चौवनवाँ भाग
अपने पापा से बात करने के बाद अभिषेक ने फोन रख दिया और हम दोनों महेश का इंतजार करने लगे। मैंने उसे फोन किया तो उसने कुछ देख मैं आने के लिए बोल दिया लगभग 1 घंटे बाद महेश और पल्लवी कमरे पर आए। महेश जैसे ही अंदर आया। हम दोनों ने उसे दबोच लिया और बिस्तर पर पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया। अभिषेक ने उसके ऊपर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। मैं महेश के हाथ मरोड़ने लगा और बोला।
मै- साले चिरकुट। इतनी बड़ी बात तूने हम दोनों से छिपाई। तूने चाचा जी को सबकुछ बता दिया और तो और खुशबू को घर भी ले गया था। कमीने हमें नहीं बता सकता था।
महेश- अबे नूनू साले छोड़ मुझे दर्द होता है। अरे अभिषेक साले क्या कर रहा है। पल्लवी अभी गई नहीं हैं। अगर उसने हमें ऐसे देख लिया तो मेरी वाट लगा देगी। साले मैंने तेरे दिल का तार खुशबू के साथ फिर से जोड़ा है और तू मेरे दिल का तार पल्लवी के दिल से काटना चाहता है।
अभिषेक- मैं हूँ न तेरा कनेक्शन दोबारा से जोड़ने के लिए।
महेश- साले अब बकैती मत कर। अपना तो जोड़ नहीं पाया और मेरा जोड़ने की बात कर रहा है।
हम तीनों मस्ती कर रहे थे और पल्लवी दरवाजे से खड़ी सब देख रही थी। थोड़ी देर बाद उसने कहा।
पल्लवी- ये क्या हो रहा है। तुम तीनों को शर्म नहीं आती। एक लड़की के सामने ऐसा करते हुए।
मैं- आ जा पल्लू तो भी महेश का दूसरा हाथ मरोड़। साला बहुत कमीना हो गया है। हम लोगों को भनक भी नहीं लगने दी इसने।
पल्लवी- मुझे तो पहले से ही पता था इसके बारे में।
अभिषेक- क्या। इसने तुम्हें भी बताया था और तुमने हम दोनों को भी बताना जरूरी नहीं समझा। रूको अभी तुम्हें बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक महेश के ऊपर से उठा और पल्लवी की तरफ जाने लगा। पल्लवी हँसते हुए भागने लगी और आकर बिस्तर पर बैठ गई। महेश भी उठकर बिस्तर पर बैठ गया। अभिषेक ने एक बहुत ही हलका मुक्का पल्लवी को मारते हुए कहा।
अभिषेक- तुम भी इसके साथ रह रह कर कमीनी होती जा रही हो।
महेश- अरे यार भलाई का तो जमाना ही नहीं रहा। हमने इतना बड़ा काम किया फिर भी धन्यवाद कहने के बजाय शिकायत की जा रही हो। देख ली तुम दोनों की दोस्ती और प्यार। वो क्या कहते हैं। यही दोस्ती यही प्यार।
महेश की बात सुनकर हम सब हँसने लगा। थोड़ी देर हँसने के बाद अभिषेक ने महेश का हाथ पकड़ते हुए कहा।
अभिषेक- महेश मेरे भाई। तेरा बहुत बहुत धन्यवाद। मैं तेरा कैसे शुक्रिया अदा करूँ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं तेरा कर्जदार हो गया। मैं तेरा एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूँगा।
महेश- अभी एक कान के नीचे बजाऊँगा तो तेरा दिमाग ठिकाने लग जाएगा। अबे मैं दोस्त हूँ तेरा। और दोस्ती के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। मैंने तो बस एक कोशिश की जो कामयाब हो गई।
मैं- लेकिन तेरे दिमाग में कब आया कि चाचा जी को ये बात बतानी है।
महेश- खुशबू से तेरा नम्बर लेने के बाद मैंने खुशबू को फोन करके मिलने के लिए बुलाया। लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि उससे बात क्या करूँगा। तो मैंने पल्लवी को फोन किया और पल्लवी से इस बारे में बात की। बातों बातों में ही पल्लवी और मैंने निर्णय लिया कि इस बात का जिक्र चाचा जी से करना चाहिए। हो सकता है वो कोई रास्ता निकाल लें। तो सबसे पहले इसके लिए खुशबू को मनाना था। जो ज्यादा कठिन नहीं था। वो तो तुमसे शादी करने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी तो मैंने उसके तुम्हारे घर चलने के लिए कहा। जिसके लिए वो तैयार हो गई और तुम्हारे घर जाकर मैंने चाचा जी से बात की और खुशबू ने उन्हें सबकुछ बता दिया। उसके बाद चाचा जी खुशबू के पापा से बात मिलने का निर्णय लिया। उसके बाद का तो तुम दोनों को पता है।
अभिषेक-लेकिन इसके बारे में तुम दोनों हमें पहले ही बता सकते थे।
पल्लवी- बता तो सकते थे लेकिन हमे भरोसा नहीं था कि जो हम कर रहे हैं उससे खुशबू के पापा मान ही जाएँ और हम तुम्हें कोई उम्मीद दिखाकर फिर से दुःखी नहीं करना चाहते थे। इसलिए हमने तुम दोनों को कुछ नहीं बताया।
मैं- यार मैं क्या कहूँ अब। तुम दोनों बहुत अच्छे और सच्चे दोस्त हो। भगवान तुम्हारे जैसा दोस्त सबको दे।
पल्लवी- गलत बात हम दो नहीं हम छः हैं। और भगवान हम सबकी दोस्ती ऐसे ही बनाए रखे। वैसे एक बात पूछू नयन।
मैं- यार तुम्हें कब से अनुमति की जरूरत पड़ने लगी। पूछो क्या पूछना है।
पल्लवी- एकदम सच सच बताना। क्या महिमा सच में तुमको अच्छी नहीं लगती। उसमें कोई कमी है क्या जो तुम उसके सच्चे प्यार को देख नहीं पा रहे हो।
मैं- नहीं पल्लवी वो बहुत अच्छी है। एकदम भोली-भाली और सीधी-सादी है। लेकिन मैं उसके लायक खुद की नहीं समझता। उसे बहुत ही अच्छा लड़का मिलना चाहिए। मुझसे भी ज्यादा अच्छा लड़का। और हो सके तो इस बारे में आगे बात मत करना मुझसे। अब मैं अपना पूरा प्यार शादी के बाद अपनी पत्नी को दूँगा। यही मेरी कोशिश रहेगी। बाकी किस्मत मे क्या लिखा है वो तो समय ही बताएगा।
महेश- बात तो तुम सही कह रहे हो। किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले कुछ भी नहीं मिलता मेरे भाई। तेरे साथ भी सबकुछ अच्छा ही होगा।
पल्लवी- अच्छा सुनो वो कर्मचारी चयन आयोग वाली परीक्षा की तारीख आ गई है तो तैयारी फिर से शुरू कर दो। इस बार चयन हो जाना चाहिए।
अभिषेक- ठीक है। कोशिश पूरी रहेगी।
उसके बाद हम लोग अपने कमरे में ही बैठकर बात-चीत करने लगे। कोचिंग के समय हम लोग साथ में ही कोचिंग गए। महेश को भी हम अपने साथ कोचिंग ले गए। उधर से रेशमा भी आ गई। उसे भी ये जानकर बहुत खुशी हुई कि अभिषेक को उसका प्यार वापस मिल गया है। हम सब कोचिंग करने के बाद ठेले पर जाकर मेरा प्यार मुझे वापस मिलने की पार्टी मनाई और रेशमा और पल्लवी से विदा लेकर अपने कमरे पर आ गए। रात में हमने खाने बनाया। खाना खाकर हमलोग सोने लगे। अभिषेक ने थोड़ी देर खुशबू से बात की और फिर हम सब सो गए। इसी तरह दो दिन निकल गए। संजू का भी फोन नहीं आया। महेश जब से लखनऊ से आया था वो घर नहीं गया था। दो दिन बाद दोपहर बाद मुझे काजल का फोन आया।
काजल- प्रणाम भैया। कैसें हैं आप।
मैं- मैं तो ठीक हूँ। तुम कैसी हो।
काजल- मैं भी बहुत अच्छी हूँ भैया। आपको एक खुशखबरी देनी थी।
मैं- खुशखबरी। कैसी खुशखबरी।
काजल- पापा ने आपके लिए एक लड़की देखी है।
मैं- क्या। कब, कहाँ, कैसे।
अभिषेक और महेश मेरे पास ही बैठे थे। मेरे ऐसा कहने पर उन दोनों ने मुझसे इशारे में पूछा तो मैंने फोन स्पीकर पर डाल दिया।
काजल- मुझे ज्यादा तो नहीं पता। बस इतना पता है कि इंद्रजीत चाचा (सुरेश के पापा) के किसी जान-पहचान वाले की लड़की है। और आज सुबह ही उसको मैंने, अम्मा और पापा ने देखा है। वो इंद्रजीत चाचा के यहाँ आई थी अपने मम्मी पापा के साथ।
मैं- इतनी जल्दी किस बात की थी। और पापा ने मुझे इस बारे में कुछ बताया भी नहीं।
काजल- पापा शाम को शायद आपसे बात करें। वो तो मैं इतनी ज्यादा खुश थी की आपको बता रही हूँ।
मैं- तू इतनी ज्यादा खुश किसलिए है।
काजल- मैं खुश क्यों नहीं होऊँगी। भाभी दिखने में बहुत अच्छी है। और उनकी बोली बहुत ही सुरीली है। एकदम कोयल की तरह मीठी बोली है। एकदम हँसमुख स्वभाव की हैं। हम दोनों थोड़ी देर में ही अच्छे दोस्त बन गए।
मैं- पहली बात तो ये कि वो तेरी भाभी नहीं है। और वो कोयल है क्या जो उसकी आवाज सुरीली है।
काजल- नहीं वो भाभी है मेरी। आपको उसी से शादी करनी पड़ेगी। नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगी आपसे। और वो एकदम कोयल की तरह ही हैं।
मैं- मतलब वो काली है।
काजल- अरे नहीं भैया। उनकी आवाज ही कोयल की तरह सुरीली है। नहीं तो वो सुंदर हैं। देखने में अच्छी दिखती हैं। और सबसे बड़ी बात जो इंद्रजीत चाचा बता रहे थे कि वो बहुत ही संस्कारी हैं।
मैं- चल ठीक है मैं पापा से बात करूँगा इस बारे में। अब तुम फोन रखो।
उसके बाद मैंने फोन रख दिया। अभिषेक और महेश खुशी खुशी मुझे देख रहे थे। मैंने उन दोनों की तरफ देखते हुए कहा।
मैं- तुम दोनों को क्या हो गया। मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो।
महेश- अबे अब मुझे लग रहा है कि अपन तीनों की शादी एक ही मंडप में होने वाली है।
मैं- मतलब।
महेश- मतलब ये कि अभिषेक और मैं तो सेट हैं। आज तेरे पापा ने तुझको भी सेट कर दिया है। तो हम तीनों अकेले से दुकेले होने वाले हैं।
मैं- अबे चुप। तूने घर में पल्लवी के बारे में अभी बताया नहीं है और शादी का सपना देख रहा है।
महेश- मुझे पता है कि मेरे घरवाले मना नहीं करेंगे। पल्लवी जैसी लड़की को कौन अपनी बहू नहीं बनाना चाहेगा।
अभिषेक- नहीं महेश नयन सही कह रहा है। तेरी बात सही है कि पल्लवी बहुत अच्छी लड़की है और हर कोई उसे अपने घर की बहू बनाना चाहेगा, लेकिन फिर भी एक बार उसके बारे में अपने घर में बता तो दे।
महेश- अबे मुझे बताने में डर लगता है। इसलिए नहीं बता पा रहा हूँ।
महेश की बात सुनकर हम दोंनो हँसने लगे। हमें हँसता देखकर महेश ने कहा।
महेश- अबे तुम दोनों को क्या हुआ। ऐसे दाँत निपोर कर क्यों हँस रहे हो।
अभिषेक- साले तू कब से इतना डरने लगा। लोग सही कहते हैं। कि दूसरे के फटे में सब टाँग अँड़ाते हैं, लेकिन जब अपने फटे में टाँग अंड़ाना हो तो पीछे हट जाते हैं। तू कहे तो हम दोनों बात करें तेरे पापा से।
महेश- नहीं यार तुम दोनों रहने दो। कोई अच्छा सा समय देखकर मैं खुद पापा से बात कर लूँगा।
उसके बाद हम लोग पढ़ाई करने लगे। आज कोचिंग की छुट्टी थी तो हम कमरे पर ही थे। 5 बजे के करीब पापा को भी फोन आ गया। मैंने फोन स्पीकर पर डाल कर फोन उठा लिया।
मैं- प्रणाम पापा।
पापा- खुश रहो बेटा। कैसे हो तुम
मैं- मैं भी बहुत अच्छा हूँ पापा। अम्मा कैसी हैं।
पापा- वो भी ठीक हैं। अच्छा बेटा कुछ बात करने के लिए तुम्हारे पास फोन किया था।
मैं- जी पापा बताइए।
पापा- बात ये है कि जैसा तुमने कहा था कि तुम हम लोगों के पसंद की लड़की से ही शादी करोगे। तो मैंने तुम्हारे लिए एक लड़की देखी है।
मैं- हाँ पापा काजल ने बताया थो कुछ घंटे पहले फोन करके। लेकिन इतनी जल्दी क्या है पापा। और वो लड़की कौन है।
पापा- वो तुम्हारे इंद्रजीत चाचा हैं न तुम्हारे। उनके साले के पहचान वाले की लड़की है। कुछ दिन पहले बाजार में मिले थे तो तुम्हारे बारे में पूछने लगे। तो बातों ही बातों में मैंने उससे बोल दिया कि कोई अच्छी लड़की नजर में हो तो वो बताए। कल उसने बताया कि एक अच्छी लड़की है। अगर मैं कहूँ तो वो उन्हें कल बुला ले। तो मैंने बुलाने के लिए बोल दिया। आज सुबह ही वो लोग आ गए। हमने लड़की देखी नयन। लड़की बहुत ही अच्छी और सुशील लगी। तेरी अम्मा, मुझको और काजल को लड़की बहुत पसंद आई, लेकिन मैंने उन्हें बोल दिया कि आखिरी निर्णय नयन का होगा। अगर उसने हाँ कर दी तो हमारी तरफ से रिश्ता पक्का। लेकिन नयन के हाँ करने के बाद भी शादी तभी होगी जब नयन तैयार हो जाएगा शादी के लिए। अभी वो पढ़ाई कर रहा है। तो हो सकता है 1-2 साल का समय लग जाए शादी में। जिसके लिए वो लोग तैयार हो गए हैं। बस तुम एक बार लड़की से मिल लो फिर आगे की बात होगी।
पापा की बात सुनकर मैंने हाँ कह दिया, क्योंकि मैं जानता था कि पापा मेरे लिए कभी गलत निर्णय नहीं लेंगे। फिर मैंने कुछ देर अम्मा से बात की और फोन रख दिया। मेरे फोन रखने के बाद महेश ने कहा।
महेश- चल भाई तेरी एक चिंता और दूर हो गई कि तुझे 1-2 साल का और समय मिल गया। अब कहीं जाकर मन को सुकून मिल रहा है।
इतना कहकर महेश शांत हुआ, लेकिन कुछ पल बाद ही तुरंत बोला।
महेश- अभी कहाँ सुकून मिला। अभी तो अनामिका का मामला जस का तस है। इस संजू ने भी फोन करके नहीं बताया कि वो डीएनए जाँच के लिए तैयार हो गई है या नहीं।
अभिषेक- तू सही कह रहा है भाई। रुक मैं फोन लगाकर पूछता हूँ।
इसके बाद अभिषेक ने अपना मोबाइल निकाला और संजू को फोन करने ही वाला था कि महेश एकाएक बोल पड़ा।
महेश- रुक जा अभिषेक अभी फोन मत करना उसे। तो मेडिकल रिपोर्ट एक बार फिर से दिखा मुझे। मुझे कुछ देखना है उसमें।
अभिषेक- अबे कितनी बार देखेगा। तेरे बार-बार देखने से रिपोर्ट थोड़ी न बदल जाएगी।
महेश- अबे बकवास मत कर। रिपोर्ट दिखा मुझे।
फिर अभिषेक ने महेश को मेडिकर रिपोर्ट देखने के लिए मोबाइल दे दिया। मेडिकल रिपोर्ट दोबारा से देखने के बाद महेश बोला।
महेश- सच में हम पाँचों चूतिया हैं। एकदम लल्लू है हम लोग। अनामिका ने हम लोगों को इतना उलझा दिया है इस मामले में कि इस बात की तरफ किसी का ध्यान ही नहीं गया। जबकि ये बहुत साधारण सी बात थी।
मैं- अबे तू क्या बोल रहा है। हमें तु कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
महेश- अबे नूनू। हम लोग एक बात अभी तक नजरअंदाज करते चले आ रहे हैं वो ये है कि अगर अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार ये रिपोर्ट सही है तो इस क्रमांक पर किसके नाम से रिपोर्ट जारी की गई है। वो नाम हमें पता करना था, जबकि हम लोग रिपोर्ट के पीछे उलझे हुए हैं।
अभिषेक- हाँ यार। ये बात तो किसी के भी दिमाग में आई ही नहीं। अनामिका के गर्भवती होने के विस्फोट के बाद तो दिमाग काम ही करना बंद कर दिया। ऊपर से खुशबू वाला मामला सामने आ गया तो इस तरफ किसी का दिमाग नहीं गया।
महेश- उस लौंडियाबाज आदित्य को फोन कर तुरंत और मुझे दो बात करने के लिए।
अभिषेक ने तुरंत आदित्य को फोन मिलाया। कुछ देर में आदित्य ने फोन उठाया। हाल चाल पूछने के बाद आदित्य ने कहा।
आदित्य- कुछ काम था क्या अभिषेक।
महेश-आदित्य मैं महेश बोल रहा हूँ। हम लोगों से एक गलती हो रही है रिपोर्ट को लेकर। हम तुमको रिपोर्ट की छायाप्रति भेज रहे हैं। तुम अपने दोस्त तो जरा बात करके देखो कि उस क्रमांक की रिपोर्ट पर अस्पताल के रिकॉर्ड पर किसका नाम है। और हाँ अपने दोस्त से बात करते समय मुझको कॉन्फ्रेंस में ले लेना।
आदित्य- हाँ यार। इस बात की तरफ तो मेरा भी ध्यान नहीं गया। तुम रिपोर्ट भेजो मैं बात करता हूँ उससे।
उसके बाद महेश ने फोन कट कर दिया तो अभिषेक ने रिपोर्ट को आदित्य को व्हाट्सअप कर दी और उसके फोन का इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद आदित्य का फोन भी आ गया। मैंने फोन उठाया और स्पीकर पर डाल दिया।
आदित्य- मेरा दोस्त लाइन पर है।
महेश- भाई आदित्य ने जो तुम्हें मेडिकल रिपोर्ट की छायाप्रति भेजी है उसको अपने अस्पताल के रिकॉर्ड से मिलाओ। क्या इस रिपोर्ट पर जो नाम लिखा है वही नाम अस्पताल के रिकॉर्ड में है।
महेश की बात सुनने के बाद आदित्य के दोस्त ने मेडिकल रिपोर्ट क्रमांक की जाँच की और कहा।
आ.दोस्त- मेडिकल रिपोर्ट क्रमांक के हिसाब से यह मेडिकल रिपोर्ट किसी ऋतु सक्सेना के नाम पर है।
जिसे सुनने के पद हम सभी चौक पड़े। महेश ने आदित्य के दोस्त से कहा
महेश- भाई क्या उस मेडिकल रिपोर्ट पर उस ऋतु सक्सेना की उम्र और पता लिखा हुआ है।
आ.दोस्त- हाँ उसकी उम्र 23-24 के आस पास है। और पता भी लिखा है।
महेश- भाई क्या ये रिपोर्ट तुम हमें भेज सकते हो।
आ.दोस्त- अरे भाई इसमें कहने की बात है। ये गलत तो है लेकिन आदित्य के लिए कुछ भी गलत नहीं है। मैं कुछ ही देर में आदित्य को यह रिपोर्ट भेज रहा हूँ तुम उससे ले लेना ये रिपोर्ट।
इतना कहकर उसके दोस्त ने उधर से फोन काट दिया। अभिषेक ने आदित्य से कहा।
अभिषेक- धन्यवाद आदित्य। हमारी मदद करने के लिए।
आदित्य- इसमें धन्यवाद की क्या बात है। मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि मैं बुरा इंसान नहीं हूँ। मेरी नजर लड़कियों पर बुरी है, लेकिन मैंने कभी किसी लड़की के साथ जबरदस्ती नहीं की। जो भी किया उनकी मरजी से किया। लेकिन मैंने अपनी जिंदगी में अनामिका जैसी शातिर और चालबाज लड़की नहीं देखी। कितना तेज दिमाग है उसके पास हम सभी को उलझा कर रख दिया उसने। अब तो ये पता चल गया कि ये रिपोर्ट नकली है।
महेश- अभी पूरी तरह से नहीं पता है। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार ये रिपोर्ट नकली है, लेकिन फिर भी हमें एक बार ऋतु सक्सेना से मिलना पड़ेगा, क्योंकि हम अब थोड़ी भी शक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते।
आदित्य- तुम लोग जब अयोध्या चलने लगना तो मुझे भी बताना। मैं भी साथ में चलूँगा। अनामिका ने मुझे बहुत प्रभावित किया है आपने शातिराना चाल से। आखिरी बार इससे मिलना चाहता हूँ मैं।
अभिषेक- तुम ही नहीं हमें भी मिलना है उससे आखिरी बार।
आदित्य- ठीक है मैं फोन रख रहा हूँ। रिपोर्ट उधर से आते ही तुम्हें भेजता हूँ।
उसके बाद आदित्य ने फोन रख दिया। हम सब एक दूसरे को देखने लगे। हम लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। थोड़ी देर बाद आदित्य ने असली मेडिकल रिपोर्ट की छायाप्रति अभिषेक के पास भेज दी। जिसे देखने के बाद अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- यार सच में बहुत ही शातिर लड़की है यार। संजू को फोन लगाकर बताता हूँ।
इसके बाद अभिषेक ने संजू को फोन लगा दिया। फोन कुछ देर बाद ही संजू ने उठाया और फोन उठाते ही उसने कहा।
संजू- अरे अभिषेक भाई। मैं तुम्हें ही फोन करने का सोच रहा था। वो अनामिका मान ही नहीं रही है डीएनए जाँच के लिए। बोल रही है बिना मेरे मम्मी पापा से मिले वो जाँच नहीं करवाएगी।
अभिषेक- अब उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।
संजू (असमंजस में) क्यों जरूरत नहीं पड़ेगी।
अभिषेक- क्योंकि वो रिपोर्ट नकली है।
संजू- क्या।
अभिषेक- हाँ और यही बताने के लिए तुमको फोन किया है कि कल हमको अयोध्या चलना है। इसलिए सुबह समय से आ जाना। तुम्हें रास्ते में सबकुछ बता दूँगा। अब मैं फोन रख रहा हूँ। कल समय से आ जाना। कल बात करते हैं।
उसके बाद अभिषेक ने अपना फोन रख दिया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।