्यक्ति के साथ नहीं होना चाहिए .....
उसकी जांघ में लकड़ी को एक बड़ा टुकड़ा पेवस्त हो चुका था ....दर्द के मारे घुटी हुई चीख ही निकल सकी उसके मुंह से....खून लगातार बहने लगा था....
भेड़िए पहले से ही उस व्यक्ति पर आक्रामक थे लेकिन अब उन्हें ताज़ा खून की गंध भी मिल गई थी इस लिए उस व्यक्ति के आस पास पहले से ज्यादा हलचल तेज़ हो गई.....भेड़ियों की गुर्राहट लगातार बढ़ती ही जा रही थी तभी उस व्यक्ति ने एक आखिरी कोशिश करी वहां से उठ कर चलने की लेकिन वो कोशिश कामयाब नही हुई....
जैसे ही उस व्यक्ति ने खड़े होने की कोशिश करी खट की आवाज के साथ उसकी जांघ की हड्डी का एक बड़ा टुकड़ा मांस से बाहर निकल आया....अब कुछ नहीं हो सकता था ना तो वह कहीं भाग सकता था ना कोई इस वीराने में उसकी मदद को आने वाला था ।
उस व्यक्ति की आंखो में आंसू आ चुके थे कुछ ना कर पाने की बेबसी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी.....लेकिन तभी उसने अपने आंसू पोंछे और अपनी कमर पर बंधी साइड पॉकेट से एक डायरी और एक शीशी निकाली....
डायरी एयर टाइट पॉलीथिन से कवर थी इसलिए झील के पानी से कुछ नुकसान नहीं हुआ था....उस व्यक्ति ने पॉलीथिन से जब वो डायरी निकाल जब उसे खोला तो सबसे पहले उसे अपनी बीवी की तस्वीर नजर आई .....उसकी बीवी के साथ दो बच्चे अगल बगल खड़े थे जबकि उसकी गोद में एक बच्चा और भी था....
अपने बीवी बच्चो की तस्वीर देख ना जाने वह व्यक्ति कौनसी यादों में खो गया....लेकिन एक थर्रा देने वाली आवाज से वो व्यक्ति जैसे नींद से जागा....भेड़िए उसे दिखाई नहीं दे रहे थे लेकिन उनकी भयंकर गुर्राहट वो व्यक्ति आसानी से सुन पा रहा था....उस व्यक्ति के अनुभव के हिसाब से भेड़ियों उसको चारों तरफ से पहले घेरेंगे ओर उसके बाद वो सब अपने शिकार का लुत्फ उठाएंगे.....मौत नजदीक थी इसलिए उसने आखिरी बार उस तस्वीर को देखा ओर डायरी के कुछ पन्ने पलटने के बाद एक जगह आकर उसकी निगाह थम गई.....
उस पन्ने पर कुछ नंबर लिखे थे और कुछ आडी तिरछी रेखाएं जैसे कि वह रेखाएं किसी जगह का नक्शा हों...उस व्यक्ति ने तुरंत वह पन्ना डायरी से फाड़ा और साइड पॉकेट से डायरी के साथ निकाली हुई शीशी को खाली करने लगा.....
उस शीशी मैं कुछ रंग बिरंगे दुर्लभ प्रजाति के फूल थे जो इस व्यक्ति ने इसी द्वीप से इकट्ठे लिए थे....
फूलों को निकालने के बाद उस व्यक्ति ने वह पन्ना उस शीशी में डाला और ऊपर से कस कर लकड़ी का कॉर्क लगा दिया....
पास में बह रही एक छोटी नदी पर उसकी नजर पहले ही पड़ गई थी इसलिए उसने ये सब करने का फैसला लिया था....
सब से पहले उसने अपनी डायरी वापस एयर टाइट पॉलीथिन में पेक कर उसी पेड़ के पास पड़े पत्थर के नीचे रख दिया जहां वह इस वक्त सहारा लेकर बैठा हुआ था....
फिर धीरे धीरे सरक कर वह व्यक्ति उस छोटी नदी की तरफ बढ़ने लगा जो उस से कुछ मीटर की दूरी पर ही बह रही थी.....
लेकिन वह व्यक्ति ज्यादा आगे बढ़ पाता उस से पहले ही झाड़ियों से एक भेड़िए ने निकल कर उस व्यक्ति पर हमला कर दिया लेकिन अपने सलामत पैर की एक ठोकर से ही वह भेड़िया दूर जा गिरा....तभी सामने से एक भेड़िया ओर निकल आया जिसने उस व्यक्ति का वह हाथ अपने जबड़ों में दबा लिया जिसमें वो शीशी थी....
आने वाली मृत्यु का अहसास अब उस व्यक्ति को भी हो गया था इसलिए उसने बिना देरी करे अपने दूसरे हाथ से खंजर निकाल कर सीधा उस भेड़िए के मस्तक पर घोप दिया....वो भेड़िया उसी वक्त वहीं ढेर हो गया ....
अभी वो व्यक्ति भेड़िए के सर मैं धंसा खंजर निकाल पाता उस से पहले ही तीन भेड़िए और झाड़ियों से निकल कर बाहर आ गए.....यानी इस वक्त चार भेड़ियों ने उसे घेर लिया था जबकि उनके पीछे और भी भेड़ियों के होने का आभास उस व्यक्ति को हो चुका था....उसने खंजर निकालने की कोशिश ना करते हुए बस सरकना जारी रखा .......
अभी वह कुछ फीट ही आगे सरका था कि दो भेड़ियों ने उसके पैरो पर हमला कर दिया.....बहती नदी उस व्यक्ति के आंखो के सामने थी इसलिए उसने तुरंत हाथ में मजबूती से पकड़ी शीशी उस नदी में लुढ़का दी जो कि पास में ही स्थित विशाल समंदर में मग्न हो जाएगी....
शीशी को नदी में बहता देख उस व्यक्ति ने राहत की सांस ली और उसी के साथ उस वीराने मैं चीखों का वह दौर शुरू हुआ जो उस व्यक्ति की आखरी सांस निकलने के बाद ही थमा.....
हेलीकॉप्टर अभी समंदर के ऊपर ही लगातार उडे जा रहा था....प्रिया , सुमन और नेहा के साथ साथ राज भी गहरे विशाल समंदर को ही निहारने में लगे हुए थे....
तभी पायलट की आवाज हैडफोन में गूंजी....
"" सर आपके दाईं तरफ क्षितिज की ओर देखिए....""
पायलेट का इतना ही कहना था कि सबकी नजरें दाईं ओर घूम गई....
उस तरफ क्षितिज पर कुछ काले घने बादल दिखाई पड़ रहे थे और उन बादलों मैं कड़कड़ाती बिजलियों की चमक इस धूप में भी आसानी से नजर आने लगी थी....
कोई कुछ पूछ पाता तभी पायलेट दुबारा बोलने लगा.....
"" सर यहां हमेशा इसी तरह का मौसम बना रहता है ....इस तूफान में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता और जिसने भी आज तक इस तूफान के राज को जानने कि कोशिश करी है वो कभी दुबारा लौट कर बाहर नहीं आ सका......""
उसने अपनी बात कहना जारी रख सबको एक नई जानकारी और प्रदान करी.....
"" उस दिशा मैं 70 वर्ग किलोमीटर के लगभग ही ये तूफान हमेशा फैला रहता है....कई स्पेस एजेंसी भी इस जगह की फोटो सैटलाइट से लेने की कोशिश कर चुकी है लेकिन कोई भी सैटलाइट इमेज बादलों के पार नहीं देख पाई....यहां तक कि बादलों के पार देखने वाले कैमरे भी कोई कमाल नहीं दिखा सके.....""
राज - लेकिन ऐसा क्या हमेशा होता रहता है यहां.....कोई तो तरीका होगा इस तूफान के बारे में पता करने का....आपके पास तो सबमरीन भी है आप चाहे तो पानी के अंदर अंदर भी जाकर देख सकते हैं कि तूफान के पीछे क्या है.....
मेरे इस सवाल से सभी के चहरे पायलेट की तरफ मूड गए और ध्यान सिर्फ कान पर गूंजती पायलेट की आवाज पर....
"" सर इस तूफान में इतनी एनर्जी है कि किसी छोटे देश को सदियों तक ऊर्जा दे सके.....इलेक्ट्रो मैगनेटिक ऊर्जा इस कदर वहां फैली है कि कोई भी ऊर्जा से चलने वाली चीज़ उस तक पहुंच ही नहीं सकती ....यहां तक कि ये इस मीटर को देखिए...""
सभी का ध्यान पायलेट द्वारा इंगित किए हुए स्थान पर चला गया.....ये दिशा सूचक यंत्र था जो कि लगातार गोल गोल घूमे जा रहा था ....
सुमन - ये दिशा सूचक इस तरह गोल गोल कैसे घूमने लगा.....???
सुमन की बात सुन पायलेट कहता है....
"" मैडम हम उस तूफान से इतना दूर है लेकिन फिर भी इलेक्ट्रो मैगनेटिक ऊर्जा ने हमारे कुछ सिस्टम बंद कर रखे है....जैसे ये दिशा सूचक और ऑटो पायलेट तकनीक भी ....""
पायलेट की बात सुन एक बार तो सबके तोते हवा में उड़ने लगे जहां सबकी आंखे इस बात को सुन आश्चर्य से फ़ैल गई वहीं नेहा ने अपनी एक आंख बंद करके एक ठंडी सांस ली....
प्रिया - अंकल तो हम उस ब्लू आयलैंड तक कैसे पहुंच पाएंगे जबकि दिशा बताने वाला सिस्टम काम ही नहीं कर रहा....??
प्रिया की बात का जवाब पायलेट ने मुस्कुरा के दिया....
"" सही सवाल किया बेटा..... और इसका जवाब है अनुभव .....पिछले कई सालों से में इस द्वीप पर आ रहा हूं इस लिए मैं हमेशा सही वक्त और गति का ध्यान रखता हूं....अभी मेरा दिशा सूचक ये सूर्य है लेकिन कई बार सूर्य भी काम नहीं आता इस लिए नीचे समंदर में बने छोटे छोटे द्वीप मुझे सही रास्ता दिखाते है....हां वैसे रात का सफर ज्यादा आसान होता है बशर्ते दिन के....क्योनी सितारे अपनी स्थिति कभी नहीं बदलते.... और वो देखो हम पहुंच ही गए....."""
पायलेट अपनी उंगली का इशारा एक दिशा में किया जहां सिर्फ नीले पानी पर उभरा हुआ एक काफी बड़ा द्वीप था.... हरे वर्क्षो से लबालब ये द्वीप ऐसा लग रहा था जैसे कि प्रकृति ने सारा हरा रंग सिर्फ इसी द्वीप को रंगने के काम में लिया हो....
द्वीप की सुन्दरता में सब इस कदर खो गए की जैसे ये नज़ारा हमेशा के लिए सभी अपने दिलों दिमाग में बसा रहे हो.....
क्या राज है उस तूफान का.....क्या राज की मंजिल वहीं तूफान है या फिर कुछ जो उस तूफान के पीछे छुपा हुआ है...??.....जानने के लिए साथ बने रहें ।
कौनसा अपडेट दोस्तNice update, bane to rahenge magar update kab aaye ga?

धन्यवाद ऋतु जीSuperb update
Kya bat kya bat10.....
तकरीबन दो साल पहले दूर दराज समंदर में ही कहीं स्थित निर्जन द्वीप पर....
"" खों.... खों... खों...""
जैसे वो व्यक्ति द्वीप में स्थित झील से लड़ रहा था ....जैसे ही वो डूबता व्यक्ति संघर्ष कर झील के पानी से बाहर निकलने की कोशिश करता वैसे ही वो झील उसे फिर से अपने अंदर खेंच लेती....
डूबते हुए व्यक्ति ने एक आखिरी कोशिश करी और एक लम्बी सांस लेकर झील में डुबकी लगा दी और अपने शिकारी खंजर को बूट से एक झटके मैं बाहर खींच लिया....उसकी एक टांग पर अभी भी कुछ लिपटा हुआ था जो की उसे झील के तले में खींचा चला जा रहा था....
दम घुटने लगा था उस व्यक्ति का लेकिन फिर भी वह खुद के पैर को आजाद कराने के लिए खंजर चलाने लगा , उसके हाथ भी मौत के डर से और ज्यादा तेज़ चलने लगे थे.... जल्दी ही उस आफत से खुद को आजाद कर वो व्यक्ति झील की सतह पर पहुंच गया.....
झील की सतह पर पहुंचते ही वह व्यक्ति जोर जोर से अपने फेफड़ों में हवा खीचने लगा था....अभी वो संयत हुआ ही था कि झील में हुए एक तेज़ विस्फोट ने एक बार फिर से भय कि लहरें उस व्यक्ति के चेहरे पर ला दी थी....
वो व्यक्ति तेज़ी से उस झील से बाहर निकलने के लिए तेज़ी से हाथ पैर चलाने लगा , वो आज इतना तेज़ तैर रहा था कि विश्वरिकॉर्ड धारी भी उसकी गति से पानी भरने लगे....झील में ना जाने आज कैसा उफान आना शुरू हो चुका , ऐसा लग रहा था जैसे उस व्यक्ति के पीछे पानी के भीतर ही कुछ बड़ी तेज़ी से पीछा कर रहा हो ।
जिस्म को तोड़ देनी वाली मशक्कत करने के बाद वो व्यक्ति झील के किनारे पर पहुंच गया ....जैसे ही वो व्यक्ति पानी से बाहर निकला झील मै हो रही भयंकर हलचल भी उसी के साथ शांत पड गई जैसे दूध मै आए उबाल को किसी ने पानी के छींटे मार शांत किया हो....
वह व्यक्ति वही किनारे पर ही लेटा गहरी गहरी सांसे लेने लगा था....थोड़ी देर बाद खुद को संयत करने के बाद उसने जब आंखे खोली तो पूर्ण चंद्रमा का प्रकाश उसकी आंखो को चौंधिया गया....
अभी कुछ ही देर हुई थी उस व्यक्ति को वहां लेटे हुए और तभी पास की झाड़ियों में सरसराहट तेज़ी से बढ़ सी गई........
""आऊ उ उ उं ऊं ऊं......""
भेड़िए के इस रुदन ने उस व्यक्ति की रीढ़ में जैसे सिहरन पैदा कर दी थी....
एक पल ना लगा उसे वहां से भागने के लिए ....वह व्यक्ति बिना मुड़े बस एक ही दिशा में भागे जा रहा था और पीछे से भेड़ियों कि आवाजें और ज्यादा नजदीक आती उसे सुनाई दे रही थी....
घने पेड़ों के बीच से भागता वह व्यक्ति अब हाफने सा लगा था....वह किसी भी तरह अपनी जान बचा कर इस वीराने से निकालना चाहता था , बार बार वह व्यक्ति खुद से बस यही बात दोहरा रहा था कि ...
"" बस कुछ दूर और ....किनारा आने ही वाला है ...""
उस व्यक्ति की बोट द्वीप के किनारे पर ही मौजूद थी जो कि उसके जीवन की एक मात्र आशा थी इस द्वीप से जीवित बाहर निकालने की.....
अचानक उस व्यक्ति को ठोकर लगी और वह ढलान पर लुढ़कने लगा ....लेकिन जब वह लुढ़कते हुए एक पेड़ से टकराया तो वो हो गया जो किसी भी सर्वाइवर या अकेले फसे व्यक्ति के साथ नहीं होना चाहिए .....
उसकी जांघ में लकड़ी को एक बड़ा टुकड़ा पेवस्त हो चुका था ....दर्द के मारे घुटी हुई चीख ही निकल सकी उसके मुंह से....खून लगातार बहने लगा था....
भेड़िए पहले से ही उस व्यक्ति पर आक्रामक थे लेकिन अब उन्हें ताज़ा खून की गंध भी मिल गई थी इस लिए उस व्यक्ति के आस पास पहले से ज्यादा हलचल तेज़ हो गई.....भेड़ियों की गुर्राहट लगातार बढ़ती ही जा रही थी तभी उस व्यक्ति ने एक आखिरी कोशिश करी वहां से उठ कर चलने की लेकिन वो कोशिश कामयाब नही हुई....
जैसे ही उस व्यक्ति ने खड़े होने की कोशिश करी खट की आवाज के साथ उसकी जांघ की हड्डी का एक बड़ा टुकड़ा मांस से बाहर निकल आया....अब कुछ नहीं हो सकता था ना तो वह कहीं भाग सकता था ना कोई इस वीराने में उसकी मदद को आने वाला था ।
उस व्यक्ति की आंखो में आंसू आ चुके थे कुछ ना कर पाने की बेबसी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी.....लेकिन तभी उसने अपने आंसू पोंछे और अपनी कमर पर बंधी साइड पॉकेट से एक डायरी और एक शीशी निकाली....
डायरी एयर टाइट पॉलीथिन से कवर थी इसलिए झील के पानी से कुछ नुकसान नहीं हुआ था....उस व्यक्ति ने पॉलीथिन से जब वो डायरी निकाल जब उसे खोला तो सबसे पहले उसे अपनी बीवी की तस्वीर नजर आई .....उसकी बीवी के साथ दो बच्चे अगल बगल खड़े थे जबकि उसकी गोद में एक बच्चा और भी था....
अपने बीवी बच्चो की तस्वीर देख ना जाने वह व्यक्ति कौनसी यादों में खो गया....लेकिन एक थर्रा देने वाली आवाज से वो व्यक्ति जैसे नींद से जागा....भेड़िए उसे दिखाई नहीं दे रहे थे लेकिन उनकी भयंकर गुर्राहट वो व्यक्ति आसानी से सुन पा रहा था....उस व्यक्ति के अनुभव के हिसाब से भेड़ियों उसको चारों तरफ से पहले घेरेंगे ओर उसके बाद वो सब अपने शिकार का लुत्फ उठाएंगे.....मौत नजदीक थी इसलिए उसने आखिरी बार उस तस्वीर को देखा ओर डायरी के कुछ पन्ने पलटने के बाद एक जगह आकर उसकी निगाह थम गई.....
उस पन्ने पर कुछ नंबर लिखे थे और कुछ आडी तिरछी रेखाएं जैसे कि वह रेखाएं किसी जगह का नक्शा हों...उस व्यक्ति ने तुरंत वह पन्ना डायरी से फाड़ा और साइड पॉकेट से डायरी के साथ निकाली हुई शीशी को खाली करने लगा.....
उस शीशी मैं कुछ रंग बिरंगे दुर्लभ प्रजाति के फूल थे जो इस व्यक्ति ने इसी द्वीप से इकट्ठे लिए थे....
फूलों को निकालने के बाद उस व्यक्ति ने वह पन्ना उस शीशी में डाला और ऊपर से कस कर लकड़ी का कॉर्क लगा दिया....
पास में बह रही एक छोटी नदी पर उसकी नजर पहले ही पड़ गई थी इसलिए उसने ये सब करने का फैसला लिया था....
सब से पहले उसने अपनी डायरी वापस एयर टाइट पॉलीथिन में पेक कर उसी पेड़ के पास पड़े पत्थर के नीचे रख दिया जहां वह इस वक्त सहारा लेकर बैठा हुआ था....
फिर धीरे धीरे सरक कर वह व्यक्ति उस छोटी नदी की तरफ बढ़ने लगा जो उस से कुछ मीटर की दूरी पर ही बह रही थी.....
लेकिन वह व्यक्ति ज्यादा आगे बढ़ पाता उस से पहले ही झाड़ियों से एक भेड़िए ने निकल कर उस व्यक्ति पर हमला कर दिया लेकिन अपने सलामत पैर की एक ठोकर से ही वह भेड़िया दूर जा गिरा....तभी सामने से एक भेड़िया ओर निकल आया जिसने उस व्यक्ति का वह हाथ अपने जबड़ों में दबा लिया जिसमें वो शीशी थी....
आने वाली मृत्यु का अहसास अब उस व्यक्ति को भी हो गया था इसलिए उसने बिना देरी करे अपने दूसरे हाथ से खंजर निकाल कर सीधा उस भेड़िए के मस्तक पर घोप दिया....वो भेड़िया उसी वक्त वहीं ढेर हो गया ....
अभी वो व्यक्ति भेड़िए के सर मैं धंसा खंजर निकाल पाता उस से पहले ही तीन भेड़िए और झाड़ियों से निकल कर बाहर आ गए.....यानी इस वक्त चार भेड़ियों ने उसे घेर लिया था जबकि उनके पीछे और भी भेड़ियों के होने का आभास उस व्यक्ति को हो चुका था....उसने खंजर निकालने की कोशिश ना करते हुए बस सरकना जारी रखा .......
अभी वह कुछ फीट ही आगे सरका था कि दो भेड़ियों ने उसके पैरो पर हमला कर दिया.....बहती नदी उस व्यक्ति के आंखो के सामने थी इसलिए उसने तुरंत हाथ में मजबूती से पकड़ी शीशी उस नदी में लुढ़का दी जो कि पास में ही स्थित विशाल समंदर में मग्न हो जाएगी....
शीशी को नदी में बहता देख उस व्यक्ति ने राहत की सांस ली और उसी के साथ उस वीराने मैं चीखों का वह दौर शुरू हुआ जो उस व्यक्ति की आखरी सांस निकलने के बाद ही थमा.....
हेलीकॉप्टर अभी समंदर के ऊपर ही लगातार उडे जा रहा था....प्रिया , सुमन और नेहा के साथ साथ राज भी गहरे विशाल समंदर को ही निहारने में लगे हुए थे....
तभी पायलट की आवाज हैडफोन में गूंजी....
"" सर आपके दाईं तरफ क्षितिज की ओर देखिए....""
पायलेट का इतना ही कहना था कि सबकी नजरें दाईं ओर घूम गई....
उस तरफ क्षितिज पर कुछ काले घने बादल दिखाई पड़ रहे थे और उन बादलों मैं कड़कड़ाती बिजलियों की चमक इस धूप में भी आसानी से नजर आने लगी थी....
कोई कुछ पूछ पाता तभी पायलेट दुबारा बोलने लगा.....
"" सर यहां हमेशा इसी तरह का मौसम बना रहता है ....इस तूफान में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता और जिसने भी आज तक इस तूफान के राज को जानने कि कोशिश करी है वो कभी दुबारा लौट कर बाहर नहीं आ सका......""
उसने अपनी बात कहना जारी रख सबको एक नई जानकारी और प्रदान करी.....
"" उस दिशा मैं 70 वर्ग किलोमीटर के लगभग ही ये तूफान हमेशा फैला रहता है....कई स्पेस एजेंसी भी इस जगह की फोटो सैटलाइट से लेने की कोशिश कर चुकी है लेकिन कोई भी सैटलाइट इमेज बादलों के पार नहीं देख पाई....यहां तक कि बादलों के पार देखने वाले कैमरे भी कोई कमाल नहीं दिखा सके.....""
राज - लेकिन ऐसा क्या हमेशा होता रहता है यहां.....कोई तो तरीका होगा इस तूफान के बारे में पता करने का....आपके पास तो सबमरीन भी है आप चाहे तो पानी के अंदर अंदर भी जाकर देख सकते हैं कि तूफान के पीछे क्या है.....
मेरे इस सवाल से सभी के चहरे पायलेट की तरफ मूड गए और ध्यान सिर्फ कान पर गूंजती पायलेट की आवाज पर....
"" सर इस तूफान में इतनी एनर्जी है कि किसी छोटे देश को सदियों तक ऊर्जा दे सके.....इलेक्ट्रो मैगनेटिक ऊर्जा इस कदर वहां फैली है कि कोई भी ऊर्जा से चलने वाली चीज़ उस तक पहुंच ही नहीं सकती ....यहां तक कि ये इस मीटर को देखिए...""
सभी का ध्यान पायलेट द्वारा इंगित किए हुए स्थान पर चला गया.....ये दिशा सूचक यंत्र था जो कि लगातार गोल गोल घूमे जा रहा था ....
सुमन - ये दिशा सूचक इस तरह गोल गोल कैसे घूमने लगा.....???
सुमन की बात सुन पायलेट कहता है....
"" मैडम हम उस तूफान से इतना दूर है लेकिन फिर भी इलेक्ट्रो मैगनेटिक ऊर्जा ने हमारे कुछ सिस्टम बंद कर रखे है....जैसे ये दिशा सूचक और ऑटो पायलेट तकनीक भी ....""
पायलेट की बात सुन एक बार तो सबके तोते हवा में उड़ने लगे जहां सबकी आंखे इस बात को सुन आश्चर्य से फ़ैल गई वहीं नेहा ने अपनी एक आंख बंद करके एक ठंडी सांस ली....
प्रिया - अंकल तो हम उस ब्लू आयलैंड तक कैसे पहुंच पाएंगे जबकि दिशा बताने वाला सिस्टम काम ही नहीं कर रहा....??
प्रिया की बात का जवाब पायलेट ने मुस्कुरा के दिया....
"" सही सवाल किया बेटा..... और इसका जवाब है अनुभव .....पिछले कई सालों से में इस द्वीप पर आ रहा हूं इस लिए मैं हमेशा सही वक्त और गति का ध्यान रखता हूं....अभी मेरा दिशा सूचक ये सूर्य है लेकिन कई बार सूर्य भी काम नहीं आता इस लिए नीचे समंदर में बने छोटे छोटे द्वीप मुझे सही रास्ता दिखाते है....हां वैसे रात का सफर ज्यादा आसान होता है बशर्ते दिन के....क्योनी सितारे अपनी स्थिति कभी नहीं बदलते.... और वो देखो हम पहुंच ही गए....."""
पायलेट अपनी उंगली का इशारा एक दिशा में किया जहां सिर्फ नीले पानी पर उभरा हुआ एक काफी बड़ा द्वीप था.... हरे वर्क्षो से लबालब ये द्वीप ऐसा लग रहा था जैसे कि प्रकृति ने सारा हरा रंग सिर्फ इसी द्वीप को रंगने के काम में लिया हो....
द्वीप की सुन्दरता में सब इस कदर खो गए की जैसे ये नज़ारा हमेशा के लिए सभी अपने दिलों दिमाग में बसा रहे हो.....
क्या राज है उस तूफान का.....क्या राज की मंजिल वहीं तूफान है या फिर कुछ जो उस तूफान के पीछे छुपा हुआ है...??.....जानने के लिए साथ बने रहें ।
