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कहानी का प्रारंभ बहुत ही जबरदस्त और लाजवाब हैं भाई मजा आ गयाकहानी: परी और पत्थर
अध्याय : 00 (मुख्य पात्रों का परिचय)
मदन
मदन एक 18 साल का होनहार और जिज्ञासु युवक है, जो गाँव के स्कूल में 11वीं कक्षा का सबसे तेज छात्र माना जाता है। वह पढ़ाई में बहुत कुशल है और हमेशा अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान पर आता है। उसके शिक्षकों और दोस्तों के बीच उसकी बहुत प्रशंसा होती है। हालाँकि, उसकी समझदारी और बुद्धिमानी के बावजूद, मदन का मन केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता। उसे नए-नए विषयों के बारे में जानने का बहुत शौक है। विज्ञान हो, भूगोल हो या पुरानी कहानियाँ—वह हर चीज़ में रुचि लेता है।
मदन की सबसे प्रिय आदतों में से एक है नई-नई किताबें पढ़ना। उसे खासतौर पर रहस्यमयी कहानियाँ और पौराणिक कथाएँ पढ़ने का बहुत शौक है। उसे हमेशा से कुछ असामान्य चीज़ों की ओर खींचाव महसूस होता है। कई बार वह अपने दोस्तों के साथ खेल-कूद में व्यस्त रहता है, लेकिन जब भी वह अकेला होता है, तो किताबें ही उसका सबसे बड़ा साथी बन जाती हैं। उसे गाँव के पुस्तकालय से नई किताबें लाना बहुत पसंद है, और वह घंटों उन किताबों में डूबा रहता है।
इसके अलावा, मदन को प्रकृति के साथ समय बिताना भी अच्छा लगता है। गाँव के पास बहने वाली नदी के किनारे वह अक्सर अकेले बैठकर सोचता रहता है, जैसे उसकी सोच किसी अज्ञात दुनिया में विचर रही हो। उसकी आँखों में एक अजीब चमक और मन में अनगिनत सवाल होते हैं, जो उसे एक साधारण लड़के से अलग बनाते हैं। उसके दोस्त भी उसकी इस गहरी सोच और किताबों की दीवानगी का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन मदन को इन बातों से फर्क नहीं पड़ता।
मदन का एक मित्र है रवि एक नंबर का कमिना तो नही कहेंगे पर सीधा भी नही है एक बार जब यह मदन के घर आया था तो उसने मदन की बहन पर गंदी नजर दाई थी बेचारा आदत से मजबूर पर इसने मदन से ये बात बता भी दिया और माफी भी मान ली तब से रवि मदन के बुलाने पर भी घर नही आता है
सुमित्रा
सुमित्रा, मदन की 21 वर्षीय बड़ी बहन, एक जिम्मेदार और समझदार लड़की है। उसने अपनी शिक्षा में भी उतनी ही सफलता हासिल की है, जितनी मदन कर रहा है। हाल ही में उसने बीए (बैचलर ऑफ आर्ट्स) की पढ़ाई पूरी की है और अब वह अपने परिवार और घर की ज़िम्मेदारियों में पूरी तरह से लगी हुई है। सुमित्रा गाँव में एक आदर्श बेटी और बहन के रूप में जानी जाती है।
सुमित्रा पढ़ाई में तेज़ होने के साथ-साथ बहुत समझदार और धैर्यवान भी है। माँ के गुजर जाने के बाद, उसने ही घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली। उसने खुद अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मदन की देखभाल भी की और घर के सारे काम बिना किसी शिकायत के करती रही। सुमित्रा का स्वभाव नरम और प्रेमपूर्ण है, लेकिन जब जरूरत पड़ती है, तो वह बहुत दृढ़ और साहसी भी हो सकती है।
सुमित्रा का व्यक्तित्व उसे गाँव की अन्य लड़कियों से अलग बनाता है। वह सामाजिक कार्यों में भी दिलचस्पी लेती है और गाँव के विकास और भलाई के लिए काम करने वाले समूहों में सक्रिय रहती है। उसकी सबसे बड़ी खासियत है कि वह हर समस्या को शांति और धैर्य से सुलझाने की कोशिश करती है।
धर्मेंद्र
धर्मेंद्र, मदन और सुमित्रा के पिता, गाँव के सबसे सम्मानित व्यक्तियों में से एक हैं। वह एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति हैं, जिनकी इज्जत पूरे गाँव में होती है। वह खेती करते हैं और साथ ही गाँव के भलाई के कार्यों में भी हिस्सा लेते हैं। गाँव में उनकी प्रतिष्ठा एक आदर्श नागरिक के रूप में है, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।
हालाँकि, धर्मेंद्र का जीवन एक रहस्यमय पहलू भी समेटे हुए है। हर रात 10 बजे के आसपास, वह अपने दोस्तों से काम का बहाना बनाकर घर से बाहर निकल जाते हैं और लगभग 11 या 12 बजे के बाद ही वापस आते हैं। मदन और सुमित्रा को लगता है कि उनके पिता गाँव के भले के लिए किसी गुप्त काम में लगे हुए हैं, और यह ज्यादातर सच भी है। धर्मेंद्र वास्तव में गाँव की सुरक्षा और भलाई के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उनके इस रहस्यपूर्ण व्यवहार के पीछे कुछ ऐसा है, जो अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।
धर्मेंद्र के इस रात के कामों के बारे में जानने की जिज्ञासा कभी-कभी मदन और सुमित्रा के मन में उठती है, लेकिन उनके पिता की इज्जत और विश्वास उन्हें सवाल पूछने से रोक देता है। वे अपने पिता की ईमानदारी और परोपकारिता पर पूरा भरोसा रखते हैं, और उन्हें यकीन है कि वह जो भी कर रहे हैं, वह अच्छे के लिए ही है।
धर्मेंद्र एक अच्छे पिता हैं, जो अपने बच्चों के भविष्य के बारे में हमेशा सोचते रहते हैं। वह मदन और सुमित्रा से बहुत प्यार करते हैं और उन्हें जीवन के सही मूल्यों का पाठ पढ़ाते हैं। उनका मानना है कि मेहनत, ईमानदारी और धैर्य से जीवन की हर मुश्किल को सुलझाया जा सकता है। हालांकि, उनकी रात की रहस्यमयी यात्राएँ एक ऐसा पहलू है, जो इस परिवार के जीवन में किसी अज्ञात रहस्य की ओर इशारा करता है।
सविता
मदन की माँ, सविता, का निधन तब हुआ था जब वह केवल 14 साल का था। यह उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा झटका था। सविता एक समझदार और देखभाल करने वाली माँ थी, लेकिन अचानक एक गंभीर बीमारी ने उसे उनसे छीन लिया। मदन और सुमित्रा के लिए यह समय कठिन था, लेकिन उनके पिता धर्मेंद्र ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। वह अपनी मेहनत और लगन से बच्चों को संभालते रहे। सुमित्रा ने तब अपनी माँ की भूमिका निभाई और घर के कामकाज का जिम्मा अपने कंधों पर उठा लिया।
मदन की मां की मौत एक रहस्य जैसा लगता है क्योंकि मदन की माँ, सविता, का कुछ साल पहले एक भयंकर बीमारी के कारण निधन हो गया था। जब मदन 14 साल का था, तब उसकी माँ को अचानक बुखार हुआ, जो कुछ ही दिनों में खतरनाक रूप ले लिया। डॉक्टरों ने कहा कि यह एक घातक संक्रमण था, जिसे उस समय गाँव के पास मौजूद सीमित साधनों से ठीक नहीं किया जा सका।
लेकिन मां के मौत के बाद मदन के पिता ने उसकी मां को मुखाग्नि नही दिए बल्कि नदी में प्रवाहित कर दिए कारण ये था कि उस समय बारिश बहुत तेज हो रही थी चारो तरफ पानी ही पानी था।
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मदन, सुमित्रा और धर्मेंद्र के जीवन में एक साधारण दिनचर्या है, लेकिन उनके जीवन के इस सादे दिखने वाले पर्दे के पीछे गहराई से छिपे हुए रहस्य और भावनाएँ भी हैं। मदन की जिज्ञासा, सुमित्रा की समझदारी, और धर्मेंद्र का रहस्यमयी स्वभाव इस कहानी को नए मोड़ पर ले जाने के लिए तैयार हैं।