Vikashkumar
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Mast updateमैं खिड़की के पिछे चुप देख रहा था मगर मुझे पता नहीं था की मां ने देख लिया है। अब मां बाल्टी से पानी निकाल के अपने शरीर पर डालने लगती हैं मगर मां ने अपने कपड़े नहीं उतारे ते वह कपड़े के उपर से ही अपने आप को गिला कर रही थी।
मां(मन में): तुझे क्या लगा की मैं कपड़े उतार के नहाऊंगी तेरे सामने ।
मैं मां को देखता हु कि वह मन ही मन मुस्कुरा रही थी और अपने शरीर पर पानी डाल रही थी । मैं तो यह देखना चाह रहा था की मां कब अपनी बुर को साफ करेंगी उस दाढ़ी बनाने वाली सेविंग से ।
मैं(मन में): मां अपनी झांटों के बल साफ करो ना तुम्हारा बेटा देखने को चाह रहा है मां मां।
मां अपनी साड़ी के ऊपर से पानी डाल रही थी और साड़ी के ऊपर से ही अपनी शरीर को मल रही थी । मां पानी से भींगी हुई और ऊपर से उनके चूतड़ का गोल आकर दिख रहा था और उनकी चूची जो ब्लाउज के अंदर थी उसका भी शेप दिख रहा था ।
मां(मन में): क्या करूं इसके सामने नन्गी हो जाऊ क्या मैं कैसी मां हु जो अपने बेटे के सामने नन्गी होने को सोच रही हु।
मां(का दिमाग): हो जा संगीता तु भी तो यह करना चाहती है और तुने और बबीता ने मिल कर कहा है की अपने बेटे से प्यार करने में क्या गलत है।
मां(मन में): नहीं उस टाइम तो मैंने ऐसे ही बोल दी थी मगर अब करने में डर लग रहा है।
मैं मां को देखता हु की वह मुझे पीठ दिखा के चुप चाप बैठी थी मां अब अपने शरीर पर पानी भी नहीं डाल रही थी।
मैं(मन में): क्या कर रही है मां मुझे तो कुछ अंदाजा भी नहीं लग रहा हैं।
मां(का दिमाग): उस टाइम तो तु बबीता को बहुत ज्ञान पेल रही थी अब क्या हुआ अपने टाइम पर बता।
मां(मन में): उस टाइम तो मैंने जोश में बोल दी थी ।
मां(का दिमाग): तु भी प्यासी है और आज तो तुने अपने बेटे का लन्ड भी देख लिया था उसके पेंट में जो तम्बू बना हुआ था और तो और तेरे पति से तो बड़ा ही है उसका लन्ड।
मां(मन में): हा पता है मेरे पति से बड़ा है उसका औजार मगर।
मां(का दिमाग): मगर वगर कुछ नहीं आज तु कर के दिखा अपने बेटे को जो तेरे मन में है।
मैं अभी भी यही खिड़की के पीछे खड़ा हो के देख रहा था और अभी भी वैसे ही बैठी थी और जग के पानी में अपना हाथ डाले हुई थी। और कभी कभी मां अपना शर हिला रही थी मगर मुझे पता नहीं था क्यों हिला रही है।
मां(मन में): सही है जब मुझे बबिता को बताने में शर्म नहीं आई तो मुझे करने में कैसी शर्म ।
मां(का दिमाग): हा अब सही फैसला लिया है।
मैं अब मां को उठते हुए देखता हु और मां अपनी साड़ी खोलने लगती है।
मैं(मन में): मां आज अपन पुरी नन्गी हो जाओ मैं अपको पुरा नन्गा देखना चाहता हु।
मां(मन में): बेटा तु आज अपनी मां को नन्गी देख के अपना हथियार खड़ा कर और तेरी मां तुझे अपनी जिस्म दिखा ये गी।
मां(का दिमाग): आज तु लाज शर्म छोड़ दे संगीता आज नन्गी हो के दिखा अपने बेटे को और एक कपड़ा भी नहीं रहना चाहिए तेरे शरीर पर।
मां अब साड़ी उतार के रस्सी पर रख देती है और वह अब पेटिकोट और ब्लाउज में हो जाती है मैं ये देख के अपना लन्ड निकाल के अपने हाथों से आगे पीछे मरने लगता हु और मेरी दिल की धड़कने तेज होने लगती है ।
मां यह सब बहुत धीरे धीरे कर रही थी जब मां पेटीकोट में थी तो यह और अपने ऊपर पानी डाल रही थी और मैं उनके पेटिकोट के अन्दर कच्छी का छाप देख रहा था जो गीले होने के कारण उभर आया था। थोड़ी देर बाद मां पेटिकोट उठा के अपनी कच्छी उतारने लगती है। और मैं यह देख के मेरी दिल की धड़कने और तेज होने लगती हैं जब मां कच्छी उतार देती है तो वह वही रख देती है ।
अब मां का पेटिकोट मां के चूतड़ों में घुसा हुआ था और चूतड़ का साइज अब और निखर कर आ रहा था मेरा मन कर रहा था की अभी मां के पास जाके उनके चूतड़ों को चाटने लागू और अपनी नाक घुसा के चूतड़ को सुंघने लागु । अब देखता हु की मां अपनी एक टांग उठा के नल पर रख देती है और अपने हाथों में साबुन रगड़ती है और साबुन के झाग को अपनी चुत पर लगा देती है और दाढ़ी बनाने वाली से अपनी झाट के बाल साफ करने लगती है। मगर मुझे सही से दिख नहीं रही थी मां की चुत क्योंकी पेटिकोट चुत को ढक दे रहा था।
मां(मन में): मेरी बुर देखना चाह रहा हैं लेकिन मैं तुझे नहीं दिखाऊंगी अभी बेटा थोड़ी सबर कर।
मां अब पीठ मेरी तरफ कर के खड़ी होके अपनी झाट बनाने लगती हैं। कुछ देर बाद मां अपनी चुत साफ कर के अपनी चुत पर पानी मारने लगती है ।
मां(का दिमाग): तु तो नन्गी होने वाली थी क्या कर रही है।
मां (मन में): रुको तो सही अभी रात होने ही वाली है तब नन्गी होऊंगी।
मैं अभी भी मां को देख अपना लन्ड हिलाए जा रहा था । थोड़ी देर में रात होती है तब मां अपनी ब्लाउज को खोल ती हैं और अपनी ब्रा की हुक को खोल के नीचे गिरा देती हैं।
मैं(मन में): मां रात होने का इंतजार कर रही थी क्या ।
देखते देखते मां अब मेरे नजरों के सामने पुरी नन्गी हो जाती है और उनका पेटिकोट भी उनके नीचे गिरा हुआ था ।
मैं ये देख मेरा लन्ड और टाइट होने लगा था और मैं तुरंत से अपना पैंट उतार देता हु और मैं भी नन्गा हो जाता हु और अपने हाथ की रफ्तार को तेज कर देता हु। मां अपने शरीर पर साबुन लगा रही थी और अपने शरीर को मल रही थी।
मां साबुन लगा रही थी तो वह अपने शरीर के हर एक अंग को अपने हाथों से आराम आराम से साबुन को रगड़ रही थी और अपनी चूचियों को दबा भी रही थी। अब मां अपने ऊपर पानी डाल ती हैं और जो साबुन लगा था मां के शरीर से हट जाता है और मां का दूधिया बदन इतनी रात में चमकने लगता है।
मैं( मन में): मां देखना तुम्हारे बेटे का लोड़ा तुम्हें देखकर कैसे खड़ा है और आपको बुला रहा है aaaaaahhhh sssssssshhhh।
मां(मन में): यह कमीनी मेरी बुर इसे हमेशा पेशाब करने को चाहिए होता है जब भी नहाने आती हु।
फिर मां वही बैठ जाती हैं और अपनी प्यारी सी बुर से पानी के फव्वारे निकलना शुरू कर देती है। जब मैं मां मुत्ते देखता हु तो मेरी शरीर में एक अलग ही एहसास होता है और मेरा लोड़ा झड़ने को तैयार हो जाता है और मेरा शरीर पूरी तरीके से टाइट हो जाता है जब मैं झड़ने वाला होता हु।
मां(मन में): देख ले बेटा आज अपनी मां को पेशाब करते हुए कैसे तेरी मां नन्गी बैठकर पेशाब कर रही है तेरे सामने।
मां जब पेशाब कर रही थी तो उसमें से सिटी की आवाज आ रही थी मगर मेरे कानों तक नहीं पहुंच पा रही थी वह सिटी की आवाज। अब मैं झड़ जाता हु और मेरे लन्ड से निकाला माल वही उसी रूम के फर्श पर गिरा देता हु।
मैं(मन में): मां जो अपने अपनी बुर से जो पानी निकाला है वह आपके बेटे के लिए एक अमृत समान है मेरा मन कर रहा है अभी आपकी बुर आकर चाट लु जो भी पेशाब की पानी की बूंदे बची होगी सब चाट के साफ कर दु ।
मां पेशाब कर के उठ जाती है और अपनी बुर पर जग से पानी गिरने लगती है और साफ करती है । फिर बाद में तोलिया से अपने शरीर को पोंछ ती है और अपने बालों को झट कारती है । मां जब तौलिया से अपने बालों को झटकार रही थी तब मां की चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी । मेरा यह देख लन्ड फिर से खड़ा होने लगा था मां की चूचियां एक दम टाइट थी और जब यह ऊपर नीचे हो रही थी मेरा मन कर रहा था की उन चूचियों के बीच अपना मुंह रख दो और मां अपनी चूचियों से मेरे मुंह पर मारे जब यह ऊपर नीचे हो रही हो तब।
फिर जब मेरी नजर मां की चूतड़ पढ़ती है तो जो मेरा लन्ड अभी सही से खड़ा भी नहीं था तो वह अब चूतड़ को हिलता देख फन फना के खड़ा होने लगता है। मां चूतड़ भी हिल रहे थे और ऊपर नीचे हो रहते थे और जो कुछ पानी की बूंदे चूतड़ों पर थी वह भी टपक टपक के नीचे गिर रही थी। अब जब मां अपने बाल सुखा लेती है तो यह रस्सी पर रखी पेटिकोट को उठाकर पहने लगती है और पेटिकोट को अपनी चुचियों तक लाकर बांध देती हैं और जो मैंने मां की कच्छी रस्सी पर रखी थी पाउडर लगा के मां उसे ले लेती है और यहां से निकल के अपने रूम में आजाती है।
मैं(मन में): अब मजा आएगा जब मां वह कच्छी पहनेगी तो मैं भी देखूंगा उस पाउडर का कमाल।
मैं यहां से निकल जाता हु और अपने रूम में आकर लेट के सोचने लगता हु।
मैं(मन में): क्या मां मुझे बुलाएगी की आकर मुझे चोद दे जैसे बबीता आंटी को कह रही थी या फिर गाजर और मूली से काम चलाएगी।
इधर मां अपने रूम में आकर कपड़े पहने लगती है और मां ने अपने रूम का दरवाजा खुला छोड़ रखा था ताकि मैं आकर देख सकू मगर मैं तो अपने रूम में था।
मां(मन में): जरा पीछे मुड़कर के तो देखो कहीं दरवाजे से देखा तो नहीं रहा मेरे को।
मगर मैं वहां नहीं था तो मैं मां को नहीं देखता हु।
मां(मन में): चलो कोई नहीं अभी नहीं आया तो क्या बाद में दिखा दूंगी।
अब यह कच्छी पहन लेती है जिस मैं मैने पाउडर लगाया था और उसके बाद साड़ी पहन के बाहर आती है और मेरे को खाना खाने के लिए आवाज लगती है।
मां: रोहित आजा खाना खाल ले।
मैं: आया मां।
मैं अपने रूम से निकल के घर के आंगन में आकर बैठ जाता हूं और मां भी खाना लेके आ जाती है और वह भी मेरे साथ बैठकर खाना खाने लगती है। और मां अपना साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देती है और कहती है। और मेरी नजर मां की चूचियों पर पड़ती है जो ब्लाउज के अंदर कैद थे और मां की चूचियों की दरार(क्लीवेज)मेरे को पागल कर रही थी।
मां: आज बहुत गर्मी है न बेटा।
मैं: हा मां आज बहुत गर्मी है देखो यह पंखा भी हवा सही से नहीं कर पा रहा है।
मां: मैं तो अभी नहा कर आई हु तो भी इतनी गर्मी लग रही है।
मैं(मन में): लगता है पाउडर ने अपना कमाल करना शुरू कर दिया है।
मगर अभी मां मुझे से मजे ले रही थी अभी पाउडर ने अपना कमाल करना शुरू नहीं करा था।
मैं: गर्मी इतनी है मां की नहाने का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
मां(मन में): और जो तु अपनी मां को देख रहा था नहाते वक्त उसका क्या बेटा।
मां: हा सही कह रहा है।
तभी घर के दरवाजे पर कोई आता है और दरवाजा बजने लगता है।
मां: इस टाइम कौन आगया।
मैं: आप खाओ मां में देखता हु ।
मां: हा जा जरा देख कौन आया हैं।
मैं घर का दरवाजा खोलता हु तो देखता हु बबिता आंटी आई होती है।
बबीता: तेरी मां कहा है रोहित।
बबीता आंटी कुछ ज्यादा ही जल्दी में थी तो वह घर के अंदर आ जाति है ।
बबीता: संगीता तेरे खेत की फसल पूरे जंगली सूअर बर्बाद कर रहे हैं।
मां: क्या कह रही है तु।
बबीता: हा तुम दोनों जल्दी जाओ और उन सुर को भगाओ नहीं तो तुम्हारी फसल बर्बाद कर देंगे वह।
मां अपना खाना जल्दी से खा लेती है और मैं तो पहले ही खा लिया था।
मैं: चलो मां जल्दी नहीं तो फसल बर्बाद ही जाएगा।
बबीता: हा चल ।
मां खाना खा के चलने के लिए तैयार हो जाती है। और हम तीनों घर से निकल जाते हैं और घर का दरवाजा बंद करके ताला लगा देते हैं।
बबीता: वह तो अच्छा हुआ कि मेरा बेटा उधर ही घूमने गया था उसने देखा कि तुम्हारी खेत की फसल बर्बाद कर रहे हैं तो आकर मुझे बताया तो मैं तुम्हें बताने आ गई।
मां: जंगली जानवरों का कुछ करना पड़ेगा बबीता क्या करें ऐसी हमारी फसल पहले की थी वह भी ऐसी बर्बाद कर दिया था।
बबीता: सुन संगीता कुछ कहना है तेरे से।
मां: हा बोल।
बबीता: बेटा तु थोड़ा आगे चला जा हम दोनों कुछ पर्सनल बात करनी है।
मैं: जी आंटी।
मैं थोड़ा आगे आ जाता हु और वह दोनों वहीं खड़े होकर कुछ बातें करने लगती है।
मां: बोल अब।
बबीता(शरमा के): आज मेरी सुहागरात।
मां(तेज आवाज में): क्या।
बबीता (चुप करते हुए): धीरे बोल।
मां: यह कब हुआ।
बबीता: आज ही जो तुने बताया मैंने कर दिया।
मां: तु तो बड़ी तेज निकली बबीता उस टाइम कैसे शरमा रही थी और घबरा भी रही थी और यह सब करने के लिए अब देखो तैयार है।
बबीता: हा तु कहां तक पहुंची अभी।
मां: मेरी किस्मत कहां तेरी जैसी।
बबीता: क्या हुआ।
मां: कुछ भी नहीं हुआ हमारे बीच मगर मैं अपनी तरफ से कर रही हु।
बबीता: सही है लगी रह अपनी तरफ से।
मां: कैसे जाएगी अपने बेटे के पास एकदम नई दुल्हन बनके।
बबीता: हा मैंने तो आज अपने बुर के बाल भी साफ कर लिया है एकदम चिकना कर दिया है।
मां: और तु मुझे छिनार कह रही थी।
बबीता(हंसते हुए): वो तो ऐसे ही कह रही थी।
मां: ह्म्म पता है।
बबीता: चल मैं चलती हु तेरे जीजा जी इंतजार कर रहे होंगे।
मां: क्या बात है बबीता "तेरे जीजा जी"।
बबीता(शरमा के): ह्म्म और नहीं तो क्या अब से मेरा बेटा तेरे जीजा जी।
मां(मां मेरी तरफ इशारा कर के): अच्छा जी और जो वहां खड़ा है वह तेरा क्या है।
बबिता(मस्ती में): वह मेरे जीजा जी है।
मां: ह्म्म्म।
बबीता: चलती हु मैं अब ।
मां: ठीक है जा तेरी सुहागरात की बहुत-बहुत बधाइयां।
बबीता आंटी वहां से चली जाती है और मां और मैं खेत के लिए निकल जाते है। हम दोनों पैदल ही चल रहे थे और रात का माहौल था सड़कों पर कोई भी नहीं था और हम दोनों चलते जा रहे थे तभी मैं सोचता हु।
मैं(मन में): उस पाउडर ने अभी तक कुछ असर नहीं दिखाई। मां तो बिल्कुल मस्त चल रही है।
कुछ दूर चलने के बाद हम खेत तक पहुंचने वाले थे और अब हम खेतों के बीच में थे और खेत में पतले से जगह में चल रहे थे हमारे आजू-बाजू में लंबे-लंबे झाड़ियां थी।
मां: बेटा जरा टॉर्च जालना।
मैं: जी मां लो।
मैं टॉर्च जलाकर मां को दे देता हु और अब मां मेरे आगे थी और मैं उनके पीछे चल रहा था और दोनों के हाथों में टॉर्च था।
मां आगे का रास्ता टॉर्च से देख रही थी और मैं मां के चूतड़ों को देख रहा था जो ऊपर नीचे हो रही थी साड़ी के अंदर और दाएं बाएं भी और मेरी टोर्च की लाइट मां के चूतड़ों पर रोशनी कर रही थी।
मां(मन में): लगता हैं की ये मेरे चूतड़ देख रहा है तभी तो इसकी टोर्च की लाइट इधर-उधर नहीं जा रही है मेरे कमर के नीचे रह रही है। रुक अभी कुछ दिखाती हु।
तभी मां अपनी कमर को लचकाने लगती हैं। और अब मां चूतड़ कुछ ज्यादा ही हिलेरी मार रहे थे ऊपर नीचे दाएं बाएं हो रहे थे। मैं यह देख मां के पीछे पागल हो जा रहा था और मेरा लन्ड अपने विराट रूप में आने लगा था पैंट के अंदर ही। मैं अभी भी यही सोच रहा था।
मैं(मन में): यार ये पाउडर कुछ कर क्यों नहीं रहा लगता है पैसा बर्बाद है। इतना देर हो गया है अभी तक तो असर कर देना चाहिए था।
मां(मन में): यह क्या हो रहा हैं मेरी बुर में मुझे खुजली क्यों होने लगी।
अब हम अपने खेत में आहते है और देखते हैं की फसल तो बिल्कुल सही है और कोई भी जंगली जानवर नहीं थे।
मैं:फसल तो बिल्कुल सही है मां यहां तो कोई जंगली जानवर भी नहीं है।
मां(तोड़ी परेशान को के): हा सही कह रहा है।
तभी मां के फोन पर कॉल आती है। और मैं खेत में जाकर देखने लगता हु कहीं फसल बर्बाद तो नहीं हुई है।
बबीता(चीखते हुए): ahhhh और तेज बेटा aaaahhh संगीता तु पहुंच गई खेत में।
मां: यह तेरी आवाज को क्या हुआ।
बबीता: aaaaahhhh ssssshhhhh बेटा aaaaaahhhhh बताया तो था तेरे को आज हमारी सुहागरात है।
मां बबीता आंटी की चीखे और उनकी शासकीया सुन रही थी। और जो मां की बुर में खुजली हो रही थी मां यही खेत के झोपड़ी के पास खड़ी हो के साड़ी के ऊपर से ही अपने हाथों से अपनी बुर की खुजली मिटा रही थी।
मां: तुने अपनी चीखे सुनने के लिए फोन किया है।
बबीता: aahhhh नहीं मैं यह कह रही हु आज रात तु भी मजे ले ले उस खेत में।
मां(मन में): मुझे तो पसीना भी होने लगा है और मेरी बुर तो आग मार रही है यह क्या हो रहा है मुझे।
मां: क्या।
बबीता: shhhhhh ahhhhh हा मैं झूठ बोलकर तेरे को खेत में भेजी हु ताकि तु भी कुछ कर सके।
मां: इसका मतलब कि तुने झूठ बोला था की हमारे खेत में जंगली जानवर आ गए है।
बबीता: हा चल अब कॉल कट रही हु।
मैं पूरे खेत को देख लेता हु कुछ भी नहीं होता है तो मैं मां के पास आता हु और मां को पसीने में तर बतर देखता हु।
मैं: मां आपको गर्मी लग रही है।
मां: हा बेटा बहुत ज्यादा ही गर्मी लग रही है मेरे को पसीना रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।
मैं(मन में): आह अब जाकर पाउडर ने अपना कमाल करना शुरू करा है।
मां के माथे से पसीना टपके जा रहा था और उनका पूरा शरीर पसीने सना हुआ था।
मैं: रुको मां में कुछ करता हु।
फिर मैं झोपड़ी के अंदर जाता हु और वहां से चारपाई लेकर आता हु और हाथ वाला पंखा भी लेकर आ जाता हु जो झोपड़ी में रखी हुई थी और झोपड़ी के बाहर चारपाई लाकर रख देता हु और मन से कहता हु।
मैं: मां चारपाई पर बैठ जाओ मैं हाथ वाला पंखा कर देता हु आपको।
मां(मन में): बेटा तु हवा तो कर देगा मगर जो मेरी बुर की गर्म हो रही है उसका क्या आज पता नहीं क्या हो रहा है मेरे साथ।
मां चारपाई पर बैठ जाती है और मां को हाथ वाला पंखा करता रहता हु। मां कभी-कभी अपनी बुर पर हाथ लग रही थी मगर मेरे को देखकर हटा दे रही थी हाथ को।
मां(मन में): क्या करूं अब यह गर्मी और खुजली मुझे से सहा नहीं जा रहा है।
मैं: मां अब राहत मिली रही है हवा कर रहा हु तुम्हें तो।
मां: नहीं बेटा यह पसीना रुकने का नाम नहीं ले रहा है तु हवा कर रहा है तो भी।
फिर चारपाई से ऊट खड़ी होती है और कहती है।
मां: मुझे अपनी साड़ी उतार ने दे तभी गर्मी शांत होगी।
मैं(मन में): मां मेरे सामने अपनी साड़ी उतरेगी आह मजे ही मजे मेरे तो आज ।
मां अपनी साड़ी साड़ी उतार के चारपाई पर रख देती है और मां अब पेटिकोट और ब्लाउज में थी उनका ब्लाउज भी गीला हो चुका था पसीने से।
मां(मन में): आज तो मैं अपने बेटे के सामने अपनी साड़ी उतार दी हु।
मां चारपाई पर बैठ जाती है और मैं कहता हु।
मैं: मां मैं आपके पसीना पोंछ दु।
मां: हा बेटा।
फिर में अपनी जेब में हाथ डालकर देखा हु की रुमाल है कि नहीं मगर रुमाल नहीं था मेरे जेब में।
मैं: मां रुमाल तो है ही नहीं कैसे पसीना साफ करु।
मां: मेरी साड़ी से कर दे।
फिर मैं मां की साड़ी उठाकर उनका पसीना पोंछ ने लगता हु पहले मैं मां के हाथों साफ करता हूं फिर उनके कमर को और जब मेरी एक ऊंगली मां की नाभि में जाती है तो मां के मुंह से आह की आवाज आती है।
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मां: aaahh सही साफ कर रहा है बेटा।
मां(मन में): यह कैसा एहसास था इसकी उंगली मेरे नाभि पर पड़ी मानो कि मेरे शरीर में करंट से दौड़ गया हो।
मैं पसीना साफ कर देता हूं फिर भी मां का पसीना नहीं रुकता है। और मां की बुर की गर्मी और बढ़ते जा रही थी।
मां(मन में): आह यह क्या हो रहा है मेरे को ऐसा लग रहा है कि मैं झड़ने वाली हु यह कैसा एहसास है।
मैं मां को देखता हु की वह अपनी आंख ऊपर कर रही थी मानो की यह अपने चरम सीमा पर हो।
मैं(मन में): यह मां अपनी आंखों को ऊपर क्यों कर रही है कहीं इस पाउडर की वजह से मां झाड़ने वाले तो नहीं है।
मां( मन में): aaaaahhh मैं झड़ने वाली हु वह भी अपने बेटे के आंखों के सामने।
मां चारपाई पर बैठे हुए थी और उनका शरीर हिलने लगा था मानो की मां अपनी बुर को चारपाई से रगड़ रही हो और उनके पैर टाइट होने लगे थे। मैं यह सब बड़े ध्यान से देख रहा था और देखते देखते ही मां का शरीर हिलने लगता है।
मां(मन में): aaaaahhh गई मैं aaaaahhhh बेटा ।
और मेरी नजर चारपाई के नीचे पड़ती है तो देखता हु नीचे पानी टपक रहा था। यह जो पानी टपक रहा था वह मां का पेशाब था जब वह झड़ी थी तो उनके बुर से पेशाब निकल गया था या कहो की जब औरतों को ऑर्गेज्म मिलता है तक यह होता है। मैं यह देखकर मां को कहता हु।
मैं: मां यह क्या कर रही हो अपने बैठे-बैठे पेशाब कर दिया।
मां(मन में): यह क्या कर दिया मैंने और मैं इतना मदहोश हो गई थी कि मुझे कुछ एहसास नहीं था कि मैं क्या कर रही हु और यह पेशाब वाला एहसास तो मैने जिंदगी में पहली बार करा है।
मां: क्या कह रहा है तु।
मैं: हा मां अपने पेशाब कर दिया है उठो देखो आपका पेटिकोट गिला होगा और चारपाई के नीचे देखो।
मां: क्या सही में मैं पेशाब कर दिया है।
मैं: हा।
मां जानबूझकर कह रही थी उन्हें पता था की पेशाब कर रहा है और अब मां चारपाई से उठकर नीचे देखने लगती है जहा पेशाब अभी भी बह रहा था जमीन पर।
मैं: देखो।
मां: हा यह कैसे हो गया मुझे पता नहीं बेटा।
मैं(मन में): मगर मुझे पता है मां कैसे हुआ ये।
मैं: मां अब आप कैसे रहोगी इस गीले पेटीकोट में।
मां: अच्छा सुन बेटा एक काम करते हैं आज रात यहीं पर रुक जाते हैं और जब तक मेरी पेटीकोट भी सूख जाएगी।
मैं(मजे लेते हुए): क्या अब आप पेटिकोट उतार के सो उगी।
मां: क्या कहा तुने।
मैं: मां मेरा मतलब वह नहीं था।
मां(मजे लेते हुए): सब समझ रही हु तेरा मतलब।
मैं: आपने तो कहा था कि जब पेटिकोट सूख जाएगा तब चलेंगे घर सुबह।
मां: मैने सुबह घर जाने की तो बात ही नहीं करी इसका मतलब की मैं अपना पेटिकोट उतार दु और तेरे सामने अपनी कच्छी और ब्रा सो जाऊं।
मां के मुंह से कच्छी और ब्रा शाब्द सुनकर मुझे अच्छा लगता है और उस पाउडर का असर अब काम हो रहा था।
मां: बोल ।
मैं: नहीं मां कैसी बात कर रही हो आप।
मां(मन में): देखो कैसे डर रहा है अब और शाम के वक्त देखो कैसे चुप के देख रहा था मेरे को नहाते हुए अभी बिल्कुल भीगी बिल्ली बन गया।
मां: नहीं तेरा मतलब वही था।
मैं: नहीं मां मैं कैसे सोच सकता हु अपनी मां के बारे में।
मां(मन में): अगर सोचता नहीं तो मुझे नहाते हुए नहीं देखता।
मां: अच्छा।
मैं: हा मां।
मां: नहीं तो वही सोच रहा था और अब मैं तेरे सामने अपना पेटिकोट खोलूंगी और तेरे साथ सो जाऊंगी।
मैं: मां क्या कर रही हो।
मां: नहीं अब तु अपनी मां को कच्छी और ब्रा में देख।
मां(मन में): इसके चेहरे का तो
रंग उड़ा हुआ है जैसे में बातें कर रही हो एकदम डरा हुआ चल बेटा ज्यादा नहीं डराऊंगी।
Next।।।।