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स्त्रियों का शरीर कामवासना प्रेरित करने वाले हॉर्मोन्स के प्रज्वलित होने के कारण उस हालात में सम्भोग के लिए अपने आपको पुरुष को समर्पित करने के लिए विवश हो जाता है। यह कुदरत का नियम है। स्त्रियां दबी हुई कमान की तरह होती हैं। अगर नियंत्रण की रोक हटी तो वह पुरुष से कहीं ज्यादा भोग विलास के लिए सदा तत्पर हो जाती है।
एक बार अगर युवा स्त्री को अपने मन पसंद, सशक्त, आकर्षक और सुन्दर पुरुष के साथ एकांत में कामवासना का मौक़ा मिले, और अगर पुरुष उस स्त्री की कामवासना को जागृत करने के लिए प्रयत्नशील हो जाए, तो वह स्त्री सारी मर्यादाओं और लाज शर्म को त्याग कर उस पुरुष के साथ कामक्रीड़ा करने के लिए बाध्य हो जायगी।
अगर उनका थोड़ा सा भी मन हो तो कहती है ”प्लीज ऐसा मत करो, मुझे परेशान मत करो, अब जाओ यहां से, इत्यादि।’ अगर ‘हां’ कहनी है और अगर उसका पूरा मन है, तो कहती हैं ‘पता नहीं, देखते है।’ और सवाल को टालने की कोशिश करती है। अगर कोई नारी ‘हां’ कहे तो समझना कि वह भारतीय नारी नहीं हो सकती।”
“भारतीय नारियों की एक खासियत होती है कि उनको जब मना करना हो तो साफ़-साफ़ शब्दों में सख्ती से मना करती हैं। और अगर ज्यादा आग्रह किया जाए, तो जोर से चिल्लाने लगती हैं।

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