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Incest दिवाली का जुआ

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Jacobs

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अध्याय ६

करीब एक घंटे बाद, जब रात का खाना तैयार हो गया, तो मीरा तरुण को बुलाने के लिए ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर गईं। सीढ़ियां चढ़ते समय उनका बदन थक चुका था और घर के पूरी तरह घरेलू माहौल में उन्होंने अपनी साड़ी बदल ली थी।

तरुण के कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर मीरा ने हल्के से नॉक किया, "तरुण, चलो बेटा, खाना लग गया है।"

जैसे ही तरुण ने दरवाजा खोला, सामने का नजारा देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसके हलक में थूक सूख गया। मीरा मौसी अब साड़ी में नहीं थीं, बल्कि उन्होंने एक हल्के गुलाबी रंग की हाफ-स्लीव वाली सिल्क की नाइटी पहन रखी थी। यूं तो वह नाइटी ऊपर से नीचे तक बंद थी और एक संस्कारी, घरेलू औरत की तरह उनके शरीर को पूरी तरह ढके हुए थी, लेकिन मीरा की भारी-भरकम काया के अंगों का उभार संभालना उस पतले सिल्क के कपड़े के लिए बिल्कुल नामुमकिन साबित हो रहा था।

नाइटी उनके बदन पर इतनी कसी हुई थी कि सामने से उनके विशाल, गोलाकार और दूध जैसे गोरे वक्ष पूरी तरह से उभरकर बाहर की तरफ आ रहे थे। सिल्क का कपड़ा वक्षों के कड़ेपन के कारण इतना तन गया था कि दोनों वक्षों के बीच का भारी खिंचाव साफ नजर आ रहा था। नाइटी की तंग कसावट के कारण उनके वक्षों का उतार-चढ़ाव तरुण की आँखों के ठीक सामने था।

"चलो नीचे..." मीरा ने तरुण की आँखों में फैली दीवानगी को देखते हुए अपनी नजरें झुका लीं और वापस नीचे की तरफ मुड़ गईं।



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जब मीरा आगे बढ़ीं और तरुण उनके ठीक पीछे-पीछे चलने लगा, तो यह दृश्य तरुण के लिए और भी ज्यादा भयानक और मदहोश कर देने वाला था। उस तंग सिल्क की नाइटी ने मीरा के पीछे के हिस्से को इस कदर जकड़ रखा था कि उनके वो विशालकाय, चौड़े और भारी-भरकम नितंब ऐसे लग रहे थे मानो इस पूरे ब्रह्मांड का भार अकेले संभाल रहे हों। उस पतली नाइटी के लिए मीरा के इतने भारी कूल्हों को थामना मुश्किल हो रहा था।

जैसे ही मीरा ने नीचे उतरने के लिए सीढ़ी पर पहला कदम रखा, उनके दोनों नितंबों में एक भारी और मादक थिरकन पैदा हुई। एक-एक सीढ़ी उतरते हुए, सिल्क के कपड़े के नीचे से उनके भारी कूल्हों का वो डोलना, ऊपर-नीचे होना और आपस में रगड़ खाना तरुण के सामने किसी लाइव कयामत जैसा था। तरुण बिना पलक झपकाए उस भारी-भरकम थिरकन को निहारता हुआ जा रहा था और अंदर ही अंदर दुआ कर रहा था कि काश... यह सीढ़ियां कभी खत्म ही ना हों और वह जिंदगी भर अपनी मीरा मौसी के इस विशाल बदन को ऐसे ही पीछे से देखता रहे।

**भाग 3:

दोनों नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँचे। माहौल को सामान्य बनाने के लिए मीरा ने प्लेट्स लगाना शुरू किया और तरुण कुर्सी खींचकर बैठ गया।

"तुम्हारी माँ का फोन आया था तरुण, मुंबई पहुँच गई है वह," मीरा ने गरम-गरम रोटियां हॉटपॉट से निकालते हुए कहा, "कल सुबह मानव और निखिल की फाइनल सेरेमनी है। दोनों बच्चे कितनी जल्दी बड़े हो गए, कल उनकी डिग्री उनके हाथ में होगी। बस भगवान करे दोनों को हमारे बिज़नस को अच्छी से संभालेंगे।"

"हाँ मौसी, मानव और निखिल दोनों ने बहुत मेहनत की है। माँ भी बहुत एक्साइटेड थीं वहां जाने के लिए," तरुण ने सब्जी की कटोरी अपनी तरफ खींचते हुए कहा, लेकिन उसकी नजरें अभी भी टेबल पर झुककर खाना परोसती मीरा के जिस्म पर टिकी थीं।

जब मीरा टेबल पर आगे की तरफ झुककर तरुण की प्लेट में चावल परोस रही थीं, तो नाइटी का गला थोड़ा आगे की तरफ लटक गया, जिससे उनके विशाल वक्षों की वो गोरी घाटी तरुण को बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी। तरुण को लग रहा था कि वह बहुत चुपके से मीरा मौसी के इस कातिलाना जिस्म का रसपान कर रहा है और मौसी को कुछ पता नहीं चल रहा।

लेकिन तरुण इस बात से बिल्कुल अनजान था कि मीरा सिर्फ उसकी मौसी नहीं, बल्कि एक मैच्योर और अनुभवी औरत थीं। वे बहुत अच्छी तरह से जानती थीं कि मर्दों की नजरें कब और कहाँ टिकती हैं। जब तरुण उनके वक्षों और उनकी कमर के उभार को घूर रहा था, तो मीरा को अपनी त्वचा पर तरुण की नज़रों की वो तपिश साफ महसूस हो रही थी। उनके भीतर इस बात से एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिया। वे बहुत ही शालीनता से खाना परोसती रहीं,
हो
 
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Jacobs

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हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
 

Jacobs

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अध्याय - ७

उधर मुंबई के उसी आलीशान होटल के सुइट में भी रात काफी गहरी हो चुकी थी। बाहर की मूसलाधार बारिश अब मद्धम हो चली थी, लेकिन कमरे के भीतर का सन्नाटा और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। निखिल जब तान्या आंटी को चूमने के बजाय सिरदर्द और थकान का बहाना बनाकर बगल वाले कमरे में गया था, तो वह खुद को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहा था। लेकिन तान्या के लिए यह स्थिति बिल्कुल सामान्य नहीं थी। एक जवान लड़का उनके इस बेबाक रूप को देखने के बाद भी पीछे हट गया और वे उसे 'पिघला' नहीं पाईं—यह बात एक सफल और डोमिनेटिंग CEO के दिमाग में लगातार खतरे की घंटी बजा रही थी। करीब एक घंटे बाद, रूम सर्विस वाले ने सुइट के डाइनिंग एरिया में रात का खाना लगा दिया। तान्या ने बगल वाले कमरे का दरवाजा खटखटाया और अपनी उसी अधिकार भरी आवाज में कहा, "निखिल, डिनर लग गया है। बाहर आओ, भूखे पेट सोओगे तो सिरदर्द और बढ़ जाएगा।"

निखिल ने गहरी सांस ली और खुद को पूरी तरह सामान्य दिखाते हुए बाहर आया। लेकिन जैसे ही उसकी नजर डाइनिंग टेबल पर बैठी तान्या पर पड़ी, उसके कदम एक बार फिर ठिठक गए। तान्या ने अब वह ब्लैक सिल्क नाइट-रोब हटा दिया था, लेकिन उनका नया आउटफिट निखिल के संयम की परीक्षा लेने के लिए काफी था। उन्होंने सिल्क के कपड़े का ही एक हल्के ऑलिव ग्रीन रंग का बेहद टाइट स्लीवलेस नाइट-सूट पहन रखा था। हालांकि इस कैमिसोल का गला बहुत ज्यादा डीप नहीं था, लेकिन तान्या के वक्ष इतने बड़े और भारी-भरकम थे कि वे उस नॉर्मल गले के顶 टॉप में भी समा नहीं पा रहे थे और बाहर की तरफ भारी दबाव बना रहे थे। उसके ऊपर उन्होंने एक पारदर्शी दुपट्टा ओढ़ रखा था। उस झीने दुपट्टे के पार से तान्या के आधे से थोड़े कम निकले हुए बड़े, सुडौल और दूधिया रंग के वक्ष किसी मखमली ढलान की तरह साफ चमक रहे थे, जो कमरे की मद्धम रोशनी में और भी खूबसूरत लग रहे थे। नीचे उन्होंने उसी रंग की एक बेहद चस्त शॉर्ट्स पहनी हुई थी, जिसमें से उनकी स्वस्थ, गोरी जांघें और पूरी खुली हुई मखमली बाहें साफ दिख रही थीं।

"बैठो निखिल," तान्या ने वाइन का ग्लास उठाते हुए कहा। दोनों खाने की मेज पर आमने-सामने बैठ गए। माहौल को सामान्य बनाने के लिए तान्या ने खुद ही बातचीत की शुरुआत की। उन्होंने निखिल की तरफ प्लेट्स सरकाते हुए कहा, "चिकन करी और राइस मँगाया है, और तुम्हारे लिए ये गरमा-गरम वेजिटेबल सूप भी है। वैसे, तुम हॉस्टल में क्या खाते हो? तीन साल से तुम्हारी मम्मी दिल्ली में हर हफ्ते मुझसे यही रोना रोती हैं कि मेरा निखिल वहां पता नहीं क्या खा रहा होगा, दुबला हो गया होगा। ज़रा बताओ, क्या वाक़ई हॉस्टल का खाना इतना बुरा होता है जैसा तुम्हारी मम्मी सोचती हैं?" निखिल ने सूप का चम्मच हाथ में लेते हुए हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, "शुरुआत में तो सच में बहुत मुश्किल होती थी आंटी। दिल्ली के पराठों और घर के खाने के बाद यहाँ के हॉस्टल की वो पानी जैसी दाल और उबले हुए चावल निगलना किसी सज़ा से कम नहीं था। मानव तो कई बार गुस्से में प्लेट ही छोड़ देता था। पर फिर धीरे-धीरे आदत हो गई। इंसान को पेट भरने के लिए सब कुछ खाना आ ही जाता है।"

तान्या ने हल्के से हंसते हुए अपनी कोहनी टेबल पर टिकाई, जिससे उनका पारदर्शी दुपट्टा थोड़ा सा खिसक गया और उनके भारी वक्षों की गोलाई और उभर आई। उन्होंने कहा, "अरे बाप रे! तो मेरा सीधा-साधा निखिल इतना बड़ा तपस्वी बन गया? वैसे मानव का तो मुझे पता है, मीरा उसे बहुत लाड-प्यार से रखती है, तो उसके नखरे जायज़ हैं। पर तुम तो अपनी मम्मी के इतने आज्ञाकारी हो, कभी दिल्ली फोन करके शिकायत नहीं की तुमने?" निखिल ने सूप का एक घूंट लेते हुए अपनी नज़रें नीचे ही रखीं, "नहीं आंटी, मम्मी पहले ही दिल्ली में अपने बिज़नेस और घर को अकेले संभाल रही हैं। मैं उन्हें अपनी छोटी-छोटी दिक्कतों के लिए परेशान नहीं करना चाहता था। मुंबई का यह तेज़ मिज़ाज भले ही शुरू में पराया लगा, लेकिन इस शहर ने मुझे आत्मनिर्भर बनना सिखा दिया। बस... कभी-कभी जब मूसलाधार बारिश होती है और कमरे में उमस बढ़ जाती है, तो दिल्ली के उस शांत बंगले की और मम्मी के हाथ की बनी अदरक वाली चाय की बहुत याद आती है।"

तान्या ने निखिल की आँखों में झांकते हुए वाइन का ग्लास घुमाया और बेहद सधे हुए लहजे में पूछा, "वैसे निखिल, सच बताना... तुम्हारी मम्मी ने जब इस सेरेमनी में आने से साफ़ मना कर दिया, तो क्या तुम्हें बुरा नहीं लगा? कॉलेज का इतना बड़ा दिन है, तुम्हारी ज़िंदगी का इतना बड़ा मुकाम है, और उन्होंने कह दिया कि बिज़नेस की मंगेतर व्यस्तताओं के कारण वो नहीं आ सकतीं।" निखिल के चेहरे पर एक पल के लिए उदासी की लकीर खिंच गई, जिसे उसने तुरंत छुपाने की कोशिश की, "बुरा तो लगा था आंटी... पर मैं उनकी मजबूरियों को समझता हूँ। वो अकेले ही सब संभालती हैं।" तान्या ने एक ठंडी सांस ली और अपने ऑलिव ग्रीन टॉप को थोड़ा सहेजते हुए बोलीं, "सच कहूँ तो निखिल, तुम्हारी मम्मी का यह रवैया मुझे भी थोड़ा अजीब लगा। मैंने दिल्ली छोड़ने से पहले खुद उनसे बात करने की बहुत कोशिश की थी, उनके घर भी गई, फोन भी मिलाया... लेकिन उनसे ढंग से बात ही नहीं हो पाई। वो बहुत कटी-कटी सी रह रही हैं। मुझे लगा था कि कम से कम अपने इकलौते बेटे की खातिर वो सब छोड़-छाड़ कर आएंगी, पर पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा है। खैर, छोड़ो... तुम बताओ कल की क्या तैयारी है? सूट वगैरह सब रेडी है न?"

निखिल ने सिर हिलाया, "हाँ आंटी, सब रेडी है। कल सुबह बस समय पर पहुंचना है।" तान्या ने मुस्कुराते हुए अपनी जांघों को थोड़ा और आराम से सोफे पर फैलाया और पूछा, "अच्छा, कल तो डिग्री मिल जाएगी। पर इस बार का फाइनल रिजल्ट कैसा रहा? तुम्हारा स्कोर बेहतर है या मानव का? सुना है मानव पढ़ाई में बहुत तेज़ है और कॉलेज टॉपर बनने की रेस में सबसे आगे था।" निखिल ने बहुत ही शांत और गंभीर आवाज़ में जवाब दिया, "मानव वाकई पढ़ाई में बहुत तेज़ और शातिर दिमाग का है आंटी। उसका एकेडमिक रिकॉर्ड हमेशा से कमाल का रहा है। मेरा रिजल्ट भी अच्छा है, पर मानव ने इस बार सच में बहुत मेहनत की थी, तो निश्चित रूप से उसका रिजल्ट मुझसे थोड़ा बेहतर ही होगा।" तान्या ने उसकी इस ईमानदारी को नोट किया और आगे झुकते हुए बोलीं, "पढ़ाई अपनी जगह है निखिल, पर तुमने आगे फ्यूचर के लिए क्या सोचा है? कल के बाद क्या प्लान है?"

निखिल ने कुछ पल सोचा, "मैं दिल्ली लौटकर मम्मी के साथ उनके बिज़नेस को ही आगे बढ़ाना चाहता हूँ।" यह सुनते ही तान्या की आँखों में एक शातिर चमक आ गई। उन्होंने टेबल पर आगे बढ़कर निखिल के हाथ के बिल्कुल पास अपनी उंगलियां टिकाईं, जिससे उनके पारदर्शी दुपट्टे के नीचे फंसे विशाल वक्षों का दबाव टेबल के किनारे से छूने लगा। उन्होंने बेहद मखमली और अधिकार भरी आवाज़ में कहा, "दिल्ली का बिज़नेस? निखिल, मैंने तुम्हें अभी बताया कि दिल्ली में इस वक्त मेरा और तुम्हारी मम्मी का बिज़नेस बहुत धीमा चल रहा है। मार्केट बहुत कड़ा है। लेकिन तुम बिल्कुल फिक्र मत करना। अगर तुम दिल्ली में कदम रख रहे हो और तुम्हें आगे बढ़ना है, तो तुम्हारी यह तान्या आंटी तुम्हारी बहुत मदद कर सकती है। मेरे कॉर्पोरेट कनेक्शंस और मेरी कंपनी का रसूख तुम्हें दिल्ली के मार्केट में बहुत तेजी से टॉप पर ले जा सकता है। मैं तुम्हें ऐसे क्लाइंट्स और डील्स दिलवा सकती हूँ जो तुम्हारी मम्मी अकेले कभी नहीं सोच सकतीं। बस... तुम्हें मेरा साथ देना होगा। क्या तुम अपनी इस आंटी की मदद लोगे?"

निखिल ने सांत्वना देते हुए और तान्या के इस भारी प्रस्ताव को भांपते हुए कहा, "आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए आंटी। मैं और मानव कल अपनी डिग्री लेने के बाद पूरा ध्यान इसी पर लगाएंगे। हम दोनों मिलकर आप लोगों के बिज़नेस को वापस टॉप पर लेकर आएंगे। और आपकी मदद तो मेरे लिए हमेशा एक आशीर्वाद की तरह रहेगी।" इस गंभीर बातचीत के बाद तान्या ने अचानक अपने वाइन के ग्लास को टेबल पर रखा और थोड़ा और आगे झुकते हुए निखिल की आँखों में सीधे देखा। उनका गला थोड़ा और खुल गया, जिससे उनके वक्षों का उभार और तीखा हो गया। "वैसे निखिल... खाना शुरू करने से पहले मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ," तान्या ने अपनी आवाज को थोड़ा धीमा और मखमली बनाते हुए कहा, "आई एम रियली सॉरी... थोड़ी देर पहले कमरे में जो कुछ भी हुआ, उस मोमेंट के लिए। मुझे उस तरह तुम्हारे इतने करीब नहीं आना चाहिए था। शायद मुंबई के इस भीगे मौसम और वाइन के नशे ने मुझे थोड़ा सा बेकाबू कर दिया था। प्लीज माइंड मत करना।"

निखिल अंदर से पूरी तरह अचकचा गया, पर उसने बाहर से खुद को संभालते हुए कहा, "अरे नहीं आंटी, प्लीज सॉरी मत कहिए। आप मेरी मां की सहेली हैं और आपका मुझ पर पूरा हक है। इसमें आपकी कोई गलती नहीं थी।" तान्या के होठों पर एक शातिर मुस्कान तैर गई। वे यही सुनना चाहती थीं। उन्होंने अपनी कोहनी टेबल पर टिकाई और निखिल को और गहराई से घूरते हुए बोलीं, "सॉरी तो मुझे कहना ही था निखिल... क्योंकि तुम इतने ज्यादा हैंडसम और खूबसूरत हो कि कोई भी औरत अपना आपा खो दे। सच कहूँ तो, पूरे कॉलेज में कोई न कोई लड़की तो तुम्हारी दीवानी होगी ही। तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है ना, निखिल? मुझे बताओ, कौन है वो खुशकिस्मत लड़की? तुम अपनी इस आंटी से सब कुछ शेयर कर सकते हो, मैं किसी को नहीं बताऊंगी।"

तान्या का यह सवाल निखिल के दिल पर सीधा वार था। उसके दिमाग में तुरंत उसकी माँ नंदिनी का चेहरा घूम गया, जिनके प्रति उसका छुपा हुआ पजेसिव अट्रैक्शन ही उसकी असली बंदिश थी और जिसके कारण वह तान्या के उस 'किसिंग मोमेंट' से पीछे हटा था। निखिल ने चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लाते हुए कहा, "अरे नहीं आंटी, आप भी क्या बात कर रही हैं। यहाँ पढ़ाई और असाइनमेंट से ही फुरसत नहीं मिलती, गर्लफ्रेंड बनाने का समय कहाँ है। मेरे जीवन में ऐसी कोई लड़की नहीं है।" निखिल ने बहुत ही चतुराई से बात को टाल दिया, लेकिन तान्या का शातिर दिमाग इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। बातचीत के दौरान निखिल की नजरें लगातार तान्या के इस चस्त रूप में उलझी हुई थीं। जब भी तान्या बात करते हुए अपने पारदर्शी दुपट्टे को संभालतीं, तो टाइट टॉप में कसे उनके भारी वक्ष और उसके नीचे से चमकती उनकी गोरी त्वचा निखिल की आँखों के सामने आ जाती। जब वे मुस्कुरातीं, तो शॉर्ट्स में कसी उनकी जांघों की बनावट निखिल के भीतर की जवान कामुकता को और भड़का देती।

तान्या एक मैच्योर और अनुभवी औरत थीं,嫌 उन्हें निखिल की इस भटकती हुई और प्यासी नजरों का पूरा अहसास हो रहा था। वे निखिल की इस बेचैनी को अंदर ही अंदर एंजॉय कर रही थीं, लेकिन उनके कॉर्पोरेट दिमाग में अभी भी वही पहेली चल रही थी कि यह लड़का मेरी तरफ आकर्षित तो है, इसकी नजरें मेरे जिस्म को घूर रही हैं... लेकिन फिर भी यह कमरे में पीछे [/ref] हट गया? इसका मतलब साफ है कि इसके दिल और दिमाग पर किसी ऐसी औरत का साया है, जिसके सामने वह हार मान चुका है। "अच्छा चलो, अब खाना खाकर आराम करो। कल सुबह हम दोनों साथ में सेरेमनी में चलेंगे और मानव को वो बड़ा सरप्राइज देंगे। मानव बेचारा तो यही सोच रहा होगा कि उसकी माँ मीरा आने वाली थी, पर उसकी जगह मुझे देखकर उसके होश उड़ जाएंगे," तान्या ने अपनी उंगलियों से निखिल के हाथ को हल्के से छूते हुए कहा। "जी आंटी, बिल्कुल। सुबह मिलते हैं," निखिल ने हाथ पीछे खींचते हुए कहा।

खाना खत्म हुआ और दोनों ने एक-दूसरे को 'गुड नाइट' कहा। तान्या अपने कमरे के बेड पर लेटकर कमरे की छत को घूरते हुए इसी पहेली को सुलझाने में लग गईं कि निखिल के दिल का राज़ आखिर क्या है। उधर बगल के कमरे में निखिल बिस्तर पर लेटा अपनी माँ नंदिनी के ख्यालों में खो गया। दोनों ही अपनी-अपनी मर्यादा और उमंग के बीच झूल रहे थे, इस बात से पूरी तरह अनजान कि सुबह की पहली किरण के साथ ही दीक्षांत समारोह का वह विशाल मैदान इन दोनों परिवारों की दबी हुई इच्छाओं और शातिर चालों का सबसे बड़ा गवाह बनने जा रहा था।

खाना खत्म हुआ और दोनों ने एक-दूसरे को 'गुड नाइट' कहा। तान्या अपने कमरे के बेड पर लेटकर कमरे की छत को घूरते हुए इसी पहेली को सुलझाने में लग गईं कि निखिल के दिल का राज़ आखिर क्या है। उधर बगल के कमरे के एकांत में निखिल जब बिस्तर पर लेटा, तो कमरे का सन्नाटा और बाहर की मद्धम बारिश की गूँज उसके भीतर की तड़प को सौ गुना बढ़ा रही थी। उसने बेड पर लेटने के बाद अपना फोन चालू किया, जो अब तक नेटवर्क से बाहर आ रहा था। जैसे ही फोन की स्क्रीन चमकी, स्क्रीन पर मानव का एक नया मैसेज पॉप-अप हुआ। मानव ने मैसेज में लिखा था, "भाई, मैं अभी गेस्ट हाउस में हूँ। रात बहुत हो चुकी है और बाहर मूसलाधार बारिश है, इसलिए मैं सुबह सीधा कॉलेज की फाइनल सेरेमनी में ही तुमसे मिलूँगा। सारी तैयारी पूरी रखना, कल का दिन हमारा है।"

निखिल ने मानव का मैसेज पढ़ा और उसके होठों पर एक गहरी मुस्कान आ गई। उसने तुरंत कीबोर्ड पर उंगलियां चलाईं और मानव को जवाब में लिखा, "ठीक है भाई, कल सुबह सीधे सेरेमनी में ही मिलते हैं।" निखिल बहुत ही गंभीर और शांत स्वभाव का लड़का था जो अपने राज़ छुपाना बखूबी जानता था। उसने मानव को मैसेज तो भेज दिया, लेकिन अपनी इस चैट में तान्या आंटी के मुंबई आने के बारे में एक शब्द भी नहीं बताया। उसने इस बात को पूरी तरह छुपा लिया कि तान्या आंटी उसी आलीशान होटल के सुइट में उसके बिल्कुल बगल वाले कमरे में मौजूद हैं। मानव को तान्या के बारे में कुछ न बताना निखिल की उस वफ़ादारी का हिस्सा था जो वह अपनी माँ के प्रति रखता था।

फोन को साइड टेबल पर रखकर निखिल ने लाइट बंद की और सीधे बेड पर लेटकर कंबल को अपने सीने तक खींच लिया, लेकिन उसकी बंद आँखों के सामने बार-बार सिर्फ और सिर्फ उसकी माँ नंदिनी का वह दैवीय, संस्कारी और पारदर्शी साड़ी वाला रूप घूम रहा था। आज जब तान्या आंटी ऑलिव ग्रीन चस्त सूट, पारदर्शी दुपट्टे और उस बोल्ड अंदाज़ में उसके इतने करीब बैठी थीं, तो निखिल के जिस्म की जवानी सुलग तो रही थी, पर उसके दिल ने किसी और को स्वीकार करने से साफ़ मना कर दिया था। निखिल ने अंधेरे में एक गहरी और ठंडी सांस ली। उसका मन कर रहा था कि वह चिल्लाकर इस रात के सन्नाटे को तोड़ दे। उसके दिल के सबसे अंधे और गहरे कोने से एक बेकाबू हसरत उठ रही थी कि काश... काश उसकी वो देवी, उसकी माँ नंदिनी आज इस आलीशान होटल के सुइट में उसके साथ होतीं! अगर आज रात तान्या आंटी की जगह उसकी वो संस्कारी और मखमली काया वाली देवी इस कमरे में उसके सामने खड़ी होती, तो इस भीगे मौसम और आलीशान बिस्तर का मज़ा सचमुच दोगुना हो जाता। वह अपनी माँ के उस सम्मोहक रूप की कल्पना मात्र से ही सिहर उठा। वह सोचने लगा कि अगर उसकी देवी यहाँ होती, तो वह उनके इस संस्कारी रूप को अपनी बाँहों में भींच लेता और इस तूफानी रात की हर एक बंदिश को हमेशा के लिए मिटा देता। तान्या आंटी का हुस्न चाहे कितना भी बेबाक और रसूखदार क्यों न हो, लेकिन निखिल के लिए उसकी माँ का वह शालीन और कातिलाना सौंदर्य ही उसकी असली इबादत था। इसी पागलपन और अपनी देवी के प्रति इस पजेसिव अट्रैक्शन के विचारों में डूबा निखिल का दिमाग धीरे-धीरे शांत होने लगा। वह अपनी माँ के चेहरे को अपनी बंद आँखों में पूरी गहराई से बसाए हुए, एक बेहद गहरी और मदहोश नींद के आगोश में समा गया, इस बात से पूरी तरह अनजान कि सुबह की पहली किरण के साथ ही दीक्षांत समारोह में वो अपनी सपने की काम देवी
रूपी मां नंदिनी से मिलेगा ।
 
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Jacobs

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लगता है लोगो को स्टोरी का प्लॉट अच्छा नहीं लगा ,न comments नहीं likes, कोई review भी नहीं ,।
ऐसे कैसे मोटिवेशन मिलेगा
 
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