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Mere kahani me fit nahi ho raha tha dear situation isliye mujhe ye karna pada baki sabke sath chudai to hona hi hai aur dekhte hai aage kaise kya ho sakta hai... Thanks for valuable complementYrrr ye kya kiya Bhai tumne
Kuch readers ne bola tha phele bhi ki Lekha ke sath phele relation Kamal ka bane par tumne Lekha ka 1st sex uske bete se karwa diya
Yrr ab Lekha ki chudayi Kamal kare wo bhi uske bete se bhi aachi aur valgur full gali ke sath
Ye seen banana bhai ab please
Tum hi bolte ho suggestion ke liye (apply karna bhai)
Keep going![]()
Brother sach kahu to mujhe ye episode bilkul bhi pasand nahi aya kyu ki esi chudai to ham sab bht si story mai padte hi aa rahe h hame laga tha ki yha kuch new dekhe or padne ko milega lekin esa nahi hua agr tum pehli chudai lekha ki kamal ke sath karwate or ani ki pehli chudai Chanchal ke sath to uska ek alag maja ata isse story mai kuch new creat hota jisko tum aage bhi use kar sakte the khair thik tak hi tha ye update bhaiअध्याय 16
लेखा दुकान मे खाली बैठी थीं उसके साथ कुछ दिनों से घट रही घटनाओ को याद कर रही थीं की कैसे पहले उससे उसके बेटे ने दवाई लगवाने के लिए बोल कर ही अपना लंड दिखा दिखा के उसे चुदासी बना दिया फिर इतने से मन नहीं भरा तो उसने कमल के साथ मिलकर अपने लंड से मुझ पर अपना लंड ला पानी छोड़ दिया,
वो सोचने लगी क्या सही है क्या गलत कुछ समझ नहीं आ रहा है, लंड की तड़प ने मुझमे इतना ज्यादा हवस भर दिया है खुद को रोक ही नहीं पा रही इनके करीब जाने से, आज तो मैंने फिर एक नया लंड जेठ जी का देख लीया,
काश मेरे पति अभी यहाँ होते तो अभी के अभी अपनी चूत को अच्छे से कुटवा लेती पर हाय मेरी किस्मत पता नहीं क्या करवाना चाहती है कितना विरोध कर लू पर लगता है मेरी किस्मत मेरे बेटे के लंड को मेरी इस चूत मे घुसवा के ही मानेगी और साडी के ऊपर से पनियाती चूत को छूने लगी साथ ही ऊपर से उसे रगड़ने लगी,
लेखा ने मन मे सोचा "हे भगवान माफ़ करना मै जो नहीं करना चाहती थीं अब वो मुझे करना ही पड़ेगा, अपनी इस चूत को शांत करने के लिए पति के अलावा दूसरे लंड को इसके अंदर लेना ही होगा तभी मुझे शांति मिलेगी इस गर्मी से"
लेखा ने फ़ोन उठाया फिर सीधे अनि को फ़ोन घुमाया और 5 मिनट तक कुछ समझाया,
जिसके परिणामस्वरूप आधे घंठे के भीतर ही अनि दुकान पहुंच गया,
अनि "माँ जैसा आपने कहा था मैं वो चीजे ले आया हूँ"
लेखा "ठीक है तू अंदर बैठ मैं अभी आती हूँ"
अनि अंदर जाके सामान एक तरफ रख बिस्तर पे कूलर के आगे बैठ गया कुछ सोच के मुस्कुराते हुए,
अगले कुछ मिनट के बाद उसे सट्टर के बंद होने की आवाज़ आयी वो बिस्तर मे उठके बैठ गया,
लेखा अंदर आके अनि के रखे सामान को देखने लगी सब चीजों को ठीक और पूरा देख वो भी बिस्तर मे आके अनि के बगल मे बैठ गयी,
अनि "माँ उस दिन मैंने जो भी गलती की उसके लिए फिर से माफ़ी मानता हूँ" और निचे देखने लगा
लेखा थोड़ी देर चुप रही फिर "बेटा दुसरो को बाते बताना ठीक है पर हम जो कर रहे है उसके बारे मे जिक्र करना मतलब हमारी बदनामी हर जगह हो सकती है"
अनि अभी भी निचे देखते हुए "हम्म मुझे पता है माँ हमारे नये रिश्ते के बारे मे किसी को पता चला तो हर जगह हमारा क्या हाल होगा"
लेखा "समझ सकती हूँ इसमें तेरी क्या ही गलती है जो भी हो रहा शायद मेरी ही किस्मत मे लिखा हो"
अनि "अगर उस दिन कमल भैया और रिंकी हमें नहीं देखते तो ज्यादा अच्छा होता माफ़ करना माँ शायद मेरी ही कही गलती रही होगी"
लेखा "हम्म कोई बात नहीं अब जब तुम दोनों ने मुझे ऐसे देख ही लिया है तो मैं कुछ नहीं कह सकती हूँ मेरी ही भूख ने ये सब किया मेरे साथ"
अनि "कोन सी भूख माँ क्या आपने खाना नहीं खाया अभी तक" माहौल को सामान्य बनाते हुए
लेखा "खाना खा लिया मुझे उसकी भूख नहीं इसकी भूख मेरे लाल मेरे बच्चे" और पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी,
अनि "आह माँ अब पता चला मुझे आपकी भूख के बारे मे"
लेखा "तूने कमल को नहीं बताया ना आज यहाँ आने के बारे मे"
अनि आंखे बंद किये हुए "नहीं माँ उनको नहीं पता मैं आपके साथ यहाँ हूँ"
लेखा "फिर तो अभी हमारे पास बहुत समय है"
लेखा ने अनि को बिस्तर पर लेटा दिया और उसके पैंट को खोलने लगी अनि ने गांड उठा के साथ दिया और पैंट चड्डी के साथ घुटनो तक आ पंहुचा,
लेखा बिना किसी देरी के अपने बेटे के कड़क हो चुके लंड को हाथो मे लेके देखने लगी,
लेखा "आह इतना कड़क हो गया है रे तेरा ये लंड बिलकुल मोटे लकड़ी के तने जैसा"
अनि "ये सब आपका ही कमाल है माँ आपका एक स्पर्श मेरे लंड को एक अलग अहसास देता है जैसे उसे उसका बिछड़ा प्यार मिलने वाला हो"
लेखा मुस्कुरा कर अपने बेटे के लंड पर झुक गयी उसने अनि की आँखों मे देखा अनि ने अपनी माँ की आँखों मे देखा फिर लंड के टोपे को खोलते हुए एक बूँद आ चुकी गुलाबी टोपे को होठो के अंदर ले ली,
अनि की आँखे खुद ब खुद बंद हो गयी अपनी कामुकता से परिपूर्ण माँ के बस लंड के ऊपरी हिस्से को लेने मात्र से,
अनि "आह्ह माँ कितनी गर्म है आपके ये होंठ बस अब मुझे और इंतजार मत करवाइये, ले लीजिये इस पूरे लंड को अपने गर्म मुँह मे"
लेखा ने अपने बेटे की आग्रह को स्वीकारते हुए मे पूरे लंड को मुँह मे लेने की कोशिश करने लगी पर लम्बाई ज्यादा होने की वजह से कुछ हिस्सा अब भी बाहर रह गया,
अनि की आँखे बंद माँ के द्वारा लंड की चुसाई का मज़ा लेने लगा, उसकी चूत मे लंड देने की इक्छा हर पल अब और बढ़ती जा रही थीं,
लेखा ने अपनी गति बढ़ा दी उसके लंड को चूसने और चाटने का तरीका अनि के लिए असहनीय होता जा रहा था
अनि "आह्ह माँ ऐसे लंड चुसोगी तो मेरा पानी तो और भी जल्दी निकाल जायेगा"
लेखा मुँह हटा के हाथो से लंड को हिलाते हुए "मत रोक बेटा आज कितने दिन बात तस्सली से मैं लंड चूस रही हूँ तेरे पापा भी यहाँ नहीं है तो अब मैं खुद को रोकना नहीं चाहती"
लेखा ने अब अपने दोनों हाथो को लंड पे ऊपर निचे करते हुए बिच बिच मे मुँह से लंड को चूसने लगी,
अनि को लगने लगा वो अब कभी भी झड़ सकता है तो लेखा को रोकना सही समझा क्युकी जल्दी झड़ने से उसे आगे माँ को संतुष्ट करना मुश्किल ना हो जाये,
अब लेखा बिस्तर मे चित्त लेटी थीं उसके ब्लाउज खुले हुए और दोनों टांगे फैली हुयी थीं जिनके बिच उसका बेटा उसकी चूत चाटना शुरू करने वाला था,
पहले से ही गीली हो चुकी रस छोड़ती चूत को और गीला करने मे अनि को ज्यादा मुश्किल नहीं हुयी उसने दो उंगलियों से चूत के फांको को अच्छे से फैलाया,
पहले तो जी भर के सुंझा फिर जैसे ही अपनी जीभ से एक बार चूत को चाटा लेखा उछल पड़ी "आह्ह अनि तेरा जीभ कितनी ठंडी है बेटा"
अनि ने अपनी माँ की आँखों मे देखते हुए चूत पर होंठ रख अंदर जीभ से उसे और अंदर तक चाटने लगा,
लेखा भी अनि को देख रही थीं उसने अपने हाथो को अनि के सर पे रख और जोर से दबाने लगी,
लेखा "आह्ह माँ चूस बेटा ऐसे ही रुकना नहीं ये आजकल बहुत पानी छोड़ रही है हा हा ऐसे ही और जोर लगा अनि आअह्ह्ह"
दोनों की आँखे एक दूसरे को देख रही थीं लेखा तो पूरी पागल हो चुकी अपनी कमर भी हिलाना शुरू कर दी अनि के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था पर अपने दोनों हाथो से पूरी ताकत से उसने लेखा की टांगो को पकड़ उसकी चूत चूसना जारी रखा,
लेखा झड़ने के करीब थीं फिर अनि ने अपना सर चूत से हटा दिया लेखा ने तुरंत उसके सर को दबाने लगी "अब रुक क्यों गया कमीने मैं तुझे जान से मार दूंगी" पर अनि रुका रहा और बोला "माँ मुझे लंड अंदर डालना है" लेखा "पहले तू ये काम पूरा करना फिर बाद मे डाल लेना बेटा मेरा आने वाला है बिच मे मत रुक" अनि "नहीं माँ आप बाद मे फिर माना कर दिए तो" लेखा ने चिल्लाते हुए "नहीं करुँगी मना पहले तू चूस मेरी चूत कुत्ते",
अनि फिर भी नहीं माना उसके हिसाब से अगर अभी नहीं किया तो शायद माँ की चूत मिलने मे और देरी हो जाये,
लेखा ने झल्ला कर कहा "ठीक है डाल ले पर मुझसे पहले झड़ा तो तेरे लंड की खैर नहीं"
अनि को जैसे ही अपनी माँ की मंजूरी मिली उसने तुरंत उठके दोनों टांगो को पकड़ चूत के ऊपर अपने लंड को रख दिया,
लेखा को अपने बेटे के लंड गर्माहट महसूस होने लगी उसने अपनी कमर हिला के इशारा किया की अब जल्दी से इसे अंदर डाल और मेरी चूत को शांति देदे,
अनि अपने पहले चुदाई के लिए तैयार था उसने सपने मे भी नहीं सोचा था उसकी पहली चुदाई उसकी माँ से होंगी,
लाल हो चूका सुपाढ़ा बज्बजाति चूत के मुँह के ऊपर आ चूका था अनि ने लंड को पकड़ चूत के ऊपर हिला के दे मारा लेखा तड़प के रह गयी,
लेखा "आहहह बेटा अब क्यों रुका है क्यों इतना तड़पा रहा है अब तो मैं तुझे वो काम करने की मंजूरी दे दी जिसके लिए तू इतने दिन से छटपटा रहा था, डाल दे बेटा मेरी चूत बहुत दिन से लंड के लिए भूखी है"
फिर एक आहहह की आवाज़ लेखा के मुँह से निकला क्युकी अनि ने अपने लंड के लाल सुपाड़े को चूत के भीतर कर दिया था,
बस इस अहसास से अनि को लगा वो झड़ जायेगा धीरे धीरे उसने अपने शरीर का दबाव लेखा के जिस्म पे देने लगा,
लेखा आँखे बंद किये अपनी चूत के अंदर अपने बेटे के लंड को महसूस करने लगी उसके शरीर मे एक नयी तरह की कम्मोतेजना का संचार होने लगा है,
अनि ने धीरे धीरे करके अपने पूरे लंड को अपनी माँ की चूत मे उतार चूका था लेखा के शरीर मे दर्द का सैलाब उमड़ चूका था उसने अनि को वही थोड़ी देर रुकने का इशारा किया और अपने बेटे के लंड के हिसाब से चूत को ढालने लगी,
अनि ने अपनी माँ के मासूम चेहरे को देखा उसे यकीन नहीं हो रहा था उसकी माँ इसके लिए कैसे मान गयी, उसने मन मे सोचा क्या माँ को सच मे पापा की कमी खल रही थीं या ये एक संयोग था जिसके लिए ना चाहते उसे हा बोलना पड़ा या माँ को लंड लेना इतना पसंद है की उसने अपने ही बेटे का लंड ले लिया अपनी चूत को शांत करने के लिए, पर खैर मुझे क्या मुझे तो माँ की चूत चोदना था जो अब मुझे मिल चूका है,
लेखा ने अनि के गांड पे हाथ मार इशारा दिया की अब वो अंदर बाहर करना शुरू करें
अनि ने दोनों हाथ को अपनी माँ के कंधो के बगल मे ले आया फिर शुरू हुआ माँ बेटे की असली ताबड़तोड़ चुदाई,
अनि बिना रुके पहली चुदाई के जोश मे दनादन लेखा की चुतो पर अपनी कमर पटकाने लगा,
लेखा "आअह्ह्ह माँ मेरी चूत मर गयी मैं आअह्ह्ह आराम से बेटा माँ हूँ मैं तेरी कहीं नहीं जा रही आअह्ह्ह मैं तेरे साथ ही हूउउ आअह्ह्ह"
अनि तो कुछ सुनना ही नहीं चाह रहा था बस कमर को अपनी माँ की चूत मे पटके जा रहा था पूरा लंड चूत की गहराई तक नाप रहा था,
लेखा को अहसास हुआ उसका बेटा पहली चुदाई कुछ ज्यादा जोश मे कर रहा है पर उसके जोरदार धक्को से लेखा को मज़ा भी आने लगा,
पर अनि कबतक यूँही तेज करता इंसान है जानवर नहीं, थोड़ा धीरे होते ही लेखा ने उसके चेहरे को अपने पास लाके उसके होठो को चूमने लगी,
अनि कुछ पल रुका रहा और माँ के होठो को चूसते हुए उसका साथ देने लगा पर वो पहली चुदाई मे ही लेखा को दिखाना चाहता था उसका बेटा क्या कर सकता है उसने फिर धीरे से धक्के देने शुरू किया,
पर इसबार लेखा भी उसका साथ देते हुए बोलने लगी "आह्ह हा मेरे बच्चे बहुत अच्छा कर रहा इसी तरह हा ऐसे ही और अंदर तक आह माँ इतना मज़ा पहले क्यों नहीं आया आअह्ह्ह हां बेटे थोड़ा और तेज कर तेरा पूरा लंड मेरी चूत खा रहा है"
लेखा की बातो ने अनि को और जोश से भर दिया लेखा के ऊपर ही लेट कर उसने होनी गांड हिलाना शुरू किया,
इस तरह लेखा भी खुद नहीं रोक पा रही थीं वो अब चूत की आग से ठंडी पड़ने वाली थीं उसने दोनों हाथो को अनि के गांड के ऊपर रखा और जब अनि निचे जाता तो वो भी दोनों हाथो से और जोर लगा के उसके लंड का चूत मे अंदर लेती,
लेखा के हाथ और अनि के कमर तेजी से चल रहे थे अंतिम क्षण नजदीक आ चूका था ठप ठप की गूंज पुरे कमरे मे हो रही थीं, कोई धीरे नहीं हो चाह रहा था
अनि "आह्ह माँ मैं झड़ने वाला हूँ कहा करना है"
लेखा "हा मेरे बच्चे आहहह मेरा भी हम्म होने वाला है अंदर डाल देना गर्मी शांत करना है"
आखिर कर वो पल आ ही गया और परिणाम ये हुआ की दोनों माँ बेटे एक साथ एक आहहह भरते हुए झड़ने लगे,
लेखा के कमर लगातार हिल रहे थे तो वही अनि का लंड जड़ तक अंदर घुसा हुआ बस झटके के साथ लगातार पिचकारी अपनी माँ चूत मे छोड़ रहा था,
अनि अपनी माँ के ऊपर ही पस्त होके पड़ा रहा, लगभग 15 मिनट शांति रही, लेखा और उसका बेटा दोनों उसी हालत मे पड़े रहे,
फिर लेखा ने आंखे खोली और अभी थोड़ी देर पहले जो हुआ उसका पूरा विवरण मन मे बनाने लगी,
लेखा मन मे "हे भगवान करवा ही दिया आपने मुझसे पाप एक आग को शांत करने के लिए, पता नहीं अब और आगे क्या क्या करवाओगे आप इस आग को शांत करने के लिए"
लेखा ने अनि को उठाया वो अभी भी पहली चुदाई के नशे मे था वो और सोना चाह रहा था तो लेखा ने कपडे पहन कर सोने को बोल दिया और खुद पीछे बने टाइलेट मे चली गयी,
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दोपहर खाने के बाद तो लेखा वापस दुकान चली गई थीं जिसके आगे क्या हुआ वो तो आपको पता ही है,
पर घर मे खेत से वापस आके रमेश जी दुविधा मे थे अभी वो चंचल के पास जाये या नहीं क्युकी रिंकी अभी घर पर ही थीं,
भले ही बाकि सभी लोग बाहर हो पर रिंकी के रहते ऐसा कदम उठाना रमेश जी को सही नहीं लगा,
इसलिए रमेश जी खुद ऊपर टीवी देख रही रिंकी के पास जा पहुंचे,
रिंकी वहा सोफे मे बैठी पैर सामने टी टेबल मे रखी थीं उसने हल्की ढीली टी शर्ट और निचे चुस्त लेग्गी पहन रखी थीं,
रमेश धीरे कदमो से वहा पहुंचे अबतक रिंकी को उसके दादाजी के आने का कोई आभास नहीं था,
रमेश जी अपने पोती के बदन को दूर से ताड़ रहे थे रात की बाते और हरकते उसकी जहन मे अच्छे से दिख रहे थे उसने रिंकी को टीवी देखने से साथ बिच बिच मे अपनी गोल गांड को खुजाते देखा जो लेग्गी के ऊपर से ही कहर ढा रहे थे,
रमेश जी कदम बढ़ा के वहा पहुंच गए
रिंकी "दादू आप यहाँ आइये बैठिये"
रमेश "क्या देख रही रिंकी बिटिया" बोलते हुए उसके बगल मे जाके बैठ गए
रिंकी "कुछ खास नहीं दादू फ़ोन से बोर हो गयी थीं तो मूवी देखने आ गयी थीं पर यहाँ भी कोई अच्छी मूवी नहीं आ रही है"
रमेश "क्या इन पिक्चर को देखने मे लगी है बेटी उससे अच्छा तो कुछ और कर लो"
रिंकी "आप ही बताओ दादू क्या करें अभी तो शाम होने मे बहुत समय है"
रमेश कुछ सोचने के बाद "क्यों ना तुम मुझे वो बताओ जो आजकल के बच्चों को पसंद हो जो मेरे समय मे नहीं थे"
रिंकी थोड़ी देर सोचती है फिर टीवी को बंद कर अपने दादा जी को रील दिखाने के बारे मे सोचती है फ़ोन की स्क्रीन ऑन कर इंस्टाग्राम मे देखने बोलती है
रिंकी "ये देखिये दादू इसमें आजकल सब अपनी रोज की नयी नयी तस्वीर डालते है और साथ मे कुछ लोग डांस वाली वीडियो भी डालते है"
रिंकी वीडियो दिखाने लगती है एक एक कर के कभी कॉमेडी वाली तो कभी विज्ञान वाली और किसी के डांस वाली जिसमे लड़की या औरत डांस करती है
चुंकि ये गांव था तो रिंकी को लगा रमेश चंद जी को कहा पता होगा पर रिंकी को कहा पता रमेश जी खिलाडी है वो खुद कभी कभी गन्दी वीडियो देखा करते है हालांकि उनके पास इंस्टाग्राम नहीं था तो क्या हुआ,
रमेश "अरे हा बिटिया ये तो बहुत सही है लोग अच्छे अच्छे डांस वाले वीडियो डाल रहे है"
रिंकी तो कॉमेडी वाली ही वीडियो दिखाना चाह रही थीं पर रमेश रिंकी को डांस वाले दिखाते हुए "ये आज कल बहुत खुल के डांस करते हुए वीडियो डालते है पहले तो लोग ऐसे चीज कभी कभी देखते थे"
रिंकी "हा दादू आजकल ऐसे वीडियो डालना आम बात है"
रमेश अपनी पोती के करीब होते हुए "ये देखो इसमें ये औरत कैसे खुल के डांस कर रही है और इसमें देखो ये लड़की भी इतने अजीब से डांस कर रही है"
रिंकी अपने पास बैठे दादा जी के पसंद को देख मुस्कुराते हुए और इसी तरह के वीडियो दिखाते हुए बोली "मैं भी सोचती हूँ दादू ऐसे डांस वीडियो डालू पर मुझे शर्म आती है इसलिए नहीं कर पाती हूँ"
रमेश "अरे इसमें शर्म कैसी बिटिया ये देखो ये लड़की बिलकुल तुम्हारी तरह दिख रही है और कितने अच्छे से डांस कर रही है" वीडियो मे लड़की ने बिना दुप्पटे के चुचे हिलाते हुए गांड हिला हिला के नाच रही थीं
रिंकी "हा दादू ये दिख तो रही है पर मुझे ऐसे कपडे पहन कर डांस करते हुए वीडियो बनाना अच्छा नहीं लगता है"
रमेश "ठीक है अभी वीडियो मत डालो पर मेरे सामने एक बार डांस करके झिजक दूर कर सकती हो"
रिंकी कुछ सोच के "ठीक है दादू मैं एक गाना लगाती हूँ फिर डांस करती हूँ"
थोड़ी देर बाद रमेश ने अपनी पोती को गाना लगा के डांस करते देखा रिंकी की ढीली टीशर्ट मे उसके चुचे हल्के हल्के हिल रहे थे फिर पीछे से गांड दिखाते हुए नाचने लगी जिससे लेग्गी मे चुस्त गांड बिलकुल आकार लिए रमेश के सामने थीं,
रमेश का लंड पाजामे मे हल्का फुल्का तनाव लेने लगा रिंकी तुरंत थक के उससे आके चिपक गयी और पूछने लगी "दादू कैसा था मेरा डांस क्या मैं भी डालू ऐसे वीडियो"
रमेश के बदन से चिपकी रिंकी को देख उसने बोला "बहुत ही बढ़िया था बिटिया बिलकुल जैसे वीडियो मे थे पर वीडियो अच्छे कपड़ो मे डालना जैसे घूमने जाते समय पहनते है"
रमेश "बिटिया मैंने सुना है आज कल तुम सुबह योग करती हो"
रिंकी "हा दादू हमारे कॉलेज मे एक टीचर ने घर पर सबको ये करने के लिए कहा है और साथ ही क्या क्या खाने से शरीर अच्छा रहता है वो भी बताई है"
रमेश "अरे वाह ये तो अच्छी बात है योग करने और अच्छा खाने से हमारा शरीर चुस्त रहता है वैसे मैं देख सकता हूँ असर दिख रहा है तुम्हारे शरीर मे"
रिंकी "हां थैंक्स दादू" और उसके गले लग गयी जिससे उसके चुचे रमेश के सीने मे छू गया
रमेश भी अपनी पोती को पकड़ लिया पर ज्यादा देर तक ख़ुश नहीं हुआ क्यों रिंकी अलग होते हुए "दादू मैं तो कहती हूँ आपको भी योग करना चाहिए"
रमेश "बिटिया मेरा तो खेतोँ मे काम करने से वैसे ही हो जाता है पर तू कह रही तो तेरे साथ ये भी कर लूंगा" और मुस्कुराते हुए उसके गालों को छूने लगा
रिंकी "मुझे तो आजकल के नये तरीके से करना पसंद है दादू आपको दिखाऊ" रमेश ने हामी भरी
फिर रिंकी ने वही निचे बैठ पहले तो आसान से योग दिखाए जिसके बारे मे रमेश जानता ही था आगे बढ़ते हुए रिंकी ने कहा "दादू ये देखिये इस तरह से करने से यहाँ आराम मिलता है"
रमेश को अचानक सामने से रिंकी की बिना ब्रा वाली चुचे झूलते हुए दिखाई दी रमेश हम्म्म बोलते हुए एक टक वही देखने लगा, रिंकी ने भी ये देखा और बिना कुछ बोले उठ कर घूम गयी फिर दूसरा आसान दिखाने लगी
रिंकी "दादू ये करने से आपके पैरो को आराम मिलता है" रमेश तो बस हम्म बोल सामने दिख रहे नज़ारे लेग्गी मे चुस्त गांड को देखने लगा जिसे रिंकी ने फिर गौर किया
फिर रिंकी ने वो कहा जिसकी उम्मीद रमेश को बिल्कुल नहीं था "दादू इस योग के लिए किसी की मदद चाहिए होता है आप आइये और मेरी कमर को यहाँ से दबाइये"
रमेश तो खुद चाहता था अपनी पोती को किसी तरह चुना और रिंकी ने खुद उसे अपने पास बुला लिया रमेश बिना कुछ बोले पीछे से रिंकी की कमर को दोनों हाथो से दबाने लगा,
रिंकी "हम्म हा दादू ऐसे ही इससे कमर के जोड़ खुलते है जिससे दर्द मे आराम मिलता है"
रमेश सामने का नजारा अद्भुत था बिलकुल सामने उसकी पोती झुकी हुयी थीं और उसकी गांड उसके सामने था,
मध्यम आकार की गांड को देख और उसके अंदर लंड जाने की कल्पना ने रमेश के लंड को भरपूर तनाव से भर दिया दोनों हाथो से उसने कमर को दबाते हुए धीरे से रिंकी की गांड को चुना चाहा,
पर इस बार फिर रिंकी वैसे ही उलटे होके लेट गयी और दोनों पैर को जोड़ कर अपने सर की तरफ ले जाते हुए बोली "दादू ये करने से पेट दब्ता है जिससे पेट बाहर नहीं आता है,
रमेश घुटनो पर बैठा था उसका लंड अब पूरा सख्त हो चूका था वो उसे होने पजाने मे छुपा रहा था ताकि रिंकी को इसके बारे मे पाता ना चले पर उसे क्या पाता उसकी पोती सब गौर कर रही थीं,
उसने सामने अपनी पोती की लेग्गी मे चुस्त दोनों टांगो को देखा रिंकी की बातो को सुन "फिर तो इसे रोज करना चाहिए बिटिया जिनका पेट बाहर हो"
रिंकी "हा दादू पर जिनका ज्यादा ही बाहर उनके पैरो को यहाँ से थोड़ा दबाना चाहिए आप भी कीजिये एक बार"
रिंकी की बातो को सुन बताये अनुसार रमेश ने दोनों हाथो को अपनी पोती की मुलायम जांघो पर रखा उसका लंड मोटे पाइप की तरफ सख्त हो चूका था,
रिंकी "हा दादू बिल्कुल यहाँ से अब दबाइये"
रमेश के दबाते ही रिंकी आँखे बंद कर "आह्ह हा दादू थोड़ा और जोर से दबाइये हा बिल्कुल ऐसे ही करना है"
यहाँ रमेश अपनी कल्पना से बाहर आ ही नहीं पा रहा था पहले पोती की पीछे से गांड मारने और अब सामने से उसकी चूत मे लंड घुसा हुआ सोच कर ही उसका लंड टन टन करने लगा,
वही रिंकी भी कहा पीछे रहने वाली थीं पहले उसने अपने भाई कमल के लंड को चूसने के बाद उसकी लंड लेने की प्रबल इक्छा बढ़ती जा रही थीं और अभी अपने दादू के साथ ये सब करने से उसकी चूत गीली हो चुकी थीं,
उसकी चूत इस तरह से लंड घुसे जाने की बात से और भी ज्यादा उत्तेजित हो रही थीं अपने दादू के सख्त हाथो की पकड़ को अपनी जांघो पर पा कर रिंकी सिंहरने लगी थीं,
रिंकी के शांत रहने का मतलब जानने के लिए रमेश ने थोड़ा आगे बढ़ने का सोचा उसने दोनों टांगो को फैला कर सीधा अपनी कमर को अपनी पोती के चूत के सामने ले जाकर टच कर दिया,
रिंकी को चूत के सामने कुछ आभास हुआ उसने आँखे खोली उसकी आँखे नशीली हो चुकी थीं अपने दादा जी की आँखों मे देखते हुए "दादू इससे पेट पर नहीं जांघो पर तनाव बढ़ता है और दर्द से आराम मिलता है" रिंकी अब भी योग बताने मे लगी थीं,
रमेश ने बिना कुछ बात किये पजाने के ऊपर से अपने खड़े लंड को रिंकी की चूत के ऊपर रख दबाने लगा, रिंकी का शरीर जवाब देने लगा पर एक डर भी सामने था क्या उसके दादा जी खुद अपनी पोती से ऐसा कर सकते है,
उसके चूत के ऊपर उसके अपने दादाजी का खड़ा लंड दबाव बना रहा था अब भी रमेश के हाथ दोनों टांगो को फैलाये हुए थे,
रिंकी "दादू मेरा पैर अब दर्द कर रहा है आप थोड़ा हटेंगे क्या"
रमेश ने जैसे ही रिंकी की बातो को सुना काल्पनिक दुनिया से वास्तविक दुनिया मे आ गया और तुरंत उठ खड़ा हुआ और रिंकी के हाथो पकड़ उसे भी उठा दिया,
रिंकी की नजरें नीची थीं रमेश "बिटिया ये तो अच्छा योग बताया मुझे बहुत अच्छा लगा"
रिंकी अपने साँसो को सामान्य करते हुए ऊपर देखते हुए "हम्म दादू आज के लिए इतना ही अब कल सुबह आपको मै और अच्छे से सीखा दूंगी"
रमेश ने मुस्कुराते हुए सोचने लगा "क्या रिंकी को अब भी कुछ पता नहीं या जैसा मैं सोच रहा वैसा होने वाला है"
रमेश "ठीक है बिटिया अब तुम जाओ थोड़ा आराम करलो मैं भी थोड़ा आराम कर लेता हूँ"
दोनों अपने अपने कमरे मे चल दिए,
आज के इतना ही दोस्तों मिलते है अगले अध्याय मे धन्यवाद
Thanks for your special complement.... Main koshis karunga aage episode me kuch naya kar paauBrother sach kahu to mujhe ye episode bilkul bhi pasand nahi aya kyu ki esi chudai to ham sab bht si story mai padte hi aa rahe h hame laga tha ki yha kuch new dekhe or padne ko milega lekin esa nahi hua agr tum pehli chudai lekha ki kamal ke sath karwate or ani ki pehli chudai Chanchal ke sath to uska ek alag maja ata isse story mai kuch new creat hota jisko tum aage bhi use kar sakte the khair thik tak hi tha ye update bhai
बहुत ही गरमागरम कामुक मादक और उत्तेजना से भरपूर उन्मादक अपडेट हैं भाई मजा आ गयाअध्याय 16
लेखा दुकान मे खाली बैठी थीं उसके साथ कुछ दिनों से घट रही घटनाओ को याद कर रही थीं की कैसे पहले उससे उसके बेटे ने दवाई लगवाने के लिए बोल कर ही अपना लंड दिखा दिखा के उसे चुदासी बना दिया फिर इतने से मन नहीं भरा तो उसने कमल के साथ मिलकर अपने लंड से मुझ पर अपना लंड ला पानी छोड़ दिया,
वो सोचने लगी क्या सही है क्या गलत कुछ समझ नहीं आ रहा है, लंड की तड़प ने मुझमे इतना ज्यादा हवस भर दिया है खुद को रोक ही नहीं पा रही इनके करीब जाने से, आज तो मैंने फिर एक नया लंड जेठ जी का देख लीया,
काश मेरे पति अभी यहाँ होते तो अभी के अभी अपनी चूत को अच्छे से कुटवा लेती पर हाय मेरी किस्मत पता नहीं क्या करवाना चाहती है कितना विरोध कर लू पर लगता है मेरी किस्मत मेरे बेटे के लंड को मेरी इस चूत मे घुसवा के ही मानेगी और साडी के ऊपर से पनियाती चूत को छूने लगी साथ ही ऊपर से उसे रगड़ने लगी,
लेखा ने मन मे सोचा "हे भगवान माफ़ करना मै जो नहीं करना चाहती थीं अब वो मुझे करना ही पड़ेगा, अपनी इस चूत को शांत करने के लिए पति के अलावा दूसरे लंड को इसके अंदर लेना ही होगा तभी मुझे शांति मिलेगी इस गर्मी से"
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अगले कुछ मिनट के बाद उसे सट्टर के बंद होने की आवाज़ आयी वो बिस्तर मे उठके बैठ गया,
लेखा अंदर आके अनि के रखे सामान को देखने लगी सब चीजों को ठीक और पूरा देख वो भी बिस्तर मे आके अनि के बगल मे बैठ गयी,
अनि "माँ उस दिन मैंने जो भी गलती की उसके लिए फिर से माफ़ी मानता हूँ" और निचे देखने लगा
लेखा थोड़ी देर चुप रही फिर "बेटा दुसरो को बाते बताना ठीक है पर हम जो कर रहे है उसके बारे मे जिक्र करना मतलब हमारी बदनामी हर जगह हो सकती है"
अनि अभी भी निचे देखते हुए "हम्म मुझे पता है माँ हमारे नये रिश्ते के बारे मे किसी को पता चला तो हर जगह हमारा क्या हाल होगा"
लेखा "समझ सकती हूँ इसमें तेरी क्या ही गलती है जो भी हो रहा शायद मेरी ही किस्मत मे लिखा हो"
अनि "अगर उस दिन कमल भैया और रिंकी हमें नहीं देखते तो ज्यादा अच्छा होता माफ़ करना माँ शायद मेरी ही कही गलती रही होगी"
लेखा "हम्म कोई बात नहीं अब जब तुम दोनों ने मुझे ऐसे देख ही लिया है तो मैं कुछ नहीं कह सकती हूँ मेरी ही भूख ने ये सब किया मेरे साथ"
अनि "कोन सी भूख माँ क्या आपने खाना नहीं खाया अभी तक" माहौल को सामान्य बनाते हुए
लेखा "खाना खा लिया मुझे उसकी भूख नहीं इसकी भूख मेरे लाल मेरे बच्चे" और पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी,
अनि "आह माँ अब पता चला मुझे आपकी भूख के बारे मे"
लेखा "तूने कमल को नहीं बताया ना आज यहाँ आने के बारे मे"
अनि आंखे बंद किये हुए "नहीं माँ उनको नहीं पता मैं आपके साथ यहाँ हूँ"
लेखा "फिर तो अभी हमारे पास बहुत समय है"
लेखा ने अनि को बिस्तर पर लेटा दिया और उसके पैंट को खोलने लगी अनि ने गांड उठा के साथ दिया और पैंट चड्डी के साथ घुटनो तक आ पंहुचा,
लेखा बिना किसी देरी के अपने बेटे के कड़क हो चुके लंड को हाथो मे लेके देखने लगी,
लेखा "आह इतना कड़क हो गया है रे तेरा ये लंड बिलकुल मोटे लकड़ी के तने जैसा"
अनि "ये सब आपका ही कमाल है माँ आपका एक स्पर्श मेरे लंड को एक अलग अहसास देता है जैसे उसे उसका बिछड़ा प्यार मिलने वाला हो"
लेखा मुस्कुरा कर अपने बेटे के लंड पर झुक गयी उसने अनि की आँखों मे देखा अनि ने अपनी माँ की आँखों मे देखा फिर लंड के टोपे को खोलते हुए एक बूँद आ चुकी गुलाबी टोपे को होठो के अंदर ले ली,
अनि की आँखे खुद ब खुद बंद हो गयी अपनी कामुकता से परिपूर्ण माँ के बस लंड के ऊपरी हिस्से को लेने मात्र से,
अनि "आह्ह माँ कितनी गर्म है आपके ये होंठ बस अब मुझे और इंतजार मत करवाइये, ले लीजिये इस पूरे लंड को अपने गर्म मुँह मे"
लेखा ने अपने बेटे की आग्रह को स्वीकारते हुए मे पूरे लंड को मुँह मे लेने की कोशिश करने लगी पर लम्बाई ज्यादा होने की वजह से कुछ हिस्सा अब भी बाहर रह गया,
अनि की आँखे बंद माँ के द्वारा लंड की चुसाई का मज़ा लेने लगा, उसकी चूत मे लंड देने की इक्छा हर पल अब और बढ़ती जा रही थीं,
लेखा ने अपनी गति बढ़ा दी उसके लंड को चूसने और चाटने का तरीका अनि के लिए असहनीय होता जा रहा था
अनि "आह्ह माँ ऐसे लंड चुसोगी तो मेरा पानी तो और भी जल्दी निकाल जायेगा"
लेखा मुँह हटा के हाथो से लंड को हिलाते हुए "मत रोक बेटा आज कितने दिन बात तस्सली से मैं लंड चूस रही हूँ तेरे पापा भी यहाँ नहीं है तो अब मैं खुद को रोकना नहीं चाहती"
लेखा ने अब अपने दोनों हाथो को लंड पे ऊपर निचे करते हुए बिच बिच मे मुँह से लंड को चूसने लगी,
अनि को लगने लगा वो अब कभी भी झड़ सकता है तो लेखा को रोकना सही समझा क्युकी जल्दी झड़ने से उसे आगे माँ को संतुष्ट करना मुश्किल ना हो जाये,
अब लेखा बिस्तर मे चित्त लेटी थीं उसके ब्लाउज खुले हुए और दोनों टांगे फैली हुयी थीं जिनके बिच उसका बेटा उसकी चूत चाटना शुरू करने वाला था,
पहले से ही गीली हो चुकी रस छोड़ती चूत को और गीला करने मे अनि को ज्यादा मुश्किल नहीं हुयी उसने दो उंगलियों से चूत के फांको को अच्छे से फैलाया,
पहले तो जी भर के सुंझा फिर जैसे ही अपनी जीभ से एक बार चूत को चाटा लेखा उछल पड़ी "आह्ह अनि तेरा जीभ कितनी ठंडी है बेटा"
अनि ने अपनी माँ की आँखों मे देखते हुए चूत पर होंठ रख अंदर जीभ से उसे और अंदर तक चाटने लगा,
लेखा भी अनि को देख रही थीं उसने अपने हाथो को अनि के सर पे रख और जोर से दबाने लगी,
लेखा "आह्ह माँ चूस बेटा ऐसे ही रुकना नहीं ये आजकल बहुत पानी छोड़ रही है हा हा ऐसे ही और जोर लगा अनि आअह्ह्ह"
दोनों की आँखे एक दूसरे को देख रही थीं लेखा तो पूरी पागल हो चुकी अपनी कमर भी हिलाना शुरू कर दी अनि के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था पर अपने दोनों हाथो से पूरी ताकत से उसने लेखा की टांगो को पकड़ उसकी चूत चूसना जारी रखा,
लेखा झड़ने के करीब थीं फिर अनि ने अपना सर चूत से हटा दिया लेखा ने तुरंत उसके सर को दबाने लगी "अब रुक क्यों गया कमीने मैं तुझे जान से मार दूंगी" पर अनि रुका रहा और बोला "माँ मुझे लंड अंदर डालना है" लेखा "पहले तू ये काम पूरा करना फिर बाद मे डाल लेना बेटा मेरा आने वाला है बिच मे मत रुक" अनि "नहीं माँ आप बाद मे फिर माना कर दिए तो" लेखा ने चिल्लाते हुए "नहीं करुँगी मना पहले तू चूस मेरी चूत कुत्ते",
अनि फिर भी नहीं माना उसके हिसाब से अगर अभी नहीं किया तो शायद माँ की चूत मिलने मे और देरी हो जाये,
लेखा ने झल्ला कर कहा "ठीक है डाल ले पर मुझसे पहले झड़ा तो तेरे लंड की खैर नहीं"
अनि को जैसे ही अपनी माँ की मंजूरी मिली उसने तुरंत उठके दोनों टांगो को पकड़ चूत के ऊपर अपने लंड को रख दिया,
लेखा को अपने बेटे के लंड गर्माहट महसूस होने लगी उसने अपनी कमर हिला के इशारा किया की अब जल्दी से इसे अंदर डाल और मेरी चूत को शांति देदे,
अनि अपने पहले चुदाई के लिए तैयार था उसने सपने मे भी नहीं सोचा था उसकी पहली चुदाई उसकी माँ से होंगी,
लाल हो चूका सुपाढ़ा बज्बजाति चूत के मुँह के ऊपर आ चूका था अनि ने लंड को पकड़ चूत के ऊपर हिला के दे मारा लेखा तड़प के रह गयी,
लेखा "आहहह बेटा अब क्यों रुका है क्यों इतना तड़पा रहा है अब तो मैं तुझे वो काम करने की मंजूरी दे दी जिसके लिए तू इतने दिन से छटपटा रहा था, डाल दे बेटा मेरी चूत बहुत दिन से लंड के लिए भूखी है"
फिर एक आहहह की आवाज़ लेखा के मुँह से निकला क्युकी अनि ने अपने लंड के लाल सुपाड़े को चूत के भीतर कर दिया था,
बस इस अहसास से अनि को लगा वो झड़ जायेगा धीरे धीरे उसने अपने शरीर का दबाव लेखा के जिस्म पे देने लगा,
लेखा आँखे बंद किये अपनी चूत के अंदर अपने बेटे के लंड को महसूस करने लगी उसके शरीर मे एक नयी तरह की कम्मोतेजना का संचार होने लगा है,
अनि ने धीरे धीरे करके अपने पूरे लंड को अपनी माँ की चूत मे उतार चूका था लेखा के शरीर मे दर्द का सैलाब उमड़ चूका था उसने अनि को वही थोड़ी देर रुकने का इशारा किया और अपने बेटे के लंड के हिसाब से चूत को ढालने लगी,
अनि ने अपनी माँ के मासूम चेहरे को देखा उसे यकीन नहीं हो रहा था उसकी माँ इसके लिए कैसे मान गयी, उसने मन मे सोचा क्या माँ को सच मे पापा की कमी खल रही थीं या ये एक संयोग था जिसके लिए ना चाहते उसे हा बोलना पड़ा या माँ को लंड लेना इतना पसंद है की उसने अपने ही बेटे का लंड ले लिया अपनी चूत को शांत करने के लिए, पर खैर मुझे क्या मुझे तो माँ की चूत चोदना था जो अब मुझे मिल चूका है,
लेखा ने अनि के गांड पे हाथ मार इशारा दिया की अब वो अंदर बाहर करना शुरू करें
अनि ने दोनों हाथ को अपनी माँ के कंधो के बगल मे ले आया फिर शुरू हुआ माँ बेटे की असली ताबड़तोड़ चुदाई,
अनि बिना रुके पहली चुदाई के जोश मे दनादन लेखा की चुतो पर अपनी कमर पटकाने लगा,
लेखा "आअह्ह्ह माँ मेरी चूत मर गयी मैं आअह्ह्ह आराम से बेटा माँ हूँ मैं तेरी कहीं नहीं जा रही आअह्ह्ह मैं तेरे साथ ही हूउउ आअह्ह्ह"
अनि तो कुछ सुनना ही नहीं चाह रहा था बस कमर को अपनी माँ की चूत मे पटके जा रहा था पूरा लंड चूत की गहराई तक नाप रहा था,
लेखा को अहसास हुआ उसका बेटा पहली चुदाई कुछ ज्यादा जोश मे कर रहा है पर उसके जोरदार धक्को से लेखा को मज़ा भी आने लगा,
पर अनि कबतक यूँही तेज करता इंसान है जानवर नहीं, थोड़ा धीरे होते ही लेखा ने उसके चेहरे को अपने पास लाके उसके होठो को चूमने लगी,
अनि कुछ पल रुका रहा और माँ के होठो को चूसते हुए उसका साथ देने लगा पर वो पहली चुदाई मे ही लेखा को दिखाना चाहता था उसका बेटा क्या कर सकता है उसने फिर धीरे से धक्के देने शुरू किया,
पर इसबार लेखा भी उसका साथ देते हुए बोलने लगी "आह्ह हा मेरे बच्चे बहुत अच्छा कर रहा इसी तरह हा ऐसे ही और अंदर तक आह माँ इतना मज़ा पहले क्यों नहीं आया आअह्ह्ह हां बेटे थोड़ा और तेज कर तेरा पूरा लंड मेरी चूत खा रहा है"
लेखा की बातो ने अनि को और जोश से भर दिया लेखा के ऊपर ही लेट कर उसने होनी गांड हिलाना शुरू किया,
इस तरह लेखा भी खुद नहीं रोक पा रही थीं वो अब चूत की आग से ठंडी पड़ने वाली थीं उसने दोनों हाथो को अनि के गांड के ऊपर रखा और जब अनि निचे जाता तो वो भी दोनों हाथो से और जोर लगा के उसके लंड का चूत मे अंदर लेती,
लेखा के हाथ और अनि के कमर तेजी से चल रहे थे अंतिम क्षण नजदीक आ चूका था ठप ठप की गूंज पुरे कमरे मे हो रही थीं, कोई धीरे नहीं हो चाह रहा था
अनि "आह्ह माँ मैं झड़ने वाला हूँ कहा करना है"
लेखा "हा मेरे बच्चे आहहह मेरा भी हम्म होने वाला है अंदर डाल देना गर्मी शांत करना है"
आखिर कर वो पल आ ही गया और परिणाम ये हुआ की दोनों माँ बेटे एक साथ एक आहहह भरते हुए झड़ने लगे,
लेखा के कमर लगातार हिल रहे थे तो वही अनि का लंड जड़ तक अंदर घुसा हुआ बस झटके के साथ लगातार पिचकारी अपनी माँ चूत मे छोड़ रहा था,
अनि अपनी माँ के ऊपर ही पस्त होके पड़ा रहा, लगभग 15 मिनट शांति रही, लेखा और उसका बेटा दोनों उसी हालत मे पड़े रहे,
फिर लेखा ने आंखे खोली और अभी थोड़ी देर पहले जो हुआ उसका पूरा विवरण मन मे बनाने लगी,
लेखा मन मे "हे भगवान करवा ही दिया आपने मुझसे पाप एक आग को शांत करने के लिए, पता नहीं अब और आगे क्या क्या करवाओगे आप इस आग को शांत करने के लिए"
लेखा ने अनि को उठाया वो अभी भी पहली चुदाई के नशे मे था वो और सोना चाह रहा था तो लेखा ने कपडे पहन कर सोने को बोल दिया और खुद पीछे बने टाइलेट मे चली गयी,
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दोपहर खाने के बाद तो लेखा वापस दुकान चली गई थीं जिसके आगे क्या हुआ वो तो आपको पता ही है,
पर घर मे खेत से वापस आके रमेश जी दुविधा मे थे अभी वो चंचल के पास जाये या नहीं क्युकी रिंकी अभी घर पर ही थीं,
भले ही बाकि सभी लोग बाहर हो पर रिंकी के रहते ऐसा कदम उठाना रमेश जी को सही नहीं लगा,
इसलिए रमेश जी खुद ऊपर टीवी देख रही रिंकी के पास जा पहुंचे,
रिंकी वहा सोफे मे बैठी पैर सामने टी टेबल मे रखी थीं उसने हल्की ढीली टी शर्ट और निचे चुस्त लेग्गी पहन रखी थीं,
रमेश धीरे कदमो से वहा पहुंचे अबतक रिंकी को उसके दादाजी के आने का कोई आभास नहीं था,
रमेश जी अपने पोती के बदन को दूर से ताड़ रहे थे रात की बाते और हरकते उसकी जहन मे अच्छे से दिख रहे थे उसने रिंकी को टीवी देखने से साथ बिच बिच मे अपनी गोल गांड को खुजाते देखा जो लेग्गी के ऊपर से ही कहर ढा रहे थे,
रमेश जी कदम बढ़ा के वहा पहुंच गए
रिंकी "दादू आप यहाँ आइये बैठिये"
रमेश "क्या देख रही रिंकी बिटिया" बोलते हुए उसके बगल मे जाके बैठ गए
रिंकी "कुछ खास नहीं दादू फ़ोन से बोर हो गयी थीं तो मूवी देखने आ गयी थीं पर यहाँ भी कोई अच्छी मूवी नहीं आ रही है"
रमेश "क्या इन पिक्चर को देखने मे लगी है बेटी उससे अच्छा तो कुछ और कर लो"
रिंकी "आप ही बताओ दादू क्या करें अभी तो शाम होने मे बहुत समय है"
रमेश कुछ सोचने के बाद "क्यों ना तुम मुझे वो बताओ जो आजकल के बच्चों को पसंद हो जो मेरे समय मे नहीं थे"
रिंकी थोड़ी देर सोचती है फिर टीवी को बंद कर अपने दादा जी को रील दिखाने के बारे मे सोचती है फ़ोन की स्क्रीन ऑन कर इंस्टाग्राम मे देखने बोलती है
रिंकी "ये देखिये दादू इसमें आजकल सब अपनी रोज की नयी नयी तस्वीर डालते है और साथ मे कुछ लोग डांस वाली वीडियो भी डालते है"
रिंकी वीडियो दिखाने लगती है एक एक कर के कभी कॉमेडी वाली तो कभी विज्ञान वाली और किसी के डांस वाली जिसमे लड़की या औरत डांस करती है
चुंकि ये गांव था तो रिंकी को लगा रमेश चंद जी को कहा पता होगा पर रिंकी को कहा पता रमेश जी खिलाडी है वो खुद कभी कभी गन्दी वीडियो देखा करते है हालांकि उनके पास इंस्टाग्राम नहीं था तो क्या हुआ,
रमेश "अरे हा बिटिया ये तो बहुत सही है लोग अच्छे अच्छे डांस वाले वीडियो डाल रहे है"
रिंकी तो कॉमेडी वाली ही वीडियो दिखाना चाह रही थीं पर रमेश रिंकी को डांस वाले दिखाते हुए "ये आज कल बहुत खुल के डांस करते हुए वीडियो डालते है पहले तो लोग ऐसे चीज कभी कभी देखते थे"
रिंकी "हा दादू आजकल ऐसे वीडियो डालना आम बात है"
रमेश अपनी पोती के करीब होते हुए "ये देखो इसमें ये औरत कैसे खुल के डांस कर रही है और इसमें देखो ये लड़की भी इतने अजीब से डांस कर रही है"
रिंकी अपने पास बैठे दादा जी के पसंद को देख मुस्कुराते हुए और इसी तरह के वीडियो दिखाते हुए बोली "मैं भी सोचती हूँ दादू ऐसे डांस वीडियो डालू पर मुझे शर्म आती है इसलिए नहीं कर पाती हूँ"
रमेश "अरे इसमें शर्म कैसी बिटिया ये देखो ये लड़की बिलकुल तुम्हारी तरह दिख रही है और कितने अच्छे से डांस कर रही है" वीडियो मे लड़की ने बिना दुप्पटे के चुचे हिलाते हुए गांड हिला हिला के नाच रही थीं
रिंकी "हा दादू ये दिख तो रही है पर मुझे ऐसे कपडे पहन कर डांस करते हुए वीडियो बनाना अच्छा नहीं लगता है"
रमेश "ठीक है अभी वीडियो मत डालो पर मेरे सामने एक बार डांस करके झिजक दूर कर सकती हो"
रिंकी कुछ सोच के "ठीक है दादू मैं एक गाना लगाती हूँ फिर डांस करती हूँ"
थोड़ी देर बाद रमेश ने अपनी पोती को गाना लगा के डांस करते देखा रिंकी की ढीली टीशर्ट मे उसके चुचे हल्के हल्के हिल रहे थे फिर पीछे से गांड दिखाते हुए नाचने लगी जिससे लेग्गी मे चुस्त गांड बिलकुल आकार लिए रमेश के सामने थीं,
रमेश का लंड पाजामे मे हल्का फुल्का तनाव लेने लगा रिंकी तुरंत थक के उससे आके चिपक गयी और पूछने लगी "दादू कैसा था मेरा डांस क्या मैं भी डालू ऐसे वीडियो"
रमेश के बदन से चिपकी रिंकी को देख उसने बोला "बहुत ही बढ़िया था बिटिया बिलकुल जैसे वीडियो मे थे पर वीडियो अच्छे कपड़ो मे डालना जैसे घूमने जाते समय पहनते है"
रमेश "बिटिया मैंने सुना है आज कल तुम सुबह योग करती हो"
रिंकी "हा दादू हमारे कॉलेज मे एक टीचर ने घर पर सबको ये करने के लिए कहा है और साथ ही क्या क्या खाने से शरीर अच्छा रहता है वो भी बताई है"
रमेश "अरे वाह ये तो अच्छी बात है योग करने और अच्छा खाने से हमारा शरीर चुस्त रहता है वैसे मैं देख सकता हूँ असर दिख रहा है तुम्हारे शरीर मे"
रिंकी "हां थैंक्स दादू" और उसके गले लग गयी जिससे उसके चुचे रमेश के सीने मे छू गया
रमेश भी अपनी पोती को पकड़ लिया पर ज्यादा देर तक ख़ुश नहीं हुआ क्यों रिंकी अलग होते हुए "दादू मैं तो कहती हूँ आपको भी योग करना चाहिए"
रमेश "बिटिया मेरा तो खेतोँ मे काम करने से वैसे ही हो जाता है पर तू कह रही तो तेरे साथ ये भी कर लूंगा" और मुस्कुराते हुए उसके गालों को छूने लगा
रिंकी "मुझे तो आजकल के नये तरीके से करना पसंद है दादू आपको दिखाऊ" रमेश ने हामी भरी
फिर रिंकी ने वही निचे बैठ पहले तो आसान से योग दिखाए जिसके बारे मे रमेश जानता ही था आगे बढ़ते हुए रिंकी ने कहा "दादू ये देखिये इस तरह से करने से यहाँ आराम मिलता है"
रमेश को अचानक सामने से रिंकी की बिना ब्रा वाली चुचे झूलते हुए दिखाई दी रमेश हम्म्म बोलते हुए एक टक वही देखने लगा, रिंकी ने भी ये देखा और बिना कुछ बोले उठ कर घूम गयी फिर दूसरा आसान दिखाने लगी
रिंकी "दादू ये करने से आपके पैरो को आराम मिलता है" रमेश तो बस हम्म बोल सामने दिख रहे नज़ारे लेग्गी मे चुस्त गांड को देखने लगा जिसे रिंकी ने फिर गौर किया
फिर रिंकी ने वो कहा जिसकी उम्मीद रमेश को बिल्कुल नहीं था "दादू इस योग के लिए किसी की मदद चाहिए होता है आप आइये और मेरी कमर को यहाँ से दबाइये"
रमेश तो खुद चाहता था अपनी पोती को किसी तरह चुना और रिंकी ने खुद उसे अपने पास बुला लिया रमेश बिना कुछ बोले पीछे से रिंकी की कमर को दोनों हाथो से दबाने लगा,
रिंकी "हम्म हा दादू ऐसे ही इससे कमर के जोड़ खुलते है जिससे दर्द मे आराम मिलता है"
रमेश सामने का नजारा अद्भुत था बिलकुल सामने उसकी पोती झुकी हुयी थीं और उसकी गांड उसके सामने था,
मध्यम आकार की गांड को देख और उसके अंदर लंड जाने की कल्पना ने रमेश के लंड को भरपूर तनाव से भर दिया दोनों हाथो से उसने कमर को दबाते हुए धीरे से रिंकी की गांड को चुना चाहा,
पर इस बार फिर रिंकी वैसे ही उलटे होके लेट गयी और दोनों पैर को जोड़ कर अपने सर की तरफ ले जाते हुए बोली "दादू ये करने से पेट दब्ता है जिससे पेट बाहर नहीं आता है,
रमेश घुटनो पर बैठा था उसका लंड अब पूरा सख्त हो चूका था वो उसे होने पजाने मे छुपा रहा था ताकि रिंकी को इसके बारे मे पाता ना चले पर उसे क्या पाता उसकी पोती सब गौर कर रही थीं,
उसने सामने अपनी पोती की लेग्गी मे चुस्त दोनों टांगो को देखा रिंकी की बातो को सुन "फिर तो इसे रोज करना चाहिए बिटिया जिनका पेट बाहर हो"
रिंकी "हा दादू पर जिनका ज्यादा ही बाहर उनके पैरो को यहाँ से थोड़ा दबाना चाहिए आप भी कीजिये एक बार"
रिंकी की बातो को सुन बताये अनुसार रमेश ने दोनों हाथो को अपनी पोती की मुलायम जांघो पर रखा उसका लंड मोटे पाइप की तरफ सख्त हो चूका था,
रिंकी "हा दादू बिल्कुल यहाँ से अब दबाइये"
रमेश के दबाते ही रिंकी आँखे बंद कर "आह्ह हा दादू थोड़ा और जोर से दबाइये हा बिल्कुल ऐसे ही करना है"
यहाँ रमेश अपनी कल्पना से बाहर आ ही नहीं पा रहा था पहले पोती की पीछे से गांड मारने और अब सामने से उसकी चूत मे लंड घुसा हुआ सोच कर ही उसका लंड टन टन करने लगा,
वही रिंकी भी कहा पीछे रहने वाली थीं पहले उसने अपने भाई कमल के लंड को चूसने के बाद उसकी लंड लेने की प्रबल इक्छा बढ़ती जा रही थीं और अभी अपने दादू के साथ ये सब करने से उसकी चूत गीली हो चुकी थीं,
उसकी चूत इस तरह से लंड घुसे जाने की बात से और भी ज्यादा उत्तेजित हो रही थीं अपने दादू के सख्त हाथो की पकड़ को अपनी जांघो पर पा कर रिंकी सिंहरने लगी थीं,
रिंकी के शांत रहने का मतलब जानने के लिए रमेश ने थोड़ा आगे बढ़ने का सोचा उसने दोनों टांगो को फैला कर सीधा अपनी कमर को अपनी पोती के चूत के सामने ले जाकर टच कर दिया,
रिंकी को चूत के सामने कुछ आभास हुआ उसने आँखे खोली उसकी आँखे नशीली हो चुकी थीं अपने दादा जी की आँखों मे देखते हुए "दादू इससे पेट पर नहीं जांघो पर तनाव बढ़ता है और दर्द से आराम मिलता है" रिंकी अब भी योग बताने मे लगी थीं,
रमेश ने बिना कुछ बात किये पजाने के ऊपर से अपने खड़े लंड को रिंकी की चूत के ऊपर रख दबाने लगा, रिंकी का शरीर जवाब देने लगा पर एक डर भी सामने था क्या उसके दादा जी खुद अपनी पोती से ऐसा कर सकते है,
उसके चूत के ऊपर उसके अपने दादाजी का खड़ा लंड दबाव बना रहा था अब भी रमेश के हाथ दोनों टांगो को फैलाये हुए थे,
रिंकी "दादू मेरा पैर अब दर्द कर रहा है आप थोड़ा हटेंगे क्या"
रमेश ने जैसे ही रिंकी की बातो को सुना काल्पनिक दुनिया से वास्तविक दुनिया मे आ गया और तुरंत उठ खड़ा हुआ और रिंकी के हाथो पकड़ उसे भी उठा दिया,
रिंकी की नजरें नीची थीं रमेश "बिटिया ये तो अच्छा योग बताया मुझे बहुत अच्छा लगा"
रिंकी अपने साँसो को सामान्य करते हुए ऊपर देखते हुए "हम्म दादू आज के लिए इतना ही अब कल सुबह आपको मै और अच्छे से सीखा दूंगी"
रमेश ने मुस्कुराते हुए सोचने लगा "क्या रिंकी को अब भी कुछ पता नहीं या जैसा मैं सोच रहा वैसा होने वाला है"
रमेश "ठीक है बिटिया अब तुम जाओ थोड़ा आराम करलो मैं भी थोड़ा आराम कर लेता हूँ"
दोनों अपने अपने कमरे मे चल दिए,
आज के इतना ही दोस्तों मिलते है अगले अध्याय मे धन्यवाद