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Incest आर्या

Rishabhsingh

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ऋतु की बात सुनकर राधा जी अभी कुछ बोलती इससे पहले ही एक आवाज सुनकर वह दोनों चौक जाती है यह कोई और नही बल्कि सुनैना थी जो कि काफी देर से इन लोगो की बातों को सुन और देख रही थी ।यह बात अलग थी कि वह अभी घर मे कदम रखी है लेकिन उसे यह बात सुनने के लिए यंहा पर होना कोई जरूरी नही था तो वह बोली
सुनैना : ऋतु एक शब्द और नही बोलना मानसी के खिलाफ वरना तुम्हारी जिंदगी मैं नरक से भी बदतर कर दूंगी ।
सुनैना अपनी बेटी को इस हाल में देख कर उसके आंखों में आँशु आ गए ।मानसी कंहा पहले गुड़िया की तरह दिखती थी और कितनी मासूम सी थी किन्तु आज उसके चहेरे से मासूमियत गायब सी हो गयी थी । उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वह कितनी दिनों से भूखी हो तो वह बोली कि
सुनैना : तुम सब ने इस मासूम सी बच्ची पर इतना जुल्म किया कि इसकी मासूमियत ही छीन लिया तुम सबने ।
उसकी बात सुनकर ऋतु जो पहले से गुस्से में थी सुनैना की बातों ने उसमे घी का काम किया और वह भड़कती हुई बोली
ऋतु : तुम होती कौन हो हमारे बीच मे बोलने वाली और तू अंदर तक कैसे आ गयी।
ऋतु के इस तरह बोलने से मारिया आगे बढ़ कर कुछ बोलने को होती है लेकिन सुनैना उसे रोक देती है और बोलती है कि
सुनैना : मैं कौन हूं इस बारे में अगर तुम ना ही जानो तो अच्छा रहेगा तुम्हारे लिए और मुझे आने के लिए किसी के परमिशन की जरूरत नही है ।मैं तो यंहा पर अपनी बहन की बेटी को देखने के लिए आई हूं पर यंहा पर तो उस फूल सी बच्ची की क्या हालत बना दी है।
सुनैना कि बात सुनकर वह दोनों भी नही समझ पाती हैंकि उसके कहने का मतलब क्या है तो राधा जी बोलती है कि
राधा : बेटी तुम कौन हो मैंने तुम्हें पहचाना नही और कौन है तुम्हारी बहन ।
सुनैना :आंटी जी मैं अनुराधा बहन हु और पिछले तीन सालों से बाहर थी कल आयी तो मुझे सब कुछ पता चला तो मैं उसकी बेटी से मिलने के लिए आ गयी और यंहा पर यह इस लड़की को मार रही थी तो मुझसे देखा नही गया इसलिए बोल दी ।
उधर बाहर खड़ी गाड़ियों और उसके साथ हथियार बन्द आदमियो को देख कर किसी ने विनोद को खबर कर दी तो वह भी अपने अड्डे से तुरन्त घर की तरफ निकल लिया वहीं सुनैना की बात सुनकर ऋतु फिर से अपना मुंह खोली और बोली
ऋतु : अभी यह कलमुँही कम थी जो एक और आ गयी । आ तू भी मुफ्त की रोटी खा ले ।
उसकी बात सुनकर सुनैना हस्ती हैं और बोलती है कि
सुनैना : तू शायद खुद को बहुत बड़ा तोप समझती है लेकिन तेरी औकात मेरे सामने एक चींटी से ज्यादा नही है इसलिए तू अब अपना मुंह बंद रख और चिंता मत कर आज से मेरी बेटी यंहा पर नही रहेगी बल्कि मेरे साथ जाएगी।
उसकी बात सुनकर जंहा ऋतु खुश हो जाती है वही राधा थोड़ी चिंता में पड़ जाती है। उसे इस तरह चिंता में देख कर सुनैना बोलती है कि
सुनैना : आंटी जी आप बिलकुल भी चिंता ना करे मेरे पास सब कुछ है बस कोई अपना कहने वाला कोई नही है ।अब दीदी की लड़की को अपनी बेटी बना कर पालूंगी और आप जब भी याद करेंगी मैं इसे आपसे मिलने के लिए खुद लेकर आउंगी।
वही जब विनोद घर के बाहर इतनी सारी गाड़िया देखता है और वह भी एक से बढ़कर एक महंगी गाड़िया तो उसके होश ही उड़ जाते है और वह सोचता है कि कौन है जो आया है यही सब कुछ सोचते हुए वह घर मे दाखिल होता है और जैसे ही उसकी नजर मारिया पर पड़ती है उसके होश उड़ जाते है क्यूंकि उसके भी माफिया से है और वह मारिया को कई मीटिंग में देख चुका है और उसके बारे में उसे पता है कि सभी माफिया की बॉस है वह उसे खुद के घर मे पाकर उसके होश ही उड़ जाते है फिर उसकी नजर सुनैना पर पड़ती है तो वह उसे देखते ही रह जाता है ।फिर खुद को संभाल कर वह मारिया के पास जाता है और बोलता है
विनोद : मैम आप मुझ गरीब के घर पर अगर कोई काम था तो मुझे आदेश कर दिया होता यह गुलाम वह काम खुद कर देता आपको यंहा तक आने की कष्ट नही करना पड़ा होता।
वही ऋतु और राधा दोनो यह देखकर चकित रह जाती है कि जो विनोद किसी से सीधे मुह बात नही करता है वह दूसरी वाली लड़की के सामने हाथ जोड़े खड़ा है ।वही विनोद के बोलने से मारिया का ध्यान उसकी तरफ जाता है और वह उसे देख कर ही उसके बारे में सब कुछ जान जाती है तो वह बोलती है
मारिया : नही मिस्टर बिनोद वह मैडम को अपनी बहन की लड़की से मिलने और उसे खुद के साथ ले जाने के लिए आई है ।
जब विनोद सुनता है कि इसकी भी बोस आयी है साथ में जिसे कुछ गिने चुने लोगो के अलावा और कोई नही देखा है तो वह यह सुनकर बहुत खुश होता है और बोलता है
विनोद : तो क्या बड़ी मैडम भी आई हुई है क्या नाम है उनका है सुनैना जी।
सुनैना उसकी बात सुन लेती है और बोलती है
सुनैना : हा मिस्टर बिनोद मैं भी यही पर हु और इस वक्त मैं तुम्हारी हरकतों की वजह से मेरा दिमाग पहले से ही हिला हुआ है जो गलती तुमने की थी वह तो अभी तक सुधारी नही है और यंहा तुम्हारे घर मे एक मासूम बच्ची पर जुल्म हो रहा है और तुम उसे भी नही रोक रहे हो ।


मारिया :देख तू झूठ बोलने की कोशिश तो बिल्कुल भी मत करना क्यूंकि यह बात तो अच्छी तरह से जानता है कि अगर मैं खुद पर आ गयी तो पत्थर को जुबान खुलवा लेती हूं और तू तो जीता जागता है इसलिए सच बोल
विनोद : मैडम हमे माफ कर दे हमसे गलती हो गयी ।हा मैं मानता हूं कि हमसे गलती हो गयी है हमने जान बूझ कर यह सब कर रहे थे क्यूंकि भैया ने अपनी पूरी सम्पति इसके नाम कर दिए है इसलिए मैं बचपन से ही इसे
दबाव में रख रहा था ।

उसकी बात सुनकर जंहा पर राधा सॉकड रह जाती है वही सुनैना बोलती है
सुनैना : तूने जिस सम्पति के लिए इसके ऊपर जुल्म किया वह मैं तुझे बिख के रूप में दे रही हु और तू यह मत सोचना की मैंने तुझे माफ कर दिया बल्कि तुझे समय दे रही हु की तू अपने बचाव के लिए जो चाहे कर ले क्यूंकि तुझे सजा मैं नही बल्कि यही लड़की देगी जिसके ऊपर तूने जुल्म किया है ।
इतना बोल कर वह राधा जी की तरफ मुडती है और उनसे बोलती है
सुनैना : आंटी जी आप ने मेरी बच्ची के लिये इतना सोची इसके लिए मैं आपकी आभारी हूं ।अगर कभी भी मदद की जरूरत पड़े तो याद कीजियेगा मैं जरूर आउंगी और हा अब आप मानसी के लिये बिल्कुल भी चिंता ना करे।
इसके बाद वह मानसी को लेकर निकल जाती है और उसके जाने के बाद ऋतु विनोद पर भड़कती हुई बोलती है
ऋतु : आप उन दो मामूली लड़कियों के आगे हाथ जोड़ते हुए शर्म नही आई और उसने आपके सामने उसको लेकर चली गयी और आप कुछ भी नही कर सके ।
राधा : हा बेटा कौन थी वह लड़की जो अभी आयी हुई थी और तुम उसके सामने भीगी बिल्ली बन गए थे ।मैंने तो आज तक तुझे किसी से भी डरते हुए नही देखा।
बिनोद : माँ आप जानती नही है कि वह दोनों कौन थी अगर वह चाहे तो पल भर में हमारा पूरा वजूद ही खत्म कर दे और कोई उसका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगा । बड़े से बड़े माफिया और अधिकारी उसके सामने घुटनो के बल खड़े रहते है ।कोई भी उनके खिलाफ एक भी शब्द नही बोलता है और वह जो दूसरी लड़की थी जो अनुराधा को अपनी बहन बता रही थी अगर वह सच है तो यकीन मानो हमने बहुत बड़ी मुशीबत मोल ले ली है।।

इधर रानी परी मधु के यंहा से निकलने के बाद सीधे कोमल के घर से कुछ दूर पर प्रकट हुई और फिर उसके घर की तरफ चल दी और गेटमैन से बोली कि
रानी परी : मुझे कोमल से मिलना है उससे बोलो की ...... जगह से उनकी माँ की दोस्त मिलने के लिए आई हुई है ।कूछ बात करनी है।
 

prkin

Well-Known Member
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189
बहुत ही अच्छी कहानी है.
मुझे याद नहीं कि मैंने इस प्रकार की कहानी कभी और पढ़ी हो.

धन्यवाद और आशा है कि आप यूँ ही लिखते रहेंगे।
 

DAIVIK-RAJ

ANKIT-RAJ
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ऋतु की बात सुनकर राधा जी अभी कुछ बोलती इससे पहले ही एक आवाज सुनकर वह दोनों चौक जाती है यह कोई और नही बल्कि सुनैना थी जो कि काफी देर से इन लोगो की बातों को सुन और देख रही थी ।यह बात अलग थी कि वह अभी घर मे कदम रखी है लेकिन उसे यह बात सुनने के लिए यंहा पर होना कोई जरूरी नही था तो वह बोली
सुनैना : ऋतु एक शब्द और नही बोलना मानसी के खिलाफ वरना तुम्हारी जिंदगी मैं नरक से भी बदतर कर दूंगी ।
सुनैना अपनी बेटी को इस हाल में देख कर उसके आंखों में आँशु आ गए ।मानसी कंहा पहले गुड़िया की तरह दिखती थी और कितनी मासूम सी थी किन्तु आज उसके चहेरे से मासूमियत गायब सी हो गयी थी । उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वह कितनी दिनों से भूखी हो तो वह बोली कि
सुनैना : तुम सब ने इस मासूम सी बच्ची पर इतना जुल्म किया कि इसकी मासूमियत ही छीन लिया तुम सबने ।
उसकी बात सुनकर ऋतु जो पहले से गुस्से में थी सुनैना की बातों ने उसमे घी का काम किया और वह भड़कती हुई बोली
ऋतु : तुम होती कौन हो हमारे बीच मे बोलने वाली और तू अंदर तक कैसे आ गयी।
ऋतु के इस तरह बोलने से मारिया आगे बढ़ कर कुछ बोलने को होती है लेकिन सुनैना उसे रोक देती है और बोलती है कि
सुनैना : मैं कौन हूं इस बारे में अगर तुम ना ही जानो तो अच्छा रहेगा तुम्हारे लिए और मुझे आने के लिए किसी के परमिशन की जरूरत नही है ।मैं तो यंहा पर अपनी बहन की बेटी को देखने के लिए आई हूं पर यंहा पर तो उस फूल सी बच्ची की क्या हालत बना दी है।
सुनैना कि बात सुनकर वह दोनों भी नही समझ पाती हैंकि उसके कहने का मतलब क्या है तो राधा जी बोलती है कि
राधा : बेटी तुम कौन हो मैंने तुम्हें पहचाना नही और कौन है तुम्हारी बहन ।
सुनैना :आंटी जी मैं अनुराधा बहन हु और पिछले तीन सालों से बाहर थी कल आयी तो मुझे सब कुछ पता चला तो मैं उसकी बेटी से मिलने के लिए आ गयी और यंहा पर यह इस लड़की को मार रही थी तो मुझसे देखा नही गया इसलिए बोल दी ।
उधर बाहर खड़ी गाड़ियों और उसके साथ हथियार बन्द आदमियो को देख कर किसी ने विनोद को खबर कर दी तो वह भी अपने अड्डे से तुरन्त घर की तरफ निकल लिया वहीं सुनैना की बात सुनकर ऋतु फिर से अपना मुंह खोली और बोली
ऋतु : अभी यह कलमुँही कम थी जो एक और आ गयी । आ तू भी मुफ्त की रोटी खा ले ।
उसकी बात सुनकर सुनैना हस्ती हैं और बोलती है कि
सुनैना : तू शायद खुद को बहुत बड़ा तोप समझती है लेकिन तेरी औकात मेरे सामने एक चींटी से ज्यादा नही है इसलिए तू अब अपना मुंह बंद रख और चिंता मत कर आज से मेरी बेटी यंहा पर नही रहेगी बल्कि मेरे साथ जाएगी।
उसकी बात सुनकर जंहा ऋतु खुश हो जाती है वही राधा थोड़ी चिंता में पड़ जाती है। उसे इस तरह चिंता में देख कर सुनैना बोलती है कि
सुनैना : आंटी जी आप बिलकुल भी चिंता ना करे मेरे पास सब कुछ है बस कोई अपना कहने वाला कोई नही है ।अब दीदी की लड़की को अपनी बेटी बना कर पालूंगी और आप जब भी याद करेंगी मैं इसे आपसे मिलने के लिए खुद लेकर आउंगी।
वही जब विनोद घर के बाहर इतनी सारी गाड़िया देखता है और वह भी एक से बढ़कर एक महंगी गाड़िया तो उसके होश ही उड़ जाते है और वह सोचता है कि कौन है जो आया है यही सब कुछ सोचते हुए वह घर मे दाखिल होता है और जैसे ही उसकी नजर मारिया पर पड़ती है उसके होश उड़ जाते है क्यूंकि उसके भी माफिया से है और वह मारिया को कई मीटिंग में देख चुका है और उसके बारे में उसे पता है कि सभी माफिया की बॉस है वह उसे खुद के घर मे पाकर उसके होश ही उड़ जाते है फिर उसकी नजर सुनैना पर पड़ती है तो वह उसे देखते ही रह जाता है ।फिर खुद को संभाल कर वह मारिया के पास जाता है और बोलता है
विनोद : मैम आप मुझ गरीब के घर पर अगर कोई काम था तो मुझे आदेश कर दिया होता यह गुलाम वह काम खुद कर देता आपको यंहा तक आने की कष्ट नही करना पड़ा होता।
वही ऋतु और राधा दोनो यह देखकर चकित रह जाती है कि जो विनोद किसी से सीधे मुह बात नही करता है वह दूसरी वाली लड़की के सामने हाथ जोड़े खड़ा है ।वही विनोद के बोलने से मारिया का ध्यान उसकी तरफ जाता है और वह उसे देख कर ही उसके बारे में सब कुछ जान जाती है तो वह बोलती है
मारिया : नही मिस्टर बिनोद वह मैडम को अपनी बहन की लड़की से मिलने और उसे खुद के साथ ले जाने के लिए आई है ।
जब विनोद सुनता है कि इसकी भी बोस आयी है साथ में जिसे कुछ गिने चुने लोगो के अलावा और कोई नही देखा है तो वह यह सुनकर बहुत खुश होता है और बोलता है
विनोद : तो क्या बड़ी मैडम भी आई हुई है क्या नाम है उनका है सुनैना जी।
सुनैना उसकी बात सुन लेती है और बोलती है
सुनैना : हा मिस्टर बिनोद मैं भी यही पर हु और इस वक्त मैं तुम्हारी हरकतों की वजह से मेरा दिमाग पहले से ही हिला हुआ है जो गलती तुमने की थी वह तो अभी तक सुधारी नही है और यंहा तुम्हारे घर मे एक मासूम बच्ची पर जुल्म हो रहा है और तुम उसे भी नही रोक रहे हो ।


मारिया :देख तू झूठ बोलने की कोशिश तो बिल्कुल भी मत करना क्यूंकि यह बात तो अच्छी तरह से जानता है कि अगर मैं खुद पर आ गयी तो पत्थर को जुबान खुलवा लेती हूं और तू तो जीता जागता है इसलिए सच बोल
विनोद : मैडम हमे माफ कर दे हमसे गलती हो गयी ।हा मैं मानता हूं कि हमसे गलती हो गयी है हमने जान बूझ कर यह सब कर रहे थे क्यूंकि भैया ने अपनी पूरी सम्पति इसके नाम कर दिए है इसलिए मैं बचपन से ही इसे
दबाव में रख रहा था ।

उसकी बात सुनकर जंहा पर राधा सॉकड रह जाती है वही सुनैना बोलती है
सुनैना : तूने जिस सम्पति के लिए इसके ऊपर जुल्म किया वह मैं तुझे बिख के रूप में दे रही हु और तू यह मत सोचना की मैंने तुझे माफ कर दिया बल्कि तुझे समय दे रही हु की तू अपने बचाव के लिए जो चाहे कर ले क्यूंकि तुझे सजा मैं नही बल्कि यही लड़की देगी जिसके ऊपर तूने जुल्म किया है ।
इतना बोल कर वह राधा जी की तरफ मुडती है और उनसे बोलती है
सुनैना : आंटी जी आप ने मेरी बच्ची के लिये इतना सोची इसके लिए मैं आपकी आभारी हूं ।अगर कभी भी मदद की जरूरत पड़े तो याद कीजियेगा मैं जरूर आउंगी और हा अब आप मानसी के लिये बिल्कुल भी चिंता ना करे।
इसके बाद वह मानसी को लेकर निकल जाती है और उसके जाने के बाद ऋतु विनोद पर भड़कती हुई बोलती है
ऋतु : आप उन दो मामूली लड़कियों के आगे हाथ जोड़ते हुए शर्म नही आई और उसने आपके सामने उसको लेकर चली गयी और आप कुछ भी नही कर सके ।
राधा : हा बेटा कौन थी वह लड़की जो अभी आयी हुई थी और तुम उसके सामने भीगी बिल्ली बन गए थे ।मैंने तो आज तक तुझे किसी से भी डरते हुए नही देखा।
बिनोद : माँ आप जानती नही है कि वह दोनों कौन थी अगर वह चाहे तो पल भर में हमारा पूरा वजूद ही खत्म कर दे और कोई उसका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगा । बड़े से बड़े माफिया और अधिकारी उसके सामने घुटनो के बल खड़े रहते है ।कोई भी उनके खिलाफ एक भी शब्द नही बोलता है और वह जो दूसरी लड़की थी जो अनुराधा को अपनी बहन बता रही थी अगर वह सच है तो यकीन मानो हमने बहुत बड़ी मुशीबत मोल ले ली है।।

इधर रानी परी मधु के यंहा से निकलने के बाद सीधे कोमल के घर से कुछ दूर पर प्रकट हुई और फिर उसके घर की तरफ चल दी और गेटमैन से बोली कि
रानी परी : मुझे कोमल से मिलना है उससे बोलो की ...... जगह से उनकी माँ की दोस्त मिलने के लिए आई हुई है ।कूछ बात करनी है।
Nice update
 

Shurya dev

Member
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ऋतु की बात सुनकर राधा जी अभी कुछ बोलती इससे पहले ही एक आवाज सुनकर वह दोनों चौक जाती है यह कोई और नही बल्कि सुनैना थी जो कि काफी देर से इन लोगो की बातों को सुन और देख रही थी ।यह बात अलग थी कि वह अभी घर मे कदम रखी है लेकिन उसे यह बात सुनने के लिए यंहा पर होना कोई जरूरी नही था तो वह बोली
सुनैना : ऋतु एक शब्द और नही बोलना मानसी के खिलाफ वरना तुम्हारी जिंदगी मैं नरक से भी बदतर कर दूंगी ।
सुनैना अपनी बेटी को इस हाल में देख कर उसके आंखों में आँशु आ गए ।मानसी कंहा पहले गुड़िया की तरह दिखती थी और कितनी मासूम सी थी किन्तु आज उसके चहेरे से मासूमियत गायब सी हो गयी थी । उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वह कितनी दिनों से भूखी हो तो वह बोली कि
सुनैना : तुम सब ने इस मासूम सी बच्ची पर इतना जुल्म किया कि इसकी मासूमियत ही छीन लिया तुम सबने ।
उसकी बात सुनकर ऋतु जो पहले से गुस्से में थी सुनैना की बातों ने उसमे घी का काम किया और वह भड़कती हुई बोली
ऋतु : तुम होती कौन हो हमारे बीच मे बोलने वाली और तू अंदर तक कैसे आ गयी।
ऋतु के इस तरह बोलने से मारिया आगे बढ़ कर कुछ बोलने को होती है लेकिन सुनैना उसे रोक देती है और बोलती है कि
सुनैना : मैं कौन हूं इस बारे में अगर तुम ना ही जानो तो अच्छा रहेगा तुम्हारे लिए और मुझे आने के लिए किसी के परमिशन की जरूरत नही है ।मैं तो यंहा पर अपनी बहन की बेटी को देखने के लिए आई हूं पर यंहा पर तो उस फूल सी बच्ची की क्या हालत बना दी है।
सुनैना कि बात सुनकर वह दोनों भी नही समझ पाती हैंकि उसके कहने का मतलब क्या है तो राधा जी बोलती है कि
राधा : बेटी तुम कौन हो मैंने तुम्हें पहचाना नही और कौन है तुम्हारी बहन ।
सुनैना :आंटी जी मैं अनुराधा बहन हु और पिछले तीन सालों से बाहर थी कल आयी तो मुझे सब कुछ पता चला तो मैं उसकी बेटी से मिलने के लिए आ गयी और यंहा पर यह इस लड़की को मार रही थी तो मुझसे देखा नही गया इसलिए बोल दी ।
उधर बाहर खड़ी गाड़ियों और उसके साथ हथियार बन्द आदमियो को देख कर किसी ने विनोद को खबर कर दी तो वह भी अपने अड्डे से तुरन्त घर की तरफ निकल लिया वहीं सुनैना की बात सुनकर ऋतु फिर से अपना मुंह खोली और बोली
ऋतु : अभी यह कलमुँही कम थी जो एक और आ गयी । आ तू भी मुफ्त की रोटी खा ले ।
उसकी बात सुनकर सुनैना हस्ती हैं और बोलती है कि
सुनैना : तू शायद खुद को बहुत बड़ा तोप समझती है लेकिन तेरी औकात मेरे सामने एक चींटी से ज्यादा नही है इसलिए तू अब अपना मुंह बंद रख और चिंता मत कर आज से मेरी बेटी यंहा पर नही रहेगी बल्कि मेरे साथ जाएगी।
उसकी बात सुनकर जंहा ऋतु खुश हो जाती है वही राधा थोड़ी चिंता में पड़ जाती है। उसे इस तरह चिंता में देख कर सुनैना बोलती है कि
सुनैना : आंटी जी आप बिलकुल भी चिंता ना करे मेरे पास सब कुछ है बस कोई अपना कहने वाला कोई नही है ।अब दीदी की लड़की को अपनी बेटी बना कर पालूंगी और आप जब भी याद करेंगी मैं इसे आपसे मिलने के लिए खुद लेकर आउंगी।
वही जब विनोद घर के बाहर इतनी सारी गाड़िया देखता है और वह भी एक से बढ़कर एक महंगी गाड़िया तो उसके होश ही उड़ जाते है और वह सोचता है कि कौन है जो आया है यही सब कुछ सोचते हुए वह घर मे दाखिल होता है और जैसे ही उसकी नजर मारिया पर पड़ती है उसके होश उड़ जाते है क्यूंकि उसके भी माफिया से है और वह मारिया को कई मीटिंग में देख चुका है और उसके बारे में उसे पता है कि सभी माफिया की बॉस है वह उसे खुद के घर मे पाकर उसके होश ही उड़ जाते है फिर उसकी नजर सुनैना पर पड़ती है तो वह उसे देखते ही रह जाता है ।फिर खुद को संभाल कर वह मारिया के पास जाता है और बोलता है
विनोद : मैम आप मुझ गरीब के घर पर अगर कोई काम था तो मुझे आदेश कर दिया होता यह गुलाम वह काम खुद कर देता आपको यंहा तक आने की कष्ट नही करना पड़ा होता।
वही ऋतु और राधा दोनो यह देखकर चकित रह जाती है कि जो विनोद किसी से सीधे मुह बात नही करता है वह दूसरी वाली लड़की के सामने हाथ जोड़े खड़ा है ।वही विनोद के बोलने से मारिया का ध्यान उसकी तरफ जाता है और वह उसे देख कर ही उसके बारे में सब कुछ जान जाती है तो वह बोलती है
मारिया : नही मिस्टर बिनोद वह मैडम को अपनी बहन की लड़की से मिलने और उसे खुद के साथ ले जाने के लिए आई है ।
जब विनोद सुनता है कि इसकी भी बोस आयी है साथ में जिसे कुछ गिने चुने लोगो के अलावा और कोई नही देखा है तो वह यह सुनकर बहुत खुश होता है और बोलता है
विनोद : तो क्या बड़ी मैडम भी आई हुई है क्या नाम है उनका है सुनैना जी।
सुनैना उसकी बात सुन लेती है और बोलती है
सुनैना : हा मिस्टर बिनोद मैं भी यही पर हु और इस वक्त मैं तुम्हारी हरकतों की वजह से मेरा दिमाग पहले से ही हिला हुआ है जो गलती तुमने की थी वह तो अभी तक सुधारी नही है और यंहा तुम्हारे घर मे एक मासूम बच्ची पर जुल्म हो रहा है और तुम उसे भी नही रोक रहे हो ।


मारिया :देख तू झूठ बोलने की कोशिश तो बिल्कुल भी मत करना क्यूंकि यह बात तो अच्छी तरह से जानता है कि अगर मैं खुद पर आ गयी तो पत्थर को जुबान खुलवा लेती हूं और तू तो जीता जागता है इसलिए सच बोल
विनोद : मैडम हमे माफ कर दे हमसे गलती हो गयी ।हा मैं मानता हूं कि हमसे गलती हो गयी है हमने जान बूझ कर यह सब कर रहे थे क्यूंकि भैया ने अपनी पूरी सम्पति इसके नाम कर दिए है इसलिए मैं बचपन से ही इसे
दबाव में रख रहा था ।

उसकी बात सुनकर जंहा पर राधा सॉकड रह जाती है वही सुनैना बोलती है
सुनैना : तूने जिस सम्पति के लिए इसके ऊपर जुल्म किया वह मैं तुझे बिख के रूप में दे रही हु और तू यह मत सोचना की मैंने तुझे माफ कर दिया बल्कि तुझे समय दे रही हु की तू अपने बचाव के लिए जो चाहे कर ले क्यूंकि तुझे सजा मैं नही बल्कि यही लड़की देगी जिसके ऊपर तूने जुल्म किया है ।
इतना बोल कर वह राधा जी की तरफ मुडती है और उनसे बोलती है
सुनैना : आंटी जी आप ने मेरी बच्ची के लिये इतना सोची इसके लिए मैं आपकी आभारी हूं ।अगर कभी भी मदद की जरूरत पड़े तो याद कीजियेगा मैं जरूर आउंगी और हा अब आप मानसी के लिये बिल्कुल भी चिंता ना करे।
इसके बाद वह मानसी को लेकर निकल जाती है और उसके जाने के बाद ऋतु विनोद पर भड़कती हुई बोलती है
ऋतु : आप उन दो मामूली लड़कियों के आगे हाथ जोड़ते हुए शर्म नही आई और उसने आपके सामने उसको लेकर चली गयी और आप कुछ भी नही कर सके ।
राधा : हा बेटा कौन थी वह लड़की जो अभी आयी हुई थी और तुम उसके सामने भीगी बिल्ली बन गए थे ।मैंने तो आज तक तुझे किसी से भी डरते हुए नही देखा।
बिनोद : माँ आप जानती नही है कि वह दोनों कौन थी अगर वह चाहे तो पल भर में हमारा पूरा वजूद ही खत्म कर दे और कोई उसका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगा । बड़े से बड़े माफिया और अधिकारी उसके सामने घुटनो के बल खड़े रहते है ।कोई भी उनके खिलाफ एक भी शब्द नही बोलता है और वह जो दूसरी लड़की थी जो अनुराधा को अपनी बहन बता रही थी अगर वह सच है तो यकीन मानो हमने बहुत बड़ी मुशीबत मोल ले ली है।।

इधर रानी परी मधु के यंहा से निकलने के बाद सीधे कोमल के घर से कुछ दूर पर प्रकट हुई और फिर उसके घर की तरफ चल दी और गेटमैन से बोली कि
रानी परी : मुझे कोमल से मिलना है उससे बोलो की ...... जगह से उनकी माँ की दोस्त मिलने के लिए आई हुई है ।कूछ बात करनी है।
Superb update brother
 

Rishabhsingh

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कोमल ने जिसके साथ भाग कर शादी की थी वह ठाकुर नही था इसलिए उसके पिता जी ने इस रिश्ते के लिए मना कर दिया था पर वह लड़का काफी पैसे वाले घर से था और आज वह खुद का बिजनेस ही सम्भाल रहा था ।
कोमल के परिवार का इण्ट्रो
विश्वजीत राय (ससुर) उम्र 55साल
मीना राय ( सास) उम्र 52 साल
संजय राय (पति) उम्र 28 साल
कोमल उम्र 26
कोमल की एक बेटी है
चाँदनी
सुरेखा (ननद) उम्र 21 साल
(कहानी आगे)
चौकीदार जब घर में जाकर यह बताता है तो कोमल पहले तो बहुत खुश होती है लेकिन जब उसे याद आता है तो कि उसके घर वालो ने कितना जलील किया था जब वह शादी करके घर गयी थी तो वह दुखी हो जाती है और बोलती है कि
कोमल : जाकर उनसे बोल दीजिये कि यंहा पर कोमल नाम की कोई भी नही रहता है ।
कोमल की सास जो कि उसे बेटी मानती थी और वह जानती थी कि कोमल को उसके पिता के द्वारा कही गयी बातो को वह अभी तक भूल नही पाई है इसलिए वह ऐसा बोल रही है इसलिये वह चौकीदार को रोकते हुए बोलती है कि
मीना :तुम उन्हें आदर के साथ अंदर ले कर आओ।
कोमल अपनी सास की बात सुनकर बोलती है
कोमल : माँ आप जानती हो कि मैं उन लोगो से कोई मतलब नही रखना चाहती हु फिर आप उन्हें अंदर क्यों बुला रही है।
मीना : बहु अगर वह तुम्हारे परिवार में से होती तो मैं उन्हें कभी नही बुलाती पर वह तुम्हारी माँ की दोस्त है हो सकता है कुछ जरूरी बात हो जो तुम्हे जानना जरूरी हो । अब इतने दिनों बाद कोई आया है हो ना हो कोई जरूरी बात जरूर है ।
कोमल भी अपनी सास की बात सुनकर सोच में पड़ जाती है क्यूंकि जंहा तक वह जानती है माँ कभी भी पिता जी के विरोध में जाकर कोई काम नही करेंगी ।तब तक रानी परी भी अंदर आ जाती है तो मीणा जी उन्हें आदर के साथ बैठाती है और कोमल चाय नास्ता करवाने के बाद आकर उनके पास बैठ जाती है और बोलती हैकि
कोमल : आंटी जी मैंने तो आपको कभी देखा नही है माँ के साथ मे और वैसे भी आज इतने सालों बाद उनको मेरी याद कैसे आ गयी।
रानी परी जानती थी कि कोमल के मन मे उसके माता पिता के लिए क्या भाव है और वह यह भी जानती थी कि कोई भी बेटी हो चाहे वह अपने माँ बाप से कितना भी नाराज क्यों ना हो लेकिन उनकी मौत की खबर किसी सदमे से कम नही हो सकती है इसलिए सोच रही थी कि वह यह बात कैसे बताये कि उसके पूरे परिवार में उसे जानने वाला कोई भी नही है इसलिए वह बोली
रानी परी : बेटी मैं तुम्हारी माँ के गांव की हु तुमने मुझे नही देखा है इसलिए तुम मेरे बारे में नही जानती होगी और मुझे यंहा पर तुम्हारी माँ ने नही बल्कि मैं अपने मन से आई हूं ।
कोमल इतना सुनकर ही बीच मे बोल पड़ी कि
कोमल(अपने सास से ) : देखा माँ मैं जानती थी ऐसा ही कुछ होगा इसलिए मैं मिलना ही नही चाहती थी लेकिन आपको लगा कि शायद मेरी माँ की ममता जाग गयी हो और मेरी खबर लेने के लिये भेजी है ।
रानी परी: बेटी पहले मेरी पूरी बात सुन लो इसके बाद ही कुछ बोलना तुम्हारे मायके से कोई भेज ही नही सकता है क्यूंकि वहां पर कोई ऐसा है ही नही जो तुम्हे जानता हो ।
रानी परी की बात सुनकर कोमल को डर लगने लगा और वह कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी पर उसके मुंह से जैसे आवाज ही नही निकल रही थी लेकिन तभी बीच में मीना जी बोल पड़ी
मीना : आप यह क्या बोल रही है माना कि कोई माँ बाप अपने बच्चों से नाराज हो सकते है लेकिन भूल जाये वह भी पूरा परिवार एक साथ ऐसा कैसे हो सकता है ।
रानी परी : बेटी अपने दिल को मजबूत कर लो क्यूंकि जो बात मैं तुम्हे बताने जा रही हु वह बहुत ही दुखद है।
कोमल रोते हुए बोलती है
कोमल : घर पर सब ठीक तो है ना आंटी आप की बातों से मुझे कुछ अशुभ होने की आशंका हो रही है।
रानी परी : बेटी तुम्हारे घर मे इस वक्त सिर्फ दो लोग ही है और वह दोनों ही तम्हे नही जानते है ।उसमें से भी एक मात्र अभी छोटा बच्चा है।
उनकी बात सुनकर जंहा कोमल रोने लगती है वही मीना जी सॉकड रह जाती है और बोलती है कि
मीना : आप क्या बोलना चाहती है खुल कर बातये ऐसे में हमे कुछ भी समझ मे नही आ रहा है।
रानी परी : बात यह है कि दो साल पहले ही कोमल के मायके वालों की हत्या कर दी गयी उस वक्त केवल इसकी छोटी भाभी जो कि इसके बड़े भाई के बच्चे को लेकर बाहर किसी काम से गयी थी सिर्फ वही दोनो बच पाए है और बाकी के पूरे परिवार की किसी ने निर्ममता से हत्या कर दी कोई भी जिंदा नही बचा है । उस घर की छोटी बहू किसी तरह से उन हत्यारो से बचते हुए उस घर की आखिरी चिराग को सुरक्षित बचा कर जंगलो में भटकती रही वही पर उसकी भेट मेरे भाई से हुई जो कि भगवान शिव के मंदिर के पुजारी है तो वह बच्चे के साथ उसी मन्दिर में रहने लगी ।कल जब मैं वंहा मिलने के लिए अपने भाई के पास गई तो इन सबके बारे में मालूम हुआ मैं भी इसी सहर में रहती हूं तो तुम्हारी माँ को कभी कभार तुम्हारा हाल बता दिया करती थी वैसे तो वह लोग वंहा पर हर प्रकार से सुरक्षित है फिर भी मैंने सोचा कि अगर आप लोगो को बता दु तो अच्छा रहेगा ।
मीना : वह लोग इतने दिनों से खतरे में है और यंहा पर नही आ सके।
रानी परी : ऐसी बात नही है बहन जी वह क्या है कि मधु यानी कि इसकी छोटी भाभी की शादी के कुछ ही महीनों के बाद यह घटना हो गयी और वह इसके बारे में जानती भी नही थी।(फिर कोमल से बोलती है ) अच्छा तो बेटी मैं चलती हु । तुम अपना ख्याल रखना ।
कोमल जो अभी तक उस सदमे से उभरी नही थी वह रानी परी की जाने की बात सुनकर सदमे से बाहर आती है और रोते हुए बोलती है
कोमल : आंटी जी ऐसे कैसे जा सकती है जब आपने इतना कष्ट करके मेरे घर की खबर दी और आप यह जानती है कि वह इस वक्त मुसीबतों के जाल में फशे हुए है और जब आज उन्हें मेरी मदद की जरूरत है तो आप ऐसे ही चले जाएंगी (फिर मिना जी की तरफ घूम के) मा मैं चाहती हु कि
मीना जी (बीच मे ही बात को काटते हुए): बेटी तुम्हे कुछ भी बोलने की जरूरत नही है मैं सब समझ गयी हु (सुरेखा से जो अपनी भाभी को रोते हुए देख कर आ गयी थी ) बेटी अपने भाई को फोन करके बोल की जल्द से जल्द घर आ जाये।

 

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ऋतु की बात सुनकर राधा जी अभी कुछ बोलती इससे पहले ही एक आवाज सुनकर वह दोनों चौक जाती है यह कोई और नही बल्कि सुनैना थी जो कि काफी देर से इन लोगो की बातों को सुन और देख रही थी ।यह बात अलग थी कि वह अभी घर मे कदम रखी है लेकिन उसे यह बात सुनने के लिए यंहा पर होना कोई जरूरी नही था तो वह बोली
सुनैना : ऋतु एक शब्द और नही बोलना मानसी के खिलाफ वरना तुम्हारी जिंदगी मैं नरक से भी बदतर कर दूंगी ।
सुनैना अपनी बेटी को इस हाल में देख कर उसके आंखों में आँशु आ गए ।मानसी कंहा पहले गुड़िया की तरह दिखती थी और कितनी मासूम सी थी किन्तु आज उसके चहेरे से मासूमियत गायब सी हो गयी थी । उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वह कितनी दिनों से भूखी हो तो वह बोली कि
सुनैना : तुम सब ने इस मासूम सी बच्ची पर इतना जुल्म किया कि इसकी मासूमियत ही छीन लिया तुम सबने ।
उसकी बात सुनकर ऋतु जो पहले से गुस्से में थी सुनैना की बातों ने उसमे घी का काम किया और वह भड़कती हुई बोली
ऋतु : तुम होती कौन हो हमारे बीच मे बोलने वाली और तू अंदर तक कैसे आ गयी।
ऋतु के इस तरह बोलने से मारिया आगे बढ़ कर कुछ बोलने को होती है लेकिन सुनैना उसे रोक देती है और बोलती है कि
सुनैना : मैं कौन हूं इस बारे में अगर तुम ना ही जानो तो अच्छा रहेगा तुम्हारे लिए और मुझे आने के लिए किसी के परमिशन की जरूरत नही है ।मैं तो यंहा पर अपनी बहन की बेटी को देखने के लिए आई हूं पर यंहा पर तो उस फूल सी बच्ची की क्या हालत बना दी है।
सुनैना कि बात सुनकर वह दोनों भी नही समझ पाती हैंकि उसके कहने का मतलब क्या है तो राधा जी बोलती है कि
राधा : बेटी तुम कौन हो मैंने तुम्हें पहचाना नही और कौन है तुम्हारी बहन ।
सुनैना :आंटी जी मैं अनुराधा बहन हु और पिछले तीन सालों से बाहर थी कल आयी तो मुझे सब कुछ पता चला तो मैं उसकी बेटी से मिलने के लिए आ गयी और यंहा पर यह इस लड़की को मार रही थी तो मुझसे देखा नही गया इसलिए बोल दी ।
उधर बाहर खड़ी गाड़ियों और उसके साथ हथियार बन्द आदमियो को देख कर किसी ने विनोद को खबर कर दी तो वह भी अपने अड्डे से तुरन्त घर की तरफ निकल लिया वहीं सुनैना की बात सुनकर ऋतु फिर से अपना मुंह खोली और बोली
ऋतु : अभी यह कलमुँही कम थी जो एक और आ गयी । आ तू भी मुफ्त की रोटी खा ले ।
उसकी बात सुनकर सुनैना हस्ती हैं और बोलती है कि
सुनैना : तू शायद खुद को बहुत बड़ा तोप समझती है लेकिन तेरी औकात मेरे सामने एक चींटी से ज्यादा नही है इसलिए तू अब अपना मुंह बंद रख और चिंता मत कर आज से मेरी बेटी यंहा पर नही रहेगी बल्कि मेरे साथ जाएगी।
उसकी बात सुनकर जंहा ऋतु खुश हो जाती है वही राधा थोड़ी चिंता में पड़ जाती है। उसे इस तरह चिंता में देख कर सुनैना बोलती है कि
सुनैना : आंटी जी आप बिलकुल भी चिंता ना करे मेरे पास सब कुछ है बस कोई अपना कहने वाला कोई नही है ।अब दीदी की लड़की को अपनी बेटी बना कर पालूंगी और आप जब भी याद करेंगी मैं इसे आपसे मिलने के लिए खुद लेकर आउंगी।
वही जब विनोद घर के बाहर इतनी सारी गाड़िया देखता है और वह भी एक से बढ़कर एक महंगी गाड़िया तो उसके होश ही उड़ जाते है और वह सोचता है कि कौन है जो आया है यही सब कुछ सोचते हुए वह घर मे दाखिल होता है और जैसे ही उसकी नजर मारिया पर पड़ती है उसके होश उड़ जाते है क्यूंकि उसके भी माफिया से है और वह मारिया को कई मीटिंग में देख चुका है और उसके बारे में उसे पता है कि सभी माफिया की बॉस है वह उसे खुद के घर मे पाकर उसके होश ही उड़ जाते है फिर उसकी नजर सुनैना पर पड़ती है तो वह उसे देखते ही रह जाता है ।फिर खुद को संभाल कर वह मारिया के पास जाता है और बोलता है
विनोद : मैम आप मुझ गरीब के घर पर अगर कोई काम था तो मुझे आदेश कर दिया होता यह गुलाम वह काम खुद कर देता आपको यंहा तक आने की कष्ट नही करना पड़ा होता।
वही ऋतु और राधा दोनो यह देखकर चकित रह जाती है कि जो विनोद किसी से सीधे मुह बात नही करता है वह दूसरी वाली लड़की के सामने हाथ जोड़े खड़ा है ।वही विनोद के बोलने से मारिया का ध्यान उसकी तरफ जाता है और वह उसे देख कर ही उसके बारे में सब कुछ जान जाती है तो वह बोलती है
मारिया : नही मिस्टर बिनोद वह मैडम को अपनी बहन की लड़की से मिलने और उसे खुद के साथ ले जाने के लिए आई है ।
जब विनोद सुनता है कि इसकी भी बोस आयी है साथ में जिसे कुछ गिने चुने लोगो के अलावा और कोई नही देखा है तो वह यह सुनकर बहुत खुश होता है और बोलता है
विनोद : तो क्या बड़ी मैडम भी आई हुई है क्या नाम है उनका है सुनैना जी।
सुनैना उसकी बात सुन लेती है और बोलती है
सुनैना : हा मिस्टर बिनोद मैं भी यही पर हु और इस वक्त मैं तुम्हारी हरकतों की वजह से मेरा दिमाग पहले से ही हिला हुआ है जो गलती तुमने की थी वह तो अभी तक सुधारी नही है और यंहा तुम्हारे घर मे एक मासूम बच्ची पर जुल्म हो रहा है और तुम उसे भी नही रोक रहे हो ।


मारिया :देख तू झूठ बोलने की कोशिश तो बिल्कुल भी मत करना क्यूंकि यह बात तो अच्छी तरह से जानता है कि अगर मैं खुद पर आ गयी तो पत्थर को जुबान खुलवा लेती हूं और तू तो जीता जागता है इसलिए सच बोल
विनोद : मैडम हमे माफ कर दे हमसे गलती हो गयी ।हा मैं मानता हूं कि हमसे गलती हो गयी है हमने जान बूझ कर यह सब कर रहे थे क्यूंकि भैया ने अपनी पूरी सम्पति इसके नाम कर दिए है इसलिए मैं बचपन से ही इसे
दबाव में रख रहा था ।

उसकी बात सुनकर जंहा पर राधा सॉकड रह जाती है वही सुनैना बोलती है
सुनैना : तूने जिस सम्पति के लिए इसके ऊपर जुल्म किया वह मैं तुझे बिख के रूप में दे रही हु और तू यह मत सोचना की मैंने तुझे माफ कर दिया बल्कि तुझे समय दे रही हु की तू अपने बचाव के लिए जो चाहे कर ले क्यूंकि तुझे सजा मैं नही बल्कि यही लड़की देगी जिसके ऊपर तूने जुल्म किया है ।
इतना बोल कर वह राधा जी की तरफ मुडती है और उनसे बोलती है
सुनैना : आंटी जी आप ने मेरी बच्ची के लिये इतना सोची इसके लिए मैं आपकी आभारी हूं ।अगर कभी भी मदद की जरूरत पड़े तो याद कीजियेगा मैं जरूर आउंगी और हा अब आप मानसी के लिये बिल्कुल भी चिंता ना करे।
इसके बाद वह मानसी को लेकर निकल जाती है और उसके जाने के बाद ऋतु विनोद पर भड़कती हुई बोलती है
ऋतु : आप उन दो मामूली लड़कियों के आगे हाथ जोड़ते हुए शर्म नही आई और उसने आपके सामने उसको लेकर चली गयी और आप कुछ भी नही कर सके ।
राधा : हा बेटा कौन थी वह लड़की जो अभी आयी हुई थी और तुम उसके सामने भीगी बिल्ली बन गए थे ।मैंने तो आज तक तुझे किसी से भी डरते हुए नही देखा।
बिनोद : माँ आप जानती नही है कि वह दोनों कौन थी अगर वह चाहे तो पल भर में हमारा पूरा वजूद ही खत्म कर दे और कोई उसका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगा । बड़े से बड़े माफिया और अधिकारी उसके सामने घुटनो के बल खड़े रहते है ।कोई भी उनके खिलाफ एक भी शब्द नही बोलता है और वह जो दूसरी लड़की थी जो अनुराधा को अपनी बहन बता रही थी अगर वह सच है तो यकीन मानो हमने बहुत बड़ी मुशीबत मोल ले ली है।।

इधर रानी परी मधु के यंहा से निकलने के बाद सीधे कोमल के घर से कुछ दूर पर प्रकट हुई और फिर उसके घर की तरफ चल दी और गेटमैन से बोली कि
रानी परी : मुझे कोमल से मिलना है उससे बोलो की ...... जगह से उनकी माँ की दोस्त मिलने के लिए आई हुई है ।कूछ बात करनी है।
very nice update
 

DAIVIK-RAJ

ANKIT-RAJ
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कोमल ने जिसके साथ भाग कर शादी की थी वह ठाकुर नही था इसलिए उसके पिता जी ने इस रिश्ते के लिए मना कर दिया था पर वह लड़का काफी पैसे वाले घर से था और आज वह खुद का बिजनेस ही सम्भाल रहा था ।
कोमल के परिवार का इण्ट्रो
विश्वजीत राय (ससुर) उम्र 55साल
मीना राय ( सास) उम्र 52 साल
संजय राय (पति) उम्र 28 साल
कोमल उम्र 26
कोमल की एक बेटी है
चाँदनी
सुरेखा (ननद) उम्र 21 साल
(कहानी आगे)
चौकीदार जब घर में जाकर यह बताता है तो कोमल पहले तो बहुत खुश होती है लेकिन जब उसे याद आता है तो कि उसके घर वालो ने कितना जलील किया था जब वह शादी करके घर गयी थी तो वह दुखी हो जाती है और बोलती है कि
कोमल : जाकर उनसे बोल दीजिये कि यंहा पर कोमल नाम की कोई भी नही रहता है ।
कोमल की सास जो कि उसे बेटी मानती थी और वह जानती थी कि कोमल को उसके पिता के द्वारा कही गयी बातो को वह अभी तक भूल नही पाई है इसलिए वह ऐसा बोल रही है इसलिये वह चौकीदार को रोकते हुए बोलती है कि
मीना :तुम उन्हें आदर के साथ अंदर ले कर आओ।
कोमल अपनी सास की बात सुनकर बोलती है
कोमल : माँ आप जानती हो कि मैं उन लोगो से कोई मतलब नही रखना चाहती हु फिर आप उन्हें अंदर क्यों बुला रही है।
मीना : बहु अगर वह तुम्हारे परिवार में से होती तो मैं उन्हें कभी नही बुलाती पर वह तुम्हारी माँ की दोस्त है हो सकता है कुछ जरूरी बात हो जो तुम्हे जानना जरूरी हो । अब इतने दिनों बाद कोई आया है हो ना हो कोई जरूरी बात जरूर है ।
कोमल भी अपनी सास की बात सुनकर सोच में पड़ जाती है क्यूंकि जंहा तक वह जानती है माँ कभी भी पिता जी के विरोध में जाकर कोई काम नही करेंगी ।तब तक रानी परी भी अंदर आ जाती है तो मीणा जी उन्हें आदर के साथ बैठाती है और कोमल चाय नास्ता करवाने के बाद आकर उनके पास बैठ जाती है और बोलती हैकि
कोमल : आंटी जी मैंने तो आपको कभी देखा नही है माँ के साथ मे और वैसे भी आज इतने सालों बाद उनको मेरी याद कैसे आ गयी।
रानी परी जानती थी कि कोमल के मन मे उसके माता पिता के लिए क्या भाव है और वह यह भी जानती थी कि कोई भी बेटी हो चाहे वह अपने माँ बाप से कितना भी नाराज क्यों ना हो लेकिन उनकी मौत की खबर किसी सदमे से कम नही हो सकती है इसलिए सोच रही थी कि वह यह बात कैसे बताये कि उसके पूरे परिवार में उसे जानने वाला कोई भी नही है इसलिए वह बोली
रानी परी : बेटी मैं तुम्हारी माँ के गांव की हु तुमने मुझे नही देखा है इसलिए तुम मेरे बारे में नही जानती होगी और मुझे यंहा पर तुम्हारी माँ ने नही बल्कि मैं अपने मन से आई हूं ।
कोमल इतना सुनकर ही बीच मे बोल पड़ी कि
कोमल(अपने सास से ) : देखा माँ मैं जानती थी ऐसा ही कुछ होगा इसलिए मैं मिलना ही नही चाहती थी लेकिन आपको लगा कि शायद मेरी माँ की ममता जाग गयी हो और मेरी खबर लेने के लिये भेजी है ।
रानी परी: बेटी पहले मेरी पूरी बात सुन लो इसके बाद ही कुछ बोलना तुम्हारे मायके से कोई भेज ही नही सकता है क्यूंकि वहां पर कोई ऐसा है ही नही जो तुम्हे जानता हो ।
रानी परी की बात सुनकर कोमल को डर लगने लगा और वह कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी पर उसके मुंह से जैसे आवाज ही नही निकल रही थी लेकिन तभी बीच में मीना जी बोल पड़ी
मीना : आप यह क्या बोल रही है माना कि कोई माँ बाप अपने बच्चों से नाराज हो सकते है लेकिन भूल जाये वह भी पूरा परिवार एक साथ ऐसा कैसे हो सकता है ।
रानी परी : बेटी अपने दिल को मजबूत कर लो क्यूंकि जो बात मैं तुम्हे बताने जा रही हु वह बहुत ही दुखद है।
कोमल रोते हुए बोलती है
कोमल : घर पर सब ठीक तो है ना आंटी आप की बातों से मुझे कुछ अशुभ होने की आशंका हो रही है।
रानी परी : बेटी तुम्हारे घर मे इस वक्त सिर्फ दो लोग ही है और वह दोनों ही तम्हे नही जानते है ।उसमें से भी एक मात्र अभी छोटा बच्चा है।
उनकी बात सुनकर जंहा कोमल रोने लगती है वही मीना जी सॉकड रह जाती है और बोलती है कि
मीना : आप क्या बोलना चाहती है खुल कर बातये ऐसे में हमे कुछ भी समझ मे नही आ रहा है।
रानी परी : बात यह है कि दो साल पहले ही कोमल के मायके वालों की हत्या कर दी गयी उस वक्त केवल इसकी छोटी भाभी जो कि इसके बड़े भाई के बच्चे को लेकर बाहर किसी काम से गयी थी सिर्फ वही दोनो बच पाए है और बाकी के पूरे परिवार की किसी ने निर्ममता से हत्या कर दी कोई भी जिंदा नही बचा है । उस घर की छोटी बहू किसी तरह से उन हत्यारो से बचते हुए उस घर की आखिरी चिराग को सुरक्षित बचा कर जंगलो में भटकती रही वही पर उसकी भेट मेरे भाई से हुई जो कि भगवान शिव के मंदिर के पुजारी है तो वह बच्चे के साथ उसी मन्दिर में रहने लगी ।कल जब मैं वंहा मिलने के लिए अपने भाई के पास गई तो इन सबके बारे में मालूम हुआ मैं भी इसी सहर में रहती हूं तो तुम्हारी माँ को कभी कभार तुम्हारा हाल बता दिया करती थी वैसे तो वह लोग वंहा पर हर प्रकार से सुरक्षित है फिर भी मैंने सोचा कि अगर आप लोगो को बता दु तो अच्छा रहेगा ।
मीना : वह लोग इतने दिनों से खतरे में है और यंहा पर नही आ सके।
रानी परी : ऐसी बात नही है बहन जी वह क्या है कि मधु यानी कि इसकी छोटी भाभी की शादी के कुछ ही महीनों के बाद यह घटना हो गयी और वह इसके बारे में जानती भी नही थी।(फिर कोमल से बोलती है ) अच्छा तो बेटी मैं चलती हु । तुम अपना ख्याल रखना ।
कोमल जो अभी तक उस सदमे से उभरी नही थी वह रानी परी की जाने की बात सुनकर सदमे से बाहर आती है और रोते हुए बोलती है
कोमल : आंटी जी ऐसे कैसे जा सकती है जब आपने इतना कष्ट करके मेरे घर की खबर दी और आप यह जानती है कि वह इस वक्त मुसीबतों के जाल में फशे हुए है और जब आज उन्हें मेरी मदद की जरूरत है तो आप ऐसे ही चले जाएंगी (फिर मिना जी की तरफ घूम के) मा मैं चाहती हु कि
मीना जी (बीच मे ही बात को काटते हुए): बेटी तुम्हे कुछ भी बोलने की जरूरत नही है मैं सब समझ गयी हु (सुरेखा से जो अपनी भाभी को रोते हुए देख कर आ गयी थी ) बेटी अपने भाई को फोन करके बोल की जल्द से जल्द घर आ जाये।
Nice mind blowing update brother
 

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कोमल ने जिसके साथ भाग कर शादी की थी वह ठाकुर नही था इसलिए उसके पिता जी ने इस रिश्ते के लिए मना कर दिया था पर वह लड़का काफी पैसे वाले घर से था और आज वह खुद का बिजनेस ही सम्भाल रहा था ।
कोमल के परिवार का इण्ट्रो
विश्वजीत राय (ससुर) उम्र 55साल
मीना राय ( सास) उम्र 52 साल
संजय राय (पति) उम्र 28 साल
कोमल उम्र 26
कोमल की एक बेटी है
चाँदनी
सुरेखा (ननद) उम्र 21 साल
(कहानी आगे)
चौकीदार जब घर में जाकर यह बताता है तो कोमल पहले तो बहुत खुश होती है लेकिन जब उसे याद आता है तो कि उसके घर वालो ने कितना जलील किया था जब वह शादी करके घर गयी थी तो वह दुखी हो जाती है और बोलती है कि
कोमल : जाकर उनसे बोल दीजिये कि यंहा पर कोमल नाम की कोई भी नही रहता है ।
कोमल की सास जो कि उसे बेटी मानती थी और वह जानती थी कि कोमल को उसके पिता के द्वारा कही गयी बातो को वह अभी तक भूल नही पाई है इसलिए वह ऐसा बोल रही है इसलिये वह चौकीदार को रोकते हुए बोलती है कि
मीना :तुम उन्हें आदर के साथ अंदर ले कर आओ।
कोमल अपनी सास की बात सुनकर बोलती है
कोमल : माँ आप जानती हो कि मैं उन लोगो से कोई मतलब नही रखना चाहती हु फिर आप उन्हें अंदर क्यों बुला रही है।
मीना : बहु अगर वह तुम्हारे परिवार में से होती तो मैं उन्हें कभी नही बुलाती पर वह तुम्हारी माँ की दोस्त है हो सकता है कुछ जरूरी बात हो जो तुम्हे जानना जरूरी हो । अब इतने दिनों बाद कोई आया है हो ना हो कोई जरूरी बात जरूर है ।
कोमल भी अपनी सास की बात सुनकर सोच में पड़ जाती है क्यूंकि जंहा तक वह जानती है माँ कभी भी पिता जी के विरोध में जाकर कोई काम नही करेंगी ।तब तक रानी परी भी अंदर आ जाती है तो मीणा जी उन्हें आदर के साथ बैठाती है और कोमल चाय नास्ता करवाने के बाद आकर उनके पास बैठ जाती है और बोलती हैकि
कोमल : आंटी जी मैंने तो आपको कभी देखा नही है माँ के साथ मे और वैसे भी आज इतने सालों बाद उनको मेरी याद कैसे आ गयी।
रानी परी जानती थी कि कोमल के मन मे उसके माता पिता के लिए क्या भाव है और वह यह भी जानती थी कि कोई भी बेटी हो चाहे वह अपने माँ बाप से कितना भी नाराज क्यों ना हो लेकिन उनकी मौत की खबर किसी सदमे से कम नही हो सकती है इसलिए सोच रही थी कि वह यह बात कैसे बताये कि उसके पूरे परिवार में उसे जानने वाला कोई भी नही है इसलिए वह बोली
रानी परी : बेटी मैं तुम्हारी माँ के गांव की हु तुमने मुझे नही देखा है इसलिए तुम मेरे बारे में नही जानती होगी और मुझे यंहा पर तुम्हारी माँ ने नही बल्कि मैं अपने मन से आई हूं ।
कोमल इतना सुनकर ही बीच मे बोल पड़ी कि
कोमल(अपने सास से ) : देखा माँ मैं जानती थी ऐसा ही कुछ होगा इसलिए मैं मिलना ही नही चाहती थी लेकिन आपको लगा कि शायद मेरी माँ की ममता जाग गयी हो और मेरी खबर लेने के लिये भेजी है ।
रानी परी: बेटी पहले मेरी पूरी बात सुन लो इसके बाद ही कुछ बोलना तुम्हारे मायके से कोई भेज ही नही सकता है क्यूंकि वहां पर कोई ऐसा है ही नही जो तुम्हे जानता हो ।
रानी परी की बात सुनकर कोमल को डर लगने लगा और वह कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी पर उसके मुंह से जैसे आवाज ही नही निकल रही थी लेकिन तभी बीच में मीना जी बोल पड़ी
मीना : आप यह क्या बोल रही है माना कि कोई माँ बाप अपने बच्चों से नाराज हो सकते है लेकिन भूल जाये वह भी पूरा परिवार एक साथ ऐसा कैसे हो सकता है ।
रानी परी : बेटी अपने दिल को मजबूत कर लो क्यूंकि जो बात मैं तुम्हे बताने जा रही हु वह बहुत ही दुखद है।
कोमल रोते हुए बोलती है
कोमल : घर पर सब ठीक तो है ना आंटी आप की बातों से मुझे कुछ अशुभ होने की आशंका हो रही है।
रानी परी : बेटी तुम्हारे घर मे इस वक्त सिर्फ दो लोग ही है और वह दोनों ही तम्हे नही जानते है ।उसमें से भी एक मात्र अभी छोटा बच्चा है।
उनकी बात सुनकर जंहा कोमल रोने लगती है वही मीना जी सॉकड रह जाती है और बोलती है कि
मीना : आप क्या बोलना चाहती है खुल कर बातये ऐसे में हमे कुछ भी समझ मे नही आ रहा है।
रानी परी : बात यह है कि दो साल पहले ही कोमल के मायके वालों की हत्या कर दी गयी उस वक्त केवल इसकी छोटी भाभी जो कि इसके बड़े भाई के बच्चे को लेकर बाहर किसी काम से गयी थी सिर्फ वही दोनो बच पाए है और बाकी के पूरे परिवार की किसी ने निर्ममता से हत्या कर दी कोई भी जिंदा नही बचा है । उस घर की छोटी बहू किसी तरह से उन हत्यारो से बचते हुए उस घर की आखिरी चिराग को सुरक्षित बचा कर जंगलो में भटकती रही वही पर उसकी भेट मेरे भाई से हुई जो कि भगवान शिव के मंदिर के पुजारी है तो वह बच्चे के साथ उसी मन्दिर में रहने लगी ।कल जब मैं वंहा मिलने के लिए अपने भाई के पास गई तो इन सबके बारे में मालूम हुआ मैं भी इसी सहर में रहती हूं तो तुम्हारी माँ को कभी कभार तुम्हारा हाल बता दिया करती थी वैसे तो वह लोग वंहा पर हर प्रकार से सुरक्षित है फिर भी मैंने सोचा कि अगर आप लोगो को बता दु तो अच्छा रहेगा ।
मीना : वह लोग इतने दिनों से खतरे में है और यंहा पर नही आ सके।
रानी परी : ऐसी बात नही है बहन जी वह क्या है कि मधु यानी कि इसकी छोटी भाभी की शादी के कुछ ही महीनों के बाद यह घटना हो गयी और वह इसके बारे में जानती भी नही थी।(फिर कोमल से बोलती है ) अच्छा तो बेटी मैं चलती हु । तुम अपना ख्याल रखना ।
कोमल जो अभी तक उस सदमे से उभरी नही थी वह रानी परी की जाने की बात सुनकर सदमे से बाहर आती है और रोते हुए बोलती है
कोमल : आंटी जी ऐसे कैसे जा सकती है जब आपने इतना कष्ट करके मेरे घर की खबर दी और आप यह जानती है कि वह इस वक्त मुसीबतों के जाल में फशे हुए है और जब आज उन्हें मेरी मदद की जरूरत है तो आप ऐसे ही चले जाएंगी (फिर मिना जी की तरफ घूम के) मा मैं चाहती हु कि
मीना जी (बीच मे ही बात को काटते हुए): बेटी तुम्हे कुछ भी बोलने की जरूरत नही है मैं सब समझ गयी हु (सुरेखा से जो अपनी भाभी को रोते हुए देख कर आ गयी थी ) बेटी अपने भाई को फोन करके बोल की जल्द से जल्द घर आ जाये।

nice update
 
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