Update 23
बदन की आग इंसान से बहुत से गलत फ़ैसले करवा देता हैं ओर इंसान को उन फैसलो का परिणाम का अंदाजा तब तक नहीं होता जब तक परिणाम उसके सामने ना हो.. सुमित्रा के फ़ैसले ने सबकी जिंदगी बदल कर रख दी थी..
सूरज के अस्पताल पहुंचते पहुंचते जयप्रकाश की मौत हो चुकी थी ओर सूरज का हाल बेहाल था उसे समझ नहीं आ रहा था की अचानक से ये क्या हुआ हैं.. विनोद ओर गरिमा वापस आ गए थे अनुराधा का रो रो कर बुरा हाल था घर मे ग़मगीन माहौल था ओर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था.. हर कोई एक दूसरे के आंसू पोंछने मे लगा हुआ था..
सुमित्रा के मन का हाल कुछ अलग था उसे अपने किये पर पछतावा हो रहा था मगर अब उस पछतावे का प्राश्चित करना असंभव था.. उसकी आँख नम तो नहीं थी मगर दिखावे के लिए ही सही वो भी अपने हिस्से के आंसू बहा रही थी.. ओर सबको लग रहा था सुमित्रा का दुख उनसब से कहीं ज्यादा था..
मरने के बाद की जाने वाली सारी क्रिया विधि पूरी हो चुकी थी ओर अब सब अपने अपने घर को भी लोट चुके थे.. विनोद ने भी सूरज से वापस जाने की बात कही ओर सुमित्रा से भी कह चूका था.. विनोद रात के इस वक़्त गहरी नींद मे सो चूका था ओर सुमित्रा अपने बिस्तर पर अपनी चुत मे खीरा डाले अपनी फंतासी मे खोई हुई थी.. अब उसे जयप्रकाश का लिहाज़ ना था.. जो उसने किया था उसका मन मे दुख था मगर उस दुख से ज्यादा उसकी काम इच्छा थी..
सूरज अपने कमरे मे बैठा हुआ दुख मे था की गरिमा अंदर आते हुए बोली..
कब तक यूँही उदास से बैठे रहोगे सूरज.. भगवान् की मर्ज़ी के आगे किसका बस चल पाता हैं.. ज़िन्दगी तो गुजारनी ही पड़ती हैं..
सूरज अपनी उदास आँखों से गरिमा की तरफ देखते हुए बोला.. जानता हूँ भाभी.. पर क्या करू? ऐसा लगता हैं जैसे भगवान की मेरी ना होकर मेरे पाप का नतीजा हो.. मैंने जो गलतियां की हैं उसका परिणाम हो..
गरिमा सूरज के पास बैठकर उसका हाथ अपने हाथ मे पकड़ते हुए बोली.. अपने आप को दोष देना गलत हैं सूरज.. अनहोनी मे किसीका क्या दोष? जो होना था सो हो गया.. अब हमें आगे देखना चाहिए..
सूरज उदास था ओर गरिमा उसे सांत्वना देने आई थी गरिमा ने सूरज का हाथ अपने हाथों मे ले लिया था ओर सूरज को दिलासा दे रही थी मगर गरिमा ने सूरज अपनी तरफ झुका लिया ओर अपनी बाहो मे भर्ती हुई बोली..
कल तुम्हारे भईया ओर मैं वापस चले जाएंगे.. फिर घर तुम ओर मम्मीजी अकेले ही रह जाओगे.. अब तुम्हे ही उनका सहारा बनाना हैं सूरज.. तुम्हे अपने आपको मजबूत करना होगा..
सूरज का सर गरिमा ने अपने दोनों उरोजो के ऊपर सटा कर दबाया हुआ था ओर वो चाहती थी सूरज को दुख से निकालने के लिए वो जो हो सके करे..
जयप्रकाश को मारे 1 हफ्ते से ज्यादा हो चूका था..
गरिमा ने आगे बढ़कर सूरज को चूमना चाहा तो सूरज ने गरिमा से मुँह मोड़ लिया ओर बेड से उठ गया..
नहीं भाभी..
सूरज.. मैं जानती हूँ तुमपर क्या बीत रही हैं.. मैं तुम्हारा दुख बांटना चाहती हूं.. गरिमा सूरज को देखते हुए अपने आँचल से सारी गिरा दी ओर उठकर सूरज की तरफ जाते हुए उसे गले से लगा लिया..
सूरज इस बार अपने आप पर काबू ना रख पाया.. गरिमा की खूबसूरती ओर अपनापन उसे अपनी तरफ खींच ले गया.. सूरज ने गरिमा के होंठो को अपने होंठो से मिला लिया ओर चूमने लगा.. गरिमा ने अपना एक हाथ सूरज के पेंट के अंदर डाल दिया ओर उसका लंड पकड़ कर मुठियाने लगी.. सूरज के तन मन मे ओर तरंग उठने लगी ओर वो गरिमा को बाहो मे उठकार बिस्तर पर ले गया ओर इस बार उसने गरिमा का ब्लाउज खोलकर ब्रा सरकाते हुए उसके उन्नत सुडोल चुचे चूसने लगा जिससे गरिमा कामसुःख के सागर मे गोते खाने लगी.. सूरज ने गरिमा के दोनों चुचो का भरपूर रस पिया ओर गरिमा ने भी सूरज के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर पुरे प्यार ओर स्नेह के साथ अपने उरोजो का रस पीलाया..
गरिमा ने अपने साडी को अपने हाथों से ऊपर कर लिया ओर अपने मोटी मसल झांघे ओर उसके बीच मे लाल चड्डी से ढकी चुत सूरज के आगे परोस दी..
सूरज ने देर ना करते हुए गरिमा की चुत को चाटना शुरू कर दिया ओर चड्डी को एक बार मे उतार कर फेंक दिया..
सूरज किसी कुत्ते की तरह गरिमा की चुत चाट रहा था ओर गरिमा उसका पूरा आंनद लेते हुए सिसकियाँ ले रही थी.. दोनों एकदूसरे के साथ पूरा सुख भोग रहे थे..
गरिमा का पानी निकला तो उसने फट से उसे साफ कर सूरज के लंड को मुँह मे ले लिया जिससे सूरज भी हैरान था पिछली बार जब दोनों ने सम्भोग किया था तब गरिमा ने ऐसा कुछ ना किया था वो वर्जिन थी मगर आज गरिमा बड़े चाव ओर पूरी लग्न के साथ लंड मुँह मे लेके चूस रही थी..
गरिमा ने जब सूरज के लंड को पूरी औकात मे ला दिया तो चूसना बंद कर सूरज को धकेलते हुए पीठ के बल लिटा दिया ओर खुद उसके ऊपर आकर बैठ गई ओर दोनों हाथ सूरज के सीने पर रखकर उसके लंड को चुत मे लेते हुए कमर को आगे पीछे ओर ऊपर निचे करने लगी..
सूरज अब स्वर्ग की सैर पर था उसने अपनी खुली आँखों से गरिमा का ये रूप पहली बार देखा था.. बिखरी हुई जुल्फे ओर आकर्षक बनावट के साथ ऐसी कामकला सूरज के मन मे गरिमा के प्रति ओर ज्यादा गहरी जगह बना रही थी..
सूरज ने कुछ देर बाद गरिमा को अपने आगे कुतिया बना लिया ओर बाल खींचते हुए पूरी मेहनत से चोदने लगा.. गरिमा अपने आपको सूरज के हवाले कर चुकी थी ओर चाहती थी उसका ये व्यभिचार कभी ख़त्म ना हो मगर कुछ समय बाद मिशनरी पोज़ मे सूरज ने अपना सारा वीर्य गरिमा की चुत मे भरते हुए उसके ऊपर लेटकर चुदाई का समापन कर दिया ओर गहरी साँसे लेने लगा.. गरिमा ने अपनी साडी से सूरज के पसीने को पोंछ डाला ओर मुस्कुराते हुए उसे चूमना शुरू कर दिया.. दोनों मे बहुत देर तक चुम्मे को नहीं तोड़ा मगर फिर सूरज ने चुम्मा तोड़ते हुए कहा..
भाभी.. भईया?
गरिमा ने अपने कपडे सँभालते हुए कहा.. उनकी फ़िक्र मत करो.. वो सुबह से पहले नहीं उठने वाले.. ओर भाभी नहीं सूरज.. गरिमा.. मेरे नाम से मुझे पुकारो..
सूरज ने नज़र निचे करके बेड से उठते हुए मुस्कुराते हुए कहा.. अब भाभी हो तो भाभी ही कहूंगा ना.. ओर सच मे भाभी कहने मे जो अपना पन हैं वो नाम लेने मे नहीं..
गरिमा हस्ते हर बोली.. अच्छा जी? चलो ठीक हैं.. भाभी ही सही.. मैं भी अब देवर जी ही बुलाऊंगी.. ओर मुझे ख़ुशी हैं मेरे कारण अब तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान तो आई..
दिवार की घड़ी रात के 4 चार बजा रही थी ओर गरिमा ने आखिरी चुम्बन देते हुए सूरज से विदा लेकर कमरे से रुखसती लेली ओर वापस आकर विनोद के बगल मे लेट गई.. उसके मन मे सुकून था ओर उसे नींद भी तुरंत आ गई..
सूरज सोचने लगा की अगर उसे इतना दुख हैं ओर गरिमा उसका दुख काम कर सकती हैं तो सुमित्रा का दुख उसे भी काम करना चाहिए.. सूरज के लिए सबसे ज्यादा सुख सुमित्रा को था ओर वो सुमित्रा का दुख बांटना चाहता था.. उसने फैसला कर लिया था की वो विनोद ओर गरिमा के जाने के बाद सुमित्रा से इस बारे मे बात करेगा.. अगले दिन शाम को विनोद गरिमा के साथ दिल्ली के लिए निकल गया ओर पीछे सूरज सुमित्रा के अकेले घर मे रह गए..
सूरज बहुत देर तक किसी असमंजस मे पड़ा हुआ था ओर रात के 11 होते होते उसने सुमित्रा के करीब जाने का फैसला कर लिया था सुमित्रा भी इसी इंतजार मे थी कब सूरज उसके करीब आये ओर दोनों एक जिस्म हो जाए..
सूरज जब निचे आया तो उसने देखा की सुमित्रा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था ओर सुमित्रा बिस्तर पर सो रही थी सूरज ने बिना किसी हिचकिचाहट के कमरे के अंदर आ गया ओर दरवाजा लगा दिया.. कमरे मे अंधेरा था मगर हॉल से आती हलकी रौशनी ने कमरे को अब भी थोड़ा बहुत प्रकाशित कर रखा था..
सूरज आकर सुमित्रा के बगल मे लेट गया ओर धीरे से सुमित्रा को अपनी बाहो मे भर लिया.. उसे लगा सुमित्रा नींद मे हैं मगर सुमित्रा कब से इसी पल के इंतजार मे थी.. उसने जिस सुख की कल्पना करके अपने पति को मरवाया था वही सुख वो अब भोगना चाहती थी..
सूरज ने धीरे धीरे सुमित्रा के बदन से साडी अलग कर दी ओर फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए.. सुमित्रा ने सूरज का हल्का सा भी विरोध नहीं किया बल्कि खुद ही सूरज के लिए ये सब आसान कर दिया था सूरज समझ चूका था सुमित्रा नहीं मे नहीं हैं.. सूरज की नज़र दिवार पर लटकी जयप्रकाश की माला चढ़ी तस्वीर पर गई तो उसे शर्म सी आने लगी ओर उसने अपनी माँ के कान मे कहा..
माँ..
सुमित्रा ने हम्म्म.. कहकर जवाब दिया तो सूरज बोला..
माँ.. इस कमरे मे तुम्हारी ओर पापा की यादे हैं.. ओर पापा की उस तस्वीर के सामने मैं तुम्हे अपना बनाऊंगा तो मुझे अजीब लगेगा.. हम ऊपर मेरे कमरे मे चलकर सो जाते हैं..
सुमित्रा ने करवट बदल लीं ओर सूरज की बाहो मे समाते हुए उसकी आँखों मे देखकर बोली.. अब यही तेरा कमरा हैं सूरज.. ओर यही तेरा बिस्तर.. मैंने तुझे रेरे पापा की जगह दे दी हैं.. तु चाहता था ना की मैं तुझे अपने तन मन सब दे दू? मैं तैयार हूं..
सूरज ने एक नज़र दिवार पर लटकी जयप्रकाश की तस्वीर को देखा ओर मन मे माफ़ी मांगते हुए सुमित्रा के होंठो पर टूट पड़ा.. सुमित्रा ने भी आज कोई पर्दा ना रखा ओर सूरज को भर भर के अपने होंठो के जाम पिलाने लगी..
सूरज ने चुम्बन के दौरान ही सुमित्रा का ब्लाउज ओर ब्रा फाड़ कर उसे कमर से ऊपर नंगा कर दिया ओर सुमित्रा ने भी सूरज की शर्ट उतार कर फेंक दी.. दोनों पुरे जोश मे थे..
करीब 15 मिनट लम्बे इस चुम्बन को सुमित्रा ने तोड़ दिया ओर सूरज को पीठ के बल लिटा कर उसकी गर्दन ओर सीने को चूमने लगी.. सूरज ने भी सुमित्रा की छाती ओर गर्दन को चूमते हुए काम के रस से गीला कर दिया..
सूरज ने सुमित्रा के दोनों चुचो को अपने हाथ से पकड़ कर इतना जोर से मसला की सुमित्रा जोर से चिल्लाते हुए बोली.. अह्ह्ह.. बेटा.. आराम से..
सूरज ने अगले ही पल सुमित्रा के चुचक को मुँह मे भर लिया ओर बड़ी बेसब्री से चूसने लगा ओर सुमित्रा सूरज के सर को अपने दोनों हाथ से पकड़ के अपने बोबे चुसवाने लगी.. आज वो ख़ुश थी ओर जो उसने सोचा था वही हो रहा था..
सुमित्रा काम ओर ममता दोनों के भाव से सूरज को देख रही थी ओर उसके साथ समागम कर रही थी..
बेटा.. आराम से.. मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही हूं.. इतना उतावला हो रहा हैं तु.. सुमित्रा ने सूरज के सर और हाथ रखकर फेरते हुए कहा ओर अपनी कमर पर बंधा घाघरे का नाड़ा खोल दिया ओर निचे सरका कर बदन से अलग करते हुए वापस हंसकर बोली.. बेटा.. कितना भी चूस ले अपनी माँ के बोबे.. अब इनमे दूध नहीं आने वाला..
सूरज अपनी माँ की बात ओर बोलने के अंदाज़ पर मुस्कुराने लगा ओर बोबे छोड़कर सुमित्रा के होंठो पर एक डीप किस करके बोला..
माँ तेरे बोबो से दूध आये या ना आये.. मैं अब से इन्हे रोज़ चूसूंगा..
सिर्फ मेरे बोबे चूसेगा? सुमित्रा ने कामुक नज़र ओर अंदाज़ मे कहा तो सूरज उसका मतलब झट से समझ गया ओर अपना हाथ सुमित्रा की चुत और रखकर हलके से सहलाते हुए बोला.. ये भी..
सुमित्रा की एक दम से अह्ह्ह निकल गयी ओर सूरज ने सुमित्रा की चड्डी निकाल कर झट से अपना मुँह चुत पर लगा दिया ओर जन्मो की प्यास बुझाने लगा..
सुमित्रा मानो काम सुख के अथाह सागर की गहराई मे चली गई उसकी आँख बंद थी ओर दोनों हाथ अपने बेटे के सर पर.. मानो जो सूरज को आशीर्वाद दे रही हो..
सूरज को सुमित्रा का पानी निकालेने मे ज्यादा देर ना लगी ओर काम की आग मे सुलग रही सुमित्रा ने अपना झरना कुछ पलो मे ही बहा दिया ओर अकड़ने लगी.. सूरज चुत का भोग लगा चूका था ओर अब दोनों के बीच किसी तरह की शर्म की दिवार नहीं बची थी.. दोनों ने एक दूसरे को तन मन दोनों से अपना लिया था प्यार का खुला इज़हार कर दिया था..
कुछ पलों के बाद सुमित्रा ओर सूरज ने एक दूसरे की आँखों मे देखा ओर एकदूसरे के मन को समझते हुए सुमित्रा ने अपनी हथेली पर थूक दिया ओर सूरज के लंड को अपने थूक से मसलते हुए अपनी चुत पर लगा कर लंड का टोपा अंदर घुसा लिया बोली..
डाल दे बेटा..
सूरज ने एक नज़र दिवार पर लटकी जयप्रकाश की तस्वीर को देखा ओर बोला.. माफ़ करना पापा.. इतना बोलते ही सूरज ने पूरी ताकत के साथ एक झटके मे लंड अपनी माँ की चुत के अंदर घुसा दिया ओर सुमित्रा ने जोर से अह्ह्ह.. बेटा.. मार डाला.. बोलते हुए सूरज को अपनी बाहो मे भर लिया..
सूरज का पूरा लंड अपनी माँ की चुत मे था ओर सुमित्रा की चुत ने 3-4 बून्द अपने लहू की बहा कर अपने बेटे के लंड का स्वागत किया..
सुमित्रा का बदन काँप रहा था को सूरज को महसूस हो रहा था उसने उसी तरह पड़े रहने का फैसला लिया जब तक सुमित्रा की पकड़ थोड़ी ढीली ना हुई.. सुमित्रा की आँख मे आंसू थे ओर उसके चेहरे से उसके दर्द का साफ पता चल रहा था..
खून की बूंदो ने सफ़ेद चादर पर माँ बेटे के मिलन का साक्ष्य छोड़ दिया था चुत मे खीरा बैगन डालकर मुठियाने वाली सुमित्रा बेटे के लंड के सामने रोने लगी थी.. उसे कामसुःख का अंदाजा था मगर काम की शुरुआती पीड़ा का आभास नहीं.. सालो से बंद पड़ी चुत मे जब अंदर तक लंड घुसा तो सुमित्रा किसी कुंवारी की तरह चीखने लगी थी..
सूरज ने सुमित्रा के मुँह को अपने मुँह से बंद करवा दिया ओर अब अपने लंड से एक के बाद एक ताबड़तोड़ हमले अपने माँ की चुत पर करने लगा जिससे सुमित्रा की हालत खराब हो गई.. सुमित्रा की चुदाई हो रही थी ओर ऐसा लग रहा था जैसे कमरे मे पठाके फुट रहे हो.. जब सूरज का लंड चुत मे जाता ओर दोनों की जांघ और पेट आपस मे टकराते हुए पट-पट की आवाज अँधेरी रात के शोर को चिरते हुए मधुर संगीत को जन्म देती.. सुमित्रा के मुँह को सूरज ने आज़ाद किया तो वो अह्ह्ह.. अह्ह्ह.. उम्म्म.. करते हुए सूरज को अधखुली आँखों से देखते हुए अपनी चुदाई की पीड़ा और उस पीड़ा मे मिश्रित सुख को भोगते हुए सूरज का साथ देने लगी..
सूरज ने चुदाई की पोजीशन नहीं बदली और मिशनरी पोज़ मे ही अपनी माँ सुमित्रा को चोदते हुए अपना सारा माल सुमित्रा की चुत मे भर दिया और गहरी आँसे लेते हुए सुमित्रा के ऊपर लेट गया.. सुमित्रा भी जड़ चुकी थी और वो अब सूरज को बड़ी प्यार से देखते हुए उसके बाल सहला रही थी.. उसे काम सुख प्राप्तहुआ था और उसके अपने बेटे ने उसे ये सुख दिया था जिसके चलते सुमित्रा के मन मे सूरज के लिए प्रेम और ज्यादा दृढ हो गया था.. उसकी कल्पना आज साकार हुई थी उसने अपनी फंतासी पूरी की थी और अब अपने बेटे की बाहो मे लेटी हुई थी..
सूरज मुस्कुराते हुए सुमित्रा को देख रहा था और बार बार उसके गाल, गर्दन और होंठ चुमते हुए आँखों ही आँखों मे सुमित्रा के साथ छेड़खानी कर रहा था जिसका सुमित्रा भी भरपूर आनंद ले रही थी..
सुमित्रा ने कुछ देर बाद सूरज को दूर धकेलते हुए कहा.. हो गई हर ख्वाहिश पूरी? अब सो जाओ.. कल ऑफिस हैं ना तुम्हारा?
सूरज को सुमित्रा मे आये हर बदलाव का अहसास हो रहा था.. आज पहली बार उसने सूरज को तु नहीं तुम कहकर बुलाया था.. सूरज ने कुछ ना कहा और सुमित्रा को देखता रहा.. सुमित्रा जैसे ही बेड से निचे उतरी तो लड़खड़ाकर निचे गिर गई और सूरज जोर से हँसने लगा.. सुमित्रा का बदन काँप रहा था मगर सुमित्रा खुश थी.. सुमित्रा ने मुड़कर सूरज को बनावटी गुस्से की नज़र से देखा और लड़खड़ा कर बाथरूम की तरफ चली गई..
सूरज भी अब जयप्रकाश के दुख से बाहर आ गया था और उसने सोचा नहीं था की इतनी आसानी से वो सुमित्रा को अपना बना लेगा.. इतने दिनों को मानसिक थकान शारीरिक थकान से चूर सूरज को आज सब थकान उतरी हुई लग रही थी और सूरज को आँख बंद करते ही नींद आ गई थी..
सुमित्रा जब बाथरूम से बाहर आई तो देखा की सूरज सो चूका था उसने बड़े प्यार से सूरज को अपनी बाहो मे लिया और उसके चहेरे को चूमते हुए खुद भी गहरी नींद मे सो गई..
सुमित्रा की नींद तो सुबह 6 बजे ही खुल गई और वो रोज़ की तरह घर के कामो मे लग गई आज वो हल्का सा लड़खड़ा रही थी और इसके पीछे के सुख को याद करने से उसके मन और तन दोनों मे उमंग और उलास छाया हुआ था.. उसने साफ सफाई और रसोई का काम करने के बाद बाथरूम जाकर नहाना धोना पूरा किया और एक साडी पहनकर संस्कारी औरतों की तरह घर के मंदिर मे सुबह की पूजा शुरु कर दी..