Badhiya sasur bahu ne zabardast ghamasan machahyi makke ke khet me zabardastchapter 7
रामपाल माधुरी बीच खेत मे थे रामपाल बहोत बेताब जोस मे था बेचारा बीवी के जाने के बाद चुदाई का सुख नही ले पाया था
माधुरी भी बेचैन बेताब थी अपने ससुर से चुदवाने के लिये मनोज के ना होने से माधुरी रात तरप् मचल के सोती थी
रामपाल अपना लंड निकाल माधुरी को देख - चल बहु चूस के गिला करदे ताकि तेरी बुर मे लंड आराम से चला जाए
माधुरी घुटनों पे बैठ लंड को मुठी मे पकर रामपाल को देख सर्म से - पापा जी आज अपनी बहु को चोद के ही मानेंगे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - और नही तो क्या चलो चुसो ना
माधुरी मुस्कुराते हुवे मुह मे लंड लेके चूसने लगती है रामपाल मजे मे खोने लगता है मक्के के खेत मे ससुर बहु का रसलीला सुरु हो गया था माधुरी मन मे - उफ मक्के के खेत मे अपने ससुर से चुद्दूगी सोचा नही था आह मेरी बुर लंड लेने के लिये तरप् रही है
रामपाल - उफ बस बेटी आगे का प्रोग्राम करते है
माधुरी लंड मुह से निकाल रामपाल को देखती है
रामपाल माधुरी को देख - बेटी घोरी बन जाओ
माधुरी पहली बार अपनी बुर देखाने चुदने वाली थी बेताब भी थी सर्म भी आ रही थी लेकिन माधुरी सारी पेटीकोट उठा के घोरी बन जाती है
रामपाल बेताबी से झुक के अपनी बहु के बुर देखने लगता है जो फूली टाइट चिकनी थी रामपाल दोनों हाथो से बुर फैला के बुर के फाको मे उंगली से रुब करने लगता है माधुरी जोर से सिसकिया लेने लगती हैं सिहर जाती है पहली बार पति के अलावा किसी और ने उसकी बुर देखती छुवा था माधुरी जोर जोर से सासे लेने लगती है
रामपाल तेजी से उंगली करते हुवे - उफ कसम से बहु तेरी बुर बहोत खूबसूरत टाइट गर्म है बाल नही है चल बताना सुबह साफ किया ना
माधुरी सर्म जोस मे - उफ पापा जी आपने सही कहा आह सुबह साफ किया है उफ मा पापा जी बहोत अच्छा लग रहा है उंगली करते रहिये
रामपाल कुछ देर उंगली करते रहता है एसी मे माधुरी की बुर रस से गीली हो जाती है
रामपाल पुरा नँगा हो जाता है और घुटनों पे बैठ लंड मुठी मे पकर माधुरी की गांड फैला के छेद पे अपना लंड रख देता है अपनी बुर के छेद पे अपने ससुर का गर्म मोटा लंड फिल करते ही माधुरी पागल होने लगती है रामपाल धीरे से अंदर लंड घुसाने लगता है
टोपा फक् के साथ अंदर घुस जाता है माधुरी दर्द मे मर गई मा पापा जी बहोत दर्द हो रहा है धीरे घुसाओ ना
रामपाल धीरे से लंड अंदर घुसते हुवे - बहु बहोत टाइट बुर है तेरी आह बहोत गर्म भी मेरा लंड जलने लगता है
रामपाल एक जोर का धक्का मरते हुवे पुरा लंड अंदर तक घुसा देता है माधुरी जोर से दर्द मे चीख परती है आखो से आसु निकल आते है
रामपाल माधुरी के गांड को पकरे - आह कितना गर्म है उफ अब जाके सुकून मिला
माधुरी दर्द मे - मर गई पापा जी बहोत दर्द हो रहा है
रामपाल - बस बेटी अब मजा आयेगा
रामपाल चुदाई करना सुरु करता है साथ मे माधुरी के मस्त गांड दबाते रहता है लंड फट फट फच् आवाज के साथ माधुरी के बुर के अंदर बाहर होने लगता है रामपाल धक्के मारे जा रहा था माधुरी घोरी बनी अपने ससुर का लंड लेती जा रही थी आह उफ सिसकिया ले रही थी
रामपाल गांड दबाते चुदाई करते हुवे - यकीन नही होता बहु मेरा लंड तेरी बुर मे है तुझे मे घोरी बना के मक्के के खेत मे चोद रहा हु उफ तेरी है गर्म टाइट बुर इतना मजा आ रहा है तेरी चुदाई करने मे बता नही सकता बहु तु कसम से मस्त माल है आह सुकून मिल गया
माधुरी दर्द मजे मे सिसकिया लेते हुवे - आह पापा जी यकीन कर लो आपकी बहु घोरी बनी है आप चोद रहे है आह मजा आ रहा है मेरी बुर तरप् रही थी लंड के लिये आपका लंड लेके खुश हो गई है
खेत मे फट फच् आह उफ सिसकिया तेज सासे गुज रही थी
10 मिनट बाद माधुरी झर जाती है
माधुरी बैठी थी रामपाल उपर के ब्लाउस बिकनी निकाल माधुरी के चुचे दबाने लगता है
माधुरी - उफ पापा जी आपने तो जान निकाल दी धीरे दबाइये दर्द होता है
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अभी तो सुरु किया हु बेटी
रामपाल जमीन पे लेत माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - चलो बहु तेरी बरी अब
माधुरी सर्म से रामपाल के ऊपर आके लंड बुर मे लेके बैठ जाती है गांड रामपाल की तरफ थी
माधुरी दोनों हाथो को पीछे जमीन पे रखे पीछे थोरा झुक के अपनी गांड उपर नीचे करते हुवे लंड की सवारी करने लगती है रामपाल नीचे लेता माधुरी के बॉडी को सेहलने चुचे दबाने लगता है
रामपाल - उफ बहु मस्त सवारी करके लंड ले रही हो मनोज के साथ ऐसा ही करती हो किया
माधुरी जो मजे मे खोई थी तेजी से लंड बुर मे ले रही थी रामपाल की बात सुन - आह उफ हा पापा जी लेती हु आह अभी तो आपका मोटा लंड ले रही हु बहोत मजा आ रहा है
रामपाल - बहु अब मेरी तरफ करके बैठो मेरे लंड पे
माधुरी रामपाल की तरफ फेस करके लंड पे बैठ जाती है
माधुरी रामपाल के ऊपर जमीन पे दोनों हाथो को रखे झुक जाती है और रामपाल नीचे से धक्के मारते हुवे चुदाई करने लगता है माधुरी दर्द मजे से - उफ मा मर गई पापा जी इतनी तेज चुदाई करोगे तो आह मेरी बुर छील जायेगी आह आप तो कमाल के है
रामपाल तेजी से चुदाई करते हुवे - बहु मे नही तु कमाल की है तेरी मस्त गर्म बुर कमाल की है तू पूरी कमाल की है आह मेरी किस्मत ही खुल गई मेरी बहु मुझे मिल गई अब रोज तेरी बुर मारुंगा
माधुरी चुदाई का मजा लेते हुवे - मार लेना पापा जी उफ करते रहिये
रामपाल - उफ थक गया बहु अब तुम करो
रामपाल की बात सुन माधुरी रामपाल के ऊपर लेत के अपनी गांड तेजी से उपर नीचे करते हुवे लंड लेने लगती हैं माधुरी - आह पापा जी मे झरने वाली हु आह उफ मा मजा आ रहा है उफ
रामपाल हफ्ते हुवे - मे भी करती रहो जोर से आह उफ मे आह
माधुरी पूरी तरह रामपाल को पकर लेती है और पुरा लंड अंदर तक लेके झरने लगती है रामपाल भी कई सालों का जमा अपना माल अपनी बहु माधुरी के अंदर गिरा देता है दोनों तेज सासे लेने लगते है
रामपाल मस्त हो गया था कई सालों बाद चुदाई का सुख मिला भी बहु से तो मजा और डबल हो गया था माधुरी को भी बहोत मजा आता है 43 मिनट चुदाई चली थी जिसमे माधुरी 4 बार झरी जबकि मनोज 15 मिनट चुदाई करता था ऐसा नही था माधुरी को मनोज खुश नही कर पा रहा था
माधुरी रामपाल कपड़े पहन बाहर आते है
रामपाल माधुरी को देख -- बहु तेरी चुदाई करने जो मजा आया बता नही सकता चलो ना बातें करते है
माधुरी रामपाल को देख - ना बाबा ना आपके मोटे लंड से चुदने के बाद मेरी बुर मे जलन दर्द हो रहा है मे थक भी गई हु मे तो चली
माधुरी रामपाल के होठों पे किस करते हुवे - मुझे भी बहोत जयदा मजा आया मे बहोत खुश हु पापा जी आपसे चुदके
माधुरी मुस्कुराते हुवे जाने लगती है अपनी गांड हिलाते हुवे रामपाल माधुरी को जाते देख मुस्कुराते हुवे - रात को और अच्छे से लूंगा
माधुरी पीछे रामपाल को देख सर्म से - बहोत तेज हो रहे है पापा जी
माधुरी घर आके बिस्तर पे लेत सारी उपर करके बुर मे हाथ रख - आह बहोत मजा आया सोचा नही था पापा जी के अंदर इतना दम होता पति जी 15 मिनट चोदते है मे दो बार झर जाती हु लेकिन पापा जी उफ मेरी बुर आज तो सुकून मिल गया पापा जी का लंड लेके
वही रामपाल मचान पे लेते मन मे - यकीन नही होता मेने अपनी बहु को चोद दिया मक्के के खेत मे उफ रात और लूंगा
रात 8 बजे
माधुरी को रामपाल को किस किये जा रहा था माधुरी भी पुरे जोस मे अपने ससुर जी का साथ ले रही थी दोनों ससुर बहु मुह मिठा करते है
रामपाल माधुरी को देख - बहु जलन अभी भी हो रही है क्या
माधुरी सर्म से - हा थोरा सा आपका मोटा लंड जो गया है
रामपाल माधुरी के नाइटी निकाल नँगा करते हुवे मुस्कुरा के - अब फिर जायेगा मेरा मोटा लंड तेरी बुर मे
रामपाल माधुरी को बिस्तर पे गिरा देता है माधुरी नंगी बिस्तर पे लेती रामपाल को मुस्कुराते हुवे देखने लगती है
रामपाल माधुरी की नंगी बॉडी को देखते हुवे - खेत मे अच्छे से तेरी पूरी बॉडी खूबसूरती को देख नही पाया था बहु लेकिन अब देख रहा हु तुम सब मे बहोत खूबसूरत हो तुम्हारी बॉडी भी बहोत अच्छी है
रामपाल माधुरी के चिकनी बुर को देख - उफ तेरी बुर बहु मस्त है
माधुरी सर्म से - अच्छा बहु को नँगा करके मीठी बातें कर रहे है
रामपाल माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - मीठी नही सच
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रामपाल माधुरी के पास जाके माधुरी के उपर आके चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है माधुरी सिसकिया लेते हुवे - आह मेरे प्यारे ससुर जी चूसिये जितना चूसना है आह बेटे का काम आप कर रहे है
रामपाल चुचे मुह से निकाल माधुरी को देख - करना ही पड़ेगा
रामपाल माधुरी के तांगे फैला के माधुरी को देख - बुर का रस नही पिया है अब पियूँगा
माधुरी सर्म से रामपाल को देख - रोका किसने है चूस लीजिये
रामपाल भी बिना देरी किये अपनी बहु की मस्त बुर के फाको के बीच जिब से चाटने लगता है माधुरी जोर से सिसक् परती है माधुरी को अलग ही मजा आने लगता है माधुरी अपनी गांड उठा उठा के रामपाल के सर को अपनी बुर पे दबाते हुवे - आह ससुर जी ये कैसा मजा सुकून है उफ मा बहोत मजा आ रहा है
रामपाल अपनी बहु के बुर का स्वाद लेते हुवे मन मे - बहोत गर्म नमकीन मस्त स्वाद है मजा आ रहा है उफ बहु की बुर का स्वाद उफ
6 मिनट मे ही माधुरी झर जाती है
रामपाल माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - झर गई इतनी जल्दी
माधुरी सर्म से लाल होके हफ्ते रामपाल को देख - गंदे ससुर जी
रामपाल माधुरी ले उपर आ जाता है माधुरी रामपाल के लंड को पकर अपनी बुर के छेद पे सेट करते हुवे रामपाल को देख - घुसा दीजिये ससुर जी अपनी बहु के बुर मे अपना लंड
रामपाल माधुरी को देखते हुवे एक धक्के मे पुरा लंड घुसा देता है माधुरी दर्द मे चीख मारती है आसु निकल आते है
रामपाल माधुरी को देख दर्द हुआ
माधुरी रामपाल को देख मुस्कुराते हुवे - दर्द मे सुकून मिला आप सुरु करिये
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रामपाल भी माधुरी के ऊपर लेता धक्के पे धक्के मरने लगता है और माधुरी दोनों तांगे उठाये रामपाल को बाहों मे पकरे चुदाई का मजा लेते हुवे - आह उफ मर गई ससुर जी आह बहोत तेज चुदाई करते है आप
रामपाल धक्के मारते हुवे माधुरी को देख - तेज चुदाई करने मे ही असली मजा आता है मेरी बहु मनोज के साथ इतना मजा आता है
माधुरी - उफ नही ससुर जी आपके साथ बहोत जयदा मजा आ रहा है
रामपाल दोनों हाथो के सहारे माधुरी से उपर आके जोर जोर से धक्का मारने लगता है चुदाई करने लगता है माधुरी दर्द मे आह उफ करते जाती है फट फट फच् फच् पायल की माधुरी की दर्द सिसकिया कमरे मे गुज रही थी बेचारा मनोज को पता ही नही था उसकी बीवी को उसका बाप चोद रहा है और उसकी बीवी मजे से चुदवा रही है
रामपाल घोरी बना के चुदाई करने लगता है धक्के से मस्त माधुरी की दोनों चुचे लटके हवा मे झूल रहे थे रामपाल मजे से पेले जा रहा था
माधुरी दर्द मजे मे - ससुर जी आह सर्म कीजिये अपनी बहु को आह मा घोरी बना के चोद रहे है उफ मा मर गई
रामपाल तेज धक्के मारते हुवे - बहु सर्म करता ना तो तेरी बुर नही मिलती कितनी टाइट है तेरी बुर तु भी बहोत मस्त माल है पता है जब तु आती थी तुझे देखता था तो सोचता था कितनी मस्त माल है
माधुरी शोक मे फिर मुस्कुराते हुवे - आह अच्छा जी सुरु से आपकी नजर मेरे उपर थी
रामपाल चुदाई करते हुवे - हा ना भी बीच मे था
50 मिनट बाद
चुदाई खतम होती है माधुरी गर्म गर्म अपने ससुर का माल अपनी बुर मे लेके लेती हुई हाफ रही थी माधुरी रामपाल को देख - इतना सारा माल मेरी बुर मे भर दिया कही मा बन गई तो
रामपाल माधुरी को देख - कियु नही चाहती तुम मा बनो
माधुरी रामपाल को देख - दिल से चाहती हु पर डर है कही मुझमे कमी ना हो
रामपाल माधुरी को बाहों मे लेके - नही बहु तुझमे कोई कमी नही है वैसे भी पता चल ही जायेगा
माधुरी रामपाल को प्यार से देख - हु आपने सही कहा
रात 11 बजे रामपाल की बेटी संगीता के घर
संगीता कमरे से निकल एक खाली कमरे मे आती है जहा पहले से ही कोई था जो संगीता को देख खुश होके - आ गई बहु
संगीता धीरे से -आप ना किसी दिन मरवा दोगे किसी को पता चल गया तो
अंजान - किया करू बेटी तुझसे बातें किये बगैर तेरी चुदाई किये बगैर नींद नही आती
संगीता सर्म से - आप भी ना पापा जी सासु तो है ना उन्हें प्यार करो ना
ससुर संगीता को बाहों मे लेके मुस्कुराते हुवे - प्यार या चुदाई
संगीता सर्म से - छी बहोत गंदे हो आप बेसरम भी
ससुर संगीत के पेट को मसलते हुवे दबाते हुवे - बहु उफ तेरी ये चिकनी पेट आह बहोत मजा आता है दबाने मसल्ने मे
संगीता सिसकिया लेते हुवे - आह ससुर जी जरा धीरे दर्द हो रहा है
संगीता अपने ससुर को दूर करते हुवे अपनी नाइटी उतरते हुवे ससुर को देख मुस्कुराते नसीली आखो से देख - जयदा देर करना सही नही होगा मेरे प्यार ससुर जी हमारी बेटी सो रही है कही जाग गई तो मुझे जाना परेगा और आप को लंड हिलाके सोना परेगा
ससुर संगीता को देख मुस्कुराते हुवे - बहु तेरी ये बात भी सही है
तभी संगीता नाइटी उतार पूरी नंगी हो जाती है उफ संगीता की नंगी खूबसूरत मस्त बॉडी मस्त थी
ससुर संगीता के नंगी बॉडी को देख - उफ बहु जब भी देखता हु दिल नही भरता उफ किया मस्त बॉडी है , ससुर चुचे को देख,तेरे दोनों बरे खरे चुचे मस्त है काले निपल वाले, तेरी बुर उफ शब्द नही है
संगीता ससुर के पास आके अपने चुचे दबाके दूध निकलते हुवे - देखिये इतना खुद बचा है मेरे बच्चे के पापा आपको ही पीके खाली करना होगा
ससुर मुस्कुराते हुवे - जरूर इसके लिये तो हमेसा रेडी रहता हु
चलो समय आ गया है कुछ राज खोलने का और चीजो को किल्यर करने का
देखो रामपाल और माधुरी के पिता हरिपाल दोनों जिगरी दोस्त है जब रामपाल हरिपाल की सदी होती है बच्चे बरे होते है तो दोनों फैसला करते है अपनी बेटी की शादी एक दूसरे के बेटे से करेगे
बस तय हो जाता है
रामपाल - बीवी मलती - बेटी संगीता बेटा मनोज
हरिपाल - बीवी सुजाता - बेटी माधुरी बेटा अशोक
जब मनोज 18 का हुआ तो उसकी शादी हरिपाल की बेटी माधुरी से कर दी गई और हरिपाल की बेटी रामपाल की बहु बनके आई
जब संगीता 18 की हुई तब रामपाल ने भी अपनी बेटी संगीता की शादी अपने दोस्त के बेटे अशोक से कर दी और संगीता हरिपाल की बहु बन गई
आज अभी की बात करे तो मनोज की शादी के 2 साल से जयदा हो गये है लेकिन माधुरी मा नही बन पाई
लेकिन वही संगीता के शादी के एक साल से जयदा हो चुके है और संगीता ने एक बेटी को जन्म दिया है और वो बेटी हरिपाल संगीता के बीच चुदाई से पैदा हुई है
संगीता हरिपाल ने अपनी बेटी का नाम जूही रखा जो अभी 1 महीने की होने वाली है
रामपाल हरिपाल दोनों दोस्त है तो समझ गये होगे माधुरी संगीता भी दोस्त है एक बरी वजह ये भी रही माधुरी रामपाल के बीच खुले मस्ती वाले बातें होने का
यही संगीता हरीलाल के ऊपर भी लागू होता है
ये एक राज ही है संगीता हरिपाल ने किसी को पता नही चलने दिया जूही किसकी बेटी है पर ये सब कैसे कब हुवा जल्दी ही आप सब को पता चल जायेगा
किस्मत भी अजीब खेल खेल रही थी रामपाल ने अब जाके अपने दोस्त की बेटी अपनी बहु को चोद पाया है लेकिन बेचारा रामपाल को क्या मालूम उसका दोस्त हरिपाल उसकी बेटी संगीता को चोद के मा बना चुका है
आज के लिये इतना ही![]()
बहुत ही गरमागरम कामुक और बडा ही शानदार लाजवाब उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाchapter 7
रामपाल माधुरी बीच खेत मे थे रामपाल बहोत बेताब जोस मे था बेचारा बीवी के जाने के बाद चुदाई का सुख नही ले पाया था
माधुरी भी बेचैन बेताब थी अपने ससुर से चुदवाने के लिये मनोज के ना होने से माधुरी रात तरप् मचल के सोती थी
रामपाल अपना लंड निकाल माधुरी को देख - चल बहु चूस के गिला करदे ताकि तेरी बुर मे लंड आराम से चला जाए
माधुरी घुटनों पे बैठ लंड को मुठी मे पकर रामपाल को देख सर्म से - पापा जी आज अपनी बहु को चोद के ही मानेंगे
रामपाल मुस्कुराते हुवे - और नही तो क्या चलो चुसो ना
माधुरी मुस्कुराते हुवे मुह मे लंड लेके चूसने लगती है रामपाल मजे मे खोने लगता है मक्के के खेत मे ससुर बहु का रसलीला सुरु हो गया था माधुरी मन मे - उफ मक्के के खेत मे अपने ससुर से चुद्दूगी सोचा नही था आह मेरी बुर लंड लेने के लिये तरप् रही है
रामपाल - उफ बस बेटी आगे का प्रोग्राम करते है
माधुरी लंड मुह से निकाल रामपाल को देखती है
रामपाल माधुरी को देख - बेटी घोरी बन जाओ
माधुरी पहली बार अपनी बुर देखाने चुदने वाली थी बेताब भी थी सर्म भी आ रही थी लेकिन माधुरी सारी पेटीकोट उठा के घोरी बन जाती है
रामपाल बेताबी से झुक के अपनी बहु के बुर देखने लगता है जो फूली टाइट चिकनी थी रामपाल दोनों हाथो से बुर फैला के बुर के फाको मे उंगली से रुब करने लगता है माधुरी जोर से सिसकिया लेने लगती हैं सिहर जाती है पहली बार पति के अलावा किसी और ने उसकी बुर देखती छुवा था माधुरी जोर जोर से सासे लेने लगती है
रामपाल तेजी से उंगली करते हुवे - उफ कसम से बहु तेरी बुर बहोत खूबसूरत टाइट गर्म है बाल नही है चल बताना सुबह साफ किया ना
माधुरी सर्म जोस मे - उफ पापा जी आपने सही कहा आह सुबह साफ किया है उफ मा पापा जी बहोत अच्छा लग रहा है उंगली करते रहिये
रामपाल कुछ देर उंगली करते रहता है एसी मे माधुरी की बुर रस से गीली हो जाती है
रामपाल पुरा नँगा हो जाता है और घुटनों पे बैठ लंड मुठी मे पकर माधुरी की गांड फैला के छेद पे अपना लंड रख देता है अपनी बुर के छेद पे अपने ससुर का गर्म मोटा लंड फिल करते ही माधुरी पागल होने लगती है रामपाल धीरे से अंदर लंड घुसाने लगता है
टोपा फक् के साथ अंदर घुस जाता है माधुरी दर्द मे मर गई मा पापा जी बहोत दर्द हो रहा है धीरे घुसाओ ना
रामपाल धीरे से लंड अंदर घुसते हुवे - बहु बहोत टाइट बुर है तेरी आह बहोत गर्म भी मेरा लंड जलने लगता है
रामपाल एक जोर का धक्का मरते हुवे पुरा लंड अंदर तक घुसा देता है माधुरी जोर से दर्द मे चीख परती है आखो से आसु निकल आते है
रामपाल माधुरी के गांड को पकरे - आह कितना गर्म है उफ अब जाके सुकून मिला
माधुरी दर्द मे - मर गई पापा जी बहोत दर्द हो रहा है
रामपाल - बस बेटी अब मजा आयेगा
रामपाल चुदाई करना सुरु करता है साथ मे माधुरी के मस्त गांड दबाते रहता है लंड फट फट फच् आवाज के साथ माधुरी के बुर के अंदर बाहर होने लगता है रामपाल धक्के मारे जा रहा था माधुरी घोरी बनी अपने ससुर का लंड लेती जा रही थी आह उफ सिसकिया ले रही थी
रामपाल गांड दबाते चुदाई करते हुवे - यकीन नही होता बहु मेरा लंड तेरी बुर मे है तुझे मे घोरी बना के मक्के के खेत मे चोद रहा हु उफ तेरी है गर्म टाइट बुर इतना मजा आ रहा है तेरी चुदाई करने मे बता नही सकता बहु तु कसम से मस्त माल है आह सुकून मिल गया
माधुरी दर्द मजे मे सिसकिया लेते हुवे - आह पापा जी यकीन कर लो आपकी बहु घोरी बनी है आप चोद रहे है आह मजा आ रहा है मेरी बुर तरप् रही थी लंड के लिये आपका लंड लेके खुश हो गई है
खेत मे फट फच् आह उफ सिसकिया तेज सासे गुज रही थी
10 मिनट बाद माधुरी झर जाती है
माधुरी बैठी थी रामपाल उपर के ब्लाउस बिकनी निकाल माधुरी के चुचे दबाने लगता है
माधुरी - उफ पापा जी आपने तो जान निकाल दी धीरे दबाइये दर्द होता है
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अभी तो सुरु किया हु बेटी
रामपाल जमीन पे लेत माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - चलो बहु तेरी बरी अब
माधुरी सर्म से रामपाल के ऊपर आके लंड बुर मे लेके बैठ जाती है गांड रामपाल की तरफ थी
माधुरी दोनों हाथो को पीछे जमीन पे रखे पीछे थोरा झुक के अपनी गांड उपर नीचे करते हुवे लंड की सवारी करने लगती है रामपाल नीचे लेता माधुरी के बॉडी को सेहलने चुचे दबाने लगता है
रामपाल - उफ बहु मस्त सवारी करके लंड ले रही हो मनोज के साथ ऐसा ही करती हो किया
माधुरी जो मजे मे खोई थी तेजी से लंड बुर मे ले रही थी रामपाल की बात सुन - आह उफ हा पापा जी लेती हु आह अभी तो आपका मोटा लंड ले रही हु बहोत मजा आ रहा है
रामपाल - बहु अब मेरी तरफ करके बैठो मेरे लंड पे
माधुरी रामपाल की तरफ फेस करके लंड पे बैठ जाती है
माधुरी रामपाल के ऊपर जमीन पे दोनों हाथो को रखे झुक जाती है और रामपाल नीचे से धक्के मारते हुवे चुदाई करने लगता है माधुरी दर्द मजे से - उफ मा मर गई पापा जी इतनी तेज चुदाई करोगे तो आह मेरी बुर छील जायेगी आह आप तो कमाल के है
रामपाल तेजी से चुदाई करते हुवे - बहु मे नही तु कमाल की है तेरी मस्त गर्म बुर कमाल की है तू पूरी कमाल की है आह मेरी किस्मत ही खुल गई मेरी बहु मुझे मिल गई अब रोज तेरी बुर मारुंगा
माधुरी चुदाई का मजा लेते हुवे - मार लेना पापा जी उफ करते रहिये
रामपाल - उफ थक गया बहु अब तुम करो
रामपाल की बात सुन माधुरी रामपाल के ऊपर लेत के अपनी गांड तेजी से उपर नीचे करते हुवे लंड लेने लगती हैं माधुरी - आह पापा जी मे झरने वाली हु आह उफ मा मजा आ रहा है उफ
रामपाल हफ्ते हुवे - मे भी करती रहो जोर से आह उफ मे आह
माधुरी पूरी तरह रामपाल को पकर लेती है और पुरा लंड अंदर तक लेके झरने लगती है रामपाल भी कई सालों का जमा अपना माल अपनी बहु माधुरी के अंदर गिरा देता है दोनों तेज सासे लेने लगते है
रामपाल मस्त हो गया था कई सालों बाद चुदाई का सुख मिला भी बहु से तो मजा और डबल हो गया था माधुरी को भी बहोत मजा आता है 43 मिनट चुदाई चली थी जिसमे माधुरी 4 बार झरी जबकि मनोज 15 मिनट चुदाई करता था ऐसा नही था माधुरी को मनोज खुश नही कर पा रहा था
माधुरी रामपाल कपड़े पहन बाहर आते है
रामपाल माधुरी को देख -- बहु तेरी चुदाई करने जो मजा आया बता नही सकता चलो ना बातें करते है
माधुरी रामपाल को देख - ना बाबा ना आपके मोटे लंड से चुदने के बाद मेरी बुर मे जलन दर्द हो रहा है मे थक भी गई हु मे तो चली
माधुरी रामपाल के होठों पे किस करते हुवे - मुझे भी बहोत जयदा मजा आया मे बहोत खुश हु पापा जी आपसे चुदके
माधुरी मुस्कुराते हुवे जाने लगती है अपनी गांड हिलाते हुवे रामपाल माधुरी को जाते देख मुस्कुराते हुवे - रात को और अच्छे से लूंगा
माधुरी पीछे रामपाल को देख सर्म से - बहोत तेज हो रहे है पापा जी
माधुरी घर आके बिस्तर पे लेत सारी उपर करके बुर मे हाथ रख - आह बहोत मजा आया सोचा नही था पापा जी के अंदर इतना दम होता पति जी 15 मिनट चोदते है मे दो बार झर जाती हु लेकिन पापा जी उफ मेरी बुर आज तो सुकून मिल गया पापा जी का लंड लेके
वही रामपाल मचान पे लेते मन मे - यकीन नही होता मेने अपनी बहु को चोद दिया मक्के के खेत मे उफ रात और लूंगा
रात 8 बजे
माधुरी को रामपाल को किस किये जा रहा था माधुरी भी पुरे जोस मे अपने ससुर जी का साथ ले रही थी दोनों ससुर बहु मुह मिठा करते है
रामपाल माधुरी को देख - बहु जलन अभी भी हो रही है क्या
माधुरी सर्म से - हा थोरा सा आपका मोटा लंड जो गया है
रामपाल माधुरी के नाइटी निकाल नँगा करते हुवे मुस्कुरा के - अब फिर जायेगा मेरा मोटा लंड तेरी बुर मे
रामपाल माधुरी को बिस्तर पे गिरा देता है माधुरी नंगी बिस्तर पे लेती रामपाल को मुस्कुराते हुवे देखने लगती है
रामपाल माधुरी की नंगी बॉडी को देखते हुवे - खेत मे अच्छे से तेरी पूरी बॉडी खूबसूरती को देख नही पाया था बहु लेकिन अब देख रहा हु तुम सब मे बहोत खूबसूरत हो तुम्हारी बॉडी भी बहोत अच्छी है
रामपाल माधुरी के चिकनी बुर को देख - उफ तेरी बुर बहु मस्त है
माधुरी सर्म से - अच्छा बहु को नँगा करके मीठी बातें कर रहे है
रामपाल माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - मीठी नही सच
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रामपाल माधुरी के पास जाके माधुरी के उपर आके चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है माधुरी सिसकिया लेते हुवे - आह मेरे प्यारे ससुर जी चूसिये जितना चूसना है आह बेटे का काम आप कर रहे है
रामपाल चुचे मुह से निकाल माधुरी को देख - करना ही पड़ेगा
रामपाल माधुरी के तांगे फैला के माधुरी को देख - बुर का रस नही पिया है अब पियूँगा
माधुरी सर्म से रामपाल को देख - रोका किसने है चूस लीजिये
रामपाल भी बिना देरी किये अपनी बहु की मस्त बुर के फाको के बीच जिब से चाटने लगता है माधुरी जोर से सिसक् परती है माधुरी को अलग ही मजा आने लगता है माधुरी अपनी गांड उठा उठा के रामपाल के सर को अपनी बुर पे दबाते हुवे - आह ससुर जी ये कैसा मजा सुकून है उफ मा बहोत मजा आ रहा है
रामपाल अपनी बहु के बुर का स्वाद लेते हुवे मन मे - बहोत गर्म नमकीन मस्त स्वाद है मजा आ रहा है उफ बहु की बुर का स्वाद उफ
6 मिनट मे ही माधुरी झर जाती है
रामपाल माधुरी को देख मुस्कुराते हुवे - झर गई इतनी जल्दी
माधुरी सर्म से लाल होके हफ्ते रामपाल को देख - गंदे ससुर जी
रामपाल माधुरी ले उपर आ जाता है माधुरी रामपाल के लंड को पकर अपनी बुर के छेद पे सेट करते हुवे रामपाल को देख - घुसा दीजिये ससुर जी अपनी बहु के बुर मे अपना लंड
रामपाल माधुरी को देखते हुवे एक धक्के मे पुरा लंड घुसा देता है माधुरी दर्द मे चीख मारती है आसु निकल आते है
रामपाल माधुरी को देख दर्द हुआ
माधुरी रामपाल को देख मुस्कुराते हुवे - दर्द मे सुकून मिला आप सुरु करिये
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रामपाल भी माधुरी के ऊपर लेता धक्के पे धक्के मरने लगता है और माधुरी दोनों तांगे उठाये रामपाल को बाहों मे पकरे चुदाई का मजा लेते हुवे - आह उफ मर गई ससुर जी आह बहोत तेज चुदाई करते है आप
रामपाल धक्के मारते हुवे माधुरी को देख - तेज चुदाई करने मे ही असली मजा आता है मेरी बहु मनोज के साथ इतना मजा आता है
माधुरी - उफ नही ससुर जी आपके साथ बहोत जयदा मजा आ रहा है
रामपाल दोनों हाथो के सहारे माधुरी से उपर आके जोर जोर से धक्का मारने लगता है चुदाई करने लगता है माधुरी दर्द मे आह उफ करते जाती है फट फट फच् फच् पायल की माधुरी की दर्द सिसकिया कमरे मे गुज रही थी बेचारा मनोज को पता ही नही था उसकी बीवी को उसका बाप चोद रहा है और उसकी बीवी मजे से चुदवा रही है
रामपाल घोरी बना के चुदाई करने लगता है धक्के से मस्त माधुरी की दोनों चुचे लटके हवा मे झूल रहे थे रामपाल मजे से पेले जा रहा था
माधुरी दर्द मजे मे - ससुर जी आह सर्म कीजिये अपनी बहु को आह मा घोरी बना के चोद रहे है उफ मा मर गई
रामपाल तेज धक्के मारते हुवे - बहु सर्म करता ना तो तेरी बुर नही मिलती कितनी टाइट है तेरी बुर तु भी बहोत मस्त माल है पता है जब तु आती थी तुझे देखता था तो सोचता था कितनी मस्त माल है
माधुरी शोक मे फिर मुस्कुराते हुवे - आह अच्छा जी सुरु से आपकी नजर मेरे उपर थी
रामपाल चुदाई करते हुवे - हा ना भी बीच मे था
50 मिनट बाद
चुदाई खतम होती है माधुरी गर्म गर्म अपने ससुर का माल अपनी बुर मे लेके लेती हुई हाफ रही थी माधुरी रामपाल को देख - इतना सारा माल मेरी बुर मे भर दिया कही मा बन गई तो
रामपाल माधुरी को देख - कियु नही चाहती तुम मा बनो
माधुरी रामपाल को देख - दिल से चाहती हु पर डर है कही मुझमे कमी ना हो
रामपाल माधुरी को बाहों मे लेके - नही बहु तुझमे कोई कमी नही है वैसे भी पता चल ही जायेगा
माधुरी रामपाल को प्यार से देख - हु आपने सही कहा
रात 11 बजे रामपाल की बेटी संगीता के घर
संगीता कमरे से निकल एक खाली कमरे मे आती है जहा पहले से ही कोई था जो संगीता को देख खुश होके - आ गई बहु
संगीता धीरे से -आप ना किसी दिन मरवा दोगे किसी को पता चल गया तो
अंजान - किया करू बेटी तुझसे बातें किये बगैर तेरी चुदाई किये बगैर नींद नही आती
संगीता सर्म से - आप भी ना पापा जी सासु तो है ना उन्हें प्यार करो ना
ससुर संगीता को बाहों मे लेके मुस्कुराते हुवे - प्यार या चुदाई
संगीता सर्म से - छी बहोत गंदे हो आप बेसरम भी
ससुर संगीत के पेट को मसलते हुवे दबाते हुवे - बहु उफ तेरी ये चिकनी पेट आह बहोत मजा आता है दबाने मसल्ने मे
संगीता सिसकिया लेते हुवे - आह ससुर जी जरा धीरे दर्द हो रहा है
संगीता अपने ससुर को दूर करते हुवे अपनी नाइटी उतरते हुवे ससुर को देख मुस्कुराते नसीली आखो से देख - जयदा देर करना सही नही होगा मेरे प्यार ससुर जी हमारी बेटी सो रही है कही जाग गई तो मुझे जाना परेगा और आप को लंड हिलाके सोना परेगा
ससुर संगीता को देख मुस्कुराते हुवे - बहु तेरी ये बात भी सही है
तभी संगीता नाइटी उतार पूरी नंगी हो जाती है उफ संगीता की नंगी खूबसूरत मस्त बॉडी मस्त थी
ससुर संगीता के नंगी बॉडी को देख - उफ बहु जब भी देखता हु दिल नही भरता उफ किया मस्त बॉडी है , ससुर चुचे को देख,तेरे दोनों बरे खरे चुचे मस्त है काले निपल वाले, तेरी बुर उफ शब्द नही है
संगीता ससुर के पास आके अपने चुचे दबाके दूध निकलते हुवे - देखिये इतना खुद बचा है मेरे बच्चे के पापा आपको ही पीके खाली करना होगा
ससुर मुस्कुराते हुवे - जरूर इसके लिये तो हमेसा रेडी रहता हु
चलो समय आ गया है कुछ राज खोलने का और चीजो को किल्यर करने का
देखो रामपाल और माधुरी के पिता हरिपाल दोनों जिगरी दोस्त है जब रामपाल हरिपाल की सदी होती है बच्चे बरे होते है तो दोनों फैसला करते है अपनी बेटी की शादी एक दूसरे के बेटे से करेगे
बस तय हो जाता है
रामपाल - बीवी मलती - बेटी संगीता बेटा मनोज
हरिपाल - बीवी सुजाता - बेटी माधुरी बेटा अशोक
जब मनोज 18 का हुआ तो उसकी शादी हरिपाल की बेटी माधुरी से कर दी गई और हरिपाल की बेटी रामपाल की बहु बनके आई
जब संगीता 18 की हुई तब रामपाल ने भी अपनी बेटी संगीता की शादी अपने दोस्त के बेटे अशोक से कर दी और संगीता हरिपाल की बहु बन गई
आज अभी की बात करे तो मनोज की शादी के 2 साल से जयदा हो गये है लेकिन माधुरी मा नही बन पाई
लेकिन वही संगीता के शादी के एक साल से जयदा हो चुके है और संगीता ने एक बेटी को जन्म दिया है और वो बेटी हरिपाल संगीता के बीच चुदाई से पैदा हुई है
संगीता हरिपाल ने अपनी बेटी का नाम जूही रखा जो अभी 1 महीने की होने वाली है
रामपाल हरिपाल दोनों दोस्त है तो समझ गये होगे माधुरी संगीता भी दोस्त है एक बरी वजह ये भी रही माधुरी रामपाल के बीच खुले मस्ती वाले बातें होने का
यही संगीता हरीलाल के ऊपर भी लागू होता है
ये एक राज ही है संगीता हरिपाल ने किसी को पता नही चलने दिया जूही किसकी बेटी है पर ये सब कैसे कब हुवा जल्दी ही आप सब को पता चल जायेगा
किस्मत भी अजीब खेल खेल रही थी रामपाल ने अब जाके अपने दोस्त की बेटी अपनी बहु को चोद पाया है लेकिन बेचारा रामपाल को क्या मालूम उसका दोस्त हरिपाल उसकी बेटी संगीता को चोद के मा बना चुका है
आज के लिये इतना ही![]()




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सुबह 10 बजे रामपाल खाना पीना खाके खेत के लिये निकल परता है रामपाल तो एक राउंड माधुरी की चुदाई करके जाना चाहता था लेकिन माधुरी मना कर देती है बेचारा खरा लंड लिये खेत मे जाना परता है
माधुरी कमरे मे बिस्तर पे लेती मुस्कुराते हुवे सर्म से - हद है जब देखो मेरी बुर मे लंड डालने के लिये बेताब रहते है
माधुरी रात हुई चुदाई को याद करते हुवे सर्म से - उफ आह रात की दमदार चुदाई के बाद तो उफ मस्त नींद आई मुझे
माधुरी अपना फोन निकाल संगीता को फोन करती है
संगीता - बोल कमीनी याद आ गई मेरी
माधुरी - ओये कमीनी किसको बोला भाभी हु तेरी इज़त से बात कर समझी
संगीता - भार मे जा वैसे मे भी तेरी भाभी हु समझी
माधुरी हस्ते हुवे - यार अजब ही रिस्ता बन गया है हमारा हम दोस्त थे अब ननद भाभी है
संगीता हस्ते हुवे - यार ये सब तो हमारे पापा के वजह से है उन्होंने हमारी फीलिंग पहले से ही सेट करके रखी थी
माधुरी हस्ते हुवे - तूने सही कहा यार
संगीता मजे लेते हुवे - मेरा भाई तो सुरु से तेरा दीवाना था लेकिन तु तो उस कमीने के प्यार मे पागल थी
माधुरी - यार गरे मुर्दे कियु उखार रही है
संगीता - साली कमीनी सही समय रहते उस कमीने का राज पता चल गया नही तो मेरे भाई को चुदी हुई बुर मिलती
माधुरी - छी बेसरम कमीनी कही कि शर्म भी नही आती तुझे
संगीता हस्ते हुवे - ओये तु कोन सीधी है अपने आशिक से चुदी नही लेकिन दबाया मजा तो लिया ना
माधुरी - तेरी बुर फार दुगी और जयदा बोला तो कमीनी
संगीता मुस्कुराते हुवे - तेरे भाई ने सुहागरात को फार दी है और तु फरेगी कैसे लंड है तेरे पास बोल ना कमीनी
माधुरी मुस्कुराते हुवे - लंड नही है तो क्या हुआ बैगन घुसा दुगी
संगीता सिहर जाती है
संगीता - कितनी कमीनी है तू अपने बुर मे बैगन डाल समझी
माधुरी मन मे - डालना ही परता लेकिन अब ससुर जी का मोटा लंड जाता है मेरी बुर मे उफ मजा आ जाता है
माधुरी - सब छोर बता मा पापा कैसे है
संगीता - अच्छे है मस्त है
संगीता मन मे - तेरे पापा तो मेरे पति बने हुवे है जब देखो मेरी तांगे फैला के अपना मोटा लंड घुसा के चुदाई करने लगते है तुझे क्या बताऊ दोस्त तेरे पापा के बच्चे की मा भी बन चुकी हुई जूही तेरे पापा की बेटी है ना की तेरे भाई की
माधुरी - और मेरी प्यारी जूही कैसी है
संगीता मुस्कुराते हुवे - अभी दूध पीके मस्त सो रही है
माधुरी उदास होके - पता नही कब मुझे मा बनने का सुख मिलेगा
संगीता - भाभी उदास मत हो देर स्वेर् देखना आप मा बनेगी बहोत खूबसूरत बेबी होगा
माधुरी मुस्कुराते हुवे - हु भाई से से बात हुई
संगीता - यार हुई रोज होती है तेरे भाई से अपने भाई से हमारे पापा जवानी मे एक साथ काम करने गये थे और अब हमारे भाई
माधुरी हस्ते हुवे - सही कहा वैसे रात को भाई की बहोत याद आती होगी ना
संगीता सर्म से - छि बेसरम तुझे भी तो आती होगी भाई की याद
संगीता मन मे - मुझे आती है लेकिन ससुर जी उफ रात उनकी जगह लेके मेरी चुदाई करके मेरी बुर उफ को संत कर देते है
माधुरी मन मे - आती थी लेकिन अब ससुर जी हि उनकी जगह ले चुके है रात उफ जम के चोदा मजा ही आ गया
तभी हरिपाल संगीता के कमरे मे आता है संगीता को बात करते देख इशारे से पूछता है कोन है तो संगीता इशारे से बताती है माधुरी है
हरिपाल संगीता के पास धीरे से बिना कुछ बोले लेत जाता है और संगीता हरिपाल को देख मुस्कुराते हुवे अपने ब्लाउस खोल एक चुचे निकाल देती है हरिपाल बिना देरी कियु मुह मे लेके दबाते हुवे चूसने लगता है जिसकी वजह से संगीता के मुह से आह सिसक् निकल परती है
माधुरी आवाज सुन - हैलो किया हुआ संगीता
संगीता मुश्किल से सिसकिया रोके हुवे - कुछ नही ये बता मायके नही आना है क्या
संगीता फिर हरिपाल के सर को सहलाने लगती है
माधुरी - यार जल्दी ही आउंगी
हरिपाल दूध पीने के बाद नीचे आता है संगीता हरिपाल को देख मुस्कुराते हुवे अपनी तांगे पुरा फैला देती है हरिपाल संगीता को देखते हुवे सारी पेटीकोट उपर कर देता है
संगीता की छोटे बालों वाली बुर हरिपाल के सामने नंगी थी हरिपाल नीचे झुक के दोनों अंगुटे दे संगीता की बुर के फके फैला के जिब से चाटने लगता है और संगीता एकदम से जोर से आह सिसक् परती है
माधुरी को फिर आवाज सुनाई देती है
माधुरी - यार ये कैसी आवाज है
संगीता हरिपाल के सर को पकरे अपनी बुर पे दबाते हुवे - कुछ नही यार छोटी चिटि ने काट लिया अच्छा पापा कहा है
माधुरी - खेत मे और कहा मेरे पापा कहा है
संगीता हरिपाल को देख मन मे - तेरे पापा मेरे टाँगों के बीच मे है और मेरी बुर अपनी बहु की बुर का रस पी रहे है
संगीता - खेत मे सासु जी के साथ गये है
हरिपाल बुर रस पीने के बाद नीचे से नँगा होके संगीता के पास खरा हो जाता है संगीता हरिपाल को देखती है फिर मुस्कुराते हुवे लंड को मुठी मे पकर मुह मे मे लेके चूस गिला कर देती है
माधुरी - भाई ने बताया कब आ रहे है दोनों
संगीता - यार केह रहे है जल्दी आयेगे लेकिन कब ये बता नही
हरिपाल फिर संगीता के टाँगों के बीच आ जाता है संगीता अपनी तांगे पुरा फैला देती है रामपाल घुटने मे बैठ जाता है और अपना लंड बुर पे खिस्टे हुवे धीरे धीरे अंदर पुरा घुसा देता है अंदर जाते ही संगीता दर्द मजे मे आह मा करती है
माधुरी - अबे कमीनी तू कर क्या रही है सच सच बता
संगीता हरिपाल को देख - कुछ नही बाद मे बातें करते है
फोन कट
संगीता हरिपाल को अपने उपर लेता के हरिपाल को देख दर्द मे - आह मरवा दोगे आप एक दिन अब धीरे से करो
हरिपाल संगीता को देखते हुवे धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगता है 5 मिनट बाद फट फट फच् फच् और संगीता की आह उफ मा धीरे मर गई के साथ पायल की आवाजे गुजने लगती है बुर से रस निकल के बिस्तर पे गिर रहा था हरिपाल का लंड बुर के पानी से पुरा गिला था सत् सत् लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था
संगीता हरिपाल को बाहों मे लिये हरिपाल को देख - आह सुनिये अंदर मत गिरना जूही अभी छोटी है मे इतनी जल्दी दूसरा बच्चा नही चाहती जूही जब चलने लगेगी उसके बाद ही
हरिपाल हफ्ते धक्के मारते हुवे संगीता को देख - ठीक है बहु लेकिन बच्चा मेरा ही होना चाहिये
संगीता दर्द मजे मे - ठीक है ससुर जी दूसरा बच्चा भी आपका ही होगा
तो वही माधुरी बिस्तर पे लेती अपने ससुर के बरे मे सोचते हुवे - सुबह करने नही दिया कही पापा जी नाराज ना हो जाये
खेत मे मचान पे रामपाल लेता मन मे - यार बहु ने करने नही दिया लेकिन सोचु तो भले ही बहु की बुर मिल गई है लेकिन हर वक़्त खैर कुछ करण होगा
दोपहर 12 बजे
माधुरी खाना पैक रही थी तभी माधुरी का फोन बजता है माधुरी नंबर देख टेंसन मे आ जाती है हिम्मत करके फोन उठा के - जी भाई
अशोक पीछे अपने दोस्त माधुरी के पति मनोज को लेते आराम करता देखता है फिर थोरा आगे एक जगह जहा आस पास कोई नही था खरा होके - गुरिया कैसी है तू
माधुरी हकलाते हुवे - जी भाई मे ठीक हु
अशोक धीरे से - सुन एक किस दे ना
माधुरी थोरा गुस्से मे - भाई आप ये गलत कर रहे है मेरी मजबूरी का फायेदा उठा रहे है
अशोक मनोज को सोता देख - गुरिया मेरी वजह से उस कमीने की सचाई तुझे पता चली उस दिन मे तुम लोगो को नही देखता तो तू उसके जल मे फस अपनी जिंदगी बर्बाद कर चुकी होती
माधुरी मुठी कसते हुवे - तो क्या उसके बदले कोई भाई अपनी बहन का फायेदा उठता है
अशोक - गुरिया मेने उस राज को राज रखा पापा मा से तुझे भी बचाया इतना हक तो बनता है
अशोक अपना लंड पैंट के ऊपर से मसलते हुवे - उस रात जयदा कुछ करने नही दिया और ना कभी करने देती हो
माधुरी - कियुंकी आप मेरे बरे भाई है देखिये उसके बदलने आपने मेरे साथ बहोत कुछ कर लिया है अब नही भाई है मेरे इस लिये चुप हु कही आपकी बदनामी ना हो जाये गलती से भी पापा मा आपके दोस्त को पता चला तो आपकी खैर नही
अशोक उदास दुखी आवाज मे नाटक करते हुवे - सही है बहन सही है बाहर किसी लरके को सब करने दे रही थी लेकिन अपने भाई को रिश्ते का नाता दे रही हो सही है माफ करना बहन जयदा उमीद नही करी थी तुझसे बस बातें किस थोरा टच इतना भी नही कोई बात नही तू मेरी गुरिया है फोर्स नही करुगा
माधुरी थोरा सन्त होके - ठीक हो भाई लेकिन वादा करिये मेरी मर्ज़ी के बगैर आप कभी
अशोक जल्दी - वादा
माधुरी फोन को होठों के पास करते हुवे उमा
अशोक जैसे ही उमा की आवाज सुनता है अशोक का लंड खरा होके झटके मरने लगता है
अशोक - थैंक्स गुरिया बस लास्ट मे बातें कर सकता हु ना वो समझ रही हो ना
माधुरी सर पकर दुखी होके - ठीक है लेकिन कभी कभी रोज नही
अशोक - वादा लास्ट कोन सी पैंटी पहनी है तूने
माधुरी गहरी सास लेते हुवे - नही पहनी रखती हुवे
फोन कट
अशोक ने जैसे ही सुना माधुरी ने क्या कहा पैंटी नही पहनी वैसे ही अशोक का पानी निकल जाता है
वही माधुरी खाना लेके जाते हुवे मन मे - हद है मेरा भाई ही मेरे पीछे परा है किसी को बता नही सकती ना अपने भाई को गुस्सा कर सकती हु
अशोक जब झर जाता है तो मनोज के पास सोफे पे लेत जाता है मे बता दु दोनों पढ़े लिखे है अच्छी कंपनी मे जॉब करते है
2 मिनट बाद
मनोज उठता है अशोक को सोता देख उठ किरकी के पास दूर कहा होके किसी को फोन करता है जब फोन उठता है तो
मनोज मुस्कुराते हुवे - कैसी है मेरी प्यारी सासु
ये भी एक राज था जो खुल गया है लेकिन अशोक माधुरी के बीच कितना कब कैसे हुआ आगे सब समय आने पे बता चल जायेगा
और मनोज सासु के बीच का भी
राज और भी है हो खुलते जायेंगे
माधुरी खाना लेके आती है रामपाल दोनों खाते है लेकिन माधुरी देखती है रामपाल थोरा उदास है तो माधुरी समझ जाती है क्या मामला है माधुरी अंदर ही अंदर मुस्कुरा देती है
माधुरी रामपाल को देख मुस्कुराते हुवे - क्या बात है पापा जी आप थोरा उदास लग रहे है
रामपाल माधुरी को देख - कुछ नही बेटी बस ऐसे ही
माधुरी रामपाल के गोद मे बैठ रामपाल के गले मे बाहें डाल अपनी बुर रामपाल के लंड पे गांड आगे पीछे करते घिसते हुवे रामपाल को देख - उफ आह आप उदास मत हो ससुर ही मेरी बुर मे अब आपके ही है सुबह के लिये माफ करदो अब कभी आपको मना नही करुगी
माधुरी की गर्म बुर की गर्मी घिसन् से रामपाल का लंड पुरा खरा हो जाता है जिसे फिल करके माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल को देख - आपका चूहा नाराज नही है आप भी नाराज मत रहिये
रामपाल माधुरी को बाहों मे लेके मुस्कुराते हुवे - ठीक है जैसा मेरी बहु कहे
माधुरी रामपाल को देख - तो खेत मे चले
रामपाल मुस्कुराते हुवे - चलो फिर
रामपाल माधुरी मक्के के खेत के बीच आ जाते है रामपाल नीचे से नँगा हो जाता है और माधुरी घुटने पे बैठ मजे से लंड चूसने लगती है
रामपाल माधुरी के सर पे हाथ रखे - आह बहु तू सच मे कमाल है चुसो बहु अपने ससुर का लंड
माधुरी अच्छे से लंड चूसने चाटने के बाद
माधुरी खरी होती है अपनी सारी पेटीकोट निकाल नीचे से पूरी नंगी हो जाती है रामपाल माधुरी को देख - बहु सच मे तेरी बॉडी बहोत मस्त है
माधुरी मुस्कुराते हुवे रामपाल को देख - सुन के अच्छा लगा
माधुरी जमीन पे कुहिनी, घुटने के बल घोरी बन जाती है और अपनी बरी गांड रामपाल के तरफ सामने कर देती है
रामपाल ये नजारा देख पागल होने लगता है माधुरी घोरी बनी रामपाल को पीछे देख - अब देर किस बात की घुसा दीजिये अपना लंड
रामपाल मुस्कुराते हुवे - अभी घुसा देता हु बहु
माधुरी घुटने पे घोरी बनी हुई थी लेकिन भाई जो सिन बना था वो बवाल था माधुरी घोरी मे क्या मत गजब लग रही थी बरी चोरी फैली गांड लेकिन उससे जयदा तो माधुरी की टाइट फूली बुर मस्त दिख रही थी मोटे बुर फाके चिपके थे लेकिन उपर बुर का छेद और गांड का छेद साफ तोर पे अच्छे से दिख रहा था जितना गजब का नजरा था
रामपाल घुटने मे था और अपने लंड पे थूक लग के गिला कर रहा था
रामपाल फिर एक हाथ माधुरी के गांड पे रखता है और एक हाथ से लंड पकरे बुर के छेद पे रख धीरे से अंदर घुसा देता है फुक की आवाज के साथ अंदर मोटा लंड जाते ही माधुरी दर्द मे मर गई जान लोगे क्या अपनी बहु की
रामपाल - यार आधा ही तो गया है इतना दर्द होने लगा
माधुरी पीछे रामपाल को देख - रात भर किसने मेरी बुर मारी
रामपाल - अच्छा बाबा आधे पे चुदाई कर लूंगा
माधुरी - धीरे से करना रात का दर्द जलन अभी भी है
रामपाल आधे लंड घुसाये ही चुदाई करने लगता है रामपाल बार बार माधुरी की गांड और छेद को देख रहा था माधुरी घोरी बनी लंड लेते हुवे रामपाल को पीछे देख - आह उफ मा बस ऐसे ही चोदते रहिये अंदर मेरी बुर छील गई है
रामपाल गांड आगे पीछे करते चुदाई करते हुवे माधुरी को देख - पुरा डाल दु मजा नही आ रहा बहु
माधुरी रामपाल को देखते हुवे - उफ मा अभी नही थोरि देर बाद पुरा घुसा देना अभी आधे पे ही चुदाई करते रहिये
रामपाल चुदाई करते हुवे - ठीक है
रामपाल की नजर फिर माधुरी की गांड की छेद पे चली जाती है
रामपाल लंड बुर से निकालता फक आवाज के साथ गिला लंड बुर से बाहर निकल आता है रामपाल लंड को पकर कस के पकरे माधुरी के गांड की छेद मे घुसाने लगता है जैसे थी माधुरी को अपनी गांड की छेद मे मोटा टोपा घुसते फिल होता है दर्द मे चीखते हुवे जल्दी से पीछे हट के रामपाल को हैरान डरी देखने लगती है
रामपाल माधुरी को देख - वो बहु तेरी गांड देख मन किया गांड मरने का
माधुरी हैरान डरी रामपाल को देख - गांड भी कोई मारता है आप पागल हो गये है क्या
रामपाल माधुरी को देखते हुवे - बहु मारते है बहोत मजा भी आता है तेरी सास की मे खूब गांड मरता था तुंझे तो सब पता होना चाहिये था आज के समय सब गांड मरते है
माधुरी शोक हैरान होके रामपाल को देख - क्या दर्द नही होता
रामपाल - अरे बहु पहली बार हो बुर मारो या गांड दर्द होता ही है लेकिन बाद मे बहोत मजा आता है
रामपाल माधुरी के पास जाके माधुरी को घोरी बनाते हुवे - प्लेस घोरी बन जा अपनी गांड मरने दे
माधुरी डरते हुवे घोरी बनके रामपाल को देख - देखिये ससुर जी जयदा दर्द होगा तो करने नही दुगी
रामपाल लंड पे थूक लगते हुवे माधुरी को देख - दर्द होगा लेकिन जयदा हुआ सेह नही पाओगी तो रुक जाउंगा
माधुरी रामपाल को देख अपनी गांड और उठाते हुवे - ठीक है मार दीजिये मेरी गांड
आज के लिये इतना ही![]()