यह कहानी राजनाथ और उनकी बेटी आरती के बारे में है। आरती की शादी को 6 साल हो चुके हैं लेकिन उसे कोई संतान नहीं है। इस कारण उसके ससुराल वाले उसे परेशान करते हैं और वह अपने पिता के घर आ जाती है। राजनाथ अपनी बेटी की मदद करने के लिए उसे डॉक्टर के पास ले जाते हैं। डॉक्टर आरती और राजनाथ को पति-पत्नी समझ लेती है, जिससे एक अजीब स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कहानी में पिता-बेटी के रिश्ते की जटिलताएं और समाज में महिलाओं की स्थिति को दर्शाया गया है।
एक बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी जो समाज की कई कुरीतियों पर प्रकाश डालती है। लेखक ने पात्रों के मनोविज्ञान को बखूबी चित्रित किया है। कहानी में पिता-बेटी के रिश्ते की गहराई, बेटी के प्रति पिता का प्यार और चिंता, और समाज में महिलाओं की स्थिति को बड़ी ही सूक्ष्मता से प्रस्तुत किया गया है। भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है। कहानी पाठक को बांधे रखती है और उसमें आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है। यह कहानी वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है और समाज में व्याप्त कई समस्याओं पर गंभीर चिंतन की मांग करती है।
राजनाथ और आरती की कहानी पाठकों के दिलों को छू जाती है। यह कहानी न सिर्फ पारिवारिक बंधनों, सामाजिक दबावों और व्यक्तिगत संघर्षों को उजागर करती है, बल्कि इसमें भावनाओं का ऐसा सूक्ष्म चित्रण है जो पाठकों को कहानी के साथ जोड़ देता है।
कहानी का मुख्य केंद्र आरती की वह पीड़ा है जो वह बच्चे न होने के कारण झेल रही है। उसका पति और ससुराल वाले उसे दोष देते हैं, जबकि असली समस्या कहीं और है। राजनाथ, एक पिता होने के नाते, अपनी बेटी के दर्द को समझता है और उसकी मदद के लिए आगे आता है। डॉक्टर के पास जाने के दौरान जो घटनाएँ घटती हैं, वे कहानी को एक नया मोड़ देती हैं।
लेखक ने पिता-बेटी के रिश्ते को बहुत ही संवेदनशील तरीके से चित्रित किया है। राजनाथ का आरती के प्रति स्नेह, चिंता और उसकी खुशी के लिए त्याग करने की भावना दिल को छू जाती है। वहीं, आरती का अपने पिता के प्रति समर्पण और उसकी मजबूरी को समझने की कोशिश करना भी प्रशंसनीय है।
कहानी में समाज की उस मानसिकता पर भी प्रकाश डाला गया है जहाँ औरत को ही बच्चा न होने का दोषी माना जाता है, जबकि पुरुष की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देती है कि ऐसे मुद्दों को समझने के लिए दोनों पक्षों की जिम्मेदारी को समझना जरूरी है।
कहानी की भाषा सरल और प्रभावी है। संवादों में स्वाभाविकता है, जो पात्रों को वास्तविक बनाती है। डॉक्टर के क्लिनिक वाले दृश्य में जो हास्य और संवेदना का मिश्रण है, वह कहानी को और भी रोचक बना देता है।
यह कहानी पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है और सोचने पर मजबूर करती है। पारिवारिक प्रेम, सामाजिक कुरीतियों और व्यक्तिगत संघर्षों का यह मिश्रण एक बेहतरीन कथानक बनाता है। आगे के भागों की प्रतीक्षा रहेगी कि क्या राजनाथ और आरती की यह यात्रा एक सुखद अंत की ओर ले जाती है।