dhalchandarun
[Death is the most beautiful thing.]
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Wonderful update, Shefali bhi sach aur sapna mein antar nahi kar payi, shayad isliye ki usne pahli baar apni mom aur dad ka chehra dekha tha, khair ye Akex, Taufiq aur mujhe lagta hai ki Suyash bhi gayab rahne wala hai jab Shefali ka ye illusion samapt hoga tab.#200.
रहस्यमय सनूरा: (22.01.02, मंगलवार, सीनोर महल, अराका द्वीप)
रोजर अपने कमरे में बैठा, 5 दिन पहले हुए युद्ध के बारे में सोच रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह सुर्वया का कैसे शुक्रिया अदा करे? अगर उस दिन सुर्वया ने उसके प्राण नहीं बचाये होते, तो वह तो मारा गया था।
रोजर को मेलाइट का व्यक्तित्व भी समझ नहीं आ रहा था। कभी वह बहुत प्यार से बात करती, तो कभी डांटने लगती, पर जो भी हो रोजर के दिल में मेलाइट के लिये कुछ तो था, वह जब भी मेलाइट के पास होता, तो खुश हो जाता था।
रोजर को मेलाइट की शैतानियों से भी प्यार था, पर जब से उसे पता चला कि मेलाइट का संबंध देवी आर्टेमिस से है, वह मेलाइट से थोड़ा डरा-डरा सा रहता था।
फिर रोजर अपनी इस नई और अजीब सी जिंदगी के बारे में सोचने लगा कि कहां वह न्यूयार्क का रहने वाला इंसान, इस रहस्यमय द्वीप पर आ गया और उसके बाद से उसने इतनी विचित्र चीजें देखीं, कि उसका भूत-प्रेत, आत्मा, ईश्वर सब पर विश्वास हो गया।
अब वह विज्ञान की बातें छोड़, भगवान की बातें करने लगा था और करता भी क्यों ना?...कभी वह स्वयं सुनहरे मानव में परिवर्तित हो जा रहा था, तो कभी उसकी नाभि से सुनहरी रोशनी निकलने लग रही थी।
रोजर अपने ख्यालों के झंझावात में ऐसे ही उलझा था कि तभी उसके कक्ष में मेलाइट ने प्रवेश किया।
मेलाइट को अपने कक्ष में आया देख, रोजर तुरंत मेलाइट के सम्मान में अपने बिस्तर से खड़ा हो गया।
“और क्या हो रहा है रोजी? आई मीन रोजर?" मेलाइट ने आते ही रोजर को छेड़ना शुरु कर दिया- “मेरे बारे में सोच रहे हो क्या?"
रोजर, इस प्रकार मेलाइट को बोलते देख एका एक घबरा सा गया, क्यों कि सच में ही कुछ देर पहले वह मेलाइट के बारे में ही सोच रहा था।
“वो....मैं मैं... वो वो मैं...।” रोजर ने कुछ कहने की कोशिश की, पर उसके गले से मारे डर के आवाज ही नहीं निकली।
"ये क्या बकरी की तरह मैं...मैं... लगा रखा है...अरे बनना ही है, तो हिरण बनो, बकरी भी कोई जानवर होता है?” मेलाइट ने फिर से रोजर को डांटा।
“मैं इस समय अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहा था।" रोजर ने दबे-दबे से स्वर में कहा।
“मेरे रहते अब तुम क्यों अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहे थे?” मेलाइट ने रोजर को आँख मारते हुए कहा।
मेलाइट को आँख मारते देख रोजर सकपकाकर इधर-उधर देखने लगा।
“अच्छा ये बताओ कि वह सुनहरी रोशनी तुम्हारे शरीर से निकलना बंद हुई कि नहीं?” मेलाइट ने रोजर को घबराते देख विषय को बदलते हुए कहा।
“अभी तो बंद है, पर आप आई हो तो वह भी आ ही जायेगी।” रोजर ने पीछे वाले शब्द धीरे से बुदबुदाकर कहे।
“अच्छा रोजर, तुम ये बताओ कि तुम्हें कौन सा शहर पसंद है?” मेलाइट ने रोजर के बिस्तर पर बैठते हुए पूछा।
“कोई भी शहर हो, बस जंगल ना हो....मुझे जंगल बिल्कुल पसंद नहीं।” मेलाइट को अपने बिस्तर पर बैठते देख, रोजर अपने बिस्तर से उठकर, सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गया।
"तुम्हारी पसंद या ना पसंद से क्या होता है? अब तो ईश्वर ने तुम्हारी जिंदगी में जंगल और हिरणी ही लिखा है।” मेलाइट ने अपने मन में कहा।
तभी वहां सुर्वया और सनूरा भी आ गये।
“ये दोनों लोग अकेले-अकेले क्या कर रहे हो?" सुर्वया ने मुस्कुराते हुए मेलाइट की ओर देखा।
“ये कहां कुछ कर रहा है? जो भी कर रही हूं, मैं ही कर रही हूं।” मेलाइट ने भी सुर्वया को देख मुस्कुराकर कहा।
सुर्वया एक पल में मेलाइट का मतलब समझ गई, पर उसने रोजर के सामने कुछ कहा नहीं।
अब सुर्वया और सनूरा भी किसी पक्की सहेलियों की तरह, मेलाइट के साथ बिस्तर पर बैठ गईं।
“मैं बाहर जाऊं क्या?" सभी को आराम से बैठा देखकर रोजर ने पूछ लिया।
“क्यों, तुम्हें क्यों बाहर जाना है?” मेलाइट ने रोजर को घूरते हुए पूछा।
“अरे, आप लोग जब एक साथ होते हो, तो मुझे वहां कहां बैठाते हो?” रोजर ने किसी छोटे बच्चे की तरह से कंप्लेन करते हुए कहा।
यह बात सुन तीनों ने आपस में एक दूसरे की ओर देखा और फिर तीनों जोर से हंस दीं। उन्हें हंसता हुआ देख अब रोजर और ज्यादा नर्वस दिखाई देने लगा।
“अरे नहीं नहीं रोजर, ऐसी कोई बात नहीं है, वह बस मेलाइट तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा ही मजाक करती है बस....।” सनूरा ने कहा- “पर आज से हम सभी ध्यान रखेंगे कि बात करते समय तुम्हें भी बुला लिया करेंगे।"
सनूरा की बात सुन, रोजर ने डरते-डरते मेलाइट की ओर देखा, पर मेलाइट से नजर मिलते ही मेलाइट ने फिर नाक सिकोड़ कर रोजर को चिढ़ाया।
पर इस बार रोजर घबराने की जगह मुस्कुराने लगा। उसे मुस्कुराता देख मेलाइट के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कुराहट आ गई।
तभी सुर्वया ने सनूरा से कहा- “अरे याद आया सनूरा, उस दिन तुम अपनी कहानी सुनाने जा रही थी? फिर महल पर हमला होने की वजह से तुम उठकर चली गई थी तो अगर तुम चाहो, तो इस समय अपनी कहानी सुना सकती हो?"
यह सुन मेलाइट भी पालथी मारकर बिस्तर पर बैठ गई और सनूरा की ओर देखने लगी।
“ठीक है, मैं सुनाती हूं अपनी कहानी।” यह कहकर सनूरा ने अपनी कहानी को सुनाना शुरु कर दिया- “यह आज से लगभग 600 वर्ष पहले की बात है, उस समय मैं मात्र 18 वर्ष की थी।"
"600 वर्ष पहले 18 वर्ष की थी।” रोजर ने अपनी आँखें फाड़ते हुए कहा- “तो अभी आपकी उम्र उप्स...सॉरी माफ कर दीजिये...मैं भूल गया था कि किसी लड़की से उसकी उम्र नहीं पूछी जाती?"
"ओए उप्स...यहां हम सबमें सनूरा ही सबसे छोटी है और भूलकर भी हम लोगों से हमारी उम्र के बारे में पूछना भी मत।” मेलाइट ने नकली का गुस्सा दिखाते हुए रोजर से कहा- “हां सनूरा आप कहानी को जारी रखिये।"
मेलाइट की बात सुन सनूरा ने फिर से बोलना शुरु कर दिया- “सभी अराका वासियों की औसत उम्र 800 वर्ष की होती है।....हां तो मैं कह रही थी कि मेरे माता पिता बचपन में ही गुजर गये थे, इसलिये मेरा पालन पोषण मेरे चाचा ने किया था। एक दिन मैं सीनोर के जंगल में अकेले ही विचरण कर रही थी कि तभी मैंने देखा, कि कुछ जंगली कुत्ते एक छोटी सी बिल्ली पर हमला कर रहे हैं। मुझसे उन कुत्तों का यह व्यवहार देखा नहीं गया। इसलिये मैंने अपने पास पड़े पत्थरों को उठाकर उन कुत्तों पर मारना शुरु कर दिया। कुत्ते मेरे हमले से डरकर भाग गये।
"कुत्तों के जाने के बाद, मैंने उस बिल्ली को अपने हाथ में उठा लिया। वह बिल्ली कुत्तों के हमले से जख्मी हो गई थी, इसलिये मैंने जंगल से कुछ औषधि ढूंढकर उसे बिल्ली के जख्मों पर लगा दिया। मैं जब उस बिल्ली को हाथ में लेकर जंगल से बाहर निकली, तो उसी समय मुझे सीनोर के राजा मुफासा दिखाई दिये। मुफासा ने मेरे हाथ में थमी बिल्ली को मुझसे ले लिया। बाद में मुझे पता चला कि वह राजा मुफासा की पालतू और सबसे प्यारी बिल्ली थी।
“मुफासा मेरे द्वारा बिल्ली की जान बचाने से अत्यंत प्रसन्न हो गये। उन्होंने मुझसे मेरे माता-पिता के बारे में पूछा, तो मैंने उन्हें बता दिया कि मेरे माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजा मुफासा मुझे लेकर सीनोर महल आ गये। उन्होंने मुझे वहीं रहने को कहा। मेरे लिये एकदम से झोपड़ी से निकलकर महलों में आना एक अलग अनुभव था।
"उस समय के सीनोर के कानून के हिसाब से राजा मुफासा को 600 वर्षों तक सीनोर पर राज्य करना था, इन 600 वर्षों में राजा अपना पुत्र उत्पन्न नहीं कर सकते थे। इसलिये राजा मुफासा मुझे अपनी बेटी की तरह से रखने लगे। कुछ ही दिन में मैं उनकी सबसे चहेती बन गई। उस समय मुझे युद्धाभ्यास देखने का बहुत शौक था, इसलिये मैं छिप-छिपकर सैनिकों का युद्धाभ्यास देखती और बाद में अपने कमरे में आकर, छिपकर अस्त्र-शस्त्र चलाना सीखने लगी।
"एक दिन राजा मुफासा ने मुझे तलवार चलाते देख लिया। वह मेरी शस्त्रकला से बहुत प्रभावित हो गये। उन्होंने कहा कि 1 महीने के बाद सीनोर के नये सेनापति का चुनाव होना है, तो अगर मैं चाहूं तो उसमें भाग ले सकती हूं। परंतु सेनापति के उस चुनाव के लिये, एक प्रतियोगिता का आयोजन होना था, जिसमें एक विशाल भालू को सिर्फ तलवार व भालों की मदद से मारना था। वह भालू बहुत ही खतरनाक था और अब तक सैकड़ों लोगों को मार चुका था। मैंने राजा मुफासा का मेरे प्रतिविश्वास देखकर, एक महीने तक अलग-अलग प्रकार से दिन रात तलवार और भाले का अभ्यास किया। आखिरकार प्रतियोगिता का वह दिन भी आ गया।
“महल के विशाल क्रीड़ास्थल पर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। मुझसे पहले लगभग 12 सीनोर के बलशाली योद्वाओं ने उस भालू को मारने का प्रयास किया। पर एक-एक कर वह सभी उस खतरनाक भालू के द्वारा मारे गये। अब मेरा नंबर था। मुफासा क्रीड़ा स्थल के सबसे ऊंचे स्थान पर बैठकर मेरा युद्ध देख रहे थे। मैंने अपने भाले से भालू पर हमला कर दिया। हम दोनों का युद्ध लगभग आधा घंटा तक चला। मैं और भालू दोनों ही बुरी तरह से जख्मी हो गये थे, पर दोनों ही हार मानने को तैयार नहीं थे।
"अंततः जब मैं थककर गिर गई, तो भालू ने मुझ पर छलांग लगा दी। वह खतरनाक भालू, बस मुझ पर गिरने ही वाला था कि मैंने अपने हाथ में पकड़े भाले को खड़ा कर दिया। हवा में कूदा भालू, सीधा उस भाले के ऊपर गिरा। भाला, भालू के सिर के आरपार हो गया और वह मारा गया। भालू के मरने पर दर्शकदीर्घा में तेज शोर गूंजा, पर मैं उस शोर को सुनने के लायक नहीं थी, मैं उस समय जख्मी हालत में बेहोश हो गई थी। राजा मुफासा मुझे क्रीड़ा स्थल से वापस महल ले आये। वैद्य ने मेरे जिंदा बचने की आस छोड़ दी थी।
“इसलिये राजा मुफासा सभी को अपने कक्ष से बाहर निकालकर, एक गुप्त रास्ते के द्वारा मुझे एक बिल्ली वाली गुफा में ले गये, जहां एक बिल्ली वाली देवी की मूर्ति थी। उस मूर्ति के हाथ में एक सुनहरा पात्र था, जिसमें दिव्य जल भरा था। राजा मुफासा ने मुझे वह दिव्य जल पिला दिया। उस दिव्य जल को पीते ही मैं तुरंत सही हो गई।
"बाद में राजा मुफासा ने मुझे बताया कि वह बिल्ली वाली देवी मिश्र की कोई देवी हैं, जिनसे एक बार मुफासा मिला था, तभी देवी ने खुश होकर, वह प्रतिमा और वह सुनहरा पात्र मुफासा को दिया था। उस पात्र के अंदर उपस्थित दिव्य जल की विशेषता यह थी कि उसे पीने वाले व्यक्ति की उम्र, 50 वर्ष तक कम हो जाती। इस प्रकार वह कभी भी बूढ़ा नहीं होता। उस दिव्य जल को एक बार पीने के बाद, पात्र उसे 25 वर्षों में दोबारा भर देता था। इस दिव्य पात्र और जल के बारे में मुफासा ने आज तक किसी को नहीं बताया था और ना ही किसी को उस गुप्त रास्ते का पता था। कुछ समय के बाद उसी दिव्य जल की वजह से मुझमें बिल्ली में परिवर्तित होने की शक्तियां आ गई।
“इस प्रकार मैंने सीनोर राज्य के सेनापति का कार्यभार संभाल लिया और हर 50 वर्ष बाद, उस दिव्य जल का सेवन करते हुए, सीनोर की सेवा करती रही। सैकड़ों वर्षों के बाद जब वीनस और लुफासा का जन्म हुआ, तो एक बार महामंत्री मकोटा ने मुझे मिश्र में एक कार्य हेतु भेजा।
"जब मैं वह कार्य करके वापस लौटी, तो मुझे पता चला कि सामरा राज्य के राजा कलाट ने हमारे राजा मुफासा और रानी कागोशी को मार डाला है। बस उसके बाद से ही मैं कलाट की मृत्यु की कामना करते हुए जी रही हूं।" इतना कहकर सनूरा चुप हो गई, पर कहानी के बाद उसके चेहरे पर उदासी छा गई, शायद उसे मुफासा और कागोशी की याद आ गई थी।
“तो क्या उस दिव्य जल का सेवन लुफासा भी करता है?” मेलाइट ने सनूरा से पूछा।
"नहीं, मैंने उसे आज तक दिव्य जल के बारे में नहीं बताया और उसका सेवन करने के लिये किसी की भी उम्र कम से कम 50 वर्ष के ऊपर तो होनी ही चाहिये। जबकि लुफासा अभी मात्र 25 वर्ष का ही है। जब समय आयेगा तो मैं उसे उस दिव्य जल के बारे में बता दूंगी।” सनूरा ने कहा।
"तो फिर आपने हमें उसका रहस्य क्यों बताया?" रोजर ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“क्यों कि अब आप लोग बिल्कुल अपने से लगने लगे हो।” सनूरा ने कहा।
“बिल्कुल ठीक....3 सच्ची सहेली, 2 दोस्त और 1 पहेली।” रोजर ने धीरे से कहा, फिर भी रोजर की बात को सभी ने सुन लिया।
रोजर की बात सुन फिर सभी के मुंह से एक जोर का ठहाका फूट पड़ा। और रोजर वह तो बस पहेली को सुलझाने में लगा था।
चैपटर-9
अनोखा जादूगर: (तिलिस्मा 5.33)
शैफाली और सुयश पश्चिम दिशा की ओर निकले थे। बहुत दिनों बाद अपने आसपास इतनी भीड़ देखकर दोनों ही खुश हो रहे थे।
शैफाली की निगाह तेजी से मेले में चारो ओर घूम रही थी। तभी शैफाली को एक जगह पर काफी भीड़ दिखाई दी।
“कैप्टेन अंकल, उस ओर काफी ज्यादा भीड़ दिखाई दे रही है। मुझे लगता है कि हमें उधर चलकर देखना चाहिये।” शैफाली ने सुयश को भीड़ की ओर इशारा करते हुए कहा।
सुयश ने धीरे से सिर हिलाया और शैफाली के साथ, भीड़ की ओर बढ़ गया। भीड़ को चीरते हुए दोनों आगे की ओर आ गये।
आगे एक बड़ा सा टेंट लगा था, जिस पर एक काला मोती बना था।
काला मोती के बगल एक जादूगर की तस्वीर बनी थी। पूरी भीड़ उसी जादूगर का जादू देखने के लिये भीड़ लगाये हुई थी।
“कैप्टेन अंकल, मुझे लगता है कि हमें इस जादूगर का जादू देखना चाहिये? क्यों कि यहां पर काला मोती का फोटो भी बना है। कैश्वर ने जरुर यहां कुछ विशेष बना रखा होगा?" शैफाली ने ने कहा।
“तुम ठीक कह रही हो शैफाली। मुझे भी यह जगह कुछ रहस्यमई सी लग रही है? हमें एक बार अंदर चलना ही होगा।” सुयश ने शैफाली की ओर देखते हुए कहा।
यह कहकर सुयश ने शैफाली का हाथ पकड़ा और शैफाली को लेकर टेंट के अंदर प्रवेश कर गया।
अंदर से टेंट बहुत विशाल था। टेंट में आगे की ओर एक बड़ा सा स्टेज बना था। सुयश को आगे की तीसरी लाइन में 2 कुर्सियां खाली दिखाई दीं। वह शैफाली को लेकर उन्हीं कुर्सियों पर जाकर बैठ गया।
यह जगह बिल्कुल किसी मेले में लगाए गए जादूगर के शो की ही तरह लग रही थी। उसे देखकर ऐसा प्रतीत ही नहीं हो रहा था, कि यह जगह तिलिस्मा के अंदर की है।
कुछ ही देर में एक तेज आवाज के साथ एक जादूगर स्टेज पर प्रकट हुआ।
जादूगर के शरीर पर एक लाल और काले रंग की ड्रेस थी। उसके सिर पर भी जादूगरों की भांति ही एक बड़ी सी टोपी थी।
कुछ देर हल्के-फुल्के जादू दिखाने के बाद, जादूगर ने स्टेज पर एक बड़ा सा काला मोती मंगवाया।
काला मोती एक छोटे से प्लेटफार्म पर था, जिसमें पहिये लगे थे।
"दोस्तों अब मैं आपके सामने पेश करने जा रहा हूं, अपने जादू का एक महान खेल, जो आपको अवश्य ही पसंद आयेगा।” जादूगर ने कहा- “पर उसके लिये मुझे आप लोगों में से एक दर्शक की जरुरत है।' यह कहकर जादूगर ने चारो ओर देखा और शैफाली की ओर इशारा करते हुए उसे स्टेज पर आने को कहा।
शैफाली अपनी जगह से खड़ी हुई। तभी सुयश ने शैफाली का हाथ दबा कर उसे सतर्क रहने का इशारा किया। अब शैफाली स्टेज पर खड़े जादूगर के सामने पहुंच गई।
“आपका नाम क्या है बच्ची?” जादूगर ने शैफाली से पूछा।
“शैफाली।"
"तो दोस्तों अब शुरु करते हैं, जादू का यह खेल।' यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी आँख बंद करने को कहा। शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
तभी शैफाली को अपने आसपास कुछ शोर की आवाजें सुनाई दीं, शैफाली ने घबराकर अपनी आँखें खोल दीं।
आँखें खोलते ही शैफाली घबरा गई, इस समय वह एक कमरे में थी, जो कि तेजी से हिल-डुल रहा था।
“यह कौन सी जगह है? और मैं यहां कैसे आ पहुंची?" शैफाली ने अजीब सी निगाहों से कमरे के चारो ओर देखते हुए कहा।
तभी शैफाली को कमरे में रखी एक टेबल पर एक फोटो दिखाई दी, जिसमें वह 1 आदमी और 1 औरत के साथ खड़ी थी।
अब शैफाली के दिमाग को एक झटका लगा “क्या क्या ये मेरे मॉम-डैड हैं?" तभी दूसरे कमरे से एक औरत तेजी से निकलकर उस कमरे में आई।
“ये क्या शैफाली, तुमने अभी तक लाइफ जैकेट नहीं पहनी? क्या तुम्हें पता नहीं कि ‘सुप्रीम’ डूबने वाला है? चलो जल्दी करो।" यह कहकर मारथा, वहां पड़ा एक लाइफ जैकेट शैफाली को पहनाने लगी।.... पर शैफाली तो सिर्फ डबडबाई आँखों से मारथा को ही निहार रही थी।
एक पल में ही शैफाली को समझ आ गया कि इस समय वह कहां है? वह तेजी से मारथा से लिपट गई
'मॉमऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।"
मारथ को लगा कि शैफाली डर की वजह से ऐसे कर रही है, इसलिये उसने भी शैफाली को कसकर अपने शरीर से चिपका लिया।
"डर मत मेरी बच्ची, तुम्हें कुछ नहीं होगा, तुम्हारे पापा गए हैं और लाइफ जैकेट लाने के लिये। वो बस आते ही होंगे।” मारथा ने भरी-भरी आँखों से कहा- “तुम तो बहुत बहादुर और टैलेंटेड हो। देखना एक दिन तुम हमारा नाम बहुत रोशन करोगी, मुझे पता है। बस तुम ये गणित के चक्कर में अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डाला करो।
शैफाली ने फिर से मारथा का चेहरा देखा और उसके चेहरे को बेतहाशा चूमने लगी।
“अरे-अरे ये ब्रूनो जैसी हरकत क्यों कर रही हो?" मारथा ने शैफाली के चेहरे पर ढुलक आये आँसुओं को पोंछते हुए कहा।
“ब्रूनो....ब्रूनो कहां है मॉम?” मारथा के शब्द सुन, शैफाली को अचानक से ब्रूनो की याद आ गई।
“वह तुम्हारे डैड के साथ बाहर गया है, वह बस आते ही होंगे।” अभी मारथा ने इतना ही कहा था कि तभी एक तेज बिजली गिरने की आवाज सुनाई दी।
शायद वह बिजली सुप्रीम के ही किसी भाग में गिरी थी। एक पल के लिये सुप्रीम पूरा का पूरा डगमगा गया।
बिजली की तेज आवाज सुन मारथा ने शैफाली को फिर से अपनी बाहों में भर लिया- “हे मेरे ईश्वर....हम सबकी रक्षा करना।"
“मुझे कुछ नहीं होगा मॉम, मुझको लेकर आप बिल्कुल भी मत घबराइये।” शैफाली ने मारथा को देखते हुए कहा- “देखिये, अब तो मुझे दिखाई भी देने लगा है। मैं आपको देख सकती हूं मॉम।"
शैफाली की बात सुन मारथा आश्चर्य से शैफाली को देखने लगी।
“यह कैसे संभव हुआ?” अब मारथा सबकुछ छोड़ बस शैफाली की आँख को ही देख रही थी।
“बहुत लंबी कहानी है मॉम। बाद में बताऊंगी, पर पहले यहां से बचने के बारे में सोचते हैं।” यह कह शैफाली अपने आसपास मौजूद सामान को देखने लगी।
तभी ‘धड़ाक' की आवाज के साथ कमरे का दरवाजा खुला और माइकल व ब्रूनो कमरे के अंदर दाखिल हुए। ब्रूनो सीधे आकर शैफाली से लिपट गया और उसे गिराकर उसका मुंह चाटने लगा।
शैफाली भी ब्रूनो से कसकर लिपट गई।
“ये इन दोनों को क्या हो गया? यह तो ऐसे मिल रहे हैं, जैसे कि वर्षों बाद मिलें हों, जबकि अभी कुछ देर पहले ही साथ में थे।” माइकल ने मारथा को देखते हुए कहा।
“उन दोनों को छोड़ो, पहले ये बताओ कि और लाइफ जैकेट नहीं मिले क्या?” मारथा ने माइकल से पूछा।
“नहीं...चारो ओर भगदड़ मची हुई है। कोई किसी की सुन नहीं रहा? सब बस अपनी जान बचाने के पीछे लगे हैं।” माइकल ने अपना चेहरा झुकाते हुए कहा- सुप्रीम अब नहीं बचेगा। वह कई जगह से क्षतिग्रस्त भी हो गया है।...पर तुम चिंता ना करो, मैं तुम लोगों को बचाने के लिये कुछ ना कुछ करता हूं।" यह कहकर माइकल कमरे में रखे सामान को देखने लगा। उसकी नजर अब अपने हार्स पोलो खेलने वाले डिब्बे पर थी।
(हार्स पोलोः एक तरह का गेम, जिसमें घोड़े पर बैठकर हॉकी जैसी स्टिक से पोलो खेला जाता है।)
माइकल ने बिना देर किये उस डिब्बे के सामान को वहीं कमरे में पलट दिया। उस डिब्बे में घोड़े की रकाब, रस्सी और अन्य घुड़सवारी के सामान थे। माइकल ने जल्दी-जल्दी कुछ सामान को उठाया और मारथा व शैफाली का हाथ पकड़ जहाज के डेक की ओर भागा। ब्रूनो उनके पीछे-पीछे ही था।
शैफाली तो सबकुछ छोड़ बस माइकल के हाथ को देख रही थी। वह चाहती थी काश कुछ देर के लिये समय यहीं रुक जाये।
पर समय भला कब किसी के लिये रुका है? वह तो सदैव गतिमान रहना ही अपनी श्रेष्ठता समझता है।
अब सभी भागकर सुप्रीम के डेक पर पहुंच गये। तभी सुप्रीम का एक बड़ा सा हिस्सा टूटकर समुद्र में जा गिरा। इस हिस्से के टूटने से सुप्रीम को एक तेज झटका भी लगा था।
तभी माइकल को पानी में तैर रहा लकड़ी का एक बड़ा सा तख्ता दिखाई दिया। उधर सुप्रीम के डेक पर लगी आग धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ रही थी। समय बहुत कम था।
माइकल ने पीछे से आ रही आग को देखा और बिना देर किये, शैफाली के हाथ में रस्सी और कुछ सामान पकड़कर, उसे समुद्र की ओर धक्का दे दिया। शैफाली को पानी में गिरते देख, ब्रूनो ने भी पानी में छलांग लगा दी।
शैफाली का पूरा शरीर हवा में था। यह देख शैफाली के मुंह से बहुत तेज आवाज निकली- “मां !"
शायद शैफाली 'मॉम' बोलना चाहती थी, पर मुंह में पानी चले जाने से उसके मुंह से सिर्फ 'मां' शब्द ही निकला।
पर इस 'मां' शब्द ने वहां से हजारों किलोमीटर दूर, तपस्या में लीन माया की आँखें खोल दी थी।
जारी रहेगा_____![]()

