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Incest पहाडी मौसम

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सूरज राजा साहब की बीवी को लेकर एक नए सफर की ओर निकल चुका था,,, राजा साहब 10 12 दिनों के लिए कहीं गया हुआ था जिसका पूरा फायदा उठाते हुए सूरज उसकी बीवी के साथ पहाड़ी पर झरने की तरफ जा रहा था,,,,, आगे आगे सूरज था और पीछे-पीछे राजा साहब की बीवी चल रही थी,,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि पहली बार हुआ इस तरह के कदम उठा रही थी किसी अनजान लड़के के साथ ऐसी जगह पर जा रही थी जहां पर जाना उसका ख्वाब था उसकी आंखों के सामने ही वह ख्वाब होते हुए भी वह कभी पूरा नहीं कर पाई थी इसलिए अपने पति के गैरहाजरी में वह अपना ख्वाब पूरा कर लेना चाहती थी,,,, फिर भी मन में घबराहट थी। क्योंकि अगर किसी ने उसे यहां देख लिया और राजा साहब को बता दिया तो गजब हो जाएगा वैसे ही राजा साहब अपनी बीवी से चिढ़ता ही रहता था,,,, घनी झाड़ियां को दोनों हाथों से दूर करते हुए और रास्ता बनाते हुए सूरज राजा साहब की बीवी की तरफ देख भी नहीं बोला,,,,।

आपको डर तो नहीं लग रहा है ना रानी साहिबा,,,।

नहीं,,,, किस बात का डर मुझे डर नहीं लग रहा है,,, (वैसे तो वह अंदर ही अंदर डरी हुई थी लेकिन फिर भी सूरज के सामने यह जताना नहीं चाहती थी इसलिए ना डरने का नाटक करते हुए वह बोली रानी साहिबा के जवाब से सूरज खुश होता हुआ बोला)

यह हुई ना बात रानी साहिबा इंसान को कभी डरना नहीं चाहिए डरने से ही इंसान बहुत से अनुभव को महसूस नहीं कर पाता और जिंदगी अधूरी रह जाती है जैसा कि अब तक तुम्हारी थी तुम थोड़ी सी हिम्मत दिखाई तो शायद अपने आप ही पहाड़ी तक पहुंच जाती अपने तरीके से जिंदगी जीती।




तुम जैसा सोच रहे हो जिंदगी इतनी सबके लिए सही नहीं होती,,,,,। जिंदगी जीने का सबका अलग-अलग तरीका होता है और मैं इस गांव की लड़की नहीं बहू हूं इसलिए मर्यादा में रहना पड़ता है और राजा साहब की बीवी हूं इसलिए तो और संभाल कर रहना पड़ता है।

हां यह बात तो है लेकिन यह भी तो है कि आप अगर राजा साहब को अपने मन की इच्छा बताती तो वह आपको जरूर पहाड़ी तक ले जाते जहां कहती वहां ले जाते,,,,।
(सूरज की बातों पर सुनकर पल भर के लिए रानी साहिबा के मन में आया कि वह सब कुछ सूरज से बता दे कि वह अपनी जिंदगी से खुश नहीं है फिर किसी तरह से अपनी भावनाओं पर काबू करके वह अपने मन की बात को मन में ही लिए रह गई और बात को घुमाते हुए बोली।)

बात तो सही है लेकिन,, राजा साहब थोड़े गुस्से वाले इंसान है इसलिए मैंने कभी कहीं नहीं है और वैसे भी जरूरत भी नहीं पड़ी वह तो आज राजा साहब नहीं है तो ,,,,,,,।

हमममम सोच रही हो थोड़ा मजा ले लिया जाए,,,,।

(सूरज की बात सुनकर वह कुछ बोली नहीं बस हंसने लगी तभी चलते-चलते सूरज एकदम से दोनों हाथ फैला कर रानी साहिबा को रुकने का इशारा किया,,,,, रानी साहिबा की अपने आप को रोकते-रोकते एकदम से उसकी पीठ से सट गई और तुरंत अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

क्या हो गया,,,!

वह देखो,,,(हाथ के इशारे से थोड़ी दूरी पर दिखाते हुए)

बाप रे इतना लंबा और मोटा सांप,,,

हां,,,, इस जंगल जैसी जगह पर न जाने कितने ही ऐसे सांप बिच्छू घूम रहे होंगे इसलिए थोड़ा संभल कर चलना ऐसा ना हो कि कोई अनहोनी हो जाए और लेने के देने पड़ जाए,,,।

तुम तो मुझे डरा रहे हो,,,,।

डरा नहीं रहा हूं बस आगाह कर रहा हूं,,,, संभाल कर चलोगी तो सुरक्षित रहोगी ‌।
(उस बड़े से सांप को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी,,,,, उसके जाते ही सूरज फिर से आगे की तरफ बढ़ गया और उसके पीछे-पीछे रानी साहिबा भी चलने लगी अब रानी साहिबा की नजर नीचे जमीन पर इधर-उधर घूम रही थी,,,,, वह दोनों काफी दूर निकल आए थे यहां का नजारा भी खूब गजब का था ऐसा लग रहा था इस जगह पर कोई आता ही नहीं था चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़,,,, कोई ऐसा फल बाकी नहीं था जो यहां पर ना हो चीकू अमरूद अंगूर की लताएं,,, पपाया,,,,, देख कर ही रानी साहिबा के मुंह में पानी आ रहा था। चलते चलते सूरज दो अमरुद तोड़ लिया था और एक अमरूद रानी साहिबा को थमा दिया था रानी साहिबा भी बेझिझक हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के हाथ से अमरुद ले ली और उसे खाने लगी,, अमरूद लेते समय उंगलियों का स्पर्श सूरज को रोमांचित कर गया था,,,, दोनों अमरूद खाते-खाते आगे बढ़ रहे थे बीच-बीच में छोटे-छोटे तालाब जो कि बड़े खूबसूरत दिखाई दे रहे थे उन तालाबों को देखकर रानी साहिबा बहुत खुश हो रही थी,,,,,, रानी साहिबा के चेहरे पर खुशी देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि एक औरत को कैसे प्रसन्न किया जाता है और एक औरत को कैसे प्राप्त किया जाता है धीरे-धीरे उसे प्रसन्न करके खुश करके औरत के मन में अपने लिए जगह बनाना यह सूरज को अच्छी तरह से आता था। और वैसे भी इस जंगल जैसी जगह में एक खूबसूरत औरत का साथ पाकर सूरज अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था उसे बड़ा ही अच्छा लग रहा था,,,,, मन ही मन उसे भोगने की लालसा और भी ज्यादा प्रज्वलित होती जा रही थी,,, सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि रानी साहिबा जब पूरे कपड़े उतार कर नंगी होती होगी तो राजा साहब उसे देखकर ही मस्त हो जाता होगा रोज उसकी लेता होगा कितना खुश किस्मत है राजा साहब,,, लेकिन इस बात से अनजान था की रानी साहिबा की चुदाई उसके पिताजी भी कर चुके थे चोरी-छिपे रात के अंधेरे का फायदा उठाकर रानी साहिबा के कमरे में घुस गए थे और बिना किसी शोर शारदा के बिना कुछ बोले रहनी साहिब की टांगें खोलकर उसके गुलाबी पर में अपना लोहे जैसा लंड उतार कर रगड़ कर चुदाई कीए थे।

तुम पहले भी इधर आ चुके हो क्या,,,?

नहीं तो मैं पहली बार इधर आ रहा हूं मैं जानता नहीं था कि यहां इतनी खूबसूरत जगह है वरना इधर जरूर आता,,,,,, लेकिन ऐसी जगह पर जंगली जानवरों का डर रहता है,,,,, इस जगह से मैं बिल्कुल अनजान हूं इसलिए मन में थोड़ा डर भी रहता है कि सामने कौन सा जानवर मिल जाएगा।

तुम फिर से मुझे डरा रहे हो,,,,।

डरा नहीं रहा हूं मैं सिर्फ बता रहा हूं किसी भी अनजान जगह पर जाते समय पूरी तरह से चौकन्ना रहना चाहिए,,,,।

और यहां अगर कोई जंगली जानवर आ गया तो मैं तो गई समझ लो,,,,।

ऐसे कैसे रह नहीं जाएगा मैं हूं ना मेरे रहते हुए कोई जानवर तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता,,,, जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं निश्चिंत रहो,,,,,।

ऊमममम कहे तो ऐसे रहे हो जैसे बहुत हिम्मत वाले हो,,,,।

खाने से नहीं होता रानी साहिबा दिखाने से होता है,,,, बहुत लोग बातों के जादूगर होते हैं लेकिन सही समय पर दुम दबाकर भाग जाते हैं मैं उनमें से नहीं हूं, मौका आने पर मैं साबित कर सकता हूं,,,,,।

चलो यह तो वक्त ही बताएगा,,,,।

(रानी साहिबा को सूरज से बात करने में बड़ा मजा आ रहा था पहली बार कोई ऐसा लड़का मिला था जिससे बात करके रानी साहिबा को खुशी मिल रही थी और न जाने क्यों सूरज पर हुआ इतना यकीन कर पा रही थी उसे अंदर ही अंदर डर तो लग रहा था लेकिन सूरज की मौजूदगी में उसे पूरा विश्वास था कि सूरज उसकी रक्षा कर सकेगा,,,,,, एक जगह पर आम का पेड़ देखकर रानी साइबर रुक गई आम का पेड़ बहुत ही विशाल था और उसे पर इतने आम लगे हुए थे कि रानी साहिबा देखती रहेगी सूरज भी हैरानी से उसे पेड़ पर देख रहा था क्योंकि एक ही पेड़ में इतने सारे आम उसने आज तक नहीं देखा था इसलिए वह रानी साहिबा के पास खड़ा होकर बोला।)

गजब का पेड़ है रानी साहिबा पुर गांव में ऐसा पेड़ मैंने कभी नहीं देखा एक ही पेड़ में इतने सारे आम लगे हैं देखो तो सही,,,, ऐसा लग रहा है कि पूरे बगीचे का हम एक ही पेड़ में लगा हो,,,।

तुम सच कह रहे हो सूरज मैं भी यही देख रही हूं और हम भी देखो कितने बड़े-बड़े हैं,,, मेरा तो मन इसे तोड़ने को कर रहा है,,,,, रुको मैं अभी तोड़ती हूं,,,(ऐसा कहते हुए रानी साहिबा ढेला लेकर पेड़ पर मारने लगी ताकि आम टूट सके लेकिन उसके इस तरह से ढेला करने से आम टूट नहीं रहा था यह देखकर सूरज मैन ही मन मुस्कुरा रहा था क्योंकि रानी साहिबा की यह सादगी सूरज को अंदर तक मदहोश कर गई थी,,, ढेला उठाने के लिए नीचे झुकना और झुकाने की वजह से उसके गोलाकार नितंबों का आकार इस कदर लाजवाब ढंग से बड़ा हो जाता था कि सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पता था उसका मन करता था कि पीछे से जाकर उसे पकड़ ले लेकिन किसी तरह से अपने आप पर काबू किए हुए था और ढीला मरते समय उसके ब्लाउस में हो रही हड़कंप को देखकर सूरज अपने पजामे में होने वाली हरकत को रोक नहीं पा रहा था,,,, रानी साहिबा बार-बार प्रयास कर रही थी लेकिन इसका प्रयास सफल नहीं हो रहा था और सूरज दोनों हाथ बांधे उसे ही देख रहा था सूरज के मन में खुराफात चल रहा था,,,, बहुत प्रयास करने पर भी जब रानी साहिबा से एक भी आम नहीं टूटा तो वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

ऐसे ढेला मारने से आम टूटने वाला नहीं है,,,,।

फिर कैसे टूटेगा यह आम मेरे मुंह में पानी आ रहा है,,,,,,(बार-बार प्रयास करने की वजह से वह थक गई थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी गहरी गहरी सांस लेने की वजह से उसके ब्लाउज का आकार बढ़ रहा था घट रहा था यह सब देखकर सूरज मदहोश हुआ जा रहा था,,,, वह मुस्कुराते हुए बोला)

रुको मैं बताता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ यही सूरज रानी साहिबा के करीब जाने लगा और वह कुछ समझ पाती ईससे पहले ही,,, सूरज पीछे से दोनों हाथों में उसकी मोटी मोटी जांघों को जकड़ कर उसे उठाने लगा यह देखकर वह घबराते हुए बोली।)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो,,,, में गिर जाऊंगी,,,।

नामुमकिन रानी साहिबा,,,, आपको मैं गिरने नहीं दूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज रानी साहिबा को उठा लिया और वह एकदम आम के करीब पहुंच गई यह देखकर सूरज बोला)




अब तोड़ो जितना तोड़ना है,,,,(कुछ पल के लिए रानी साहिबा घबराई हुई थी लेकिन जब उसने देखी कि सूरज बड़े आराम से उसे उठाया हुआ है तब वह थोड़ा निश्चित होने लगी फिर धीरे से अपना हाथ ऊपर करके बड़े-बड़े आम को तोड़ने लगी उसे अच्छा लग रहा था और वह निश्चित हो गई थी उसे यकीन हो गया था कि सूरज उसे गिराएगा नहीं,,, कम से कम आठ दस अाम रानी साहिबा ने तोड़कर उसे नीचे गिरा दिया,,,, और बोली।)

बस अब मुझे नीचे उतारो,,,,।

अरे नहीं रानी साहिबा और तोड़ना है तो तोड़ लो,,,।

नहीं नहीं बस हो गया,,,,।

देख रही हो रानी साहिबा आप आम तोड़ते तोड़ते थक गई लेकिन मैं तुम्हें उठाए हुए नहीं था था अगर मुझे इसी तरह से शाम तक भी घूमना रहे तो भी में नहीं थकुंगा,,,,।

नहीं नहीं मैं थक गई हूं मुझे नीचे उतारो,,,,,(रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली और मन ही मन सूरज की हिम्मत का दाद दे रही थी,,,,, सूरज की मुस्कुराना इतनी खूबसूरत औरत को उठाए हुए वह अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था लेकिन उसके मन में शरारत सूझ रही थी एक खूबसूरत औरत के सामने और उत्तेजित हो चुका था पजामे में उसका लंड खड़ा होकर तंबू की शक्ल धारण कर लिया था,,,, वह रानी साहिबा को उतरते समय अपने बदन से इतना ज्यादा सटा के उसे नीचे उतर रहा था कि जैसे ही उसकी गोलाकार गांड उसके पजामी के अग्रभाग पर पहुंची तो तुरंत ही उसके लंड की रगड़ रानी साहिबा की गांड पर होने लगा भले हुए साड़ी पहनी हुई थी लेकिन साड़ी पहनी होने के बावजूद भी तंबू की शक्ल में सूरज का लंड एकदम बराबर रानी साहिबा की गांड में दस्त हुआ और रगड़ हुआ महसूस हो रहा था और यह रगड़ यह चुभन रानी साहिबा महसूस करते ही दंग रह गई आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,, क्योंकि उसे साफ महसूस हो रहा था कि सूरज का लंड साड़ी पहनी होने के बावजूद भी उसकी गांड की दरार में धंसता हुआ महसूस हो रहा था,,,, रानी साहिबा इतनी नादान नहीं थी वह अच्छी तरह से समझती थी कि यह चुभन किस चीज की है क्योंकि राजा साहिब में उसे हर एक आसन में चुदाई कर चुका था उसे अच्छी तरह से वाकिफ कर चुका था कि मर्द औरत के बीच किस तरह का रिश्ता होता है इसलिए रानी साहिबा सूरज के तंबू की चुभन को महसूस करके अनजाने में ही गदगद हुए जा रही थी,,,, सूरज भी कम शैतान नहीं था वह रानी साहिबा को नीचे उतारते हुए जैसे ही उसकी गांड उसके लंड के करीब पहुंची थी वह कुछ पल के लिए इस अवस्था में रानी साहिबा को उठाया नहीं गया था ताकि रानी साहिबा उसके लंड की चुभन को अच्छी तरह से महसूस कर सकें और यह एहसास कर सके की सूरज क्या चाहता है।

सूरज मुस्कुराते हुए रानी साहिबा को नीचे जमीन पर उतार चुका था,,,, और तुरंत नीचे झुक कर आम को बिनने लगा था उसके पास शाम को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं था इसलिए तीन आम से ज्यादा उसके दोनों हथेलियों में नहीं आ रहा था। रानी साहिबा शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थे सूरज समझ गया था कि उसका काम बन गया है,,,,, और उसे इस बात का एहसास भी हो रहा था की रानी साहिबा तिरछी नजरों से उसके पजामे की तरफ देख रही थी जो कि अभी भी तंबू बना हुआ था,,,,, सूरज को जैसे ही एहसास हुआ कि रानी साहिबा उसके लंड की तरफ देख रही है और उसके पजामे में बने तंबू को देख चुकी है तो वह अंदर ही अंदर और भी ज्यादा मत होने लगा लेकिन वह आसानी से ज्यादा शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए वह तुरंत आम के पेड़ की जड़ों पर बैठ गया और बोला,,,,।




और कुछ देर यही बैठकर खा लेते हैं,,,, मुझे लग रहा है कि आम मीठे हैं,,,,,।(इतना कहकर वह दो आम को वही नीचे रखकर एक आम को खाना शुरू कर दिया जैसे ही उसने आम को खाना शुरू किया उसे एहसास हो गया कि आम बहुत ही स्वादिष्ट और मीठे थे वह एकदम से रानी साहिबा से बोला,,,)

वह रानी साहिबा मुझे लगता नहीं था कि आम इतने स्वादिष्ट होंगे लेकिन यह सब आपकी करामात है,,,।

मेरी करामात वो कैसे,,,?

अपने अपने हाथों से तोड़ी होना इसलिए आम और ज्यादा स्वादिष्ट हो गए हैं।
(इतना सुनते ही रानी साहिबा शर्मा गई,,,,, और बिना कुछ बोले भाभी ठीक उसके सामने ही बड़े से पत्थर पर बैठ गई और आम खाने लगी लेकिन आम खाते हुए उसके मन में ढेर सारी बातें चल रही थी सूरज के लंड की रगड़ को अपनी गांड पर महसूस करके वह पूरी तरह से अनजाने में ही गदगद हो गई थी उसे एहसास हो गया था कि सूरज के पजामे में कोई मामूली हथियार नहीं था,,,,, लेकिन वह इस बात को नहीं समझ पा रही थी कि वह खड़ा क्यों हो गया था क्योंकि एक औरत होने के नाते उसे मर्दों की फितरत के बारे में अच्छी तरह से मालूम था कि मर्द का लंड कब खड़ा होता हैं,,, इसलिए रानी सब अपने मन में सोच रही थी कि क्या सूरज उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है अगर उत्तेजित न होता तो उसका लंड खड़ा ना होता उसके लंड का खड़ा होने का मतलब ही यही है कि वह चुदवासा है उत्तेजित है,,, और यह मर्द के साथ तभी होता है जब एक औरत की उपस्थिति हो और इस समय यहां जंगल में उसके सिवा दूसरी कोई औरत सूरज के समीप नहीं थी इसका मतलब यही था कि सूरज उसकी वजह से ही उत्तेजित हुआ है जहां एक तरफ यह बात सोचकर उसे अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ उसका मन प्रफुल्लित हो रहा था,,,,। यही सब सोचते हुए वह आम का मजा ले रही थी,,,, आम वाकई में स्वादिष्ट थे,,,,,, इसलिए आम को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दबाकर चूसते हुए रानी साहिबा बोली,,,)





तुम सही कह रहे हो सूरज आम बहुत स्वादिष्ट हैं,,,,।

मैं हमेशा सही कहता हूं रानी साहिबा आम है भी तो बहुत बड़े-बड़े,,,(रानी साहिबा की छाती की तरफ देखते हुए सूरज बोला और रानी साहिबा सूरज की नजरों को पहचान गई थी इसलिए धीरे से अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने का नाटक करते हुए बोली)

मैंने तो इतने बड़े-बड़े आम कभी नहीं देखे,,,, हमारे खुद के बगीचे में इतने बड़े आम नहीं है,,,।

वह तो मैं देख ही रहा हूं,,,,(रानी साहिबा की छाती की तरफ देखते हुए)

क्या ,,,,?

मेरा मतलब है मैं राजा साहब के आम के बगीचे को देखा हुं वहां के भी आम इतने बड़े-बड़े नहीं है,,,,, सोचने वाली बात है रानी साहिबा जिस पेड़ से लोगों को खाने के लिए आम मिलता है होगा हम बड़े-बड़े नहीं है और जिस पेड़ को किसी ने कभी देखा भी नहीं है उसमें देखो इतने बड़े-बड़े आम लगे हुए कोई मतलब नहीं है बस यह पंछियों के लिए है।

बात तो तुम सही कह रहे हो,,,, भगवान सबका ठिकाना बना ही देते हैं यहां पर पंछियों के लिए खाने के लिए इतने अच्छे-अच्छे आम है ताकि पंछी लोग कभी भूखे ना रहे,,,,।

हमममम,,,

(दोनों ने दो-दो आम खाए इतने में हीं उन दोनों का पेट भर गया वह दोनों कुछ देर तक वहीं बैठे रहे क्योंकि धूप बढ़ने लगी थी,,,, और फिर कुछ देर बाद दोनों चलने के लिए तैयार हो गए सूरज रानी साहिबा से बोला)

बाकी के आमों का क्या होगा,,,?

होगा क्या लेकर भी तो नहीं जा सकते,,,, कुछ रखने के लिए नहीं है,,,, इन्हें छोड़ो यही आगे चलते हैं देख तो सही आगे क्या है पहाड़ी तो दिखाई दे रही है,,,,।

हां पहाड़ी तो दिखाई दे रही है,,,,, बहुत ही खूबसूरत नजारा भी है,,,,, चलो चलकर देखते हैं,,,,(इतना कहकर सूरज फिर से चल दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) सही कहूं तो रानी साहिबा मुझे आपके साथ बड़ा मजा आ रहा है मेरा सौभाग्य है कि मैं इतने बड़े जमींदार की बीवी के साथ घूम रहा हूं,,,,।

हमममम इसको तुम भाग्यशाली होना कहते हो,,,।

जरूर,,,, मेरे लिए तो यह किसी सपने से काम नहीं है। सच कहूं तो राजा साहब की किस्मत बहुत तेज है जो तुम्हारी जैसी बीवी मिली इतनी खूबसूरत सुशील,,,,।
(सूरज अपनी बातों के जान में रानी साहिबा को पूरी तरह से फंसा रहा था वह जानता था कि औरत के नाम के बीच पहुंचने का रास्ता उनकी तारीफ से ही शुरू होता है और सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर रानी साहिबा भी गदगद हुए जा रही थी)

चलो रहने दो,,,, खूबसूरत सुशील यह सब बनी बनाई बातें हैं,,, ऐसा कुछ भी नहीं है भगवान ने जैसा मुझे बनाए हैं मैं वैसे ही हूं।

खूबसूरत सुशील,,,,, (एकदम से सूरज बोला)

खूबसूरत और सुशील तुम्हें कहां से लगती हूं मैं खूबसूरत,,,, (चलते-चलते एकदम से रानी साहिबा रुक गई और अपनी कमर पर दोनों हाथ रखते हुए सूरज की तरफ देखते हुए पूरी सूरज भी रानी साहिबा को देखकर रुक गया और,,, बोला,,,)

चांद को नहीं मालूम कि वह खूबसूरत है और चांद कभी अपने मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ नहीं करता वैसे आप हो इसीलिए मैं आपको सुशील कह रहा हूं क्योंकि आपको मालूम है कि आप खूबसूरत है लेकिन अपने मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ करना पसंद नहीं करोगी कभी अपने आप को आईने में गौर से देखना किसी चांद से कम नहीं लगती हो,,,,।
(अपने लिए इस तरह के शब्दों में खूबसूरती की तारीफ सुनकर रानी साहिबा खुशी से गदगद हुई जा रही थी क्योंकि आज तक इस तरह से उसकी खूबसूरती की तारीफ उसके पति ने भी नहीं किया था,,, खूबसूरती का मतलब उसके पति के लिए बस इतना ही था कि बिस्तर पर कभी टांगे फैला लो तो कभी घोड़ी बन जाओ,,,, बस इतनी सही मतलब था कभी दो मीठे बोल नहीं बोला था इसलिए तो सूरज के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर रानी साहिबा को बहुत अच्छा लग रहा था,,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अब एक अंक की खूबसूरती की तारीफ करूंगा तो तुम्हारा खूबसूरत बदन बुरा मान जाएगा,,,, बस इतना समझ लो की किसी कलाकार की कल्पना हो,,, एक शिल्पकार जब पत्थरों को काट काट कर आकर देता है तो वह कितना खूबसूरत दिखाई देता है बस वही शिल्पी कर की कला हो ,,,,,, बहुत खूबसूरत हो,,,, (इतना कहते हुए सूरज रानी साहिबा की आंखों में देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई और रानी साहिबा शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दी और यह देखकर सूरज आगे बढ़ गया और पीछे पीछे रानी साहिबा मुस्कुरा कर शर्माते हुए चलने लगी,,,, रानी साहिबा के पैरों में बड़ी पायल की घुंघरू इस सन्नाटे में बहुत ही मधुर धोनी पैदा कर रही थी और यह पायल के घोड़े की मधुर ध्वनि सूरज के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा रहा था चूड़ियों की खनक पायल की झनक सब सूरज को मदहोश बना रहा था। लेकिन इतना वह जरूर समझ गया था कि बस थोड़ी सी मेहनत करने की और दे रही है और ज्यादा देर नहीं लगेगी उसे रानी साहिबा की टांगों के बीच आने के लिए,,,,, क्योंकि अभी तक उसकी एक भी हरकत की वजह से रानी साहिबा को गुस्सा नहीं आया था और ना ही उसकी कोई हरकत उसे बुरी लगी थी यहां तक की सूरज में अपने लंड की चुभन उसकी गांड पर अच्छी तरह से महसूस करवा चुका था लेकिन इस पर भी रानी साहिबा को बिल्कुल भी क्रोध नहीं आया था बल्कि रानी साहिबा का चेहरा देखकर सूरज को एहसास हो रहा था कि उसे उसकी हरकत अच्छी लग रही थी,,,,,, रानी साहिबा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही थी कि तभी पगडंडी के दूसरी तरफ,,,, झाड़ियों में सुरसुराहट की आवाज सुनाई दी उस आवाज को सुनकर रानी साहिबा एकदम से चौंक गई,,,, सूरज ने भी उसे आवाज को सुना था और वह एकदम से रुक गया था वह समझ गया था कि कोई जंगली जानवर है इसलिए फिर से दोनों हाथ फैला कर रानी साहिबा को अपने पीछे आने का इशारा किया और रानी सजदा एकदम से उसके पीठ से सट गई उसके कंधों को पकड़कर झाड़ियों की तरफ देखने लगी,,,, ।

मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज पेड़ के पास पड़ा हुआ मोटा सा पेड़ से नीचे गिरा हुआ सूखा हुआ डंडा उठा लिया सूरज जानता था कि यह मजबूर डंडा नहीं था लेकिन फिर भी अपनी हिफाजत के लिए इस समय इतना ही काफी था,,,, झाड़ियों के बीच की सुरसुराहट बढ़ती जा रही थी,,,, यह देखकर राजा साहब की बीवी घबरा रही थी वह डर के मारे सूरज से बोली,,,।

क्या है सुरज,,,! मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,।

डरो मत मैं हूं ना,,,,, कुछ तो है,,,, यही तो देखना है कि है क्या,,,,,? तुम इधर-उधर मत जाना मेरे पीछे ही रहना,,,,,

(सूरज इस तरह से रानी साहिबा को चौकन्ना रहने के लिए कह रहा था,, रानी साहिबा और ज्यादा घबरा रही थी वह कस के सूरज के कंधों को पड़ी हुई थी और उसकी पीठ से एकदम से सात गई थी जिसकी वजह से उसकी गोलाकार तनी हुई चूचियां सूरज की पीठ पर चुदाती हुई महसूस हो रही थी ऐसे घबराहट भरे माहौल में भी सूरज रानी साहिबा की मदहोश कर देने वाली चुचियों का आनंद ले रहा था,,,,,, सूरज हाथ में डंडा लिए हुए पूरी तरह से तैयार था तभी एकदम से झाड़ियां में से सियार निकल आया जिसे देखते ही रानी साहिबा के तो होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई ऐसा नहीं था कि सूरज घबराए नहीं था अपने सामने बड़े सियार को देख कर उसकी भी हालत खराब हो गई थी लेकिन फिर भी वह हिम्मत नहीं आ रहा था क्योंकि उसके हाथ में पड़ा था डंडा था लेकिन रानी साहिबा सूरज से बोली,,,।)

हाय दइया सियार है,,,,, अब तो गए सूरज,,,,।

तुम चिंता मत करो रानी साहिबा,,,,, हऐई,,, सहहहहह। हटटटटट,,,, हटटटटटटट,,,,, (सूरज उसे भगाने के लिए अपने मुंह से आवाज निकलने लगा लेकिन वह सियार अपने सामने दो इंसान को देखकर गुस्से से भर गया था क्योंकि उसने अभी तक इस जगह पर इंसानों को कम ही देखा था और जितने को भी देखा था उनके ऊपर हमला कर दिया था,,,,, सूरज उसे हटाने के लिए जितनी आवाज निकल रहा था बस यार इतना ज्यादा गुररआ रहा था उसके बड़े-बड़े दांत देखकर सूरज की भी हालत खराब हो गई थी,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि अगर एक बार इसका दांत बदन के किसी भी हिस्से पर पड़ा तो 500 ग्राम जितना मांस नोच इसलिए उसके मन में घबराहट भी थी और रानी साहिबा की तो हालात पूरी तरह से खराब हो गई थी वह तो सूरज उसके साथ था वरना अपने सामने सियार को देखकर रानी साहिबा मूत देती,,,, सूरज समझ गया कि इतनी आसानी से यह सियार जाने वाला नहीं है,,,, वह हवा में लकड़े को इधर-उधर घूमाने लगा लेकिन इससे भी सियार पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह धीरे-धीरे सूरज की तरफ आगे बढ़ रहा था जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था सूरज की सिटी,,,, पिट्टी गुम हो रही थी,,,,,, धीरे-धीरे वह सियार आगे बढ़ता चला रहा था,,,, राजा साहब की बीवी के बदन में कंपन होने लगी थी वह घबरा रही थी कांप रही थी,,,,, वह सियार दोनों पर हमला करने के फिराक में था तभी वह कर से आगे बड़ा की तभी सूरज फुर्ती दिखाता हुआ उसे सुखे लकड़ी को इतनी जोर से घुमाया की उसका निशान सीधा सियार के मुंह पर लगा और सियार एकदम से नीचे गिर गया,,,,,,, उसके नीचे गिरते ही सूरज ने फिर से लकड़े का प्रहार उस पर किया,,,, सियार को समझ में आ गया था कि यहां से भागना ही उचित है और सूरज उस पर लकड़े का और प्रहार करता इससे पहले ही वह उठकर फिर से झाड़ियों में भाग गया,,,, उसके जाते ही रानी साहिबा को न जाने क्या सोचा वह एकदम से सूरज के गले लग गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,, सूरज के तो मानो अरमान पूरे हो रहे हो वह एकदम से मचल उठा,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि रानी साहिबा के मन में इस समय क्या चल रहा था क्योंकि उसने उसकी जान बचाई थी।

गहरी चलती सांसों की गति के साथ ब्लाउज में कैद रानी साहिबा की चूचियां सूरज की छाती पर अपने होने का एहसास करा रहे थे,,,, सूरज धीरे से अपने दोनों हाथ को रानी साहिबा की पीठ पर रख दिया और हल्के-हल्के सहलाते हुए बोला।

घबराने की कोई बात नहीं है सियार चला गया है,,,,,,, मेरे होते हुए आपको कुछ नहीं होगा,,,,,।

(रानी साहिबा अभी भी जोर-जोर से सांस ले रही थी,,,, क्योंकि उसने बड़े करीब से अपनी मौत को अपने सामने देखी थी और सूरज ने हिम्मत दिखाते हुए उसकी मौत का मुंह मोड़ दिया था,,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से खड़े रहे सूरज अपनी अरमानों को पूरा करता रहा पेट पर से उसकी हथेली कब रानी साहिबा की चिकनी कमर पर पहुंच गई यह रानी साहिबा को भी पता नहीं चला लेकिन रानी साहिबा सूरज की हरकत से पूरी तरह से गनगना गई थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, वह धीरे से सूरज की बाहों से अलग हुई अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए घबराए हुए स्वर में बोली,,)

सियार चला गया ना,,,।

चला नहीं गया भाग गया,,,, मैंने कहा था ना कि मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा,,,,,,।

(रानी साहिबा का दिल अभी भी जोरों से धड़क रहा था वह जिस तरह से घबरा कर उसके गले लगी थी रानी साहिबा खुद शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और धीरे से अपनी निगाह को सूरज के पजामे की तरफ की तो फिर से उसके होश उड़ गए क्योंकि उसके गले लगने की वजह से सूरज का लंड फिर से खड़ा हो गया था यह देखकर ना चाहते हुए भी रानी साहिबा की टांगों के बीच की पतली दरार में अजीब सी हलचल होने लगी,,, गहरी सांस लेते हुए वह सूरज से बोली,,,)

अब हमें वापस चलना चाहिए,,,
(यह सुनकर सूरज हैरान हो गया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि इतनी जल्दी रानी साहिबा वापस घर के लिए लौटे क्योंकि उसे विश्वास हो गया था कि थोड़ी और मेहनत की जाए तो रानी साहिबा उसे वह सब कुछ देगी जो राजा साहब को देती है इसलिए सूरज एकदम से बोला,,,)

यह क्या कह रही हो रानी साहिबा मेरे होते हुए घबराने की जरूरत नहीं है सामने ही पहाड़ी दिख रही है वहां चलकर थोड़ा रुक कर चलते हैं क्योंकि वहां झरने के पानी में मुझे नहाना है,,,।

क्या उधर झरना भी है,,,?

हां लग तो रहा है,,,, क्योंकि पानी की किसने की आवाज सुनाई दे रही है।

हां आवाज तो आ रही है,,,,।

फिर चलो यहां तक आई हो तो थोड़ा और सही वैसे भी राजा साहब तो घर पर ही नहीं घर पर जाकर करोगी क्या थोड़ा घूम फिर कर मजा ले लो,,,।

मजा तो ले लो लेकिन जंगली जानवर परेशान कर रहे हैं,,,।

मैं हूं ना कुछ नहीं होने दूंगा,,,,।
(सूरज के मुंह से इतना सुनकर रानी साहिबा मुस्कुराने लगी,,,,,, और इस बार वह खुद आगे आगे चलने लगी और सूरज पीछे-पीछे चलते समय रानी साहिबा की गोलाकार गांड ऊंची नीची पगडंडी की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे ऐसा लग रहा था कि रानी साहिबा के साड़ी के अंदर कोई दो बड़े-बड़े तरबूज ठुंस दिया हो,,,, सूरज मदहोश हुआ जा रहा था रानी साहिबा की थोड़ा बहुत उत्तेजित हुए जा रही थी क्योंकि बार-बार वह सूरज के पजामे की तरफ देख ले रही थी जिसकी वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी थी,,,, चारों तरफ घनी झाड़ियां बड़े-बड़े पेड़ छोटे-छोटे खूबसूरत फूलों के पौधे इस जगह को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहा था जैसे-जैसे दोनों पहाड़ी के करीब जा रहे थे वैसे-वैसे पानी गिरने की आवाज तेज होती जा रही थी रानी साहिबा को भी यकीन हो गया था कि जरूर यहां पर झरना है। रानी साहिबा और तेजी से आगे की तरफ बढ़ने लगी और फिर थोड़ी दूर जाने के बाद जो नजर आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर रानी साहिबा के साथ-साथ सूरज भी दंग रह गया बड़ी पहाड़ी के नीचे छोटी पहाड़ी और उसे पैसे नीचे गिरता हुआ झरने का पानी इतना खूबसूरत नजर लग रहा था कि सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई इतना आश्चर्य से सूरज आज तक केवल औरतों की टांगों के बीच ही देखा था लेकिन पहली बार हुआ कुदरत का नजारा देख रहा था इससे पहले भी सूरज झरने में नहाने का मजा ले चुका था और वह अभी अपनी बहन के साथ लेकिन यह झरना उसे झरने से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत था। रानी साहिबा तो खुशी से पागल हो जा रही थी वह एकदम से सूरज की तरफ देख ले रही थी तो कभी झरने की तरफ देख ले रही थी वह अपने खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर पा रही थी।

बाप रे रानी साहिबा सच कह रहा हूं मैं आज तक इतना खूबसूरत झरना नहीं देखा और यह सब आपकी बदौलत है आप यहां आने के लिए ना कहती तो शायद में कुदरत की इतनी खूबसूरत नजारे को अपनी आंखों से देखा नहीं पाता।

मैं भी सूरज बहुत खुश हूं,,,, अच्छा हुआ कि तुम मुझे यहां लेकर आए,,,,, मैं तो यह सब सिर्फ सपने में ही देखा करती थी लेकिन आज हकीकत में अपनी आंख से देख कर मैं बता नहीं सकती की कितनी खुश हूं,,,।

सच में रानी साहिबा मजा आ गया,,, (आगे बढ़ते हुए सूरज बोला पीछे-पीछे धीरे-धीरे रानी साहिबा भी बढ़ रही थी कुछ देर तक दोनों खड़े होकर झरने के पानी को देखते रहे जोर से हवा का झोंका बार-बार पानी के बूंद को उन दोनों के शरीर पर गिरा दे रहा था जिससे दोनों के बदन में ठंडक फेल जा रही थी। सूरज का दिमाग बड़ी तेजी से कम कर रहा था वह जानता था कि ईतना अच्छा मौका उसे दोबारा मिलने वाला नहीं है और यह भी जानता था कि बार-बार रानी साहिबा उसके पजामी की तरफ देख रही थी तो जरूर उसके मन में कुछ ना कुछ चल रहा होगा वह रानी साहिबा को किसी बहाने से अपना मोटा तगड़ा लंड दिखाना चाहता था,, क्योंकि उसे अपनी मर्दाना अंग पर पूरा भरोसा था कि इसे देख लेने के बाद औरत अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं रह पाती,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद वह रानी साहिबा से बोला,,,,।)

रानी साहिबा इतना ठंडा पानी और झरना देखकर तो मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

क्यों,,,? (आश्चर्य जताते हुए रानी साहिबा बोली)

क्योंकि मेरा मन नहाने को कर रहा है,,,


लेकिन कपड़े कहां है,,,?

यही तो सोच रहा हूं,,,,, आप साथ में ना होती तो अब तक में कब तक कुद गया होता कपड़े उतार कर,,,,,।

कपड़े उतार कर,,,(आश्चर्य से सूरज की तरफ देखते हुए रानी साहिबा बोली और सूरज ने इस तरह की बात जानबूझकर किया था क्योंकि वह रानी साहिबा के मन में इस बात को उतारना चाहता था कि वह कपड़े उतार कर नंगा नहाना चाहता है इसलिए वह बोला)

बिल्कुल,,,,, एक काम करो रानी साहिबा तुम दूसरी तरफ मुंह घुमा कर खड़ी हो जाओ,,,।

सच में,,,, लेकिन तुम करने क्या वाले हो,,,।

कपड़े उतारने वाला हूं,,,(इतना कहने के साथ ही रानी साहिबा के सामने ही वह अपना कुर्ता उतारने लगा कुर्ता उतरते ही इसकी चौड़ी नंगी छाती को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में अजीब सी अच्छा लगने लगी,,,, रानी साहिबा को एहसास हो रहा था कि सूरज का बदन कसरती था,,,,,,, कुर्ता उतार लेने के बाद सूरज रानी साहिबा की तरफ देखते हुए बोला,,,)

मुंह घुमाओ ना दूसरी तरफ,,,,,।

(अब रानी साहिबा के मन में भी शर्त सुझने लगी थी,,, वह मुस्कुराते हुए बोली)

अगर नहीं घुमाऊं तो,,,,

तो क्या,,,, तुम्हारे सामने कपड़े उतार कर पानी में कूद जाऊंगा,,,,।

इतनी हिम्मत,,,,,


आपने अभी मेरी हिम्मत देखी कहां है,,,।

चलो नहीं घूमाती मैं भी तो देखु तुम्हारी हिम्मत,,,,,(दोनों हाथ आपस में बात कर रानी साहिबा खड़ी हो गई और सूरज को देखने लगी सूरज के तनबदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,, रानी साहिबा किस तरह की बात की वजह से सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी जिसकी वजह से उसके लंड का आकार बढ़ने लगा था रानी साहिबा की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

देखो फिर मुझे दोष मत देना कि मैं आपके सामने कपड़े उतार दिया,,।

नहीं दूंगी,,,,।

चलो फिर क्या है जब आपको ऐतराज नहीं है तो मुझे कैसा एतराज होगा,,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपने पजामा की डोरी को खोलने लगा यह देखकर रानी साहिबा के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे लग रहा था कि सूरज मजाक कर रहा है लेकिन वह सच में रानी साहिबा के सामने नंगा होना चाहता था और यह उसके मन की भी बात थी क्योंकि वह जानता था की रानी साहिबा के सामने नंगा होने के बाद रानी साहिबा की नजर उसके मोटे तगड़े लंड पर जरूर पड़ेगी और एक औरत होने के नाते मोटे तगड़े लंड को देखकर उसके मन में भी कौतूहल जागेगा,,,, और फिर सूरज भी बिल्कुल भी देर ना करते हुए रानी साहिबा की आंखों के सामने ही अपनी पजामा एक झटके से नीचे खींच दिया और जैसे ही पजामा उसके घुटनों तक आया उसका मोटा तगड़ा लंड एकदम से आजाद होकर लहराने लगा जिसे देखते ही रानी साहिबा की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,, वह पल भर के लिए झलक भर सूरज के लंड को देखते रही और फिर शर्म के मारे अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली यह देखकर सूरज मैन ही मन मुस्कुराने लगा और पैजामा को दोनों हाथों से अपने पैरों से बाहर निकाल कर एकदम नंगा हो गया और झरने के गिरने से इकट्ठा हुए पानी में कूद गया जो की एक बड़ा सा तालाब जैसा था,,,,, सूरज बड़े मजे लेकर झरने के पानी में नहा रहा था वह पूरी तरह से नंगा था इस बात पर रानी साहिबा को बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था अगर वह अपनी आंखों से ना देखी तो शायद किसी के कहने पर वह विश्वास नहीं कर पाती उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सूरज किस प्रकार का लड़का है,,,,।



वह उसकी इच्छा भी पूरी करने के लिए उसे इतनी दूर लेकर आया उसकी रक्षा भी कर रहा है और उसकी मौजूदगी में उत्तेजित भी हो रहा है रानी साहिबा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जिस तरह का नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी वह नजारा देखकर उसकी हालत एकदम से खराब हो गई थी अपने पति के लैंड को ही वह मर्दों का सबसे बड़ा लंड समझती थी लेकिन इस समय उसकी आंखों के सामने सूरज का लंड नजर आया थाजो की पूरी तरह अपनी औकात में आकर खड़ा था और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके पति से काफी लंबा और मोटा था,,, इस तरह के अद्भुत मादकता भरे नजारे को देखकर ना चाहते हुए भी रानी साहिबा की बुर पानी छोड़ रही थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था सांसों की गति अभी भी बड़ी तेजी से चल रही थी वह सूरज को देख रही थी सूरज नहाने का मजा ले रहा था और बार-बार उसकी तरफ ही देख रहा था,,।

पानी बहुत ठंडा हैरानी साहिबा बहुत मजा आ रहा है अगर आपको तैरना आता है तो आप भी आ जाओ,,,,,आहहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,,,ओहहहहह हो,,,,,(सूरज खुशी के मारे जोर-जोर से चिल्ला रहा था,,,,, लेकिन रानी साहिबा के तन बदन में आग लगी हुई थी,,,, रानी साहब अपने पति के बारे में सोच रही थी जो कि आज तक उसके खुशी का बिल्कुल भी परवाह नहीं किया था चाहे दैनिक जीवन में हो सांसारिक जीवन में हो या फिर बिस्तर पर हो सब तरह से सिर्फ अपनी मनमानी किया था वह सिर्फ अपना सुख खोजता था,,,, उसे अच्छी तरह से याद था कि उसके पति के द्वारा किया गया संभोग से कितना दर्द देता था क्योंकि वह संभोग में भी मनमानी करता हुआ बस अपनी प्यास बुझा देता था और करवट लेकर सो जाता था या फिर कमरे से बाहर चला जाता था कभी भी उसने उसकी इच्छा पूछने की जरूरत नहीं समझा इसलिए इस समय न जाने क्यों रानी साहिबा का मन बहक रहा था,,,, उसने आज तक मर्यादा के बाहर जाकर कोई ऐसा कार्य नहीं की थी जिससे उसकी बदनामी हो लेकिन आज उसका मन बहक रहा था सूरज को देखकर उसका चंचल मन उड़ने को कर रहा था मजा लेने को कर रहा था और वह बार-बार सूरज के लंड के बारे में सोच रही थी कि अगर इतना मोटा लंड किसी औरत की बुर में जाएगा तो औरत को मजा आएगा या दर्द होगा,,,,। यही सब सोच भी रही थी और सूरज की तरफ देख भी रही थी सूरज बार-बार उसे पानी में उतरने के लिए प्रेरित कर रहा था क्योंकि सूरज जानता था अगर वह एक बार पानी में उतर गई तो किसी न किसी बहाने से वह उसे अपनी बाहों में भर लेगा और उसे पूरा विश्वास था कि जो नजर उसने कुछ देर पहले रानी साहिबा को दिखाया था उसे नजारे को देखकर रानी साहिबा के तन बदन में आग लग गई होगी,,,,, वातावरण की गर्मी और जवानी की गर्मी दोनों रानी साहिबा को परेशान कर रहे थे वह भी झरने के पानी में नहाना चाहती थी वह भी खुले में लेकिन जवानी के दिनों से और जब से उसका विवाह हुआ था तब से अपनी इच्छाओं का गला घोट करवा है को ठीक है चार दिवारी में अपना जीवन गुजर रही थी कभी आनंद के साथ वह अपना जीवन नहीं थी इसलिए आज वह अपने मन की कर लेना चाहती थी,,,,, सूरज दूसरी तरफ मुंह करके तैरते हुए दूसरी तरफ जा रहा था और तभी राजा साहब की बीवी एक बड़े से पत्थर के पीछे गई और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई,,,, सूरज उसे पलट कर देख भी नहीं पाया और वह छम्म से जाकर झरने के पानी में कूद गई और जैसे ही वह पानी में गोरी उसकी आवाज के साथ सूरज उसे तरफ देखने लगा तो वह खुशी के मारे झूम उठा क्योंकि तलाब में रानी साहिबा भी नहा रही थी। पानी काफी ठंडा था जो कि इस भरी दुपहरी की गर्मी में ठंडक देने के लिए पर्याप्त था।

सूरज तैरता हुआ रानी साहिबा के करीब जा रहा था क्योंकि उसे अभी तक यह नहीं मालूम था की रानी साहिबा कपड़े पहने हुए पानी में कूद गई है या कपड़े उतार कर लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ की रानी साहिबा के बदन पर वस्त्र का रेशा तक नहीं है पर एकदम से खुशी से झूम उठा उत्तेजना से पानी के अंदर ही उसका लंड ठुनकी मारने लगा,,,,, वह रानी साहिबा के करीब गया जैसे-जैसे सूरज उसके करीब आ रहा था वैसे-वैसे शर्म के मारे रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि वह पूरी तरह से नंगी थी और ऐसे में एक जवान लड़की का उसके करीब आना उसके बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था तकरीबन 1 मीटर की दूरी पर स्थिर होकर सूरज मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

आप सारे कपड़े उतार कर,,,।
(सूरज का बस इतना कहना था की रानी साहिबा मुस्कुरावदी और उसकी मुस्कुराहट ने सारे सवाल के जवाब स्पष्ट कर दिए,,,,, खुशी के मारे सूरज का लंड दर्द करने लगा था,,,, सूरज बार-बार रानी साहिबा के करीब जाने लगा रानी साहिबा जी तरफ जाती पीछे पीछे सूरज भी उसी तरफ चल देता और जाते-जाते वह इतना करीब पहुंच जाता कि उसका नंगा लंड रानी साहिबा की नंगी गांड पर रगड़ खाने लगता और यह एहसास रानी साहिबा के तन बदन में चुदास की लहर भरने के लिए काफी था,,,, ऐसा बार-बार हो रहा था और सूरज ऐसा जानबूझकर कर रहा था,,,, रानी साहिबा जब तैरते हुए तालाब के बड़े से पत्थर के तरफ जा रही थी तो सूरज भी बड़ी तेजी से तैरता हुआ एकदम से रानी साहिबा से सट गया और इस बार सूरज का मोटा तगड़ा लंड पानी की चिकनाहट प्रकार रानी साहिबा की गांड की दरार में एकदम से रगड़ खाने लगा,,, यह एहसास रानी साहिबा को पानी पानी कर दिया था हालत तो सूरज की भी खराब हो गई थी क्योंकि वह रानी साहिबा की बुर में अपना लंड डालना चाहता था,,, रानी साहिबा को लगने लगा था कि अब वह अपने आप ऊपर से काबू को बैठेगी और किसी भी समय सूरज के लंड को अपनी बुर में ले लेगी,,,, वह मुंह से तो कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन उसका चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था सूरज को एहसास हो रहा था की रानी साहिबा क्या चाहती है,,,,, रानी साहिबा पानी में तैरते हुए कल आपके किनारे बड़े से पत्थर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर पानी में ही खड़ी हो गई और ठीक सूरज भी उसके पीछे उसी अवस्था में खड़ा हो गया जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी जामुन के बीच से होता हुआ नीचे से उसकी बुर पर दस्तक देने लगा था यह एहसास रानी साहिबा को अपने मर्यादा से नीचे गिरने के लिए कमजोर बना रहा था वह गहरी सांस लेते हुए बड़े से पत्थर को दोनों हाथों से पकड़ कर स्थिर खडी थी। ठीक उसके पीछे सूरज खड़ा था और अभी दोनों हाथों को बड़े से पत्थर पर रखा हुआ था जिससे इस अवस्था में रानी साहिबा उसकी आगोश में थी और सूरज का लंड दोनों टांगों के बीच से उसकी बुर पर नीचे से ठोकर लग रहा था जिससे रानी साहिबा एकदम से रोमांचित हुए जा रही थी,,,,।



रानी साहिबा अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी,,,, क्योंकि रानी साहिबा का धैर्य जवाब दे गया था,,,, तभी उसने हल्के से अपनी टांगों को थोड़ा सा और खोल दी यह एहसास सूरज को अच्छी तरह से महसूस हुआ,,,, और यही मौका बिल्कुल सही था रानी साहिबा को अपनी आगोश मे लेकर दबाने का और इस मौके का सूरज पूरी तरह से फायदा उठाता हुआ एकदम से रानी साहिबा के बदन से सट गया और अपने दोनों हथेलियों को आगे की तरफ लाते हुए, एकदम से पुरानी साहिब की दोनों चूचियों पर अपनी हथेली लगती है और उसे हल्के से दबाते हुए अपने होठों को रानी सागर के गर्दन पर रखकर गहरी सांस लेने लगा सांसों की गर्मी और हथेलियों के दबाव को रानी साहिबा बर्दाश्त नहीं कर पाई और एकदम से पिघलने लगी गहरी सांस लेते हुए वह अपने मन की इच्छा को इशारे से ही जाहिर करने लगी,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा की उत्तेजक गहरी सांस ही उसकी सारी कहानी को बयां कर रही थी सूरज समझ गया था की रानी साहिबा क्या चाहती है सूरज पागलों की तरह उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए अपने हथेलियों का दबाव चुची पर बढ़ाने लगा,,, रानी साहिबा की दोनों चुचीया जवानी से भरी हुई थी जिसे दबाने में सूरज को बहुत मजा आ रहा था,,,,, जवाब में रानी साहिबा के मुंह से केवल शिसकारी की आवाज फूट रही थी।

सहहहहहहहह सहहहहहहवआहहहहहहह ऊमममममममम ,,,।
(रानी साहिबा के मुंह से इस तरह की आवाज को सुनकर सूरज का हौसला बढ़ने लगा सूरज नीचे से अपने लंड को बराबर से उसकी बुर पर रगड़ता हुआ उसकी चूचियों से खेलने लगा,,,, सूरज कभी सोचा नहीं था कि राजा साहब की बीवी के साथ उसे मजा लेने का मौका मिलेगा,,,, जंगल में झरने के अंदर वह पूरी तरह से राजा साहब की बीवी की जवानी का रस नीचोड रहा था।,,,,, सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की खूबसूरत नंगे बदन पर अपने होंठ से दस्तखत कर रहा था,,,, रानी साहिबा ठंडे पानी में भी गर्म होने लगी थी सूरज पानी के अंदर ही धीरे से उसके कंधों को पकड़कर उसे अपनी तरफ घूमा लिया,, और रानी साहिबा के उत्तेजना से तमतमाए खूबसूरत चेहरे की तरफ देखने लगा दोनों की आंखें आपस में तक रहे और रानी साहिबा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली लाल लाल गुलाब की पंखुड़ी जैसे उसके होंठ उत्तेजना से थरथरा रहे थे जिसे काबू में करने के लिए सूरज अपने होठों को उसके होंठ पर रखकर उसके नाजुक होठों को अपने मुंह में भर लिया और उसके होठों का रसपान करते हुए पानी के अंदर ही अपने दोनों हथेलियां को उसकी चिकनी पीठ से नीचे की तरफ ले जाते हुए उसके नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाते हुए उसे अपने बदन से सटा दिया ऐसी अवस्था में सूरज का कठोर अंग उसकी बुर की दरार पर जबरदस्त रगड़ खाने लगी जिससे रानी साहिबा का पूरा वजूद हचमचाने लगा वह मदहोश होने लगी मत होने लगी और एकदम से अंगूर के लता की तरह सूरज के बदन से लिपट गई। रानी साहिबा की सरकार से सूरज के मन की रही सही शंका भी दूर हो गई,,, सूरज और पागलों की तरह उसे अपनी बाहों में चक्कर उसके नितंबों को दोनों हाथों से दबाते हुए उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,, अब सूरज से रहने जा रहा था सूरज पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और जब अपने लंड पर उसे रानी साहिबा की हथेली का कसाव महसूस हुआ तो वह एकदम से पागल हो गया अब वह पानी के अंदर नहीं पानी के बाहर मजा लेना चाहता था क्योंकि पानी के अंदर रहकर वह रानी साहिबा के खूबसूरत बदन से जी भर कर मजा नहीं ले पा रहा था,,,, इसलिए वह रानी साहिबा से बोला,,,)

चलो पानी के बाहर,,,, आज तुम्हें मस्त कर देता हूं,,,,(सूरज की ईस बात रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई,,,, और सूरज कल आपके बाहर आ गया हुआ पूरी तरह से नंगा था उसका लहराता हुआ लंड देखकर रानी साहिबा के होश उड़ गए क्योंकि यह बहुत कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा दिखाई दे रहा था एक झलक सूरज के लंड की तरफ देखकर वह फिर से अपनी नजर को नीचे झुका ली सूरज ने अपना हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा को पानी से बाहर निकलने में मदद किया और जैसे ही रानी साहिबा पानी से बाहर आई वह फिर से उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबाते हुए मजा लेने लगा अब सूरज रुकने का नाम नहीं लेना चाहता था देखते ही देखते वह रानी साहिबा की दोनों चूचियों को बारी बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,, रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा है सूरज की हर एक हरकत उसे आनंदित कर दे रही थी,,,, उसे एहसास होने लगा था कि सूरज उसके पति से भी ज्यादा और अच्छे तरीके से उसके बदन से खेल रहा था वरना उसका पति तो केवल उसके बदन को निचोडता बस था। लेकिन सूरज उसके बदन से दिल से प्यार कर रहा था इसलिए तो रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,,,।

तुम बहुत खूबसूरत हो रानी साहब मैंने आज तक तुम्हारी जैसी औरत नहीं देखा जो कपड़े उतारने के बाद ही इतनी खूबसूरत दिखती हो,,,,।(रानी साहिबा कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म से अपनी नजर के नीचे झुका ली,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम्हारी दोनों चुचिया बिल्कुल उस पेड़ के आम की तरह एकदम गोल गोल,,,,सहहहहहह( हथेली में लेकर चुची को दबाते हुए) तुम्हारी चुचीया आज बहुत मजा देने वाली है,,,।(और इतना कहने के साथ हैं हल्के से चुची को दबाते हुए अपने मुंह को चुची की तरफ ले गया और अपने होंठों के बीच चुची को भरकर पीना शुरू कर दिया,,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा एकदम से मदहोश होने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी और सूरज बारी बारी से से उसकी दोनों चूचियों को पीना शुरू कर दिया,,, रानी साहिबा को इतना मजा मिल रहा था कि पूछो मत जिंदगी में ऐसा लग रहा था की पहली बार वह मर्द के साथ होने का एहसास कर रही थी क्योंकि पहले रात से ही उसे कभी नहीं लगा कि उसका पति उसे अच्छी तरह से प्यार करता है,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से उसकी दोनों चुचियों का मजा लेता रहा लेकिन बीच-बीच में अपनी हथेली को उसकी कोमल बुर पर रखकर उसे जोर-जोर से मसलकर उसका पानी निकालने से पीछे नहीं हट रहा था। और सूरज की यही हरकत उसे पानी पानी कर दे रही थी,,,, लगातार रानी साहिबा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी और वह खुलकर इस तरह की आवाज ले रही थी क्योंकि जंगल में उसकी शेषकारी की आवाज सुनने वाला वहां सूरज के सिवा और कोई नहीं था,,,, रानी साहिबा कभी सोची नहीं थी कि गांव के लड़के के साथ वह इस तरह से मजा लुटेगी,,, और शायद यह भी नहीं सोची थी कि गांव का लड़का उसे इतना मजा देगा।

सूरज पूरी तरह से रानी साहिबा पर छा जाना चाहता था इसलिए उसे बड़े से पत्थर का सहारा देकर खड़ी कर दिया था और धीरे से अपने घुटने के बाद नीचे बैठ गया था क्योंकि वहां पर बड़े-बड़े पत्थर थे एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में दबोच कर उसके होठों का रसपान करते हुए सूरज धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ला रहा था उसकी गर्दन में उसकी छाती उसकी चूचियों से होता हुआ उसकी गहरी नाभि पर चुंबन करते हुए सूरज अपनी जीभ को अपने होठों को उसके बदन से सरकाते हुए उसकी नाजुक गुलाबी बुर की तरफ नीचे उतरता चला जा रहा था,,,, उसकी जीभ और उसके दहकते हुए होंठ उसकी बुर की ऊपरी हिस्से के रेशमी बालों के झुरमुट पर पहुंच चुके थे जिससे रानी साहिबा के बदन में झनझनाहट होने लगी थी सूरज की हरकत से रानी साहिबा समझ गई थी कि सूरज क्या करने वाला है क्योंकि इस तरह से राजा साहब उसकी बुर की चटाई बहुत बार कर चुके थे लेकिन इतना मजा नहीं आया था,,, आज वह देखना चाहती थी कि सूरज क्या गुल खिलाता है,,,, औरतों को खुश करने के मामले में सूरज दूसरे मर्दों से एक कदम आगे था इस बात को रानी साहिबा नहीं जानती थी लेकिन चल रही है उसे सूरज एहसास करने वाला था क्योंकि अगले ही फल सूरज के प्यासे हो रानी साहिबा की थाती हुई बुर पर स्पर्श हुई और सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की बोर की चढ़ाई करना शुरू कर दिया उसमें से मदन रस का फवारा फूट रहा था रानी साहिबा अपनी आंखों को बंद करके सूरज के बालों को दोनों हाथों से पकड़ कर वहां उसके मुंह का दबाव अपनी बुर पर बनाए हुए थी,,, बुर चटाई में औरतों को मजा देने मे वह बिल्कुल भी पीछे हटता नहीं था। वह पागलों की तरह सनी साहिब की बुर को चाट रहा था और रानी साहिबा मत हो जा रही थी देखते-देखते रानी सब अपनी टांग उठा कर उसे सूरज के कंधे पर रख दी और दोनों हाथों से उसका सर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दी इस तरह से वह अपनी बुर से सूरज के मुंह को चोद रही थी। रानी साहिबा के सरकार से सूरज काफी प्रभावित हुआ था और रानी साहिबा खुद अपनी हरकत से हैरान थी क्योंकि आज तक उसने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत नहीं की थी लेकिन हर सूरज के साथ वह इतनी आनंदित हो गई थी कि अपने आप ही उसकी कमर आगे पीछे हो रही थी।

सूरज रानी साहिबा का मजा और ज्यादा बढ़ाने के लिए अपनी दो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर की मलाई चाट रहा था जिससे ईरानी साहिब की मस्ती चरम पर पहुंच चुकी थी उसके बदन की अकड़न बढ़ने लगी थी और देखते ही देखते वह कस के सूरज को पकड़ ली और झड़ने लगी,,,, सूरज की मुंह में उसकी बुर से निकला हुआ मदन दास का फवारा बह रहा था और सूरज रानी साहिबा की बुर से निकलने वाले मदन रस की एक-एक बूंद को नीचे नहीं गिरने देना चाहता था इसलिए वह गले के नीचे घटक रहा था उसे पी रहा था उसके नमकीन रस का स्वाद ले रहा था यह देखकर रानी साहिबा गदगद हुए जा रही थी। सूरज अपनी जीभ से ही चटाई करके रानी साहिबा को झाड़ दिया था इस बात से रानी साहिबा भी काफी प्रभावित हुई थी सूरज धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रानी साहिबा की आंखों में देखते हुए बोला।

कैसा लगा रानी साहिबा,,,।

(रानी साहिबा कुछ बोली नहीं बस शर्म से नजर नीचे झुका ली और फिर सूरज अपने दोनों हाथों को रानी साहिबा के कंधे पर रखकर उसे पर दबाव बनाते हुए उसे नीचे की तरफ बैठने लगा देखते देखते रानी साहिबा अपने घुटनों के ऊपर नीचे बैठ गई और सूरज अपने लंड को हाथ में पकड़ कर लहराता हुआ उसके सुपाड़े को रानी साहिबा के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, रानी साहिबा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था लंड की गर्माहट उसे मदहोश कर रही थी,,, विवाहित होने के नाते और वासना से भरे पति के कारण इतना तो रानी साहिबा को अनुभव हो ही चुका था कि अब उसे क्या करना है,,, इसलिए वह बिना झिझक अपने लाल लाल होठों को खोल दी और सूरज अपने लंड को उसके मुंह में प्रवेश कर दिया रानी साहिबा को जितना होना रहता था वह सारा हुनर उसने सूरज के लंड पर आजमाना शुरू कर दी थी,,, सूरज मस्त होता जा रहा था अपनी आंखों को बंद करके वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया था और रानी साहिबा अपने होठों का कम लंड पर बढ़ाकर उसे बुर के कसाव का मजा देने की कोशिश कर रही थी। सूरज के मोटे लंड से रानी साहिबा का पूरा मुंह भरा हुआ था बड़ी मुश्किल से हुआ उसे अपने मुंह में लेकर चूस रही थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी कमर हिलता रहा और रानी साहिबा को मजा देता रहा फिर धीरे से वह अपने लंड को रानी साहिबा के मुंह से बाहर निकाल लिया,,,,, रानी साहिबा की सांस अटक रही थी इसलिए जैसे ही लंड बाहर निकला वह खुलकर सांस लेने लगी,,,,, अब रानी साहिबा को चोदने का समय आ गया था इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए और नीचे बड़े-बड़े पत्थर होने की वजह से सूरज रानी साहिबा का हाथ पकड़ कर उसे हरी हरी घास के करीब लाया और उसे पीठ के बल लेटा दिया रानी साहिबा का दिल जोरो धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी कि अब क्या होने वाला है। सूरज मुस्कुराता हुआ है रानी साहिबा की दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा और दोनों हथेलियां को नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी कमर को पकड़कर उसकी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया और फिर धीरे से उसकी बुर में अपने लंड को प्रवेश कराने लगा,,, बरकी चिकनाहट पकड़ लंड बड़े आराम से बुरे के अंदर प्रवेश कर तो जा रहा था लेकिन रानी साहिबा को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सूरज का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा था क्योंकि उसे हल्का-हल्का दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन लंड की रगड उसे पूरा मस्त कर दे रही थी। जैसे-जैसे लंड बुर के अंदर प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे रानी साहिबा के चेहरे का रंग बदलता जा रहा था उसके हाव-भाव बदलते जा रहे थे कभी दर्द का एहसास हो रहा था तो कभी आनंद ही आनंद की रेखाएं उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी देखते ही देखते सूरज मेहनत करते हुए अपने पूरे लंड को रानी सहेली की बुर में डाल दिया और रानी साहिबा से बोला,,,,)

देखो रानी साहिबा मेरा पूरा लंड तुम्हारी बुर की गहराई में खो गया है,,,,।
(सूरज की बात सुनकर रानी साहिबा अपने हाथ की दोनों को हानि का सहारा लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठे और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थित कर दी और वहां का नजारा देखकर वाकई में वह आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो चुका था यह देखकर रानी साहिबा उत्साहित होते हुए बोली)

बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है सूरज तुम्हारा लंड मेरे पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है लेकिन मैं तुम्हारे लंड को अपनी बुर में ले लूंगी इस बात से मेरा मन आसंकित था लेकिन देखो बढ़िया आराम से तुम्हारा लंड मेरी बुर की गहराई में खो गया है,,,,।

बिल्कुल रानी साहिबा आखिर आप है भी तो रानी साहिबा किसी से कम थोड़ी ना है,,, अब देखो मेरा कमाल,,,,(रानी साहिबा की अश्लील बातों से सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी और सूरज बिल्कुल भी देर ना करते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था वह रानी साहिबा की चुदाई करना शुरू कर दिया था हर एक धक्के से रानी साहिबा साथी आसमान पर पहुंच जा रही थी उसने आज तक ऐसी चुदाई का मजा नहीं ली थी इसलिए वह मजे ले लेकर सूरज से चुदवा रही थी सूरज उसकी चुदाई करने में बिल्कुल भी कसर नहीं बाकी रख रहा था,,, हर एक धकके साथ रानी साहिबा की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लहर उठती थी जिसे सूरज अपने हाथों से पकड़ कर दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,,, राजा साहब की बीवी को जितना मजा मिल रहा था वह उसके जीवन का सबसे सर्वोत्तम सुख था वह कभी सोचा नहीं थी कि उसे इस तरह का सुख कभी मिल पाएगा क्योंकि पति से तो उसे सुख नहीं मिल पा रहा था बल्कि पति से दुख ही मिल रहा था लेकिन आज सूरज ने उसे चुदाई का असली सुख से वाकीफ करवाया था,,,, सूरज उसकी चूचियों को दबाता हुआ उसकी चूचियों को मुंह में लेकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था जिससे रानी साहिबा आनंदित हो उठती थी,,,, रानी साहिबा इस बात से भी है क्रांति की काफी देर हो गया था सूरज के लंड को खड़ा हुए लेकिन अभी तक उसके लंड ने पानी नहीं छोड़ा था,,, सूरज का हर एक धक्का उसे अपने बच्चेदानी पर ठोकर मारता हुआ महसूस हो रहा था जैसा कि आज तक उसे अपने पति से भी महसूस नहीं हुआ था,,,।

कुछ देर तक सूरज इसी तरह से रानी साहिबा की चुदाई करता रहा और फिर तेरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे घोड़ी बनने को बोल दिया रानी साहिबा घोड़ी बनने का मतलब को अच्छी तरह से जानती थी वह जल्दी से घुटनों और हाथ की कोहनी के बाल हो गई और अपनी गोलाकार गांड को हवा में लहराने लगी,,,, गोरी गोरी गांड देखकर सूरज से रहने की और उसकी गांड पर दो चार चपत लगा दिया जिससे उसकी गोरी गोरी गाल टमाटर की तरह लाल हो गई और फिर धीरे से उसकी गुलाबी बुर अपना लंड डालकर फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया,,, सूरज पागलों की तरह रानी साहिबा की चुदाई कर रहा था रानी साहिबा पसीने से तरबतर हो चुकी थी इतनी देर में उसका पति दो बार झड़ गया होता लेकिन सूरज था कि झड़ने का नाम नहीं ले रहा था आखिरकार दोनों चरम पर पहुंचने लगे रानी साहिबा कि सीसकारी की आवाज जोर-जोर से निकालने लगी और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे सूरज के लंड का फवारा सीधा उसके बच्चेदानी पर पड़ रहा था जिससे रानी साहिबा गदगद हुए जा रही थी। कुछ देर तक सूरज रानी साहिबा पर ही लेट रहा और रानी साहिबा की घोड़ी बनी गहरी सांस लेते हुए अपने आप को दुरुस्त करने में लगी रहे और फिर धीरे से सूरज ने अपने लंड को रानी साहिबा की बुर से बाहर निकाला।

सूरज गहरी सांस लेता हुआ पास में ही बैठ गया था रानी साहिबा के चेहरे पर संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे वह सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे,,,,, धीरे-धीरे होने वाली थी दोनों को मालूम था कि घर पहुंच कर पहुंचते हैं तेरा हो जाएगा वैसे तो उन दोनों का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था यहां से जाने का लेकिन समय को देखते हुए दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे और फिर उन दोनों को घर पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो चुका था,,,,, घर पर पहुंचे तो कुंवर अपनी बहन का इंतजार कर रहा था अपनी बहन को सूरज के साथ देखकर हुआ है एकदम उत्साहित होता हुआ बोला।

तुम दोनों जन कहां से आ रहे हैं मैं कब से इंतजार कर रहा हूं आखिर बिना बताए कहां चली गई थी,,,,।
(सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें लेकिन वह कुछ बोलता है इससे पहले ही रानी साहिबा बोल उठी )

अरे उस दिन मेरे कान का झुमका नहीं मिल रहा था ना,,,।

हां,,,,,,

सूरज को इस बात का पता चला तो होगा मुझे लेकर बाजार गया था और उन दोनों ने वहां काफी देर तक ढूंढने के बाद देखा मेरा झुमका मिल गया,,,,(झुमके को कान में पहने हुए ही वह अपने भाई को दिखाने लगे तो उसका भाई भी झुमका देखकर खुश हो गया क्योंकि वह जानता था कि यह जनता उसकी मां का दिया हुआ था और खुश होता हुआ बोला,,,)

तुमने तो कमाल कर दिया सूरज,,, तुम समझ नहीं पाओगे कि मैं कितना खुश हूं,,,,, इसके बदले में मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या दुं,,,,।

मैं भी तो यही कह रही थी रात हो गई है मैं सूरज से कह रही थी कि यहीं रुक जाओ मेरे बगल वाला कमरा खाली पड़ा है रात को वहीं रुक जाना,,,,, आज की रात हमारे घर की मेहमान नवाजी का मजा लेते जाओ।

लेकिन घर पर,,,,।

अरे कोई बात नहीं कह देना कि काम पड़ गया था।


दीदी ठीक कह रही है रुक जाओ,,,।

चलो ठीक है इतना कहते हो तो मैं रुक जाता हूं,,,(सूरज भी रात को रुकना नहीं चाहता था क्योंकि जो मजा रानी साहिबा ने उसे दी थी वह भी अधूरा ही था पूरा मजा लेना बाकी था और आज की रात रुकता हुआ है रानी साहिबा की जवानी का रस पूरी तरह से निचोड़ लेना चाहता था)
बहुत ही सुंदर लाजवाब और शानदार अद्भुत तुफानी मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
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rohnny4545

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रानी साहिबा का आमंत्रण सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था। और यह आमंत्रण कोई भोज प्रसंग या रेन बसेरा का नहीं था बल्कि बहुत प्रसंग और रेन बसेरा के आड़ में संभोग प्रसंग का नेता था जिसे सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था,,, क्योंकि इस तरह क्या आमंत्रण बहुत ही किस्मत वाले को ही मिलता है और इस समय सूरज किस्मत का धनी था क्योंकि आए दिन रोज उसे कोई ना कोई खूबसूरत औरत अपना खूबसूरत जवान समर्पित कर दे रही थी और रानी साहिबा की तो बात ही अलग थी वह बड़े जमींदार की बीवी थी और ऐसे जमीदार की बीवी को चोदने का सिर्फ कल्पना ही किया जा सकता है हकीकत में किस्मत का साथ होना जरूरी है। और इस समय किस्मत का साथ सूरज के साथ था। कुंवर और उसकी बहन बहुत खुश नजर आ रहे थे। कुंवर को यह आवाज तक नहीं था कि सूरज उसकी बहन के बीच बहुत कुछ घटित हो चुका है वह तो इसे एक मेहमान के तौर पर ही देख रहा था जो की कान का झुमका देकर बहुत बड़ा उपकार किया था लेकिन इस उपकार के बदले में कुंवर की बहन में अपनी जवानी सूरज के कदमों में न्योछावर कर दी थी इस बात का अंदाजा कुंवर को बिल्कुल भी नहीं था।

सूरज के रुकने की वजह से आज भोजन में खीर पुरी दो तरह की सब्जी और मिठाई का प्रबंध किया गया था अभी भोजन का समय नहीं हुआ था और सूरज को कुंवर उसके कमरे में लेकर गया था जहां पर आज उसे रात रुकना था ‌।

कैसा लगा सूरज आपको यह कमरा,,,, (वैसे तो कुंवर अच्छी तरह से जानता था कि आज नहीं तो कल सूरज उसका साला बनने वाला है और वह कुंवर से बड़ा था इसलिए उसे भैया कहने का मन कर रहा था लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू किया हुआ था क्योंकि वह सूरज के मन में शंका नहीं होने देना चाहता था कि कुंवर और उसकी बहन के बीच कुछ चल रहा है,,,,)

बहुत अच्छा मैं कभी सोचा नहीं था कि मैं इस तरह के आलीशान कमरे में रात रुकूंगा,,,, (खिड़की से बाहर देखा हुआ सूरज बोल खिड़की के बाहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत आचारों तरफ दूर-दूर तक खेती खेत दिखाई दे रहे थे आसमान में चांद अपनी चांदनी बिखेर रहा था। कुंवर भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा हुआ बहुत खुश था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर सूरज को खुश कर लिया तो वह खुशी-खुशी अपनी बहन का हाथ उसके हाथ में दे देगा,,,,, सूरज की बात सुनकर कुंवर बोला)


मुझे भी यह नजारा बहुत अच्छा लगता है मैं घंटे बैठकर अकेले ही यह सब देखता रहता हूं,,,,।


अच्छा जीवन है तुम्हारा ,,,,(कुंवर की तरफ देखकर सूरज बोला)


मुझे तो ऐसा नहीं लगता,,, बस आजादी है आजादी तो तुम्हें भी है कहीं भी घूम सकते हो कहीं भी आ सकते हो जा सकते हो मेरे और तुम्हारे जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है,,,।

(कुंवर की आवाज सुनकर सूरज कुछ बोला नहीं बस मुस्कुराने लगा कुछ देर तक और दोनों की बातचीत चली,,,, भोजन का समय हो गया था भोजन करने के लिए रानी साहिबा खुद कमरे तक आई और अपने भाई और सूरज दोनों को भोजन करने के लिए बुलाकर ले गई,,,, तीनों साथ मिलकर भोजन कर रहे थे इस बीच भोजन करते हुए सूरज की नजर बार-बार रानी साहिबा पर चली जा रही थी रानी साहिबा के समीप रहकर उसकी काम भावना बार-बार जागरूक हो रही थी और यही हाल रानी साहिबा कभी था वह अपने भाई के सोने का इंतजार कर रही थी लेकिन अभी इसमें बहुत समय था क्योंकि अभी तो तीनों भोजन कर रहे थे,,,, रानी साहिबा को इस बात कहे संस्था की सूरज में जो बात थी वह उसके पति में नहीं थी उसका पति उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाता था जिससे उसे बिल्कुल भी आनंद नहीं आता था लेकिन सूरज एक मर्द की तरह औरतों के साथ संबंध बनाता था जिसमें वह पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी। पहली बार की चुदाई में ही सूरज ने रानी साहिबा को पूरी तरह से अपना दीवानी बना दिया था। दोनों एक दूसरे को कनखियो में देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे,,, भोजन करते हुए रानी साहिबा सूरज से बोली,,,)

अरे सूरज,,,, थोड़ा और खीर लो,,,,

नहीं नहीं बस इतना काफी है मेरे लिए,,,।

अरे ऐसे कैसे,,,, थोड़ा तो और लेना पड़ेगा,,, (इतना कहते हुए रानी साहिबा खुद बर्तन में से बड़ा चम्मच भरकर खीर सूरज की थाली में गिराने लगी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) आज की रात तुम हमारे मेहमान हो और हमारे वहां मेहमान को भगवान मानते हैं बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रखते,,,,,.


रानी साहिबा यह तो आप लोगों का बड़प्पन है वरना हम लोग आपके मेहमान नवाजी के लायक कहां,,,।

कैसी बात कर रहे हो सूरज हमारे और तुम्हारे में कोई फर्क नहीं है मैं तो तुम्हें अपना बड़ा भाई की तरह मानता हूं,,,,,,

हां कुंवर सच कह रहा है ,,,, 2 दिन की मुलाकात में ऐसा लगता ही नहीं है कि तुम कोई पराए हो अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे तुम अपने ही हो,,,,,।

यह सुनकर तो रानी साहिबा मेरा दिल गद गद हो गया ,,,,, मैं कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े खानदान से मुझे इतनी इज्जत मिलेगी,,,,।

हमारे साथ रहोगे तो इसी तरह से मौज करोगे।

यह बात है तब तो हादसे में आप लोगों का हो गया जब भी मेरी जरूरत पड़े तब मुझे बुला लेना,,,, मैं हमेशा आप लोगों का साथ दूंगा,,,,।

वादा,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

पक्का वादा सूरज की यही खासियत है एक बार वादा कर लेता है तो जान दे देता है लेकिन अपना वादा नहीं तोड़ता,,,,

हमममम यह हुई ना बात पहली बार कोई सच्चा साथी मिला है,,,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,, रोशनी के लिए चारों तरफ लालटेन चल रही थी जिसकी पीली रोशनी में रानी साहिबा का खूबसूरत मुखड़ा और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था,,,, थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,, सूरज के लिए जो कमरा नियुक्त किया गया था सूरज इस कमरे में चला गया और खिड़की के पास कुर्सी पर बैठकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रहा था वह बड़ी बेसब्री से रानी साहिबा का इंतजार कर रहा था क्योंकि पेट की आज तो भोजन से शांत हो चुकी थी लेकिन की आग बुझाने के लिए जवानी से भरी हुई औरत का साथ होना जरूरी था जो कि अभी उसके पास नहीं थी लेकिन कुछ ही देर में बिस्तर पर उसका साथ देने के लिए तैयार हो रही थी रानी साहिबा भी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी कुंवर के सो जाने का,,,,, वैसे भी नौकर लोग अपनी-अपने में जाकर सो गए थे लेकिन कुंवर कुछ देर सूरज से बात करने के लिए रानी साहिबा से पूछ कर सूरज के कमरे में गया था,,,, कुंवर को अपने कमरे में आज देखकर सूरज को मन ही मन बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकता था ना चाहते हुए भी थोड़ी देर तक कुंवर से इधर-उधर की बातें करता रहा और फिर कुंवर को नींद आने लगी,,, कुंवर आलस मरोड़ते हुए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और सूरज से बोला,,)

मुझे तो बहुत नींद आ रही है मैं सोने जा रहा हूं अब तुम भी सो जाओ रात काफी हो चुकी है,,,,।

मुझे भी नींद आ रही है,,,, दिनभर ईधर उधर घूम कर थक गया हूं,,,,,, (सूरज भी जम्हाई लेता हुआ बोला,,,, कुंवर कमरे से बाहर जा चुका था सूरज धीरे से दरवाजे के पास आए और दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन अंदर से कड़ी नहीं लगाया क्योंकि उसे पूरा विश्वास था की रानी साहिबा जरूर उसके कमरे में आएगी क्योंकि वह भी कुंवर के जाने का इंतजार कर रही होगी और वैसे भी रानी साहिबा का कमरा उसके बगल में ही था,,,, सूरज फिर से गरम आहे भरता हुआ खिड़की के पास जाकर बैठ गया और बाहर का नजारा देखकर रानी साहिबा का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा इस बार उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा जल्द ही दरवाजा खोलने की आवाज के साथ सूरज दरवाजे की तरफ देखने लगा तो देखा रानी साहिबा इधर-उधर देखते हुए उसके कमरे में प्रवेश कर रही थी पर जैसे ही कमरे में प्रवेश की वह दरवाजा बंद करके दरवाजे की कड़ी लगा दी,,,,,, रानी साहिबा को देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, क्योंकि एक जमींदार की खूबसूरत बीवी आधी रात को उसके कमरे में उससे चुदवाने के लिए आ रही थी,,,, रानी साहिबा को देखकर खुश होता हुआ सूरज बोला,,,)

बड़ी देर लगा दी कब से इंतजार कर रहा हूं,,,, ।

क्या करूं कुंवर जाग रहा था,,,, मैं भी तो तुमसे मिलने के लिए कब से बेकरार थी।

इतनी बेकरारी किस लिए रानी साहिबा दिन में ही तो जमकर चुदवाई थी,,,,।

(चुदवाई वाली बात सूरज के मुंह से सुनकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई,,,, क्योंकि रानी साहिबा आपके कदम भले ही बैठ गए थे लेकिन वह मर्यादा में रहने वाली औरत थी,,, पति की बेरुखी की वजह से उसके कदम लड़खड़ा गए थे अगर उसे उसका पति अच्छी तरह से समझता तो शायद वह सूरज के साथ कभी भी संबंध नहीं बनाती लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता था कि पति ने उसे एक खिलौना ही समझा था अगर उसे एक औरत समझकर के साथ प्यार करता है तो शायद वह तन से प्यासी ना रही थी और सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए वह प्रेरित ना होती। इसलिए वह सूरज से बोली,,,)

धत् इस तरह की बात मत किया करो मुझे शर्म आती है,,,,।(ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे सूरज के करीब पहुंच गई रानी साहिबा कि यह अदा सूरज को एकदम से भा गई वह तुरंत रानी साहिबा का हांथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

हाय मेरी रानी तुम्हारा इस तरह से शर्माना ही तो मेरी जान ले लेता है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह रानी साहिबा को अपनी गोद में बैठा लिया रानी साहिबा की एकदम दर्द हो गई उसके होठों के करीब ले गई सूरज में एकदम से उसके होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी,,, सूरज के पास पर्याप्त समय था इसलिए वह किसी के प्रकार की जल्दबाजी दिखाने नहीं चाहता था क्योंकि आज की रात वह राजा साहब की बीवी की जवानी के साथ जी भरकर खेल लेना चाहता था,,,, लाल-लाल होठों को चूसते हुए वह ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया था,,, सूरज को रानी साहिबा के लाल लाल होंठ चूसने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था रानी साहिबा भी दिल खोलकर सूरज पर अपनी जवानी लूटा रही थी,,, उत्तेजना के मारे ब्लाउज में कैसे रानी साहिबा की चूची का कद बढ़ने लगा था वह धीरे-धीरे कठोर होना शुरू हो गए थे,,,, रानी साहिबा जिस तरह से सूरज की गोद में बैठी हुई थी सूरज के पजामे के अंदर उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है जो कि अब पूरी तरह से खड़ा होकर रानी साहिबा की गांड में चुभने लगा था,, रानी साहिबा सूरज के लंड की चुभन को अपनी गांड की दरार में अच्छी तरह से महसूस कर रही थी ‌। यह चुभन उसे पानी पानी कर रहा था वह सूरज की गोद में कम से रही थी उसकी भारी भरकम गोलाकार गांड सूरज की गोद में इधर-उधर हो रही थी जिसकी वजह से बार-बार सूरज का लंड पजामे में होने के बावजूद भी उसकी गांड के दरार में घुसने का प्रयास करने लगता था,,, यह देखकर सूरज चुंबन को तोड़ते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला।)

देख रही हो रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारी मैदान में दौड़ने के लिए कितना बेताब है,,,,।

देख रही हूं और महसूस भी कर रही हूं अपने घोड़े को थोड़ा संभालो समय आएगा तो अपने आप मैदान का द्वार खोल दिया जाएगा इतनी तड़प अच्छी नहीं है,,,।

अब कर भी कर सकते हैं रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारे मैदान का दीवाना हो गया है जब तक तुम्हारे मैदान की घास नहीं खाएगी तब तक इसका पेट नहीं भरेगा,,,,।

तब तो अपने घोड़े को कह दो कि थोड़ा और इंतजार कर ले क्योंकि उसे पर पानी पड़ेगा तो घास और हरी हो जाएगी तब खाने में और ज्यादा मजा आएगा,,,,।

हाय मेरी रानी मेरा घोड़ा अगर मेरी बात समझता तो इतना बेताब ना होता,,, मेरा घोड़ा पर लगा में है कहीं भी इसका इनाम फिसल जाता है,,,।

बेलगाम घोड़े ही मुझे ज्यादा पसंद है मुझे मालूम है कि बेलगाम घोड़े पर कैसे काबू पाया जाता है,,,,,।

कैसे काबू पाया जाता है,,, जरा बताना तो मेरे घोड़े को,,,,,।

धीरे-धीरे पता चल जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही रानी साहिबा फिर से सूरज के होठों को अपने होंठ में ले ली और होठो का रसपान करना शुरू कर दी,,,, सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो चुका था धीरे से अपने दोनों हाथों को फिर से चुची पर ल गया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया माहौल पूरी तरह से गर्म होता चला जा रहा था,,,,, वातावरण में गर्मी बिल्कुल भी नहीं थी खिड़की से चल रही ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने का भरपूर प्रयास कर रही थी लेकिन रानी साहिबा की गर्म जवानी वातावरण की ठंडक को जवानी की आग में झुलसा दे रही थी,,,, कुछ देर तक इसी तरह से दोनों का चुंबन और स्तन मर्दन का कार्य चलता रहा रानी साहिबा की बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी जिससे उसका पेटिकोट गीला हो चुका था,,, अब रानी साहिबा ईस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,,, रानी साहिबा जैसा अपने मन में सोची थी ठीक उसी तरह से सूरज उसकी सोच के मुताबिक आगे बढ़ रहा था बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखाना था और यही चाहती थी उसकी चुदाई करके या तो लेट गया होता या तो कमरे से बाहर निकल गया होता लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था इतनी देर से अपनी गोद से लेकर सिर्फ उसकी जवानी से ऊपर ही ऊपर से खेल रहा था फिर भी वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था ,,,, रानी साहिबा कोई इस बात का एहसास हो रहा था कि सूरज को औरत के जिस्म से खेलना अच्छी तरह से आता है,,,,, चुंबन को तोड़ते हुए रानी साहिबा धीरे से सूरज की गोद से उठकर खड़ी हो गई,,,,, सूरज गहरी सांस लेता हुआ रानी साहिबा को देखता रहा और रानी सागर मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखते हुए मादक चाल चलते हुए खिड़की पर आकर खड़ी हो गई,,,, खिड़की से ठंडी ठंडी हवा का झोंका पूरे कमरे को ठंडक दे रहा था जिसमें रानी साहिबा के रेशमी बाल की लहर रहे थे रानी साहिबा खिड़की पर हाथ रखकर खड़ी थी और नजर पीछे की तरफ घूमा कर सूरज की तरफ देख रही थी सूरज भी मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देख रहा था,,, लेकिन सूरज की नजर चेहरे पर काम रानी साहिबा की गोलाकार गांड पर ज्यादा टिकी हुई थी,,,,।

इसलिए मौका देखकर रानी साहिबा अपनी गोलाकार गांड को गोल-गोल करके हल्के घूमाना शुरू कर दी ,, कश्मीरी साड़ी में रानी साहिबा की मदहोश कर देने वाली गांड कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुई थी जिसे देखकर सूरज का मन देखने लगा वह मदहोश होने लगा था उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंच चुकी थी और वह तुरंत कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड पर रखकर सहलाने लगा और उस पर चपत लगाने लगा,,,, सूरज की हरकत से मदहोश होती हुई रानी साहिबा अपनी गांड को और पीछे की तरफ उभार कर खड़ी हो गई,,,, और अपनी हाथ की कोनी को खिड़की पर रखकर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी रानी साहिबा की यह आधा देखकर सूरज से रहा नहीं किया और सूरज अपनी जगह से उठकर खड़ा हो जा खड़ा होते ही पजामे में उसका तंबू एकदम से नजर आने लगा जिसे देखकर रानी साहिबा मुस्कुरा दी और बोली।

तुम्हारा घोड़ा तो पागल हुआ जा रहा है,,,,।

इसमें इसकी गलती नहीं है रानी साहिबा,,,,(एकदम पुरानी साइकिल के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर) जब आंखों के सामने इतनी मस्तानी घोड़ी,,(दोनों हाथ से गांड पर चपत लगाते हुए) देखेगा तो घोड़ा तो पागल होगा ही,,,, ।

ऊमममम यह बात है,,,, घोड़े को पता होना चाहिए की मस्तानी घोड़ी तैयार है,,,,।

पता है तभी तो,,,, घोड़ी की सवारी करने के लिए तैयार हो गया है,,,,, बहुत मस्त पिछवाड़ा है रानी साहिबा तुम्हारा कसी हुई साड़ी में तो जान ले लेती है,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने दोनों हाथों को रानी साहिबा के आगे की तरफ लाया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से चूचियों पर हथेली रखते हुए चूचियों को दबाते हुए रानी साहिबा को सीधी खड़ी कर दिया और पीछे से उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी चूची को दबाते हुए गरदानों पर चुंबन की बारिश कर दिया साड़ी का पल्लू पहले ही कंधे पर से नीचे गिर चुका था सूरज पागल हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी बाहों में जवानी से भरी हुई औरत कसमसा रही थी,,, सूरज रानी साहिबा को पागल किया जा रहा था रानी साहब अपनी गांड की दरार में सूरज के तंबू को महसूस करके उसकी रगड़ से पागल हुए जा रही थी उसकी बुर लगातार पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,, सूरज लगातार चूचियों को दबाता हुआ धीरे से रानी साहिबा के कान में बोला,,,।)

बाहर देख रही हो कितना खूबसूरत नजारआ है रात को ऐसा नजारा देखते हुए चुदाई करने का मजा ही कुछ और है,,, तुम तो रोज मजे ले लेकर राजा साहब से चुदवाती होगी,,,,,।

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,, तुम्हारे जैसा साथी हो तो ऐसे नजारे को देख कर चुदवाने का मजा आता है,,,, राजा साहब तुम्हारी तरह प्यार नहीं कर पाए वह तो बस लटके और चढ़ गए पानी निकला और निकल गए,,,,।
(रानी साहिबा की यह बात सुनकर सूरज को हंसी आ गई,,,,, यह देखकर रानी साहिबा बोली)

मेरी हालत पर तुमको मजाआ रहा है,,,।

मजा नहीं आ रहा जिस तरह से तुम बोले इसलिए हंसी आ गई और वैसे भी मुझे विश्वास नहीं होता कि राजा सारी इतनी खूबसूरत औरत के साथ सिर्फ मनमानी करते होंगे मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हें जी भरकर बिस्तर पर प्यार करते होंगे।

अगर ऐसा होता तो मैं अंदर से प्यासी ना होती तुम्हारे साथ जिस्मानी ताल्लुकात ना बनाई होती,,,,।
(सूरज इस बात से अंदर ही अंदर खुश हो रहा था कि राजा साहब रानी साहिबा को जिस्मानी सुख नहीं दे पाते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करके चला जाता है लेकिन इस बारे में इस समय बहस करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था सूरज मजा को किरकिरा नहीं करना चाहता था इसलिए बात का रुख बदलते हुए बोला,,)

छोड़ो वो सब आज की रात तो तुम मेरे साथ हो आज देखने में तुम्हें ऐसा मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(ऐसा कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की चूचियों पर से अपना हाथ हटाकर धीरे से अपने हाथ को साड़ी के ऊपर ले आया और साड़ी को दोनों तरफ से दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया रानी साहिबा फिर से उत्तेजना से गदगद होने लगी और सूरज फिर से रानी साहिबा के गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया सूरज के होठ जहां-जहां पडते थे वहां-वहां से रानी साहिबा गनगना जाती थी,,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी और सूरज अपनी हरकतों से उसकी हालत को और ज्यादा खराब करता चला जा रहा था अभी तक सूरज ने रानी साहिबा के बदन को ऊपर से ही टटोला था अभी तो उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी करना बाकी था। देखते देखते सूरज रानी साहिबा की साड़ी को कमर तक उठा दिया था उसकी नंगी गांड चांदनी रात और लालटेन की पीली रोशनी के मिले-जुले रंग में और भी ज्यादा खूबसूरत और और भी ज्यादा चमक रही थी सूरज दोनों हाथों रानी साहिबा की गांड की दोनों फांकों को पकड़ कर जोर-जोर से दबोच कर मसल शुरू कर दिया,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोश होता हुआ बोला)

ओहहहहह मेरी रानी मैं तो पागल हो जाऊंगा कितनी खूबसूरत गांड है तुम्हारी,,,,ऊमममममम झरने के पास तो जी भर कर तुम्हारे जिस्म से खेल नहीं पाया था लेकिन अब नहींछोडूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और रानी साहिबा की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दबाने लगा , दबोचने लगा मसलने लगा जैसे हो सकता था उसे तरह से सूरज रानी साहिबा की नंगी गांड से मजा ले लेना चाहता था,,,,, रानी साहिबा भी मस्त होते हुए अपनी गांड का सूरज के हाथों में दे दी थी एक तरह से वह अपनी जवानी को सूरज के दोनों हाथों में परोस दी थी,,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था,,, सूरज कभी सोचा भी नहीं था की रानी साहिबा के साथ वह कभी संबंध बन पाएगा रानी साहिबा की चुदाई करना उसके नसीब में लिखा भी था यह बात सूरज कभी नहीं जानता था लेकिन आज उसे अपनी किस्मत पर गर्व महसूस हो रहा था लिखने वाले ने भी बड़ी फुर्सत से उसकी किस्मत बनाया था गांव की हर एक खूबसूरत औरत उसकी ही गोद में आकर गिर रही थी,,,,, रानी साहिबा की नंगी गांड की दोनों आंखों को दोनों हाथों से पड़कर उसे लगभग फैलाते हुए उसने देखा तो रानी साहिबा की गांड का छोटा सा छेद और उसकी गुलाबी घड़ी एकदम साफ नजर आ रही थी,,, अपनी आंखों के सामने खूबसूरत औरत के दो-दो छेद को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाए और एकदम से अपने होंठ को गांड की दरार में ले जाकर के उसे पर चुंबनों की बौछार कर दिया,,, सूरज की कामातुर कर देने वाली हरकतों से मदहोश होकर रानी सरकार के मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज के सिवा और कुछ नहीं निकल रहा था। सूरज पागलों की तरह गांड की दरार में अपने होठों को डालकर चूम रहा था चाट रहा था और जैसे ही सूरज के होंठ उसकी गांड के छेद के ऊपर पहुंचे और सूरज ने जैसे ही उसे पर चुंबन लेना शुरू किया रानी साहिबा उतेजना से गन गना गई,,,,, वह कभी सोची नहीं थी कि सूरज उसकी गांड के छेद पर चुंबन करेगा,,,, सूरज भी अच्छी तरह से जानता था कि उसके होठ रानी साहिबा के किस अंग पर हैं और उसने यह भी महसूस कर लिया था कि उसे पर होठ रखने से रानी साहिबा के बदन में कंपन होने लगा था।

इसलिए ईस कंपन को महसूस करके, सूरज धीरे से अपनी अजीब को बाहर निकाल कर उसकी गांड के भूरे रंग के छेद पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू कर दिया,,,, इस अद्भुत एहसास में रानी साहिबा पूरी तरह से डूबने लगी वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी इसलिए अपने संपूर्ण वजूद को अपने पैर के अंगूठे पर स्थिर करके वह और ऊपर उठ जा रही थी लेकिन सूरज उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे अपने काबू में किए हुए था वह पागलों की तरह रानी साहिबा की गांड को चाटना शुरू कर दिया था नीचे गुलाबी छेद से उसका मदन रस रसमलाई की तरह टपक रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से रानी साहिबा की गांड को चाटता रहा,,,, लेकिन गांड के छेद को देखकर सूरज के मन में बहुत से ख्याल आ रहे थे वह रानी साहिबा की गांड के छेद का जायजा लेना चाहता था,,,, इसलिए कहा रानी साहिबा को और ज्यादा उत्तेजित करने के हतु अपनी तो उंगली को एक साथ रानी साहिबा की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और गांड की चटाई जारी रखा,,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा के तन बदन में आग लगने लगी वह पागल होने लगी उसके मुख से सिसकारी की आवाज और ज्यादा तेज हो गई लेकिन वह जानते थे कि उसकी सिसकारी की आवाज इस समय और कोई सुन नहीं सकता क्योंकि वह खिड़की के पास खड़ी थी और खिड़की खेत,,,, की तरफ खुलती थी बाकी सबके कमरे रानी साहिबा के कमरे से काफी दूर थे,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी साहिबा को इस समय उसकी बुर में लंड महसुस होना चाहिए था लेकिन सूरज और तो की संगत में अच्छी तरह से पक्का खिलाड़ी बन चुका था और यह बात उसे अच्छी तरह से मालूम थी कि कब लंड को बर के अंदर डालना है इससे पहले वह औरत को काफी हद तक तड़पा देता था। झरने के पास सूरज नहीं जल्दबाजी दिखाते हुए रानी साहिबा की बुर में लंड पेल दिया था क्योंकि सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी उसे समय भावनाओं में बह चुकी थी लेकिन किसी भी वक्त अगर वह अपने आप में हो जाती और उसे लगने लगता है जो कुछ भी हो रहा है गलत हो रहा है तो सूरज दोबारा उसके साथ चुदाई का सुख भोग नहीं पता इसलिए वह जल्दबाजी दिखाता हुआ रानी साहिबा की बुर में लंड डाल दिया था क्योंकि एक बार मर्यादा की दीवार गिर जाए तो वह कभी खड़ी नहीं होती।

रानी साहिबा को अत्यधिक उत्तेजित और तड़पा लेने के बाद सूरज धीरे से रानी साहिबा की बुर से अपनी उंगली निकाल कर, रानी साहिबा की गांड के छेद में उंगली डालने का प्रयास करने लगा लेकिन जैसे ही उसने उंगली को रानी साहिबा की गांड में प्रवेश कराने की कोशिश किया रानी साहिबा एकदम से अपनी गांड को सीकोड कर आगे की तरफ गांड को खींच ली और बोली,,,,।

ना,,,,,,, उसमें नहीं,,,,, तुम्हारा कुछ ज्यादा ही मोटा लंबा है,,,,,।

इसकी मोटाई से डर गई,,,, मजा भी तो ज्यादा देता है,,,।

मैं जानती हूं लेकिन गांड में नहीं बुर में चाहे जितना डाल लो,,,,,।
( रानी साहिबा की बात का सम्मान करते हुए सूरज अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड से पीछे खींच लिया और वैसे भी वह समझ गया था की रानी साहिबा की गांड में दम नहीं था उसके लंड कुछ दिखाना उंगली रखते ही उसे एहसास हो गया था की रानी सा की गांड का छेद को ज्यादा ही छोटा था जबरदस्ती करने को तो सूरज कर सकता था लेकिन उसके बाद सूरज के लिए नुकसान था क्योंकि यह सिलसिला वह आगे भी चलने देना चाहता था अपनी गलती से वह इस रिश्ते को यहीं खत्म कर लेना नहीं चाहता था इसलिए रानी साहिबा की बात मानकर वह मुस्कुराहट कर खड़ा हो गया और रानी साहिबा को अपनी तरफ घूमा कर उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया,,, ब्लाउज का बटन खोलते हुए सूरज बोला,,,)

जैसी आपकी मर्जी रानी साहिबा हम तो आपके गुलाम हैं जैसे चाहे वैसे उपयोग कर लो जबरदस्ती करने वाले नहीं है,,,,,(और मुस्कुराता हुआ धीरे-धीरे रानी साहिबा के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया रानी साहिबा सूरज की बात से बहुत खुश हुई क्योंकि सूरज रानी साहिबा की इज्जत करता था जल्दबाजी या जबरदस्ती नहीं करता था यह बात सूरज की रानी साहिबा को बहुत अच्छी लगी थी और यही फर्क था राजा साहिब में और सूरज में कि इतने वर्षों के बाद भी राजा साहब रानी साहिबा के दिल में अपने लिए जगह नहीं बन पाया था और सूरज एक ही दिन में रानी साहिबा पर छा चुका था,,,,, ब्लाउज के सारे बटन खोलने के बाद सूरज धीरे से ब्लाउज को उसकी बाहों से उतार कर नीचे फेंक दिया,,,, रानी साहिबा कमर के ऊपर कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी क्योंकि साड़ी अभी भी कमर में इकट्ठा हुए नितंबों के उभार की वजह से टिकी हुई थी रानी साहिबा की दोनों चूचियों को देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था और सूरज दोनों हाथ आगे बड़ा कर रानी साहिबा की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला,,,,)

यह तो हमारे मुखिया जी के बगीचे के दशहरी आम की तरह है बहुत खूबसूरत और रसीले,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की एक चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया और रानी साहिबा एकदम से गनगना गई,,,,, सूरज बिल्कुल भी कसर बाकी रखना नहीं चाहता था इसलिए बारी-बारी से रानी साहिबा की दोनों चीजों को मुंह में लेकर पी रहा था दबा रहा था, जिस तरह से सूरज बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को पी रहा था उसे खेल रहा था रानी साहिबा को सूरज की हरकत काफी प्रभावित कर गई थी दोनों चुचियों में से किसी भी चुची के साथ वह जात्ती नहीं कर रहा था दोनों को बराबर का हक दे रहा था,,,, सूरज की हरकतों से मदहोश होकर रानी साहिबा से रहने की और वह अपना हाथ आगे बढ़कर पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ कर दबाना शुरूकर दी,,,, इस समय सूरज का लंड और भी ज्यादा मोटा और लंबा महसूस हो रहा था जिससे रानी साहिबा की बुर पानी पानी हो रही थी,,,, सूरज एक हाथ से अपने पजामे को नीचे कर दिया जिससे रानी साहिबा उसके नंगे लंड से खेल सके,,, नंगा और ग्राम लंड हाथ में आते ही रानी साहिबा की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह जिस तरह से सूरज के लंड से खेल रही थी अपनी हथेली में लेकर दबा रही थी सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसे क्या चाहिए इसलिए वह कुछ देर और रानी साहिबा की चूचियों को पीने के बाद धीरे से रानी साहिबा के कंधे पर दोनों हाथ रखकर उसे दबाव देता हुआ नीचे की तरफ झुकने लगा और रानी साहिबा देखते ही देखते झुकने लगी और अपनी नंगी गांड को खिड़की से सटाकर सूरज के मोटे कपड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी सूरज पागल हुआ जा रहा था,,, रानी साहिबा की हरकतों का आनंद लेते हुए सूरज अपने हाथ को आगे बढ़कर रानी साहिबा की नंगी गांड पर चपत लगाता हुआ मजा ले रहा था,,,

रानी साहिबा सूरज के लंड को चुस चुस कर उसकी धार को बढ़ा रही थी,,,,, उसे अपनी बुर के लिए तैयार कर रही थी,,,,, सूरज दोनों हाथों से रानी साहिबा की गांड को पड़कर उसे दबोच रहा था मसल रहा था उसे पर चपत लगा रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सबको साथ दिखाई दे रहा था और वैसे भी आसमान में चांदनी रात छाई हुई थी जिसकी रोशनी खिड़की से अंदर की तरफ आ रही थी और सब को साफ दिखाई दे रहा था रोशनी में रानी साहिबा के जिस्म के साथ खेलने का मजा ही कुछ और था सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ रानी साहिबा के मुंह को चोद रहा था,,, सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए रानी साहिबा के मुंह में ठीक तरह से समा नहीं रहा था लेकिन फिर भी रानी साहिबा पूरी कोशिश किए हुए थी,,, सूरज जिस तरह से अपनी कमर हिला रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड का सुख रहा है उसके पहले के अंदर तक पहुंच जा रहा था जिससे रानी साहिबा को सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी जो आनंद मिल रहा था उसकी अपेक्षा यह तकलीफ बहुत कम थी। रानी साहिबा सूरज को भी पूरी तरह से खुश करने में लगी हुई थी ऐसा नहीं था कि लंड मुंह में लेकर चूसने में उसे मजा नहीं आ रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा मन कर रहा था कि वह लंड को मुंह से बाहर ही ना निकाले,,, लेकिन खेल को आगे बढ़ाना था इसलिए सूरज ने धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा के मुंह से बाहर खींच लिया और गहरी सांस लेता हुआ बोला।

बहुत मस्त चुसती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने कुर्ते को उतारने लगा और देखते ही देखते रानी साहिबा के सामने एकदम नंगा हो गया नंगा होने के बाद सूरज का बदन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था लालटेन की पीली रोशनी में इसकी चौड़ी छाती देखकर रानी साहिबा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी,,,,, सूरज की टांगों के बीच उसका मोटा तगड़ा लंड छत की तरफ मोटा ही खड़ा था उसकी मोटाई और लंबाई वाकई में आकर्षक थी,,, अपनी कमर से साड़ी को खोलते हुए रानी साहिबा सूरज के मोटे तगड़े लंड को ही देख रही थी जो कि सूरज बार-बार उस पर अंगूठा रखकर उसे हिला दे रहा था,,,, साड़ी को खोल कर एक तरफ रखने के बाद जैसे ही रानी साहिबा अपने पेटिकोट की डोरी पर अपनी उंगली रखी वैसे ही सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,)

तुम मेहनत क्यों करती हो रानी साहिबा यह तो मेरा काम है कपड़े उतारने का,,,(पर इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की पेटिकोट की दूरी को अपनी उंगलियों में फंसा कर जोर से खींच लिया और पेटिकोट की डोरी खुल गई पेटिकोट की डोरी खुलते ही कमर पर बंधी हुई पेटिकोट ढीली पड़ गई लेकिन नितंबों के उभार पर टिकी हुई थी जिसे सूरज अपने हाथों से उंगलियों का सहारा लेकर पेटीकोट को कमर के इर्द गिर्द से ढीला करने लगा और जैसे ही पेटिकोट हिली हुई सूरज ने कमर से ही पेटीकोट को नीचे छोड़ दिया पेटिकोट भर भरा कर रानी साहिबा के कदमों में जाकर सूरज की तरह रानी साहिबा भी कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लालटेन की पीली रोशनी में दोनों का बदन सोने की तरह चमक रहा था,,,, रानी साहिबा की नंगी होते ही सूरज उसका हाथ पकड़ कर फिर से उसे अपनी तरफ खींचकर बाहों में भर लिया। और अपनी दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखें जोर-जोर से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया नंगी हो जाने के बाद सूरज का नंगा लंड उसकी बुर के मुहाने पर ठोकर मारने लगा और यह ठोकर रानी साहिबा को मदहोश कर रही थी रानी साहिबा से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे से अपना हाथ सूरज के लैंड पर रख दिया और उसके सुपाडे को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर रगड़ना शुरू कर दी रानी साहिबा की हरकत को देखकर सूरज समझ गया था की रानी साहिबा लंड को बुर में लेना चाहती है लेकिन सूरज अभी कुछ और जाता था रानी साहिबा को और तड़पाना चाहता था इसलिए वह तुरंत रानी साहिबा को अपनी गोद में उठा लिया और चलते हुए उसे ले जाकर के उसके नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, रानी साहिबा का दिल जोरों से धडक कर रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, रानी साहिबा को लग रहा था कि सूरज जब उसकी चुदाई करेगा लेकिन वह नहीं जानती थी कि सूरज औरत को पूरी तरह से तड़पनेा के बाद ही उसकी बुर में लंड डालता था,,, सूरज धीरे-धीरे घुटनों के पास नरम गद्दे पर आगे बढ़ता हुआ देखते-देखते उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी टांगों को थोड़ा सा और खोलकर उसकी गुलाबी बुर की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा यह देखकर रानी साहिबा शर्म से अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,, रानी साहिबा का शर्माना देखकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और वह रानी साहिबा के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए अपने प्यास होठों को तुरंत उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से सटा दिया,,,,,,।

सूरज की हरकत पर रानी साहिबा के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,

सहहहहहहहह सहहहहहहवआहहहहहहह,,,,,।

(इस आवाज को सुनकर सूरज और ज्यादा मदहोश हो गया और रानी साहिबा की बुर को पूरी तरह से मुंह में भरकर उसे चूसना और चाटना शुरू कर दिया रानी साहिबा की बुर पहले से ही उत्तेजना से पानी छोड़ रही थी उसके मदन रस के नमकीन स्वाद को पकड़ सूरज एकदम से पागल हो गया उसकी मोटी मोटी जांघों म को दोनों हथेलियां में दबोच कर और ज्यादा फैलाते हुए जितना हो सकता था उसमें अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, सूरज की यह हरकत रानी साहिबा के होश उड़ा रही थी,,,, रानी साहिबा को मजा आ रहा था वह उत्तेजना से बिस्तर पर तड़प रही थी ना सर पटक रही थी सूरज बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह पूरे जोश के साथ रानी साहिबा की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, सूरज बुर के उपर अपनी जीभ घूमा रहा था उसके रेशमी झांट के बाल को भी मुंह में लेकर चूस रहा था। उत्तेजना से रानी साहिबा बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी और सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पड़कर उसे स्थिर किए हुए था देखते ही देखते रानी साहिबा का बदन अकड़ने लगा उसके मुंह से सिसकारी की आवाज बड़ी तेजी से निकलने लगी और फिर उसकी बुर से भर भरा कर मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, लेकिन सूरज रानी साहिबा की बुर से अपने होंठ को बिल्कुल भी अलग नहीं किया,,, रानी साहिबा की बुर से निकलने वाली मदन रस की एक बूंद को सूरज अपनी जीभ से चाट चाट कर अपने गले के अंदर उतारता चला गया,,, बिना चुदवाए ही रानी साहिबा झड़ चुकी थी,,,, सूरज अपनी जीभ की ही कलाबाजी दिखाकर उसका पानी निकाल दिया था,,,।

सूरज धीरे से अपने होठों को रानी साहिबा की बुर से अलग किया उसके हाथ से रानी साहिबा के मदन रस की धार टपक रही थी जिसे देखकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान थी संतुष्टि का एहसास था उसका चेहरा उत्तेजना से तम तमा रहा था,,,, रानी साहिबा की गहरी चलती सांस के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज मुस्कुरा रहा था सूरज होठ पर अपनी जीभ फिराता हुआ बोला,,,)

बहुत नमकीन पानी है तुम्हारा,,,,।

धत्,,,,,,,(रानी साहिबा फिर से शरमाते हुए बोली सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

अब आएगा असली मजा अब देखना कैसे मेरा लंड तुम्हारी बुर में जाता है आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,।

आराम से कहीं राजा साहब को पता ना चल जाए कि उनकी गैरहाजरी में उनकी रानी किसी और राजा की दीवानी हो गई है,,,,।

पता चलता है तो चल जाए मैं किसी से डरता नहीं ऐसा होगा तो मैं तुम्हें भगा कर ले चलूंगा किसी और देश में,,,,।


अच्छा बच्चु यह बात है,,,,।

बच्चु मत कहो चोद कर तुम्हें बच्चे की मां बना सकता हूं,,,,।

ओहहह क्या बात है इतना गुरूर है तुम्हें अपनी मर्दानगी पर,,,,।

असली मर्दानगी तुमने देखी कहां हो,,,।

तो दिखाओ मेरे राजा यह रानी भी मेरे राजा की मर्दानगी देखने के लिए तड़प रही है,,,,(रानी साहिबा जानबूझकर सूरज इस तरह की बात कर रही थी उसे उकसाकर उसे जबरदस्ती चुदाई की अपेक्षा जो रखती थी और सूरज भी उसकी बात में मस्त होकर उसके दोनों टांगों को खोलकर उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी जांघों पर चढ़ा दिया और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी बुर मदन रस के कारण पानीयाई आई हुई थी,,,, इसलिए सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसके बुरे में जाने में ज्यादा समय नहीं दिया वैसे भी शाम को ही हुआ रानी साहिबा की बुर में अपना लंड डाल चुका था इसलिए उसे रानी साहिबा की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका था। धीरे-धीरे करके सूरज अपने पूरे लंड को रानी साहिबा की बुर में उतार चुका था,,,, एक बार पूरा लंड बुर में घुस जाने के बाद सूरज मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देखने लगा रानी साहिबा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके बच्चेदानी तक पहुंच गया था इसलिए वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी। सूरज को पूछने की जरूरत नहीं थी कि बुर में लंड गहराई तक घुसा है कि नहीं क्योंकि रानी साहिबा का चेहरा सब कुछ बता रहा था।

दोनों टांगों को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसे फैला कर रखे हुए सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया रानी साहिबा की चुदाई शुरू हो चुकी थी जैसे-जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था वैसे-वैसे रानी साहिबा के चेहरे के हाव भाव बदलते जा रहे थे सूरज की कमर की रफ्तार बढ़ती जा रही थी धीरे-धीरे वह रानी साहिबा की चुदाई बड़ी तेजी से करना शुरू कर दिया था हर धक्के के साथ रानी साहिबा के होश उड़ जा रहे थे क्योंकि हर एक धक्का रानी साहिबा की बच्चेदानी से जाकर टकरा जा रहा था,,,, वैसे भी सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। बिना कहे उसकी गहराई तक बच्चेदानी तक पहुंचना जायज था,,,, लेकिन रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,, सूरज उसकी दोनों टांगों को फैलाए हुए जी जान से मेहनत कर रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,, लेकिन सूरज अभी भी टिका हुआ था रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी उसकी बुर के धागे खुल चुके थे वह कभी सोच नहीं थी कि कोई इस तरह से भी चुदाई करता होगा इतनी रगड और तेज तर्रार उसे अपने पति के साथ भी महसूस नहीं हुई थी। बेरहमी से चोदने में सूरज राजा साहब से एक कदम आगे था लेकिन दोनों में फर्क था क्योंकि राजा साहब औरतों की कदर नहीं करता था और सूरज औरत का सम्मान करता था औरत की जरूरत को पूरा करता था और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि औरत को कैसे मजा आता है इसीलिए तो बड़ी बैरहमी से चुदवाने के बाद भी रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,,,, सूरज की कमर बड़ी तेजी से हटाई थी इतनी रफ्तार उसने राजा साहब में भी कभी नहीं देखी थी लेकिन मजा भी उतना ही आ रहा था उसकी गर्मा गर्म सिसकारी की आवाज भी ठीक से मुंह से नहीं निकल पा रही थी क्योंकि सूरज उसे अपनी बाहों में कस लिया था और उसके होठों पर अपनी होंठ रखकर उसके लाल-लाल होठों पर आसमान करते हुए अपनी कमर को बड़ी तेजी से हिला रहा था। एक बार फिर से रानी साहिबा का बदन अकडने लगा वह झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी यही हाल सूरज का भी था सूरज भी अपने चरम पर पहुंच चुका था इसलिए एकदम से उसे अपनी बाहों में दबोचता हुआ अपनी कमर को जोर से पटकन शुरू कर दिया और फिर देखते ही देखते 10 15 धक्के बाद दोनों भल भला कर झड़ने लगे।


कुछ देर तक सूरज रानी साहिबा पर ही लेता है क्या और फिर जैसे ही दोनों की सांसे दुरुस्त हुई सूरज धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा की बुर से बाहर निकाला लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी वह खड़ा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे लेकिन रानी साहिबा को बड़ी जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,,, रानी साहिबा धीरे से बिस्तर से नीचे उतर गई और एक चादर को अपने बदन पर लपेटने लगी तो सूरज चादर को खींच लिया और बोला।

अभी तो सारी रात मजा करना है,,, अभी से कहां जा रही हो।

मुझे जाना पड़ेगा क्योंकि रोका नहीं जा रहा है,,,।

(रानी साहिबा का बदन कसमसा रहा था वह बार-बार अपने पैर के अंगूठे पर खड़ी हो जा रही थी यह देखकर सुरज समझ गया कि उसे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है और वह मुस्कुराता हुआ बोला,,)

ऐसा कहो ना की मुतने जाना है,,,।

धत्,,,,, ऐसा कहने में मुझे शर्म आती है।

नंगी होकर चुदवा रही हो तब शर्म नहीं आ रही है।

तू बड़ा बेशर्म है इस तरह की बातें करेगा तो फिर दोबारा कभी तुझे करने नहीं दूंगी।

नहीं नहीं ऐसा मत करना रानी साहिबा मैं अपनी गलती के लिए क्षमा मांगता हूं तुम्हारे बिना तो अब मेरा दिल नहीं लगेगा चलो मैं तुम्हें लेकर चलता हूं कहां चलना है,,,,,।

कपड़े तो पहन लेने दे,,,।

इतनी रात को कोई जाग नहीं रहा होगा,,,, ऐसे ही चलते हैं मजा आएगा,,,,।

नहीं नहीं कोई देख लिया तो,,,।


कोई नहीं देखेगा रानी साहिबा चारों तरफ अंधेरा ही तो है आ जाओ मेरे साथ,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज बिस्तर से नीचे उतरा और आगे आगे चलने लगा हुआ भी पूरी तरह से नंगा था रानी साहिबा भी पूरी तरह से नंगी थी सूरज को इस तरह से चला देखकर उसका भी हौसला बढ़ने लगा और वह भी सूरज के पीछे-पीछे चलने लगी सूरज ने धीरे से बिना शोर के दरवाजा खुला और बाहर इधर-उधर देखने लगा चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था अंधेरा छाया हुआ था इसलिए बिना दिक्कत के हुआ कमरे से बाहर निकल गया उसके पीछे-पीछे रानी साहिबा भी कमरे से बाहर निकल गई वह पूरी तरह से नंगी थी उसे अजीब सा एहसास हो रहा था सूरज ने धीरे से बोला,,,)

किस तरफ चलना है,,?

(रानी साहिबा बिना कुछ बोले उंगली के इशारे से ही दूसरी तरफ इशारा करने लगी और सूरज मुस्कुरा कर आगे आगे चलने लगा और रानी साहिबा पीछे-पीछे नंगेपन के हिसाब से उसके बाद में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, देखते देखते सूरज एक खुली छत के पास पहुंच गया जहां पर एकदम अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से हल्का उजाला दिखाई दे रहा था,,, दूसरी तरफ खेत ही खेत दिखाई दे रहे थे यहां पर किसी की नजर पहुंचने वाली नहीं थे सूरज समझ गया था कि यहीं पर पेशाब करती है रानी साहिबा इसलिए वह रानी साहिबा से बोला,,,)

यही बैठ जाओ रानी साहिबा,,,।

तुम्हारे सामने,,,,!

तो क्या हुआ मैं भी तो देखो रानी साहिबा कैसे पेशाब करती है,,,,।

धत् मुझे शर्म आती है,,,।

शर्माओगी तो एक अच्छा खासा अनुभव हाथ से निकल जाएगा,,,,।

(सूरज की आवाज सुनकर रानी साहिबा भी उसकी बात मानते हुए दो कदम आगे गई और सूरज के सामने ही बैठ गई और पेशाब करने लगी जैसे ही बुर से सिटी की मधुर ध्वनि सूरज के कान में पड़ी सूरज समस्या की रानी साहिबा पेशाब कर रही है वह इस पल के अनुभव में उत्तेजना में मदहोश होने लगा,,, उसे रहा नहीं दिया और भाभी रानी साहिबा के बगल में जाकर खड़ा हो गया और पेशाब करने लगा पुरानी साहिब अपने पास में ही सूरज को खड़े होकर पेशाब करता देखकर एकदम से मदहोश होने लगी मस्त होने लगी,,, रानी साहिबा के लिए यह एक अलग ही अनुभव था उसने आज तक इस तरह की हरकत अपने पति के सामने नहीं की थी लेकिन सूरज के सामने वह विवस हो गई थी क्योंकि सूरज ने जिस तरह का आनंद उसे दिया था इसलिए सूरज की हर एक बात मानना जरूरी हो गया था और उसे विश्वास हो गया था कि सूरज जो कुछ भी कहता है उसमें उसके लिए मजा ही मजा है,,,, सूरज पेशाब कर चुका था लेकिन इसलिए सूरज बिना कुछ बोल रानी साहिबा का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और पास के ही दीवार से सटाकर एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी जांघ को अपने कंधे पर रखकर उसकी बुर पर अपनी होंठ लगा दिया जिस पर अभी पेशाब की बूंदे लगी हुई थी लेकिन बिल्कुल भी परवाह किए बिना सूरज उसकी बुर को चाटने शुरू कर दिया और यह देखकर रानी साहिबा एकदम से गड़बड़ हो गई क्योंकि सूरज इसकी बुरे से निकलने वाली पेशाब की बुंद को चाट रहा था जो कि उसके रेशमी बाल के गुच्छों पर लगा हुआ था,,,,, रानी साहिबा उसे रोक नहीं पाई क्योंकि उसकी हरकत इतनी कामातुर कर देने वाली थी की रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई गरमा गरम सिसकारी लेने लगी,,, सूरज पूरी तरह से रानी साहिबा पर छा चुका था हर एक पल हर एक क्षण उसे मजा ही मजा दे रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह से रानी साहिबा की बुर चाटने के बाद सूरज भी चुदवासा हो गया था वह धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रानी साहिबा को दीवार के सहारे घूमारर खड़ी कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड को अपनी तरफ खींच लिया सूरत से रहने जा रहा था सूरज अपने मोटे-मोटे लंड को एक बार फिर से उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया। और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक की दोनों एक साथ झड़ नहीं गए रानी साहिबा कभी सपने कभी नहीं सोची थी कि गांव के लड़के के साथ उसे इतना मजा आएगा गांव का लड़का एक ही दिन में उसे पूरी तरह से छिनार बना दिया था झरने के पास घर के अंदर और घर के बाहर हर जगह मौका मिलते ही सूरज उसकी बुर में लंड डाल दे रहा था। दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र रहे थे बाहर चुदाई करने के बाद वालों कमरे में आ गए और यह सिलसिला सुबह तक चलता रहा सुबह होने वाली थी तभी रानी साहिबा अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे में चली गई और सुबह सूरज को जगाने के लिए कुंवर को भेजी किसी को खनखन खबर तक नहीं पड़ी की रानी साहिबा रात भर सूरज के साथ मिलकर कौन सा गुल खिलाई थी। सुबह भी खातेदारी करने के बाद रानी साहिबा सूरज को रोकने के लिए बोल रही थी क्योंकि जो मजा सूरज उसे दे रहा था रानी साहिबा सपने में भी नहीं सोची थी कि ऐसा सोचो से मिलेगा अभी भी राजा साहब है को 8 दिन जैसा रह गया था आने में और वह सोच रही थी कि हिंदी में वह जी भर कर अपनी जिंदगी जी ले,,, इसलिए वह बोली,,,,।


यही रुक जाते तो अच्छा था जब तक राजा साहब नहीं आ जाते,,,,।

रुक तो जाता है रानी साहिबा लेकिन घर पर भी मुझे काम है बारिश आने वाली है मुझे छत की मरम्मत करनी है,,,,।

ओहहह यह बात है,,,,,।

तब तो तुम्हें जाना ही होगा रुको,,,,,, तुमने जो ईमानदारी दिखाई है उसके बदले में तुम्हें इनाम तो मिलना चाहिए क्यों कुंवर ठीक कह रही हो ना मैं,,,।


हां दीदी तुम एकदम ठीक कह रही हो भला आजकल के जमाने में कौन ऐसा होगा जो सोने का झुमका मिलने पर भी वापस कर देगा,,,,।

रुको मै अभी आती हूं,,,(इतना कहकर वहां घर के अंदर गई और थोड़ी देर में वापस आई उसके हाथ में कुछ रुपए थे वह सूरज को देते हुए बोली,,,)

अब बिल्कुल भी इंकार मत करना यह मेरी तरफ से मेहमान नवाजी है क्यों कुंवर,,,।


दीदी बिल्कुल सही कह रही है सूरज भैया यह तो तुम्हें लेना ही होगा,,,,,,,,।

ठीक है अब आप दोनों कह रहे हो तो हमें ले लेता हूं लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा है शर्मिंदा कर दिया आप लोगों ने।


शर्मिंदा होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है और आते रहना छत की मरम्मत हो जाए तो एक बार जरूर यहां के चक्कर लगाना तुम्हारे लिए इस हवेली के दरवाजे हमेशा खुले हैं क्यों कुंवर,,,,


बिल्कुल दीदी एक ही दिन में न जाने कैसा रिश्ता हो गया है की मन ही नहीं मानता कि तुम्हें जाने दे।

मन तो मेरा भी नहीं मानता लेकिन घर पर मेरी जरूरत है मैं जरूर आऊंगा,,,(इतना कहकर सूरज हवेली से बाहर निकल गया एक अद्भुत अनुभव लेकर)
 

Kumarshiva

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रानी साहिबा का आमंत्रण सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था। और यह आमंत्रण कोई भोज प्रसंग या रेन बसेरा का नहीं था बल्कि बहुत प्रसंग और रेन बसेरा के आड़ में संभोग प्रसंग का नेता था जिसे सूरज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था,,, क्योंकि इस तरह क्या आमंत्रण बहुत ही किस्मत वाले को ही मिलता है और इस समय सूरज किस्मत का धनी था क्योंकि आए दिन रोज उसे कोई ना कोई खूबसूरत औरत अपना खूबसूरत जवान समर्पित कर दे रही थी और रानी साहिबा की तो बात ही अलग थी वह बड़े जमींदार की बीवी थी और ऐसे जमीदार की बीवी को चोदने का सिर्फ कल्पना ही किया जा सकता है हकीकत में किस्मत का साथ होना जरूरी है। और इस समय किस्मत का साथ सूरज के साथ था। कुंवर और उसकी बहन बहुत खुश नजर आ रहे थे। कुंवर को यह आवाज तक नहीं था कि सूरज उसकी बहन के बीच बहुत कुछ घटित हो चुका है वह तो इसे एक मेहमान के तौर पर ही देख रहा था जो की कान का झुमका देकर बहुत बड़ा उपकार किया था लेकिन इस उपकार के बदले में कुंवर की बहन में अपनी जवानी सूरज के कदमों में न्योछावर कर दी थी इस बात का अंदाजा कुंवर को बिल्कुल भी नहीं था।

सूरज के रुकने की वजह से आज भोजन में खीर पुरी दो तरह की सब्जी और मिठाई का प्रबंध किया गया था अभी भोजन का समय नहीं हुआ था और सूरज को कुंवर उसके कमरे में लेकर गया था जहां पर आज उसे रात रुकना था ‌।

कैसा लगा सूरज आपको यह कमरा,,,, (वैसे तो कुंवर अच्छी तरह से जानता था कि आज नहीं तो कल सूरज उसका साला बनने वाला है और वह कुंवर से बड़ा था इसलिए उसे भैया कहने का मन कर रहा था लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू किया हुआ था क्योंकि वह सूरज के मन में शंका नहीं होने देना चाहता था कि कुंवर और उसकी बहन के बीच कुछ चल रहा है,,,,)

बहुत अच्छा मैं कभी सोचा नहीं था कि मैं इस तरह के आलीशान कमरे में रात रुकूंगा,,,, (खिड़की से बाहर देखा हुआ सूरज बोल खिड़की के बाहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत आचारों तरफ दूर-दूर तक खेती खेत दिखाई दे रहे थे आसमान में चांद अपनी चांदनी बिखेर रहा था। कुंवर भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा हुआ बहुत खुश था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर सूरज को खुश कर लिया तो वह खुशी-खुशी अपनी बहन का हाथ उसके हाथ में दे देगा,,,,, सूरज की बात सुनकर कुंवर बोला)


मुझे भी यह नजारा बहुत अच्छा लगता है मैं घंटे बैठकर अकेले ही यह सब देखता रहता हूं,,,,।


अच्छा जीवन है तुम्हारा ,,,,(कुंवर की तरफ देखकर सूरज बोला)


मुझे तो ऐसा नहीं लगता,,, बस आजादी है आजादी तो तुम्हें भी है कहीं भी घूम सकते हो कहीं भी आ सकते हो जा सकते हो मेरे और तुम्हारे जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है,,,।

(कुंवर की आवाज सुनकर सूरज कुछ बोला नहीं बस मुस्कुराने लगा कुछ देर तक और दोनों की बातचीत चली,,,, भोजन का समय हो गया था भोजन करने के लिए रानी साहिबा खुद कमरे तक आई और अपने भाई और सूरज दोनों को भोजन करने के लिए बुलाकर ले गई,,,, तीनों साथ मिलकर भोजन कर रहे थे इस बीच भोजन करते हुए सूरज की नजर बार-बार रानी साहिबा पर चली जा रही थी रानी साहिबा के समीप रहकर उसकी काम भावना बार-बार जागरूक हो रही थी और यही हाल रानी साहिबा कभी था वह अपने भाई के सोने का इंतजार कर रही थी लेकिन अभी इसमें बहुत समय था क्योंकि अभी तो तीनों भोजन कर रहे थे,,,, रानी साहिबा को इस बात कहे संस्था की सूरज में जो बात थी वह उसके पति में नहीं थी उसका पति उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाता था जिससे उसे बिल्कुल भी आनंद नहीं आता था लेकिन सूरज एक मर्द की तरह औरतों के साथ संबंध बनाता था जिसमें वह पूरी तरह से मदहोश हो जाती थी। पहली बार की चुदाई में ही सूरज ने रानी साहिबा को पूरी तरह से अपना दीवानी बना दिया था। दोनों एक दूसरे को कनखियो में देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे,,, भोजन करते हुए रानी साहिबा सूरज से बोली,,,)

अरे सूरज,,,, थोड़ा और खीर लो,,,,

नहीं नहीं बस इतना काफी है मेरे लिए,,,।

अरे ऐसे कैसे,,,, थोड़ा तो और लेना पड़ेगा,,, (इतना कहते हुए रानी साहिबा खुद बर्तन में से बड़ा चम्मच भरकर खीर सूरज की थाली में गिराने लगी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) आज की रात तुम हमारे मेहमान हो और हमारे वहां मेहमान को भगवान मानते हैं बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रखते,,,,,.


रानी साहिबा यह तो आप लोगों का बड़प्पन है वरना हम लोग आपके मेहमान नवाजी के लायक कहां,,,।

कैसी बात कर रहे हो सूरज हमारे और तुम्हारे में कोई फर्क नहीं है मैं तो तुम्हें अपना बड़ा भाई की तरह मानता हूं,,,,,,

हां कुंवर सच कह रहा है ,,,, 2 दिन की मुलाकात में ऐसा लगता ही नहीं है कि तुम कोई पराए हो अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे तुम अपने ही हो,,,,,।

यह सुनकर तो रानी साहिबा मेरा दिल गद गद हो गया ,,,,, मैं कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े खानदान से मुझे इतनी इज्जत मिलेगी,,,,।

हमारे साथ रहोगे तो इसी तरह से मौज करोगे।

यह बात है तब तो हादसे में आप लोगों का हो गया जब भी मेरी जरूरत पड़े तब मुझे बुला लेना,,,, मैं हमेशा आप लोगों का साथ दूंगा,,,,।

वादा,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

पक्का वादा सूरज की यही खासियत है एक बार वादा कर लेता है तो जान दे देता है लेकिन अपना वादा नहीं तोड़ता,,,,

हमममम यह हुई ना बात पहली बार कोई सच्चा साथी मिला है,,,,,, (रानी साहिबा मुस्कुराते हुए बोली,,,, रोशनी के लिए चारों तरफ लालटेन चल रही थी जिसकी पीली रोशनी में रानी साहिबा का खूबसूरत मुखड़ा और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था,,,, थोड़ी देर में तीनों खाना खा चुके थे,,,, सूरज के लिए जो कमरा नियुक्त किया गया था सूरज इस कमरे में चला गया और खिड़की के पास कुर्सी पर बैठकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रहा था वह बड़ी बेसब्री से रानी साहिबा का इंतजार कर रहा था क्योंकि पेट की आज तो भोजन से शांत हो चुकी थी लेकिन की आग बुझाने के लिए जवानी से भरी हुई औरत का साथ होना जरूरी था जो कि अभी उसके पास नहीं थी लेकिन कुछ ही देर में बिस्तर पर उसका साथ देने के लिए तैयार हो रही थी रानी साहिबा भी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी कुंवर के सो जाने का,,,,, वैसे भी नौकर लोग अपनी-अपने में जाकर सो गए थे लेकिन कुंवर कुछ देर सूरज से बात करने के लिए रानी साहिबा से पूछ कर सूरज के कमरे में गया था,,,, कुंवर को अपने कमरे में आज देखकर सूरज को मन ही मन बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकता था ना चाहते हुए भी थोड़ी देर तक कुंवर से इधर-उधर की बातें करता रहा और फिर कुंवर को नींद आने लगी,,, कुंवर आलस मरोड़ते हुए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और सूरज से बोला,,)

मुझे तो बहुत नींद आ रही है मैं सोने जा रहा हूं अब तुम भी सो जाओ रात काफी हो चुकी है,,,,।

मुझे भी नींद आ रही है,,,, दिनभर ईधर उधर घूम कर थक गया हूं,,,,,, (सूरज भी जम्हाई लेता हुआ बोला,,,, कुंवर कमरे से बाहर जा चुका था सूरज धीरे से दरवाजे के पास आए और दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन अंदर से कड़ी नहीं लगाया क्योंकि उसे पूरा विश्वास था की रानी साहिबा जरूर उसके कमरे में आएगी क्योंकि वह भी कुंवर के जाने का इंतजार कर रही होगी और वैसे भी रानी साहिबा का कमरा उसके बगल में ही था,,,, सूरज फिर से गरम आहे भरता हुआ खिड़की के पास जाकर बैठ गया और बाहर का नजारा देखकर रानी साहिबा का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा इस बार उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा जल्द ही दरवाजा खोलने की आवाज के साथ सूरज दरवाजे की तरफ देखने लगा तो देखा रानी साहिबा इधर-उधर देखते हुए उसके कमरे में प्रवेश कर रही थी पर जैसे ही कमरे में प्रवेश की वह दरवाजा बंद करके दरवाजे की कड़ी लगा दी,,,,,, रानी साहिबा को देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, क्योंकि एक जमींदार की खूबसूरत बीवी आधी रात को उसके कमरे में उससे चुदवाने के लिए आ रही थी,,,, रानी साहिबा को देखकर खुश होता हुआ सूरज बोला,,,)

बड़ी देर लगा दी कब से इंतजार कर रहा हूं,,,, ।

क्या करूं कुंवर जाग रहा था,,,, मैं भी तो तुमसे मिलने के लिए कब से बेकरार थी।

इतनी बेकरारी किस लिए रानी साहिबा दिन में ही तो जमकर चुदवाई थी,,,,।

(चुदवाई वाली बात सूरज के मुंह से सुनकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई,,,, क्योंकि रानी साहिबा आपके कदम भले ही बैठ गए थे लेकिन वह मर्यादा में रहने वाली औरत थी,,, पति की बेरुखी की वजह से उसके कदम लड़खड़ा गए थे अगर उसे उसका पति अच्छी तरह से समझता तो शायद वह सूरज के साथ कभी भी संबंध नहीं बनाती लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता था कि पति ने उसे एक खिलौना ही समझा था अगर उसे एक औरत समझकर के साथ प्यार करता है तो शायद वह तन से प्यासी ना रही थी और सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए वह प्रेरित ना होती। इसलिए वह सूरज से बोली,,,)

धत् इस तरह की बात मत किया करो मुझे शर्म आती है,,,,।(ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे सूरज के करीब पहुंच गई रानी साहिबा कि यह अदा सूरज को एकदम से भा गई वह तुरंत रानी साहिबा का हांथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला)

हाय मेरी रानी तुम्हारा इस तरह से शर्माना ही तो मेरी जान ले लेता है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह रानी साहिबा को अपनी गोद में बैठा लिया रानी साहिबा की एकदम दर्द हो गई उसके होठों के करीब ले गई सूरज में एकदम से उसके होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई उसकी सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी,,, सूरज के पास पर्याप्त समय था इसलिए वह किसी के प्रकार की जल्दबाजी दिखाने नहीं चाहता था क्योंकि आज की रात वह राजा साहब की बीवी की जवानी के साथ जी भरकर खेल लेना चाहता था,,,, लाल-लाल होठों को चूसते हुए वह ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया था,,, सूरज को रानी साहिबा के लाल लाल होंठ चूसने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था रानी साहिबा भी दिल खोलकर सूरज पर अपनी जवानी लूटा रही थी,,, उत्तेजना के मारे ब्लाउज में कैसे रानी साहिबा की चूची का कद बढ़ने लगा था वह धीरे-धीरे कठोर होना शुरू हो गए थे,,,, रानी साहिबा जिस तरह से सूरज की गोद में बैठी हुई थी सूरज के पजामे के अंदर उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है जो कि अब पूरी तरह से खड़ा होकर रानी साहिबा की गांड में चुभने लगा था,, रानी साहिबा सूरज के लंड की चुभन को अपनी गांड की दरार में अच्छी तरह से महसूस कर रही थी ‌। यह चुभन उसे पानी पानी कर रहा था वह सूरज की गोद में कम से रही थी उसकी भारी भरकम गोलाकार गांड सूरज की गोद में इधर-उधर हो रही थी जिसकी वजह से बार-बार सूरज का लंड पजामे में होने के बावजूद भी उसकी गांड के दरार में घुसने का प्रयास करने लगता था,,, यह देखकर सूरज चुंबन को तोड़ते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला।)

देख रही हो रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारी मैदान में दौड़ने के लिए कितना बेताब है,,,,।

देख रही हूं और महसूस भी कर रही हूं अपने घोड़े को थोड़ा संभालो समय आएगा तो अपने आप मैदान का द्वार खोल दिया जाएगा इतनी तड़प अच्छी नहीं है,,,।

अब कर भी कर सकते हैं रानी साहिबा मेरा घोड़ा तुम्हारे मैदान का दीवाना हो गया है जब तक तुम्हारे मैदान की घास नहीं खाएगी तब तक इसका पेट नहीं भरेगा,,,,।

तब तो अपने घोड़े को कह दो कि थोड़ा और इंतजार कर ले क्योंकि उसे पर पानी पड़ेगा तो घास और हरी हो जाएगी तब खाने में और ज्यादा मजा आएगा,,,,।

हाय मेरी रानी मेरा घोड़ा अगर मेरी बात समझता तो इतना बेताब ना होता,,, मेरा घोड़ा पर लगा में है कहीं भी इसका इनाम फिसल जाता है,,,।

बेलगाम घोड़े ही मुझे ज्यादा पसंद है मुझे मालूम है कि बेलगाम घोड़े पर कैसे काबू पाया जाता है,,,,,।

कैसे काबू पाया जाता है,,, जरा बताना तो मेरे घोड़े को,,,,,।

धीरे-धीरे पता चल जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही रानी साहिबा फिर से सूरज के होठों को अपने होंठ में ले ली और होठो का रसपान करना शुरू कर दी,,,, सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो चुका था धीरे से अपने दोनों हाथों को फिर से चुची पर ल गया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया माहौल पूरी तरह से गर्म होता चला जा रहा था,,,,, वातावरण में गर्मी बिल्कुल भी नहीं थी खिड़की से चल रही ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने का भरपूर प्रयास कर रही थी लेकिन रानी साहिबा की गर्म जवानी वातावरण की ठंडक को जवानी की आग में झुलसा दे रही थी,,,, कुछ देर तक इसी तरह से दोनों का चुंबन और स्तन मर्दन का कार्य चलता रहा रानी साहिबा की बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी जिससे उसका पेटिकोट गीला हो चुका था,,, अब रानी साहिबा ईस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी,,,, रानी साहिबा जैसा अपने मन में सोची थी ठीक उसी तरह से सूरज उसकी सोच के मुताबिक आगे बढ़ रहा था बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखाना था और यही चाहती थी उसकी चुदाई करके या तो लेट गया होता या तो कमरे से बाहर निकल गया होता लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था इतनी देर से अपनी गोद से लेकर सिर्फ उसकी जवानी से ऊपर ही ऊपर से खेल रहा था फिर भी वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था ,,,, रानी साहिबा कोई इस बात का एहसास हो रहा था कि सूरज को औरत के जिस्म से खेलना अच्छी तरह से आता है,,,,, चुंबन को तोड़ते हुए रानी साहिबा धीरे से सूरज की गोद से उठकर खड़ी हो गई,,,,, सूरज गहरी सांस लेता हुआ रानी साहिबा को देखता रहा और रानी सागर मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखते हुए मादक चाल चलते हुए खिड़की पर आकर खड़ी हो गई,,,, खिड़की से ठंडी ठंडी हवा का झोंका पूरे कमरे को ठंडक दे रहा था जिसमें रानी साहिबा के रेशमी बाल की लहर रहे थे रानी साहिबा खिड़की पर हाथ रखकर खड़ी थी और नजर पीछे की तरफ घूमा कर सूरज की तरफ देख रही थी सूरज भी मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देख रहा था,,, लेकिन सूरज की नजर चेहरे पर काम रानी साहिबा की गोलाकार गांड पर ज्यादा टिकी हुई थी,,,,।

इसलिए मौका देखकर रानी साहिबा अपनी गोलाकार गांड को गोल-गोल करके हल्के घूमाना शुरू कर दी ,, कश्मीरी साड़ी में रानी साहिबा की मदहोश कर देने वाली गांड कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुई थी जिसे देखकर सूरज का मन देखने लगा वह मदहोश होने लगा था उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंच चुकी थी और वह तुरंत कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड पर रखकर सहलाने लगा और उस पर चपत लगाने लगा,,,, सूरज की हरकत से मदहोश होती हुई रानी साहिबा अपनी गांड को और पीछे की तरफ उभार कर खड़ी हो गई,,,, और अपनी हाथ की कोनी को खिड़की पर रखकर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी रानी साहिबा की यह आधा देखकर सूरज से रहा नहीं किया और सूरज अपनी जगह से उठकर खड़ा हो जा खड़ा होते ही पजामे में उसका तंबू एकदम से नजर आने लगा जिसे देखकर रानी साहिबा मुस्कुरा दी और बोली।

तुम्हारा घोड़ा तो पागल हुआ जा रहा है,,,,।

इसमें इसकी गलती नहीं है रानी साहिबा,,,,(एकदम पुरानी साइकिल के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर) जब आंखों के सामने इतनी मस्तानी घोड़ी,,(दोनों हाथ से गांड पर चपत लगाते हुए) देखेगा तो घोड़ा तो पागल होगा ही,,,, ।

ऊमममम यह बात है,,,, घोड़े को पता होना चाहिए की मस्तानी घोड़ी तैयार है,,,,।

पता है तभी तो,,,, घोड़ी की सवारी करने के लिए तैयार हो गया है,,,,, बहुत मस्त पिछवाड़ा है रानी साहिबा तुम्हारा कसी हुई साड़ी में तो जान ले लेती है,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने दोनों हाथों को रानी साहिबा के आगे की तरफ लाया और ब्लाउज के ऊपर से ही फिर से चूचियों पर हथेली रखते हुए चूचियों को दबाते हुए रानी साहिबा को सीधी खड़ी कर दिया और पीछे से उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी चूची को दबाते हुए गरदानों पर चुंबन की बारिश कर दिया साड़ी का पल्लू पहले ही कंधे पर से नीचे गिर चुका था सूरज पागल हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी बाहों में जवानी से भरी हुई औरत कसमसा रही थी,,, सूरज रानी साहिबा को पागल किया जा रहा था रानी साहब अपनी गांड की दरार में सूरज के तंबू को महसूस करके उसकी रगड़ से पागल हुए जा रही थी उसकी बुर लगातार पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,, सूरज लगातार चूचियों को दबाता हुआ धीरे से रानी साहिबा के कान में बोला,,,।)

बाहर देख रही हो कितना खूबसूरत नजारआ है रात को ऐसा नजारा देखते हुए चुदाई करने का मजा ही कुछ और है,,, तुम तो रोज मजे ले लेकर राजा साहब से चुदवाती होगी,,,,,।

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,, तुम्हारे जैसा साथी हो तो ऐसे नजारे को देख कर चुदवाने का मजा आता है,,,, राजा साहब तुम्हारी तरह प्यार नहीं कर पाए वह तो बस लटके और चढ़ गए पानी निकला और निकल गए,,,,।
(रानी साहिबा की यह बात सुनकर सूरज को हंसी आ गई,,,,, यह देखकर रानी साहिबा बोली)

मेरी हालत पर तुमको मजाआ रहा है,,,।

मजा नहीं आ रहा जिस तरह से तुम बोले इसलिए हंसी आ गई और वैसे भी मुझे विश्वास नहीं होता कि राजा सारी इतनी खूबसूरत औरत के साथ सिर्फ मनमानी करते होंगे मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हें जी भरकर बिस्तर पर प्यार करते होंगे।

अगर ऐसा होता तो मैं अंदर से प्यासी ना होती तुम्हारे साथ जिस्मानी ताल्लुकात ना बनाई होती,,,,।
(सूरज इस बात से अंदर ही अंदर खुश हो रहा था कि राजा साहब रानी साहिबा को जिस्मानी सुख नहीं दे पाते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करके चला जाता है लेकिन इस बारे में इस समय बहस करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था सूरज मजा को किरकिरा नहीं करना चाहता था इसलिए बात का रुख बदलते हुए बोला,,)

छोड़ो वो सब आज की रात तो तुम मेरे साथ हो आज देखने में तुम्हें ऐसा मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(ऐसा कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की चूचियों पर से अपना हाथ हटाकर धीरे से अपने हाथ को साड़ी के ऊपर ले आया और साड़ी को दोनों तरफ से दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया रानी साहिबा फिर से उत्तेजना से गदगद होने लगी और सूरज फिर से रानी साहिबा के गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया सूरज के होठ जहां-जहां पडते थे वहां-वहां से रानी साहिबा गनगना जाती थी,,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी और सूरज अपनी हरकतों से उसकी हालत को और ज्यादा खराब करता चला जा रहा था अभी तक सूरज ने रानी साहिबा के बदन को ऊपर से ही टटोला था अभी तो उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी करना बाकी था। देखते देखते सूरज रानी साहिबा की साड़ी को कमर तक उठा दिया था उसकी नंगी गांड चांदनी रात और लालटेन की पीली रोशनी के मिले-जुले रंग में और भी ज्यादा खूबसूरत और और भी ज्यादा चमक रही थी सूरज दोनों हाथों रानी साहिबा की गांड की दोनों फांकों को पकड़ कर जोर-जोर से दबोच कर मसल शुरू कर दिया,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोश होता हुआ बोला)

ओहहहहह मेरी रानी मैं तो पागल हो जाऊंगा कितनी खूबसूरत गांड है तुम्हारी,,,,ऊमममममम झरने के पास तो जी भर कर तुम्हारे जिस्म से खेल नहीं पाया था लेकिन अब नहींछोडूंगा,,,(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और रानी साहिबा की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दबाने लगा , दबोचने लगा मसलने लगा जैसे हो सकता था उसे तरह से सूरज रानी साहिबा की नंगी गांड से मजा ले लेना चाहता था,,,,, रानी साहिबा भी मस्त होते हुए अपनी गांड का सूरज के हाथों में दे दी थी एक तरह से वह अपनी जवानी को सूरज के दोनों हाथों में परोस दी थी,,,, सूरज से रहा नहीं जा रहा था,,, सूरज कभी सोचा भी नहीं था की रानी साहिबा के साथ वह कभी संबंध बन पाएगा रानी साहिबा की चुदाई करना उसके नसीब में लिखा भी था यह बात सूरज कभी नहीं जानता था लेकिन आज उसे अपनी किस्मत पर गर्व महसूस हो रहा था लिखने वाले ने भी बड़ी फुर्सत से उसकी किस्मत बनाया था गांव की हर एक खूबसूरत औरत उसकी ही गोद में आकर गिर रही थी,,,,, रानी साहिबा की नंगी गांड की दोनों आंखों को दोनों हाथों से पड़कर उसे लगभग फैलाते हुए उसने देखा तो रानी साहिबा की गांड का छोटा सा छेद और उसकी गुलाबी घड़ी एकदम साफ नजर आ रही थी,,, अपनी आंखों के सामने खूबसूरत औरत के दो-दो छेद को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाए और एकदम से अपने होंठ को गांड की दरार में ले जाकर के उसे पर चुंबनों की बौछार कर दिया,,, सूरज की कामातुर कर देने वाली हरकतों से मदहोश होकर रानी सरकार के मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज के सिवा और कुछ नहीं निकल रहा था। सूरज पागलों की तरह गांड की दरार में अपने होठों को डालकर चूम रहा था चाट रहा था और जैसे ही सूरज के होंठ उसकी गांड के छेद के ऊपर पहुंचे और सूरज ने जैसे ही उसे पर चुंबन लेना शुरू किया रानी साहिबा उतेजना से गन गना गई,,,,, वह कभी सोची नहीं थी कि सूरज उसकी गांड के छेद पर चुंबन करेगा,,,, सूरज भी अच्छी तरह से जानता था कि उसके होठ रानी साहिबा के किस अंग पर हैं और उसने यह भी महसूस कर लिया था कि उसे पर होठ रखने से रानी साहिबा के बदन में कंपन होने लगा था।

इसलिए ईस कंपन को महसूस करके, सूरज धीरे से अपनी अजीब को बाहर निकाल कर उसकी गांड के भूरे रंग के छेद पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू कर दिया,,,, इस अद्भुत एहसास में रानी साहिबा पूरी तरह से डूबने लगी वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी इसलिए अपने संपूर्ण वजूद को अपने पैर के अंगूठे पर स्थिर करके वह और ऊपर उठ जा रही थी लेकिन सूरज उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे अपने काबू में किए हुए था वह पागलों की तरह रानी साहिबा की गांड को चाटना शुरू कर दिया था नीचे गुलाबी छेद से उसका मदन रस रसमलाई की तरह टपक रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से रानी साहिबा की गांड को चाटता रहा,,,, लेकिन गांड के छेद को देखकर सूरज के मन में बहुत से ख्याल आ रहे थे वह रानी साहिबा की गांड के छेद का जायजा लेना चाहता था,,,, इसलिए कहा रानी साहिबा को और ज्यादा उत्तेजित करने के हतु अपनी तो उंगली को एक साथ रानी साहिबा की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और गांड की चटाई जारी रखा,,,, सूरज की हरकत से रानी साहिबा के तन बदन में आग लगने लगी वह पागल होने लगी उसके मुख से सिसकारी की आवाज और ज्यादा तेज हो गई लेकिन वह जानते थे कि उसकी सिसकारी की आवाज इस समय और कोई सुन नहीं सकता क्योंकि वह खिड़की के पास खड़ी थी और खिड़की खेत,,,, की तरफ खुलती थी बाकी सबके कमरे रानी साहिबा के कमरे से काफी दूर थे,,, रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी साहिबा को इस समय उसकी बुर में लंड महसुस होना चाहिए था लेकिन सूरज और तो की संगत में अच्छी तरह से पक्का खिलाड़ी बन चुका था और यह बात उसे अच्छी तरह से मालूम थी कि कब लंड को बर के अंदर डालना है इससे पहले वह औरत को काफी हद तक तड़पा देता था। झरने के पास सूरज नहीं जल्दबाजी दिखाते हुए रानी साहिबा की बुर में लंड पेल दिया था क्योंकि सूरज अच्छी तरह से जानता था की रानी उसे समय भावनाओं में बह चुकी थी लेकिन किसी भी वक्त अगर वह अपने आप में हो जाती और उसे लगने लगता है जो कुछ भी हो रहा है गलत हो रहा है तो सूरज दोबारा उसके साथ चुदाई का सुख भोग नहीं पता इसलिए वह जल्दबाजी दिखाता हुआ रानी साहिबा की बुर में लंड डाल दिया था क्योंकि एक बार मर्यादा की दीवार गिर जाए तो वह कभी खड़ी नहीं होती।

रानी साहिबा को अत्यधिक उत्तेजित और तड़पा लेने के बाद सूरज धीरे से रानी साहिबा की बुर से अपनी उंगली निकाल कर, रानी साहिबा की गांड के छेद में उंगली डालने का प्रयास करने लगा लेकिन जैसे ही उसने उंगली को रानी साहिबा की गांड में प्रवेश कराने की कोशिश किया रानी साहिबा एकदम से अपनी गांड को सीकोड कर आगे की तरफ गांड को खींच ली और बोली,,,,।

ना,,,,,,, उसमें नहीं,,,,, तुम्हारा कुछ ज्यादा ही मोटा लंबा है,,,,,।

इसकी मोटाई से डर गई,,,, मजा भी तो ज्यादा देता है,,,।

मैं जानती हूं लेकिन गांड में नहीं बुर में चाहे जितना डाल लो,,,,,।
( रानी साहिबा की बात का सम्मान करते हुए सूरज अपने हाथ को रानी साहिबा की गांड से पीछे खींच लिया और वैसे भी वह समझ गया था की रानी साहिबा की गांड में दम नहीं था उसके लंड कुछ दिखाना उंगली रखते ही उसे एहसास हो गया था की रानी सा की गांड का छेद को ज्यादा ही छोटा था जबरदस्ती करने को तो सूरज कर सकता था लेकिन उसके बाद सूरज के लिए नुकसान था क्योंकि यह सिलसिला वह आगे भी चलने देना चाहता था अपनी गलती से वह इस रिश्ते को यहीं खत्म कर लेना नहीं चाहता था इसलिए रानी साहिबा की बात मानकर वह मुस्कुराहट कर खड़ा हो गया और रानी साहिबा को अपनी तरफ घूमा कर उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया,,, ब्लाउज का बटन खोलते हुए सूरज बोला,,,)

जैसी आपकी मर्जी रानी साहिबा हम तो आपके गुलाम हैं जैसे चाहे वैसे उपयोग कर लो जबरदस्ती करने वाले नहीं है,,,,,(और मुस्कुराता हुआ धीरे-धीरे रानी साहिबा के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया रानी साहिबा सूरज की बात से बहुत खुश हुई क्योंकि सूरज रानी साहिबा की इज्जत करता था जल्दबाजी या जबरदस्ती नहीं करता था यह बात सूरज की रानी साहिबा को बहुत अच्छी लगी थी और यही फर्क था राजा साहिब में और सूरज में कि इतने वर्षों के बाद भी राजा साहब रानी साहिबा के दिल में अपने लिए जगह नहीं बन पाया था और सूरज एक ही दिन में रानी साहिबा पर छा चुका था,,,,, ब्लाउज के सारे बटन खोलने के बाद सूरज धीरे से ब्लाउज को उसकी बाहों से उतार कर नीचे फेंक दिया,,,, रानी साहिबा कमर के ऊपर कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी क्योंकि साड़ी अभी भी कमर में इकट्ठा हुए नितंबों के उभार की वजह से टिकी हुई थी रानी साहिबा की दोनों चूचियों को देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था और सूरज दोनों हाथ आगे बड़ा कर रानी साहिबा की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला,,,,)

यह तो हमारे मुखिया जी के बगीचे के दशहरी आम की तरह है बहुत खूबसूरत और रसीले,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की एक चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया और रानी साहिबा एकदम से गनगना गई,,,,, सूरज बिल्कुल भी कसर बाकी रखना नहीं चाहता था इसलिए बारी-बारी से रानी साहिबा की दोनों चीजों को मुंह में लेकर पी रहा था दबा रहा था, जिस तरह से सूरज बारी-बारी से उसकी दोनों चूचियों को पी रहा था उसे खेल रहा था रानी साहिबा को सूरज की हरकत काफी प्रभावित कर गई थी दोनों चुचियों में से किसी भी चुची के साथ वह जात्ती नहीं कर रहा था दोनों को बराबर का हक दे रहा था,,,, सूरज की हरकतों से मदहोश होकर रानी साहिबा से रहने की और वह अपना हाथ आगे बढ़कर पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ कर दबाना शुरूकर दी,,,, इस समय सूरज का लंड और भी ज्यादा मोटा और लंबा महसूस हो रहा था जिससे रानी साहिबा की बुर पानी पानी हो रही थी,,,, सूरज एक हाथ से अपने पजामे को नीचे कर दिया जिससे रानी साहिबा उसके नंगे लंड से खेल सके,,, नंगा और ग्राम लंड हाथ में आते ही रानी साहिबा की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह जिस तरह से सूरज के लंड से खेल रही थी अपनी हथेली में लेकर दबा रही थी सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसे क्या चाहिए इसलिए वह कुछ देर और रानी साहिबा की चूचियों को पीने के बाद धीरे से रानी साहिबा के कंधे पर दोनों हाथ रखकर उसे दबाव देता हुआ नीचे की तरफ झुकने लगा और रानी साहिबा देखते ही देखते झुकने लगी और अपनी नंगी गांड को खिड़की से सटाकर सूरज के मोटे कपड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी सूरज पागल हुआ जा रहा था,,, रानी साहिबा की हरकतों का आनंद लेते हुए सूरज अपने हाथ को आगे बढ़कर रानी साहिबा की नंगी गांड पर चपत लगाता हुआ मजा ले रहा था,,,

रानी साहिबा सूरज के लंड को चुस चुस कर उसकी धार को बढ़ा रही थी,,,,, उसे अपनी बुर के लिए तैयार कर रही थी,,,,, सूरज दोनों हाथों से रानी साहिबा की गांड को पड़कर उसे दबोच रहा था मसल रहा था उसे पर चपत लगा रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सबको साथ दिखाई दे रहा था और वैसे भी आसमान में चांदनी रात छाई हुई थी जिसकी रोशनी खिड़की से अंदर की तरफ आ रही थी और सब को साफ दिखाई दे रहा था रोशनी में रानी साहिबा के जिस्म के साथ खेलने का मजा ही कुछ और था सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ रानी साहिबा के मुंह को चोद रहा था,,, सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए रानी साहिबा के मुंह में ठीक तरह से समा नहीं रहा था लेकिन फिर भी रानी साहिबा पूरी कोशिश किए हुए थी,,, सूरज जिस तरह से अपनी कमर हिला रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड का सुख रहा है उसके पहले के अंदर तक पहुंच जा रहा था जिससे रानी साहिबा को सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी जो आनंद मिल रहा था उसकी अपेक्षा यह तकलीफ बहुत कम थी। रानी साहिबा सूरज को भी पूरी तरह से खुश करने में लगी हुई थी ऐसा नहीं था कि लंड मुंह में लेकर चूसने में उसे मजा नहीं आ रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा मन कर रहा था कि वह लंड को मुंह से बाहर ही ना निकाले,,, लेकिन खेल को आगे बढ़ाना था इसलिए सूरज ने धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा के मुंह से बाहर खींच लिया और गहरी सांस लेता हुआ बोला।

बहुत मस्त चुसती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने कुर्ते को उतारने लगा और देखते ही देखते रानी साहिबा के सामने एकदम नंगा हो गया नंगा होने के बाद सूरज का बदन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था लालटेन की पीली रोशनी में इसकी चौड़ी छाती देखकर रानी साहिबा की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी,,,,, सूरज की टांगों के बीच उसका मोटा तगड़ा लंड छत की तरफ मोटा ही खड़ा था उसकी मोटाई और लंबाई वाकई में आकर्षक थी,,, अपनी कमर से साड़ी को खोलते हुए रानी साहिबा सूरज के मोटे तगड़े लंड को ही देख रही थी जो कि सूरज बार-बार उस पर अंगूठा रखकर उसे हिला दे रहा था,,,, साड़ी को खोल कर एक तरफ रखने के बाद जैसे ही रानी साहिबा अपने पेटिकोट की डोरी पर अपनी उंगली रखी वैसे ही सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,)

तुम मेहनत क्यों करती हो रानी साहिबा यह तो मेरा काम है कपड़े उतारने का,,,(पर इतना कहने के साथ ही सूरज रानी साहिबा की पेटिकोट की दूरी को अपनी उंगलियों में फंसा कर जोर से खींच लिया और पेटिकोट की डोरी खुल गई पेटिकोट की डोरी खुलते ही कमर पर बंधी हुई पेटिकोट ढीली पड़ गई लेकिन नितंबों के उभार पर टिकी हुई थी जिसे सूरज अपने हाथों से उंगलियों का सहारा लेकर पेटीकोट को कमर के इर्द गिर्द से ढीला करने लगा और जैसे ही पेटिकोट हिली हुई सूरज ने कमर से ही पेटीकोट को नीचे छोड़ दिया पेटिकोट भर भरा कर रानी साहिबा के कदमों में जाकर सूरज की तरह रानी साहिबा भी कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लालटेन की पीली रोशनी में दोनों का बदन सोने की तरह चमक रहा था,,,, रानी साहिबा की नंगी होते ही सूरज उसका हाथ पकड़ कर फिर से उसे अपनी तरफ खींचकर बाहों में भर लिया। और अपनी दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखें जोर-जोर से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया नंगी हो जाने के बाद सूरज का नंगा लंड उसकी बुर के मुहाने पर ठोकर मारने लगा और यह ठोकर रानी साहिबा को मदहोश कर रही थी रानी साहिबा से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे से अपना हाथ सूरज के लैंड पर रख दिया और उसके सुपाडे को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर रगड़ना शुरू कर दी रानी साहिबा की हरकत को देखकर सूरज समझ गया था की रानी साहिबा लंड को बुर में लेना चाहती है लेकिन सूरज अभी कुछ और जाता था रानी साहिबा को और तड़पाना चाहता था इसलिए वह तुरंत रानी साहिबा को अपनी गोद में उठा लिया और चलते हुए उसे ले जाकर के उसके नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, रानी साहिबा का दिल जोरों से धडक कर रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, रानी साहिबा को लग रहा था कि सूरज जब उसकी चुदाई करेगा लेकिन वह नहीं जानती थी कि सूरज औरत को पूरी तरह से तड़पनेा के बाद ही उसकी बुर में लंड डालता था,,, सूरज धीरे-धीरे घुटनों के पास नरम गद्दे पर आगे बढ़ता हुआ देखते-देखते उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी टांगों को थोड़ा सा और खोलकर उसकी गुलाबी बुर की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा यह देखकर रानी साहिबा शर्म से अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,, रानी साहिबा का शर्माना देखकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और वह रानी साहिबा के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए अपने प्यास होठों को तुरंत उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से सटा दिया,,,,,,।

सूरज की हरकत पर रानी साहिबा के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,

सहहहहहहहह सहहहहहहवआहहहहहहह,,,,,।

(इस आवाज को सुनकर सूरज और ज्यादा मदहोश हो गया और रानी साहिबा की बुर को पूरी तरह से मुंह में भरकर उसे चूसना और चाटना शुरू कर दिया रानी साहिबा की बुर पहले से ही उत्तेजना से पानी छोड़ रही थी उसके मदन रस के नमकीन स्वाद को पकड़ सूरज एकदम से पागल हो गया उसकी मोटी मोटी जांघों म को दोनों हथेलियां में दबोच कर और ज्यादा फैलाते हुए जितना हो सकता था उसमें अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, सूरज की यह हरकत रानी साहिबा के होश उड़ा रही थी,,,, रानी साहिबा को मजा आ रहा था वह उत्तेजना से बिस्तर पर तड़प रही थी ना सर पटक रही थी सूरज बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह पूरे जोश के साथ रानी साहिबा की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, सूरज बुर के उपर अपनी जीभ घूमा रहा था उसके रेशमी झांट के बाल को भी मुंह में लेकर चूस रहा था। उत्तेजना से रानी साहिबा बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दे रही थी और सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पड़कर उसे स्थिर किए हुए था देखते ही देखते रानी साहिबा का बदन अकड़ने लगा उसके मुंह से सिसकारी की आवाज बड़ी तेजी से निकलने लगी और फिर उसकी बुर से भर भरा कर मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, लेकिन सूरज रानी साहिबा की बुर से अपने होंठ को बिल्कुल भी अलग नहीं किया,,, रानी साहिबा की बुर से निकलने वाली मदन रस की एक बूंद को सूरज अपनी जीभ से चाट चाट कर अपने गले के अंदर उतारता चला गया,,, बिना चुदवाए ही रानी साहिबा झड़ चुकी थी,,,, सूरज अपनी जीभ की ही कलाबाजी दिखाकर उसका पानी निकाल दिया था,,,।

सूरज धीरे से अपने होठों को रानी साहिबा की बुर से अलग किया उसके हाथ से रानी साहिबा के मदन रस की धार टपक रही थी जिसे देखकर रानी साहिबा शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान थी संतुष्टि का एहसास था उसका चेहरा उत्तेजना से तम तमा रहा था,,,, रानी साहिबा की गहरी चलती सांस के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज मुस्कुरा रहा था सूरज होठ पर अपनी जीभ फिराता हुआ बोला,,,)

बहुत नमकीन पानी है तुम्हारा,,,,।

धत्,,,,,,,(रानी साहिबा फिर से शरमाते हुए बोली सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

अब आएगा असली मजा अब देखना कैसे मेरा लंड तुम्हारी बुर में जाता है आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,।

आराम से कहीं राजा साहब को पता ना चल जाए कि उनकी गैरहाजरी में उनकी रानी किसी और राजा की दीवानी हो गई है,,,,।

पता चलता है तो चल जाए मैं किसी से डरता नहीं ऐसा होगा तो मैं तुम्हें भगा कर ले चलूंगा किसी और देश में,,,,।


अच्छा बच्चु यह बात है,,,,।

बच्चु मत कहो चोद कर तुम्हें बच्चे की मां बना सकता हूं,,,,।

ओहहह क्या बात है इतना गुरूर है तुम्हें अपनी मर्दानगी पर,,,,।

असली मर्दानगी तुमने देखी कहां हो,,,।

तो दिखाओ मेरे राजा यह रानी भी मेरे राजा की मर्दानगी देखने के लिए तड़प रही है,,,,(रानी साहिबा जानबूझकर सूरज इस तरह की बात कर रही थी उसे उकसाकर उसे जबरदस्ती चुदाई की अपेक्षा जो रखती थी और सूरज भी उसकी बात में मस्त होकर उसके दोनों टांगों को खोलकर उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी जांघों पर चढ़ा दिया और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी बुर मदन रस के कारण पानीयाई आई हुई थी,,,, इसलिए सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसके बुरे में जाने में ज्यादा समय नहीं दिया वैसे भी शाम को ही हुआ रानी साहिबा की बुर में अपना लंड डाल चुका था इसलिए उसे रानी साहिबा की बुर में उसके लंड का सांचा बन चुका था। धीरे-धीरे करके सूरज अपने पूरे लंड को रानी साहिबा की बुर में उतार चुका था,,,, एक बार पूरा लंड बुर में घुस जाने के बाद सूरज मुस्कुरा कर रानी साहिबा की तरफ देखने लगा रानी साहिबा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि सूरज का लंड उसके बच्चेदानी तक पहुंच गया था इसलिए वह उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी। सूरज को पूछने की जरूरत नहीं थी कि बुर में लंड गहराई तक घुसा है कि नहीं क्योंकि रानी साहिबा का चेहरा सब कुछ बता रहा था।

दोनों टांगों को दोनों हाथों से पकड़े हुए उसे फैला कर रखे हुए सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया रानी साहिबा की चुदाई शुरू हो चुकी थी जैसे-जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था वैसे-वैसे रानी साहिबा के चेहरे के हाव भाव बदलते जा रहे थे सूरज की कमर की रफ्तार बढ़ती जा रही थी धीरे-धीरे वह रानी साहिबा की चुदाई बड़ी तेजी से करना शुरू कर दिया था हर धक्के के साथ रानी साहिबा के होश उड़ जा रहे थे क्योंकि हर एक धक्का रानी साहिबा की बच्चेदानी से जाकर टकरा जा रहा था,,,, वैसे भी सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। बिना कहे उसकी गहराई तक बच्चेदानी तक पहुंचना जायज था,,,, लेकिन रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,, सूरज उसकी दोनों टांगों को फैलाए हुए जी जान से मेहनत कर रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,, लेकिन सूरज अभी भी टिका हुआ था रानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी उसकी बुर के धागे खुल चुके थे वह कभी सोच नहीं थी कि कोई इस तरह से भी चुदाई करता होगा इतनी रगड और तेज तर्रार उसे अपने पति के साथ भी महसूस नहीं हुई थी। बेरहमी से चोदने में सूरज राजा साहब से एक कदम आगे था लेकिन दोनों में फर्क था क्योंकि राजा साहब औरतों की कदर नहीं करता था और सूरज औरत का सम्मान करता था औरत की जरूरत को पूरा करता था और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि औरत को कैसे मजा आता है इसीलिए तो बड़ी बैरहमी से चुदवाने के बाद भी रानी साहिबा को बहुत मजा आ रहा था,,,,, सूरज की कमर बड़ी तेजी से हटाई थी इतनी रफ्तार उसने राजा साहब में भी कभी नहीं देखी थी लेकिन मजा भी उतना ही आ रहा था उसकी गर्मा गर्म सिसकारी की आवाज भी ठीक से मुंह से नहीं निकल पा रही थी क्योंकि सूरज उसे अपनी बाहों में कस लिया था और उसके होठों पर अपनी होंठ रखकर उसके लाल-लाल होठों पर आसमान करते हुए अपनी कमर को बड़ी तेजी से हिला रहा था। एक बार फिर से रानी साहिबा का बदन अकडने लगा वह झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी यही हाल सूरज का भी था सूरज भी अपने चरम पर पहुंच चुका था इसलिए एकदम से उसे अपनी बाहों में दबोचता हुआ अपनी कमर को जोर से पटकन शुरू कर दिया और फिर देखते ही देखते 10 15 धक्के बाद दोनों भल भला कर झड़ने लगे।


कुछ देर तक सूरज रानी साहिबा पर ही लेता है क्या और फिर जैसे ही दोनों की सांसे दुरुस्त हुई सूरज धीरे से अपने लंड को रानी साहिबा की बुर से बाहर निकाला लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी वह खड़ा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे लेकिन रानी साहिबा को बड़ी जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,,, रानी साहिबा धीरे से बिस्तर से नीचे उतर गई और एक चादर को अपने बदन पर लपेटने लगी तो सूरज चादर को खींच लिया और बोला।

अभी तो सारी रात मजा करना है,,, अभी से कहां जा रही हो।

मुझे जाना पड़ेगा क्योंकि रोका नहीं जा रहा है,,,।

(रानी साहिबा का बदन कसमसा रहा था वह बार-बार अपने पैर के अंगूठे पर खड़ी हो जा रही थी यह देखकर सुरज समझ गया कि उसे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है और वह मुस्कुराता हुआ बोला,,)

ऐसा कहो ना की मुतने जाना है,,,।

धत्,,,,, ऐसा कहने में मुझे शर्म आती है।

नंगी होकर चुदवा रही हो तब शर्म नहीं आ रही है।

तू बड़ा बेशर्म है इस तरह की बातें करेगा तो फिर दोबारा कभी तुझे करने नहीं दूंगी।

नहीं नहीं ऐसा मत करना रानी साहिबा मैं अपनी गलती के लिए क्षमा मांगता हूं तुम्हारे बिना तो अब मेरा दिल नहीं लगेगा चलो मैं तुम्हें लेकर चलता हूं कहां चलना है,,,,,।

कपड़े तो पहन लेने दे,,,।

इतनी रात को कोई जाग नहीं रहा होगा,,,, ऐसे ही चलते हैं मजा आएगा,,,,।

नहीं नहीं कोई देख लिया तो,,,।


कोई नहीं देखेगा रानी साहिबा चारों तरफ अंधेरा ही तो है आ जाओ मेरे साथ,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज बिस्तर से नीचे उतरा और आगे आगे चलने लगा हुआ भी पूरी तरह से नंगा था रानी साहिबा भी पूरी तरह से नंगी थी सूरज को इस तरह से चला देखकर उसका भी हौसला बढ़ने लगा और वह भी सूरज के पीछे-पीछे चलने लगी सूरज ने धीरे से बिना शोर के दरवाजा खुला और बाहर इधर-उधर देखने लगा चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था अंधेरा छाया हुआ था इसलिए बिना दिक्कत के हुआ कमरे से बाहर निकल गया उसके पीछे-पीछे रानी साहिबा भी कमरे से बाहर निकल गई वह पूरी तरह से नंगी थी उसे अजीब सा एहसास हो रहा था सूरज ने धीरे से बोला,,,)

किस तरफ चलना है,,?

(रानी साहिबा बिना कुछ बोले उंगली के इशारे से ही दूसरी तरफ इशारा करने लगी और सूरज मुस्कुरा कर आगे आगे चलने लगा और रानी साहिबा पीछे-पीछे नंगेपन के हिसाब से उसके बाद में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, देखते देखते सूरज एक खुली छत के पास पहुंच गया जहां पर एकदम अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से हल्का उजाला दिखाई दे रहा था,,, दूसरी तरफ खेत ही खेत दिखाई दे रहे थे यहां पर किसी की नजर पहुंचने वाली नहीं थे सूरज समझ गया था कि यहीं पर पेशाब करती है रानी साहिबा इसलिए वह रानी साहिबा से बोला,,,)

यही बैठ जाओ रानी साहिबा,,,।

तुम्हारे सामने,,,,!

तो क्या हुआ मैं भी तो देखो रानी साहिबा कैसे पेशाब करती है,,,,।

धत् मुझे शर्म आती है,,,।

शर्माओगी तो एक अच्छा खासा अनुभव हाथ से निकल जाएगा,,,,।

(सूरज की आवाज सुनकर रानी साहिबा भी उसकी बात मानते हुए दो कदम आगे गई और सूरज के सामने ही बैठ गई और पेशाब करने लगी जैसे ही बुर से सिटी की मधुर ध्वनि सूरज के कान में पड़ी सूरज समस्या की रानी साहिबा पेशाब कर रही है वह इस पल के अनुभव में उत्तेजना में मदहोश होने लगा,,, उसे रहा नहीं दिया और भाभी रानी साहिबा के बगल में जाकर खड़ा हो गया और पेशाब करने लगा पुरानी साहिब अपने पास में ही सूरज को खड़े होकर पेशाब करता देखकर एकदम से मदहोश होने लगी मस्त होने लगी,,, रानी साहिबा के लिए यह एक अलग ही अनुभव था उसने आज तक इस तरह की हरकत अपने पति के सामने नहीं की थी लेकिन सूरज के सामने वह विवस हो गई थी क्योंकि सूरज ने जिस तरह का आनंद उसे दिया था इसलिए सूरज की हर एक बात मानना जरूरी हो गया था और उसे विश्वास हो गया था कि सूरज जो कुछ भी कहता है उसमें उसके लिए मजा ही मजा है,,,, सूरज पेशाब कर चुका था लेकिन इसलिए सूरज बिना कुछ बोल रानी साहिबा का हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और पास के ही दीवार से सटाकर एकदम से अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी जांघ को अपने कंधे पर रखकर उसकी बुर पर अपनी होंठ लगा दिया जिस पर अभी पेशाब की बूंदे लगी हुई थी लेकिन बिल्कुल भी परवाह किए बिना सूरज उसकी बुर को चाटने शुरू कर दिया और यह देखकर रानी साहिबा एकदम से गड़बड़ हो गई क्योंकि सूरज इसकी बुरे से निकलने वाली पेशाब की बुंद को चाट रहा था जो कि उसके रेशमी बाल के गुच्छों पर लगा हुआ था,,,,, रानी साहिबा उसे रोक नहीं पाई क्योंकि उसकी हरकत इतनी कामातुर कर देने वाली थी की रानी साहिबा एकदम से मदहोश हो गई गरमा गरम सिसकारी लेने लगी,,, सूरज पूरी तरह से रानी साहिबा पर छा चुका था हर एक पल हर एक क्षण उसे मजा ही मजा दे रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह से रानी साहिबा की बुर चाटने के बाद सूरज भी चुदवासा हो गया था वह धीरे से उठकर खड़ा हुआ और रानी साहिबा को दीवार के सहारे घूमारर खड़ी कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड को अपनी तरफ खींच लिया सूरत से रहने जा रहा था सूरज अपने मोटे-मोटे लंड को एक बार फिर से उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया। और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक की दोनों एक साथ झड़ नहीं गए रानी साहिबा कभी सपने कभी नहीं सोची थी कि गांव के लड़के के साथ उसे इतना मजा आएगा गांव का लड़का एक ही दिन में उसे पूरी तरह से छिनार बना दिया था झरने के पास घर के अंदर और घर के बाहर हर जगह मौका मिलते ही सूरज उसकी बुर में लंड डाल दे रहा था। दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र रहे थे बाहर चुदाई करने के बाद वालों कमरे में आ गए और यह सिलसिला सुबह तक चलता रहा सुबह होने वाली थी तभी रानी साहिबा अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे में चली गई और सुबह सूरज को जगाने के लिए कुंवर को भेजी किसी को खनखन खबर तक नहीं पड़ी की रानी साहिबा रात भर सूरज के साथ मिलकर कौन सा गुल खिलाई थी। सुबह भी खातेदारी करने के बाद रानी साहिबा सूरज को रोकने के लिए बोल रही थी क्योंकि जो मजा सूरज उसे दे रहा था रानी साहिबा सपने में भी नहीं सोची थी कि ऐसा सोचो से मिलेगा अभी भी राजा साहब है को 8 दिन जैसा रह गया था आने में और वह सोच रही थी कि हिंदी में वह जी भर कर अपनी जिंदगी जी ले,,, इसलिए वह बोली,,,,।


यही रुक जाते तो अच्छा था जब तक राजा साहब नहीं आ जाते,,,,।

रुक तो जाता है रानी साहिबा लेकिन घर पर भी मुझे काम है बारिश आने वाली है मुझे छत की मरम्मत करनी है,,,,।

ओहहह यह बात है,,,,,।

तब तो तुम्हें जाना ही होगा रुको,,,,,, तुमने जो ईमानदारी दिखाई है उसके बदले में तुम्हें इनाम तो मिलना चाहिए क्यों कुंवर ठीक कह रही हो ना मैं,,,।


हां दीदी तुम एकदम ठीक कह रही हो भला आजकल के जमाने में कौन ऐसा होगा जो सोने का झुमका मिलने पर भी वापस कर देगा,,,,।

रुको मै अभी आती हूं,,,(इतना कहकर वहां घर के अंदर गई और थोड़ी देर में वापस आई उसके हाथ में कुछ रुपए थे वह सूरज को देते हुए बोली,,,)

अब बिल्कुल भी इंकार मत करना यह मेरी तरफ से मेहमान नवाजी है क्यों कुंवर,,,।


दीदी बिल्कुल सही कह रही है सूरज भैया यह तो तुम्हें लेना ही होगा,,,,,,,,।

ठीक है अब आप दोनों कह रहे हो तो हमें ले लेता हूं लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा है शर्मिंदा कर दिया आप लोगों ने।


शर्मिंदा होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है और आते रहना छत की मरम्मत हो जाए तो एक बार जरूर यहां के चक्कर लगाना तुम्हारे लिए इस हवेली के दरवाजे हमेशा खुले हैं क्यों कुंवर,,,,


बिल्कुल दीदी एक ही दिन में न जाने कैसा रिश्ता हो गया है की मन ही नहीं मानता कि तुम्हें जाने दे।

मन तो मेरा भी नहीं मानता लेकिन घर पर मेरी जरूरत है मैं जरूर आऊंगा,,,(इतना कहकर सूरज हवेली से बाहर निकल गया एक अद्भुत अनुभव लेकर)
Nice update
 
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