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Fantasy क्या यही प्यार है

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Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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I think majority must be granted. And majority are with us.
Mahi Maurya ji , please understand our imotion. :D
😁😂😂🤣😁😁

चूंकि हम पूरी कहानी लिख चुके हैं तो अब कहानी में बदलाव संभव ही नहीं है। फिर भी हम आपके जज्बातों की कद्र करते हैं।।

बाकी आप निराश नहीं होंगे आगे आने वाली परिस्थितियों को देखकर।।
 

Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
Supreme
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Mahi Maurya ji ab senior sir bhi kah diye...ab to ek Kara do...
कहानी पूरी लिख चुके हैं। अगर उसमे बदलाव किया तो फिर बहुत कुछ बदलना पड़ जाएगा मुझे।

तो इसलिए अपने जज्बात को काबू में रखिए।।और कहानी का आनंद लीजिए।
 

Luffy

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इक्यावनवाँ भाग

खुशबू के घर से आने के बाद अभिषेक मोटर साईकिल से उतरकर कमरे में चला गया और बिस्तर पर बैठकर फूट फूट कर रोने लगा। मैं भी गाड़ी खड़ी करने के बाद कमरे में चला गया और अभिषेक के पास बैठ गया। अभिषेक मेरे गले लग गया और रोने लगा। मैंने भी उसके कुछ देर रोने के लिए छोड़ दिया। जब थोड़ी देर बाद वो कुछ शांत हुआ तब मैंने अभिषेक से कहा।

मैं- अभिषेक जो भी हो रहा है वो बिलकुल भी अच्छा नहीं हो रहा है। लेकिन वो खुशबू के माँ बाप हैं। हमसे ज्यादा उन्हें खुशबू की चिंता है। इसलिए तू शांत हो जा भाई।

अभिषेक- (हिचिकते हुए) ऐसा क्यों हुआ मेरे साथ। एक ने प्यार किया तो धोखा दे दिया और एक ने प्यार किया तो वो मुझको मिल कर भी नहीं मिल रही है।

मैं- देख भाई ऐसे रोने से कुछ नहीं होता। तुम लोग ही तो मुझे समझाते थे कि जो किस्मत में लिखा होता हो हमको वही चीज मिलती है। शायद खुशबू तेरी किस्मत में नहीं लिखी भाई। तुम सब ही बोलते थे मुझे कि हर प्यार करने वाले को मंजिल नहीं मिलती। तो यही समझ ले भाई कि तेरी मंजिल खुशबू नहीं कोई और है।

अभिषेक- लेकिन मैं उसे कितना प्यार करता हूँ तू तो जानता है न।

मैं- लेकिन उसके माँ बाप से ज्यादा प्यार तो नहीं करता न तू उसे। अगर तुझे उससे शादी करनी है तो वो तो तेरे साथ भागने के लिए भी तैयार है। लेकिन क्या तू उसे भगा कर शादी करना चाहेगा।

अभिषेक- मैं उसके माँ बाप की बददुआ लेकर और उनके अरमानों का गला घोंटकर अपने प्यार को नहीं पाना चाहता।

मैं- तो फिर यही समझ ले कि तेरी किस्मत में खुशबू का साथ यहीं तक लिखा था। तू रुक मैं उन दोनों को बुलाता हूँ।

अभिषेक- रहने दो भाई। वो दोनों भी यही सोचेंगी को हम दोनों कितने पनौती दोस्त हैं उनके। हमेशा हम दोनों की गाड़ लाल हुई पड़ी रहती है।

अभिषेक ने ये बात सिसकते हुए भी मुस्कुराते हुए कही थी। मैंने अभिषेक की बात सुनकर पल्लवी के पास फोन लगा दिया। उस समय पल्लवी और रेशमा साथ में ही थी। मैंने उन दोनों को सब बताया तो वो कुछ देर बाद कमरे पर आ गई। उन्होंने आते ही अभिषेक को समझाना शुरू कर दिया।

रेशमा- देखो अभिषेक उसके पापा की पूरी बात सुनने के बाद मुझे लगता है कि वो खुशबू से तुम्हारी शादी नहीं करेंगे अगर ऐसा होता तो वो खुशबू को समझाने के लिए तुमसे नहीं कहते। अब तुम्हारे पास दो ही रास्ते हैं या तो तुम खुशबू के साथ भागकर शादी करो या फिर खुशबू को समझाओ।

पल्लवी- हाँ अभिषेक, रेशमा सही कह रही है।

अभिषेक- तुम लोगों को क्या लगता है कि मुझे क्या करना चाहिए।

पल्लवी- देखो अभिषेक मैं जो कहने जा रही हूँ तुम उसका बुरा मत मानना। मेरे हिसाब से खुशबू को भगा कर शादी करना उचित नहीं है। खुशबू भले ही भागने की बात कर रही है, लेकिन उसपर अभी इश्क का भूत सवार है। लेकिन जब इश्क का भूत उसके सिर से उतरेगा तो उसे भी अपने फैसले पर पछताना पड़ेगा। और एक माँ बाप कभी भी अपने बच्चों के लिए गलत फैसला नहीं लेते। उन्होंने हमसे ज्यादा दुनिया देखी है।

रेशमा- पल्लवी सही कह रही है अभिषेक। उसका छोड़ों। जितना तुम्हारे घरवालों को जानती हूँ उसके हिसाब से तो तुम्हारे घरवाले खुद नहीं चाहेंगे कि तुम किसी की बेटी को भगाकर उससे शादी करो। और वैसे भी जो शादी माँ बाप की मरजी के बगेर की जाए वो शादी शादी नहीं होती दोस्त।

मैं रेशमा और पल्लवी की बात सुन रहा था। उनकी बात खत्म होने के बाद अभिषेक ने मेरी तरफ देखा। तो मैं उसकी तरफ देखने लगा। थोड़ी देर मुझे देखने के बाद अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- प्रभु। आप भी अपने ज्ञान से मेरे मार्गदर्शन कीजिए।

मैं- अबे यहाँ मेरे खुद के लौंड़े लगे हुए हैं। मेरा ज्ञान इस समय मेरी ही ले रहा है। सारे मार्ग बंद हो चुके हैं। मैं तेरा मार्गदर्शन क्या करूँगा। रेशमा और पल्लवी जो कह रही हैं मुझे भी वही सही लग रहा है।

अभी हम बात कर ही रहे थे कि खुशबू का फोन मेरे मोबाइल पर आया। मैंने सभी को शांत रहने के लिए कहा और फोन उठाया।

मैं-हाँ खुशबू बोलो क्या हुआ।

खुशबू- तुम लोग आए थे तो क्या बात हुई पापा से। पापा मान गए हैं न शादी के लिए। और अभिषेक कहाँ है उसका फोन क्यों बंद आ रहा है।

मैं- वो क्या है न तुम्हारे घर का पानी पीकर अभिषेक का पेट खराब हो गया है तो वो इस समय गुसलखाने में है। उसको मोबाइल की बैंटरी खत्म हो गई है तो उसका मोबाइल बंद हो गया है। जो भी बात हुई है तुम्हारे पापा से कोचिंग में मिलकर बात करते हैं न।

इतना कहकर मैंने फोन काट दिया तो अभिषेक, रेशमा और पल्लवी मुझे देखने लगे। मैंने भी उनको देखते हुए कहा।

मै- ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे। मैंने कुछ गलत कह दिया क्या।

अभिषेक- साले इससे अच्छा बहाना नहीं मिला तुझे बनाने के लिए। उसके घर का पानी हाहाहाहा।

अभिषेक मेरी बात सुनकर हँसने लगा। ऐसे ही बात करते हुए कोचिंग का समय हो गया। पल्लवी ने महेश को फोन करके सब बता दिया। रेशमा ने रश्मि को फोन करके बता दिया। वो दोनों भी बहुत दुःखी हुए। हम लोगों के मना करने के बाद भी अभिषेक कोचिंग जाने के लिए तैयार हो गया। जब हम लोग कोचिंग पहुँचे तो खुशबू वहाँ पहले से ही मौजूद थी। ये सब बात कोचिंग में करना सही नहीं था तो हम चारों खुशबू के साथ एक पार्क में चले गए। वहाँ पर एक खाली जगह देखकर बैठ गए। बैठने के बाद खुशबू ने कहा।

खुशबू- अब तुम्हारी तबीयत कैसी है अभिषेक। पापा के पास गए थे तुम दोनों तो क्या बात हुई पापा से। पापा से पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं तुमसे पूछूँ। बताओ न अभिषेक क्या बात हुई।

खुशबू की बात सुनकर अभिषेक हम तीनों की तरफ देखने लगा। हम तीनों ने उसे इशारा किया कि जो बात है साफ साफ बोलने के लिए। अभिषेक ने एक गहरी साँस ली और खुशबू का हाथ पकड़कर अपने हाथ में ले लिया और उससे कहा।

अभिषेक- मेरी तबीयत अब बिलकुल ठीक है। तुम्हारे पापा से मेरी बात हो गई है। इसलिए मैं तुमसे जो कहने जा रहा हूँ उसको ध्यान से सुनना और समझने की कोशिश करना।

खुशबू- क्या बात है अभिषेक तुम्हारी बात से मुझे कुछ गलत लग रहा है। मेरा दिल बैठा जा रहा है। बताओ न क्या बात है।

अभिषेक- खुशबू। बात ये है कि मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। तुम्हारे पापा जिस लड़के से शादी करने के लिए कह रहे हैं तुम उस लड़के के लिए हाँ बोल दो।

मेरी बात सुनकर खुशबू मुझे एक टक देखने लगी। उसकी आँखों में आसू आ गए। उसने टूटे फूटे स्वर में मुझसे कहा।

खुशबू- ये तुम्हारे बोल नहीं हैं अभिषेक। ये पापा के शब्द हैं जिन्हें तुम बोल रहे हो। और तुम्हें लगता है कि मैं मान जाऊँगी।

अभिषेक- पहले मेरी बात तो सुन लो फिर किसी निर्णय पर पहुँचना।
खुशबू- नहीं सुनना मुझे कोई भी बात तुम्हारी। तुम वहाँ मेरे साथ अपना रिश्ता जोड़ने गए थे या रिश्ता तोड़ने गए थे।

अभिषेक- तुम्हें मेरी कसम है खुशबू। एक बार मेरी पूरी बात तो सुन लो।

खुशबू- हाँ सुनाओ। क्या सुनाना चाहते हो तुम।

अभिषेक- तुम्हें क्या लगता है खुशबू कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता। या मैं तुमसे दूर होकर खुश रह पाऊँगा। मैं तुमसे दूर रहकर खुश नहीं रह पाऊँगा। मैंने तुम्हारे पापा से बात की थी। लेकिन तुम्हारे पापा की बात भी अपनी जगह पर सही है। तुम्हारा भविष्य मेरे साथ नहीं तुम्हारे पापा के पसंद किये हुए रिश्ते में ही खुशहाल रहेगा।

खुशबू- मेरा भविष्य किसके साथ खुशहाल रहेगा ये मैं अच्छी तरह से जानती हूँ। मेरा भविष्य तुम्हारे साथ ज्यादा खुशहाल रहेगा। क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ।

मै- नहीं खुशबू तुम गलत बोल रही हो। आने वाली जिंदगी में प्यार के अलावा बहुत सी चीजों की जरूरत पड़ती है। प्यार से पेट नहीं भरता खुशबू। माना कि हम दोनों ने जज्बात में बहकर शादी कर ली उसके बाद क्या। मेरे पास अभी कोई रोजगार नहीं है। और ये भी जरूरी नहीं की मेरी नौकरी लगे ही। क्योकि किस्मत किसकी कब पलट जाए कोई कह नहीं सकता। मैं तुमसे इस भरोसे शादी कर लूँ कि कल को मेरी नौकरी लग जाएगी। लेकिन अगर नहीं लगी तो फिर क्या होगा।

खुशबू- मुझे उससे कोई मतलब नहीं है। मैं तुम्हारे प्यार के सहारे पूरी जिंदगी गुजार लूँगी। मुझे तुम मिल जाओ और मुझे कुछ नहीं चाहिए।

अभिषेक- ये सब बातें किताबों मे अच्छी लगती हैं खुशबू। जबकि हकीकत की धरातल पर ये सब बातें वीरान नजर आती हैं। मैं पल भर के उन्माद में तुम्हारी सारी जिंदगी को दुःखों से नहीं भरना चाहता। अच्छा एक बात बताओ। तुम मुझसे ज्यादा प्यार करती हो या अपने मम्मी पापा से।

खुशबू- ये कैसा सवाल है अभिषेक। जाहिर सी बात है तुमसे प्यार करती हूँ।

अभिषेक- क्यों। तुम्हारा साल भर का प्यार तुम्हारे मम्मी पापा के प्यार से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया। एक बात जान लो खुशबू कि एक माता पिता से ज्यादा हमें कोई दूसरा प्यार नहीं कर सकता है। तुम मुझे और नयन को ही ले लो। हमारी दोस्ती की मिसाल दी जाती है हमारे स्कूल में। हम दोनों भी एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। लेकिन हम दोनों का प्यार हमारे माँ बाप से प्यार की तुलना में बहुत कम है। वो इसलिए कि वो हमारे जन्मदाता हैं। उनका अंश हमारे शरीर में है। उन्होंने बचपन से लेकर आज तक हमारे हर सुख दुःख में हमारा साथ दिया है।

खुशबू- लेकिन मेरी कोई इच्छा नहीं है मेरी कोई भावना नहीं है। वो मेरी भावनाओं को क्यों नहीं समझ रहे हैं फिर

मैं- अगर तुम अपने माँ बाप पर ये इल्जाम लगा रही हो कि तुम्हारे माँ बाप तुम्हारी इच्छा को नहीं समझ रहे हैं तुम्हारी भावनाओं को नहीं समझ रहे हैं। तो इस लिहाज से देखा जाए तो तुम भी तो उनकी इच्छा और भावनाओं को नहीं समझ रही हो। शायद तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारे माँ बाप तुम्हें कितना प्यार करते हैं। वो मैंने और नयन ने देखा। तुमने इसलिए नहीं देखा कि तुमने उनकी बात ही सुनने की कोशिश नहीं की। वो तो यहाँ तक बोल रहे हैं कि तुम चाहो तो भाग कर शादी कर सकते हो। वो तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती नहीं करेंगे।

खुशबू- ये जबरदस्ती नहीं है तो और क्या है। मैं तुमसे प्यार करती हूँ और पापा मेरी शादी कहीं और करवा रहे हैं। और अगर पापा तैयार हैं तो भाग कर शादी करने में क्या बुराई है।

अभिषेक- भाग कर शादी करने के लिए मैं तैयार नहीं हूँ खुशबू। माँ बाप के अरमानों की अर्थी पर मुझे अपने सपनों का महल नहीं खड़ा करना खुशबू। एक बात जान लो खुशबू कि अगर हमारे कारण हमारे माँ बाप की आँखों में आँसू आ जाए और उन्हें हमारी वजह से रोना पड़े तो ऐसे जीवन का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने बचपन से लेकर अभी तक हमारी हर इच्छा को पूरा किया है। तो क्या उनका इतना भी हक नहीं है कि वो अपनी पसंद से अपने बच्चों की शादी कर करें। और जिसे तुम जबरदस्ती कह रही हो। यही उनका तुम्हारे लिए प्यार है। वही तुम्हारे लिए उनकी चिंता है खुशबू। आज मैंने तुम्हारे साथ भाग कर शादी कर ली। तो हमारे इस एक निर्णय की वजह से कितनी मासूम बच्चियाँ गर्भ में ही मार दी जाएँगी, क्योंकि माँ बाप को डर सताने लगेगा कि उनकी बेटी भी बड़ी होने के बाद उनकी इज्जत को नीलाम करते हुए, उनके सपनों को रौंदते हुए किसी के साथ भाग जाएगी। क्या तुम यही चाहती हो कि मैं जीवन भर आपने कंधे पर तुम्हारे माता पिता के अरमानों की अर्थी और भविष्य में होने वाली उन मासूम बच्चियों की हत्याओं का बोझ लेकर जिऊँ।

ये मुझसे नहीं होगा खुशबू। प्यार हमेशा देता ही नहीं है। लेता भी है। जो प्यार करते हैं जरूरी नहीं कि सबको उनका प्यार मिले ही। प्यार कभी कभी कुरबानी भी माँगता है। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ मेरे लिए तुमसे यह सब कुछ कहना इतना आसान नहीं है। लेकिन तुम्हारे मम्मी पापा के प्यार के आगे मेरा प्यार कुछ भी नहीं है। और अगर तुमने मुझसे सच्चा प्यार किया है और तुम्हारे दिल में अगर मेरे लिए तनिक भी इज्जत हो तो मुझे भूल जाओ और अपने पापा की बात मान लो और बिना कुछ उलटी-सीधी हरकत किए उनकी पसंद के लड़के से शादी कर लो।

इतना कहकर अभिषेक ने अपनी बात समाप्त की। खुशबू की आँखों से झर झर आँसू बहने लगे। इसके आगे वो एक शब्द नहीं बोली और अपनी जगह से उठी और रोते हुए पार्क से बाहर निकल गई। हम सभी ने उसे रोकना चाहा लेकिन वो रुकी नहीं। उसके जाने के बाद अभिषेक भी रोने लगा। अभिषेक ने अपने आपको भूलने की बात खुशबू से कैसे कही ये बस अभिषेक ही जानता था। तीनों ने मिलकर अभिषेक शांत कराया। कुछ देर में जब अभिषेक सामान्य हुआ तो हम सभी पार्क से बाहर निकल आए। कोचिंग का समय समाप्त हो गया था तो मैं और अभिषेक पल्लवी से विदा लेकर कमरे की तरफ चल पड़े।
आज का पूरा दिन अच्छा नहीं गया था। अभिषेक पूरी तरह से टूट गया था। मैं उसे किसी तरह शांत रहने के लिए समझा रहा था, लेकिन जिसकी खुद की लगी पड़ी हो वो दूसरे को सांत्त्वना दूँ भी तो कैसे। मैंने आज रात के खाने के लिए तहड़ी डाली। मैंने अभिषेक को किसी तरह से थोड़ा बहुत खिलाया और खुद खाकर हम दोनों अपने बिस्तर पर लेट गए। थोड़ी देर बाद ही हम दोनों को नींद आ गई।

अगले पूरा दिन अभिषेक शांत और गमगीन ही रहा। संजू का फोन भी आया, लेकिन तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर मैंने उसकी बात टरका दी। मेरे दिमाग में बस यही बातें चल रही थी कि आखिर हम दोनों को साथ क्या हो रहा है। हम दोनों लगभग एक ही गम से गुजर रहे थे। प्यार ऐसा तो नहीं होता। क्यों नहीं होता शायद ये भी प्यार का एक रूप है। शाम को महेश भी आ गया। उसने भी अभिषेक को दिलाशा दिया फिर हम सब बैठे बातें करने लगे। बात करते करते महेश ने अनामिका का मामला छेड़ दिया।

महेश- मुझे तो लगता है कि उस बच्चे का बाप संजू ही होगा उस साले को जब अनामिका की सच्चाई के बारे में पता चला होगा तो वह उसको छोड़ना चाहता होगा और उसे छोड़ने के लिए यह पाप का घड़ा तुझपर फोड़ना चाहता है। लेकिन जहां तक तुम बता रहे हो कि संजू ने भी जब उसके साथ सेक्स किया है तो कंडोम का इस्तेमाल किया है। तो ये उसका बच्चा हो ये संभव भी नहीं हो सकता। ऊपर से अनामिका डीएनए जाँच के लिए भी तैयार है।

मैं- यह बात तो तुम सही बोल रहे हो।

महेश- कहीँ ऐसा तो नहीं है कि संजू तुम सबको चूतिया बना रहा है। ये बच्चा डेढ़ महीने का न होकर 5-6 महीने का हो।

अभिषेक- अबे चूतिया तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। अगर बच्चा 5 से 6 महीने का होता तो अनामिका का बंपर अच्छी तरह से देखा जा सकता था। 1 मिनट रुक ऐसा करते हैं कि हम मेडिकल रिपोर्ट संजू से माँग लेते हैं।

इतना कहकर अभिषेक ने संजू को फोन किया और अनामिका की मेडिकल रिपोर्ट को व्हाट्सएप करने को बोला। थोड़ी देर में ही मेडिकल रिपोर्ट अभिषेक के व्हाट्सअप नंबर पर आ गई। महेश ने रिपोर्ट को ध्यान से देखने के बाद कहा।

महेश- भाई इस रिपोर्ट के अनुसार बच्चा सच में डेढ़ महीनें का ही लग रहा है।

हम तीनों व्हाट्सएप पर रिपोर्ट देखने के बाद एकदम से मौन हो गए थे हमारी समझ में नहीं आ रहा था कि करें तो क्या करें। मैं कुछ सोच ही रहा था की अभिषेक अचानक से बोल पड़ा।

अभिषेक- एक मिनट कहीं ऐसा तो नहीं है कि अनामिका अभी भी उसके संपर्क में हो।

मैं और महेश- किससे संपर्क में।

अभिषेक- मैं उसी साले के बारे में बोल रहा हूं जिसके कारण मुझे अनामिका की सच्चाई पता चली थी।

मैं- कहीं तुम उस मकान मालिक के लड़के की बात तो नहीं कर रहे हो।

अभिषेक- हाँ मैं उसकी ही बात कर रहा हूँ। अनामिका चित्रकूट में जिस इमारत में रहती थी उसके मालिक का बेटा आदित्य। साला एक नंबर का लौंडिया बाज इंसान है। वो उस इमारत में रहने वाली हर लड़कियों को बुरी नजर से देखता था। और अधिकतर लड़कियों से अपना टांका फंसा रखा था और अनामिका भी उसमे से एक थी।

महेश- तुझे कैसे पता उसके चरित्र के बारे में इतना।

अभिषेक- वो क्या है न। जहाँ मैं रहता था। वो इमारत उसी सोसाइटी के पास में है। चित्रकूट से आने के बाद एक दिन बातों बातों में मेरे मम्मी की मौसी के लड़के (अविनाश) ने उसके बारे में बताया था।

महेश- अबे साले। अगर वो इतना ठरकी है तो हो सकता है कि वो ही इस बच्चे का बाप हो।

मैं- लेकिन अब तो अनामिका अयोध्या में है। तो उससे कैसे मुलाकात होती होगी।

अभिषेक- अरे उसके पापा का आयात-निर्यात का व्यापार करते हैं तो हो सकता है उसी सिलसिले में वो अयोध्या भी जाता हो और अनामिका के संपर्क में हो।

महेश- हम अभी केवल कयास लगा सकते हैं कि ऐसा हो सकता है। सच्चाई तो उससे बात करने के बाद ही पता चलेगी।

मैं- तो पता करो न। निकालो उसका नम्बर और फोन करते हैं उसको।

अभिषेक- लेकिन उसका नम्बर मेरे पास नहीं है।

महेश- तो अपने भाई से फोन करके ले लो। जिसने तुम्हें उसके बारे में जानकारी दी थी।

महेश की बात सुनकर अभिषेक ने अपने मम्मी की मौसी के लड़के को फोन किया और कहा।

अविनाश- हाँ अभिषेक कैसे हो भाई। बड़े दिन बाद याद किया।

अभिषेक- मामा जी। वो आदित्य का नम्बर चाहिए थी मुझे।

अविनाश- उस लौंडियाबाज से तुझे क्या काम पड़ गया है। जो तुझे उसका नम्बर चाहिए।

अभिषेक- बात ये है मामा जी कि मेरे एक दोस्त को उससे बहुत जरूरी काम है। मुझसे माँग रहा था। मेरे पास उसका नम्बर नहीं है। इसलिए मैंने आपको फोन किया।

अविनाश- उसका नम्बर मेरे पास भी नहीं है। मैं अभी घर से बाहर हूँ। कल सुबह तक तुझे उसका नम्बर व्हाट्सअप करता हूँ।

अभिषेक- ठीक है मामा जी। फोन रखता हूँ मैं।

इतना कहकर अभिषेक ने फोन रख दिया। तभी मेरे नम्बर पर संजू का फोन आया।

मैं- हाँ भाई साहब कहिए। कैसे याद किया।

संजू- मैं ये कह रहा था कि कल मिलकर थोड़ा बात करते।

मैं- हाँ भाई क्यों नहीं कल ................. इस पते पर सुबह आ जाना।

इतना कहकर मैंने फोन रख दिया।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Awesome update
 

Kingfisher

💞 soft hearted person 💞
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चूंकि हम पूरी कहानी लिख चुके हैं तो अब कहानी में बदलाव संभव ही नहीं है। फिर भी हम आपके जज्बातों की कद्र करते हैं।।
:dubmar:to etne din hum aise hi chilla rahe the ...acha tabhi aap hamari ek bhi request nhi mani
Ab hum demand nhi karenge ek sidha sadha review chap dende jaisa aap mere story par karti ho ek choda sa nanha sa munha sa rebu .,.....jai hind jai kisan
 
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Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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बावनवाँ भाग


सुबह 10 बजे के करीब संजू अपनी कार से हमारे कमरे पर आया। जिसका पता मैंने कल उसे दिया था। कमरे पर आने के बाद संजू को मैंने महेश से मिलवाया। उससे मिलने के बाद संजू ने कहा।

संजू- आगे का क्या प्लान है। क्या करना है आगे कुछ सोचा है इसके बारे में।

अभिषेक- हमारे दिमाग में एक बात आई है। वो बच्चा नयन का नहीं है। और तुम्हारे कहने के मुताबिक तुम्हारा भी नहीं है, तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि वो बच्चा आदित्य का हो।

संजू- कौन आदित्य।

अभिषेक- वही आदित्य जिसके बारे में तुम्हें बताया था। चित्रकूट में अमानिका जिस मकान में रहती थी। उसके मालिक का वेटा। हो सकता है उसके अभी भी अनामिका के साथ चक्कर चल रहा हो।

संजू- तुम इतने दावे के साथ कैसे कह सकते हो कि अनामिका का चक्कर अभी भी उस लड़के का साथ में है।

अभिषेक- दावा नहीं है भाई। बस एक शक है मन में।

संजू- तो उससे भी पूछ कर देख लेते हैं। फोन लगाकर बात करो उससे और मिलने के लिए बोलो।

अभिषेक- उसका नम्बर अभी तो नहीं है मेरे पास। रुको पहले नम्बर तो मिल जाए।

उसके बाद अभिषेक ने अविनाश के पास फोन लगा दिया। फोन उठाने के बाद उन्होंने कहा।

अविनाश- बस अभिषेक पाँच मिनट में आदित्य का नम्बर दे रहा हूँ तुम्हें।

अभिषेक- ठीक है मामा जी। थोड़ा जल्दी करिए।

उसके बाद अभिषेक ने फोन रख दिया तो मैंने संजू से पूछा।

मैं- अनामिका से बात हुई। डीएनए जाँच के लिए क्या बोली वो।

संजू- उससे बात हो गई। लेकिन उसकी जिद वही है कि वो डीएनए जाँच तो करवाएगी, लेकिन उसके पहले मेरे घरवालों से मिलेगी। मैंने किसी तरह उसे रोक रखा है बहाना बनाकर।

तब तक अभिषेक के मामा ने आदित्य का नम्बर अभिषेक को भेज दिया था। अभिषेक ने जब आदित्य का नम्बर लगाया तो ट्रू कॉलर पर उसका नाम लिखकर आया जिसे देखकर हम सब के चेहरे पर मुस्कान आ गई। किसी ने उसका नाम लौंडियाबाज आदित्य के नाम से सुरक्षित किया था अपने मोबाइल पर जिसे ट्रू कॉलर ने अपने डाटाबेस में इसी नाम से सुरक्षित कर लिया था। और वही नाम अभिषेक के मोबाइल की स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था। घंटी बंद होते होते उधर को फोन उठा लिया गया। अभिषेक ने फोन स्पीकर पर कर दिया। आदित्य ने कहा।

आदित्य- हेलो।

अभिषेक- हाय। क्या आप आदित्य बोल रहे हैं।

आदित्य- हाँ। मैं आदित्य। आप कौन हैं।

अभिषेक- मै अभिषेक बोल रहा हूँ।

आदित्य- कौन अभिषेक।

अभिषेक- भूल गया साले। अनामिका को तो जाना है न। मैं वही अभिषेक हूँ। कुछ याद आया साले।

आदित्य- अभिषेक भो...........ले तू। साले तूने मुझे फोन क्यों किया। फोन रख।

अभिषेक- अबे मुझे तुझसे कुछ जरूरी बात करनी है।

आदित्य- लेकिन मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है। अब फोन रख।

अभिषेक- अबे बात तो सुन। वो अनामिका को जुड़ी बात है। अगर मेरी बात नहीं सुनी तूने तो तेरे लौड़े लग जाएँगे। फिर मत कहना कि मैंने सचेत नहीं किया तुझे।

अभिषेक की बात सुनकर आदित्य सचेत हो गया। उसने थोड़ी देर सोचने के बाद कहा।

आदित्य- बोल क्या बात करनी है तुझे।

अभिषेक- साले। अनामिका को गर्भवती करने के बाद पूछ रहा है कि क्या बात करनी है तुझसे।

आदित्य- क्या कहा। जरा फिर से कहना।

अभिषेक- मैंने कहा कि अनामिका गर्भवती है और उसके पेट में तेरा बच्चा है।

अभिषेक की बात सुनकर आदित्य भौचक्का रह गया। उसने कुछ देर बाद जवाब दिया।

आदित्य- ये क्या बोल रहा है बे। तेरे दिमाग तो ठीक है ना। जब से वो यहाँ गई है मैं मिला ही नहीं हूँ उससे तो फिर मैं उसके बच्चे का बाप कैसे हो गया।

उसकी बात सुनकर हम लोग फिर से निराश हो गए। क्योकि उसकी बातों में सच्चाई हो सकती थी। फिर भी अभिषेक ने अंधेरे में तीर छोड़ते हुए कहा।

अभिषेक- झूठ मत बोल। मैंने खुद तुझे तीन महीने पहले अनामिका के साथ देखा था अयोध्या मैं जिसका सबूत मेरे पास है। मैंने तुम दोनों की फोटो खीच ली थी। तो अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं है। सच बता दे नहीं तो फँसेगा तो तू भी।

अभिषेक का अंधेरे में चलाया गया तीर सही निशाने पर लगा और कुछ देर सोचने के बाद आदित्य ने कहा।

आदित्य- मेरा अभी भी अनामिका के साथ चक्कर है। मैं अपने व्यापार के सिलसिले में अयोध्या आता जाता रहता हूँ तो अनामिका के साथ सेक्स होता रहता था मेरा। लेकिन ढाई महीने पहले मैं जब उससे मिला और सेक्स किया तो साली कमीनी बोल रही थी कि मुझसे सेक्स करने में उसे अब मजा नहीं आता। उसने बताया कि उसे कोई और लड़का मिल गया है। जैसे हम लोग लड़कियों को बोलते हैं न फ्रेश माल तो उसे भी कोई नया लड़का मिल गया था। यो ढाई महीने पहले की बात है। उसके बाद मैं अनामिका से कभी नहीं मिला और न ही आज तक उसका फोन भी मेरे पास नहीं आया। साली बड़ी कुत्ती चीज है अनामिका।

आदित्य की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे। अभिषेक ने आदित्य से कहा।

अभिषेक- क्यों बे साले। तुझे अब समझ में आया कि वो कुत्ती चीज है। जब उसे तुझसे ज्यादा अच्छा लड़का मिल गया तब। इसके पहले तो तुझे वो बहुत अच्छी लगती थी। मुझे तेरी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा है।

आदित्य- तुझे विश्वास करना है तो कर और न करना है तो न कर। जो सच है वो मैंने तुझे बता दिया।

अभिषेक- मुझे मिलना है तुझसे। तू चित्रकूट में हो तो मैं आऊँ यहाँ।

आदित्य- मैं क्यों मिलूँ तुझसे।

अभिषेक- देख भाई। मैं तेरे फायदे के लिए ही तुझसे मिलना चाहता हूँ। अनामिका के पास मेडिकल रिपोर्ट है और उसके हिसाब से वो गर्भवती है। वो रिपोर्ट किसी आम अस्पताल की नहीं है। अयोध्या शहर के जाने माने अस्पताल की है। लेकिन उसके बावजूद भी मेरे एक मित्र को लगता है कि वो रिपोर्ट नकली है। अगर मेरे मित्र की बात में जरा सी भी सच्चाई है। तो अब तू खुद सोच अगर वो इतने बड़े अस्पताल से नकली रिपोर्ट बनवा सकती है तो तू सोच कि वो कितनी पहँची हुई चीज है। साथ ही वो डीएनए जाँच के लिए भी तैयार है। तो वो डीएनए रिपोर्ट भी बदलवा सकती है। इसी सिलसिले में तुझसे मिलकर बात करनी है मुझे। और हाँ इसका जिक्र तुम अनामिका से मत करना। क्योंकि शायद उसका ध्यान तुझपर नहीं गया है अभी। वो तो मेरे बेरोजगार दोस्त को अपने बच्चे का बाप बता रही है। तू तो पैसे वाला है और अपने माँ बाप का इकलौता वेटा है। तो तेरा नाम ध्यान में आते ही वो तुझे अपने बच्चे का बाप बना सकती है।

ये बात अभिषेक ने उसे डराने के लिए कुछ झूठ कुछ सच मिलाकर आदित्य को बता दी। जिसका कुछ सकारात्मक असर आदित्य पर हुआ। वह कुछ देर सोचता हुआ बोला।

आदित्य- मैं जान सकता हूँ कि तू मेरे ऊपर इतना मेहरबान क्यों है।

अभिषेक- देख मैं जानता हूँ कि तू लौंडियाबाज लड़का है, लेकिन तुमने ही मुझे अनामिका की सच्चाई बताई थी। उसका असली चेहरा मेरे सामने लाया था। इसी कारण मैं तुझे बता रहा हूँ।

आदित्य- ठीक है मैं मिलूँगा तुझसे, लेकिन आज नहीं कल। मैं किसी काम के सिलसिले में प्रतापगढ़ आया हूँ एक हफ्ते के लिए। अभी में कुछ दिन यहीं रहूँगा तो कल मिलते हैं। मैं तुझे होटल का पता भेज रहा हूँ।

इतना कहकर आदित्य ने फोन वापस रख दिया। इधर अभिषेक ने जब फोन रखा तो हम सब उसे देखने लगे। महेश ने उसे देखते हुए कहा।

महेश- अबे ये सब क्या था। तू झूठ कब से बोलने लगा बे। उसे झूठ मूठ की ऐसी घुट्टी पिलाई कि वो मिलने के लिए राजी हो गया।

अभिषेक- भले ही सबकुछ झूठ बोला है मैंने लेकिन तेरा संदेह करना तो सही बताया मैंने। कल मिलकर बात करते हैं उससे। शायद कोई और बात पता चल जाए।

संजू- धन्यवाद भाई मेरी इतनी मदद करने के लिए।

अभिषेक- तुम इस गलतफहमी में मत रहो कि मैं तुम्हारी मदद कर रहा हूँ। वो तुमने मेरे दोस्त के ऊपर जो इल्जाम लगाया है। मैं उसे गलत साबित करने के लिए ये सब कर रहा हूँ। ये बात सही है कि ये बच्चा उसका नहीं है, लेकिन फिर भी मैं .0001 फीसदी भी खतरा नहीं होने देने चाहता।

संजू- जो भी हो। इसी बहाने ही सही तुम मेरी मदद कर रहे हो।

अभिषेक- कल सुबह चलने के लिए तैयार रहना।

उसके बाद हम चारों बैठकर इधर उधर की बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद संजू अपने घर चल गया। कुछ देर बैठा रहने के बाद महेश ने कहा।

महेश- अभिषेक। जरा एक बार अनामिका की मेडिकल रिपोर्ट तो दिखा दोबारा।

अभिषेक ने वो मेडिकल रिपोर्ट दोबारा देखने लगा। महेश बहुत बारीकी से उसका निरीक्षण कर रहा था। साहसा उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। उसकी मुस्कान देखकर हम दोनों सोच में पड़ गए। महेश ने हम दोनों को देखते हुए कहा।

महेश- अबे मुझे लग रहा है कि ये रिपोर्ट ही नकली है।

मैं- वो कैसे।

महेश- ये देख इस रिपोर्ट में न तो अस्पताल की मुहर है और न ही जाँच करने वाले डॉ. के हस्ताक्षर।

अभिषेक- हाँ यार इसकी ओर तो हमने ध्यान ही नहीं दिया था।

मैं- तो फिर कैसा करना है अब आगे।

महेश- कल पहले उस लौंडियाबाज से मिलते हैं। फिर देखते हैं क्या करना है आगे।

उसके बाद हमने खाना खाया और बिस्तर पर बैठ गए। अभिषेक अब कुछ दुःखी लग रहा था। महेश ने उसे दिलासा देते हुए कहा।

महेश- ये क्या है यार अभिषेक। कब तक ऐसे उदास रहेगा। मैं कहता हूँ कि एक बार तुझे फिर से खुशबू के पापा से बात करनी चाहिए। तुझे उनको समझाना चाहिए। एक बार उनको कह तो सही कि तुझे कुछ समय की मोहतल तो दें।

अभिषेक- समय हाथ से निकल चुका है भाई। उन्हें मैं अच्छा, संस्कारी और नेक दिखाई देता हूँ। लेकिन खुशबू के काबिल नहीं दिखाई देता। उन्होंने मुझे अपनी बातों में ऐसे फँसाया कि मुझे कुछ कहने का मौका नहीं मिला। मैंने खुशबू के साथ बहुत गलत किया। लेकिन उसके माँ-बाप को भी दुःखी नहीं कर सकता।

महेश- तू खुद दुःखी रह सकता है। अबे अगर तेरी जगह कोई और लड़का होता तो अब तक खुशबू को भगा ले जाता। लेकिन मैं जानता हूँ कि तू ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि सब संस्कारों का प्रभाव है। फिर भी एक बार उनसे बात तो कर ही सकते हैं।

अभिषेक- नहीं यार अब मैं खुशबू का सामना नहीं कर पाऊँगा। उसने अभी तक मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की मेरा फोन भी नहीं उठा रही है। मुझसे बहुत नाराज है वो। वो भी अपनी जगह सही है भाई।

महेश- तू कुछ नहीं करेगा। लेकिन मैं तो कर सकता हूँ न कुछ तेरे लिए। मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा तुम दोनों को मिलाने के लिए।

अभिषेक- क्या करने वाला है तू। देख महेश तू कुछ उल्टा सीधा मत करना। नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। समझ लेना।

महेश- वैसे भी तुझसे बुरा कोई नहीं है इस समय। तू मेरा भरोसा कर भाई। मैं ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करूँगा जिससे तुझे उसके माँ बाप के सामने शर्मिंदा होना पड़े, लेकिन तू मुझे रोकना मत कुछ करने से। मैं जो कुछ करने वाला हूँ उससे मुझे पूरी उम्मीद है कि शायद बात बन जाए। मुझे खुशबू का नम्बर दे और अपनी गाड़ी की चाबी दे।

अभिषेक- लेकिन तू करने क्या वाला है। कुछ बता तो।

महेश- अभी तो कुछ भी नहीं बताऊँगा।

अभिषेक ने महेश को खुशबू का नम्बर दिया और अपने गाड़ी की चाबी दे दी। महेश गाड़ी लेकर चला गया। कुछ देर बाद महेश ने खुशबू को फोन किया।

महेश- खुशबू मैं महेश। अभिषेक का दोस्त। मुझे तुमसे मिलना और कुछ जरूरी बात करनी है।

खुशबू- मैं ....................... जगह पर 30 मिनट में आ रही हूँ।

उधर हम लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि महेश करने क्या वाला है। थोड़ी देर बाद कोचिंग का समय हो गया तो हम दोनों कोचिंग चले गए। कोचिंग बस 15 दिनों के लिए और बाकी थी। मेरे उस दिन की बात से महिमा कोचिंग नहीं आ रही थी। तीन दिन से खुशबू भी कोचिंग नहीं आ रही थी। थोड़ी देर बाद पल्लवी और रेशमा भी आ गए। हम चारों ने थोड़ी देर बात की और कक्षा में चले गए। हमने अपनी कक्षा पूरी की और वापस अपने कमरे में आ गए। महेश अभी तक नहीं आया था। रात को लगभग 8 बजे महेश वापस कमरे पर आया। उसे देखते ही मैंने उससे पूछा।

मैं- क्यों बे। कहाँ था इतनी देर। क्या कर रहा था। कुछ बात बनी।

महेश- कुछ नहीं हुआ भाई। खुशबू इससे बहुत नाराज है। उसने तो मुझसे भी मिलने से मना कर दिया।

अभिषेक- तो फिर तू इतनी देर तक क्या कर रहा था। कहाँ गया था तू।

महेश- क्या कर रहा था क्या। जब खुशबू ने मिलने से मना कर दिया तो मैं कमरे पर आकर क्या करता। तुम लोग तो कोचिंग में थे। तो मैंने सोचा की तब तक शहर घूम लूँ और रमेश चाचा से मिल लूँ तो उसी में इतनी देर लग गई। अब तुम दोनों अपनी बकचोदी बंद करो और खाने की तैयारी करो। मुझे भूख लग रही है।

मैं- साले तू अभी भी भुक्खड़ ही है। अभी तक नहीं बदला।

मेरी बात पर हम तीनों हँसने लगे। फिर हम तीनों मिलकर खाना बनाने लगे। रात को नौ बजे तक अभिषेक के मोबाइल पर उसके घर से फोन आया। फोन उसकी माँ का था।

अभिषेक- प्रमाण मम्मी। कैसी हैं आप।

अ.मम्मी- मैं बहुत अच्छी हूँ। तुम अपना बताओ।

अभिषेक- मैं भी बहुत अच्छा हूँ मम्मी।

अ.मम्मी- क्या बात है अभिषेक तुम घर क्यों नहीं आ रहे हो। तुम्हारी परीक्षा के भी 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तुम घर नहीं आए। हम लोगों से नाराज हो क्या तुम बेटा।

अभिषेक- कैसी बातें कर रही हैं आप मम्मी। मैं काहे नाराज होऊँगा आप सभी से।

अ.मम्मी- तो फिर कल घर आ जा बेटा। तेरी बहुत याद आती है। कितने दिन हो गए तुझे देखे हुए।

अभिषेक- मम्मी, मैं कल कुछ जरूरी काम के कारण प्रतापगढ़ जा रहा हूँ। मैं फिर आ जाऊँगा।

अ.मम्मी- कल मतलब कल। प्रतापगढ़ इसी रास्ते से होकर तो जाएगा। तो जाने से पहले घर होकर तब जाना।

अभिषेक- ठीक है मम्मी। जैसा आप कहें। प्रणाम मम्मी।

इतना कहकर अभिषेक ने फोन रख दिया। मैंने अभिषेक से कहा।

मैं- क्या हुआ अभिषेक। चाची जी क्या बोल रही थी।

अभिषेक- वो बोल रही हैं कि प्रतापगढ़ जाते हुए घर होकर तब जाऊँ।

मैं- ठीक तो है रास्ते में ही तो है। घर भी घूम लेंगे।

उसके बाद हम तीनों खाना खाकर सो गए। सुबह जल्दी उठकर में अपनी कोचिंग चला गया। कोचिंग में पढ़ाकर आने के बाद हम तीनों खाना खाकर संजू का इंतजार करने लगे। कुछ ही देर में संजू अपनी कार से आया। हम उसकी कार में बैठकर आदित्य से मिलने के लिए निकल पड़े। निकलने से पहले अभिषेक ने आदित्य से बात कर ली थी। रास्ते में अभिषेक ने संजू को थोड़ी देर के लिए गाड़ी अपने घर पर ले चलने के लिए बोल दिया था। 40 मिनट बाद ही हम चारों अभिषेक के घर पहँच गए। उस समय घर पर अभिषेक के पापा, अभिषेक की मम्मी और पायल थी। हम चारों ने अभिषेक के मम्मी, पापा का पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। फिर पायल खुशी खुशी हम तीनों के गले मिली। अभिषेक ने अपने मम्मी, पापा और पायल से संजू का परिचय करवाते हुए कहा।

अभिषेक- मम्मी, पापा और पायल ये हमारे दोस्त हैं संजू। सेना में नौकरी करते हैं और इन्ही के कुछ जरूरी काम के लिए हम चारों प्रतापगढ़ जा रहे हैं।

उसके बाद हम चारों कुछ देर बैठे रहे। पायल थोड़ी थोड़ी देर में चाय नाश्ता पानी हम लोगों को लाकर देती रही। थोड़ी देर बाद अभिषेक के पापा ने अभिषेक से कहा।

अ.पापा- क्या बात है अभिषेक- तुम कुछ परेशान से दिख रहे हो।

अभिषेक- (हड़बड़ाकर) नहीं पापा ऐसा तो कुछ भी नहीं है। मैं परेशान नहीं हूँ।

अ.पापा- तुम्हारे चेहरे की रौनक गायब है बेटा। तुम कुछ बदले बदले से लग रहे हो। तो इसलिए मैंने पूछ लिया।

अभिषेक- नहीं पापा वो बस थोड़ा सा दर्द है सर में और कुछ भी नहीं।

इसके बाद चाचा जी ने अभिषेक से कुछ नहीं पूछा। थोड़ी देर और बैठने के बाद हम सब अभिषेक के मम्मी पापा से विदा लेकर आदित्य से मिलने के लिए निकल पड़े। प्रतापगढ़ पहुँचने के बाद अभिषेक ने आदित्य को फोन किया तो उसने एक पार्क का पता बता दिया। हम वहाँ पहुँचे तो आदित्य वहीं पर खड़ा मिला। वो हमें पार्क के अंदर ले गया और एक खाली जगह पर हम सभी बैठ गए। बैठने के बाद अभिषेक ने मेरा, महेश और संजू का परिचय आदित्य से कराया। आदित्य ने कहा।

आदित्य- कल तुम बता रहे था कि अनामिका माँ बनने वाली है। क्या ये सही है।

अभिषेक- तुम्हें क्या लगता है हम इतनी दूर से तुम्हारे साथ मस्ती करने आए हैं। वो सब छोड़ो पहले तुम ये बताओ कि तुम जो बोल रहे थे कि अनामिका से आखिरी बार तुम ढाई महीने पहले मिले थे। ये सत्य है या तुम हमे चूतिया बना रहे हो।

आदित्य- मैं क्यों झूठ बोलूँगा तुमसे। और तुम ये मत समझना कि उसकी गर्भावस्था की खबर सुनकर मैं डर गया हूँ, इसलिए तुमसे मिलने के लिए तैयार हो गया। मेरा तुम लोगों से मिलने का दो कारण है। एक तो मेरा स्वभाव तुम्हें पता ही है। मैं किसी बंधन में बँधकर नहीं रहना चाहता। इसलिए मैं अनामिका के किसी भी पचड़े में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए तुमसे मिल रहा हूँ। और दूसरी बात ये है कि अनामिका की गर्भावस्था वाले मामले में मेरी रुचि बढ़ गई है। मैं भी देखना चाहता हूँ कि आखिर वो लौडा है कौन जिसने अनामिका जैसी शातिर लड़की को गर्भवती कर दिया। बाकी वो मेरी रत्ती भार झाँठ के बाल नहीं उखाड़ सकती और न ही तुम चारो मेरा कुछ बिगाड़ सकते हो।

अभिषेक- हो गई तुम्हारी बक बक। तो कुछ काम की बात करें।

आदित्य- हाँ क्यों नहीं। मैंने जो कुछ कल बताया था बो एकदम सही है। मैंने उसके साथ हमेशा कंडोम लगाकर सेक्स किया। फिर भी तुम बता रहे हो कि उसके बच्चे का बाप मैं हूँ। जरा मेडिकल रिपोर्ट तो दिखाओ।

उसके कहने के बाद अभिषेक ने उसको अपने मोबाइल पर मेडिकल रिपोर्ट दिखाई। वो बड़े ध्यान से मेडिकल रिपोर्ट देख रहा था। थोड़ी देर रिपोर्ट देखने के बाद उसने कहा।

आदित्य- मुझे लगता है ये रिपोर्ट नकली है, क्योंकि न इसमे डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं और न ही अस्पताल की मुहर। वो तुम सब को चूतिया बना रही है।

उसकी बात सुनकर हम सभी एक दूसरे को देखने लगे। थोड़ी देर बाद महेश ने कहा।

महेश- ये बात तो मैंने भी कल कही थी कि ये रिपोर्ट नकली है तो क्यों न इसका पता लगाने के लिए अयोध्या चला जाए।।

आदित्य- वहाँ जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसी अस्पताल में मेरे एक मित्र काम करता है। रुको तुम सब। उससे बात करके देखता हूँ।

उसके बाद आदित्य ने अपनी जेब से आईफोन निकाला और उसमे अपने दोस्त का नम्बर देखने लगा। फिर उसमें नम्बर मिलाया। उधर से एक लड़के ने फोन उठाया और बोला।

लड़का- अबे साले चिरकुट। आज याद आई मेरी। कैसा है तू भाई। बड़े दिन बाद याद किया तुमने मुझे।

आदित्य- मैं ठीक हूँ भाई। तुझे ते पता है कि मेरा काम कैसा है।

लड़का- हाँ पता है साले। तुझे लड़कियों से फुरसत मिलेगी तभी तो तू मुझे याद करेगा।

आदित्य- अच्छा ये सब छोड़। यहाँ कुछ समस्या आ गई है जिसमे मुझे तेरी एक मदद चाहिए।

लड़का- अरे तू बोल भाई। मेरे रहते तुझे किस बात की समस्या है बे। तू बिन्दास होकर बोल।

आदित्य- बात ये है कि मेरा एक दोस्त है जिसके पास एक मेडिकल रिपोर्ट है तुम्हारे अस्पताल की। उसे देखने के बाद मुझे लगता है कि वो रिपोर्ट नकली है। तो इस बात का पता कैसे लगेगा कि रिपोर्ट नकली है या असली।

लड़का- बहुत साधारण बात है यार। अगर वो रिपोर्ट असली होगी तो उसके पूरा रिकार्ड कंप्यूटर पर अस्पताल के डेटाबेस में सुरक्षित होगा और अगर नकली हुई तो अस्पताल के पास उसका कोई साक्ष्य नहीं होगा। तू मेडिकल रिपोर्ट की क्रमांक संख्या बता मैं तुझे अभी बता देता हूँ कि रिपोर्ट असली है या नकली।

आदित्य- हाँ लिख। एचपीए सी 014 66 20 21

उस लड़के ने कंप्यूटर में रिपोर्ट क्रमांक डालकर सर्च किया और बोला।

लड़का- हाँ भाई रिपोर्ट तो असली है। इसका पूरा रिकार्ट अस्पताल के पास मौजूद है। ये लगभग 45 दिन की गर्भावस्था रिपोर्ट है।

आदित्य- ठीक है भाई अभी फोन रखता हूँ बाद में बात करता हूँ।

उस लड़के की बात सुनकर हम पाँचों का चेहरा मायूस हो गया। हम सभी को उम्मीद थी शायद ये रिपोर्ट नकली हो। लेकिन अस्पताल रिकार्ड में पूरा ब्यौरा मौजूद होने के कारण रिपोर्ट की सार्थकता प्रमाणित हो गई। हम सभी निराश हो कर एक दूसरे की तरफ देखने लगे।



इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
 
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Ashurocket

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मधुशाला में सब ठरकी हैं इनसे जरा बचकर रहना।।
नहीं तो नुकसान आपका ही होगा।।

कोई कितना भी कुछ दे, जब तक हम स्वीकार नहीं करेंगे, कुछ नहीं हो सकता।

वैसे हमारी इतनी चिंता करने के लिए धन्यवाद।


आशु
 
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Mahi Maurya

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:dubmar:to etne din hum aise hi chilla rahe the ...acha tabhi aap hamari ek bhi request nhi mani
Ab hum demand nhi karenge ek sidha sadha review chap dende jaisa aap mere story par karti ho ek choda sa nanha sa munha sa rebu .,.....jai hind jai kisan
हमने केवल ये कहा है कि हमने कहानी पूरी लिख ली है और अब बदलाव संभव नहीं है। लेकिन कैसे लिखी है ये थोड़ी न बताया है। हो सकता है हमने कहानी जैसे लिखी है वो आप लोगों के मन मुताबिक हो। बिना जाने कुछ भी मत बोला करिए।

हमारी हर समीक्षा की लंबाई इतनी ही रहती है। कभी कभी तो आपकी कहानी की लंबाई से ज्यादा बड़ी से हमारी समीक्षा की लंबाई रहती है। :DD: :toohappy: :hinthint::happy: तो ज्यादा सानपट्टी मत करिए और चुपचाप अपनी टिप्पणी दीजिए वो भी बड़ी वाली।
 

Ashurocket

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