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अध्याय ६
करीब एक घंटे बाद, जब रात का खाना तैयार हो गया, तो मीरा तरुण को बुलाने के लिए ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर गईं। सीढ़ियां चढ़ते समय उनका बदन थक चुका था और घर के पूरी तरह घरेलू माहौल में उन्होंने अपनी साड़ी बदल ली थी।
तरुण के कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर मीरा ने हल्के से नॉक किया, "तरुण, चलो बेटा, खाना लग गया है।"
जैसे ही तरुण ने दरवाजा खोला, सामने का नजारा देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसके हलक में थूक सूख गया। मीरा मौसी अब साड़ी में नहीं थीं, बल्कि उन्होंने एक हल्के गुलाबी रंग की हाफ-स्लीव वाली सिल्क की नाइटी पहन रखी थी। यूं तो वह नाइटी ऊपर से नीचे तक बंद थी और एक संस्कारी, घरेलू औरत की तरह उनके शरीर को पूरी तरह ढके हुए थी, लेकिन मीरा की भारी-भरकम काया के अंगों का उभार संभालना उस पतले सिल्क के कपड़े के लिए बिल्कुल नामुमकिन साबित हो रहा था।
नाइटी उनके बदन पर इतनी कसी हुई थी कि सामने से उनके विशाल, गोलाकार और दूध जैसे गोरे वक्ष पूरी तरह से उभरकर बाहर की तरफ आ रहे थे। सिल्क का कपड़ा वक्षों के कड़ेपन के कारण इतना तन गया था कि दोनों वक्षों के बीच का भारी खिंचाव साफ नजर आ रहा था। नाइटी की तंग कसावट के कारण उनके वक्षों का उतार-चढ़ाव तरुण की आँखों के ठीक सामने था।
"चलो नीचे..." मीरा ने तरुण की आँखों में फैली दीवानगी को देखते हुए अपनी नजरें झुका लीं और वापस नीचे की तरफ मुड़ गईं।

जब मीरा आगे बढ़ीं और तरुण उनके ठीक पीछे-पीछे चलने लगा, तो यह दृश्य तरुण के लिए और भी ज्यादा भयानक और मदहोश कर देने वाला था। उस तंग सिल्क की नाइटी ने मीरा के पीछे के हिस्से को इस कदर जकड़ रखा था कि उनके वो विशालकाय, चौड़े और भारी-भरकम नितंब ऐसे लग रहे थे मानो इस पूरे ब्रह्मांड का भार अकेले संभाल रहे हों। उस पतली नाइटी के लिए मीरा के इतने भारी कूल्हों को थामना मुश्किल हो रहा था।
जैसे ही मीरा ने नीचे उतरने के लिए सीढ़ी पर पहला कदम रखा, उनके दोनों नितंबों में एक भारी और मादक थिरकन पैदा हुई। एक-एक सीढ़ी उतरते हुए, सिल्क के कपड़े के नीचे से उनके भारी कूल्हों का वो डोलना, ऊपर-नीचे होना और आपस में रगड़ खाना तरुण के सामने किसी लाइव कयामत जैसा था। तरुण बिना पलक झपकाए उस भारी-भरकम थिरकन को निहारता हुआ जा रहा था और अंदर ही अंदर दुआ कर रहा था कि काश... यह सीढ़ियां कभी खत्म ही ना हों और वह जिंदगी भर अपनी मीरा मौसी के इस विशाल बदन को ऐसे ही पीछे से देखता रहे।
**भाग 3:
दोनों नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँचे। माहौल को सामान्य बनाने के लिए मीरा ने प्लेट्स लगाना शुरू किया और तरुण कुर्सी खींचकर बैठ गया।
"तुम्हारी माँ का फोन आया था तरुण, मुंबई पहुँच गई है वह," मीरा ने गरम-गरम रोटियां हॉटपॉट से निकालते हुए कहा, "कल सुबह मानव और निखिल की फाइनल सेरेमनी है। दोनों बच्चे कितनी जल्दी बड़े हो गए, कल उनकी डिग्री उनके हाथ में होगी। बस भगवान करे दोनों को हमारे बिज़नस को अच्छी से संभालेंगे।"
"हाँ मौसी, मानव और निखिल दोनों ने बहुत मेहनत की है। माँ भी बहुत एक्साइटेड थीं वहां जाने के लिए," तरुण ने सब्जी की कटोरी अपनी तरफ खींचते हुए कहा, लेकिन उसकी नजरें अभी भी टेबल पर झुककर खाना परोसती मीरा के जिस्म पर टिकी थीं।
जब मीरा टेबल पर आगे की तरफ झुककर तरुण की प्लेट में चावल परोस रही थीं, तो नाइटी का गला थोड़ा आगे की तरफ लटक गया, जिससे उनके विशाल वक्षों की वो गोरी घाटी तरुण को बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी। तरुण को लग रहा था कि वह बहुत चुपके से मीरा मौसी के इस कातिलाना जिस्म का रसपान कर रहा है और मौसी को कुछ पता नहीं चल रहा।
लेकिन तरुण इस बात से बिल्कुल अनजान था कि मीरा सिर्फ उसकी मौसी नहीं, बल्कि एक मैच्योर और अनुभवी औरत थीं। वे बहुत अच्छी तरह से जानती थीं कि मर्दों की नजरें कब और कहाँ टिकती हैं। जब तरुण उनके वक्षों और उनकी कमर के उभार को घूर रहा था, तो मीरा को अपनी त्वचा पर तरुण की नज़रों की वो तपिश साफ महसूस हो रही थी। उनके भीतर इस बात से एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिया। वे बहुत ही शालीनता से खाना परोसती रहीं,हो
करीब एक घंटे बाद, जब रात का खाना तैयार हो गया, तो मीरा तरुण को बुलाने के लिए ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर गईं। सीढ़ियां चढ़ते समय उनका बदन थक चुका था और घर के पूरी तरह घरेलू माहौल में उन्होंने अपनी साड़ी बदल ली थी।
तरुण के कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर मीरा ने हल्के से नॉक किया, "तरुण, चलो बेटा, खाना लग गया है।"
जैसे ही तरुण ने दरवाजा खोला, सामने का नजारा देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। उसके हलक में थूक सूख गया। मीरा मौसी अब साड़ी में नहीं थीं, बल्कि उन्होंने एक हल्के गुलाबी रंग की हाफ-स्लीव वाली सिल्क की नाइटी पहन रखी थी। यूं तो वह नाइटी ऊपर से नीचे तक बंद थी और एक संस्कारी, घरेलू औरत की तरह उनके शरीर को पूरी तरह ढके हुए थी, लेकिन मीरा की भारी-भरकम काया के अंगों का उभार संभालना उस पतले सिल्क के कपड़े के लिए बिल्कुल नामुमकिन साबित हो रहा था।
नाइटी उनके बदन पर इतनी कसी हुई थी कि सामने से उनके विशाल, गोलाकार और दूध जैसे गोरे वक्ष पूरी तरह से उभरकर बाहर की तरफ आ रहे थे। सिल्क का कपड़ा वक्षों के कड़ेपन के कारण इतना तन गया था कि दोनों वक्षों के बीच का भारी खिंचाव साफ नजर आ रहा था। नाइटी की तंग कसावट के कारण उनके वक्षों का उतार-चढ़ाव तरुण की आँखों के ठीक सामने था।
"चलो नीचे..." मीरा ने तरुण की आँखों में फैली दीवानगी को देखते हुए अपनी नजरें झुका लीं और वापस नीचे की तरफ मुड़ गईं।

जब मीरा आगे बढ़ीं और तरुण उनके ठीक पीछे-पीछे चलने लगा, तो यह दृश्य तरुण के लिए और भी ज्यादा भयानक और मदहोश कर देने वाला था। उस तंग सिल्क की नाइटी ने मीरा के पीछे के हिस्से को इस कदर जकड़ रखा था कि उनके वो विशालकाय, चौड़े और भारी-भरकम नितंब ऐसे लग रहे थे मानो इस पूरे ब्रह्मांड का भार अकेले संभाल रहे हों। उस पतली नाइटी के लिए मीरा के इतने भारी कूल्हों को थामना मुश्किल हो रहा था।
जैसे ही मीरा ने नीचे उतरने के लिए सीढ़ी पर पहला कदम रखा, उनके दोनों नितंबों में एक भारी और मादक थिरकन पैदा हुई। एक-एक सीढ़ी उतरते हुए, सिल्क के कपड़े के नीचे से उनके भारी कूल्हों का वो डोलना, ऊपर-नीचे होना और आपस में रगड़ खाना तरुण के सामने किसी लाइव कयामत जैसा था। तरुण बिना पलक झपकाए उस भारी-भरकम थिरकन को निहारता हुआ जा रहा था और अंदर ही अंदर दुआ कर रहा था कि काश... यह सीढ़ियां कभी खत्म ही ना हों और वह जिंदगी भर अपनी मीरा मौसी के इस विशाल बदन को ऐसे ही पीछे से देखता रहे।
**भाग 3:
दोनों नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँचे। माहौल को सामान्य बनाने के लिए मीरा ने प्लेट्स लगाना शुरू किया और तरुण कुर्सी खींचकर बैठ गया।
"तुम्हारी माँ का फोन आया था तरुण, मुंबई पहुँच गई है वह," मीरा ने गरम-गरम रोटियां हॉटपॉट से निकालते हुए कहा, "कल सुबह मानव और निखिल की फाइनल सेरेमनी है। दोनों बच्चे कितनी जल्दी बड़े हो गए, कल उनकी डिग्री उनके हाथ में होगी। बस भगवान करे दोनों को हमारे बिज़नस को अच्छी से संभालेंगे।"
"हाँ मौसी, मानव और निखिल दोनों ने बहुत मेहनत की है। माँ भी बहुत एक्साइटेड थीं वहां जाने के लिए," तरुण ने सब्जी की कटोरी अपनी तरफ खींचते हुए कहा, लेकिन उसकी नजरें अभी भी टेबल पर झुककर खाना परोसती मीरा के जिस्म पर टिकी थीं।
जब मीरा टेबल पर आगे की तरफ झुककर तरुण की प्लेट में चावल परोस रही थीं, तो नाइटी का गला थोड़ा आगे की तरफ लटक गया, जिससे उनके विशाल वक्षों की वो गोरी घाटी तरुण को बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी। तरुण को लग रहा था कि वह बहुत चुपके से मीरा मौसी के इस कातिलाना जिस्म का रसपान कर रहा है और मौसी को कुछ पता नहीं चल रहा।
लेकिन तरुण इस बात से बिल्कुल अनजान था कि मीरा सिर्फ उसकी मौसी नहीं, बल्कि एक मैच्योर और अनुभवी औरत थीं। वे बहुत अच्छी तरह से जानती थीं कि मर्दों की नजरें कब और कहाँ टिकती हैं। जब तरुण उनके वक्षों और उनकी कमर के उभार को घूर रहा था, तो मीरा को अपनी त्वचा पर तरुण की नज़रों की वो तपिश साफ महसूस हो रही थी। उनके भीतर इस बात से एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिया। वे बहुत ही शालीनता से खाना परोसती रहीं,हो
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