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राहुल की उम्र 26 साल प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। सुबह से शाम तक ऑफिस की भागदौड़, मीटिंग्स, बॉस की डाँट और थकान… घर आकर बस थोड़ा आराम चाहिए होता।
निधि उसकी बीवी उम्र 24 गोरी, गठीली बॉडी, गोल-मटोल सीने और कमर जो साड़ी या जींस में भी साफ़ नज़र आती। शादी को दो साल हो चुके थे। शुरू-शुरू में दोनों एक-दूसरे पर मरते थे। हर रात नई-नई कोशिशें, लंबी चुदाई, पसीने-पसीने होकर सोना। लेकिन अब… अब राहुल को अपनी सेक्स लाइफ से ऊब हो चुकी थी।
वही पोजीशन, वही आवाज़ें। निधि कोशिश करती थी मज़ेदार बनाने की, लेकिन राहुल के अंदर कुछ खोया-खोया सा लगने लगा था।
आज ऑफिस में लंच ब्रेक में फोन घूम रहा था। गलती से एक वीडियो खुल गई। टाइटल पढ़ते ही दिल ज़ोर से धड़का – “Wife Shared With Friend – Cuckold”. उसने हेडफ़ोन लगाए। स्क्रीन पर एक पति बैठा था, जबकि उसकी बीवी दूसरे मर्द के नीचे कराह रही थी। पति की आँखों में शर्म, जलन… और साथ में एक अजीब सी कामुकता।
राहुल का दिमाग हिल गया।
वीडियो खत्म होने के बाद भी वो सीन उसके दिमाग में घूमता रहा। ऑफिस से निकलते वक्त भी वही ख्याल। घर पहुँचा तो निधि किचन में खड़ी थी। हल्की कुर्ती पहनी हुई, बाल खुले, गर्दन पर पसीने की हल्की चमक। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आ गए? थके लग रहे हो।”
राहुल ने बस सिर हिलाया। लेकिन आँखें निधि पर टिकी रहीं। उसकी कमर, जाँघें, वो मुस्कान… और दिमाग में बार-बार वही सीन घूमने लगा। अगर निधि किसी और के नीचे होती… अगर कोई और उसे ऐसे छूता, चूमता, घुसेड़ता… तो वो कैसा महसूस करता?
रात हुई। खाना खाकर दोनों बेडरूम में आए। निधि ने जैसे हमेशा की तरह पहल की। कपड़े उतारे, राहुल के ऊपर चढ़ गई। चुदाई शुरू हुई। निधि कराह रही थी, राहुल जोर-जोर से धकेल रहा था… लेकिन उसका दिमाग कहीं और था।
हर धक्के के साथ वो सोच रहा था –“अगर ये कोई और होता… अगर निधि की ये आवाज़ किसी और के लिए निकल रही होती… तो मैं कैसा महसूस करता? जलन? शर्म? या फिर… ये अजीब सी गर्मी जो अभी मेरे अंदर उठ रही है?”
निधि को लगा राहुल आज ज़्यादा जोशीला है। उसने आँखें बंद कर लीं और और ज़ोर से कराहने लगी।राहुल की साँसें तेज़ थीं। शरीर तो निधि के अंदर था, लेकिन दिमाग उस पॉर्न वीडियो के अंदर खोया हुआ था।
और पहली बार… चुदाई के दौरान राहुल को अपनी बीवी किसी और के साथ सोचते हुए एक अजीब सा मज़ा आने लगा।
सुबह की धूप खिड़की से छन-छनकर कमरे में आ रही थी। राहुल की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। निधि उसके सीने पर सिर रखकर सोई हुई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे और एक हाथ राहुल की कमर पर पड़ा था।
रात की बात याद आते ही राहुल के अंदर एक हल्की सी हलचल हुई। कल रात जो ख्याल आए थे, वो अभी भी कहीं न कहीं दिमाग में घूम रहे थे। लेकिन अभी वो ख्याल दबाने की कोशिश करता।
उसने धीरे से निधि के माथे पर एक चुंबन दिया। निधि मुस्कुराई और आँखें खोलीं।
“गुड मॉर्निंग…” उसने कर्कश आवाज़ में कहा।
“गुड मॉर्निंग,” राहुल ने जवाब दिया और उसके बालों को सहलाया।
दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। निधि ने राहुल की गर्दन में मुँह छुपा लिया और हल्के से काट लिया। राहुल हँसा, “अरे, इतनी सुबह से ही रोमांस?”
“तुम कल रात बहुत जोश में थे,” निधि ने धीरे से कहा, “मुझे अच्छा लगा।”
राहुल की साँस थोड़ी तेज़ हो गई। उसने कुछ नहीं कहा, बस निधि को और पास खींच लिया। कुछ पल चुपचाप एक-दूसरे को छूते रहे। फिर निधि उठ बैठी।
“चलो, देर हो जाएगी। तुम्हें ऑफिस भी जाना है।”
दोनों बाथरूम की तरफ बढ़े। निधि ने पहले नहाने का मौका लिया। पानी की आवाज़ आ रही थी। राहुल बाहर खड़ा था, और उसके दिमाग में फिर वही बात घूमने लगी। निधि नहा रही है… अगर कोई और होता तो? वो ख्याल आते ही उसने सिर हिलाया और खुद को व्यस्त करने की कोशिश की।
निधि नहाकर निकली। सिर्फ तौलिया लपेटे हुए। पानी की बूँदें उसकी गर्दन और कंधों पर चमक रही थीं। राहुल की नज़रें अनजाने में उसके शरीर पर टिक गईं। निधि ने देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई।
“क्या देख रहे हो?”
“बीवी को ही तो देख रहा हूँ,” राहुल ने हल्के से कहा और पास जाकर उसके गाल पर एक लंबा चुंबन दे दिया। निधि ने उसकी गर्दन में बाँहें डाल लीं। कुछ पल दोनों चूमे, फिर निधि हँसते हुए पीछे हट गई।
“अब नहा लो, वरना लेट हो जाओगे।”
राहुल नहाने चला गया। जब वो निकला तो निधि पहले से कपड़े पहन चुकी थी कुर्ती और लेगिंग्स। बाल अभी भी थोड़े गीले थे। वो किचन में चाय बना रही थी।
राहुल ने शर्ट के बटन लगाते हुए पीछे से जाकर उसकी कमर में हाथ डाल दिए। निधि मुस्कुराई और सिर घुमाकर बोली, “आज बहुत प्यार हो रहा है तुम्हें?”
“हूँ…” राहुल ने बस इतना कहा और उसकी गर्दन पर हल्के से होंठ रख दिए।
नाश्ते की मेज पर दोनों बैठे। निधि राहुल के प्लेट में पराठा रख रही थी, और राहुल चुपचाप उसे देख रहा था। सुबह की रोशनी में निधि और भी खूबसूरत लग रही थी। और राहुल के मन में बार-बार एक सवाल उठ रहा था
“क्या ये सिर्फ मेरी है… या कोई और भी इसे ऐसे देख सकता है?”
उसने जल्दी से वो ख्याल निकाल दिया।
नाश्ता खत्म हुआ। राहुल ने बैग उठाया। निधि दरवाज़े तक आई।
“ध्यान से जाना,” उसने कहा और राहुल के गाल पर एक हल्का चुंबन दे दिया।
राहुल ने उसकी कमर पकड़कर एक और चुंबन लिया – इस बार थोड़ा लंबा। निधि की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।
“शाम को जल्दी आ जाना,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
राहुल ने सिर हिलाया और निकल गया।
दरवाज़ा बंद होते ही निधि कुछ देर खड़ी रही। उसके चेहरे पर मुस्कान थी… लेकिन राहुल के मन में जो तूफ़ान चल रहा था, उसकी उसे अभी कोई खबर नहीं थी।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।
सुबह की हल्की रोमांस, ऑफिस की थकान, रात की चुदाई… और बीच-बीच में राहुल के दिमाग में वो अजीब से ख्याल। पहले तो वो खुद को रोकता, लेकिन धीरे-धीरे वो इच्छा और गहरी होती जा रही थी। कभी निधि को देखकर सोचता – “अगर कोई और इसे छूए तो…”, कभी चुदाई के दौरान आँखें बंद करके किसी तीसरे व्यक्ति की कल्पना करने लगता। हर बार बाद में शर्मिंदगी होती, लेकिन इच्छा कम नहीं हो रही थी। उल्टे बढ़ रही थी।
एक शाम राहुल बालकनी में बैठा था। ठंडी हवा चल रही थी। उसने सिगरेट जलाई और ख्यालों में डूबा हुआ था कि अचानक फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर “पापा” लिखा देखकर उसने कॉल उठाया।
“हेलो पापा…”
“बेटा, कैसे हो? निधि कैसी है?”
थोड़ी देर हाल-चाल की बात चली।… फिर पापा की आवाज़ थोड़ी गंभीर हो गई।
“बेटा, एक बात बतानी थी। पड़ोस वाले रमेश अंकल कुछ दिन के लिए शहर आ रहे हैं। उनका कोई काम है। मैंने कह दिया था कि तुम्हारे घर ठहर जाएँगे। तुम उनका इंतज़ाम कर देना।”
राहुल का हाथ सिगरेट समेत थोड़ा सा काँप गया।
रमेश अंकल… गाँव के पड़ोसी। उम्र करीब पैंतालीस-पचास के होंगे। हट्टे-कट्टे, ज़रा रूखे स्वभाव वाले, लेकिन बातचीत में हमेशा हँसमुख। राहुल बचपन से उन्हें जानता था। निधि से उनकी मुलाकात शादी के बाद एक-दो बार ही हुई थी।
“पापा, लेकिन… हमारे पास तो सिर्फ दो कमरे हैं,” राहुल ने हिचकते हुए कहा।
“अरे बस चार-पाँच दिन की बात है। कोई दिक्कत नहीं होगी। निधि से कह देना, वो समझदार है।”
कॉल कट गई।
राहुल काफी देर तक बालकनी में बैठा रहा। सिगरेट बुझ चुकी थी, लेकिन वो अभी भी उन्हीं ख्यालों में था। घर में कोई तीसरा मर्द… और वो भी इतने दिनों तक। अंदर ही अंदर एक अजीब सी बेचैनी फैल गई।
वो अंदर आया। निधि टीवी देख रही थी। राहुल ने पास बैठकर धीरे से बात बताई।
“पापा ने फोन किया था… रमेश अंकल कुछ दिन के लिए शहर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हमारे यहाँ ठहरेंगे।”
निधि की भौंहें सिकुड़ गईं।
“रमेश अंकल? इतने दिनों तक? हमारे पास जगह कहाँ है?”
“मैंने भी यही कहा… लेकिन पापा ने कह दिया है।”
निधि कुछ पल चुप रही। फिर उसने साँस छोड़ते हुए कहा, “अरे… कुछ दिनों की ही तो बात है। बैगल वाले कमरे में उनका इंतज़ाम कर देती हूँ। बिस्तर लगा दूँगी, बाथरूम अलग है ही। कोई खास दिक्कत नहीं होगी।”
राहुल ने निधि की तरफ देखा। उसकी आवाज़ में थोड़ी नाराज़गी तो थी। और अचानक राहुल के मन में एक ख्याल कौंधा –
घर में कोई और मर्द होगा…
वो ख्याल आते ही उसके पेट में एक अजीब सी गर्मी उठी। उसने जल्दी से नज़रें फेर लीं।
“हाँ… ठीक है,” उसने बस इतना कहा।
निधि उठकर किचन की तरफ चली गई, “चलो खाना लगाती हूँ। तुम भी धोकर आ जाओ।”
राहुल वहीं सोफे पर बैठा रहा। बाहर बालकनी में हवा चल रही थी, और उसके अंदर धीरे-धीरे एक नया तूफ़ान आकार ले रहा था।
निधि उसकी बीवी उम्र 24 गोरी, गठीली बॉडी, गोल-मटोल सीने और कमर जो साड़ी या जींस में भी साफ़ नज़र आती। शादी को दो साल हो चुके थे। शुरू-शुरू में दोनों एक-दूसरे पर मरते थे। हर रात नई-नई कोशिशें, लंबी चुदाई, पसीने-पसीने होकर सोना। लेकिन अब… अब राहुल को अपनी सेक्स लाइफ से ऊब हो चुकी थी।
वही पोजीशन, वही आवाज़ें। निधि कोशिश करती थी मज़ेदार बनाने की, लेकिन राहुल के अंदर कुछ खोया-खोया सा लगने लगा था।
आज ऑफिस में लंच ब्रेक में फोन घूम रहा था। गलती से एक वीडियो खुल गई। टाइटल पढ़ते ही दिल ज़ोर से धड़का – “Wife Shared With Friend – Cuckold”. उसने हेडफ़ोन लगाए। स्क्रीन पर एक पति बैठा था, जबकि उसकी बीवी दूसरे मर्द के नीचे कराह रही थी। पति की आँखों में शर्म, जलन… और साथ में एक अजीब सी कामुकता।
राहुल का दिमाग हिल गया।
वीडियो खत्म होने के बाद भी वो सीन उसके दिमाग में घूमता रहा। ऑफिस से निकलते वक्त भी वही ख्याल। घर पहुँचा तो निधि किचन में खड़ी थी। हल्की कुर्ती पहनी हुई, बाल खुले, गर्दन पर पसीने की हल्की चमक। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आ गए? थके लग रहे हो।”
राहुल ने बस सिर हिलाया। लेकिन आँखें निधि पर टिकी रहीं। उसकी कमर, जाँघें, वो मुस्कान… और दिमाग में बार-बार वही सीन घूमने लगा। अगर निधि किसी और के नीचे होती… अगर कोई और उसे ऐसे छूता, चूमता, घुसेड़ता… तो वो कैसा महसूस करता?
रात हुई। खाना खाकर दोनों बेडरूम में आए। निधि ने जैसे हमेशा की तरह पहल की। कपड़े उतारे, राहुल के ऊपर चढ़ गई। चुदाई शुरू हुई। निधि कराह रही थी, राहुल जोर-जोर से धकेल रहा था… लेकिन उसका दिमाग कहीं और था।
हर धक्के के साथ वो सोच रहा था –“अगर ये कोई और होता… अगर निधि की ये आवाज़ किसी और के लिए निकल रही होती… तो मैं कैसा महसूस करता? जलन? शर्म? या फिर… ये अजीब सी गर्मी जो अभी मेरे अंदर उठ रही है?”
निधि को लगा राहुल आज ज़्यादा जोशीला है। उसने आँखें बंद कर लीं और और ज़ोर से कराहने लगी।राहुल की साँसें तेज़ थीं। शरीर तो निधि के अंदर था, लेकिन दिमाग उस पॉर्न वीडियो के अंदर खोया हुआ था।
और पहली बार… चुदाई के दौरान राहुल को अपनी बीवी किसी और के साथ सोचते हुए एक अजीब सा मज़ा आने लगा।
सुबह की धूप खिड़की से छन-छनकर कमरे में आ रही थी। राहुल की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। निधि उसके सीने पर सिर रखकर सोई हुई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे और एक हाथ राहुल की कमर पर पड़ा था।
रात की बात याद आते ही राहुल के अंदर एक हल्की सी हलचल हुई। कल रात जो ख्याल आए थे, वो अभी भी कहीं न कहीं दिमाग में घूम रहे थे। लेकिन अभी वो ख्याल दबाने की कोशिश करता।
उसने धीरे से निधि के माथे पर एक चुंबन दिया। निधि मुस्कुराई और आँखें खोलीं।
“गुड मॉर्निंग…” उसने कर्कश आवाज़ में कहा।
“गुड मॉर्निंग,” राहुल ने जवाब दिया और उसके बालों को सहलाया।
दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। निधि ने राहुल की गर्दन में मुँह छुपा लिया और हल्के से काट लिया। राहुल हँसा, “अरे, इतनी सुबह से ही रोमांस?”
“तुम कल रात बहुत जोश में थे,” निधि ने धीरे से कहा, “मुझे अच्छा लगा।”
राहुल की साँस थोड़ी तेज़ हो गई। उसने कुछ नहीं कहा, बस निधि को और पास खींच लिया। कुछ पल चुपचाप एक-दूसरे को छूते रहे। फिर निधि उठ बैठी।
“चलो, देर हो जाएगी। तुम्हें ऑफिस भी जाना है।”
दोनों बाथरूम की तरफ बढ़े। निधि ने पहले नहाने का मौका लिया। पानी की आवाज़ आ रही थी। राहुल बाहर खड़ा था, और उसके दिमाग में फिर वही बात घूमने लगी। निधि नहा रही है… अगर कोई और होता तो? वो ख्याल आते ही उसने सिर हिलाया और खुद को व्यस्त करने की कोशिश की।
निधि नहाकर निकली। सिर्फ तौलिया लपेटे हुए। पानी की बूँदें उसकी गर्दन और कंधों पर चमक रही थीं। राहुल की नज़रें अनजाने में उसके शरीर पर टिक गईं। निधि ने देखा और शरमाते हुए मुस्कुराई।
“क्या देख रहे हो?”
“बीवी को ही तो देख रहा हूँ,” राहुल ने हल्के से कहा और पास जाकर उसके गाल पर एक लंबा चुंबन दे दिया। निधि ने उसकी गर्दन में बाँहें डाल लीं। कुछ पल दोनों चूमे, फिर निधि हँसते हुए पीछे हट गई।
“अब नहा लो, वरना लेट हो जाओगे।”
राहुल नहाने चला गया। जब वो निकला तो निधि पहले से कपड़े पहन चुकी थी कुर्ती और लेगिंग्स। बाल अभी भी थोड़े गीले थे। वो किचन में चाय बना रही थी।
राहुल ने शर्ट के बटन लगाते हुए पीछे से जाकर उसकी कमर में हाथ डाल दिए। निधि मुस्कुराई और सिर घुमाकर बोली, “आज बहुत प्यार हो रहा है तुम्हें?”
“हूँ…” राहुल ने बस इतना कहा और उसकी गर्दन पर हल्के से होंठ रख दिए।
नाश्ते की मेज पर दोनों बैठे। निधि राहुल के प्लेट में पराठा रख रही थी, और राहुल चुपचाप उसे देख रहा था। सुबह की रोशनी में निधि और भी खूबसूरत लग रही थी। और राहुल के मन में बार-बार एक सवाल उठ रहा था
“क्या ये सिर्फ मेरी है… या कोई और भी इसे ऐसे देख सकता है?”
उसने जल्दी से वो ख्याल निकाल दिया।
नाश्ता खत्म हुआ। राहुल ने बैग उठाया। निधि दरवाज़े तक आई।
“ध्यान से जाना,” उसने कहा और राहुल के गाल पर एक हल्का चुंबन दे दिया।
राहुल ने उसकी कमर पकड़कर एक और चुंबन लिया – इस बार थोड़ा लंबा। निधि की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।
“शाम को जल्दी आ जाना,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
राहुल ने सिर हिलाया और निकल गया।
दरवाज़ा बंद होते ही निधि कुछ देर खड़ी रही। उसके चेहरे पर मुस्कान थी… लेकिन राहुल के मन में जो तूफ़ान चल रहा था, उसकी उसे अभी कोई खबर नहीं थी।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।
सुबह की हल्की रोमांस, ऑफिस की थकान, रात की चुदाई… और बीच-बीच में राहुल के दिमाग में वो अजीब से ख्याल। पहले तो वो खुद को रोकता, लेकिन धीरे-धीरे वो इच्छा और गहरी होती जा रही थी। कभी निधि को देखकर सोचता – “अगर कोई और इसे छूए तो…”, कभी चुदाई के दौरान आँखें बंद करके किसी तीसरे व्यक्ति की कल्पना करने लगता। हर बार बाद में शर्मिंदगी होती, लेकिन इच्छा कम नहीं हो रही थी। उल्टे बढ़ रही थी।
एक शाम राहुल बालकनी में बैठा था। ठंडी हवा चल रही थी। उसने सिगरेट जलाई और ख्यालों में डूबा हुआ था कि अचानक फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर “पापा” लिखा देखकर उसने कॉल उठाया।
“हेलो पापा…”
“बेटा, कैसे हो? निधि कैसी है?”
थोड़ी देर हाल-चाल की बात चली।… फिर पापा की आवाज़ थोड़ी गंभीर हो गई।
“बेटा, एक बात बतानी थी। पड़ोस वाले रमेश अंकल कुछ दिन के लिए शहर आ रहे हैं। उनका कोई काम है। मैंने कह दिया था कि तुम्हारे घर ठहर जाएँगे। तुम उनका इंतज़ाम कर देना।”
राहुल का हाथ सिगरेट समेत थोड़ा सा काँप गया।
रमेश अंकल… गाँव के पड़ोसी। उम्र करीब पैंतालीस-पचास के होंगे। हट्टे-कट्टे, ज़रा रूखे स्वभाव वाले, लेकिन बातचीत में हमेशा हँसमुख। राहुल बचपन से उन्हें जानता था। निधि से उनकी मुलाकात शादी के बाद एक-दो बार ही हुई थी।
“पापा, लेकिन… हमारे पास तो सिर्फ दो कमरे हैं,” राहुल ने हिचकते हुए कहा।
“अरे बस चार-पाँच दिन की बात है। कोई दिक्कत नहीं होगी। निधि से कह देना, वो समझदार है।”
कॉल कट गई।
राहुल काफी देर तक बालकनी में बैठा रहा। सिगरेट बुझ चुकी थी, लेकिन वो अभी भी उन्हीं ख्यालों में था। घर में कोई तीसरा मर्द… और वो भी इतने दिनों तक। अंदर ही अंदर एक अजीब सी बेचैनी फैल गई।
वो अंदर आया। निधि टीवी देख रही थी। राहुल ने पास बैठकर धीरे से बात बताई।
“पापा ने फोन किया था… रमेश अंकल कुछ दिन के लिए शहर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हमारे यहाँ ठहरेंगे।”
निधि की भौंहें सिकुड़ गईं।
“रमेश अंकल? इतने दिनों तक? हमारे पास जगह कहाँ है?”
“मैंने भी यही कहा… लेकिन पापा ने कह दिया है।”
निधि कुछ पल चुप रही। फिर उसने साँस छोड़ते हुए कहा, “अरे… कुछ दिनों की ही तो बात है। बैगल वाले कमरे में उनका इंतज़ाम कर देती हूँ। बिस्तर लगा दूँगी, बाथरूम अलग है ही। कोई खास दिक्कत नहीं होगी।”
राहुल ने निधि की तरफ देखा। उसकी आवाज़ में थोड़ी नाराज़गी तो थी। और अचानक राहुल के मन में एक ख्याल कौंधा –
घर में कोई और मर्द होगा…
वो ख्याल आते ही उसके पेट में एक अजीब सी गर्मी उठी। उसने जल्दी से नज़रें फेर लीं।
“हाँ… ठीक है,” उसने बस इतना कहा।
निधि उठकर किचन की तरफ चली गई, “चलो खाना लगाती हूँ। तुम भी धोकर आ जाओ।”
राहुल वहीं सोफे पर बैठा रहा। बाहर बालकनी में हवा चल रही थी, और उसके अंदर धीरे-धीरे एक नया तूफ़ान आकार ले रहा था।