parkas
Well-Known Member
- 33,885
- 71,599
- 303
मस्तभाग एक
सुबह के वक्त में दिल्ली के कनाट प्लेस में मौजूद एक बंगले के अन्दर इस वक्त नम्रता सुबह का नाश्ता तैयार कर रही थी और उनके साथ उनकी बहू रिया जिसकी शादी कुछ ही महीनों पहले हुई थी और जैसा कि पहले ही बता चुका हूं कि वह एक मिडिल क्लास परिवार से आती है तो उसके अन्दर बड़े घर की लड़कियों की तरह कोई घमण्ड नहीं था ।वह हर दिन अपनी सास के साथ मिलकर किचन का पूरा काम करती थी और बाकि के टाइम वह अपनी तैयारियां करती थी। अब वैसे भी घर मे सभी काम करने के लिए लिए मेड थी लेकिन नम्रता के बनाये गए नियम के अनुसार सुबह का नाश्ता वह खुद तैयार करती थी। आज भी वही हो रहा था। सभी कुछ तैयार कर लेने के बाद वह रिया से बोली
नम्रता - रिया बेटा ऐसा करो कि जाकर अपनी लाडली काजल को उठा दो वरना आज वह पहले दिन ही कालेज के लेट हो जाएगी ।
रिया को हर दिन सुबह का यही काम करना होता था लेकिन आज जब वह किचन से बाहर जाने लगी तो देखा कि आज रिया उठ कर तैयार होकर चारो बहनें एक साथ नीचे आ रही थी और यह देख कर रिया के फेस पर एक मुस्कान तैर गई और फिर वह मूढ़ कर वह अपनी सास से बोली
रिया- माँ अब उनको जगाने की जरूरत नही है क्यूंकि वह और बाकि के सभी बहने एक साथ आज आ रही है लगता है कि आज कोई खास बात है जो यह लोग आज एक साथ नीचे आ गयी है।
रिया की बात सुनकर नम्रता के दिमाग मे एक बात तुरन्त याद आती है और वह तुरन्त अपना फोन निकाल अपनी सेक्रेटरी को फोन करके कुछ बोली और फिर वह मूढ़ कर रिया से बोलती है
नम्रता - अरे अच्छा हुआ बेटा जो इनकी वजह से मुझे याद आ गयी वरना मैं तो भूल ही गयी थी कि आज रोहित का अठारहवा जन्मदिन है वरना आज वह मेरी जान ले लेता ।।
रिया जब यह सुनती है तो वह चौक जाती है और फिर बहुत धीमी आवाज में बोलती है
रिया - मुझे तो किसी ने बताया ही नही कि आज देवर जी का जन्मदिन है मैंने तो कोई गिफ्ट भी नही लिया है।
अभी उसकी बातों का नम्रता कोई जवाब देती उसके पहले ही राजन किचन में आते हुए बोलता है
राजन -रिया तुमको चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है मैंने हम दोनों की तरफ से आज उसके लिए उसकी पसन्द की स्पोर्ट्स कार ली है और यह आज हम दोनों उसको देंगे।।
इधर मैं अपने जन्मदिन को कभी भी याद नही रखता था अक्सर मुझे मेरी बहनें ही याद दिलाया करती थी और उसमें भी सबसे पहले भी श्रुति दीदी ही बधाई देती है और उन्होंने मुझे बचपन से ही एक माँ की तरह प्यार दिया है । सभी बहनो में एक वही थी जो कि मेरी हर गलती को सभी से छुपा लेती थी । आज भी जब मैं अपना सुबह का एक्सरसाइज करके जब घर आया तो मैं पूरी तरह से पसीने में भिगा हुआ था लेकिन इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए श्रुति दीदी तुरन्त मेरे गले लग गई और मेरे गालों को चूमते हुए बोली
श्रुति दीदी - हैप्पी बर्थडे बाबू जन्मदिन की ढेर सारी सुभकामनाये ।
इतना बोलकर उन्होंने एक बॉक्स मेरी तरफ बढ़ा दिया जो कि मेरे जन्मदिन का तोहफा था और हर साल की तरह इस बार भी सबसे पहले वही बोली इसके बाद रेखा दीदी, प्रिया दीदी और सबसे लास्ट में काजल दीदी ने गिफ्ट दिया और मुझे बधाई दी। जिसमे रेखा दीदी ने एक आईफोन 14pro दिया था।श्रुति दीदी ने एक स्पोर्ट्स बाइक गिफ्ट किया था और काजल दीदी ने एक अच्छी सी स्मार्टवॉच गिफ्ट की थी और सबसे लास्ट में काजल दीदी ने अपनी पॉकेट मनी से बचा कर मेरे लिए एक शानदार ड्रेस दी थी शाम की पार्टी के लिए ।इसके बाद बड़े भैया ने भाभी के साथ मिलकर स्पोर्ट्स कार गिफ्ट की ।आज से पहले मुझे ना तो मोबाइल चलाने की छूट थी और न ही किसी तरह की ड्राइविंग करने की यह सब मुझे आज परिवार वालो की तरफ से गिफ्ट मिला । सबसे लास्ट में मम्मी और पापा खड़े थे तो मैं उनके पास गया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और तब मम्मी और दोनों ने एक साथ आशीर्वाद दिया और फिर माँ ने अपने पास से एक नो लिमिट कार्ड दिया जो कि सभी भाई बहनों को उनके 18 वे जन्मदिन पर पापा की तरफ से दिया जाता था ।बस इस बार नोलिमिट कार्ड था और हर बार की लिमिट फिक्स होती थी।।।
इसके बाद सभी लोग एक साथ नाश्ता करने के लिए मेरा इन्तजार करने लगे क्यूंकि मैं फ्रेश होने के लिए अपने रूम में चला गया था। कुछ समय बाद मैं कालेज जाने के लिए तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर आया जंहा पर सभी मेरा ही इन्तजार कर रहे थे।हर दिन की तरह आज भी श्रुति दीदी और रेखा दीदी मेरे दोनों साइड बैठ गयी और अपने प्लेट से खाना खिलाने लगी यह दोनों लोगो की बहुत पुरानी आदत थी जब तक मुझे ना खिला ले तब तक इनको खाना अच्छा नही लगता था ।एक दो बार खाने के बाद मैंने अपनी प्लेट से निकाल कर खिलाया तब जाकर उन दोनों लोगो ने अपना खाना सुरु किया।
नाश्ता करने के बाद सभी लोग अपने अपने काम और ऑफिस निकल गए। इधर मेरे नई कार जो कि दो सीटर थी ।जिसपर मेरे साथ काजल दीदी ने अपना कब्जा बना लिया और तब मैं और काजल दीदी दोनों ही कालेज के निकल लिए। अब काजल दीदी का तो यह दूसरा साल था पर मेरा तो पहला साल था और कॉलेज के पहला दिन तो मैं थोड़ा नर्वस भी था तो काजल दीदी मेरी तरफ देखते हुए बोली
काजल दीदी - क्या हुआ हीरो पहले दिन डर लग रहा है कालेज जाने में कि कोई रैंगिग ना करने लगे तुम्हारे साथ।
अब यह बात सच थी तो भला मैं झूठ क्यों बोलता वह भी अपनी ही बहन से तो मैंने हा में सर हिला दिया तो वह अपनी फेस पर एक रहस्यमयी मुस्कान लाती हुई बोली
काजल दीदी - मैं तुम्हारी हेल्प तो कर सकती हूं लेकिन इसमें मेरा क्या फायदा होगा।।
काजल दीदी की बात सुनकर मैं हैरान होकर उनको देखने लगा फिर कुछ सोच कर बोला
मैं - दीदी आज साम को मेरी तरफ से आपको शॉपिंग फ्री है बस आप मेरी हेल्प कर दो।।
मेरी बात सुनकर काजल दीदी बुरा सा मुह बनाते हुए बोली
काजल दीदी - देख मैं तेरी हेल्प कर दूंगी पर तुझे वादा करना होगा कि जो मैं बोलूंगी तुझे करना होगा मेरी बात से मुकर नही सकते हो तुम।।
मुझे अपनी बहन पर पूरा यकीन था इसलिए बिना सोचे मैंने हा कर दिया और यही मेरी पूरी लाइफ की चेंजिग पॉइंट साबित हुई ।।