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DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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भोजपुरिया होली
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malikarman

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UPDATE 019




होलीईईईईई हैएएएएए......

नीतू भाभी के साथ आई दूसरी औरतों ने भी मुझे घेर लिया था वही हाल में
किसी के हाथ मेरे टीशर्ट में थे तो किसी के गाल और बालों पर
" अरे नहीं भाभी हीहीहेहे वहा नहीं " , मै ऐंठने लगा क्योंकि उन औरतों में से एक ने मेरे लोवर को पीछे से लास्टिक खींच कर चूतड़ को लाल कर दिया था

" आराम से रहो नहीं तो खड़े खड़े तुम्हारी बहनिया पेल दूंगी " , नीतू भाभी अबीर से नहाई हुई थी और उनके खिले चेहरे , मस्ती में मुझे घूरती कातिल निगाहे
शिफॉन की साड़ी में ढीली ब्लाउज और गहरे गले की ब्लाउज से झांकते चूचे अबीर गुलाल से सन कर और भी मुलायम जान पड़ रहे थे


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" सीई देखो बहनचोद को अभी भी खूंटा टाइट है इसका ", नीतू भाभी ने मुझे दिवाल से चिपका कर लोवर में झूल रहे लंबी पिचकारी को को देख कर बोली

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, लेकिन मेरी निगाहे तो उनकी गुदाज चर्बीदार मोटी रसीली चुचियों पर था

" लेना है ? " , वही पुराने अंदाज में नीतू भाभी ने फिर से आग्रह किया और मै मुस्कुरा उठा । सालों पहले उनकी रसीली छातियां मुंह में भर कर उनके दूध का स्वाद लिया था और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा ।
मुस्कुरा कर मैने मम्मी बुआ को देखा जो दूसरे औरतों के साथ व्यस्त थी और शरारती नजरो से हुंकारी भर दी
अगले ही पल मेरी कालर पकड़ कर सीधा मेरा मुंह अपनी छाती में रगड़ दिया और उनके छातियों पर लगे अबीर से मेरा चेहरा रंगीन हो गया और मौका देखकर हाथ बढ़ा कर उन्होंने लोवर के ऊपर से मेरा लंड दबोच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह भाभी आराम से
: बहनचोद आज नहीं आए न तो पक्का तुम्हारी बहिनिया को रंडी बनवाऊंगी अगली होली में , समझे ...ठीक 03 बजे

एक आखिरी अल्टीमेटम देकर उसने मेरे आड़ छोड़ दिए और पूरे जिस्म में सिहरन थी और मेरी नजर उसकी हल्की गुलाबी साड़ी में थिरकते चूतड़ों पर गई , कातिल चीज थी नीतू भाभी
इनके जिस्म की असल नुमाइश तो इन्हें भीगा कर करने में थी और मैने उन्हें इशारा किया कि आपकी इकलौती ननद और मेरी बहन छत पर है दबोच लो
होली भाभियों को दो ही तो चाहिए एक देवर दूसरी कमसीन नन्द , उन्हें उनके रसीले मम्मे गुलाबी करने में मजा आता है और मुझे ऐसे सिन देखने में ।

पानी वाले रंगों के लिए मम्मी ने पहले से डायरेक्शन दे दिए थे कि होली छत पर ही होगी तो मैने भी अपने हथियार कर रखे थे
बुआ को जैसे ही भनक हुई कि लोग ऊपर जा रहे है तो मम्मी भी उनके साथ ऊपर हो ली
पापा हाल में सोफे पर बैठे थे अबीर से सराबोर, उन्हें भी मुहल्ले की औरतों ने खूब रंगा और मुझे बोलकर बाहर चले गए दोस्तो से मिलने ।
मैने भी रूम से गहरे वाला पक्का रंग निकाला और हाल का दरवाजा बंद कर ऊपर टैरिस पर
खूब हल्ला गुल्ला मचा हुआ था
बबली के ऊपर क्या नीचे क्या , नीतू भाभी तो अगुवा कर रंग कम रही थी और रगड़ ज्यादा

: हाय राम मेरी बच्ची ( बुआ उसकी हालत देख कर घबराई )
: अरे होली है दीदी क्या तुम भी ( मम्मी ने उन्हें शांत किया )
: मम्मी ??
: हा क्या हुआ
मैने उन्हें पक्के रंग का पैकेट दिखाया और मम्मी मुस्कुरा उठी
मै झट से बाथरूम में बाल्टी में पानी में घोलना शुरू किया और एक लंबी पिचकारी में भर
: आज इस नाउन की पतोह को छोड़ना नहीं है
: अरे बिल्कुल ( मैने हस कर मम्मी की बात का जवाब दिया और औरतों की झुंड की ओर लपका )


भाभीईईईई ...
मै जोर से पिचकारी उठा कर चिल्लाया
एकदम से नीतू भाभी ने हमे देखा
मै मम्मी और बुआ तीनों के हाथों में लंबी बड़ी पिचकारी ,, सामने मुहल्ले की दूसरों औरतों का झुंड

जीने का दरवाजा भी बंद और बगल के ही एक हांडे में भरपूर गहरा पक्का रंग
सब जान गए कि मैने उन्हें अच्छे से उल्लू बनाया
हल्ला गुल्ला जोरो पर था

" मम्मीईईई अटैक हाहाहाहाहा"
बुआ और मम्मी ने एक साथ पिचकारी दागी और मै भी उन औरतों की ओर तान दिया लेकिन मेरा निशाना नीतू भाभी थी
शातिर थी बड़ी चालाक , खींच कर बबली दीदी को ढाल बना कर अपने आगे कर दिया


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छरछरा कर ठंडे पानी की बौछार उनके मोटे नारियल जैसे चूचों पर चल गई : रोहन!!!!!
दीदी खिलखिला कर चिल्लाई
" उप्स सॉरी"
मैने वापस से अपनी पिचकारी लोड की और भाभी बचती हुई दिखी मैने भी उन्हें पीछे की ओर दौड़ा लिया

" अह नहीं रोहन बाबू ठंडा है अह्ह्ह्ह हीहीहीही रुको न "
वो खिलखिलाती हुई हाथ आगे कर रंगो की पिचकारी रोकने का प्रयास की लेकिन मेरा निशाना अचूक था


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चट्ट चट्ट कर 3 4 मोटी धार मैने सीधे उन्हें गुलगुले चूचों पर मारे पूरी साड़ी ट्रांसपेरेंट सी हो गई , अंदर से ब्लाउज दिखने लगी और ठंडे पानी की सिहरन ने निप्पल तान दिए

: आहुच मम्मी... सीईईई ( पंजों से उन्होंने अपनी छाती पकड़ ली और मै खिलखिलाया )
लेकिन अब भागने की बारी मेरी थी
उधर मुहल्ले की औरतें वापस मम्मी बुआ पर भारी पड़ गई थी
: बहिनचोद भाग कहा रहे हो
उन्होंने मुझे पकड़ कर वही बिठा दिया और हांडे से जग में भर भर मुझे नहलाने लगी
तबतक बबली दीदी आई और एकदम से मेरे ऊपर रंग गिरना बंद हुआ
बबली ने नीतू भाभी के चेहरे को हरा कर दिया और मैने भी उन्हें खींच कर नीचे लिटा दिया और रंगीन पानी गिराने लगा , कभी उनके चूचों पर तो कभी पेट पर । पल्लू तो सीने से ऐसे चिपका था कि मालूम हो रहा था कि है ही नहीं
वो छटपटाती खिलखिलाती रही और बुआ मम्मी मेरी हरकत देख रही थी
बबली ने मुझे इशारा किया और मै चुप हो गया
रंग खत्म हो गया , बाल्टियां हांडे सब खाली
हंसी ठिठौली चालू थी
रंगो से सब सराबोर हो गए
मम्मी बुआ की साड़ी भी देह से एकदम चिपक गई थी ,


कुछ औरतें बाथरूम में मुंह धूल रही थी कुछ पाइप से
मेरी निगाहे नीतू भाभी पर , अपनी शिफॉन की साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी , असल हुस्न का दीदार तो अब हुआ था उनका , रसीले मम्में और चूतड़ एकदम शेप में देख रहे थे साड़ी भीग कर लगभग ट्रांसपेरेंट हो गई थी


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और रंगीन चेहरे पर मुस्कुराहट अलग ही खिल रही थी
मम्मी बुआ रेलिंग के पास खड़े होकर मुहल्ले की नुक्कड़ पर लगी डीजे पर नाचते टाऊन के फूहड़ों को देख रही थी । बबली दीदी बाथरूम में अपने बाल धूल रही थी , असल में ऐसा रंग उन्होंने पहले कभी खेला ही नहीं था
मम्मी बुआ बिंदास थी और मुझे अब भूख भी लग रही थी लेकिन नीतू भाभी की शरारती मुस्कुराहट और गीली जवानी को ताड़ना कैसे छोड़ सकता था ।

: बहनचोद ( वो बुदबुदाई और मै मुस्कुराया )
आज तो उनकी गाली ने हर बार मेरे लंड में जोश भरने का काम किया था । कुछ अलग ही तलब थी , शायद बबली दीदी के साथ हुए कल रात की कहानी ने मुझ में बदलाव ला दिए थे ।
थोड़ी देर सब लोग सूखने लगे , दोपहर चढ़ रही थी और मम्मी सबको नीचे ले कर आई नाश्ते के लिए, बबली दीदी अपने कपड़े लेकर चली गई नहाने के लिए उन्हें अपने देह से रंग छुड़ाना ज्यादा जरूरी लगा , बजाय कि गपशप के ।

मिठाइयों का दौर शुरू हो गया, कुछ मम्मी ने अपने हाथों की बनी खिलाई तो कुछ उन औरतों ने अपने डिब्बे से मम्मी को
मै भी लपक कर उन्हीं डिब्बों से मिठाई उठाने का सोचा कि नीतू भाभी ने हाथ पकड़ लिया और ना में इशारा किया , बुआ उस वक्त किचन ने चाय बना रही थी
इशारा साफ था मिठाई भांग वाली थी और आज नीतू भाभी कोई बहाना नहीं चाह रही थी
चाय नाश्ते का दौर खत्म होते ही बाकी सब चली गई और जाते हुए नीतू भाभी ने आंखों से वार्निंग दे दी मुझे
कमरे आया तो देखा मम्मी वापस से उसी डिब्बे की मिठाई गपक ली
: अरे दीदी लो न
मैने झपट कर मम्मी के हाथ से डिब्बा ले लिया
: अरे क्या हुआ
: अरे मम्मी भांग वाली है
: धत्त मैने तो 3 खाई है ऐसा तो कुछ नहीं हुआ मुझे ( उनकी स्माइल बड़ी हो रही थी और फिर भौहें टाइट कर उन्होंने बुआ को देखा ) दीदी आपको कुछ हुआ क्या ?
: मैने तो नहीं खाई .. ला देखूं ( बुआ ने हाथ बढ़ाया लेकिन मैने डिब्बा बंद कर दिया )
: अरे रोहन !!!
: नहीं बुआ ये नहीं ( मैने हाथ पीछे कर उसे किचन में रख दिया ऊपर रैक पर )
बुआ मेरे पास आई
: क्या ये सच में भांग वाली है
: उधर देखो उनको हीही ( मैने उन्हें मम्मी की ओर दिखाया जो अजीब सा मुंह बना कर डकार लेते हुए कमर पर हाथ रख कर रिमोट से टीवी चला रही थी । )
: हैं? अरे भगवान् अब क्या होगा ( बुआ घबड़ाई )
: भांगड़ा हाहा ( मै हस कर बोला और उधर मम्मी ने गाना लगा दिया ) हर साल पापा करते थे इस साल मम्मी हीहीही

टीवी पर होली के भोजपुरी गाने चालू हो गए और मम्मी टहलती हुई किचन में

: क्या हुआ तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो ? ( मम्मी ने हस कर कहा )
हम बस शांत थे , बुआ किचन में भीड़ कर पूरी निकालने के लिए क्योंकि मुझे भूख लगी थी

: अरे तो जा नहा ले ऐसे खायेगा क्या ( मम्मी के भाव पर अब ओवर रिएक्शन से जाहिर हो रहे थे )
: कुसुम !!! क्या चिल्ला रही है ( बुआ ने डांटा तो मम्मी उनको पीछे से पकड़ने लगी टीवी पर चल रही भोजपुरी गाने की लिरिक्स को दोहराते हुए

: झूठार देहले राजा जी , चढल जवानी के दहिया
: धत्त हट छोड़ मुझे ( बुआ एकदम से मम्मी के चिपकने और उन्हें सहलाने से शर्माने लगी उसपर से वो गाना )
: झूठार देहले राजा जी अपने बहिन के जवानियां हीहीहीही हाहाहा

अजीब सी क्रिपि हंसी थी मम्मी की और ये तो बस शुरुआत था
बुआ असहज होकर मुझे देख रहे थी और हम समझ रहे थे कि आज बड़ा हंगामा होकर रहेगा ।

: सीईई अह्ह्ह दीदी सच में भांग वाली थी क्या हाहाहा उफ्फ सर पकड़ रहा है अब तो
हम चुप थे और बुआ पुरिया बेल रही थी
: रोहन
: हा मम्मी ?
: बेटा तू सही कह रहा था थोड़ा तेल लगा देगा सर में
: अरे ऐसे कैसे बाल धुलने पड़ेंगे न ?
: अच्छा बाम लगा दे बेटा उफ्फ फड़क रहा पूरा सर
मुझे यही सही लगा और मैने उन्हें हाल में सोफे पर बैठा कर उनके सर पर बाम लगा कर मालिश की , उन्हें थोड़ा आराम हुआ लेकिन भांग का असर हर बीतते पल के साथ बढ़ ही रहा था ।

: रोहन !!
: जी मम्मी ?
: वो जरा अपने पापा का गमछा देना ( उन्होंने हाल के वाल हैंगर पर टंगे पापा के गमछे की ओर देख कर कहा )
मैने उन्हें दिया और वो उन्होंने अपने सर पर अच्छे से लपेट दिया
: अह्ह्ह्ह्ह अब गर्माहट है और ठीक भी
: तो मै नहाने जाऊ
: हा नहा ले बेटा
मै नहाने के लिए अपने कमरे से कपड़े निकाले और इधर एकदम से हाल में टीबी का वॉल्यूम बढ़ गया और गाना भी एकदम ऐसा ही नाचने से खुद को रोक ही न पाओ

लूटा ऐ राजा, लूटा ऐ राजा

मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लुटा ए राजा



तभी बुआ के खिलखिलाने की आवाज आई और मै अपने बैग से कपड़े निकाल रहा था
" अरे कुसुम छोड़ न तेल जल रहा है हीही "

मेरे दिमाग में भी चूल होने लगी कि साला असल में बाहर क्या बवाल हो रहा है और फिर गाने की धुन ही ऐसे थे कि मस्ती में पूरा तन मन झूम रहा था मै झट से बाहर आया

"धरा न कमरिया में बड़ा मजा पाईबा
होठवा से होठवा तू जेतने सताइवा"

: हीही मार खाएगी कुसुम उम्ममम छोड़ मुझे हाहाहा ( बाहर आया तो देखा बुआ को मम्मी ने बाहों में भर रखा था और उनके लिप्स से अपने लिप्स लगाने की कोशिश कर रही थी और हस रहे थी )
: मस्ती में मन डोली जैसे खोलवा चोली ( मम्मी गाने के बोल चिल्लाते हुए बुआ के चूचों पर हाथ फिराने लगी और घुमा कर पीछे से पकड़ लिया) बटनिया बटनिया बटनिया खोला ऐ राजा
बटनिया खोला ऐ राजा
: अह्ह्ह्ह भक्क कुसुम छोड़ मुझे पगला गई है क्या हीही ( बुआ हस भी रही थी और अपने सीने पर ब्लाउज को पकड़े हुए थी लेकिन मम्मी की जबरजतसी नहीं रुकने वाली थी )

डर था कही मम्मी फाड़ ही न दे बुआ का ब्लाउज और नहीं कुछ हाथ आया तो उनकी साड़ी पकड़ कर खींच ली और गाने के बोल को दोहराते हुए नचाने लगी बुआ को पकड़ा कर

उफ्फ बुआ इस वक्त ब्लाउज पेटीकोट में आ गई थी , बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी और चर्बीदार थुलथुले कूल्हे पेटीकोट में खूब थिरक रहे थे
लंड वापस से अपना आकार लेना शुरू कर चुका था और तभी हाल का दरवाजा खुला और एकदम से पापा आ गए

बुआ ने अपने आप को इस हाल में देखा और झट से अपनी साड़ी उठा कर किचन में भागी

पापा आए और अगले ही पल उनके मुस्कुराहट ने बता दिया कि वो भी अपना डोज लेकर आए थे

: हो गया कल्याण अब ( मै खुद से बुदबुदा कर आया था )
मम्मी को नाचता देख पापा भी अपने कमर और सर पर हाथ रख कर मम्मी के साथ ठुमके लगाने लगे
लेकिन अभी तो स्थिति और फूहड़ होने वाली थी

: धड़के ला धक धक तोहरे ला छतिया ( मम्मी ने अपने छातियों पर हाथ रख गाने के स्टेप किए ) करा ऐ राजा तनि प्यार वाली बतिया ( फिर पापा से लिपट ही गई )
मम्मी तो जाने गाने की हीरोइन मोनालिसा ही बन गई थी , वही बोल्ड अंदाज वैसे ही डांस स्टेप या कुछ ज्यादा ही अश्लील

: ढिबरिया भुता दा ऐ राजा
कइ द अन्हर कोठरिया लहरिया लूटा ऐ राजा ( मम्मी ने अपने सर का गमछा खोलकर खुद को और पापा को उढ़ा लिया )
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा


सामने नजर गई तो उसपार से बुआ खड़ी थी किचन से झांक रही थी और इधर बाथरूम के पास मै
बीच हाल में उन दोनों ने गमछे में छिपकर एक दूसरे को चूमने लगे थे

इधर जैसे ही मेरी नजर बुआ से मिली मै मुस्कुरा कर उन्हें देखा और उन्होंने मुझे
बस फिर मै बाथरूम में चला गया लेकिन हंगामा अभी थमा नहीं था ... ये तो बस शुरुआत थी
मैने बाथरूम में पानी चालू कर कपड़े निकालने लगा और दरवाजा लगा दिया
इधर टीवी पर एक और गाना लग चुका था ... मुझे गाने की म्यूजिक से कुछ कुछ गाने का अंदेशा हो रहा था लेकिन टोटी से पानी बाल्टी में गिरने की आवाज से आवाज उतनी साफ नहीं थी , फिर पास में मोटर भी चालू था , अभी 4 5 मग पानी मैने अपने ऊपर डाला ही था कि गाने की बढ़ती म्यूजिक ने मुझे थोड़ा सा और रिझाया

मैने झट से टोटी ऑफ की ओर गाने की आवाज आई
गाना भी सुपरहिट था , खेसारीलाल यादव का "लहंगा उठावल पड़ी महंगा "

पढ़े वाला खातिर लभ के पढ़ाई हाऊ

पोखरा में बिछलाये वाला काई हाउ
लइकन के चूसनी , जवनकन के मिसनी

तू तो बूढ़वन के आंख के दवाई हाउ


साला लिरिक्स ऐसे थे कि दिल गार्डेन गार्डेन हुआ जा रहा था , ये सोच कर कि इस गाने पर बाहर क्या माहौल मचा होगा , लेकिन पानी डालने से रंग मेरे देह पर फैलने लगा और उधर गाना चालू हो गया था

मैने झट से पूरी बाल्टी पानी उठा कर अपने देह पर उड़ेल ली और हौले से दरवाजा खोला तो
गाना फुल वॉल्यूम पर मेरे कानो को हिट किया और आंखे सामने के नजारे देख कर चमक उठी


: चुनरी हटाई का ( मम्मी ने अपने छातियों से पल्लू झटका और अपनी कमर को ऐसे बलखाया फिर वो का बयां नहीं कर सकता था ) चीज कुछ दिखाई का ( उन्होंने अपने जबरजस्त जोबन को ब्लाउज में पापा के सामने लहराया )

उफ्फ पापा ने तो लपक कर मम्मी की साड़ी पकड़नी चाही तो मम्मी पूरा नाच गई फिरकी की तरह और उनकी साड़ी पूरी फर्श पर और पापा ने उनको अपनी बाहों में झुला दिया और हैरत की बात थी कि पापा को गाने के बोल डिट्टो याद थे
मम्मी सही कहती थी पापा बड़े छुपा रुस्तम है बस दिखाते नहीं है लेकिन रोमांस भरा पड़ा है उनमें

: ऐसे उठाईबु जब लहंगा ( सीईईई पापा ने तो मम्मी का पेटीकोट उठाने लगे पीछे से ) हंगामा पूरा हाल में होई
मम्मी की जांघें पीछे से दिखने लगी थी और पापा ने पजामे में बड़ा सा तंबू बन गया था । तभी सामने नजर गई तो बुआ भी किचन से झांक रही थी और मैने झट से अंदर हो गया ।


फटाफट से पानी डाल कर अपना बदन रगड़ने लगा और मन ही मन पापा मम्मी का ये नया रूप देख कर पूरी बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी । बाहर गाना चालू था और रह रह कर मेरा मन ललचा रहा था ।
वक्त बीत रहा था और मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा था , हाथ भले न खाली हो लेकिन दिमाग पूरी तरह से बाहर लगा हुआ था
समझ नहीं आ रहा था क्या करु
तभी मेरी नजर बाथरूम की दूसरी बाल्टी पर गई और मैने झट से उसको उल्टा कर बाथरूम के दरवाजे के पास लगाया और बाथरूम के दरवाजे की जाली से बाहर देखने लगा

सामने बुआ अभी भी किचन से झांक ही रही थी और मम्मी पापा को तो जैसे किसी से कोई डर फिकर ही गई , नसे में सब मस्त थे और हस हस के नाच रहे थे


Gi-UHhwl-Xo-AAt-Rjs
: चीज देखते ही जोश मन में भर जाई हो ( मम्मी ने अपने ब्लाउज के दो हुक चटकाते हुए पापा की ओर बढ़ी ) सबकर पैसा लगवाल राजा तर जाए हो
मम्मी की हरकत पर बुआ ने तो अपना माथा पकड़ लिया और अगले ही पल पापा के गाने बोल दोहराते हुए अपने कंधे से गमछा एक हाथ से झटका
: तोहरा पावे ला पर्दा भी फाड़ दिहे हो ( एकदम उन्होंने उस गमछे को बीच से चीर दिया )

अरे साला ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है , और तभी देखा सामने बुआ वैसे ही ब्लाउज पेटीकोट में भागी आई और मम्मी को पकड़ कर किनारे करते हुए डांटने लगी , गाने की आवाज में उनकी आवाज साफ नहीं थी लेकिन एक परवाह भरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था
लेकिन मम्मी को कहा फर्क पड़ रहा था वो तो बुआ को पकड़ कर वापस खींच ली डांस करने के लिए लेकिन तबतक सब गाना खत्म हो गया था

: अरे दीदी नाचो न
: अरे तुम लोगो को कुछ लाज है कि नहीं रोहन बाथरूम में नहा रहा है और ये तुम क्या दिखा रही हो बंद करो ( बुआ ने मम्मी के ब्लाउज पकड़ कर उनको डांट लगाई )


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पापा एकदम से शांत हो गए और उनकी नजरे तो बस बुआ के हल्के गिले पेटीकोट पर थी बड़े भड़कीले चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ।

ऊऊऊ बड़ा ही कोल्ड मोमेंट हो गया था
: और तू विजय , नहाना नहीं है क्या
पापा ने बस मुस्कुरा दिया और सामने से बुआ की बड़ी बड़ी रसीली छातियां देखने लगे जो बड़ी मुश्किल से सेट हो रहे थे उनके ब्लाउज में । पापा बस चुपचाप अपने कमरे में चले गए
लेकिन यहां टीवी पर एक और गाना शुरू हो गया था ,

मै भी अब चुपचाप बाल्टी से उतरने का सोच रहा था क्योंकि शरीर का साबुन सुख रहा था

"चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी

चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी
मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी

: नहीं कुसुम मारूंगी अब तुझे , अरे हीही ( मै तो एक पैर वापस बाल्टी से उतार ही चुका था लेकिन जैसे ही बुआ की आवाज आई मेरा ध्यान वापस से हाल में )
: मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी ( मम्मी वापस से बुआ को पकड़ कर डांस करने लगी थी हस हस कर अपने कूल्हे उछालते हुए ) बस एक गाना दीदी बस एक

बुआ की दोनों कलाइयों को मम्मी ने पकड़ कर उठा रखा था और अपने कूल्हे से उनके चर्बीदार कूल्हे पर झटके दे रही थे , दोनो के कूल्हे टकराते लेकिन प्रतिक्रिया उन्होंने ढीले ब्लाउज में रसीले जोबनों पर देखने को मिलती खूब हिलकोरे खा कर दोनों की मुलायम छातियां हिलती ब्लाउज में
आखिर मम्मी बुआ को अपने रंग में मिला ही लिया और गाने की म्यूजिक पर बुआ के भी ठुमके लगने शुरू हो गए और इधर पापा उनके कमरे के दरवाजे के पास हाथ में तौलिया लिए खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे
मम्मी की नजर उनपर गई तो उन्होंने पापा को भी खींच ही लिया और एक हाथ से पापा का हाथ और दूसरे हाथ से बुआ का हाथ पकड़ उनके सामने नाचने लगी

"एह उमर बा प्यार करे के, डरबा कौने बात के
मिलल बा मौका मकैया में चला, लूटा लहर मुलाकात के"
मम्मी ने हस कर बुआ को इशारे किए, दोनो भाई बहन खूब शर्मा रहे थे और पापा के पजामे में एकदम टाइट तंबू साफ साफ दिखाई दे रहा था

: ले ला इनके अंकोरी में, रस पइबा राजा जी ( मम्मी ने बुआ को पकड़ कर पापा की ओर झटका और बुआ एक फिरकी घूम कर खुद को संभालते हुए पापा की बाहों में और उनके रसीले मम्मे हच्च से पापा के सीने पर धंस गए ) जेतना सटबा ओतना मस्ती मजा उठइबा राजा जी

मम्मी ने बुआ को पापा की ओर और धकेला और दोनों दिवाल से चिपक गए , ऐसा हुआ ही नहीं होगा कि पापा के कड़े लंड की ठोकर बुआ को अपने चूत या जांघ पर महसूस नहीं हुई हो ।
फिर मम्मी घूम कर पापा के पास खड़ी हो गई उनके कंधे पर हाथ रख कर , बुआ लाज के मारे मुस्कुराते हुए सीधी होने लगी

:चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी

चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी
मजा मारे इनके संगे ( बुआ को दिखा कर मम्मी मुस्कुरा कर गाना गाते हुए बोली ) , चला मकैया में राजा जी

: भक्क पागल हो तुम लोग , कमीनी कही की हट ( बुआ एकदम से लजा कर मम्मी के हाथ झटक पापा से अलग हो गई )

मम्मी एकदम से खिलखिला हसने लगी और पापा को पकड़ नीचे वही बैठ गई , देखता कोई उन्हें पागल ही समझता ऐसी हालत थी ।
मै मुस्कुरा रहा था और मेरा लंड भी
इधर मेरे देह का साबुन सुख गया था और पेशाब भी लगाने लगी थी कबसे गिले होने की वजह से

लेकिन तभी मम्मी और पापा के बीच कुछ हंसी ठिठौली हुई और मम्मी ने उन्हें आंखे दिखाई । पापा हस कर ना नुकूर कर रहे थे
साला अब क्या नया ड्रामा होने वाला था , एक भीतर की बेचैनी और दूसरी ओर पेशाब का जोर

मैने जल्दी से उतर कर अपना लंड हल्का कर दिया मोटी धार निकल पड़ी , उधर गाना वैसे ही बज रहा था लेकिन शांति थी

एकदम से हाल में हल्ला गुल्ला होने लगा और बुआ ने मुझे आवाज देना शुरू कर दिया

: रोहन हीही हाहाहाहाहा कुसुम नही मारूंगी अब ज्यादा हो रहा है , देख विजय छोड़ अह्ह्ह्ह
: हाहाहाहा होलीईईईईई हैएएएएए हीहेहेहे ( मम्मी की आवाज आई )
: बस बस हो गया कुसुम छोड़ दे ( पापा ने मम्मी को कहा )
: अरे दीदी लगवा लो न रात में तो मल मल के बुकवा लगवाई, थोड़ा आप भी लगाओ जी दीदी को
: क्या ?? नहीं विजय हीहीहेहे ( बुआ खिलखिलाई )


अबे क्या बवाल हो गया है मैने आंखों से साबुन हटा साफ कर दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा ही अलग था
मम्मी ने फिर से होली शुरू कर दी थी


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और पापा बुआ को पीछे से पकड़ कर खड़े थे , मम्मी ने अपने हाथों का गाढ़ा रंग पापा के हाथों में चिपका दिया और पापा ने पीछे से बुआ को दबोचे हुए बुआ के नंगे पेट पर हाथ रगड़ने लगे
बुआ बेबस खिलखिलाती रही हंसती रही , उनका मुंह पूरा हरा हो गया था

तभी बुआ ने एकदम से चिल्लाई : नहीं कुसुम लग जाएगा पैर छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह नहीं हीहीहीहेही छोड़ से हरामीन , पगला गई है क्या अह्ह्ह्ह्ह
मम्मी हंसते हुए बुआ की पेटीकोट में हाथ डाल कर उसके हाथ उनकी जांघें रंगने लगी

: रुक कामिनी तुझे बताती हूं अब
मम्मी खिलखिला कर हसने लगी और बुआ जबरन पापा से हाथ छुड़ा कर अलग हुए ओह साला पापा का लंड एकदम रॉड जैसे तना हुआ पजामे में और बुआ के गिले पेटीकोट में जितने अंदर धंसा था उतना दूर उनके सफेद पजामे पर बुआ के पेटीकोट का रंग पापा के पजामे पर चढ़ गया था ।
इधर बुआ मम्मी को पकड़ कर फर्श पर लेट गई और उनके ऊपर चढ़ कर अपने पेट का गाढ़ा रंग मम्मी के पेट पर मलने लगी


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मम्मी के ऊपर चढ़ने से बुआ की गाड़ पेटीकोट में और विस्तार ले चुकी थी और वही मैने पापा को देखा अपना लंड खुजाते हुए बुआ को पीछे से देख रहे थे
गिले पेटीकोट में उनकी पहाड़ जैसे भड़कीले चूतड़ों का सेप उभार और गोलाई साफ झलक रही थी यहां तक कि उनकी गहरे दरारें भी

फर्श पर बुआ और मम्मी की खिलखिलाती हाथापाई हो रही थी
मेरा लंड एकदम बगावत पर आ गया था

: नहीइइ दीदी फट जायेगा हीहीही हाहाहाहा
: तो फट जाने दे लेकिन तुझ ... बुआ ने हाथ आगे कर मम्मी ने ब्लाउज में जबरन हाथ घुसाने लगी
मम्मी खिलखिलाती हुई पापा का आवाज देने लगी
पापा भी मम्मी की मदद को आगे आए और पीछे से बुआ को पकड़ कर उठाने लगा पहले बाजुओं से पकड़ कर प्रयास किया लेकिन बुआ ने झटक दिया : छोड़ विजय मुझे ... इसकी मस्ती अभी बताती हूं

: अह्ह्ह्ह्ह दीदी हीहीहेहेहे , अरे पकड़ो न जी दीदी को ( मम्मी खिलखिला रही थी)
पापा ने दुबारा से बुआ को पेट के पास से पकड़ कर उठाना चाहा तो उनका हाथ फिसलने लगा और इस बार उन्होंने अपना पंजा ऊपर कर लिया और एकदम से उनके हाथों में बुआ के मोटे बड़े बड़े रसीले मम्में नंगे आ गए


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क्योंकि मम्मी के साथ हाथापाई ने कभी बुआ के ब्लाउज के हुक चटक गए उन्हें भनक ही नहीं थी

जैसे ही बुआ को अपने नंगे चूचों पर पापा के हाथों का स्पर्श मिला वो हिचक कर रुक गई और पापा ने मौका देख कर उन्हें पकड़ कर खींच दिया पीछे

मम्मी मौका पाकर अपनी खुली ब्लाउज को पकड़े हुए हसने लगी और सामने देखा तो बुआ के दोनों चूचों नंगे हवा में झूल रहे थे और उनके गोरे मोटे चूचों पर दोनों तरफ से पापा के पंजों के निशान छप गए थे


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पापा ने एक नजर बुआ को देखा और फिर नजरे फेर कर खिसक लिए बाहर ,शायद ऊपर वाले बाथरूम की ओर

इधर मम्मी खिलखिला कर हसी जा रही थी और ना चाहते हुए भी बुआ मम्मी को देख कर हस पड़ी क्योंकि उन्हें भी पता था इस पागलपंती में वो भी शामिल थी तो परिणाम जो भी हो .... होली है !!!!!


जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं होली के रंग फीके नहीं पड़ेंगे और न ही आपके सपोर्ट के रंग भी .... मन गदगद हुआ हो तो पढ़ने के बाद लाइक कमेंट जरूर करें .. इंतजार मुझे भी होता है 😁 )
Shandar update 🥰
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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UPDATE 019




होलीईईईईई हैएएएएए......

नीतू भाभी के साथ आई दूसरी औरतों ने भी मुझे घेर लिया था वही हाल में
किसी के हाथ मेरे टीशर्ट में थे तो किसी के गाल और बालों पर
" अरे नहीं भाभी हीहीहेहे वहा नहीं " , मै ऐंठने लगा क्योंकि उन औरतों में से एक ने मेरे लोवर को पीछे से लास्टिक खींच कर चूतड़ को लाल कर दिया था

" आराम से रहो नहीं तो खड़े खड़े तुम्हारी बहनिया पेल दूंगी " , नीतू भाभी अबीर से नहाई हुई थी और उनके खिले चेहरे , मस्ती में मुझे घूरती कातिल निगाहे
शिफॉन की साड़ी में ढीली ब्लाउज और गहरे गले की ब्लाउज से झांकते चूचे अबीर गुलाल से सन कर और भी मुलायम जान पड़ रहे थे


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" सीई देखो बहनचोद को अभी भी खूंटा टाइट है इसका ", नीतू भाभी ने मुझे दिवाल से चिपका कर लोवर में झूल रहे लंबी पिचकारी को को देख कर बोली

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, लेकिन मेरी निगाहे तो उनकी गुदाज चर्बीदार मोटी रसीली चुचियों पर था

" लेना है ? " , वही पुराने अंदाज में नीतू भाभी ने फिर से आग्रह किया और मै मुस्कुरा उठा । सालों पहले उनकी रसीली छातियां मुंह में भर कर उनके दूध का स्वाद लिया था और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा ।
मुस्कुरा कर मैने मम्मी बुआ को देखा जो दूसरे औरतों के साथ व्यस्त थी और शरारती नजरो से हुंकारी भर दी
अगले ही पल मेरी कालर पकड़ कर सीधा मेरा मुंह अपनी छाती में रगड़ दिया और उनके छातियों पर लगे अबीर से मेरा चेहरा रंगीन हो गया और मौका देखकर हाथ बढ़ा कर उन्होंने लोवर के ऊपर से मेरा लंड दबोच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह भाभी आराम से
: बहनचोद आज नहीं आए न तो पक्का तुम्हारी बहिनिया को रंडी बनवाऊंगी अगली होली में , समझे ...ठीक 03 बजे

एक आखिरी अल्टीमेटम देकर उसने मेरे आड़ छोड़ दिए और पूरे जिस्म में सिहरन थी और मेरी नजर उसकी हल्की गुलाबी साड़ी में थिरकते चूतड़ों पर गई , कातिल चीज थी नीतू भाभी
इनके जिस्म की असल नुमाइश तो इन्हें भीगा कर करने में थी और मैने उन्हें इशारा किया कि आपकी इकलौती ननद और मेरी बहन छत पर है दबोच लो
होली भाभियों को दो ही तो चाहिए एक देवर दूसरी कमसीन नन्द , उन्हें उनके रसीले मम्मे गुलाबी करने में मजा आता है और मुझे ऐसे सिन देखने में ।

पानी वाले रंगों के लिए मम्मी ने पहले से डायरेक्शन दे दिए थे कि होली छत पर ही होगी तो मैने भी अपने हथियार कर रखे थे
बुआ को जैसे ही भनक हुई कि लोग ऊपर जा रहे है तो मम्मी भी उनके साथ ऊपर हो ली
पापा हाल में सोफे पर बैठे थे अबीर से सराबोर, उन्हें भी मुहल्ले की औरतों ने खूब रंगा और मुझे बोलकर बाहर चले गए दोस्तो से मिलने ।
मैने भी रूम से गहरे वाला पक्का रंग निकाला और हाल का दरवाजा बंद कर ऊपर टैरिस पर
खूब हल्ला गुल्ला मचा हुआ था
बबली के ऊपर क्या नीचे क्या , नीतू भाभी तो अगुवा कर रंग कम रही थी और रगड़ ज्यादा

: हाय राम मेरी बच्ची ( बुआ उसकी हालत देख कर घबराई )
: अरे होली है दीदी क्या तुम भी ( मम्मी ने उन्हें शांत किया )
: मम्मी ??
: हा क्या हुआ
मैने उन्हें पक्के रंग का पैकेट दिखाया और मम्मी मुस्कुरा उठी
मै झट से बाथरूम में बाल्टी में पानी में घोलना शुरू किया और एक लंबी पिचकारी में भर
: आज इस नाउन की पतोह को छोड़ना नहीं है
: अरे बिल्कुल ( मैने हस कर मम्मी की बात का जवाब दिया और औरतों की झुंड की ओर लपका )


भाभीईईईई ...
मै जोर से पिचकारी उठा कर चिल्लाया
एकदम से नीतू भाभी ने हमे देखा
मै मम्मी और बुआ तीनों के हाथों में लंबी बड़ी पिचकारी ,, सामने मुहल्ले की दूसरों औरतों का झुंड

जीने का दरवाजा भी बंद और बगल के ही एक हांडे में भरपूर गहरा पक्का रंग
सब जान गए कि मैने उन्हें अच्छे से उल्लू बनाया
हल्ला गुल्ला जोरो पर था

" मम्मीईईई अटैक हाहाहाहाहा"
बुआ और मम्मी ने एक साथ पिचकारी दागी और मै भी उन औरतों की ओर तान दिया लेकिन मेरा निशाना नीतू भाभी थी
शातिर थी बड़ी चालाक , खींच कर बबली दीदी को ढाल बना कर अपने आगे कर दिया


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छरछरा कर ठंडे पानी की बौछार उनके मोटे नारियल जैसे चूचों पर चल गई : रोहन!!!!!
दीदी खिलखिला कर चिल्लाई
" उप्स सॉरी"
मैने वापस से अपनी पिचकारी लोड की और भाभी बचती हुई दिखी मैने भी उन्हें पीछे की ओर दौड़ा लिया

" अह नहीं रोहन बाबू ठंडा है अह्ह्ह्ह हीहीहीही रुको न "
वो खिलखिलाती हुई हाथ आगे कर रंगो की पिचकारी रोकने का प्रयास की लेकिन मेरा निशाना अचूक था


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चट्ट चट्ट कर 3 4 मोटी धार मैने सीधे उन्हें गुलगुले चूचों पर मारे पूरी साड़ी ट्रांसपेरेंट सी हो गई , अंदर से ब्लाउज दिखने लगी और ठंडे पानी की सिहरन ने निप्पल तान दिए

: आहुच मम्मी... सीईईई ( पंजों से उन्होंने अपनी छाती पकड़ ली और मै खिलखिलाया )
लेकिन अब भागने की बारी मेरी थी
उधर मुहल्ले की औरतें वापस मम्मी बुआ पर भारी पड़ गई थी
: बहिनचोद भाग कहा रहे हो
उन्होंने मुझे पकड़ कर वही बिठा दिया और हांडे से जग में भर भर मुझे नहलाने लगी
तबतक बबली दीदी आई और एकदम से मेरे ऊपर रंग गिरना बंद हुआ
बबली ने नीतू भाभी के चेहरे को हरा कर दिया और मैने भी उन्हें खींच कर नीचे लिटा दिया और रंगीन पानी गिराने लगा , कभी उनके चूचों पर तो कभी पेट पर । पल्लू तो सीने से ऐसे चिपका था कि मालूम हो रहा था कि है ही नहीं
वो छटपटाती खिलखिलाती रही और बुआ मम्मी मेरी हरकत देख रही थी
बबली ने मुझे इशारा किया और मै चुप हो गया
रंग खत्म हो गया , बाल्टियां हांडे सब खाली
हंसी ठिठौली चालू थी
रंगो से सब सराबोर हो गए
मम्मी बुआ की साड़ी भी देह से एकदम चिपक गई थी ,


कुछ औरतें बाथरूम में मुंह धूल रही थी कुछ पाइप से
मेरी निगाहे नीतू भाभी पर , अपनी शिफॉन की साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी , असल हुस्न का दीदार तो अब हुआ था उनका , रसीले मम्में और चूतड़ एकदम शेप में देख रहे थे साड़ी भीग कर लगभग ट्रांसपेरेंट हो गई थी


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और रंगीन चेहरे पर मुस्कुराहट अलग ही खिल रही थी
मम्मी बुआ रेलिंग के पास खड़े होकर मुहल्ले की नुक्कड़ पर लगी डीजे पर नाचते टाऊन के फूहड़ों को देख रही थी । बबली दीदी बाथरूम में अपने बाल धूल रही थी , असल में ऐसा रंग उन्होंने पहले कभी खेला ही नहीं था
मम्मी बुआ बिंदास थी और मुझे अब भूख भी लग रही थी लेकिन नीतू भाभी की शरारती मुस्कुराहट और गीली जवानी को ताड़ना कैसे छोड़ सकता था ।

: बहनचोद ( वो बुदबुदाई और मै मुस्कुराया )
आज तो उनकी गाली ने हर बार मेरे लंड में जोश भरने का काम किया था । कुछ अलग ही तलब थी , शायद बबली दीदी के साथ हुए कल रात की कहानी ने मुझ में बदलाव ला दिए थे ।
थोड़ी देर सब लोग सूखने लगे , दोपहर चढ़ रही थी और मम्मी सबको नीचे ले कर आई नाश्ते के लिए, बबली दीदी अपने कपड़े लेकर चली गई नहाने के लिए उन्हें अपने देह से रंग छुड़ाना ज्यादा जरूरी लगा , बजाय कि गपशप के ।

मिठाइयों का दौर शुरू हो गया, कुछ मम्मी ने अपने हाथों की बनी खिलाई तो कुछ उन औरतों ने अपने डिब्बे से मम्मी को
मै भी लपक कर उन्हीं डिब्बों से मिठाई उठाने का सोचा कि नीतू भाभी ने हाथ पकड़ लिया और ना में इशारा किया , बुआ उस वक्त किचन ने चाय बना रही थी
इशारा साफ था मिठाई भांग वाली थी और आज नीतू भाभी कोई बहाना नहीं चाह रही थी
चाय नाश्ते का दौर खत्म होते ही बाकी सब चली गई और जाते हुए नीतू भाभी ने आंखों से वार्निंग दे दी मुझे
कमरे आया तो देखा मम्मी वापस से उसी डिब्बे की मिठाई गपक ली
: अरे दीदी लो न
मैने झपट कर मम्मी के हाथ से डिब्बा ले लिया
: अरे क्या हुआ
: अरे मम्मी भांग वाली है
: धत्त मैने तो 3 खाई है ऐसा तो कुछ नहीं हुआ मुझे ( उनकी स्माइल बड़ी हो रही थी और फिर भौहें टाइट कर उन्होंने बुआ को देखा ) दीदी आपको कुछ हुआ क्या ?
: मैने तो नहीं खाई .. ला देखूं ( बुआ ने हाथ बढ़ाया लेकिन मैने डिब्बा बंद कर दिया )
: अरे रोहन !!!
: नहीं बुआ ये नहीं ( मैने हाथ पीछे कर उसे किचन में रख दिया ऊपर रैक पर )
बुआ मेरे पास आई
: क्या ये सच में भांग वाली है
: उधर देखो उनको हीही ( मैने उन्हें मम्मी की ओर दिखाया जो अजीब सा मुंह बना कर डकार लेते हुए कमर पर हाथ रख कर रिमोट से टीवी चला रही थी । )
: हैं? अरे भगवान् अब क्या होगा ( बुआ घबड़ाई )
: भांगड़ा हाहा ( मै हस कर बोला और उधर मम्मी ने गाना लगा दिया ) हर साल पापा करते थे इस साल मम्मी हीहीही

टीवी पर होली के भोजपुरी गाने चालू हो गए और मम्मी टहलती हुई किचन में

: क्या हुआ तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो ? ( मम्मी ने हस कर कहा )
हम बस शांत थे , बुआ किचन में भीड़ कर पूरी निकालने के लिए क्योंकि मुझे भूख लगी थी

: अरे तो जा नहा ले ऐसे खायेगा क्या ( मम्मी के भाव पर अब ओवर रिएक्शन से जाहिर हो रहे थे )
: कुसुम !!! क्या चिल्ला रही है ( बुआ ने डांटा तो मम्मी उनको पीछे से पकड़ने लगी टीवी पर चल रही भोजपुरी गाने की लिरिक्स को दोहराते हुए

: झूठार देहले राजा जी , चढल जवानी के दहिया
: धत्त हट छोड़ मुझे ( बुआ एकदम से मम्मी के चिपकने और उन्हें सहलाने से शर्माने लगी उसपर से वो गाना )
: झूठार देहले राजा जी अपने बहिन के जवानियां हीहीहीही हाहाहा

अजीब सी क्रिपि हंसी थी मम्मी की और ये तो बस शुरुआत था
बुआ असहज होकर मुझे देख रहे थी और हम समझ रहे थे कि आज बड़ा हंगामा होकर रहेगा ।

: सीईई अह्ह्ह दीदी सच में भांग वाली थी क्या हाहाहा उफ्फ सर पकड़ रहा है अब तो
हम चुप थे और बुआ पुरिया बेल रही थी
: रोहन
: हा मम्मी ?
: बेटा तू सही कह रहा था थोड़ा तेल लगा देगा सर में
: अरे ऐसे कैसे बाल धुलने पड़ेंगे न ?
: अच्छा बाम लगा दे बेटा उफ्फ फड़क रहा पूरा सर
मुझे यही सही लगा और मैने उन्हें हाल में सोफे पर बैठा कर उनके सर पर बाम लगा कर मालिश की , उन्हें थोड़ा आराम हुआ लेकिन भांग का असर हर बीतते पल के साथ बढ़ ही रहा था ।

: रोहन !!
: जी मम्मी ?
: वो जरा अपने पापा का गमछा देना ( उन्होंने हाल के वाल हैंगर पर टंगे पापा के गमछे की ओर देख कर कहा )
मैने उन्हें दिया और वो उन्होंने अपने सर पर अच्छे से लपेट दिया
: अह्ह्ह्ह्ह अब गर्माहट है और ठीक भी
: तो मै नहाने जाऊ
: हा नहा ले बेटा
मै नहाने के लिए अपने कमरे से कपड़े निकाले और इधर एकदम से हाल में टीबी का वॉल्यूम बढ़ गया और गाना भी एकदम ऐसा ही नाचने से खुद को रोक ही न पाओ

लूटा ऐ राजा, लूटा ऐ राजा

मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लुटा ए राजा



तभी बुआ के खिलखिलाने की आवाज आई और मै अपने बैग से कपड़े निकाल रहा था
" अरे कुसुम छोड़ न तेल जल रहा है हीही "

मेरे दिमाग में भी चूल होने लगी कि साला असल में बाहर क्या बवाल हो रहा है और फिर गाने की धुन ही ऐसे थे कि मस्ती में पूरा तन मन झूम रहा था मै झट से बाहर आया

"धरा न कमरिया में बड़ा मजा पाईबा
होठवा से होठवा तू जेतने सताइवा"

: हीही मार खाएगी कुसुम उम्ममम छोड़ मुझे हाहाहा ( बाहर आया तो देखा बुआ को मम्मी ने बाहों में भर रखा था और उनके लिप्स से अपने लिप्स लगाने की कोशिश कर रही थी और हस रहे थी )
: मस्ती में मन डोली जैसे खोलवा चोली ( मम्मी गाने के बोल चिल्लाते हुए बुआ के चूचों पर हाथ फिराने लगी और घुमा कर पीछे से पकड़ लिया) बटनिया बटनिया बटनिया खोला ऐ राजा
बटनिया खोला ऐ राजा
: अह्ह्ह्ह भक्क कुसुम छोड़ मुझे पगला गई है क्या हीही ( बुआ हस भी रही थी और अपने सीने पर ब्लाउज को पकड़े हुए थी लेकिन मम्मी की जबरजतसी नहीं रुकने वाली थी )

डर था कही मम्मी फाड़ ही न दे बुआ का ब्लाउज और नहीं कुछ हाथ आया तो उनकी साड़ी पकड़ कर खींच ली और गाने के बोल को दोहराते हुए नचाने लगी बुआ को पकड़ा कर

उफ्फ बुआ इस वक्त ब्लाउज पेटीकोट में आ गई थी , बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी और चर्बीदार थुलथुले कूल्हे पेटीकोट में खूब थिरक रहे थे
लंड वापस से अपना आकार लेना शुरू कर चुका था और तभी हाल का दरवाजा खुला और एकदम से पापा आ गए

बुआ ने अपने आप को इस हाल में देखा और झट से अपनी साड़ी उठा कर किचन में भागी

पापा आए और अगले ही पल उनके मुस्कुराहट ने बता दिया कि वो भी अपना डोज लेकर आए थे

: हो गया कल्याण अब ( मै खुद से बुदबुदा कर आया था )
मम्मी को नाचता देख पापा भी अपने कमर और सर पर हाथ रख कर मम्मी के साथ ठुमके लगाने लगे
लेकिन अभी तो स्थिति और फूहड़ होने वाली थी

: धड़के ला धक धक तोहरे ला छतिया ( मम्मी ने अपने छातियों पर हाथ रख गाने के स्टेप किए ) करा ऐ राजा तनि प्यार वाली बतिया ( फिर पापा से लिपट ही गई )
मम्मी तो जाने गाने की हीरोइन मोनालिसा ही बन गई थी , वही बोल्ड अंदाज वैसे ही डांस स्टेप या कुछ ज्यादा ही अश्लील

: ढिबरिया भुता दा ऐ राजा
कइ द अन्हर कोठरिया लहरिया लूटा ऐ राजा ( मम्मी ने अपने सर का गमछा खोलकर खुद को और पापा को उढ़ा लिया )
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा


सामने नजर गई तो उसपार से बुआ खड़ी थी किचन से झांक रही थी और इधर बाथरूम के पास मै
बीच हाल में उन दोनों ने गमछे में छिपकर एक दूसरे को चूमने लगे थे

इधर जैसे ही मेरी नजर बुआ से मिली मै मुस्कुरा कर उन्हें देखा और उन्होंने मुझे
बस फिर मै बाथरूम में चला गया लेकिन हंगामा अभी थमा नहीं था ... ये तो बस शुरुआत थी
मैने बाथरूम में पानी चालू कर कपड़े निकालने लगा और दरवाजा लगा दिया
इधर टीवी पर एक और गाना लग चुका था ... मुझे गाने की म्यूजिक से कुछ कुछ गाने का अंदेशा हो रहा था लेकिन टोटी से पानी बाल्टी में गिरने की आवाज से आवाज उतनी साफ नहीं थी , फिर पास में मोटर भी चालू था , अभी 4 5 मग पानी मैने अपने ऊपर डाला ही था कि गाने की बढ़ती म्यूजिक ने मुझे थोड़ा सा और रिझाया

मैने झट से टोटी ऑफ की ओर गाने की आवाज आई
गाना भी सुपरहिट था , खेसारीलाल यादव का "लहंगा उठावल पड़ी महंगा "

पढ़े वाला खातिर लभ के पढ़ाई हाऊ

पोखरा में बिछलाये वाला काई हाउ
लइकन के चूसनी , जवनकन के मिसनी

तू तो बूढ़वन के आंख के दवाई हाउ


साला लिरिक्स ऐसे थे कि दिल गार्डेन गार्डेन हुआ जा रहा था , ये सोच कर कि इस गाने पर बाहर क्या माहौल मचा होगा , लेकिन पानी डालने से रंग मेरे देह पर फैलने लगा और उधर गाना चालू हो गया था

मैने झट से पूरी बाल्टी पानी उठा कर अपने देह पर उड़ेल ली और हौले से दरवाजा खोला तो
गाना फुल वॉल्यूम पर मेरे कानो को हिट किया और आंखे सामने के नजारे देख कर चमक उठी


: चुनरी हटाई का ( मम्मी ने अपने छातियों से पल्लू झटका और अपनी कमर को ऐसे बलखाया फिर वो का बयां नहीं कर सकता था ) चीज कुछ दिखाई का ( उन्होंने अपने जबरजस्त जोबन को ब्लाउज में पापा के सामने लहराया )

उफ्फ पापा ने तो लपक कर मम्मी की साड़ी पकड़नी चाही तो मम्मी पूरा नाच गई फिरकी की तरह और उनकी साड़ी पूरी फर्श पर और पापा ने उनको अपनी बाहों में झुला दिया और हैरत की बात थी कि पापा को गाने के बोल डिट्टो याद थे
मम्मी सही कहती थी पापा बड़े छुपा रुस्तम है बस दिखाते नहीं है लेकिन रोमांस भरा पड़ा है उनमें

: ऐसे उठाईबु जब लहंगा ( सीईईई पापा ने तो मम्मी का पेटीकोट उठाने लगे पीछे से ) हंगामा पूरा हाल में होई
मम्मी की जांघें पीछे से दिखने लगी थी और पापा ने पजामे में बड़ा सा तंबू बन गया था । तभी सामने नजर गई तो बुआ भी किचन से झांक रही थी और मैने झट से अंदर हो गया ।


फटाफट से पानी डाल कर अपना बदन रगड़ने लगा और मन ही मन पापा मम्मी का ये नया रूप देख कर पूरी बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी । बाहर गाना चालू था और रह रह कर मेरा मन ललचा रहा था ।
वक्त बीत रहा था और मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा था , हाथ भले न खाली हो लेकिन दिमाग पूरी तरह से बाहर लगा हुआ था
समझ नहीं आ रहा था क्या करु
तभी मेरी नजर बाथरूम की दूसरी बाल्टी पर गई और मैने झट से उसको उल्टा कर बाथरूम के दरवाजे के पास लगाया और बाथरूम के दरवाजे की जाली से बाहर देखने लगा

सामने बुआ अभी भी किचन से झांक ही रही थी और मम्मी पापा को तो जैसे किसी से कोई डर फिकर ही गई , नसे में सब मस्त थे और हस हस के नाच रहे थे


Gi-UHhwl-Xo-AAt-Rjs
: चीज देखते ही जोश मन में भर जाई हो ( मम्मी ने अपने ब्लाउज के दो हुक चटकाते हुए पापा की ओर बढ़ी ) सबकर पैसा लगवाल राजा तर जाए हो
मम्मी की हरकत पर बुआ ने तो अपना माथा पकड़ लिया और अगले ही पल पापा के गाने बोल दोहराते हुए अपने कंधे से गमछा एक हाथ से झटका
: तोहरा पावे ला पर्दा भी फाड़ दिहे हो ( एकदम उन्होंने उस गमछे को बीच से चीर दिया )

अरे साला ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है , और तभी देखा सामने बुआ वैसे ही ब्लाउज पेटीकोट में भागी आई और मम्मी को पकड़ कर किनारे करते हुए डांटने लगी , गाने की आवाज में उनकी आवाज साफ नहीं थी लेकिन एक परवाह भरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था
लेकिन मम्मी को कहा फर्क पड़ रहा था वो तो बुआ को पकड़ कर वापस खींच ली डांस करने के लिए लेकिन तबतक सब गाना खत्म हो गया था

: अरे दीदी नाचो न
: अरे तुम लोगो को कुछ लाज है कि नहीं रोहन बाथरूम में नहा रहा है और ये तुम क्या दिखा रही हो बंद करो ( बुआ ने मम्मी के ब्लाउज पकड़ कर उनको डांट लगाई )


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पापा एकदम से शांत हो गए और उनकी नजरे तो बस बुआ के हल्के गिले पेटीकोट पर थी बड़े भड़कीले चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ।

ऊऊऊ बड़ा ही कोल्ड मोमेंट हो गया था
: और तू विजय , नहाना नहीं है क्या
पापा ने बस मुस्कुरा दिया और सामने से बुआ की बड़ी बड़ी रसीली छातियां देखने लगे जो बड़ी मुश्किल से सेट हो रहे थे उनके ब्लाउज में । पापा बस चुपचाप अपने कमरे में चले गए
लेकिन यहां टीवी पर एक और गाना शुरू हो गया था ,

मै भी अब चुपचाप बाल्टी से उतरने का सोच रहा था क्योंकि शरीर का साबुन सुख रहा था

"चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी

चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी
मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी

: नहीं कुसुम मारूंगी अब तुझे , अरे हीही ( मै तो एक पैर वापस बाल्टी से उतार ही चुका था लेकिन जैसे ही बुआ की आवाज आई मेरा ध्यान वापस से हाल में )
: मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी ( मम्मी वापस से बुआ को पकड़ कर डांस करने लगी थी हस हस कर अपने कूल्हे उछालते हुए ) बस एक गाना दीदी बस एक

बुआ की दोनों कलाइयों को मम्मी ने पकड़ कर उठा रखा था और अपने कूल्हे से उनके चर्बीदार कूल्हे पर झटके दे रही थे , दोनो के कूल्हे टकराते लेकिन प्रतिक्रिया उन्होंने ढीले ब्लाउज में रसीले जोबनों पर देखने को मिलती खूब हिलकोरे खा कर दोनों की मुलायम छातियां हिलती ब्लाउज में
आखिर मम्मी बुआ को अपने रंग में मिला ही लिया और गाने की म्यूजिक पर बुआ के भी ठुमके लगने शुरू हो गए और इधर पापा उनके कमरे के दरवाजे के पास हाथ में तौलिया लिए खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे
मम्मी की नजर उनपर गई तो उन्होंने पापा को भी खींच ही लिया और एक हाथ से पापा का हाथ और दूसरे हाथ से बुआ का हाथ पकड़ उनके सामने नाचने लगी

"एह उमर बा प्यार करे के, डरबा कौने बात के
मिलल बा मौका मकैया में चला, लूटा लहर मुलाकात के"
मम्मी ने हस कर बुआ को इशारे किए, दोनो भाई बहन खूब शर्मा रहे थे और पापा के पजामे में एकदम टाइट तंबू साफ साफ दिखाई दे रहा था

: ले ला इनके अंकोरी में, रस पइबा राजा जी ( मम्मी ने बुआ को पकड़ कर पापा की ओर झटका और बुआ एक फिरकी घूम कर खुद को संभालते हुए पापा की बाहों में और उनके रसीले मम्मे हच्च से पापा के सीने पर धंस गए ) जेतना सटबा ओतना मस्ती मजा उठइबा राजा जी

मम्मी ने बुआ को पापा की ओर और धकेला और दोनों दिवाल से चिपक गए , ऐसा हुआ ही नहीं होगा कि पापा के कड़े लंड की ठोकर बुआ को अपने चूत या जांघ पर महसूस नहीं हुई हो ।
फिर मम्मी घूम कर पापा के पास खड़ी हो गई उनके कंधे पर हाथ रख कर , बुआ लाज के मारे मुस्कुराते हुए सीधी होने लगी

:चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी

चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी
मजा मारे इनके संगे ( बुआ को दिखा कर मम्मी मुस्कुरा कर गाना गाते हुए बोली ) , चला मकैया में राजा जी

: भक्क पागल हो तुम लोग , कमीनी कही की हट ( बुआ एकदम से लजा कर मम्मी के हाथ झटक पापा से अलग हो गई )

मम्मी एकदम से खिलखिला हसने लगी और पापा को पकड़ नीचे वही बैठ गई , देखता कोई उन्हें पागल ही समझता ऐसी हालत थी ।
मै मुस्कुरा रहा था और मेरा लंड भी
इधर मेरे देह का साबुन सुख गया था और पेशाब भी लगाने लगी थी कबसे गिले होने की वजह से

लेकिन तभी मम्मी और पापा के बीच कुछ हंसी ठिठौली हुई और मम्मी ने उन्हें आंखे दिखाई । पापा हस कर ना नुकूर कर रहे थे
साला अब क्या नया ड्रामा होने वाला था , एक भीतर की बेचैनी और दूसरी ओर पेशाब का जोर

मैने जल्दी से उतर कर अपना लंड हल्का कर दिया मोटी धार निकल पड़ी , उधर गाना वैसे ही बज रहा था लेकिन शांति थी

एकदम से हाल में हल्ला गुल्ला होने लगा और बुआ ने मुझे आवाज देना शुरू कर दिया

: रोहन हीही हाहाहाहाहा कुसुम नही मारूंगी अब ज्यादा हो रहा है , देख विजय छोड़ अह्ह्ह्ह
: हाहाहाहा होलीईईईईई हैएएएएए हीहेहेहे ( मम्मी की आवाज आई )
: बस बस हो गया कुसुम छोड़ दे ( पापा ने मम्मी को कहा )
: अरे दीदी लगवा लो न रात में तो मल मल के बुकवा लगवाई, थोड़ा आप भी लगाओ जी दीदी को
: क्या ?? नहीं विजय हीहीहेहे ( बुआ खिलखिलाई )


अबे क्या बवाल हो गया है मैने आंखों से साबुन हटा साफ कर दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा ही अलग था
मम्मी ने फिर से होली शुरू कर दी थी


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और पापा बुआ को पीछे से पकड़ कर खड़े थे , मम्मी ने अपने हाथों का गाढ़ा रंग पापा के हाथों में चिपका दिया और पापा ने पीछे से बुआ को दबोचे हुए बुआ के नंगे पेट पर हाथ रगड़ने लगे
बुआ बेबस खिलखिलाती रही हंसती रही , उनका मुंह पूरा हरा हो गया था

तभी बुआ ने एकदम से चिल्लाई : नहीं कुसुम लग जाएगा पैर छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह नहीं हीहीहीहेही छोड़ से हरामीन , पगला गई है क्या अह्ह्ह्ह्ह
मम्मी हंसते हुए बुआ की पेटीकोट में हाथ डाल कर उसके हाथ उनकी जांघें रंगने लगी

: रुक कामिनी तुझे बताती हूं अब
मम्मी खिलखिला कर हसने लगी और बुआ जबरन पापा से हाथ छुड़ा कर अलग हुए ओह साला पापा का लंड एकदम रॉड जैसे तना हुआ पजामे में और बुआ के गिले पेटीकोट में जितने अंदर धंसा था उतना दूर उनके सफेद पजामे पर बुआ के पेटीकोट का रंग पापा के पजामे पर चढ़ गया था ।
इधर बुआ मम्मी को पकड़ कर फर्श पर लेट गई और उनके ऊपर चढ़ कर अपने पेट का गाढ़ा रंग मम्मी के पेट पर मलने लगी


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मम्मी के ऊपर चढ़ने से बुआ की गाड़ पेटीकोट में और विस्तार ले चुकी थी और वही मैने पापा को देखा अपना लंड खुजाते हुए बुआ को पीछे से देख रहे थे
गिले पेटीकोट में उनकी पहाड़ जैसे भड़कीले चूतड़ों का सेप उभार और गोलाई साफ झलक रही थी यहां तक कि उनकी गहरे दरारें भी

फर्श पर बुआ और मम्मी की खिलखिलाती हाथापाई हो रही थी
मेरा लंड एकदम बगावत पर आ गया था

: नहीइइ दीदी फट जायेगा हीहीही हाहाहाहा
: तो फट जाने दे लेकिन तुझ ... बुआ ने हाथ आगे कर मम्मी ने ब्लाउज में जबरन हाथ घुसाने लगी
मम्मी खिलखिलाती हुई पापा का आवाज देने लगी
पापा भी मम्मी की मदद को आगे आए और पीछे से बुआ को पकड़ कर उठाने लगा पहले बाजुओं से पकड़ कर प्रयास किया लेकिन बुआ ने झटक दिया : छोड़ विजय मुझे ... इसकी मस्ती अभी बताती हूं

: अह्ह्ह्ह्ह दीदी हीहीहेहेहे , अरे पकड़ो न जी दीदी को ( मम्मी खिलखिला रही थी)
पापा ने दुबारा से बुआ को पेट के पास से पकड़ कर उठाना चाहा तो उनका हाथ फिसलने लगा और इस बार उन्होंने अपना पंजा ऊपर कर लिया और एकदम से उनके हाथों में बुआ के मोटे बड़े बड़े रसीले मम्में नंगे आ गए


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क्योंकि मम्मी के साथ हाथापाई ने कभी बुआ के ब्लाउज के हुक चटक गए उन्हें भनक ही नहीं थी

जैसे ही बुआ को अपने नंगे चूचों पर पापा के हाथों का स्पर्श मिला वो हिचक कर रुक गई और पापा ने मौका देख कर उन्हें पकड़ कर खींच दिया पीछे

मम्मी मौका पाकर अपनी खुली ब्लाउज को पकड़े हुए हसने लगी और सामने देखा तो बुआ के दोनों चूचों नंगे हवा में झूल रहे थे और उनके गोरे मोटे चूचों पर दोनों तरफ से पापा के पंजों के निशान छप गए थे


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पापा ने एक नजर बुआ को देखा और फिर नजरे फेर कर खिसक लिए बाहर ,शायद ऊपर वाले बाथरूम की ओर

इधर मम्मी खिलखिला कर हसी जा रही थी और ना चाहते हुए भी बुआ मम्मी को देख कर हस पड़ी क्योंकि उन्हें भी पता था इस पागलपंती में वो भी शामिल थी तो परिणाम जो भी हो .... होली है !!!!!


जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं होली के रंग फीके नहीं पड़ेंगे और न ही आपके सपोर्ट के रंग भी .... मन गदगद हुआ हो तो पढ़ने के बाद लाइक कमेंट जरूर करें .. इंतजार मुझे भी होता है 😁 )
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Deepaksoni

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UPDATE 019




होलीईईईईई हैएएएएए......

नीतू भाभी के साथ आई दूसरी औरतों ने भी मुझे घेर लिया था वही हाल में
किसी के हाथ मेरे टीशर्ट में थे तो किसी के गाल और बालों पर
" अरे नहीं भाभी हीहीहेहे वहा नहीं " , मै ऐंठने लगा क्योंकि उन औरतों में से एक ने मेरे लोवर को पीछे से लास्टिक खींच कर चूतड़ को लाल कर दिया था

" आराम से रहो नहीं तो खड़े खड़े तुम्हारी बहनिया पेल दूंगी " , नीतू भाभी अबीर से नहाई हुई थी और उनके खिले चेहरे , मस्ती में मुझे घूरती कातिल निगाहे
शिफॉन की साड़ी में ढीली ब्लाउज और गहरे गले की ब्लाउज से झांकते चूचे अबीर गुलाल से सन कर और भी मुलायम जान पड़ रहे थे


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" सीई देखो बहनचोद को अभी भी खूंटा टाइट है इसका ", नीतू भाभी ने मुझे दिवाल से चिपका कर लोवर में झूल रहे लंबी पिचकारी को को देख कर बोली

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, लेकिन मेरी निगाहे तो उनकी गुदाज चर्बीदार मोटी रसीली चुचियों पर था

" लेना है ? " , वही पुराने अंदाज में नीतू भाभी ने फिर से आग्रह किया और मै मुस्कुरा उठा । सालों पहले उनकी रसीली छातियां मुंह में भर कर उनके दूध का स्वाद लिया था और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा ।
मुस्कुरा कर मैने मम्मी बुआ को देखा जो दूसरे औरतों के साथ व्यस्त थी और शरारती नजरो से हुंकारी भर दी
अगले ही पल मेरी कालर पकड़ कर सीधा मेरा मुंह अपनी छाती में रगड़ दिया और उनके छातियों पर लगे अबीर से मेरा चेहरा रंगीन हो गया और मौका देखकर हाथ बढ़ा कर उन्होंने लोवर के ऊपर से मेरा लंड दबोच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह भाभी आराम से
: बहनचोद आज नहीं आए न तो पक्का तुम्हारी बहिनिया को रंडी बनवाऊंगी अगली होली में , समझे ...ठीक 03 बजे

एक आखिरी अल्टीमेटम देकर उसने मेरे आड़ छोड़ दिए और पूरे जिस्म में सिहरन थी और मेरी नजर उसकी हल्की गुलाबी साड़ी में थिरकते चूतड़ों पर गई , कातिल चीज थी नीतू भाभी
इनके जिस्म की असल नुमाइश तो इन्हें भीगा कर करने में थी और मैने उन्हें इशारा किया कि आपकी इकलौती ननद और मेरी बहन छत पर है दबोच लो
होली भाभियों को दो ही तो चाहिए एक देवर दूसरी कमसीन नन्द , उन्हें उनके रसीले मम्मे गुलाबी करने में मजा आता है और मुझे ऐसे सिन देखने में ।

पानी वाले रंगों के लिए मम्मी ने पहले से डायरेक्शन दे दिए थे कि होली छत पर ही होगी तो मैने भी अपने हथियार कर रखे थे
बुआ को जैसे ही भनक हुई कि लोग ऊपर जा रहे है तो मम्मी भी उनके साथ ऊपर हो ली
पापा हाल में सोफे पर बैठे थे अबीर से सराबोर, उन्हें भी मुहल्ले की औरतों ने खूब रंगा और मुझे बोलकर बाहर चले गए दोस्तो से मिलने ।
मैने भी रूम से गहरे वाला पक्का रंग निकाला और हाल का दरवाजा बंद कर ऊपर टैरिस पर
खूब हल्ला गुल्ला मचा हुआ था
बबली के ऊपर क्या नीचे क्या , नीतू भाभी तो अगुवा कर रंग कम रही थी और रगड़ ज्यादा

: हाय राम मेरी बच्ची ( बुआ उसकी हालत देख कर घबराई )
: अरे होली है दीदी क्या तुम भी ( मम्मी ने उन्हें शांत किया )
: मम्मी ??
: हा क्या हुआ
मैने उन्हें पक्के रंग का पैकेट दिखाया और मम्मी मुस्कुरा उठी
मै झट से बाथरूम में बाल्टी में पानी में घोलना शुरू किया और एक लंबी पिचकारी में भर
: आज इस नाउन की पतोह को छोड़ना नहीं है
: अरे बिल्कुल ( मैने हस कर मम्मी की बात का जवाब दिया और औरतों की झुंड की ओर लपका )


भाभीईईईई ...
मै जोर से पिचकारी उठा कर चिल्लाया
एकदम से नीतू भाभी ने हमे देखा
मै मम्मी और बुआ तीनों के हाथों में लंबी बड़ी पिचकारी ,, सामने मुहल्ले की दूसरों औरतों का झुंड

जीने का दरवाजा भी बंद और बगल के ही एक हांडे में भरपूर गहरा पक्का रंग
सब जान गए कि मैने उन्हें अच्छे से उल्लू बनाया
हल्ला गुल्ला जोरो पर था

" मम्मीईईई अटैक हाहाहाहाहा"
बुआ और मम्मी ने एक साथ पिचकारी दागी और मै भी उन औरतों की ओर तान दिया लेकिन मेरा निशाना नीतू भाभी थी
शातिर थी बड़ी चालाक , खींच कर बबली दीदी को ढाल बना कर अपने आगे कर दिया


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छरछरा कर ठंडे पानी की बौछार उनके मोटे नारियल जैसे चूचों पर चल गई : रोहन!!!!!
दीदी खिलखिला कर चिल्लाई
" उप्स सॉरी"
मैने वापस से अपनी पिचकारी लोड की और भाभी बचती हुई दिखी मैने भी उन्हें पीछे की ओर दौड़ा लिया

" अह नहीं रोहन बाबू ठंडा है अह्ह्ह्ह हीहीहीही रुको न "
वो खिलखिलाती हुई हाथ आगे कर रंगो की पिचकारी रोकने का प्रयास की लेकिन मेरा निशाना अचूक था


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चट्ट चट्ट कर 3 4 मोटी धार मैने सीधे उन्हें गुलगुले चूचों पर मारे पूरी साड़ी ट्रांसपेरेंट सी हो गई , अंदर से ब्लाउज दिखने लगी और ठंडे पानी की सिहरन ने निप्पल तान दिए

: आहुच मम्मी... सीईईई ( पंजों से उन्होंने अपनी छाती पकड़ ली और मै खिलखिलाया )
लेकिन अब भागने की बारी मेरी थी
उधर मुहल्ले की औरतें वापस मम्मी बुआ पर भारी पड़ गई थी
: बहिनचोद भाग कहा रहे हो
उन्होंने मुझे पकड़ कर वही बिठा दिया और हांडे से जग में भर भर मुझे नहलाने लगी
तबतक बबली दीदी आई और एकदम से मेरे ऊपर रंग गिरना बंद हुआ
बबली ने नीतू भाभी के चेहरे को हरा कर दिया और मैने भी उन्हें खींच कर नीचे लिटा दिया और रंगीन पानी गिराने लगा , कभी उनके चूचों पर तो कभी पेट पर । पल्लू तो सीने से ऐसे चिपका था कि मालूम हो रहा था कि है ही नहीं
वो छटपटाती खिलखिलाती रही और बुआ मम्मी मेरी हरकत देख रही थी
बबली ने मुझे इशारा किया और मै चुप हो गया
रंग खत्म हो गया , बाल्टियां हांडे सब खाली
हंसी ठिठौली चालू थी
रंगो से सब सराबोर हो गए
मम्मी बुआ की साड़ी भी देह से एकदम चिपक गई थी ,


कुछ औरतें बाथरूम में मुंह धूल रही थी कुछ पाइप से
मेरी निगाहे नीतू भाभी पर , अपनी शिफॉन की साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी , असल हुस्न का दीदार तो अब हुआ था उनका , रसीले मम्में और चूतड़ एकदम शेप में देख रहे थे साड़ी भीग कर लगभग ट्रांसपेरेंट हो गई थी


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और रंगीन चेहरे पर मुस्कुराहट अलग ही खिल रही थी
मम्मी बुआ रेलिंग के पास खड़े होकर मुहल्ले की नुक्कड़ पर लगी डीजे पर नाचते टाऊन के फूहड़ों को देख रही थी । बबली दीदी बाथरूम में अपने बाल धूल रही थी , असल में ऐसा रंग उन्होंने पहले कभी खेला ही नहीं था
मम्मी बुआ बिंदास थी और मुझे अब भूख भी लग रही थी लेकिन नीतू भाभी की शरारती मुस्कुराहट और गीली जवानी को ताड़ना कैसे छोड़ सकता था ।

: बहनचोद ( वो बुदबुदाई और मै मुस्कुराया )
आज तो उनकी गाली ने हर बार मेरे लंड में जोश भरने का काम किया था । कुछ अलग ही तलब थी , शायद बबली दीदी के साथ हुए कल रात की कहानी ने मुझ में बदलाव ला दिए थे ।
थोड़ी देर सब लोग सूखने लगे , दोपहर चढ़ रही थी और मम्मी सबको नीचे ले कर आई नाश्ते के लिए, बबली दीदी अपने कपड़े लेकर चली गई नहाने के लिए उन्हें अपने देह से रंग छुड़ाना ज्यादा जरूरी लगा , बजाय कि गपशप के ।

मिठाइयों का दौर शुरू हो गया, कुछ मम्मी ने अपने हाथों की बनी खिलाई तो कुछ उन औरतों ने अपने डिब्बे से मम्मी को
मै भी लपक कर उन्हीं डिब्बों से मिठाई उठाने का सोचा कि नीतू भाभी ने हाथ पकड़ लिया और ना में इशारा किया , बुआ उस वक्त किचन ने चाय बना रही थी
इशारा साफ था मिठाई भांग वाली थी और आज नीतू भाभी कोई बहाना नहीं चाह रही थी
चाय नाश्ते का दौर खत्म होते ही बाकी सब चली गई और जाते हुए नीतू भाभी ने आंखों से वार्निंग दे दी मुझे
कमरे आया तो देखा मम्मी वापस से उसी डिब्बे की मिठाई गपक ली
: अरे दीदी लो न
मैने झपट कर मम्मी के हाथ से डिब्बा ले लिया
: अरे क्या हुआ
: अरे मम्मी भांग वाली है
: धत्त मैने तो 3 खाई है ऐसा तो कुछ नहीं हुआ मुझे ( उनकी स्माइल बड़ी हो रही थी और फिर भौहें टाइट कर उन्होंने बुआ को देखा ) दीदी आपको कुछ हुआ क्या ?
: मैने तो नहीं खाई .. ला देखूं ( बुआ ने हाथ बढ़ाया लेकिन मैने डिब्बा बंद कर दिया )
: अरे रोहन !!!
: नहीं बुआ ये नहीं ( मैने हाथ पीछे कर उसे किचन में रख दिया ऊपर रैक पर )
बुआ मेरे पास आई
: क्या ये सच में भांग वाली है
: उधर देखो उनको हीही ( मैने उन्हें मम्मी की ओर दिखाया जो अजीब सा मुंह बना कर डकार लेते हुए कमर पर हाथ रख कर रिमोट से टीवी चला रही थी । )
: हैं? अरे भगवान् अब क्या होगा ( बुआ घबड़ाई )
: भांगड़ा हाहा ( मै हस कर बोला और उधर मम्मी ने गाना लगा दिया ) हर साल पापा करते थे इस साल मम्मी हीहीही

टीवी पर होली के भोजपुरी गाने चालू हो गए और मम्मी टहलती हुई किचन में

: क्या हुआ तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो ? ( मम्मी ने हस कर कहा )
हम बस शांत थे , बुआ किचन में भीड़ कर पूरी निकालने के लिए क्योंकि मुझे भूख लगी थी

: अरे तो जा नहा ले ऐसे खायेगा क्या ( मम्मी के भाव पर अब ओवर रिएक्शन से जाहिर हो रहे थे )
: कुसुम !!! क्या चिल्ला रही है ( बुआ ने डांटा तो मम्मी उनको पीछे से पकड़ने लगी टीवी पर चल रही भोजपुरी गाने की लिरिक्स को दोहराते हुए

: झूठार देहले राजा जी , चढल जवानी के दहिया
: धत्त हट छोड़ मुझे ( बुआ एकदम से मम्मी के चिपकने और उन्हें सहलाने से शर्माने लगी उसपर से वो गाना )
: झूठार देहले राजा जी अपने बहिन के जवानियां हीहीहीही हाहाहा

अजीब सी क्रिपि हंसी थी मम्मी की और ये तो बस शुरुआत था
बुआ असहज होकर मुझे देख रहे थी और हम समझ रहे थे कि आज बड़ा हंगामा होकर रहेगा ।

: सीईई अह्ह्ह दीदी सच में भांग वाली थी क्या हाहाहा उफ्फ सर पकड़ रहा है अब तो
हम चुप थे और बुआ पुरिया बेल रही थी
: रोहन
: हा मम्मी ?
: बेटा तू सही कह रहा था थोड़ा तेल लगा देगा सर में
: अरे ऐसे कैसे बाल धुलने पड़ेंगे न ?
: अच्छा बाम लगा दे बेटा उफ्फ फड़क रहा पूरा सर
मुझे यही सही लगा और मैने उन्हें हाल में सोफे पर बैठा कर उनके सर पर बाम लगा कर मालिश की , उन्हें थोड़ा आराम हुआ लेकिन भांग का असर हर बीतते पल के साथ बढ़ ही रहा था ।

: रोहन !!
: जी मम्मी ?
: वो जरा अपने पापा का गमछा देना ( उन्होंने हाल के वाल हैंगर पर टंगे पापा के गमछे की ओर देख कर कहा )
मैने उन्हें दिया और वो उन्होंने अपने सर पर अच्छे से लपेट दिया
: अह्ह्ह्ह्ह अब गर्माहट है और ठीक भी
: तो मै नहाने जाऊ
: हा नहा ले बेटा
मै नहाने के लिए अपने कमरे से कपड़े निकाले और इधर एकदम से हाल में टीबी का वॉल्यूम बढ़ गया और गाना भी एकदम ऐसा ही नाचने से खुद को रोक ही न पाओ

लूटा ऐ राजा, लूटा ऐ राजा

मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लुटा ए राजा



तभी बुआ के खिलखिलाने की आवाज आई और मै अपने बैग से कपड़े निकाल रहा था
" अरे कुसुम छोड़ न तेल जल रहा है हीही "

मेरे दिमाग में भी चूल होने लगी कि साला असल में बाहर क्या बवाल हो रहा है और फिर गाने की धुन ही ऐसे थे कि मस्ती में पूरा तन मन झूम रहा था मै झट से बाहर आया

"धरा न कमरिया में बड़ा मजा पाईबा
होठवा से होठवा तू जेतने सताइवा"

: हीही मार खाएगी कुसुम उम्ममम छोड़ मुझे हाहाहा ( बाहर आया तो देखा बुआ को मम्मी ने बाहों में भर रखा था और उनके लिप्स से अपने लिप्स लगाने की कोशिश कर रही थी और हस रहे थी )
: मस्ती में मन डोली जैसे खोलवा चोली ( मम्मी गाने के बोल चिल्लाते हुए बुआ के चूचों पर हाथ फिराने लगी और घुमा कर पीछे से पकड़ लिया) बटनिया बटनिया बटनिया खोला ऐ राजा
बटनिया खोला ऐ राजा
: अह्ह्ह्ह भक्क कुसुम छोड़ मुझे पगला गई है क्या हीही ( बुआ हस भी रही थी और अपने सीने पर ब्लाउज को पकड़े हुए थी लेकिन मम्मी की जबरजतसी नहीं रुकने वाली थी )

डर था कही मम्मी फाड़ ही न दे बुआ का ब्लाउज और नहीं कुछ हाथ आया तो उनकी साड़ी पकड़ कर खींच ली और गाने के बोल को दोहराते हुए नचाने लगी बुआ को पकड़ा कर

उफ्फ बुआ इस वक्त ब्लाउज पेटीकोट में आ गई थी , बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी और चर्बीदार थुलथुले कूल्हे पेटीकोट में खूब थिरक रहे थे
लंड वापस से अपना आकार लेना शुरू कर चुका था और तभी हाल का दरवाजा खुला और एकदम से पापा आ गए

बुआ ने अपने आप को इस हाल में देखा और झट से अपनी साड़ी उठा कर किचन में भागी

पापा आए और अगले ही पल उनके मुस्कुराहट ने बता दिया कि वो भी अपना डोज लेकर आए थे

: हो गया कल्याण अब ( मै खुद से बुदबुदा कर आया था )
मम्मी को नाचता देख पापा भी अपने कमर और सर पर हाथ रख कर मम्मी के साथ ठुमके लगाने लगे
लेकिन अभी तो स्थिति और फूहड़ होने वाली थी

: धड़के ला धक धक तोहरे ला छतिया ( मम्मी ने अपने छातियों पर हाथ रख गाने के स्टेप किए ) करा ऐ राजा तनि प्यार वाली बतिया ( फिर पापा से लिपट ही गई )
मम्मी तो जाने गाने की हीरोइन मोनालिसा ही बन गई थी , वही बोल्ड अंदाज वैसे ही डांस स्टेप या कुछ ज्यादा ही अश्लील

: ढिबरिया भुता दा ऐ राजा
कइ द अन्हर कोठरिया लहरिया लूटा ऐ राजा ( मम्मी ने अपने सर का गमछा खोलकर खुद को और पापा को उढ़ा लिया )
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा


सामने नजर गई तो उसपार से बुआ खड़ी थी किचन से झांक रही थी और इधर बाथरूम के पास मै
बीच हाल में उन दोनों ने गमछे में छिपकर एक दूसरे को चूमने लगे थे

इधर जैसे ही मेरी नजर बुआ से मिली मै मुस्कुरा कर उन्हें देखा और उन्होंने मुझे
बस फिर मै बाथरूम में चला गया लेकिन हंगामा अभी थमा नहीं था ... ये तो बस शुरुआत थी
मैने बाथरूम में पानी चालू कर कपड़े निकालने लगा और दरवाजा लगा दिया
इधर टीवी पर एक और गाना लग चुका था ... मुझे गाने की म्यूजिक से कुछ कुछ गाने का अंदेशा हो रहा था लेकिन टोटी से पानी बाल्टी में गिरने की आवाज से आवाज उतनी साफ नहीं थी , फिर पास में मोटर भी चालू था , अभी 4 5 मग पानी मैने अपने ऊपर डाला ही था कि गाने की बढ़ती म्यूजिक ने मुझे थोड़ा सा और रिझाया

मैने झट से टोटी ऑफ की ओर गाने की आवाज आई
गाना भी सुपरहिट था , खेसारीलाल यादव का "लहंगा उठावल पड़ी महंगा "

पढ़े वाला खातिर लभ के पढ़ाई हाऊ

पोखरा में बिछलाये वाला काई हाउ
लइकन के चूसनी , जवनकन के मिसनी

तू तो बूढ़वन के आंख के दवाई हाउ


साला लिरिक्स ऐसे थे कि दिल गार्डेन गार्डेन हुआ जा रहा था , ये सोच कर कि इस गाने पर बाहर क्या माहौल मचा होगा , लेकिन पानी डालने से रंग मेरे देह पर फैलने लगा और उधर गाना चालू हो गया था

मैने झट से पूरी बाल्टी पानी उठा कर अपने देह पर उड़ेल ली और हौले से दरवाजा खोला तो
गाना फुल वॉल्यूम पर मेरे कानो को हिट किया और आंखे सामने के नजारे देख कर चमक उठी


: चुनरी हटाई का ( मम्मी ने अपने छातियों से पल्लू झटका और अपनी कमर को ऐसे बलखाया फिर वो का बयां नहीं कर सकता था ) चीज कुछ दिखाई का ( उन्होंने अपने जबरजस्त जोबन को ब्लाउज में पापा के सामने लहराया )

उफ्फ पापा ने तो लपक कर मम्मी की साड़ी पकड़नी चाही तो मम्मी पूरा नाच गई फिरकी की तरह और उनकी साड़ी पूरी फर्श पर और पापा ने उनको अपनी बाहों में झुला दिया और हैरत की बात थी कि पापा को गाने के बोल डिट्टो याद थे
मम्मी सही कहती थी पापा बड़े छुपा रुस्तम है बस दिखाते नहीं है लेकिन रोमांस भरा पड़ा है उनमें

: ऐसे उठाईबु जब लहंगा ( सीईईई पापा ने तो मम्मी का पेटीकोट उठाने लगे पीछे से ) हंगामा पूरा हाल में होई
मम्मी की जांघें पीछे से दिखने लगी थी और पापा ने पजामे में बड़ा सा तंबू बन गया था । तभी सामने नजर गई तो बुआ भी किचन से झांक रही थी और मैने झट से अंदर हो गया ।


फटाफट से पानी डाल कर अपना बदन रगड़ने लगा और मन ही मन पापा मम्मी का ये नया रूप देख कर पूरी बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी । बाहर गाना चालू था और रह रह कर मेरा मन ललचा रहा था ।
वक्त बीत रहा था और मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा था , हाथ भले न खाली हो लेकिन दिमाग पूरी तरह से बाहर लगा हुआ था
समझ नहीं आ रहा था क्या करु
तभी मेरी नजर बाथरूम की दूसरी बाल्टी पर गई और मैने झट से उसको उल्टा कर बाथरूम के दरवाजे के पास लगाया और बाथरूम के दरवाजे की जाली से बाहर देखने लगा

सामने बुआ अभी भी किचन से झांक ही रही थी और मम्मी पापा को तो जैसे किसी से कोई डर फिकर ही गई , नसे में सब मस्त थे और हस हस के नाच रहे थे


Gi-UHhwl-Xo-AAt-Rjs
: चीज देखते ही जोश मन में भर जाई हो ( मम्मी ने अपने ब्लाउज के दो हुक चटकाते हुए पापा की ओर बढ़ी ) सबकर पैसा लगवाल राजा तर जाए हो
मम्मी की हरकत पर बुआ ने तो अपना माथा पकड़ लिया और अगले ही पल पापा के गाने बोल दोहराते हुए अपने कंधे से गमछा एक हाथ से झटका
: तोहरा पावे ला पर्दा भी फाड़ दिहे हो ( एकदम उन्होंने उस गमछे को बीच से चीर दिया )

अरे साला ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है , और तभी देखा सामने बुआ वैसे ही ब्लाउज पेटीकोट में भागी आई और मम्मी को पकड़ कर किनारे करते हुए डांटने लगी , गाने की आवाज में उनकी आवाज साफ नहीं थी लेकिन एक परवाह भरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था
लेकिन मम्मी को कहा फर्क पड़ रहा था वो तो बुआ को पकड़ कर वापस खींच ली डांस करने के लिए लेकिन तबतक सब गाना खत्म हो गया था

: अरे दीदी नाचो न
: अरे तुम लोगो को कुछ लाज है कि नहीं रोहन बाथरूम में नहा रहा है और ये तुम क्या दिखा रही हो बंद करो ( बुआ ने मम्मी के ब्लाउज पकड़ कर उनको डांट लगाई )


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पापा एकदम से शांत हो गए और उनकी नजरे तो बस बुआ के हल्के गिले पेटीकोट पर थी बड़े भड़कीले चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ।

ऊऊऊ बड़ा ही कोल्ड मोमेंट हो गया था
: और तू विजय , नहाना नहीं है क्या
पापा ने बस मुस्कुरा दिया और सामने से बुआ की बड़ी बड़ी रसीली छातियां देखने लगे जो बड़ी मुश्किल से सेट हो रहे थे उनके ब्लाउज में । पापा बस चुपचाप अपने कमरे में चले गए
लेकिन यहां टीवी पर एक और गाना शुरू हो गया था ,

मै भी अब चुपचाप बाल्टी से उतरने का सोच रहा था क्योंकि शरीर का साबुन सुख रहा था

"चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी

चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी
मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी

: नहीं कुसुम मारूंगी अब तुझे , अरे हीही ( मै तो एक पैर वापस बाल्टी से उतार ही चुका था लेकिन जैसे ही बुआ की आवाज आई मेरा ध्यान वापस से हाल में )
: मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी ( मम्मी वापस से बुआ को पकड़ कर डांस करने लगी थी हस हस कर अपने कूल्हे उछालते हुए ) बस एक गाना दीदी बस एक

बुआ की दोनों कलाइयों को मम्मी ने पकड़ कर उठा रखा था और अपने कूल्हे से उनके चर्बीदार कूल्हे पर झटके दे रही थे , दोनो के कूल्हे टकराते लेकिन प्रतिक्रिया उन्होंने ढीले ब्लाउज में रसीले जोबनों पर देखने को मिलती खूब हिलकोरे खा कर दोनों की मुलायम छातियां हिलती ब्लाउज में
आखिर मम्मी बुआ को अपने रंग में मिला ही लिया और गाने की म्यूजिक पर बुआ के भी ठुमके लगने शुरू हो गए और इधर पापा उनके कमरे के दरवाजे के पास हाथ में तौलिया लिए खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे
मम्मी की नजर उनपर गई तो उन्होंने पापा को भी खींच ही लिया और एक हाथ से पापा का हाथ और दूसरे हाथ से बुआ का हाथ पकड़ उनके सामने नाचने लगी

"एह उमर बा प्यार करे के, डरबा कौने बात के
मिलल बा मौका मकैया में चला, लूटा लहर मुलाकात के"
मम्मी ने हस कर बुआ को इशारे किए, दोनो भाई बहन खूब शर्मा रहे थे और पापा के पजामे में एकदम टाइट तंबू साफ साफ दिखाई दे रहा था

: ले ला इनके अंकोरी में, रस पइबा राजा जी ( मम्मी ने बुआ को पकड़ कर पापा की ओर झटका और बुआ एक फिरकी घूम कर खुद को संभालते हुए पापा की बाहों में और उनके रसीले मम्मे हच्च से पापा के सीने पर धंस गए ) जेतना सटबा ओतना मस्ती मजा उठइबा राजा जी

मम्मी ने बुआ को पापा की ओर और धकेला और दोनों दिवाल से चिपक गए , ऐसा हुआ ही नहीं होगा कि पापा के कड़े लंड की ठोकर बुआ को अपने चूत या जांघ पर महसूस नहीं हुई हो ।
फिर मम्मी घूम कर पापा के पास खड़ी हो गई उनके कंधे पर हाथ रख कर , बुआ लाज के मारे मुस्कुराते हुए सीधी होने लगी

:चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी

चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी
मजा मारे इनके संगे ( बुआ को दिखा कर मम्मी मुस्कुरा कर गाना गाते हुए बोली ) , चला मकैया में राजा जी

: भक्क पागल हो तुम लोग , कमीनी कही की हट ( बुआ एकदम से लजा कर मम्मी के हाथ झटक पापा से अलग हो गई )

मम्मी एकदम से खिलखिला हसने लगी और पापा को पकड़ नीचे वही बैठ गई , देखता कोई उन्हें पागल ही समझता ऐसी हालत थी ।
मै मुस्कुरा रहा था और मेरा लंड भी
इधर मेरे देह का साबुन सुख गया था और पेशाब भी लगाने लगी थी कबसे गिले होने की वजह से

लेकिन तभी मम्मी और पापा के बीच कुछ हंसी ठिठौली हुई और मम्मी ने उन्हें आंखे दिखाई । पापा हस कर ना नुकूर कर रहे थे
साला अब क्या नया ड्रामा होने वाला था , एक भीतर की बेचैनी और दूसरी ओर पेशाब का जोर

मैने जल्दी से उतर कर अपना लंड हल्का कर दिया मोटी धार निकल पड़ी , उधर गाना वैसे ही बज रहा था लेकिन शांति थी

एकदम से हाल में हल्ला गुल्ला होने लगा और बुआ ने मुझे आवाज देना शुरू कर दिया

: रोहन हीही हाहाहाहाहा कुसुम नही मारूंगी अब ज्यादा हो रहा है , देख विजय छोड़ अह्ह्ह्ह
: हाहाहाहा होलीईईईईई हैएएएएए हीहेहेहे ( मम्मी की आवाज आई )
: बस बस हो गया कुसुम छोड़ दे ( पापा ने मम्मी को कहा )
: अरे दीदी लगवा लो न रात में तो मल मल के बुकवा लगवाई, थोड़ा आप भी लगाओ जी दीदी को
: क्या ?? नहीं विजय हीहीहेहे ( बुआ खिलखिलाई )


अबे क्या बवाल हो गया है मैने आंखों से साबुन हटा साफ कर दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा ही अलग था
मम्मी ने फिर से होली शुरू कर दी थी


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और पापा बुआ को पीछे से पकड़ कर खड़े थे , मम्मी ने अपने हाथों का गाढ़ा रंग पापा के हाथों में चिपका दिया और पापा ने पीछे से बुआ को दबोचे हुए बुआ के नंगे पेट पर हाथ रगड़ने लगे
बुआ बेबस खिलखिलाती रही हंसती रही , उनका मुंह पूरा हरा हो गया था

तभी बुआ ने एकदम से चिल्लाई : नहीं कुसुम लग जाएगा पैर छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह नहीं हीहीहीहेही छोड़ से हरामीन , पगला गई है क्या अह्ह्ह्ह्ह
मम्मी हंसते हुए बुआ की पेटीकोट में हाथ डाल कर उसके हाथ उनकी जांघें रंगने लगी

: रुक कामिनी तुझे बताती हूं अब
मम्मी खिलखिला कर हसने लगी और बुआ जबरन पापा से हाथ छुड़ा कर अलग हुए ओह साला पापा का लंड एकदम रॉड जैसे तना हुआ पजामे में और बुआ के गिले पेटीकोट में जितने अंदर धंसा था उतना दूर उनके सफेद पजामे पर बुआ के पेटीकोट का रंग पापा के पजामे पर चढ़ गया था ।
इधर बुआ मम्मी को पकड़ कर फर्श पर लेट गई और उनके ऊपर चढ़ कर अपने पेट का गाढ़ा रंग मम्मी के पेट पर मलने लगी


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मम्मी के ऊपर चढ़ने से बुआ की गाड़ पेटीकोट में और विस्तार ले चुकी थी और वही मैने पापा को देखा अपना लंड खुजाते हुए बुआ को पीछे से देख रहे थे
गिले पेटीकोट में उनकी पहाड़ जैसे भड़कीले चूतड़ों का सेप उभार और गोलाई साफ झलक रही थी यहां तक कि उनकी गहरे दरारें भी

फर्श पर बुआ और मम्मी की खिलखिलाती हाथापाई हो रही थी
मेरा लंड एकदम बगावत पर आ गया था

: नहीइइ दीदी फट जायेगा हीहीही हाहाहाहा
: तो फट जाने दे लेकिन तुझ ... बुआ ने हाथ आगे कर मम्मी ने ब्लाउज में जबरन हाथ घुसाने लगी
मम्मी खिलखिलाती हुई पापा का आवाज देने लगी
पापा भी मम्मी की मदद को आगे आए और पीछे से बुआ को पकड़ कर उठाने लगा पहले बाजुओं से पकड़ कर प्रयास किया लेकिन बुआ ने झटक दिया : छोड़ विजय मुझे ... इसकी मस्ती अभी बताती हूं

: अह्ह्ह्ह्ह दीदी हीहीहेहेहे , अरे पकड़ो न जी दीदी को ( मम्मी खिलखिला रही थी)
पापा ने दुबारा से बुआ को पेट के पास से पकड़ कर उठाना चाहा तो उनका हाथ फिसलने लगा और इस बार उन्होंने अपना पंजा ऊपर कर लिया और एकदम से उनके हाथों में बुआ के मोटे बड़े बड़े रसीले मम्में नंगे आ गए


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क्योंकि मम्मी के साथ हाथापाई ने कभी बुआ के ब्लाउज के हुक चटक गए उन्हें भनक ही नहीं थी

जैसे ही बुआ को अपने नंगे चूचों पर पापा के हाथों का स्पर्श मिला वो हिचक कर रुक गई और पापा ने मौका देख कर उन्हें पकड़ कर खींच दिया पीछे

मम्मी मौका पाकर अपनी खुली ब्लाउज को पकड़े हुए हसने लगी और सामने देखा तो बुआ के दोनों चूचों नंगे हवा में झूल रहे थे और उनके गोरे मोटे चूचों पर दोनों तरफ से पापा के पंजों के निशान छप गए थे


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पापा ने एक नजर बुआ को देखा और फिर नजरे फेर कर खिसक लिए बाहर ,शायद ऊपर वाले बाथरूम की ओर

इधर मम्मी खिलखिला कर हसी जा रही थी और ना चाहते हुए भी बुआ मम्मी को देख कर हस पड़ी क्योंकि उन्हें भी पता था इस पागलपंती में वो भी शामिल थी तो परिणाम जो भी हो .... होली है !!!!!


जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं होली के रंग फीके नहीं पड़ेंगे और न ही आपके सपोर्ट के रंग भी .... मन गदगद हुआ हो तो पढ़ने के बाद लाइक कमेंट जरूर करें .. इंतजार मुझे भी होता है 😁 )
Bht hi behatreen update diya bhai
Kya kumuk Holi kheli h to rohan ki mummy nai bua ke nange chuche akhir pakdwa hi diye apne pati ke hath mai
Dekhte h aage ki rohan kaise nettu bhabhi ki chut ki chashni nikalta h
 

Napster

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UPDATE 019




होलीईईईईई हैएएएएए......

नीतू भाभी के साथ आई दूसरी औरतों ने भी मुझे घेर लिया था वही हाल में
किसी के हाथ मेरे टीशर्ट में थे तो किसी के गाल और बालों पर
" अरे नहीं भाभी हीहीहेहे वहा नहीं " , मै ऐंठने लगा क्योंकि उन औरतों में से एक ने मेरे लोवर को पीछे से लास्टिक खींच कर चूतड़ को लाल कर दिया था

" आराम से रहो नहीं तो खड़े खड़े तुम्हारी बहनिया पेल दूंगी " , नीतू भाभी अबीर से नहाई हुई थी और उनके खिले चेहरे , मस्ती में मुझे घूरती कातिल निगाहे
शिफॉन की साड़ी में ढीली ब्लाउज और गहरे गले की ब्लाउज से झांकते चूचे अबीर गुलाल से सन कर और भी मुलायम जान पड़ रहे थे


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" सीई देखो बहनचोद को अभी भी खूंटा टाइट है इसका ", नीतू भाभी ने मुझे दिवाल से चिपका कर लोवर में झूल रहे लंबी पिचकारी को को देख कर बोली

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, लेकिन मेरी निगाहे तो उनकी गुदाज चर्बीदार मोटी रसीली चुचियों पर था

" लेना है ? " , वही पुराने अंदाज में नीतू भाभी ने फिर से आग्रह किया और मै मुस्कुरा उठा । सालों पहले उनकी रसीली छातियां मुंह में भर कर उनके दूध का स्वाद लिया था और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा ।
मुस्कुरा कर मैने मम्मी बुआ को देखा जो दूसरे औरतों के साथ व्यस्त थी और शरारती नजरो से हुंकारी भर दी
अगले ही पल मेरी कालर पकड़ कर सीधा मेरा मुंह अपनी छाती में रगड़ दिया और उनके छातियों पर लगे अबीर से मेरा चेहरा रंगीन हो गया और मौका देखकर हाथ बढ़ा कर उन्होंने लोवर के ऊपर से मेरा लंड दबोच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह भाभी आराम से
: बहनचोद आज नहीं आए न तो पक्का तुम्हारी बहिनिया को रंडी बनवाऊंगी अगली होली में , समझे ...ठीक 03 बजे

एक आखिरी अल्टीमेटम देकर उसने मेरे आड़ छोड़ दिए और पूरे जिस्म में सिहरन थी और मेरी नजर उसकी हल्की गुलाबी साड़ी में थिरकते चूतड़ों पर गई , कातिल चीज थी नीतू भाभी
इनके जिस्म की असल नुमाइश तो इन्हें भीगा कर करने में थी और मैने उन्हें इशारा किया कि आपकी इकलौती ननद और मेरी बहन छत पर है दबोच लो
होली भाभियों को दो ही तो चाहिए एक देवर दूसरी कमसीन नन्द , उन्हें उनके रसीले मम्मे गुलाबी करने में मजा आता है और मुझे ऐसे सिन देखने में ।

पानी वाले रंगों के लिए मम्मी ने पहले से डायरेक्शन दे दिए थे कि होली छत पर ही होगी तो मैने भी अपने हथियार कर रखे थे
बुआ को जैसे ही भनक हुई कि लोग ऊपर जा रहे है तो मम्मी भी उनके साथ ऊपर हो ली
पापा हाल में सोफे पर बैठे थे अबीर से सराबोर, उन्हें भी मुहल्ले की औरतों ने खूब रंगा और मुझे बोलकर बाहर चले गए दोस्तो से मिलने ।
मैने भी रूम से गहरे वाला पक्का रंग निकाला और हाल का दरवाजा बंद कर ऊपर टैरिस पर
खूब हल्ला गुल्ला मचा हुआ था
बबली के ऊपर क्या नीचे क्या , नीतू भाभी तो अगुवा कर रंग कम रही थी और रगड़ ज्यादा

: हाय राम मेरी बच्ची ( बुआ उसकी हालत देख कर घबराई )
: अरे होली है दीदी क्या तुम भी ( मम्मी ने उन्हें शांत किया )
: मम्मी ??
: हा क्या हुआ
मैने उन्हें पक्के रंग का पैकेट दिखाया और मम्मी मुस्कुरा उठी
मै झट से बाथरूम में बाल्टी में पानी में घोलना शुरू किया और एक लंबी पिचकारी में भर
: आज इस नाउन की पतोह को छोड़ना नहीं है
: अरे बिल्कुल ( मैने हस कर मम्मी की बात का जवाब दिया और औरतों की झुंड की ओर लपका )


भाभीईईईई ...
मै जोर से पिचकारी उठा कर चिल्लाया
एकदम से नीतू भाभी ने हमे देखा
मै मम्मी और बुआ तीनों के हाथों में लंबी बड़ी पिचकारी ,, सामने मुहल्ले की दूसरों औरतों का झुंड

जीने का दरवाजा भी बंद और बगल के ही एक हांडे में भरपूर गहरा पक्का रंग
सब जान गए कि मैने उन्हें अच्छे से उल्लू बनाया
हल्ला गुल्ला जोरो पर था

" मम्मीईईई अटैक हाहाहाहाहा"
बुआ और मम्मी ने एक साथ पिचकारी दागी और मै भी उन औरतों की ओर तान दिया लेकिन मेरा निशाना नीतू भाभी थी
शातिर थी बड़ी चालाक , खींच कर बबली दीदी को ढाल बना कर अपने आगे कर दिया


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छरछरा कर ठंडे पानी की बौछार उनके मोटे नारियल जैसे चूचों पर चल गई : रोहन!!!!!
दीदी खिलखिला कर चिल्लाई
" उप्स सॉरी"
मैने वापस से अपनी पिचकारी लोड की और भाभी बचती हुई दिखी मैने भी उन्हें पीछे की ओर दौड़ा लिया

" अह नहीं रोहन बाबू ठंडा है अह्ह्ह्ह हीहीहीही रुको न "
वो खिलखिलाती हुई हाथ आगे कर रंगो की पिचकारी रोकने का प्रयास की लेकिन मेरा निशाना अचूक था


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चट्ट चट्ट कर 3 4 मोटी धार मैने सीधे उन्हें गुलगुले चूचों पर मारे पूरी साड़ी ट्रांसपेरेंट सी हो गई , अंदर से ब्लाउज दिखने लगी और ठंडे पानी की सिहरन ने निप्पल तान दिए

: आहुच मम्मी... सीईईई ( पंजों से उन्होंने अपनी छाती पकड़ ली और मै खिलखिलाया )
लेकिन अब भागने की बारी मेरी थी
उधर मुहल्ले की औरतें वापस मम्मी बुआ पर भारी पड़ गई थी
: बहिनचोद भाग कहा रहे हो
उन्होंने मुझे पकड़ कर वही बिठा दिया और हांडे से जग में भर भर मुझे नहलाने लगी
तबतक बबली दीदी आई और एकदम से मेरे ऊपर रंग गिरना बंद हुआ
बबली ने नीतू भाभी के चेहरे को हरा कर दिया और मैने भी उन्हें खींच कर नीचे लिटा दिया और रंगीन पानी गिराने लगा , कभी उनके चूचों पर तो कभी पेट पर । पल्लू तो सीने से ऐसे चिपका था कि मालूम हो रहा था कि है ही नहीं
वो छटपटाती खिलखिलाती रही और बुआ मम्मी मेरी हरकत देख रही थी
बबली ने मुझे इशारा किया और मै चुप हो गया
रंग खत्म हो गया , बाल्टियां हांडे सब खाली
हंसी ठिठौली चालू थी
रंगो से सब सराबोर हो गए
मम्मी बुआ की साड़ी भी देह से एकदम चिपक गई थी ,


कुछ औरतें बाथरूम में मुंह धूल रही थी कुछ पाइप से
मेरी निगाहे नीतू भाभी पर , अपनी शिफॉन की साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी , असल हुस्न का दीदार तो अब हुआ था उनका , रसीले मम्में और चूतड़ एकदम शेप में देख रहे थे साड़ी भीग कर लगभग ट्रांसपेरेंट हो गई थी


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और रंगीन चेहरे पर मुस्कुराहट अलग ही खिल रही थी
मम्मी बुआ रेलिंग के पास खड़े होकर मुहल्ले की नुक्कड़ पर लगी डीजे पर नाचते टाऊन के फूहड़ों को देख रही थी । बबली दीदी बाथरूम में अपने बाल धूल रही थी , असल में ऐसा रंग उन्होंने पहले कभी खेला ही नहीं था
मम्मी बुआ बिंदास थी और मुझे अब भूख भी लग रही थी लेकिन नीतू भाभी की शरारती मुस्कुराहट और गीली जवानी को ताड़ना कैसे छोड़ सकता था ।

: बहनचोद ( वो बुदबुदाई और मै मुस्कुराया )
आज तो उनकी गाली ने हर बार मेरे लंड में जोश भरने का काम किया था । कुछ अलग ही तलब थी , शायद बबली दीदी के साथ हुए कल रात की कहानी ने मुझ में बदलाव ला दिए थे ।
थोड़ी देर सब लोग सूखने लगे , दोपहर चढ़ रही थी और मम्मी सबको नीचे ले कर आई नाश्ते के लिए, बबली दीदी अपने कपड़े लेकर चली गई नहाने के लिए उन्हें अपने देह से रंग छुड़ाना ज्यादा जरूरी लगा , बजाय कि गपशप के ।

मिठाइयों का दौर शुरू हो गया, कुछ मम्मी ने अपने हाथों की बनी खिलाई तो कुछ उन औरतों ने अपने डिब्बे से मम्मी को
मै भी लपक कर उन्हीं डिब्बों से मिठाई उठाने का सोचा कि नीतू भाभी ने हाथ पकड़ लिया और ना में इशारा किया , बुआ उस वक्त किचन ने चाय बना रही थी
इशारा साफ था मिठाई भांग वाली थी और आज नीतू भाभी कोई बहाना नहीं चाह रही थी
चाय नाश्ते का दौर खत्म होते ही बाकी सब चली गई और जाते हुए नीतू भाभी ने आंखों से वार्निंग दे दी मुझे
कमरे आया तो देखा मम्मी वापस से उसी डिब्बे की मिठाई गपक ली
: अरे दीदी लो न
मैने झपट कर मम्मी के हाथ से डिब्बा ले लिया
: अरे क्या हुआ
: अरे मम्मी भांग वाली है
: धत्त मैने तो 3 खाई है ऐसा तो कुछ नहीं हुआ मुझे ( उनकी स्माइल बड़ी हो रही थी और फिर भौहें टाइट कर उन्होंने बुआ को देखा ) दीदी आपको कुछ हुआ क्या ?
: मैने तो नहीं खाई .. ला देखूं ( बुआ ने हाथ बढ़ाया लेकिन मैने डिब्बा बंद कर दिया )
: अरे रोहन !!!
: नहीं बुआ ये नहीं ( मैने हाथ पीछे कर उसे किचन में रख दिया ऊपर रैक पर )
बुआ मेरे पास आई
: क्या ये सच में भांग वाली है
: उधर देखो उनको हीही ( मैने उन्हें मम्मी की ओर दिखाया जो अजीब सा मुंह बना कर डकार लेते हुए कमर पर हाथ रख कर रिमोट से टीवी चला रही थी । )
: हैं? अरे भगवान् अब क्या होगा ( बुआ घबड़ाई )
: भांगड़ा हाहा ( मै हस कर बोला और उधर मम्मी ने गाना लगा दिया ) हर साल पापा करते थे इस साल मम्मी हीहीही

टीवी पर होली के भोजपुरी गाने चालू हो गए और मम्मी टहलती हुई किचन में

: क्या हुआ तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो ? ( मम्मी ने हस कर कहा )
हम बस शांत थे , बुआ किचन में भीड़ कर पूरी निकालने के लिए क्योंकि मुझे भूख लगी थी

: अरे तो जा नहा ले ऐसे खायेगा क्या ( मम्मी के भाव पर अब ओवर रिएक्शन से जाहिर हो रहे थे )
: कुसुम !!! क्या चिल्ला रही है ( बुआ ने डांटा तो मम्मी उनको पीछे से पकड़ने लगी टीवी पर चल रही भोजपुरी गाने की लिरिक्स को दोहराते हुए

: झूठार देहले राजा जी , चढल जवानी के दहिया
: धत्त हट छोड़ मुझे ( बुआ एकदम से मम्मी के चिपकने और उन्हें सहलाने से शर्माने लगी उसपर से वो गाना )
: झूठार देहले राजा जी अपने बहिन के जवानियां हीहीहीही हाहाहा

अजीब सी क्रिपि हंसी थी मम्मी की और ये तो बस शुरुआत था
बुआ असहज होकर मुझे देख रहे थी और हम समझ रहे थे कि आज बड़ा हंगामा होकर रहेगा ।

: सीईई अह्ह्ह दीदी सच में भांग वाली थी क्या हाहाहा उफ्फ सर पकड़ रहा है अब तो
हम चुप थे और बुआ पुरिया बेल रही थी
: रोहन
: हा मम्मी ?
: बेटा तू सही कह रहा था थोड़ा तेल लगा देगा सर में
: अरे ऐसे कैसे बाल धुलने पड़ेंगे न ?
: अच्छा बाम लगा दे बेटा उफ्फ फड़क रहा पूरा सर
मुझे यही सही लगा और मैने उन्हें हाल में सोफे पर बैठा कर उनके सर पर बाम लगा कर मालिश की , उन्हें थोड़ा आराम हुआ लेकिन भांग का असर हर बीतते पल के साथ बढ़ ही रहा था ।

: रोहन !!
: जी मम्मी ?
: वो जरा अपने पापा का गमछा देना ( उन्होंने हाल के वाल हैंगर पर टंगे पापा के गमछे की ओर देख कर कहा )
मैने उन्हें दिया और वो उन्होंने अपने सर पर अच्छे से लपेट दिया
: अह्ह्ह्ह्ह अब गर्माहट है और ठीक भी
: तो मै नहाने जाऊ
: हा नहा ले बेटा
मै नहाने के लिए अपने कमरे से कपड़े निकाले और इधर एकदम से हाल में टीबी का वॉल्यूम बढ़ गया और गाना भी एकदम ऐसा ही नाचने से खुद को रोक ही न पाओ

लूटा ऐ राजा, लूटा ऐ राजा

मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लुटा ए राजा



तभी बुआ के खिलखिलाने की आवाज आई और मै अपने बैग से कपड़े निकाल रहा था
" अरे कुसुम छोड़ न तेल जल रहा है हीही "

मेरे दिमाग में भी चूल होने लगी कि साला असल में बाहर क्या बवाल हो रहा है और फिर गाने की धुन ही ऐसे थे कि मस्ती में पूरा तन मन झूम रहा था मै झट से बाहर आया

"धरा न कमरिया में बड़ा मजा पाईबा
होठवा से होठवा तू जेतने सताइवा"

: हीही मार खाएगी कुसुम उम्ममम छोड़ मुझे हाहाहा ( बाहर आया तो देखा बुआ को मम्मी ने बाहों में भर रखा था और उनके लिप्स से अपने लिप्स लगाने की कोशिश कर रही थी और हस रहे थी )
: मस्ती में मन डोली जैसे खोलवा चोली ( मम्मी गाने के बोल चिल्लाते हुए बुआ के चूचों पर हाथ फिराने लगी और घुमा कर पीछे से पकड़ लिया) बटनिया बटनिया बटनिया खोला ऐ राजा
बटनिया खोला ऐ राजा
: अह्ह्ह्ह भक्क कुसुम छोड़ मुझे पगला गई है क्या हीही ( बुआ हस भी रही थी और अपने सीने पर ब्लाउज को पकड़े हुए थी लेकिन मम्मी की जबरजतसी नहीं रुकने वाली थी )

डर था कही मम्मी फाड़ ही न दे बुआ का ब्लाउज और नहीं कुछ हाथ आया तो उनकी साड़ी पकड़ कर खींच ली और गाने के बोल को दोहराते हुए नचाने लगी बुआ को पकड़ा कर

उफ्फ बुआ इस वक्त ब्लाउज पेटीकोट में आ गई थी , बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी और चर्बीदार थुलथुले कूल्हे पेटीकोट में खूब थिरक रहे थे
लंड वापस से अपना आकार लेना शुरू कर चुका था और तभी हाल का दरवाजा खुला और एकदम से पापा आ गए

बुआ ने अपने आप को इस हाल में देखा और झट से अपनी साड़ी उठा कर किचन में भागी

पापा आए और अगले ही पल उनके मुस्कुराहट ने बता दिया कि वो भी अपना डोज लेकर आए थे

: हो गया कल्याण अब ( मै खुद से बुदबुदा कर आया था )
मम्मी को नाचता देख पापा भी अपने कमर और सर पर हाथ रख कर मम्मी के साथ ठुमके लगाने लगे
लेकिन अभी तो स्थिति और फूहड़ होने वाली थी

: धड़के ला धक धक तोहरे ला छतिया ( मम्मी ने अपने छातियों पर हाथ रख गाने के स्टेप किए ) करा ऐ राजा तनि प्यार वाली बतिया ( फिर पापा से लिपट ही गई )
मम्मी तो जाने गाने की हीरोइन मोनालिसा ही बन गई थी , वही बोल्ड अंदाज वैसे ही डांस स्टेप या कुछ ज्यादा ही अश्लील

: ढिबरिया भुता दा ऐ राजा
कइ द अन्हर कोठरिया लहरिया लूटा ऐ राजा ( मम्मी ने अपने सर का गमछा खोलकर खुद को और पापा को उढ़ा लिया )
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा


सामने नजर गई तो उसपार से बुआ खड़ी थी किचन से झांक रही थी और इधर बाथरूम के पास मै
बीच हाल में उन दोनों ने गमछे में छिपकर एक दूसरे को चूमने लगे थे

इधर जैसे ही मेरी नजर बुआ से मिली मै मुस्कुरा कर उन्हें देखा और उन्होंने मुझे
बस फिर मै बाथरूम में चला गया लेकिन हंगामा अभी थमा नहीं था ... ये तो बस शुरुआत थी
मैने बाथरूम में पानी चालू कर कपड़े निकालने लगा और दरवाजा लगा दिया
इधर टीवी पर एक और गाना लग चुका था ... मुझे गाने की म्यूजिक से कुछ कुछ गाने का अंदेशा हो रहा था लेकिन टोटी से पानी बाल्टी में गिरने की आवाज से आवाज उतनी साफ नहीं थी , फिर पास में मोटर भी चालू था , अभी 4 5 मग पानी मैने अपने ऊपर डाला ही था कि गाने की बढ़ती म्यूजिक ने मुझे थोड़ा सा और रिझाया

मैने झट से टोटी ऑफ की ओर गाने की आवाज आई
गाना भी सुपरहिट था , खेसारीलाल यादव का "लहंगा उठावल पड़ी महंगा "

पढ़े वाला खातिर लभ के पढ़ाई हाऊ

पोखरा में बिछलाये वाला काई हाउ
लइकन के चूसनी , जवनकन के मिसनी

तू तो बूढ़वन के आंख के दवाई हाउ


साला लिरिक्स ऐसे थे कि दिल गार्डेन गार्डेन हुआ जा रहा था , ये सोच कर कि इस गाने पर बाहर क्या माहौल मचा होगा , लेकिन पानी डालने से रंग मेरे देह पर फैलने लगा और उधर गाना चालू हो गया था

मैने झट से पूरी बाल्टी पानी उठा कर अपने देह पर उड़ेल ली और हौले से दरवाजा खोला तो
गाना फुल वॉल्यूम पर मेरे कानो को हिट किया और आंखे सामने के नजारे देख कर चमक उठी


: चुनरी हटाई का ( मम्मी ने अपने छातियों से पल्लू झटका और अपनी कमर को ऐसे बलखाया फिर वो का बयां नहीं कर सकता था ) चीज कुछ दिखाई का ( उन्होंने अपने जबरजस्त जोबन को ब्लाउज में पापा के सामने लहराया )

उफ्फ पापा ने तो लपक कर मम्मी की साड़ी पकड़नी चाही तो मम्मी पूरा नाच गई फिरकी की तरह और उनकी साड़ी पूरी फर्श पर और पापा ने उनको अपनी बाहों में झुला दिया और हैरत की बात थी कि पापा को गाने के बोल डिट्टो याद थे
मम्मी सही कहती थी पापा बड़े छुपा रुस्तम है बस दिखाते नहीं है लेकिन रोमांस भरा पड़ा है उनमें

: ऐसे उठाईबु जब लहंगा ( सीईईई पापा ने तो मम्मी का पेटीकोट उठाने लगे पीछे से ) हंगामा पूरा हाल में होई
मम्मी की जांघें पीछे से दिखने लगी थी और पापा ने पजामे में बड़ा सा तंबू बन गया था । तभी सामने नजर गई तो बुआ भी किचन से झांक रही थी और मैने झट से अंदर हो गया ।


फटाफट से पानी डाल कर अपना बदन रगड़ने लगा और मन ही मन पापा मम्मी का ये नया रूप देख कर पूरी बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी । बाहर गाना चालू था और रह रह कर मेरा मन ललचा रहा था ।
वक्त बीत रहा था और मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा था , हाथ भले न खाली हो लेकिन दिमाग पूरी तरह से बाहर लगा हुआ था
समझ नहीं आ रहा था क्या करु
तभी मेरी नजर बाथरूम की दूसरी बाल्टी पर गई और मैने झट से उसको उल्टा कर बाथरूम के दरवाजे के पास लगाया और बाथरूम के दरवाजे की जाली से बाहर देखने लगा

सामने बुआ अभी भी किचन से झांक ही रही थी और मम्मी पापा को तो जैसे किसी से कोई डर फिकर ही गई , नसे में सब मस्त थे और हस हस के नाच रहे थे


Gi-UHhwl-Xo-AAt-Rjs
: चीज देखते ही जोश मन में भर जाई हो ( मम्मी ने अपने ब्लाउज के दो हुक चटकाते हुए पापा की ओर बढ़ी ) सबकर पैसा लगवाल राजा तर जाए हो
मम्मी की हरकत पर बुआ ने तो अपना माथा पकड़ लिया और अगले ही पल पापा के गाने बोल दोहराते हुए अपने कंधे से गमछा एक हाथ से झटका
: तोहरा पावे ला पर्दा भी फाड़ दिहे हो ( एकदम उन्होंने उस गमछे को बीच से चीर दिया )

अरे साला ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है , और तभी देखा सामने बुआ वैसे ही ब्लाउज पेटीकोट में भागी आई और मम्मी को पकड़ कर किनारे करते हुए डांटने लगी , गाने की आवाज में उनकी आवाज साफ नहीं थी लेकिन एक परवाह भरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था
लेकिन मम्मी को कहा फर्क पड़ रहा था वो तो बुआ को पकड़ कर वापस खींच ली डांस करने के लिए लेकिन तबतक सब गाना खत्म हो गया था

: अरे दीदी नाचो न
: अरे तुम लोगो को कुछ लाज है कि नहीं रोहन बाथरूम में नहा रहा है और ये तुम क्या दिखा रही हो बंद करो ( बुआ ने मम्मी के ब्लाउज पकड़ कर उनको डांट लगाई )


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पापा एकदम से शांत हो गए और उनकी नजरे तो बस बुआ के हल्के गिले पेटीकोट पर थी बड़े भड़कीले चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ।

ऊऊऊ बड़ा ही कोल्ड मोमेंट हो गया था
: और तू विजय , नहाना नहीं है क्या
पापा ने बस मुस्कुरा दिया और सामने से बुआ की बड़ी बड़ी रसीली छातियां देखने लगे जो बड़ी मुश्किल से सेट हो रहे थे उनके ब्लाउज में । पापा बस चुपचाप अपने कमरे में चले गए
लेकिन यहां टीवी पर एक और गाना शुरू हो गया था ,

मै भी अब चुपचाप बाल्टी से उतरने का सोच रहा था क्योंकि शरीर का साबुन सुख रहा था

"चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी

चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी
मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी

: नहीं कुसुम मारूंगी अब तुझे , अरे हीही ( मै तो एक पैर वापस बाल्टी से उतार ही चुका था लेकिन जैसे ही बुआ की आवाज आई मेरा ध्यान वापस से हाल में )
: मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी ( मम्मी वापस से बुआ को पकड़ कर डांस करने लगी थी हस हस कर अपने कूल्हे उछालते हुए ) बस एक गाना दीदी बस एक

बुआ की दोनों कलाइयों को मम्मी ने पकड़ कर उठा रखा था और अपने कूल्हे से उनके चर्बीदार कूल्हे पर झटके दे रही थे , दोनो के कूल्हे टकराते लेकिन प्रतिक्रिया उन्होंने ढीले ब्लाउज में रसीले जोबनों पर देखने को मिलती खूब हिलकोरे खा कर दोनों की मुलायम छातियां हिलती ब्लाउज में
आखिर मम्मी बुआ को अपने रंग में मिला ही लिया और गाने की म्यूजिक पर बुआ के भी ठुमके लगने शुरू हो गए और इधर पापा उनके कमरे के दरवाजे के पास हाथ में तौलिया लिए खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे
मम्मी की नजर उनपर गई तो उन्होंने पापा को भी खींच ही लिया और एक हाथ से पापा का हाथ और दूसरे हाथ से बुआ का हाथ पकड़ उनके सामने नाचने लगी

"एह उमर बा प्यार करे के, डरबा कौने बात के
मिलल बा मौका मकैया में चला, लूटा लहर मुलाकात के"
मम्मी ने हस कर बुआ को इशारे किए, दोनो भाई बहन खूब शर्मा रहे थे और पापा के पजामे में एकदम टाइट तंबू साफ साफ दिखाई दे रहा था

: ले ला इनके अंकोरी में, रस पइबा राजा जी ( मम्मी ने बुआ को पकड़ कर पापा की ओर झटका और बुआ एक फिरकी घूम कर खुद को संभालते हुए पापा की बाहों में और उनके रसीले मम्मे हच्च से पापा के सीने पर धंस गए ) जेतना सटबा ओतना मस्ती मजा उठइबा राजा जी

मम्मी ने बुआ को पापा की ओर और धकेला और दोनों दिवाल से चिपक गए , ऐसा हुआ ही नहीं होगा कि पापा के कड़े लंड की ठोकर बुआ को अपने चूत या जांघ पर महसूस नहीं हुई हो ।
फिर मम्मी घूम कर पापा के पास खड़ी हो गई उनके कंधे पर हाथ रख कर , बुआ लाज के मारे मुस्कुराते हुए सीधी होने लगी

:चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी

चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी
मजा मारे इनके संगे ( बुआ को दिखा कर मम्मी मुस्कुरा कर गाना गाते हुए बोली ) , चला मकैया में राजा जी

: भक्क पागल हो तुम लोग , कमीनी कही की हट ( बुआ एकदम से लजा कर मम्मी के हाथ झटक पापा से अलग हो गई )

मम्मी एकदम से खिलखिला हसने लगी और पापा को पकड़ नीचे वही बैठ गई , देखता कोई उन्हें पागल ही समझता ऐसी हालत थी ।
मै मुस्कुरा रहा था और मेरा लंड भी
इधर मेरे देह का साबुन सुख गया था और पेशाब भी लगाने लगी थी कबसे गिले होने की वजह से

लेकिन तभी मम्मी और पापा के बीच कुछ हंसी ठिठौली हुई और मम्मी ने उन्हें आंखे दिखाई । पापा हस कर ना नुकूर कर रहे थे
साला अब क्या नया ड्रामा होने वाला था , एक भीतर की बेचैनी और दूसरी ओर पेशाब का जोर

मैने जल्दी से उतर कर अपना लंड हल्का कर दिया मोटी धार निकल पड़ी , उधर गाना वैसे ही बज रहा था लेकिन शांति थी

एकदम से हाल में हल्ला गुल्ला होने लगा और बुआ ने मुझे आवाज देना शुरू कर दिया

: रोहन हीही हाहाहाहाहा कुसुम नही मारूंगी अब ज्यादा हो रहा है , देख विजय छोड़ अह्ह्ह्ह
: हाहाहाहा होलीईईईईई हैएएएएए हीहेहेहे ( मम्मी की आवाज आई )
: बस बस हो गया कुसुम छोड़ दे ( पापा ने मम्मी को कहा )
: अरे दीदी लगवा लो न रात में तो मल मल के बुकवा लगवाई, थोड़ा आप भी लगाओ जी दीदी को
: क्या ?? नहीं विजय हीहीहेहे ( बुआ खिलखिलाई )


अबे क्या बवाल हो गया है मैने आंखों से साबुन हटा साफ कर दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा ही अलग था
मम्मी ने फिर से होली शुरू कर दी थी


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और पापा बुआ को पीछे से पकड़ कर खड़े थे , मम्मी ने अपने हाथों का गाढ़ा रंग पापा के हाथों में चिपका दिया और पापा ने पीछे से बुआ को दबोचे हुए बुआ के नंगे पेट पर हाथ रगड़ने लगे
बुआ बेबस खिलखिलाती रही हंसती रही , उनका मुंह पूरा हरा हो गया था

तभी बुआ ने एकदम से चिल्लाई : नहीं कुसुम लग जाएगा पैर छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह नहीं हीहीहीहेही छोड़ से हरामीन , पगला गई है क्या अह्ह्ह्ह्ह
मम्मी हंसते हुए बुआ की पेटीकोट में हाथ डाल कर उसके हाथ उनकी जांघें रंगने लगी

: रुक कामिनी तुझे बताती हूं अब
मम्मी खिलखिला कर हसने लगी और बुआ जबरन पापा से हाथ छुड़ा कर अलग हुए ओह साला पापा का लंड एकदम रॉड जैसे तना हुआ पजामे में और बुआ के गिले पेटीकोट में जितने अंदर धंसा था उतना दूर उनके सफेद पजामे पर बुआ के पेटीकोट का रंग पापा के पजामे पर चढ़ गया था ।
इधर बुआ मम्मी को पकड़ कर फर्श पर लेट गई और उनके ऊपर चढ़ कर अपने पेट का गाढ़ा रंग मम्मी के पेट पर मलने लगी


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मम्मी के ऊपर चढ़ने से बुआ की गाड़ पेटीकोट में और विस्तार ले चुकी थी और वही मैने पापा को देखा अपना लंड खुजाते हुए बुआ को पीछे से देख रहे थे
गिले पेटीकोट में उनकी पहाड़ जैसे भड़कीले चूतड़ों का सेप उभार और गोलाई साफ झलक रही थी यहां तक कि उनकी गहरे दरारें भी

फर्श पर बुआ और मम्मी की खिलखिलाती हाथापाई हो रही थी
मेरा लंड एकदम बगावत पर आ गया था

: नहीइइ दीदी फट जायेगा हीहीही हाहाहाहा
: तो फट जाने दे लेकिन तुझ ... बुआ ने हाथ आगे कर मम्मी ने ब्लाउज में जबरन हाथ घुसाने लगी
मम्मी खिलखिलाती हुई पापा का आवाज देने लगी
पापा भी मम्मी की मदद को आगे आए और पीछे से बुआ को पकड़ कर उठाने लगा पहले बाजुओं से पकड़ कर प्रयास किया लेकिन बुआ ने झटक दिया : छोड़ विजय मुझे ... इसकी मस्ती अभी बताती हूं

: अह्ह्ह्ह्ह दीदी हीहीहेहेहे , अरे पकड़ो न जी दीदी को ( मम्मी खिलखिला रही थी)
पापा ने दुबारा से बुआ को पेट के पास से पकड़ कर उठाना चाहा तो उनका हाथ फिसलने लगा और इस बार उन्होंने अपना पंजा ऊपर कर लिया और एकदम से उनके हाथों में बुआ के मोटे बड़े बड़े रसीले मम्में नंगे आ गए


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क्योंकि मम्मी के साथ हाथापाई ने कभी बुआ के ब्लाउज के हुक चटक गए उन्हें भनक ही नहीं थी

जैसे ही बुआ को अपने नंगे चूचों पर पापा के हाथों का स्पर्श मिला वो हिचक कर रुक गई और पापा ने मौका देख कर उन्हें पकड़ कर खींच दिया पीछे

मम्मी मौका पाकर अपनी खुली ब्लाउज को पकड़े हुए हसने लगी और सामने देखा तो बुआ के दोनों चूचों नंगे हवा में झूल रहे थे और उनके गोरे मोटे चूचों पर दोनों तरफ से पापा के पंजों के निशान छप गए थे


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पापा ने एक नजर बुआ को देखा और फिर नजरे फेर कर खिसक लिए बाहर ,शायद ऊपर वाले बाथरूम की ओर

इधर मम्मी खिलखिला कर हसी जा रही थी और ना चाहते हुए भी बुआ मम्मी को देख कर हस पड़ी क्योंकि उन्हें भी पता था इस पागलपंती में वो भी शामिल थी तो परिणाम जो भी हो .... होली है !!!!!


जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं होली के रंग फीके नहीं पड़ेंगे और न ही आपके सपोर्ट के रंग भी .... मन गदगद हुआ हो तो पढ़ने के बाद लाइक कमेंट जरूर करें .. इंतजार मुझे भी होता है 😁 )
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक मजेदार अपडेट है भाई मजा आ गया
ये होली अपना एक अलग ही रंग सामने ला रहीं हैं
देवर भाभी यानी नितु और रोहन तो वही घर पर रोहन की मम्मी अपने पती के साथ मिलकर ननंद राणी की धमाचौकडी वाली मजाक मस्ती
बडा ही जबरदस्त अपडेट हैं
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

rajeev13

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UPDATE 019




होलीईईईईई हैएएएएए......

नीतू भाभी के साथ आई दूसरी औरतों ने भी मुझे घेर लिया था वही हाल में
किसी के हाथ मेरे टीशर्ट में थे तो किसी के गाल और बालों पर
" अरे नहीं भाभी हीहीहेहे वहा नहीं " , मै ऐंठने लगा क्योंकि उन औरतों में से एक ने मेरे लोवर को पीछे से लास्टिक खींच कर चूतड़ को लाल कर दिया था

" आराम से रहो नहीं तो खड़े खड़े तुम्हारी बहनिया पेल दूंगी " , नीतू भाभी अबीर से नहाई हुई थी और उनके खिले चेहरे , मस्ती में मुझे घूरती कातिल निगाहे
शिफॉन की साड़ी में ढीली ब्लाउज और गहरे गले की ब्लाउज से झांकते चूचे अबीर गुलाल से सन कर और भी मुलायम जान पड़ रहे थे


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" सीई देखो बहनचोद को अभी भी खूंटा टाइट है इसका ", नीतू भाभी ने मुझे दिवाल से चिपका कर लोवर में झूल रहे लंबी पिचकारी को को देख कर बोली

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, लेकिन मेरी निगाहे तो उनकी गुदाज चर्बीदार मोटी रसीली चुचियों पर था

" लेना है ? " , वही पुराने अंदाज में नीतू भाभी ने फिर से आग्रह किया और मै मुस्कुरा उठा । सालों पहले उनकी रसीली छातियां मुंह में भर कर उनके दूध का स्वाद लिया था और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा ।
मुस्कुरा कर मैने मम्मी बुआ को देखा जो दूसरे औरतों के साथ व्यस्त थी और शरारती नजरो से हुंकारी भर दी
अगले ही पल मेरी कालर पकड़ कर सीधा मेरा मुंह अपनी छाती में रगड़ दिया और उनके छातियों पर लगे अबीर से मेरा चेहरा रंगीन हो गया और मौका देखकर हाथ बढ़ा कर उन्होंने लोवर के ऊपर से मेरा लंड दबोच लिया
: अह्ह्ह्ह्ह भाभी आराम से
: बहनचोद आज नहीं आए न तो पक्का तुम्हारी बहिनिया को रंडी बनवाऊंगी अगली होली में , समझे ...ठीक 03 बजे

एक आखिरी अल्टीमेटम देकर उसने मेरे आड़ छोड़ दिए और पूरे जिस्म में सिहरन थी और मेरी नजर उसकी हल्की गुलाबी साड़ी में थिरकते चूतड़ों पर गई , कातिल चीज थी नीतू भाभी
इनके जिस्म की असल नुमाइश तो इन्हें भीगा कर करने में थी और मैने उन्हें इशारा किया कि आपकी इकलौती ननद और मेरी बहन छत पर है दबोच लो
होली भाभियों को दो ही तो चाहिए एक देवर दूसरी कमसीन नन्द , उन्हें उनके रसीले मम्मे गुलाबी करने में मजा आता है और मुझे ऐसे सिन देखने में ।

पानी वाले रंगों के लिए मम्मी ने पहले से डायरेक्शन दे दिए थे कि होली छत पर ही होगी तो मैने भी अपने हथियार कर रखे थे
बुआ को जैसे ही भनक हुई कि लोग ऊपर जा रहे है तो मम्मी भी उनके साथ ऊपर हो ली
पापा हाल में सोफे पर बैठे थे अबीर से सराबोर, उन्हें भी मुहल्ले की औरतों ने खूब रंगा और मुझे बोलकर बाहर चले गए दोस्तो से मिलने ।
मैने भी रूम से गहरे वाला पक्का रंग निकाला और हाल का दरवाजा बंद कर ऊपर टैरिस पर
खूब हल्ला गुल्ला मचा हुआ था
बबली के ऊपर क्या नीचे क्या , नीतू भाभी तो अगुवा कर रंग कम रही थी और रगड़ ज्यादा

: हाय राम मेरी बच्ची ( बुआ उसकी हालत देख कर घबराई )
: अरे होली है दीदी क्या तुम भी ( मम्मी ने उन्हें शांत किया )
: मम्मी ??
: हा क्या हुआ
मैने उन्हें पक्के रंग का पैकेट दिखाया और मम्मी मुस्कुरा उठी
मै झट से बाथरूम में बाल्टी में पानी में घोलना शुरू किया और एक लंबी पिचकारी में भर
: आज इस नाउन की पतोह को छोड़ना नहीं है
: अरे बिल्कुल ( मैने हस कर मम्मी की बात का जवाब दिया और औरतों की झुंड की ओर लपका )


भाभीईईईई ...
मै जोर से पिचकारी उठा कर चिल्लाया
एकदम से नीतू भाभी ने हमे देखा
मै मम्मी और बुआ तीनों के हाथों में लंबी बड़ी पिचकारी ,, सामने मुहल्ले की दूसरों औरतों का झुंड

जीने का दरवाजा भी बंद और बगल के ही एक हांडे में भरपूर गहरा पक्का रंग
सब जान गए कि मैने उन्हें अच्छे से उल्लू बनाया
हल्ला गुल्ला जोरो पर था

" मम्मीईईई अटैक हाहाहाहाहा"
बुआ और मम्मी ने एक साथ पिचकारी दागी और मै भी उन औरतों की ओर तान दिया लेकिन मेरा निशाना नीतू भाभी थी
शातिर थी बड़ी चालाक , खींच कर बबली दीदी को ढाल बना कर अपने आगे कर दिया


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छरछरा कर ठंडे पानी की बौछार उनके मोटे नारियल जैसे चूचों पर चल गई : रोहन!!!!!
दीदी खिलखिला कर चिल्लाई
" उप्स सॉरी"
मैने वापस से अपनी पिचकारी लोड की और भाभी बचती हुई दिखी मैने भी उन्हें पीछे की ओर दौड़ा लिया

" अह नहीं रोहन बाबू ठंडा है अह्ह्ह्ह हीहीहीही रुको न "
वो खिलखिलाती हुई हाथ आगे कर रंगो की पिचकारी रोकने का प्रयास की लेकिन मेरा निशाना अचूक था


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चट्ट चट्ट कर 3 4 मोटी धार मैने सीधे उन्हें गुलगुले चूचों पर मारे पूरी साड़ी ट्रांसपेरेंट सी हो गई , अंदर से ब्लाउज दिखने लगी और ठंडे पानी की सिहरन ने निप्पल तान दिए

: आहुच मम्मी... सीईईई ( पंजों से उन्होंने अपनी छाती पकड़ ली और मै खिलखिलाया )
लेकिन अब भागने की बारी मेरी थी
उधर मुहल्ले की औरतें वापस मम्मी बुआ पर भारी पड़ गई थी
: बहिनचोद भाग कहा रहे हो
उन्होंने मुझे पकड़ कर वही बिठा दिया और हांडे से जग में भर भर मुझे नहलाने लगी
तबतक बबली दीदी आई और एकदम से मेरे ऊपर रंग गिरना बंद हुआ
बबली ने नीतू भाभी के चेहरे को हरा कर दिया और मैने भी उन्हें खींच कर नीचे लिटा दिया और रंगीन पानी गिराने लगा , कभी उनके चूचों पर तो कभी पेट पर । पल्लू तो सीने से ऐसे चिपका था कि मालूम हो रहा था कि है ही नहीं
वो छटपटाती खिलखिलाती रही और बुआ मम्मी मेरी हरकत देख रही थी
बबली ने मुझे इशारा किया और मै चुप हो गया
रंग खत्म हो गया , बाल्टियां हांडे सब खाली
हंसी ठिठौली चालू थी
रंगो से सब सराबोर हो गए
मम्मी बुआ की साड़ी भी देह से एकदम चिपक गई थी ,


कुछ औरतें बाथरूम में मुंह धूल रही थी कुछ पाइप से
मेरी निगाहे नीतू भाभी पर , अपनी शिफॉन की साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी , असल हुस्न का दीदार तो अब हुआ था उनका , रसीले मम्में और चूतड़ एकदम शेप में देख रहे थे साड़ी भीग कर लगभग ट्रांसपेरेंट हो गई थी


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और रंगीन चेहरे पर मुस्कुराहट अलग ही खिल रही थी
मम्मी बुआ रेलिंग के पास खड़े होकर मुहल्ले की नुक्कड़ पर लगी डीजे पर नाचते टाऊन के फूहड़ों को देख रही थी । बबली दीदी बाथरूम में अपने बाल धूल रही थी , असल में ऐसा रंग उन्होंने पहले कभी खेला ही नहीं था
मम्मी बुआ बिंदास थी और मुझे अब भूख भी लग रही थी लेकिन नीतू भाभी की शरारती मुस्कुराहट और गीली जवानी को ताड़ना कैसे छोड़ सकता था ।

: बहनचोद ( वो बुदबुदाई और मै मुस्कुराया )
आज तो उनकी गाली ने हर बार मेरे लंड में जोश भरने का काम किया था । कुछ अलग ही तलब थी , शायद बबली दीदी के साथ हुए कल रात की कहानी ने मुझ में बदलाव ला दिए थे ।
थोड़ी देर सब लोग सूखने लगे , दोपहर चढ़ रही थी और मम्मी सबको नीचे ले कर आई नाश्ते के लिए, बबली दीदी अपने कपड़े लेकर चली गई नहाने के लिए उन्हें अपने देह से रंग छुड़ाना ज्यादा जरूरी लगा , बजाय कि गपशप के ।

मिठाइयों का दौर शुरू हो गया, कुछ मम्मी ने अपने हाथों की बनी खिलाई तो कुछ उन औरतों ने अपने डिब्बे से मम्मी को
मै भी लपक कर उन्हीं डिब्बों से मिठाई उठाने का सोचा कि नीतू भाभी ने हाथ पकड़ लिया और ना में इशारा किया , बुआ उस वक्त किचन ने चाय बना रही थी
इशारा साफ था मिठाई भांग वाली थी और आज नीतू भाभी कोई बहाना नहीं चाह रही थी
चाय नाश्ते का दौर खत्म होते ही बाकी सब चली गई और जाते हुए नीतू भाभी ने आंखों से वार्निंग दे दी मुझे
कमरे आया तो देखा मम्मी वापस से उसी डिब्बे की मिठाई गपक ली
: अरे दीदी लो न
मैने झपट कर मम्मी के हाथ से डिब्बा ले लिया
: अरे क्या हुआ
: अरे मम्मी भांग वाली है
: धत्त मैने तो 3 खाई है ऐसा तो कुछ नहीं हुआ मुझे ( उनकी स्माइल बड़ी हो रही थी और फिर भौहें टाइट कर उन्होंने बुआ को देखा ) दीदी आपको कुछ हुआ क्या ?
: मैने तो नहीं खाई .. ला देखूं ( बुआ ने हाथ बढ़ाया लेकिन मैने डिब्बा बंद कर दिया )
: अरे रोहन !!!
: नहीं बुआ ये नहीं ( मैने हाथ पीछे कर उसे किचन में रख दिया ऊपर रैक पर )
बुआ मेरे पास आई
: क्या ये सच में भांग वाली है
: उधर देखो उनको हीही ( मैने उन्हें मम्मी की ओर दिखाया जो अजीब सा मुंह बना कर डकार लेते हुए कमर पर हाथ रख कर रिमोट से टीवी चला रही थी । )
: हैं? अरे भगवान् अब क्या होगा ( बुआ घबड़ाई )
: भांगड़ा हाहा ( मै हस कर बोला और उधर मम्मी ने गाना लगा दिया ) हर साल पापा करते थे इस साल मम्मी हीहीही

टीवी पर होली के भोजपुरी गाने चालू हो गए और मम्मी टहलती हुई किचन में

: क्या हुआ तुम लोग ऐसे क्यों देख रहे हो ? ( मम्मी ने हस कर कहा )
हम बस शांत थे , बुआ किचन में भीड़ कर पूरी निकालने के लिए क्योंकि मुझे भूख लगी थी

: अरे तो जा नहा ले ऐसे खायेगा क्या ( मम्मी के भाव पर अब ओवर रिएक्शन से जाहिर हो रहे थे )
: कुसुम !!! क्या चिल्ला रही है ( बुआ ने डांटा तो मम्मी उनको पीछे से पकड़ने लगी टीवी पर चल रही भोजपुरी गाने की लिरिक्स को दोहराते हुए

: झूठार देहले राजा जी , चढल जवानी के दहिया
: धत्त हट छोड़ मुझे ( बुआ एकदम से मम्मी के चिपकने और उन्हें सहलाने से शर्माने लगी उसपर से वो गाना )
: झूठार देहले राजा जी अपने बहिन के जवानियां हीहीहीही हाहाहा

अजीब सी क्रिपि हंसी थी मम्मी की और ये तो बस शुरुआत था
बुआ असहज होकर मुझे देख रहे थी और हम समझ रहे थे कि आज बड़ा हंगामा होकर रहेगा ।

: सीईई अह्ह्ह दीदी सच में भांग वाली थी क्या हाहाहा उफ्फ सर पकड़ रहा है अब तो
हम चुप थे और बुआ पुरिया बेल रही थी
: रोहन
: हा मम्मी ?
: बेटा तू सही कह रहा था थोड़ा तेल लगा देगा सर में
: अरे ऐसे कैसे बाल धुलने पड़ेंगे न ?
: अच्छा बाम लगा दे बेटा उफ्फ फड़क रहा पूरा सर
मुझे यही सही लगा और मैने उन्हें हाल में सोफे पर बैठा कर उनके सर पर बाम लगा कर मालिश की , उन्हें थोड़ा आराम हुआ लेकिन भांग का असर हर बीतते पल के साथ बढ़ ही रहा था ।

: रोहन !!
: जी मम्मी ?
: वो जरा अपने पापा का गमछा देना ( उन्होंने हाल के वाल हैंगर पर टंगे पापा के गमछे की ओर देख कर कहा )
मैने उन्हें दिया और वो उन्होंने अपने सर पर अच्छे से लपेट दिया
: अह्ह्ह्ह्ह अब गर्माहट है और ठीक भी
: तो मै नहाने जाऊ
: हा नहा ले बेटा
मै नहाने के लिए अपने कमरे से कपड़े निकाले और इधर एकदम से हाल में टीबी का वॉल्यूम बढ़ गया और गाना भी एकदम ऐसा ही नाचने से खुद को रोक ही न पाओ

लूटा ऐ राजा, लूटा ऐ राजा

मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लुटा ए राजा



तभी बुआ के खिलखिलाने की आवाज आई और मै अपने बैग से कपड़े निकाल रहा था
" अरे कुसुम छोड़ न तेल जल रहा है हीही "

मेरे दिमाग में भी चूल होने लगी कि साला असल में बाहर क्या बवाल हो रहा है और फिर गाने की धुन ही ऐसे थे कि मस्ती में पूरा तन मन झूम रहा था मै झट से बाहर आया

"धरा न कमरिया में बड़ा मजा पाईबा
होठवा से होठवा तू जेतने सताइवा"

: हीही मार खाएगी कुसुम उम्ममम छोड़ मुझे हाहाहा ( बाहर आया तो देखा बुआ को मम्मी ने बाहों में भर रखा था और उनके लिप्स से अपने लिप्स लगाने की कोशिश कर रही थी और हस रहे थी )
: मस्ती में मन डोली जैसे खोलवा चोली ( मम्मी गाने के बोल चिल्लाते हुए बुआ के चूचों पर हाथ फिराने लगी और घुमा कर पीछे से पकड़ लिया) बटनिया बटनिया बटनिया खोला ऐ राजा
बटनिया खोला ऐ राजा
: अह्ह्ह्ह भक्क कुसुम छोड़ मुझे पगला गई है क्या हीही ( बुआ हस भी रही थी और अपने सीने पर ब्लाउज को पकड़े हुए थी लेकिन मम्मी की जबरजतसी नहीं रुकने वाली थी )

डर था कही मम्मी फाड़ ही न दे बुआ का ब्लाउज और नहीं कुछ हाथ आया तो उनकी साड़ी पकड़ कर खींच ली और गाने के बोल को दोहराते हुए नचाने लगी बुआ को पकड़ा कर

उफ्फ बुआ इस वक्त ब्लाउज पेटीकोट में आ गई थी , बड़ी बड़ी मोटी मोटी चूचियां ब्लाउज में उछल रही थी और चर्बीदार थुलथुले कूल्हे पेटीकोट में खूब थिरक रहे थे
लंड वापस से अपना आकार लेना शुरू कर चुका था और तभी हाल का दरवाजा खुला और एकदम से पापा आ गए

बुआ ने अपने आप को इस हाल में देखा और झट से अपनी साड़ी उठा कर किचन में भागी

पापा आए और अगले ही पल उनके मुस्कुराहट ने बता दिया कि वो भी अपना डोज लेकर आए थे

: हो गया कल्याण अब ( मै खुद से बुदबुदा कर आया था )
मम्मी को नाचता देख पापा भी अपने कमर और सर पर हाथ रख कर मम्मी के साथ ठुमके लगाने लगे
लेकिन अभी तो स्थिति और फूहड़ होने वाली थी

: धड़के ला धक धक तोहरे ला छतिया ( मम्मी ने अपने छातियों पर हाथ रख गाने के स्टेप किए ) करा ऐ राजा तनि प्यार वाली बतिया ( फिर पापा से लिपट ही गई )
मम्मी तो जाने गाने की हीरोइन मोनालिसा ही बन गई थी , वही बोल्ड अंदाज वैसे ही डांस स्टेप या कुछ ज्यादा ही अश्लील

: ढिबरिया भुता दा ऐ राजा
कइ द अन्हर कोठरिया लहरिया लूटा ऐ राजा ( मम्मी ने अपने सर का गमछा खोलकर खुद को और पापा को उढ़ा लिया )
मुँहवा पे डाल के चदरिया
लहरिया लूटा ऐ राजा


सामने नजर गई तो उसपार से बुआ खड़ी थी किचन से झांक रही थी और इधर बाथरूम के पास मै
बीच हाल में उन दोनों ने गमछे में छिपकर एक दूसरे को चूमने लगे थे

इधर जैसे ही मेरी नजर बुआ से मिली मै मुस्कुरा कर उन्हें देखा और उन्होंने मुझे
बस फिर मै बाथरूम में चला गया लेकिन हंगामा अभी थमा नहीं था ... ये तो बस शुरुआत थी
मैने बाथरूम में पानी चालू कर कपड़े निकालने लगा और दरवाजा लगा दिया
इधर टीवी पर एक और गाना लग चुका था ... मुझे गाने की म्यूजिक से कुछ कुछ गाने का अंदेशा हो रहा था लेकिन टोटी से पानी बाल्टी में गिरने की आवाज से आवाज उतनी साफ नहीं थी , फिर पास में मोटर भी चालू था , अभी 4 5 मग पानी मैने अपने ऊपर डाला ही था कि गाने की बढ़ती म्यूजिक ने मुझे थोड़ा सा और रिझाया

मैने झट से टोटी ऑफ की ओर गाने की आवाज आई
गाना भी सुपरहिट था , खेसारीलाल यादव का "लहंगा उठावल पड़ी महंगा "

पढ़े वाला खातिर लभ के पढ़ाई हाऊ

पोखरा में बिछलाये वाला काई हाउ
लइकन के चूसनी , जवनकन के मिसनी

तू तो बूढ़वन के आंख के दवाई हाउ


साला लिरिक्स ऐसे थे कि दिल गार्डेन गार्डेन हुआ जा रहा था , ये सोच कर कि इस गाने पर बाहर क्या माहौल मचा होगा , लेकिन पानी डालने से रंग मेरे देह पर फैलने लगा और उधर गाना चालू हो गया था

मैने झट से पूरी बाल्टी पानी उठा कर अपने देह पर उड़ेल ली और हौले से दरवाजा खोला तो
गाना फुल वॉल्यूम पर मेरे कानो को हिट किया और आंखे सामने के नजारे देख कर चमक उठी


: चुनरी हटाई का ( मम्मी ने अपने छातियों से पल्लू झटका और अपनी कमर को ऐसे बलखाया फिर वो का बयां नहीं कर सकता था ) चीज कुछ दिखाई का ( उन्होंने अपने जबरजस्त जोबन को ब्लाउज में पापा के सामने लहराया )

उफ्फ पापा ने तो लपक कर मम्मी की साड़ी पकड़नी चाही तो मम्मी पूरा नाच गई फिरकी की तरह और उनकी साड़ी पूरी फर्श पर और पापा ने उनको अपनी बाहों में झुला दिया और हैरत की बात थी कि पापा को गाने के बोल डिट्टो याद थे
मम्मी सही कहती थी पापा बड़े छुपा रुस्तम है बस दिखाते नहीं है लेकिन रोमांस भरा पड़ा है उनमें

: ऐसे उठाईबु जब लहंगा ( सीईईई पापा ने तो मम्मी का पेटीकोट उठाने लगे पीछे से ) हंगामा पूरा हाल में होई
मम्मी की जांघें पीछे से दिखने लगी थी और पापा ने पजामे में बड़ा सा तंबू बन गया था । तभी सामने नजर गई तो बुआ भी किचन से झांक रही थी और मैने झट से अंदर हो गया ।


फटाफट से पानी डाल कर अपना बदन रगड़ने लगा और मन ही मन पापा मम्मी का ये नया रूप देख कर पूरी बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी । बाहर गाना चालू था और रह रह कर मेरा मन ललचा रहा था ।
वक्त बीत रहा था और मेरे पूरे बदन पर साबुन लगा था , हाथ भले न खाली हो लेकिन दिमाग पूरी तरह से बाहर लगा हुआ था
समझ नहीं आ रहा था क्या करु
तभी मेरी नजर बाथरूम की दूसरी बाल्टी पर गई और मैने झट से उसको उल्टा कर बाथरूम के दरवाजे के पास लगाया और बाथरूम के दरवाजे की जाली से बाहर देखने लगा

सामने बुआ अभी भी किचन से झांक ही रही थी और मम्मी पापा को तो जैसे किसी से कोई डर फिकर ही गई , नसे में सब मस्त थे और हस हस के नाच रहे थे


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: चीज देखते ही जोश मन में भर जाई हो ( मम्मी ने अपने ब्लाउज के दो हुक चटकाते हुए पापा की ओर बढ़ी ) सबकर पैसा लगवाल राजा तर जाए हो
मम्मी की हरकत पर बुआ ने तो अपना माथा पकड़ लिया और अगले ही पल पापा के गाने बोल दोहराते हुए अपने कंधे से गमछा एक हाथ से झटका
: तोहरा पावे ला पर्दा भी फाड़ दिहे हो ( एकदम उन्होंने उस गमछे को बीच से चीर दिया )

अरे साला ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है , और तभी देखा सामने बुआ वैसे ही ब्लाउज पेटीकोट में भागी आई और मम्मी को पकड़ कर किनारे करते हुए डांटने लगी , गाने की आवाज में उनकी आवाज साफ नहीं थी लेकिन एक परवाह भरा गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था
लेकिन मम्मी को कहा फर्क पड़ रहा था वो तो बुआ को पकड़ कर वापस खींच ली डांस करने के लिए लेकिन तबतक सब गाना खत्म हो गया था

: अरे दीदी नाचो न
: अरे तुम लोगो को कुछ लाज है कि नहीं रोहन बाथरूम में नहा रहा है और ये तुम क्या दिखा रही हो बंद करो ( बुआ ने मम्मी के ब्लाउज पकड़ कर उनको डांट लगाई )


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पापा एकदम से शांत हो गए और उनकी नजरे तो बस बुआ के हल्के गिले पेटीकोट पर थी बड़े भड़कीले चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ।

ऊऊऊ बड़ा ही कोल्ड मोमेंट हो गया था
: और तू विजय , नहाना नहीं है क्या
पापा ने बस मुस्कुरा दिया और सामने से बुआ की बड़ी बड़ी रसीली छातियां देखने लगे जो बड़ी मुश्किल से सेट हो रहे थे उनके ब्लाउज में । पापा बस चुपचाप अपने कमरे में चले गए
लेकिन यहां टीवी पर एक और गाना शुरू हो गया था ,

मै भी अब चुपचाप बाल्टी से उतरने का सोच रहा था क्योंकि शरीर का साबुन सुख रहा था

"चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी

चढ़ल जवानी बा सुनला, यही समइया में राजा जी
मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी

: नहीं कुसुम मारूंगी अब तुझे , अरे हीही ( मै तो एक पैर वापस बाल्टी से उतार ही चुका था लेकिन जैसे ही बुआ की आवाज आई मेरा ध्यान वापस से हाल में )
: मजा मारे हमार संगे, चला मकैया में राजा जी ( मम्मी वापस से बुआ को पकड़ कर डांस करने लगी थी हस हस कर अपने कूल्हे उछालते हुए ) बस एक गाना दीदी बस एक

बुआ की दोनों कलाइयों को मम्मी ने पकड़ कर उठा रखा था और अपने कूल्हे से उनके चर्बीदार कूल्हे पर झटके दे रही थे , दोनो के कूल्हे टकराते लेकिन प्रतिक्रिया उन्होंने ढीले ब्लाउज में रसीले जोबनों पर देखने को मिलती खूब हिलकोरे खा कर दोनों की मुलायम छातियां हिलती ब्लाउज में
आखिर मम्मी बुआ को अपने रंग में मिला ही लिया और गाने की म्यूजिक पर बुआ के भी ठुमके लगने शुरू हो गए और इधर पापा उनके कमरे के दरवाजे के पास हाथ में तौलिया लिए खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे
मम्मी की नजर उनपर गई तो उन्होंने पापा को भी खींच ही लिया और एक हाथ से पापा का हाथ और दूसरे हाथ से बुआ का हाथ पकड़ उनके सामने नाचने लगी

"एह उमर बा प्यार करे के, डरबा कौने बात के
मिलल बा मौका मकैया में चला, लूटा लहर मुलाकात के"
मम्मी ने हस कर बुआ को इशारे किए, दोनो भाई बहन खूब शर्मा रहे थे और पापा के पजामे में एकदम टाइट तंबू साफ साफ दिखाई दे रहा था

: ले ला इनके अंकोरी में, रस पइबा राजा जी ( मम्मी ने बुआ को पकड़ कर पापा की ओर झटका और बुआ एक फिरकी घूम कर खुद को संभालते हुए पापा की बाहों में और उनके रसीले मम्मे हच्च से पापा के सीने पर धंस गए ) जेतना सटबा ओतना मस्ती मजा उठइबा राजा जी

मम्मी ने बुआ को पापा की ओर और धकेला और दोनों दिवाल से चिपक गए , ऐसा हुआ ही नहीं होगा कि पापा के कड़े लंड की ठोकर बुआ को अपने चूत या जांघ पर महसूस नहीं हुई हो ।
फिर मम्मी घूम कर पापा के पास खड़ी हो गई उनके कंधे पर हाथ रख कर , बुआ लाज के मारे मुस्कुराते हुए सीधी होने लगी

:चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी

चाहे मचानिया पे करिहा, चाहे भुइंया में राजा जी
मजा मारे इनके संगे ( बुआ को दिखा कर मम्मी मुस्कुरा कर गाना गाते हुए बोली ) , चला मकैया में राजा जी

: भक्क पागल हो तुम लोग , कमीनी कही की हट ( बुआ एकदम से लजा कर मम्मी के हाथ झटक पापा से अलग हो गई )

मम्मी एकदम से खिलखिला हसने लगी और पापा को पकड़ नीचे वही बैठ गई , देखता कोई उन्हें पागल ही समझता ऐसी हालत थी ।
मै मुस्कुरा रहा था और मेरा लंड भी
इधर मेरे देह का साबुन सुख गया था और पेशाब भी लगाने लगी थी कबसे गिले होने की वजह से

लेकिन तभी मम्मी और पापा के बीच कुछ हंसी ठिठौली हुई और मम्मी ने उन्हें आंखे दिखाई । पापा हस कर ना नुकूर कर रहे थे
साला अब क्या नया ड्रामा होने वाला था , एक भीतर की बेचैनी और दूसरी ओर पेशाब का जोर

मैने जल्दी से उतर कर अपना लंड हल्का कर दिया मोटी धार निकल पड़ी , उधर गाना वैसे ही बज रहा था लेकिन शांति थी

एकदम से हाल में हल्ला गुल्ला होने लगा और बुआ ने मुझे आवाज देना शुरू कर दिया

: रोहन हीही हाहाहाहाहा कुसुम नही मारूंगी अब ज्यादा हो रहा है , देख विजय छोड़ अह्ह्ह्ह
: हाहाहाहा होलीईईईईई हैएएएएए हीहेहेहे ( मम्मी की आवाज आई )
: बस बस हो गया कुसुम छोड़ दे ( पापा ने मम्मी को कहा )
: अरे दीदी लगवा लो न रात में तो मल मल के बुकवा लगवाई, थोड़ा आप भी लगाओ जी दीदी को
: क्या ?? नहीं विजय हीहीहेहे ( बुआ खिलखिलाई )


अबे क्या बवाल हो गया है मैने आंखों से साबुन हटा साफ कर दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा ही अलग था
मम्मी ने फिर से होली शुरू कर दी थी


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और पापा बुआ को पीछे से पकड़ कर खड़े थे , मम्मी ने अपने हाथों का गाढ़ा रंग पापा के हाथों में चिपका दिया और पापा ने पीछे से बुआ को दबोचे हुए बुआ के नंगे पेट पर हाथ रगड़ने लगे
बुआ बेबस खिलखिलाती रही हंसती रही , उनका मुंह पूरा हरा हो गया था

तभी बुआ ने एकदम से चिल्लाई : नहीं कुसुम लग जाएगा पैर छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह नहीं हीहीहीहेही छोड़ से हरामीन , पगला गई है क्या अह्ह्ह्ह्ह
मम्मी हंसते हुए बुआ की पेटीकोट में हाथ डाल कर उसके हाथ उनकी जांघें रंगने लगी

: रुक कामिनी तुझे बताती हूं अब
मम्मी खिलखिला कर हसने लगी और बुआ जबरन पापा से हाथ छुड़ा कर अलग हुए ओह साला पापा का लंड एकदम रॉड जैसे तना हुआ पजामे में और बुआ के गिले पेटीकोट में जितने अंदर धंसा था उतना दूर उनके सफेद पजामे पर बुआ के पेटीकोट का रंग पापा के पजामे पर चढ़ गया था ।
इधर बुआ मम्मी को पकड़ कर फर्श पर लेट गई और उनके ऊपर चढ़ कर अपने पेट का गाढ़ा रंग मम्मी के पेट पर मलने लगी


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मम्मी के ऊपर चढ़ने से बुआ की गाड़ पेटीकोट में और विस्तार ले चुकी थी और वही मैने पापा को देखा अपना लंड खुजाते हुए बुआ को पीछे से देख रहे थे
गिले पेटीकोट में उनकी पहाड़ जैसे भड़कीले चूतड़ों का सेप उभार और गोलाई साफ झलक रही थी यहां तक कि उनकी गहरे दरारें भी

फर्श पर बुआ और मम्मी की खिलखिलाती हाथापाई हो रही थी
मेरा लंड एकदम बगावत पर आ गया था

: नहीइइ दीदी फट जायेगा हीहीही हाहाहाहा
: तो फट जाने दे लेकिन तुझ ... बुआ ने हाथ आगे कर मम्मी ने ब्लाउज में जबरन हाथ घुसाने लगी
मम्मी खिलखिलाती हुई पापा का आवाज देने लगी
पापा भी मम्मी की मदद को आगे आए और पीछे से बुआ को पकड़ कर उठाने लगा पहले बाजुओं से पकड़ कर प्रयास किया लेकिन बुआ ने झटक दिया : छोड़ विजय मुझे ... इसकी मस्ती अभी बताती हूं

: अह्ह्ह्ह्ह दीदी हीहीहेहेहे , अरे पकड़ो न जी दीदी को ( मम्मी खिलखिला रही थी)
पापा ने दुबारा से बुआ को पेट के पास से पकड़ कर उठाना चाहा तो उनका हाथ फिसलने लगा और इस बार उन्होंने अपना पंजा ऊपर कर लिया और एकदम से उनके हाथों में बुआ के मोटे बड़े बड़े रसीले मम्में नंगे आ गए


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क्योंकि मम्मी के साथ हाथापाई ने कभी बुआ के ब्लाउज के हुक चटक गए उन्हें भनक ही नहीं थी

जैसे ही बुआ को अपने नंगे चूचों पर पापा के हाथों का स्पर्श मिला वो हिचक कर रुक गई और पापा ने मौका देख कर उन्हें पकड़ कर खींच दिया पीछे

मम्मी मौका पाकर अपनी खुली ब्लाउज को पकड़े हुए हसने लगी और सामने देखा तो बुआ के दोनों चूचों नंगे हवा में झूल रहे थे और उनके गोरे मोटे चूचों पर दोनों तरफ से पापा के पंजों के निशान छप गए थे


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पापा ने एक नजर बुआ को देखा और फिर नजरे फेर कर खिसक लिए बाहर ,शायद ऊपर वाले बाथरूम की ओर

इधर मम्मी खिलखिला कर हसी जा रही थी और ना चाहते हुए भी बुआ मम्मी को देख कर हस पड़ी क्योंकि उन्हें भी पता था इस पागलपंती में वो भी शामिल थी तो परिणाम जो भी हो .... होली है !!!!!


जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं होली के रंग फीके नहीं पड़ेंगे और न ही आपके सपोर्ट के रंग भी .... मन गदगद हुआ हो तो पढ़ने के बाद लाइक कमेंट जरूर करें .. इंतजार मुझे भी होता है 😁 )
बड़ा गज़ब अपडेट था, भोजपुरी तड़का तो कमाल था,

वैसे आपको शायद ये गाना ज्यादा पसंद है इसलिए अपनी दूसरी कहानी सपना या हकीकत के अध्याय 02 के अपडेट 13 में भी आपने इसका उपयोग किया था,


वैसे आप भी बिहार से हो क्या ?
 
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DREAMBOY40

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नीतू भाभी की छलकती जवानी
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Coming soon 🥳
 
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