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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

Kuresa Begam

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Nice
अध्याय - 26 --- " पाप का अंत "

मेरी सास ने अबकी बार फिर से अपनी बेटी कुसुम को कुछ नहीं बताया कि उसका पति और बेटी क्या गुल खिला रही है । शायद बता देती तो कुछ बच जाता ।

एक समय था जब कुसुम मेरी जिंदगी थी और आज रिंकी के आकर्षण ने मुझे इस कदर अपनी गिरफ्त में ले लिया था. कि कब उस का मैसेज आए और मेरी धड़कनों को बहकने का मौका मिले. जरूरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो…! रोज मेरी सुबह की शुरुआत उस के एक प्यारे से मैसेज से होती. कभी कभी वह बहुत अजीब से मैसेज भेजती.

कभी उस ने एक खूबसूरत सी शायरी सुनाई. हसीं जज्बातों से लबरेज उसकी शायरी का जवाब मै शायरी से ही देने लगा. सालों पहले मैं शायरी लिखा करता था. रिंकी की वजह से आज फिर से मेरा यह पैशन जिंदा हो गया था. देर तक हम दोनों बातें करते रहे. ऐसा लगा जैसे मेरा मन बिलकुल हलका हो गया हो. रिंकी की बातें मेरे मन को छूने लगी थीं. वह बड़े बिंदास अंदाज में बातें करती. समय के साथ मेरी जिंदगी में रिंकी का हस्तक्षेप बढ़ता ही चला जा रहा था., इधर कुसुम अपने पत्नी धर्म का पालन करते हुए नौकरी के साथ साथ अपने सास ससुर और पति की सेवा में दिन रात एक किए हुए थी ना वो दिन देखती ना वो रात देखती ।

एक महीने बाद....... रिंकी अपने कॉलेज गयी थी श्रुति की नज़र जब उस पर पड़ी तो वो सवाल भरी नज़रो से उसे देखने लगी......!

क्या बात है रिंकी तेरे चेहरे पर निखार कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है......लगता है पापा की क्रीम चेहरे पर ज्यादा लगाई जा रही है.......??

श्रुति की बातों को सुनकर रिंकी का चेहरा शरम से लाल पड़ गया उसने अपना चेहरा तुरंत नीचे झुका लिया और श्रुति उसके चेहरे की ओर देखकर मुस्कुराती रही..


मैने सही कहा ना रिंकी . तू इतने दिनों से अपने प्रोफेसर पापा के साथ स्पेशल क्लास ले रही थी, वैसे इसमें छुपाने वाली कौन सी बात है.......जवान तू भी है और मैं भी......जब मैं भी अपने बॉयफ्रेंड की क्रीम मुह पर लगाती हू तब मेरे चेहरे की रोनक तेरी जैसी हो जाती हैं. इसलिए मैने अंदाज़ा लगाया कि तू भी इतने दिनों से..........??

प्लीज़ स्टॉप श्रुति. मुझे शरम आती है तुझे इन सब के अलावा और कोई बात नहीं सूझती क्या.......चल अब लेक्चर शुरू होने वाला है....श्रुति भी आगे कुछ नहीं कहती और दोनो अपने क्लास की ओर चल पड़ते है.......!

आज रिंकी अपने लेक्चर्स पर भी ध्यान दे रही थी.....कल तक उसे सारे पीरियड्स बोर करते थे मगर आज सारे लेक्चर्स उसे अच्छे लग रहें थे, दोपहर तक वक़्त बहुत जल्दी कट गया उसे भूख लगी थी तो रिंकी, श्रुति को वही बैठा छोड़ और एक और सहेली थी उसके साथ कॅंटीन की ओर निकल पड़ी........!

बाहर कई सारे लड़के रिंकी को घूर रहें थे जैसे ही वो आगे बढ़ी तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया.. उसका हाथ इस तरह पकड़ने से उसकी साँसें एक पल के लिए मानो रुक सी गयी... उसके जिस्म में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि पलटकर उसकी तरफ देखे की किसकी इतनी जुर्रत हुई ये हरकत करने की... कुछ सोचकर खामोश रही फिर अपनी गर्देन घूमकर उस सक्श को देखने लगी.. उसका हाथ पकड़ने वाला सक्श उसकी सहेली श्रुति का बॉय फ्रेंड सोमेश था ........ शकल से शायद रिंकी उसे अच्छे से जानती थी........वो रिंकी की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था......!


बहुत मुश्किल से अपने जज्बातो को संभालते हुए बोली- रिंकी बोली छोड़ो मेरा हाथ......??

वो उसे देखकर हसे जा रहा था ..... तुम श्रुति के बॉयफ्रेंड सोमेश् हो! रिंकी के इस तरह कहने पर उसने अपने हाथों पर दबाव और ज़ोरों से बढ़ा दिया...!

सही कहा तुमने मैं तेरी सहेली का बॉय फ्रेंड हूँ.......मगर क्या करूँ मैने तो उससे दोस्ती सिर्फ़ इसलिए की थी कि मैं उसके ज़रिए तुझे हासिल कर सकूँ....मगर एक तू है कि मेरी तरफ देखती भी नहीं........क्या कमी है मुझ में.....कॉलेज की कई लड़कियाँ मुझपर मरती है मगर मैं तुझ पर मरता हूँ......? लेकिन जब श्रुति ने बताया " तू अपने बाप से मरवाती (चुदवाती) है " तब मेरे सब्र की सीमा टूट गयी तब मुझे ऐसा करना पड़ा.......!

रिंकी अपनी आँखें फाडे उसके चेहरे की ओर देखती रही उसका दिमाग़ काम करना लगभग बंद कर चुका था......सारे लोग उसे ही देख रहें थे, जिस्म डर से थर थर कांप रहा था. उसके साथ आई सहेली भी अपनी आँखें फाडे उसे तो कभी सोमेश को घूर रही थी वो बेचारी क्या कहती उसने फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे झुका ली.....!

चुप क्यों हो रिंकी कुछ तो बोलो....

जस्ट शटअप.........प्लीज़ तुम अभी यहाँ से चले जाओ......मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ......मेरा और तमाशा यहाँ मत बनाओ.

देखो रिंकी मुझे पता तुम्हे अपने पापा के 'बड़े केले' को लेने का शौक है, उनके साथ जो करना है वो बिंदास करो मुझे कोई issue नही है, लेकिन एक बार मेरे 'छोटे पप्पू' को भी मौका दो. उसने अपने पेंट की जिप की तरफ इशारा करते हुए कहा.

अभी सोमेश की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि किसी ने उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा. जब उसकी नज़र सामने खड़ी लड़की पर पड़ी तो सोमेश के साथ साथ रिंकी की आँखें भी हैरत से फैलती चली गयी........ उसके सामने श्रुति खड़ी थी. इस वक़्त वो बहुत गुस्से में दिखाई दे रही थी शायद किसी ने उसे इस बात की खबर कर दी थी......!

श्रुति को सामने देख सोमेश चुपचाप वहा से निकल गया... श्रुति ने रिंकी की तरफ देखा उसकी आँखो मे आसु थे, श्रुति ने उससे माफी मांगते हुए उसके कंधे पर हाथ रखा ही था कि रिंकी ने उसका हाथ छिटक दिया और एक जोरदार चांटा श्रुति के गाल पर जड़ दिया. Don't say me sorry श्रुति..... कह कर रिंकी कॉलेज से सीधा घर आ गयी.

आज जो कॉलेज में हुआ वो नही होना चाहिए था, भले ही इस मामले में पूरी गलती श्रुति के प्रेमी की थी. लेकिन श्रुति ने जब रिंकी को सोर्री बोला तो रिंकी को उसे चांटा नही मारना चाइये था....?

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन श्रुति ने इसे अपनी तौहीन समझी, उसकी अन्य सहेलियों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब सहेलियों ने इसे श्रुति की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि जल्द से जल्द श्रुति को इस थप्पड़ का बदला रिंकी से लेना चाहिए.


इधर घर आकर रिंकी ने अपने फोन मे सारे सहेलियों और दोस्तों के no ब्लॉक कर दिये. और उसने घर से निकलना पूरी तरह बंद कर दिया. मेरे मेसेज और काल के reply आना बंद हो गया. दो तीन दिन तक रिंकी के मैसेज काल के इन्तजार करने के बाद मुझे उम्मीद थी शायद मेरी माँ को रिंकी की कुछ फोन पर बातचीत होती हो. लेकिन नही, रिंकी के बारे में उन्हें कुछ भी नही पता था.

उस रात कमरे के अंधेरे में अपने बेड के कोने पर बैठा मैं पिछले दो तीन दिनो के बारे में सोच रहा था. कितना कुछ बदल गया था दो तीन दिनो मैं. बड़ी मुश्किल से इतनी मेहनत करने के बाद अच्छे दिनो के आसार बने थे, लगता था अब हम बेहतर ज़िंदगी जी सकेंगे. अपनी लाडो रिंकी संग कैसे कैसे सपने देखे थे, कैसी कैसी योजनाएँ बनाई थी, भविष्य कितना सुखद लगने लगा था. और फिर एक ही झटके में सब सपने टूट गये, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया, जैसे किसी ने आसमान से ज़मीन पर पटक दिया था. जिसके लिए मै सब कुछ कर रहा था वो ही खामोश हो गयी थी.

आँखे लगातार रोने और जागने से लाल हो गयी थी, दिमाग़ में तूफान चल रहा था, जिस्म थक कर चूर हो चुका था मगर नींद का कोई नामो निशान नही था. फिर मेने फैसला किया कल मै अपनी ससुराल जाकर रिंकी से फेस टू फेस बात करूँगा आखिर मुझसे इस तरह उसके रूठने की वजह क्या है ??????

******

अगले दिन सुबह नौकरी पर ना जाते हुए मै सीधा अपनी ससुराल चला गया. घर का दरवाजा अंदर से बंद था. मैने बड़े आहिस्ते से कुंडी खटखटाई.....रिंकी ने दरवाजे की दरार से ही झांक लिया था कि बाहर पापा खड़े है, अगले पल ही अपनी दोनों हथेलियों से उसने आंखें ढक ली और मन ही मन सोचने भी लगी-‘यह कैसी आग है, जो स्त्री को पुरुष-दर-पुरुष और पुरुष को स्त्री-दर-स्त्री भटकने पर मजबूर कर देती है।
यह जानने की कोशिश करते-करते पसीने से तरबतर हो गई।

उसके स्तनों से फूट आये पसीने ने उसकी समीज को भिगो दिया उसके हाथ अनायास ही जांघों पर चले गये। चड्डी भी पसीने से भीग गई थी। ऐसा लगा, उसके भीतर भी कुछ-कुछ हो रहा है। उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान हो गया था। वो वहां से सीधे अपने कदम बढ़ाते हुए दरवाजे पर चली आई। और उसने दरवाजा खोला.

मैं इतनी देर से कुंडी बजा रहा हूं, इतनी देर लगती हैं दरवाजा खोलने मे’’

बोलते बोलते मेरी नजर जब रिंकी की समीज पर पड़ी, तो शायद उस समय वो नहा रही थी और यही वजह थी कि उस ने उस समय समीज के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था. जिस्म पर चिपके हुए गीले सफेद पारदर्शी कपड़े मे उसके चूचे ने उस समय मुझको मदहोश कर दिया. मै फटी आंखों से रिंकी को देखता ही रह गया.

रिंकी ने बनावटी गुस्से से कहा, ‘‘इस तरह क्या देख रहे हो? बड़े बेशर्म हो आप.

लगता हैं मेरे यहा आने से तुम्हे खुशी नही हुयी रिंकी....??? मैने प्रशन वाचक निगाहों से उससे पूछा.


देखो पापा अभी घर में कोई नही है आप चले जाओ, किसी ने अगर आपको यहां आते देख लिया होगा, तो बेवजह हम दोनों की बदनामी होगी.

मुझे यहा आते किसी ने नही देखा, दूसरी बात मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ. कहते हुए मै अंदर आ गया.

उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

मैंने मन में सोचा कि रिंकी और मैं अकेले घर पर हैं, ये मौका पर चौका वाला समय इसको सवाल जबाब में बर्बाद नही करना चाहिए.

मै उसकी ओर बढ़ा और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मुझसे फिर कहा- पापा प्लीज चले जाओ, कोई आ जायेगा...??

मै हस्ते हुये बोला- अगर जिसको आना होता तो वो जाता ही क्यों...!

उसने अपनी आंखें नीचे झुका लीं. मेरी बात सही थी. रिंकी भी मन ही मन मेरे नीचे आने को तरस रही थी.

मैने उसका हाथ फिर से पकड़ा, उसने अपना हाथ मेरी पकड़ से छुड़ाना चाहा.
लेकिन मेरे हाथों की पकड़ इतनी ज्यादा सख्त थी कि वो अपने आपको मेरी पकड़ से नहीं छुड़ा पा रही थी.

अब मैने उसे आगन में ही धक्का देकर दीवार से सटा दिया. और सामने आकर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूसने लगा.

मेरा चूसने का तरीका इतना ज्यादा मादक था कि वो पानी पानी हो रही थी. फिर भी वो दिखाने के लिए मुझसे बोले जा रही थी- छोड़ो पापा छोड़ो …

कुछ ही पलों में उसने मेरे होंठों को काटना आरम्भ कर दिया. यहां तक कि मेरे मुँह से आ रही सिग्रेट की महक भी उसे अब अच्छी लगने लगी थी.

मै अपने काम में लगा रहा और उसने मेरे गले पर, सीने में, किस करना शुरू कर दिया. दो मिनट किस करने के बाद वह मुझसे दूर हो गयी और मैं उसकी आंखों में देखने लगा.

मैने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया. वो चुपचाप मुझे देख रही थी.

मैने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी. जल्दी ही मैने अपनी शर्ट निकाल फेंकी. वो मेरी मर्दानगी भरे सीने को देखकर उस पर निहाल हो गई. वो मेरी आंखों में देख रही थी. मै भी उसकी आंखों में एकटक देख रहा था.

कुछ समय बाद मै उसके करीब आया और उसे अपने सीने से चिपका लिया. वो मेरी गर्दन पर फिर से किस करने लगी.

इस बार मैने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और उसकी कमर को सहलाता हुआ उसकी बढ़ती धड़कनों को सुनने लगा.
धीरे धीरे मै अपना एक हाथ उसके बालों के जूड़े तक ले गया और उसे भी खोल दिया.

उसके बाल खुल कर बिखर चुके थे और मै उसके बालों से खेलने लगा. फिर मैने पीछे अपने हाथ ले गया और उसकी दोनों आस्तीनों से उसकी समीज को निकाल कर अलग कर दिया.

अब वो मेरे सामने ऊपर से नग्न अवस्था में थी.

उसने मुझे धक्का देकर दूर किया और अपने हाथों से अपने स्तन छुपाते हुए बेडरूम की ओर जाने लगी. मै मदमस्त सांड की तरह लार् टपकाते हुए उसका पीछा कर रहा था.

वो बेडरूम के पास जाकर रुक गई और पलट कर मेरी तरफ देखा; मुझे आंखों ही आंखों में बेडरूम में आने का न्यौता सा दे दिया.

फिर से वो आगे बढ़ने लगी. बेड के पास जाकर खड़ी हो गई.

मै उसके पीछे पीछे आ गया और पीछे से हाथ डालते हुए उसके पेट को सहलाने लगा. दूसरे हाथ को उसके सीने पर हाथ रखते हुए मम्मों को हल्का हल्का दबाने लगा.

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. बेड के दूसरे तरफ लगे आईने में मैं देख रहा था. मैने आगे से उसकी सलवार के नाड़े को अन्दर हाथ डाल कर खींचा और सलवार एक ही क्षण में जमीन पर गिर गई.

मैंने उसकी तरफ घूम कर देखा. उसकी आंखों में हवस का नशा था. मुझे लग रहा था कि मै जल्दी से उसे बेड पर लेटा दु और अपना काम चालू कर दू. मेरे लिए खुद को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

हम दोनों बिस्तर पर निवर्स्त्र थे मै बैठकर उसके पूरे शरीर को देख रहा था. उसके मम्मों पर, कमर पर, चेहरे पर हाथ फेरते हुए मैने उसे मदहोश कर दिया था.

मै उसके पूरे जिस्म को चूमे जा रहा था.
चूमते हुए मै उसके मम्मों पर भी आ चुका था और मम्मों को जोर जोर से चूसने लगा.
वो मेरे सिर पर हाथ रखकर अपने मम्मों पर उसे दबाने लगी थी. इसलिए मै मम्मों को दांतों से दबाने काटने भी लगा था. उसे मीठा दर्द होने लगा था लेकिन मेरा साथ पूरी तरह से दे रही थी. और मै उसे मछली जैसे तड़पा रहा था.


कुछ देर बाद मैने उठकर उसके चेहरे पर हाथ रखा और जल्द ही उसका हाथ पकड़कर उसे डॉगी पोजिशन मे घुमा दिया.
उसके बालों को एक साथ करके पकड़ा और खींचते हुए बोला- मेरी जान, मैंने तीन दिनो से इस समय के लिए इंतजार किया है.

रिंकी की चूत तो पहले से ही गीली हो चुकी थी और फिर मुझे पता ही ना चला कब हम दोनों आपस में दो जिस्म एक जान हो गए.

बाप बेटी की वासना की आग जब शांत हुयी तो नंगे बदन एक दूसरे की बाहों के आगोश में मैने बड़े प्यार से रिंकी से कहा-‘तुम सचमुच ही मुझे बहुत ही आनंद देती हो। तेरी मम्मी तो मुझे पसन्द ही नहीं करती है। वह कहती है कि तुम तीन-तीन दिन तक दाढ़ी ही नहीं बनाते हो। तुम्हे किश कौन करेगा। तुम्हारी दाढ़ी कांटों की तरह मेरे गालों पर चुभती है।

रिंकी, दाढ़ी तो मेरी आज भी बढ़ी हुई है। क्या तुम भी मेरी दाढ़ी से परहेज करती हो?’

पापा के यह कहते ही रिंकी हंसने लगी-‘डार्लिंग यही तो, मम्मी औरत है या कोई मोम की गुड़िया…? भला पुरुष की दाढ़ी की चुभन भी कहीं स्त्री को पीड़ा पहुँचाती है! स्त्री को पीड़ा तो तब पहुंचती है, जब पुरुष बीच में ही साथ छोड़ जाता है।

पापा क्या तुम्हें नहीं पता, सैक्स में नोंच-खरोच का कितना महत्व है? दाढ़ी नोंच-खरोच का ही तो काम करती है। ईश्वर ने कुछ सोच-समझकर ही पुरुष को दाढ़ी दी है। सच तो यह है कि मैं तुम्हें तुम्हारी दाढ़ी से ही पसन्द करती हूं। यह कहते-कहते रिंकी ने मुझ को बाहों में समेट लिया और अपने चिकने और मुलायम गाल मेरे दाढ़ीदार गाल पर रखकर रगड़ने लगी।

यह मेरे लिए एक नया ही अनुभव था। मैं आश्चर्यचकित होकर सोच रहा था रिंकी मुझे यानि पापा को इसलिए पसन्द करती है, क्योंकि उसे पुरुष की दाढ़ी की चुभन अच्छी लगती है और इसकी मम्मी को मेरे चिकने गाल पसंद हैं। ये दोनों स्त्रियां ही हैं, लेकिन इन की पसन्द अलग-अलग है।

शायद यही वजह है कि स्त्री-पुरुष अपने जीवन साथी को छोड़कर कहीं बहक जाते हैं। बहक क्या जाते हैं, अपने मनपसंद किसी सुयोग्य साथी की तलाश कर लेते हैं। मैं भी तो एक मर्द ही हूं। क्या मेरी पसन्द अपने विचारों के अनुकूल स्त्री की नहीं है? क्या अपनी पसन्द की चीज को ढूंढना या पाना गलत है? नहीं, हम बाप बेटी बहके या भटके नहीं हैं, हमने तो अपनी-अपनी पसंद को हासिल किया है।


जारी है..... ✍🏻
Nice update 🙏
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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अध्याय - 26 --- " पाप का अंत "

मेरी सास ने अबकी बार फिर से अपनी बेटी कुसुम को कुछ नहीं बताया कि उसका पति और बेटी क्या गुल खिला रही है । शायद बता देती तो कुछ बच जाता ।

एक समय था जब कुसुम मेरी जिंदगी थी और आज रिंकी के आकर्षण ने मुझे इस कदर अपनी गिरफ्त में ले लिया था. कि कब उस का मैसेज आए और मेरी धड़कनों को बहकने का मौका मिले. जरूरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो…! रोज मेरी सुबह की शुरुआत उस के एक प्यारे से मैसेज से होती. कभी कभी वह बहुत अजीब से मैसेज भेजती.

कभी उस ने एक खूबसूरत सी शायरी सुनाई. हसीं जज्बातों से लबरेज उसकी शायरी का जवाब मै शायरी से ही देने लगा. सालों पहले मैं शायरी लिखा करता था. रिंकी की वजह से आज फिर से मेरा यह पैशन जिंदा हो गया था. देर तक हम दोनों बातें करते रहे. ऐसा लगा जैसे मेरा मन बिलकुल हलका हो गया हो. रिंकी की बातें मेरे मन को छूने लगी थीं. वह बड़े बिंदास अंदाज में बातें करती. समय के साथ मेरी जिंदगी में रिंकी का हस्तक्षेप बढ़ता ही चला जा रहा था., इधर कुसुम अपने पत्नी धर्म का पालन करते हुए नौकरी के साथ साथ अपने सास ससुर और पति की सेवा में दिन रात एक किए हुए थी ना वो दिन देखती ना वो रात देखती ।

एक महीने बाद....... रिंकी अपने कॉलेज गयी थी श्रुति की नज़र जब उस पर पड़ी तो वो सवाल भरी नज़रो से उसे देखने लगी......!

क्या बात है रिंकी तेरे चेहरे पर निखार कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है......लगता है पापा की क्रीम चेहरे पर ज्यादा लगाई जा रही है.......??

श्रुति की बातों को सुनकर रिंकी का चेहरा शरम से लाल पड़ गया उसने अपना चेहरा तुरंत नीचे झुका लिया और श्रुति उसके चेहरे की ओर देखकर मुस्कुराती रही..


मैने सही कहा ना रिंकी . तू इतने दिनों से अपने प्रोफेसर पापा के साथ स्पेशल क्लास ले रही थी, वैसे इसमें छुपाने वाली कौन सी बात है.......जवान तू भी है और मैं भी......जब मैं भी अपने बॉयफ्रेंड की क्रीम मुह पर लगाती हू तब मेरे चेहरे की रोनक तेरी जैसी हो जाती हैं. इसलिए मैने अंदाज़ा लगाया कि तू भी इतने दिनों से..........??

प्लीज़ स्टॉप श्रुति. मुझे शरम आती है तुझे इन सब के अलावा और कोई बात नहीं सूझती क्या.......चल अब लेक्चर शुरू होने वाला है....श्रुति भी आगे कुछ नहीं कहती और दोनो अपने क्लास की ओर चल पड़ते है.......!

आज रिंकी अपने लेक्चर्स पर भी ध्यान दे रही थी.....कल तक उसे सारे पीरियड्स बोर करते थे मगर आज सारे लेक्चर्स उसे अच्छे लग रहें थे, दोपहर तक वक़्त बहुत जल्दी कट गया उसे भूख लगी थी तो रिंकी, श्रुति को वही बैठा छोड़ और एक और सहेली थी उसके साथ कॅंटीन की ओर निकल पड़ी........!

बाहर कई सारे लड़के रिंकी को घूर रहें थे जैसे ही वो आगे बढ़ी तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया.. उसका हाथ इस तरह पकड़ने से उसकी साँसें एक पल के लिए मानो रुक सी गयी... उसके जिस्म में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि पलटकर उसकी तरफ देखे की किसकी इतनी जुर्रत हुई ये हरकत करने की... कुछ सोचकर खामोश रही फिर अपनी गर्देन घूमकर उस सक्श को देखने लगी.. उसका हाथ पकड़ने वाला सक्श उसकी सहेली श्रुति का बॉय फ्रेंड सोमेश था ........ शकल से शायद रिंकी उसे अच्छे से जानती थी........वो रिंकी की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था......!


बहुत मुश्किल से अपने जज्बातो को संभालते हुए बोली- रिंकी बोली छोड़ो मेरा हाथ......??

वो उसे देखकर हसे जा रहा था ..... तुम श्रुति के बॉयफ्रेंड सोमेश् हो! रिंकी के इस तरह कहने पर उसने अपने हाथों पर दबाव और ज़ोरों से बढ़ा दिया...!

सही कहा तुमने मैं तेरी सहेली का बॉय फ्रेंड हूँ.......मगर क्या करूँ मैने तो उससे दोस्ती सिर्फ़ इसलिए की थी कि मैं उसके ज़रिए तुझे हासिल कर सकूँ....मगर एक तू है कि मेरी तरफ देखती भी नहीं........क्या कमी है मुझ में.....कॉलेज की कई लड़कियाँ मुझपर मरती है मगर मैं तुझ पर मरता हूँ......? लेकिन जब श्रुति ने बताया " तू अपने बाप से मरवाती (चुदवाती) है " तब मेरे सब्र की सीमा टूट गयी तब मुझे ऐसा करना पड़ा.......!

रिंकी अपनी आँखें फाडे उसके चेहरे की ओर देखती रही उसका दिमाग़ काम करना लगभग बंद कर चुका था......सारे लोग उसे ही देख रहें थे, जिस्म डर से थर थर कांप रहा था. उसके साथ आई सहेली भी अपनी आँखें फाडे उसे तो कभी सोमेश को घूर रही थी वो बेचारी क्या कहती उसने फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे झुका ली.....!

चुप क्यों हो रिंकी कुछ तो बोलो....

जस्ट शटअप.........प्लीज़ तुम अभी यहाँ से चले जाओ......मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ......मेरा और तमाशा यहाँ मत बनाओ.

देखो रिंकी मुझे पता तुम्हे अपने पापा के 'बड़े केले' को लेने का शौक है, उनके साथ जो करना है वो बिंदास करो मुझे कोई issue नही है, लेकिन एक बार मेरे 'छोटे पप्पू' को भी मौका दो. उसने अपने पेंट की जिप की तरफ इशारा करते हुए कहा.

अभी सोमेश की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि किसी ने उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा. जब उसकी नज़र सामने खड़ी लड़की पर पड़ी तो सोमेश के साथ साथ रिंकी की आँखें भी हैरत से फैलती चली गयी........ उसके सामने श्रुति खड़ी थी. इस वक़्त वो बहुत गुस्से में दिखाई दे रही थी शायद किसी ने उसे इस बात की खबर कर दी थी......!

श्रुति को सामने देख सोमेश चुपचाप वहा से निकल गया... श्रुति ने रिंकी की तरफ देखा उसकी आँखो मे आसु थे, श्रुति ने उससे माफी मांगते हुए उसके कंधे पर हाथ रखा ही था कि रिंकी ने उसका हाथ छिटक दिया और एक जोरदार चांटा श्रुति के गाल पर जड़ दिया. Don't say me sorry श्रुति..... कह कर रिंकी कॉलेज से सीधा घर आ गयी.

आज जो कॉलेज में हुआ वो नही होना चाहिए था, भले ही इस मामले में पूरी गलती श्रुति के प्रेमी की थी. लेकिन श्रुति ने जब रिंकी को सोर्री बोला तो रिंकी को उसे चांटा नही मारना चाइये था....?

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन श्रुति ने इसे अपनी तौहीन समझी, उसकी अन्य सहेलियों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब सहेलियों ने इसे श्रुति की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि जल्द से जल्द श्रुति को इस थप्पड़ का बदला रिंकी से लेना चाहिए.


इधर घर आकर रिंकी ने अपने फोन मे सारे सहेलियों और दोस्तों के no ब्लॉक कर दिये. और उसने घर से निकलना पूरी तरह बंद कर दिया. मेरे मेसेज और काल के reply आना बंद हो गया. दो तीन दिन तक रिंकी के मैसेज काल के इन्तजार करने के बाद मुझे उम्मीद थी शायद मेरी माँ को रिंकी की कुछ फोन पर बातचीत होती हो. लेकिन नही, रिंकी के बारे में उन्हें कुछ भी नही पता था.

उस रात कमरे के अंधेरे में अपने बेड के कोने पर बैठा मैं पिछले दो तीन दिनो के बारे में सोच रहा था. कितना कुछ बदल गया था दो तीन दिनो मैं. बड़ी मुश्किल से इतनी मेहनत करने के बाद अच्छे दिनो के आसार बने थे, लगता था अब हम बेहतर ज़िंदगी जी सकेंगे. अपनी लाडो रिंकी संग कैसे कैसे सपने देखे थे, कैसी कैसी योजनाएँ बनाई थी, भविष्य कितना सुखद लगने लगा था. और फिर एक ही झटके में सब सपने टूट गये, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया, जैसे किसी ने आसमान से ज़मीन पर पटक दिया था. जिसके लिए मै सब कुछ कर रहा था वो ही खामोश हो गयी थी.

आँखे लगातार रोने और जागने से लाल हो गयी थी, दिमाग़ में तूफान चल रहा था, जिस्म थक कर चूर हो चुका था मगर नींद का कोई नामो निशान नही था. फिर मेने फैसला किया कल मै अपनी ससुराल जाकर रिंकी से फेस टू फेस बात करूँगा आखिर मुझसे इस तरह उसके रूठने की वजह क्या है ??????

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अगले दिन सुबह नौकरी पर ना जाते हुए मै सीधा अपनी ससुराल चला गया. घर का दरवाजा अंदर से बंद था. मैने बड़े आहिस्ते से कुंडी खटखटाई.....रिंकी ने दरवाजे की दरार से ही झांक लिया था कि बाहर पापा खड़े है, अगले पल ही अपनी दोनों हथेलियों से उसने आंखें ढक ली और मन ही मन सोचने भी लगी-‘यह कैसी आग है, जो स्त्री को पुरुष-दर-पुरुष और पुरुष को स्त्री-दर-स्त्री भटकने पर मजबूर कर देती है।
यह जानने की कोशिश करते-करते पसीने से तरबतर हो गई।

उसके स्तनों से फूट आये पसीने ने उसकी समीज को भिगो दिया उसके हाथ अनायास ही जांघों पर चले गये। चड्डी भी पसीने से भीग गई थी। ऐसा लगा, उसके भीतर भी कुछ-कुछ हो रहा है। उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान हो गया था। वो वहां से सीधे अपने कदम बढ़ाते हुए दरवाजे पर चली आई। और उसने दरवाजा खोला.

मैं इतनी देर से कुंडी बजा रहा हूं, इतनी देर लगती हैं दरवाजा खोलने मे’’

बोलते बोलते मेरी नजर जब रिंकी की समीज पर पड़ी, तो शायद उस समय वो नहा रही थी और यही वजह थी कि उस ने उस समय समीज के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था. जिस्म पर चिपके हुए गीले सफेद पारदर्शी कपड़े मे उसके चूचे ने उस समय मुझको मदहोश कर दिया. मै फटी आंखों से रिंकी को देखता ही रह गया.

रिंकी ने बनावटी गुस्से से कहा, ‘‘इस तरह क्या देख रहे हो? बड़े बेशर्म हो आप.

लगता हैं मेरे यहा आने से तुम्हे खुशी नही हुयी रिंकी....??? मैने प्रशन वाचक निगाहों से उससे पूछा.


देखो पापा अभी घर में कोई नही है आप चले जाओ, किसी ने अगर आपको यहां आते देख लिया होगा, तो बेवजह हम दोनों की बदनामी होगी.

मुझे यहा आते किसी ने नही देखा, दूसरी बात मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ. कहते हुए मै अंदर आ गया.

उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

मैंने मन में सोचा कि रिंकी और मैं अकेले घर पर हैं, ये मौका पर चौका वाला समय इसको सवाल जबाब में बर्बाद नही करना चाहिए.

मै उसकी ओर बढ़ा और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मुझसे फिर कहा- पापा प्लीज चले जाओ, कोई आ जायेगा...??

मै हस्ते हुये बोला- अगर जिसको आना होता तो वो जाता ही क्यों...!

उसने अपनी आंखें नीचे झुका लीं. मेरी बात सही थी. रिंकी भी मन ही मन मेरे नीचे आने को तरस रही थी.

मैने उसका हाथ फिर से पकड़ा, उसने अपना हाथ मेरी पकड़ से छुड़ाना चाहा.
लेकिन मेरे हाथों की पकड़ इतनी ज्यादा सख्त थी कि वो अपने आपको मेरी पकड़ से नहीं छुड़ा पा रही थी.

अब मैने उसे आगन में ही धक्का देकर दीवार से सटा दिया. और सामने आकर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूसने लगा.

मेरा चूसने का तरीका इतना ज्यादा मादक था कि वो पानी पानी हो रही थी. फिर भी वो दिखाने के लिए मुझसे बोले जा रही थी- छोड़ो पापा छोड़ो …

कुछ ही पलों में उसने मेरे होंठों को काटना आरम्भ कर दिया. यहां तक कि मेरे मुँह से आ रही सिग्रेट की महक भी उसे अब अच्छी लगने लगी थी.

मै अपने काम में लगा रहा और उसने मेरे गले पर, सीने में, किस करना शुरू कर दिया. दो मिनट किस करने के बाद वह मुझसे दूर हो गयी और मैं उसकी आंखों में देखने लगा.

मैने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया. वो चुपचाप मुझे देख रही थी.

मैने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी. जल्दी ही मैने अपनी शर्ट निकाल फेंकी. वो मेरी मर्दानगी भरे सीने को देखकर उस पर निहाल हो गई. वो मेरी आंखों में देख रही थी. मै भी उसकी आंखों में एकटक देख रहा था.

कुछ समय बाद मै उसके करीब आया और उसे अपने सीने से चिपका लिया. वो मेरी गर्दन पर फिर से किस करने लगी.

इस बार मैने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और उसकी कमर को सहलाता हुआ उसकी बढ़ती धड़कनों को सुनने लगा.
धीरे धीरे मै अपना एक हाथ उसके बालों के जूड़े तक ले गया और उसे भी खोल दिया.

उसके बाल खुल कर बिखर चुके थे और मै उसके बालों से खेलने लगा. फिर मैने पीछे अपने हाथ ले गया और उसकी दोनों आस्तीनों से उसकी समीज को निकाल कर अलग कर दिया.

अब वो मेरे सामने ऊपर से नग्न अवस्था में थी.

उसने मुझे धक्का देकर दूर किया और अपने हाथों से अपने स्तन छुपाते हुए बेडरूम की ओर जाने लगी. मै मदमस्त सांड की तरह लार् टपकाते हुए उसका पीछा कर रहा था.

वो बेडरूम के पास जाकर रुक गई और पलट कर मेरी तरफ देखा; मुझे आंखों ही आंखों में बेडरूम में आने का न्यौता सा दे दिया.

फिर से वो आगे बढ़ने लगी. बेड के पास जाकर खड़ी हो गई.

मै उसके पीछे पीछे आ गया और पीछे से हाथ डालते हुए उसके पेट को सहलाने लगा. दूसरे हाथ को उसके सीने पर हाथ रखते हुए मम्मों को हल्का हल्का दबाने लगा.

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. बेड के दूसरे तरफ लगे आईने में मैं देख रहा था. मैने आगे से उसकी सलवार के नाड़े को अन्दर हाथ डाल कर खींचा और सलवार एक ही क्षण में जमीन पर गिर गई.

मैंने उसकी तरफ घूम कर देखा. उसकी आंखों में हवस का नशा था. मुझे लग रहा था कि मै जल्दी से उसे बेड पर लेटा दु और अपना काम चालू कर दू. मेरे लिए खुद को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

हम दोनों बिस्तर पर निवर्स्त्र थे मै बैठकर उसके पूरे शरीर को देख रहा था. उसके मम्मों पर, कमर पर, चेहरे पर हाथ फेरते हुए मैने उसे मदहोश कर दिया था.

मै उसके पूरे जिस्म को चूमे जा रहा था.
चूमते हुए मै उसके मम्मों पर भी आ चुका था और मम्मों को जोर जोर से चूसने लगा.
वो मेरे सिर पर हाथ रखकर अपने मम्मों पर उसे दबाने लगी थी. इसलिए मै मम्मों को दांतों से दबाने काटने भी लगा था. उसे मीठा दर्द होने लगा था लेकिन मेरा साथ पूरी तरह से दे रही थी. और मै उसे मछली जैसे तड़पा रहा था.


कुछ देर बाद मैने उठकर उसके चेहरे पर हाथ रखा और जल्द ही उसका हाथ पकड़कर उसे डॉगी पोजिशन मे घुमा दिया.
उसके बालों को एक साथ करके पकड़ा और खींचते हुए बोला- मेरी जान, मैंने तीन दिनो से इस समय के लिए इंतजार किया है.

रिंकी की चूत तो पहले से ही गीली हो चुकी थी और फिर मुझे पता ही ना चला कब हम दोनों आपस में दो जिस्म एक जान हो गए.

बाप बेटी की वासना की आग जब शांत हुयी तो नंगे बदन एक दूसरे की बाहों के आगोश में मैने बड़े प्यार से रिंकी से कहा-‘तुम सचमुच ही मुझे बहुत ही आनंद देती हो। तेरी मम्मी तो मुझे पसन्द ही नहीं करती है। वह कहती है कि तुम तीन-तीन दिन तक दाढ़ी ही नहीं बनाते हो। तुम्हे किश कौन करेगा। तुम्हारी दाढ़ी कांटों की तरह मेरे गालों पर चुभती है।

रिंकी, दाढ़ी तो मेरी आज भी बढ़ी हुई है। क्या तुम भी मेरी दाढ़ी से परहेज करती हो?’

पापा के यह कहते ही रिंकी हंसने लगी-‘डार्लिंग यही तो, मम्मी औरत है या कोई मोम की गुड़िया…? भला पुरुष की दाढ़ी की चुभन भी कहीं स्त्री को पीड़ा पहुँचाती है! स्त्री को पीड़ा तो तब पहुंचती है, जब पुरुष बीच में ही साथ छोड़ जाता है।

पापा क्या तुम्हें नहीं पता, सैक्स में नोंच-खरोच का कितना महत्व है? दाढ़ी नोंच-खरोच का ही तो काम करती है। ईश्वर ने कुछ सोच-समझकर ही पुरुष को दाढ़ी दी है। सच तो यह है कि मैं तुम्हें तुम्हारी दाढ़ी से ही पसन्द करती हूं। यह कहते-कहते रिंकी ने मुझ को बाहों में समेट लिया और अपने चिकने और मुलायम गाल मेरे दाढ़ीदार गाल पर रखकर रगड़ने लगी।

यह मेरे लिए एक नया ही अनुभव था। मैं आश्चर्यचकित होकर सोच रहा था रिंकी मुझे यानि पापा को इसलिए पसन्द करती है, क्योंकि उसे पुरुष की दाढ़ी की चुभन अच्छी लगती है और इसकी मम्मी को मेरे चिकने गाल पसंद हैं। ये दोनों स्त्रियां ही हैं, लेकिन इन की पसन्द अलग-अलग है।

शायद यही वजह है कि स्त्री-पुरुष अपने जीवन साथी को छोड़कर कहीं बहक जाते हैं। बहक क्या जाते हैं, अपने मनपसंद किसी सुयोग्य साथी की तलाश कर लेते हैं। मैं भी तो एक मर्द ही हूं। क्या मेरी पसन्द अपने विचारों के अनुकूल स्त्री की नहीं है? क्या अपनी पसन्द की चीज को ढूंढना या पाना गलत है? नहीं, हम बाप बेटी बहके या भटके नहीं हैं, हमने तो अपनी-अपनी पसंद को हासिल किया है।


जारी है..... ✍🏻
Awesome update manu👍 rinky ka raaj sab doosto k samne khul gaya jo ki sach me bohot bura hua, udhar arun hai jo apni aadat se laachaar ho rakha hai, ye rinki ki chudaas hi hai jo itna sab hone k baad bhi us se door nahi reh paai :nope: Dekhte hai aage kya hota hai👍 waise bhi professor ka ghar tootne wala hi hai:declare:
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Kuresa Begam

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अध्याय - 26 --- " पाप का अंत "

मेरी सास ने अबकी बार फिर से अपनी बेटी कुसुम को कुछ नहीं बताया कि उसका पति और बेटी क्या गुल खिला रही है । शायद बता देती तो कुछ बच जाता ।

एक समय था जब कुसुम मेरी जिंदगी थी और आज रिंकी के आकर्षण ने मुझे इस कदर अपनी गिरफ्त में ले लिया था. कि कब उस का मैसेज आए और मेरी धड़कनों को बहकने का मौका मिले. जरूरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो…! रोज मेरी सुबह की शुरुआत उस के एक प्यारे से मैसेज से होती. कभी कभी वह बहुत अजीब से मैसेज भेजती.

कभी उस ने एक खूबसूरत सी शायरी सुनाई. हसीं जज्बातों से लबरेज उसकी शायरी का जवाब मै शायरी से ही देने लगा. सालों पहले मैं शायरी लिखा करता था. रिंकी की वजह से आज फिर से मेरा यह पैशन जिंदा हो गया था. देर तक हम दोनों बातें करते रहे. ऐसा लगा जैसे मेरा मन बिलकुल हलका हो गया हो. रिंकी की बातें मेरे मन को छूने लगी थीं. वह बड़े बिंदास अंदाज में बातें करती. समय के साथ मेरी जिंदगी में रिंकी का हस्तक्षेप बढ़ता ही चला जा रहा था., इधर कुसुम अपने पत्नी धर्म का पालन करते हुए नौकरी के साथ साथ अपने सास ससुर और पति की सेवा में दिन रात एक किए हुए थी ना वो दिन देखती ना वो रात देखती ।

एक महीने बाद....... रिंकी अपने कॉलेज गयी थी श्रुति की नज़र जब उस पर पड़ी तो वो सवाल भरी नज़रो से उसे देखने लगी......!

क्या बात है रिंकी तेरे चेहरे पर निखार कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है......लगता है पापा की क्रीम चेहरे पर ज्यादा लगाई जा रही है.......??

श्रुति की बातों को सुनकर रिंकी का चेहरा शरम से लाल पड़ गया उसने अपना चेहरा तुरंत नीचे झुका लिया और श्रुति उसके चेहरे की ओर देखकर मुस्कुराती रही..


मैने सही कहा ना रिंकी . तू इतने दिनों से अपने प्रोफेसर पापा के साथ स्पेशल क्लास ले रही थी, वैसे इसमें छुपाने वाली कौन सी बात है.......जवान तू भी है और मैं भी......जब मैं भी अपने बॉयफ्रेंड की क्रीम मुह पर लगाती हू तब मेरे चेहरे की रोनक तेरी जैसी हो जाती हैं. इसलिए मैने अंदाज़ा लगाया कि तू भी इतने दिनों से..........??

प्लीज़ स्टॉप श्रुति. मुझे शरम आती है तुझे इन सब के अलावा और कोई बात नहीं सूझती क्या.......चल अब लेक्चर शुरू होने वाला है....श्रुति भी आगे कुछ नहीं कहती और दोनो अपने क्लास की ओर चल पड़ते है.......!

आज रिंकी अपने लेक्चर्स पर भी ध्यान दे रही थी.....कल तक उसे सारे पीरियड्स बोर करते थे मगर आज सारे लेक्चर्स उसे अच्छे लग रहें थे, दोपहर तक वक़्त बहुत जल्दी कट गया उसे भूख लगी थी तो रिंकी, श्रुति को वही बैठा छोड़ और एक और सहेली थी उसके साथ कॅंटीन की ओर निकल पड़ी........!

बाहर कई सारे लड़के रिंकी को घूर रहें थे जैसे ही वो आगे बढ़ी तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया.. उसका हाथ इस तरह पकड़ने से उसकी साँसें एक पल के लिए मानो रुक सी गयी... उसके जिस्म में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि पलटकर उसकी तरफ देखे की किसकी इतनी जुर्रत हुई ये हरकत करने की... कुछ सोचकर खामोश रही फिर अपनी गर्देन घूमकर उस सक्श को देखने लगी.. उसका हाथ पकड़ने वाला सक्श उसकी सहेली श्रुति का बॉय फ्रेंड सोमेश था ........ शकल से शायद रिंकी उसे अच्छे से जानती थी........वो रिंकी की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था......!


बहुत मुश्किल से अपने जज्बातो को संभालते हुए बोली- रिंकी बोली छोड़ो मेरा हाथ......??

वो उसे देखकर हसे जा रहा था ..... तुम श्रुति के बॉयफ्रेंड सोमेश् हो! रिंकी के इस तरह कहने पर उसने अपने हाथों पर दबाव और ज़ोरों से बढ़ा दिया...!

सही कहा तुमने मैं तेरी सहेली का बॉय फ्रेंड हूँ.......मगर क्या करूँ मैने तो उससे दोस्ती सिर्फ़ इसलिए की थी कि मैं उसके ज़रिए तुझे हासिल कर सकूँ....मगर एक तू है कि मेरी तरफ देखती भी नहीं........क्या कमी है मुझ में.....कॉलेज की कई लड़कियाँ मुझपर मरती है मगर मैं तुझ पर मरता हूँ......? लेकिन जब श्रुति ने बताया " तू अपने बाप से मरवाती (चुदवाती) है " तब मेरे सब्र की सीमा टूट गयी तब मुझे ऐसा करना पड़ा.......!

रिंकी अपनी आँखें फाडे उसके चेहरे की ओर देखती रही उसका दिमाग़ काम करना लगभग बंद कर चुका था......सारे लोग उसे ही देख रहें थे, जिस्म डर से थर थर कांप रहा था. उसके साथ आई सहेली भी अपनी आँखें फाडे उसे तो कभी सोमेश को घूर रही थी वो बेचारी क्या कहती उसने फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे झुका ली.....!

चुप क्यों हो रिंकी कुछ तो बोलो....

जस्ट शटअप.........प्लीज़ तुम अभी यहाँ से चले जाओ......मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ......मेरा और तमाशा यहाँ मत बनाओ.

देखो रिंकी मुझे पता तुम्हे अपने पापा के 'बड़े केले' को लेने का शौक है, उनके साथ जो करना है वो बिंदास करो मुझे कोई issue नही है, लेकिन एक बार मेरे 'छोटे पप्पू' को भी मौका दो. उसने अपने पेंट की जिप की तरफ इशारा करते हुए कहा.

अभी सोमेश की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि किसी ने उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा. जब उसकी नज़र सामने खड़ी लड़की पर पड़ी तो सोमेश के साथ साथ रिंकी की आँखें भी हैरत से फैलती चली गयी........ उसके सामने श्रुति खड़ी थी. इस वक़्त वो बहुत गुस्से में दिखाई दे रही थी शायद किसी ने उसे इस बात की खबर कर दी थी......!

श्रुति को सामने देख सोमेश चुपचाप वहा से निकल गया... श्रुति ने रिंकी की तरफ देखा उसकी आँखो मे आसु थे, श्रुति ने उससे माफी मांगते हुए उसके कंधे पर हाथ रखा ही था कि रिंकी ने उसका हाथ छिटक दिया और एक जोरदार चांटा श्रुति के गाल पर जड़ दिया. Don't say me sorry श्रुति..... कह कर रिंकी कॉलेज से सीधा घर आ गयी.

आज जो कॉलेज में हुआ वो नही होना चाहिए था, भले ही इस मामले में पूरी गलती श्रुति के प्रेमी की थी. लेकिन श्रुति ने जब रिंकी को सोर्री बोला तो रिंकी को उसे चांटा नही मारना चाइये था....?

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन श्रुति ने इसे अपनी तौहीन समझी, उसकी अन्य सहेलियों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब सहेलियों ने इसे श्रुति की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि जल्द से जल्द श्रुति को इस थप्पड़ का बदला रिंकी से लेना चाहिए.


इधर घर आकर रिंकी ने अपने फोन मे सारे सहेलियों और दोस्तों के no ब्लॉक कर दिये. और उसने घर से निकलना पूरी तरह बंद कर दिया. मेरे मेसेज और काल के reply आना बंद हो गया. दो तीन दिन तक रिंकी के मैसेज काल के इन्तजार करने के बाद मुझे उम्मीद थी शायद मेरी माँ को रिंकी की कुछ फोन पर बातचीत होती हो. लेकिन नही, रिंकी के बारे में उन्हें कुछ भी नही पता था.

उस रात कमरे के अंधेरे में अपने बेड के कोने पर बैठा मैं पिछले दो तीन दिनो के बारे में सोच रहा था. कितना कुछ बदल गया था दो तीन दिनो मैं. बड़ी मुश्किल से इतनी मेहनत करने के बाद अच्छे दिनो के आसार बने थे, लगता था अब हम बेहतर ज़िंदगी जी सकेंगे. अपनी लाडो रिंकी संग कैसे कैसे सपने देखे थे, कैसी कैसी योजनाएँ बनाई थी, भविष्य कितना सुखद लगने लगा था. और फिर एक ही झटके में सब सपने टूट गये, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया, जैसे किसी ने आसमान से ज़मीन पर पटक दिया था. जिसके लिए मै सब कुछ कर रहा था वो ही खामोश हो गयी थी.

आँखे लगातार रोने और जागने से लाल हो गयी थी, दिमाग़ में तूफान चल रहा था, जिस्म थक कर चूर हो चुका था मगर नींद का कोई नामो निशान नही था. फिर मेने फैसला किया कल मै अपनी ससुराल जाकर रिंकी से फेस टू फेस बात करूँगा आखिर मुझसे इस तरह उसके रूठने की वजह क्या है ??????

******

अगले दिन सुबह नौकरी पर ना जाते हुए मै सीधा अपनी ससुराल चला गया. घर का दरवाजा अंदर से बंद था. मैने बड़े आहिस्ते से कुंडी खटखटाई.....रिंकी ने दरवाजे की दरार से ही झांक लिया था कि बाहर पापा खड़े है, अगले पल ही अपनी दोनों हथेलियों से उसने आंखें ढक ली और मन ही मन सोचने भी लगी-‘यह कैसी आग है, जो स्त्री को पुरुष-दर-पुरुष और पुरुष को स्त्री-दर-स्त्री भटकने पर मजबूर कर देती है।
यह जानने की कोशिश करते-करते पसीने से तरबतर हो गई।

उसके स्तनों से फूट आये पसीने ने उसकी समीज को भिगो दिया उसके हाथ अनायास ही जांघों पर चले गये। चड्डी भी पसीने से भीग गई थी। ऐसा लगा, उसके भीतर भी कुछ-कुछ हो रहा है। उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान हो गया था। वो वहां से सीधे अपने कदम बढ़ाते हुए दरवाजे पर चली आई। और उसने दरवाजा खोला.

मैं इतनी देर से कुंडी बजा रहा हूं, इतनी देर लगती हैं दरवाजा खोलने मे’’

बोलते बोलते मेरी नजर जब रिंकी की समीज पर पड़ी, तो शायद उस समय वो नहा रही थी और यही वजह थी कि उस ने उस समय समीज के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था. जिस्म पर चिपके हुए गीले सफेद पारदर्शी कपड़े मे उसके चूचे ने उस समय मुझको मदहोश कर दिया. मै फटी आंखों से रिंकी को देखता ही रह गया.

रिंकी ने बनावटी गुस्से से कहा, ‘‘इस तरह क्या देख रहे हो? बड़े बेशर्म हो आप.

लगता हैं मेरे यहा आने से तुम्हे खुशी नही हुयी रिंकी....??? मैने प्रशन वाचक निगाहों से उससे पूछा.


देखो पापा अभी घर में कोई नही है आप चले जाओ, किसी ने अगर आपको यहां आते देख लिया होगा, तो बेवजह हम दोनों की बदनामी होगी.

मुझे यहा आते किसी ने नही देखा, दूसरी बात मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ. कहते हुए मै अंदर आ गया.

उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

मैंने मन में सोचा कि रिंकी और मैं अकेले घर पर हैं, ये मौका पर चौका वाला समय इसको सवाल जबाब में बर्बाद नही करना चाहिए.

मै उसकी ओर बढ़ा और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मुझसे फिर कहा- पापा प्लीज चले जाओ, कोई आ जायेगा...??

मै हस्ते हुये बोला- अगर जिसको आना होता तो वो जाता ही क्यों...!

उसने अपनी आंखें नीचे झुका लीं. मेरी बात सही थी. रिंकी भी मन ही मन मेरे नीचे आने को तरस रही थी.

मैने उसका हाथ फिर से पकड़ा, उसने अपना हाथ मेरी पकड़ से छुड़ाना चाहा.
लेकिन मेरे हाथों की पकड़ इतनी ज्यादा सख्त थी कि वो अपने आपको मेरी पकड़ से नहीं छुड़ा पा रही थी.

अब मैने उसे आगन में ही धक्का देकर दीवार से सटा दिया. और सामने आकर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूसने लगा.

मेरा चूसने का तरीका इतना ज्यादा मादक था कि वो पानी पानी हो रही थी. फिर भी वो दिखाने के लिए मुझसे बोले जा रही थी- छोड़ो पापा छोड़ो …

कुछ ही पलों में उसने मेरे होंठों को काटना आरम्भ कर दिया. यहां तक कि मेरे मुँह से आ रही सिग्रेट की महक भी उसे अब अच्छी लगने लगी थी.

मै अपने काम में लगा रहा और उसने मेरे गले पर, सीने में, किस करना शुरू कर दिया. दो मिनट किस करने के बाद वह मुझसे दूर हो गयी और मैं उसकी आंखों में देखने लगा.

मैने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया. वो चुपचाप मुझे देख रही थी.

मैने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी. जल्दी ही मैने अपनी शर्ट निकाल फेंकी. वो मेरी मर्दानगी भरे सीने को देखकर उस पर निहाल हो गई. वो मेरी आंखों में देख रही थी. मै भी उसकी आंखों में एकटक देख रहा था.

कुछ समय बाद मै उसके करीब आया और उसे अपने सीने से चिपका लिया. वो मेरी गर्दन पर फिर से किस करने लगी.

इस बार मैने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और उसकी कमर को सहलाता हुआ उसकी बढ़ती धड़कनों को सुनने लगा.
धीरे धीरे मै अपना एक हाथ उसके बालों के जूड़े तक ले गया और उसे भी खोल दिया.

उसके बाल खुल कर बिखर चुके थे और मै उसके बालों से खेलने लगा. फिर मैने पीछे अपने हाथ ले गया और उसकी दोनों आस्तीनों से उसकी समीज को निकाल कर अलग कर दिया.

अब वो मेरे सामने ऊपर से नग्न अवस्था में थी.

उसने मुझे धक्का देकर दूर किया और अपने हाथों से अपने स्तन छुपाते हुए बेडरूम की ओर जाने लगी. मै मदमस्त सांड की तरह लार् टपकाते हुए उसका पीछा कर रहा था.

वो बेडरूम के पास जाकर रुक गई और पलट कर मेरी तरफ देखा; मुझे आंखों ही आंखों में बेडरूम में आने का न्यौता सा दे दिया.

फिर से वो आगे बढ़ने लगी. बेड के पास जाकर खड़ी हो गई.

मै उसके पीछे पीछे आ गया और पीछे से हाथ डालते हुए उसके पेट को सहलाने लगा. दूसरे हाथ को उसके सीने पर हाथ रखते हुए मम्मों को हल्का हल्का दबाने लगा.

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. बेड के दूसरे तरफ लगे आईने में मैं देख रहा था. मैने आगे से उसकी सलवार के नाड़े को अन्दर हाथ डाल कर खींचा और सलवार एक ही क्षण में जमीन पर गिर गई.

मैंने उसकी तरफ घूम कर देखा. उसकी आंखों में हवस का नशा था. मुझे लग रहा था कि मै जल्दी से उसे बेड पर लेटा दु और अपना काम चालू कर दू. मेरे लिए खुद को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

हम दोनों बिस्तर पर निवर्स्त्र थे मै बैठकर उसके पूरे शरीर को देख रहा था. उसके मम्मों पर, कमर पर, चेहरे पर हाथ फेरते हुए मैने उसे मदहोश कर दिया था.

मै उसके पूरे जिस्म को चूमे जा रहा था.
चूमते हुए मै उसके मम्मों पर भी आ चुका था और मम्मों को जोर जोर से चूसने लगा.
वो मेरे सिर पर हाथ रखकर अपने मम्मों पर उसे दबाने लगी थी. इसलिए मै मम्मों को दांतों से दबाने काटने भी लगा था. उसे मीठा दर्द होने लगा था लेकिन मेरा साथ पूरी तरह से दे रही थी. और मै उसे मछली जैसे तड़पा रहा था.


कुछ देर बाद मैने उठकर उसके चेहरे पर हाथ रखा और जल्द ही उसका हाथ पकड़कर उसे डॉगी पोजिशन मे घुमा दिया.
उसके बालों को एक साथ करके पकड़ा और खींचते हुए बोला- मेरी जान, मैंने तीन दिनो से इस समय के लिए इंतजार किया है.

रिंकी की चूत तो पहले से ही गीली हो चुकी थी और फिर मुझे पता ही ना चला कब हम दोनों आपस में दो जिस्म एक जान हो गए.

बाप बेटी की वासना की आग जब शांत हुयी तो नंगे बदन एक दूसरे की बाहों के आगोश में मैने बड़े प्यार से रिंकी से कहा-‘तुम सचमुच ही मुझे बहुत ही आनंद देती हो। तेरी मम्मी तो मुझे पसन्द ही नहीं करती है। वह कहती है कि तुम तीन-तीन दिन तक दाढ़ी ही नहीं बनाते हो। तुम्हे किश कौन करेगा। तुम्हारी दाढ़ी कांटों की तरह मेरे गालों पर चुभती है।

रिंकी, दाढ़ी तो मेरी आज भी बढ़ी हुई है। क्या तुम भी मेरी दाढ़ी से परहेज करती हो?’

पापा के यह कहते ही रिंकी हंसने लगी-‘डार्लिंग यही तो, मम्मी औरत है या कोई मोम की गुड़िया…? भला पुरुष की दाढ़ी की चुभन भी कहीं स्त्री को पीड़ा पहुँचाती है! स्त्री को पीड़ा तो तब पहुंचती है, जब पुरुष बीच में ही साथ छोड़ जाता है।

पापा क्या तुम्हें नहीं पता, सैक्स में नोंच-खरोच का कितना महत्व है? दाढ़ी नोंच-खरोच का ही तो काम करती है। ईश्वर ने कुछ सोच-समझकर ही पुरुष को दाढ़ी दी है। सच तो यह है कि मैं तुम्हें तुम्हारी दाढ़ी से ही पसन्द करती हूं। यह कहते-कहते रिंकी ने मुझ को बाहों में समेट लिया और अपने चिकने और मुलायम गाल मेरे दाढ़ीदार गाल पर रखकर रगड़ने लगी।

यह मेरे लिए एक नया ही अनुभव था। मैं आश्चर्यचकित होकर सोच रहा था रिंकी मुझे यानि पापा को इसलिए पसन्द करती है, क्योंकि उसे पुरुष की दाढ़ी की चुभन अच्छी लगती है और इसकी मम्मी को मेरे चिकने गाल पसंद हैं। ये दोनों स्त्रियां ही हैं, लेकिन इन की पसन्द अलग-अलग है।

शायद यही वजह है कि स्त्री-पुरुष अपने जीवन साथी को छोड़कर कहीं बहक जाते हैं। बहक क्या जाते हैं, अपने मनपसंद किसी सुयोग्य साथी की तलाश कर लेते हैं। मैं भी तो एक मर्द ही हूं। क्या मेरी पसन्द अपने विचारों के अनुकूल स्त्री की नहीं है? क्या अपनी पसन्द की चीज को ढूंढना या पाना गलत है? नहीं, हम बाप बेटी बहके या भटके नहीं हैं, हमने तो अपनी-अपनी पसंद को हासिल किया है।


जारी है..... ✍🏻
Nice update professor ji ☺️
Agle update ka intezaar hai sir ji
 
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manu@84

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Zabardast update....bechari kusum ki bhi setting kardo bhai
Thanks bro.

KUSUM kee setting karwaana aasaan nhi hai, bahut khatarnaak hai kaan me baali or muh mein gaali hamesha reddy rahti hai😁😁😁
 

manu@84

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Nice update
Yeah kya school main sabko pata lag gya too bad for rinki .
Thanks bhaai, rinki ne khud hi apni pap ki lanka mein aag lagaayi hai to भुगतना तो पड़ेगा 😁
 

manu@84

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Awesome update manu👍 rinky ka raaj sab doosto k samne khul gaya jo ki sach me bohot bura hua, udhar arun hai jo apni aadat se laachaar ho rakha hai, ye rinki ki chudaas hi hai jo itna sab hone k baad bhi us se door nahi reh paai :nope: Dekhte hai aage kya hota hai👍 waise bhi professor ka ghar tootne wala hi hai:declare:
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सच्चाई छिप नही सकती बनावट के उसूलों से,
खुशबु आ नही सकती कागज के फूलों से.....

बाप बेटी ने मिलकर जो कुकर्म किये है, उनका दंड तो भुगतना पड़ेगा.
 
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