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Erotica दीवाली वाले दिन मिली भाभी की चूत चोदी

dishahot

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These stories collected from internet if anyone has any issue dont report dm me. thank you


जवान भाभी की चुदाई बाथरूम में की, बेडरूम में की. मजा आ गया एक अनजान भाभी की गर्म चूत चोद कर. आप भी यह कहानी पढ़ कर मजा लें.
दोस्तो कैसे हैं आप सब, उम्मीद है कि सब अच्छे से होंगे.
यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, जो मैं आप सबके साथ शेयर कर रहा हूं, अगर कोई गलती हो जाए तो मुझे माफ़ कर दीजिएगा.
मेरा नाम आकाश (नाम बदला हुआ) है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और मेरी उम्र 21 साल है.
मैं उम्मीद करता हूं इस दीवाली आपकी गांड में जबरदस्त खुजली हुई होगी और आप सबने अपनी खुजली मिटाई होगी.
जवान भाभी की चुदाई बाथरूम में की. वो अनजान भाभी थी जो मुझे अनायास ही मिल गयी थी.
भाभी दिखने में बहुत ही सेक्सी हैं. उनकी उम्र 32 साल है और उनका साइज 34-28-36 का है. वो बहुत गोरी हैं.
यह बात दीवाली वाले दिन की है.
मैं उस दिन मॉर्निंग में पार्क गया हुआ था. वहीं मुझे एक सेक्सी हॉट भाभी के दर्शन हुए.
वो दीवाली वाले दिन पहली बार पार्क में आयी थीं.
उनका नाम अंकिता (नाम बदला हुआ) था.
मेरी बात उनसे अंजाने में हो गई.
पार्क में वॉक करते हुए अचानक से उनके पेट में दर्द होने लगा.
जब उनके पेट में दर्द होना शुरू हुआ था तो मैं उनके पास से ही निकल रहा था.
मेरी नजर उन पर पड़ी, तो मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ?
उन्होंने बताया तो मैं उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले गया.
वहां डॉक्टर को दिखाया, तो डॉक्टर ने कहा कि पहले ही दिन ज्यादा रनिंग करने से इनके पेट में दर्द शुरू हो गया, डरने की कोई बात नहीं है.
डॉक्टर ने उन्हें दवा दे दी, जिससे भाभी को थोड़ी देर में आराम लगा.
फिर हम दोनों बाहर आ गए.
मैंने उनसे कहा- आपको पहले ही दिन इतनी रनिंग नहीं करनी चाहिए थी.
भाभी ने कहा- हां आगे से ध्यान रखूंगी.
फिर उन्होंने थैंक्स कहा.
मैंने बोला- अब आप चली जाओगी. उन्होंने कहा- हां.
फिर जैसे ही वो जाने लगीं, तो उनको थोड़ी कमजोरी लग रही थी.
मैंने कहा- मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूं.
भाभी बोलीं- नहीं, मैं आपको पहले ही परेशान कर चुकी हूँ. आपको अपने घर भी तो जाना होगा.
मैंने भाभी से कहा- परेशानी कैसी.
उसी समय मैंने अपने घर पर फोन करके सब बता दिया था.
भाभी बोलीं- ठीक है, इसी बहाने आप हमारे हाथ की चाय भी पी लोगे.
मैंने कहा- हां क्यों नहीं.
फिर मैं उनको उनके घर छोड़ने जाने लगा.
रस्ते में मैंने उनके लिए एक ग्लूकोज का पैक भी ले लिया था ताकि भाभी की कमजोरी दूर हो जाए.
भाभी ने कहा- आप तो बहुत केयरिंग हो, मुझे आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा.
मैं- भाभी में तो ऐसा ही हूं और जहां आप जैसी सुन्दर सेक्सी भाभी हो, तो बस वहां तो पूछो ही मत.
भाभी ने जब ये सुना तो हंस कर बोलीं- अच्छा बच्चू, ऐसा है क्या?
मैं- हां बिल्कुल.
इसके बाद हम दोनों भाभी के घर पहुंच गए.
भाभी के कोई बच्चा नहीं था और उनके पति का ट्रांसपोर्ट का बिजनेस था.
वो महीने में 1-2 बार ही घर आ पाते थे.
दीवाली की वजह से उनके पति का काम बहुत ज्यादा बढ़ गया था तो वो दीवाली पर घर नहीं आए थे.
भाभी के सास ससुर गांव में रहते थे.
चूंकि मैं चुदाई का बहुत शौकीन हूं और स्पेशली भाभी और औरतों में मुझे ख़ास रूचि है.
इधर भाभी के मामले में मुझे आशा की किरण दिखाई देने लगी थी.
जब हम दोनों घर में पहुंचे तो मैं बैठ गया और भाभी चाय बना कर ले आईं.
वो मुझे अपने घर के बारे में सब बताने लगीं.
मेरे मन में लड्डू फ़ूटने लगे कि मामला सैट हो सकता है.
रात होने से पहले ही मैंने सोचा कि आज अच्छा मौका भी है और भाभी मुझसे खुश भी हैं.
पति महीने में 1-2 आते है तो भाभी चुदाई की भी प्यासी होंगी.
मैंने और भाभी ने चाय पी ली.
फिर मैं जाने को हुआ तो भाभी ने नंबर एक्सचेंज करने की बात कही.
मैंने जाते हुए कहा- भाभी, दोपहर को शॉपिंग करने चलोगी?
भाभी तुरंत मान गईं क्योंकि भाभी घर पर अकेली ही थीं. उन्हें दीवाली पर किसी का साथ चाहिए था.
मैं काम से फ्री होकर करीब 2 बजे उनके घर पहुंच गया.
भाभी ने नीले रंग की शाइनिंग वाली साड़ी पहनी हुई थी.
वो इस साड़ी में इतनी सेक्सी लग रही थीं कि मन तो कर रहा था कि उन्हें वहीं चोद दूं, लेकिन मैंने कंट्रोल किया.
मैंने उनकी साड़ी और खूबसूरत मेकअप की तारीफ़ की तो भाभी मुस्कुरा दीं.
फिर हम दोनों मार्केट चले गए.
मार्केट में हमने खूब सारी शॉपिंग की.
मैंने भाभी को एक लहंगा दिलवाया, जिसे देखकर वो बहुत खुश हुईं.
उसके बाद भाभी लेडीज जोन में चली गईं. मैं बाहर इंतजार कर रहा था.
कुछ देर बाद मेरा इंतजार खत्म हुआ और भाभी बाहर आकर मुझसे बोलीं- चलो.
मैंने भाभी से कहा- भाभी, आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हो.
भाभी बोलीं- हां, मुझे भी तुम अच्छे लगने लगे हो.
मैंने कहा- भाभी आप बुरा न मानें तो क्या मैं आपसे कुछ कह सकता हूँ!
भाभी- हां बेहिचक कह दो.
मैंने कहा- भाभी मैं आपको प्यार करने लगा हूँ.
भाभी मेरी ओर अपलक देखने लगीं और धीरे से बोलीं- हां मैं भी तुमसे बहुत प्यार करने लगी हूं.
मैंने भाभी की तरफ बांहें फैला दीं.
वो मेरे गले से लग गईं.
हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे को महसूस करते रहे.
फिर भाभी मुझसे अलग हो गईं.
मैंने कहा- भाभी मैं आज आपको चोदना चाहता हूं.
भाभी ने पहले तो न कर दी.
फिर मैंने कहा- भाभी मैं जानता हूं कि आप भी चुदना चाहती हो, अगर आपको मैं पसंद नहीं हूं तो बता दीजिए. मैं अभी चला जाता हूं.
भाभी ने कहा- ऐसी बात नहीं है, मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूं.
हम दोनों की बात होने लगी.
कुछ देर बाद भाभी ने हां कह दी.
मुझे पता ही था कि भाभी हां ही कहेंगी क्योंकि उनके पति उन्हें सेक्स का सुख नहीं दे पाते थे.
भाभी भी एक औरत थीं, कब तक सेक्स न करतीं.
हर औरत का चुदने का मन करता है.
हम दोनों तुरंत भाभी के घर पहुंचे.
भाभी के घर कोई नहीं था लेकिन मुझे अपने घर भी जाना था क्योंकि दीवाली का दिन था इसलिए जाना जरूरी था; कोई और दिन होता तो बहाना मार देता.
मैं मेडिकल शॉप से कंडोम लेने जाने लगा तो भाभी बोलीं- रहने दो … आज पहली बार मेरी चुदाई अच्छे से होगी.
उन्हें देखकर लग रहा था कि मैं उन्हें पूरा निचोड़ दूंगा, मैंने उनकी बात समझ ली.
हम दोनों भाभी के घर पहुंचे, सब कुछ सैट था.
मैंने समय न खराब करते हुए तुरन्त भाभी को अन्दर लिया और मेनडोर लॉक कर दिया.
कोई आने वाला तो था नहीं तो मुझे डर भी नहीं था.
ये तो आप भी जानते हैं कि डोर लॉक करके चुदाई करने में जो मज़ा है, वो मज़ा खुले डोर में नहीं है.
मैंने डोर लॉक करते ही भाभी के होंठ से होंठ मिला लिए और करीब 10 मिनट तक मैंने भाभी के होंठों का रसपान किया.
क्या रसीले होंठ थे, पूरे रस से भरे हुए.
भाभी ने भी मेरा बराबर साथ दिया.
फिर मैं भाभी को गले पर, गाल पर, भाभी की नाभि को चूसने और चाटने लगा.
भाभी की मादक सिसकारियां निकलने लगीं.
मैं भाभी को बेडरूम में ले गया और बेडरूम भी अन्दर से लॉक कर दिया.
भाभी लजाती हुई सामने खड़ी थीं.
मैंने आगे बढ़ कर भाभी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया.
भाभी के बूब्स देखते ही मैं तो मानो पागल हो गया. क्या भरे हुए बूब्स थे भाभी के.
मैं भाभी के मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा.
भाभी गर्म होने लगीं.
फिर मैंने भाभी के ब्लाउज के हुक को खोल दिया और उनकी ब्रा को ब्लाउज समेत उतार कर उनके मम्मों को आजाद कर दिया.
एक बार नजर भरकर भाभी के मम्मों को देखा और उन पर टूट पड़ा.
कुछ ही देर में मैंने भाभी के मम्मों को चूस चूस कर पूरा लाल कर दिया था.
भाभी को दर्द होने लगा और वो जोर जोर से आवाजें भर रही थीं.
फिर मैंने भाभी के पेटीकोट को ऊपर किया और उनकी चिकनी जांघों को सहलाने लगा, चाटने लगा.
भाभी अब तक पूरी जोश में आ गई थीं. भाभी ने मेरे कपड़े उतारे. पहले शर्ट उतारी, फिर पैंट उतार दी.
पैंट उतारते ही उन्हें चुदाई का हथियार मेरा लौड़ा दिख गया, जो अब तक काफी कड़क हो गया था.
भाभी ने खड़े लंड को देखा और उनके चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.
उन्होंने जोश में आकर मेरा अंडरवियर फाड़ डाला.
उसके बाद उन्होंने मेरे लौड़े को मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगीं.
कुछ पल बाद मैंने उनके पेटीकोट को उतार दिया था और 69 में होकर उनकी चूत चाटने लगा.
हम आधे घंटे तक 69 की पोजीशन में ही एक दूसरे को चूसते और चाटते रहे. हम दोनों बिल्कुल चुदासे हो गए थे.
उसके बाद मैंने कहा- भाभी, अब अपनी चुत में मेरा लंड लेने के लिए तैयार हो जाओ.
भाभी बोलीं- मैं तो बहुत देर से तैयार हूं.
भाभी को चूत और गांड काफी समय से लंड नहीं मिला था तो उन्होंने झट से हां कर दी थी.
मैंने पहले उनकी उंगलियों से जमकर चुदाई की, जिससे उनकी चूत खुल गई.
ऐसा मैंने इसलिए किया था, जिससे दोनों को ही परेशानी न हो.
मैंने आव देखा न ताव … पहले उन्हें बिस्तर पर लिटा कर उनकी टांगों को खोल दिया.
फिर मैंने भाभी के पैरों के नीचे तकिया लगा दिया और उनकी चूत में अपना लंड पेल दिया.
पहले शॉट में ही मैंने अपना आधे से ज्यादा लंड भाभी की चूत में पेल दिया.
भाभी की जोर से चीख निकल गई.
मैं थोड़ी देर रुक गया.
फिर जब मुझे लगा कि हां अब दूसरा धक्का मारना सही रहेगा, तो मैंने एक और जोरदार धक्का लगा दिया.
मेरा पूरा का पूरा लंड भाभी की चूत में समा गया.
इस बार भाभी की चीख बहुत तेज निकली और वो रोने लगीं.
मैं फिर से थोड़ी देर रुक गया.
भाभी जब थोड़ी देर बाद नॉर्मल हुईं, तब मैंने अपनी चुदाई शुरू कर दी और धीरे धीरे धक्के मारने लगा.
अब भाभी को भी मज़ा आने लगा और उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं.
बीच बीच में मैं भाभी की चुदाई के साथ उनके मम्मों के साथ खेलने लगा और उनके होंठों को चूसता रहा.
मैं तो उस समय खुद को जन्नत में हूं … ऐसा महसूस कर रहा था.
उस दिन मैंने जवान भाभी की जमकर चुदाई की.
भाभी भी अपनी गांड उठाकर बोले जा रही थीं- आंह चोदो … और चोदो … मज़ा आ रहा है.
मेरी ताबड़तोड़ चुदाई के दौरान भाभी 3 बार झड़ चुकी थीं.
फिर मैं भी झड़ने वाला था, तो मैंने भाभी से पूछा- कहां निकालूँ?
भाभी ने बोला- अन्दर ही निकाल दो.
मैंने बोला- कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी न!
भाभी ने कहा- मैं पिल्स खा लूंगी, कुछ नहीं होगा.
अब मेरा लंड उनकी बच्चेदानी को छू रहा था.
मैंने भाभी के अन्दर ही सारा वीर्य छोड़ दिया और भाभी के बगल में ही लेट गया.
भाभी के चेहरे पर मुस्कान थी. मैं समझ गया था कि वो बहुत खुश हैं.
फिर भी मैंने पूछा- मज़ा आया?
वो बोली- हां बहुत ज्यादा.
फिर भाभी नंगी ही किचन में गईं और चाय नाश्ता ले आईं.
हम दोनों ने नंगे ही चिपटकर एक दूसरे को नाश्ता खिलाया और चाय पी.
मैंने बोला- एक और राउंड हो जाए!
वो बोलीं- हां क्यों नहीं.
हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे.
भाभी सिसकारियां भर रही थीं उनकी आंखें बन्द थीं.
मैंने देर किए बिना अपना लंड उनकी चूत पर टिका दिया और पेल दिया.
भाभी की आंखें एकदम से फट गईं और उनके मुँह से गाली निकल गई- आंह भोसड़ी के धीरे चोद ना!
मैंने सॉरी कहा और 2 मिनट रुक गया.
फिर भाभी बोलीं- बाबू ऐसे नहीं करना चाहिए … तुम तो बस मौके का फायदा उठाने में लग गए.
मैंने कहा- जो मौके का फायदा न उठाए, वो आपका चाहने वाला ही क्या!
भाभी हंस दीं.
फिर हमने धमाकेदार चुदाई की और भाभी दो बार झड़ गई थीं.
अब मैं भी दुबारा झड़ने वाला था तो मैंने भाभी के मुँह में लंड डालकर अच्छे से मुँह की भी चुदाई की और उनके मुँह में ही झड़ गया.
भाभी मेरा पूरा वीर्य पी गईं और मुझे वासना से देखने लगीं.
इस बार हम दोनों बुरी तरह से पसीना पसीना हो गए थे और थककर एक दूसरे से चिपककर लेट गए.
थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में चले गए. उधर हम एक साथ नहाए.
मैंने उन्हें मसल मसलकर नहलाया और उन्होंने मुझे नहलाया.
बाथरूम में भाभी के ऊपर गिरते हुए पानी को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
हम दोनों ने एक और बार बाथरूम चुदाई की.
मैंने होंठ, बूब्स का रसपान किया, जिसमें भाभी ने भी खूब साथ दिया. भाभी मेरा लंड लेकर चूसे जा रही थीं.
एक बार हम दोनों ने एक दूसरे को फिर से नहलाया.
भाभी मेरा लंड को अच्छे से मसलकर साबुन लगाकर साफ कर रही थीं और मैं उनकी चूत और बूब्स को साफ़ कर रहा था.
अब काफी समय हो गया था तो मैं निकलने के लिए कहने लगा.
भाभी कहने लगीं- अब कब आओगे?
मैंने बोला- जब आप बुलाओ.
भाभी बोलीं- मेरा बस चले तो मैं तुम्हें जाने ही न दूं.
यह सुनकर मुझे लगा कि चलो भाभी को मज़ा आ गया.
मैंने बोला- भाभी मैं बहुत ही जल्द आऊंगा और आपके साथ पूरा दिन, पूरी रात रहूंगा. लेकिन तब आपको अपनी गांड भी मरवानी होगी. आज जो मैंने आपको लहंगा दिलवाया है, तब आप वही पहनोगी.
उन्होंने बोला- मैं गांड नहीं मरवाऊंगी.
मैंने बोला- तो फिर मैं नहीं आऊंगा.
मेरा ऐसा बोलने की ही देर थी कि उन्होंने बोला- बाबू ऐसा मत करना … मैं सोचूंगी बाबू.
मुझे पता था कि वो अपनी गांड जरूर मरवाएंगी.
मैंने बोला- मैं जल्द ही आऊंगा जान.
ऐसा कहकर मैं कपड़े पहनकर वहां से निकल आया.
जब तक मैं उनके घर नहीं गया, तब तक हमारी फोन पर और मैसेज पर सेक्सी बातें चलती रहीं,
भाईदूज के बाद मैं जैसे ही फ्री हुआ, उनके घर आ गया और उनकी जबरदस्त चुदाई की.
भाभी की गांड भी मारी.
वो सेक्स कहानी मैं अगली बार लिखूंगा.
 
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dishahot

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यह इंडियन हॉट भाभी सेक्स कहानी शहर में दूकान चलाने वाली एक भाभी की है. लॉकडाउन में पुलिस ने जब दूकान बंद करायी तो मैं उसके साथ फंस गया.

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम लस्टराम है. मैं बड़े लंड के शहर बुलंडशहर (बुलंदशहर) से हूँ.
मैं 5 फुट 11 इंच का गठीले बदन वाला लड़का हूँ.

मेरी तरफ हसीनाएं एक ख़ास वजह से आकर्षित होती हैं, उसका कारण और श्रेय मेरे 9 इंच के लिंगराज को जाता है.

दोस्तो, ये मेरी सच्ची व पहली इंडियन हॉट भाभी सेक्स कहानी है.

जैसा कि आप सभी इस बात से वाकिफ होंगे कि कोरोना काल में देश में लगे लॉकडाउन के चलते हम सभी लोग कई दिनों से घर से नहीं निकले थे.

फिर एक दिन जब दुकानों के खुलने का फरमान जारी हुआ, तो मैं अपने गांव से घूमने के लिए शहर निकल गया.

जब मैं घर से निकला था, तब मुझे पता नहीं था कि आज घर से निकला ये नौजवान लड़का, पूरा मर्द बनकर लौटेगा.

हुआ यूं कि मैं कान में इअरफोन लगा कर गाना सुनते हुए शहर से वापस अपने गांव लौट रहा था.
तभी अचानक मेरी नज़र एक दुकान पर पड़ी, जहां पर एक 34 इंच के कबूतरों (बूब्स) वाली और 36 इंच के बत्तखों (गांड) वाली व 28 इंच की कटीली कमर लिए एक मस्त औरत अपनी जवानी छलकाती हुई दुकान पर ग्राहकों को सौदे दे रही थी.

उस कली ने मुझ जैसे भँवरे को कुछ इस कदर अपनी ओर आकर्षित किया कि मैं भी बहती नदी में आई बाढ़ के नजारे को दूर से ही देखने पहुंच गया.

दुकान बंद होने का समय हो चला था तो सभी दुकानदारों ने धीरे धीरे अपनी दुकान बढ़ाना शुरू कर दिया.

लेकिन भाभी की दुकान पर ग्राहक कुछ इस कदर डटे थे, जैसे आज के बाद इन बड़े बूढ़े नौजवानों को किसी ने कह दिया हो कि सारी खरीददारी आज ही कर लो. इसके बाद प्रलय आ जाएगा और सब मिट जाएगा.

वहां खड़े सभी ग्राहकों के ऊपर और नीचे के मास्क दोनों जगहों से निकलने वाली लार की वजह से गीले हो रहे थे.

काफी वक्त से दूर खड़ा मैं इस नज़ारे का लुत्फ़ उठा रहा था और अब भीड़ कम होने लगी थी क्योंकि पुलिस वालों ने लाठी पटकना शुरू कर दिया था.
लेकिन उन पुलिस वालों ने भाभी को देखकर जो मुस्कान दी थी, उससे साफ लगता था कि भाभी ने इन पुलिस वालों के डंडे का तेल निकाला होगा.

अब भाभी की दुकान के सामने मैं अकेला ग्राहक खड़ा था लेकिन मुझे उसकी दुकान में रखे सामानों में कोई दिलचस्पी नहीं थी.
मुझे तो उस भाभी के कुदरती सामानों का सौदा करना था.

भाभी ने मुझे देखा और बोल उठी- तुम्हें क्या चाहिए बाबू … मैं कब से देख रही हूं कि तुम दूर चुपचाप खड़े हो. जो चाहिए, जल्दी बोलो. वैसे ही देर हो गई है.

मेरी नज़र भाभी के कबूतरों पर थी.

भाभी ने मुझे देखा और मुस्करा कर अपनी चुन्नी नीचे कर दी जिसकी वजह से मुझे भाभी के उठे हुए पहाड़ों में प्रवेश करने वाली बड़ी गहरी और संकरी गली के दीदार होने लगे.

अब भाभी ने सीना फुलाया और फिर से पूछा.
तो मैं जल्दी से बोल उठा- मुझे एक पेन दे दो.

जिसे निकालने के लिए वो पीछे मुड़ी और अब तो मुझे भाभी की सबसे प्यारी बत्तखों के दर्शन हो गए.

भाभी का मस्त पिछवाड़ा देख कर मैं पूरा नशे में हो गया था.

पेन लेकर भाभी लौटी तो मैं बोल उठा- ये वाला नहीं … दूसरा.
भाभी ने इधर उधर देखा और मुझसे धीरे से बोली- बाबू आप अन्दर आ जाओ.

मैं बोला- कोई बात नहीं भाभी … कल ले लूंगा.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर दुकान के अन्दर खींचा और बोली- भाभी के देवर जी, जल्दी से अन्दर आ जाओ.

मुझे अन्दर खींच कर भाभी ने अन्दर से दुकान की शटर गिरा दी.
उसका घर अन्दर ही था.

मैं भाभी की दुकान के अन्दर गया तो मेरी नज़र घड़ी की तरफ चली गई.
सात बजने वाले थे और मेरे गांव जाने के सभी साधन बंद हो चुके थे.

भाभी मेरा अता-पता पूछने लगी, तो मैंने उसे सब बताया.
कुछ देर तक हंसी मजाक चला.

फिर उस भाभी ने कहा- बाबू, आप घर फ़ोन कर दीजिए कि आज आप नहीं जा पाओगे.
मैंने भाभी से कहा- कोई बात नहीं भाभी … मैं अपने दोस्त के घर रुक जाऊंगा.

उसने तुरंत कहा- आज तुम मेरे साथ यहीं रुक जाओ क्योंकि मेरे घर पर भी कोई नहीं है. मेरे पति दिल्ली में लॉकडाउन की वजह से फंसे हैं और मेरा इस शहर में कोई नहीं है.

भाभी के कहने को मैं टाल ना सका.

हम बातें कर रहे थे तो मैंने भाभी से बोला- आप बहुत सुंदर हो.
भाभी ने भी कहा- बाबू तुम भी बहुत मस्त हो. जरा सी देर में ही आपने मुझे बहुत हंसाया है.

अब घड़ी ने 8 बजने का इशारा किया तो भाभी बोली- आप मेरे पति का टॉवल लपेट लो और चाहो तो नहा भी सकते हो. वैसे खाने में क्या खाओगे?

मैंने झट से बोला- आज तो जो आप दोगी, मैं सब कुछ खा जाऊंगा.
भाभी हंसती हुई बोली- ठीक है … आप रुको, मैं कपड़े बदल कर नहा कर आती हूँ.

छोटा कमरा होने के नाते भाभी, दुकान के सामने बने रसोईघर में कपड़े उतारने लगी.
ये देखकर मेरे अन्दर का शेर जागने लगा और मैंने ज़िन्दगी में पहली बार किसी को अपनी आंख के सामने कपड़े बदलते देखा था.

दोस्तो, यूँ तो मैंने कई सारी लड़कियां पटाई थीं … लेकिन किसी के भी साथ मैंने संभोग नहीं किया था.

मैं भाभी की जवानी का नज़ारा देख रहा था कि तभी भाभी ने मुझसे कहा- बाबू मेरी ब्रा का हुक नहीं खुल रहा है, जरा मेरी हेल्प कर दो.

मेरे हाथ कांपने लगे, मैंने धीरे से हुक खोला.

अब भाभी ने मुझे मर्द बनाने का पूरा मन बना लिया था. भाभी ने उस वक्त तौलिया लपेट रखा था.

मैं भाभी को देखते हुए बोला- गर्मी बहुत लग रही है.
भाभी हंसती हुई बोली- हां कुछ तो गर्मी है और कुछ बढ़ गई है.

मैं हंसने लगा तो भाभी भी हंसने लगी और बोली- बाबू तुम भी कपड़े उतार दो न!

भाभी ने मुझे अपने सामने ही कपड़े बदलने को बोल उठी.
उसके बहुत कहने के बाद मैंने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए.

मेरे मजबूत बदन को देख कर भाभी ने अपने कबूतरों को हल्के हल्के से दबाना शुरू कर दिया.

भाभी बोलने लगी- बाबू, मैंने अभी तक इतना फिट लड़का नहीं छुआ है. क्या मैं तुम्हारे बदन को छू लूं?
मैं हंस कर बोला- भाभी आप ये क्या बोल रही हो … मैं बिगड़ गया तो आपको मुसीबत हो जाएगी.

भाभी ने कहा- तो बिगड़ जाओ न मेरे देवर बाबू, आज आपकी ये भाभी भी बिगड़ने के मूड में है.
मैंने कहा- देख लो भाभी … कहीं कुछ ज्यादा न हो जाए.

भाभी मेरी बात का मर्म नहीं समझ सकी और बोली- क्या ज्यादा हो जाएगा बाबू?

मैंने धीरे से कहा- मेरा औजार …

अभी मैंने इतना ही कहा था कि भाभी ने मेरी बात काटते हुए कहा- बाबू अब आपसे क्या शर्माना … सिर्फ एक बार आपको छू लेने दो न!
मेरे मन में भी तो लड्डू फूट रहे थे.

लेकिन वो कहते हैं ना कि
‘मन मन भावें मुड़ी हिलावें.
मैं वही कर रहा था.

अब भाभी ने मुझे छूना शुरू किया. मेरी हालत उस वक्त कैसी थी, मैं बता नहीं सकता.

भाभी ने मेरे बदन को छूते हुए पूछा- बाबू आज तक आपने बहुत सारी लड़कियों को तृप्त किया होगा ना?

मैं भाभी को ना भी बोलता, तो वो कहां विश्वास करने वाली थी इसलिए मैंने कुछ नहीं बोला.

भाभी पीछे से मेरे बदन को छूते हुए बोली- आप अपना लोवर भी उतार दो.

अब भाभी ने पूरी तरह से मुझे हरी झंडी दे दी थी.
मैंने ये समझने में देर नहीं की और अपना लोवर नीचे करने लगा.

भाभी की चुदाई के बारे में सोच कर … और उसके हाथों से मेरे बदन को छूने की वजह से मेरा लंड भी अपने विकराल रूप में आने की कोशिश कर रहा था.
खड़े लंड के मुँह से जो लार गिरने लगी थी, वो मेरी स्लेटी रंग की चड्डी पर साफ दिख रही थी.

थोड़े लचीलेपन के साथ मेरा लंड अपनी औकात में आ चुका था.

मैं अपनी आंखें नीचे करके बड़े भोलेपन के साथ धीरे धीरे लोवर नीचे कर रहा था.
भाभी के हाथ अब काबू से बाहर होने लगे, शायद उन्होंने इतने बड़े लंड के दर्शन अब तक कभी नहीं किए थे.

तभी भाभी पीछे मुड़कर कर देखने लगी कि मैं शर्माना छोड़कर नंगा हो जाऊं.

मैं सिर्फ चड्ढी में था तो मैंने भाभी से टॉवल मांगी.
पर भाभी की नज़र मेरे लंड से हट ही नहीं रही थी.

उसने बिना देरी किए मेरे साथ जो किया … वो मेरा पहला अनुभव था.
खुद को रोकने की नाकाम कोशिश करने के बाद भाभी मेरी ओर भूखी शेरनी की तरह झपटी और मेरे होंठों को चूसने लगी.

भाभी मुझसे बोली- बाबू मेरी लिपस्टिक जब तक खत्म ना हो … तब तक मुझे चूसते रहो.

मैंने भाभी के कहे अनुसार उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उनकी गांड को मसलने लगा.

ना जाने कब भाभी ने अपना एक हाथ मेरे चड्डी में डाल दिया और लंड को सहलाने लगी.

तभी मैंने भाभी को चूमते हुए देखा.
उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे, वो रो रही थी.
ये देख कर मैं डर गया.

फिर कुछ मिनट उसके रसभरे गुलाबी होंठों को चूमने के बाद मैंने पूछा- भाभी आप रो क्यों रही हो? यदि ये सब गलत है, तो हम नहीं करते हैं.

तभी भाभी ने मुझे पास पड़ी कुर्सी पर धक्का देकर बिठा दिया और बिना देर किए मेरे विकराल रूप धारण किए लिंगराज के दर्शन के लिए चड्डी रूपी फाटक को उतार फैंका.

जैसे ही भाभी ने मेरी चड्डी उतारी, मेरे लिंगराज ने जोर से फटाक से बाहर निकलते हुए भाभी के गालों को स्पर्श कर दिया.

मैं देख कर घबरा गया क्योंकि अब भाभी की अश्रुधारा और तेज़ हो गई और उसका बदन सिहर उठा था.
वो कांपने लगी थी.

उसका तौलिया मैंने खींच लिया तो भाभी मेरे सामने गुलाबी चड्डी और एक हुक लगी ब्रा में रह गई थी.

मैंने उसे खींचा और खुद के ऊपर बिठा लिया. मैंने भाभी से इस स्थिति का कारण पूछा, तो उसने मुझे गले से लगा लिया.

भाभी बोल उठी- बाबू मेरी शादी को दो साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक मैं सिर्फ 8 से 10 बार ही चुदी हूँ. मेरे पति का लंड सिर्फ 4 इंच का पतला सा है. मैं अपने पति के सिवाए आज तक किसी से नहीं चुदी हूँ और मेरी गांड तो आज तक कुवांरी है.

दोस्तो, इंडियन हॉट भाभी के मुँह से ये सारे खुले शब्द सुनकर मैं चौंक उठा. मैं बहुत रोमांचित हो रहा था.

मैंने पूछा- भाभी ये पुलिस वालों की नजरें तो कुछ और ही बयां कर रही थीं.
भाभी ने जवाब दिया- वो मैं बाद में बताऊंगी और मेरी आंख से आंसू का कारण आपके लंड की साइज़ है.

भाभी को मैंने गले पर चूमा तो वो तुरंत मेरी गोद से उतरकर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर कण्ठ में धारण करने की कोशिश करने लगी.
वो मेरे लंड को कुल्फी की तरह चाट रही थी.

फिर भाभी ने लेट कर टांगें फैला दीं और मुझे अपने ऊपर चढ़ने का इशारा कर दिया.

अब मेरे सामने भाभी की चुत खुली हुई लपलप कर रही थी और मेरा लंड भाभी की चुत चीरने की चाहत में फनफना रहा था.
 

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Jaisa ki aap sabko maloom hai abhi pichhle hafte hi humne USC ki announcement ki hai or abhi kuch time pehle Rules and Queries thread bhi open kiya hai or Chit Chat thread toh pehle se hi Hind section mein khula hai.

Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 7000 words (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 7th February ko open hoga matlab aap 7 February se story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 25th February tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.



Story se related koi doubt hai to iske liye is thread ka use kare — Chit Chat Thread

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Prizes
Position Benifits
Winner 1500 Rupees + Award + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 500 Rupees + Award + 2500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) + 2 Months Prime Membership
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Scodash Psychopath

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"Chance to win cash prize up to Rs 8000"
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Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 7000 words ke bich honi chahiye (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Cash Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 15th February ko open ho chuka matlab aap apni story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 5th March 2024 tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.



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Prizes
Position Benifits
Winner 4000 Rupees + Award + 5000 Likes + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 1500 Rupees + Award + 3500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 1000 Rupees + 2000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories)
3rd Runner-UP 750 Rupees + 1000 Likes
Best Supporting Reader 750 Rupees + Award + 1000 Likes
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