| Position | Benifits |
|---|---|
| Winner | 4000 Rupees + Award + 5000 Likes + 30 days sticky Thread (Stories) |
| 1st Runner-Up | 1500 Rupees + Award + 3500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories) |
| 2nd Runner-UP | 1000 Rupees + 2000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) |
| 3rd Runner-UP | 750 Rupees + 1000 Likes |
| Best Supporting Reader | 750 Rupees + Award + 1000 Likes |
| Members reporting CnP Stories with Valid Proof | 200 Likes for each report |
Nice story. Almost all boys go through this experience during their teenage days.UPDATE-1
नौवीं कक्षा में आते ही मेरे मन में लड़कियों के प्रति यौन आकर्षण होने लगा। मैं हर समय लड़कियों और सेक्स के बारे में सोचने लगा। मैंने वो सभी चीजें करना शुरू कर दिया जो एक नौंवी-दसवीं का लड़का यौन जिज्ञासा पूरी करने के लिए करता है।
लड़कियों और महिलाओं को छुप-छुप कर देखना, उनके गुप्त अंगों को देखने की कोशिश करना, उनके कपड़ों से उनके अंडरगारमेंट्स के रंग और पैटर्न का अंदाजा लगाना, छुपकर एडल्ट मूवीज़ देखना, ब्लू-फिल्में देखना, सेक्स कहानियाँ पढ़ना आदि।
धीरे-धीरे मेरे संपर्क और दृष्टि में रहने वाली लड़कियों और औरतों के प्रति मेरे मन में वासना विकसित होने लगी। मैं स्कूल में अपने से बड़ी उम्र की लड़कियों, खूबसूरत टीचरों, सड़क से गुजरती लड़किया, हमारे पड़ोस में रहने वाली और हमारे रिश्ते में कुछ औरतों को वासना भरी नजरों से देखता था।
एक बार मैंने अपनी बड़ी बहन को ब्रा और पैंटी में कपड़े बदलते हुए देखा और मैंने जो देखा उसका मुझ पर ग़हरा प्रभाव पड़ा और मैं बहुत उत्तेजित हो गया। पहले तो मुझे शर्म आई कि मैं अपनी ही बहन को वासना भरी नजरों से देख रहा हूं.
लेकिन उसे इस तरह अर्धनग्न अवस्था में देखकर मेरे शरीर में जिस तरह की काम तरंगें दौड़ रही थीं, मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। पहले तो मेरे मन में ग्लानि के भाव आते थे लेकिन गुज़रते समय के साथ मैंने अपनी बहन को अलग नज़र से देखना शुरू कर दिया।
एक बार मुझे सेक्स कहानियों की एक अश्लील हिंदी किताब पढ़ने को मिली. उस किताब में कुछ कहानियाँ करीबी रिश्तेदारों के बीच सेक्स के बारे में थीं। साथ ही इसमें भाई-बहन की सेक्स कहानियाँ भी थीं जिन्हें पढ़ते हुए मैं अपनी बहन पायल के बारे में सोच रहा था और बहुत उत्तेजित और उत्साहित था।
इस तरह की कहानियाँ पढ़ने के बाद, मुझे थोड़ी राहत महसूस होती थी कि इस तरह का सेक्स दुनिया में मौजूद है और मैं अकेला नहीं हूँ जो अपनी ही बहन के प्रति वासना रखता हूँ।
मेरी बहन पायल दीदी मुझसे 8 साल बड़ी थी। इकलौता छोटा भाई होने के कारण पायल दीदी मुझे बहुत प्यार करती थी। अक्सर वह मुझे प्यार से गले लगाती, मेरे गाल चूमती। दीदी मेरा माँ की तरह ख्याल रखती थी, जैसे में उसका अपना बच्चा था।
हम साथ साथ खेलते थे, हंसते थे, मौज-मस्ती करते थे। हम दोंनो एक दूसरे के बहुत करीब थे. हालाँकि हम भाई-बहन हैं, फिर भी हम ऐसा व्यवहार करते थे कि मानो हम दोस्त हों।
पायल दीदी एक सामान्य मध्यमवर्गीय लड़की की तरह थी लेकिन उनका चेहरा आकर्षक था। दीदी का फिगर उस समय सेक्सबॉम्ब तो नहीं था लेकिन सुडौल और सही जगह भरा हुआ था। उसकी चुचिया और नितंब सही जगह पर उभरे हुए थे। उसका फिगर देख मैं पागल हो जाता था और मुझे हर दिन हस्तमैथुन करना पड़ता था।
घर में रहते हुए मुझे हमेशा बिना दीदी की जानकारी के उसे वासना भरी नजरों से देखने का मौका मिलता था। दीदी के साथ मेरे चंचल और प्यारभरे रिश्ते के कारण मुझे हमेशा उसके मुलायम मुलायम चुचियों को छूने का अवसर मिलता था।
हम जहां भी खड़े होते वह मेरे पास आकर खड़ी होती। उसके नितंब और चुचियों के छूने से मुझे उत्तेजना होती। पायल दीदी के प्रति मेरा यौन आकर्षण समय के साथ बढ़ता ही गया।
दीदी के लिए मैं उसका शरारती छोटा भाई था। वह शुरू से ही जब मेरे सामने कपड़े बदलती थी। दीदी मेरे साथ एक बच्चे की तरह व्यवहार करती थी। मैंने भी उस पर कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
लेकिन जैसे-जैसे मुझमें उसके प्रति वासना जागृत हुई, वह मेरी बड़ी बहन के बजाय मेरे लिए कामदेवी बन गई। अब जब वह मेरे सामने अपने कपड़े बदलती तो मैं छुपकर उस पर वासना भरी नजर डालता और उसके अर्धनग्न अंगों की एक झलक पाने की कोशिश करता।
जब वह मेरे सामने कपड़े बदल रही होती थी तो मैं उससे कुछ बात करता ताकि मैं उसकी तरफ देख सकूं और उसके ब्रा में ढके चुचियों का अवलोकन कर सकूं। कभी-कभी वह मुझसे अपनी ड्रेस के पीछे की ज़िप लगाने के लिए कहती थी और कभी-कभी वह मुझसे अपने ब्लाउज के बटन लगवाती थी, जिसके माध्यम से मैं उसकी आधी नंगी पीठ पर उसकी ब्रा की पट्टियों को देख सकता था।
कभी कभी सलवार या स्कर्ट पहनते समय मुझे दीदी की पैंटी दिख जाती थी. कभी-कभी उसके पैंटी से ढके हुए नितंब दिख जाते थे। उसने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि उसका छोटा भाई उसे वासना भरी नजरों से देख रहा था।
जब भी मैं घर पर दीदी की ब्रा और पैंटी देखता तो बहुत उत्तेजित हो जाता था। यह सोचकर कि ये वे कपड़े थे जिनके पीछे मेरी दीदी के मोटे स्तन और नितंब छिपे हुए थे, में पागल हो जाता। कभी-कभी मुझे लगता था कि अगर मैं ब्रा या पैंटी होता तो चौबीसों घंटे दीदी की चुचियों या चूत से चिपका रहता।
जब भी मुझे मौका मिलता, मैं पायल दीदी की ब्रा और पैंटी उठा लेता और उसमें मुठ मार लेता। मैं उसकी पैंटी को अपने लंड पर रगड़ता था और ब्रा को मुँह पर रख कर उसके कप को चूसता था.
जब मैं दीदी की इस्तेमाल की हुई पैंटी को मुँह में लेकर चूसता तो कामेच्छा से पागल हो जाता। उसकी खुशबू मेरे लिए किसी भी महंगे इत्र से बढ़कर थी। पैंटी का उसकी चूत को ढकने वाला हिस्सा जो उसकी चूत के रस से भीगा हुआ रहता था उसका स्वाद मेरे लिए अमृत से कम न था। उसकी पैंटी को अपने सख्त लंड पर रगड़ते हुए, मैं कल्पना करता कि मैं दीदी की चूत सहला रहा हूँ और मैं उसकी पैंटी पर ही वीर्यपात कर देता, जिससे उसकी पैंटी कई बार गीली हो जाती।
पायल दीदी के गुप्त अंगो को छूने के आनंद से मैं पागल हो जाता था और उन्हें छूने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता था।
जब हमारा घर छोटा था तो हम सब एक साथ हॉल में सोते थे और मैं दीदी के बगल में सोता था।
आधी रात के बाद, जब सब लोग गहरी नींद में सो रहे होते, मैं पायल दीदी के करीब चला जाता था। बाद में, हर संभव सावधानी बरतते हुए, मैं उसके गले लग जाता और उसके शरीर को सहलाता।
मैं उसकी मोटी मोटी चुचियोंको धीरे से छूता था। वो अहसास मेरे लिए आग में घी डालने का काम करता। मैं उनके नितंब पर जी भर के हाथ फेरता था। मैं कभी उसकी जाँघों को छूता था तो कभी उसके कपड़ों के ऊपर से उसकी चूत को छूता था।
सौभाग्य से, मेरे माता-पिता को मेरी अपनी सगी बड़ी बहन के प्रति कामेच्छा के बारे में कभी कोई अंदाज़ा नहीं हुआ। उनके बारे में क्या, पायल दीदी को भी कभी पता नहीं चला कि उनके प्रति मेरी सच्ची भावनाएँ क्या हैं। मैं इस बात का बहुत ध्यान रखता था कि किसी को भी मेरी दीदी के प्रति आकर्षण का पता न चलें।
हालाँकि मेरे मन में पायल दीदी के लिए यौन भावनाएँ थीं और मैं दीदी के साथ संभोग करने के सपना देखता था, लेकिन मैं जानता था कि वास्तविकता में यह संभव नहीं था। अपनी बहन के साथ फ़्लर्ट करना या उसके साथ सेक्स करना सिर्फ एक सपना है जिसका सच होना नामुमकिन है।
it gives so much excitement to use your sister's undergarments for musterbation.UPDATE-3
जैसे-जैसे मैं बड़ा और समझदार होता गया, दीदी मेरे साथ अधिक खुलकर बाते और व्यवहार करने लगी। हम किसी भी विषय पर वैसे ही बातें और चर्चा करते थे जैसे दोस्त करते हैं। आमतौर पर भाई-बहन अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात नहीं करते लेकिन धीरे-धीरे हम इस बारे में बात करने लगे।
मैंने दीदी को उसके प्रति अपनी सच्ची भावनाओं या अपने प्रेम संबंध और यौन जीवन के बारे में कभी नहीं बताया। मैं दिखावा करता था कि मुझे सेक्स के बारे में केवल सुनी-सुनाई और किताबी जानकारी है।
लेकिन दीदी की बातों से मुझे पता चल गया कि उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी नहीं था। जीजू की बढ़ती उम्र के साथ उनका कामजीवन भी बहुत खुशहाल नहीं था। शादी के बाद शुरुआती दौर में जीजू ने उन्हें बहुत प्यार दिया। उसी दौरान वह गर्भवती हो गई और एक बेटे को जन्म दिया था।
लेकिन बाद में दीदी बच्चे के साथ व्यस्त हो गईं और जीजू अपने बिजनेस में लग गए। इससे उनके बीच एक खाई पैदा हो गई जिसे मिटाने का कोई रास्ता दीदी को दिख नहीं रहा था। हालाँकि दीदी अपनी तरफ से पूरा प्रयास करती थी की उनकी ज़िंदगी मे फिरसे वह शादी के बाद वाले पल लौट आए। दीदी रोज जीजू के आने से पहले सँजती-सँवरती थी, उन्हें रिझाने की कोशिश करती थी। लेकिन जीजू चालीस के हो चले थे, उनकी सेक्स में बिल्कुल भी रुचि नहीं बची थी।
एक-दूसरे के प्रति समझौता और कर्तव्य निभाना ही उनका जीवन बनता जा रहा था। धीरे-धीरे उन्हें उस तरह के जीवन की आदत हो गई। ऊपर ऊपर से तो, दीदी का एक आदर्श और खुशहाल परिवार था। लेकिन अंदर ही अंदर मुझे एहसास हुआ कि दीदी अपने वैवाहिक जीवन से बहुत खुश नहीं थी।
पायल दीदी के प्रति मेरी भावनाएँ जो भी हों, आख़िरकार मैं उसका भाई ही था। मुझे दीदी की मानसिक अवस्था पर बुरा लगता था और उस पर दया आती थी। मैं हमेशा दीदी को सांत्वना देता था और उसे मोटिवेट करता था।
मैं दीदी को तरह-तरह के चुटकुले सुनाता रहता। मैं हमेशा उसे मुस्कुराने और उसके मूड को खुश रखने की कोशिश करता। जब भी वह अपने मायके आती या मैं उसके घर जाता तो मैं उसे बाहर घुमाने ले जाता था।
हम कभी शॉपिंग करने, कभी मूवी देखने तो कभी घूमने जाते थे। अक्सर मैं उसे किसी अच्छे रेस्तरां में ले जाता। मैं वो सभी काम कर रहा था जो पायल दीदी को पसंद थे और उन्हें ख़ुशी देते थे। दुःख की बात ये थी कि ये सभी काम जीजू को करने चाहिए थे।
एक दिन जब मैं ऑफिस से घर आया तो मां ने बताया कि पायल दीदी का फोन आया था, वह दिवाली पर हमारे घर आना चाहती है लेकिन हमेशा की तरह, जीजू के पास दीदी को बिज़नेस से फुर्सत लेकर लाने का समय नहीं था।
माँ पूछ रही थी कि क्या मेरे पास जाकर पायल दीदी को लाने का समय है। मैं दीदी को लाने के लिए उनके घर जाने के विचार से ही उत्साहित हुआ।
मुझे याद आया कि जब मैं चार महीने पहले उसके घर गया था तो मैंने क्या किया था -
जीजू पूरे दिन अपनी बिजनेस में व्यस्त होते और मेरा भानजा पूरी दोपहर किंडरगार्टन में जाता था। इसलिए काफी समय तक दीदी और मैं घर में अकेले ही रहते थे, जिससे मुझे दीदी को बिना किसी रोक-टोक के देखने का मौका मिल जाता।
काम करते समय वह अपनी साड़ी और ब्लाउज को लेकर थोड़ी लापरवाह हो जाती थी जिससे मुझे उसके मोटी मोटी चुचियों की गहराई का अच्छा अंदाज़ा हो जाता था। जब वह अपनी साड़ी उठाकर झाड़ू-पोंछा करती या बर्तन धोते समय बैठ जाती तो मुझे उसका पेट और जांघें देखने को मिलती।
जब दोपहर का खाना ख़त्म हो जाता और जीजू चले जाते तो मैं हॉल में बैठ कर टीवी देखता। फिर पायल दीदी सारा काम ख़त्म करके मेरे पास सोफे पर बैठ जाती। हम टीवी देखते हुए बातें करते थे। दीदी को दोपहर को रोज़ थोड़ी देर सोने की आदत थी, इसलिए वो थोड़ी देर बाद वहीं सोफ़े पर लेट जाती और सो जाती.
जब वह गहरी नींद में सोती तो मैं बिना डरे उसे करीब से देखता था। यदि संभव हो तो, मैं सावधानी से उसकी साड़ी की परत को उसकी छाती के ऊपर से सरकाता और उसकी सांसों की लय के साथ उसकी छाती के उभारों की गति को देखता।
साथ ही मैं उसके पेट, गोल नाभि और पेडू को भी तीखी नजरों से देखता था। कभी-कभी मैं उसकी साड़ी उठाने की कोशिश करता। लेकिन इसके लिए मुझे बहुत सावधान रहना पड़ता और मैं केवल उसकी साड़ी को उसके घुटनों तक ही ऊपर उठा पाता।
पायल दीदी आमतौर पर सुबह जल्दी नहीं नहाती थीं। सुबह के सारे काम निपटाने और जीजू के ऑफिस चले जाने के बाद वह आठ से नौ बजे के बीच आराम से नहाती थी। मेरा भांजा तब सोता रहता और दस बजे के बीच उठ जाता था। मैं भी उसके साथ सोने का नाटक करता।
नहाने जाने से पहले वह घर का दरवाज़ा बंद कर लेती थी। जिस कमरे में मैं सो रहा था वह कमरा बाथरूम से सटा हुआ था। मैं दीदी हरकतों का अनुमान लगाता था और जैसे ही वह बाथरूम का दरवाज़ा बंद करती थी, मैं उठकर बाहर आ जाता था।
मैं दबे पाँव दरवाज़े के पास जाता और अंदर की आवाज़ सुनने की कोशिश करता। दीदी की चुड़ियों की खनखन से मैं अंदाजा लगाता की दीदी क्या करती हैं।
दीदी पहले तो अपनी आवश्यकता के अनुसार गर्म पानी को ठंडे पानी में मिलाकर नहाने का पानी तैयार करती थी। अपनी साड़ी उतारने के बाद वो अपने बाकी बचे कपड़े उतार कर नहाने लग जाती।
नहाने के बाद वह अपना गीला शरीर तौलिये से पोछ लेती थी। फिर वो पेटिकोट छाती से बांधकर उसके नीचे दूसरी ब्रा और पैंटी पहन कर बाहर आती थी। वह अपने बेडरूम में जाकर ब्लाउज के साथ साड़ी पहनती थीं।
दरवाज़े के बाहर से कुछ नहीं दिखता था लेकिन पानी की आवाज़ और दीदी की चूड़ियों की खनखन ही मुझे उत्तेजित करने और मेरी कामेच्छा जगाने के लिए काफी थी।
दीदी साड़ी पहनकर मुझे उठाने आती। मैं आराम से अँगड़ाई लेकर उठने का नाटक करता और अपने खड़े लन्ड को दीदी की नजरो से छुपाकर बाथरूम में घुस जाता। जब मुझे वहाँ दीदी की इस्तेमाल की हुई ब्रा और पैंटी लटकाई दिखती तो मेरा हथियार झटके मारने लगता।
मैं उसकी ब्रा-पैंटी उठाकर उसे सूँघने और चाटने लगता। दीदी के अंडरगारमेंट्स अपने लंड पर रगड़ता और उसी में अपना माल छोड़ देता। फिर में दीदी की ब्रा पैंटी साफ करके पहले जैसी रख देता ताकि दीदी को मुझ पर शक न हो।
मुझे वो सारी बातें याद आ गईं और मैं दीदी को लेकर आने के लिए तैयार हो गया। अगर मेरे पास समय नहीं भी होता तो भी मैं समय निकाल लेता।
Its heaven to feel the boobs on your chest.UPDATE-5
अगले दिन दोपहर को मैं हॉल में बैठा टीवी देख रहा था। दीदी मेरे पास बैठी कुछ कपड़े सिल रही थी। हम लोग टीवी देख रहे थे और बीच-बीच में बातें भी कर रहे थे। मैं रिमोट से एक के बाद एक चैनल बदल रहा था क्योंकि दोपहर का कोई भी प्रोग्राम मुझे दिलचस्प नहीं लग रहा था।
अंततः मैं एक लोकप्रिय चैनल पर रुका। उस चैनल पर विज्ञापन चल रहे थे। मैंने रिमोट एक तरफ रखते हुए खुद से कहा, 'विज्ञापन खत्म होने के बाद इस चैनल पर जो भी प्रोग्राम होगा, उसे देखूंगा।'
विज्ञापन ख़त्म हुए और प्रोग्राम शुरू हुआ। उस प्रोग्राम में वे भारत के कुछ मशहूर ठंडी हवा वाली जगहों के बारे में जानकारी दे रहे थे। पहले उन्होंने ठंडी हवा वाले स्थान उटी (तमिलनाडु) के बारे में बताया, फिर शिमला के बारे में बताने लगे।
जानकारी देते समय वह शिमला की हरी-भरी पहाड़ियों, झरनों और प्रकृति से भरपूर अन्य खूबसूरत जगहों की वीडियो क्लिप दिखा रहे थे। इसमें दिखाया गया कि कैसे स्कूल ट्रिप, ऑफिस ग्रुप, कपल्स और साथ ही नवविवाहित जोड़े सभी शिमला जाते हैं और मौज-मस्ती करते हैं।
“कितना सुंदर है ना शिमला!” पायल दीदी ने टीवी की ओर देखते हुए कहा।
"हाँ! बहुत अच्छा है! मैं वहाँ कई बार गया हूँ!” मैंने उत्तर दिया।
"सच में!! राहुल, किसके साथ गए थे तुम?” दीदी ने उत्साहित होकर पूछा।
“एक बार अपने कॉलेज ग्रुप के साथ और दूसरी बार अपने दोस्तों के साथ।”
"राहुल क्या तुम जानते हो?" पायल दीदी ने धीमी आवाज में कहा, "मेरी सभी सहेलिया शिमला जाती रहती है। जब भी वह वापस आकर मुझे उनकी मौजमस्ती सुनाती है तो मुझे भी शिमला देखने की चाहत होती है , मैं भी इस खूबसूरत जगह को देखना चाहती हूं।"
"क्या कहती हो दीदी?" ''तुमने अभी तक शिमला नहीं देखा?'' मैंने आश्चर्य से पूछा।
“नहीं राजा! मेरी ऐसी किस्मत कहाँ है!”
"ओह, माय गॉड! आप अभी तक वहां नहीं गए? शिमला तो चंडीगढ़ से बहुत करीब है और जीजू आपको कभी वहां नहीं ले गए? क्या कहती हो दीदी?”
"हाँ! लेकिन मैं सच कह रही हूं...क्या तेरे जीजू के पास मेरे लिए समय है?" दीदी ने जीजू पर चिढ़ते हुए कहा।
"ओह! दी ! यदि तुम उनसे पूछोगी, तो वे काम से छुट्टी ले सकते हैं और तुम्हें शिमला ले जा सकते हैं।
“मैंने उनसे कई बार पूछा,” दीदी ने परेशान होकर कहा, “लेकिन हर बार उन्होंने बिज़नेस का हवाला देकर मना कर दिया। मैं तुम्हें बता दूं, वे बिल्कुल भी रोमांटिक नहीं हैं। क्या तुम जानते हो हम शादी के बाद हनीमून पर भी नहीं गए। उन्हें किसी रोमांटिक जगह पर जाना पसंद नहीं है। वे कहते हैं, ऐसी जगह पर जाना समय और पैसे की बर्बादी है।''
मुझे शुरू से पता था कि मेरे जीजू दीदी से काफी बड़े है, तो उन्हें रोमांस में कोई दिलचस्पी नहीं होगी। और इसके विपरीत मेरी दी को घूमना बेहद पसंद था। मुझे दीदी के लिये बहुत बुरा लगा। मैंने उसके पास आकर कहा,
“दी, अगर तुम बुरा न मानो तो मैं तुम्हें शिमला ले चलूँगा!”
“सचमुच राहुल?” दीदी ने उत्साहित होकर कहा, लेकिन अगले ही पल वह दुःखी हो गयी और बोली, “काश! तुम्हारे जीजू भी तुम्हारी तरह बोलते, अपने पार्टनर के साथ ऐसी रोमांटिक जगहों पर जाने में मज़ा आता है, भाईके साथ नहीं।''
"ऐसा कौन कहता है?" मैंने उससे पूछा, “दी, जब तक हम एक-दूसरे के साथ में कम्फर्टेबल हैं और इतनी खूबसूरत जगह का आनंद ले रहे हैं, तो भाई-बहन होने से क्या फर्क पड़ता है? और हमारे बीच भाई-बहन के रिश्ते से ज्यादा दोस्ती का रिश्ता है। हम बिल्कुल दोस्त की तरह हैं, है ना मैडम?”
"हां मेरे भाई! मेरे प्यारे दोस्त!" पायल दीदी ने खुशी से कहा। फिर वो मुझे समझाते हुए बोली- "भाई, फिर भी मैं अपने पति के साथ वहां जाना उचित समझती हूं,"
"तो फिर मुझे नहीं लगता कि तुम्हें कभी शिमला देखने को मिलेगा दी, क्योंकि जीजू को तो अपने बिज़नेस से फुर्सत ही नहीं मिलती।"
"हाँ! ये भी सही है, ठीक है, देखते हैं कि क्या हम कभी शिमला जा सकते हैं।"
"क्या बात है दी! हम अभी शिमला जा सकते हैं।"
"अभी? तुम पागलों की तरह बात कर रहे हो।” दीदी ने आश्चर्य से पूछा।
“अभी मतलब परसों हम मेरठ जा रहे हैं, तब हम शिमला चलेंगे!” मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा.
" मेरठ जाते वक्त?" पायल दीदी ने सोचा, "यह कैसे संभव है राहुल?"
"क्यों नहीं, दी?" मैं उत्साहपूर्वक उससे कहने लगा, “देखो! हम अगली सुबह अपने घर मेरठ जा रहे हैं, ठीक? तो हम यहां से थोड़ा जल्दी निकलेंगे और शिमला पहुंचेंगे और वहां हम पूरे दिन घूमेंगे फिर अगली सुबह हम अपने घर के लिए वहां से रवाना होंगे।
“वो तो ठीक है, लेकिन हम शिमला में रात को कहां रुकेंगे?” दी ने उत्सुकता से पूछा।
“कहाँ रुकेंगे मतलब? होटल में दी!” मैंने तुरंत उत्तर दिया.
"होटल में?" पायल दी ने थोड़ा सोचा, "लेकिन मैं तो कहती हूँ, हम उसी रात मेरठ वापस क्यों नहीं जा सकते?"
“तुम जा सकती हो, दी, लेकिन इससे हमारा कोई फायदा नहीं होगा, इससे हमारी केवल भागदौड़ होगी। क्योंकि हम पूरा शिमला घूमेंगे तो रात हो जायेगी और तुम इसे पहली बार देख रही हो तो, ज्यादा समय बीत जाएगा। और तो और चलते-चलते हम थक जाएंगे फिर आराम की भी जरूरत होगी इसलिए हमें रात को होटल में ही रुकना चाहिए।”
“तुम ठीक कह रहे हो राहुल,” दीदी लगभग सहमत हो गई लेकिन उसने कहा, “तो फिर ठीक है। लेकिन बात बस यह है कि भाई के साथ होटल में एक रात रुकना कुछ अजीबसा लगता है।"
“ओह कम ऑन दी, हम कोई अजनबी नहीं हैं। क्या हुआ क्योंकि हम भाई-बहन हैं, हम दोस्त भी तो हैं। वहाँ तुम्हें बिल्कुल भी अजीब महसूस नहीं होगा, दी! देखना, तुम्हें वहां बहुत मजा आएगा।”
"हाँ! हाँ! मैं यह जानती हूं, मेरे छोटे भाई!” ये कहते हुए उसने मजाक में मेरे गाल पर चुटकी काट ली। मुझे उसका इस तरह चुटकी काटना पसंद नहीं है।
“दी! तुम्हें पता है ना मुझे तुम्हारा इस तरह चुटकी काटना पसंद नहीं है, क्या मैं अभी भी बच्चा हूं? अब मैं अच्छी तरह बड़ा हो गया हूं।”
“ओह हाँ हाँ हाँ हाँ! क्या तुम बड़े हो गये हो? तुम केवल शारीरिक रूप से बड़े हुए हो, राहुल! लेकिन मेरे लिए तुम हमेशा छोटे ही रहोगे," उसने मुझसे कहा, "छोटा भाई, बिल्कुल मेरे बच्चे की तरह!"
“ओह दी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं चाहता हूं की तुम हमेशा खुश रहो। मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूं।” इतना कह कर मैंने भी उसे गले लगा लिया.
"मैं जानती हूं राहुल, मैं भी तुमसे प्यार करती हूं, तुम मेरे भाई हो इसका मुझे हमेशा गर्व रहेगा।"
अगर उस पल मैं कुछ भी महसूस कर सकता था तो वह थी मेरे सीने पर दबी हुई मेरी बड़ी बहन की कोमल स्तनों की कठोरता। ऐसे ही कुछ समय गले लगे रहने के बाद हम अलग हो गए और आगे की प्लानिंग करने लगे।
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