अपडेट ---13
अदालत के कटघरे में रीतेश , खड़ा था......
जज - केस की कारवायी शुरु की जाये.......
केस की कारवायी शुरु होती है, रीतेश के खीलाफ सारे सबूत इकट्ठे कर लीये गये थे, यहाँ तक की उसका दोस्थ राहुल....भी उसके खीलाफ गवाही दे दीया........!!
.............जज. ने अपना फैसला सुनाया.........
जज - तमाम गवाहो और सबूतो को देखने और सुनने के बाद.....अदालत इस नतीजे पर पहुचीं है की, मुज़रीम रीतेश , स्मगलर सागा के लीये ड्रग डील का करता था......
इसलीए एन. डी. पी. एस. एक्ट 1985 के तहत धारा 15 लागू होता है, मुज़रीम को 1 लाख का जुर्माना और 2 साल की सजा सुनाई जाती है!!
जज के फैसले पर , सब की आखों मे आंशू आ जाते है......सुलेखा चीख-चीख कर चील्लाती रही की उसका बेटा बेकसूर है। लेकीन फैसला तो हो गया था,
"रीतेश अपनी नज़रे झुकाये कटघरे में खड़ा रहा , एकदम शांत ,
रीतेश, को हवलदार अपने हीरासत में लेकर जाने लगे तो.....सामने राहुल खड़ा था!
रीतेश राहुल के सामने खड़ा हो जाता है और बोला-
रीतेश - कबीर सींह तो बीकाउ नही था, तो ये कबीर सींह कीतने बीक गया.....
रीतेश की बात सुनकर , राहुल अपना सर नीचे झुका लेता है....और कुछ नही बोलता!! रीतेश फीर कुछ नही बोलता और वहां खड़े अपने बाप की तरफ अपने कदम बढ़ा देता है!!
.....रीतेश के कदम अपने बाप के सामने आकर रुक जाता है......रमन के हाथ में दादी की अस्थीयो का कलश था! रीतेश उसके हाथ से कलश लेते हुए बोला-
रीतेश - मेरी जीदंगी के कोरे कागज़ तो दादी के साथ ही खत्म हो गये......लेकीन तेरे जीदगीं के कोरे कागज़ पर तेरा भवीष्य तो मै ही लीखूगां.......!!
........जो रीतेश को जानते थे, वो रीतेश के खामोशी को आने वाले तूफ़ान का आगाज़ समझ चुके थे, और रमन की हालत भी......
इतना कह कर रीतेश......बीना कीसी के तरफ़ देखे , और बीना कुछ कहे हवलदार के साथ चल देता है!!
सुलेखा, वैभवी, हेमा के साथ - साथ सब लोग रीतेश को जाते हुए देखते रहते है!! लेकीन रीतेश एक बार भी पीछे मुड़ कर नही देखता। और देखता भी क्यू ? उसे सबसे ज्यादा चाहने वाली उसकी दादी तो उसके साथ ही थी। 'दादी की अस्थीया'
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भाई तुम्हारी कहानी तो सच में एक दम अलग है, मां - बाप ही साथ नही दीये......और तुम बीना कोयी जुर्म कीये दो साल की सज़ा हसतें- हसतें काट दीया!!
'' जेल में 3 लोग रीतेश के साथ बैठे थे......
रीतेश - हां रमेश, ये दो साल जेल में मुझे बोझ नही लगा.....क्यूकीं मेरी दादी जो मेरे साथ थी!!
इतना कहकर रीतेश अपने हाथ में लीये अस्थीयोँ को देखने लगता है.... उसकी पलके आशूओं से नम हो जाती है!!
उन अस्थीय को देख कर रमेश बोला-
रमेश - भाई तुम अपनी दादी को बहुत चाहते थे ना,
'' रमेश की बात सुनकर , रीतेश कुछ बोल नही पाता लेकीन ना जाने क्यूं उसके अश्क थम ना सके , और भीग चकी पलको से आशुंओ की धारा बहने लगती है, रीतेश अपनी दादी के कलश को अपने सीने से लगाये जोर-जोर से रोने लगता है!!
'रीतेश का अपने दादी के लीये इतना प्यार देखकर उन तीनो की आंखे भी नम हो जाती है.....और वो तीनो रीतेश को सभांलने लगते है!!
..........क्या रे ओय.......बदाई कल है, तुम लोग का आज़ से ही रोना धोना चालू हो गया क्या रे......
एक अनजान आवाज़ रीतेश और उन तीनो के कानो में पड़ा.....रीतेश अपने आखं से आशूं पोछते हुए नज़रे उठा कर देखा तों.....एक 5.5 इंच का मोटा आदमी जीसकी उम्र करीब 27 साल की होगी......और उसके पीछे तीन और लोग खड़े थे!
उस आदमी को देखकर रमेश गुस्से मे....झपट कर उसका कॉलर पकड़ते हुए....
रमेश - तेरी मां की........
तभी रीतेश रमेश को रोकते हुए बोला-
रीतेश - रमेश नही, छोड़ दे उसे.....
रमेश की आंखे गुस्से से लाल थी, लेकीन रीतेश के बोलने पर वो उस आदमी का कॉलर छोड़ देता है!!
रीतेश - चल रमेश.......हमे इससे भीड़ने की जरुरत नही......ये तो पहले से मरा हुआ है, फांसी जो होने वाला है.....
इतना कहकर रीतेश, रमेश और दोनो साथीयो के साथ , वंहा से जाने लगता है......
..........अरे, आपुन मरा नही है रे, आपुन खूनी नही......आपुन भी तुम लोग के माफ़ीक नीर्दोष है......सुना की नही रे.....
रीतेश के कदम ज़मीन पर आगे बढ़ तो रहे थे, लेकीन उसके कान उस आदमी की आवाज़ें सुन रही थी!!
........अरे याद रखना बीड़ू.....यहां इस जगह पर जीतने लोग आते है....सब के सब नीर्दोष इच आते है......असली मुज़रीम तो ....वो बाहर की दुनीया मैं एश करते है रे......समझा क्या रे, आपुन को डर नही अपनी मौत का, बस आपुन को तो इस बात की कसक रहेगी की साला आपुन को इस जगह पहुचाने वाला वो साला हरामी 'सागा' को मार ना सका रे.....समझा.....क्या? आपुन का नाम पीटर है, भगवान कसम आपुन भी तुम लोग के माफीक है!!
रीतेश चलते हुए कदम 'सागा का नाम सुनते ही रुक जाता है......लेकीन फीर वो अपने कदम आगे की तरफ़ बढ़ा देता है!!
''आज़ पूरे दो साल हो गये थे, रीतेश बस कल के दीन का इंतजार कर रहा था......लेकीन आज़ उसके कानो में पीटर की कही हुई बात गुज़ँ रही थी......रीतेश पेड़ के नीचे अपने तीनो दोस्त के साथ बैठा जेल की रोटीया तोड़ते हुए, पीटर की बात ही सोच रहा था!!
''रीतेश - रमेश.......
रमेश - क्या हुआ भाई?
रीतेश - ये पीटर का क्या लफ़ड़ा था....?
रमेश जेल की सुखी रोटीयो को खाते हुए बोला-
रमेश - .क्या मालूम? लेकीन कहते है की.....ये एक स्कूल का बस ड्रायवर था, और इसने वो बस हायजैक कर लीया......जीसमें कयी सारे बच्चो की जान गयी!!
रमेश की बात सुनकर ॥
रीतेश - हमे पीटर को.....यहां से भगाना पड़ेगा!!
रीतेश की बात सुनकर.....रमेश के हाथ से, सूखी रोटी ज़मीन पर गीर जाती है!!
रमेश उठते हुए बोला-
रमेश - अबे तू पागल हो गया है क्या? उसे फांसी होने वाली है!!
रीतेश गुस्से में -
रीतेश - हां....तो, होने वाला है....हुई नही है!! उसे भी फंसाया गया है, वो सही कह रहा था, यहा जीतने भी लोग आते है.....सब कीसी ना कीसी शाज़ीश के शीकार हुए होते !! ये कानून बीक चुका है......
रीतेश की बात सुनकर , रमेश और वो तीनो दंग रह जाते है......लेकीन फीर रमेश बोला-
रमेश - अरे लेकीन तूझे, उससे क्यू इतनी हमदर्दी है.....
रीतेश पेड़ के पास से उठते हुए रमेश के नज़दीक जाते हुए....उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला-
रीतेश - हमदर्दी मुझे पीटर से नही, बल्की उस इँसान से है जो एक ऐसी जुर्म की सज़ा काट रहा है, जो उसने कीया ही नही है......और कल को जब वो मरेगा, तो लोग उसे एक बुरे इँसान के नाम से याद करेगें, इसके मरने के बाद भी इसे गाली देगें..........भाइ मेरे जन्म कैसा भी हो, मौत तो शानदार होनी चाहीए, यूं लटक रही फासीं के फदों मे मायूस होके नही, बल्की जमाने के सामने चेहरे को गर्व से उठाकर!!
''रीतेश की बातें........रमेश के उन हर सवालो का जवाब दे बैठी!!
रमेश ने अपने हाथ को, रीतेश के हाथो पर रखते हुए बोला-
रमेश - सही कहा भाई, समझ पीटर जेल से बाहर। संकेत जा जाकर तू पीटर को बुला ला-
सकेंत - ठीक है भाई,
और ये कहकर , सकेंत अपने कदम पीटर को बुलाने के लीये आगे बढ़ा देता है......
छोटे अपडेट - और लेट अपडेट देने के लीये माफी चाहुगां दोस्तो, आप लोगो का प्यार है, जो मुझे लीखने के लीये प्रोतसाहीत करता है........थोड़ा ऑफीशीयल वर्क में बीज़ी हो जाता हू, लेकीन आय प्रामीस स्टोरी कंपलीट करुगां......और स्टोरी आप सब के दील को छू जाये वैसा लीखने की कोशीश करुगां!!
bahut - bahut dhanywaad is story ko itna pyaar dene ke liye!!
sirf 12 update me , 5 lacs view cross ho gaya, agar maine proper update diya hota to 10 lacs cross ho jata!!
aap log kya sochte hai is story ke baare me, kitne lacs views cross karega! zarur batana,, **kyuki chudai abhi baki ha mere dost**