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Adultery नियति से बंधी नीतू

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NeetuDarling

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नीतू ने अपने पति को रोककर कहा, "...सिर्फ़ बातों में समय बर्बाद करने का वक्त नहीं है।" यह कहते हुए वह उसकी लंड की ओर झुकी, अपनी जीभ निकाली, और नीचे से ऊपर तक उसके 9-10 इंच लंबे और बहुत मोटे लंड को चाटने लगी। पहले बसव और टेलर की लंड चूस चुकी नीतू अपने पति की लंड को बहुत सावधानी से, दाँत न लगने देते हुए, मुँह में लेकर चूसने लगी। जीवन में पहली बार अपनी लंड चुसवाने वाला हरीश उस अद्भुत सुख को जी भरकर अनुभव कर रहा था। दस मिनट तक उस भयानक लंड को चूसने के बाद नीतू बिस्तर पर चढ़ी, अपने पैरों को विपरीत दिशा में चौड़ा किया, और अपने पति को अपनी जाँघों के बीच आने का न्योता दिया।

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हरीश बिस्तर से उतरा और ड्रेसिंग टेबल पर रखी बॉडी लोशन की बोतल लेकर उसका लोशन अपने हाथ में डाला। पहले उसने नीतू की चूत के अंदर अच्छे से मला। फिर लोशन लेने गया, तो नीतू ने उसे रोककर खुद अपने हाथ में लोशन डाला। उसने अपने औरतपन को लुटाने और उसे पूर्ण कामसुख देने वाले हरीश की उभरी लंड को लोशन में पूरी तरह डुबोकर गीला किया, फिर बिस्तर पर जाँघें चौड़ा करके लेट गई। नीतू की जाँघों के बीच में आकर हरीश ने अपनी डंडे जैसी लंड को पकड़ा और पत्नी की चूत की पंखुड़ियों पर छह-सात बार हल्के प्रहार किए। नीतू मन ही मन "कामसूत्र" लिखने वाले पुण्यात्मा को नमन करते हुए सोच रही थी कि जो सन्यासी जैसा मेरा पति था, वह पूरी तरह विलासी बन गया। नीतू की चूत की पंखुड़ियों को उंगलियों से चौड़ा करके हरीश ने अपनी लंड का सिरा आगे रखा और ज़ोर से धक्का दिया, लेकिन उसका भयानक अनाकोंडा उस छोटी गुफा में प्रवेश नहीं कर सका। छह-सात बार कोशिश करने पर नीतू ने खुद अपनी उंगलियों से चूत की पंखुड़ियों को चौड़ा करके पकड़ा और सहयोग दिया। बहुत मेहनत के बाद हरीश की लंड का सिरा, जो छोटे सेब जैसा था, चूत के अंदर प्रवेश कर सका। सिर्फ़ लंड के सिरे के प्रवेश से ही नीतू बेचैन होने लगी, और असहनीय दर्द से उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

नीतू को भयंकर दर्द में देखकर हरीश ने तुरंत अपनी लंड का प्रहार रोक दिया। उस दर्द में भी नीतू ने अपने पति की ओर गुस्से से देखकर कहा, "...हर रात मैं यही सोचकर तरसती रही कि मेरा पति आज मुझे चाहेगा या कल मेरा मनमथ बनकर मुझसे प्यार करेगा। 13-14 साल तक मैं इस इंतज़ार में रही। आज जब हम दोनों का पुनर्मिलन होने का समय आया है, और आप मेरे दर्द के बारे में सोचकर रुक गए, तो मैं आपको कभी माफ़ नहीं करूँगी। मुझे कितना भी दर्द हो, मैं सह लूँगी, लेकिन कृपया अपनी प्यारी पत्नी को इस रात अविस्मरणीय कामसुख दीजिए।" यह कहते हुए उसने बिस्तर पर पड़ी अपनी ब्रा को मोड़कर दाँतों से काट लिया और आगे बढ़ने का इशारा किया। नीतू हर रात कितने काम-वेदना से कराहती थी, यह उसके चेहरे की दुख भरी भावना से ही हरीश को समझ आ गया। उसने बहुत ज़ोरदार प्रहारों के साथ अपनी लंड को चूत के अंदर प्रवेश कराना शुरू किया। हरीश की विशाल लंड को नीतू की चूत में प्रवेश कराने में उसे चार मिनट का समय और पच्चीस से ज्यादा ज़ोरदार प्रहार करने पड़े। जब हरीश ने अपनी लंड को पूरी तरह चूत के अंदर तक प्रवेश कराया और अपनी पत्नी का चेहरा देखा, तो उसका कलेजा जैसे फट गया। जिस पत्नी की आँखों में वह एक बूँद आँसू भी नहीं आने देता था [संभोग को छोड़कर बाकी हर तरह से पत्नी का ख्याल रखने वाला], आज उसी पत्नी की आँखों से उसने धार के रूप में आँसू बहते देखे। हरीश उसकी ओर झुका और उसके गालों पर बह रहे आँसुओं को अपने होंठों और जीभ से चाटकर पी गया। आँखें खोलकर नीतू ने असहनीय दर्द में भी अपने पति को देखा और प्यार से मुस्कुराई।

जब पति ने उसके होंठों पर चुम्बन दिया, तो नीतू ने अपना हाथ नीचे सरकाकर चूत के आसपास जाँच की, और उसे पता चला कि हरीश का कामदंड पूरी तरह उसके काम मंदिर में प्रवेश कर चुका है। उसने पति का चेहरा पकड़ा और उसके होंठों पर चुम्बनों की बौछार करते हुए कहा, " आज मेरी तपस्या सफल हुई। मेरा पति पूरी तरह मुझमें समा गया है। बहुत-बहुत धन्यवाद हरीश, " हरीश बोला, "...नीतू, कृपया मुझे माफ़ कर दे, मैं तुम्हें बहुत दर्द दे रहा हूँ..." नीतू ने उसके मुँह पर हाथ रखकर कहा, "...आपकी बात यहीं रुक जाए। यह दर्द नहीं, मेरे पति का प्यार है। अब क्या सिर्फ़ मुझे देखते रहेंगे, या मेरे औरतपन को लूटने के लिए कोई मुहूर्त देख रहे हैं?" हरीश हँसते हुए अपनी पत्नी के स्तनों को पकड़कर मसलने लगा और अपनी लंड को चूत से तीन-चौथाई बाहर निकालकर फिर ज़ोर से अंदर प्रवेश कराया। दस मिनट तक पति की लंड के प्रहारों से होने वाले दर्द को होंठ काटकर सहन करने वाली नीतू ने महसूस किया कि उसकी चूत पति की विशाल लंड के आकार के अनुकूल होने लगी थी। दर्द कम होने पर वह अपने कूल्हों को उठा-उठाकर जवाबी प्रहार देने लगी। नीतू के होंठों पर चुम्बन देते और उसके स्तनों को मसलते हुए हरीश ने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और बहुत तेज़ी से ज़ोरदार प्रहारों के साथ अपनी पत्नी की चूत को 13-14 साल बाद आज रौंद रहा था। पति की लंड के हर प्रहार को अपनी चूत में अनुभव करती नीतू का शरीर इंच-इंच कामसुख से रोमांचित हो रहा था, और उसके गोल स्तन उसके प्रहारों से इधर-उधर उछल रहे थे।

योग, व्यायाम, या उस व्यक्ति द्वारा दी गई जड़ का प्रभाव, जो भी हो, पति-पत्नी की कामक्रीड़ा एक घंटे से अधिक समय तक चली। नीतू ने 3, 4, 5 या अनगिनत बार अपनी चूत से रतिरस प्रवाहित किया, और लगातार अपने पति की लंड का अभिषेक करती रही, जिससे वह पूरी तरह थक गई थी। आखिरकार, 70 मिनट बीतने के बाद हरीश की लंड से निकला वीर्य नीतू की गर्भभूमि में सुनामी ला गया। आज की रात नीतू के यौवन भरे शरीर को असली कामसुख प्राप्त हुआ। दोनों की कामक्रीड़ा समाप्त होने पर पति-पत्नी के चेहरे पर कुछ महान हासिल करने की संतुष्टि साफ़ दिख रही थी। बिस्तर पर लेटे पति की छाती पर मुँह रखकर उसे गले लगाए, नंगे शरीर में नीतू नींद में खो गई। हरीश ने उसके माथे पर चुम्बन दिया, उसके सिर को सहलाया, और वह भी निद्रा देवी की शरण में चला गया।

पिछली रात भयानक कामक्रीड़ा में लिप्त रहे नीतू और हरीश सुबह सूर्योदय होने के बावजूद अभी तक नहीं उठे थे। सबसे पहले हरीश की नींद खुली और जब उसने आँखें खोलीं, तो देखा कि उसकी पत्नी, जिसके होंठों पर मधुर मुस्कान और चेहरे पर सुख की संतुष्टि का भाव था, नंगे शरीर में उसकी छाती पर सिर रखकर उसे कसकर गले लगाए सो रही थी। सुबह का यह सबसे खूबसूरत दृश्य देखकर हरीश ने भगवान को धन्यवाद दिया। उसने अपनी पत्नी को सावधानी से हटाने की कोशिश की, लेकिन नीतू ने आधी खुली आँखों से अपने पति को देखा और मोहक मुस्कान दी। यह देखकर हरीश को लगा कि इतने सालों बाद उसके वैवाहिक जीवन को सार्थकता मिली है। जब हरीश बिस्तर से उतरा, तो पुरुषों की सुबह की सामान्य समस्या के साथ-साथ अपनी मनमोहक सुंदरता की देवी जैसी पत्नी के नंगे शरीर के सामने होने के कारण उसकी लंड पूरी तरह उभरकर खड़ी हो गई। नीतू ने इसे देखकर हँसते हुए अपने पति को पास बुलाया और उसकी लंड को सहलाते हुए कहा, "...पूरी रात मेरी छोटी गुफा को खोदकर कुआँ बना दिया, फिर भी तुम्हारा मन नहीं भरा? अब भी मेरी गुफा में घुसने के लिए सिर उठाए खड़े हो।" नीतू को अपनी लंड से बात करते देख हरीश के लिए यह जीवन का सबसे खुशी का पल बन गया। नीतू ने अपने पति की ओर मुड़कर कहा, "...जी, बच्चे उठने से पहले आप जाकर दूध ले आइए, तब तक मैं भी उठ जाऊँगी।" हरीश ने उसे उठाकर बिठाया, उसे नाइटी पहनाई, फिर वापस लिटाकर और आराम करने को कहा। खुद तरोताज़ा होकर दूध लाने के लिए घर से बाहर निकला।


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हरीश के गेट तक पहुँचने से पहले ही बाहर से गेट खोलकर अंदर आई शीला को देखकर हरीश एक पल के लिए हक्का-बक्का रह गया। बैंगनी रंग की नाइटी में शीला के गोल-मटोल स्तन हरीश की आँखों में चुभ रहे थे। शीला ने पास आकर "गुड मॉर्निंग" कहा, तो हरीश चौंककर उसका जवाब देते हुए उसने भी विश किया। नीतू के बारे में पूछने पर उसने बताया कि वह अभी कमरे में ही है और चाबी देने के लिए आगे बढ़ा। लेकिन शीला के स्तनों को देखते हुए उसका हाथ से चाबी नीचे गिर गई।

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हरीश के झुकने से पहले ही शीला ने चाबी उठाने के लिए झुक गई। उसकी नाइटी ढीली होने के कारण हरीश को उसके अंदर पहनी हुई भूरी ब्रा भी दिख गई। शीला ने चाबी उठाकर घर के दरवाजे की ओर बढ़ते समय हरीश की नजर उसके हिलते-डुलते मोटे कूल्हों पर टिक गई। हरीश ने धीरे से अपना सिर ठोककर कहा, "...छी, मैं सभ्य था, लेकिन कामसूत्र पढ़ने के सिर्फ़ दो दिन में पूरी तरह ठरकी बन गया हूँ।" यह कहते हुए वह हँसता हुआ दूध लाने के लिए कदम बढ़ा।
 

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जब शीला कमरे में दाखिल हुई, तो पिछली रात पति-पत्नी के बीच हुई कामक्रीड़ा का पूरा कमरा साक्षी था। नीतू की लेगिंग्स कमरे के फर्श पर बेतरतीब पड़ी थी, उसकी काली ब्रा पास की कुर्सी पर लटक रही थी, और रात में नीतू ने पहनी लाल पैंटी ड्रेसिंग टेबल पर बिखरी पड़ी थी। पूरे कमरे में पति-पत्नी के मिलन से निकलने वाले उनके कामरस की सुगंध कमरे में अपनी खुशबू बिखेर रही थी। नीतू सिर्फ़ नाइटी पहने, इस लोक की सुध-बुध खोए हुए सो रही थी। उसने एक पैर मोड़ा हुआ था, जिससे नाइटी उसकी जाँघों तक सरक गई थी। नीतू की हालत देखकर शीला के मन में अपना दुख उमड़ आया, लेकिन उसने खुद को रोका। अपनी सहेली के चेहरे पर मधुर मुस्कान देखकर वह अपना दर्द भूल गई। नीतू की नाइटी पारदर्शी थी, जिससे उसके गोल-मटोल स्तन और काले निप्पल शीला की आँखों में साफ़ दिख रहे थे। सहेली के चेहरे की मुस्कान और उसकी सुखद नींद में खलल डालने का मन न होने के बावजूद, शीला ने सोचा कि अगर बच्चे अपनी माँ को बुलाने अंदर आ गए, तो क्या होगा। यह सोचकर उसने अपनी सहेली को जगाना शुरू किया। नीतू अभी भी नींद के नशे में बोली, "...जी, बस करो, चुप रहो। पूरी रात मेरे शरीर को चूर-चूर कर दिया, फिर भी तुम्हारा मन नहीं भरा? थोड़ी देर तो सोने दो, बाद में कर लेना।" अपनी आत्मीय सहेली की बात सुनकर शीला को एक तरफ़ खुशी से हँसी आई, तो दूसरी तरफ़ अपने दर्द की याद से दुख भी उमड़ रहा था, जिसे उसने मुश्किल से रोका। उसने नीतू को ज़ोर से हिलाया, तो नीतू ने आँखें खोलीं और सामने अपनी सहेली को खड़ा देखकर हड़बड़ाते हुए उठकर बैठ गई। उसकी हालत देखकर शीला बोली, "...क्या बात है, मैडम, अभी भी रात के नशे में हो? चाहिए तो मैं जाकर तुम्हारे पति को ही भेज दूँ?" यह कहकर वह ज़ोर से हँसने लगी। नीतू ने उसकी ओर नकली गुस्से से देखा और बिस्तर से उतरने के लिए पैर नीचे रखकर खड़ी हुई। लेकिन रात की तीव्र कामक्रीड़ा के दौरान हरीश की भयानक कामदण्ड के प्रहारों को झेलने वाली उसकी नाज़ुक कामपात्र में अभी भी हल्का-हल्का दर्द था। "...आह... अम्मा..." कहते हुए नीतू ज़ोर से चीखी और बिस्तर पर धम्म से गिरकर बैठ गई।

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शीला अपनी सहेली के पास आई और बोली, "...क्यों, क्या हुआ, तू इस तरह चीख क्यों रही थी?" अपनी स्थिति याद करके नीतू को हँसी आई, लेकिन उसने हल्के से खुद को रोका और बोली, "...कुछ नहीं, यार, कल रात से पैर में थोड़ा दर्द है, लेकिन घबराने वाली कोई बात नहीं।" शीला ने अपनी सहेली की ओर नकली मुस्कान देते हुए कहा, "...मेरी भी शादी हुई है, यार, मुझे अच्छे से पता है कि कब, कहाँ, और कैसा दर्द होता है। गर्म पानी से अच्छे से नहा ले, रात का सारा दर्द कम हो जाएगा।" उसने सहेली को समर्थन देते हुए उसे बाथरूम में भेजा, बिस्तर पर बिछी चादर को ठीक किया, और इधर-उधर बिखरी पड़ी नीतू की ब्रा, पैंटी, और लेगिंग्स को उठाकर बाथरूम के दरवाजे के पास रख दिया। फिर वह बिस्तर पर बैठकर अपनी ही सोच में डूब गई।

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नीतू ने बाथरूम में अपनी नाइटी उतारी और शीशे में अपना प्रतिबिंब देखा। उसने पाया कि उसके स्तनों पर अपने पति के प्यार के निशान उभरे हुए हैं, जिसे देखकर वह शरमा गई। जब नीतू ने अपनी कामपात्र की ओर देखा, तो पति की भयानक कामदण्ड के प्रहारों से उसकी नाज़ुक कामपात्र थोड़ी फूली हुई थी। गर्म-गर्म पानी से अच्छे से नहाते हुए उसने अपनी कामपात्र पर थोड़ा ज्यादा गर्म पानी डाला और रगड़ा, जिससे उसका दर्द कम हुआ और शरीर में ताज़गी के साथ उत्साह सा आ गया। नहाने के लिए आते समय वह न कपड़े लाई थी, न तौलिया। अब शरीर को कैसे पोंछे, यह सोचकर उसने सोचा कि अगर शीला अभी भी कमरे में है, तो उससे ही ले लेगी। उसने दरवाजा थोड़ा सा खोलकर झाँका। शीला को बिस्तर पर बैठे गहरी सोच में डूबा हुआ देखकर नीतू ने आह भरी। उसने तीन-चार बार "शीला... शीला..." पुकारा, लेकिन शीला ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह देखकर नीतू के मन में कई विचार कौंध गए। उसने गौर से अपनी सहेली का चेहरा देखा, तो पाया कि वह कुछ सोचते हुए आँसू बहा रही थी।

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अपनी बचपन की प्यारी सहेली को दुख में देखकर नीतू के मन में गहरा दर्द हुआ। उस पल उसने कुछ तय किया और और ज़ोर से "शीला!" चिल्लाई। शीला चौंककर उठी, अपना मुँह दूसरी ओर करके आँसू पोंछे, और जबरदस्ती हँसते हुए बोली, "...क्यों, अब क्या हुआ, इतनी ज़ोर से क्यों चिल्ला रही है?" नीतू बोली, "...अरे, मैं कपड़े नहीं लाई, यार। ज़रा अलमारी से ले दे, और वहाँ रखा तौलिया भी दे दे।" शीला ज़ोर से हँसते हुए बोली, "...अभी भी रात के सपनों में तैर रही है।" उसने सहेली को तौलिया दिया और अलमारी से नीली ब्रा, पीली पैंटी, और हरे रंग का चूड़ीदार निकालकर दे दिया।

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नीतू ने कपड़े पहने, बाहर आई, और बाल सँवारकर तैयार होने तक हरीश तीनों के लिए कॉफी बना लाया था। इसे देखकर नीतू ने "थैंक्स" कहते हुए कप उठाया, तो शीला बोली, "...आप कॉफी बनाने क्यों गए, क्या हम नहीं थे?" नीतू ने उसे चुप रहने को कहा, "...एक-दो दिन पति भी पत्नी की सेवा कर ले, तो उनका क्या बिगड़ जाएगा।

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तू चुपचाप कॉफी पी।" यह कहकर उसने अपने पति की ओर मुड़कर आँख मारी। हरीश हँसते हुए कमरे से बाहर निकला, तो नीतू ने उसे रोका, "...जी, आज मुझे नाश्ता बनाने का मन नहीं है, आप..." उसकी बात को बीच में काटते हुए हरीश बोला, "...मैं पहले ही होटल से सबके लिए नाश्ता ला चुका हूँ। शीला जी, आप भी हमारे साथ नाश्ता कीजिए।" यह कहकर वह चला गया। शीला आश्चर्य से दोनों को देख रही थी, तभी नीतू ने उसके कंधे पर थपकी दी और बोली, "...देख, मैंने अपने पति को कैसे पूरी तरह ट्रेन किया है। ये सब छोड़, तेरा पति और बेटा घर पर हैं, क्या हाल है?" शीला ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "...नहीं, यार, उनके ऑफिस में आज कोई ज़रूरी काम था, इसलिए वह जल्दी चले गए। और बेटा, छुट्टी के दिन सुबह दस बजे से पहले उठता ही नहीं। फिर तैयार होकर दोस्तों के साथ चला जाता है, और शाम को ही लौटता है।" नीतू ने मन ही मन सब कुछ सोचकर योजना बनाई और बोली, "...ठीक है, चल, पहले नाश्ता करते हैं, फिर हमारी स्कूल के पास घूमकर आते हैं।" यह कहकर उसने अपनी सहेली को उठाया।

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सबके साथ नाश्ता करते समय शीला हँसती-मुस्कुराती रही। फिर उसने अपने बेटे को जगाकर तैयार होने को कहा और घर की ओर चली गई। नीतू ने अपने पति से कहा, "...जी, आप बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमकर आइए।" बच्चों ने कहा, "...मम्मी, तुम भी चलो।" नीतू ने दोनों को प्यार से समझाया, "...मुझे तुम्हारी आंटी के साथ थोड़ा काम है। कल हम सब साथ में जाएँगे।" यह कहकर उसने उन्हें पति के साथ भेज दिया। शीला घर पहुँची, तो उसका बेटा तैयार होकर नाश्ता करने बैठा था। उसने उसे बताया कि वह बाहर जा रही है और तैयार होने के लिए कमरे में चली गई। रंगनाथ कमरे के दरवाजे के पास आया और झरोखे से अपनी माँ को कपड़े बदलते देखने लगा।

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जब शीला ने नाइटी और लहँगा उतारा, तो उसकी भूरी ब्रा और हरी पैंटी में उसका शरीर देखकर वह लार टपकाते हुए सोचने लगा, "...एक दिन नहीं, तो एक दिन तुझे ज़रूर चोदूँगा।" फिर वह वापस टेबल पर आकर नाश्ता करने लगा। शीला चूड़ीदार पहनकर आई, तो रंग ने कहा, "...अम्मा, मैं गिरीश और सुरेश के पास जा रहा हूँ।" शीला बोली, "...वहाँ कोई घर पर नहीं है, यार।" पूरे दिन उनके साथ रहने के बहाने नीतू आंटी का शरीर देखने की योजना बनाए रंगनाथ को निराशा हुई। उसने अपनी माँ से कहा, "...ठीक है, तुम जाओ। एक चाबी साथ ले जाओ। अगर मेरा दोस्त आया, तो मैं भी उसके साथ चला जाऊँगा।" जब शीला नीतू के घर पहुँची, तो उसने ताला लगाकर अपनी सहेली का इंतज़ार कर रही नीतू को देखा और दोनों अपनी पढ़ी हुई स्कूल की ओर निकल पड़ीं।

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दोनों ने स्कूल के पूरे परिसर को घूमा, पुरानी यादों को ताज़ा किया, और जिस कमरे में वे बैठा करती थीं, उसे देखा। फिर वहाँ के एक-दो पुराने शिक्षकों से बात की और स्कूल के पीछे मैदान में बेंच पर बैठ गईं। छुट्टी का दिन होने के कारण ज़्यादा लोग इधर-उधर नहीं थे, और पूरे मैदान में सिर्फ़ यही दोनों बैठी थीं।

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नीतू ने अपनी सहेली की ओर देखकर कहा, "...अब बता, तू कह रही थी कि बहुत कुछ बात करनी है, क्या मसला है?" नीतू ने गौर किया कि शीला के चेहरे पर डर और दुख के लक्षण छिपाने की असफल कोशिश साफ़ दिख रही थी। शीला सोच रही थी कि क्या कहूँ, कैसे कहूँ, मेरी सहेली क्या सोचेगी। वह जबरदस्ती हँसते हुए बोली, "...क्या खास बात, यार, बस बहुत दिन बाद मिले हैं, इसलिए सोचा कुछ इधर-उधर की गपशप करें।" नीतू ने अपनी सहेली का चेहरा अपनी ओर घुमाया और बोली, "...मेरे सामने झूठ बोल रही है? मैंने सुबह से गौर किया, तू कोई बात मुझसे छिपाने की कोशिश कर रही है। क्यों, क्या मैं अब तेरे लिए पराई हो गई? क्या मैं तेरे दुख को बाँटने लायक भी नहीं रही? बचपन से मेरे माँ-बाप नहीं थे, मैं नानी-नाना के साथ पली। स्कूल के पहले दिन तू मुझसे मिली, और हम दोनों बड़े होते-होते इतनी गहरी दोस्त बन गए कि एक-दूसरे को छोड़ नहीं सकते। तेरे माता-पिता भी मुझे उतना ही प्यार करते थे, जितना तुझे, और मेरे नानी-नाना के लिए तू और मैं अलग-अलग नहीं थे। अब वे कोई नहीं रहे, सिर्फ़ हम दोनों हैं। हमारे सुख-दुख को हमें ही बाँटना होगा, है ना?" नीतू बोलते समय शीला उसे ही देख रही थी। अचानक उसने अपनी सहेली को कसकर गले लगाया और बोली, "...प्लीज़, यार, मुझे बचा ले। मुझे मरना नहीं है, लेकिन मैं हर दिन मर-मरकर जी रही हूँ। प्लीज़, मुझे इस नरक से निकालने का रास्ता दिखा। तेरे सिवा मेरा और कौन है?" अपनी सहेली की बात सुनकर नीतू को लगा जैसे उसके सिर पर बिजली गिरी हो।
 

DB Singh

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वह औरत अपनी दोनों टांगों को कुर्सी के दोनों हैंडल पर रखकर और जांघें फैलाकर बैठी थी। घनी झांटों के बीच छिपी अपनी काली चूत को सहलाते हुए उसने कहा, "उस सुपर सेक्सी बम को धंधे में कब उतारेगा? तूने यूं ही उसकी चूत चोदकर नहीं छोड़ा होगा, जरूर उसका वीडियो भी लिया होगा, है न? जरा मुझे भी दिखा, वो तेरी सेक्सी बम कैसी है?"

उस औरत की बात सुनकर नीतू का सिर चकराने लगा। क्या टेलर मुझे धंधा करवाने के लिए इस्तेमाल करने वाला है? उसने कुछ वीडियो दिखाने की बात की, मुझे देखना ही होगा कि वह क्या है।

टेलर को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि नीतू दुकान के अंदर छिपकर सब कुछ देख रही है। टेलर बेफिक्र होकर दीवार पर टंगे एल.ई.डी. टीवी के पास गया, अपने मोबाइल को उससे कनेक्ट किया और एक वीडियो चलाया। टीवी पर एक पुरुष और औरत की ब्लू फिल्म शुरू हुई, जिसमें औरत की जगह खुद नीतू थी। यह वही रासलीला थी जो उसने इसी दुकान में टेलर के साथ की थी। यह देखकर नीतू को ऐसा लगा जैसे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह जमीन में समा गई। वह औरत टीवी देखते हुए बोली, "वाह, बुरा नहीं! बूढ़ा होने के बावजूद तूने तो कमाल की माल को अपने जाल में फंसा लिया। इसे जल्दी धंधे में उतार दे। इसकी गोरी चूत चोदने के लिए ग्राहक हजारों रुपये की ढेर लगाकर दे देंगे।" टेलर हंसते हुए बोला, "इसके लिए क्या जल्दी है? पहले कुछ दिन मैं अकेले इस शरीर का जी भरकर मजा लूंगा। इसके गांड का उद्घाटन करने के बाद एक-दो महीने तक इसके रसभरे शरीर का रस पीने के बाद इसे ब्लू फिल्म दिखाकर डराऊंगा, फिर इसे अपने कब्जे में लेकर हमारे ग्राहकों के बिस्तर पर लिटाऊंगा।" यह सुनकर दोनों जोर-जोर से हंसने लगे। नीतू के लिए यह जीवन का सबसे बड़ा झटका था। वह कुछ देर पत्थर की तरह खड़ी रही, फिर थोड़ा संभलकर उसी रास्ते से चुपके से बाहर निकल गई।

नीतू घर की ओर चल पड़ी और दुकान में हुई घटनाओं के बारे में सोचने लगी। "पति के साथ किए गए विश्वासघात की सजा भगवान ने मुझे सही दी है। मेरे लिए पति और बच्चों का प्यार और विश्वास से ज्यादा मेरे शरीर की चूल बढ़ गई थी। इसलिए मैंने बिना सोचे-समझे पहले बसव के नीचे और फिर उस धोखेबाज टेलर के नीचे पूरी तरह नग्न होकर लेटकर अपने शरीर को गंदा करने में उनका साथ दिया। पति को धोखा देने वाली मेरी जैसी बेशर्म औरत को इस धरती पर जीने का कोई हक नहीं है।" नीतू ने मन में तय कर लिया कि वह किसी भी कीमत पर जीवित नहीं रहेगी और तेजी से घर की ओर कदम बढ़ाने लगी।

कॉलोनी के गेट के पास बैठे तीन सिक्योरिटी गार्डों ने दूर से नीतू को आते देखा और उसके रसभरे शरीर को फिर से निहारने के लिए तैयार हो गए। नीतू ने उनकी ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया और घर की ओर बढ़ती रही। उसकी गुलाबी साड़ी का पल्लू एक गोल स्तन से पूरी तरह सरक गया था और स्तनों के बीच की गहरी खाई में अटक गया था। नीतू के पतले पीले ब्लाउज के अंदर काली ब्रा में कैद मूसंबी के आकार के भारी स्तनों का पूरा आकार गार्डों को साफ दिख रहा था। नीतू तेजी से गेट पार करके घर की ओर बढ़ रही थी, जिससे उसके गोल नितंब सामान्य से कहीं ज्यादा हिल-डुल रहे थे। नीतू के शरीर को सिर से पैर तक देखकर आनंद लेने वाले गार्ड अपने-अपने लंड को सहलाते हुए सोच रहे थे, "बस एक बार इस भरे-पूरे शरीर की सवारी कर लें, तो जिंदगी सार्थक हो जाए।"

नीतू घर पहुंची, मुख्य दरवाजा बंद किया, अपने कमरे में गई और उसका दरवाजा भी बंद कर लिया। उसने एक साड़ी निकाली, छत की हुक से बांधी, उससे फंदा बनाया, स्टूल पर चढ़कर अपने गले में फंदा डाला और कस लिया।

नीतू ने अपनी गर्दन में फंदा कस लिया और आत्महत्या के रूप में अपनी जिंदगी खत्म करने की स्थिति में खुद को धकेल दिया था। इस वजह से वह स्वर्ग में मौजूद अपनी दादी और दादाजी से क्षमा मांग रही थी। कमरे की दीवार पर टंगी अपनी और पति की शादी की तस्वीर को देखकर आंसू बहाते हुए उसने हरीश की तस्वीर को हाथ जोड़कर कहा, "मेरी जैसी कामुक औरत को आपके जीवन में नहीं आना चाहिए था। आपके प्यार और विश्वास से ज्यादा मेरे लिए मेरे शरीर की कामुकता महत्वपूर्ण हो गई और मैंने गलती कर दी। आपकी पत्नी के रूप में जो पवित्रता मुझे मिली थी, उसे मैंने खुद ही दो परपुरुषों के साथ कामक्रीड़ा करके अपने शरीर को अपवित्र कर लिया। मैंने आपके साथ जो धोखा किया, उसके लिए भगवान ने मुझे सही सजा दी है। अब मैं आपको छोड़कर जा रही हूं। हमारे बच्चे अभी छोटे हैं, आपको उनकी देखभाल करनी होगी। अगर संभव हो तो मुझे माफ कर देना।" नीतू उस स्टूल को पैर से धक्का देने के लिए तैयार थी........................................
Yrr aurat ko itna lachaar OR kamzor na dikhao ki vasna me beh kar kisi se bhi chud jaaye.. shayad purusho dwara aurat ko kamzor pair ki jooti smjhne ke kaaran hi kahin na kahin aaj ki aurten galat rashte pr nikal chuki Hai jiska khamiyaza kuchh Sharif purush sachche purush bhugat rhe Hai. Please request Hai Neetu ko strong dikhao OR maa ke laude budhe se Phone se ya jahan bhi video Hai usko delete krwao OR neetu ko ek shaktishali aurat ke roop me prastut kro pta nhi neetu jaisi kitni aurton ki zindagi uss randi ke aulad budhe ne barbad kra hoga.. Neetu kitne hi aurton ki zindagi bacha skti Hai...
 
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जब शीला कमरे में दाखिल हुई, तो पिछली रात पति-पत्नी के बीच हुई कामक्रीड़ा का पूरा कमरा साक्षी था। नीतू की लेगिंग्स कमरे के फर्श पर बेतरतीब पड़ी थी, उसकी काली ब्रा पास की कुर्सी पर लटक रही थी, और रात में नीतू ने पहनी लाल पैंटी ड्रेसिंग टेबल पर बिखरी पड़ी थी। पूरे कमरे में पति-पत्नी के मिलन से निकलने वाले उनके कामरस की सुगंध कमरे में अपनी खुशबू बिखेर रही थी। नीतू सिर्फ़ नाइटी पहने, इस लोक की सुध-बुध खोए हुए सो रही थी। उसने एक पैर मोड़ा हुआ था, जिससे नाइटी उसकी जाँघों तक सरक गई थी। नीतू की हालत देखकर शीला के मन में अपना दुख उमड़ आया, लेकिन उसने खुद को रोका। अपनी सहेली के चेहरे पर मधुर मुस्कान देखकर वह अपना दर्द भूल गई। नीतू की नाइटी पारदर्शी थी, जिससे उसके गोल-मटोल स्तन और काले निप्पल शीला की आँखों में साफ़ दिख रहे थे। सहेली के चेहरे की मुस्कान और उसकी सुखद नींद में खलल डालने का मन न होने के बावजूद, शीला ने सोचा कि अगर बच्चे अपनी माँ को बुलाने अंदर आ गए, तो क्या होगा। यह सोचकर उसने अपनी सहेली को जगाना शुरू किया। नीतू अभी भी नींद के नशे में बोली, "...जी, बस करो, चुप रहो। पूरी रात मेरे शरीर को चूर-चूर कर दिया, फिर भी तुम्हारा मन नहीं भरा? थोड़ी देर तो सोने दो, बाद में कर लेना।" अपनी आत्मीय सहेली की बात सुनकर शीला को एक तरफ़ खुशी से हँसी आई, तो दूसरी तरफ़ अपने दर्द की याद से दुख भी उमड़ रहा था, जिसे उसने मुश्किल से रोका। उसने नीतू को ज़ोर से हिलाया, तो नीतू ने आँखें खोलीं और सामने अपनी सहेली को खड़ा देखकर हड़बड़ाते हुए उठकर बैठ गई। उसकी हालत देखकर शीला बोली, "...क्या बात है, मैडम, अभी भी रात के नशे में हो? चाहिए तो मैं जाकर तुम्हारे पति को ही भेज दूँ?" यह कहकर वह ज़ोर से हँसने लगी। नीतू ने उसकी ओर नकली गुस्से से देखा और बिस्तर से उतरने के लिए पैर नीचे रखकर खड़ी हुई। लेकिन रात की तीव्र कामक्रीड़ा के दौरान हरीश की भयानक कामदण्ड के प्रहारों को झेलने वाली उसकी नाज़ुक कामपात्र में अभी भी हल्का-हल्का दर्द था। "...आह... अम्मा..." कहते हुए नीतू ज़ोर से चीखी और बिस्तर पर धम्म से गिरकर बैठ गई।

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शीला अपनी सहेली के पास आई और बोली, "...क्यों, क्या हुआ, तू इस तरह चीख क्यों रही थी?" अपनी स्थिति याद करके नीतू को हँसी आई, लेकिन उसने हल्के से खुद को रोका और बोली, "...कुछ नहीं, यार, कल रात से पैर में थोड़ा दर्द है, लेकिन घबराने वाली कोई बात नहीं।" शीला ने अपनी सहेली की ओर नकली मुस्कान देते हुए कहा, "...मेरी भी शादी हुई है, यार, मुझे अच्छे से पता है कि कब, कहाँ, और कैसा दर्द होता है। गर्म पानी से अच्छे से नहा ले, रात का सारा दर्द कम हो जाएगा।" उसने सहेली को समर्थन देते हुए उसे बाथरूम में भेजा, बिस्तर पर बिछी चादर को ठीक किया, और इधर-उधर बिखरी पड़ी नीतू की ब्रा, पैंटी, और लेगिंग्स को उठाकर बाथरूम के दरवाजे के पास रख दिया। फिर वह बिस्तर पर बैठकर अपनी ही सोच में डूब गई।

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नीतू ने बाथरूम में अपनी नाइटी उतारी और शीशे में अपना प्रतिबिंब देखा। उसने पाया कि उसके स्तनों पर अपने पति के प्यार के निशान उभरे हुए हैं, जिसे देखकर वह शरमा गई। जब नीतू ने अपनी कामपात्र की ओर देखा, तो पति की भयानक कामदण्ड के प्रहारों से उसकी नाज़ुक कामपात्र थोड़ी फूली हुई थी। गर्म-गर्म पानी से अच्छे से नहाते हुए उसने अपनी कामपात्र पर थोड़ा ज्यादा गर्म पानी डाला और रगड़ा, जिससे उसका दर्द कम हुआ और शरीर में ताज़गी के साथ उत्साह सा आ गया। नहाने के लिए आते समय वह न कपड़े लाई थी, न तौलिया। अब शरीर को कैसे पोंछे, यह सोचकर उसने सोचा कि अगर शीला अभी भी कमरे में है, तो उससे ही ले लेगी। उसने दरवाजा थोड़ा सा खोलकर झाँका। शीला को बिस्तर पर बैठे गहरी सोच में डूबा हुआ देखकर नीतू ने आह भरी। उसने तीन-चार बार "शीला... शीला..." पुकारा, लेकिन शीला ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह देखकर नीतू के मन में कई विचार कौंध गए। उसने गौर से अपनी सहेली का चेहरा देखा, तो पाया कि वह कुछ सोचते हुए आँसू बहा रही थी।

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अपनी बचपन की प्यारी सहेली को दुख में देखकर नीतू के मन में गहरा दर्द हुआ। उस पल उसने कुछ तय किया और और ज़ोर से "शीला!" चिल्लाई। शीला चौंककर उठी, अपना मुँह दूसरी ओर करके आँसू पोंछे, और जबरदस्ती हँसते हुए बोली, "...क्यों, अब क्या हुआ, इतनी ज़ोर से क्यों चिल्ला रही है?" नीतू बोली, "...अरे, मैं कपड़े नहीं लाई, यार। ज़रा अलमारी से ले दे, और वहाँ रखा तौलिया भी दे दे।" शीला ज़ोर से हँसते हुए बोली, "...अभी भी रात के सपनों में तैर रही है।" उसने सहेली को तौलिया दिया और अलमारी से नीली ब्रा, पीली पैंटी, और हरे रंग का चूड़ीदार निकालकर दे दिया।

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नीतू ने कपड़े पहने, बाहर आई, और बाल सँवारकर तैयार होने तक हरीश तीनों के लिए कॉफी बना लाया था। इसे देखकर नीतू ने "थैंक्स" कहते हुए कप उठाया, तो शीला बोली, "...आप कॉफी बनाने क्यों गए, क्या हम नहीं थे?" नीतू ने उसे चुप रहने को कहा, "...एक-दो दिन पति भी पत्नी की सेवा कर ले, तो उनका क्या बिगड़ जाएगा।

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तू चुपचाप कॉफी पी।" यह कहकर उसने अपने पति की ओर मुड़कर आँख मारी। हरीश हँसते हुए कमरे से बाहर निकला, तो नीतू ने उसे रोका, "...जी, आज मुझे नाश्ता बनाने का मन नहीं है, आप..." उसकी बात को बीच में काटते हुए हरीश बोला, "...मैं पहले ही होटल से सबके लिए नाश्ता ला चुका हूँ। शीला जी, आप भी हमारे साथ नाश्ता कीजिए।" यह कहकर वह चला गया। शीला आश्चर्य से दोनों को देख रही थी, तभी नीतू ने उसके कंधे पर थपकी दी और बोली, "...देख, मैंने अपने पति को कैसे पूरी तरह ट्रेन किया है। ये सब छोड़, तेरा पति और बेटा घर पर हैं, क्या हाल है?" शीला ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "...नहीं, यार, उनके ऑफिस में आज कोई ज़रूरी काम था, इसलिए वह जल्दी चले गए। और बेटा, छुट्टी के दिन सुबह दस बजे से पहले उठता ही नहीं। फिर तैयार होकर दोस्तों के साथ चला जाता है, और शाम को ही लौटता है।" नीतू ने मन ही मन सब कुछ सोचकर योजना बनाई और बोली, "...ठीक है, चल, पहले नाश्ता करते हैं, फिर हमारी स्कूल के पास घूमकर आते हैं।" यह कहकर उसने अपनी सहेली को उठाया।

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सबके साथ नाश्ता करते समय शीला हँसती-मुस्कुराती रही। फिर उसने अपने बेटे को जगाकर तैयार होने को कहा और घर की ओर चली गई। नीतू ने अपने पति से कहा, "...जी, आप बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमकर आइए।" बच्चों ने कहा, "...मम्मी, तुम भी चलो।" नीतू ने दोनों को प्यार से समझाया, "...मुझे तुम्हारी आंटी के साथ थोड़ा काम है। कल हम सब साथ में जाएँगे।" यह कहकर उसने उन्हें पति के साथ भेज दिया। शीला घर पहुँची, तो उसका बेटा तैयार होकर नाश्ता करने बैठा था। उसने उसे बताया कि वह बाहर जा रही है और तैयार होने के लिए कमरे में चली गई। रंगनाथ कमरे के दरवाजे के पास आया और झरोखे से अपनी माँ को कपड़े बदलते देखने लगा।

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जब शीला ने नाइटी और लहँगा उतारा, तो उसकी भूरी ब्रा और हरी पैंटी में उसका शरीर देखकर वह लार टपकाते हुए सोचने लगा, "...एक दिन नहीं, तो एक दिन तुझे ज़रूर चोदूँगा।" फिर वह वापस टेबल पर आकर नाश्ता करने लगा। शीला चूड़ीदार पहनकर आई, तो रंग ने कहा, "...अम्मा, मैं गिरीश और सुरेश के पास जा रहा हूँ।" शीला बोली, "...वहाँ कोई घर पर नहीं है, यार।" पूरे दिन उनके साथ रहने के बहाने नीतू आंटी का शरीर देखने की योजना बनाए रंगनाथ को निराशा हुई। उसने अपनी माँ से कहा, "...ठीक है, तुम जाओ। एक चाबी साथ ले जाओ। अगर मेरा दोस्त आया, तो मैं भी उसके साथ चला जाऊँगा।" जब शीला नीतू के घर पहुँची, तो उसने ताला लगाकर अपनी सहेली का इंतज़ार कर रही नीतू को देखा और दोनों अपनी पढ़ी हुई स्कूल की ओर निकल पड़ीं।

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दोनों ने स्कूल के पूरे परिसर को घूमा, पुरानी यादों को ताज़ा किया, और जिस कमरे में वे बैठा करती थीं, उसे देखा। फिर वहाँ के एक-दो पुराने शिक्षकों से बात की और स्कूल के पीछे मैदान में बेंच पर बैठ गईं। छुट्टी का दिन होने के कारण ज़्यादा लोग इधर-उधर नहीं थे, और पूरे मैदान में सिर्फ़ यही दोनों बैठी थीं।

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नीतू ने अपनी सहेली की ओर देखकर कहा, "...अब बता, तू कह रही थी कि बहुत कुछ बात करनी है, क्या मसला है?" नीतू ने गौर किया कि शीला के चेहरे पर डर और दुख के लक्षण छिपाने की असफल कोशिश साफ़ दिख रही थी। शीला सोच रही थी कि क्या कहूँ, कैसे कहूँ, मेरी सहेली क्या सोचेगी। वह जबरदस्ती हँसते हुए बोली, "...क्या खास बात, यार, बस बहुत दिन बाद मिले हैं, इसलिए सोचा कुछ इधर-उधर की गपशप करें।" नीतू ने अपनी सहेली का चेहरा अपनी ओर घुमाया और बोली, "...मेरे सामने झूठ बोल रही है? मैंने सुबह से गौर किया, तू कोई बात मुझसे छिपाने की कोशिश कर रही है। क्यों, क्या मैं अब तेरे लिए पराई हो गई? क्या मैं तेरे दुख को बाँटने लायक भी नहीं रही? बचपन से मेरे माँ-बाप नहीं थे, मैं नानी-नाना के साथ पली। स्कूल के पहले दिन तू मुझसे मिली, और हम दोनों बड़े होते-होते इतनी गहरी दोस्त बन गए कि एक-दूसरे को छोड़ नहीं सकते। तेरे माता-पिता भी मुझे उतना ही प्यार करते थे, जितना तुझे, और मेरे नानी-नाना के लिए तू और मैं अलग-अलग नहीं थे। अब वे कोई नहीं रहे, सिर्फ़ हम दोनों हैं। हमारे सुख-दुख को हमें ही बाँटना होगा, है ना?" नीतू बोलते समय शीला उसे ही देख रही थी। अचानक उसने अपनी सहेली को कसकर गले लगाया और बोली, "...प्लीज़, यार, मुझे बचा ले। मुझे मरना नहीं है, लेकिन मैं हर दिन मर-मरकर जी रही हूँ। प्लीज़, मुझे इस नरक से निकालने का रास्ता दिखा। तेरे सिवा मेरा और कौन है?" अपनी सहेली की बात सुनकर नीतू को लगा जैसे उसके सिर पर बिजली गिरी हो।
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Yrr aurat ko itna lachaar OR kamzor na dikhao ki vasna me beh kar kisi se bhi chud jaaye.. shayad purusho dwara aurat ko kamzor pair ki jooti smjhne ke kaaran hi kahin na kahin aaj ki aurten galat rashte pr nikal chuki Hai jiska khamiyaza kuchh Sharif purush sachche purush bhugat rhe Hai. Please request Hai Neetu ko strong dikhao OR maa ke laude budhe se Phone se ya jahan bhi video Hai usko delete krwao OR neetu ko ek shaktishali aurat ke roop me prastut kro pta nhi neetu jaisi kitni aurton ki zindagi uss randi ke aulad budhe ne barbad kra hoga.. Neetu kitne hi aurton ki zindagi bacha skti Hai...
Wait for the story to continue... you will have real thriller.
 
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