अपडेट ७#
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सम्राट चीजे समेटने लगता है, तभी उसे एक कोने में रोशनी जैसी दिखती है। सम्राट उत्सुकता से उधर जाता है, और ऐसा लगता है की दीवाल के पीछे से रोशनी आ रही है, सम्राट इधर उधर देखता है तो दीवाल पर उसे कोई लिपि दिखती है, जिसे देखते ही सम्राट को।लगता है वो उसे पढ़ सकता है, वो कोई मंत्र जैसा होता है, और सम्राट के उसे पढ़ते ही, दीवाल एक तरफ खिसक जाती है, और अंदर एक सुंदर सा कमरा दिखता है, जिसमे मशाल से रोशनी हो रही होती है.......
अब आगे -
कमरे के अंदर कोई नही था, सम्राट ने देखा वहां कमरे के बीचों बीच एक ताबूत जैसा कुछ रखा था। सम्राट उसके पास जा कर उसे खोलने की कोशिश करता है, और थोड़ी मशक्कत के बाद वो खुल जाता है। अंदर रेत की सिवा कुछ नहीं था। सम्राट उस रेत के अंदर हाथ डालता है तो उसके हाथ कुछ लगता है। वो एक रोना का रत्न जड़ित चूड़ा था, जो काफी सुंदर और मूल्यवान था। सम्राट उसे देखते हुए कमरे में चारों ओर और कुछ ढूंढने लगा, मगर और कुछ भी नही मिला वहां। वो निराश होकर बाहर आ गया। उसके कमरे के बाहर पैर रखते ही मशाल अपने आप ही बुझ गई और दरवाजा भी पहले की तरह बंद हो गया। सम्राट ने फौरन उस लिपि को पढ़ने की कोशिश की, मगर इस बार उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था। ये बात उसे बड़ी अजीब लगी। उसने वो चूड़ा अपने बैग में रख लिया। उसे वो इतना पसंद आया था कि वो किसी को भी इसके बारे में नही बताना चाहता था। फिर वो वापस ऊपर आ गया और सबसे मिला।
वहीं उस तहखाने में एक घटना और हुई, जिस पर सम्राट की नजर नहीं पड़ी। जैसे ही सम्राट ने वो ताबूत खोला, वैसे ही उसमे से एक काले धुएं की एक लकीर निकल कर कमरे से बाहर चली गई, जिसपर सम्राट की नजर नहीं पड़ी। उस लकीर रूपी धुएं के बाहर निकलते ही आसमान में जोरदार बिजली कड़कने लगी, और हवाएं और तेज चलने लगी।
जब सम्राट बाहर निकल कर सबसे मिला तो मौसम बहुत खराब हो चुका था। सारे लोग उसका ही इंतजार कर रहे थे।
चाचा: कुछ मिला?
सम्राट: नही चाचा जी, वो असल में बैग गिर गया था नीचे, वही लेने रुक गया था मैं। आप में से किसी को कुछ मिला क्या?
चाचा: नही, हम सब भी खाली हाथ ही हैं, लगता है वो सब बस अफवाह ही है। अब सब जल्दी चलो मौसम बहुत खराब हो रहा है। अभी हम जंगल भी पर करना है।
सब जल्दी से बाहर निकलते हैं, और अपनी गाड़ी में बैठ वापस चल देते हैं। रास्ते में मौसम और खराब होने लगा, हवा इतनी जोर से चलने लगी की कई जगह तो ऐसा लगता था की कोई पेड़ टूट कर गाड़ी पर न गिर जाय, बारिश भी मूसलाधार होने लगी, अंधेरा इतना भयानक हो गया कि, गाड़ी की हैडलाइट में भी कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे प्रकृति उनको वहां से बाहर न जाने देना चाहती हो। वो तो ड्राइवर इन रास्तों का इतना अभ्यस्त था कि बिना किसी परेशानी के वो गाड़ी जंगल से बाहर ले आया। और कुछ ही समय में सब चाचा के घर पहुंच गए। पूरी रात बारिश और तूफान चलता रहा।
सुबह अच्छी सुहावनी थी, सब वापस लौटने को तैयार थे, सम्राट ने चुपके से वो चूड़ा अपने समान में रख लिया था। उसने तय कर लिया था की ये चूड़ा वो किसी अच्छे दिन आरती को दे देगा। नाश्ता करके सब हंसी खुशी वापस लौट जाते हैं। शाम तक सब वापस अपने शहर पहुंच जाते हैं।
इतनी लंबी ड्राइव से थका हुआ सम्राट अपने कमरे में जाते ही सो जाता है। रात को खाने के समय सुषमा जी उसे उठाने आती है।
खाना खा कर सब टीवी देखने लगते हैं, सब धीरे धीरे अपने कमरों में जा कर सो जाते हैं। सबसे आखिरी में सम्राट भी अपने कमरे में पहुंचता है।
उसकी नींद सुबह नूपुर की आवाज से खुलती है। ठंड के कारण वो रजाई ओढ़े सो रहा था, और नूपुर उसे चाय देने आई थी। ये उस रात के बाद दोनो की पहली एकांत में मुलाकात थी।
सम्राट नूपुर को देखते ही जग गया और रजाई से बाहर निकला, निर्वस्त्र.........