अशोक बहुत अच्छे तरीके से अब वंदना की बुर में उंगलिया घुमा रहा होता है। अशोक वंदना को इस तरीके से गर्म कर रहा होता है और वंदना की हालत ऐसी हो जाती है जैसे मानो की अशोक ने अब पूरे उसे अपने कंट्रोल में ले लिया है।। थोड़े ही देर के बाद बिस्तर के ऊपर अखबार बढ़ा करके वंदना ने अशोक के लिए नॉनवेज लगा दिया होता है दोनों पूर्ण रूप से नंगे होते हैं।। अशोक अपने मुरझाए हुए बड़े लोड़े के साथ में बिस्तर के ऊपर बैठा हुआ होता है और वंदना को अपने सामने बिठा हुए होता है।।
अशोक वंदना के दोनों पैरों को थोड़ा फैला देता है बिस्तर पर जिस की वंदना के बालों वाली बुर अशोक के नजरों के सामने में आ जाती है।। वंदना ने सारा इंतजाम कर लिया होता है तभी अशोक दारू की बोतल की सील जैसे ही खोलता पुक्कक्क के एक जोरदार आवाज के साथ में दारू की बोतल खुल जाती है और अशोक बंदना के बुर को देखते हुए दारु को अच्छे तरीके से दो-दो गिलास में लगाता है।। अशोक दारू से भारी ग्लास को लेकर वंदना के आगे बढ़ता है और उसके पीठ के ऊपर हाथ फिरते हुए उसे इशारा करता है पीने के लिए पहले तो वंदना अपना चेहरा कुछ अजीब सा बनती है लेकिन अशोक के कहने से वह एक बार आंखें बंद करते हुए जैसे ही अपने होठों को गिलास पर रखती है अशोक पूरा ग्लास उड़ेल देता जैसे ही वंदना शराब के गिलास को खाली करती है अशोक नॉनवेज का एक टुकड़ा लेकर के वंदना के होठों के पास रखकर उसे खिलाना शुरू कर देता है।। कुछ ही देर में अशोक अच्छे तरीके से वंदना को पूरा दारू पिलाकर टंच कर देता है।