वर्षा - हसते हुऐ अच्छा अब बस बेटा कितनी तारीफ़ करोगे मेरी....
संजू - मम्मी मै कोई झूटी तारीफ़ नहीं कर रहा हु
यकीन नहीं होता आपने इतने लंबे औऱ मोटे सांप को को मारा मै तो उन्हें देखकर ही ड़र गया था मम्मी लेकिन आप ज़रा भी नहीं डरे
लेकिन मम्मी उनका पानी आपने कैसे निकाला औऱ वों भी एक ही झटके मै...
वर्षा - पानी नहीं बेटा वों ज़हर था ( वर्षा इस बात पर हसने लगी )
संजू - हां मम्मी वही मेरे मुँह से बार बार पानी ही निकल रहा है.... ( संजू जान बुझ कर इस बात को लंबा खींच रहा था. औऱ अब तो संजू का सांप भी धीरे धीरे पानी छोड़ने लगा था )
वर्षा - बेटा बस उन्हे देखकर ना जाने मूझमे इतनी हिम्मत कहाँ से आयी क़्या पाता औऱ अगर उन्हें मै नहीं मारती तो घर मै भी आ सकते थे
संजू - मम्मी मैंने सुना है की सांप ज्यादा छेद मै ही छुपते है वों कभी ज्यादा तर बाहर नहीं होते
क़्या यें सच है मम्मी
वर्षा - हाँ बेटा यें सच है
संजू- लेकिन ऐसा क्यों मम्मी उन्हें बिल मै ही रहना क्यों पसंद है
वर्षा - बेटा उन्हें शायद वहां अच्छा महसूस होता होंगा इसीलिए
संजू - मम्मी क़्या आपने इस्से पहले भी ऐसे बड़े बड़े सांप मारे है
वर्षा - नहीं बेटा मैंने तो आज़ पहली बार मारे सांप
संजू - अच्छा हुआ मम्मी आप यें ड्रेस मै थी अगर आप सलवार सूट मै होती ना तो शायद नहीं मार पाती उन्हें
( संजू के इस बात पर वर्षा बोलि )
वर्षा - क्यों बेटा इस ड्रेस मै ऐसी क़्या खास बात है
संजू - मम्मी यें पैंट शॉर्ट्स है अगर इसकी जगह सलवार सूट होता तो शायद आपको दिक्कत आती
इसमें आप के पैर कितने फ्री थे.....
वर्षा- हाँ बेटा....
संजू - मम्मी सच मै आज आपने बड़ी हिम्मत दिखाई
( यें बाते सुनकर वर्षा के ख़ुशी का ठिकाना नहीं था., लेकिन उसे क़्या मालूम की संजू कौन से लम्बे सांप औऱ कौन से बिल की बाते कर रहा था )
वर्षा - बेटा मै ज़रा चेंज करके आयी
इतना बोलकर वर्षा अपने रूम मै चली गयी....
श्याम हो चुकी थी संजू सफाई काम से थक कर अपने कमरे मै सो रहा था.....
औऱ वही दूसरी औऱ वर्षा हॉल मै बैठकर टीवी देख रही थी......
थोड़ी देर बाद ज़ब संजू की आँख खुली तो उसने देखा 6 बज चुके थे........
संडे होने के कारण आज संजू भी आराम ही कर रहा था संजू बाहर आया तो उसने देख वर्षा टीवी देख रही थी संजू भी जाकर हॉल मै अपनी मम्मी के साथ बैठ गया......
वर्षा - उठ गये बेटा......
संजू - हाँ मम्मी
वर्षा - अच्छा हुआ बेटा जो आज तुमने हेल्प कर दी नहीं तो मेरा पूरा दिन आज काम मै ही निकल जाता था.....
संजू - कोई बात नहीं मम्मी
संजू को इस वक़्त भूख लगी थी औऱ कुछ खाने का जुगाड़ करने संजू किचन मै चला गया ( इतने मै वर्षा ने उसे आवाज़ लगा कर पानी की बोतल लाने कहाँ पानी बोतल लेकर संजू हॉल मै आ गया औऱ फ्रीज़ से कुछ आम भी साथ मै लेकर आ गया )
वर्षा - अरे यें आम तुम भी ना संजू ज़िद बोहत कर रहे थे लेकिन एक भी आम तुमने अब तक नहीं खाया.....
संजू - हाँ मम्मी मूझे भी अब याद आया ज़ब मैंने फ्रिज खोला तब..
मम्मी आप भी खाओगे ( संजू ने वर्षा को आम देते हुऐ पूछा.....)
वर्षा - नहीं बेटा तुम खाओ मूझे नहीं पसंद आम
वर्षा के ना कहने पर संजू ने भी अपनी मम्मी को फ़ोर्स करना ठीक नहीं समझा.......
आम काफ़ी बड़ा था औऱ उसका आधा हिस्सा गुलाबी भी था संजू ने आम की तारीफ़ करते हुऐ वर्षा से कहाँ
संजू - मम्मी देखो यें आम कितना बड़ा है हाथों मै भी नहीं आ रहा है औऱ काफ़ी वज़नदार भी है मम्मी
( संजू ने आम को अपने हाथों मै लेकर उसे टटोलने लगा )
अपने बेटे को आम की तारीफ़ करता देख भोली वर्षा उसकी बातों का मतलब नहीं समझ पायी औऱ उसने संजू की बात का ज़वाब देते हुऐ कहाँ
वर्षा - हां बेटा इसे हापुस आम बोलते है यें ऐसे ही होते है बड़े
संजू - हां मम्मी तभी तो देखो ना कितने गुलाबी भी है
औऱ इतना बोलकर संजू ने आम को अपने मुँह मै भरकर उसे चूसने लगा.....
उम्म्मम वाहह मम्मी यें तो बोहत मीठे है...
उम्म्म्म औऱ इतना बोलते हुऐ संजू आम चूसने लगा
....
वर्षा - हाँ बेटा मीठे तो होंगे ही ना मैंने सब देख कर ही लिये थे......
संजू - तो मम्मी आप भी खाओ ना आप क्यों मना कर रहे हो......
वर्षा - नहीं बेटा मूझे आम नहीं पसंद.. ( वर्षा ने मुँह बनाते हुऐ कहाँ )
संजू - तो फ़िर क़्या पसंद है आपको मम्मी...
वर्षा - बेटा मुझे केले पसंद है क्यों की वों खाने मै ज्यादा दिक्कत भी नहीं होती सिर्फ़ छिलका निकालो औऱ खा लों...... ( वर्षा ने संजू की औऱ देखते हुऐ कहाँ )
संजू - तो मम्मी आपने कहाँ क्यों नहीं हम बाजार मै ही तो थे अगर आप पहले बोलते तो लेते थे हम....
वर्षा - अरे छोड़ो बेटा...
संजू - मम्मी यें आम भी बोहत मीठे औऱ रसीले है
( संजू इतना बोलकर आम को चूसने लगा )
मम्मी आप भी खा कर देखो ना एक आम...
वर्षा - नहीं नहीं बेटा रहने दो तुम खा लों
संजू - ठीक है मम्मी लेकिन आप को आम नहीं पसंद तो फ़िर क़्या पसंद है आपको.......
वर्षा - बेटा मूझे ककड़ी बोहत पसंद है औऱ पपीते औऱ केले भी पसंद है.... ( वर्षा ने अपनी बात रखते हुऐ संजू से कहाँ )
संजू - मम्मी तो फ़िर अपने पहले क्यों नहीं बताया हम मार्केट से लेते थे ना.....
वर्षा - हाँ बेटा लेकिन छोड़ो जाने दो...
संजू नज़रे बचाते हुऐ वर्षा को घूर रहा था....
संजू - मम्मी अभी आपने यें सब कपड़े डिझाईन करके मार्केट मै लाये है....
तो क़्या आप इसके अलावा भी औऱ कुछ नये ब्रांड्स मार्केट मै लाओगे........
वर्षा - बेटा क़्या पता अगर वर्मा जी बोले तो शायद वों करना होगा......
संजू - मम्मी आप ऐसा नहीं कर सकते की सब हिसाब किताब का काम छोड़ के सिर्फ़ कपड़े डिझाईन करना?
संजू के इस बात पर वर्षा भी सोचने लगी की वों यें काम भी कर सकती है... लेकिन वों वर्मा जी के यहाँ सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ हिसाब देखने के लिये काम कर रही थी...
दूसरी तरफ़ संजू यें सोच रहा था की अगर ऐसा हो गया तो मम्मी घर रहकर भी यें काम कर सकती है..
संजू - मम्मी देखो मूझे तो यही लगता है की आप यें हिसाब वाला काम छोड़के यें डिझाईन वाला काम करो क्यों की आपने अब तक जितनी भी डिझाईन बनाई है वों सब बेहतरीन औऱ लाजवाब है....
वर्षा - हाँ बेटा तुम ठीक बोल रहे हो मै इस बारे मै वर्मा जी से बात करके देखूंगी.....
संजू - हाँ मम्मी आपको वर्मा जी से इस बारे मै बात करनी चाहिये....
औऱ मूझे यें भी लग रहा था की आप यें डिझाईन घर पर भी कर सकते हो इसके लिये आपको दर्जी की भी जरुरत नहीं.....
औऱ मम्मी आप ऐसा क्यों नहीं करते की वर्मा जी के बोलने से पहले ही आप उन्हें एक अच्छी साड़ी औऱ एक ब्लाउज़ डिझाईन करके उन्हें दिखाओ ताकि वों
आपसे इम्प्रेस हो जाये और आपकी इस बात को मान ले...
संजू की यें बाते वर्षा को भा गयी औऱ उसे भी अब संजू की बातों पर यकीन होने लगा की शायद संजू ठीक ही बोल रहा है....
( अपनी मम्मी को सोचता देख संजू को यकीन हो गया की उसका तीर सही निशाने पर लगा है इसके बहाने मम्मी घर भी रहेगी औऱ वों इसी बहाने मुझसे घुल मिल भी जाएगी )
वर्षा - हाँ बेटा तुम्हारी बात तो सही है लेकिन मै तो सारा दिन वहां दुकान मै रहती हु औऱ फ़िर घर आते हुऐ मूझे देर भी हो जाती है तो मै यें कैसे करू.....
संजू - मम्मी आप ऐसा करलो वर्मा जी को बोलकर आप 3-4 दिन की छुट्टी लें लों औऱ फ़िर आराम से घर पर इस डिझाईन के लिये काम करो....
औऱ मम्मी सिर्फ़ साड़ीयाँ ही क्यों मार्केट मै औऱ भी नये फैशन आ गये है आप उन सब पर भी काम करो
वों सकता है शायद आपका ऐसा करने से आपके डिझाईन किये हुऐ ड्रेसेस मार्केट मै एक नया ब्रांड बन जाये........... ( संजू ने अब अपने सारे पत्ते वर्षा के सामने खोल दिये जिस्से वर्षा आसानी से संजू की बातों मै आ सके )
संजू - मम्मी मै कोई झूटी तारीफ़ नहीं कर रहा हु
यकीन नहीं होता आपने इतने लंबे औऱ मोटे सांप को को मारा मै तो उन्हें देखकर ही ड़र गया था मम्मी लेकिन आप ज़रा भी नहीं डरे
लेकिन मम्मी उनका पानी आपने कैसे निकाला औऱ वों भी एक ही झटके मै...
वर्षा - पानी नहीं बेटा वों ज़हर था ( वर्षा इस बात पर हसने लगी )
संजू - हां मम्मी वही मेरे मुँह से बार बार पानी ही निकल रहा है.... ( संजू जान बुझ कर इस बात को लंबा खींच रहा था. औऱ अब तो संजू का सांप भी धीरे धीरे पानी छोड़ने लगा था )
वर्षा - बेटा बस उन्हे देखकर ना जाने मूझमे इतनी हिम्मत कहाँ से आयी क़्या पाता औऱ अगर उन्हें मै नहीं मारती तो घर मै भी आ सकते थे
संजू - मम्मी मैंने सुना है की सांप ज्यादा छेद मै ही छुपते है वों कभी ज्यादा तर बाहर नहीं होते
क़्या यें सच है मम्मी
वर्षा - हाँ बेटा यें सच है
संजू- लेकिन ऐसा क्यों मम्मी उन्हें बिल मै ही रहना क्यों पसंद है
वर्षा - बेटा उन्हें शायद वहां अच्छा महसूस होता होंगा इसीलिए
संजू - मम्मी क़्या आपने इस्से पहले भी ऐसे बड़े बड़े सांप मारे है
वर्षा - नहीं बेटा मैंने तो आज़ पहली बार मारे सांप
संजू - अच्छा हुआ मम्मी आप यें ड्रेस मै थी अगर आप सलवार सूट मै होती ना तो शायद नहीं मार पाती उन्हें
( संजू के इस बात पर वर्षा बोलि )
वर्षा - क्यों बेटा इस ड्रेस मै ऐसी क़्या खास बात है
संजू - मम्मी यें पैंट शॉर्ट्स है अगर इसकी जगह सलवार सूट होता तो शायद आपको दिक्कत आती
इसमें आप के पैर कितने फ्री थे.....
वर्षा- हाँ बेटा....
संजू - मम्मी सच मै आज आपने बड़ी हिम्मत दिखाई
( यें बाते सुनकर वर्षा के ख़ुशी का ठिकाना नहीं था., लेकिन उसे क़्या मालूम की संजू कौन से लम्बे सांप औऱ कौन से बिल की बाते कर रहा था )
वर्षा - बेटा मै ज़रा चेंज करके आयी
इतना बोलकर वर्षा अपने रूम मै चली गयी....
श्याम हो चुकी थी संजू सफाई काम से थक कर अपने कमरे मै सो रहा था.....
औऱ वही दूसरी औऱ वर्षा हॉल मै बैठकर टीवी देख रही थी......
थोड़ी देर बाद ज़ब संजू की आँख खुली तो उसने देखा 6 बज चुके थे........
संडे होने के कारण आज संजू भी आराम ही कर रहा था संजू बाहर आया तो उसने देख वर्षा टीवी देख रही थी संजू भी जाकर हॉल मै अपनी मम्मी के साथ बैठ गया......
वर्षा - उठ गये बेटा......
संजू - हाँ मम्मी
वर्षा - अच्छा हुआ बेटा जो आज तुमने हेल्प कर दी नहीं तो मेरा पूरा दिन आज काम मै ही निकल जाता था.....
संजू - कोई बात नहीं मम्मी
संजू को इस वक़्त भूख लगी थी औऱ कुछ खाने का जुगाड़ करने संजू किचन मै चला गया ( इतने मै वर्षा ने उसे आवाज़ लगा कर पानी की बोतल लाने कहाँ पानी बोतल लेकर संजू हॉल मै आ गया औऱ फ्रीज़ से कुछ आम भी साथ मै लेकर आ गया )
वर्षा - अरे यें आम तुम भी ना संजू ज़िद बोहत कर रहे थे लेकिन एक भी आम तुमने अब तक नहीं खाया.....
संजू - हाँ मम्मी मूझे भी अब याद आया ज़ब मैंने फ्रिज खोला तब..
मम्मी आप भी खाओगे ( संजू ने वर्षा को आम देते हुऐ पूछा.....)
वर्षा - नहीं बेटा तुम खाओ मूझे नहीं पसंद आम
वर्षा के ना कहने पर संजू ने भी अपनी मम्मी को फ़ोर्स करना ठीक नहीं समझा.......
आम काफ़ी बड़ा था औऱ उसका आधा हिस्सा गुलाबी भी था संजू ने आम की तारीफ़ करते हुऐ वर्षा से कहाँ
संजू - मम्मी देखो यें आम कितना बड़ा है हाथों मै भी नहीं आ रहा है औऱ काफ़ी वज़नदार भी है मम्मी
( संजू ने आम को अपने हाथों मै लेकर उसे टटोलने लगा )
अपने बेटे को आम की तारीफ़ करता देख भोली वर्षा उसकी बातों का मतलब नहीं समझ पायी औऱ उसने संजू की बात का ज़वाब देते हुऐ कहाँ
वर्षा - हां बेटा इसे हापुस आम बोलते है यें ऐसे ही होते है बड़े
संजू - हां मम्मी तभी तो देखो ना कितने गुलाबी भी है
औऱ इतना बोलकर संजू ने आम को अपने मुँह मै भरकर उसे चूसने लगा.....
उम्म्मम वाहह मम्मी यें तो बोहत मीठे है...
उम्म्म्म औऱ इतना बोलते हुऐ संजू आम चूसने लगा
....
वर्षा - हाँ बेटा मीठे तो होंगे ही ना मैंने सब देख कर ही लिये थे......
संजू - तो मम्मी आप भी खाओ ना आप क्यों मना कर रहे हो......
वर्षा - नहीं बेटा मूझे आम नहीं पसंद.. ( वर्षा ने मुँह बनाते हुऐ कहाँ )
संजू - तो फ़िर क़्या पसंद है आपको मम्मी...
वर्षा - बेटा मुझे केले पसंद है क्यों की वों खाने मै ज्यादा दिक्कत भी नहीं होती सिर्फ़ छिलका निकालो औऱ खा लों...... ( वर्षा ने संजू की औऱ देखते हुऐ कहाँ )
संजू - तो मम्मी आपने कहाँ क्यों नहीं हम बाजार मै ही तो थे अगर आप पहले बोलते तो लेते थे हम....
वर्षा - अरे छोड़ो बेटा...
संजू - मम्मी यें आम भी बोहत मीठे औऱ रसीले है
( संजू इतना बोलकर आम को चूसने लगा )
मम्मी आप भी खा कर देखो ना एक आम...
वर्षा - नहीं नहीं बेटा रहने दो तुम खा लों
संजू - ठीक है मम्मी लेकिन आप को आम नहीं पसंद तो फ़िर क़्या पसंद है आपको.......
वर्षा - बेटा मूझे ककड़ी बोहत पसंद है औऱ पपीते औऱ केले भी पसंद है.... ( वर्षा ने अपनी बात रखते हुऐ संजू से कहाँ )
संजू - मम्मी तो फ़िर अपने पहले क्यों नहीं बताया हम मार्केट से लेते थे ना.....
वर्षा - हाँ बेटा लेकिन छोड़ो जाने दो...
संजू नज़रे बचाते हुऐ वर्षा को घूर रहा था....
संजू - मम्मी अभी आपने यें सब कपड़े डिझाईन करके मार्केट मै लाये है....
तो क़्या आप इसके अलावा भी औऱ कुछ नये ब्रांड्स मार्केट मै लाओगे........
वर्षा - बेटा क़्या पता अगर वर्मा जी बोले तो शायद वों करना होगा......
संजू - मम्मी आप ऐसा नहीं कर सकते की सब हिसाब किताब का काम छोड़ के सिर्फ़ कपड़े डिझाईन करना?
संजू के इस बात पर वर्षा भी सोचने लगी की वों यें काम भी कर सकती है... लेकिन वों वर्मा जी के यहाँ सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ हिसाब देखने के लिये काम कर रही थी...
दूसरी तरफ़ संजू यें सोच रहा था की अगर ऐसा हो गया तो मम्मी घर रहकर भी यें काम कर सकती है..
संजू - मम्मी देखो मूझे तो यही लगता है की आप यें हिसाब वाला काम छोड़के यें डिझाईन वाला काम करो क्यों की आपने अब तक जितनी भी डिझाईन बनाई है वों सब बेहतरीन औऱ लाजवाब है....
वर्षा - हाँ बेटा तुम ठीक बोल रहे हो मै इस बारे मै वर्मा जी से बात करके देखूंगी.....
संजू - हाँ मम्मी आपको वर्मा जी से इस बारे मै बात करनी चाहिये....
औऱ मूझे यें भी लग रहा था की आप यें डिझाईन घर पर भी कर सकते हो इसके लिये आपको दर्जी की भी जरुरत नहीं.....
औऱ मम्मी आप ऐसा क्यों नहीं करते की वर्मा जी के बोलने से पहले ही आप उन्हें एक अच्छी साड़ी औऱ एक ब्लाउज़ डिझाईन करके उन्हें दिखाओ ताकि वों
आपसे इम्प्रेस हो जाये और आपकी इस बात को मान ले...
संजू की यें बाते वर्षा को भा गयी औऱ उसे भी अब संजू की बातों पर यकीन होने लगा की शायद संजू ठीक ही बोल रहा है....
( अपनी मम्मी को सोचता देख संजू को यकीन हो गया की उसका तीर सही निशाने पर लगा है इसके बहाने मम्मी घर भी रहेगी औऱ वों इसी बहाने मुझसे घुल मिल भी जाएगी )
वर्षा - हाँ बेटा तुम्हारी बात तो सही है लेकिन मै तो सारा दिन वहां दुकान मै रहती हु औऱ फ़िर घर आते हुऐ मूझे देर भी हो जाती है तो मै यें कैसे करू.....
संजू - मम्मी आप ऐसा करलो वर्मा जी को बोलकर आप 3-4 दिन की छुट्टी लें लों औऱ फ़िर आराम से घर पर इस डिझाईन के लिये काम करो....
औऱ मम्मी सिर्फ़ साड़ीयाँ ही क्यों मार्केट मै औऱ भी नये फैशन आ गये है आप उन सब पर भी काम करो
वों सकता है शायद आपका ऐसा करने से आपके डिझाईन किये हुऐ ड्रेसेस मार्केट मै एक नया ब्रांड बन जाये........... ( संजू ने अब अपने सारे पत्ते वर्षा के सामने खोल दिये जिस्से वर्षा आसानी से संजू की बातों मै आ सके )
