UPDATE 16
घर आ कर मैंने पत्नी से कहा कि मैं कुछ दिनों के लिये बगलुरु जा रहा हुँ सो मेरे कपड़ें पैक कर दे। वह बोली की माधुरी को बता दिया है तो मैंने कहा नही। उसे सुबह फोन किया था तो वह बिजी थी, उस का भी कोई फोन नहीं आया था। यह कह कर मैं जाने की तैयारी में लग गया। बहुत काम था सुबह जल्दी निकलना था। माधुरी ने कोई फोन नही किया। मैंने भी नही किया। अगले दिन सुबह जल्दी निकल गया सात बजे की फ्लाइट थी। ग्यारह बजे बगलुरु पहुँचा, पहले होटल गया, वहाँ सामान रख कर साईट पर चला गया।
शाम को देर से लौटा तो पत्नी का फोन आया कि क्या कर रहे हो? मैंने उसे बताया कि दोपहर को खाना नही खाया है अभी लौटा हूँ नहा कर खाना ऑडर करुँगा फिर खा कर सो जाऊँगा। वह कुछ पुछना चाहती थी लेकिन उस ने पुछा नही। मैंने कुछ बताया नहीं। थके होने की वजह से बिस्तर पर पड़ते ही सो गया। आधी रात को नींद फोन की घंटी से खुली, देखा तो माधुरी का फोन था, उस की आवाज बैठी हुई थी। मैंने पुछा कि इतनी रात को क्यों फोन करा? कुछ देर तक कोई आवाज नही आयी। मुझे डर लगा कि कहीं कुछ कर ना ले।
अगर कुछ बोलना नही है तो फोन क्यों करा है?
क्या बोलुँ
जो तुम्हारे मन में हो कहो
फोन क्यों नही किया?
तुम ने क्यों नही किया?
मैं बिजी थी
मैं भी बिजी था लेकिन परसों सुबह फोन किया था तुम से उठाया नही था, कही बिजी थी।
बाद में भी तो कर सकते थे
कर सकता था लेकिन बहुत बिजी था, बगलुरु आने की तैयारी कर रहा था। आज भी यहाँ पर दम मारने की फुरसत नही मिली है दिन का और रात खाना एक साथ खाया है। मेरी छोड़ो अपनी बताओ
क्या बताऊँ
कुछ भी कॉलिज में क्या हाल है?
मेरा हाल नही पुछोगे?
तुम्हारी आवाज से तुम्हारा हाल मुझे पता चल गया है
हम दोनों लड़ते क्यों है?
मुझे क्या पता मैं तो नही लड़ा लेकिन अपनी गल्तियाँ ढुढ रहा हुँ कि कहाँ पर गलत हूँ
माफ नही करोंगे
माफी किस बात की, तुम तो दोस्त हो
उस दिन कुछ कहा क्यों नहीं
कुछ नही कहना था
इतना बुरा लग गया था
हाँ बुरा तो लगा था लेकिन फिर लगा कि दोनों औरतें गलत तो नही हो सकती है, मेरे ही में कुछ गलत है।
मुझे मार सकते थे
क्यों मारुँ
माधुरी एक बात हमेशा ध्यान रखना तुम सबसे पहले मेरी दोस्त हो उस के बाद कुछ और हो तुम से सेक्स की कोई आशा नही थी, सिर्फ दोस्ती की चाहत थी, उसी चाहत में शायद कुछ गलत हो गया है।
माधुरी रोने लगी। मुझे समझ नही आ रहा था कि उसे क्या कहुँ, मैंने उस से कहा कि अपना फोन विडियों कॉल पर कर के मुझे अपने को दिखाये तो उस ने विडियों कॉल कर ली उस की शक्ल देख कर मुझे चैन आया उस ने कहा कि अपना कमरा दिखाओ, कैमरा घुमा कर, मुझे हँसी आ गयी और मैंने कैमरा चारों तरफ घुमा कर दिखा दिया, फिर पुछा चैन आया कि साथ में तो कोई नही है? वह बोली कि नहीं विश्वास है तुम पर। लेकिन तुम्हारा कमरा देखने का मन था। सो देख लिया। मैंने कहा की मैडम अब सो जाओ बंदें को सुबह जल्दी जग कर साइट पर जाना है तुम्हें भी कॉलेज जाना है। यह कह कर मैंने उसे एक फ्लाइग किस किया और फोन बंद कर दिया। इस के बाद मैं नींद में डुब गया।
सुबह उठा तो देखा कि फोन पर माधुरी का सॉरी का मैसेज था, उसे फोन किया और कहा कि सॉरी किस बात का उसे जो गलत लगा उसने कहा इस में सॉरी कहने की जरुरत नही है। वह बोली की तुम ऐसे ही नाराज रहोगे तो मैं हँस का बोला कि भई नाराज होने का हक है मुझे लेकिन मैं नाराज नहीं हूँ।
वह बोली की तो मेरे से बात क्यों नही कर रहे हो? मैंने उसे समझाया कि कल रात को बहुत थका हुआ था इस लिये ऐसा हो गया है अभी भी तैयार हो कर साइट पर जाना है, इस लिये ज्यादा बात नहीं कर पाऊँगा। लेकिन वापस आ कर बहुत सी बातें करुँगा। मेरी बात पर वह बोली कि दो मिनट तो बात कर ही सकते हो। मैंने कहा कि जरुर कर सकता हूँ लेकिन शाम को बात करुँगा।
तुम्हें भी तो कॉलेज जाना है या नहीं तो वह बोली कि हाँ जाना तो है, तो पहले काम जरुरी है बातें बाद में करेंगे। यह कह कर मैंने फोन काट दिया। मैं तैयार होने लग गया जब कमरे से निकल रहा था तभी पत्नी का फोन आया कि माधुरी को फोन क्यों नही कर रहे हो। मैंने उसे बताया कि अभी तो मेरी उस से बात हुई है तो वह बोली कि सुबह उस का फोन आया था कि तुम ने रात को उस का फोन काट दिया था।
मैंने उसे बताया कि आधी रात थी और मैं बहुत थका हुआ था फिर भी मैंने उस से बात की थी विडियों पर उस की शक्ल भी देखी थी और उसे अपना कमरा भी दिखाया था इस के बाद फोन बंद कर दिया था। यहाँ बहुत ज्यादा काम है इस कारण से मैं किसी से भी ज्यादा बात नहीं कर पाऊँगा। यह उस को बताया था तुम को भी बता रहा हुँ उसे भी समझा देना तथा मेरी उस से कोई लड़ाई नहीं हुई है इस लिये परेशान मत होओ। आ कर सारी बात बताऊँगा।
यह कह कर मैंने उस का फोन भी काट दिया। सारे दिन काम के सिवाय और कुछ सोचने का वक्त ही नहीं मिला। शाम को होटल आ कर माधुरी को फोन किया तो वह खुश लगी बोली कि मैं भी सारे दिन कॉलेज में वयस्त थी, हम दोनों ने इधर-उधर की बातें की और फोन रख दिया।
उस के बाद पत्नी को फोन किया तो वह बोली कि खाना खा लिया तो मैंने उसे बताया कि अभी आया हूँ नहा कर खाना ऑडर करुँगा। वह कुछ बोलती इस से पहले ही मैंने उसे बता दिया की माधुरी को फोन कर लिया था, वह सही है। उस ने चैन की साँस ली। वह बोली कि तुम दोनों तो बच्चों की तरह रुठतें रहते हो, यह क्या है? मैंने कहा कि सही कह रही हो लेकिन हो ही जाता है इस का भी कोई हल ढुढ़ना पड़ेगा। वह बोली की हाँ तुम्हारें पास तो हर समस्या का हल है, मैं बोला कि ताना तो मत मारो।
वह हँस कर बोली कि कभी तुम और मैं कितना लड़ते थे? मैंने कहा हाँ लेकिन समय के साथ सुधर गये है। शायद यह भी समय के साथ सुधर जाये। उस ने पुछा कि कब आयोंगे तो मैं बोला कि अभी पता नही है बहुत काम है अगर ज्यादा दिन चला तो तुम्हें यहाँ बुला लुगा। वह बोली कि मेरी बजाए माधुरी को बुला लेना मैंने कहा कि वह कॉलेज की वजह से नहीं आ पायेगी। इस के बाद फोन कट गया। मैं भी नहाने चला गया, आ कर खाना खाया और सोने चला गया।
पुरा हफ्ता ऐसे ही निकल गया रविवार को छुट्टी थी सो देर तक सोता रहा, उठ कर नहाया, नाश्ता किया फिर पहनने के कपड़ें देखे कि सभी गंदे हो गये थे, होटल में कपड़ें धुलवाना बहुत महँगा था सो वह विचार छोड़ दिया, सोचा कि दो-तीन नये पेंट शर्ट ले लेता हूँ हफ्ता निकल जायेगा। दोपहर में शापिंग करने निकाल और कुछ अपने लिये तथा कुछ पत्नी और माधुरी के लिये कपड़ें खरीद लिये। शाम का बाहर ही खाना भी खा लिया। जल्दी सोने जा रहा था कि माधुरी का फोन आया और बोली कि आज क्या किया है? तो मैंने उसे बताया कि सारे कपड़ें गंदे हो गये थे सो कुछ नये कपड़ें खरीद लिये है। वह बोली कि अंडर ग्रामेंट तो नही लिये होगे तो मैंने मना किया वह बोली कि जो सबसे जरुरी थे वही नही खरीदे। मैंने कहा कि अभी धो कर डाल देता हूँ सुबह तक सुख जायेगे, अगर समय मिला तो कल ले लुँगा।
वह बोली की कुछ मत खरीदना मैं अपने साथ ले कर आऊँगी तो मैंने पुछा कि तुम्हारे पास आने का समय है? वह बोली की समय तो निकालना पड़ेगा। तुम अभी आओगें नहीं इस लिये किसी को तो आना ही होगा। दीदी ने मुझे जाने को कहा है सो मैं शनिवार की सुबह आऊँगी, मेरे रहने का इंतजाम कर के रखना। मैंने कहा जो हूकुम सरकार। मेरा जबाव सुन कह वह हँस दी और बोली कि हम दोनों को अपनी चीज की चिन्ता हो रही है इस लिये आना पड़ रहा है।
कपड़ें वगैरहा में साथ लाऊँगी। तुम कुछ और नही खरीदना। दूसरे दिन मैंने ऑफिस को कहा कि यहाँ की बजाए मुझे कोई अपार्टमेंट दिलवा दे सस्ता भी पड़ेगा तथा मैं पत्नी को भी बुला सकुँगा, मेरा विचार सब को पसंद आया और दुसरे दिन ही उन्होंने एक ऑफिस अपार्टमेंट मेरे लिये बुक कर दिया।
दो कमरें, किचन, बाथरुम, फुल फर्नीशड, सिर्फ खाने की परेशानी थी सो वह भी हल हो गयी वहाँ पैक्ड खाना आ जाता था। मैं बुधवार को ही उस में शिफ्ट हो गया, होटल से ज्यादा खुला था, दसवीं मंजिल पर शहर का बढ़िया नजारा दिखायी देता था। आजादी थी कोई भी आ जा सकता था। शनिवार को माधुरी सुबह की फ्लाईट से आ गयी, वह साथ में मेरे काफी कपड़ें लायी थी।
उस दिन तो वह सारे दिन अकेली रही. जब मैं शाम तो आया तो वह टीवी देख रही थी। मुझे देख कर बोली कि खाने का क्या करना है? मैंने उसे बताया कि खाना आने वाला है मैंने ऑडर कर दिया है, थोड़ी देर में खाना आ गया हम दोनों खाना खाने लगे तब मुझे ध्यान आया कि माधुरी ने तो दोपहर में खाना नहीं खाया होगा मैं काम में उस का खाना ऑडर करना भुल गया। मैंने इस के लिये माधुरी से माफी माँगी तो वह बोली कि मैं दिल्ली से अपना और तुम्हारा खाना बना कर लाई थी, सो उसी को खा लिया।
लेकिन मुझे बहुत बुरा लग रहा था कि मैं उस के बारें में बिल्कुल भुल गया मैं ऐसा कैसे कर सकता था? वह मेरे लिये दिल्ली से आयी है और मैं उस के बारे में भुल गया। मुझे शर्मिंदा देख कर उस ने कहा कि मुझे दीदी ने पहले ही बता दिया था कि यह काम के दौरान सब कुछ भुल जाते है सो तुम अपना ध्यान खुद ही रखना। इन से किसी चीज की आशा मत करना।
उन की बात सही थी। फिर उस ने कहा कि इस बात को लेकर चिन्ता करने की जरुरत नही है अगर मुझे भुख लगती तो मैं तुम्हें फोन कर के याद दिला देती, इतना तो हक है तुम पर। मैं यह सुन कर मुस्करा दिया मेरी मुस्कराहट पर वह बोली कि इस मुस्कराहट पर तो सब कुछ कुरबान है फिर एक वक्त का खाना क्या चीज है? मैंने उस का हाथ दबाया तो वह बोली कि पहले खाना खा लो। मैं और वह खाना खाने लगे।
खाना खाने के बाद हम दोनों कुछ देर तक बालकॉनी में खड़े हो कर रात में रोशनी में नहाये शहर को देखते रहे, मैंने पुछा कि पहले बगलुरु आयी है तो वह बोली कि नहीं पहली बार आयी हूँ। तुम तो आते रहते हो। मैंने जबाव दिया कि हाँ काम के सिलसिले में आता हूँ लेकिन कभी कुछ देखने का मौका नहीं मिला है। काम से फुरसत ही नही मिलती है। वह बोली कि अब मैं आयी हूँ तो फुरसत भी मिल जायेगी तभी कुछ देखेगे। हम दोनों एक दूसरें का हाथ थामें कमरे में आ गये। फिर हाथ थामें ही बेडरुम में चले गये। मैं सोने के लिये बेड पर गया तो वह कपड़ें बदलने चली गयी।
जब कपड़ें बदल कर आयी तो उस का रुप ही बदल गया था उस ने बैबी डॉल ड्रेस डाल रखी थी उस पारदर्शी पोशाक में वह और मादक लग रही थी, माधुरी को मैंने इस रुप में नहीं देखा था। मेरी नजर को देख कर वह बोली कि कैसी लग रही हूँ तो मैंने दोनों बाँहें फैला कर कहा कि आयों बताता हूँ तो वह वही खड़ी रही और बोली कि क्या बात है? मैंने कहा कि अब देर मत करो बाँहों में आ जाओ ना। वह बोली कि सुधर गये हो नही तो अब तक तो गोद में ले कर पटक देते।
मैं बोला कि हाँ मुझे भी बदलना है मेरे प्यार दर्शाने के तरीके को बदलना है। मेरी इस बात पर वह झट से मेरी बाँहों में समा गयी। मैंने कस कर उसे सीने से चिपका लिया। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही रहे। कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज ही आ रही थी। मैं माधुरी के शरीर की गरमाहट अपने शरीर में समा लेना चाहता था। वह भी कुछ ऐसा ही चाहती थी। उस की बाँहे मेरी पीठ पर से हो कर गरदन पर कसी थी। उस के उरोज मेरी छाती में चुभ रहे थे लेकिन यह चुभन अच्छी लग रही थी।
फिर उस ने मुँह उठा कर अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिये। उस के होंठों का मीठा स्वाद आज कुछ नया सा लग रहा था। ऐसा लग रहा था कि दो किशोर प्रेमी पहली बार आपस में किस कर रहे थे। विरहाकूल तो हम दोनों थे ही। उस के बाद उस की जीभ मेरे मुँह में घुस कर मेरी जीभ के साथ अढ़खेलियाँ करने लगी, मेरी जीभ भी उस के साथ खेल रही थी।
दोनों प्रेमी अपनी प्यास बुझाते रहे। जब वह अलग हुई तो मैंने उस के होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया। मैं उस के होंठों का रस मिला चाहता था काफी देर तक उस के होंठों को चुसता रहा, उस ने अपनी उँगलीं से मेरी बगल में कोचाँ तो मैंने उस के होंठ छोड़े।
हम दोनों की साँसें उखड़ गयी थी सो उन को संभालने के लिये दोनों बेड पर बैठ गये। साँस में साँस आने के बाद उस ने मेरे चेहरे का चुमना शुरु कर दिया। माथा, आँखें, नाक और गाल सब पर उस के होंठों की मोहर लग गयी अब कानों का नंबर था उन की लौ को जीभ से छु कर गरदन पर गरम साँसे छोड़ने लगी।
गरदन पर उस के होंठ ऐसे जमें थे की मुझे लगा कि लव वाईट के निशान ना बन जाये लेकिन मैंने उसे रोका नही। आज मैं उसे रोकने के मुड में नही था ना वह ही रुकने के मुड में थी। उस की गर्म साँसे अब मेरी छाती पर लग रही थी।
कमीज के बटन खोल कर वह छाती को चुम रही थी फिर उस के होंठों के बीच मेरा निप्पल आ गया कुछ देर तक तो वह उस को जीभ से चाटती रही फिर उस ने उसे दाँतों के बीच ले कर जोर से काट लिया। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। दर्द तो हुआ लेकिन उत्तेजना बढ़ गयी। नाभी को चुमने हुये वह पजामें तक पहुँच चुकी थी मैंने थोड़ा उचक कर उसे पजामा खीसकाने दिया। उस ने पजामें के साथ ही ब्रीफ भी पेरों में डाल दी।
अब मैदान खाली था वह झुक कर मेरे लिंग को चुम रही थी जो अब अपने पुरे शबाव पर आ गया था। उस ने उसे पुरा निगल लिया। मैं भी उत्तेजित हो कर उस की पीठ सहला रहा था। मैंने झुक कर उस की पीठ को चुमा ब्रा का हुक ही नाम मात्र का कपड़ा उस की पीठ पर था। पीठ से उस की झुकी हुई गरदन पर किस किया। उस का ध्यान कहीं और था वह अपने मुँह में लिये लिंग को होंठों से मथ रही थी। मेरे से सीधा रहना मुश्किल हो रहा था। लेकिन यह स्थिति मैं बदलना नहीं चाहता था। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया तथा उसे कंधों से नीचे खिसका दिया अब मेरे हाथ उस को उरोजों तक पहुँच गये।
मैंने उन्हे धीरे-धीरे हाथों से सहलाना शुरु कर दिया कभी कभी उन्हें हथेलियों में कस लेता था। मेरे ऐसा करने से माधुरी की उत्तेजना भी बढ़ रही थी वह लिंग को अंदर बाहर कर रही थी मुझे लगा कि आज तो मैं इस के मुँह में ही स्खलित हो जाऊँगा और कुछ देर बाद हुआ भी यहीं मेरे मुँह से कराह सी निकली जो बताती थी कि मैं चरम पर पहुँच कर स्खलित हो गया था माधुरी नें सारा वीर्य मुँह में ही रहने दिया और उसे पी गयी। मैं तो एक तरह से निचुड़ ही गया था। वह लिंग को अभी भी चुस रही थी, कुछ देर बाद उस ने अपना मुँह लिंग से हटाया तो लिंग सुकुड़ कर छोटा सा हो गया था।
मैंने हाथ बढ़ा कर उस की पेंटी को नीचे सरकाया और उसे पाँवों पर कर दिया उस के माँसल कुल्हों की मध्य रेखा में उँगली फिराता हुआ मैं उस की योनि पर पहुँच गया। योनि से पानी टपक रहा था उँगली जब योनि में डाली तो वहाँ पर भरपुर नमी थी। मैंने भी अपनी उँगली को अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। माधुरी ने गरदन ऊपर की तो उस के मुँह पर मेरा वीर्य लगा था मैंने उस के होंठ चुम लिये अपने वीर्य का कड़वा और नमकीन सा स्वाद मुझे भी चखने को मिला। मेरा हाथ अब आगे से माधुरी की योनि का अंवेषण कर रहा था।
अब मैंने माधुरी को बेड पर लिटा दिया और उस की जाँघों के मध्य बैठ गया। उन्हें चौड़ा कर के मैंने योनि को चुमने की जगह बनायी और योनि के होंठों को अलग करके जीभ को अंदर डाल दिया। उस की योनि का नमकीन स्वाद मेरी जीभ को हुआ। मेरे दोनों हाथ उस के दोनों उरोजों को मसल रहे थे निप्पलों को भी मसल रहे थे। माधुरी का बदन कस कर ऐढ़ सा रहा था वह सर को इधर उधर कर रही थी। अभी तक उस ने अपनी मर्जी करी थी अब मेरी बारी थी। कुछ देर बाद मैंने अपनी उँगली उस की योनि में डाल कर उस के जी-स्पाट को रगड़ना शुरु कर दिया।
माधुरी मुँह से आहहहहहह उहहह अईईईईई निकालने लगी। मुझे पता था कि वह किसी सी समय चरम पर पहुँच सकती थी। अचानक उस के मुँह से चीख सी निकली और उस की योनि ने जोर से पानी की फुहार सी निकाली। मेरा मुँह उस फुहार से पुरा भीग गया। माधुरी का शरीर रह रह कर अकड़ रहा था। मेरी उँगली अपना काम कर रही थी। उस की कराह मुझे और उत्तेजित करने लगी। उस ने अपनी दोनों टाँगें उठा कर कर मेरी गरदन के पीछे लॉक कर दी। वह पुरी तरह से स्खलित हो चुकी थी।
कुछ पलों तक हम दोनों ऐसे ही रहे। फिर उस की टाँगें हट गयी और मैंने अपना मुँह उस की योनि से हटा लिया। मैं भी उठ कर उस की बगल में लेट गया। मैंने अपना हाथ उस की योनि पर रखा तो पता चला कि अभी भी पानी बाहर निकल रहा था। पास पड़ी तोलिया को उठा कर मैंने उस की योनि पर लगा दिया। उस ने जाँघों से उसे कस लिया। मैंने उस के उपर झुक कर उस को किस किया तो वह बोली कि मुझे क्या हो रहा है? मैंने कहा कुछ नही तुम से शायद पहली बार ऑरगाज्म का आनंद लिया है। वह बोली कि यह रु्क क्यों नही रहा है मैंने कहा कि रुक जायेगा।
उस ने अपनी बांहें उठा कर मुझे अपने पर गिरा कर जोर से जकड़ लिया। मैं उस के इस अनुभव को भंग नही करना चाहता था सो उस के ऊपर लेटा रहा। जब उसे कुछ आराम पड़ा तो वह बोली कि मेरे साथ पहली बार ऐसा हुआ है। मेरा सर घुम रहा है चक्कर से आ रहे थे। मैंने पुछा अब क्या हाल हो तो बोली कि अब सही हूँ। मैं उस के उपर से उठ कर उस की बगल में लेट गया और उसे टेड़ा करके अपने से लिपटा लिया। हम दोनों प्रेमी एक दूसरे से लिपट कर पड़े रहें। दोनों विरह के बाद ऐसे अनुभव से गुजर रहे थे कि कुछ कह नहीं पा रहे थे।
प्यार की चरम अवस्था का स्वाद हम दोनों ने बिना संभोग करे ही कर लिया था। दोनों के मन और शरीर इस आनंद का मजा उठा रहे थे कुछ कुछ गुगें के गुड़ जैसी हालत थी कि कोई भी उसे शब्दों में व्यक्त नही कर सकता था केवल उस का आनंद उठा सकते थे सो कर रहे थे। शायद इसी बीच हम दोनों की आँख लग गयी। कब तक सोते रहे पता नही चला।
फोन की घंटी से मेरी आँख खुली पत्नी का फोन था, उस ने पुछा कि माधुरी सही से पहुँच गयी थी मैंने बताया कि वह सुबह आ गयी थी मैं उसे छोड़ कर काम पर चला गया था और काम के चक्कर में उस के खाने के बारे में भी भुल गया था मेरी बात सुन कर वह बोली कि मुझे पता था कि ऐसा ही कुछ होगा इस लिये मैंने माधुरी को खाना दे कर भेजा था कि वह भुखी ना रहे। कुछ और बातें कर के उस ने फोन बंद कर दिया। तब तक माधुरी भी उठ कर बैठ गयी थी। मैंने उसे बताया कि पत्नी का फोन था तुम्हारें बारे में पुछ रही थी तो वह बोली कि मैं भी तुम्हारें पीछे सोती रही फोन करना ही भुल गयी।
उस ने उठ कर मुझे देखा और अपने जाँघों के बीच फँसी तोलिये को देख कर पुछा कि क्या हुआ था? मैंने कहा कुछ तो नहीं वह बोली कि तुम्हारें मुँह पर और मेरे पैरों के बीच तोलिया क्यों है? मैंने तोलिया निकाल कर देखा वह गिला हो गया था। उस के एक सुखे कोने से मुँह पौछ कर कहा कि ज्यादा डिस्चार्ज हो रहा था इस लिये इसे लगा दिया था कि गद्दा खराब ना हो।
यह कह कर मैं बेड से उठ कर बाथरुम चला गया वहाँ जा कर मैंने चेहरा धोया और अपने लिंग को पानी से साफ किया, उस के बाद तोलिये को पानी से धो कर उसे निचोड़ कर वापस आया और माधुरी के नीचे के अंगों को अच्छी तरह से पौछ दिया।
उस की जाँघों को भी तथा योनि को भी साफ कर दिया। कुछ देर माधुरी लेटी रही फिर बोली कि पेशाब आ रहा है और बाथरुम चली गयी। कुछ देर बाद जब वह वापस आयी तो उस का मुँह भी धुला हुआ था। मुझ से बोली की बड़ा प्रेशर था अंदर काफी पेशाब आया है, अब कुछ आराम मिला है। चेहरा धो कर अच्छा लग रहा है।
वह भी मेरे पास आ कर लेट गयी। मैंने उस के हाथ को थपथपाया तो वह मेरे हाथ को पकड़ कर मुझ से चिपक गयी। कुछ देर हम दोनों चुपचाप बैठे रहे। फिर मैंने मौन तोड़ा और उस से पुछा कि अब कैसा लग रहा है तो वह बोली की ऐसा लग रहा है जैसे भरपुर संतुष्टी मिली है। मन भर सा गया है। आज से पहले ऐसी अनुभुति नहीं हुई थी। यह क्या है?
मैंने कहा जहाँ तक मैं समझ पा रहा हुँ आज हम दोनों के मन किसी भी बंधन या संकोच के एक-दूसरें के साथ का आनंद उठा रहे है। हमारे मन के कोई दुविधा नहीं है मिलन की इच्छा थी और मन पर कोई बोझ ना होने के कारण तन और मन ने भरपुर मजा लिया है शरीर ने भी पुरा सहयोग दिया है इस कारण से तुम ने आज बिना संभोग के ही ऑरगाज्म पा लिया है। मैंने भी चरम सुख भोगा है इस लिये दोनों के मन और तन आनंदित प्रफुल्लित है।
तुम्हारें साथ आज से पहले ऐसा सुख पहले नही मिला था। इस से ज्यादा मैं कुछ नहीं समझा सकता। तुम बताओ कैसा लग रहा है। इस पर वह बोली कि आज तो मैंने ही शुरुआत करी थी जो मेरे मन में था सो मैंने किया और तुम्हें स्खलित कर दिया यही मैं चाहती थी तुम्हें पुरा निगलना चाहती थी सो किया और मुख मैथुन कर के तुम्हें चरम पर पहुँचा दिया और मेरे को भी चरमसुख मिला फिर जब तुमने मुझे नीचे से किया तो मेरा चरमसुख एक दम ज्वालामुखी की तरह फट गया।
मुझे पता ही नही चला कि मेरे साथ क्या हो रहा है। शरीर में तरंग सी उठ रही थी। दर्द हो रहा था गर्मी लग रही थी और उत्तेजना की मानों बाढ़ सी आ गयी। शरीर कांपने लगा, अंट शंट भी बका होगा मुझे ध्यान नही है। लेकिन जब वह फटा तो ऐसा लगा कि मैं आकाश में उड़ रही हुँ बहुत हल्की सी हो गयी थी। रुक रुक कर शरीर में आनंद की लहर उठ रही थी पता नहीं कितना डिस्चार्ज हुआ है लेकिन जब हो गया तो चैन पड़ा लेकिन उस के पहले तो लग रहा था कि मैं मर तो नहीं जाऊगीं। जो कुछ भी था वो बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इसी लिये उस के बाद बेहोश सी हो गयी थी।
आगे तुम्हें पता है मैं तो फोन की आवाज से ही उठी हुँ इस से पहले का कुछ भी याद नही है। लेकिन बहुत आनंद दायक अनुभव है, तुम्हारें पास होने के बाद मेरे से मेरा शरीर नहीं सभंलता है यह क्या है? मैंने कहा कि यह प्यार है। हम दोनों के बीच जो प्यार है वह मन के बाद शरीर को भी नियंत्रित करने लगा है। इसी लिये हम दोनों जब प्यार करते है तो वह कुछ अलग, खास होता है।
उस से डरना नहीं चाहिये उसे भोगना चाहिये। दोनों शरीर जब मिलते है तो उन के बीच जो संवाद होता है वह अलग तरह का होता है उस में एक स्वाभाविक उत्तेजना होती है उसे किसी तरह से रोका नही जा सकता है वह नकली नहीं है दोनों के बीच जो लगाव है वह उस की तार्किक परिणिती है।
हम दोनों को इस से डरना बंद करना पड़ेगा हम तो भाग्य शाली है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी हमारे अंदर इतनी उर्जा है कि हम इतना शारीरिक मिलन कर सकते है उसे संभाल सकते है। एक दूसरे को लेकर इतना लगाव है कि उसे दिखाने से रोकना नहीं चाहिये। कुछ तो हम दोनों के बीच खास है हम उसे नाम नहीं दे सकते लेकिन उस का उपभोग तो कर सकते है जब तक शरीर साथ दे रहे है। यह कह कर मैं चुप हो गया।
माधुरी हँसी और बोली कि मेरे प्रियतम ने सारी व्याख्या कर दी अब मैं क्या कहुँ?
शायद हमारे बीच जो भी है वह कुछ अलग है हमें उसे दबाना नहीं है उस पर शर्मिंदा भी नही होना है बल्कि उस का आनंद लेना है यह मैं आज समझ चुकी हुँ, तुम भी मेरी ही बात को सही साबित कर रहे हो, हो सकता है शायद मेरे अंतकरण में कुछ ऐसा बैठा है जो इस को लेकर शर्मिंदा होता हो लेकिन आगे से ऐसा नही होगा। यह आज मुझे समझ आ गया है कि तुम्हारें साथ मैं कुछ और हो जाती हूँ तुम्हारें को भोगने के लिये मुझे पहले अपने आप को भोगना पड़ेगा तब तुम तक पहुँच पाऊँगी।
मैंने उस की बात सुन कर कहा कि यह तो कबीर की उलट-बासी हो गयी। माधुरी बोली कि तुमने कबीर पढ़ा है तो मैंने कहा कि मैडम याद रखा करो की तुम्हारा सनम हिंदी साहित्य का प्रेमी है। मेरी बात सुन कर वह हँसी और बोली कि यही एक बात में हर बार भुल जाती हूँ।
काम भी तो एक तरह ही पूजा ही है। हम दोनों उस के पुजारी है। हमें एकान्त सही अर्थों में शायद आज ही मिला है। जब हमारे मन में किसी का डर नहीं है। तभी हम एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह से भोग पाये है। हमें बातें करते हुये काफी समय बीत गया था मैंने कहा कि आओ इस धारा में फिर से गोता लगाते है पहले कुछ रह गया था सो उसे अब पुरा कर लेते है मेरी बात सुन कर माधुरी मेरे ऊपर आ गयी और बोली कि आज तो मैं ही मन का करुँगी। मैंने कहा कि मैंने कब मना किया है।