नहीं मम्मी आपकी बातों का बुरा नहीं लगा
अपने बेटे की इस रव्वये से वर्षा की चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी.....
यें तो किसी पार्टिज या फंशन मै ही पहन सकते हैं अब..
मम्मी ऐसा जरूरी नहीं हैं आप इसे कभी भी पहन सकते हो
वर्षा - लेकिन बेटा यें साड़ी कुछ ज्यादा ही जालीदार हैं औऱ इसका ब्लाउज़ भी थोड़ा अजीब हैं..
यें सब पहने बाहर जाना इस्से थोड़ा अजीब भी लगेगा ना.....
संजू - मम्मी वैसा आपको लग रहा हैं औऱ यें साड़ी बोहत बड़े दुकान की है अगर यें साड़ी या ब्लाउज़ ऐसा अगर अजीब होता तो क़्या इतनी बड़ी दुकान वाले इसे बेचते इस्से उनके ही दुकान का नाम खराब होता...
( संंजु ने बड़ी सफाई से यें बात वर्षा को समझाई )
वर्षा - हा बेटा यें भी सही हैं
संजू - मम्मी वर्मा जी के यहां भी हैं ऐसी साड़ीया हैं
संजू बातों बातों मै वर्षा को लपेट रहा था ताकि वों वों उसे औऱ थोड़ी देर इस रूप मै ताड़ सके....
वर्षा - शायद होंगी बेटा अभी तो वों सलवार सूट भी रखने वाले हैं.... अरे हा मै तो तुम्हें बताना ही भूल गयी दुकान मै कौन कौन से नाप की औऱ कौन सी डिझाईन की रखने हैं यें मै सिलेक्ट करने वाली हु..वों काम वर्मा जी ने मुझ पर सोफा हैं
संजू - अच्छा यें तो बड़ी बात हैं मम्मी मतलब इतनी बड़ी दुकान मै कौन सी ड्रेसेज होना यें आप दिसाईड़ करोगे...
अपने लिये यें तारीफ़ सुनकर वर्षा भी खुश हो गयी
हा बेटा वों तो उनका बड़प्पन हैं
संजू बड़प्पन उनका हैं लेकिन मम्मी आप इसके काबिल होंगी तभी तो उन्होंने आपसे यें कहाँ ना..
औऱ हा मूझे पूरा यकीन हैं मम्मी आपकी डिझाईन औऱ आपके ड्रेसेस सबसे अलग होंगे...
इस बात पर वर्षा खुश होते हुई बोलि थैंक यु बेटा
संजू अपनी मम्मी की तारीफ़ पे तारीफ़ किये जा रहा था...
वर्षा - हा बेटा अच्छा अब मै कुछ काम कर लेती हु
संजू - ठीक हैं मम्मी.
संजू अपने कमरे मै चला गया औऱ डोर को अंदर से लॉक कर दिया
संजू आराम से अपने पलंग पर लेट गया औऱ जल्दी से अपनी पैंट को निचे करके अपने लंड को बाहर निकाल दिया संजू से अब रहा नहीं गया औऱ वों अपने लंड को अपनी मम्मी की याद मै मुठियाँने लगा उसका सूपड़ा वर्षा की यादो मै झटके मार रहा था अपनी मम्मी का यें खूबसूरत रूप आज इतनी पास से देखकर संजू के मुँह मै पानी आ गया औऱ अपनी मम्मी को पाने की इच्छा औऱ ज्यादा उसके लिये बढ़ गयी थी इन सब बातों को याद करते हुऐ संजू अब अपने लंड पर जल्दी जल्दी हात चलाने लगा था वों यही सोच मै था की अगर मम्मी साड़ी मै ही इतनी मादक बदन की लग रही थी तो नंगी कितनी कहर मचा देगी यही सोचते सोचते संजू का गर्म लावा उसके हाथों पर गिर गया औऱ संजू को एहसास हुआ की उसका वीर्य बोहत गर्म था शायद मम्मी की याद मै इसने इतना गर्म पानी फेका होगा औऱ हो भी क्यों ना मम्मी की याद मै तो अच्छे अच्छो का पानी निकल जाये...
संजू ने जल्दी बेड को साफ़ किया औऱ कुछ देर पढ़ाई करने मै लग गया....
तभी कुछ देर बाद वर्षा ने उसे खाना खाने की लिये बुला लिया
वर्षा ने इस वक़्त साड़ी चेंज कर ली थी औऱ अपन हमेशा की सूट सलवार मै थी
संजू - मम्मी पापा की बिना कितना अजिब लग रहा है ना...
वर्षा - हा बेटा
लेकिन क़्या करे उनका काम ही वैसा हैं
संजू - हा वों बात भी हैं
संजू - मम्मी फ़िर आप कब डिझाईन देने वाले हो ड्रेसेस की औऱ कौन कौन से ड्रेस होंगे मम्मी सिर्फ़ सलवार सूट होंगे या और भी कही
अपने बेटे की इस सवाल पर वर्षा खुद ही कंफ्यूज थी क्यों की अब तक उसे भी इतना कुछ मालूम नहीं था
वर्षा - बेटा दरसल मूझे भी नहीं पता शायद मूझे लगता हैं की सलवार सूट ही होंगे
लेकिन वैसा मै कन्फर्म भी नहीं बता सकती
संजू - हा मम्मी वों भी हैं अच्छा अगर मम्मी आपकी डिझाईन वर्मा जी को पसंद आ गयी तो क़्या उनके पुरे दुकान मै वही कपड़े रहेंगे....
वर्षा - हा बेटा
संजू - तब तो मम्मी यें बोहत बड़ी बात होंगी
वर्षा - अच्छा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही हैं
( वर्षा ने इस बार संजू से पूछा )
संजू - ठीक चल रही हैं मम्मी
वर्षा - अच्छा बेटा तुम्हें मै मेरी पहली सैलेरी से क़्या लेकर दू बताओ मूझे....
( वर्षा ने बड़े प्यार से संजू से पूछा )
संजू - मम्मी कुछ नहीं
वर्षा - अरे ऐसे कैसे तुमने मूझे दो बार गिफ्ट दिये हैं औऱ क़्या मै एक बार भी तुम्हारें लिये कुछ ले नहीं सकती....
अच्छा मेरी पहली सैलरी मिलने पर तूम मूझे सोचके बता देना ठीक हैं
संजू - ठीक हैं मम्मी
वर्षा औऱ संजू खान ख़त्म कर की अपने अपने कमरे चले गये....
सुबह ज़ब संजू की नींद खुली तो वर्षा किचन मै खाना बना रही थी
कुछ दिनों से संजू वॉकिंग पर नहीं जा रहा था लेकिन वर्षा रोज वॉक करती थी
संजू सीधा तैयार होकर कीचन मै गया वर्षा अपने काम मै लगी हुई थी
वर्षा को काम करता देख संजू वही खड़े होकर वर्षा से पूछने लगा.....
मम्मी अभी आप सुबह जल्दी ही उठ जाते होंगे हैं ना
( अपने बेटे की आवाज़ सुनते ही वर्षा संजू की औऱ देखते हुऐ कहाँ )
अरे उठ गये बेटा औऱ यें क़्या आज तुम बिना बोले ही तैयार हो गये....
संजू - हा मम्मी वों क़्या ना कही आपको देर ना हो जाये इसलिए
वर्षा - अच्छा फ़िर तो ठीक हैं
मै भी तैयार ही हु बस तुम्हारें लिये कुछ बना दू
तुम जाकर हॉल मै बैठो मे कुछ खाने को लेकर आती हु....
संजू - जी मम्मी
थोड़ी देर मै वर्षा ने संजू को खाना लगा दिया औऱ थोड़ी देर मै दोनों ही घर से निकल पड़े
वर्षा अपने काम पर पहुंच गयी औऱ वहां संजू भी अपने कॉलेज पहुंच चूका था....
वर्मा - गुड मॉर्निंग भाभी जी
वर्षा - वर्मा जी को स्माइल देकर उसने भी वर्मा को मॉर्निंग कहाँ....
वर्मा - वर्षा जी आज हमने सलवार सूट की कुछ कपड़े मंगवायें हैं हम एक काम करते हैं यें पार्सल हम टेलर की यहां भेज देते हैं औऱ हम उन्हें वहां जाकर मिल भी लेते हैं इतना बड़ा ऑर्डर हैं उन्हें मिलना भी जरूरी हैं ( वर्मा ने एक इसमें अपनी बात वर्षा से कह दी )
वर्षा - हा वर्मा जी चलेगा वैसे हमें इस ऑर्डर की लिये टाइम भी लग जायेगा
वर्मा - हा भाभी जी मै भी वही सोच रहा था इसीलिये हमें थोड़ा जल्दी करना होगा
वर्षा - हा वर्मा जी
वर्मा - तो भाभी जी हम ऐसा करते हैं की हम अभी चलते हैं टेलर की यहाँ औऱ यें पार्सल तो हमारी शॉप की गाड़ी से वहां पहुंच ही जायेगा मै इनको अड्रेस दे देता हु......
वर्षा - जी भाई साहब
वर्मा इतना बोलकर बाहर की औऱ निकल गया औऱ उसके साथ साथ वर्षा भी आ गयी
वर्मा बाहर आते हि उसका ड्राइवर गाड़ी लेकर वहां आ गया..........
वर्मा - आईये भाभी जी बैठीये औऱ इतना बोलकरब
वर्मा ने डोर ओपन किया......
( वर्मा को अपने लिये इतनी इज़्ज़त देना वर्षा को बोहत अच्छा लगा औऱ उसने एक स्माइल वर्मा को दे दी )
वर्षा- ड्राइवर भाई साहब यें हैं उनका कार्ड टेलर का
वर्षा ने ड्राइवर को कार्ड देते हुऐ कहाँ, ड्राइवर ने भी कार्ड लेकर उस दिशा की औऱ गाड़ी बढ़ा दी )
वर्मा - भाभी जी आज हम डिझाईन औऱ किस तरह से ड्रेस रखनी हैं यें डिसाइड करके टेलर को एक बड़ा ऑर्डर दे देते हैं.......
वर्षा - जी भाई साहब क़्या हमें सिर्फ़ सलवार औऱ सूट का ही ऑर्डर देना हैं क़्या या औऱ भी कुछ ड्रेसेस देने हैं........
( वर्षा की इस सवाल पर वर्मा ने वर्षा की औऱ देखते हुऐ कहाँ )
वर्मा - भाभी जी मै भी वही सोच रहा था अब आप आने से पहले हमारे दुकान पर एक लेडीज कस्टमर आयी थी करीब आपके जैसी ही थी लेकिन बिना कुछ खरीदी किये ही चली गयी आज पहली बार ऐसा हुआ की कस्टमर ने कुछ माँगा औऱ मैंने उसे मना कर दिया.....
वर्षा - क़्या पहली बार वापस गया कस्टमर औऱ भाई साहब जहाँ तक मूझे पता है हमारे दुकान पर तो सब हैं लेकिन ऐसी कौन सी चीज थी जिसके लिये कस्टमर वापस चला गया?
( यहां मै आपको बता दू की वर्मा यहां झूठ बोल रहा था ऐसा कोई कस्टमर ना आया था औऱ ना वापस गया लेकिन इस वक़्त वर्मा की दिमाग़ मै कुछ औऱ ही था )
वर्मा - भाभी जी अब क़्या बताऊ आपको याद हैं आपने जॉगिंग की लिये सूट लिया था.....
वर्षा - हा भाई साहब
वर्मा - बस भाभी उस लेडीज को वही होना था जॉगिंग ड्रेस
वर्षा - अरे भाई साहब होता था ना हमारे यहां...
वर्मा - भाभी जी वों तो था लेकिन उसे वों ड्रेस हाफ मै होना था हाफ ट्रैक पैंट जिस्से की रन्निंग करने के लिये आसानी हो... लेकिन वैसा ड्रेस हमारे पास नहीं था औऱ वों भी उस लेडीज को अच्छे डिझाईन मै होना था.......
वर्षा - अच्छा तो यें बात
वर्मा - हा भाभी वही तो बात हैं....
औऱ यें सब बाते करते करते वों टेलर के यहां पहुंच गये