ऋषभ ने ममता को अपनी बाहों में कसकर जकड़ रखा था। उसकी सांसें तेज थीं और उसका शरीर आग की तरह तप रहा था।
ममता, जो अब तक एक संकोची माँ बनी हुई थीं, अब पूरी तरह से एक प्यासी औरत में बदल चुकी थीं। उनकी आँखें आधी बंद थीं और उनके होंठ हल्के से खुले हुए थे, जिससे उनकी भारी सांसें बाहर निकल रही थीं।
ऋषभ ने धीरे से ममता के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके होंठों पर एक गहरा, लंबा किस किया। इस बार यह किस सिर्फ भूख नहीं, बल्कि एक वादा था
—कि आज वह अपनी माँ के शरीर के हर एक कोने को अपनी वासना से भर देगा। ऋषभ की जीभ ममता के मुँह के अंदर गहराई तक गई, उनके साथ खेलते हुए, जिससे ममता के गले से एक धीमी कराह निकली।
"आह्ह... रेशु... बेटा..." ममता ने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उनके हाथ ऋषभ की पीठ को जोर-जोर से खरोंच रहे थे।
ऋषभ ने धीरे से अपना चेहरा नीचे किया और ममता की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए। वह उनकी गर्दन को चूमते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा।
उसने ममता के कानों के पास जाकर फुसफुसाया, "माँ... आज मैं तुम्हें वह सुख दूँगा जो तुमने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी महसूस नहीं किया होगा।"
ऋषभ के शब्द ममता के शरीर में बिजली की तरह दौड़ गए। वह अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाने लगीं, जैसे वह ऋषभ को और करीब बुला रही हों।
ऋषभ ने अब उनके भारी और गोल स्तनों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। उसने एक चूची को अपने हाथ में लिया और उसे जोर से दबाया, जिससे ममता के मुँह से एक तीखी सिसकी निकली।
"ओह्ह... रेशु... धीरे..." ममता ने कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में कोई विरोध नहीं था, बल्कि एक गहरी चाहत थी।
ऋषभ ने अपने होंठ उनके सख्त निप्पल पर रखे और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा। वह कभी उन्हें चूसता, तो कभी हल्के से दांतों से काटता।
ममता का पूरा शरीर कांपने लगा। उनके
दोनों निप्पलों की संवेदनशीलता इतनी बढ़ गई थी कि ऋषभ का हर स्पर्श उन्हें चरम सुख की ओर ले जा रहा था।
तभी ऋषभ ने अपना चेहरा और नीचे किया। वह धीरे-धीरे ममता की जांघों के बीच पहुँचा।
ममता की रसीली और गुलाबी चूत अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। कामुक रस की बूंदें उनके बाहरी हिस्सों से रिसकर बिस्तर की चादर को भिगो रही थीं।
ऋषभ ने अपनी नाक ममता की चूत के पास ले जाकर उसकी खुशबू को महसूस किया। यह एक ऐसी प्राकृतिक और कामुक खुशबू थी
जिसने ऋषभ के लंड को और भी ज्यादा सख्त कर दिया। उसने धीरे से अपनी जीभ को ममता की क्लिटोरिस (clitoris) पर छुआया।
"आह्ह्ह्ह!" ममता ने एक जोरदार चीख मारी और अपनी टांगें और फैला लीं।
ऋषभ अब पूरी तरह से समर्पित था। उसने अपनी जीभ का उपयोग करके ममता की चूत के बाहरी हिस्से को चाटना शुरू किया।
वह बहुत धीरे-धीरे और बारीकी से उनके सबसे संवेदनशील हिस्से को सहला रहा था। उसकी जीभ जब-जब उस छोटे से दाने (clitoris) को छूती, ममता का पूरा शरीर एक झटके के साथ ऊपर उठता।
"रेशु... बेटा... क्या कर रहा है... आह्ह... बहुत... बहुत अच्छा लग रहा है... ओह्ह!" ममता अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। वह अपने हाथों से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ रही थीं।
ऋषभ ने अब अपनी जीभ को ममता की चूत के अंदर धकेलना शुरू किया। वह गहराई तक अपनी जीभ ले जा रहा था,
उनके अंदर के गर्म और गीले अहसास को महसूस कर रहा था। वह चूसने लगा, जैसे वह ममता के अंदर का सारा रस पी जाना चाहता हो।
चप-चप-चप की आवाज़ कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी।
ममता की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं। वह बार-बार "रेशु...रेशु..." पुकार रही थीं। उनकी चूत की दीवारें ऋषभ की जीभ को कसकर जकड़ रही थीं।
अचानक, ममता का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और उन्होंने एक लंबी चीख मारी।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!"
ममता को अपना पहला चरम सुख (orgasm) मिल चुका था। उनका शरीर लहरों की तरह कांप रहा था
और उनकी चूत से कामुक रस की एक और लहर निकली। ऋषभ ने तब तक उन्हें चाटना जारी रखा जब तक कि वह पूरी तरह से शांत नहीं हो गईं।
लेकिन ऋषभ की प्यास अभी बुझी नहीं थी। उसका मोटा, नसदार लंड अब फटने को तैयार था।
उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और ममता की आँखों में देखा। ममता की आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी।
ममता ने आगे हाथ बढ़ा के ऋषभ की पैंट उतार दी ,
ऋषभ का लंड एक झटके में टनटना के बाहर आ गया , ममता का शरीर अन्दर तक हिल गया ,ममता ने हल्की जीभ निकाल के लंड के टॉप को चाटा,
ऋषभ : आह मां बहुत अच्छा लग रहा था है
ममता ने अपना मुंह खोल के न चाहते लंड को मुंह में भर लिया ,और आगे पीछे करने लगी
ऋषभ भी जोश में आ गया और अपनी मां के बाल पकड़ के लंड को उसके गले तक ठेलने लगा ।फिर थोड़ी देर बाद
"अब... अब मुझे अपना लंड दे दो... मुझे तुम्हारी ज़रूरत है," ममता ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
ऋषभ ने बिना देर किए अपना पत्थर जैसा सख्त लंड ममता की चूत के द्वार पर रखा। उसने धीरे से दबाव बनाया।
ममता ने अपनी टांगों को ऋषभ की कमर के चारों ओर लपेट लिया, जिससे वह और भी गहराई तक जा सके।
जैसे ही ऋषभ का लंड ममता की तंग और गर्म चूत के अंदर घुसा, दोनों के मुँह से एक साथ आह निकली।
"आह्ह्ह्ह!"
ममता की चूत इतनी तंग थी कि ऋषभ को लगा जैसे वह किसी गर्म मखमल के अंदर जा रहा हो। वह धीरे-धीरे, इंच-दर-इंच अंदर धँसता गया, जब तक कि उसका पूरा लंड ममता के गर्भाशय के मुँह से जा टकराया।
"ओह्ह... माँ... तुम कितनी तंग हो... बहुत ही ज्यादा तंग..." ऋषभ ने हांफते हुए कहा।
ममता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और ऋषभ के कंधों को कसकर पकड़ लिया। "बेटा... बहुत बड़ा है... पूरा अंदर तक आ गया... आह्ह!"
ऋषभ ने अब अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। पहले धीमी गति, फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ती गई।
00 हर धक्के के साथ, ऋषभ का लंड ममता की गहराई को छू रहा था। चप-चप-चप की आवाज़ और तेज़ हो गई क्योंकि उनके शरीर एक-दूसरे से पूरी ताकत से टकरा रहे थे।
"हाँ... ऐसे ही... और ज़ोर से... मुझे और गहराई तक चाहिए... रेशु ... आह्ह!" ममता अब पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीं।
ऋषभ ने अब अपनी गति बढ़ा दी। वह अब किसी जानवर की तरह अपनी माँ के शरीर को नोच रहा था।
वह पूरी ताकत से धक्के मार रहा था, जिससे ममता का पूरा शरीर बिस्तर पर पीछे की ओर खिसक रहा था।
"मेरी माँ... मेरी रसीली माँ... आज मैं तुम्हें पूरी तरह से अपना बना लूँगा!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाते हुए कहा।
ऋषभ ने अब ममता की पोजीशन बदली। उसने उन्हें पलटकर घुटनों के बल खड़ा कर दिया (Doggy Style)। अब ममता का उभरा हुआ
और गोरा पिछवाड़ा ऋषभ के सामने था। ऋषभ ने उनके कूल्हों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और पीछे से एक जोरदार धक्का मारा।
"आह्ह्ह्ह्ह!" ममता की चीख पूरे कमरे में गूँज गई।
पीछे से प्रवेश और भी गहरा और तीव्र था। ऋषभ का लंड अब ममता की चूत की सबसे गहरी दीवारों को रगड़ रहा था।
वह बार-बार उनके चूचियों को पीछे से पकड़कर मरोड़ रहा था और अपनी पूरी ताकत से उनके अंदर धँस रहा था।
"हाँ... मारो मुझे... और ज़ोर से मारो... मैं तुम्हारी हूँ... सिर्फ तुम्हारी!" ममता अब पूरी तरह से समर्पित हो चुकी थीं।
वह अपनी माँ होने का गौरव भूलकर सिर्फ एक ऐसी औरत बन गई थीं जिसे अपने बेटे के लंड की भूख थी।
ऋषभ की गति अब चरम पर थी। वह इतनी तेज़ी से धक्का मार रहा था कि ममता का शरीर आगे-पीछे डोल रहा था।
उसे महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने को तैयार है। उसकी नसों में खून उबल रहा था और उसका लंड अब और भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो गया था।
"माँ... मैं... मैं अब रुक नहीं सकता... मैं तुम्हारे अंदर ही सब कुछ छोड़ दूँगा!" ऋषभ ने चिल्लाते हुए कहा।
"हाँ... छोड़ दो... सब कुछ मेरे अंदर डाल दो... मुझे अपने बीज से भर दो... रेशु ... आह्ह्ह!" ममता ने भी अपने दूसरे चरम सुख को महसूस किया।
उनकी चूत की दीवारें ऋषभ के लंड को इतनी जोर से जकड़ने लगीं कि ऋषभ की सांसें रुक गईं।
एक आखिरी, सबसे जोरदार और हिंसक धक्के के साथ, ऋषभ ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसके लंड से गर्म, गाढ़ा और सफेद वीर्य फुहारों की तरह ममता की चूत की गहराई में छूटने लगा।
"आह्ह्ह्ह्ह्ह!"
दोनों एक साथ चिल्लाए और उनके शरीर एक झटके के साथ स्थिर हो गए। ऋषभ ने अपना लंड अंदर ही रखा, महसूस करते हुए कि कैसे उसका गर्म वीर्य ममता के अंदर धीरे-धीरे फैल रहा है।
वह पूरी तरह से खाली हो चुका था, और उसके चेहरे पर एक असीम संतुष्टि थी।
ममता बिस्तर पर निढाल पड़ी थीं, उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और सुख था।
उन्होंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और ऋषभ की ओर देखा, जो अब भी उनके ऊपर था।
ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जो अब भी थोड़ा सख्त था और जिससे वीर्य की कुछ बूंदें बाहर निकल रही थीं।
उसने ममता को अपनी बाहों में भर लिया और उनके माथे को चूमा।
"आई लव यू, माँ।"
ममता ने शर्माते हुए अपना सिर उनके सीने पर रख दिया और धीरे से कहा, "ME TOO ... आई लव यू, मेरे बेटे।"
कमरे में अब सिर्फ उनकी भारी साँसों की आवाज़ थी, और बिस्तर पर बिखरी हुई वह काली साड़ी इस बात की गवाह थी.
कि आज एक पवित्र रिश्ता पूरी तरह से वासना की आग में जलकर एक नए, वर्जित और बेहद सुखद मोड़ पर पहुँच गया था।