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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

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dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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#200.

रहस्यमय सनूरा:
(22.01.02, मंगलवार, सीनोर महल, अराका द्वीप)

रोजर अपने कमरे में बैठा, 5 दिन पहले हुए युद्ध के बारे में सोच रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह सुर्वया का कैसे शुक्रिया अदा करे? अगर उस दिन सुर्वया ने उसके प्राण नहीं बचाये होते, तो वह तो मारा गया था।

रोजर को मेलाइट का व्यक्तित्व भी समझ नहीं आ रहा था। कभी वह बहुत प्यार से बात करती, तो कभी डांटने लगती, पर जो भी हो रोजर के दिल में मेलाइट के लिये कुछ तो था, वह जब भी मेलाइट के पास होता, तो खुश हो जाता था।

रोजर को मेलाइट की शैतानियों से भी प्यार था, पर जब से उसे पता चला कि मेलाइट का संबंध देवी आर्टेमिस से है, वह मेलाइट से थोड़ा डरा-डरा सा रहता था।

फिर रोजर अपनी इस नई और अजीब सी जिंदगी के बारे में सोचने लगा कि कहां वह न्यूयार्क का रहने वाला इंसान, इस रहस्यमय द्वीप पर आ गया और उसके बाद से उसने इतनी विचित्र चीजें देखीं, कि उसका भूत-प्रेत, आत्मा, ईश्वर सब पर विश्वास हो गया।

अब वह विज्ञान की बातें छोड़, भगवान की बातें करने लगा था और करता भी क्यों ना?...कभी वह स्वयं सुनहरे मानव में परिवर्तित हो जा रहा था, तो कभी उसकी नाभि से सुनहरी रोशनी निकलने लग रही थी।

रोजर अपने ख्यालों के झंझावात में ऐसे ही उलझा था कि तभी उसके कक्ष में मेलाइट ने प्रवेश किया।

मेलाइट को अपने कक्ष में आया देख, रोजर तुरंत मेलाइट के सम्मान में अपने बिस्तर से खड़ा हो गया।

“और क्या हो रहा है रोजी? आई मीन रोजर?" मेलाइट ने आते ही रोजर को छेड़ना शुरु कर दिया- “मेरे बारे में सोच रहे हो क्या?"

रोजर, इस प्रकार मेलाइट को बोलते देख एका एक घबरा सा गया, क्यों कि सच में ही कुछ देर पहले वह मेलाइट के बारे में ही सोच रहा था।

“वो....मैं मैं... वो वो मैं...।” रोजर ने कुछ कहने की कोशिश की, पर उसके गले से मारे डर के आवाज ही नहीं निकली।

"ये क्या बकरी की तरह मैं...मैं... लगा रखा है...अरे बनना ही है, तो हिरण बनो, बकरी भी कोई जानवर होता है?” मेलाइट ने फिर से रोजर को डांटा।

“मैं इस समय अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहा था।" रोजर ने दबे-दबे से स्वर में कहा।

“मेरे रहते अब तुम क्यों अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहे थे?” मेलाइट ने रोजर को आँख मारते हुए कहा।

मेलाइट को आँख मारते देख रोजर सकपकाकर इधर-उधर देखने लगा।

“अच्छा ये बताओ कि वह सुनहरी रोशनी तुम्हारे शरीर से निकलना बंद हुई कि नहीं?” मेलाइट ने रोजर को घबराते देख विषय को बदलते हुए कहा।

“अभी तो बंद है, पर आप आई हो तो वह भी आ ही जायेगी।” रोजर ने पीछे वाले शब्द धीरे से बुदबुदाकर कहे।

“अच्छा रोजर, तुम ये बताओ कि तुम्हें कौन सा शहर पसंद है?” मेलाइट ने रोजर के बिस्तर पर बैठते हुए पूछा।

“कोई भी शहर हो, बस जंगल ना हो....मुझे जंगल बिल्कुल पसंद नहीं।” मेलाइट को अपने बिस्तर पर बैठते देख, रोजर अपने बिस्तर से उठकर, सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गया।

"तुम्हारी पसंद या ना पसंद से क्या होता है? अब तो ईश्वर ने तुम्हारी जिंदगी में जंगल और हिरणी ही लिखा है।” मेलाइट ने अपने मन में कहा।

तभी वहां सुर्वया और सनूरा भी आ गये।

“ये दोनों लोग अकेले-अकेले क्या कर रहे हो?" सुर्वया ने मुस्कुराते हुए मेलाइट की ओर देखा।


“ये कहां कुछ कर रहा है? जो भी कर रही हूं, मैं ही कर रही हूं।” मेलाइट ने भी सुर्वया को देख मुस्कुराकर कहा।

सुर्वया एक पल में मेलाइट का मतलब समझ गई, पर उसने रोजर के सामने कुछ कहा नहीं।

अब सुर्वया और सनूरा भी किसी पक्की सहेलियों की तरह, मेलाइट के साथ बिस्तर पर बैठ गईं।

“मैं बाहर जाऊं क्या?" सभी को आराम से बैठा देखकर रोजर ने पूछ लिया।

“क्यों, तुम्हें क्यों बाहर जाना है?” मेलाइट ने रोजर को घूरते हुए पूछा।

“अरे, आप लोग जब एक साथ होते हो, तो मुझे वहां कहां बैठाते हो?” रोजर ने किसी छोटे बच्चे की तरह से कंप्लेन करते हुए कहा।

यह बात सुन तीनों ने आपस में एक दूसरे की ओर देखा और फिर तीनों जोर से हंस दीं। उन्हें हंसता हुआ देख अब रोजर और ज्यादा नर्वस दिखाई देने लगा।

“अरे नहीं नहीं रोजर, ऐसी कोई बात नहीं है, वह बस मेलाइट तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा ही मजाक करती है बस....।” सनूरा ने कहा- “पर आज से हम सभी ध्यान रखेंगे कि बात करते समय तुम्हें भी बुला लिया करेंगे।"

सनूरा की बात सुन, रोजर ने डरते-डरते मेलाइट की ओर देखा, पर मेलाइट से नजर मिलते ही मेलाइट ने फिर नाक सिकोड़ कर रोजर को चिढ़ाया।

पर इस बार रोजर घबराने की जगह मुस्कुराने लगा। उसे मुस्कुराता देख मेलाइट के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कुराहट आ गई।

तभी सुर्वया ने सनूरा से कहा- “अरे याद आया सनूरा, उस दिन तुम अपनी कहानी सुनाने जा रही थी? फिर महल पर हमला होने की वजह से तुम उठकर चली गई थी तो अगर तुम चाहो, तो इस समय अपनी कहानी सुना सकती हो?"

यह सुन मेलाइट भी पालथी मारकर बिस्तर पर बैठ गई और सनूरा की ओर देखने लगी।

“ठीक है, मैं सुनाती हूं अपनी कहानी।” यह कहकर सनूरा ने अपनी कहानी को सुनाना शुरु कर दिया- “यह आज से लगभग 600 वर्ष पहले की बात है, उस समय मैं मात्र 18 वर्ष की थी।"

"600 वर्ष पहले 18 वर्ष की थी।” रोजर ने अपनी आँखें फाड़ते हुए कहा- “तो अभी आपकी उम्र उप्स...सॉरी माफ कर दीजिये...मैं भूल गया था कि किसी लड़की से उसकी उम्र नहीं पूछी जाती?"

"ओए उप्स...यहां हम सबमें सनूरा ही सबसे छोटी है और भूलकर भी हम लोगों से हमारी उम्र के बारे में पूछना भी मत।” मेलाइट ने नकली का गुस्सा दिखाते हुए रोजर से कहा- “हां सनूरा आप कहानी को जारी रखिये।"

मेलाइट की बात सुन सनूरा ने फिर से बोलना शुरु कर दिया- “सभी अराका वासियों की औसत उम्र 800 वर्ष की होती है।....हां तो मैं कह रही थी कि मेरे माता पिता बचपन में ही गुजर गये थे, इसलिये मेरा पालन पोषण मेरे चाचा ने किया था। एक दिन मैं सीनोर के जंगल में अकेले ही विचरण कर रही थी कि तभी मैंने देखा, कि कुछ जंगली कुत्ते एक छोटी सी बिल्ली पर हमला कर रहे हैं। मुझसे उन कुत्तों का यह व्यवहार देखा नहीं गया। इसलिये मैंने अपने पास पड़े पत्थरों को उठाकर उन कुत्तों पर मारना शुरु कर दिया। कुत्ते मेरे हमले से डरकर भाग गये।

"कुत्तों के जाने के बाद, मैंने उस बिल्ली को अपने हाथ में उठा लिया। वह बिल्ली कुत्तों के हमले से जख्मी हो गई थी, इसलिये मैंने जंगल से कुछ औषधि ढूंढकर उसे बिल्ली के जख्मों पर लगा दिया। मैं जब उस बिल्ली को हाथ में लेकर जंगल से बाहर निकली, तो उसी समय मुझे सीनोर के राजा मुफासा दिखाई दिये। मुफासा ने मेरे हाथ में थमी बिल्ली को मुझसे ले लिया। बाद में मुझे पता चला कि वह राजा मुफासा की पालतू और सबसे प्यारी बिल्ली थी।

“मुफासा मेरे द्वारा बिल्ली की जान बचाने से अत्यंत प्रसन्न हो गये। उन्होंने मुझसे मेरे माता-पिता के बारे में पूछा, तो मैंने उन्हें बता दिया कि मेरे माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजा मुफासा मुझे लेकर सीनोर महल आ गये। उन्होंने मुझे वहीं रहने को कहा। मेरे लिये एकदम से झोपड़ी से निकलकर महलों में आना एक अलग अनुभव था।

"उस समय के सीनोर के कानून के हिसाब से राजा मुफासा को 600 वर्षों तक सीनोर पर राज्य करना था, इन 600 वर्षों में राजा अपना पुत्र उत्पन्न नहीं कर सकते थे। इसलिये राजा मुफासा मुझे अपनी बेटी की तरह से रखने लगे। कुछ ही दिन में मैं उनकी सबसे चहेती बन गई। उस समय मुझे युद्धाभ्यास देखने का बहुत शौक था, इसलिये मैं छिप-छिपकर सैनिकों का युद्धाभ्यास देखती और बाद में अपने कमरे में आकर, छिपकर अस्त्र-शस्त्र चलाना सीखने लगी।

"एक दिन राजा मुफासा ने मुझे तलवार चलाते देख लिया। वह मेरी शस्त्रकला से बहुत प्रभावित हो गये। उन्होंने कहा कि 1 महीने के बाद सीनोर के नये सेनापति का चुनाव होना है, तो अगर मैं चाहूं तो उसमें भाग ले सकती हूं। परंतु सेनापति के उस चुनाव के लिये, एक प्रतियोगिता का आयोजन होना था, जिसमें एक विशाल भालू को सिर्फ तलवार व भालों की मदद से मारना था। वह भालू बहुत ही खतरनाक था और अब तक सैकड़ों लोगों को मार चुका था। मैंने राजा मुफासा का मेरे प्रतिविश्वास देखकर, एक महीने तक अलग-अलग प्रकार से दिन रात तलवार और भाले का अभ्यास किया। आखिरकार प्रतियोगिता का वह दिन भी आ गया।

“महल के विशाल क्रीड़ास्थल पर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। मुझसे पहले लगभग 12 सीनोर के बलशाली योद्वाओं ने उस भालू को मारने का प्रयास किया। पर एक-एक कर वह सभी उस खतरनाक भालू के द्वारा मारे गये। अब मेरा नंबर था। मुफासा क्रीड़ा स्थल के सबसे ऊंचे स्थान पर बैठकर मेरा युद्ध देख रहे थे। मैंने अपने भाले से भालू पर हमला कर दिया। हम दोनों का युद्ध लगभग आधा घंटा तक चला। मैं और भालू दोनों ही बुरी तरह से जख्मी हो गये थे, पर दोनों ही हार मानने को तैयार नहीं थे।

"अंततः जब मैं थककर गिर गई, तो भालू ने मुझ पर छलांग लगा दी। वह खतरनाक भालू, बस मुझ पर गिरने ही वाला था कि मैंने अपने हाथ में पकड़े भाले को खड़ा कर दिया। हवा में कूदा भालू, सीधा उस भाले के ऊपर गिरा। भाला, भालू के सिर के आरपार हो गया और वह मारा गया। भालू के मरने पर दर्शकदीर्घा में तेज शोर गूंजा, पर मैं उस शोर को सुनने के लायक नहीं थी, मैं उस समय जख्मी हालत में बेहोश हो गई थी। राजा मुफासा मुझे क्रीड़ा स्थल से वापस महल ले आये। वैद्य ने मेरे जिंदा बचने की आस छोड़ दी थी।

“इसलिये राजा मुफासा सभी को अपने कक्ष से बाहर निकालकर, एक गुप्त रास्ते के द्वारा मुझे एक बिल्ली वाली गुफा में ले गये, जहां एक बिल्ली वाली देवी की मूर्ति थी। उस मूर्ति के हाथ में एक सुनहरा पात्र था, जिसमें दिव्य जल भरा था। राजा मुफासा ने मुझे वह दिव्य जल पिला दिया। उस दिव्य जल को पीते ही मैं तुरंत सही हो गई।

"बाद में राजा मुफासा ने मुझे बताया कि वह बिल्ली वाली देवी मिश्र की कोई देवी हैं, जिनसे एक बार मुफासा मिला था, तभी देवी ने खुश होकर, वह प्रतिमा और वह सुनहरा पात्र मुफासा को दिया था। उस पात्र के अंदर उपस्थित दिव्य जल की विशेषता यह थी कि उसे पीने वाले व्यक्ति की उम्र, 50 वर्ष तक कम हो जाती। इस प्रकार वह कभी भी बूढ़ा नहीं होता। उस दिव्य जल को एक बार पीने के बाद, पात्र उसे 25 वर्षों में दोबारा भर देता था। इस दिव्य पात्र और जल के बारे में मुफासा ने आज तक किसी को नहीं बताया था और ना ही किसी को उस गुप्त रास्ते का पता था। कुछ समय के बाद उसी दिव्य जल की वजह से मुझमें बिल्ली में परिवर्तित होने की शक्तियां आ गई।

“इस प्रकार मैंने सीनोर राज्य के सेनापति का कार्यभार संभाल लिया और हर 50 वर्ष बाद, उस दिव्य जल का सेवन करते हुए, सीनोर की सेवा करती रही। सैकड़ों वर्षों के बाद जब वीनस और लुफासा का जन्म हुआ, तो एक बार महामंत्री मकोटा ने मुझे मिश्र में एक कार्य हेतु भेजा।

"जब मैं वह कार्य करके वापस लौटी, तो मुझे पता चला कि सामरा राज्य के राजा कलाट ने हमारे राजा मुफासा और रानी कागोशी को मार डाला है। बस उसके बाद से ही मैं कलाट की मृत्यु की कामना करते हुए जी रही हूं।" इतना कहकर सनूरा चुप हो गई, पर कहानी के बाद उसके चेहरे पर उदासी छा गई, शायद उसे मुफासा और कागोशी की याद आ गई थी।

“तो क्या उस दिव्य जल का सेवन लुफासा भी करता है?” मेलाइट ने सनूरा से पूछा।

"नहीं, मैंने उसे आज तक दिव्य जल के बारे में नहीं बताया और उसका सेवन करने के लिये किसी की भी उम्र कम से कम 50 वर्ष के ऊपर तो होनी ही चाहिये। जबकि लुफासा अभी मात्र 25 वर्ष का ही है। जब समय आयेगा तो मैं उसे उस दिव्य जल के बारे में बता दूंगी।” सनूरा ने कहा।

"तो फिर आपने हमें उसका रहस्य क्यों बताया?" रोजर ने मुस्कुराते हुए पूछा।

“क्यों कि अब आप लोग बिल्कुल अपने से लगने लगे हो।” सनूरा ने कहा।


“बिल्कुल ठीक....3 सच्ची सहेली, 2 दोस्त और 1 पहेली।” रोजर ने धीरे से कहा, फिर भी रोजर की बात को सभी ने सुन लिया।

रोजर की बात सुन फिर सभी के मुंह से एक जोर का ठहाका फूट पड़ा। और रोजर वह तो बस पहेली को सुलझाने में लगा था।


चैपटर-9
अनोखा जादूगर:
(तिलिस्मा 5.33)

शैफाली और सुयश पश्चिम दिशा की ओर निकले थे। बहुत दिनों बाद अपने आसपास इतनी भीड़ देखकर दोनों ही खुश हो रहे थे।

शैफाली की निगाह तेजी से मेले में चारो ओर घूम रही थी। तभी शैफाली को एक जगह पर काफी भीड़ दिखाई दी।

“कैप्टेन अंकल, उस ओर काफी ज्यादा भीड़ दिखाई दे रही है। मुझे लगता है कि हमें उधर चलकर देखना चाहिये।” शैफाली ने सुयश को भीड़ की ओर इशारा करते हुए कहा।

सुयश ने धीरे से सिर हिलाया और शैफाली के साथ, भीड़ की ओर बढ़ गया। भीड़ को चीरते हुए दोनों आगे की ओर आ गये।

आगे एक बड़ा सा टेंट लगा था, जिस पर एक काला मोती बना था।

काला मोती के बगल एक जादूगर की तस्वीर बनी थी। पूरी भीड़ उसी जादूगर का जादू देखने के लिये भीड़ लगाये हुई थी।

“कैप्टेन अंकल, मुझे लगता है कि हमें इस जादूगर का जादू देखना चाहिये? क्यों कि यहां पर काला मोती का फोटो भी बना है। कैश्वर ने जरुर यहां कुछ विशेष बना रखा होगा?" शैफाली ने ने कहा।

“तुम ठीक कह रही हो शैफाली। मुझे भी यह जगह कुछ रहस्यमई सी लग रही है? हमें एक बार अंदर चलना ही होगा।” सुयश ने शैफाली की ओर देखते हुए कहा।

यह कहकर सुयश ने शैफाली का हाथ पकड़ा और शैफाली को लेकर टेंट के अंदर प्रवेश कर गया।

अंदर से टेंट बहुत विशाल था। टेंट में आगे की ओर एक बड़ा सा स्टेज बना था। सुयश को आगे की तीसरी लाइन में 2 कुर्सियां खाली दिखाई दीं। वह शैफाली को लेकर उन्हीं कुर्सियों पर जाकर बैठ गया।

यह जगह बिल्कुल किसी मेले में लगाए गए जादूगर के शो की ही तरह लग रही थी। उसे देखकर ऐसा प्रतीत ही नहीं हो रहा था, कि यह जगह तिलिस्मा के अंदर की है।

कुछ ही देर में एक तेज आवाज के साथ एक जादूगर स्टेज पर प्रकट हुआ।

जादूगर के शरीर पर एक लाल और काले रंग की ड्रेस थी। उसके सिर पर भी जादूगरों की भांति ही एक बड़ी सी टोपी थी।

कुछ देर हल्के-फुल्के जादू दिखाने के बाद, जादूगर ने स्टेज पर एक बड़ा सा काला मोती मंगवाया।
काला मोती एक छोटे से प्लेटफार्म पर था, जिसमें पहिये लगे थे।

"दोस्तों अब मैं आपके सामने पेश करने जा रहा हूं, अपने जादू का एक महान खेल, जो आपको अवश्य ही पसंद आयेगा।” जादूगर ने कहा- “पर उसके लिये मुझे आप लोगों में से एक दर्शक की जरुरत है।' यह कहकर जादूगर ने चारो ओर देखा और शैफाली की ओर इशारा करते हुए उसे स्टेज पर आने को कहा।

शैफाली अपनी जगह से खड़ी हुई। तभी सुयश ने शैफाली का हाथ दबा कर उसे सतर्क रहने का इशारा किया। अब शैफाली स्टेज पर खड़े जादूगर के सामने पहुंच गई।

“आपका नाम क्या है बच्ची?” जादूगर ने शैफाली से पूछा।

“शैफाली।"

"तो दोस्तों अब शुरु करते हैं, जादू का यह खेल।' यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी आँख बंद करने को कहा। शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

तभी शैफाली को अपने आसपास कुछ शोर की आवाजें सुनाई दीं, शैफाली ने घबराकर अपनी आँखें खोल दीं।

आँखें खोलते ही शैफाली घबरा गई, इस समय वह एक कमरे में थी, जो कि तेजी से हिल-डुल रहा था।

“यह कौन सी जगह है? और मैं यहां कैसे आ पहुंची?" शैफाली ने अजीब सी निगाहों से कमरे के चारो ओर देखते हुए कहा।

तभी शैफाली को कमरे में रखी एक टेबल पर एक फोटो दिखाई दी, जिसमें वह 1 आदमी और 1 औरत के साथ खड़ी थी।

अब शैफाली के दिमाग को एक झटका लगा “क्या क्या ये मेरे मॉम-डैड हैं?" तभी दूसरे कमरे से एक औरत तेजी से निकलकर उस कमरे में आई।

“ये क्या शैफाली, तुमने अभी तक लाइफ जैकेट नहीं पहनी? क्या तुम्हें पता नहीं कि ‘सुप्रीम’ डूबने वाला है? चलो जल्दी करो।" यह कहकर मारथा, वहां पड़ा एक लाइफ जैकेट शैफाली को पहनाने लगी।.... पर शैफाली तो सिर्फ डबडबाई आँखों से मारथा को ही निहार रही थी।

एक पल में ही शैफाली को समझ आ गया कि इस समय वह कहां है? वह तेजी से मारथा से लिपट गई
'मॉमऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।"

मारथ को लगा कि शैफाली डर की वजह से ऐसे कर रही है, इसलिये उसने भी शैफाली को कसकर अपने शरीर से चिपका लिया।

"डर मत मेरी बच्ची, तुम्हें कुछ नहीं होगा, तुम्हारे पापा गए हैं और लाइफ जैकेट लाने के लिये। वो बस आते ही होंगे।” मारथा ने भरी-भरी आँखों से कहा- “तुम तो बहुत बहादुर और टैलेंटेड हो। देखना एक दिन तुम हमारा नाम बहुत रोशन करोगी, मुझे पता है। बस तुम ये गणित के चक्कर में अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डाला करो।

शैफाली ने फिर से मारथा का चेहरा देखा और उसके चेहरे को बेतहाशा चूमने लगी।


“अरे-अरे ये ब्रूनो जैसी हरकत क्यों कर रही हो?" मारथा ने शैफाली के चेहरे पर ढुलक आये आँसुओं को पोंछते हुए कहा।

“ब्रूनो....ब्रूनो कहां है मॉम?” मारथा के शब्द सुन, शैफाली को अचानक से ब्रूनो की याद आ गई।

“वह तुम्हारे डैड के साथ बाहर गया है, वह बस आते ही होंगे।” अभी मारथा ने इतना ही कहा था कि तभी एक तेज बिजली गिरने की आवाज सुनाई दी।

शायद वह बिजली सुप्रीम के ही किसी भाग में गिरी थी। एक पल के लिये सुप्रीम पूरा का पूरा डगमगा गया।

बिजली की तेज आवाज सुन मारथा ने शैफाली को फिर से अपनी बाहों में भर लिया- “हे मेरे ईश्वर....हम सबकी रक्षा करना।"

“मुझे कुछ नहीं होगा मॉम, मुझको लेकर आप बिल्कुल भी मत घबराइये।” शैफाली ने मारथा को देखते हुए कहा- “देखिये, अब तो मुझे दिखाई भी देने लगा है। मैं आपको देख सकती हूं मॉम।"

शैफाली की बात सुन मारथा आश्चर्य से शैफाली को देखने लगी।

“यह कैसे संभव हुआ?” अब मारथा सबकुछ छोड़ बस शैफाली की आँख को ही देख रही थी।

“बहुत लंबी कहानी है मॉम। बाद में बताऊंगी, पर पहले यहां से बचने के बारे में सोचते हैं।” यह कह शैफाली अपने आसपास मौजूद सामान को देखने लगी।

तभी ‘धड़ाक' की आवाज के साथ कमरे का दरवाजा खुला और माइकल व ब्रूनो कमरे के अंदर दाखिल हुए। ब्रूनो सीधे आकर शैफाली से लिपट गया और उसे गिराकर उसका मुंह चाटने लगा।

शैफाली भी ब्रूनो से कसकर लिपट गई।

“ये इन दोनों को क्या हो गया? यह तो ऐसे मिल रहे हैं, जैसे कि वर्षों बाद मिलें हों, जबकि अभी कुछ देर पहले ही साथ में थे।” माइकल ने मारथा को देखते हुए कहा।

“उन दोनों को छोड़ो, पहले ये बताओ कि और लाइफ जैकेट नहीं मिले क्या?” मारथा ने माइकल से पूछा।

“नहीं...चारो ओर भगदड़ मची हुई है। कोई किसी की सुन नहीं रहा? सब बस अपनी जान बचाने के पीछे लगे हैं।” माइकल ने अपना चेहरा झुकाते हुए कहा- सुप्रीम अब नहीं बचेगा। वह कई जगह से क्षतिग्रस्त भी हो गया है।...पर तुम चिंता ना करो, मैं तुम लोगों को बचाने के लिये कुछ ना कुछ करता हूं।" यह कहकर माइकल कमरे में रखे सामान को देखने लगा। उसकी नजर अब अपने हार्स पोलो खेलने वाले डिब्बे पर थी।

(हार्स पोलोः एक तरह का गेम, जिसमें घोड़े पर बैठकर हॉकी जैसी स्टिक से पोलो खेला जाता है।)

माइकल ने बिना देर किये उस डिब्बे के सामान को वहीं कमरे में पलट दिया। उस डिब्बे में घोड़े की रकाब, रस्सी और अन्य घुड़सवारी के सामान थे। माइकल ने जल्दी-जल्दी कुछ सामान को उठाया और मारथा व शैफाली का हाथ पकड़ जहाज के डेक की ओर भागा। ब्रूनो उनके पीछे-पीछे ही था।

शैफाली तो सबकुछ छोड़ बस माइकल के हाथ को देख रही थी। वह चाहती थी काश कुछ देर के लिये समय यहीं रुक जाये।

पर समय भला कब किसी के लिये रुका है? वह तो सदैव गतिमान रहना ही अपनी श्रेष्ठता समझता है।

अब सभी भागकर सुप्रीम के डेक पर पहुंच गये। तभी सुप्रीम का एक बड़ा सा हिस्सा टूटकर समुद्र में जा गिरा। इस हिस्से के टूटने से सुप्रीम को एक तेज झटका भी लगा था।

तभी माइकल को पानी में तैर रहा लकड़ी का एक बड़ा सा तख्ता दिखाई दिया। उधर सुप्रीम के डेक पर लगी आग धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ रही थी। समय बहुत कम था।

माइकल ने पीछे से आ रही आग को देखा और बिना देर किये, शैफाली के हाथ में रस्सी और कुछ सामान पकड़कर, उसे समुद्र की ओर धक्का दे दिया। शैफाली को पानी में गिरते देख, ब्रूनो ने भी पानी में छलांग लगा दी।

शैफाली का पूरा शरीर हवा में था। यह देख शैफाली के मुंह से बहुत तेज आवाज निकली- “मां !"
शायद शैफाली 'मॉम' बोलना चाहती थी, पर मुंह में पानी चले जाने से उसके मुंह से सिर्फ 'मां' शब्द ही निकला।

पर इस 'मां' शब्द ने वहां से हजारों किलोमीटर दूर, तपस्या में लीन माया की आँखें खोल दी थी।


जारी रहेगा_____✍️
Wonderful update, Shefali bhi sach aur sapna mein antar nahi kar payi, shayad isliye ki usne pahli baar apni mom aur dad ka chehra dekha tha, khair ye Akex, Taufiq aur mujhe lagta hai ki Suyash bhi gayab rahne wala hai jab Shefali ka ye illusion samapt hoga tab.
 
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Raj_sharma

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Wonderful update, Shefali bhi sach aur sapna mein antar nahi kar payi, shayad isliye ki usne pahli baar apni mom aur dad ka chehra dekha tha, khair ye Akex, Taufiq aur mujhe lagta hai ki Suyash bhi gayab rahne wala hai jab Shefali ka ye illusion samapt hoga tab.
Nahi bhai nahi, suyash ko kuch nahi hoga, aur abhi to Aryan ki yaade bhi uske sath hain, jisne itne bade bade kaam kiye ho, wo iss Tilism se maat kaise kha sakta 😁
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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#201.

उधर शैफाली पानी के अंदर डूबती जा रही थी, पता नहीं क्यों वह पानी में ठीक से तैर नहीं पा रही थी?

शैफाली को लगा कि शायद अब वह जीवित नहीं बचेगी, कि तभी शैफाली को पानी में एक बड़ा सा साया दिखाई दिया, जो तेजी से उसकी ओर ही आ रहा था।

एक पल में शैफाली ने उस साये को पहचान लिया, वह डेंगो था। विशाल डेंगो.... मैग्ना की सवारी डेंगो।
डेंगो ने शैफाली के शरीर को उठाया और उसे लकड़ी के तख्ते पर चढ़ा दिया।

शैफाली अपनी आँखें खोलकर डेंगो को देख रही थी। तभी एका एक डेंगो का आकार बदल गया। अब वह ब्रूनो के रुप में नजर आने लगा था।

ब्रूनो अब शैफाली के तख्ते को खींचकर डूब रहे सुप्रीम से दूर ले जाने लगा। तभी शैफाली की नजर अपने हाथ पर गई। उसके हाथ में घोड़े की रकाब और रस्सी नजर आ रही थी।

अब अचानक शैफाली को तिलिस्मा का द्वार याद आ गया। तभी एक तेज गड़गड़ाहट की आवाज के साथ सुप्रीम वहीं पानी में डूब गया।

तेज गड़गड़ाहट से शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

शैफाली ने जब अपनी आँखें खोलीं, तो उसे वह गड़गड़ाहट की आवाज तालियों की दिखी, जो कि जादूगर के जादू से खुश होकर वहां बैठे लोग बजा रहे थे। शैफाली यह देखकर हैरान रह गई।

तभी उसकी नजर अपने हाथ में थमी रस्सी और घोड़े की रकाब की ओर गई।

“उम्मीद करता हूं शैफाली, कि तुम्हें मेरे जादू से बहुत मजा आया
होगा?” यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी कुर्सी की ओर जाने का इशारा किया।

शैफाली, रकाब और रस्सी को उठाये अपनी कुर्सी की ओर बढ़ गई, पर इस समय उसके दिमाग में बहुत उथल-पुथल चल रही थी।

“क्या उसने जो कुछ भी अभी देखा, वह सब असली था? क्या ब्रूनो ही डेंगो था? क्या माइकल और मारथा मर गये या फिर वह जिंदा थे?” ऐसे ही ना जाने कितने प्रश्न शैफाली के दिमाग में घूम रहे थे। शैफाली अब सुयश के पास आकर बैठ गई थी।

“यह घोड़े की रकाब और रस्सी तुम्हें कहां से मिली?” सुयश ने शैफाली के हाथ में पकड़ी वस्तुओं को आश्चर्य से देखते हुए कहा।

शैफाली ने धीरे-धीरे सुयश को पूरी कहानी सुना दी।

सुप्रीम की बात सुन तो एक बार सुयश भी विचलित हो गया, पर तुरंत ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया, लेकिन शैफाली की बातें सुनकर सुयश भी हैरान हो गया था।

जादूगर को शो अब खत्म हो चुका था। भीड़ के साथ-साथ अब सुयश और शैफाली भी उस टेंट से बाहर आ गये।

चूंकि उन्हें दोनों चीजें मिल गई थीं, इसलिये वह दोनों अब वापस उस स्थान की ओर चल पड़े, जहां से निकलकर वह इस मेले में आये थे।

सुयश और शैफाली जब उस स्थान पर पहुंचे, तो क्रिस्टी और जेनिथ पहले से ही उस जगह पर खड़े थे।
पर उन दोनों के लटके चेहरे देख सुयश समझ गया कि अवश्य ही कोई गड़बड़ हुई है।

तभी सुयश का ध्यान ऐलेक्स और तौफीक की ओर गया, उन्हें वहां ना देख सुयश ने घबराकर पूछा।

“ये ऐलेक्स और तौफीक कहां हैं? कहीं दिखाई नहीं दे रहे?” सुयश ने घबराए हुए शब्दों में पूछा।

सुयश की बात सुन क्रिस्टी और जेनिथ ने पूरी कहानी सुयश और शैफाली को सुना दी। दोनों की कहानी सुन एक पल के लिये सुयश और शैफाली के कदमों तले से जमीन निकल गई।

क्रिस्टी की आँखें तो रो-रोकर लाल हो गईं थीं।

“यह तो बहुत बुरा हुआ।” सुयश ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “मुझे लग रहा था कि वह दोनों हमारे साथ ही तिलिस्मा तोड़कर ही बाहर निकलेंगे।"

ऐलेक्स और तौफीक की मौत की खबर सुनकर शैफाली की आंखों से भी आंसू निकलने लगे।

उसे रोता देख जेनिथ ने उसे अपने गले से लगा लिया। पर इस समय उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि वह शैफाली से क्या कहे?

काफी देर तक यही हालात बने रहे, फिर सभी अपनी जगह पर शांत होकर खड़े हो गये।

“अब सबकी बातें समाप्त हो गई हों, तो जरा मुझ पर भी ध्यान दे लीजिये।” हवा में घूम रही सुनहरी रेत ने कहा।

सभी की बातों के चक्कर में क्रिस्टी उस हवा में घूम रही रेत को तो भूल ही गई थी, जो कि उसकी पेंसिल से बाहर निकली थी।

अब क्रिस्टी ने जल्दी-जल्दी सुयश को उस सुनहरी रेत की कहानी सुना दी।

पूरी कहानी सुनने के बाद सुयश पलटकर हवा में घूम रही उस सुनहरी रेत को देखने लगा।

“आप कौन हो? उस पेंसिल की रेत में क्या कर रहे थे? और मुझे कैसे जानते हो?” सुयश ने आश्चर्य से हवा में घूम रही, उस रेत को देखते हुए कहा।

“मुझे अपने बारे में आपको कुछ बताने की जरुरत नहीं पड़ेगी? आप सबकुछ अपने आप समझ जाओगे दोस्त। लेकिन उससे पहले आप मुझे, इस रेत को आपके शरीर में मिलाने की आज्ञा दीजिये?" रेत ने कहा।

“मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं कि आप क्या कह रहे हो? और जब तक मैं इस रेत के बारे में जानूंगा नहीं, तब तक आपको आज्ञा कैसे दे सकता हूं? मेरा मतलब कि मुझे पता होना चाहिये कि इस रेत में आखिर है क्या? और यह तुम मेरे शरीर में क्यों मिलाना चाहते हो?" सुयश के चेहरे पर इस समय ना समझने वाले भाव थे।

“ये आपकी ही स्मृतियां हैं आर्यन। जिसे आपने मुझे आज ही के लिये संभाल कर रखने को कहा था।' रेत ने कहा- “मैं जैसे ही यह स्मृतियां आपके शरीर में मिलाऊंगा? आपको स्वयमेव ही सबकुछ याद आ जायेगा।

रेत की बात सुन सुयश कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोल उठा- “ठीक है मैं आपको आज्ञा देता हूं इस रेत को अपने शरीर में मिलाने की।"

सुयश की बात सुनते ही रेत हवा में तेजी से नाचने लगी और धीरे-धीरे सुयश के शरीर में प्रवेश कर गई।

जैसे ही रेत ने सुयश के शरीर में प्रवेश किया, सुयश के शरीर के आसपास एक तेज चमक बिखर गई। सुयश को अपने दिमाग में अनगिनत आवाजें सुनाई देने लगीं।

लगभग 1 मिनट तक सुयश का हाल ऐसे ही रहा, फिर वह धीरे-धीरे नार्मल होने लगा। अब सुयश के चेहरे पर प्रकाश सा तेज दिखाई देने लगा था।

तभी उसके मुंह से एक शब्द निकला "इद्रांक्ष।"

“आपने बिल्कुल सही पहचाना।” हवा में वही रेत वाली आवाज उभरी।

“अब कोई हमें भी बता दो, कि यह क्या हो रहा है?" शैफाली ने कहा।

“मुझे आर्यन की सभी स्मृतियां और शक्तियां प्राप्त हो गईं शैफाली।” सुयश ने कहा- “दरअसल यह जो दिखाई नहीं दे रहा है, इसका नाम इद्रांक्ष है। यह एक यक्ष है, जिसे मुझे मारने के लिये देवराज इंद्र ने तब भेजा था, जब मैं ब्रह्मकलश लेने के लिये जा रहा था। पर कुछ परिस्थितियों के बदल जाने के बाद, यह मेरा दोस्त बन गया था और मेरे साथ ही रहने लगा था। जब मैंने आर्यन के रुप में अपने प्राण त्यागने के बारे में सोचा, तो मुझे भविष्य के बारे में जानने की इच्छा हुई। ब्रह्मदेव के वरदान स्वरुप मैं एक बार कभी भी भविष्य को देख सकता था। मैंने उसी शक्ति का प्रयोग कर भविष्य को देखा, जिसमें मुझे सुयश दिखाई
दिया, जो कि मेरा ही स्वरुप था। मुझे पता था कि मैं दूसरे जन्म में अपनी उन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाता क्यों कि मुझे कुछ याद ही नहीं रहता? इसलिये मैंने अपनी स्मृतियों की सुरक्षा का भार इद्रांक्ष के कंधों पर डाला। इद्रांक्ष ने मेरे मरने के बाद मेरी स्मृतियों को, भूमि की रेत से खींचकर इस काँच की पेंसिल में डाल दिया और स्वयं इसकी रक्षा करने लगा। इद्रांक्ष को जब तक कोई उस पेंसिल से स्वतंत्र नहीं करता, तब तक यह मुझे स्मृतियां वापस नहीं कर सकता था।" यह कहकर सुयश चुप हो गया।

“अगर यह आपका दोस्त था, तो उस दिन रेत मानव बनकर हम पर हमला क्यों कर रहा था?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“वह रेत मानव मैं नहीं था, वह मेरी शक्तियों से बना रेत मानव था, जो तुममें से किसी को भी नहीं पहचानता था। वह तो बस तुम लोगों से पेंसिल का बचाव कर रहा था।” इद्रांक्ष ने कहा- “पर जो हुआ अच्छा ही हुआ, नहीं तो कैश्वर मुझे देखकर, तिलिस्मा को और ज्यादा खतरनाक बना देता।"

"क्या आप अपनी शक्तियों से इस तिलिस्म के सभी द्वार को तोड़ सकते हो?" जेनिथ ने इद्रांक्ष से पूछा।

“ये कैश्वर की कंम्प्यूटर शक्ति से नहीं, बल्कि कैस्पर की ब्रह्मशक्ति से बना तिलिस्म है, जिसे तोड़ने का अधिकार, देवताओं या चमत्कारी शक्ति वालों के पास नहीं है।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब मुझे इस तिलिस्मा से बाहर जाने की आज्ञा दो दोस्त? मैं आपको इस तिलिस्मा के बाद ही मिलूंगा।”

“पर तुम इस तिलिस्मा से बाहर कैसे जाओगे?" शैफाली ने हैरान होते हुए कहा।

"मेरे पास इस तिलिस्मा से बाहर जाने की शक्ति है।" इद्रांक्ष ने कहा।

“तो फिर क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो?" शैफाली ने इद्रांक्ष से कहा।

"हां-हां जरुर....बताओ क्या काम करना है मैग्ना?” इद्रांक्ष ने शैफाली को मैग्ना कहकर संबोधित किया।

“आपको मेरा एक संदेश कैस्पर तक पहुंचाना होगा।” शैफाली ने धीमी आवाज में कहा- “आपको कैस्पर से कहना होगा कि-
“सप्तअश्व हैं आसमान में, दिव्य अस्त्रों से बना त्रिशूल, समय की झिरों से झांके हैं, पंचकिरण के अद्भुत फूल।”

शैफाली की ये कविता वहां खड़े किसी की भी समझ में नही आयी। वैसे तो कैश्वर ने बहुत सी पहेलियों का निर्माण किया था, पर अब पहेली को हल करने की बारी कैश्वर की थी।

“ठीक है मैग्ना, मैं तुम्हारा ये संदेश कैस्पर तक अवश्य पहुंचा दूंगा।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब जाने से पहले मुझे एक स्वयं से किया हुआ वादा पूरा करना होगा और वह वादा था कि जो कोई भी मुझे इस पेंसिल से स्वतंत्र करेगा, मैं उसकी कोई एक इच्छा पूरी करुंगा।....तो क्रिस्टी तुम कोई भी एक वरदान मुझसे मांग सकती हो? पर तुम्हें वह वरदान अपने मन में मांगना होगा और इसके पूरा होने के पहले, तुम्हें इस वरदान के बारे में किसी को कुछ नहीं बताना, नहीं तो ये वरदान फलीभूत नहीं होगा।”

यह सुन क्रिस्टी के चेहरे पर एक चमक आ गई। क्रिस्टी ने अपने दोनों हाथों को बांधकर, आँख बंद कर इद्रांक्ष से कोई विश मांगी।

क्रिस्टी लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही आँख बंद किये रही, शायद वह मन ही मन इद्रांक्ष से कोई बात कर रही थी।

5 मिनट के बाद क्रिस्टी ने अपनी आँखें खोल दी, पर अब उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।

क्रिस्टी को वरदान देने के बाद इंद्राक्ष हवा में कहीं गायब हो गया।

"चलो दोस्तों, अब चलकर इस द्वार को पार कर लिया जाये।” क्रिस्टी ने खुशी भरे स्वर में कहा।

क्रिस्टी की बात सुनकर सभी उस रोशनी वाले द्वार से होकर अंदर की ओर आ गये।

शैफाली ने एक-एक कर कान के सभी भागों को उसके सही स्थान से जोड़ दिया।

कान के उन भागों को जोड़ते ही सभी को उस स्थान पर आवाज सुनाई देने लगी।

तभी उन्हें सामने एक दरवाजा दिखाई दिया, जिस पर एक जीभ बनी थी और उस पर लिखा था- “तिलिस्मा 5.4"

सभी उस द्वार से अंदर की ओर प्रवेश कर गये।

जारी रहेगा
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

बहुत ही शानदार लाजवाब और रोमांच से भरपूर अद्भुत रमणिय अपडेट है भाई मजा आ गया
सुयश और टीम अपनी सुझबुज और एकता के साथ धीरे धीरे ही सही पर तिलिस्मा के एक एक कठीनाईयाॅं पार करतें हुए आगे बढ रहें हैं
खैर देखते हैं आगे क्या होता है

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

Kya gazab ki update post ki he Raj_sharma Bhai

Eye Specialist wali padhayi karwa di aapne to is dwar me.........

Ab agla number ENT ka he............

Keep rocking Bro

Nice update....

बहुत ही उम्दा और बेहतरीन अपडेट है 👏🏻👏🏻👏🏻

Shaandar update

Lovely update ❤❤❤

बहुत ही उम्दा और लाजवाब लिखा है ! ऐसा लग रहा है अपने सपनों की दुनिया में उड़ान भर रहे हैं !

हर पल कि अपडेट उस स्वप्न को और गहरा करता जा रहा है
सच में भाई अद्भुत लेखन कला है आपकी !

👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻

romanchak update.

#181
हनुका - माया संवाद से वो गाना याद आ गया, “यशोमती मैया से,”! बहुत अच्छा लिखा। मेरी बेटियाँ भी वीकेंड पर ऐसी ही चित्रकारी करती हैं - लेकिन इतने वर्षों में वो सीख गई हैं। इसलिए कम से कम उन चित्रों के साथ बाहर जाया जा सकता है।

चुहिया और ऋषि की कहानी भी अति उत्तम लगी।

माँ तो आखिर माँ ही होती है। बहुत बढ़िया!

#182
तौफ़ीक़ बड़ा निशानची निकला!
“ज़ेनिक्स” क्या बला है भाई! क्या भविष्य में ज़ेनिथ ज़ेनिक्स बनने वाली है?!

लिली से याद आया - केरल के ठेक्कड़ी में मैंने एक सफ़ेद रंग की भीनी भीनी खुशबू वाली लिली देखी थी। गाइड ने बताया था कि हाथी उसको बहुत पसंद करते हैं और अक्सर उसको खाते हैं!

एक और ज्ञानचंद बात करता हूँ - मनुष्य की आँखें electromagnetic spectrum के बहुत छोटे हिस्से को ही देख पाती हैं। पूरा स्पेक्ट्रम रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक फैला होता है, लेकिन हमारी आँखें सिर्फ़ दृश्य प्रकाश (visible light) नामक हिस्से को देख सकती हैं, जो प्रकाश स्पेक्ट्रम का लगभग 0.0035% हिस्सा है। यानी हम पूरे प्रकाश के 99.997% हिस्से को नहीं देख पाते।

#183
ब्लाइंड चेस -- सुसरा साधारण चेस खेलने में दिमाग चकरा जाता है। ये अँधा हो कर कैसे खेलें! ख़ैर…

#184
भाई, मुझको भगवन महादेव के ये पंचमुखी रूप पता हैं -- सद्योजात (बालक जैसा शुद्ध और निर्विकार रूप); वामदेव (विकारों का नाश); अघोर (भयंकर रूप); तत्पुरुष (ध्यान और योग शक्ति); ईशान (मोक्ष प्रदान करने वाला)। कहीं अघोर रूप ही तो वीरभद्र रूप नहीं है?

अरे! डेल्फानो ग्रह का इतिहास ही 5,000 वर्ष पुराना है! या वहाँ की सभ्यता का? त्रुटि लग रही है। यह विवरण पढ़ कर ऐसा लग रहा है कि जैसे ईश्वर डेल्फानो से आते हैं। हा हा हा! पैदा होते ही बाप बन गए!

“गिरोट ने ही देवता नोवान का आशीर्वाद प्राप्त कर, 5,000 वर्ष पहले इस ग्रह को बसाया था।” -- अच्छा, तो कृत्रिम ग्रह है। चूँकि इसके सूर्य की रोशनी पीली है, मतलब ये न तो थोड़ा ठंडा सूर्य है (जितना गर्म सूर्य होगा उतनी छोटी तरंगदैर्ध्य - नीली रोशनी, और जितना ठंडा होगा उतनी लंबी तरंगदैर्ध्य - लाल रोशनी!) -- अपने सूर्य जैसा ही है।

“ब्लैकून का पूरा नियंत्रण अंदर मौजूद एक कंप्यूटर 'जेनिक्स' करती है” -- ओ तेरी!

लेकिन यार, ये प्रयोगशाला के लिए बड़ा अतरंगी नाम है! न जाने क्यों, इस बात पर वो पिटी हुई फिल्म याद आ गई, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता के लोग अपने नगर को ‘मोहनजो दारो’ (मुर्दों का टीला) कह कर पुकारते हैं! 😂 😂

#185
ब्लैक होल के अंदर समय का “कोई अस्तित्व नहीं” - यह बात पूरी तरह सही नहीं है। समय का अस्तित्व है, लेकिन बहुत विचित्र और अलग तरीके से। यह आइंस्टीन की General Relativity Theory से समझा जा सकता है।

ब्लैक होल के बाहर समय बिल्कुल सामान्य गति से चलता है। Event Horizon पर, कोई व्यक्ति जो दूर खड़ा है, उसको लगता है कि ब्लैक होल में गिरने वाला व्यक्ति हमेशा के लिए रुक गया है। समय अनंत रूप से धीमा हो जाता है, लेकिन गिरने वाला व्यक्ति खुद को बिल्कुल सामान्य महसूस करता है। उसके लिए समय नहीं रुका। ब्लैक होल के अंदर समय और दूरी की भूमिकाएँ बदल जाती हैं। बाहर “समय” की दिशा हमेशा आगे (future) की ओर होती है, लेकिन अंदर “समय” की दिशा singularity की ओर बाध्य हो जाती है। मतलब, आप चाहें जितना प्रयास कर लें, singularity से बच नहीं सकते। ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी पर आप “ऊपर” की बजाय “नीचे” की तरफ गिरते हैं। Singularity पर space-time की curvature अनंत हो जाती है। समय, दूरी, और भौतिकी के सभी नियम टूट जाते हैं। यहाँ “समय का क्या होगा”, यह प्रश्न अनुत्तरित है क्योंकि हमें quantum gravity की पूरी थ्योरी की जानकारी नहीं है।

ओ भाई! हमारे पात्रों में ओरस कौन है!!

Good update Bhai sabhi ki misunderstanding dur ho gyi

nice update

Bahut hi shaaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

romanchak update..

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Ab lagta hai maya ka milan shaifali se hone wala hai

Lag to aisa hi raha hai bhai, per kuch bhi kaho, bhai likh bohot badiya rahe hain.

इंटरेस्टिंग इंट्रस्टिंग।
तिलस्म जितना भी गहरा होता जा रहा हैं मुझे लगता हैं उसमें सबसे ज्यादा मज़ा अब आ रहा हैं । अब ऐसा लग रहा हैं कि कोई नया टास्क आया हैं, क्योंकि इन्हे एक पड़ाव पार करने के लिए इक्विपमेंट चाहिए जिसके लिए सब लोग अलग अलग होकर खोज रहे हैं ।

इसके साथ ही इस बार लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं बल्कि इल्यूजन और पारिवारिक रिश्तों को समझने की भी हैं । क्योंकि जहाँ तक मुझे लगता हैं अभी एलेक्स और तौफिक की मृत्यु नहीं हुई हैं, वो सिर्फ एक इल्यूजन हैं । इसके साथ ही केशश्वर इनकी परीक्षा ले रहा हैं कि ये लोग भ्रम और अस्तित्व में फर्क कैसे ढूंढ पाते हैं ।

वैसे अगर तौफिक ज़िंदा निकला तो जेनिथ और उसके बीच की दूरियाँ जल्द समाप्त होंगी, क्योंकि तौफिक का ऐसा कदम उठाना खुद में एक एप्रिशिएट वाला काम हैं । आज के जमाने में कौन खुद की जान की चिंता छोड़ किसी और की जान की परवाह कर खुद को मृत्यु के मुख में डालेगा ।

अब आगे चलते हैं, ये ओरस का राज भी इतने आसान तरीके से खुल गया कि नक्षत्र ही ओरस हैं । लेकिन वो खुद की प्रयोगशाला में बैठा हैं, तो ऐसे में सवाल हैं कि ये ओरस जब इतना कुछ जानता हैं तो खुद का सच सबसे क्यों छुपा रहा हैं ।

वैसे रोचक होगा कैसे नक्षत्र यानी ओरस उस लॉकेट से आज़ाद होगा । जितना मुझे याद हैं वो उसमें कैद हो गया हैं । अब उसे निकालना हैं, वो कैसे निकलेगा यही खोज करना हैं ।

आगे सुनेरा का राज खुल चुका हैं कि वो महिला हैं, सौ टक्का कन्फर्म हो गया । लेकिन ये क्या, उसने एक काली बिल्ली का जिक्र किया हैं । कुछ याद आ रहा हैं । अल्बर्ट के ज़िंदा होने की गुत्थी भी अब सुलझ गई हैं, अल्बर्ट भी पचास साल का हैं ।

इस हिसाब से अल्बर्ट के पास मैजिकल पॉवर्स भी होंगी । वैसे हैं कहाँ वो, याद नहीं आ रहा हैं, कब आया था वह ।

वैसे वो द्रव्य जो अल्बर्ट ने पिया, जहाँ तक मुझे लगता हैं वो माया द्वारा शक्तियाँ जिन्हें सही स्थान पर रखा गया वो थीं । वैसे एक एंगल यह भी लग रहा हैं कि वो काली बिल्ली कुछ और राज भी निकाल सकती हैं ।
वैसे धीरे धीरे सब लोगों के जीवन साथी मिल रहे हैं, ये सुनेरा को कौन मिलेगा और कब मिलेगा ।

वैसे ये पॉसिबल हैं कि अल्बर्ट जो ज़िंदा हैं तो अब उम्र कम हो गई होगी हाँ ना, am I right or wrong क्योंकि सुनेरा की उम्र कम हुई हैं ना ।
उसके साथ ही माया ओलंपस माउंटेन में भी गए लेकिन ये क्या, बड़ा सरप्राइज़ मिल गया । सोफिया और मोरेन ज़िंदा हैं जिन्हें अब कैप्स्योर बचाएँगे । वैसे जितना मैं समझा हूँ ग्रीक देवता लोग भी जल्दी ही इधर मुसीबत से लड़ने जरूर आएँगे, खास कर आर्टिमिस । क्योंकि जाहिर हैं इन्हें सिर्फ पात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए तो रखा नहीं होगा, इसलिए हो ना हो जल्दी ही इन्हे आना होगा ।

एक और बात, क्या ग्रीक गॉड भरोसे लायक हैं । क्या संभव नहीं कि वो माया को धोखा दे जाएँ । वो तो हनुका की शक्ति से कुछ समय बचने के लिए इन लोगों ने हाँ भी कह दी हो ।

अब आते हैं हनुका के कमाल पर, वोल्फा मारा गया । वैसे ये वोल्फा जरूर कुछ बड़ा था लेकिन मुझे ऐसा क्यों लगता हैं कि वोल्फा आगे काम आ सकता था । ये मकोटा लोग तिलस्म में जाने की सोच रहे हैं, ऐसे में इसको ज़िंदा पकड़ सारे इंफॉर्मेशन निकाले जा सकते थे ।

आखिर में तिलस्म फिर से शेफाली के आर्क पर । पहले तो इस बार भी इल्यूजन हैं सुप्रीम का डूबना, लेकिन एक मिनट, वो शेफाली का “माँ” कह कर माया को याद करना कहीं से भी नॉर्मल नहीं हैं । वो जरूर कुछ ना बड़ा होने का संकेत हैं ।

शायद ये तिलस्म का अब तक का सबसे रोमांच से भरा तिलस्म हैं । लोगों को सोचने पर मजबूर किया इस तिलस्म ने ।

वैसे एक बात सोचने पर मजबूर कर रही हैं । शेफाली के माँ बाप विदेशी लोग या यूँ कहे वो क्रिस्टिन लोग और शेफाली हमारे भारत के लोगों जैसी । क्या जू को नहीं लगता यहाँ कुछ गड़बड़ हैं ।

पॉसिबल हैं शेफाली adopted हो, और बाद में कुछ खुलासा होना बाकी हो कि शेफाली के माँ बाप तो मरे ही नहीं ।

बाकी अभी के लिए इतना ही ।
आगे मिलेंगे अगली बार ।
Raj_sharma

Wonderful update, Shefali bhi sach aur sapna mein antar nahi kar payi, shayad isliye ki usne pahli baar apni mom aur dad ka chehra dekha tha, khair ye Akex, Taufiq aur mujhe lagta hai ki Suyash bhi gayab rahne wala hai jab Shefali ka ye illusion samapt hoga tab.

Update posted friends 👍
 

dhparikh

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#201.

उधर शैफाली पानी के अंदर डूबती जा रही थी, पता नहीं क्यों वह पानी में ठीक से तैर नहीं पा रही थी?

शैफाली को लगा कि शायद अब वह जीवित नहीं बचेगी, कि तभी शैफाली को पानी में एक बड़ा सा साया दिखाई दिया, जो तेजी से उसकी ओर ही आ रहा था।

एक पल में शैफाली ने उस साये को पहचान लिया, वह डेंगो था। विशाल डेंगो.... मैग्ना की सवारी डेंगो।
डेंगो ने शैफाली के शरीर को उठाया और उसे लकड़ी के तख्ते पर चढ़ा दिया।

शैफाली अपनी आँखें खोलकर डेंगो को देख रही थी। तभी एका एक डेंगो का आकार बदल गया। अब वह ब्रूनो के रुप में नजर आने लगा था।

ब्रूनो अब शैफाली के तख्ते को खींचकर डूब रहे सुप्रीम से दूर ले जाने लगा। तभी शैफाली की नजर अपने हाथ पर गई। उसके हाथ में घोड़े की रकाब और रस्सी नजर आ रही थी।

अब अचानक शैफाली को तिलिस्मा का द्वार याद आ गया। तभी एक तेज गड़गड़ाहट की आवाज के साथ सुप्रीम वहीं पानी में डूब गया।

तेज गड़गड़ाहट से शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

शैफाली ने जब अपनी आँखें खोलीं, तो उसे वह गड़गड़ाहट की आवाज तालियों की दिखी, जो कि जादूगर के जादू से खुश होकर वहां बैठे लोग बजा रहे थे। शैफाली यह देखकर हैरान रह गई।

तभी उसकी नजर अपने हाथ में थमी रस्सी और घोड़े की रकाब की ओर गई।

“उम्मीद करता हूं शैफाली, कि तुम्हें मेरे जादू से बहुत मजा आया
होगा?” यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी कुर्सी की ओर जाने का इशारा किया।

शैफाली, रकाब और रस्सी को उठाये अपनी कुर्सी की ओर बढ़ गई, पर इस समय उसके दिमाग में बहुत उथल-पुथल चल रही थी।

“क्या उसने जो कुछ भी अभी देखा, वह सब असली था? क्या ब्रूनो ही डेंगो था? क्या माइकल और मारथा मर गये या फिर वह जिंदा थे?” ऐसे ही ना जाने कितने प्रश्न शैफाली के दिमाग में घूम रहे थे। शैफाली अब सुयश के पास आकर बैठ गई थी।

“यह घोड़े की रकाब और रस्सी तुम्हें कहां से मिली?” सुयश ने शैफाली के हाथ में पकड़ी वस्तुओं को आश्चर्य से देखते हुए कहा।

शैफाली ने धीरे-धीरे सुयश को पूरी कहानी सुना दी।

सुप्रीम की बात सुन तो एक बार सुयश भी विचलित हो गया, पर तुरंत ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया, लेकिन शैफाली की बातें सुनकर सुयश भी हैरान हो गया था।

जादूगर को शो अब खत्म हो चुका था। भीड़ के साथ-साथ अब सुयश और शैफाली भी उस टेंट से बाहर आ गये।

चूंकि उन्हें दोनों चीजें मिल गई थीं, इसलिये वह दोनों अब वापस उस स्थान की ओर चल पड़े, जहां से निकलकर वह इस मेले में आये थे।

सुयश और शैफाली जब उस स्थान पर पहुंचे, तो क्रिस्टी और जेनिथ पहले से ही उस जगह पर खड़े थे।
पर उन दोनों के लटके चेहरे देख सुयश समझ गया कि अवश्य ही कोई गड़बड़ हुई है।

तभी सुयश का ध्यान ऐलेक्स और तौफीक की ओर गया, उन्हें वहां ना देख सुयश ने घबराकर पूछा।

“ये ऐलेक्स और तौफीक कहां हैं? कहीं दिखाई नहीं दे रहे?” सुयश ने घबराए हुए शब्दों में पूछा।

सुयश की बात सुन क्रिस्टी और जेनिथ ने पूरी कहानी सुयश और शैफाली को सुना दी। दोनों की कहानी सुन एक पल के लिये सुयश और शैफाली के कदमों तले से जमीन निकल गई।

क्रिस्टी की आँखें तो रो-रोकर लाल हो गईं थीं।

“यह तो बहुत बुरा हुआ।” सुयश ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “मुझे लग रहा था कि वह दोनों हमारे साथ ही तिलिस्मा तोड़कर ही बाहर निकलेंगे।"

ऐलेक्स और तौफीक की मौत की खबर सुनकर शैफाली की आंखों से भी आंसू निकलने लगे।

उसे रोता देख जेनिथ ने उसे अपने गले से लगा लिया। पर इस समय उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि वह शैफाली से क्या कहे?

काफी देर तक यही हालात बने रहे, फिर सभी अपनी जगह पर शांत होकर खड़े हो गये।

“अब सबकी बातें समाप्त हो गई हों, तो जरा मुझ पर भी ध्यान दे लीजिये।” हवा में घूम रही सुनहरी रेत ने कहा।

सभी की बातों के चक्कर में क्रिस्टी उस हवा में घूम रही रेत को तो भूल ही गई थी, जो कि उसकी पेंसिल से बाहर निकली थी।

अब क्रिस्टी ने जल्दी-जल्दी सुयश को उस सुनहरी रेत की कहानी सुना दी।

पूरी कहानी सुनने के बाद सुयश पलटकर हवा में घूम रही उस सुनहरी रेत को देखने लगा।

“आप कौन हो? उस पेंसिल की रेत में क्या कर रहे थे? और मुझे कैसे जानते हो?” सुयश ने आश्चर्य से हवा में घूम रही, उस रेत को देखते हुए कहा।

“मुझे अपने बारे में आपको कुछ बताने की जरुरत नहीं पड़ेगी? आप सबकुछ अपने आप समझ जाओगे दोस्त। लेकिन उससे पहले आप मुझे, इस रेत को आपके शरीर में मिलाने की आज्ञा दीजिये?" रेत ने कहा।

“मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं कि आप क्या कह रहे हो? और जब तक मैं इस रेत के बारे में जानूंगा नहीं, तब तक आपको आज्ञा कैसे दे सकता हूं? मेरा मतलब कि मुझे पता होना चाहिये कि इस रेत में आखिर है क्या? और यह तुम मेरे शरीर में क्यों मिलाना चाहते हो?" सुयश के चेहरे पर इस समय ना समझने वाले भाव थे।

“ये आपकी ही स्मृतियां हैं आर्यन। जिसे आपने मुझे आज ही के लिये संभाल कर रखने को कहा था।' रेत ने कहा- “मैं जैसे ही यह स्मृतियां आपके शरीर में मिलाऊंगा? आपको स्वयमेव ही सबकुछ याद आ जायेगा।

रेत की बात सुन सुयश कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोल उठा- “ठीक है मैं आपको आज्ञा देता हूं इस रेत को अपने शरीर में मिलाने की।"

सुयश की बात सुनते ही रेत हवा में तेजी से नाचने लगी और धीरे-धीरे सुयश के शरीर में प्रवेश कर गई।

जैसे ही रेत ने सुयश के शरीर में प्रवेश किया, सुयश के शरीर के आसपास एक तेज चमक बिखर गई। सुयश को अपने दिमाग में अनगिनत आवाजें सुनाई देने लगीं।

लगभग 1 मिनट तक सुयश का हाल ऐसे ही रहा, फिर वह धीरे-धीरे नार्मल होने लगा। अब सुयश के चेहरे पर प्रकाश सा तेज दिखाई देने लगा था।

तभी उसके मुंह से एक शब्द निकला "इद्रांक्ष।"

“आपने बिल्कुल सही पहचाना।” हवा में वही रेत वाली आवाज उभरी।

“अब कोई हमें भी बता दो, कि यह क्या हो रहा है?" शैफाली ने कहा।

“मुझे आर्यन की सभी स्मृतियां और शक्तियां प्राप्त हो गईं शैफाली।” सुयश ने कहा- “दरअसल यह जो दिखाई नहीं दे रहा है, इसका नाम इद्रांक्ष है। यह एक यक्ष है, जिसे मुझे मारने के लिये देवराज इंद्र ने तब भेजा था, जब मैं ब्रह्मकलश लेने के लिये जा रहा था। पर कुछ परिस्थितियों के बदल जाने के बाद, यह मेरा दोस्त बन गया था और मेरे साथ ही रहने लगा था। जब मैंने आर्यन के रुप में अपने प्राण त्यागने के बारे में सोचा, तो मुझे भविष्य के बारे में जानने की इच्छा हुई। ब्रह्मदेव के वरदान स्वरुप मैं एक बार कभी भी भविष्य को देख सकता था। मैंने उसी शक्ति का प्रयोग कर भविष्य को देखा, जिसमें मुझे सुयश दिखाई
दिया, जो कि मेरा ही स्वरुप था। मुझे पता था कि मैं दूसरे जन्म में अपनी उन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाता क्यों कि मुझे कुछ याद ही नहीं रहता? इसलिये मैंने अपनी स्मृतियों की सुरक्षा का भार इद्रांक्ष के कंधों पर डाला। इद्रांक्ष ने मेरे मरने के बाद मेरी स्मृतियों को, भूमि की रेत से खींचकर इस काँच की पेंसिल में डाल दिया और स्वयं इसकी रक्षा करने लगा। इद्रांक्ष को जब तक कोई उस पेंसिल से स्वतंत्र नहीं करता, तब तक यह मुझे स्मृतियां वापस नहीं कर सकता था।" यह कहकर सुयश चुप हो गया।

“अगर यह आपका दोस्त था, तो उस दिन रेत मानव बनकर हम पर हमला क्यों कर रहा था?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“वह रेत मानव मैं नहीं था, वह मेरी शक्तियों से बना रेत मानव था, जो तुममें से किसी को भी नहीं पहचानता था। वह तो बस तुम लोगों से पेंसिल का बचाव कर रहा था।” इद्रांक्ष ने कहा- “पर जो हुआ अच्छा ही हुआ, नहीं तो कैश्वर मुझे देखकर, तिलिस्मा को और ज्यादा खतरनाक बना देता।"

"क्या आप अपनी शक्तियों से इस तिलिस्म के सभी द्वार को तोड़ सकते हो?" जेनिथ ने इद्रांक्ष से पूछा।

“ये कैश्वर की कंम्प्यूटर शक्ति से नहीं, बल्कि कैस्पर की ब्रह्मशक्ति से बना तिलिस्म है, जिसे तोड़ने का अधिकार, देवताओं या चमत्कारी शक्ति वालों के पास नहीं है।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब मुझे इस तिलिस्मा से बाहर जाने की आज्ञा दो दोस्त? मैं आपको इस तिलिस्मा के बाद ही मिलूंगा।”

“पर तुम इस तिलिस्मा से बाहर कैसे जाओगे?" शैफाली ने हैरान होते हुए कहा।

"मेरे पास इस तिलिस्मा से बाहर जाने की शक्ति है।" इद्रांक्ष ने कहा।

“तो फिर क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो?" शैफाली ने इद्रांक्ष से कहा।

"हां-हां जरुर....बताओ क्या काम करना है मैग्ना?” इद्रांक्ष ने शैफाली को मैग्ना कहकर संबोधित किया।

“आपको मेरा एक संदेश कैस्पर तक पहुंचाना होगा।” शैफाली ने धीमी आवाज में कहा- “आपको कैस्पर से कहना होगा कि-
“सप्तअश्व हैं आसमान में, दिव्य अस्त्रों से बना त्रिशूल, समय की झिरों से झांके हैं, पंचकिरण के अद्भुत फूल।”

शैफाली की ये कविता वहां खड़े किसी की भी समझ में नही आयी। वैसे तो कैश्वर ने बहुत सी पहेलियों का निर्माण किया था, पर अब पहेली को हल करने की बारी कैश्वर की थी।

“ठीक है मैग्ना, मैं तुम्हारा ये संदेश कैस्पर तक अवश्य पहुंचा दूंगा।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब जाने से पहले मुझे एक स्वयं से किया हुआ वादा पूरा करना होगा और वह वादा था कि जो कोई भी मुझे इस पेंसिल से स्वतंत्र करेगा, मैं उसकी कोई एक इच्छा पूरी करुंगा।....तो क्रिस्टी तुम कोई भी एक वरदान मुझसे मांग सकती हो? पर तुम्हें वह वरदान अपने मन में मांगना होगा और इसके पूरा होने के पहले, तुम्हें इस वरदान के बारे में किसी को कुछ नहीं बताना, नहीं तो ये वरदान फलीभूत नहीं होगा।”

यह सुन क्रिस्टी के चेहरे पर एक चमक आ गई। क्रिस्टी ने अपने दोनों हाथों को बांधकर, आँख बंद कर इद्रांक्ष से कोई विश मांगी।

क्रिस्टी लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही आँख बंद किये रही, शायद वह मन ही मन इद्रांक्ष से कोई बात कर रही थी।

5 मिनट के बाद क्रिस्टी ने अपनी आँखें खोल दी, पर अब उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।

क्रिस्टी को वरदान देने के बाद इंद्राक्ष हवा में कहीं गायब हो गया।

"चलो दोस्तों, अब चलकर इस द्वार को पार कर लिया जाये।” क्रिस्टी ने खुशी भरे स्वर में कहा।

क्रिस्टी की बात सुनकर सभी उस रोशनी वाले द्वार से होकर अंदर की ओर आ गये।

शैफाली ने एक-एक कर कान के सभी भागों को उसके सही स्थान से जोड़ दिया।

कान के उन भागों को जोड़ते ही सभी को उस स्थान पर आवाज सुनाई देने लगी।

तभी उन्हें सामने एक दरवाजा दिखाई दिया, जिस पर एक जीभ बनी थी और उस पर लिखा था- “तिलिस्मा 5.4"

सभी उस द्वार से अंदर की ओर प्रवेश कर गये।

जारी रहेगा
_____✍️
Nice update.....
 
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उधर शैफाली पानी के अंदर डूबती जा रही थी, पता नहीं क्यों वह पानी में ठीक से तैर नहीं पा रही थी?

शैफाली को लगा कि शायद अब वह जीवित नहीं बचेगी, कि तभी शैफाली को पानी में एक बड़ा सा साया दिखाई दिया, जो तेजी से उसकी ओर ही आ रहा था।

एक पल में शैफाली ने उस साये को पहचान लिया, वह डेंगो था। विशाल डेंगो.... मैग्ना की सवारी डेंगो।
डेंगो ने शैफाली के शरीर को उठाया और उसे लकड़ी के तख्ते पर चढ़ा दिया।

शैफाली अपनी आँखें खोलकर डेंगो को देख रही थी। तभी एका एक डेंगो का आकार बदल गया। अब वह ब्रूनो के रुप में नजर आने लगा था।

ब्रूनो अब शैफाली के तख्ते को खींचकर डूब रहे सुप्रीम से दूर ले जाने लगा। तभी शैफाली की नजर अपने हाथ पर गई। उसके हाथ में घोड़े की रकाब और रस्सी नजर आ रही थी।

अब अचानक शैफाली को तिलिस्मा का द्वार याद आ गया। तभी एक तेज गड़गड़ाहट की आवाज के साथ सुप्रीम वहीं पानी में डूब गया।

तेज गड़गड़ाहट से शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

शैफाली ने जब अपनी आँखें खोलीं, तो उसे वह गड़गड़ाहट की आवाज तालियों की दिखी, जो कि जादूगर के जादू से खुश होकर वहां बैठे लोग बजा रहे थे। शैफाली यह देखकर हैरान रह गई।

तभी उसकी नजर अपने हाथ में थमी रस्सी और घोड़े की रकाब की ओर गई।

“उम्मीद करता हूं शैफाली, कि तुम्हें मेरे जादू से बहुत मजा आया
होगा?” यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी कुर्सी की ओर जाने का इशारा किया।

शैफाली, रकाब और रस्सी को उठाये अपनी कुर्सी की ओर बढ़ गई, पर इस समय उसके दिमाग में बहुत उथल-पुथल चल रही थी।

“क्या उसने जो कुछ भी अभी देखा, वह सब असली था? क्या ब्रूनो ही डेंगो था? क्या माइकल और मारथा मर गये या फिर वह जिंदा थे?” ऐसे ही ना जाने कितने प्रश्न शैफाली के दिमाग में घूम रहे थे। शैफाली अब सुयश के पास आकर बैठ गई थी।

“यह घोड़े की रकाब और रस्सी तुम्हें कहां से मिली?” सुयश ने शैफाली के हाथ में पकड़ी वस्तुओं को आश्चर्य से देखते हुए कहा।

शैफाली ने धीरे-धीरे सुयश को पूरी कहानी सुना दी।

सुप्रीम की बात सुन तो एक बार सुयश भी विचलित हो गया, पर तुरंत ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया, लेकिन शैफाली की बातें सुनकर सुयश भी हैरान हो गया था।

जादूगर को शो अब खत्म हो चुका था। भीड़ के साथ-साथ अब सुयश और शैफाली भी उस टेंट से बाहर आ गये।

चूंकि उन्हें दोनों चीजें मिल गई थीं, इसलिये वह दोनों अब वापस उस स्थान की ओर चल पड़े, जहां से निकलकर वह इस मेले में आये थे।

सुयश और शैफाली जब उस स्थान पर पहुंचे, तो क्रिस्टी और जेनिथ पहले से ही उस जगह पर खड़े थे।
पर उन दोनों के लटके चेहरे देख सुयश समझ गया कि अवश्य ही कोई गड़बड़ हुई है।

तभी सुयश का ध्यान ऐलेक्स और तौफीक की ओर गया, उन्हें वहां ना देख सुयश ने घबराकर पूछा।

“ये ऐलेक्स और तौफीक कहां हैं? कहीं दिखाई नहीं दे रहे?” सुयश ने घबराए हुए शब्दों में पूछा।

सुयश की बात सुन क्रिस्टी और जेनिथ ने पूरी कहानी सुयश और शैफाली को सुना दी। दोनों की कहानी सुन एक पल के लिये सुयश और शैफाली के कदमों तले से जमीन निकल गई।

क्रिस्टी की आँखें तो रो-रोकर लाल हो गईं थीं।

“यह तो बहुत बुरा हुआ।” सुयश ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “मुझे लग रहा था कि वह दोनों हमारे साथ ही तिलिस्मा तोड़कर ही बाहर निकलेंगे।"

ऐलेक्स और तौफीक की मौत की खबर सुनकर शैफाली की आंखों से भी आंसू निकलने लगे।

उसे रोता देख जेनिथ ने उसे अपने गले से लगा लिया। पर इस समय उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि वह शैफाली से क्या कहे?

काफी देर तक यही हालात बने रहे, फिर सभी अपनी जगह पर शांत होकर खड़े हो गये।

“अब सबकी बातें समाप्त हो गई हों, तो जरा मुझ पर भी ध्यान दे लीजिये।” हवा में घूम रही सुनहरी रेत ने कहा।

सभी की बातों के चक्कर में क्रिस्टी उस हवा में घूम रही रेत को तो भूल ही गई थी, जो कि उसकी पेंसिल से बाहर निकली थी।

अब क्रिस्टी ने जल्दी-जल्दी सुयश को उस सुनहरी रेत की कहानी सुना दी।

पूरी कहानी सुनने के बाद सुयश पलटकर हवा में घूम रही उस सुनहरी रेत को देखने लगा।

“आप कौन हो? उस पेंसिल की रेत में क्या कर रहे थे? और मुझे कैसे जानते हो?” सुयश ने आश्चर्य से हवा में घूम रही, उस रेत को देखते हुए कहा।

“मुझे अपने बारे में आपको कुछ बताने की जरुरत नहीं पड़ेगी? आप सबकुछ अपने आप समझ जाओगे दोस्त। लेकिन उससे पहले आप मुझे, इस रेत को आपके शरीर में मिलाने की आज्ञा दीजिये?" रेत ने कहा।

“मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं कि आप क्या कह रहे हो? और जब तक मैं इस रेत के बारे में जानूंगा नहीं, तब तक आपको आज्ञा कैसे दे सकता हूं? मेरा मतलब कि मुझे पता होना चाहिये कि इस रेत में आखिर है क्या? और यह तुम मेरे शरीर में क्यों मिलाना चाहते हो?" सुयश के चेहरे पर इस समय ना समझने वाले भाव थे।

“ये आपकी ही स्मृतियां हैं आर्यन। जिसे आपने मुझे आज ही के लिये संभाल कर रखने को कहा था।' रेत ने कहा- “मैं जैसे ही यह स्मृतियां आपके शरीर में मिलाऊंगा? आपको स्वयमेव ही सबकुछ याद आ जायेगा।

रेत की बात सुन सुयश कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोल उठा- “ठीक है मैं आपको आज्ञा देता हूं इस रेत को अपने शरीर में मिलाने की।"

सुयश की बात सुनते ही रेत हवा में तेजी से नाचने लगी और धीरे-धीरे सुयश के शरीर में प्रवेश कर गई।

जैसे ही रेत ने सुयश के शरीर में प्रवेश किया, सुयश के शरीर के आसपास एक तेज चमक बिखर गई। सुयश को अपने दिमाग में अनगिनत आवाजें सुनाई देने लगीं।

लगभग 1 मिनट तक सुयश का हाल ऐसे ही रहा, फिर वह धीरे-धीरे नार्मल होने लगा। अब सुयश के चेहरे पर प्रकाश सा तेज दिखाई देने लगा था।

तभी उसके मुंह से एक शब्द निकला "इद्रांक्ष।"

“आपने बिल्कुल सही पहचाना।” हवा में वही रेत वाली आवाज उभरी।

“अब कोई हमें भी बता दो, कि यह क्या हो रहा है?" शैफाली ने कहा।

“मुझे आर्यन की सभी स्मृतियां और शक्तियां प्राप्त हो गईं शैफाली।” सुयश ने कहा- “दरअसल यह जो दिखाई नहीं दे रहा है, इसका नाम इद्रांक्ष है। यह एक यक्ष है, जिसे मुझे मारने के लिये देवराज इंद्र ने तब भेजा था, जब मैं ब्रह्मकलश लेने के लिये जा रहा था। पर कुछ परिस्थितियों के बदल जाने के बाद, यह मेरा दोस्त बन गया था और मेरे साथ ही रहने लगा था। जब मैंने आर्यन के रुप में अपने प्राण त्यागने के बारे में सोचा, तो मुझे भविष्य के बारे में जानने की इच्छा हुई। ब्रह्मदेव के वरदान स्वरुप मैं एक बार कभी भी भविष्य को देख सकता था। मैंने उसी शक्ति का प्रयोग कर भविष्य को देखा, जिसमें मुझे सुयश दिखाई
दिया, जो कि मेरा ही स्वरुप था। मुझे पता था कि मैं दूसरे जन्म में अपनी उन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाता क्यों कि मुझे कुछ याद ही नहीं रहता? इसलिये मैंने अपनी स्मृतियों की सुरक्षा का भार इद्रांक्ष के कंधों पर डाला। इद्रांक्ष ने मेरे मरने के बाद मेरी स्मृतियों को, भूमि की रेत से खींचकर इस काँच की पेंसिल में डाल दिया और स्वयं इसकी रक्षा करने लगा। इद्रांक्ष को जब तक कोई उस पेंसिल से स्वतंत्र नहीं करता, तब तक यह मुझे स्मृतियां वापस नहीं कर सकता था।" यह कहकर सुयश चुप हो गया।

“अगर यह आपका दोस्त था, तो उस दिन रेत मानव बनकर हम पर हमला क्यों कर रहा था?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“वह रेत मानव मैं नहीं था, वह मेरी शक्तियों से बना रेत मानव था, जो तुममें से किसी को भी नहीं पहचानता था। वह तो बस तुम लोगों से पेंसिल का बचाव कर रहा था।” इद्रांक्ष ने कहा- “पर जो हुआ अच्छा ही हुआ, नहीं तो कैश्वर मुझे देखकर, तिलिस्मा को और ज्यादा खतरनाक बना देता।"

"क्या आप अपनी शक्तियों से इस तिलिस्म के सभी द्वार को तोड़ सकते हो?" जेनिथ ने इद्रांक्ष से पूछा।

“ये कैश्वर की कंम्प्यूटर शक्ति से नहीं, बल्कि कैस्पर की ब्रह्मशक्ति से बना तिलिस्म है, जिसे तोड़ने का अधिकार, देवताओं या चमत्कारी शक्ति वालों के पास नहीं है।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब मुझे इस तिलिस्मा से बाहर जाने की आज्ञा दो दोस्त? मैं आपको इस तिलिस्मा के बाद ही मिलूंगा।”

“पर तुम इस तिलिस्मा से बाहर कैसे जाओगे?" शैफाली ने हैरान होते हुए कहा।

"मेरे पास इस तिलिस्मा से बाहर जाने की शक्ति है।" इद्रांक्ष ने कहा।

“तो फिर क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो?" शैफाली ने इद्रांक्ष से कहा।

"हां-हां जरुर....बताओ क्या काम करना है मैग्ना?” इद्रांक्ष ने शैफाली को मैग्ना कहकर संबोधित किया।

“आपको मेरा एक संदेश कैस्पर तक पहुंचाना होगा।” शैफाली ने धीमी आवाज में कहा- “आपको कैस्पर से कहना होगा कि-
“सप्तअश्व हैं आसमान में, दिव्य अस्त्रों से बना त्रिशूल, समय की झिरों से झांके हैं, पंचकिरण के अद्भुत फूल।”

शैफाली की ये कविता वहां खड़े किसी की भी समझ में नही आयी। वैसे तो कैश्वर ने बहुत सी पहेलियों का निर्माण किया था, पर अब पहेली को हल करने की बारी कैश्वर की थी।

“ठीक है मैग्ना, मैं तुम्हारा ये संदेश कैस्पर तक अवश्य पहुंचा दूंगा।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब जाने से पहले मुझे एक स्वयं से किया हुआ वादा पूरा करना होगा और वह वादा था कि जो कोई भी मुझे इस पेंसिल से स्वतंत्र करेगा, मैं उसकी कोई एक इच्छा पूरी करुंगा।....तो क्रिस्टी तुम कोई भी एक वरदान मुझसे मांग सकती हो? पर तुम्हें वह वरदान अपने मन में मांगना होगा और इसके पूरा होने के पहले, तुम्हें इस वरदान के बारे में किसी को कुछ नहीं बताना, नहीं तो ये वरदान फलीभूत नहीं होगा।”

यह सुन क्रिस्टी के चेहरे पर एक चमक आ गई। क्रिस्टी ने अपने दोनों हाथों को बांधकर, आँख बंद कर इद्रांक्ष से कोई विश मांगी।

क्रिस्टी लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही आँख बंद किये रही, शायद वह मन ही मन इद्रांक्ष से कोई बात कर रही थी।

5 मिनट के बाद क्रिस्टी ने अपनी आँखें खोल दी, पर अब उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।

क्रिस्टी को वरदान देने के बाद इंद्राक्ष हवा में कहीं गायब हो गया।

"चलो दोस्तों, अब चलकर इस द्वार को पार कर लिया जाये।” क्रिस्टी ने खुशी भरे स्वर में कहा।

क्रिस्टी की बात सुनकर सभी उस रोशनी वाले द्वार से होकर अंदर की ओर आ गये।

शैफाली ने एक-एक कर कान के सभी भागों को उसके सही स्थान से जोड़ दिया।

कान के उन भागों को जोड़ते ही सभी को उस स्थान पर आवाज सुनाई देने लगी।

तभी उन्हें सामने एक दरवाजा दिखाई दिया, जिस पर एक जीभ बनी थी और उस पर लिखा था- “तिलिस्मा 5.4"

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Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 
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उधर शैफाली पानी के अंदर डूबती जा रही थी, पता नहीं क्यों वह पानी में ठीक से तैर नहीं पा रही थी?

शैफाली को लगा कि शायद अब वह जीवित नहीं बचेगी, कि तभी शैफाली को पानी में एक बड़ा सा साया दिखाई दिया, जो तेजी से उसकी ओर ही आ रहा था।

एक पल में शैफाली ने उस साये को पहचान लिया, वह डेंगो था। विशाल डेंगो.... मैग्ना की सवारी डेंगो।
डेंगो ने शैफाली के शरीर को उठाया और उसे लकड़ी के तख्ते पर चढ़ा दिया।

शैफाली अपनी आँखें खोलकर डेंगो को देख रही थी। तभी एका एक डेंगो का आकार बदल गया। अब वह ब्रूनो के रुप में नजर आने लगा था।

ब्रूनो अब शैफाली के तख्ते को खींचकर डूब रहे सुप्रीम से दूर ले जाने लगा। तभी शैफाली की नजर अपने हाथ पर गई। उसके हाथ में घोड़े की रकाब और रस्सी नजर आ रही थी।

अब अचानक शैफाली को तिलिस्मा का द्वार याद आ गया। तभी एक तेज गड़गड़ाहट की आवाज के साथ सुप्रीम वहीं पानी में डूब गया।

तेज गड़गड़ाहट से शैफाली ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

शैफाली ने जब अपनी आँखें खोलीं, तो उसे वह गड़गड़ाहट की आवाज तालियों की दिखी, जो कि जादूगर के जादू से खुश होकर वहां बैठे लोग बजा रहे थे। शैफाली यह देखकर हैरान रह गई।

तभी उसकी नजर अपने हाथ में थमी रस्सी और घोड़े की रकाब की ओर गई।

“उम्मीद करता हूं शैफाली, कि तुम्हें मेरे जादू से बहुत मजा आया
होगा?” यह कहकर जादूगर ने शैफाली को अपनी कुर्सी की ओर जाने का इशारा किया।

शैफाली, रकाब और रस्सी को उठाये अपनी कुर्सी की ओर बढ़ गई, पर इस समय उसके दिमाग में बहुत उथल-पुथल चल रही थी।

“क्या उसने जो कुछ भी अभी देखा, वह सब असली था? क्या ब्रूनो ही डेंगो था? क्या माइकल और मारथा मर गये या फिर वह जिंदा थे?” ऐसे ही ना जाने कितने प्रश्न शैफाली के दिमाग में घूम रहे थे। शैफाली अब सुयश के पास आकर बैठ गई थी।

“यह घोड़े की रकाब और रस्सी तुम्हें कहां से मिली?” सुयश ने शैफाली के हाथ में पकड़ी वस्तुओं को आश्चर्य से देखते हुए कहा।

शैफाली ने धीरे-धीरे सुयश को पूरी कहानी सुना दी।

सुप्रीम की बात सुन तो एक बार सुयश भी विचलित हो गया, पर तुरंत ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया, लेकिन शैफाली की बातें सुनकर सुयश भी हैरान हो गया था।

जादूगर को शो अब खत्म हो चुका था। भीड़ के साथ-साथ अब सुयश और शैफाली भी उस टेंट से बाहर आ गये।

चूंकि उन्हें दोनों चीजें मिल गई थीं, इसलिये वह दोनों अब वापस उस स्थान की ओर चल पड़े, जहां से निकलकर वह इस मेले में आये थे।

सुयश और शैफाली जब उस स्थान पर पहुंचे, तो क्रिस्टी और जेनिथ पहले से ही उस जगह पर खड़े थे।
पर उन दोनों के लटके चेहरे देख सुयश समझ गया कि अवश्य ही कोई गड़बड़ हुई है।

तभी सुयश का ध्यान ऐलेक्स और तौफीक की ओर गया, उन्हें वहां ना देख सुयश ने घबराकर पूछा।

“ये ऐलेक्स और तौफीक कहां हैं? कहीं दिखाई नहीं दे रहे?” सुयश ने घबराए हुए शब्दों में पूछा।

सुयश की बात सुन क्रिस्टी और जेनिथ ने पूरी कहानी सुयश और शैफाली को सुना दी। दोनों की कहानी सुन एक पल के लिये सुयश और शैफाली के कदमों तले से जमीन निकल गई।

क्रिस्टी की आँखें तो रो-रोकर लाल हो गईं थीं।

“यह तो बहुत बुरा हुआ।” सुयश ने अपना सिर झुकाते हुए कहा- “मुझे लग रहा था कि वह दोनों हमारे साथ ही तिलिस्मा तोड़कर ही बाहर निकलेंगे।"

ऐलेक्स और तौफीक की मौत की खबर सुनकर शैफाली की आंखों से भी आंसू निकलने लगे।

उसे रोता देख जेनिथ ने उसे अपने गले से लगा लिया। पर इस समय उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि वह शैफाली से क्या कहे?

काफी देर तक यही हालात बने रहे, फिर सभी अपनी जगह पर शांत होकर खड़े हो गये।

“अब सबकी बातें समाप्त हो गई हों, तो जरा मुझ पर भी ध्यान दे लीजिये।” हवा में घूम रही सुनहरी रेत ने कहा।

सभी की बातों के चक्कर में क्रिस्टी उस हवा में घूम रही रेत को तो भूल ही गई थी, जो कि उसकी पेंसिल से बाहर निकली थी।

अब क्रिस्टी ने जल्दी-जल्दी सुयश को उस सुनहरी रेत की कहानी सुना दी।

पूरी कहानी सुनने के बाद सुयश पलटकर हवा में घूम रही उस सुनहरी रेत को देखने लगा।

“आप कौन हो? उस पेंसिल की रेत में क्या कर रहे थे? और मुझे कैसे जानते हो?” सुयश ने आश्चर्य से हवा में घूम रही, उस रेत को देखते हुए कहा।

“मुझे अपने बारे में आपको कुछ बताने की जरुरत नहीं पड़ेगी? आप सबकुछ अपने आप समझ जाओगे दोस्त। लेकिन उससे पहले आप मुझे, इस रेत को आपके शरीर में मिलाने की आज्ञा दीजिये?" रेत ने कहा।

“मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं कि आप क्या कह रहे हो? और जब तक मैं इस रेत के बारे में जानूंगा नहीं, तब तक आपको आज्ञा कैसे दे सकता हूं? मेरा मतलब कि मुझे पता होना चाहिये कि इस रेत में आखिर है क्या? और यह तुम मेरे शरीर में क्यों मिलाना चाहते हो?" सुयश के चेहरे पर इस समय ना समझने वाले भाव थे।

“ये आपकी ही स्मृतियां हैं आर्यन। जिसे आपने मुझे आज ही के लिये संभाल कर रखने को कहा था।' रेत ने कहा- “मैं जैसे ही यह स्मृतियां आपके शरीर में मिलाऊंगा? आपको स्वयमेव ही सबकुछ याद आ जायेगा।

रेत की बात सुन सुयश कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोल उठा- “ठीक है मैं आपको आज्ञा देता हूं इस रेत को अपने शरीर में मिलाने की।"

सुयश की बात सुनते ही रेत हवा में तेजी से नाचने लगी और धीरे-धीरे सुयश के शरीर में प्रवेश कर गई।

जैसे ही रेत ने सुयश के शरीर में प्रवेश किया, सुयश के शरीर के आसपास एक तेज चमक बिखर गई। सुयश को अपने दिमाग में अनगिनत आवाजें सुनाई देने लगीं।

लगभग 1 मिनट तक सुयश का हाल ऐसे ही रहा, फिर वह धीरे-धीरे नार्मल होने लगा। अब सुयश के चेहरे पर प्रकाश सा तेज दिखाई देने लगा था।

तभी उसके मुंह से एक शब्द निकला "इद्रांक्ष।"

“आपने बिल्कुल सही पहचाना।” हवा में वही रेत वाली आवाज उभरी।

“अब कोई हमें भी बता दो, कि यह क्या हो रहा है?" शैफाली ने कहा।

“मुझे आर्यन की सभी स्मृतियां और शक्तियां प्राप्त हो गईं शैफाली।” सुयश ने कहा- “दरअसल यह जो दिखाई नहीं दे रहा है, इसका नाम इद्रांक्ष है। यह एक यक्ष है, जिसे मुझे मारने के लिये देवराज इंद्र ने तब भेजा था, जब मैं ब्रह्मकलश लेने के लिये जा रहा था। पर कुछ परिस्थितियों के बदल जाने के बाद, यह मेरा दोस्त बन गया था और मेरे साथ ही रहने लगा था। जब मैंने आर्यन के रुप में अपने प्राण त्यागने के बारे में सोचा, तो मुझे भविष्य के बारे में जानने की इच्छा हुई। ब्रह्मदेव के वरदान स्वरुप मैं एक बार कभी भी भविष्य को देख सकता था। मैंने उसी शक्ति का प्रयोग कर भविष्य को देखा, जिसमें मुझे सुयश दिखाई
दिया, जो कि मेरा ही स्वरुप था। मुझे पता था कि मैं दूसरे जन्म में अपनी उन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाता क्यों कि मुझे कुछ याद ही नहीं रहता? इसलिये मैंने अपनी स्मृतियों की सुरक्षा का भार इद्रांक्ष के कंधों पर डाला। इद्रांक्ष ने मेरे मरने के बाद मेरी स्मृतियों को, भूमि की रेत से खींचकर इस काँच की पेंसिल में डाल दिया और स्वयं इसकी रक्षा करने लगा। इद्रांक्ष को जब तक कोई उस पेंसिल से स्वतंत्र नहीं करता, तब तक यह मुझे स्मृतियां वापस नहीं कर सकता था।" यह कहकर सुयश चुप हो गया।

“अगर यह आपका दोस्त था, तो उस दिन रेत मानव बनकर हम पर हमला क्यों कर रहा था?” क्रिस्टी ने सुयश से पूछा।

“वह रेत मानव मैं नहीं था, वह मेरी शक्तियों से बना रेत मानव था, जो तुममें से किसी को भी नहीं पहचानता था। वह तो बस तुम लोगों से पेंसिल का बचाव कर रहा था।” इद्रांक्ष ने कहा- “पर जो हुआ अच्छा ही हुआ, नहीं तो कैश्वर मुझे देखकर, तिलिस्मा को और ज्यादा खतरनाक बना देता।"

"क्या आप अपनी शक्तियों से इस तिलिस्म के सभी द्वार को तोड़ सकते हो?" जेनिथ ने इद्रांक्ष से पूछा।

“ये कैश्वर की कंम्प्यूटर शक्ति से नहीं, बल्कि कैस्पर की ब्रह्मशक्ति से बना तिलिस्म है, जिसे तोड़ने का अधिकार, देवताओं या चमत्कारी शक्ति वालों के पास नहीं है।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब मुझे इस तिलिस्मा से बाहर जाने की आज्ञा दो दोस्त? मैं आपको इस तिलिस्मा के बाद ही मिलूंगा।”

“पर तुम इस तिलिस्मा से बाहर कैसे जाओगे?" शैफाली ने हैरान होते हुए कहा।

"मेरे पास इस तिलिस्मा से बाहर जाने की शक्ति है।" इद्रांक्ष ने कहा।

“तो फिर क्या तुम मेरा एक काम कर सकते हो?" शैफाली ने इद्रांक्ष से कहा।

"हां-हां जरुर....बताओ क्या काम करना है मैग्ना?” इद्रांक्ष ने शैफाली को मैग्ना कहकर संबोधित किया।

“आपको मेरा एक संदेश कैस्पर तक पहुंचाना होगा।” शैफाली ने धीमी आवाज में कहा- “आपको कैस्पर से कहना होगा कि-
“सप्तअश्व हैं आसमान में, दिव्य अस्त्रों से बना त्रिशूल, समय की झिरों से झांके हैं, पंचकिरण के अद्भुत फूल।”

शैफाली की ये कविता वहां खड़े किसी की भी समझ में नही आयी। वैसे तो कैश्वर ने बहुत सी पहेलियों का निर्माण किया था, पर अब पहेली को हल करने की बारी कैश्वर की थी।

“ठीक है मैग्ना, मैं तुम्हारा ये संदेश कैस्पर तक अवश्य पहुंचा दूंगा।” इद्रांक्ष ने कहा- “अब जाने से पहले मुझे एक स्वयं से किया हुआ वादा पूरा करना होगा और वह वादा था कि जो कोई भी मुझे इस पेंसिल से स्वतंत्र करेगा, मैं उसकी कोई एक इच्छा पूरी करुंगा।....तो क्रिस्टी तुम कोई भी एक वरदान मुझसे मांग सकती हो? पर तुम्हें वह वरदान अपने मन में मांगना होगा और इसके पूरा होने के पहले, तुम्हें इस वरदान के बारे में किसी को कुछ नहीं बताना, नहीं तो ये वरदान फलीभूत नहीं होगा।”

यह सुन क्रिस्टी के चेहरे पर एक चमक आ गई। क्रिस्टी ने अपने दोनों हाथों को बांधकर, आँख बंद कर इद्रांक्ष से कोई विश मांगी।

क्रिस्टी लगभग 5 मिनट तक ऐसे ही आँख बंद किये रही, शायद वह मन ही मन इद्रांक्ष से कोई बात कर रही थी।

5 मिनट के बाद क्रिस्टी ने अपनी आँखें खोल दी, पर अब उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।

क्रिस्टी को वरदान देने के बाद इंद्राक्ष हवा में कहीं गायब हो गया।

"चलो दोस्तों, अब चलकर इस द्वार को पार कर लिया जाये।” क्रिस्टी ने खुशी भरे स्वर में कहा।

क्रिस्टी की बात सुनकर सभी उस रोशनी वाले द्वार से होकर अंदर की ओर आ गये।

शैफाली ने एक-एक कर कान के सभी भागों को उसके सही स्थान से जोड़ दिया।

कान के उन भागों को जोड़ते ही सभी को उस स्थान पर आवाज सुनाई देने लगी।

तभी उन्हें सामने एक दरवाजा दिखाई दिया, जिस पर एक जीभ बनी थी और उस पर लिखा था- “तिलिस्मा 5.4"

सभी उस द्वार से अंदर की ओर प्रवेश कर गये।

जारी रहेगा
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Bhut hi badhiya update Bhai
Lagta hai kristi ne alex aur taufiq ke vapis zinda hone ki wish mangi hai
 
  • Love
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