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Incest काला इश्क़ दूसरा अध्याय: एक बग़ावत

Mohdsirajali

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भाई आप तो सीरियस हो लिए..... दो लोग आपस में एक दूसरे की भावनाओ को और विचारों को तभी समझ सकते है जब वो आपस में साढू हो.... 😜

मै और कामदेव जी साढू भाई है.... 😂😜
bhai....aap sadu honge iska matlab ye nahi ki aap sabse jyada gayaani hain..aap ucc par mere support ki baat kar rahe hain..shayad aap mere naam par ja rahe hain..kyunki main Muslim hoon..magar ucc kya hai..mujhe iski puri knowledge hai..ye rajneeti karne ka ek lolly pop hai..
 

manu@84

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bhai....aap sadu honge iska matlab ye nahi ki aap sabse jyada gayaani hain..aap ucc par mere support ki baat kar rahe hain..shayad aap mere naam par ja rahe hain..kyunki main Muslim hoon..magar ucc kya hai..mujhe iski puri knowledge hai..ye rajneeti karne ka ek lolly pop hai..
दोस्त मेरा कॉमेंट सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखा गया था। इसका नाम से कोई लेना देना नही था। हम यहाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए आते हैं। हमारी ये वो दुनिया है जहा हम अपनी बातें, पसंद नापसंद रख सकते है। जो कि वास्तविक दुनिया के संभव नहीं है।

सच तो ये है यहाँ कोई किसी का असली नाम तक नही जानता, आप मेरा नाम काम धर्म जानते है.... नही ना फिर भी हम बात कर रहे हैं।

यहाँ सिर्फ प्यार है, गैरो के बीच अपनो का प्यार पाने की कल्पना जिसे incest कहा जाता है। उसी पर ये सारा मसला खड़ा हुआ था।

Sorry अगर मेरे शब्दों से आपका दिल दुखा हो 🙏
 

Mohdsirajali

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दोस्त मेरा कॉमेंट सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखा गया था। इसका नाम से कोई लेना देना नही था। हम यहाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए आते हैं। हमारी ये वो दुनिया है जहा हम अपनी बातें, पसंद नापसंद रख सकते है। जो कि वास्तविक दुनिया के संभव नहीं है।

सच तो ये है यहाँ कोई किसी का असली नाम तक नही जानता, आप मेरा नाम काम धर्म जानते है.... नही ना फिर भी हम बात कर रहे हैं।

यहाँ सिर्फ प्यार है, गैरो के बीच अपनो का प्यार पाने की कल्पना जिसे incest कहा जाता है। उसी पर ये सारा मसला खड़ा हुआ था।

Sorry अगर मेरे शब्दों से आपका दिल दुखा हो 🙏
bhai...dil dukhne jaisi koi baat nahi..magar aapki kuch baaten galat lagi isiliye maine bol diya...bhai hame apne badon ka maan samman kabhi nahi bhoolna chahye hum xforum par hain site gandi hai iska ye matlab nahi ki hum apni bhasha ki maryada ko bhool jaayen..agar meri baton se aapko dukh hua to..I'm sorry
 
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Rockstar_Rocky

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Manu bhai dhanywad ki apne apne chahne wale ki list me shamil kiya hum dil se dua .
Super aur shandar update diya hai bhai apne .Bas ek request hai ki sex scene thoda kam Dale aisa meri ray hai kyuki apki story aise hi padhkar maja ajata jisme atoot prem ho.Baki ap jaisa soche aur jaisa other reader chahe....thankyu for awesome update .
Stuti mo meri taraf se❤️😘😍

धन्यवाद कैसा अभी भाई?! आप तो शुरू से मेरे पसंदीदा लोगों की सूची में शामिल रहे हो| :hug:

तारीफ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई! :thank_you: :dost: :hug: :love3:
सेक्स सीन जो डालने थे वो डाल चूका हूँ, इसके आगे छोटे-मोटे सेक्स सन आएंगे|

स्तुति को आपकी तरफ से प्यारी ये कह कर दे चूका हूँ की; "आपके (स्तुति के) लिए एक ख़ास प्यारी बड़ी दूर से आई है| ये प्यारी आपके अभी अंकल ने भेजी है! अभी अंकल मेरे इंटरनेट फ्रेंड हैं!" स्तुति के लिए इतनी जानकारी काफी थी और वो इससे बहुत खुश थी तथा खरगोश की भाँती ख़ुशी से फुदक रही थी!

नया अपडेट थोड़ी देरी में|
 

Rockstar_Rocky

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Rockstar bhai....aapne ladki ki manodasha ka jo varnan kiya hai..wo adbhut hai..wo bhi itna erotik tareeqe se aapne likha ki maza aa gaya..kriti ko sex ka Chaska lag chuka hai..yaani agar chut ko lund mil jaaye to wo chude bina nahi reh sakti..ab kriti reh paayegi....ya nahi..ye aage pata chalega...aapne bahot hi lazaab update diya hai..aap waqai prashansha ke Yogya hain...

तारीफ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई! :thank_you: :dost: :hug: :love3:

'संगत से गुण आवत हैं, संगत से गुण जावत हैं|' ये कथन यहाँ बिलकुल सही बैठता है| बाकी erotic तो मैं पहले लिखता था, अब ज्यादा लिखने का मन नहीं करता| कहानी के मुख्य सीन के लिए सारा erotic बचा कर रख रहा हूँ! :lol:

नया अपडेट थोड़ी देरी में|
 

Rockstar_Rocky

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Awesome update, ek navyouvna ke pahle sex ko aapne jaise yha racha hai adbhut hai, agar aise hi sabdo me anjali ne kirti ko sab sunaya hoga jaisa ki aapne comment me kha hai kirti ka kirdar ek real kirdar se prerit hai to ye anjali ke pahle sex ka varnan sunkar uske man par kya prabhav hua hoga wo janne ki tirv ichha hai, ab kirti kya kadam uthati hai apne life me , kya wo anjali ke nakshe kadam par chalegi

तारीफ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद! :thank_you: :dost: :hug: :love3:

दो दोस्त जब इस प्रकार की बात करते हैं तो वर्णन बिलकुल ऐसा ही होता है| हाँ कुछ बातें होती हैं जो बढ़ाई-चढ़ाई जाती हैं ताकि मज़ा दुगना हो जाए|
अंजलि की बातों का कीर्ति पर क्या प्रभाव हुआ और उसने इस संजोय ज्ञान का क्या किया ये आपको आगे आने वाली updates में पता लगेगा|
अभी तक आपने कीर्ति का एक रूप देखा है मगर अब कहानी गति पकड़ेगी और आपको करती का दूसरा रूप दिखेगा|

नई update थोड़ी देर में| अंजलि की बातों का कीर्ति पर क्या प्रभाव हुआ और उसने इस संजोय ज्ञान का क्या किया ये आपको आगे आने वाली updates में पता लगेगा|
अभी तक आपने कीर्ति का एक रूप देखा है मगर अब कहानी गति पकड़ेगी और आपको करती का दूसरा रूप दिखेगा|

नई update थोड़ी देर में|
 

hirak01

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भाग - 2


अब तक आपने पढ़ा:

हमने उस स्कूल में करीब 4 दिन तक शरण ली और ये चारों रातें मैंने इस क्रिया को देखा| समझ कुछ नहीं आया मगर उस औरत के चेहरे पर जो संतुष्टि के भाव आते थे उन्हें देख कर मैं इतना समझ गई थी की इस काम में मज़ा बहुत आता है!!!!

ये हादसा मेरे जीवन में एक गहरी छाप बना चूका था, इस काण्ड को देख मैं सम्भोग के प्रति आकर्षित हो चुकी थी!


अब आगे:

इस
चक्रवात के कारण मेरे पिताजी की गॉंव की ज़मीन और घर को खासा नुक्सान पहुँचा था| शहर में दो बच्चों की जिम्मेदारी और गॉंव में हुए नुक्सान के कारण मेरे पिताजी बहुत तनाव में रहने लगे थे| शायद यही कारण था की अब मुझे पिताजी का वो प्यार...वो लाड-दुलार नहीं मिलता था| पिताजी के प्यार की कमी पूरी की मेरे भैया यानी आदि भैया ने|



भले ही पिताजी मुझे लाड-दुलार न करते हों मगर उनकी लगाई मुझ पर बंदिशें जारी थीं| आदि भैया मुझसे 5 साल बड़े थे, वहीं मेरे अंदर बचपना भरा हुआ था| तो स्कूल से आते ही मैं अपना होमवर्क करते हुए चपड़-चपड़ कर भैया का सारा ध्यान अपने ऊपर केंद्रित रखती थी| आदि भैया भी मेरे सामने एक दम बच्चे बन जाते और मेरे साथ एक दोस्त की तरह हँसी-ठिठोली करने लगते| आदि भैया के साथ मेरा गहरा रिश्ता यहीं से स्थापित हुआ था|



पिताजी की रोक-टोक के कारण मेरा घर से बाहर निकलना बहुत कम होता था इसलिए घर के बाहर मेरे दोस्त थे ही नहीं| लेकिन कुछ समय बाद हमारे घर के बगल वाले घर में एक नया परिवार रहने आया और तभी मेरा एक प्यारा सा सच्चा दोस्त बना...मानु| मानु के मेरे जीवन में आने से नै बहार आ गई थी| दिखने, बोल-चाल में मानु बहुत ही तहज़ीबदार लड़का था| हम दोनों की दोस्ती इतनी गहरी हुई की हम दोनों बेरोक-टोक एक दूसरे के घर में घुस जाते थे| स्कूल साथ था तो दोनों स्कूल में भी मस्ती करने लगे, स्कूल से लौट कर दोनों एकसाथ बैठकर पढ़ाई करते थे| अब जैसा की होता है, एक लड़का और लड़की को दोस्ती के रिश्ते में नहीं रहने दिया जाता तो जल्द ही हम दोनों को अपने परिवारों के दबाव के कारण भाई-बहन के रिश्ते में बँधना पड़ा| लेकिन भले ही हमें जबरदस्ती भाई-बहन के रिश्ते में बाँधा गया हो मगर हमारा रिश्ता दोस्ती वाला ही रहा| हम दोनों ही एक दूसरे के घर में पढ़ते, खाते, खेलते और एक दूसरे की शिकायतें करते!



"आंटी जी, आज कीर्ति ने अपना होमवर्क नहीं किया था इसलिए उसे आज क्लास के बाहर खड़ा कर दिया था!" मानु मेरी शिकायत मेरी माँ से करता, जिस कारण मुझे माँ से डाँट पड़ती| बदले में मैं भी मनौ के घर पहुँच जाती उसकी शिकायत ले कर; "आंटी जी, मानु अपने दोस्तों के साथ मिल कर पीरियड बंक मार रहा था|" ये सुन कर आंटी जी मानु की क्लास लगा देतीं और मैं उसे पिटते हुए देख खी-खी कर हँसती|





धीरे-धीरे समय का चक्का घूमता गया और हम दोनों बड़े हो गए| समय के साथ दोनों के ही जिस्मों में बदलाव आते गए मगर हमारे मन में एक दूसरे को ले कर कभी कोई गलत विचार नहीं आये| मानु के दोस्त जब हम दोनों को साथ घूमते देखते तो उसे चिढ़ाने के लिए कहते की मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ| वहीं ये सुनकर मैं ज़ोर से हँसती और बोलती की; "मैं इसे अपना बॉयफ्रेंड बनाऊँगी?" ये सुनकर मानु भी चिढ जाता और बोलता की; "तू इस दुनिया की आखरी लड़की होगी न, तब भी मैं तुझे गर्लफ्रेंड न बनाऊँ!" अपनी बुराई सुन मैं चिढ जाती और उसका मुँह नोचने को उस पर लपक पड़ती|



हमारी इन लड़ाइयों में कई बार हमारे हाथ एक दूसरे को गलत जगह छू लेते थे| जैसे कई बार जब मैं मानु का मुँह नोचने के लिए उसपर कूदती तो खुद को बचाने के लिए और मुझे दूर धकेलने के लिए मानु के दोनों हाथ मेरे वक्ष पर आ जाते, लेकिन मानु ने कभी भी इस स्थिति का कोई गलत फायदा नहीं उठाया| उसने कभी मेरे स्तनों को जानबूझ कर छूने या दबाने की कोई कोशिश नहीं की|

कभी-कभी मानु मेरी चोटी पकड़ कर मुझे खींचता और मेरा बैलेंस बिगड़ने पर मैं उसी के ऊपर गिर पड़ती और कई बार गलती से मेरा हाथ उसके लिंग से स्पर्श हो जाता! परन्तु उसके लिंग को स्पर्श कर भी मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं आया| कई बार हम दोनों लड़ाई में इस कदर गुत्थम-गुत्था हुए की मेरे स्तन मनौ की छाती से दब गए मगर तब भी हम दोनों को कुछ गलत महसूस नहीं हुआ|





लेकिन धीरे-धीरे हमें अपने-अपने यौन अंगों के बारे में समझ आने लगा और हमने अब ये लड़ाई-झगड़ा करना बंद कर दिया| अपनी किशोरावस्था में ही हम इतने समझदार हो गए थे की खुद को सुधार लिया था|

अब चूँकि हमें अपने-अपने यौन अंगों का बोध हो गया था तो अब वक़्त था इन अंगों को समझने का|



मानु का तो मुझे पता नहीं मगर जब मैंने पहली बार अपनी बुर को छुआ तो मुझे स्कूल की वो काली रात याद आ गई जब मैंने उस आदमी और औरत को सम्भोग करते हुए देखा था! उस औरत के चेहरे पर आये उन आनंद और उन्माद से भरे भाव याद करते हुए मेरी उँगलियाँ मेरी योनि के पटलों को छेड़ने लगीं| इस छेड़खानी से मेरे शरीर में एक संतुष्टि की लहर दौड़ने लगी और मेरी आँखें अपने आप बंद हो गई| अपने उन्माद में बहते हुए मेरी उँगलियाँ तेज़ी से मेरी बुर के द्वारों को दाएं से बाएं तो कभी ऊपर से नीचे छेड़ रही थीं|

कुछ ही पल में मैं अपने जीवन के पहले चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई और फिर जो ज्वाला मुखी फूटा की क्या कहूँ?! बुर से निकले इस लावा ने मेरे जिस्म को चरम आनंद दिया था, ऐसा आनंद जिसे फिर से पाने को मेरा मन मचल रहा था! बस फिर क्या था, नहाते हुए मैंने फिर यही खेल खिला और पुनः चरमोत्कृष्ठ पर पहुँची!



मानु से मैं हर बात करती थी मगर ये बात कहने में मुझे लाज आ रही थी इसलिए मैंने इसका जिक्र अपनी क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की से किया| "तूने तो ये पहलीबार क्या है, मई तो एक साल से करती हुई आ रही हूँ और सच्ची इसमें बहुत मज़ा आता है!" ये सुनकर मुझे बुरा लगने लगा की आखिर क्यों मैं इस परमानंद से अछूती रही?! 'सारा टाइम तो तू मानु के साथ खेलती रहती थी तो ये सब सीखती कैसे!' मेरे दिमाग ने ये बात कह मुझे लताड़ा|

उस दिन मेरी दोस्त ने इस क्रिया को अलग-अलग ढंग से करने के नए-नए तरीके बताये| मुझे हैरानी हुई ये जानकार की मैं तो बस ऊपर-ऊपर से मजे ले रही थी, जबकि मेरी दोस्त तो अपनी बुर में ऊँगली, पेंसिल, पेन, यहाँ तक की गाजर-मूली तक डालने लगी थी! ये सुनकर मुझे बहुत उत्सुकता हुई और घर जा कर मैंने भी अपनी बुर में ऊँगली डालने की कोशिश की, परन्तु मेरी उँगलियाँ आकार में बड़ी थीं इसलिए आधी ऊँगली भीतर जाने के बाद मुझे कुछ अवरोध महसूस हुआ| मुझे डर लगने कागा की कहीं कुछ बुरा हो गया तो मैं किसी को बता भी नहीं पाऊँगी की मुझे आखिर हुआ क्या है इसलिए मैंने बस आधी ऊँगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया|

शुरू-शुर में मैं धीरे-धीरे अपनी ऊँगली अंदर-बाहर कर रही थी, लेकिन मेरा मन अब रफ्तार बढ़ाने को कह रहा था! जैसे-जैसे मेरी उँगलियों ने रफ्तार पकड़ी, मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया| मुझे बस मेरा चरम दिख रहा था जिसे पाने को मैं अपनी पूरी ताक़त झोंक कर अपनी उँगलियाँ अंदर-बाहर करने में लगी थी| अपने चरम की तरफ बढ़ते हुए मेरा बाँया हाथ मेरे स्तन पर आ पहुँचा| कामोत्तेजना में बहते हुए मैंने अपने स्तनों को बारी-बारी से दबाना शुरू किया| नीचे दाहिने हाथ की उँगलियाँ अपना कमाल दिखा ही रही थीं, लेकिन जब बाएँ हाथ ने अपना जादू स्तनों पर दिखाना शुरू किया तो मैं ये दोहरा हमला न सह पाई और भरभरा कर स्खलित हो गई!




स्खलन के शांत होने तक मैं अपनी सांसें दुरुस्त करने लगी| मुझे समझ आने लगा की उस औरत को उस समय कितना मज़ा आ रहा होगा| मैंने अपनी उसी दोस्त से इस काण्ड का जिक्र किया तो उसने मुझे सम्भोग पर पूरा ज्ञान दे दिया| इस ज्ञान को सुनकर अब मेरी इच्छा एक लिंग को देखने की हो रही थी|


जारी रहेगा अगले भाग में!
अभी मैने दूसरा भाग पढ़ा जिसमे हमारी नायिका (कीर्ति) को बड़ा होता दिखाया है आपने जो की पढ़ने में बहुत ही मजा आया।
साथ ही साथ कीर्ति का सेक्स की तरफ झुकाव भी अब मजबूत होते जा रहा है जिससे हमे लगता है की यही झुकाव ही पारिवारिक शारीरिक संबंध बनाने का कारण बनेगा या फिर शुरुआत मनु और कीर्ति से हो।
खैर मैंने पहला पार्ट पढ़ा है जिसको पढ़ने पर शुरू में तो वाह क्या मजा आया लेकिन जब रितिका ने अपना रंग दिखाया तब तो मुझे पढ़ने का बिलकुल भी मन नही किया क्योंकि उसके साथ एक बॉन्ड टाइप बन गया था तो उससे वह सब करने की आशा नही थी।
लेकिन किसी तरह से मैने वह पार्ट खत्म किया जिसके आधार पर कहानी का शीर्षक कला इश्क था फिर मैंने कहानी पूरी पढ़ी।
अब इसमें भी साला मेरे को वही डर है की वह काला पार्ट कितना काला होगा और किसके द्वारा काला किया जाएगा मनु या फिर कीर्ति के परिवार में उसके पीता या भाई के द्वारा।
क्योंकि कीर्ति मुख्य नायिका है तो इसका इश्क काला तो नही होगा (या फिर लेखक साहब की मर्जी कुछ भी करा सकते है)........
खैर देखते है आगे क्या होता है क्योंकि अभी तो मजा ही आ रहा है।
 

Rockstar_Rocky

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इस वर्णन को पढ़ कर ऐसा महसूस हो रहा है की अंजली अपने चचेरे भाई के लिए ब्राउनी पॉइंट्स बना रही है कृति के मन में।

सभी अपने पहले सेक्स का वर्णन बढ़ा-चढ़ा कर ही करते हैं| अब कीर्ति के चचेरे भाई को न्य स्वाद चखने को मिलेगा या नहीं ये आपको आने वाले updates में पता चलेगा|

नई अपडेट थोड़ी देर में|
 

Rockstar_Rocky

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Very nice update manu bhai aakash ne anjali ko apne jaal me fasakar sex kar hi liya ab dekhte hai ki in bato ka keerti par kya effect hota hai

तारीफ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई! :thank_you: :dost: :hug: :love3:

कीर्ति के किरदार के एक हिस्से को आप देख और समझ चुके हैं| अब बारी है कहानी को आगे भगाने की ताकि आप कीर्ति के किरदार को और समझ सकें|

नई update थोड़ी देर में|
 
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