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Incest बहु हो तो ऐसी....!!!!!

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बहु हो तो ऐसी.....!!! भाग 3
प्रतापसिंग और उसके हमउम्र रिटायर्ड दोस्त मूवी देखने का प्रोग्राम बना रहे थे...सबकुछ तय करके 2 बजे राजेश पांडे की दुकान पे सब मिलेंगे ये तय हुआ।

प्रताप सिंग घर वापस आया लेकिन उसे नेहा नही दिखी वो शायद अपने कमरे में ही थी। वो भी खाना खा कर अपने कमरे में आराम करने चला गया। प्रमिला भी आराम कर रही थी...उसे देख के उसके मन मे आया कि आज इसे ही चोद के थोड़ा लंड को ठंडा कर लूं...पर जैसे ही उसने कोशिश की प्रमिला ने उसे रोका...
प्रमिला:- क्या है जी...सोने दीजिये ना...
प्रतापसिंग:- अरे मेरी भागवान कितने दिन हो गए हमे चुदाई किये...कभी तो उस परमेश्वर को भूल के इस पति परमेश्वर की तरफ ध्यान दो...
प्रमिला:- कैसी बाते करते हो जी आप?? मैने कब आपका ध्यान नही रखा...बस कुछ दिन और मेरा पाठ पूरा हो जाने दीजिए...
प्रतापसिंग:- तुम हमेशा कोई न कोई पाठ करती रहती हो और मैं बस ऐसेही...
प्रमिला:- ठीक है जी बस ये हो जाने दीजिए फिर कोई नया पाठ शुरू नही करूँगी...अब थोड़ा आराम कर लूं...आप भी तो बाहर जा रहे हो न अपने दोस्तों के साथ...
प्रतापसिंग मन ही मन उसे कोसता हुआ उठा और तयार हो कर निकाल गया अभी 2 बजने में वक़्त था तो राजेश पांडे की दुकान पे जा कर बैठ गया...दोनो इधर उधर की बाते करते रहे....तभी नेहा वहा से गुजरते हुए प्रतापसिंग को दिखी....टाइट जीन्स टॉप में वो पैदल ही अपने क्लास की और जा रही थी....नेहा का ध्यान नही था...पर दोनों का ध्यान अब उसपर ही था...सामने से टॉप में ठुसे हुए उसके आम को देख दोनो की हालत खराब होने लगी थी...

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और जब वो थोड़ा आगे निकली तो उसकी मटकती गांड को देख दोनो मचल उठे...


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राजेश तो उसे रोज ही देखता था पर आज उसके साथ प्रतापसिंग भी अपनी आंखें सेक रहा था नेहा की जवानी की आग में...राजेश का ध्यान गया तो उसने देखा कि प्रतापसिंग भी अपनी बहू का पिछवाड़ा देख लार टपका रहा था...उसे देख उसको बड़ा आश्चर्य हुआ और उसे हसि भी आयी... लेकिन वो उसने छुपा ली और कुछ नही बोला।

थोड़ी देर में सब दोएत इक्कठा हुए और मूवी देखने चले गए...मूवी के बाद राजेश प्रतापसिंग को जबरदस्ती एक बार मे ले गया और बाकी दोस्त उन्हें छोड़ के घर वापस आ गए।

राजेश और प्रतापसिंग एक कोने में बैठ गए।
उनके साइड वाले टेबल पे दो लोग शराब पीते हुए बाटे कर रहे थे। उनको थोड़ी ज्यादा ही हो गयी थी।
पहला:- यार अपने शहर की बात हि कुच और थी...बहोत मजा आता था घूमना फिरना खाना पीना लडकिया ताड़ना...बहोत मिस करता हु यार...
दूसरा:- हा यार हम दोस्त तुझे बहोत मिस करते है...
पहला:- यार तुझे पता है मैन पिछले महीने नेहा को देखा उसके पति के साथ...
दूसरा:- कोन नेहा?? अरे वो नेहा...अपने मेहता डिपार्टमेंटल स्टोर वाले मेहता साब की लड़की??
पहला:- हा वही...अभी तो और माल बन गयी है यार..
दूसरा:- हा वो इसी शहर में रहती है...

राजेश और प्रतापसिंग अपनी बातों में बिजी थे पर जैसे ही नेहा का नाम सुना तो दोनों गौर से उनकी बाते सुनने लगे...पहले तो प्रतापसिंग को लगा कोई और होगी पर जब मेहता स्टोर की बात सुनी तो समझ गया कि वह उसकी बहु नेहा की बाते कर रहे थे...
दूसरा:- उसका पति हीं था न?? या कोई उसका पुराना यार??
दोनो हँसने लगे...
पहला:- पता नही भाई यार था या पति...ऐसी लड़कियों का क्या भरोसा...वहां मायके में तो बहोत झंडे गाड़े है उसने...
दूसरा:- गाड़े नही गडवाए है...हा हा हा.. पर कुछ भी कहो यार थी बड़ी मस्त चीज...
पहला:- है यार नसीबवाला है उसका पति जो अब रोज उसको पेलता होगा...
दूसरा:-ह्म्म्म पति भि पेलता होगा और ससुर देवर सब पेलते होंगे भई...
पहला:- हा और वो भी खुशी से लेती होगी सबका...
दूसरा:- चल यार हमे क्या...चल बिल दे और निकलते है...तुझे lलेट हो जाएगा....

दोनो चले गए...राजेश प्रतापसिंग को बड़े गौर से देख रहा था...वो उनदोनो की बाते सुन के बहोत बेचैन से हो गया..
राजेश:- क्या हुआ प्रतापसिंग जी क्या सोच रहे हो??
प्रताओसिंग:- नही...कुछ नही...
राजेश:- ये दो बेवड़े कही आपकी बहु नेहा की तो बात नही कर रहे थे....मतलब वो भी मायके से मेहता है...
प्रतापसिंग:- क्या बकवास कर रहे हो...
राजेश:- अरे प्रतापसिंग जी गुस्सा क्यों कर रहे हो?? वो मैं तो बस पूछ रहा था...वैसे सारि चीजे तो आपकी बहु से मेल खाती है...
प्रतापसिंग कुछ नही बोलता...उससे राजेश की हिम्मत बढ़ जाती है...
राजेश:- नेहा बेटी वैसे सच मे बहोत कमाल की है....उसे देख के खड़ा हो जाता है कसम से...जैसा आपका खड़ा हो गया था तभी दोपहर में...मैन देखा आप कैसे उसका पिछवाड़े को घर रहे थे...उसमे गलती आपकी नही है हमारी कॉलोनी के हर छोड़ा बड़ा मर्द उसके नाम से हिलाता होगा...आप भी हिलाते हो क्या??
दोनो पे शराब के नशे का सुरुर साफ झलक रहा था..
राजेश:- मैं तो हमेशा मुठ मरता हु नेहा बहु के नाम की...आप कैसे कंट्रोल करते हो पता नही...अगर मैं आपकी जगह होता न तो इस मौके का फायदा उठाता.. बेटा घर पे नही...बहु को मर्द की कमी महसूस हो रही होगी ऐसे में उसको पटाना आसान होगा प्रतापसिंग जी....
प्रतापसिंग:- अबे वो पांडे...तुझे समझ नही आता क्या...साले बकवास करेगा तो यही उठा के पटक दूंगा...दुबारा मेरी बहु को देखा बुरी नजर से तो तो तेरी आँखे निकल दूंगा समझा...दो घुट शराब क्या पीली तेरे साथ तू सर पे बैठ रहा है...
राजेश:- अरे..अरे प्रतापसिंग जी माफ् कर दीजिए वो तो मैं बस...ऐसेही...ये नशे में थोड़ा बहक गया...माफ कर दो...दुबारा कुछ नही कहूंगा...

प्रतापसिंग:- चल हट..नही पीना तेरे साथ...
और प्रतापसिंग गुस्से में वहां से निकल गया...लेकिन रास्तेभर उसके दिमाग मे राजेश और उन दो अनजान लोगों की बाते घूम रही थी.. यकीनन वो दोनों नेहा की ही बात कर रहे थे..तो क्या नेहा सच मे बहोत चुददकड थी?? इतनी चुददकड की वो अपने पति के अलावा ससुर देवर से चुदवा ले?? दोनो की बाते सुन के तो लगता है कि वो बहोत कुछ जानते है नेहा के बारे में...लेकिन एक बात समझ नही आ रही ये सब चीजें आज ही क्यों हो रही है?? ये सिर्फ संयोग है या कोई इशारा? यकीनन ये इशारा ही है।
और पांडे जो बोल रहा था वो भी सही है उसे मर्द की जरूरत है...ऐसे में वो कहि बाहर...नही ..नही इसमे बहोत बदनामी होगी इससे अच्छा की मैं ही....हा कोशिस करने में क्या जाता है...वैसे भी मेरा लंड भी तो प्यासा है कई दिनों से...लेकिन बहु के साथ ये सब...कुछ नही होता राजेश नही बोल रहा था कि अगर वो मेरी जगह होता तो...हा और मैं कोनसा जबर्फ़सती करने वाला हु...सहमति से होगा तो क्या बुरा है??

ये सब उसके अंदर उथलपुथल मची हुई थी...घर पहोचते पोहचते उसकी शराब का नशा पूरा उत्तर चुका था...और वैसे भी एकबार किसी को जवानी का नशा होने लगे तो दूसरा नशा कहा कुछ असर करता है।
घर पहोचते ही उसकी और नेहा का आमना सामना हो गया...दोनो ने एक नजर एक दूसरे को देखा ...प्रतापसिंग को देख नेहा शर्मा गयी और उसे एकदम से फर्श पर गिरे वीर्य की याद आ गयी... और उसकी हसि निकल गयी...प्रतापसिंग समझ गया कि नेहा क्यों हस रही है....उसने देखा वो अकेली थी....वो वही बैठ गया...."बहु एक ग्लास पानी तो देना"
उसने दोनो के बीच की ऑकवर्ड होती जा रही सिचुएशन को कुछ कम करने की कोशिश की।
नेहा पानी लेके आयी और प्रतापसिंग को दिया।
प्रतापसिंग ने पानी लिया...नेहा पलट के जाने लगी तो...
प्रतापसिंग:- नेहा बेटी सुनो....
नेहा रुक गयी और उसे देखने लगी।
प्रतापसिंग:- बेटी वो सुबह जो भी हुआ.....वो...मतलब...मैं वो...मैं कह रहा था कि...मैं माफी माँगना चाह रहा था...बेटी वो मैं बाथरूम में गया और याद ही नही रह दरवाजा बंद करना...आदत नही है ना...
नेहा:- (शर्माते हुए) कोई बात नही बाबूजी...वो सब तो एक एक्सीडेंट था।
नेहा का सहज जवाब से प्रतापसिंग थोड़ा हल्का फील करने लगा...
प्रतापसिंग:- थैंक यू बेटी...बड़ा अजीब लग रहा था सुबह से...एक पल के लिए भी चैन नही मिल रहा था. ..
नेहा:- क्या हुआ बाबूजी?? आप इतना क्यों सोच रहे हो...हो जाता है...
प्रतापसिंग:- है बेटी पर ऐसे एकदूसरे को देखना...पता नही बहोत अजीब लग रहा है...
नेहा शर्मा के अपना सर नीचे कर लेती है।
प्रतापसिंग:- सुबह से बस उसी के बारे में सोच रहा हु...बस आखो के सामने से सुबह की वो तस्वीर हट ही नही रही है..
नेहा को समझ आ गया कि वो उसकी नंगी तस्वीर की बात कर रहा है....उसका हाल भी वही था...सुबह से उसकी आँखों के सामने प्रतापसिंग का लंड नाच रहा था।
प्रतापसिंग:- क्या सोच रही हो बेटी? यही सोच रही हो ना कि कैसे ससुर है जो बहु से ऐसी बाते कर रहा है? बहु क्या करूँ तुम से अगर उस बारे में बात नही करूँगा तो चैन कैसे मिलेगा? तुम्हे देख के ऐसा लग रहा है जैसे तुम भी सुबह से बेचैन हो...हो क्या?
नेहा ने एकदम से प्रतसिंग की आखों में देखा...उसे उसकी आँखों मे शैतानियत नजर आयी...हवस वासना नजर आयी...वो शर्म के मारे लाल हो गयी।
नेहा:- वो बाबूजी...मैं...हा... मतलब की नही...अजीब तो लग ही रह था...लेकिन क्या कर सकते है...जो होना था वो हो गया।
प्रतापसिंग:-मतलब तुम भी सोच रही थी...और बहू थैंक यू...
नेहा:- थैंक यू??? किस लिए बाबूजी?
नेहा समझ नही पायी..
प्रतापसिंग:- वो सुबह तुमने हमारे कमरे में जो साफ किया उसलिए....और एक नॉटी स्माइल पास की।
नेहा शॉक हो कर उसे देखने लगी।
नेहा:- साफ सफाई? मतलब मैं समझी नही...उसे सब समझ आ गया था पर शर्म के मारे अनजान बनाने की कोशिश कर रही थी।
प्रतापसिंग:- अरे बेटी वो फर्श पर गिर हुआ वो...मतलब मैन देखा सब तुम जो कर रही थी... मैं भूल ही गया था उसके बारे में...और ऐसेही निकल गया था...लेकिन तुमने बचा लिया मुझे ।...तुम्हे तो पता ही है तुम्हारी सास कैसी है उसे थोड़ा भी इधर उधर नही चलता. ...खास कर के जब वो पाठ कर रही होती है।
नेहा शर्म के मारे कुछ नही बोल पा रही थी।
प्रतापसिंग:- वैसे गलती मेरी ही है...मुझे थोड़ा कंट्रोल करना चाहिए था.. .पर नही हुआ...
प्रतापसिंग हर एक कदम फुक फुक के रख रहा था...वो नेहा को देख रहा था कि वो जो बाटे कर रहा है उसपे नेहा को कोई ािाितराज तो नही...लेकिन नेहा का शर्माना उसे होलिम्मत दे रहा था।
प्रतापसिंग:- क्या करता बहु...वो सुबह तुम्हे ऐसे देखा और बस खुद पे काबू ही नही रहा...तुमने भी देखा ना...कैसे एकदम से वो.. मतलब की...
नेहा सब सुन रही थी और शर्म से लाल हुई पड़ी थी...उसका ससुर उसके सामने कबूल कर रहा था कि उसने उसके मन की मुठ मेरी थी।
प्रतापसिंग:- क्या हुआ नेहा बेटी...कुछ गलत बोल दिया क्या? कुछ जवाब तो दो...
नेहा ऊपर देखते हुए..."बाबूजी अब क्या बोलू मैं"
प्रतापसिंग:- देखो बहु जो मेरे मन मे था वो बोल दिया वरना आज नींद नही आती मुझे...तुम भी मन हल्का कर लो...वैसे एक बात पुछु?? तुम फर्श पर गिरे उस पानी को इतना गौर से देख रही थी और तुम्हारी आंखे शॉक से इतनी क्यों बड़ी हो गयी थी?
नेहा:- बाबूजी....वो...मैं...मैं...नही तो...ऐ.. ऐ.. ऐसा कुछ नही...
प्रतापसिंग:- मैन देखा बहु...तुम कुछ सोच रही थी...अब ऐसा तो नही था कि तुमने पहली बार देखा हो....
नेहा:- देखा बाबूजी पर इतना सारा किसीका नही देखा....नेहा हड़बड़ाहट में बोल गयीं।
प्रतापसिंग हँसते हुए:- किसीका??? क्या मतलब किसीका?
नेहा खुद को मन ही मन गाली दे रही थी कि वो क्या बोल गयीं।
अब नेहा को सफाई देने के लिए बोलना ही पड़ रहा था वरना वो वहां से खिसकने के बारे में सोच रही थी।
नेहा:- वो..वो...बाबूजी आपके बेटे का..मेरे कहने का मतलब ये था...
प्रतापसिंग:- अरे बहु इसमे इतना क्यों घबरा रही हो?? जब मर्द बहोत दिनों तक कुछ नही करता तो उसका निकलता है ज़्यादा...पर सच कहु तो मैं भी हैरान था...की मेरा इतना सारा कोसे निकला...शायद तुम्हारी वजह से...प्रतापसिंग ने आखरी लाइन बहोत ही धीरे से और सेंसुअस तरीके से कहि।
नेहा ने एक बार उसकी आँखों मे देखा...वो मुस्कुरा रहा था..और फिर से आँखे नीची कर ली।
प्रतापसिंग:- हा बहु सच कह रहा हु...सुबह जब तुम्हे देखा मैं बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गया था...और जब ज्यादा उत्तेजित होता हूं उतना ज्यादा निकलता है...
नेहा:- बाबूजी प्लीज ऐसी बाते मत कीजिये...नेहा वहां से बच के निकलना चाहती थी पर पता नही क्यों निकल ही नही पा रही थी।
प्रतापसिंग:- सॉरी बेटी...पर मैं करता भी क्या...मेरे पास दुआरा रास्ता नही था उसे शांत करने का...पूरी तरह अकड़ गया था...तुमने भी तो देखा था न...
नेहा:- बाबूजी....
प्रतापसिंग:- नेहा सच कहूँ... सिर्फ तभी नही दिनभर से वही हाल है मेरा...
जैसे ही प्रतापसिंग ने ऐसे कहा...नेहा की नजर उसके लंड की और चली गयी...प्रतापसिंग ने वो देख लिया।
प्रतापसिंग:- देखा बहु अभी भी वही हाल है....
नेहा को समझ आ गया कि प्रतापसिंग ने उसे उसके लंड की और देखते हुए देख लिया है वो...
नेहा:- बाबूजी मुझे कुछ काम है मैं जाती ह...बोल के अपने कमरे में भाग गई।
प्रतापसिंग शैतानी हसी हस्ते हुए उसे देखता रहा...
"ह्म्म्म सुरवात तो अछि रही...अगर उसे कुछ बुरा लगता तो मेरी इतनी सारी बाते ऐसे सुनते हुए नही खड़ी रहती चलो अच्छा है धीरे धीरे काम बन जायेगा...बस मुझे कुछ गड़बड़ नही करनी है।"

नेहा अपने कमरे में आयी और दरवाजा बंद करके धड़ाम से बेड पर गिर गयी...
"" छि बाबूजी कितने गंदे है उनको मैं कितना शरीफ समझती थी....लेकिन उनकी क्या गलती है मैं भी तो वही खड़ी उनकी बाते सुन रही थी....और बाते सुन के कुछ कुछ हो भी रहा था...लेकिन उनकी हिम्मत तो देखो...अरे क्यों हिम्मत नही बढ़ेगी जब उन्होंने देखा कि बहु कैसे उनका वीर्य सूंघ रही है चाट रही है तो उनके मन मे ये सब आना लाजमी है...और इतने तजुर्बेकार इंसान है उन्होंने मुझे ऐसे करते देख पहचान लिया होगा की मैं एक नंबर की चुदक्कड़ हु...लेकिन हु तो बहु ही ना....ह्म्म्म मुझे लगता है बाबूजी बहोत प्यासे है इसलिए मुझे आज नंगा देख के उनके सोये अरमान जग गए है...हा माजी तो कुछ करने देती नही होगी...तो बेचारे क्या करंगे? लेकिन क्या वो मुझ पे ट्राय कर रहे थे?? नही नही...बस अपना मन हल्का कर रहे थे...हे भगवान ये सब मेरे साथ ही क्यों होता है?? ये एक्सीडेंट मेरे ही नसीब में लिखे है??"
नेहा अपने पुराने दिनों के बारे में सोचने लगी...लगबग 12 साल पहले की बाते उसे याद आने लगी।
"एक वो दिन था जब मैं सेक्स की दुनिया से इंट्रोड्यूस हुई थी....मुझे याद है....जब मैं बीमार थी और माँ उस रात मेरे साथ सो रही थी....और जब मैं मेरी नींद खुली तो देखा कि माँ के ऊपर पापा चढ़े हुए थे....वो उनकी चुत में अपना लंबा मोटा लंड डाल के खप खप चोद रहे थे....उनको ऐसे देख के मेरी चुत भी कितनी गीली हो गयी थी उफ़्फ़फ़फ़फ़

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पापा और मम्मी की चुदाई कितना देर तक चली और मेरी हालत खराब हो गयी थी
मुझे आज भी याद है मम्मी कितने मजे से चुदवा रही थी पापा से उफ़्फ़फ़फ़फ़

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वो पहली बार था जब मैंने रियल लंड देखा था पहली बार .....उस वक़्त भी मैन न जाने कितनी बार पापा के लंड को सोच के चुत में उंगली की थी...और तभी से मुझे चुदाई का चश्का लगा था.. लेकिन तब मैं नासमझ थी...और अब मैं शादीशुदा हु...राजीव कितना प्यार करता है मुझसे...अब मैं पुरानी गलतिया नही दोहराउंगी..."" नेहा खुद को मजबूत करने में लगी थी और उधर प्रतापसिंग उसे कमजोर करके अपने लंड की निचे कैसे लाये इसबारे में सोच रहा था।
थोड़ी देर में सब एकसाथ बैठ के खाना खा रहे थे।
प्रमिला:- अरे वाह बहु आज तो कहना बहोत अच्छा बना है...वैसे राजीव का फ़ोन नही आया आज...
नेहा:- आया था मा जी वो सुबह 4 बजे ही आया था...ये सब गड़बड़ ही चलता रहेगा अब ...उनका और हमारा टाइमिंग अलग ही चलता है न...
प्रतापसिंग:- बहु तू दुखी मत हो...हम है ना यहां....मैं तुम्हरा अछेसे खयाल रखूंगा...प्रतापसिंग उसकी आँखों मे देखते हुए उसके हात पे अपना हाथ रख के हल्के से दबाया...तुम्हे राजीव की कमी बिल्कुल महसूस नही होने दूंगा...क्यों प्रमिला सच कहा ना?
प्रमिला:- हा बिल्कुल...ये भी भला कोई कहने की बात है?
प्रतापसिंग:- देखा बहु तुम्हारी माँ जी भी कह रही है..
नेहा ने अपना हाथ खिंचा... उसे सब समझ आ रहा था...
प्रतापसिंग:- बहु खाने के बाद थोड़ा मलाई वाला दूध पिला देना...आज पीने का बहोत मन कर रहा है...वो उसकी आँखों मे और फिर उसकी चुचियो को देलहते हुए कहा....वो आज थोड़ी कमजोरी महसूस हो रही है....नेहा की आखों में देखते हुए...बहु तुम भी पिया करो मलाई वाला दूध...देख रहा हु तुम्हारे चेहरे का नूर कम हो रहा है...शैतानी हसी...और तुम्हे तो पसंद भी है. है ना? सुबह देखा मैन तुम कैसे मलाई चाट रही थी...
नेह शर्म से पानी पानी हो रही थी।
नेहा:- जी बाबूजी...मन मे...उफ्फ ये बाबूजी भी ना यार कहा फस गयी मैं...

सब ने खाना खाया और नेहा प्रतापसिंग के लिए दूध बनाने लगी।
प्रतापसिंग ने देखा प्रमिला ऊपर जा रही है तो वो किचन में नेहा के पास चला गया...
प्रतापसिंग:- बेटी हो गया दूध गरम? उसकी चुचियो को फेखते हुए पूछा।
नेहा समझ गयी कि वो उसकी चुचियो को देख रहा है।
नेहा:- हा बाबूजी आप बैठिये अभी लाती हु...बस थोड़ा ठंडा कर लेती हूं...
प्रतापसिंग:- बहु गरम दूध का अपना ही मजा है...पिलाओगी गरम दूध?
नेहा सब समझ के अनजान बनने की कोशिश कर रही थी।
नेहा:- जैसा आप पीना चाहो...मैं अभी ग्लास में निकाल देती हूं...
प्रतापसिंग:- निकालो जल्दी बहु...अब सब्र नही हो रहा...
नेहा:- ये लीजिये बाबूजी...नेहा ने ग्लास उसकी चेहरे की तरफ उठाते हुए उसे दिया...
प्रतापसिंग:- अरे तुम नही पीओगी??
नेहा:- नही बाबूजी मुझे नही पीना..
प्रतापसिंग:- अरे ऐसे कैसे...लो तुम भी लो..उसने दूसरे ग्लास में दूध दिया ...बहु मलाई नही डालोगी? कहो तो मैं डाल दु?
ऐसा बोल के उसने वो किया जो नेहा बिल्कुल भी एक्सपेक्ट नही कर रही थी...उसने अपने लंड पर से हाथ घुमाया...

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.नेहा एकदम से शर्मा गयी।
नेहा:- नही बाबूजी नही चाहिए...
प्रतापसिंग:- सुबह तो बड़ी चाव से चाट रही थी...
नेहा को कुछ समझ नही आ रहा था...जिस बात पे उसे गुसा आना चाहिए उस बात पे वो शर्मा रही थी। वो जो भी बोल रही थी उसपे ही उल्टा पड़ रहा था और जो वो आगे बोलने वाली थी उससे तो सब कुछ उलटने वाला था...
नेहा:- प्लीज बाबूजी ऐसी बाते मत कीजिये...और खुद की भावनाओ को काबू में रखिये...
प्रतापसिंग:- बेटी कैसे काबू में रखु??? जब से तुम्हे उस रूप में देखा है तब से खुद से काबू छूट गया है...देखो बहु ये सुबह से ऐसा ही है....अब तो दर्द करने लगा है....अपना लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ के नेहा को दिखाते हुए कहता है।
नेहा:- बाबूजी मैं बहु हु आपकी आपको शोभा नहींदेत मुझसे ऐसे बात करना...ऐसी हरकतें करना... नेहा की बातों में गुस्सा कम और शर्म ज्यादा थी।
प्रताओसिंग:- जनता हु बहु पर ये हालात भी तुम्हारी वजह से हुई है मेरी...तुम्हारा ठीक है तुम्हे कुछ हो भी रहा होगा तो दिखेगा नही...लेकिन मेरा तो दिखेगा न...नेहा की नजर कभी उसके चेहरे पे जाती तो कभी उसके लंड पे।
"क्या हुआ बहु क्या देख रही हो? सुबह भी बड़े गौर से देख रही थी तुम"
नेहा:- छि बाबूजी...आप कितने गंदे हो...ये बोल के वो वहां से जाना चाहती थी और पता नही क्यों उसके पैर वहां से निकल ही नही पा रहे थे।
प्रतापसिंग बहोत गौर से उसकी हावभाव पे नजर रखे हुए था...उसे समझ आ रहा था कि नेहा को गुस्सा आ रहा है और शर्म भी मतलब वो अभी थोड़ी कंफ्यूज सी है और उसे उसी कंफ्यूज़न का फायदा उठाना है।
प्रतापसिंग:- अरे बेटी क्या करूँ तुम ही बताओ...और तुम्हारे बाबूजी गंदे नही बस हालात के मारे है...कोई बात नही बहु चलो मैं जाता हूं सोने...और ऐसा बोल के वो नेहा को वैसे ही छोड़ के चला गया।
नेहा उसे जाते देख हैरान सी थी.....और खुद पे भी हैरान थी की कैसे वो उसके लंड को उसके सामने ही देख रही थी। जाने अनजाने में नेहा भी आपमे ससुर की और आकर्षित हो रही थी।
Mast story hai. Please update soon.
 
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Hello everyone.

We are Happy to present to you The annual story contest of XForum


"The Ultimate Story Contest" (USC).

As you all know, in previous week we announced USC and also opened Rules and Queries thread after some time. Before all this, chit-chat thread already opened in Hindi section.

Well, Just want to inform that it is a Short story contest, in this you can post post story under any prefix. with minimum 700 words and maximum 7000 words . That is why, i want to invite you so that you can portray your thoughts using your words into a story which whole xforum would watch. This is a great step for you and for your stories cause USC's stories are read by every reader of Xforum. You are one of the best writers of Xforum, and your story is also going very well. That is why We whole heatedly request you to write a short story For USC. We know that you do not have time to spare but even after that we also know that you are capable of doing everything and bound to no limits.

And the readers who does not want to write they can also participate for the "Best Readers Award" .. You just have to give your reviews on the Posted stories in USC

"Winning Writer's will be awarded with Cash prizes and another awards "and along with that they get a chance to sticky their thread in their section so their thread remains on the top. That is why This is a fantastic chance for you all to make a great image on the mind of all reader and stretch your reach to the mark. This is a golden chance for all of you to portrait your thoughts into words to show us here in USC. So, bring it on and show us all your ideas, show it to the world.

Entry thread will be opened on 7th February, meaning you can start submission of your stories from 7th of feb and that will be opened till 25th of feb. During this you can post your story, so it is better for you to start writing your story in the given time.

And one more thing! Story is to be posted in one post only, cause this is a short story contest that means we can only hope for short stories. So you are not permitted to post your story in many post/parts. If you have any query regarding this, you can contact any staff member.



To chat or ask any doubt on a story, Use this thread — Chit Chat Thread

To Give review on USC's stories, Use this thread — Review Thread

To Chit Chat regarding the contest, Use this thread— Rules & Queries Thread

To post your story, use this thread — Entry Thread

Prizes
Position Benifits
Winner 1500 Rupees + Award + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 500 Rupees + Award + 2500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) + 2 Months Prime Membership
Best Supporting Reader Award + 1000 Likes+ 2 Months Prime Membership
Members reporting CnP Stories with Valid Proof 200 Likes for each report



Regards :- XForum Staff
 
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